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Maithili - The First Gospel of the Infancy of Jesus Christ

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यीशु मसीह के शैशव काल के पहहल सुसमाचार अध्याय 1 1 हमरा सभ केँ यूसुफ महापुरोहहतक पुस्तक म हिम्नहिखित हि​िरण भटि, जकरा हकछु काइफा कहैत छि 2 ओ कहैत छहि ज यीशु पाि​िा म रहिा पर सहो बजैत छिाह आ अपि माय केँ कहिहि​ि। 3 मररयम, हम परमश् िरक पुत्र यीशु छी, ओ िचि ज अहाेँ हजब्राईि स् िर्गदूत द्वारा अहाेँ केँ कहि र्ि अहछ आ हमर हपता हमरा संसारक उद्धारक ि​ि पठौि छहि। 4 हसकन्दरक युर्क तीि सय िौम िर्ग म अर्स्तस एकटा फरमाि प्रकाहशत किहि ज सभ व्यखि केँ अपि दश म कर िर्ाबय ि​ि जबाक चाही। 5 यूसुफ उठिाह आ अपि जीि​िसािी मररयमक संर् यरूशिम र्िाह आ फर बतिहम आहब र्िाह जाहह सेँ हुिका आ हुिकर पररिार केँ हुिकर पूिगजक िर्र म कर िर्ाओि जाय। 6 जि​ि ओ सभ र्ुफाक कात म पहुेँचिाह ति​ि मररयम यूसुफ केँ स्वीकार कयिहि ज हुिकर जन्मक समय आहब र्ि अहछ, आ ओ शहर म िहह जा सकिीह। 7 ओहह समय सूयागस्तक बहुत िजदीक छि। 8 मुदा यूसुफ जल्दी-जल्दी चहि र्िाह, जाहह सेँ ओ ओकरा एकटा दाई आहि सकहि। जि​ि ओ यरूशिमक एकटा बूढी इब्रािी स् त्री केँ दखि कऽ कहिहि​ि, “प्रािगिा करू, िीक स् त्री, एतऽ आहब कऽ ओहह र्ुफा म जाउ, ति​ि अहाेँ ओतय एकटा स् त्री केँ दिब ज एि​िहह बच्चा केँ जन्म दबाक ि​ि तैयार अहछ।” 9 सूयागस्तक बाद बुहढया आ यूसुफ हुिका संर् र्ुफा म पहुेँचिाह आ दु िू र्ोट ओहह र्ुफा म र्िाह। 10 दिू, सभटा इजोत सेँ भरि छि, ज दीपक आ मोमबत्तीक इजोत सेँ पैघ आ सूयगक इजोत सेँ पैघ छि। 11 ति​ि हशशु केँ िपहट क' कपडा म िपटि र्ि, आ ओकर माय सेंट मैरीक स्ति चूहस ि​ि र्ि। 12 ई इजोत दखि दु िू र्ोट आश्चयग चहकत भऽ र्िाह। बुहढया सें ट मैरी सेँ पुछिकै, की अहाेँ एहह बच्चाक माय छी? 13 सेंट मैरी उत्तर दिहि​ि, ओ छिीह। 14 ओहह पर बुहढया बजिीह, “अहाेँ सभ स्त्रीर्ण सेँ बहुत हभन्न छी।” 15 संत मररयम उत्तर दिहि​ि, “जहहिा हमर बटा जकाेँ कोिो बच्चा िहह अहछ, तहहिा ओकर माय जकाेँ कोिो स्त्री सहो िहह अहछ।” 16 बुहढया उत्तर दिहि​ि, “ह हमर महोदया, हम एतय आहब र्ि छी ज हमरा अिन्त पुरस्कार भटय।” 17 ति​ि हमर स् त्री संत मररयम हुिका कहिहि​ि, “हशशु पर हाि रािू। ज जि​ि ओ क' ि​िहि ति​ि ओ स्वस्ि भ' र्िीह। 18 जि​ि ओ आर्ू बढै त छिीह ति​ि ओ बजिीह, “आब सेँ हम अपि जीि​ि भरर एहह हशशु केँ दिभाि करब आ ओकर सिक बिब।” 19 एकर बाद जि​ि चरबाह सभ आहब कऽ आहर् िर्ा दिक आ ओ सभ बहुत आिखन्दत भऽ र्ि तेँ स्वर्ीय सिा हुिका सभ केँ प्रकट भि आ परमश् िरक स्तुहत आ आराधिा किक। 20 जि​ि चरबाह सभ एकहह काज म िार्ि छि, ति​ि ओहह समय म र्ुफा एकटा र्ौरिशािी मखन्दर जकाेँ बुझाइत छि, हकएक तेँ प्रभु मसीहक जन्मक कारण ेँ स् िर्गदूत आ मिुष्य दु िूक भार्ा परमश् िरक आराधिा आ महहमा करबाक ि​ि एकजुट भऽ र्ि छि। 21 मुदा बूढी हहब्रू स् त्री जि​ि ई सभटा चमत् कार दखि परमश् िरक स्तुहत कयिहि आ कहिहि​ि, “ह परमश् िर, ह इस्राएिक परमश् िर, हम अहाेँ केँ धन्यिाद दै त छी, हकएक तेँ हमर आेँ खि संसारक उद्धारकतागक जन्म दि​िहुेँ।” अध्याय 2 1 जि​ि हुिकर ितिाक समय आहब र्िहि, अिागत् आठम हदि, जाहह हदि धमग-हियम म बच्चाक ितिा करबाक आज्ञा दि र्ि छि, ति​ि ओ सभ ओकरा र्ुफा म ितिा क’ दिक।

2 ओ बूढी हहब्रू महहिा अग्रचमग (दोसर िोक कहैत छहि ज ओ िाहभक तार ि' ि​िहि) ि' क' ओकरा चमडाक पुराि तिक अिबास्टरक हिब्बा म सुरहित क' ि​िहि। 3 हुिका एकटा बटा छिहि ज िशािोर छिहि, जकरा ओ कहिहि​ि, “सािधाि रहू, अहाेँ एहह अिाबास्टरक हिब्बा म चीर-मिम िहह बचब, यद्यहप एकर बदिा म अहाेँ केँ तीि सय पेंस चढाओि जाय।” 4 ई ओ अिबास्टरक हिब्बा अहछ जकरा पापी मररयम बिा कऽ हमरा सभक प्रभु यीशु मसीहक माि आ पएर पर मरहम ढारर दिहि आ मािक I कश सेँ पोहछ दिहि। 5 दस हदिक बाद ओ सभ हुिका यरूशिम अि​िहि आ हुिकर जन्मक चािीसम हदि हुिका ि​ि प्रभुक समि मि् हदर म भेंट कयिहि आ मूसाक हियमक अिुसार हुिका ि​ि उहचत बहिदाि कयिहि ज िर र्भग िोित स परमश् िरक समि पहित्र कहि जायत। 6 ओहह समय म बूढ हसमोि हुिका इजोतक िंभा बहि चमकैत दि​िहि, जि​ि हुिकर माय संत मररयम कुमारर हुिका अपि कोरा म ि' ि​िहि आ ई दखि सभ सेँ बसी प्रसन्नता भ' र्िाह। 7 स् िर्गदूत सभ हुिका चारू कात ठाढ भऽ हुिकर आराधिा करै त छिाह, जिा राजाक पहरदार हुिका चारू कात ठाढ रहैत छहि। 8 ति​ि हशमोि संत मररयमक िर् जा कऽ हुिका हदस हाि बढबैत प्रभु मसीह केँ कहिहि​ि, “ह हमर प्रभु, अहाेँक सिक अहाेँक िचिक अिुसार शाखन्तपूिगक चहि जायत। 9 हमर आेँ खि अहाेँक दया दि​िहुेँ ज अहाेँ सभ जाहतक उद्धारक ि​ि तैयार कि छी। सभ िोकक ि​ि इजोत आ अहाेँक प्रजा इस्राएिक महहमा। 10 भहिर्​् यिक् ता हन्ना सहो उपखस्ित छिीह आ हुिका िर् आहब कऽ परमश् िरक स्तुहत कयिहि आ मररयमक सुिक उत्सि मिौिहि। अध्याय 3 1 राजा हरोदसक समय म जि​ि प्रभु यीशु यहूहदयाक िर्र बतिहम म जन्म ि​िहि। ज्ञािी िोकहि पूरब सेँ यरूशिम आहब र्िाह, जोरािाशक भहिष्यिाणीक अिुसार, आ अपिा संर् बहि-बहि अिागत सोिा, िोबाि आ र्ंधक अि​िहि आ हुिकर आराधिा कयिहि आ हुिका अपि िरदाि चढौिहि। 2 ति​ि ि​िी मैरी अपि एकटा िपटबिा कपडा िऽ कऽ ज हशशुकेँ िपटि छि आ ओकरा सभकेँ आशीिागदक बदिा दऽ दिक, ज ओकरा सभकेँ हुिकासेँ एकटा अत्यंत उदात्त उपहारक रूपम भटि। 3 ओही समय हुिका सभ केँ ओहह ताराक रूप म एकटा स् िर्गदूत प्रकट भिाह ज पहहि हुिका सभक यात्रा म मार्गदशगक छिहि। जकर प्रकाशक पाछाेँ-पाछाेँ चिैत रहिाह जाबत धरर ओ सभ अपि दशम घुरर िहह र्िाह। 4 घुरिा पर हुिका सभक राजा आ राजकुमार सभ हुिका सभ िर् आहब पुछैत छिाह ज, “ओ सभ की दि​िहुेँ आ की किहुेँ?” कहि यात्रा आ िापसी छिहि? सडक पर हुिका िोकहिक कोि कंपिी छिहि? 5 मुदा ओ सभ ओहह िपटबाक कपडा तैयार कयिहि ज संत मररयम हुिका सभ केँ दि छिीह, जाहह कारण ेँ ओ सभ भोज मिाबैत छिाह। 6 अपि दशक प्रिाक अिुसार आहर् िर्ा कऽ ओकर आराधिा कयिहि। 7 आहर् ओकरा िऽ कऽ राखि ि​िक। 8 जि​ि आहर् बुहझ र्ि ति​ि ओ सभ ओहह िपटक कपडा केँ हबिा कोिो चोट केँ बाहर हिकाहि ि​िक, जिा आहर् ओकरा िहह छूहब र्ि हो। 9 ति​ि ओ सभ ओकरा चुम्मा िबऽ िर्िाह आ ओकरा माि आ आेँ खि पर राखि कऽ कहिहि​ि, “ई बात हिस्संदह सत्य अहछ, आ ई सचमुच आश्चयगक बात अहछ ज आहर् ओकरा जरा िहह सकि आ ओकरा भस्म िहह क’ सकि।” 10 ति​ि ओ सभ ओकरा ि’ ि​िक आ ओकरा सभ केँ बहुत आदरपूिगक ओकरा अपि िजािा म राखि दिक। अध्याय 4 1 हरोदस ई बुहझ कऽ ज ज्ञािी िोक सभ दरी कऽ कऽ हुिका िर् िहह घुरर र्िाह, ओ पुरोहहत आ ज्ञािी सभ केँ बजा कऽ कहिहि​ि, “हमरा कहू ज मसीहक जन्म कोि स्िाि म हबाक चाही?” 2 जि​ि ओ सभ उत्तर दिहि​ि, यहूहदयाक एकटा िर्र बतिहम म, ओ प्रभु यीशु मसीहक मृत्युक हिर्य म अपिा मोि म सोचय िर्िाह।


3 मुदा परमश् िरक स् िर्गदूत यूसुफ केँ िींद म दिा कऽ कहिहि​ि, “उठू, बच्चा आ ओकर माय केँ िऽ कऽ मुर्ाग बाजैत दरी हमस्र जाउ।” त ेँ उहठ कऽ चहि र्िाह। 4 जि​ि ओ अपिा-अपि यात्राक हिर्य म हिचार-हिचार करै त छिाह ति​ि हुिका पर भोर भ’ र्िहि। 5 यात्राक िम्बाई म काठीक कहट टू हट र्ि। 6 आब ओ एकटा पैघ िर्र िर् आहब र्िाह, जाहह म एकटा मूहतग छि, जाहह म हमस्रक आि मूहतग आ दिता सभ अपि प्रसाद आ व्रत अिैत छिाह। 7 एहह मूहतगक द्वारा एकटा पुरोहहत एकर सिा करै त छिाह, ज जि​ि-जि​ि शैताि ओहह मूहतग सेँ बजैत छि, हमस्र आ ओहह दशक हि​िासी सभ केँ अपि बात कहैत छि। 8 एहह पुरोहहतक तीि िर्गक एकटा बटा छिहि, ज बहुत रास दु ष्टात्माक भूतप्रत सेँ ग्रस्त छि, ओ बहुत रास हिहचत्र बात कहैत छि, आ जि​ि दु ष्टात्मा सभ ओकरा पकहड ि​िक तऽ ओकर कपडा फाहड कऽ िंर्ट घुमैत छि, जकरा ओ दिैत छि, ओकरा सभ पर पािर फकैत छि। 9 ओहह मूहतगक िर् म शहरक सराय छि, जाहह म जि​ि यूसुफ आ संत मररयम आहब र्िाह आ ओहह सराय म घुहम र्िाह ति​ि शहरक सभ हि​िासी आश्चयगचहकत भ’ र्िाह। 10 ओहह मूहतगक समस्त दं िाहधकारी आ पुरोहहत सभ ओहह मूहतगक समि जमा भऽ कऽ पुछिहि​ि ज, “हमरा सभक समस्त दश पर ज आशंका आ भय र्ि अहछ, तकर की मतिब अहछ?” 11 मूहतग हुिका सभ केँ उत्तर दिकहि, “अज्ञात परमश् िर एतय आहब र्ि छहि, ज सत् य परमश् िर छहि। आ ि हुिका छोहड हकयो एहि अहछ ज ईश्वरीय पूजाक योग्य हो। हकएक तेँ ओ सत्त परमश् िरक पुत्र छहि। 12 हुिकर प्रहसखद्ध दखि ई दश काेँहप उठि आ हुिकर अयिा पर ितगमाि हंर्ामा आ आश्चयगक अधीि अहछ। आ हम सभ स्वयं हुिकर सामर्थ्गक महािता सेँ भयभीत छी। 13 ओही िण ई मूहतग िहस पडि आ ओकर पति पर हमस्रक सभ हि​िासी, आि-आि िोक सभ एक संर् दौडि। 14 मुदा पुरोहहतक बटा जि​ि सराय म जाइत काि हुिकर सामान्य अव्यिस्िा हुिका पर आहब र्िहि ति​ि ओतहह यूसुफ आ संत मररयम केँ भटिहि, हजिका सभ केँ छोहड कऽ छोहड र्िहि। 15 जि​ि ि​िी सेंट मैरी प्रभु मसीहक िपटबिा कपडा धो कऽ एकटा िंभा पर सुिाय ि​ि िटका दिहि ति​ि शैताि सेँ ग्रस्त िडका ओहह म सेँ एकटा केँ उतारर ओकर माि पर राखि दिक। 16 ति​ि हुिका मुेँह सेँ दु र्​् टात् मा सभ बाहर हिकहि कऽ कौआ आ साेँ पक आकृहत म उहड र्ि। 17 ओहह समय सेँ ओ बािक प्रभु मसीहक सामि्ग य सेँ ठीक भऽ र्ि, आ ओ प्रभुक स्तुहत र्ाबऽ िार्ि आ हुिका ठीक कयिहिहार प्रभुक धन्यिाद दबऽ िार्ि। 18 जि​ि हुिकर हपता हुिका अपि पूिग अिस्िा म ठीक भऽ र्ि दखि कहिहि​ि, “ह बौआ, अहाेँक की भि आ अहाेँ कोि तरह ेँ ठीक भऽ र्िहुेँ?” 19 बटा उत्तर दिक, “जि​ि दु र्​् टात् मा सभ हमरा पकहड ि​िक ति​ि हम सराय म र्िहुेँ, ति​ि एकटा िडकाक संर् एकटा बहुत सुन्दर स् त्री भटिीह, जकर िपटबाक कपडा ओ पहहि धोि छिीह आ एकटा िंभा पर िटकि छिीह। 20 हम एहह म सेँ एकटा केँ िऽ कऽ माि पर राखि दहियैक आ तुरन्त दु ष्टात्मा सभ हमरा छोहड कऽ भाहर् र्ि। 21 एहह बात पर हपता बहुत हहर्गत भऽ कहिहि​ि, “ह बौआ, शायद ई बािक ओहह जीहित परमश् िरक पुत्र अहछ ज आकाश आ पृि् िी केँ बिौिहि।” 22 हकएक तेँ जहहिा ओ हमरा सभक बीच अयिाह तेँ मूहतग टू हट र्िहि आ सभ दिता सभ िहस पडिाह आ एकटा पैघ शखि द्वारा िष्ट भऽ र्िाह। 23 ति​ि ओ भहिष्यिाणी पूरा भि ज कहैत छि, “हम अपि बटा केँ हमस्र दश सेँ बजा ि​िहुेँ।” अध्याय 5 1 यूसुफ आ मररयम जि​ि ई सुहि ज मूहतग िहस पडि अहछ आ िष्ट भऽ र्ि अहछ, ति​ि ओ सभ भय आ काेँहप उठिाह आ कहिहि​ि, “जि​ि हम सभ इस्राएि दश म छिहुेँ, ति​ि हरोदस यीशु केँ मारबाक इच्‍छा सेँ, एहह ि​ि सभ िोक केँ मारर दिहि।” बतिहम म हशशु, आ ओहह मोहल्ला म। 2 एहह म कोिो संदह िहह ज हमस्रिासी जेँ ई मूहतग केँ तोहड कऽ िहस पडि अहछ तेँ हमरा सभ केँ आहर् म जरा दत।

3 त ेँ ओ सभ एहह ठाम सेँ िकैत सभक र्ुप्त स्िाि पर र्िाह, ज यात्री सभक र्ाडी आ कपडा-ित्ता िूहट िैत छि आ ओकरा सभ केँ बाखि कऽ िऽ जाइत छि। 4 ई चोर सभ अबैत काि एकटा पैघ हल्ला सुि​िक, जिा कोिो राजाक आिाज ज एकटा पैघ सिा आ बहुत रास घोडाक संर् छि, आ अपिहह शहर सेँ हुिकर ओिरचर पर तुरही बजैत छि, जकरा दखि ओ सभ एतक िरा र्ि ज अपि सभटा िूट-पाट छोहड र्ि पाछू-पाछू, आ जल्दबाजी म उहड जाउ। 5 एहह पर कैदी सभ उहठ कऽ एक-दोसरक बाि िोहि कऽ एक-एकटा अपि-अपि झोरा िऽ कऽ चहि र्ि आ यूसुफ आ मररयम केँ हुिका सभक पहरा दबऽ अबैत दखि पुछिहि​ि, “ओ राजा कतय अहछ, हजिकर आर्मिक हल्ला िकैत सभ सुि​िक।” , आ हमरा सभकेँ छोहड र्ि, जाहहसेँ आब हम सभ सुरहित उतरर र्ि छी? 6 यूसुफ उत्तर दिहि​ि, “ओ हमरा सभक पाछाेँ आहब जताह।” अध्याय 6 1 ति​ि ओ सभ दोसर म र्िाह, जतय एकटा एहि स् त्री छि, जाहह म दु र्​् टात् मा सेँ ग्रहसत छि आ ओकरा म शैताि, ज शाहपत हिद्रोही छि, अपि हि​िास क’ ि​ि छि। 2 एक राहत जि​ि ओ पाहि आिय र्िीह ति​ि ओ ि अपि कपडा पहहरर कऽ सहि कऽ सकिीह आ ि कोिो घर म रहह सकिीह। मुदा जहहिाजहहिा जंजीर िा िोरीसेँ बाखि दै त छिहि, ओ ओकरा तोहड कऽ मरुभूहमक स्िाि पर हिकहि जाइत छिीह, आ कि​िो काि जतय सडक पार होइत छि, आ चचगक आेँ र्ि म ठाढ भ' क' पुरुर् पर पािर फहक दै त छिीह. 3 जि​ि संत मररयम एहह w आदमी केँ दि​िहि ति​ि हुिका पर दया आहब र्िहि। ति​ि शैताि ओकरा छोहड कऽ युिकक रूप म भाहर् र्ि आ कहिक, “हाय, तोहर मररयम आ तोहर बटाक कारण।ेँ ” 4 ति​ि ओ स् त्री अपि यातिा सेँ मुि भऽ र्िीह। मुदा अपिा केँ िंर्ट बुहझ ओ िजा र्िीह, आ कोिो पुरुर् केँ दिबा सेँ बचैत छिीह, आ कपडा पहहरर क' घर चहि र्िीह, आ अपि मामिाक औ हहसाब अपि हपता आ ररश्तदार केँ दिहि, ज शहरक सिगश्रष्ठ हबाक कारण सेंट .. मररयम आ यूसुफ क सबसेँ बसी आदर क संर्। 5 दोसर हदि भोर सडकक ि​ि पयागप्त भोजि भहट कऽ ओ सभ ओहह सभ सेँ हिदा भऽ र्िाह आ हदिक करीब साेँझ म दोसर िर्र म पहुेँचिाह, जतय ति​ि हि​िाह होमय बिा छि। मुदा शैतािक किा आ हकछु जादू र्रक आचरणसेँ कहियाेँ एतक र्ूंर्ा भ’ र्िीह ज ओतक मुेँह िहह िोहि सकिीह। 6 मुदा जि​ि ई र्ूंर्ा कहियाेँ ि​िी सेंट मैरी केँ शहर म प्रिश करै त दि​िहि, आ प्रभु मसीह केँ कोरा म ि' क' ि' क' ि' क' प्रभु मसीह हदस हाि बढौिहि, आ हुिका अपि कोरा म ि' ि​िहि, आ हुिका बहुत बर र्िा िर्ा ि​िहि ओकरा चुम्मा ि​िकै, िर्ातार ओकरा हहिाबैत आ ओकरा अपि दह पर दबाबैत। 7 तुरन्त हुिकर जीहक िोरी ढीिा भऽ र्िहि आ काि िुहज र्िहि आ ओ परमश् िरक स्तुहत र्ाबय िर्िीह ज हुिका पुिजीहित कयिहि। 8 ओहह राहत ओहह िर्रक हि​िासी सभ म बहुत िुशी भिहि, ज सभ सोचैत छिाह ज परमश् िर आ हुिकर स् िर्गदूत हुिका सभक बीच उतरर र्ि छहि। 9 ओ सभ तीि हदि एहह स्िाि पर रहिाह, आ सभ सेँ बसी आदर आ भव्य मिोरं जि सेँ भेंट कयिहि। 10 िोक सभक द्वारा बाट पर भोजिक व्यिस्िा कयि र्िा पर ओ सभ हिदा भऽ र्िाह आ दोसर िर्र म हिदा भिाह, जाहह म ओ सभ रहबाक प्रिृहत्त छि, हकएक तेँ ओ सभ प्रहसद्ध स्िाि छि। 11 एहह िर्र म एकटा सज्जि स् त्री छिीह, ज एक हदि िदी पर स्नाि करबाक ि​ि उतरर र्िीह, ति​ि दि​िहुेँ ज शाहपत शैताि ओकरा पर साेँपक रूप म उछहि र्ि। 12 ओ ओकर पट म मोहड कऽ सभ राहत ओकरा पर पडि रहैत छि। 13 ई महहिा ि​िी सेंट मैरी केँ , आ प्रभु मसीह केँ अपि कोरा म हशशु केँ दखि, ि​िी सेंट मैरी सेँ पुछिहि​ि ज ओ ओकरा बच्चा केँ चुम्मा िबय ि​ि द’ हदयौक, आ ओकरा कोरा म ि’ जबाक ि​ि। 14 जि​ि ओ माहि ि​िक आ जहहिा ओ स् त्री बच्चा केँ हटौिक ति​ि शैताि ओकरा छोहड कऽ भाहर् र्ि आ ि ओ स् त्री ओकरा बाद कहहयो िहह दि​िक।


15 एहह पर सभ पडोसी परमश् िरक स्तुहत कयिहि आ स् त्री हुिका सभ केँ प्रचुर उपकार कयिहि। 16 दोसर हदि िैह स् त्री प्रभु यीशु केँ धोबय ि​ि सुर्ंहधत पाहि अि​िहि। आ जि​ि ओ ओकरा धो ि​िक ति​ि ओ पाहि केँ सुरहित राखि ि​िक। 17 ओतऽ एकटा िडकी छि, जकर दह कोढसेँ उज्जर भऽ र्ि छि, ज एहह पाहिसेँ हछडहक कऽ धोओि र्ि छि आ ओ तुरन्त कोढसेँ शुद्ध भऽ र्ि छि। 18 िोक सभ हिस्संदह कहिक ज यूसुफ आ मररयम आ ओ बािक परमश् िर छहि, हकएक तेँ ओ सभ मिुष्य जकाेँ िहह दिाइत छहि। 19 ओ सभ जि​ि ओ सभ जबाक ि​ि तैयार भऽ रहि छि तेँ कोढसेँ परशाि िडकी आहब कऽ चाहिक ज ओकरा अपिा सभक संर् जबाक अिुमहत दऽ हदयौक। त ेँ ओ सभ सहमहत दिक, आ िडकी सहो हुिका सभक संर् जा धरर र्ि। ओ सभ एकटा एहि िर्र म पहुेँचिाह, जाहह म एकटा पैघ राजाक महि छि, जकर घर सराय सेँ दू र िहह छि। 20 ओ सभ एतहह रहह र्िाह आ जि​ि ओ िडकी एक हदि राजकुमारक पत्नी िर् र्ि आ ओकरा दु िी आ शोकपूणग अिस्िा म पाहब र्ि तऽ ओकरा सेँ ओकर िोरक कारण पुछिकै। 21 ओ उत्तर दिहि​ि, “हमर कुहरब पर आश्चयग िहह करू, कारण हम एकटा पैघ दु भागग्यक हशकार छी, जकरा हम ककरो कहबाक साहस िहह करै त छी।” 22 मुदा, िडकी कहैत अहछ, जेँ अहाेँ अपि एकांत हशकायत हमरा सौंहप दब तेँ शायद हम अहाेँकेँ एकर उपाय ताहक सकैत छी। 23 त ेँ अहाेँ राजकुमारक पत्नी कहैत छहि ज, ई रहस्य रािू, आ ककरो जीहित ककरो िहह पता चित! 24 हम एहह राजकुमार सेँ हि​िाह क’ ि​ि छी ज पैघ-पैघ राज्य पर राजाक रूप म शासि करै त छहि, आ हमरा सेँ हुिका कोिो संताि सेँ पहहि हुिका संर् बहुत हदि धरर जीहित रहिहुेँ। 25 अन्त म हम हुिका द्वारा र्भगिती भऽ र्िहुेँ , मुदा अफसोस! हम कोढी पुत्रक जन्म दिहुेँ। ज दखि ओ अपि िहह बित, बि् हक हमरा कहिक। 26 या तऽ ओकरा मारर हदयौक िा एहि जर्ह पर कोिो िसग िर् पठाउ, जाहह सेँ ओकर िाम कहहयो िहह सुि​ि जाय। आ आब अपि ख्याि रािू। हम अहाेँकेँ एहहसेँ बसी कहहयो िहह दिब। 27 त ेँ एतय हम अपि दयिीय आ दयिीय पररखस्िहतक हि​िाप करै त पीहब रहि छी। अफसोस, हमर बटा! अफसोस, हमर पहत! हम अहाेँक सामि एकर िुिासा कि छी? 28 िडकी उत्तर दिकहि, “हमरा अहाेँक रोर्क उपाय भहट र्ि अहछ, ज हम अहाेँ सभ सेँ िचि दै त छी, कारण हमहूेँ कोढी छिहुेँ, मुदा परमश् िर हमरा शुद्ध कऽ दिहि, जकरा यीशु कहि जाइत अहछ, ज मैरी मररयमक पुत्र अहछ।” 29 ओ स् त्री पुछैत छिीह ज ओ परमश् िर कतय छहि, जकरा बार म ओ बजिीह, ति​ि ओ िडकी उत्तर दिहि​ि ज ओ अहाेँ सभक संर् एतय ओही घर म ठहरै त छहि। 30 मुदा ई कोिा भऽ सकैत अहछ? कहैत छहि​ि ओ; ओ कतय छहि? दिू, िडकी उत्तर दिक, यूसुफ आ मररयम। हुिका सभक संर् ज हशशु अहछ, तकरा यीशु कहि जाइत अहछ। 31 मुदा ओ कहैत छहि ज अहाेँ कोि तरह ेँ कोढ सेँ शुद्ध भिहुेँ? अहाेँ हमरा स िहह कहब? 32 हकएक िहह? कहैत अहछ िडकी; हम ओहह पाहि केँ ि' क' हमरा पर ढारर दहियहि आ हमर कोढ ितम भ' र्ि। 33 ति​ि राजकुमारक पत्नी उहठ कऽ हुिका सभक स्वार्त कयिहि आ बहुत रास िोकक बीच यूसुफक ि​ि एकटा पैघ भोजक व्यिस्िा कयिहि। 34 दोसर हदि प्रभु यीशु केँ धोबय ि​ि सुर्खित पाहि िऽ कऽ बाद म िएह पाहि हुिकर बटा पर ढारर दिहि, जकरा ओ अपिा संर् अि​ि छिीह, आ हुिकर बटा तुरन्त कोढ सेँ शुद्ध भऽ र्िहि। 35 ति​ि ओ परमश् िरक धन्यिाद आ स्तुहत र्ाहब बजिीह, “ह यीशु, अहाेँ केँ जन्म दहिहार माय धन्य छहि! 36 की अहाेँ एहह तरह ेँ अपिा संर् समाि स्वभािक िोक सभ केँ ठीक करै त छी, जाहह पाहि सेँ अहाेँक शरीर धोओि जाइत अहछ? 37 ति​ि ओ ि​िी मैरी केँ बहुत पैघ उपहार चढौिहि, आ ओकरा कल्पिा योग्य आदर सेँ हिदा कयिहि। अध्याय 7 तकर बाद ओ सभ दोसर शहर आहब र्ि, आ ओतय ठहरबाक मोि भि।

2 तदिुसार ओ सभ एक आदमीक घर र्िाह, ज ि​िहि​िाहहत छि, मुदा जादू र्र सभक प्रभाि सेँ अपि पत्नीक भोर् िहह कऽ सकिाह। 3 मुदा ओहह राहत हुिका घर म ठहरिा पर ओ आदमी अपि अव्यिस्िा सेँ मुि भऽ र्ि। 4 जि​ि ओ सभ भोर-भोर अपि यात्रा पर आर्ू बढबाक तैयारी म छिाह ति​ि ि​ि हि​िाहहत व्यखि हुिका सभ केँ बाधा पहुेँचा दिहि आ हुिका सभक ि​ि एकटा उदात्त मिोरं जिक व्यिस्िा कयिहि? 5 मुदा दोसर हदि आर्ू बहढ कऽ ओ सभ दोसर िर्र म पहुेँचिाह आ दि​िहि ज तीिटा स् त्री केँ एकटा कब्र सेँ बहुत कािैत जा रहि छि। 6 जि​ि संत मररयम हुिका सभ केँ दखि कऽ हुिका सभक संर्ी िडकी सेँ कहिहि​ि, “जाउ आ हुिका सभ सेँ पूहछ हिअ ज हुिका सभक की बात अहछ आ हुिका सभक कोि दु भागग्य भि अहछ?” 7 जि​ि िडकी हुिका सभ सेँ पुछिहि​ि ति​ि ओ सभ हुिका सेँ कोिो उत्तर िहह दिहि​ि, मुदा फर पुछिहि​ि, “अहाेँ सभ क छी आ कतय जा रहि छी?” हकएक तेँ हदि दू र भऽ र्ि अहछ आ राहत िर् आहब र्ि अहछ। 8 हम सभ यात्री छी, िडकी कहैत अहछ, आ ठहरबाक ि​ि सरायक िोज म छी। 9 ओ सभ उत्तर दिहि​ि, “हमरा सभक संर् जाउ आ हमरा सभक संर् रहू।” 10 ति​ि ओ सभ हुिका सभक पाछाेँ-पाछाेँ चहि र्िाह आ सभ तरहक साज-सज्जा सेँ सुसखज्जत ि​ि घर म प्रिश कयि र्िहि। 11 आब जाडक समय भऽ र्ि छि, ति​ि ओ िडकी ओहह पािगर म र्िीह जतय ई महहिा सभ छिीह, आ हुिका सभ केँ पहहि जकाेँ कािैत आ हि​िाप करै त दि​िहि। 12 हुिका सभक िर् म रशम सेँ झाेँपि एकटा िच्चर आ र्रदहि म आबिूसक कािर िटकि ठाढ छि, जकरा ओ सभ चुम्मा ि’ क’ िुआ रहि छि। 13 मुदा जि​ि िडकी कहिकहि, “ह महहिा िोकहि, ओ िच्चर कतक सुन्दर अहछ! ओ सभ िोर कऽ कऽ उत्तर दिहि​ि, “ई िच्चर ज अहाेँ सभ दिैत छी, हमरा सभक भाइ छि, ज हमरा सभक समाि एहह माय सेँ जन्मि छि। 14 जि​ि हमर सभक हपता मरर र्िाह आ हमरा सभक ि​ि बहुत पैघ सम्पहत्त छोहड र्िाह, आ हमरा सभक ि​ि मात्र ई भाइ छि, आ हम सभ हुिका ि​ि एकटा योग्य जोडी बिाबय क प्रयास किहुेँ, आ सोचिहुेँ ज हुिका आि पुरुर् जकाेँ हि​िाह कयि जाय, ति​ि कोिो चक्करदार आ ईष्यागिु महहिा हुिका बाहर जादू कयिहि हमर ज्ञाि। 15 हम सभ एक राहत हदि सेँ हकछु ए पहहि घरक दरबज्जा सभ बन्न छि, ति​ि दि​िहुेँ ज हमरा सभक भाय िच्चर म बदहि र्ि अहछ, जिा अहाेँ सभ ओकरा एि​ि दिैत छी। 16 हम सभ जाहह हिर्ादपूणग अिस्िा म अहाेँ सभ केँ दिैत छी, ताहह म हमरा सभ केँ सान्त्विा दबयि​िा हपता िहह अहछ। संसार म जादू र्र आ भहिष्यि​िा, मुदा ओ सभ हमरा सभक कोिो सिा िहह किक। 17 जाहह बर हम सभ अपिा केँ शोक सेँ दबि पाहब िैत छी, हम सभ उहठ कऽ एहह मायक संर् अपि हपताक कब्र पर जाइत छी, जतय हम सभ पयागप्त काि​िा पर घर घुरर जाइत छी। 18 िडकी ई बात सु हि कऽ बजिीह, “हैसाहस करू आ अपि िर छोडू, हकएक तेँ अहाेँ सभक बीच आ घरक बीच म अहाेँ सभक दु ुः िक उपाय िर् म अहछ। 19 हमहूेँ कोढी छिहुेँ। मुदा जि​ि हम एहह स्त्री केँ आ ओकरा संर् एहह छोट हशशु केँ दि​िहुेँ, जकर िाम यीशु अहछ, ति​ि हम अपि शरीर पर ओहह पाहि सेँ हछडहक दहियैक, जाहह सेँ ओकर माय ओकरा धोि छिीह, आ हम ठीक भ’ र्िहुेँ। 20 हमरा हिश्वास अहछ ज ओ अहाेँ सभ केँ हिपहत्त म सेँ मुखि दबा म सहो सिम छहि। त ेँ उठू हमर मािहकि मैरी िर् जाउ आ जि​ि ओकरा अपि पािगर म आहि दब ति​ि ओकरा रहस्यक िुिासा करू, संर्हह संर् ओकरा अपि मामिा म दया करबाक ि​ि र्ंभीरता सेँ हि​िती करू। 21 स्त्रीर्ण सभ जहहिा िडकीक प्रिचि सुहि र्िीह, ओ सभ दौड-धूप ि​िी सेंट मैरी िर् चहि र्िीह, हुिकर पररचय दिहि आ हुिका सोझाेँ बैहस क’ कािय िर्िीह। 22 ओ कहिहि​ि, “ह हमर ि​िी सेंट मैरी, अहाेँक दासी सभ पर दया करू, कारण हमरा सभक पररिारक कोिो मुखिया िहह अहछ आ हमरा सभ सेँ पैघ हकयो िहह अहछ। हमरा सभसेँ पहहि कोिो हपता, िा भाइ िहह ज भीतरबाहर जाहि।


23 मुदा ई िच्चर ज अहाेँ सभ दिैत छी, स हमरा सभक भाय छि, जकरा कोिो स् त्री जादू -टोिा कऽ कऽ अहाेँ सभ दखि रहि छी। 24 ति​ि संत मररयम हुिका सभक मामिा म दु िी भ’ र्िीह आ प्रभु यीशु केँ ि’ क’ िच्चरक पीठ पर बैसा दिहि। 25 ओ पुत्र केँ कहिहि​ि, “ह यीशु मसीह, एहह िच्चर केँ अपि असाधारण शखिक अिुसार पुिस्िागहपत करू (िा ठीक करू)। 26 ई बात ि​िी सेंट मैरी द्वारा बहुत कम कहि र्ि छि, मुदा िच्चर तुरन्त मिुक्खक रूप म आहब र्ि, आ हबिा कोिो हिकृहतक युिक बहि र्ि। 27 ति​ि ओ आ ओकर माय आ बहहि सभ ि​िी सेंट मैरीक आराधिा किक आ बच्चा केँ माि पर उठा कऽ ओकरा चुम्मा ि​िक आ कहिक, “ह यीशु, ह संसारक उद्धारकताग, तोहर माय धन्य अहछ! धन्य अहछ ओ आेँ खि ज अहाेँ केँ दखि एतक प्रसन्न अहछ। 28 ति​ि दु िू बहहि अपि माय केँ कहिहि​ि, “सत्त हमर भाय प्रभु यीशु मसीहक सहायता सेँ आ ओहह िडकीक दया सेँ अपि पूिग रूप म आहब र्ि छहि, ज मररयम आ हुिकर बटाक हिर्य म हमरा सभ केँ बतौिहि।” 29 हमरा सभक भाय जहहया धरर अहि​िाहहत छहि, स उहचत अहछ ज हम सभ हुिकर हि​िाह एहह िडकी सेँ हुिकर िोकर सेँ करी। 30 ओ सभ मररयम सेँ एहह हिर्य म सिाह-मशिरा कऽ ि​िक आ ओ सभ मररयम सेँ सहमहत दऽ ि​िक तेँ ओ सभ एहह िडकीक ि​ि एकटा शािदार हि​िाह कयिक। 31 एहह तरह ेँ हुिका िोकहिक दु ुः ि आिन्द म बदहि र्िहि आ शोक आिन्द म बदहि कऽ ओ सभ आिखन्दत होमय िर्िाह। आ अपि-अपि समृद्ध पररधाि म सजि, कंर्ि ि' क' मस्ती करब, आ र्ाबय। 32 तकर बाद ओ सभ परमश् िरक महहमा आ स्तुहत कयिहि, “ह दाऊदक पुत्र यीशु ज दु ि केँ आिन्द म बदहि दै त छी आ शोक केँ आिन्द म बदहि दै त छी! 33 तकर बाद यूसुफ आ मररयम दस हदि धरर ओतहह रहिाह, ति​ि ओहह िोक सभ सेँ बहुत आदर पाहब र्िाह। 34 ओ सभ जि​ि ओ सभ हुिका सभ सेँ हिदा िऽ कऽ घर घुरर र्िाह। 35 मुदा िास कऽ िडकी। अध्याय 8 1 एहह ठाम सेँ यात्रा म ओ सभ एकटा मरुभूहम म आहब र्िाह आ कहि र्ि ज ओतऽ िकैत सभक आक्ांत अहछ। त ेँ यूसुफ आ सेंट मैरी राहत म ओहह म सेँ र्ुजरबाक तैयारी किहि। 2 जि​ि ओ सभ जा रहि छि ति​ि दि​िकै ज दू टा िकैत बाट म सु ति छि आ ओकरा सभक संर् बहुत रास िकैत सहो सुति छि। 3 एहह दु िूक िाम तीतुस आ दु माकुस छि। तीतुस दु माकुस केँ कहिहि​ि, “हम अहाेँ सेँ हि​िती करै त छी ज ओहह िोक सभ केँ चुपचाप चिय हदयौक, जाहह सेँ हमरा सभक संर्ी हुिका सभक कोिो बात िहह बुहझ सकय। 4 मुदा िु माकस मिा कऽ कऽ तीतुस फर कहिहि​ि, “हम अहाेँ केँ चािीस टा ग्रोट दऽ दब, आ प्रहतज्ञाक रूप म हमर कमरबंद िऽ हिअ, ज ओ ओकरा बजैत कऽ दि छि, जाहह सेँ ओ मुेँह िहह िोिय आ हल्ला िहह करय।” 5 जि​ि ि​िी सेंट मैरी ई िकैत हुिका सभ पर ज दया किकहि स दि​िहि तेँ ओ हुिका कहिहि​ि, “प्रभु परमश् िर अहाेँ केँ अपि दहहिा हाि म ग्रहण करताह आ अहाेँ केँ पापक िमा करताह।” 6 ति​ि प्रभु यीशु उत्तर दिहि​ि, “जि​ि तीस िर्ग पूरा भऽ जायत, ति​ि यरूशिम म यहूदी सभ हमरा क्ूस पर चढा दताह। 7 ई दु िू चोर एकहह संर् क्ूस पर हमरा संर् रहत, हमर दहहिा कात तीतुस आ बामा कात िु माकस आ ओहह समय सेँ तीतुस हमरा सेँ पहहि स्वर्ग म जायत। 8 जि​ि ओ कहिहि ज, “ह हमर बौआ, परमश् िर ई अहाेँक भाग्य िहह हो, ति​ि ओ सभ ओहह िर्र म चहि र्िाह, जाहह म कतको मूहतग छि। ज जहहिा िर् आहब र्ि छि, बािु क पहाडी म बदहि र्ि छि। 9 एहह ठाम सेँ ओ सभ ओहह हसकोमोरक र्ाछ िर् र्िाह, जकरा एि​ि मातरआ कहि जाइत अहछ। 10 मतररया म प्रभु यीशु एकटा इिार उर्ौिहि, जाहह म संत मररयम अपि कोट धोबैत छिीह। 11 ओहह दश म प्रभु यीशुक पसीिा सेँ एकटा बािसम उत्पन्न होइत अहछ िा उर्ैत अहछ। 12 ओतय सेँ ओ सभ मखफफस र्िाह आ हफरौि केँ दि​िहि आ तीि िर्ग धरर हमस्र म रहिाह।

13 प्रभु यीशु हमस्र म बहुत रास चमत्कार कयिहि, ज ि शैशि काि म सुसमाचार म भटै त अहछ आ ि पूणगताक सुसमाचार म। 14 तीि िर्गक अंत म ओ हमस्र सेँ घुरिाह आ यहूदाक िर् पहुेँचिा पर यूसुफ प्रिश करबा म िरा र्िाह। 15 ई सुहि ज हरोदस मरर र्ि छहि आ हुिकर जर्ह पर हुिकर पुत्र आकेिाउस राज करै त छहि। 16 जि​ि यीशु यहूहदया र्िाह तेँ परमश् िरक स् िर्गदूत हुिका सामि आहब कऽ कहिहि​ि, “ह यूसुफ, िासरत िर्र म जाउ आ ओतहह रहू।” 17 ई बात सत्त अजीब बात अहछ ज ओ ज सभ दशक प्रभु छहि, हुिका एहह तरह ेँ एतक रास दश म आर्ू-पाछू ि' जाओि जाय। अध्याय 9 1 बाद म जि​ि ओ सभ बतिहम िर्र म अयिाह ति​ि ओ सभ ओतय कतको बहुत हताश हिस्टम्पर भटिहि, ज बच्चा सभ केँ दखि कऽ एतक परशािी भऽ र्िहि ज अहधकांश िोकक मृत्यु भऽ र्िहि। 2 ओतय एकटा महहिा छिीह हजिकर एकटा बीमार बटा छिहि, जकरा ओ मृत्युक सीमा पर पहुेँचिा पर ि​िी सेंट मैरी िर् अि​ि छिीह, ज हुिका यीशु मसीह केँ धोबैत काि दि​ि छिीह। 3 ति​ि ओ स् त्री बजिीह, “ह हमर ि​िी मैरी, हमर एहह बटा केँ िीचाेँ दिू, ज बहुत भयािह पीडा सेँ ग्रस्त अहछ। 4 संत मररयम हुिकर बात सुहि बजिीह, “हम अपि बटा केँ जाहह पाहि सेँ धोि छी ताहह म सेँ कहि-महि ि’ क’ ओकरा पर हछडहक हदयौक।” 5 ति​ि ओ ओहह पाहि म सेँ कहि-महि, जिा संत मररयमक आज्ञा दिहि, िऽ कऽ अपि पुत्र पर हछडहक दिहि, ज अपि हहंसक पीडा सेँ िाहक कऽ सुहत र्ि छि। आ कहि सुतिाक बाद एकदम िीक जकाेँ जाहर् र्ि आ ठीक भ' र्ि। 6 माय एहह सफिता पर बहुत प्रसन्न भ’ क’ फर संत मररयम िर् र्िीह, आ संत मररयम हुिका कहिहि​ि, “परमश् िरक स्तुहत करू, ज अहाेँक एहह बटा केँ ठीक कयिहि।” 7 ओही ठाम एकटा आओर स् त्री छिीह, ज हुिकर पडोसी छिीह, हजिकर बटा आब ठीक भ’ र्ि छिहि। 8 एहह स् त्रीक बटा सहो एहि रोर् सेँ ग्रहसत छि आ ओकर आेँ खि आब िर्भर् एकदम बंद भऽ र्ि छि आ ओ हदि-राहत हुिका ि​ि हि​िाप कऽ रहि छि। 9 ठीक भि बच्चाक माय ओकरा कहिहि​ि, “अहाेँ अपि बटा केँ सेंट मररयम िर् हकएक िहह अिैत छी, जिा हम अपि बटा केँ हुिका िर् अि​ि रही, जि​ि हक ओ मृत्युक पीडा म पडि छि। ओ ओहह पाहि सेँ ठीक भ’ र्िाह, जकरा सेँ ओकर पुत्र यीशुक शरीर धोओि र्ि छिैक? 10 जि​ि ओ स् त्री हुिका ई बात सु हि कऽ िएह पाहि हिकाहि कऽ अपि बटा केँ ओहह पाहि सेँ धो ि​िहि, ति​ि हुिकर शरीर आ आेँ खि तुरन्त अपि पूिग अिस्िा म आहब र्िहि। 11 जि​ि ओ अपि बटा केँ संत मररयम िर् अि​िहि आ हुिकर कस हुिका ि​ि िोि​िहि, ति​ि ओ हुिका आज्ञा दिहि​ि ज ओ अपि बटाक स्वास्थ्य ठीक होयबाक ि​ि परमश् िर केँ धन्यिाद दहि​ि आ की भिहि स ककरो िहह कहहि​ि। अध्याय 10 1 ओही िर्र म एक आदमीक दू टा पत्नी छिीह, जाहह म एक-एकटा बटा बीमार छिहि। ओहह म सेँ एकटाक िाम मररयम आ ओकर बटाक िाम कािब छिैक। 2 ओ उहठ कऽ अपि बटा केँ िऽ कऽ यीशुक माय ि​िी सेंट मैरी िर् र्िीह आ हुिका एकटा बहुत सुन्दर टाट चढौिहि, ज, ह हमर ि​िी मैरी हमर ई टाट स्वीकार करू, आ एकर बदिा म हमरा एकटा छोट टाट हदअ कपडा िपटब। 3 मररयम एहह बात पर सहमत भिीह आ जि​ि कािबक माय चहि र्िीह ति​ि ओ अपि बटाक ि​ि िपटबिा कपडा सेँ एकटा कोट बिा कऽ ओकरा पहहरर ि​िहि आ ओकर रोर् ठीक भ’ र्िहि। मुदा दोसर पत्नीक बटा मरर र्ि। 4 ति​ि दु िूक बीच एक-एक सप्ताह म बारी-बारी सेँ पररिारक कारोबार करबा म अंतर उत्पन्न भि।


5 जि​ि कािबक माय मररयमक बाड आहब र्िहि आ ओ रोटी सकबाक ि​ि भंिार र्रम क’ रहि छिीह आ भोजि अिबाक ि​ि चहि र्िीह, ति​ि ओ अपि बटा कािब केँ भंिार िर् छोहड र्िीह। 6 दोसर पत्नी, ज ओकर प्रहतद्वं दी छि, एकहह म रहह कऽ ओकरा िऽ कऽ भोज म फहक दिक, ज बहुत र्रम छि, आ फर चहि र्ि। 7 मररयम घुरैत काि अपि पुत्र कािब केँ भंिारक बीच म पडि हेँसैत दि​िहि, आ भंिार ओतब ठं ढा जिा पहहि र्रम िहह भि हो, आ बुझिीह ज हुिकर प्रहतद्वं दी दोसर पत्नी हुिका आहर् म फहक दि छिीह। 8 जि​ि ओ ओकरा बाहर हिकाहि कऽ ि​िी सेंट मैरी िर् अि​िहि आ किा सुिौिहि, हजिका ओ उत्तर दिहि​ि, “चुप रहू, हमरा हचन्ता अहछ ज कहीं अहाेँ ई बात िहह बताबी।” 9 एकर बाद ओकर प्रहतद्वं दी दोसर पत्नी जि​ि इिार पर पाहि िींचैत छिीह आ कािब केँ इिारक कात म ि​िाइत दि​िहि आ हकयो िर् म िहह छि, ति​ि हुिका िऽ कऽ इिार म फहक दिहि। 10 जि​ि हकछु िोक इिार सेँ पाहि अिबाक ि​ि आयि तऽ ओ सभ ओहह बािक केँ पाहिक उपरका भार् पर बैसि दि​िक आ ओकरा रस्सी सेँ बाहर हिकाहि दिक आ ओहह बच्चा केँ दखि बहुत आश्चयगचहकत भऽ परमश् िरक स्तुहत कयिक। 11 ति​ि माय आहब कऽ हुिका ि’ कऽ ि​िी सेंट मैरी िर् िऽ र्िीह, हि​िाप करै त बजिीह, “ह हमर ि​िी, दिू हमर प्रहतद्वं दी हमर बटाक संर् की किक आ कोिा ओ ओकरा इिार म फहक दिक, आ हम िहह करै त छी।” प्रश्न मुदा कोिो ि कोिो समय ओ हुिकर मृत्युक अिसर हतीह । 12 संत मररयम हुिका उत्तर दिहि​ि, भर्िाि अहाेँक घायि काज केँ सही ठहरौताह। 13 तदिुसार हकछु हदिक बाद जि​ि दोसर पत्नी पाहि िींचय ि​ि इिार िर् अयिीह त हुिकर पैर रस्सी म ओझरा र्िहि, जाहह सेँ ओ इिार म माि सेँ िहस पडिीह आ हुिकर सहायताक ि​ि दौडि िोक सभ हुिकर िोपडी टू टि दि​िहि आ... हड्डी चोट िार्ि। 14 ति​ि ओ अधिाह अंत म पहुेँहच र्िीह आ ि​िकक ई बात पूरा भऽ र्िहि ज, “ओ सभ इिार िोदै त ओकरा र्हींर कऽ ि​िक, मुदा ओहह र्ड्ढा म िहस पडि ज ओ सभ तैयार कि छि।” अध्याय 11 1 ओहह िर्र म एकटा आओर स् त्री केँ सहो दू टा पुत्र बीमार छिहि। 2 जि​ि एक र्ोट मरर र्िाह, दोसर ज मृत्युक सीमा पर पडि छि, ति​ि ओ ि​िी सेंट मैरी केँ कोरा म ि' ि​िहि आ िोरक बाहढ म हुिका संबोहधत कयिहि। 3 ह हमर भर्िती, हमरा सहायता करू आ राहत हदअ। कारण, हमरा दू टा बटा छि, एकटा एि​िहह र्ाडि अहछ, दोसर केँ हम एि​िहह मृत्युक सीमा पर दिैत छी, दिू, हम कोिा र्ंभीरतापूिगक परमश् िर सेँ अिुग्रह चाहैत छी आ हुिका सेँ प्रािगिा करै त छी। 4 ति​ि ओ बजिीह, “ह प्रभु, अहाेँ कृपािु, दयािु आ दयािु छी। अहाेँ हमरा दू टा पुत्र दिहुेँ। एकटा केँ अहाेँ अपिा म ि' ि​िहुेँ , ह हमरा एहह दोसर केँ बख्शी। 5 ति​ि संत मररयम अपि दु िक महािता बुहझ हुिका पर दया कऽ बजिीह, “की अहाेँ अपि बटा केँ हमर बटाक पिंर् पर राखि हदयौक आ ओकरा कपडा सेँ झाेँहप हदयौक।” 6 जि​ि ओ हुिका ओहह पिंर् पर राखि दिहि जाहह पर मसीह पडि छिाह, ओहह िण जि​ि हुिकर आेँ खि मृत्युक कारण ेँ एि​िहह मुहि र्ि छिहि। जहहिा-जहहिा प्रभु यीशु मसीहक िस्त्रक र्ंध ओहह िडका िर् पहुेँचैत छि, ओकर आेँ खि िु हज र्ि छि, आ जोर-जोर सेँ अपि माय केँ आिाज दै त ओ रोटी मेँर्ैत छि, आ जि​ि ओ रोटी पाहब र्ि छि ति​ि ओ रोटी चूहस ि​िक। 7 ति​ि ओकर माय बजिीह, “ह ि​िी मैरी, आब हमरा हिश्वास भ’ र्ि अहछ ज परमश् िरक सामि्ग य अहाेँ म बसि अहछ, जाहह सेँ अहाेँक बटा अपि िस्त्र केँ छूबैत दरी अपिा समाि बच्चा सभ केँ ठीक क’ सकैत अहछ। 8 ई िडका ज एहह तरह ेँ ठीक भि छि, िैह अहछ जकरा सुसमाचार म बािोिोम्यू कहि र्ि अहछ।

अध्याय 12 1 फर एकटा कोढी महहिा यीशुक माय ि​िी सेंट मैरी िर् जा कए कहिहि​ि, “ह हमर ि​िी, हमर मदद करू।” 2 संत मररयम उत्तर दिहि​ि, अहाेँ कोि सहायता चाहैत छी? सोिा छै आहक चािी, आहक तोहर शरीर कोढसेँ ठीक भऽ जाय? 3 स्त्री कहैत छहि ज हमरा ई क दऽ सकैत अहछ? 4 संत मररयम हुिका उत्तर दिहि​ि, “कहि रुकू जाबत हम अपि बटा यीशु केँ धो कऽ सुता िहह दब।” 5 ओ स् त्री प्रतीिा कऽ रहि छिीह, जिा हुिका आज्ञा दि र्ि छिहि। मररयम यीशु केँ ओछाओि पर बैसा कऽ ओ पाहि दऽ कऽ कहिहि​ि, “पाहि म सेँ हकछु िऽ कऽ अपि शरीर पर ढारर हदयौक।” 6 ई काज कऽ कऽ ओ तुरन्त शुद्ध भऽ र्िीह आ परमश् िरक स्तुहत कयिहि आ हुिका धि् यिाद कयिहि। 7 तीि हदिक बाद ओ चहि र्िीह। 8 िर्र म जा कऽ ओ एकटा राजकुमार केँ दि​िक ज दोसर राजकुमारक बटी सेँ हि​िाह कऽ ि​ि छि। 9 मुदा जि​ि ओ हुिका दिय अयिाह तेँ हुिकर आेँ खिक बीच म तारा जकाेँ कोढक ि​िण दि​िहि आ ति​ि ओ हि​िाह भंर् भऽ र्िाह। 10 जि​ि ओ स् त्री एहह सभ िोक सभ केँ बहुत दु िी आ प्रचुर मात्रा म िोर बहबैत दखि कऽ हुिका सभ सेँ कािबाक कारण पुछिहि​ि। 11 ओ सभ उत्तर दिहि​ि, “हमरा सभक पररखस्िहतक बार म िहह पूछू। कारण हम सभ कोिो व्यखि केँ अपि दु भागग्यक घोर्णा करबा म िट सिम छी। 12 मुदा तैयो ओ दबाब कऽ चाहैत छिीह ज हुिका सभ केँ अपि मामिा हुिका धरर पहुेँचाबहि, ई संकत दै त ज शायद ओ हुिका सभ केँ कोिो उपाय हदस हिदे हशत कऽ सकहि। 13 जि​ि ओ सभ युिती केँ दिौिहि आ ओकर आेँ खिक बीच म कोढक ि​िण दिौिहि। 14 ओ बजिीह, “हमहूेँ, जकरा अहाेँ सभ एहह ठाम दिैत छी, ओही तरहक हिर्ाद सेँ पीहडत छिहुेँ आ कोिो काज म बतिहम जा कऽ हम एकटा र्ुफा म र्िहुेँ आ मररयम िामक एकटा स् त्री केँ दि​िहुेँ, जकरा यीशु िामक एकटा बटा छिहि। 15 ओ हमरा कोढी दखि हमरा ि​ि हचंहतत भिीह आ हमरा हकछु पाहि दिहि जाहह सेँ ओ अपि बटाक दह धोि छिीह। एहह सेँ हम अपि दह हछडहक कऽ साफ भऽ र्िहुेँ। 16 ति​ि ई स् त्रीर्ण सभ कहिहि​ि, “की अहाेँ मािहकि, हमरा सभक संर् जा कऽ हमरा सभ केँ ि​िी सेंट मररयम केँ दिा दब?” 17 ओ सभ एहह बात पर सहमहत दऽ कऽ ओ सभ उहठ कऽ ि​िी सेंट मैरी िर् र्िाह। 18 ओ सभ भीतर आहब कऽ हुिका अपि उपहार चढौिहि तेँ कोढी युिती केँ दिा दिहि​ि ज ओ सभ अपिा संर् ज हकछु अि​ि छि। 19 ति​ि संत मररयम बजिीह, “प्रभु यीशु मसीहक दया अहाेँ सभ पर अहछ। 20 जाहह पाहि सेँ ओ यीशु मसीहक शरीर केँ धोि छिीह, ताहह म सेँ कहिमहि हुिका सभ केँ दऽ कऽ हुिका सभ केँ ओहह पाहि सेँ बीमार केँ धोबय ि​ि कहिहि​ि। ज जि​ि ओ सभ कऽ ि​िक ति​ि ओ ठीक भऽ र्िीह। 21 ओ सभ आ ओहह ठामक सभ िोक परमश् िरक स्तुहत कयिहि। ओ सभ िुशी सेँ भरर र्िाह आ ओहह ि​ि परमश् िरक स्तुहत कयिहि। 22 ति​ि राजकुमार अपि पत्नी ठीक भऽ र्िहि स सुहि कऽ हुिका घर िऽ र्िाह आ दोसर हि​िाह कऽ ि​िहि आ अपि पत्नीक स्वास्थ्य ठीक होयबाक ि​ि परमश् िरक धि् यिाद कयिहि। अध्याय 13 1 एकटा िडकी सहो छि, ज शैताि सेँ पीहडत छि। 2 ओ शाहपत आत्मा ओकरा बर-बर अजर्रक आकार म दिाइत छिैक आ ओकरा हिर्िबाक ि​ि प्रिृत्त छिैक आ ओकर सभटा िूि चूहस कऽ बाहर हिकाहि ि​िक ज ओ मृत शि जकाेँ बुझाइत छिैक। 3 जहहिा-जि​ि ओ अपिा आप म अबैत छिीह, माि पर हाि मरोहड क’ ओ हचहचयाइत छिीह, आ कहैत छिीह, “हाय, हम, हकयो एहि िहह भटत ज हमरा ओहह अधमी अजर्र सेँ मुि क’ सकैत अहछ! 4 ओकर बाप-माय आ ओकर आसपासक सभ िोक ओकरा दखि शोक मिा कऽ कािय िार्ि।


5 ओहह ठामक सभ िोक जि​ि हुिकर हि​िाप करै त सुिैत छिाह आ ई कहैत छिाह ज, “हमर भाइ सभ, की हकयो हमरा एहह हत्यारा सेँ बचाब’ बिा हकयो िहह अहछ?” 6 ति​ि राजकुमारक बटी ज कोढसेँ ठीक भऽ र्ि छिीह, ओहह िडकीक हशकायत सुहि अपि महिक चोटी पर चहि र्िीह आ दि​िकहि ज मािक चारू कात हाि घुमा कऽ िोरक बाहढ बहबैत छि आ सभटा... िोक ज दु ि म ओकरा बार म छि। 7 ति​ि ओ भूत-प्रतक पहत सेँ पुछिहि​ि, “की ओकर पत्नीक माय जीहित अहछ? ओ ओकरा कहिक, ज ओकर हपता आ माय दु िू जीहित अहछ। 8 ति​ि ओ अपि माय केँ हुिका िर् पठबाक आदश दिहि​ि। ओ कराहैत आ हि​िाप करै त बजिीह, हेँ मैिम, हम ओकरा बोर क' दिहुेँ । 9 राजकुमारक बटी उत्तर दिहि​ि, “ओकर मामिाक रहस्य हमरा सामि बताउ, हकएक तेँ हम अहाेँ सभ केँ स्वीकार करै त छी ज हम कोढग्रस्त छिहुेँ, मुदा यीशु मसीहक माय ि​िी मररयम हमरा ठीक कयिहि। 10 जेँ अहाेँ चाहैत छी ज अहाेँक बटी केँ पूिग अिस्िा म आहब जाय, तेँ ओकरा बतिहम िऽ जाउ आ यीशुक माय मररयमक हिर्य म पूछताछ करू। कारण हम कोिो प्रश्न िहह करै त छी मुदा अहाेँ अपि बटीक ठीक भिा पर बहुत आिखन्दत भ' क' घर आहब जायब। 11 ओ बजैत दरी उहठ कऽ अपि बटीक संर् हिधागररत स्िाि आ मररयम िर् र्िीह आ हुिका अपि बटीक मामिा सुिौिहि। 12 जि​ि संत मररयम हुिकर किा सुहि कऽ हुिका अपि पुत्र यीशुक शरीर केँ धोओि र्ि पाहि म सेँ कहि-महि दऽ दिहि​ि आ ओकरा अपि बटीक दह पर ढारर दिहि​ि। 13 तहहिा ओ हुिका प्रभु यीशुक एकटा िपट म सेँ एकटा कपडा दऽ कऽ कहिहि​ि, “ई िपटबिा कपडा िऽ कऽ जाबत-जि​ि अहाेँ शत्रु केँ दिब, ओकरा दिा हदयौक। ओ हुिका सभ केँ शाखन्तपूिगक हिदा क’ दिहि। 14 ओ सभ ओहह िर्र केँ छोहड घर घुरिाक बाद आ ओहह समय आहब र्ि ज शैताि केँ ओकरा पकडबाक आदहत छिैक, ओही िण ई शाहपत आत्मा ओकरा एकटा हिशाि अजर्रक आकार म प्रकट भिैक आ ओकरा दखि िडकी िरर र्िै . 15 माय ओकरा कहिहि​ि, “बटी, िहह िराउ। जाब तक ओ अहाेँ क िजदीक िहह आहब जायत ताब तक ओकरा छोहड हदयौक! ति​ि ओकरा िपटबाक कपडा दिा हदयौक, ज ि​िी मैरी हमरा सभ केँ दि छिीह, आ हम सभ घटिा दिब। 16 ति​ि शैताि भयािह अजर्र जकाेँ आहब कऽ ओहह िडकीक दह भय सेँ काेँहप उठि। 17 मुदा जहहिा ओ अपि माि पर आ आेँ खिक चारू कात कपडा पहहरर कऽ ओकरा दिौिहि, ति​िहह िपट म सेँ िौ आ जरै त कोयिा हिकहि र्ि आ अजर्र पर िहस पडि। 18 ओह! ई कतक पैघ चमत्कार छि ज जहहिा अजर्र प्रभु यीशुक िपटि कपडा दि​िक तहहिा आहर् हिकहि र्ि आ ओकर माि आ आेँ खि पर हछहडया र्ि। ओ जोर-जोर सेँ हचहचया उठि, “ह मररयमक पुत्र यीशु, अहाेँ सेँ हमरा की संबंध अहछ, हम अहाेँ सेँ कतय सेँ भार्ब?” 19 ओ बहुत िरा कऽ ओहह िडकी केँ छोहड कऽ चहि र्िाह। 20 ओ एहह हिपहत्त सेँ मुि भऽ र्िीह आ परमश् िरक स्तुहत आ धन्यिाद र्बैत छिाह आ हुिका संर् ज सभ चमत्कार करबा म उपखस्ित छिाह। अध्याय 14 1 ओतहह एकटा आओर स् त्री सहो रहैत छिीह, हजिकर बटा शैतािक िास छिहि। 2 यहूदा िामक ई बािक, जि​ि-जि​ि शैताि ओकरा पकहड िैत छि, ओहह म सभ िोक केँ काहट िबाक प्रिृहत्त रिैत छि। आ जेँ ओकरा िर् म दोसर हकयो िहह भटै त छिैक तऽ ओ अपि हाि आ आि अंर् केँ काहट िैत छि। 3 मुदा एहह दयिीय बािकक माय संत मररयम आ ओकर बटा यीशुक बात सुहि तुरन्त उहठ र्िीह आ अपि बटा केँ कोरा म ि’ क’ ि​िी मररयम िर् अि​िहि। 4 एहह बीच याकूब आ जोसस हशशु प्रभु यीशु केँ िऽ र्ि छिाह ज आि बच्चा सभक संर् उहचत समय म ि​िाइत रहहि। जि​ि ओ सभ बाहर हिकि​िाह तेँ ओ सभ आ प्रभु यीशु हुिका सभक संर् बैहस र्िाह। 5 ति​ि यीशुक दहहिा कात बैहस र्िाह। 6 जि​ि शैताि हुिका पर रोजािा जकाेँ काज कऽ रहि छि ति​ि ओ प्रभु यीशु केँ काहट िबाक ि​ि तैयार भऽ र्िाह।

7 ओ ई काज िहह कऽ सकिाह, त ेँ यीशु केँ दहहिा कात मारर दिहि​ि, जाहह सेँ ओ हचहचया उठिाह। 8 ओही िण शैताि ओहह िडका म सेँ बाहर हिकहि र्ि आ पार्ि कुकुर जकाेँ भाहर् र्ि। 9 ई बािक ज यीशु केँ मारर दिक आ जाहह म सेँ शैताि कुकुरक रूप म हिकहि र्ि, ओ छि यहूदा इस्कररयोती ज ओकरा यहूदी सभक हाि म धोिा दिक। 10 जाहह कात यहूदा हुिका मारर दिकहि, ओहह कात म यहूदी सभ भािा सेँ छदिहि। अध्याय 15 1 प्रभु यीशु जि​ि सात िर्गक छिाह ति​ि ओ एक हदि म अपि संर्ी आि िडका सभक संर् छिाह ज िर्भर् ओहहिा उम्रक छिाह। 2 ओ सभ ि​िाइत काि माहट केँ कतको आकार म बिबैत छिाह, जिा र्दहा, बैि, हचडै आ अन्य आकृहत। 3 एक-एकटा अपि काजक घमंि करै त अहछ आ बाकी सभ सेँ बसी काज करबाक प्रयास करै त अहछ। 4 ति​ि प्रभु यीशु िडका सभ केँ कहिहि​ि, “हम एहह आकृहत सभ केँ चिबाक आज्ञा दब।” 5 ओ सभ तुरत चहि र्िाह आ जि​ि यीशु हुिका सभ केँ घुरबाक आज्ञा दिहि​ि ति​ि ओ सभ घुरर र्िाह। 6 ओ हचडै -चुिमुिी आ र्ौरै याक आकृहत सहो बिौि छिाह, ज जि​ि ओ उडबाक आज्ञा दै त छिाह ति​ि उडै त छि आ जि​ि ठाढ रहबाक आज्ञा दै त छिाह ति​ि ठाढ भ’ जाइत छि। जेँ ओ हुिका सभ केँ भोजि-पाि करबैत छिाह तेँ ओ सभ िाइत-पीबै त छिाह। 7 जि​ि अंततुः िडका सभ चहि र्ि आ ई सभ बात अपि माता-हपता केँ कहिक तऽ ओकर सभक पूिगज ओकरा सभ केँ कहिहि​ि, “ह बच्चा सभ, ओकर संर्हत सेँ भहिष्यक ि​ि सािधाि रहू, हकएक तेँ ओ जादू र्र अहछ। ओकरासेँ परहज करू आ ओकरासेँ बचू , आ आबसेँ कहहयो ओकरा संर् िहह ि​िाइत रहू। 8 एक हदि प्रभु यीशु िडका सभक संर् ि​िाइत आ दौडै त-दौडै त एकटा रं र्क दोकाि िर् सेँ र्ुजरिाह, जकर िाम छि सिम। 9 हुिकर दोकाि म ओहह िर्रक िोकक बहुत रास कपडाक टु कडी छिहि, जकरा ओ सभ कतको रं र्क रं र्क हिजाइि बिौि छिाह। 10 ति​ि प्रभु यीशु रं र्क दोकाि म जा कऽ सभटा कपडा िऽ कऽ भट्ठी म फहक दिहि​ि। 11 जि​ि सिम घर आहब कऽ कपडा िूहट कऽ दि​िक तेँ ओ बहुत हल्ला मचाबय िार्ि आ प्रभु यीशु केँ िाेँटय िार्ि। 12 ह मररयमक पुत्र, अहाेँ हमरा संर् की किहुेँ? अहाेँ हमरा आ हमर पडोसी दु िू केँ चोट पहुेँचा दिहुेँ। सब अपि-अपि कपडाक इच्छा करै त छि ज उहचत रं र्क हो; मुदा .अहाेँ आहब क' सभ केँ िूहट ि​िहुेँ। 13 प्रभु यीशु उत्तर दिहि​ि, “हम हर कपडाक रं र् बदहि दब ज अहाेँ ज रं र् चाहैत छी। 14 ति​ि ओ तुरन्त भट्ठी म सेँ कपडा हिकािय िर्िाह आ सभ ओहह रं र् सेँ रं र्ि र्ि छि ज रं र् करय बिा चाहैत छि। 15 यहूदी सभ जि​ि ई आश्चयगजिक चमत्कार दखि परमश् िरक स्तुहत कयिहि। अध्याय 16 1 यूसुफ िर्र म जतय कतहु जाइत छिाह, प्रभु यीशु केँ अपिा संर् ि’ र्िाह, जतय हुिका फाटक, दू धक बाट, िा छि​िी िा बक्सा बिबाक काज करबाक ि​ि पठाओि र्ि छिहि। प्रभु यीशु जतय कतहु जाइत छिाह, हुिका संर् छिाह। 2 जि​ि-जि​ि यूसुफक काज म कोिो चीज रहैत छिहि, ज ओकरा िमहर िा छोट, िा चौडा िा संकीणग बिबैत छि, ति​ि प्रभु यीशु ओहह हदस अपि हाि बढबैत छिाह। 3 ति​ि ई ओहहिा भऽ र्ि जिा यूसुफ चाहैत छि। 4 त ेँ हुिका अपि हाि सेँ कोिो काज पूरा करबाक आिश्यकता िहह छिहि, कारण ओ अपि बढईक काज म बहुत कुशि िहह छिाह। 5 एक समय यरूशिमक राजा हुिका बजा कऽ कहिहि​ि, “हम चाहैत छी ज अहाेँ हमरा ओहहिा आकारक हसंहासि बिाबी जाहह ठाम हम आमतौर पर बैसि छी।”


6 यूसुफ आज्ञा माि​िाह आ तुरन्त काज शुरू कयिहि आ राजाक महि म दू साि धरर रहिाह। 7 जि​ि ओ ओकरा अपि जर्ह पर ठीक करबाक ि​ि अयिाह तऽ दि​िहि ज ओकरा हिधागररत िाप म दू -दू कात म दू टा स्पैिक कमी छिैक। 8 राजा ई दखि यूसुफ पर बहुत क्ोहधत भऽ र्िाह। 9 यूसुफ राजाक क्ोध सेँ िरा र्िाह आ भोजिक ि​ि हकछु िहह िऽ कऽ हबिा भोजि कि सुहत र्िाह। 10 ति​ि प्रभु यीशु हुिका सेँ पुछिहि​ि, “ओ की िरै त छि? 11 यूसुफ उत्तर दिहि​ि, “हकएक तेँ हम एहह दू िर्गक काज म अपि महिहत र्मा ि​ि छी।” 12 यीशु हुिका कहिहि​ि, “िहह िरू आ ि िीचाेँ फकि जाउ। 13 अहाेँ हसंहासिक एक कात पकहड हिअ, आ हम दोसर कात पकहड िब, आ हम सभ ओकरा ओकर उहचत आयाम पर पहुेँचा दब। 14 जि​ि यूसुफ प्रभु यीशुक कहिािुसार काज कऽ ि​िक आ हुिका सभ म सेँ एक-एकटा अपि कात िींच ि​िक ति​ि हसंहासि आज्ञा माि​िक आ ओहह ठामक उहचत आयाम पर पहुेँचा दि र्ि। 15 ई चमत्कार जि​ि ओहह ठाम ठाढ िोक सभ दखि आश्चयगचहकत भऽ र्िाह आ परमश् िरक स्तुहत कयिहि। 16 हसंहासि ओही िकडी सेँ बि​ि छि ज सुिमािक समय म छि, अिागत् हिहभन्न आकार आ आकृहत सेँ सजि िकडी। अध्याय 17 1 दोसर हदि प्रभु यीशु र्िी म हिकहि कऽ हकछु िडका सभ केँ दखि कऽ ि​िाइत-ि​िबाक ि​ि भेंट कयि र्िाह। 2 मुदा ओ सभ हुिका दखि िुका र्िाह आ हुिका सभ केँ ताकय ि​ि छोहड र्िाह। 3 प्रभु यीशु एकटा घरक फाटक पर आहब कऽ ठाढ हकछु महहिा सभ सेँ पुछिहि​ि, “िडका सभ कतऽ चहि र्ि?” 4 ओ सभ उत्तर दिहि​ि, “ओतय हकयो िहह छि। प्रभु यीशु कहिहि​ि, “अहाेँ सभ ज भट्ठी म दिैत छी स क छहि?” 5 ओ सभ उत्तर दिहि​ि, “ओ सभ तीि िर्गक बच्चा छि।” 6 ति​ि यीशु जोर-जोर सेँ हचहचया उठिाह आ कहिहि​ि, “ह बच्चा सभ, अपि चरबाह िर् एतऽ बाहर आहब जाउ। 7 ति​ि िडका सभ बच्चा जकाेँ बाहर हिकहि कऽ ओकरा चारू कात कूहद र्ि। ज स्त्रीर्ण सभ दखि ओ सभ बहुत आश्चयगचहकत भऽ काेँहप उठिीह। 8 ति​ि ओ सभ तुरन्त प्रभु यीशुक आराधिा कयिहि आ हुिका सेँ हि​िती कयिहि ज, “ह मररयमक पुत्र हमर प्रभु यीशु, अहाेँ सत्त इस्राएिक ओ िीक चरबाह छी! अपि दासी सभ पर दया करू, ज अहाेँक सोझाेँ ठाढ अहछ, ज संदह िहह करै त अहछ, मुदा ज अहाेँ, ह प्रभु, उद्धार करबाक ि​ि आयि छी, िहह हक हि​िाश करबाक ि​ि।” 9 तकर बाद जि​ि प्रभु यीशु कहिहि ज, इस्राएिक सि् ताि िोक सभक बीच इहियोहपयाक िोक जकाेँ अहछ। स्त्रीर्ण सभ बजिीह, “ह प्रभु, अहाेँ सभ हकछु जिैत छी, आ ि अहाेँ सेँ कोिो बात िुकाएि अहछ। मुदा आब हम सभ अहाेँ सेँ हि​िती करै त छी आ अहाेँक दया सेँ हि​िती करै त छी ज अहाेँ ओहह िडका सभ केँ ओकर पूिग अिस्िा म िापस आहि हदयौक। 10 ति​ि यीशु कहिहि​ि, “ह िडका सभ, एतय आहब जाउ, जाहह सेँ हम सभ जा कऽ ि​िाइत छी। आ तुरंत एहह महहिा सभक उपखस्िहत म बच्चा सभ केँ बदहि क' िडकाक आकार म िापस आहब र्ि. अध्याय 18 1 आदर मास म यीशु िडका सभ केँ एक ठाम जमा कयिहि आ ओकरा सभ केँ एिा राखि दिहि जिा ओ राजा होहि। 2 ओ सभ हुिका बैसबाक ि​ि अपि िस्त्र जमीि पर पसारर दिहि। फूिक मुकुट बिा कऽ माि पर राखि राजाक पहरदार बहि अपि दहहिा-बामा कात ठाढ भऽ र्िाह। 3 जेँ संयोर्िश हकयो ओहह ठाम सेँ र्ुजरर र्ि तऽ ओकरा जबरदस्ती पकहड कऽ कहिक ज, “एतय आहब राजाक आराधिा करू, जाहह सेँ अहाेँक यात्रा िीक भ’ सकय।” 4 एहह बीच जि​ि ई सभ काज भऽ रहि छि ति​ि हकछु िोक एकटा िडका केँ िऽ कऽ सोफा पर बैसा कऽ आहब र्िाह। 5 हकएक तेँ ई िडका अपि संर्ी सभक संर् िकडी बटोरबाक ि​ि पहाड पर र्ि छि, आ ओतय तीतरक िोंता भटि छि आ अंिा हिकािबाक ि​ि

हाि दिक, ति​ि ओकरा िोंतासेँ उछहि कऽ एकटा जहरीिा साेँप िं क मारर दिक। त ेँ ओ अपि संर्ी सभक मदहद ि​ि हचहचयाबय ि​ि बाध्य भ' र्िाह: ज सभ जि​ि ओ सभ आहब र्िाह ति​ि हुिका मृतक जकाेँ धरती पर पडि पाहब र्िाह। 6 तकर बाद ओकर पडोसी सभ आहब कऽ ओकरा िर्र म िऽ र्ि। 7 मुदा जि​ि ओ सभ प्रभु यीशु राजा जकाेँ बैसि छिाह आ आि िडका सभ हुिकर सिक जकाेँ हुिका चारू कात ठाढ छिाह तेँ िडका सभ जल्दी-जल्दी हुिका सेँ भेंट कयिहि, ज साेँप काहट ि​िक आ हुिकर पडोसी सभ केँ कहिहि​ि। आऊ राजा क श्रद्धांजहि अहपगत करू; 8 मुदा जि​ि ओ सभ दु िक कारण ेँ आबय सेँ मिा कऽ दिक तेँ िडका सभ ओकरा सभ केँ िींच ि​िक आ ओकरा सभ केँ अपि इच्छाक हिरुद्ध आबय ि​ि मजबूर कऽ दिक। 9 ओ सभ प्रभु यीशु िर् पहुेँचिा पर पुछिहि​ि, “ओ सभ ओहह बािक केँ कोि कारण ेँ िऽ र्ि? 10 जि​ि ओ सभ उत्तर दिहि​ि ज साेँप ओकरा काहट ि​िक तऽ प्रभु यीशु िडका सभ केँ कहिहि​ि, “चिू, ओहह साेँप केँ मारर हदयौक।” 11 मुदा जि​ि ओहह िडकाक माय-बाबू माफी चाहय चाहैत छिाह ज हुिकर बटा मृत्युक दं ि पर पडि छिहि। िडका सभ उत्तर दिक आ कहिक, “की अहाेँ सभ राजाक कहि बात िहह सुि​िहुेँ ?” जाउ, साेँपकेँ मारर हदयौक। की अहाेँ सभ हुिकर आज्ञा िहह मािब? 12 त ेँ ओ सभ चाहहि िा िहह चाहहि, फर सोफा केँ फर सेँ अि​िहि। 13 जि​ि ओ सभ िोंता म पहुेँचिाह ति​ि प्रभु यीशु िडका सभ केँ कहिहि​ि, “की ई साेँपक र्ुप्त स्िाि अहछ?” ओ सभ कहिक, “ई छि।” 14 ति​ि प्रभु यीशु साेँप केँ बजौिहि आ ओ तुरन्त बाहर आहब हुिकर अधीि भऽ र्िाह। हुिका कहिहि​ि, “जहब अहाेँ ओहह िडका म ज जहर िर्ा दि छी, तकरा जाउ, चूहस हिअ। 15 ति​ि साेँप ओहह बािक िर् रें र्ैत र्ि आ ओकर सभटा जहर फर सेँ िऽ र्ि। 16 ति​ि प्रभु यीशु साेँप केँ शाप दिहि​ि ज ओ तुरन्त फाहट र्ि आ मरर र्ि। 17 ओ ओहह बािक केँ हाि सेँ छु हब कऽ ओकरा पहहि सेँ ठीक भऽ र्ि। 18 जि​ि ओ कािय िर्िाह तेँ प्रभु यीशु कहिहि​ि, “कािब छोडू, हकएक तेँ अहाेँ हमर हशर्​् य बिब। 19 ई ओ किािी हसमोि छहि, हजिकर चचाग सुसमाचार म अहछ। अध्याय 19 1 दोसर हदि यूसुफ अपि पुत्र याकूब केँ िकडी जुटबाक ि​ि पठौिहि आ प्रभु यीशु हुिका संर् चहि र्िाह। 2 जि​ि ओ सभ ओहह ठाम पहुेँचिाह, जाहह ठाम याकूब ओकरा बटोरय िर्िाह, ति​ि दि​िहुेँ ज एकटा जहरीिा साेँप ओकरा काहट ि​िक, जाहह सेँ ओ कािय िार्ि आ हल्ला मचाबय िार्ि। 3 प्रभु यीशु हुिका एहह तरहक अिस्िा म दखि हुिका िर् आहब र्िाह आ ओहह स्िाि पर उडा दिहि जतय साेँप हुिका काहट ि​िकहि आ ओ तुरन्त ठीक भऽ र्िाह। 4 एक हदि प्रभु यीशु घरक चोटी पर ि​िाइत हकछु िडका सभक संर् छिाह, ति​ि एकटा िडका िहस पडि आ तुरन्त मरर र्ि। 5 जाहह पर आि िडका सभ भाहर् र्ि, प्रभु यीशु घरक चोटी पर असर्र रहह र्िाह। 6 ओहह बािकक पररजि सभ हुिका िर् आहब प्रभु यीशु केँ कहिहि​ि, “अहाेँ हमरा सभक बटा केँ घरक ऊपर सेँ िसा दिहुेँ।” 7 मुदा ओ सभ एहह बात केँ अस्वीकार करै त ओ सभ हचहचया उठि, “हमर सभक बटा मरर र्ि अहछ, आ ई ओ अहछ ज ओकरा मारर दिक।” 8 प्रभु यीशु हुिका सभ केँ उत्तर दिहि​ि, “हमरा पर कोिो एहि अपराधक आरोप िहह िर्ाउ, जकरा अहाेँ सभ हमरा दोर्ी िहह ठहरा सकैत छी, बि् हक हम सभ जा कऽ ओहह िडका सेँ पूहछ िी ज सत्य केँ सोझाेँ अित।” 9 ति​ि प्रभु यीशु मृत बािकक मािक ऊपर ठाढ भऽ कऽ जोर-जोर सेँ बजिाह, “जैिुिस, जि​िुस, अहाेँ केँ घरक ऊपर सेँ क िसा दिक?” 10 ति​ि मुदाग बािक उत्तर दिक, “अहाेँ हमरा िीचाेँ िहह फहक दिहुेँ, मुदा एहि आदमी फहक दिक।” 11 प्रभु यीशु जि​ि ओहह ठाम ठाढ िोक सभ केँ अपि बात पर ध्याि दबाक ि​ि कहिहि​ि, ति​ि ओहह चमत्कारक कारण ेँ उपखस्ित सभ िोक परमश् िरक स्तुहत कयिहि।


12 एक समय म ि​िी सेंट मैरी प्रभु यीशु केँ आज्ञा दि छिीह ज हुिका ि​ि इिार सेँ हकछु पाहि आिहि। 13 जि​ि ओ पाहि आिय र्िाह ति​ि घैि जि​ि पाहि भरर र्ि ति​ि तोहड दिक। 14 यीशु अपि िस्त्र पसारर कऽ फर सेँ पाहि जमा कऽ अपि माय िर् अि​िहि। 15 ओ एहह आश्चयगक बात दखि आश्चयगचहकत भऽ कऽ ई आ आि सभ ज हकछु दि​ि छिीह, तकरा अपि स्मरण म राखि दिहि। 16 एक हदि फर प्रभु यीशु हकछु िडका सभक संर् िदीक कात म छिाह आ ओ सभ छोट-छोट िािी सेँ िदी सेँ पाहि हिकाहि कऽ छोट-छोट माछक पोिरर बिौिहि। 17 मुदा प्रभु यीशु बारह टा र्ौरै या बिा कऽ अपि पोिरर चारू कात तीिटा कात राखि दि छिाह। 18 मुदा हिश्राम-हदि छि, ति​ि एकटा यहूदी हिािीक पुत्र हुिका सभ केँ ई सभ बिबैत दखि कहिहि​ि, “की अहाेँ सभ हिश्राम-हदि म एहह तरह ेँ माहटक आकृहत बिबैत छी?” ओ दौहड कऽ हुिका सभक िर् पहुेँहच कऽ हुिका सभक माछक पोिरर सभ तोहड दिहि। 19 मुदा प्रभु यीशु अपि बिाओि र्ौरै या सभ पर तािी बजा कऽ ओ सभ चहकैत भाहर् र्िाह। 20 अन्त म हिािीक पुत्र यीशुक माछक कुंि म आहब कऽ ओकरा िष्ट करबाक ि​ि पाहि ितम भऽ र्ि आ प्रभु यीशु हुिका कहिहि​ि। 21 जहहिा ई पाहि हि​िुप्त भऽ र्ि अहछ, तहहिा अहाेँक प्राण हि​िुप्त भऽ जायत। आ सम्प्रहत िडका मरर र्ि। 22 दोसर बर जि​ि प्रभु यीशु साेँझ म यूसुफक संर् घर आहब रहि छिाह ति​ि हुिका एकटा िडका सेँ भेंट भिहि ज हुिका पर एतक जोर सेँ दौडिहि ज ओ हुिका िीचाेँ फहक दिहि। 23 प्रभु यीशु हुिका सभ केँ कहिहि​ि, “जहहिा अहाेँ हमरा िीचाेँ फहक दिहुेँ, तिा अहाेँ िहस पडब आ ि कहहयो उठब।” 24 ओहह िण ओ बािक िहस पडि आ मरर र्ि। अध्याय 20 1 यरूशिम म जक्कआ िामक एक र्ोट सहो छिाह ज स्कूिक मास्टर छिाह। 2 ओ यूसुफ केँ कहिहि​ि, “यूसुफ, अहाेँ यीशु केँ हमरा िर् हकएक िहह पठा रहि छी ज ओ अपि पत्र सभ सीिय?” 3 यूसुफ सहमत भिाह, आ सेंट मैरी केँ कहिहि​ि। 4 ओ सभ हुिका ओहह माहिक िर् अि​िहि। ज ओकरा दखितहह ओकरा ि​ि एकटा िणगमािा हिखि दिक। 5 ओ ओकरा अिफ कहबाक ि​ि कहिहि​ि। जि​ि ओ अिफ कहिक ति​ि माहिक ओकरा बि कर उच्चारण करबाक आदश दिक। 6 ति​ि प्रभु यीशु हुिका कहिहि​ि, “पहहि हमरा अिफ अिरक अिग बताउ, ति​ि हम बिक उच्चारण करब।” 7 जि​ि माहिक हुिका कोडा मारबाक धमकी दिहि​ि ति​ि प्रभु यीशु हुिका अिफ आ बि अिरक अिग बुझिहि​ि। 8 संर्हह कोि-कोि अिरक सोझ आकृहत छि, कोि हतरछा आ कोि-कोि अिर म दोहरी आकृहत छि। जकर हबन्त्दु छिैक, आ जकर कोिो हबन्त्दु िहह छिैक; एक हचट्ठी दोसर हचट्ठीसेँ आर्ू हकएक चहि र्ि; आओर बहुत रास बात ओ ओकरा कहय िर्िाह, आ बुझाबय िर्िाह, ज माहिक स्वयं कहहयो िहह सुि​ि छिाह, आ ि कोिो पोिी म पढि छिाह. 9 प्रभु यीशु आर्ू माहिक केँ कहिहि​ि, “दिू ज हम अहाेँ केँ कोिा कहैत छी। ति​ि ओ िणगमािा क अंत धरर अिफ, बि, हर्मि, ि​ि​ि, आहद स्पष्ट आ स्पष्ट रूप ेँ कहय िर्िाह | 10 एहह बात पर माहिक एतक आश्चयगचहकत भ’ र्िाह ज ओ कहिहि, “हमरा हिश्वास अहछ ज ई िडका िूह सेँ पहहि जन्मि छि। 11 ओ यूसुफ हदस घुहम कऽ कहिहि​ि, “अहाेँ हमरा िर् एकटा एहि िडका केँ हसिाब’ ि​ि अि​िहुेँ ज कोिो र्ुरु सेँ बसी हिद्वाि अहछ।” 12 ओ संत मररयम केँ सहो कहिहि​ि, “अहाेँक एहह पुत्र केँ कोिो हशिाक आिश्यकता िहह अहछ।” 13 ति​ि ओ सभ हुिका एकटा हिद्वाि र्ुरु िर् अि​िहि, ज हुिका दखि कहिहि​ि, “अिफ” कहैत छहि। 14 ओ अिफ कहह कऽ माहिक हुिका बिक उच्चारण करऽ ि​ि कहिहि​ि। जकरा पर प्रभु यीशु उत्तर दिहि​ि, “पहहि हमरा अिफ अिरक अिग बताउ, ति​ि हम बिक उच्चारण करब।”

15 मुदा ई माहिक जि​ि हुिका कोडा मारबाक ि​ि हाि उठौिहि ति​ि हुिकर हाि मुरझा र्िहि आ ओ मरर र्िाह। 16 ति​ि यूसुफ संत मररयम केँ कहिहि​ि, “आब सेँ हम सभ हुिका घर सेँ बाहर िहह जाय दबहि। कारण ज ओकरा अप्रसन्न करै त अहछ, ओकरा मारि जाइत छै क। अध्याय 21 1 बारह िर्गक भिा पर ओ सभ हुिका यरूशिम म भोज म अि​िहि। भोज समाप्त भिा पर ओ सभ घुरर र्िाह। 2 मुदा प्रभु यीशु मि् हदर म िैद्य आ बूढ-पुराि आ इस्राएिक हिद्वाि िोक सभक बीच पाछू-पाछू रहिाह। हजिका ओ सीिबाक कतको प्रश्न प्रस्ताहित किहि, आ उत्तर सहो दिहि: 3 ओ हुिका सभ केँ पुछिहि​ि, “मसीह ककर पुत्र अहछ?” ओ सभ दाऊदक पुत्र उत्तर दिहि​ि। 4 ति​ि ओ कहिहि ज, ओ आत् मा म हुिका प्रभु हकएक कहैत छहि? जि​ि ओ कहैत छहि, “प्रभु हमर प्रभु केँ कहिहि​ि, जाबत हम अहाेँक शत्रु केँ अहाेँक पैरक ठहुि िहह बिा िब, ताबत धरर अहाेँ हमर दहहिा कात बैसि रहू।” 5 ति​ि एकटा प्रधाि रब्बी हुिका पुछिहि​ि, “की अहाेँ हकताब पढि छी?” 6 यीशु उत्तर दिहि​ि, “ओ दु िू पोिी आ हकताब म राि​ि बात सभ पहढ ि​ि छहि।” 7 ओ हुिका सभ केँ धमग-हियमक पुस्तक, उपदश आ हियम-हिधाि आ प्रिक् ता सभक पुस्तक म ज रहस्य अहछ स बुझिहि। एहि चीज ज कोिो प्राणीक मि िहह पहुेँहच सकि। 8 ति​ि कहिहि​ि ज रब्बी, हम एि​ि धरर एहि ज्ञाि कहहयो िहह दि​िहुेँ आ िहह सुि​ि छी! अहाेँ क की िर्ैत अहछ ज ओ िडका होयत! 9 जि​ि एकटा िर्ोिशास्त्री, ज उपखस्ित छिाह, प्रभु यीशु सेँ पुछिहि​ि, “की अहाेँ िर्ोि हिज्ञािक अध्ययि कि छी? 10 प्रभु यीशु उत्तर दिहि​ि आ हुिका र्ोिा आ आकाशक हपंिक संख्या आ ओकर हत्रकोणीय, चौकोर आ हिंर्क रूप सहो कहिहि​ि। ओकर प्रर्हतशीि आ प्रहतर्ामी र्हत; ओकर आकार आ कतको पूिागिुमाि; आ अन्य एहि बात ज मिुक्खक कारण कहहयो िहह िोजि छि। 11 हुिका सभ म भौहतक आ प्राकृहतक दशगि म िीक जकाेँ हिपुण दाशगहिक सहो छिाह, ज प्रभु यीशु सेँ पुछिहि ज, की अहाेँ भौहतक हिज्ञािक अध्ययि कि छी? 12 ओ उत्तर दिहि, आ ओकरा भौहतकी आ तवमीमांसा बुझिहि। 13 ओ सभ सहो ज प्रकृहतक सामि्ग य सेँ ऊपर आ िीचाेँ छि। 14 शरीरक शखि, ओकर हास्य आ ओकर प्रभाि सहो। 15 एकर सदस्यक संख्या आ हड्डी, िस, धमिी आ िस सभक संख्या सहो। 16 शरीरक अिक संहिधाि, र्रम आ शुष्क, ठं ढा आ िमर्र, आ ओकर प्रिृहत्त; 17 आत्मा कोिा शरीर पर संचाहित होइत छि। 18 एकर हिहभन्न संिदिा आ िमता की छि। 19 बजबाक सामर्थ्ग, क्ोध, इच्छा। 20 आ अंत म एकर रचिा आ हिघटिक तरीका। आ आि-आि बात, जकरा कोिो प्राणीक समझ कहहयो िहह पहुेँ चि छिैक। 21 ति​ि ओ दाशगहिक उहठ कऽ प्रभु यीशुक आराधिा कयिहि आ कहिहि​ि, “ह प्रभु यीशु, आब सेँ हम अहाेँक हशष्य आ सिक बिब।” 22 जि​ि ओ सभ एहह आ एहि बात सभ पर चचाग कऽ रहि छिाह ति​ि तीि हदि धरर यूसुफक संर् घुमैत-हफरै त ि​िी सेंट मैरी भीतर आहब र्िीह। 23 जि​ि ओ हुिका िाक्टर सभक बीच बैसि आ बारी-बारी सेँ हुिका सभ सेँ प्रश्न-प्रशंसा करै त आ उत्तर दै त दखि हुिका कहिहि​ि, “ह बौआ, अहाेँ हमरा सभक द्वारा एहि हकएक कयिहुेँ?” दिू, हम आ अहाेँक हपता अहाेँक िोज म बहुत कष्ट म छी। 24 ओ उत्तर दिहि​ि, “अहाेँ सभ हमरा हकएक तकिहुेँ?” की अहाेँ सभ िहह जिैत छिहुेँ ज हमरा अपि हपताक घर म िौकरी करबाक चाही? 25 मुदा ओ सभ हुिका सभ केँ कहि बात िहह बुझिहि। 26 ति​ि िाक्टर सभ मररयम सेँ पुछिहि​ि, “की ई हुिकर बटा अहछ?” जि​ि ओ कहिहि​ि, “ओ छिाह, ति​ि ओ सभ कहिहि​ि, “ह सुिी मररयम, ज एहि पुत्र पैदा कि छी।” 27 ति​ि यीशु हुिका सभक संर् िासरत घुरर र्िाह आ सभ बात म हुिका सभक आज्ञा मािैत रहिाह। 28 हुिकर माय ई सभ बात मोि म राखि ि​िहि।


29 प्रभु यीशु कद आ बुखद्ध म बहढ र्िाह आ परमश् िर आ मिुर्​् यक कृपा म बहढ र्िाह। अध्याय 22 1 एहह समय सेँ यीशु अपि चमत्कार आ र्ुप्त काज सभ केँ िुकाबऽ िर्िाह। 2 ओ तीसम िर्गक अंत धरर धमग-हियमक अध्ययि म अपिा केँ समहपगत कयिहि। 3 ओहह समय म हपता यरदि िदी म सािगजहिक रूप सेँ हुिकर माहिक बि​िाह आ स् िर्ग सेँ ई आिाज पठौिहि ज, “ई हमर हप्रय पुत्र छहि, हजिका पर हम प्रसन्न छी। 4 पहित्र आत्मा कबूतरक रूप म सहो उपखस्ित रहब। 5 हम सभ हुिका सभक आदरपूिगक आराधिा करै त छी, हकएक तेँ ओ हमरा सभ केँ हमरा सभक प्राण आ जीि​ि दऽ दिहि आ हमरा सभ केँ मायक कोखि सेँ अि​िहि। 6 ओ हमरा सभक ि​ि मिुिक शरीर िऽ कऽ हमरा सभ केँ मुि कऽ दिहि, जाहह सेँ ओ हमरा सभ केँ अिन्त दयाक संर् र्िा िर्ा सकय आ हमरा सभ पर अपि मुि, पैघ, प्रचुर कृपा आ भिाई दिाबहि। 7 आब सेँ अिन्त काि धरर हुिका महहमा, प्रशंसा, सामि्ग य आ प्रभुव होअय, आमीि।


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