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MAHILA SASHKTIKARAN ME SHIKSHA KA PRABHAV : EK ADHYAYAN

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2021 = 7.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, MAR-APRIL, 2021, VOL- 8/64 महिला सशक्तिकरण में हशक्षा का प्रभाव:एक अध्ययन मो० सदरे आलम

शोधार्थी शशक्षाशास्त्र शिभाग, बी० आर० अंबेडकर, शबहार शिश्वशिद्यालय, मु जफ्फरपुर, शबहार

Paper Received On: 21 APRIL 2021 Peer Reviewed On: 30 APRIL 2021 Published On: 1 MAY 2021

शकसी भी समाज की उन्नशि उस समाज की मशहलाओं की उन्नशि से मापी जा सकिी है । डॉ०बी०आर०अंबेडकर *मशहला सशक्तिकरण का िात्पयय मशहला द्वारा शक्ति और सं साधनों की प्राक्ति से है , शजससे शक िे अपने शिषय में महत्वपूणय शनणय य ले सके एिं दू सरों के द्वारा शलए गए गलि शनणय यों का शिरोध कर सकें। शशक्षा मशहला सशक्तिकरण के शलए प्रर्थम और मूलभू ि साधन हैं ।प्रस्तु ि ले ख में मशहला सशक्तिकरण में शशक्षा की क्या भू शमका है िर्था मशहला शशक्षा के मागय में जो बाधाएं आ रही हैं ।उनको दशाय ने का प्रयत्न शकया गया है । शजसके द्वारा मशहला सशक्तिकरण का शनरं िर शिकास हो सके एिं मशहलाओं को जागरूक शकया जा सके मशहला को उसके क्षे त्र में शिशभन्न प्रकार की सुशिधा शदलाने का प्रयास शकया जा सके शजसके द्वारा समाज में उनको महत्वपूणय स्र्थान शमल सके।*

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प्रस्तावना:*इशिहास साक्षी है शक समाज में मशहला के संदभय में कहा गया है शक "एक मशहला को शशशक्षि करने का अर्थय एक पररिार को शशशक्षि करना है।"* *ि​ियमान युग को िैचाररकिा का युग कहा जािा है ।अगर कोई स्त्री या मािा अर्थिा गृशहणी के संस्कार शशक्षा दीक्षा उत्तम नहीं होगी िो िह समाज एिं राष्ट को उत्तम सदस्य कैसे दे सकिी है ।समाज के शु द्ध िािािरण के शलए मशहला का स्वस्र्थय,शशशक्षि,समझदार,कुशल व्यिहार एिं बुक्तद्धमान होना जरुरी है ।* *िैशदक काल के अंदर मशहलाएं भी पुरुषों के समान शशक्षा प्राि करिी र्थीं,शिशभन्न गशिशिशधयों में पुरुषों को सहयोग शकया करिी र्थीं,और समाज में उनका महत्वपूणय स्र्थान र्था।िैशदक युग में मशहला शशक्षा अपनी उच्चिम सीमा पर र्थी मशहलाएं पुरुषों के समक्ष शबना भे दभाि के शशक्षा प्राि करिी र्थी। बुक्तद्ध और ज्ञान के क्षे त्र में अगृणीय भू शमका में र्थीं। हमारे दे श की जनसंख्या का आधा भाग मशहलाएं हैं । जीिन के प्रत्येक क्षे त्र में मशहलाओं के योगदान को स्वीकार शकया गया है ।*

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(Pg. 14869-14877) *गां धी जी ने मशहलाओं की भू शमका को पुरुषों के पूरक के रूप में दे ख कर कहा र्था शक मशहला एिं पुरुष शिकास रूपी गाडी के दो पशहए हैं ।अिः शकसी भी समाज की संपन्निा और प्रगशि दोनों की असमानिा पर नहीं अशपिु समानिा और सहयोग पर शनभय र करिी है ।* *शशक्षा से हमारे जीिन में सशक्तिकरण एक सामाशजक प्रजा-िां शत्रक प्रशिया है ।शजसमें मशहलाओं को अपने जीिन पर अशधकार प्राि करने में सहायिा प्राि होिी है ।संशिधान के द्वारा बराबर का दजाय शमलने के बाद भी उसके सार्थ भे दभाि होिा है । कायय करने और आशर्थय क रूप से आत्मशनभय र होने पर भी परं परा और संस्कृशि के नाम के सार्थ-सार्थ शिशभन्न स्तरों से होकर गुजरी है ।* *अंिराय ष्टरीय स्तर पर दे खा जाए िो मशहला दशक के प्रारं शभक िषों में सशक्तिकरण को मशहला की प्रक्तस्र्थशि के संदभय में प्रस्तु ि शकया जािा र्था।शजसका अर्थय पुरुषों की िुलना में मशहलाओं की क्तस्र्थशि को ऊंचा उठाने का प्रयास रहा है ।* *शशक्षा सामाशजक सशक्तिकरण के शलए प्रर्थम एिं मू लभू ि साधन है इसशलए यह माना जािा है शक शशक्षा ही िह उपकरण है शजससे मशहला समाज में अपनी सशि,सामाशजक,आशर्थकय,राजनै शिक एिं शै शक्षक क्षमिा से समान ि उपयोगी भू शमका में अनु भूशि करा सकिी है ।शशक्षा के आधार पर मशहला में दक्षिा कौशल ज्ञान एिं क्षमिाओं का शनरं िर शिकास होिा है ।शशशक्षि मशहला न केिल स्वयं न केिल लाभाक्ति​ि होिी है बक्ति उसके सार्थ-सार्थ एक पूरी भािी पीढी को भी लाभाक्ति​ि करिी है ।शशक्षा शकसी भी प्रकार के कौशल की प्राक्ति एिं शि​िेकपूणय िरीके से उनके शिकास के शलए पूणयिया आिश्यक है ।मशहलाओं की शशक्षा से उसका शोषण रोकने में सहायिा शमले गी।शनणयय लेने की क्षमिा सशक्तिकरण का एक मू ल रूप से शनणयय ले ने का एक बडा मानक है । शशक्षा के द्वारा शनणयय ले ने की क्षमिा से धणात्मक एिं सार्थय क शनणयय लेने की क्षमिा सशक्तिकरण का सहसंबंध माना जािा है ।* *शशक्षा जीिन के दरिाजे की कुंजी है शजसका लक्ष्य ज्ञान रूपी प्रकाश को फैलाने िर्था अज्ञानिा रूपी अंधेरे को दू र करना है ।मकोल एिं अन्य के अनु सार शकसी भी समाज या राष्टर की प्रगशि के शलए मशहला शशक्षा को शिशे ष महत्व शदया जािा है ।शकसी समाज में मशहलाओं की शै शक्षक की क्तस्र्थशि जानने का िरीका है शक हम जानने का प्रयास करें शक समाज में मशहलाओं की शै शक्षक क्तस्र्थशि कैसी है ,उनको क्या क्या अशधकार प्राि हुए हैं ,और उनकी मू लभूि संसाधनों िक शकिनी पहुं चे है ,िर्था राजनीशिक ि सामाशजक शनणयय शनमाय ण की प्रशिया में उनकी शकिनी सहभाशगिा है ?दे खा जाए िो मशहलाओं की शशक्षा शिकास का एक महत्वपूणय कारक है शजसने मशहलाओं का स्तर और उनकी समाज में भू शमका को उठाने में सहायिा की है।* *जब हम इशिहास के पन्नों को पलटिे हैं िो हम दखिे हैं शक शशक्षा शकसी भी व्यक्ति के सुखद जीिन की मजबूि आधारशीला िैयार करिी है ।शशक्षा के द्वारा एक मशहला असहाय ि अबला से सशि और सबला बनिी है ।मशहला सशक्तिकरण का िात्पयय है मशहला में शिपी हुई प्रशिभा उनकी शक्तियों उनके गुणों और उनकी प्रशिभाओं को शिकशसि करना है ।शजनको व्यिहार में लाकर िे अपने शिकास की ओर स्वयं कदम बढा सके,यह सारे के सारे कायय केिल शशक्षा के द्वारा ही संभि हैं ।शिश्व शिकास ररपोटय 1993-99 स्पष्ट करिी है शक मशहला शशक्षा आशर्थय क शिकास में Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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(Pg. 14869-14877) सहायक होने के सार्थ ही प्रजन्निा को कम करके बच्चों को उशचि पालन पोषण िर्था मािा-शपिा एिं बच्चों के बेहिर स्वास्थ्य में सहायक होिी है ।* *सामान्य िौर पर शशक्षा आशर्थयक शनभय रिा में सहायक होिी है। इससे मशहलाओं का सामाशजक स्तर ऊपर उठिा है िर्था उनका सशक्तिकरण होिा है ।आशर्थय क स्वायत्तिा से शनभय रिा एिं पुरुष प्रधानिा िर्था िचन िचस्वय ध्वस्त होने से न शसफय मशहला व्यक्तिगि स्तर पर लाभाक्ति​ि होगी अशपिु सामाशजक स्तर पर ऐसे पररि​ियन घशटि होंगे शक पुरुष प्रधान सामाशजक व्यिस्र्था शिन्न-शभन्न होकर रह जाएगी और जगह एक नई समाजिादी व्यिस्र्था उभर कर सामने आएगी शजसमें मशहला और पुरुष दोनों का समान महत्व होगा।मशहलाओं की दयनीय दशा के शलए अशशक्षा मु ख्य रूप से उत्तरदायी है जै से-जै से शशक्षा का शिस्तार हो रहा है। मशहलाओं की पररक्तस्र्थशि भी पररिशियि हो रही है शशक्षा में मशहलाओं के अने क क्षे त्रों में मागय प्रशस्त शकए हैं । शशक्षा मशहलाओं को उनके अशधकारों के प्रशि जागरूक करिी है शशक्षा का प्रसार होने से मशहलाएं परं परागि जागरूक हो रही हैं | मशहलाएं अपने अशधकारों बंधनों पुराने शिचारों ि अंधशिश्वासों से मुि हो रही हैं ।िह अपने कायों को अपने शि​िेक से करने की सामर्थ्य रखिी हैं ।आधुशनक शशशक्षि मशहला पुरुष की दासिा को स्वीकार नहीं करिी हैं। िे पुरुषों के सामान अपने अशधकारों के पक्ष में हैं ।* *प्रारं शभक काल में मशहला शशक्षा का उपयोग मशहलाओं को एक पत्नी ि मािा के परं परागि कियव्यों के सार्थ अशधक कुशलिा पूियक करने के योग बनािा र्था। न शक सामाशजक,आशर्थय क ि राजनीशिक शिकास प्रशिया में उनकी अशधक दक्ष ि कुशल भागीदारी हे िु उन्हें सक्षम करना र्था। धीरे -धीरे क्तस्र्थशि में पररि​ियन आया िर्था शिशे ष रूप से स्विंत्रिा के बाद मशहला शशक्षा के महत्व को उसके शिशिध ि शिस्तृ ि आयामों के संदभय में दे खा जाने लगा और इन्हीं शिशिध आयामों में शाशमल हैं ।शशक्षा के माध्यम से मशहलाओं की समानिा ि सशक्तिकरण के अर्थय पूणय प्रयासों की संभािना को शिशभन्न शदशा प्रदान करना है ।आज स्पष्टिः यह स्वीकार शकया जाने लगा है शक शशक्षा ही िह उपकरण है शजससे मशहला समाज में अपनी सशि समान एिं उपयोगी भू शमका दजय करा सकिी है ।भारि में स्विंत्रिा के बाद संशिधान के द्वारा प्रदि समानिा के अशधकारों ने राजनीशि अर्थयव्यिस्र्था और समाज में बहुशिध भू शमका शनिाय ह करने के शलए मशहलाओं का आह्वान करके उनकी क्तस्र्थशि सुधारने हे िु नए नए आयाम प्रस्तु ि शकए हैं ।* *संशिधान की धारा 45 में प्रार्थशमक शशक्षा को साियभौशमक बनाने के उद्दे श्य से शन:शुि ि अशनिायय शशक्षा को राज्य का एक नीशि शनदे शक शसद्धां ि घोशषि शकया गया है । इसमें कहा गया है शक राज्य शसद्धां ि के काययक्ति​ि शकए जाने के समय से 10 िषय के अंदर सब बच्चों के शलए जब िक िे 14 िषय की आयु को पुणय नहीं कर लें गे शनःशुि एिं अशनिायय शशक्षा प्रदान करने का प्रयास करे गा।आज मशहलाओं के मानिीय अशधकारों िर्था समाज ि राष्टर के शिकास दोनों ही संदभय में मशहला शशक्षा की अशनिाययिा को स्वीकार शकया जाने लगा है । यही कारण है शक आज भारि में लडशकयों ि मशहलाओं की शशक्षा प्रमु ख नीशि शिषयक ित्व बन गया है ।* *राष्टरीय शशक्षा नीशि 1986 में ना केिल मशहलाओं के शलए शै शक्षक अिसरों की समस्याओं की चचाय की गई है बक्ति सार्थ ही शशक्षा के माध्यम से मशहलाओं के अशधकार मशहलाओं के सशक्तिकरण का मु द्दा भी उठाया गया है।इस हे िु लैं शगक शिषमिाओं की समाक्ति को भी प्रमु ख प्रार्थशमकिा दे ने की इस शशक्षा नीशि में चचाय की गई है । शकसी राष्टर का शिकास िभी संभि है जब शक उस समाज में मशहलाओं ि पुरुषों को समान अशधकार ि अिसर प्राि हों। इन Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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(Pg. 14869-14877) अशधकारों ि अिसरों की कानूनी ि सैद्धां शिक मान्यिा के सार्थ-सार्थ समाज में व्यिहाररक स्वीकाययिा भी अशनिायय है ।मशहलाओं की क्तस्र्थशि की जां च करने से स्पष्टिः प्रमाशणि होिा है शक यद्यशप कानू न ि सैद्धां शिक संदभय में उसके अशधकारों ि अिसरों में कोई कमी नहीं है । परं िु व्यिहाररक स्वीकाययिा के संदभय में अभी अभीष्ट लक्ष्य िक हम नहीं पहुं च पाये हैं ।* *"संयुि राष्टर संघ ने जब पूरे शिश्व के शलए धारणीय शिकास के लक्ष्य शनधाय ररि शकए िब उसमें समािेशी शशक्षा को अत्याशधक महत्व शदया है । शशक्षा से िंशचि िगों में पूरे शिश्व में सबसे बडा शहस्सा मशहलाओं का है ।पूरे शिश्व में पुरुषों की अपेक्षा मशहलाओं में शशक्षा का स्तर आधे से भी कम है।भारि में स्विंत्रिा के समय यह क्तस्र्थशि अत्यंि शिकट र्थी पुरुषों में साक्षरिा की दर 20% र्थी िहीं मशहलाओं की साक्षरिा केिल 8.9 प्रशिशि र्थी।िषय 2011 की जनगणना के अनु सार भारि में जहां पुरुषों की साक्षरिा दर 82% र्थी िहीं मशहलाओं की साक्षरिा दर 63.5% र्थी उत्तर प्रदे श शबहार राजस्र्थान झारखंड आशद राज्यों में यह 55% से भी कम है ।मशहला साक्षरिा के शहसाब से शबहार सबसे शपिडा प्रदे श है ।जहां केिल 51% मशहलाएं साक्षर हैं ।इस पररक्तस्र्थशि से स्पष्ट होिा है शक स्विंत्रिा के 70 िषों के बाद भी मशहला शशक्षा के शलए शिशे ष प्रयास करना आिश्यक है।"* *महिला सशक्तिकरण को लेकर हनणणयक लाभदायक योजनाएं हनम्न प्रकार िैं ।* *(1)बाहलका हशक्षा प्रोत्सािन लाभदायक योजना* *केंद्र सरकार ने बाशलका शशक्षा और बाशलका सशक्तिकरण को ले कर हाल में अने क योजनाएं शु रू की हैं इन योजनाओं के शियाियन से शनशि​ि रूप से बाशलकाओं को हौसला शमल रहा है ।इसमें प्रमुख रूप से बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना है ।शजसे अंिरराष्टरीय स्तर पर भी सराहा गया है ।100 करोड रुपये के शु रुआिी कोश के सार्थ यह योजना शु रू में दे श भर के 100 शजलों में शुरू की गई। खासकर उन शजलों में जहां शलं गा शलं गानु पाि बेहद कम र्था।बाद में इसका शिस्तार 61 अन्य शजलों में भी शकया गया है ।इस योजना के िारिम्य में हर लडकी के शलए पैसे बचाने की ओर लघु बचि योजना सुकन्या समृ क्तद्ध अकाउं ट योजना शुरू की गई है ।बक्तच्चयों को उच्च शशक्षा के शलए आिश्यकिा होने पर धन की उपलब्धिा जै से िोटे ले शकन महत्वपूणय लक्ष्यों के सार्थ ही घरे लू बचि का प्रशिशि बढाने के शलए यह पहल की गई है ।यह योजना मािा शपिा को अपनी लडकी की बेहिर शशक्षा और भशिष्य के शलए पैसे बचाने के शलए प्रोत्साशहि करिी है ।सार्थ ही केंद्र की ओर से शै शक्षक रूप से शपिडे 3,479 खंडों में दसिीं और बारहिीं कक्षा की िात्राओं के शलए 100 शबस्तरों िाले िात्रािासों की स्र्थापना की गई है ।इस योजना का उद्दे श्य अनु सूशचि जाशि, जनजाशि,शपिडा िगय और अल्पसंख्यक िगय की 14 से 18 िषय की ऐसी बाशलकाओं को आगे पढने के शलए प्रेररि करना है जो खराब आशर्थय क क्तस्र्थशि के कारण बीच में ही अपनी पढाई िोड दे िी हैं ।* *भारि सरकार की ओर से अनु सूशचि जाशि,जनजाशि और शपिडा िगय की बाशलकाओं के शलए सुदूर ग्रामीण क्षे त्रों में आिासीय उच्च प्रार्थशमक शिद्यालय की स्र्थापना के शलए कस्तू रबा गां धी बाशलका शिद्यालय योजना का शु भारं भ शकया गया र्था। कस्तू रबा गां धी बाशलका शिद्यालय योजना की शु रुआि पहले से पहले 2 िषय िक अलग योजना के रूप में सिय शशक्षा अशभयान,बाशलकाओं के शलए प्रार्थशमक स्तर पर शशक्षा शदलाने का राष्टरीय काययिम ि मशहला Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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(Pg. 14869-14877) सामाख्या योजना के सार्थ सामंजस्य शबठािे हुए शु रु की गई शु रू की गई है र्थी।बाद में इसे सिय शशक्षा अशभयान में एक अलग घटक के रूप में शिलय कर शदया गया है ।* *(2)महिला हशक्षा के मित्व एवं उद्दे श्य को समझना और उस बढावा दे ना* *मशहलाओं के महत्व एिं सशक्तिकरण के शलए शशक्षा िास्ति में सबसे महत्वपूणय संगठक और हस्तिे प है ।प्रस्तु ि अध्ययन का उद्दे श्य है शक शकस प्रकार की शशक्षा मशहलाओं के सशक्तिकरण में सहायक है या शशक्षा का क्या महत्व है ।शशक्षा के द्वारा ही मशहलाओं में िेजी से बदलिी हुई शिश्व की िास्तशिकिाओं को समझने के शलए आिश्यक शिश्लेषणात्मक कौशल प्राि होगा जो उन्हें अपमान पूणय और मानिीय क्तस्र्थशि का शिरोध करने का शिश्वास और िाकि प्रदान करे गा।* *(3)हशक्षा का एवं सशक्तिकरण के साथ संबंध* *अध्ययन से पिा चलिा है शक शशक्षा और सशक्तिकरण में क्या सहसंबंध है ?शशक्षा मशहलाओं को शपिृसत्तात्मक ज्ञान,शनयमों,मुल्ों व्यिहार पद्धशियों को चुनौिी दे ने में मदद करिी है । मशहलाओं के सशक्तिकरण के शलए शशक्षा सामू शहक काययिाही और शचंिन की एक अनिरि जारी रहने िाली प्रशिया है ।* *(4)महिलाओं की पररक्तथथहि एवं पररविणनों में हशक्षा का प्रभाव और उसकी समझ* *अध्ययन से पिा चला है शक मशहलाओं की पररिशियि पररक्तस्र्थशि पर शशक्षा का शकस प्रकार प्रभाि पडा है ?सशक्तिकरण में शशक्षा का महत्वपूणय स्र्थान है ।शबना शशक्षा के मशहलाओं की पररक्तस्र्थशि में सकारात्मक पररि​ियन असंभि है ।शशक्षा के माध्यम से मशहलाओं में जागरूकिा आई है ।िह अपने बारे में सोचने लगी है ,उन्होंने महसूस शकया है शक घर से बाहर भी जीिन है , मशहलाओं में आत्मशिश्वास का संचार हुआ है ,उनके व्यक्तित्व में शनखार आया है , मशहलाएं न केिल सामान्य शशक्षा शिश्वशिद्यालय िर्था काले जों में भी जा रही हैं ।बक्ति मु ख्यमंत्री,राज्यपाल, प्रधानमं त्री, राष्टरपशि बन रही हैं,एिरे स्ट पर भी जाने के बाद शिजय प्राि कर रही हैं ।िायुसेना और नौसेना में अपनी सेिा प्रदान कर रही हैं ।* *(5)महिला सशक्तिकरण हशक्षा मार्ण में बाधाओं की समझ* *शशक्षा के द्वारा ही मशहलाओं का सशक्तिकरण संभि है इसशलए प्रस्तु ि अध्ययन में यह समझने और समझाने का प्रयास शकया गया है शक िह कौन-कौन सी बाधाएं हैं ,शजनके कारण मशहलाएं शशक्षा प्राि नहीं कर पा रही हैं ,अध्ययन में यह पाया गया है शक लैं शगक भे दभाि का पररिाररक परं पराएं ,पदाय ,प्रर्था, बाल शि​िाह,शनधयनिा,सामाशजक आशर्थय क पहलू ,घर से शिद्यालय की दू री आशद मशहला शशक्षा में प्रमु ख बाधाएं हैं ।* *(6)महिला सशक्तिकरण के द्वारा हशक्षा की बाधाओं को दू र करने िे िु सुझाव* *अध्ययन का उद्दे श्य मशहलाओं की शशक्षा में आ रही शिशभन्न बाधाओं को दू र करने के शलए शिशभन्न सुझाि प्रस्तु ि करना है ।शशक्षा के अभाि में मशहला सशक्तिकरण असंभि है । अिः उन बाधाओं को जो मशहलाओं की शशक्षा प्राि करने में बाधक हैं ,कैसे दू र शकया जाए इस शिषय पर अध्ययन में प्रकाश डाला गया है।*

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(Pg. 14869-14877) *(7)महिला सशक्तिकरण की हशक्षा में आने वाली बाधाएं * *स्विंत्रिा के बाद से केंद्र और राज्य सरकारें शिशभन्न नीशियों और काययिमों के माध्यम से शबना शकसी भे दभाि के सभी मशहलाओं को शशक्षा की धारा में शाशमल करने के शलए शनरं िर प्रयास कर रही है ।* *िषय 2001 में समग्र साक्षरिा दर 65.38% र्थी,िर्था पुरुषों और मशहलाओं की साक्षरिा दर कमय ष: 75.85% र्थी,िर्था 54.16% र्थी।िर्था 2011 में समगय साक्षरिा दर 74.04 प्रशिशि र्थी, िर्था पुरुषों और मशहलाओं की साक्षरिा दर िमश 82.14% िर्था 65.46% र्थी।यद्यशप शपिले दशकों से मशहला साक्षरिा में अशधकिम सुधार हुआ है शफर भी मशहलाओं का एक बहुि बडा भाग आज भी शशक्षा से िंशचि है ।* *महिला हशक्षा के मार्ण में बाधाएं हनम्न प्रकार िैं ।* *(1)हशक्षा में महिला और पुरुष के बीच भेदभाव।* *भारिीय शशक्षा में मशहला और पुरुष के बीच भे दभाि दे खने को शमलिा है ।स्कूलों में लडशकयों की अपेक्षा लडके ज्यादा प्रिेश ले िे हैं और एक शनशि​ि स्तर िक अपनी शशक्षा पूरी करिे हैं ।लडशकयां घर पर अपनी मािाओं का हार्थ बटािी हैं , बाहर काम पर जािी हैं या शफर अपने िोटे भाई बहनों की रक्षा करिी हैं।शिज्ञान और इं जीशनयररं ग में लडशकयों की अपेक्षा लडके अशधक प्रिेश ले िे हैं और लडशकया​ाँ शनचले स्तर के पाठ्यिमों िर्था काले जों में जािी हैं ।शिज्ञान,टै े​ेक्नोलॉजी िर्था इं जीशनयररं ग शशक्षा के क्षेत्र में लडके िर्था लडशकयों के बीच असमान शि​िरण है । शकंिु इससे यह शसद्ध नहीं होिा है शक उनको अशभरूशचयों में कोई अंिर है ।* *(2) बाल हववाि एवं हनधण निा* *बाल शि​िाह एिं शनधयनिा के कारण अशभभािक बेशटयों की पढाई को शि​िाह पर होने िाले खचय के सार्थ जोडिे हैं ।इसी कारण िे अपनी लडशकयों को उसी स्तर िक पढािे हैं जहां िे उनके शलए सुयोग्य िर ढू ं ढ सकें।िोटी आयु में शि​िाह होने के कारण लडशकयों को पढाई में अिसर प्राि नहीं हो पािे हैं ।* *शनधयनिा के कारत्ण लडशकयों को शशशक्षि होने के अिसरों में स्पष्ट रूप से बाधा डालिी है।अध्ययन दशाय िे हैं शक शनधयन पररिारों में लडशकया​ाँ घर का पूरा काम करिी है।िोटे भाई बहनों की दे खभाल करिी है ,और कृशष के कायों में अपने मािा शपिा के हार्थ बटािी है ।इस कारण उनके पास शिद्यालय जाने के शलए समय ही नहीं बच पािा है ।लडकों के कायय से शभन्न लडशकयों के कायय को मशहलाओं द्वारा शकए जाने िाला कायय समझा जािा है ।* *(3)बाधाओं के सामाहजक एवं आहथणक पिलू* *मािा शपिा की बेटे और बेशटयों के समाजीकरण में भे दभाि की मनोिृशि दोनों की भू शमका और दाशयत्व शनधाय ररि करने में प्रकट होिी है ।शदल्ली के शिशशष्ट शिद्यालय में प्रिेश के इच्छु क अशभभािकों पर शकए गए एक अध्ययन से पिा चला है शक उन्हें अपने बेटों और बेशटयों से शभन्न-शभन्न अपे क्षाएं होिी हैं ।बेटों से प्राय: घर से बाहर के कायय करने के शलए कहा जािा है जबशक बेशटयों से रसोई घर में हार्थ बंटिाने की आशा की जािी है ।मािा शपिा बेटे की पढाई को भशिष्य में अच्छे रोजगार अिसरों के शलए एक शनिेश मानिे हैं । शजसके द्वारा उनकी िृद्धािस्र्था सुरशक्षि हो जाएगी।बेटी की पढाई पर इस िरह की बािों का ध्यान नहीं शदया जािा है ,इसशलए उसे प्रार्थशमकिा नहीं दी जािी है ।* Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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(Pg. 14869-14877) *(4)बाधाओं का कारण घर से हवद्यालय की दू री* *आज के समय में भी ऐसे असंख्य बच्चे हैं शजनके शलए प्रार्थशमक शिद्यालय िक पहुं चना आसान नहीं है ।यह समस्या लडशकयों के मामले में उच्चिर प्रार्थशमक स्तर पर और भी गंभीर हो जािी है । सिेक्षण से पिा लगिा है शक केिल 37% ग्रामीण आबादी का शनिास स्र्थान के नजदीक उच्चिर प्रार्थशमक शशक्षा उपलब्ध है ।इसमें से 3 शकलोमीटर की सीमा में 48% बच्चों को एक उच्चिर प्रार्थशमक शिद्यालय उपलब्ध है ।15% आबादी 3 शकलोमीटर से अशधक दू री है ।* *शजन पां च राज्यों में प्रोब सयिेक्षण हुआ र्था।* *िहां पाया गया है शक शजन गां िों में प्रार्थशमक शिद्यालय नहीं हैं ।* *िहां लडशकया​ाँ * *प्राय: कक्षा पां च के बाद पढाई िोड दे िी हैं।* *इसका कारण यह है शक मािा-शपिा अपनी लडशकयों को पढाई के शलए दू सरे गां िों में भेजना पसंद नहीं करिे हैं ।* *(5)अध्याहपकाओं की उपक्तथथहि िथा बु हनयादी सुहवधाओं की उपलब्धिा* *शिद्यालय में अध्याशपकाओं की उपक्तस्र्थशि लडशकयों को शिद्यालय जाने के शलए प्रोत्साशहि करने में एक शनणाय यक शनिेष के रूप में कायय करिी हैं ।उत्तर प्रदे श और शबहार जै से राज्यों में जहां मशहला साक्षरिा दर कम है िहां अध्याशपकाओं का प्रशिशि भी बहुि कम है ।प्रार्थशमक स्तर में िहां िमश: 25.49% और 19.84% अध्याशपकाएं हैं ।यह केरल के शिपरीि हैं । जहां उच्चिम साक्षरिा दर के सार्थ-सार्थ प्रार्थशमक स्तर पर अध्याशपकाओं का प्रशिशि भी उच्च है । प्रोबा सिेक्षण के अनु सार राजस्र्थान के अने क भागों में अशभभािक चाहिे हैं शक उनकी बेशटयों की पढाई के शलए अध्याशपकाएं होनी चाशहए। शिद्यालयों द्वारा लडशकयों को अन्य बुशनयादी सुशिधाएं प्रदान की जानी चाशहए, जै से शक लडशकयों के शलए अलग शौचालय।िठा अक्तखल भारिीय शै क्षशणक सिेक्षण बिािा है शक भारि में केिल 5.12% प्रार्थशमक शिद्यालयों िर्था 17.17% उच्चिर प्रार्थशमक शिद्यालयों में लडशकयों के शलए अलग शौचालय हैं ।* *"हािडय शिश्वशिद्यालय शिश्व आशर्थय क मं च िर्था लं दन शबजने स स्कूल द्वारा शकए गए सिेक्षण में दु शनया की 60% जनसंख्या के आं कडों को शाशमल शकया गया।इस सिेक्षण में आशर्थय क साझेदारी ि अिसर शशक्षा स्वास्थ्य िर्था राजनीशिक सशक्तिकरण के क्षे त्र में मशहलाओं और पुरुषों के बीच अंिर को मापने की कोशशश की गई है ।इं डेक्स द्वारा जारी 115 दे शों की सूची में दु शनया का एक भी ऐसा दे श नहीं हैं ।जहां इन चारों क्षेत्रों में मशहलाओं और पुरुषों में समानिा है ।सूची में मशहला सशक्तिकरण के मामले में स्वीडन पहले स्र्थान पर है ,जबशक सऊदी अरब सबसे नीचे है ,अमे ररका को 22िां स्र्थान शमला है । शफलीपींस दु शनया के उन 5 दे शों में से एक मात्र एशशयाई दे श है शजसने शशक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मशहला पुरुष असमानिा को समाि शकया है ।* *शशक्षा के क्षे त्र में व्याि असमानिा को दे खिे हुए अंिरराष्टरीय शशक्षा आयोग(1996)ने स्पष्ट शकया है शक समानिा का सम्मान करने के शलए शशक्षा जगि में व्याि शलं गभे द को समाि करना होगा।शिश्व शशक्षा ररपोटय 1995 में स्पष्ट शकया गया है शक "दु शनया के शनधयन दे शों में मशहला एिं बाशलकाएं घर की चारदीिारी में बंद हैं ।अशशशक्षि मॉ Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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(Pg. 14869-14877) अशशशक्षि बाशलकाओं को जन्म दे िी है और उनकी शादी कम उम्र में कर दी जािी है।इससे गरीबी अशशक्षा जनसंख्या िृक्तद्ध िर्था शशशु मृत्यु दर में िृक्तद्ध का एक अनं ि चि प्रारं भ होिा है ।"* *अशधकां श मामलों में यह मान शलया जािा है शक मशहला एक अच्छी पत्नी और सेिा शनष्ठ मॉ बनना है ।यशद उसके पास समय है और िह कुि बनना चाहिी हैं िो िह क्लकय या अध्याशपका बन सकिी हैं।ऐसी क्तस्र्थशि में शिज्ञान और अन्य संबंशधि क्षे त्रों में कैररयर बनाने पर समय और शनिेश करने में कोई िुक नजर नहीं आिी है ।यशद संसाधनों के शनिेष का प्रश्न उठिा है िो संसाधन शनरं िर लडकों की िकनीकी शशक्षा पर लगाए जािे हैं ।यशद लडकों की बहनों की भी िही रुशचयां हैं िो िे मशहलाओं के शलए उपयुि पाठ्यिमों को ले ने की ओर चली जािी हैं ।इन शनणययों को ले ने के पीिे यह भािना काम करिी है शक लडशकयां कुि शनशि​ि क्षे त्रों में ही अशधक अच्छा काम कर सकिी हैं ।अिः शनधयनिा सामाशजक सां स्कृशिक शिसंगशियों एिं सामाशजक कुरीशियॉ मशहला शशक्षा में बाधक हैं ।* *(6)महिला सशक्तिकरण के लाभ िे िु सुझाव* *मशहलाओं की शशक्षा के प्रशि उपेक्षा और भे दभाि को एक शदन में ही नहीं बदला जा सकिा,ले शकन नागररक समाज के सहयोग से सरकार की दे शभर में शशक्षा स्तर को ऊंचा उठाने के शलए बडी सािधानी पूियक बनाई गई योजनाओं से क्तस्त्रयों का सशक्तिकरण अिश्य हो सकेगा।इसके शलए मशहला शशक्षा में आ रही शिशभन्न बाधाओं को दू र करना होगा।* *मशहलाओं को शै शक्षक रूप से और मजबूि करना होगा। शशक्षा में लैं शगक भे दभाि को दू र करना चाशहए िर्था बेटे और बेटी की शशक्षा में शकसी भी प्रकार का भे दभाि नहीं करना चाशहए।मशहला शशक्षा के शलए स्कूलों की घर से भौगोशलक दू री का कम शकया जाना चाशहए।जनिा में मशहला शशक्षा के प्रशि जागरूकिा लाने के शलए स्र्थानीय समाज सुधारकों िर्था स्वयंसेिी संस्र्थाओं की प्रभािशाली भू शमका हो सकिी है ।इसशलए उन्हें प्रोत्साहन शदया जाना चाशहए। सरकार को मशहला शशक्षा पर शिशे ष ध्यान दे िे हुए राष्टरीय स्तर पर शै शक्षक शिकास काययिमों को उच्च प्रार्थशमकिा के आधार पर संचाशलि शकया जाना चाशहए।आिासीय कन्या पाठशालाओं की अशधक से अशधक स्र्थापना की जानी चाशहए।* *सरकार को शनधयन शपिडे िर्था कमजोर िगों में बाशलका शशक्षा के प्रशि उत्साह जगाने के शलए आशर्थय क शपिडे पन को दू र करने के शलए ठोस कदम उठाने की आिश्यकिा है ।संगशठि और असंगशठि दोनों ही क्षे त्रों में जहां मशहलाएं काम करिी हैं । बालग्रहों की स्र्थापना की जानी चाशहए िाशक लडशकयों को स्कूल िोडकर अपने भाई बहनों की दे खभाल के शलए अपनी पढाई िोड कर घर पर ना रुकना पडे ।* *महिला सशक्तिकरण की रूप रे खा का हनष्कषण* *शशक्षा मशहला सशक्तिकरण का एक महत्वपूणय साधन है ।शबना शशक्षा के शकसी को भी सशि नहीं बनाया जा सकिा है ।मशहला शशक्षा में समाज की भू शमका महत्वपूणय है यशद समाज मशहलाओं की शशक्षा के प्रशि सकारात्मक दृशष्टकोण और सहयोगी भािना रखकर अपना योगदान दे गा िो शशशक्षि मशहलाओं में िृद्शघ होगी। शशक्षा से ही मशहलाओं में आत्मशिश्वास आत्म जागृशि एिं अपने अशधकारों िर्था सरकार के द्वारा शदए जाने िाले अिसरों की जानकारी हो सकेगी।शजससे िे अपने कौशल का शिकास कर सकेंगी एिं स्वािलं बी बनकर अपने महत्वपूणय शनणयय Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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(Pg. 14869-14877) स्वयं ले कर एक मजबूि राष्टर के शनमाय ण में सहयोग कर सकेंगी।मशहला सशक्तिकरण में शशक्षा की महत्वपूणय भू शमका को स्वीकारिे हुए शबहार सरकार ने कन्या शशक्षा को प्रमु ख िरीयिा दी है ।शबहार सरकार यह प्रयास कर रही है शक आधी आबादी को शशक्षा के द्वारा इिना सशि बनाया जाए शक िह न केिल स्वयं बक्ति समाज को एक नई शदशा ि दशा प्रदान शकया जा सकें।* *संदभण सूची का हववरण* *अलिे कर,डॉ० अनंि सदाशशि: "प्राचीन भारिीय शशक्षण", नन्द शकशोर एण्ड ब्रदसय ,िाराणसी,1968 पृष्ठ 155।* *मकोल नीलम शमाय , सं दीप, सामाशजक शिकास में शशशक्षि मशहलाओं का योगदान, कुरुक्षे त्र शसिं बर 2006 पृष्ठ 53।* *व्यास डॉ०मीनाक्षी, नारी चेिना और सामाशजक शिधान, रोशनी पक्तिकेशनस, कानपुर 2008 पृष्ठ-78।* *िासी िृिा,बी०एस०डब्ल्यू ०इ०-003, शशक्षा में मशहला शिकास की पहल इग्नू , लक्ष्मी शप्रंट इं शडया शाहदरा, शदल्ली-32 पृष्ठ-66।* *काशनटकर मुकुल "भारि में मशहला शशक्षा,समाज ि सरकार की भू शमका", योजना शसिं बर 2016,पृष्ठ-37।* *दे िपुरा प्रिापभल "मशहला सशक्तिकरण में शशक्षा का महत्व", कुरुक्षे त्र अंक 5 माचय 2006 पृष्ठ-5 6 16-19।* *शमश्र,डॉ०जयशंकर, "प्राचीन भारि का सामाशजक इशिहास", शहं दी माध्यम कायाय ियन शनदे शालय,शदल्ली शिश्वशिद्यालय,नई

शदल्ली,1992 पृष्ठ 416दृ।* *श्रीिास्ति,सु धारानी (1999) "भारि में मशहलाओं की िै धाशनक क्तस्र्थशि", कामनिे ल्थ पक्तिशसय ,नई शदल्ली।* *अंसारी एम०ए०(2001) "मशहला और मानि अशधकार",ज्योशि प्रकाशन,जयपुर।* *जैन,प्रशिभा (1998),"भारिीय स्त्री सां स्कृशिक सं दभय", राि​ि पक्तिकेशन, जयपुर।* *लािण्या एम०एम०(1989)* *"समाजशास्त्रीय अनुसंधान का िकय एिं शिशधयां ",ररसचय पक्तिकेशन,जयपुर।* *शि​िारी आर०पी०(1999),"भारिीय नारी:ि​िय मान समस्याएं एिं समाधान",नई शदल्ली।* *बघेला, डॉ० हे ि शसं ह (1999)"शशक्षा मनोशिज्ञान",शिनोद पुस्तक मंशदर,आगरा।* *शमश्रा के०के०(1965),"शिकास का समाजशास्त्र",िै शाली प्रकाशन,गोरखपुर।*

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