EDUCATION
प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा संं बंं धीी सााल्ज़बर्गग घोोषणाा आज दुनि�या ु ा कई वैैश्वि�क संं कटोंं� काा साामनाा कर रहीी हैै, जोो एक-दूू सरेे सेे जुुड़ेे हुए हैंं और एक-दूू सरेे कोो और गंं भीीर बनाातेे हैंं। इनमेंं पर्याा�वरण सेे जुुड़ेे संं कट शाामि�ल हैंं, जैैसेे जैैव वि�वि�धताा काा नुुकसाान और जलवाायुु परि�वर्ततन। इसकेे सााथ हीी हर महााद्वीीप मेंं साामााजि�क न्यााय सेे जुुड़ेे संं कट हैंं और शि�क्षाा काा भीी संं कट हैै, क्योंं�कि� हमाारीी शि�क्षाा प्रणाालि�याँँ� बच्चोंं� कोो जीीवन मेंं आगेे बढ़नेे केे लि�ए आवश्यक कौौशल पूूरीी तरह नहींं� देे पाा रहीी हैंं। प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा (Nature-Based Education – NBE) इन जटि�ल और आपस मेंं जुुड़ीी समस्यााओंं काा एक व्याावहाारि�क, तुुरंंत अपनाायाा जाा सकनेे वाालाा और आशाा सेे भराा समााधाान प्रदाान करतीी हैै। जब सीीखनेे कीी प्रक्रि�याा केे केंंद्र मेंं प्रकृृ ति� कोो रखाा जााताा हैै, तोो इससेे लोोग अधि�क स्वस्थ, अधि�क खुुश और अधि�क समझदाार बनतेे हैंं, और वेे एक स्वस्थ पृृथ्वीी केे लि�ए बेेहतर जि�म्मेेदाार नाागरि�क बनतेे हैंं। अब तत्कााल कदम उठाानेे कीी आवश्यकताा हैै।
प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा: ठोोस और नि�र्णाा�यक काार्ररवााई आवश्यक जलवाायुु संं कट कीी ताात्काालि�कताा कोो देेखतेे हुए, संं रक्षण, पर्याा�वरण और शि�क्षाा केे क्षेेत्र सेे जुुड़ेे प्रमुुख लोोग 8 सेे 13 सि�तंं बर 2025 केे बीीच Salzburg Global मेंं एकत्र हुए। यह काार्ययक्रम “प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा: अब ठोोस और नि�र्णाा�यक काार्ररवााई आवश्यक ” वि�षय पर आयोोजि�त कि�याा गयाा थाा। इस दौौराान प्रति�भाागि�योंं� नेे प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा केे वि�स्ताार और कई वैैश्वि�क चुुनौौति�योंं� सेे नि�पटनेे केे लि�ए अपनीी समझ, अनुुभव और ऊर्जाा� कोो एक सााथ जोोड़तेे हुए एक स्पष्ट काार्यययोोजनाा (रोोडमैैप) तैैयाार कीी। वि�श्व समुुदााय नेे 2030 तक जैैव वि�वि�धताा केे नुुकसाान रोोकनेे और जलवाायुु परि�वर्ततन सेे नि�पटनेे केे लि�ए त्वरि�त और ठोोस कदम उठाानेे कीी प्रति�बद्धताा व्यक्त कीी हैै I फि�र भीी, अधि�कांं�श देेशोंं� नेे इन लक्ष्योंं� कोो हाासि�ल करनेे केे लि�ए अभीी तक प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा (NBE) कीी पूूरीी क्षमताा काा उपयोोग नहींं� कि�याा हैै। सााल्ज़बर्गग घोोषणाा (Salzburg Statement ) शि�क्षाा सेे जुुड़ेे नि�र्णणयकर्ताा�ओं ं सेे आग्रह करताा हैै कि� वेे अपनीी शि�क्षाा प्रणाालि�योंं� मेंं प्रकृृ ति� कोो एक अभि�न्न हि�स्साा बनाानेे केे लि�ए ठोोस प्रति�बद्धताा करेंं। सााथ हीी, यह शि�क्षकोंं�, परि�वाारोंं�, वि�द्याालय नेेतृत्व ृ और अन्य सभीी हि�तधाारकोंं� कोो आमंं त्रि�त करताा हैै कि� वेे अपनीी भूूमि�काा, पहल और कल्पनााशीील सोोच काा उपयोोग करतेे हुए बड़ेे पैैमाानेे पर प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा कोो अपनााएँँ, तााकि� लोोगोंं� और पृृथ्वीी—दोोनोंं� कोो लााभ मि�ल सकेे । सााल्ज़बर्गग ग्लोोबल काार्ययक्रम TUI केे यर फााउंं डेेशन, अंंतर्राा�ष्ट्रीी�य प्रकृृ ति� संं रक्षण संं गठन (IUCN) कीी शि�क्षाा और संं चाार समि�ति�, कनााडााई वन्यजीीव संं घ और अन्य सााझेेदाारोंं� केे सााथ मि�लकर तैैयाार कि�याा गयाा थाा।
सल्ज़बर्गग ग्लोोबल केे प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा सत्र केे परि�णाामोंं� केे बाारेे मेंं और जाानेंं। सााल्ज़बर्गग प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा घोोषणाापत्र कोो सााल्ज़बर्गग ग्लोोबल फेे लोोज़ द्वााराा अंंग्रेेज़ीी मेंं संं युुक्त रूप सेे तैैयाार कि�याा गयाा थाा।
प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा क्याा हैै? प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा ऐसीी शैैक्षणि�क पद्धति�योंं� काा समूूह हैै, जोो सीीखनेे कीी प्रक्रि�याा केे केंंद्र मेंं प्रकृृ ति� कोो रखतीी हैै। सरल शब्दोंं� मेंं, इसकाा अर्थथ हैै कक्षाा मेंं अधि�क प्रकृृ ति� कोो शाामि�ल करनाा और कक्षाा कोो अधि�क बाार प्रकृृ ति� केे बीीच लेे जाानाा हैै । इसमेंं औपचाारि�क शि�क्षाा केे सााथ-सााथ गैैर-औपचाारि�क और अनौौपचाारि�क सभीी तरीीकेे सीीखनेे केे शाामि�ल हैंं। प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा सीीखनेे वाालोंं� कोो यह यााद दि�लाातीी हैै कि� उनकाा प्रकृृ ति� सेे गहराा और स्वााभाावि�क संं बंं ध हैै, और यह संं बंं ध एक पुुनर्जीीवि�त और टि�कााऊ भवि�ष्य केे नि�र्माा�ण केे लि�ए अत्यंंत महत्वपूूर्णण हैै। यह छाात्रोंं� कोो आगेे बढ़नेे केे लि�ए आवश्यक कौौशल, ज्ञाान और सोोच वि�कसि�त करनेे मेंं मदद करतीी हैै, सााथ हीी छाात्रोंं� और शि�क्षकोंं�—दोोनोंं� केे माानसि�क और भाावनाात्मक स्वाास्थ्य कोो बेेहतर बनाातीी हैै तथाा प्रकृृ ति� और पृृथ्वीी केे प्रति� अधि�क जि�म्मेेदाार व्यवहाार कोो बढ़ाावाा देेतीी हैै। इस संं भाावनाा कोो सााकाार करनेे केे लि�ए सीीखनाा अनुुभव और भाावनााओंं सेे जुुड़ाा होोनाा चााहि�ए। जब हम प्रकृृ ति� मेंं सीीखतेे हैंं, जहाँँ� सब कुु छ जीीवि�त और रोोचक लगताा हैै, तोो हमेंं अपनेे और दूू सरोंं� केे रि�श्तोंं� कोो गहरााई सेे समझनेे मेंं मदद मि�लतीी हैै।
काारवााई कीी अपीील प्रकृृ ति� सेे हमााराा संं बंंध फि�र सेे मजबूूत करनाा एक ताात्काालि�क और पूूरीी तरह संं भव प्रााथमि�कताा हैै। यह सीीखनेे कीी प्रक्रि�याा कोो बदल सकताा हैै, लोोगोंं� केे कल्यााण कोो बेेहतर बनाा सकताा हैै और एक पुुनर्जीीवि�त भवि�ष्य केे नि�र्माा�ण मेंं सहाायक होो सकताा हैै। आप चााहेे मााताा-पि�ताा होंं�, शि�क्षक होंं�, कि�सीी संं स्थाा सेे जुुड़ेे होंं� याा नीीति�-नि�र्माा�ताा—आपकीी भूूमि�काा महत्वपूूर्णण हैै। आज हीी शुुरुआत करेंं—प्रकृृ ति� सेे जुुड़नेे केे लि�ए रोोज़मर्राा� काा एक छोोटाा-साा क्षण नि�काालेंं। सााथ हीी, अपनेे वि�द्याालय याा शि�क्षाा प्रणाालीी मेंं प्रभााव रखनेे वाालेे लोोगोंं� सेे आग्रह करेंं कि� वेे सभीी स्कूूलोंं� और समुुदाायोंं� मेंं प्रकृृ ति�-आधाारि�त शि�क्षाा कोो तेेजीी सेे अपनाानेे कीी दि�शाा मेंं कदम बढ़ााएँँ, तााकि� सीीखनेे, कल्यााण और पृृथ्वीी सेे जुुड़ेे संं कटोंं� काा प्रभाावीी ढंंग सेे समााधाान कि�याा जाा सकेे ।