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Nepali - Parable of the Sower

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बीउ छर्न े दृष् मती १३:१-२३ 1 त्ी दिर येशू घरबषट दरसेर समुदने दनरषरमष बसुनयेय २ अदर उ्षँ न्षँ धेरै मषदरस्र जमष नए, तसैसे उ्षँ एउटष डु ङषमष चढे र बसुनये, र सबै मषदरस्र दनरषरमष उदनएय ३ अदर उ्षँ से दिरी्रसषा दृष्​्रमष धेरै नुरष ननुनयेय उ्षँ से ननुनये, “ ्े र, एनजरष बीउ छर् मषदरस बीउ छर् दरस्ेय ४ अदर जब उससे छय्, ने्ी बीउ बषटेने छे उमष परे , र चरष्रसे आएर िी बीउ्र खषइदिएय ५ ने्ी ढु ङेरी जदमरमष परे , ज्षँ धेरै मषटे दिएरय िर मषटेने गद्रषइ रनएनेसे िी िुर्ै उमेय ६ अदर घषम सषगेपदछ िी ओइदसए, र जरष रनएनेसे िी सुदन्षसेय ७ अदर ने्ी नषँ डष्रमष परे ; अदर नषँ डष्र उदमएर िी दरसषदसदिएय ८ िर अर्र असस जदमरमष परे , र फस फसषए, नुरैसे सय गुणष, नुरैसे सषठी गुणष, नुरैसे िीस गुणषय ९ जसने सुने नषर छ, उससे सुरेस्य १० चेसष्र आएर उ्षँ सषा नरे, “िपषां दनर दृष्​्रमष दिरी्रसँग नुरष गरु्ुहछ?” ११ उ्षँ से दिरी्रसषा जवषफ दिरुनये र ननुनये, “ दनरदन सग्ने रषजने र्स्र जषन दिमी्रसषा दिइएने छ, िर दिरी्रसषा दिइएने छै रय” १२ दनरदन जससँग छ, उससषा दिइरेछ, र ऊसँग पशर ुरेछ; िर जससँग छै र, ऊसँग नएने पदर खेदसरेछय १३ तसैसे म दिरी्रसषा दृष्​्रमष बेलछु : दनरनरे दिरी्र ्े रेर पदर िे खिै रर् ; र सुरेर पदर सुनैरर्, र ि बुझछर्य १४ अदर दिरी्रमष यशैयषने अगमवषणी पूरष नये, जससे नरेनष छर्, “दिमी्रसे सुरेर ि सुहछछ, िर बुझिै रछ; ्े रेर ि िे खछछ, िर िे खिै रछय”

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१५ दनरदन यी मषदरस्रने हिय नठेर नएने छ, र दिरी्रनष नषर्र सुन रसके नएनष छर्, र दिरी्रसे आफरष आँ खष बन गरे नष छर्, रतिष दिरी्रसे नद्लै आफरष आँ खषसे िे खेछर्, आफरष नषरसे सुनेछर्, र आफरष हियसे बुझेछर्, र फन्रेछर् , र म दिरी्रसषा दरने पषर्छुय १६ िर दिमी्रनष आँ खष धन ुर्, दनरदन दिरी्रसे िे खछर्; अदर दिमी्रनष नषर धन ुर्, दनरदन दिरी्रसे सुहछर्य १७ दनरदन म दिमी्रसषा सषँ चे ननछु , धेरै अगमवकष्र र धम् मषदरस्रसे दिमी्रसे िे खेनष नुरष्र ्े र् चष्े नष दिए, िर िे खेरर् ; अदर दिमी्रसे सुरेनष नुरष्र सुन चष्े नष दिए, िर सुरेरर्य १८ तसनषरण बीउ छर्ने दृष् सुरय १९ जब नसैसे रषजने वचर सुहछ िर बुझिै र, िब ते िु ृ आउँ छ र उसने हियमष रेदपएने नुरष खेसेर सैजषहछय ये बषटेने छे उमष बीउ छर् मषदरस ्ेय २० िर ढु ङेरी जमीरमष बीउ छर् मषदरस ते ्े जससे वचर सुहछ र िुर्ै खुशीसषि ग्ण गछ् य २१ िैपदर उससे आफैमष जरष गषड् िैर, िर ने्ी समयने सषदग मषत दटकछय दनरदन जब वचरने नषरणसे गिष् सङृ वष सिषवट आउँ छ, िब ऊ पटन-पटन ठे स खषहछय २२ नषँ डष्रने बीचमष छररएने बीउ ते ्े जससे वचर सुहछ, िर यस संसषरने दफकी र धरसमदतने छससे वचरसषा दरसषदसदिहछ र ते फस रदिरे ुहछय २३ िर असस जदमरमष बीउ छर्चषद्ँ ते ्े जससे वचर सुहछ र बुझछ; जससे फस पदर दिहछ र फस दिहछ, नुरैसे सय गुणष, नुरैसे सषठी गुणष, नुरैसे िीस गुणषय

मनू् स ४:१-२० १ अदर उ्षँ से फेरर समुदने दनरषरमष दशकष दिर िषलरुनये; अदर उ्षँ न्षँ एउटष ठूसे नीड जमष नये, तसैसे उ्षँ एउटष डु ङषमष चढे र समुदमष बसुनये; र सबै नीड समुदने दनरषरमष जदमरमष दिएय २ अदर उ्षँ से दिरी्रसषा दृष्​्रमष धेरै नुरष्र दसनषउरुनये, र आफरे दशकषमष दिरी्रसषा ननुनये, ३ सुर; ्े र, एन जरष बीउ छर् मषदरस छर् दरस्ेय ४ अदर जब उससे छि् दिये, ने्ी बीउ बषटेने छे उमष परे , र आनषशनष चरष्रसे आएर िी बीउ्र खषइदिएय ५ अदर ने्ी ढु ङेरी जदमरमष परे , ज्षँ धेरै मषटे दिएर; अदर मषटेने गद्रषइ रनएनेसे िी िुर्ै उदमएय ६ िर जब घषम सषगे, ते ओइदसये; र जरष रनएनेसे ते सुदन्षलेय ७ अदर ने्ी नषँ डष्रमष परे , र नषँ डष्र बढे , र तससषा दरसषदसदिए, र तससे फस दिएरय ८ अदर अर्र असस जदमरमष परे , र फस फसषए, उदमए र बढे ; र फस दिए, ने्ी िीस, ने्ी सषठी, र ने्ी सयय ९ अदर उ्षँ से दिरी्रसषा ननुनये, “ जसने सुने नषर छ, तससे सुरेस्य” १० अदर जब उ्षँ एकै ुरु​ुहे, उ्षँ ने वररपरर नएनष बषह जरष पेररि्र र उ्षँ नष चेसष्रसे उ्षँ सषा ते दृष्ने बषरे मष सेधेय ११ अदर उ्षँ से दिरी्रसषा ननुनये, “ दिमी्रसषा परमेशरने रषजने र्स जषन दिइएने छय िर बषद्रनष्रसषा यी सबै नुरष दृष्​्रमष गररहछय १२ िषदन दिरी्रसे ्े रेर िे खूर्, िर िे खूर्, र सुरेर सुरूर्, िर बुझर ू ्, रतिष दिरी्र नुरै पदर समयमष पररवि्र ुरेछर्, र दिरी्रनष पषप्र कमष ुरेछर्य १३ अदर उ्षँ से दिरी्रसषा ननुनये, “ दिमी्रसे ये दृष् बुझिै रछ? अदर नसरी दिमी्रसे सबै दृष्​्र बुझेछछ?” १४ बीउ छर्से वचर छछ् य 2


१५ अदर यी िी ुर् जे बषटेने दनरषरमष छररएनष छर्, ज्षँ वचर छररएने ुहछ; िर जब दिरी्रसे सुहछर्, शैिषर िुर्ै आउँ छ र दिरी्रनष हियमष छररएने वचर सदग्षलछय १६ अदर ढु ङेरी जदमरमष छररएनष्र पदर दयरै ुर्, जससे वचर सुनष िुर्ै खुशीसषि ग्ण गछ् र्य १७ अदर दिरी्रने आफरै जरष ुँ िैर, तसैसे दिरी्र ने्ी समयने सषदग मषत दटकछर्य तसपदछ, जब वचरने नषरणसे नृ वष सिषवट आउँ छ, दिरी्र िुर्ै ठे स खषहछर्य १८ अदर नषँ डष्रमष छररएनष्र दयरै ुर्, जससे वचर सुहछर्, १९ अदर संसषरने दच्ष, धरसमदतने छस र अर नुरष्रने अदनसषषष दनत पसछर् , अदर वचरसषा दरसषदसदिहछर् र ये फस रदिरे ुहछय २० अदर असस जदमरमष छररएनष्र यी रै ुर्, जससे वचर सुहछर्, ग्ण गछ् र् , अदर फस फसषउँ छर्, नुरैसे िीस गुणष, नुरैसे सषठी गुणष, नुरैसे सय गुणषय

सून ष ८:४-१५ ४ अदर जब धेरै मषदरस्र नेसष नए, र ्रे न श्रबषट उ्षँ न्षँ आए, उ्षँ से एउटष दृष् सुरषउरुनये: ५ एउटष बीउ छर् मषदरस आफरे बीउ छर् दरस्े, र उससे छि् गिष् ने्ी बषटेने छे उमष परे , र िी नुललचए, र आनषशनष चरषचुरङी्रसे िी खषइदिएय ६ अदर ने्ी चटषरमष परे ; र उमरे दबदतनै िी ओइदसए, दनरदन तसमष ओस दिएरय ७ अदर ने्ी नषँ डष्रमष परे , र नषँ डष्र पदर तससँगै उदमए, र तससषा दरसषदसदिएय ८ अर्र असस जदमरमष परे , उमे र सय गुणष फस फसषएय अदर यी नुरष्र नदरसनेपदछ उ्षँ से ठूसे सरमष ननुनये, “ जसने सुने नषर छ, तससे सुरेस्य” ९ अदर उ्षँ नष चेसष्रसे उ्षँ सषा सेधे, “ये दृष्ने अि् ने ुर सकछ?” १० अदर उ्षँ से ननुनये, “ दिमी्रसषा परमेशरने रषजने र्स जषन दिइएने छ, िर अर्रसषा दृष्​्रमष, िषदन दिरी्रसे ्े रेर रिे खूर्, र सुरेर रबुझर ू ्य” ११ अब दृष् ये ्े: बीउ परमेशरने वचर ्ेय १२ बषटेने दनरषरमष पर्​्र िी ुर् जससे सुहछर्, िर तसपदछ शैिषर आउँ छ र दिरी्रनष हियबषट वचर खेसेर सैजषहछ, रतिष दिरी्रसे दवशषस गर्छर् र मुलक पषउरेछर्य १३ चटषरमष पर्​्र िी ुर्, जससे वचर सुरेर खुशीसषि ग्ण गछ् र् ; िर दिरी्रने जरष ुँ िैर, जससे ने्ी समयने सषदग दवशषस गछ् र्, र परीकषने समयमष पिर ुहछर्य १४ अदर नषँ डष्रमष परे नष बीउ्र िी ुर्, जे सुहछर्, िर बषद्र दरसहछर् , र यस जीवरनष दच्ष, धर र सुख-चैरमष अललझहछर्, र फस फसषउँ िैरर्य १५ िर असस जदमरमष पर्चषद्ँ िी ुर्, जससे इमषनषर र नसष हियसे वचर सुरेर तससषा जेगषउँ छर् र धैय्सषि फस फसषउँ छर्य

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