Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language, Online ISSN 2348-3083, SJ IMPACT FACTOR 2021: 7.278, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, FEB-MAR, 2023, VOL-11/56
19 व ीं शताब्दी के ब्रिटिश शशक्षा न शतयों में अध्यापक शशक्षा अभय कुमार शमाा, Ph. D. पूव-ा शोधछात्र, शशक्षा सींकाय, कमच्छा, काश टिन्द ू ब्रवश्वब्रवद्यालय Paper Received On: 18 MAR 2023 Peer Reviewed On: 31 MAR 2023 Published On: 1 APRIL 2023 Abstract
19व ीं शताब्दी के प्रारीं भ तक, भारत में ब्रिटिश सरकार की अशधकाींश न शतयााँ साम्राज्य ब्रवस्तार
पर िी केंटित थ ीं। शशक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा बिुत िी कम ध्यान टदया गया था, टकींतु इस शताब्दी में शशक्षा के ब्रवस्तार पर भ ध्यान टदया जाने लगा। इससे ध रे -ध रे कुशल अध्यापकों की माींग बढी और इस सींदभा में ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रस्तुत न शतयों में ब्रवशभन्न सुझावों एवीं शसफाररशों को प्रस्ताब्रवत टकया गया। प्रस्तुत लेख में 19व ीं शताब्दी के ब्रिटिश भारत में शशक्षा िे तु प्रस्तुत ब्रवशभन्न ब्रववरण पत्रों एवीं न शतयों में अध्यापक शशक्षा के ब्रवकास िे तु प्रस्तुत की गई शसफाररशों का ब्रवस्तारपूवक ा वणान टकया गया िै । जजसके पररणाम स्वरूप ध रे -ध रे तत्काल न ब्रिटिश भारत में अध्यापकों के प्रशशक्षण पर बल टदया जाने लगा और इस िे तु सरकार एवीं शनज सींस्थाओीं द्वारा अध्यापक प्रशशक्षण सींस्थाओीं को स्थाब्रपत टकया गया। मुख्य शब्द: शशक्षा, अध्यापक शशक्षा Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com
प्रस्तावना भारत में अध्यापकों को औपचाररक रूप से प्रशशजक्षत करने एवीं इस िे तु प्रशशक्षण सींस्थाओीं की स्थापना के ब्रवकास का इशतिास अशधक प्राच न निीीं िै । 18व ीं शताब्दी के प्रारीं भ में जब ब्रवशभन्न शमशनरी सींस्थाओीं का आगमन िुआ, तो उन्िोंने यिााँ पर शशक्षा के प्रसार िे तु चैररिी स्कूलों के शनमााण में अपन मित्वपूणा भूशमका शनभाई। टकींतु इन स्कूलों की स्थापना का मुख्य उद्दे श्य शशक्षा का प्रसार करना निीीं था, बजकक इनके द्वारा अपने धमा का प्रचार प्रसार करना था। इस सींदभा में ररक्िर (1908) Copyright © 2023, Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language