Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2016 = 6.17, www.srjis.com UGC Approved Sr. No.49366, MAR–APR, 2018, VOL- 5/44
स्वतंत्र भारत के नीततगत दस्तावेजों में वैकतपिक तिक्षा के आयाम , ,
, महात्मा गाांधी अतां रााष्ट्रीय हहदां ी हिश्वहिद्यालय ,
िधाा , महाराष्ट्र - 442001 Email id- atulkumargupta00@gmail.com
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प्रस्तावना – वैकल्पिक ल्िक्षा कोइ काययक्रम नहीं है, कोइ प्रल्क्रया नहीं है
र ना हक कोइ काययल्वल्ध है बल्पक यह एक
ऐसा दृल्िकोण है जो आस ल्वश्वास िर ल्िका है ल्क ल्िल्क्षत होने के कइ मागय है ल्जसमें व्यल्ि को ईसके वातावरण र समदु ाय से जोड़ कर ल्सखाया जा सकता है | आस प्रकार की ल्िक्षा में हम प्रत्येक व्यल्ि के ल्िए ऄिग प्रकार के वातावरण
र संरचनाओ ं को प्रदान करते हैं ल्जसमें प्रत्येक व्यल्ि ऄिने अि को सहज महससू करें
बढ़ सके | वैकल्पिक ल्िक्षा में सभक के ल्िए एकसमान ियायवरण
र िाठ्यचयाय नहीं होतक है
मानता है ल्क माता-ल्िता- र बच्चे यह ल्नणयय िेने में सक्षम है की वे ल्कस प्रकार
र अगे
र यह, यह भक
र कै से सकख सकते हैं ? यह
ल्वद्यािय ऄल्धकतर छात्रों को ल्बना फे ि करने की रणनकल्त को ऄिनाते हैं ल्जससे छात्र ल्वल्भन्न रूिों में ल्बना ल्कसक भय के ज्ञान ऄल्जयत कर सकते हैं | आस प्रकार की ल्िक्षा में ल्कसक प्रकार की कोइ बाध्यता नहीं होतक है यह Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
Atul Kumar 9823 (Pg. 9822-9833)
िणू रू य िेण बािक के ल्न्ित होतक है, बािक जब चाहे जो ल्वषय िढ़ सकता है, जब चाहे ऄिना ल्िल्फन कर सकता है | िेल्कन आन सब कायों में ऄध्यािक ऄनि ु ासन िर ल्विेष ध्यान देता है | आसमें ऄध्यािक आस प्रकार का वातावरण तैयार करता है की बािक स्वयं सकखने के ल्िये तत्िर होता है | यह सक ं पिना ईस समय
र ऄल्धक
ल्वकल्सत हुइ जब ऄमेररका में बहुत से नवयवु क छात्र ऄिनक दसवीं तक की ल्वद्याियक ल्िक्षा को िरू ा ल्कए ल्बना हक ऄिनक िढ़ाइ छोड़ दे रहे थे
र यह काययक्रम या दृल्िकोण धकरे –धकरे वतयमान समय तक ल्वकल्सत हो रहा है |
वैकल्पिक ल्िक्षा का यह दृल्िकोण प्राथल्मक स्तर, माध्यल्मक स्तर तथा ईच्च माध्यल्मक स्तर की ल्िक्षा प्रणािक िर हक िागू होता है | वैकल्पिक ल्वद्यािय के कइ मॉडि या प्रकार हो सकते है | सभक वैकल्पिक ल्वद्याियों की ऄिनक ऄिग िहचान र ल्विेषता होतक है | िेल्कन कुछ सामान्य ल्विेषताएं हैं जो िगभग सभक वैकल्पिक ल्वद्याियों में िायें जाते है:a) प्राथल्मक तथा माध्यल्मक स्तर की ल्िक्षा मातृभाषा में दक जाये | b) प्रत्येक बािक िर ऄल्धक व्यल्िगत दृल्िकोण की वह सकख रहा है की नहीं | c) ल्वल्भन्न सामाल्जक – अल्थयक ल्स्थल्त तथा ल्वल्भन्न क्षमताओ ं के बच्चों के एकीकरण के साथ ल्िक्षा | d) ल्िक्षा को ल्वद्यािय के बाहर के वास्तल्वक जकवन से जोड़कर सकखाना ल्जससे ईनमें सामाल्जकता का ल्वकास हो | e) ल्वल्भन्न ल्वषयों को एकीकृ त करके िढ़ाना ल्जससे बािक ऄच्छक तरह समझ सकें | f) ऐसे ऄध्यािकों का चयन जो स्वमं में सृजनिकि हों तथा सृजनिकिता को प्रोत्साल्हत करतें हों | g) ऄध्यािक – छात्र का कम ऄनिु ात | h) िरकक्षा से भयमि ु प्रणािक | i) आस प्रकार के ल्वद्याियों में ऄध्यािक, छात्र, सिोिय स्िाफ, प्रिासल्नक ऄल्धकारक, बच्चों के माता – ल्िता सभक ल्मिकर नकल्तयों के ल्नमायण में सहभाग करतें है | j) ल्वद्याल्थयओ ं की ल्जज्ञासा को बढ़ावा देने के ल्िए करके सकखना, खेि ल्वल्ध, मांिेसरक ल्वल्ध से िढ़ाना | k) बािकों को रिने िर कम जोर देना | Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
Atul Kumar 9824 (Pg. 9822-9833)
हमारे देि भारतवषय में भक बािकों को ल्कस प्रकार ऄच्छक ल्िक्षा दक जाये | आस सम्बन्ध में भक समय – समय िर ऄनेक अयोगों / सल्मल्तयों / नकल्तयों का गठन ल्कया गया तथा ईसकी सस्ं तल्ु तयों को िागू ल्कया गया | आन अयोगों व सस्ं तल्ु तयों को हम दो भागों में बााँि सकते है:1. स्वतंत्रता िवू य की अयोग व संस्तल्ु तयां 2. स्वतंत्रता के िश्चात के अयोग एवं संस्तल्ु तयां स्वतंत्रता के िश्चात के आयोग एवं संस्तुततयां क्रम संख्या 1.
2.
3. 4. 5. 6.
अयोग का नाम
ऄध्यक्ष का नाम
तवश्वतवद्यालय तिक्षा डॉ.सवयिपिक आयोग राधाकृ ष्णन (राधाकृ ष्णनअयोग) माध्यतमक तिक्षा डॉ.िक्ष्मक स्वामक आयोग मदु ाल्ियर (मदु ाल्ियर अयोग) राष्ट्रीय तिक्षा आयोग डॉ.डक.एस.कोठारक (कोठारक अयोग ) राष्ट्रीय तिक्षा नीतत, संसद सदस्यों की 1968 सल्मल्त राष्ट्रीय तिक्षा नीतत, संसद सदस्यों की 1986 सल्मल्त तिक्षा तिना िोझ के प्रो.यििाि (LearningWithout
अयोग के गठन का वषय 4 नवम्बर 1948
अयोग के ररिोिय देने का वषय 25 ऄगस्त 1949
23 ल्सतम्बर 1952
29 ऄगस्त 1953
14 जि ु ाइ 1964 5 ऄप्रैि 1967 मइ 1986
29 जनू 1966
माचय 1992
15 जि ु ाइ 1993
14 एवं 19 जि ु ाइ 2004
2005
24 जि ु ाइ 1968 नवम्बर 1986
Burden)
7.
राष्ट्रीय िाठ्यचयाा की रूिरेखा-2005 (N.C.F. 2005)
प्रो.यििाि
(स्रोत –िाि बक.अर.भारतकय ल्िक्षा का ल्वकास एवं ईसकी समस्याएं , 2012 -13 एवं आन्िरनेि )
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Atul Kumar 9825 (Pg. 9822-9833)
हमारे देि भारत के स्वतंत्र होने के िगभग 1 वषय िश्चात 4 नवम्िर 1948 को डॉ.सवािपली राधाकृष्ट्णन की ऄध्यक्षता में ‘तवश्वतवद्यालय तिक्षा आयोग’ (राधाकृ ष्णन कमकिन) 1948- 49 को गल्ठत ल्कया गया | यह स्वतत्रं भारत का िहिा ल्िक्षा अयोग था | आस अयोग ने तत्कािकन भारतकय ल्वश्वल्वद्याियों की ल्स्थल्त ईनकी समस्याओ ं र ईन समस्याओ ं को दरू करने के संबंध में ऄिने सझु ाव 1949 में ल्दए | आस अयोग का मख्ु य ईद्देश्य ईच्च ल्िक्षा के स्तर को उिर ईठाने के ल्िए बनाया गया था | ईच्च ल्िक्षा के सधु ार हेतु ईद्देश्य, िाठ्यक्रमों, ईच्च ल्िक्षा में भाषा, ऄनि ु ासन, ल्कस प्रकार ल्िक्षकों की ल्नयल्ु ि हो, वेतनमान, तकनककी ल्िक्षा, ग्रामकण ल्िक्षा तथा ल्वश्वल्वद्यािय के प्रल्त सकारात्मक रवैया को दिायया तथा ईस िर सधु ार के ल्िए बहुत हक संदु र ररिोिय दक | ल्कंतु ईनके सझु ाव प्राथल्मक एवं माध्यल्मक स्तर के बािकों के ल्िए ल्िक्षा के प्रल्त नहीं थक | ऄतः आस अधार िर हम कह सकते हैं ल्क वैकल्पिक ल्िक्षा की जो प्राथल्मक ल्विेषतताओ ं को बताया गया है | वो आस अयोग की संस्तल्ु तयों में नहीं देखने को ल्मिा | आस अयोग की ल्सफाररिों के बाद 1952-53 में ‘माध्यतमक तिक्षा आयोग’ (मुदातलयर आयोग) ल्जसके ऄध्यक्ष तत्कािकन मिास ल्वश्वल्वद्यािय के कुििल्त डॉ.लक्ष्मण स्वामी मुदातलयर थे | माध्यल्मक ल्िक्षा अयोग के सझु ाव में वैकल्पिक ल्िक्षा के ल्नम्नल्िल्खत दृल्िकोण देखने को ल्मिता है :1. ईन्होंने कहा ल्क छात्रों के व्यल्ित्व ल्वकास से तात्ियय छात्रों की मानल्सक, सामाल्जक, सास्ं कृ ल्तक, नैल्तक एवं चाररल्त्रक ल्वकास से है | 2. अयोग ने िाठ्यचयाय ल्नमायण के ल्िए ईियि ु ल्सद्ांत बताएं िहिा वास्ततवकता, व्यािकता, उियोतगता और सहसंिंध िर ल्वकल्सत करने का सझु ाव ल्दया तथा माध्यल्मक स्तर की िाठ्यचयाय में सह-िाठ्यचारक ल्क्रयाओ ं को ऄल्नवायय करने का सझु ाव भक ल्दया | 3. िाठ्यचयाय वास्तल्वक जकवन से संबंल्धत हो ल्जसे िरू ा कर छात्र समाज में सम्मान िवू क य रह सके | 4. ईन्होंने मातृभाषा में ल्िक्षा देने की बात कहक तथा ऄग्रं ेजक माध्यम से ल्िक्षा देने की बात कहक | 5. ईन्होंने कइ ल्िपि जैसे ल्सिाइ, बनु ाइ, काष्ठ - किा, धातु का काम, बागवानक, ल्सिाइ, कढ़ाइ, मिु ण मॉडि बनाने का काम अल्द में ल्कसक एक ल्िपि को िढ़ाने की बात कहक है |
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6. िरकक्षा प्रणािक में सधु ार के ल्िए के वि ल्नबधं ात्मक प्रश्न ना िछ ू े जाएं | यल्द िछ ू े जाएं तो ल्वचार अधाररत प्रश्नों को िछ ू ा जाए ल्जससे बािकों में सोचने की िल्ि का ल्वकास हो तथा िरकक्षा में वस्तल्ु नष्ठ प्रश्नों को भक सल्म्मल्ित ल्कया जाए | 7. ऄध्यािकों को प्रल्िल्क्षत ल्कया जाए यह सभक सुझाव वैकल्पिक ल्िक्षा के अयाम को कुछ हद तक िरू ा करते है | राष्ट्रीय तिक्षा आयोग 1964-66 (कोठारी कमीिन) भारत सरकार ने ल्िक्षा के िनु गयठन तथा देि भर के ल्िए समान ल्िक्षा नकल्त का ल्नधायरण करने के ल्िए 14 जुलाई 1964 को डी. डी. एस. कोठारी की ऄध्यक्षता में 17 सदस्य ‘राष्ट्रीय तिक्षा आयोग’ का गठन ल्कया आस अयोग के ऄध्यक्ष के नाम िर आसे ‘कोठारी आयोग’ भक कहते हैं | अयोग ने ऄिने प्रल्तवेदन का िभु ारंभ हक आस वाक्य से ल्कया है ल्क, ‚ हमारे देि के भतवष्ट्य का तनमााण उसकी कक्षाओ ं में हो रहा है |‛
अयोग को राष्रकय स्तर िर प्राथल्मक, माध्यल्मक ल्वद्यािय, ल्वश्वल्वश्वल्वद्यािय के ल्िक्षा सबं धं क सधु ार एवं ल्वस्तार हेतु कायय सौंिा गया जो ऄत्यतं व्यािक था | ल्कंतु ईनमें प्राथल्मक
र माध्यल्मक स्तर िर जो सझु ाव थे |
ईनमें वैकल्पिक ल्िक्षा के ल्नम्नल्िल्खत ल्विेषताएं समाल्हत हैं :1. सभक स्तरों की ल्िक्षा की िाठ्यचयाय में अिस में संबंध स्थाल्ित ल्कया जाए तथा ल्वद्याियक िाठ्यचयाय का ल्नमायण बेल्सक ल्िक्षा के ल्सद्ांतों (ईत्िादन एवं सहसम्बन्ध अल्द ) के अधार िर ल्कया जाये | िरन्तु ल्कसक भक स्तर की ल्िक्षा को बेल्सक ल्िक्षा ना कहा जाये | 2. जो प्राथल्मक ल्िक्षा के बाद िढ़ने की ल्स्थल्त में नहीं है ईन्हें प्राथल्मक स्तर िर हक ल्कसक हस्त कायय में ल्निणु ल्कया जाए | 3. ल्जन बच्चों को प्राथल्मक ल्िक्षा के बाद िणू क य ाल्िक ईच्च प्राथल्मक ल्िक्षा सि ु भ न हो ईसके ल्िए ऄपिकाल्िक ल्िक्षा की व्यवस्था की जाए | 4. ल्िक्षण ल्वल्धयों में सधु ार ल्कया जाए तथा ल्वल्भन्न ल्िक्षण ल्वल्धयों का प्रयोग ल्कया जाए | 5. आस अयोग ने प्राथल्मक स्तर की ल्िक्षा मातृभाषा में देने की बात कहक | Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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6. ल्वद्याियों में ऐसे काययक्रमों का अयोजन ल्कया जाय ल्जनसे बच्चों में िोकतन्त्रकय मपू यों में अस्था ईत्िन्न हों
ए वे तदनक ु ू ि व्यवहार करें |
7. छात्रों में स्वतत्रं ल्चन्तन
र ल्नणयय िेने की िल्ि का ल्वकास ल्कया जाय |
राष्ट्रीय तिक्षा नीतत 1968 राष्रकय ल्िक्षा नकल्त 1968 मख्ु य रूि से कोठारक अयोग की संस्तल्ु तयों की जांच के ल्िए तथा एक नए ड्राफ्ि को बनाने के ल्िए ल्कया गया | ल्कंतु ईसमें सामान्यत: कुछ नयक बातों को जोड़कर कोठारक अयोग के सझु ाव का समथयन ल्कया गया िररणाम स्वरुि आस राष्रकय ल्िक्षा नकल्त में भक वैकल्पिक ल्िक्षा की ल्विेषताएं ईसक प्रकार दृल्ििात होते हैं जो कोठारक अयोग में हैं | राष्ट्रीय तिक्षा नीतत 1986 राष्रकय ल्िक्षा नकल्त 1986 की घोषणा से िहिे तत्कालीन युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तत्कािकन ल्िक्षा का सवेक्षण तिक्षा की चुनौती: नीतत संिंधी िररप्रेक्ष्य (Challenge of Education : A policy perspective) के नाम से करवाया | आस दस्तावेज में भारतकय ल्िक्षा की 1951 से 1983 तक की यात्रा की प्रगल्त यात्रा का साल्ं ख्यकी ल्ववरण, ईसकी ईििल्धधयों एवं ऄसफिताओ ं का ल्ववरण तथा गणु - दोषों का भक ल्ववरण प्रस्ततु ल्कया तथा जनता के हाथों में िहुचं ाया तथा आस िर देिव्यािक बहस िरू ु की | सभक प्रांतों के ल्भन्न -ल्भन्न क्षेत्रों से सझु ाव प्राप्त हुए | कें िकय सरकार ने आन सझु ावों के अधार िर एक नइ ल्िक्षा नकल्त तैयार की
र ईसे संसद
के बजि ऄल्धवेिन 1986 में प्रस्ततु ल्कया संसद में िास कराने के बाद आसे मइ 1986 में प्रकाल्ित ल्कया | यह भारत की ऐसक िहिक राष्रकय ल्िक्षा नकल्त है ल्जसमें नकल्त के साथ-साथ ईसके ल्क्रयान्वयन िर िरू क योजना भक प्रस्ततु की गइ थक साथ हक साथ ईसके ल्िए ियायप्त संसाधन जिु ाए गये है | राष्रकय ल्िक्षा नकल्त 1986 का दस्तावेज 12 भागों में ल्वभाल्जत है | नवबं र 1986 में आसकी कायययोजना (Plan of Action) नामक दस्तावेज प्रकाल्ित ल्कया गया | यह कायय योजना 24 भागों में ल्वभाल्जत है |
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राष्रकय ल्िक्षा नकल्त 1986 के भाग-2 में तिक्षा का सार और उसकी भूतमका में यह कहा गया है ल्क ‚तिक्षा वतामान तथा भतवष्ट्य के तनमााण काअनुिम साधन है ‛ | आसक ल्सद्ांत को राष्रकय ल्िक्षा नकल्त के ल्नमायण की धरु क माना गया है | आसमें वैकल्पिक ल्िक्षा के ल्नम्नल्िल्खत अयाम या ल्विेषताएं देखने को ल्मिते हैं : राष्ट्रीय तिक्षा नीतत 1986 के भाग िांच ‘तवतभन्न स्तरों िर तिक्षा का िुनगाठन’ में ल्ििओ ु ं की देखभाि
र ल्िक्षा िर ल्विेष ध्यान ल्दया जाएगा
र जहां भक संभव हो ‘समेतकत िाल तवकास सेवा
कायाक्रम’ के साथ जोड़ा जाएगा | प्राथल्मक ल्िक्षा के सावयजनककरण के संदभय में ल्ििओ ु ं की देखभाि के कें ि खोिे जाएगं े | ल्ििओ ु ं के देखभाि
र प्राथल्मक ल्िक्षा के काययक्रमों को िरू क तरह समेल्कत ल्कया
जाएगा ताल्क प्राथल्मक ल्िक्षा को बढ़ावा ल्मि सके | ऑिरेिन ब्लैक िोडा: ल्कसक भक मौसम में काम देने िायक कम से कम 2 बड़े कमरे , अवश्यक ल्खिौने, धिैकबोडय, नक़्िे, चािय
र ऄन्य ल्िक्षण सामग्रक िाल्मि हैं | हर स्कूि में कम से कम दो ल्िक्षक की
व्यवस्था की जाएगक | यह िरू े देि की प्राथल्मक ल्िक्षा को सुधारने के ल्िए ल्कया जाएगा | ऄनौिचाररक ल्िक्षा के संदभय में आसमें कहा गया है ल्क ऐसे बच्चे जो बकच में स्कूि छोड़ गए हैं या जो ऐसे स्थानों िर रहते हैं जहां स्कूि नहीं हैं जो काम में िगे हैं जा सकतक | आन सब के ल्िए एक ल्विाि
र वे िड़ल्कयां जो ल्दन के स्कूि में िरू े समय नहीं
र व्यवल्स्थत ऄनौिचाररक ल्िक्षा काययक्रम चिाया जाएगा |
ऄनौिचाररक ल्िक्षा कें िों को चिाने का ऄल्धकतर कायय स्वयं सेवक सस्ं थाएं
र िच ं ायतक राज सस्ं थाएं
करें गक आस कायय के ल्िए आन संस्थाओ ं को ियायप्त धन समय िर ल्दया जाएगा | आस समय ल्िक्षा की िचाररक िद्ल्त
र देि की समृल्द् सास्ं कृ ल्तक िरंिराओ ं के बकच एक खाइ है ल्जसे
िािना अवश्यक है सस्ं कृ ल्त ल्वहकनता, ऄमानवकयता िर बचना होगा | ल्िक्षा की िाठ्यचयाय
र ऄजनबककरण (एल्िएनेिन) के भाव से हर कीमत
र प्रल्क्रयाओ ं को सांस्कृ ल्तक ल्वषय वस्तु के समावेि द्वारा ऄल्धक
से ऄल्धक रूिों में समृद् ल्कया जाएगा | सास्ं कृ ल्तक िरंिरा में ल्निणु व्यल्ियों को ईनके िास
िचाररक
िैल्क्षक ईिाल्ध ना होने िर भक ल्िक्षा में सांस्कृ ल्तक तत्वों का योगदान करने के ल्िए अमल्ं त्रत ल्कया जाएगा आस काम में ल्िल्खत
र मौल्खक दोनों िरंिराएं िाल्मि होंगक |
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िरकक्षा में आस प्रकार सधु ार ल्कया जाएगा ल्क मपू यांकन की एक वैध वह सकखने
र ल्वश्वसनकय प्रल्क्रया ईभर सके
र
र ल्सखाने की प्रल्क्रया के एक सिि साधन के रूि में काम अ सके , ल्जसमें ल्नम्न बातें
समाल्हत हैं :i.
रिने िर से जोर को हिाना |
ii.
ऐसक सतत
iii.
र संिणू य मपू यांकन प्रल्क्रया का ल्वकास करना ल्जसमें ल्िक्षा के िास्त्रकय
र िाश्त्रोत्तर
िहिू समाल्वि हो जाएं
र जो ल्िक्षण की िरू क ऄवल्ध में व्याप्त रहे |
ऄध्यािकों ल्वद्याल्थययों
र माता-ल्िता के द्वारा मपू यांकन की प्रल्क्रया का प्रभावक ईियोग ल्कया जाए |
सरकार
र समाज को ऐसक िररल्स्थल्तयां बनानक चाल्हए | ल्जससे ऄध्यािकों को ल्नमायण
र सृजन की
ओर बढ़ने की प्रेरणा ल्मिे | ऄध्यािकों को आस बात की अजादक होनक चाल्हए ल्क वह नए प्रयोग कर सके
र संप्रेषण की ईियि ु ल्वल्धयां
र ऄिने समदु ाय की समस्याओ ं र क्षमताओ ं के ऄनरू ु ि नए
ईिाय ल्नकाि सके |
राष्रकय ल्िक्षा नकल्त के बाद हम गणु वत्तािरक ल्िक्षा की बात करने िगे
र धकरे – धकरे हमारे छोिे बच्चों के
बस्तों का भार आतना ऄल्धक हो गया ल्क हमें 90 के दिक की िरुु अत में सन 1992 में आस समस्या के ल्वश्लेषण के ल्िए मानव ससं ाधन ल्वकास मत्रं ािय (MHRD) को एक सल्मल्त की ल्नयल्ु ि करनक िड़क | ल्जसका नाम था ‘तिक्षा तिना िोझ के ’ (LEARNING WITHOUT BURDEN) | आस सल्मल्त का ऄध्यक्ष प्रो.यििाल को बनाया गया | आस साल्मल्त ने ऄिनक ररिोिय 15 जुलाई 1993 को सरकार को सौंि दक | बाद में यह सल्मल्त ऄिने ऄध्यक्ष के नाम िर ‘यििाल सतमतत’ के नाम से जाना जाता है | यह ररिोिय िाचं भागों में बिक है ल्जसमे ईन्होनें यह बताया है की हमारे बच्चों के बस्ते का भार क्याँू आतना ऄल्धक हो गया है ?, ईसके कारणों में बताया की आसके ल्िए ल्कस प्रकार बच्चों के माता – ल्िता, स्कूि, ऄध्यािक, ल्वद्यािय तथा सरकार ल्जम्मेदार है | आस ररिोिय में वैकल्पिक ल्िक्षा के ल्नम्न अयाम िररिल्क्षत होतें है : गणु वत्तािरक ल्िक्षा ल्सफय मोिक - मोिक ल्कताबें
र िरकक्षा के भय से हक नहीं अतक हैं बल्पक ऄच्छे
ल्िक्षकों से अतक हैं | Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
Atul Kumar 9830 (Pg. 9822-9833)
प्राथल्मक स्तर िर िढाइ या ल्नदेि का माध्यम के वि मातृभाषा होनक चाल्हए | व्यल्िगत ईििल्धधयों के अधार बच्चों को जो इनाम दक जातक है ऐसक प्रल्तयोल्गताओ ं को समाप्त कर देनक चाल्हए | क्योल्कं वो बच्चों को मनोरंजक ल्िक्षा से वल्ं चत कर देते है | िाठ्यचयाय
र िाठ्यिस्ु तकों के ल्नमायण की प्रल्क्रया को
को जोड़कर ईसके ऄनरू ु ि िाठ्यचयाय
र ल्वकल्सत करना चाल्हए | आसमें क्षेत्रकयता
र िाठ्यिस्ु तकों का ल्नमायण करना चाल्हए | ल्जससे िाठ्यचयाय
र िाठ्यिस्ु तक बच्चों को नकरस या बोल्झि न िगे | िाठ्यचयाय
र िाठ्यिस्ु तकों के ल्नमायण में स्कूि के ऄध्यािकों
र प्रिासन को सहयोग करना चल्हये |
ज्यादातर ल्वद्याियों में िैल्क्षक वातावरण का ऄभाव होता है | ईनमे ियायप्त समय, कमयचारक, भवन, र प्रयोगिािायें अल्द की कमक होतक है | जबल्क ल्िक्षा में नए प्रयोग करने के ल्िए याह अवश्यक है ल्जससे बािक समझकर सकखतें है ईन्हें रिना नहीं िड़ता है | ऄच्छक ल्िक्षा बच्चों के स्वभाव को समझने से अतक है |
ल्कंतु आसके बावजदू आन प्रश्नों का हि नहीं ल्नकिा गइ ल्कंतु आसके बाद भक िरकक्षा क्या िढ़ाया जाए
र िनु ः सन 2000 में िाठ्यचयाय की रूिरे खा की समकक्षा की
र िाठ्यचयाय के ल्ववाद हि न हुए | आन्हीं सभक ल्ववादों के बकच हमारे बच्चों को
र कै से िढ़ाया जाए ? आस सदं भय में एन.सक.इ.अर.िक. ने ‘राष्ट्रीय िाठ्यचयाा की रूिरेखा -
2005’ प्रस्ततु की ल्जसमें यह िररभाल्षत ल्कया गया है ल्क हमें बच्चों को क्या, कब
र कै से िढ़ाना है ? आस
संदभय में एक व्यािक दृल्िकोण को हमारे समक्ष प्रस्ततु ल्कया | एन. सी. एफ. 2005, एक सामान्य िररचय राष्रकय िैल्क्षक ऄनसु धं ान
र प्रल्िक्षण िररषद (NCERT) की काययकाररणक ने 14 एवं 19 जि ु ाइ
2004 की बैठकों में राष्रकय िाठ्यचयाय को संिोल्धत करने का ल्नणयय ल्िया | आस काययकाररणक के अध्यक्ष प्रोफे सर यििाल थे | आसमें एक राष्रकय संचािन सल्मल्त तथा 21 राष्रकय फोकस समहू का गठन ल्कया गया | आस सल्मल्तयों में ईच्च ल्िक्षा संस्थानों के प्रल्तल्नल्ध, राष्रकय िैल्क्षक ऄनुसन्धान
र ल्िक्षा िररषद के ऄकादल्मक
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सदस्य, स्कूिों के ल्िक्षकों िहरक
र गैर सरकारक सगं ठनों के प्रल्तल्नल्ध सदस्यों के रूि में िाल्मि हुए | आसमें देि के
र ग्रामकण सभक जगहों से प्रल्तल्नल्धयों के ल्वचार को सल्म्मल्ित करने का प्रयास ल्कया गया | िहरक ल्िक्षा
सस्ं थानों जैसे मैसरू , ऄजमेर, भनु ेश्वर, भोिाि
र ल्ििागं ल्जिा में ल्स्थत िररषद के क्षेत्रकय ल्िक्षा सस्ं थानों में
क्षेत्रकय संगोल्ष्ठयों का अयोजन ल्कया गया | वहीं ग्रामकण ल्िक्षकों से सझु ाव िेने के ल्िए एक राष्रकय सम्मेिन का अयोजन ल्कया गया तथा राष्रकय एवं क्षेत्रकय समाचार ित्रों में ल्वज्ञािन ल्दए गए ल्जससे िोग नइ िाठ्यचयाय के बारे में ऄिनक राय दें सकें | एन.सी.एफ.2005 में यह माना गया है ल्क हमारे िैल्क्षक ईद्देश्यों
र ल्िक्षा की गणु वत्ता में भारक ल्वकृ ल्त
अ गइ है आस ल्वकृ ल्त को दरुु स्त करने के ल्िए िाठ्यचयाय के आस दस्तावेज में िाठ्यचयाय ल्नमायण के िांच ल्नदेिक ल्सद्ांतों का प्रस्ताव रखा है :1. ज्ञान को स्कूि के बाहर के जकवन से जोड़ना | 2. िढ़ाइ रिंत प्रणािक से मि ु हो यह सल्ु नल्श्चत करना | 3. िाठ्यचयाय का आस तरह संवधयन हो ल्क वह बच्चों को चौमख ु क ल्वकास के ऄवसर महु यै ा करवाएं बजाय आसके ल्क िाठ्यिस्ु तक कें ल्ित बनकर न रह जाए | 4. िरकक्षा को ऄिेक्षाकृ त ऄल्धक िचकिा बनाना
र कक्षा की गल्तल्वल्धयों से जोड़ना |
5. एक ऐसक ऄल्धभावक िहचान का ल्वकास ल्जसमें प्रजाताल्ं त्रक राज्यव्यवस्था के ऄतं गयत राष्रकय ल्चतं ाएं समाल्हत हो | राष्रकय िाठ्यचयाय की रूिरे खा में ल्नम्न ल्बंदओ ु ं में महत्व ल्दया गया है जो की वैकल्पिक ल्िक्षा के ल्विेषताओ ं को भक िरू ा करते है : राष्रकय िाठ्यचयाय की रूिरे खा में ल्वकें िककरण
र िंचायतक राज संस्थाओ ं की भल्ू मका को ऄत्यंत महत्विणू य
माना है ल्जसमें यह स्वककार ल्कया गया है ल्क हम बच्चों को स्थानकय ियायवरण ल्बठाकर ल्सखाएगं े तो वह ज्ञान
र ऄल्धक मजबतू होगा
र जकवन के बकच संगल्त
र बच्चे सहजता से सकखेंगे हािांल्क आन
ऄनभु वों को जोड़तें समय हमें स्वककृ त िाठ्यचयाय के ल्सद्ांतों ज्ञात से अज्ञात की ओर, मूता से अमूता की ओर
र स्थानीय से वैतश्वक की ओर जोड़कर ज्ञान देने की बात करता है जो ल्क वैकल्पिक ल्िक्षा का
मख्ु य अयाम है | Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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एन.सक.एफ. 2005 गणु वत्तािरक ल्िक्षा की बात करता है हमें यहां यह सल्ू चत करता है ल्क भौल्तक संसाधन ऄिने अि में गणु वत्ता के द्योतक नहीं माने जा सकते है बल्पक योग्य व ईत्साहक ल्िक्षकों की ईििधधता जो ऄध्यािन को कै ररयर के ल्वकपि के रूि में देखते हैं स्कूिों में सभक वगों में गणु वत्ता की एक अवश्यक ितय है जो हमारे मन में यह धारणा बन गइ है की गणु वत्ता की मख्ु य अधार िरकक्षा िररणाम है ईसे हिाना होगा ल्मिाना होगा | एन.सक.एफ. ने हमें बािकें ल्ित ल्िक्षा को
र व्यािक ढंग से समझाने का प्रयास ल्कया है | ल्जसमें हमें यह
बताया गया है ल्क हम बच्चों को ईनके स्वमं के ऄनभु वों, ईनके स्वरों
र ईनकी सल्क्रय सहभाल्गता को
प्राथल्मकता देना, ल्िक्षा को ईनके मनोवैज्ञाल्नक ल्वकास व ऄल्भरुल्चयों के मद्देनजर हमें ल्िक्षा को ल्नयोल्जत करने की अवश्यकता है | हमें ल्िक्षा को ईनके समाज से जोड़ कर देनक चाल्हए | जो ल्क ऄनौिचाररक ल्िक्षा का एक माध्यम है | हम सभक जानते हैं ल्क बच्चों के संज्ञानात्मक ल्वकास में ऄध्यािक की भल्ू मका प्रमख ु होतक है | ऄतः ऄध्यािकों को ऐसा रचनात्मक वातावरण तैयार करना चाल्हए ल्क बच्चे या ल्वद्याथी सल्क्रय रुि से िवू य प्रचल्ित ल्वचारों में ईििधध सामग्रक / गल्तल्वल्धयों या ऄनुभवों के अधार िर ऄिने ल्िए ज्ञान की रचना करते हैं ल्कंतु यह ऄनभु व एक ल्दन में नहीं अतक है यह कइ ल्दनों के ऄनभु व से प्राप्त होता है आसे एन.सक.एफ. में ‘चतुर अनुमान’ के नाम से िक ु ारा गया है | ल्वद्यािय में बच्चे तभक सकखेंगे जब ईन्हें महत्विणू य माना जा रहा हो
र भय से मि ु वातावरण हो
र अज
भक हमारे स्कूि ऐसा करने में ऄसक्षम है सभक प्रकार के िारकररक दडं के ल्वरुद् कड़ा रुख ऄिनाने की जरूरत है | स्कूि की सकमाओ ं को समाज के प्रल्त ऄल्धक ईदार होना होगा साथ हक िाठ्यचयाय का बोझ
र िरकक्षा
सबं ल्ं धत तनाव के सभक अयामों िर तात्काल्िक ध्यान देने की अवश्यकता है |
तनष्ट्कर्ा :- मैं भारत के नकल्तगत दस्तावेजों में वैकल्पिक ल्िक्षा के अयाम की बात कर रहा हाँ | ऄगर देखें तो िगभग भारत के सभक नकल्तयों में कुछ न कुछ अयाम देखने को ल्मिें है | मैं ल्जन वैकल्पिक ल्वद्याियों की बात कर रहा हाँ ईन ल्वद्याियों ने कोइ ऄिग कायय नहीं ल्कया है | के वि ईन्होनें जो संस्तुल्तयां िरू े देि के ल्िए बनायक Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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गयक है के वि ईन्हें ऄच्छक तरकके से िागू ल्कया है | ईन्होनें बािक की क्षमता, रूल्च, योग्यता को ध्यान में रखा र ईनको ईसक के ऄनरू ु ि िढ़ाया | ल्जससे बािक का मन ल्वद्यािय में िगा रहता है | ईनके ल्िए आस तरह का वातावरण तैयार ल्कया ल्जससे की वह स्वयं िढनें के ल्िए तत्िर होतें है
र ऄिनक क्षमता के ऄनरू ु ि वे सकखतें
चितें है | वैकल्पिक ल्वद्याियों में ऄध्यािकों को यह िणू य स्वतंत्रता होतक है की वे ल्कसक नवाचार ल्वल्ध के द्वारा बच्चों को िढ़ायें ल्जससे कक्षायें ईन्हें ईबाउ व नकरस न िगे ऄल्भभावक आस बात को नहीं समझ िातें है (जानकारक) दोनों समान हैं
र यहक बात मख्ु य धारा के ल्वद्यािय
र सामान्य
र ज्यादातर िोग यहक सोचतें हैं की ज्ञान (सकखना)
र सचू ना
र वे बच्चों िर ल्वकल्सत देिों के स्तर तक िहुचं नें के ल्िए िरुु अत से हक ऄल्धक से
ऄल्धक ज्ञान जमा करने का तनाव डािते है | ल्जससे बच्चे िरू ु से हक होमवकय करने िर जोर दे रहें है
र वे
ि्यि ू न ज्वाआन कर रहें है
र जरुरत िड़क तो ऄिग – ऄिग कोल्चगों को भक ज्वाआन कर रहें है ल्जसके
िररणामस्वरूि वे मनोरंजन
र खेि के ल्िए कम समय ल्नकाि िा रहें है | ऄिने िाठ्यक्रम को िरू ा करना आनका
िहिा ईद्देश्य होता है, बच्चे हक नहीं बल्पक ल्वद्यािय
र ऄध्यािक भक यहक करने में िगे है | ल्जसके कारण
मख्ु य धारा की स्कूिक ल्िक्षा बच्चों को बोल्झि, ईबाउ
र ऄरुल्चकर प्रतकत होतक है |
कोठारी आयोग में कहा गया है की, ‚ हमारे देि के भतवष्ट्य का तनमााण उसकी कक्षाओ ं में हो रहा है | ‛ ल्कन्तु हमारे देि का सबसे बड़ा दभु ायग्य है ल्क ऄभक तक ल्िक्षा के क्षेत्र में ल्जन ऄनेकों अधारभतू नकल्तयों का ल्नमायण ल्कया गया वे ऄभक तक ल्सद्ांतों
र कागजकय िररल्ध से बाहर नहीं अ िाये हैं
र िररणाम यह
होता है ल्क सरकार बदिते हक नकल्त बदि जातक हैं | ल्जसका िररणाम यह होता है की कोइ भक नकल्त या संस्तल्ु त िणू य रूि से िागु नहीं हो िाता है तब तक ऄगिक नकल्त या संस्तल्ु त अ जातक है
र सभक िोग ल्फर ईसे िागू
करने में िग जातें है | ल्जसका िररणाम यह रहा की हमारे देि में ऄनेकों नकल्तयां बनक ईसे िागू भक ल्कया गया ल्कंतु ईसका िररणाम ऄिेल्क्षत नहीं ल्नकिा | सभक नकल्तगत दस्तावेज ऄिने अि में काफी ल्वस्तृत है | जो हमारे भल्वष्य की ल्िक्षा की रूिरे खा तय करतक है | आसको िूणय रुि से िागू करना नैल्तक ल्जम्मेदारक है क्योंल्क ल्िक्षा हक ल्कसक देि
र आसमें सहयोग करना हमारक ऄिनक
र समाज की रूिरे खा तय करतक है
समझना होगा |
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र हमें आस बात को
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सन्दभा सूची (REFERENCES)
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