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Maithili - The Third Book of the Shepherd of Hermas, which is called His Similitudes

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हरमास के चरवाहा के तेस रऽ ककताब, जेक रा हुकऽ उपमा कहलऽ जाय छै उपमा १ 1 ओ हमरा कहलकिु। अहाँ सभ जुैत छी जे अहाँ सभ जे पभरक सेवक छी, एतय तीि्या​ा​ा जकाँ रहै त छी। कारण, अहाँ क ुगर एकह ुगर सँ बहत दू र अकछ। 2 ते ँ जँ अहाँ सभ अपु ुगर केँ जुैत छी जाकह मे अहाँ सभ रहब, तखु अहाँ सभ एतय ककएक जमीु कीुैत छी आ अपुा केँ साकदद भोजु, भव भवु आ फालतू घरक ववया ककएक करै त छी? ककएक तँ जे एकह ुगर मे ई सभ वसर अपुा केँ समारै त अकछ, से अपु ुगर मे घररर जेबाक कवचार ुकह करै त अकछ। 3 हे मूख्, संकदग आ दयुीय लोक। जे ई ुकह बरझैत अकछ जे ई सभ बात दोसर लोकक अकछ आ दोसरक अकिकार मे अकछ। कारण, एकह ुगरक पभर अहाँ केँ कहै त छकिु। या त हमर कुयमक पालु कर, या हमर शहर स बाहर कुकलू। 4 ते ँ जे अहाँ अपु ुगर मे कोुो कुयमक अिीु छी, अहाँ की करब? की अहाँ अपु समकपक लेल वा ओकह मे सँ कोुो वसरक लेल अपु ववया केँ असीकार क' सकैत छी? मरदा जँ अहाँ एकरा असीकार करब आ बाद मे अपु ुगर मे घररर जायब तँ अहाँ केँ सागत ुकह कयल जायत, बल् कक अहाँ केँ ओतय सँ बकहष्त कयल जायत। 5 ते ँ दे खू जे दोसर दे शक आदमी जकाँ अहाँ अपुा लेल ओकह सँ बेसी ककछर ुकह कऽ सकैत छी जे अहाँ क लेल आवशक आ पया् ा अकछ? आ तैयार रह जे जखु एकह ुगरक परमेश् वर वा पभर अहाँ केँ एकह सँ भगा दे ताह तखु अहाँ हुकर कुयमक कवरोि कऽ अपु ुगर मे जा सकब। जतऽ अहाँ सभ हँ सी-खरशी सँ अपु कुयमक अुरसार कोुो दर ष् टताक संग जीकब सकैत छी। 6 ते ँ अहाँ सभ परमेश् वरक सेवा करकुहार सभ साविाु रह आ हुका मोु मे राखू। आ कुक्ंत रह जे ओ ओकरा सभ केँ अहाँ सभक लेल ुीक बुाओत। जँ अहाँ सभ हुकर आजा सभक पालु करब।”

7 ते ँ जे समकप अहाँ सभ कीुब, ओकर बदला मे जे सभ अभाव मे अकछ, ओकरा सभ केँ ओकर आवशकता सँ मरक कर। कविवा सभ केँ िम् ठहराउ। कपताहीुक काज पर नाय कर। आ अपु िु आ अपु िु एकह तरहक काज मे खच् कर। 8 कारण, परमेश् वर अहाँ सभ केँ एकह लेल सम्द कयलकु जे अहाँ सभ एकह तरहक सेवा सभ केँ पूरा कऽ सकब। ई करब बहत ुीक, जमीु वा घर कीुबासँ बेसी; कारण, एहे ु सभ वसर एकह वत्माु समयक संग ुाश भ’ जायत। 9 मरदा पभरक ुामक लेल जे ककछर करब से अहाँ सभ केँ अपु ुगर मे भेटत आ कबुा कोुो उदासी वा भय केँ आुन्त रहब। ते ँ जाकत-जाकतक िुक लोभ ुकह कर। ककएक तँ ओ सभ परमेश् वरक सेवक सभक लेल कवुाशकारी अकछ। 10 मरदा अपु िु-समकप सँ वापार कर जाकह सँ अहाँ सभ अुन आु् पाकब सकब। 11 ओ वकभचार ुकह कर आ ुे ककरो स् ाी केँ छूउ आ ुे ओकर वासुा कर। मरदा अपु काजक लोभ राखू , तखु अहाँ उदार पाकब जायब।” उपमा २ 1 जखु हम खेत मे जा रहल छलहँ आ एल आ बेल पर कवचार करै त छलहँ आ मुे-मु ओकर फलक बारे मे सोचैत छलहँ तखु एकटा स् वग्दूत हमरा पकट भेलाह आ हमरा कहलकिु। एतेक कदु िरर अहाँ अपुा भीतर की सोचैत छी? 2 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हम एकह बेल आ एकह एल केँ एकह लेल सोचैत छी जे एकर फल सर्र होइत छै क।” ओ हमरा कहलकिु। ई दर ुू गाछ परमेश् वरक सेवक सभक लेल एकटा ुमूुाक रप मे राखल गेल अकछ। 3 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हम ई जाकु चाहै त छी जे अहाँ जे गाछ-व्कक चचा् करै त छी, ओकर पकतरप की अकछ।” सरुू, ओ कहै त छकि। अहाँ ई बेल आ ई एल दे खैत छी। सर, हम कहकलयकु, हम हुका सभ केँ दे खैत छी, 4 ई बेल, ओ कहै त छकि, फलदार होइत अकछ, मरदा एल एकटा एहु गाछ अकछ जकर फल ुकह भेटैत अकछ। तइयो ई बेल जाबत िरर एकह एल दारा सेट ुकह कयल जायत, आ एकह सँ सहारा ुकह दे ल जायत, ता िरर बेसी फल ुकह दे त। मरदा जमीु पर संग-संग पडल रहला पर अिलाह फल भेटैत छलैक, कारण


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

ओ एल पर ुकह लटकल छलैक; जखु कक एल पर सहारा लेला सँ ई अपुा लेल आ ताकह लेल दर ुू तरहे ँ फल दै त अकछ । 5 ते ँ दे खू जे एल बेल सँ कम ुकह, बल् कक बेसी फल दै त अकछ। कोुा सर, हम कहकलयकु, बेल सँ बेसी फल दै त अकछ? कारण, ओ कहलकु, एल पर सहारा दे ल गेल बेल बहत आ ुीक दर ुू फल दै त अकछ; जखु कक जँ जमीु पर संग-संग पडल रहै त त' कम सहु होइत, आ से सेहो बहत बीमार। 6 ते ँ ई उपमा परमेश् वरक सेवक सभक लेल दे खाओल गेल अकछ। आ ई िकुक आ गरीबक पकतकुकिध करै त अकछ। हम उपर दे कलयैक, “महाराज, ई बात हमरा पकट कर।” सरुू, ओ कहलकु; िकुक आदमी के िु छै ; तिाकप पभरक पकत ओ गरीब छकि। ककएक तँ ओ अपु िु-दौलतक कवषय मे उठाओल गेल अकछ आ पभर सँ कम पाि्ुा करै त अकछ। आ जे पाि्ुा ओ करै त छकि से आलसी आ कबुा बल के होइत अकछ | 7 ते ँ जखु िुी लोक गरीब सभक लग जे चीज चाहै त अकछ तकरा हाि बढबैत अकछ तँ गरीब लोक िकुक लोकक लेल पभर सँ पाि्ुा करै त अकछ। परमेश् वर िकुक केँ सभ ुीक चीज दै त छकिु, ककएक तँ गरीब लोक पाि्ुा मे िुी होइत छकि। आ ओकर आगह पर पभरक बहत सामर् छै क। 8 तखु िुी लोक सभ ककछर गरीबक सेवा करै त अकछ, ककएक तँ ओकरा ई बरझल जाइत छै क जे ओकर बात पभरक दारा सरुल जाइत छै क, आ ओ ततेक इचा सँ आ कबुा कोुो संदेहक, ओकरा जे चाही से दऽ दै त छै क, आ धाु राखैत छै क जे ओकरा कोुो चीजक कमी ुकह हो। 9 गरीब लोक िकुक लोकक लेल पभर केँ िनवाद दै त अकछ। कारण ओ सभ अपु दर ुू काज पभर सँ करै त छकि। 10 ते ँ मुरखक संग एल कोुो फल ुकह बरझल जाइत अकछ। आ ओ सभ ई ुकह जुैत छकि आ ुे बरझैत छकि जे ओकर संगकत बेल मे जोडला सँ बेल मे दर गरुा व्नद होइत छै क, अपुा लेल आ एल दर ुू लेल। 11 तकहुा गरीब लोक सभ िकुक लोकक लेल पभर सँ पाि्ुा करै त छकि, हुका सरुल जाइत छकु। आ ओकर िु बकढ जाइत छै क, ककएक तँ ओ सभ अपु िु-दौलत गरीब सभक सेवा करै त अकछ। ते ँ दर ुू गोटे एक दोसराक ुीक काजक भागीदार बुाओल जाइत छकि | 12 ते ँ केओ ई सभ काज करत, ओकरा पभर दारा ुकह छोडल जायत, बल् कक जीवुक परसक मे कलखल जायत। 13 ओ सभ िन अकछ जे िकुक अकछ आ अपुा केँ बढल बरझैत अकछ। उपमा 3 1 फेर ओ हमरा बहत रास गाछ दे खौलकु जकर पात बकह गेल छल आ जे हमरा मररझाएल बरझाइत छल, कारण ओ सभ एक समाु छल। ओ हमरा कहलकिु, “की अहाँ ई गाछ सभ दे खैत छी?” हम कहकलयकु, सर, हम दे खैत छी जे ई सभ सरखल गाछ जकाँ लगैत अकछ। 2 ओ हमरा कहलकिु। ई गाछ सभ वत्माु संसार मे रहकुहार मुरकक समाु अकछ । हम उपर दे कलयकु : सर, ई सभ सरखायल गाछ जकाँ ककएक अकछ ? कारण, ओ कहलकु जे , ुे िम् आ ुे अिम्, एक दोसरा सँ कचनल जाइत अकछ। मरदा एकह वत्माु संसार मे सभ एक समाु अकछ।

3 िम् लोक सभक लेल ई संसार जाड जकाँ अकछ, ककएक तँ ओ सभ ुकह कचनल जाइत अकछ, बल् कक पापी सभक बीच रहै त अकछ। 4 जकहुा जाडक समय मे सभ गाछक पात छूकट गेल अकछ, ओ सरखल गाछ जकाँ होइत अकछ। आ ुे ई बूझल जा सकैत अकछ जे कोु शरष आ कोु हररयर अकछ, ते ँ एकह वत्माु संसार मे ुे िम् आ ुे दर द एक दोसरा सँ भेद कयल जाइत अकछ। मरदा सभ एक समाु अकछ। उपमा ४ 1 फेर ओ हमरा आरो बहत रास गाछ दे खौलकु, जाकह मे सँ ककछर क पात छल आ ककछर सरखायल आ मररझाओल बरझाइत छल। ओ हमरा कहलकिु, “की अहाँ ई गाछ सभ दे खैत छी?” इयाु दे लकु, सर, हम हुका सभ केँ दे खैत छी; .आ ककछर सरखायल, आ ककछर पातसँ भरल। 2 ई गाछ सभ, जे हररयर-हररयर अकछ, से िमा् ा​ा अकछ जे आगामी संसारक माकलक बुत। आबय बला संसार, िम् लोककुक लेल गम् अकछ; मरदा पापी सभक लेल ई जाड अकछ। 3 ते ँ जखु पभरक दया चमकत तखु परमेश् वरक सेवा करकुहार सभ पगट आ सभ केँ सद कयल जायत। ककएक तँ जकहुा गीर मे हरे क गाछक फल दे खाओल जाइत अकछ आ पगट होइत अकछ, तकहुा िम् सभक काज सेहो पचाररत आ पगट होयत आ ओकह संसार मे ओ सभ पसर आ आुन्त भऽ जायत। 4 ककएक तँ दोसर तरहक लोक, अिा् त् दर द, जे गाछ-व्क जकाँ अहाँ सरखायल दे खलहँ, ओकह आु संसार मे ओकहुा सरखल आ फलहीु भेटत। सरखल लकडी जकाँ जरर जायत। आ ई पगट होयत जे ओ सभ अपु जीवु भरर दर ष् ट काज केुे छकि। 5 ओ सभ जरर जेताह, ककएक तँ ओ सभ पाप केुे छकि आ अपु पाप पर प्ाताप ुकह केुे छकि। आरो सभ जाकत जरर जायत, ककएक तँ ओ सभ परमेश् वर केँ अपु स्कदकता् केँ ुकह माु​ुे अकछ। 6 ते ँ अहाँ ुीक फल दे ब जाकह सँ गम् मे अहाँ क फलक पता चलय। आ बहत रास कारोबार सँ अपुा केँ बचाउ, आ अहाँ कोुो आपकप ुकह करब। कारण जे बहत कारोबार मे लागल अकछ, ओ बहत पाप करै त अकछ। ककएक तँ ओ सभ अपु काजिंिा मे डूबल छकि आ परमेश् वरक सेवा ुकह करै त छकि। 7 जे मुरष् य परमेश् वरक सेवा ुकह करै त अकछ, से परमेश् वर सँ ककछर माँ कग कऽ ओकरा कोुा गहण कऽ सकैत अकछ? मरदा जे हुकर सेवा करै त छकि, ओ सभ जे चाहै त छकि से माँ गैत छकि आ गहण करै त छकि। 8 मरदा, जँ ककरो एकोटा बातक पालु करबाक अकछ तँ ओ सेवा कऽ सकैत अकछ भगवाु्, कारण ओकर मु भगवाु् सँ ुकह हकट गेल छै क अकपतर शरद मु सँ ओकर सेवा करै त छै क | 9 ते ँ जँ अहाँ ई काज करब तँ आगामी संसार मे अहाँ केँ फल भेटत। जे सभ एहुे काज करत, से सभ फल दे त।” उपमा 5 1 हम उपवास कऽ कऽ कोुो पहाड पर बैकस कऽ परमेश् वर केँ िनवाद दै त छलहँ जे ओ हमरा संग कयलकु। दे खू, हम ओकह


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

चरबाह केँ दे खलहँ, जे हमरा सँ गप करबाक आदकत छल, हमरा लग बैसल छल आ हमरा कहै त छल जे , अहाँ केँ भोरे -भोर एतय की आकु दे लक? हम उपर दे कलयकु, सर, आइ हम एकटा से शु रखैत छी। 2 ओ उपर दे लकिु, “से शु की होइत छै क? हम जबाब दे कलयकु, वत अकछ। ओ कहलकिु, ओ की वत अकछ? हम उपर दे कलयकु, हम उपवास करै त छी, जेुा हमरा आदकत रहल अकछ। ओ कहलकु जे , अहाँ सभ केँ ई ुकह बरझल अकछ जे परमेश् वरक उपवास की होइत छै क। आ ुे ई उपवास अकछ जे अहाँ सभ उपवास करै त छी, जकरा परमेश् वरक कोुो लाभ ुकह अकछ। 3 सर, हम कहकलयकु, अहाँ केँ ई कोु बात बजबैत अकछ? ओ उपर दे लकिु, “हम ई बात कहै त छी, कारण ई सचा वत ुकह अकछ जे अहाँ सब सोचैत छी जे अहाँ उपवास करै त छी; मरदा हम अहाँ सभ केँ दे खा दे ब जे ओ की अकछ जे पूण् उपवास अकछ आ परमेश् वरक सीकाय् अकछ। 4 ओ कहलकु जे , सरुू, “पभर एहु अुावशक उपवास ुकह चाहै त छकि, ककएक तँ एकह तरहे ँ उपवास कयला सँ अहाँ िाकम्कता मे ककछर ुकह आगू बढबैत छी।” 5 मरदा सत् य उपवास ई अकछ जे अपु जीवु मे कोुो दर ष् टता ुकह कर, बल् कक शरद मु सँ परमेश् वरक सेवा कर। आ ओकर आजाक पालु कर आ ओकर उपदे शक अुरसार चलब, आ ुे कोुो दर द इचा केँ मु मे पवेश करय। 6 मरदा पभर पर भरोसा राखू जे जँ अहाँ ई सभ काज करब आ हुका सँ डरब आ सभ कोुो दर षम् सँ परहे ज करब तँ परमेश् वरक लेल जीकवत रहब। 7 जँ अहाँ ई काज करब तँ एकटा पैघ उपवास आ पभरक लेल सीकाय् उपवास कसद करब। 8 एकह कवषय मे हम अहाँ केँ जे उपमा दे बऽ जा रहल छी, से सरुू। 9 एक गोटे खेतक खेती रखकुहार आ बहत रास ुौकर-चाकर अपु संताुक लेल अपु समकपक एक भाग मे अंगूरक बगीचा लगा दे लकु। 10 दू र-दू रक दे श मे जा कऽ अपु एकटा सेवक केँ चरकु लेलकु, जकरा ओ सभ सँ बेसी कवश् वासपूण् आ अुरमोदु माुैत छलाह। ओकरा आजा दै त जे ओ बेल केँ उठाबकि। जे जँ ओ कररतकि, आ अपु आजा पूरा करकि तँ हुका अपु सतंाता दे बाक वचु दे लकु। आ ुे ओकरा एकहसँ बेसी ककछर करबाक आजा दे लक। आ ते ँ दू रक दे श मे चकल गेलाह। 11 ओ ुोकर हुका पर काज समारलाक बाद ओ अपु माकलक जे आजा दे लकिु से पूरा कयलकु। जखु ओ अंगूरक बगीचा पर खूँटा लगा कऽ ओकरा खरपतवार सँ भरल दे खलक तँ ओ मुे-मु सोचय लगलाह। 12 हमर माकलक जे आजा दे ुे छलाह से हम पूरा कऽ लेलहँ जे आब हम एकह अंगूरक बगीचा केँ खोदब आ जखु ई खोदल जायत तखु ई आओर सर्र होयत। खरपतवार खीच ं ला पर ओ बेसी फल दे त आ खरपतवारक गला ुकह घोंटत। 13 एकह काज मे लाकग कऽ ओ ओकरा खोदलकु आ ओकह मे जे खरपतवार छल तकरा उखाकड लेलकु। आ ते ँ अंगूरक बगीचा बहत सर्र आ सम्द भ' गेल, खरपतवार सँ घरटु ुकह भेल। 14 ककछर समयक बाद अंगूरक बगीचाक माकलक आकब कऽ अंगूरक बगीचा मे जाइत छकि आ दे खलकु जे ओ खूब ुीक जकाँ खूँटा लगा कऽ खोदल गेल अकछ आ ओकह मे राखल खरपतवार उखाकड गेल अकछ आ बेल सभ पुकप रहल अकछ, तखु ओ अपु ुोकरक दे खभाल मे बहत हकष्त भऽ गेलाह।

15 ओ अपु परा केँ बजबैत छलाह, जकरा ओ पेम करै त छलाह, जे हुकर उपराकिकारी बुय बला छलकु, आ अपु कमा कजुका सँ परामश् करबाक आदकत छलकु। ओ ओकरा सभ केँ कहै त अकछ जे ओ अपु ुोकर केँ की करबाक आजा दे ुे छल, आ ओकर सेवक एकह सँ बेसी की केुे छल। ओ सभ तररन ओकह ुोकर केँ बिाई दे लक जे ओकरा अपु माकलक सँ एतेक पूण् गवाही भेटलैक। 16 तखु ओ हुका सभ केँ कहलकिु, “हम एकह सेवक केँ हमरा दारा दे ल गेल आजाक पालु करऽ वला स् वतंाताक वचु दे लहँ । ओ एकरा पालु केलकु आ एकर अकतररक हमर अंगूरक बगीचा मे ुीक काज कयलकु, जे हमरा बहत ुीक लागल अकछ। 17 ते ँ ओ जे काज कयलकु ताकह लेल हम ओकरा अपु बेटाक संग अपु उपराकिकारी बुा दे ब, ककएक तँ ओ ुीक काज दे नख कऽ ओकर उपेका ुकह केलक, बल् कक काज केलक। 18 पभरक ई योजुा हुकर परा आ हुकर कमा दर ुू केँ मंजूर छलकु जे हुकर सेवक हुकर बेटाक संग उपराकिकारी बुकि। 19 एकर ककछर ए कदुक बाद पररवारक माकलक अपु कमा सभ केँ बजा कऽ अपु भोजु सँ ओकह ुोकर केँ कतेको तरहक भोजु पठौलकु। 20 जखु ओ ओकरा सभ मे सँ ओतबे ल’ लेलक जे अपुा लेल पया् ा छल आ शेष सभ केँ अपु संगी ुोकर सभक बीच बाँ कट दे लक। 21 ओ सभ जखु ओ सभ पाकब गेलाह तखु ओ सभ आुन्त भऽ गेलाह। आ चाहै त छल जे हुका सभक संग जे ककछर कयलकु ताकह लेल हुका अपु माकलकक आरो बेसी अुरगह भेकट जाय। 22 जखु हुकर माकलक ई सभ बात सरकु कऽ फेर सँ बहत आुन्त भऽ गेलाह। अपु संगी-सािी आ बेटा केँ फेर सँ बजा कऽ हुका सभ केँ कहलकिु जे हुकर ुोकर हुका सभ केँ पठाओल भोजुक संग की केुे छल। 23 ते ँ ओ सभ घरक माकलक केँ ओतेक बेसी सहमत भेलाह। ओकरा अपु बेटाक संग ओकह ुोकर केँ अपु उपराकिकारी बुाबय पडतैक। 24 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, जाबत अहाँ सभ हमरा बरझा ुकह दे ब, ताबत िरर हम ई सभ उपमा ुकह जुैत छी आ ुे बरकझ सकैत छी।” ओ कहै त छकि जे हम अहाँ सँ जे ककछर गप केलहँ वा अहाँ केँ दे खा दे लहँ , से सभ बात अहाँ केँ बरझा दे ब। 25 परमेश् वरक आजाक पालु कर आ अहाँ केँ स् वीकार कयल जायत आ हुकर आजाक पालु करयवला सभक संखा मे कलखल जायत। मरदा जँ पभरक आजाक अकतररक जँ अहाँ ककछर ुीक बात जोडब। अहाँ अपुा लेल एकटा पैघ मया् दा कीुब, आ पभरक पकत जतेक अुरगह मे रहब, ओकह सँ बेसी अुरगह मे रहब। 26 ते ँ जँ अहाँ पभरक आजा सभक पालु करब आ ओकरा सभ मे ई सभ याु जोडब तँ अहाँ आुन्त होयब। मरदा खास कऽ जँ अहाँ हमर आजाक अुरसार ओकरा सभ केँ पालु करब।” 27 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, अहाँ हमरा जे ककछर आजा दे ब, से हम पालु करब। हम जुैत छी जे अहाँ हमरा संग रहब।” हम, ओ कहलकु, अहाँ क संग रहब जे एहु संकल लेुे छी; आ हम सभ ओकह सभक संग रहब जे एकह तरहक उदे श रखैत छकि। 28 ओ कहै त छकि जे अहाँ पभरक आजाक पालु सेहो करै त छी, ई वत बहत ुीक अकछ। एकह तरहे ँ ओतय होयत। ते ँ अहाँ एकरा राखू।


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

29 सबसँ पकहुे अपुा पर साविाु रह, आ हर 1 दर द काज सँ, हर गंदा वचु सँ आ हर आहत करयवला इचा सँ अपुा केँ बचाउ। आ अपु मोु केँ एकह वत्माु संसारक समस वि्ता सँ शरद कर। जँ अहाँ एकह सभ बातक पालु करब तँ ई वत उकचत होयत। 30 ते ँ एकह तरहे ँ कर। पकहुे जे कलखल गेल अकछ से पूरा कऽ कऽ जे कदु अहाँ उपवास करब ताकह कदु रोटी-पाकु छोकड ककछर ुकह चखब। आु कदु जे भोजु करबाक आदकत अकछ ओकर गणुा कए ओकह कदु जे खच् करबाक चाही छल से एक कात रानख कविवा, अुाि आ गरीब केँ दऽ दे ब। 31 आ एकह तरहे ँ अहाँ अपु आा​ाक अपमाु केँ कसद करब। जे ककयो एकह मे सँ गहण करै त अकछ, से अपु पाण केँ संतरद करय, आ ओकर पाि्ुा अहाँ क लेल पभर परमेश् वरक समक आकब जाय।” 32 ते ँ जँ अहाँ एकह तरहे ँ अपु वत पूरा करब, जेुा हम अहाँ केँ आजा दै त छी, तँ अहाँ क बकलदाु पभरक लेल सीकाय् होयत आ अहाँ क वत हुकर परसक मे कलखल जायत। 33 ई से शु, जे एकह तरहे ँ कयल गेल अकछ, ुीक आ मुभावु अकछ, आ पभरक सीकाय् अकछ। जँ अहाँ अपु बचा सभक संग आ अपु घरक समस लोकक संग एकह सभ बातक पालु करब तँ अहाँ सरखी रहब। 34 जे केओ ई सभ बात सरकु कऽ ओकरा सभ केँ पूरा करत, ओ सभ सेहो सरखी होयत। ओ सभ जे ककछर पभर सँ माँ गताह से ओ सभ पाकब लेताह।” 35 हम हुका सँ पाि्ुा कयलकु जे ओ हमरा खेत, पभर , अंगूरक बगीचा आ अंगूरक बगीचा पर खूँटा लगेकुहार ुौकरक समाुता बरझाबकि। आ अंगूरक बगीचा मे जे खरपतवार उखाडल गेल छल, ताकह मे सँ। आ अपु बेटा आ अपु कमाक जेकरा ओ अपुा संग पररषद् मे ल' लेलक। कारण हम बरझैत छी जे से उपमा छल। 36 ओ हमरा कहलकिु, “अहाँ बहत साहसपूव्क माँ गैत छी, ककएक तँ अहाँ केँ कोुो बात ुकह माँ गबाक चाही। ककएक तँ जँ अहाँ केँ ई दे खब उकचत होयत तँ अहाँ केँ दे खाओल जायत।” 37 हम हुका उपर दे कलयकु। सर, अहाँ हमरा जे ककछर दे खा दे ब, कबुा हमरा बरझेुे, हम ओकरा विय दे खब, जँ हम ुकह बरझब जे ई की अकछ। आ जँ अहाँ कोुो उपमा पसाव दे ब आ ओकरा वाखा ुकह करब तँ हम वि् सरुब। 38. ओ हमरा फेर उपर दे लकिु, जे केओ परमेश् वरक सेवक अकछ आ ओकर हदय मे पभर अकछ, ओ ओकरा बरझबाक इचा करै त अकछ आ ओकरा गहण करै त अकछ। आर हर उपमा के वाखा करै छै , आरो पभर के वू शब समझै छै जेकरा पर पूछताछ के जररत छै । 39 मरदा जे सभ आलसी आ पाि्ुा करबा मे दे री करै त छकि, से सभ पभर सँ खोजबा मे शंका करै त छकि। यदकप पभर एतेक असािारण भलाईक छकि जे हुका सँ माँ गकुहार सभ केँ कबुा रकुे सभ ककछर दऽ दै त छकिु। 40 ते ँ अहाँ जे ओकह आदरणीय दू त सँ बल पाकब गेल छी आ पाि्ुाक एहु शनकशाली वरदाु पाकब गेल छी। आलसी ुकह छी, ते ँ आब पभर सँ बरझबाक बात ककएक ुकह माँ गैत छी आ ओकरा गहण करै त छी? 41 हम हुका कहकलयकु। हम अहाँ केँ उपनयत छी, ते ँ ई जररी अकछ जे हम अहाँ सँ एकरा ताकब आ अहाँ सँ माँ गब। कारण, अहाँ हमरा सभ ककछर दे खाबैत छी आ जखु अहाँ उपनयत रहै त छी तखु हमरा सँ गप करै त छी।

42 मरदा अहाँ ुकह रहला पर जँ हम ई सभ बात दे खब वा सरुब तऽ हम पभर सँ माँ गब जे ओ हमरा ई सभ बात कहकि। 43 ओ उपर दे लकिु, “हम ककु पकहुे कहुे रही जे अहाँ सूक आ साहसी छलहँ , कारण अहाँ एकह उपमा सभक अि् पूछैत छी।” 44 मरदा अहाँ एखुो कजद पर अकडग छी, ते ँ हम अहाँ केँ ई ददान खोलब जे अहाँ चाहै त छी। 45 ओ कहलकु जे , सरुू आ बरझ।ू पकहुे जे खेत कहल गेल अकछ ओ पूरा िरती के दशा् बैत अकछ | खेतक सामी ओ छकि जे सभ वसरक स्जु आ समा​ा केलकु, आ ओकरा सभ केँ गरण दे लकु। 46 हुकर परा पकवा आत् मा छकि, सेवक परमेश् वरक परा छकि, अंगूरक बगीचा ओ लोक अकछ जकरा ओ उदार करै त छकि। दाँ व ओ दू त अकछ जे पभर ओकरा सभ पर अपु लोकक भरण-पोषण करबाक लेल लगा दे ुे छकि। अंगूरक बगीचा मे सँ जे खरपतवार उखाडल जाइत अकछ, से ओ पाप अकछ जे परमेश् वरक सेवक सभ केुे छल। 47 भोजुक बाद जे भोजु पठौलकु से ओ आजा अकछ जे ओ अपु पराक दारा अपु लोक सभ केँ दे लकु। जे कमा लोककु केँ ओ अपुा संग परामश् करबाक लेल बजौलकु, ओ पकवा सग्दूत छकि कजुका ओ पकहुे बुौुे छलाह | घरक माकलकक अुरपनयकत, ओ समय अकछ जे ओकर आगमु िरर बाँ की अकछ । 48 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, ई सभ बात बहत ुीक, अद् भरत आ ुीक अकछ।” मरदा, हम आगू बढलहँ, की हम वा एकर अकतररक कोुो आु आदमी भले ककहयो एतेक बरनदमाु ुकह हो, ई सभ बात बरकझ सकैत छलहँ ? 49 ते ँ आब सर, हमरा कह जे हम की पूछैत छी। ओ उपर दे लकु, हमरा सँ पूछू जे अहाँ की चाहै त छी। हम कहकलयकु, एकह ददान मे परमेश् वरक परा केँ सेवकक याु पर ककएक राखल गेल अकछ? 50 ओ कहलकु जे, सरुू। परमेश् वरक परा केँ सेवकक दशा मे ुकह, बल् कक बहत सामि्​् य आ अकिकार मे राखल गेल अकछ। हम हुका कहकलयकु 'कोुा सर? हम ुकह बरझैत छी।' 51 ओ कहलकु जे, परा अपु दू त सभ केँ ओकह सभ पर रानख दे लकिु, जकरा सभ कपता हुका सौंपुे छलाह, जाकह सँ ओ सभ एक-एकटाक पालु करकि। मरदा ओ सयं बहत पररशम कयलकु आ बहत कद भोगलकु जाकह सँ ओ हुका लोककुक अपराि केँ मेटा सककि। 52 ककएक तँ कोुो अंगूरक बगीचा कबुा बेसी शम आ कदक खोदल ुकह जा सकैत अकछ। एकह लेल ओ अपु पजा सभक पाप सभ केँ मेटा कऽ ओकरा सभ केँ जीवुक बाट दे खौलकु आ ओकरा सभ केँ ओ िम् -कुयम दे लकिु जे ओकरा कपता सँ भेटल छल। 53 ओ कहलकु जे , अहाँ सभ दे खैत छी जे ओ अपु लोकक पभर छकि, आ हुका अपु कपता सँ समस सामर् भेटलकु। मरदा परमेश् वर अपु परा केँ उपराकिकार आ ुीक स् वग्दूत सभक बँटवारा मे ककएक कवचार कयलकु, से एखु सरुू। 54 ओकह पकवा आत् मा केँ जे सभ सँ पकहुे स्कजत कयल गेल छल, ओ ओकह शरीर मे रानख दे लकु जाकह मे परमेश् वर रहताह। अिा् त कोुो चरुल दे ह मे, जेुा ओकरा ुीक लागल। ते ँ ई शरीर जाकह मे पकवा आत् मा आुल गेल छल, ओकह आत् माक सेवा करै त छल, उकचत आ शरद कवुमता मे चलैत छल। आ ुे ओकह आा​ा केँ ककहयो अशरद ुकह कयलकु।


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

55 ते ँ शरीर सभ कदु पकवा आत् माक आजा माुैत छल आ हुका संग उकचत आ शरदतापूव्क पररशम करै त छल आ ुे ककहयो डगमगाइत छल। ओ शरीर िाकक गेल छल, सचमरच दासतापूव्क गप-सप करै त छल, मरदा पकवा आा​ाक संग परमेश् वरक समक पबलतापूव्क अुरमोकदत भ' क' हुका सीकार कयल गेल छल। “ ते ँ ओ अपु परा आ ुीक स् वग्दूत सभ केँ सलाह दे बाक लेल बजौलकु जे एकह शरीर केँ कोुो तरहे ँ ठाढ रहबाक याु दे ल जाय जे कुद्ष पकवा आत् माक सेवा केुे छल। कही ं ई ुै बरझाय जे अपु सेवाक फल गमा लेुे हो। 57 ककएक तँ शरद शरीर केँ ओकर फल भेटतैक। जे कुद्ष भेटैत अकछ, जाकह मे पकवा आा​ा केँ कुवास करबाक लेल कुयरक कयल गेल अकछ। आ एकह तरहे ँ अहाँ सभ लग आब एकह ददानक सेहो वाखा अकछ। 58 सर, हम कहकलयकु, आब अहाँ क अि् बरकझ गेलहँ , जखु कक ई वाखा सरुलहँ अकछ। ओ कहलकु जे , आगू सरुू, अपु शरीर केँ साफ आ शरद राखू , जाकह सँ ओकह मे रहयवला आत् मा एकर गवाही दे त आ अहाँ क संग छल जेबाक नाय कयल जाय। “ जँ अहाँ अपु शरीर केँ अशरद करब तँ पकवा आत् मा केँ सेहो अशरद करब। जँ पकवा आत् मा केँ अशरद करब तँ अहाँ जीकवत ुकह रहब।” 60 हम कहकलयकु, “अजाुताक कारणे ँ ई बात पकहुे सँ भऽ गेल रहै त तऽ की होयत। जे एकह तरहे ँ अपु शरीर केँ अशरद कयुे छकि, से कोुा उदार पाकब सकैत छकि? 61 ओ उपर दे लकिु, “मुरखक पूव्क कम् जे अजाुताक कारणे ँ कयलकु अकछ, तकर उपाय परमेश् वर मा​ा दऽ सकैत छकि। ककएक तँ सभटा सामि्​् य हुके छकु। 62 मरदा आब अपुा केँ सररककत राखू। परमेश् वर सव्शनकमाु आ दयालर छकि तँ ओ अहाँ क पकहुे जे गलत काज केुे छी तकर उपाय दे किु, जँ आगामी समय लेल अहाँ अपु शरीर आ आत् मा केँ अशरद ुकह करब। 63 ककएक तँ ओ सभ एक संग संगी छकि, एक गोटे केँ अशरद ुकह कएल जा सकैत अकछ, मरदा दोसर सेहो अशरद होयत। ते ँ दर ुू गोटे केँ शरद राखू , तखु अहाँ परमेश् वरक लेल जीकवत रहब।” उपमा 6 1 हम घर मे बैसल रही आ जे ककछर दे खलहँ ताकह लेल परमेश् वरक सरकत कऽ रहल छलहँ । आजा सभक कवषय मे सोकच रहल छल जे ओ सभ अतकिक ुीक, पैघ, आ ईमाुदार आ सरखद अकछ। आ जे मुरष् य केँ उदार मे पहँ चा सकल। हम अपुा भीतर एकह तरहे ँ कहकलयकु; जँ हम एकह आजा सभक अुरसार चलब तँ हम सरखी रहब आ जे ककयो एकह सभ मे चलत से परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। 2 जखु हम अपुा भीतर एकह बात पर बाकज रहल छलहँ तखु हम हुका दे खलहँ जे हमरा पकहुे दे खबाक आदकत छलकु, जे हमरा लग बैसल छकि। ओ हमरा एकह तरहे ँ बजलाह। 3 हम जे आजा अहाँ केँ दे ुे छी, ताकह मे अहाँ केँ की संदेह अकछ? ओ सभ ुीक अकछ, संदेह ुकह कर, मरदा पभर पर भरोसा कर, आ अहाँ ओकरा सभ मे चलब। कारण, हम अहाँ केँ ओकरा सभ केँ पूरा करबाक लेल सामर् दे ब।”

4 ई आजा सभ ओकह पापक लेल लाभदायक अकछ जे पकहुे जे पाप केुे छल, ताकह पर प्ाताप करत। जँ आगामी समयक लेल ओ सभ ओकह मे ुकह रहताह। 5 ते ँ अहाँ सभ जे केओ प्ाताप करै त छी, वत्माु संसारक ुटखटता केँ अहाँ सभ सँ दू र कऽ कदअ। आ सभ सद् गरण आ िाकम्कता पकहरब आ एकह तरहे ँ अहाँ सभ एकह आजा सभक पालु कऽ सकब। आ आब सँ पाप ुकह। 6 जँ अहाँ सभ आगामी समय सँ पाप सँ अपुा केँ सररककत राखब तँ अहाँ सभ अपु पूव्क पापक बहत रास पाप केँ काकट दे ब। हमर आजा मे चलू, तखु अहाँ सभ परमेश् वरक लेल जीकवत रहब। 7 ई बात ककह कऽ ओ जोकड दे लकिु। हम सभ खेत मे जाउ, आ हम अहाँ केँ बरदक चरबाह दे खा दे ब।” हम जबाब दे कलयकु सर, चलू। 8 हम सभ एकटा खेत मे पहँ चलहँ आ ओतऽ ओ हमरा एकटा चरबाह केँ दे खौलकु जे ुीक जकाँ सजल छल आ बैगुी रं गक वस पकहरुे छल। ओ पैघ-पैघ झरंड केँ पोसैत छलाह। ओकर बरद सभ आु् सँ भरल छल, आ बहत आु् आ पसरता सँ भरल छल। आ ओ सभ लंघैत एमर-ओमर दौडल। 9 चरबाह अपु भेड ँ ा मे बहत त्ा भऽ गेलाह। ओकह चरबाहक चेहरा हँ समरख छल, जे अपु झरंडक बीच ऊपर-ुीचाँ दौडै त छल। 10 तखु स् वग्दूत हमरा कहलकिु, “की अहाँ एकह चरबाह केँ दे खैत छी?” हम उपर दे कलयकु सर, हम हुका दे खैत छी। ओ हमरा कहलकु, ई आु् आ भोगक 3 दू त छकि। ते ँ ओ परमेश् वरक सेवक सभक मु केँ भद कऽ दै त छकि आ ओकरा सभ केँ बहतो भोग मे आुन्त करै त सत सँ मोकड दै त छकि आ ओ सभ ुाश भऽ जाइत छकि। 11 ककएक तँ ओ सभ जीकवत परमेश् वरक आजा केँ कबसरर जाइत छकि आ कवलाकसता आ वि् भोग मे रहै त छकि आ दर द स् वग्दूत दारा ुद भऽ जाइत छकि। आ दोसरकेँ एकटा खसैत दू र िरर। 12 हम उपर दे कलयैक। हम ुकह बरझैत छी जे अहाँ क की कहबाक मतलब अकछ, जे अहाँ म्तर िरर कहब आ खकस पडब। सरुू, कहै त छकि; ई सभ भेड ँ ा जे अहाँ बहत आुन्त दे खलहँ , से सभ एहु अकछ जे परमेश् वर सँ सदाक लेल कवदा भऽ गेल अकछ आ वत्माु समयक काम-वासुा मे अपुा केँ समकप्त कऽ दे लक। 13 ते ँ हुका सभ केँ जीवु मे प्ाताप करबाक कारणे ँ घररर कऽ ुकह आओत। ककएक तँ ओ सभ अपु आु पाप मे ई बात जोकड दे लकु जे ओ सभ पभरक ुामक कु्ा कयलकु। एकह तरहक लोक सभ म्तरक लेल कुयरक होइत छकि | 14 मरदा जे भेड ँ ा अहाँ उछलैत ुकह, बल् कक एक ठाम भोजु करै त दे खलहँ, से एहु अकछ जे भोग-कवलास आ भोग-कवलास मे अपुा केँ समकप्त कऽ लेुे अकछ। मरदा पभरक कवरद कोुो दर ष् ट बात ुकह कहलहँ । 15 ते ँ ई सभ मा​ा सत् य सँ हकट गेल छकि आ प्ाताप करबाक लेल हुका सभक लेल आशा जमा कयल गेल अकछ। कारण, एहु खसब एखुो ुवीकरणक ककछर आशा बचल अकछ। मरदा जे मरर गेल अकछ, से सभ सदा-सदा लेल चकल गेल अकछ। 16 फेर हम सभ कुेक आगू बढलहँ । आ हमरा एकटा पैघ चरबाह दे खौलकु, जकरा जेुा दे हाती आक्कत छल, उजर बकरीक चमडा पकहरुे, कान पर झोरा, आ हाि मे गाँ ठ सँ भरल


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

लाठी, आ बहत कठोर, आ दोसर हाि मे चाबरक; हुकर चेहरा कठोर आ खटा छलकु। एतेक जे मुरक केँ डरा सकैत अकछ; एहु छल ओकर ुजरर। 17 ओकह यरवा चरबाह सँ एहु भेड ँ ा ल’ लेलकु जे भोग-कवलास मे रहै त छल, मरदा ऊपर-ुीचा ुकह करै त छल। आ ओकरा सभ केँ काँ ट-काँ ट-काँ ट सँ भरल एकटा खास खडा चटाुी जगह मे भगा दे लक, एतेक जे ओकरा सभ सँ मरक ुकह भ' सकल। 18 मरदा ओकरा सभ मे ओझराएल, काँ ट-काँ ट-काँ ट खाइत छल आ ओकर कोडा सँ बहत कद दे ल गेल। कारण, ओ एखुो ओकरा सभ केँ आगू बढबैत छल, आ ओकरा सभ केँ ठाढ हे बाक कोुो याु आ समय ुकह दै त छल। 19 जखु हम हुका सभ केँ एतेक कूर कोडा मारल आ कद कयल गेल दे खलहँ तँ हुका सभक लेल दर खी भऽ गेलहँ । कारण, ओकरा सभ केँ बहत कद दे ल गेल छलैक, आ ुे ओकरा सभ केँ कोुो कवशाम भेटल छलैक। 20 हम ओकह चरबाह केँ कहकलयकु जे हमरा संग छल। सर, ई कूर आ अदम चरबाह के अकछ, जे एकह बरद सभक पकत कोुो करणाक संग भावरक होइत अकछ? ओ उपर दे लकिु, “ई चरबाह सपे पकवा स् वग्दूत मे सँ एक अकछ, मरदा पापी सभक सजाय लेल कुयरक कयल गेल अकछ।” 21 ते ँ परमेश् वर सँ भटकल लोक सभ हुका छोकड दे ल गेल अकछ। एकह कारणे ँ ओ सभ एक-एक केँ अपु मरभूकमक अुरसार कूर आ तरह-तरह केर पीडाक सजा दै त छकि | 22 सर, हम कहकलयकु, हम बरकझ जायब जे ई सभ केहु पीडा होइत छै क जे सभ केँ होइत छै क? सरुू, ओ कहलकु; कतेको पीडा आ यातुा ओ अकछ जे पररष अपु वत्माु जीवु मे रोज गरजरै त अकछ । ककछर गोटे केँ ुरकसाु होइत छकु; दोसर गरीबी; दोसर गोताखोर बीमारी। ककछर गोटे अशां त छकि; दोसरोॅ केॅ जे अयोग छै , ओकरा से चोट लगै छै ; दोसर कतेको आु परीका आ असरकविा मे पडै त अकछ। 23 ककएक तँ बहतो लोक अशरद योजुा बुा कऽ बहत रास काज चाहै त छकि, मरदा एकह सँ हुका सभ केँ कोुो फायदा ुकह होइत छकु। आ कहै त छकि जे हुका लोककु केँ अपु उपकम मे सफलता ुकह भेटलकु अकछ। 24 ओ सभ अपु अिलाह काज केँ मोु मे ुकह लैत छकि आ पभरक कशकायत करै त छकि। जखु एकह लेल हुका सभ केँ तरह-तरह केर परे शाुी आ असरकविा भ' गेल हे तकु। तखु ओ सभ ुीक कशकाक लेल हमरा हाि मे सौंपल जाइत छकि, आ पभरक कवश् वास मे दढ भ' जाइत छकि, आ अपु सभ कदु शरद मु सँ पभरक सेवा करै त छकि। 25 जखु ओ सभ अपु पाप पर प्ाताप करय लगैत छकि तखु ओ सभ अपु गलत काज सभ केँ मोु पाडै त छकि आ परमेश् वरक आदर करै त छकि जे , “ओ एकटा नायी नायािीश छकि, आ हुका सभ केँ अपु काजक अुरसार सभ ककछर कद भोगबाक हकदार छकि।” 26 तखु ओ सभ अपु जीवुक जे ककछर बचल अकछ, तकरा लेल ओ सभ शरद मोु सँ परमेश् वरक सेवा करै त छकि। आ अपु सभ काज मे सफलता पाकब लैत छकि आ जे ककछर चाहै त छकि से पभर सँ गहण कर। 27 तखु ओ सभ पभर केँ िनवाद दै त छकि जे ओ सभ हमरा सौंपल गेलाह। आ ुे बेसी कूरताक भोग करै त छकि। 28 हम हुका कहकलयकु। सर, हम एखुो अहाँ सँ कवुती करै त छी जे आब हमरा एकटा बात दे खा कदयौक। ओ कहलकु, अहाँ

की पूछैत छी? हम हुका कहकलयकु; की ओ सभ परमेश् वरक भय सँ कवरक छकि, ओकह समयक लेल तडपैत छकि जखु ओ सभ अपु कमरा आु् आ भोगक भोग कयलकु? ओ हमरा उपर दे लकु : एककह समयक लेल ओ सभ तडपैत छकि । 29 हम हुका कहकलयकु। तखु ओकरा सभ केँ यातुा दे ल जाइत छै क मरदा कम; जखु कक परमेश् वर केँ कबसरर जेबाक लेल अपु भोगक भोग करै त छकि, हुका सभ केँ सात गरुा बेसी दं ड सहबाक चाही। 30 ओ हमरा उपर दे लकिु। अहाँ मूख् छी, आ ुे एकह दणक पभावशीलता बरझैत छी। हम हुका कहकलयकु; सर, जँ हम बरकझ गेलहँ तँ अहाँ क इचा ुकह होइत जे अहाँ हमरा कहब। 31 ओ कहलकु जे, सरुू आ ई जाकु कलअ जे दर ुूक बल की होइत छै क, भोग आ दण दर ुूक। एक घंटाक सरख अपुकह याुक भीतर समा​ा भ' जाइत छै क; मरदा एक घंटाक सजाक पभाव तीस कदुक होइत छै क | ते ँ केओ एक कदुक लेल अपु कमरा पसरता मे भोगैत अकछ आ एक कदु तडपैत अकछ। कक एक कदु के सजा पूरा साल के जगह के बराबर छै । 32 एकह तरहे ँ दे खू जे केओ कतेक कदु अपु भोग-कवलासक पाछाँ लागैत अकछ, ताकह लेल ओकरा एतेक वष्क सजा भेटैत छै क। ते ँ अहाँ दे खैत छी जे कोुा सां साररक भोगक समय मा​ा छोट अकछ; मरदा पीडा आ यातुाक बहत बेसी। 33 हम उपर दे कलयैक। सर, एतेक िरर जे एकह सभ सरख-दर खक समय मे हमरा ुकह बरझल अकछ; हम अहाँ सभसँ कवुती करै त छी जे अहाँ हुका सभक कवषयमे अपुाकेँ बेसी सद रपसँ बरझाबी। ओ हमरा उपर दे लकु जे ; तोहर मूख्ता एखुो तोरा पर कचपकल अकछ। 34 की अहाँ केँ अपु मु केँ शरद कय परमेश् वरक सेवा ुकह करबाक चाही? साविाु रह जे जखु अहाँ क समय पूरा भ' जायत तखु अहाँ एखुो अबरनदमाु ुकह पाकब जायब। तखु जेुा चाहै त छी, सरुू, जाकह सँ अहाँ ओतबे सहजता सँ बरकझ सकब। 35 जे एक कदु अपु भोग-कवलास आ भोग-कवलास मे अपुा केँ समकप्त कऽ दै त अकछ आ जे ककछर चाहै त अकछ से करै त अकछ, ओ बहत मूख्ता सँ भरल अकछ आ ुे अपु काज केँ बरझैत अकछ, मरदा दोसर कदु कबसरर जाइत अकछ जे ओ एक कदु पकहुे केुे छल। 36 ककएक तँ आु् आ सां साररक भोग ओकरा सभ मे जकड जमा लेुे मूख्ताक कारणे ँ मोु मे ुकह राखल जाइत अकछ। मरदा जखु एक कदु मुरक पर पीडा आ यातुा अबैत छै क तखु ओ असल मे ओकर बाद भरर परे शाु भ' जाइत छै क; कारण ओकर सजा ओकर स्कत मे दढ रहै त छै क | 37 ते ँ ओ साल भरर दर ःख सँ मोु पाडै त रहै त छकि। आ तखु अपु वि् सरख आ आु् केँ मोु पाडै त अकछ, आ बरझैत अकछ जे ताकह लेल ओकरा सजा भेटल छलैक। 38 जे केओ एहु भोग मे अपुा केँ सौंपैत अकछ, ओकरा एकह तरहे ँ दं कडत कयल जाइत छै क। कारण जखु हुका सभ केँ जीवु भेटलकु तखु ओ सभ अपुा केँ म्तरक पा​ा बुा दे लकु। 39 हम हुका कहकलयकु। सर, कोु-कोु सरख आहत करयवला होइत छै क? ओ उपर दे लकिु; जे हर आदमी के लेल पसरता होइत छै क जे ओ सेचा सँ करै त अकछ। 40 ककएक तँ कोकित मुरष् य अपु राग केँ त्ा करै त ओकह मे पसरता बरझैत अकछ। आ तकहुा वकभचारी आ शराबी; कुंदा करयवला आ झूठ बाजकुहार; लोभी आ ठक। आ जे ककयो एकह


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

तरहक कोुो काज करै त अकछ, कारण ओ अपु दर द सभावक पालु करै त अकछ, ओकरा एकह काज मे संतरकद भेटैत अकछ। 41 ई सभ भोग आ भोग परमेश् वरक सेवक सभक लेल आहत करै त अकछ। एकह कारणे ँ हुका सभ केँ यातुा दे ल जाइत छकु आ सजाय भोगय पडै त छकु। 42 एहु भोग सभ सेहो अकछ जे मुरष् य केँ उदार दै त अकछ। बहतो गोटे क लेल जखु ुीक काज करै त छकि तखु ओकह मे सरख भेटैत छकि आ ओकर आु् सँ आककष्त भ' जाइत छकि । 43 ई सरख परमेश् वरक सेवक सभक लेल लाभकारी होइत अकछ आ एहु लोक सभ केँ जीवु दै त अकछ। मरदा ओ आहत सरख, जे पकहुे कहल गेल छल, यातुा आ दण दै त अकछ | 44 जे केओ ओकरा सभ मे रहत आ अपु काज सँ प्ाताप ुकह करत, ओ अपुा पर म्त् यर आुत। उपमा 7 1 ककछर कदुक बाद हम वैह वनक केँ दे खलहँ जे पकहुे हमरा सँ गप केुे छल, ओही खेत मे, जाकह मे हम ओकह चरबाह सभ केँ दे खुे रही। ओ हमरा कहलकिु। अहाँ की चाहै त छी? 2 सर, हम कहकलयकु, हम अहाँ सभ सँ कवुती करय लेल आयल छी जे अहाँ ओकह चरबाह केँ आजा कदअ जे दं डक सेवक छकि, जे ओ हमरा घर सँ बाहर कुककल जाय, ककएक तँ ओ हमरा बहत कद दै त छकि। 3 ओ उपर दे लकिु, “अहाँ क लेल असरकविा आ कद सहब आवशक अकछ। ककएक तँ ओ ुीक स् वग्दूत अहाँ क कवषय मे आजा दे लकु अकछ, ककएक तँ ओ अहाँ क परीका चाहै त अकछ। 4 सर, हम कहकलयकु। हम एतेक पैघ अपराि की केलहँ जे हमरा एकह दू त लग पहँ चा दे ल जाय? सरुू, ओ कहलकु: अहाँ सचमरच बहत पापक दोषी छी, तइयो एतेक ुकह जे अहाँ एकह दू तक हाि मे सौंपल जाय। 5 मरदा तोहर घर मे बहत पाप आ अपराि कयल गेल अकछ, आ ते ँ ओ ुीक दू त हुका सभक काज सँ दर खी भ’ क’ आजा दे लकु जे ककछर समय िरर अहाँ केँ कद भोगय पडत। ताकक दर ुू गोटे अपु काज पर प्ाताप करकि आ एकह संसारक सभ कामवासुा सँ अपुा केँ िो सककि। 6 जखु ओ सभ प्ाताप कऽ कऽ शरद भऽ जेताह तखु ओ दू त जे अहाँ क दं ड पर कुयरक छकि, अहाँ सँ कवदा भऽ जेताह। 7 हम हुका कहकलयकु। सर, जँ ओ सभ एहु ववहार केुे छकि जे ओकह ुीक परी केँ कोकित क' दे लक, तइयो हम की केलहँ? ओ उपर दे लकिु, जाबत िरर अहाँ जे पररवारक मरनखया छी, ताबत िरर ओ सभ कद ुकह उठा सकैत छी। 8 ककएक तँ अहाँ जे ककछर कष् ट भोगब, तकरा ओकरा सभ केँ बरझय पडतैक। मरदा जा िरर अहाँ ुीक जकाँ याकपत रहब ता िरर हुका सभ केँ कोुो तरहक परे शाुी ुकह भ' सकैत छकु। 9 हम उपर दे कलयकु; मरदा, माकलक, दे खू, ओहो सभ आब पूरा मोु सँ प्ाताप क' रहल छकि। हम जुैत छी, ओ कहै त छकि, जे ओ सभ मोु सँ प्ाताप करै त छकि; मरदा की अहाँ सोचैत छी जे हुका सभक अपराि जे प्ाताप करै त अकछ, से तररन मेटा जाइत अकछ? 10 ुकह, ओ सभ एखु ुकह अकछ। मरदा जे प्ाताप करै त अकछ, तकरा अपु पाण केँ दर ःनखत करबाक चाही आ अपु सभ काज मे अपुा केँ कवुमता दे खाबय पडतैक, आ अुेक तरहक परे शाुी मे पडय पडतैक।

11 जखु ओ सभ ककछर कष् ट कऽ लेताह जे हुका लेल कुिा् ररत कयल गेल छलकु। तखु शायद जे ओकरा बुौुे छल, आ एकर अकतररक सभ वसर बुौलक, ओकरा पकत दया आकब जायत आ ओकरा ककछर उपाय भेटतैक। आ खास क' जँ ओ अपु हदय केँ, जे प्ाताप करै त अकछ, हर दर द काज सँ शरद बरझत। 12 मरदा एखु अहाँ आ अहाँ क घरक लेल दर खी रहब उकचत अकछ। आ तोरा बहत परे शाुी सहु करब आवशक अकछ, जेुा पभरक स् वग्दूत जे अहाँ केँ हमरा सौंपुे छकि, आजा दे ुे छकि। 13 बल् कक पभर केँ िनवाद कदयौक, ककएक तँ ई जाकु कऽ जे आबय बला बात जाकु कऽ ओ अहाँ केँ ओकह योग बरझलकु, जकरा ओ अहाँ पर ई बात कहकि जे अहाँ पर कवपकप आकब रहल अकछ, जे अहाँ सहु करबा मे सकम छी। 14 हम हुका कहकलयकु। सर, अहाँ सेहो हमरा संग रह, आ हम सहजकह कोुो कद मे पडब। हम, ओ कहलकु, अहाँ क संग रहब। आ हम ओकह दू त सँ कवुती करब जे अहाँ क सजाय पर राखल गेल अकछ जे ओ अहाँ क पकत अपु कद केँ संयम करय। 15 तह मे अहाँ केँ कुेक काल िरर कवपकप भोगय पडत। तखु फेर अहाँ अपु पूव् अवया मे आकब जायब। केवल अपु मुक कवुमता मे आगू बढू। 16 शरद हदय सँ पभरक आजा माुू। तोँ, तोहर घर आ तोहर सनाु। आ हम जे आजा अहाँ केँ दे ुे छी, ताकह पर चलू। तखु अहाँ क प्ाताप दढ आ शरद भ' सकैत अकछ। 17 जँ अहाँ ई सभ अपु घरक संग राखब तँ अहाँ क असरकविा अहाँ सँ दू र भऽ जायत। 18 जे ककयो एकह आजा सभक अुरसार चलत, तकरा सभ सँ सभ परे शाुी ओकहुा दू र भऽ जायत। उपमा 8 1 फेर ओ हमरा एकटा ुीचाँ दे खौलकु जे खेत आ पहाड केँ झाँ कप दे ुे छल, जकर छाया मे पभरक ुाम सँ बजाओल गेल सभ लोक आकब गेल छल। 2 ओकह कवलोक कात मे पभरक एकटा स् वग्दूत बहत उपम आ ऊँच ठाढ छलाह। ओकह कवलोक डारर सभ बडका हक सँ काकट लेलक। आ ओकह कवलो छोट-छोट छडक छाया मे जे लोक छल, जेुा करीब एक फरट ुमहर छल, तकरा हाि बढौलक। 3 जखु सभ ओकरा सभ केँ पककड लेलक तखु ओ अपु हक एक कात रानख दे लक आ गाछ पूरा भ’ गेल, जेुा हम पकहुे दे खुे रही। जाकह पर हम आ्य्चककत भेलहँ, आ अपुा भीतर मु​ु केलहँ । 4 तखु ओ चरबाह हमरा कहलकिु। ई आ्य् ुकह कर जे ओ गाछ एतेक रास डारर काकट गेलाक बादो पूरा रहै त अकछ, मरदा कुेक रह, कारण आब अहाँ केँ ई दे खाओल जायत जे ओ स् वग्दूतक की मतलब अकछ, जे ओकह छडी सभ केँ लोक सभ केँ दे लक। 5 तखु ओ फेर ओकरा सभ सँ छडी माँ गलकु, आ जाकह कम मे सभ केँ भेकट गेल छल, ओकह कम मे हुका बजाओल गेलकु आ अपु लाठी केँ फेर सँ बुा लेलकु। जे पाकब कऽ हुका सभक जाँ च कयलकु। 6 ककछर गोटे सँ ओ सभ सरखायल आ सडल आ पतंगक सश् जकाँ गहण कयलकु। जेकरा ओ आजा दे लकु जे बाकी लोक सभ सँ अलग भ' क' सयं रानख दे ल जाय। दोसर लोक सभ अपु-


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

अपु छडी मे सपे सरखायल, मरदा पतंग सँ ुकह छर टल, एकह सभ केँ सेहो ओ अपुा सँ सेट करबाक आदे श दे लकु। 7 दोसर लोक आिा सरखा कऽ अपु छडी मे दऽ दे लक। ई सभ सेहो अलग-अलग राखल गेल। दोसर लोक अपु छडी मे आिा सरखायल आ फाटल दाु दे लक; ईहो सभ अपुे सेट छल। दोसर लोक अपु-अपु छडी आिा सरखा आ आिा हररयर आकु लेलक आ ई सभ सेहो ओकहुा अपुकह राखल छल। 8 दोसर लोक अपु छडी दू भाग हररयर आ तेसर सरखाएल सौंकप दे लक। आ ओहो सभ अलग-अलग राखल गेल। दोसर लोक अपु छडी दू भाग सरखायल आ तेसर हररयर आकु लेलक। आ सयं सेहो राखल गेल छल। 9 दोसर लोक अपु छडी कम सरखाएल सौंपैत छल, (ककएक तँ बहत कम छल, अिा् त ओकर चोटी सरखायल) मरदा ओकरा सभ मे दरार छलैक, आ ई सभ अपुे-अपुे ओकहुा सेट भ’ गेल छलैक। दोसरक छडी मे त' ककु हररयर छल, आ बाकी सरखायल; आ ई सभ अपुे-अपुे अलग भऽ गेल। 10 दोसर लोक सभ आकब कऽ अपु लाठी सभ केँ ओकहुा हररयर-हररयर आकु अुलक आ लोक मे सँ बेसी लोक अपु लाठी एकह तरहे ँ अुलक। दू त एकह सभ पर बहत हकष्त भेलाह आ ओहो सभ अपुा-अपु अलग भऽ गेलाह। 11 दोसर लोक सभ अपु लाठी हररयर ुकह, डारर सँ भरल आकु लेलक। एकह सभ केँ एक कात रानख दे ल गेल, स् वग्दूत दारा सेहो बहत हष् सँ सागत कयल गेल। दोसर लोक सभ अपुअपु छडी सभ डाररसँ हररयर-हररयर आकु लेलक आ ओहो सभ ककछर फल ओकरा सभ पर। 12 कजुका लग एहु छडी छलकु, ओ सभ बहत पसर छलाह। स् वग्दूत सयं हुका सभ पर बहत आुन्त भेलाह। आ ुे हमरा संग ठाढ चरबाह हुका सभ सँ कम पसर भेलाह। 13 तखु परमेश् वरक स् वग्दूत मरकरट आुबाक आजा दे लकु। स् वग्दूत ओकह लोक सभ केँ मरकरट पकहरौलकु, कजुकर छडी मे ओकरा फलक छोट-छोट डारर भेटलकु। ओ ओकरा सभ केँ बरज् मे जेबाक आजा दे लक। 14 ओ ओकह लोक सभ केँ सेहो बरज् मे पठौलकु, जकर लाठी मे ओकरा सभ केँ कबुा फलक डारर भेटलकु। कारण, हुका लोककुक वस एके रं ग छलकु, अिा् त् एकटा बफ् जकाँ उजर। जाकह सँ ओ हुका सभ केँ टावर मे जेबाक आदे श दे लकु। आ जे सभ अपु छडी केँ हररयर-हररयर वापस क' दे लक, तकरा सभ केँ सेहो एुा कयलकु। एकटा उजर वस दऽ कऽ ओकरा सभ केँ बरज् मे जेबाक लेल कवदा कऽ दे लक। 15 ई कऽ कऽ ओ हमरा संग रहकुहार चरबाह केँ कहलकिु, “हम जा रहल छी। मरदा अहाँ एकह सभ केँ दे बाल सभक भीतर पठा कदयौक, जाकह ठाम रहबाक हकदार छल। पकहुे ओकर सभक छडी परखैत रह, मरदा ओकरा सभ केँ लगु सँ परखू जे ककयो अहाँ केँ िोखा ुकह दऽ सकय। मरदा जँ केओ अहाँ सँ बकच जायत तँ हम वेदी पर ओकरा सभ केँ परखब।” चरबाह केँ ई ककह ओ कवदा भेलाह। 16 हुकर गेलाक बाद चरबाह हमरा कहलकिु, “आउ, ओकरा सभ सँ छडी लऽ कऽ रोकप कदयौक। जँ शायद फेर हररयर भ' सकैत अकछ। हम हुका कहकलयकु; सर, ओ सरखल छडी फेर ककहयो हररयर कोुा भ' सकैत अकछ। 17 ओ हमरा उपर दे लकिु। ओ गाछ कवलो अकछ, आ सकदखु जीबय मे ुीक लगैत अकछ। ते ँ जँ ई छड सभ रोपल जायत, आ कुेक ुमी भेटत त' बहतो सयं ठीक भ' जेत।

18 ते ँ हम ओकरा सभ पर पाकु ढारर दे ब आ जँ ओकरा सभ मे सँ ककयो जीकवत रकह सकैत अकछ तँ हम ओकरा संग आुन्त होयब। मरदा जँ से ुकह तँ कमसँ कम एकह माधमे हम अपु भागक उपेका ुकह केुे पाओल जाएब। 19 तखु ओ हमरा आजा दे लकिु जे हम हुका सभ केँ बजाबी। ओ सभ जाकह पाँ कत मे ठाढ छलाह, सभ हुका लग आकब कऽ हुका अपु-अपु लाठी दऽ दे लकिु। जे पाकब ओ एक-एकटा केँ अपु-अपु अुेक कम मे रोकप दे लकु। 20 सभ रोपलाक बाद ओ ओकरा सभ पर बहत पाकु ढारर दे लकु, जाकह सँ ओ सभ पाकु सँ लिपि भऽ गेल छल आ ओकर ऊपर ुकह दे खाइत छल। तखु ओ ओकरा सभ केँ पाकु दऽ कऽ हमरा कहलकिु। कवदा भ' जाउ, आ कुेक समयक बाद घररर क' हुका सभक ओतय जायब। 21 ककएक तँ एकह गाछक स्जु केओ चाहै त अकछ जे एकह गाछ सँ डं ठल लऽ कऽ सभ जीकवत रहय। आ हमरा आशा अकछ जे आब जखु एकह छड सभकेँ एकह तरहे ँ पाकु दे ल गेल अकछ, जाकहमेसँ बहतो ुमीमे पा​ा होइत अकछ, ठीक भ' जेत। 22 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हमरा कह जे ई गाछ की अि् रखैत अकछ?” कारण, हम बहत आ्य्चककत छी जे एतेक रास डारर काकट गेलाक बाद ओ एखुो सय बरझाइत अकछ। आ ुे एकह मे सँ कम ककछर बचल बरझाइत अकछ, जे हमरा बहत आ्य्चककत करै त अकछ। 23 ओ उपर दे लकिु, “सरुू।” ई महाु गाछ जे मैदाु आ पहाड आ समस िरती केँ झाँ कप दै त अकछ, से परमेश् वरक कुयम अकछ, जे समस संसार मे पकाकशत अकछ। 24 ई िम्-कुयम परमेश् वरक परा छकि, जे प्ि् वीक चार कात िरर पचार कयल जाइत छकि। जे लोक ओकर छाया मे ठाढ अकछ, ओ सभ ओकर पचार सरुलक आ कवशास केलक। 25 अहाँ सभ जे महाु आ पूज स् वग्दूत दे खलहँ , ओ छलाह माइकल, जे अपु लोक पर अकिकार रखैत छकि आ हुका सभक शासु करै त छकि। ककएक तँ ओ कवश् वास करयवला सभक हदय मे िम् -कुयम रोपुे छकि। आ ते ँ कजुका सभ केँ ओ िम्-कुयम दे ुे छकि, हुका सभ लग जाइत छकि जे ओ सभ एकरा पालु केुे छकि वा ुकह। 26 ओ पतेकक लाठीक परीकण करै त छकि। आ ओकह सभ मे सँ बहतो कमजोर अकछ, ककएक तँ ओ सभ लाठी पभरक कुयम अकछ। तखु ओ सभ लोक सभ केँ बूकझ लैत छकि जे सभ िम्कुयमक पालु ुकह केुे छकि, आ हुका सभ मे सँ एकएकटाक याु जुैत छकि। 27 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, ओ ककछर गोटे केँ बरज् पर ककएक पठा दे लकु आ ककछर केँ एतय अहाँ सभक लेल छोकड दे लकु?” ओ उपर दे लकिु, जे सभ िम्-कुयमक उलंघु केुे छकि, जे हुका सँ भेटल छलकु, से सभ हमर अकिकार मे रकह गेल छकि, जाकह सँ ओ सभ अपु पाप पर प्ाताप करकि। 28 मरदा, हम कहकलयकु जे , जे बरज् मे गेल छलाह, से के छकि? ओ उपर दे लकिु जे सभ जे सभ शैताु सँ झगडा कएुे छकि, हुका पर कवजय पाकब गेल छकि, ताज पकहरुे छकि, आ ओ सभ ओ सभ छकि जे ककठु कद भोगुे छकि, जाकह सँ ओ सभ िम् कुयमक पालु करकि। 29 मरदा जे सभ अपु लाठी हररयर-हररयर आ छोट-छोट डारर सभक संग छोकड दे लक, मरदा फल ुकह भेटल, ओ सभ ओकह िम्-कुयमक लेल कद सहलक, मरदा म्तरक सामुा ुकह कऽ सकल। आ ुे ओ सभ अपु पकवा ववया केँ ुकारुे छकि।


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

30 जे सभ अपु लाठी केँ हररयर-हररयर लऽ कऽ दे लक, ओ सभ कवुम आ िम् लोक सभ छकि आ बहत शरद मोु सँ जीबैत छकि आ परमेश् वरक आजा सभक पालु करै त छकि। 31 शेष बात अहाँ तखु बरझब जखु हम ओकह छडी सभ पर कवचार करब जे हम रोपुे छी आ पाकु दे ुे छी। 32 ककछर कदुक बाद हम सभ घररर कऽ आकब गेलहँ आ ओतकह ओ मकहमामय स् वग्दूत ठाढ छलाह आ हम हुका लग ठाढ भऽ गेलहँ , “तखु ओ हमरा कहलकु। 1 तौकलया सॅ अपुा के बानन कलअ, आ हमरा परोसू। 33 हम अपुा केँ एकटा साफ तौकलया सँ बानलहँ जे मोटका कपडा सँ बुल छल। जखु ओ हमरा कमरबंद आ सेवा करबाक लेल तैयार दे नख कहलकिु, “ओकह लोक सभ केँ बजाउ, कजुकर लाठी रोपल गेल अकछ, पतेक केँ अपु-अपु कम मे जेुा ओ दे लकु।” 34 ओ हमरा खेत मे अुलकु आ हम सभ गोटे केँ बजौलकु आ ओ सभ अपु-अपु पंनक मे तैयार भ’ गेलाह। तखु ओ हुका सभ केँ कहलकिु। सभ अपु-अपु छडी उखाकड कऽ हमरा लग आुय।” पकहुे ओ सभ अपु-अपु छडी सौंप दे लक, जकर छडी सरखाएल आ सडल छल। 35 कजुकर छडी एखुो एुा रहै त छल, हुका सभ केँ ओ अलग-अलग ठाढ रहबाक आजा दे लकु। तखु ओ सभ आकब गेल कजुकर छडी सरखा गेल छल मरदा सडल ुकह छल । एकह मे सँ ककछर गोटे अपु छडी मे हररयर रं गक कवतरण करै त छलाह; दोसर सरखायल आ सडल, जेुा पतंग छूकब गेल हो। 36 जे सभ ओकरा सभ केँ हररयर-हररयर छोकड दे लक, ओकरा सभ केँ ओ अलग-अलग ठाढ रहबाक आजा दे लकु। मरदा कजुकर छडी सरखाएल आ सडल छल, तकरा सभकेँ ओ पकहल तरहक संग ठाढ कऽ दे लक। तखु ओ सभ आकब गेल, कजुकर छडी आिा सरखल आ फाटल छल, एकह मे सँ बहतो गोटे अपु छडी हररयर आ अुाडी छोकड दे लक। 37 दोसर लोक सभ ओकरा सभ केँ डारर सभक संग हररयरहररयर आ डारर सभ पर फल-फूल सौंकप दे लक, जेुा कक जे सभ बरज् मे मरकरट पकहरुे गेल छल। दोसर लोक सभ ओकरा सभ केँ सरखायल, मरदा सडल ुकह, सौंकप दे लक। ककछर गोटे ओकरा सभकेँ पकहुे जकाँ आिा सरखाएल आ फाटल छोकड दे लक। 38 ओ एकह सभ मे सँ एक-एकटा केँ अलग-अलग ठाढ रहबाक आदे श दे लकिु। ककयो अपुे सँ, ककयो अपु-अपु पंनक मे। 39 तखु ओ सभ अयलाह, कजुकर छडी हररयर छल, मरदा फाटल छल। ई सभ अपु-अपु छडी एकदम हररयर-हररयर पहँ चा दे लक, आ अपु-अपु कम मे ठाढ भ' गेल। चरबाह एकह सभ पर आुन्त भेलाह, ककएक तँ ओ सभ बदकल गेल छल आ अपु फाँ ट सँ मरक भऽ गेल छल। 40 तखु ओ सभ अपु-अपु छडी सभ दे लक जे आिा हररयर आ आिा सरखाएल छल। एकह मे सँ ककछर पूण्तः हररयर, ककछर आिा सूखल; दोसर हररयर, जवाु अंकररक संग। आ ई सभ एक-एकटा अपु-अपु दजा् पर पठा दे ल गेल। 41 तखु ओ सभ अपु लाठी छोकड दे लकु, जकर दू भाग पकहुे हररयर आ तेसर सरखायल छल। ओकह मे सँ बहतो गोटे अपु छडी मे हररयर-हररयर दे लकु; बहतो आिा सूखल; बाकी सरखाएल मरदा सडल ुकह। ते ँ ई सभ कवदा कयल गेल, एक-एकटा अपु-अपु उकचत याु पर। 42 तखु ओ सभ अयलाह जे अपु लाठीक आगू मे दू भाग सरखायल आ तेसर हररयर छल। एकह मे सँ बहतो गोटे अपु छडी

आिा सरखायल, ककछर सरखायल आ सडल पहँ चा दे लकु; दोसर आिा सूखल आ फाटल; मरदा हररयर कम। आ ई सभ एकएकटा अपु-अपु पाँ कत मे राखल गेल। 43 तखु ओ सभ अपु-अपु लाठी मे हाि बढौलकु, जाकह मे पकहुे कुेक हररयर छल आ बाकी सभ सरखायल छल। हुका लोककुक छडी बेसी काल हररयर पाओल जाइत छलकु, छोटछोट डारर होइत छलकु, जाकह पर फल छलकु, आ बाकी एकदम हररयर । 44 चरबाह एकह सभ केँ दे नख बहत हकष्त भऽ गेलाह, ककएक तँ हुका सभ केँ एकह तरहे ँ भेटलकु। आ ओहो सभ अपु उकचत आदे श पर चकल गेलाह। 45 ओ हुका सभक सभटा डं डा परखलाक बाद हमरा कहलकु जे हम अहाँ केँ कहकलयकु जे ई गाछ जीवु सँ पेम करै त अकछ। सर, हम कहकलयकु, हम दे खैत छी। 46 ओ कहै त छकि जे अहाँ सभ ई जाकु सकब जे पभरक भलाई आ दया बहत पैघ अकछ आ आदर-सतार करबाक चाही। जे सभ प्ाताप करबाक योग पाओल गेल छल, तकरा सभ केँ अपु आत् मा दे लकु। 47 हम उपर दे कलयैक, “महाराज, तखु सभ ककएक प्ाताप ुकह केलक? ओ उपर दे लकिु, कजुकर मु पभर पकहुे दे खुे छलाह, ओ शरद हे ताह, आ ओ सभ मोु सँ हुकर सेवा करताह, हुका सभ केँ ओ प्ाताप कयलकु। 48 मरदा कजुका सभक छल-कपट आ दर दता दे नख कऽ बरझलकु जे ओ सभ सपे हुका लग घररर कऽ ुकह आओत। ओ हुका सभ केँ प्ाताप करबाक लेल असीकार कयलकु, जाकह सँ ओ सभ फेर सँ हुकर ववयाक कु्ा ुकह करकि। 49 हम हुका कहकलयकु। आब, सर, हमरा ई बताउ जे, जे अपु छडी छोकड दे ुे छकि, हुका सभ मे सँ पतेकक याु की छकु, आ हुकर 2 कहसा की छकु; ताकक जखु ओ सभ अपु मोहर केँ पूरा ुकह रखुे होकि, मरदा जे मोहर पाओल गेल छल, तकरा बबा् द क' लेुे होकि, तखु ई सभ बात सरकु क' कवशास करताह, तखु ओ सभ अपु दर षम् केँ सीकार क' प्ाताप क' सककि। 50 अहाँ सभ सँ हुकर सभक मोहर फेर सँ लऽ कऽ परमेश् वरक मकहमा कऽ सकब जे हुका सभक पकत दया आकब गेलाह आ अहाँ सभ केँ हुका सभक आत् मा केँ ुवीकरण करबाक लेल पठौलकु। 51 ओ कहलकु जे , ओ सभ सरुू, कजुकर छडी सरखाएल आ सडल भेटल अकछ, आ पतंगक सश् जकाँ । मंडली के पलायुकारी आ कवशासघाती छै । 52 ओ सभ अपु बाँ की अपरािक संग पभरक कु्ा कयलकु आ हुकर ुाम जे हुका सभ पर बजाओल गेल छलकु से असीकार कयलकु। ते ँ ई सभ परमेश् वरक लेल मरर गेल अकछ, आ अहाँ दे खैत छी जे अहाँ सभ मे सँ ककयो प्ाताप ुकह केलक, यदकप ओ सभ हमर आजा सरुलक जे अहाँ ओकरा सभ केँ दे कलयैक।” एकह पररष सभ सँ ते ँ जीवु बहत दू र अकछ। 53 जे सभ अपु लाठी सरखा कऽ सौंपुे अकछ, मरदा सडल ुकह अकछ, ओ सभ सेहो ओकरा सभ सँ दू र ुकह गेल अकछ। ककएक तँ ओ सभ ुकली छल आ अिलाह कशका सभ अु​ुे अकछ। परमेश् वरक सेवक सभ केँ कवक्त कयलकु। ओकरा सभ केँ प्ाताप करबाक लेल ुकह, बल् कक ओकरा सभ केँ अपु झूठ कशका सँ रोकैत रह।


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

54 ते ँ हुका सभ केँ आशा छकु। आ अहाँ दे खैत छी जे हुका सभ मे सँ बहतो गोटे प्ाताप केुे छकि, जकहया सँ अहाँ हमर आजा हुका सभक सोझाँ राखुे छी। आओर कतेको गोटे एखुो प्ाताप करताह। मरदा जे प्ाताप ुकह करत से प्ाताप आ जीवु दर ुू गमा लेत। 55 मरदा जे सभ प्ाताप कऽ लेुे छकि, हुकर याु पकहल दे बाल सभक भीतर शरर भऽ गेल अकछ आ ककछर गोटे बरज् मे सेहो चकल गेल छकि। ओ कहलकु जे , अहाँ दे खैत छी जे पापी सभक प्ाताप मे जीवु होइत छै क। मरदा जे प्ाताप ुै करै छै ओकरा लेल म्तर तैयार छै । 56 आब ओकह लोक सभक कवषय मे सरुू जे सभ अपु छडी मे आिा सरखाएल आ फाँ ट सँ भरल दाु कयलकु। कजुकर छडी मा​ा आिा सरखायल छलकु, से संकदग छकि; ककएक तँ ओ सभ ुे जीकवत अकछ आ ुे म्त। 57 मरदा जे सभ अपु-अपु लाठी मे पसव करै त छल, आिा सरखल ुकह, दरार सँ भरल सेहो, ओ सभ संकदग आ अिलाह बजकुहार दर ुू अकछ। जे अुरपनयत लोक सभ सँ हकट लैत छकि, आ आपस मे ककहयो शानन ुकह रखैत छकि, आ एक-दोसर सँ ईरा् करै त छकि। 58 मरदा हुका सभ केँ सेहो प्ाताप कयल गेल अकछ। ककएक तँ अहाँ दे खैत छी जे एकह मे सँ ककछर गोटे प्ाताप कऽ लेुे छकि।” 59 एकह तरहक सभ लोक जे जली-जली प्ाताप कऽ लेुे छकि, हुका टावर मे जगह भेटतकु। मरदा जे सभ प्ाताप करबा मे बेसी मंद रहल अकछ, ओ सभ दे बाल सभक भीतर रहत। मरदा जे सभ प्ाताप ुकह करत, बल् कक अपु दर ष् ट कम् मे आगू बढै त रहत, से मरर जायत। 60 जकरा सभक लाठी हररयर छल, मरदा तैयो फाटल छल। ओ सभ एहु छकि जे सकदखु कवशासी आ ुीक छलाह, मरदा मया् दा आ पिाुताक कवषय मे हुका लोककुक बीच ककछर ईरा् आ कलह छलकु | 61 आब एहे ु सभ बात वि् आ बेबरकुयाद अकछ जे एक-दोसर सँ एकह कवषय मे झगडा करै त अकछ। 62 तैयो, ई दे नख जे ओ सभ अनिा ुीक अकछ, जँ ई सभ आजा सरुला पर ओ सभ अपुा केँ सरिारर लेताह आ हमरा बरझला पर अचाुक प्ाताप करताह। ओ सभ अंततः बरज् मे रहताह, जेुा ओ सभ जे सचाई आ योग रप सँ प्ाताप केुे छकि। 63 मरदा जँ केओ फेर अपु मतभेद मे घररर जायत। ओ बरज् सँ बाहर बंद भऽ जायत आ अपु जाु गमा लेत। कारण, जे पभरक आजाक पालु करै त छकि, हुकर जीवु ओकह आजाक पालु करबा मे रहै त छकु। ररयासत मे ुकह, वा कोुो आु गररमा मे ुकह। 64 ककएक तँ िैय् आ कवुमताक कारणे ँ मुरष्‍य जीवु पाकब लेत। मरदा कवदोह आ िम्-कुयमक अवमाु​ुा दारा ओ सभ अपुा लेल म्तर कीु लेत। 65 जे सभ अपु छडी मे आिा सूखल आ आिा हररयर छल, ओ सभ संसारक बहत रास काज मे लागल छकि आ पकवा लोक सभक संग ुकह जरडल छकि। जाकह कारणे ँ आिा जीकवत अकछ आ आिा मरर गेल अकछ। 66 एकह लेल एकह मे सँ बहतो लोक हमर आजा सरुलाक बाद सँ प्ाताप कऽ कऽ बरज् मे रहय लगलाह। मरदा ककछर गोटे पूण् रपेण खकस पडल छकि; एकह सभक लेल आब प्ाताप करबाक कोुो याु ुकह अकछ।

67 अपु वत्माु साि्क कारणे ँ ओ सभ परमेश् वरक कु्ा आ अस् वीकार कयलकु। आ एकह मे सँ बहतो केँ एखुो संदेह अकछ; ई सब एखु िरर वापस आकब सकैत अकछ; आ जँ जली-जली प्ाताप करत तँ ओकरा सभ केँ टावर मे जगह भेटतैक। मरदा जँ ओ सभ बेसी मंद रहत तँ दे बाल सभक भीतर रहत। मरदा जँ ओ सभ प्ाताप ुकह करत तँ ओ सभ मरर जेताह। 68 जकर दू भाग छडी हररयर आ तेसर सरखाएल छलैक। ओ सभ अुेक तरहे ँ पभरक असीकार कएुे छकि। ओकह मे सँ बहतो गोटे प्ाताप कऽ कऽ बरज् मे जगह पाकब गेलाह। ई सब एकदम जाु गंवा दे ुे अकछ। 69 ककछर गोटे संदेहक नयकत मे रहलाह, मतभेद ठाढ क’ दे लकु अकछ, जँ ओ सभ अचाुक प्ाताप क’ क’ अपु वासुा मे ुकह रकह सकैत छकि। मरदा जँ ओ सभ अपु अिलाह काज करै त रहत तँ ओ सभ मरर जेताह। 70 ओ सभ अपु छडी मे दू भाग सरखायल आ दोसर हररयरहररयर दे लक। ओ सभ छकि जे सपे कवशासी रहलाह, मरदा िकुक आ ुीक वसर सँ भरल छकि। आ तखुकह बाहरक कविम् मे पकसद बुबाक इचा केलक, आ एकह सँ बहत घमंड मे पकड गेल, आ उच कवषय पर लक राखय लागल आ सत केँ ताग करय लागल। 71 ओ सभ पकवा लोक सभक संग ुकह जरटल छल, बल् कक गैरयहदी सभक संग रहै त छल। आ ई जीवु हुका लोककु केँ ततेक सरखद बरझाइत छलकु। मरदा ओ सभ परमेश् वर सँ ुकह हकट गेल छकि, बल् कक कवश् वास मे बुल रहलाह। केवल ओ सभ कवश् वासक काज ुकह केुे छकि। 72 एकह मे सँ बहतो लोक प्ाताप कऽ कऽ बरज् मे रहय लगलाह। तइयो दोसर लोक सभ एखुो गैर-यहदी लोकक बीच रकह रहल अकछ आ अपु वि्ताक संग उकठ कऽ परमेश् वर सँ सव्िा दू र भऽ गेल अकछ आ गैर-यहदी सभक काज आ दर ष् टताक पाछाँ लाकग गेल अकछ। ते ँ एकह तरहक लोक सभ केँ सरसमाचार सँ अुजाु लोक मे कगुल जाइत अकछ। 73 एकह मे सँ आु लोकक मु मे संदेह होबय लागल। अपु दर द काजक कारणे ँ सकदखु उदार पा​ा करबाक लेल कुराश भ' गेल छल: दोसर लोक एकह तरहे संदेह मे पकड गेल छल, तह मे कववाद भडका दे लक। 74 एकह लेल एकह सभ केँ आ जे सभ अपु काजक कारणे ँ संदेह मे पकड जाइत छकि, हुका सभ केँ एखुो घररर कऽ जेबाक आशा अकछ। मरदा ओकरा सभ केँ जली-जली प्ाताप करबाक चाही, जाकह सँ ओकर याु बरज् मे रहय। मरदा जे सभ प्ाताप ुकह करै त अकछ, मरदा अपु भोग-कवलास मे नयर रहै त अकछ, से सभ म्तरक समीप अकछ। 75 जे लोक सभ अपु छडी केँ हररयर-हररयर दाु दै त छल, कसवाय ओकर चोटी केँ, जे मा​ा सरखल छल आ फाटल छल। ई सभ सकदखु ुीक, कवशासी, आ 2 परमेश् वरक समक सोझ छलाह, तइयो ओ सभ अपु खाली भोग आ तरच कवचारक कारणे ँ कुेक पाप कयलकु जे हुका सभक भीतर छलकु। 76 एकह लेल ओ सभ मे सँ बहतो गोटे हमर बात सरकु तररन प्ाताप कऽ कऽ बरज् मे रहय लगलाह। तइयो ककछर गोटे संकदग भ' गेलाह, आ ककछर गोटे संकदग मोु मे मतभेद जोकड दे लकु। ते ँ एकह सभ केँ एखुो घररबाक आशा अकछ, कारण ओ सभ सकदखु ुीक रहलाह। मरदा ओ सभ शायदे ुकह कहलत। 77 अंत मे, जे सभ अपु छडी मे सरखा-सरखल दे लक, ओकर चोटी मा​ा छोकड दे ल गेल, जे असगरे हररयर छल। तैयो परमेश्


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

वर सँ कवसकज्त ुकह भऽ कऽ पभरक ुाम सकदखु सेचा सँ िारण कएुे छी। ओ परमेश् वरक सेवक सभ केँ सहजकह अपु घर मे समेकट लेलकु। 78 ते ँ ई बात सरकु ओ सभ घररर कऽ चकल गेलाह आ कबुा दे री सँ प्ाताप कयलकु आ सभ िाकम्कता मे जीबैत रहलाह। ककछर गोटे केँ म्तर भऽ गेलकु, ककछर गोटे केँ अपु अिलाह काज पर मोु रानख कऽ बहत रास परीका सहजकह भऽ गेलकु। 79 जखु ओ सभ छडी सभक वाखा समा​ा कऽ कऽ हमरा कहलकिु, “जाउ, सभ लोक केँ कह जे ओ सभ प्ाताप करै त छकि, आ ओ सभ परमेश् वरक लेल जीकवत रहकि। 80 ओहो लोक सभक लेल जे अपु अिलाह काजक कारणे ँ उदार पाब’ बला ुकह छकि। मरदा पभर िैय् राखताह आ अपु परा दारा दे ल गेल आमंाण केँ पालु करताह। 81 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हमरा आशा अकछ जे जखु सभ ई सभ बात सरुत तँ प्ाताप करताह।” कारण, हमरा कवशास अकछ जे जे ककयो अपु अपराि केँ सीकार करै त अकछ, आ पभरक भय केँ िारण करै त अकछ, ओ प्ाताप मे वापस आकब जायत। 82 ओ हमरा कहलकु, “जे केओ अपु पूरा हदय सँ प्ाताप करत, आ हम पकहुे कहल गेल सभ बरराई सँ अपुा केँ शरद करत, आ अपु पाप मे आओर ककछर ुकह जोडत, ओकरा पभर सँ अपु पूव्क अिम्क इलाज भेटत, जँ ओ एकह आजा पर कोुो संदेह ुकह करत, आ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। 83 मरदा जे सभ अपु अपराि मे व्नद करै त रहत आ एखु िरर वत्माु संसारक वासुा सँ गप-सप करै त रहत, से सभ अपुा केँ म्तरक सजाय दे त। मरदा अहाँ एकह आजा सभक अुरसार चलू, आ जे केओ एकह आजा सभ मे चलत आ ओकरा सभ केँ सही तरीका सँ पालु करत, से परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। 84 ओ हमरा ई सभ बात दे खा कऽ कहलकिु। शेष बात हम ककछर ए कदु मे अहाँ केँ दे खा दे ब। उपमा ९ 1 हम प्ातापक दू त चरबाहक आजा आ उपमा कलखलाक बाद। ओ हमरा लग आकब हमरा कहलकिु, “हम अहाँ केँ ओ सभ बात दे खा दे ब जे आत् मा अहाँ सँ मण् डलीक आक्कत मे बाजल छल।” ककएक तँ ओ आत् मा परमेश् वरक परा छकि। 2 अहाँ शरीर मे कमजोर छलहँ ते ँ स् वग्दूत दारा अहाँ केँ ई बात ताबत िरर ुकह कहल गेल छल जाबत िरर अहाँ केँ आत् मा सँ बल ुकह भेकट गेल आ बल मे व्नद ुकह भेल, जाकह सँ अहाँ स् वग्दूत केँ सेहो दे नख सकब। 3 ककएक तँ मण् डली दारा अहाँ केँ बरज्क कुमा् ण बहत ुीक आ गौरवशाली ढं ग सँ दे खाओल गेल छल। तैयो अहाँ सभ ककछर एहु दे खलहँ जेुा कोुो करमारर दारा अहाँ केँ दे खाओल गेल अकछ। 4 मरदा आब अहाँ स् वग्दूत दारा पबरद भऽ गेल छी, मरदा तइयो ओही आत् मा दारा। मरदा अहाँ केँ सभ बात पर लगु सँ कवचार करबाक चाही। कारण, ते ँ हमरा ओकह पूज दू त दारा अहाँ क घर मे पठाओल गेल अकछ, जाकह सँ जखु अहाँ सभ ककछर केँ सामर्पूव्क दे खब तखु अहाँ पकहुे जकाँ ुकह डरब। 5 ओ हमरा आका् कडयाक एकटा पहाडक ऊँचाई पर लऽ गेलाह आ हम सभ ओकर चोटी पर बैसल रही। आ हमरा एकटा पैघ मैदाु दे खौलकु, आ ओकर आसपास बारह टा पहाड अलगअलग आक्कत मे।

6 पकहल काकलख जकाँ कारी छल। दोसर कचकुा छल, कबुा जडी-बूटीक। तेसर काँ ट-काँ ट-काँ टसँ भरल छल। चाररम मे आिा सरखायल जडी-बूटी छल; जकर ऊपरका भाग हररयर छल, मरदा जे अकगला भाग जकड सरखायल छल; आ ककछर जडी-बूटी जखु रौद गरम होइत छलैक तखु सरखायल छलैक। 7 पाँ चम पहाड बहत उबड-खाबड छल। मरदा तैयो हररयर जडीबूटी छल। छठम पहाड दरारसँ भरल छल, ककछर छोट आ ककछर पैघ; आ एकह दरार सभ मे घास उगैत छल, जे पुपैत ुकह छल, मरदा जेुा मररझा गेल छल 8 सातम पहाड पर रमणीय चारागाह छल आ पूरा फलदार छल। आ जते ओकरासँ भोजु करबैत छल, घास ओतेक ुीक जकाँ बढै त गेल। 9 आठम पहाड फवारा सँ भरल छल आ ओकह फवारा सभ सँ परमेश् वरक सभ तरहक पाणी सभ केँ पाकु भेटैत छल। ुवम पहाड पर पाकु एकदम ुकह छल, मरदा पूण्तः ओकर अभाव छल; आ घातक साँ प केँ पोसैत छल, आ मुरष् यक लेल कवुाशकारी। 10 दसम पहाड ऊँच-ऊँच गाछ सभ सँ भरल छल आ एकदम छायादार छल। 11 एगारहम पहाड मोटगर गाछ सभ सँ भरल छल। आ ओ गाछ सभ जेुा कतेको तरहक फल सँ लदल छल; कक जे ककयो ओकरा सभ केँ दे खलकै, से ओकर फल खाय के इचा छोकड क’ ुकह चरकु सकैत छलैक। 12 बारहम पहाड एकदम उजर, आ अतंत सरखद पकक छल, आ सयं अपुा केँ एकटा उपम सौ्य् दै त छल। 13 ¶ 1 मैदाुक बीचोबीच ओ हमरा एकटा कवशाल उजर चटाु दे खौलकु, जे मैदाु सँ बाहर कुकलल छल, आ ओ चटाु ओकह पहाड सभ सँ ऊँच छल, आ चौकोर छल। जे पूरा दर कुयाँ क भरण-पोषण करबा मे सकम बरझाइत छल। 14 हमरा बरझुे ओ परराु भऽ गेल छल, मरदा ओकह मे एकटा ुव फाटक छल, जे ओकह मे ुवका कटल बरझाइत छल। आब ओ फाटक रौद सँ आगू उजल भ' गेल छल; एतेक िरर जे एकर पकाशक हम बहत पशंसा केलहं । 15 फाटकक आसपास बारह टा करमारर कना ठाढ छलीह। जाकह मे सँ चारर टा जे फाटकक कोु-कोु मे ठाढ छल, हमरा सभ सँ पैघ बरझायल, यदकप बाकी सभक सेहो मोल छल। 16 ओकह करमारर सभक क्पा मे ईहो आओर बकढ गेल जे ओ सभ कलुेु वस पकहरुे आ सभ रप सँ कमरबंद मे जोडी-जोडी मे ठाढ भऽ कऽ दकहुा बाँ कह मरक भऽ गेल छल, जेुा ककछर 2 बोझ उठाबऽ बला हो। ककएक तँ ओ सभ एुा सजल छल आ बहत हँ सी-खरशी आ तैयार छल। 17 ई दे नख हम मुे-मु आ्य्चककत भऽ गेलहँ जे एहु पैघ आ उदाप वसर दे खब। आ फेर हम ओकह करमारर सभक कववरणक पशंसा केलहँ जे ओ सभ एतेक सर्र आ ुाजरक छलीह; आ एहु दढता आ नयरताक संग ठाढ भ' गेल, जेुा पूरा सग् केँ ल' क' चलत। 18 जखु हम अपुा भीतर एकह तरहे ँ सोकच रहल छलहँ तखु चरबाह हमरा कहलकिु, “अहाँ अपुा भीतर की सोचैत छी, आ कचंकतत छी आ अपुा केँ कचना सँ भरै त छी? 19 जे ककछर ुकह बरझल अकछ, तकरा अहाँ बरनदमाु जकाँ ुकह सोचू, बल् कक पभर सँ पाि्ुा कर जे अहाँ केँ ओकरा बरझबाक सामर् भेटय। 20 ते ँ जे बात अहाँ ुकह दे नख सकैत छी, ताकह सँ परे शाु ुकह होउ। मरदा जे दे खैत छी तकरा बरकझ कलअ।”


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

21 कजजासर रहब सहु कर। हम अहाँ केँ ओ सभ बात दे खा दे ब जे हमरा अहाँ केँ कहबाक चाही। मरदा पकहुे कवचार कर जे एखु िरर की बचल अकछ। 22 ¶ जखु ओ हमरा ई बात कहलकु तखु हम आँ नख उठा कऽ दे खलहँ जे छह टा ुमहर आ पूज आदमी आकब रहल छकि। हुका लोककुक चेहरा सभ एक समाु छलकु; ओ सभ एकएकटा लोकक भीड बजौलकु। आ जे सभ हुका सभक आहाु पर आयल छल, से सभ सेहो ुमहर आ मोटगर छल। 23 ओ छह गोटे ओकरा सभ केँ आजा दे लकिु जे ओकह फाटक पर एकटा टावर बुाबकि। आ तररन ओकह आदमी सभक बडका आवाज होबय लागल जे गेट पर एमर-ओमर दौडै त छल, जे बरज् बुेबाक लेल एक ठाम आकब गेल छल। 24 मरदा ओकह करमारर सभ जे फाटकक चार कात ठाढ छलीह, से बरकझ गेलकु जे बरज्क कुमा् ण मे हुका सभ केँ जली करबाक अकछ। ओ सभ हाि पसारर लेलक जेुा ओकरा सभ सँ ककछर करबाक लेल भेटय। 25 तखु ओ छह गोटे आजा दे लकिु जे ओ सभ गहीरं जगह सँ पािर उठा कऽ बरज्क कुमा् णक लेल तैयार करकि। दस टा उजर पािर उठल छल, चौकोर, गोल ुकह काटल। 26 तखु ओ छह गोटे दस करमारर केँ बजा कऽ हुका सभ केँ आजा दे लकिु जे ओ सभ पािर जे भवु मे राखल जेबाक छल, तकरा सभ पािर केँ लऽ कऽ फाटक सँ लऽ कऽ जे सभ बरज् बुय बला सभ लग पहँ चाबकि। 27 तररन करमारर सभ एक संग ओकह पािर सभ केँ उठाबय लगलीह जे पकहुे गहीरं मे सँ कुकालल गेल छल। 28 ¶ जे सभ सेहो फाटकक चारकात ठाढ छल, ओ सभ पािर एकह तरहे ँ लऽ कऽ चलैत छल जे जे पािर सभसँ बेसी मजगूत बरझाइत छल, से कोु-कोु पर राखल गेल छल, बाकी सभ पािर कात मे राखल गेल छल। 29 एकह तरहे ँ ओ सभ सभ पािर केँ लऽ कऽ फाटक सँ लऽ कऽ ओकरा सभ केँ आजाक अुरसार बुौकुहार सभक हाि मे पहँ चा दे लक। 30 मरदा ई भवु ओकह पैघ चटाु पर आ फाटक पर बुल छल। आ एकह सभ सँ पूरा टावर केँ सहारा दे ल गेल। मरदा दस पािरक कुमा् ण पूरा फाटक भरर गेल, जे ओकह बरज्क ुीवं क लेल बुय लागल। 31 ओकह दस पािरक बाद पाँ च बीस पािर गहीरं मे सँ उठल। आ ई सभ ओही टावरक भवु मे राखल गेल छल। ओकह करमारर सभ दारा उठाओल जा रहल छल, जेुा पकहुे आु सभ छल। 32 एकह सभक बाद पाँ च तीस गोटे उठलाह। आ ई सभ सेहो ओकहुा ओकह काज मे कफट बैसल छल। तखु चालीस टा आओर पािर उठाओल गेल आ ई सभटा ओकह बरज्क कुमा् ण मे जोडल गेल। 33 तखु ओकह बरज्क ुीवं मे चाररटा पाँ कत होबय लागल। गहीरं मे सँ पािर उठब छोकड दे लक। आ जे सभ बुौुे छल, से सभ सेहो कुेक आराम केलक। 34 फेर ओ छह गोटे लोक सभ केँ आजा दे लकिु जे ओकह बारह पहाड सँ पािर आकु कऽ ओही बरज्क कुमा् ण मे आकब जाय। 35 ओ सभ पहाड पर सँ तरह-तरह केर पािर काकट कऽ ओकरा सभ केँ आकु कऽ करमारर सभ केँ दऽ दे लक। ओ सभ ओकरा सभ केँ लऽ कऽ बरज्क भवु मे सौंप दे लक। 36 जखु ओ सभ बुल छल तखु ओ सभ उजर भऽ गेल आ पकहुे जे छल। ककएक तँ सभ एक समाु छल आ अपु पूव्क

रं ग बदकल गेल। ककछर गोटे केँ सयं ओकह आदमी सभक हाि मे पहँ कच गेलकु, जे जखु ओ सभ भवु मे आकब गेलाह तखु ओकहुा चलैत रहलाह जेुा ओकरा सभ केँ राखल गेल छलकु। 37 ई सभ ुे गोर भऽ गेल आ ुे पकहुे जे छल। ककएक तँ करमारर सभ फाटकसँ ुकह लऽ जाइत छल। एकह लेल ई सभ पािर भवु मे असहमत छल, जकरा ओ छह गोटे बरकझ कऽ ओकरा सभ केँ हटा कऽ ओकह ठाम रानख दे लक जाकह ठाम सँ ओकरा सभ केँ आुल गेल छल। 38 ओ सभ पािर अुकुहार सभ केँ कहलकिु। एकह भवुक लेल अहाँ सभ हमरा सभ लग कोुो पािर ुकह पहँ चू, बल् कक ओकरा सभ केँ टावरक कात मे रानख कदयौक, जाकह सँ ई करमारर सभ ओकरा सभ केँ लऽ कऽ हमरा सभ लग पहँ कच सकैत अकछ। 39 जाबत िरर ई करमारर सभ एकह फाटक सँ ुकह लऽ जायत, ताबत िरर ओ सभ अपु रं ग बदकल ुकह सकैत अकछ। ते ँ वि् मे पररशम ुकह कर। 40 ¶ ओकह कदु भवुक कुमा् ण भऽ गेल, मरदा बरज् ुकह बुल छल। कारण, बाद मे एकर कुमा् ण होबय बला छल, ते ँ आब सेहो एकह मे ककछर दे री भ’ गेल छल। 41 ई छओ आदमी बुौकुहार सभ केँ आजा दे लकिु जे ओ ककछर समय िरर कवशाम करकि। मरदा ओ सभ ओकह करमारर सभ केँ आदे श दे लकिु जे ओ सभ बरज् सँ ुकह कुकलू। आब हमरा बरझुा गेल जे ओ सभ एकर पहरा लेल छोकड दे ल गेल हो। 42 सभ कवदा भेला पर हम ओकह चरबाह केँ कहकलयकु। सर, टावरक कुमा् ण ककएक ुकह समा​ा भेल अकछ? कारण, ओ कहलकु, जा िरर ओकर पभर ुकह आकब जायत, आ भवु केँ मंजूरी ुकह द' दे त, ता िरर ई समा​ा ुकह भ' सकैत अकछ; जाकह सँ जँ ओकरा ओकह मे कोुो एहु पािर भेटतैक जे ुीक ुकह अकछ तँ ओकरा बदकल दे ल जा सकय। कारण ई बरज् हुकर इचाक अुरसार बुल अकछ। 43 सर, हम कहकलयकु, हम जाुब जे एकह टावरक कुमा् ण की बोि कराबैत अकछ। तकहुा हमरा एकह चटाु आ एकह फाटकक कवषय मे सेहो सूकचत कयल जायत। “ आ दस पािर पकहुे ुीवं मे ककएक राखल गेल छल। तखु पचीस; तखु पैतीस; तखु चालीस? 45 एकह पािर सभक कवषय मे सेहो जे भवु मे राखल गेल छल आ फेर कुकाकल कऽ अपु जगह पर लऽ गेल गेल छल? हम पाि्ुा करै त छी जे एकह सभ बातक लेल हमर आा​ाक इचा केँ पूरा कर आ हमरा सभ केँ पकट कर। 46 ओ हमरा कहलकिु। जँ अहाँ ुीरस ुकह रहब तँ सभ ककछर बरझब आ आु सभ बात दे खब जे एकह बरज् मे होमय बला अकछ। आ एकह सभ उपमा केँ लगु सँ बरझत। 47 ककछर कदुक बाद हम सभ ओकह ठाम पहँ चलहँ जतय पकहुे बैसल रही। ओ हमरा कहलकिु, “चलू, बरज् कदस जाउ। कारण, एकर पभर आकब कऽ एकर परीकण करताह। 48 तखु हम सभ ओतऽ पहँ चलहँ आ ओतऽ ओकह करमारर सभक अकतररक ककयो ुकह भेटल। ओ हुका सभ सँ परछलकिु जे की ओकह बरज्क पभर ओतय आकब गेल छकि? आ ओ सभ उपर दे लक जे ओ एखु भवुक जाँ च करबाक लेल ओतकह रहताह। 49 ¶ ककछर ए कालक बाद हम दे खलहँ जे बहत रास लोक सभ आकब रहल छल, आ ओकर बीच मे एकटा आदमी एतेक ऊँच छल जे ओ टावर सँ ऊपर उकठ गेल।


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

50 हुका बारे मे ओ छह गोटे , जे पकहुे भवु मे आजा दै त छलाह, आ ओकह बरज् बुौकुहार बाकी सभ लोक आ बहत रास पैघ माु-समाुक लोक सभ छलाह। 51 मरदा ओ भवुक एतेक साविाुीपूव्क जाँ च केलकु जे एकएकटा पािर समारलकु। ओ सभ एक-एक केँ हाि मे पकडुे छडी सँ मारर दे लक। 52 जाकह मे सँ ककछर गोटे एतेक मारर कऽ काकलख जकाँ कारी भऽ गेलाह। दोसर सभ रक छल; ककछर गोटे एहु बरझाइत छल जेुा ओकरा मे दरार पकड गेल हो; ककछर गोटे अपंग बरझाइत छलाह: ककछर ुे कारी आ ुे गोर; ककछर तीकण लगैत छल, आ ककछर पािर सँ सहमत ुकह छल, आ ककछर िबा सँ भरल छल। 53 ई सभ ओकह पािरक अुेक पकारक छल जे भवु मे ठीक सँ ुकह भेटल छल। जे सभटा परमेश् वरक आजा छलकु जे बरज् मे सँ कुकाकल कऽ ओकर लग मे रानख दे ल जाय आ आु पािर सभ केँ आकु कऽ अपु जगह पर रानख दे ल जाय। 54 बुौकुहार लोक सभ हुका सँ परछलकिु जे अहाँ कोु पहाड सँ पािर आुय चाहै त छी जे ओ सभ कात मे राखल गेल अकछ। मरदा ओ हुका सभ केँ पहाड सँ ककरो आुय सँ मुा कऽ दे लकिु आ आदे श दे लकिु जे ओ सभ लग मे सँ कोुो खेत सँ बाहर कुककल जाय। 55 ओ सभ खेत मे खोदला पर बहत रास चमकैत चौकोर पािर आ ककछर गोल-गोल पािर सेहो भेटल। मरदा ओकह खेत मे जे ककछर भेटल छल से सभ लऽ कऽ ओकह करमारर सभ दारा फाटक सँ लऽ गेल। जे चौकोर छल, ओकरा सभ केँ कफट क’ क’ जे बाहर कुकालल गेल छलैक, ओकर जगह पर रानख दे ल गेलैक। 56 मरदा गोल-गोल सभ केँ भवु मे ुकह राखल गेल, कारण ओ सभ कठोर छल, आ ओकरा काकट दे बा मे बेसी समय लागत। मरदा ओकरा सभ केँ टावरक चार कात राखल गेल छलैक, जेुा बाद मे ओकरा सभ केँ चौकोर काकट क' भवु मे रानख दे ल जाय। ककएक तँ ओ सभ बहत गोर छल। 57 ¶ जे मया् दा मे पमरख छलाह आ पूरा बरज्क माकलक छलाह तँ ई दे नख हमरा संग रहकुहार चरबाह केँ बजा कऽ हुका ओ पािर दऽ दे लकिु जे असीकार कयल गेल छल आ बरज्क चार कात राखल गेल छल आ कहलककु। एकह पािर सभ केँ पूरा साविाुी सँ साफ कर आ टावरक भवु मे कफट कर, जाकह सँ ओ सभ बाकी सभक संग सहमत भ' सकय। मरदा जे बाकी लोकक अुरकूल ुकह होयत, तकरा टावर सँ दू र फेकक दे ल जाय। 58 ई आजा दऽ कऽ ओ अपुा संग आयल सभ गोटे क संग बरज् कदस कवदा भेलाह। 59 हम ओकह चरबाह केँ कहकलयकु, “ई पािर सभ केँ असीकार कऽ कऽ एकह बरज्क भवु मे कोुा घररर सकैत अकछ?” ओ उपर दे लकु; हम एकह पािर सभक सोझाँ बेसी भाग काकट दे ब, आ भवु मे जोकड दे ब, आ बाकी सभक बात सँ सहमत भ' जेताह। 60 हम कहकलयकु, “महाराज, जखु ओ सभ एतेक कटल रहत तखु ओ सभ ओकह ठाम कोुा भरर सकैत अकछ?” ओ उपर दे लकिु; जे कम भेटत से भवुक बीचोबीच रानख दे ल जायत आ पैघ केँ बाहर रानख कऽ भीतर राखल जायत। 61 ओ हमरा ई बात कहलकिु। चलू, तीु कदुक बाद हम सभ घररब, आ हम एकह पािर सभ केँ शरद भ’ क’ बरज् मे रानख दे ब। 62 बरज्क आसपासक सभ लोक केँ शरद करबाक चाही, जाकह सँ घरक माकलक अचाुक आकब कऽ बरज्क आसपासक लोक सभ केँ अशरद ुकह पाकब सकय। आ एतेक कोकित भ' जाउ जे ई

पािर एकह टावरक भवु मे ककहयो ुकह राखल जायत, आ हमरा दे खल जायत जे हम अपु माकलकक आजा सँ अुकभज रही। 63 तीु कदुक बाद जखु हम सभ बरज् पर पहँ चलहँ तँ ओ हमरा कहलकिु। एकह सभ पािरक परीकण करी, आ दे खू जे एकह मे सँ कोु पािर भवु मे जा सकैत अकछ। हम उपर दे कलयकु, सर, दे खू। 64 ¶ आ सभसँ पकहुे हम सभ ओकह पर कवचार करय लगलहँ जे कारी छल। ककएक तँ ओ सभ ओकहुा भेटल जेुा बरज् सँ बाहर कुकालल गेल छल। 65 तखु ओ ओकह सभ केँ परनख लेलक जे खररदर रा छल। ओ आजा दे लकिु जे ओकह मे सँ बहतो केँ गोल-गोल काकट कऽ करमारर सभ दारा टावरक भवु मे कफट कयल जाय। ते ँ ओ सभ ओकरा सभ केँ लऽ कऽ भवुक बीचोबीच मे कफट कऽ दे लक। ओ आजा दे लकिु जे बाँ की सभ केँ कारी सभक संग कबछा दे ल जाय, कारण ओहो सभ कारी भ' गेल छल। 66 तखु ओ ओकह सभ पर कवचार केलकु जे दरार सँ भरल छल, आ ओकह मे सँ बहतो केँ काकट दे बाक आदे श दे लकु, आ एकह तरहे ँ ओही करमारर सभ दारा शेष भवु मे जोडबाक आदे श दे लकु। 67 एकह सभ केँ बाहर राखल गेल छल, कारण ओ सभ पूण् रप सँ भेटल छल। मरदा ओकर सभक दरारक भीडक कारणे ँ जे अवशेष छलैक ओकरा सरिारल ुकह जा सकलैक, आ ते ँ टावरक कुमा् णसँ दू र फेकक दे ल गेलैक | 68 तखु ओ अपंग लोक सभ पर कवचार कयलकु। एकह मे सँ बहतो मे दरार छल, आ कारी भ' गेल छल; दोसर पैघ-पैघ दरार छल; एकह सभ केँ ओ आजा दे लकु जे जे सभ असीकार कयल गेल छल, ओकर संग रानख दे ल जाय। 69 मरदा बाँ की सभ केँ शरद आ सरिार कयला पर ओ भवु मे राखबाक आजा दे लकु। एकह लेल ओ करमारर सभ कमजोर भऽ कऽ भवुक बीच मे बैकस गेलाह। 70 एकह सभक बाद ओ ओकह सभ केँ जाँ च कयलकु जे आिा उजर आ आिा कारी भेटल। आ ओकह मे सँ बहतो आब कारी भ' गेल छल; एकह सभ केँ सेहो ओ फेकल गेल लोक सभक बीच राखबाक आदे श दे लकु। 71 बाकी सभ एकदम उजर भेटल। ओ सभ करमारर सभ उठा कऽ ओही बरज् मे रानख दे लक। जाकह सँ ओ सभ बीच मे राखल गेल सभ मे रानख सककि, ककएक तँ ओकरा सभ सँ ककछर ुकह काटल गेल छल। 72 तखु ओ ओकह सभ कदस तकलकु जे कठोर आ तीकण छल। मरदा एकह मे सँ ककछर ए उपयोग कयल गेल, कारण ओकरा सभ केँ काकट ुकह दे ल जा सकैत छल, कारण ई सभ बहत कठोर भेटैत छल, मरदा बाकी सभ केँ बुाओल गेल छल आ करमारर सभ दारा भवुक बीच मे कफट कयल गेल छल, कारण ओ सभ बेसी कमजोर छल। 73 तखु ओ ओकह सभ पर कवचार कयलकु जाकह पर दाग छल। एकह मे सँ ककछर गोटे कारी भेटल, आ ई सभ अपु संगी सभक लग पहँ चा दे ल गेल। बाकी गोर आ समूण् छल; करमारर सभ ओकरा सभ केँ अपु सामर्क कारणे ँ भवु मे कफट क' क' बाहर मे रानख दे लक। 74 ¶ एकर बाद ओ ओकह पािर सभ पर कवचार करऽ लगलाह जे उजर आ गोल छल, आ हमरा कहलकिु, “हमरा सभ एकह पािर सभक की करब?” हम उपर दे कलयकु, सर, हम ुकह ककह सकैत छी।


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

75 ओ उपर दे लकिु, “की अहाँ एकह सभक लेल ककछर ुकह सोकच सकैत छी?” हम उपर दे कलयकु, सर, हम ई कला ुकह बरझैत छी; ुे हम पािर कटकुहार छी आ ुे ककछर ककह सकैत छी। 76 ओ परछलकिु, “की अहाँ ुकह दे खैत छी जे ओ सभ बहत गोल अकछ?” आब ओकरा सभकेँ चौकोर बुेबाक लेल हमरा ओकरा सभसँ बहत ककछर काकट दे बए पडत; तिाकप, ई जररी अकछ जे एकह मे सँ ककछर टावरक भवु मे जेबाक चाही. 77 हम उपर दे कलयैक। जँ आवशक अकछ तँ अहाँ अपुाकेँ ककएक भकमत करै त छी , आ ुीक ुकह चरुैत छी , जँ अहाँ केँ हुका सभमे कोुो कवकल अकछ , आ हुका सभकेँ भवुमे कफट कएल जाइत अकछ । 78 एकह पर ओ सभसँ पैघ आ उजल सभकेँ चरकु कऽ चौकोर बुा दे लकु। जे ओ पूरा कऽ कऽ करमारर सभ ओकरा सभ केँ उठा कऽ भवुक बाहर रानख दे लक। 79 जे कवशाम बचल छल, तकरा ओकह खेत मे लऽ जाइत छल, जाकह खेत सँ ओकरा सभ केँ लऽ गेल छल। मरदा, ओ सभ ुकह फेकल गेल। कारण, ओ कहलकु, एखु िरर एकह टावर मे ककुको कमी ुकह अकछ, जे बुय बला अकछ; आ शायद पभर एकह पािर सभ केँ एकह भवु मे कफट करौताह, कारण ई सभ बेसी उजर अकछ। 80 तखु बारह टा बहत भव मकहला बजाओल गेलीह, जे कारी वस पकहरुे , कमरबंद आ कान मरक आ केश ढीला। ई सब हमरा दे शक मकहला बरझाइत छल। 81 चरबाह हुका सभ केँ आजा दे लकिु जे भवु सँ बाहर फेकल पािर सभ केँ उठा कऽ ओकह पहाड सभ पर ल' जेबाक चाही, जाकह मे सँ ओ सभ कुकालल गेल छल। 82 ओ सभ खरशी-खरशी सभ केँ लऽ कऽ अपु-अपु याु पर लऽ गेलाह, जतय सँ ओ सभ लऽ गेल छल। 83 जखु बरज्क चारकात एकटा पािर ुकह बचल तखु ओ हमरा कहलकिु, “आउ, एकह बरज् मे घरकम कऽ दे खू जे एकह मे कोुो चीजक कमी अकछ कक ुकह।” 84 ते ँ हम सभ ओकह ठाम घरमए लगलहँ । जखु ओ दे खलकु जे ई सर्र बुल अकछ तऽ ओ बहत पसर होबय लगलाह। कारण, एकर फेम एतेक सर्र छल जे जे ककयो एकरा दे खुे होयत, ओकरा एकह भवु सँ पेम भ' गेल हे तै। 85 ककएक तँ एक पािर छोकड सभटा पािर बरझाइत छल, आ ुे कतह जोड ुकह दे खाइत छल। मरदा लागैत छल जेुा सभटा एककह पािरसँ काकट गेल हो। “ ककएक तँ टावरक सभटा बात समरप हे बाक चाही। 87 हम हुकर आजाक अुरसार केलहँ आ ओ हमरा कहलकु, “हमर मदकद करबाक लेल तैयार रह, तखु ई काज जलीए समा​ा भ’ जायत।” 88 ते ँ ओ पािर सभक जगह सभ केँ भरर दे लकु आ बरज्क आसपासक याु केँ शरद करबाक आजा दे लकु। 89 तखु ओ करमारर सभ बेसोम लऽ कऽ चार कात साफ कऽ दे लक आ सभटा कूडा-करकट लऽ कऽ पाकु फेकक दे लक। जे भ' गेलै, ओ जगह आु्दायक भ' गेलै, आ टावर सर्र भ' गेलै। 90 तखु ओ हमरा कहलकिु, “आब सभ ककछर शरद भऽ गेल अकछ, जँ पभर बरज् केँ समा​ा कर’ अबैत छकि तँ हुका हमरा सभक कशकायत करबाक लेल ककछर ुकह भेटतकु।” 91 ई बात ककह कऽ ओ चकल गेल रकहतकि। मरदा हम हुकर झोरा पककड कऽ पभरक लेल हुका सँ कवुती करय लगलहँ जे ओ हमरा जे ककछर दे खौलकु से हमरा बरझा दे किु।

92 ओ हमरा कहलकिु, “हमरा लग एखु ककु काज अकछ। मरदा हम अहाँ केँ अचाुक सभ बात बरझा दे ब।” जाबे हम ुै आबै ताबे हमरा लेल एतकह रह। 93 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हम एत’ असगरे की करब?” ओ उपर दे लकिु, “अहाँ असगर ुकह छी, ई सभ करमारर अहाँ क संग अकछ।” 94 हम कहकलयकु, “महाराज, तखु हमरा हुका सभक हाि मे सौंप कदअ।” तखु ओ हुका सभ केँ बजा कऽ कहलकिु, “जखु िरर हम ुकह आकब जायब ताबत िरर हम एकह आदमी केँ अहाँ सभक समक रानख दै त छी।” 95 हम ओकह करमारर सभक संग रहलहँ । खास क' चार, जे ओकह मे सबसँ पैघ बरझाइत छल। 96 ¶ तखु ओ करमारर सभ हमरा कहलकिु जे आइ चरबाह एतय ुकह घररर जेताह। हम हुका सभ केँ कहकलयकु, “तखु हम की करब?” ओ सभ उपर दे लकिु, “साँ झ िरर हुका लेल रह, जँ ओ आकब कऽ अहाँ सँ गप क’ सकैत छकि। मरदा जँ से ुकह तँ अहाँ हमरा सभक संग ताबत िरर रहब जाबत िरर ओ कोमा मे ुकह आकब जायत। 97 हम हुका सभ केँ कहकलयकु, “हम हुका लेल साँ झ िरर रहब। मरदा जँ ओकह समय िरर बे ुकह आकब जायत तँ हम घर चकल जायब, आ दोसर कदु भोरे फेर एतय घररर जायब। 98 ओ सभ हमरा उपर दे लकिु, “अहाँ हमरा सभक हाि मे सौंपल गेल छी, अहाँ हमरा सभ सँ दू र ुकह भ’ सकैत छी।” हम कहकलयकु, हम कतय रहब? 99 ओ सभ उपर दे लकिु, “अहाँ हमरा सभक संग भाय जकाँ सरतब, पकत जकाँ ुकह, ककएक तँ अहाँ हमरा सभक भाइ छी आ हम सभ आब सँ अहाँ क संग रहबाक लेल तैयार छी। ककएक तँ अहाँ हमरा सभक बहत कपय छी। 100 तिाकप हमरा हुका सभक संग आगू बढबा मे लाज होइत छल। मरदा ओ जे हुका सभ मे सबसँ पैघ बरझाइत छलीह, हमरा गला लगा लेलक आ हमरा चरमा लेबय लगलीह। आ बाँ की सभ जखु दे नख जे हमरा ओ चरमा लेलक तऽ हमरा भाइ जकाँ चरमा लेबऽ लागल। आ हमरा टावरक चार कात घरमा दे लक आ हमरा संग खेलाइत रहल। 101 ककछर गोटे भजु सेहो गबैत छलाह, ककछर गोटे हुका संग कोरस बुबैत छलाह। मरदा हम हुका सभक संग टावर पर घरमैत रहलहँ, चरपचाप हकष्त होइत, आ अपुा केँ जेुा फेर सँ जवाु भ' गेल छी। 102 जखु साँ झ भेल तखु हम तररन घर चकल जाइत छलहँ , मरदा ओ सभ हमरा रोकक दे लक आ हमरा ुकह जाय दे लक। ते ँ हम ओकह राकत ओही टावर लग हुका सभक संग रहलहँ । 103 ओ सभ अपु कलुेु वस जमीु पर पसारर दे लकु। आ हमरा बीच मे रानख दे लक, आ ुे ककछर आओर, मा​ा ओ सभ पाि्ुा केलक। 104 हमहँ हुका सभक संग अकवराम पाि्ुा केलहँ आ ुे हुका सभसँ कम। ओ सभ हमरा ओकह तरहे ँ पाि्ुा करै त दे नख बहत आुन्त भऽ गेलाह। आ हम दोसर कदु िरर हुका सभक संग ओतकह रहलहँ । 105 जखु हम सभ परमेश् वरक आरािुा कएलहँ तखु चरबाह आकब कऽ हुका सभ केँ कहलकिु, “अहाँ सभ एकह आदमी केँ कोुो तरहक चोट ुकह पहँ चेलहँ । ओ सभ उपर दे लकिु, “ओकरा सँ पूछू।” हम हुका कहकलयकु, “महाराज,


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

हमरा एकह मे बहत संतरकद भेटल अकछ जे हुका सभक संग रकह गेल अकछ।” 106 ओ हमरा कहलकिु, “अहाँ कोुा भोजु करै त छी?” हम उपर दे कलयकु, “महाराज, हम भरर राकत पभरक वचु पर भोज केलहँ ।” ओ सभ तखु अहाँ क ुीक सागत केलक, ओ कहलकु। हम कहकलयकु, सर, बहत ुीक। 107 ओ उपर दे लकिु, “की अहाँ आब जे चाहै त छलहँ से सीखब?” हम उपर दे कलयैक, “महाराज, हम चाहब, आ पकहुे हम अहाँ सँ कवुती करै त छी जे अहाँ हमरा सभ ककछर ओकह कम मे दे खाबी जेुा हम ओकरा सभ सँ कहलहँ ।” 108 ओ उपर दे लकिु, “हम अहाँ क इचाुरसार सभ ककछर करब, आ ुे अहाँ सँ ककछर ुरकाएब।” 109 ¶ सबसँ पकहुे सर, हम कहकलयकु, कह, ई चटाु, आ ई फाटक की दशा् बैत अकछ? सरुू, ओ कहलकु; ई चटाु आ ई फाटक परमेश् वरक परा छकि। हम उपर दे कलयकु, सर, से कोुा भ' सकैत अकछ; दे नख पािर परराु अकछ, मरदा फाटक ुव। 110 सरुू, ओ कहलक, हे मूख् आदमी! आ बरझ।ू परमेश् वरक परा वासव मे कोुो पाणी सँ बेसी पाचीु छकि; एतेक िरर जे ओ सभ वसरक स्कद मे अपु कपताक संग मेल-कमलाप मे छलाह। 111 मरदा ओ फाटक ुव अकछ, ककएक तँ ओ अंकतम समय मे समयक पूण्ता मे पकट भेलाह। जे उदार पाकब लेत, से सभ ओकह दारा परमेश् वरक राज् य मे पवेश करकि। 112 ओ कहलकु जे , अहाँ सभ दे खलहँ जे ओकह पािर सभ केँ फाटक सँ लऽ जाइत छल, जे कोुा टावरक भवु मे राखल गेल छल। मरदा जे सभ फाटक सँ ुकह लऽ गेल छल, ओकरा सभ केँ अपु-अपु याु पर पठा दे ल गेल? 113 हम उपर दे कलयैक, “महाराज, हम दे खलहँ ।” ओ कहलकु जे, परमेश् वरक राज् य मे केओ पवेश ुकह करत, बल् कक जे परमेश् वरक पराक ुाम अपुा ऊपर लेत। 114 जँ अहाँ सभ कोुो ुगर मे पवेश चाहै त छी आ ओकह ुगर केँ दे बाल सँ घेरल रहै त आ मा​ा एकटा फाटक रहै त तऽ की अहाँ ओकह फाटक छोकड ओकह ुगर मे पवेश कऽ सकैत छी? 115 हम उपर दे कलयैक, “महाराज, हम आु कोुा क’ सकैत छलहँ ? जेुा ओ कहलकु जे, ओकह ुगर मे पवेशक कोुो दोसर बाट ुकह होयत, कसवाय ओकर फाटक सँ , ते ँ परमेश् वरक राज् य मे ककयो पवेश ुकह कऽ सकैत अकछ, बल् कक मा​ा अपु पराक ुाम सँ पवेश कऽ सकैत अकछ, जे हुका लेल सभ सँ कपय अकछ। 116 ओ हमरा कहलकिु, “की अहाँ ओकह बरज् बुौकुहार लोकक भीड दे खलहँ ?” सर, हम कहकलयकु, हम दे खलहँ । ओ उपर दे लकिु, “ओ सभ स् वग्दूत छकि, अपु मया् दा मे पूज छकि।” 117 ओकह सभक संग पभर दे बाल जकाँ घेरल छकि, मरदा फाटक परमेश् वरक परा छकि, जे परमेश् वर लग एबाक एकमा​ा बाट छकि। ककएक तँ केओ परमेश् वर लग ुकह जायत, कसवाय अपु पराक दारा। 118 ओ कहलकु जे, अहाँ छओ आदमी आ बीच मे ओकह पूज महापररष केँ सेहो दे खलहँ जे बरज् मे घरमैत छल आ बरज् मे सँ पािर केँ ुकारै त छल? 119 सर, हम कहकलयकु, हम हुका सभ केँ दे खलहँ । ओ उपर दे लकिु, “ओ लंबा आदमी परमेश् वरक परा छलाह, आ ओ छह गोटे हुकर परमेश् वरक स् वग्दूत छलाह, जे हुका चार कात दकहुा आ बामा कात ठाढ छकि।”

120 एकह उपम स् वग्दूत मे सँ ककयो हुका कबुा परमेश् वर लग ुकह अबैत छकि। ओ आगू बजलाह, “जे केओ अपु ुाम ुकह लेत, ओ परमेश् वरक राज् य मे ुकह पवेश करत।” 121 ¶ तखु हम कहकलयकु, ई की बरज् अकछ? ई, ओ कहलकु, चच् किक। आ की अकछ सर, ई करमारर सब? ओ हमरा कहलकिु, “ई सभ पकवा आत् मा सभ अकछ, ककएक तँ परमेश् वरक राज् य मे ककरो पवेश ुकह कऽ सकैत अकछ, जाबत ई सभ ओकरा अपु वस ुकह पकहराओत।” 122 कारण, जाबत तक अहाँ हुका सभक वस सेहो ुकह पाकब लेब, ताबत िरर परमेश् वरक पराक ुाम िारण करबा मे अहाँ केँ कोुो फायदा ुकह होयत। कारण, ई करमारर सभ परमेश् वरक पराक सामि्​् य अकछ। तकहुा मुरर अपु ुाम विय िारण करत, जाबत तक ओकरा अपु सामर् सँ समर ुकह कयल जायत। 123 ओ हमरा कहलकिु, “की अहाँ ओ पािर सभ दे खलहँ जे फेकल गेल छल?” ओ सभ सपे ुाम िारण केुे छलाह, मरदा अपु वस ुकह पकहरुे छलाह। हम कहकलयकु, सर, हुका लोककुक वस की छकु? ओ कहलकु जे, हुका लोककुक ुामकह हुका लोककुक वस किक। 124 ते ँ जे केओ परमेश् वरक पराक ुाम िारण करै त अकछ, ओकरा अपु ुाम सेहो िारण करबाक चाही। ककएक तँ परमेश् वरक परा सेहो हुका सभक ुाम िारण करै त छकि। 125 ओ सभ पािरक बात जे हुका सभक हाि सँ बचाओल गेल छल आ अहाँ दे खलहँ जे भवु मे रकह गेल अकछ, ओ सभ अपु शनकक कपडा पकहरुे छल। जाकह कारणे ँ अहाँ पािरक संग एककह रं गक पूरा बरज् दे खैत छी जे एककह पािरक बुाओल गेल अकछ। 126 तकहुा जे सभ परमेश् वरक पराक दारा परमेश् वर पर कवश् वास कयुे छकि, से सभ हुकर आत् मा पकहरुे छकि। दे खू, एक आत् मा, एक शरीर आ एक रं गक वसक एक रं ग रहत। आ सभ ई पा​ा करत, जे एकह करमारर सभक ुाम िारण करत। 127 हम कहकलयकु, “महाराज, तखु ओकह पािर सभ केँ ककएक फेकल गेल जे खाररज कयल गेल छल, जखु कक ओकरा सभ केँ फाटक सँ लऽ कऽ एकह करमारर सभक हाि सँ एकह बरज्क भवु मे सौंपल गेल छल? 128 ओ कहलकु जे , अहाँ सभ बातक गहुता सँ पूछताछ करबाक धाु रखैत छी आ ओकह पािर सभक कवषय मे सेहो सरुू जे असीकार कयल गेल छल। एकह सभ केँ परमेश् वरक पराक ुाम आ ताकह संग एकह करमारर सभक सामि्​् य सेहो भेटलकु। 129 एकह आत् मा सभ केँ गहण कयला पर ओ सभ कसद भऽ गेलाह आ परमेश् वरक सेवक सभक संखा मे आकब गेलाह। ओ सभ एक शरीर बुय लगलाह आ एकेटा वस होबय लगलाह, ककएक तँ ओ सभ 3 वैह िाकम्कता सँ समर छलाह, जे ओ सभ एक समाु करै त छलाह। 130 मरदा तकर बाद ओ स् ाीगण सभ केँ पकडल जायत जे अहाँ कारी वस पकहरुे दे खलहँ , कान मरक आ केश ढीला। ओ सभ अपु सौ्य्क पलोभु मे अपु इचा ओकरा सभ पर कटकौलकु। ओ सभ अपु सामर्क वस पकहरुे छलाह आ करमारर सभक वस उतारर दे लकु। 131 ते ँ ओ सभ परमेश् वरक घर सँ फेकक दे ल गेल आ ओकह स् ाीगण सभक हाि मे सौंपल गेल। मरदा जे सभ अपु सौ्य् सँ भद ुकह भेल छल, ओ सभ परमेश् वरक घर मे रकह गेल। ओ


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

कहलकु जे , ई ओकह पािरक अि् किक जकरा खाररज कयल गेल छल | 132 ¶ हम कहकलयकु, माकलक, जँ एकह मे सँ ककयो प्ाताप क’ ओकह सीगण सँ अपु इचा केँ ताकग क’ िम् पररवत्ु क’ क’ एकह करमारर सब लग घररर क’ अपु गरण केँ फेर सँ पकहरर लेत त’ की हे तै; की ओ सभ परमेश् वरक घर मे पवेश ुकह करत? 133 ओ कहलकु, जँ ओ सभ ओकह सीगणक सभ काज केँ एक कात रानख कऽ एकह करमारर सभक शनक केँ फेर सँ शरर कऽ लेत आ अपु काज मे चलत। 134 आ एकह कारणे ँ भवु मे एकटा स्प अकछ जे जँ ओ सभ प्ाताप करताह तँ हुका सभ केँ एकह टावरक भवु मे जोडल जा सकैत अकछ। मरदा जँ ओ सभ प्ाताप ुकह करत तँ ओकरा सभक याु पर दोसरो लोकक कुमा् ण भऽ जाय आ एकह तरहे ँ ओ सभ एकदम फेकक दे ल जाय। 135 एकह सभ बातक लेल हम पभर केँ िनवाद दे लहँ, जे ओ सभ लोक पर दया आकब गेलाह, कजुका पर हुकर ुाम कहल गेल छकु, ओ हमरा सभ लग प्ाताप करबाक दू त पठौलकु जे हमरा सभक अधकता करकि जे हुका कवरद पाप केुे छी। आ कक ओ हमरा सभक आा​ा केँ ताजा क' दे लकु जे लगभग खतम भ' गेल छल, आ जेकरा उदारक कोुो आशा ुकह छल, मरदा आब जीवुक ुवीकरणक लेल ताजा भ' गेल अकछ। 136 तखु हम कहकलयकु, “अखु हमरा दे खाउ, माकलक, ई बरज् जमीु पर ुकह, बल् कक चटाु पर आ फाटक पर ककएक बुल अकछ? ओ उपर दे लकिु, “अहाँ मूख् छी, आ कबुा बरझुे, ते ँ अहाँ ई पूछैत छी।” 137 हम कहकलयकु, “महाराज, हमरा अहाँ सँ सभटा बात माँ गबाक आवशकता अकछ, कारण हमरा ककछर ओ ुकह बरझल अकछ। कारण, अहाँ क सभ उपर महाु आ उपम अकछ। आ जेकरा मुरक शायदे बरकझ सकैत अकछ। 138 सरुू, ओ कहलकु, परमेश् वरक पराक ुाम पैघ आ सीमाहीु अकछ, आ समस संसार एकह सँ सहारा अकछ। हम कहकलयकु, जँ परमेश् वरक पत् येक स्ष् कट केँ हुकर परा दारा सहु कयल जाइत छकु तँ ओ हुका सभ केँ सेहो ककएक ुकह दे किु जे हुका दारा आमंकात कयल गेल छकि आ जे हुकर ुाम िारण करै त छकि आ हुकर आजा मे चलैत छकि? 139 ओ कहलकु जे , की अहाँ ुकह दे खैत छी जे ओ हुका सभक संग दै त छकि, जे सभ मोु सँ हुकर ुाम िारण करै त छकि? ते ँ ओ हुका सभक ुीवं छकि, आ जे हुकर ुाम केँ ुकारै त ुकह, मरदा सेचा सँ सहु करै त छकि, तकरा सभ केँ सहष्पूव्क सहारा दै त छकि। 140 ¶ आ हम कहकलयकु: सर, एकह करमारर सभक ुाम बताउ। आ ओकह सीगणक जे कारी वस पकहरुे छलीह। 141 ओ कहलकु जे, ओकह करमारर सभक ुाम सरुू जे बेसी शनकशाली अकछ आ फाटकक कोु मे ठाढ अकछ। ई हुका लोककुक ुाम अकछ : १. 142 पकहल केँ कवशास कहल जाइत छै क; दोसर संयम; तेसर, शनक; चाररम, िैय्; शेष जे एकह सभक ुीचाँ ठाढ अकछ से अकछ, सादगी, मासूकमयत, पकतवता, हँ समरखता, सत, समझ, समनय, दाु | 143 ते ँ जे केओ एकह ुाम आ परमेश् वरक पराक ुाम िारण करत, ओ परमेश् वरक राज् य मे पवेश करत।

144 ओ कहलकु, आब सरुू, ओकह सीगणक ुाम, जे कारी वस पकहरुे छलीह। एकह मे चारर टा पिाु अकछ : पकहल अकछ कवशासघात; दोसर, असंयम; तेसर, बेवफाई; चाररम, सरख। 145 आ शेष जे ओकर बाद होइत अकछ ओकरा एकह तरहे ँ कहल जाइत छै क, उदासी, दर भा् वुा, कामुा, कोि, झूठ बाजब, मूख्ता, अकभमाु आ घ्णा। परमेश् वरक सेवक जे एकह आत् मा सभ केँ लऽ कऽ चलैत अकछ, से परमेश् वरक राज् य केँ दे नख लेत, मरदा ओ ओकह मे पवेश ुकह करत। 146 मरदा, सर, ओ सभ पािर की अकछ जे गहीरं सँ कुकाकल भवुमे कफट कएल गेल छल? दस, ओ कहलकु, जे ुीवं पर राखल गेल छल, पकहल यरग किक; कुमकलनखत पाँ च-बीस, दोसर, िम् पररषक। 147 अकगला पैतीस, पभरक भकवरवका आ सेवक छकि। आ चालीस, परमेश् वरक पराक पचारक पेररत आ वैद छकि। 148 हम कहकलयकु, “महाराज, करमारर सभ ओकह पािर सभ केँ फाटक सँ लऽ गेलाक बाद भवु मे ककएक रानख दे लकु? ओ कहलकिु, “ई सभ पकहुे ओकह आत् मा सभ केँ लऽ कऽ चलैत छल, आ एकोटा सँ एको ुकह, आ ुे मुरष् य सभ आत् मा सभ सँ, आ ुे आत् मा सभ केँ मुरष् य सभ सँ। 149 मरदा ओकह लोक सभक म्तरक कदु िरर आत् मा सभ ओकह लोक सभक संग जरकड गेल छल। जे जँ हुका सभक संग ई आा​ा सभ ुकह रहै त तँ एकह टावरक कुमा् ण मे ओ सभ उपयोगी ुकह भ' सकैत छल | 150 हम कहकलयकु, “महाराज, हमरा एतेक दू र िरर दे खा कदअ।” ओ उपर दे लकिु, “अहाँ की पूछैत छी?” ई पािर सभ गहीरं मे सँ ककएक कुकलल, आ एकह टावरक भवु मे राखल गेल, ई दे खैत जे ई सभ बहत पकहुे सँ ओकह पकवा आा​ा सभ केँ लऽ कऽ चलैत छल। 151 ओ कहलकु जे, हुका सभ केँ पाकु सँ चढब आवशक छल, जाकह सँ ओ सभ आराम करकि। कारण, ओ सभ अनिा परमेश् वरक राज् य मे पवेश ुकह कऽ सकैत छल, बल् कक अपु पूव् जीवुक ुशरता केँ एक कात रानख सकैत छल। 152 ते ँ ओ सभ मरर गेल छलाह, मरदा परमेश् वरक पराक मरहर लगाओल गेल छलाह आ एकह तरहे ँ परमेश् वरक राज् य मे पवेश कयलकु। 153 ककएक तँ परमेश् वरक पराक ुाम गहण करबा सँ पकहुे ओकरा म्तरक लेल कुयरक कयल गेल अकछ। मरदा जखु ओकरा ओ मोहर भेटैत छै क तखु ओ म्तर सँ मरक भ’ जाइत छै क आ जीवु मे कुयरक भ’ जाइत छै क। 154 आब ओ मोहर बपकतस् माक पाकु अकछ, जाकह मे मुरर म्तरक बाधता मे उतरर जाइत अकछ, मरदा जीवुक लेल कुयरक भ’ क’ ऊपर अबैत अकछ। 155 एकह लेल हुका सभ केँ सेहो ई मोहरक पचार कयल गेल छल आ ओ सभ एकर उपयोग कयलकु जाकह सँ ओ सभ परमेश् वरक राज् य मे पवेश करकि। 156 हम कहकलयकु, “तखु माकलक, ई चालीस पािर सेहो पकहुे सँ ओ मोहर पाकब क’ गहीरं मे सँ बाहर ककएक चढल? 157 ओ उपर दे लकिु, “ई सभ पेररत आ गरर सभ जे परमेश् वरक पराक ुामक पचार करै त छलाह आ हुकर कवश् वास आ सामि्​् य पाकब कऽ मरै त छलाह। ओ सभ ई मोहर ओकरा सभ केँ दऽ दे लक।


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

158 ओ सभ हुका सभक संग पाकु मे उतरर गेलाह आ फेर ऊपर चकल गेलाह। मरदा ई सभ जीकवत रहै त ुीचाँ उतरर कऽ फेर सँ जीकवत चकल गेलाह। 159 एकह सभक दारा ओ सभ जीवु पाकब परमेश् वरक परा केँ कचनलकु। आ काटल ुकह, बन् पूरा मे राखल गेल। कारण, ओ सभ िाकम्कता आ बहत पकवाता मे मरर गेलाह। मा​ा ई मोहर हुका सभक लेल चाहै त छल। 160 एकह तरहे ँ अहाँ केँ एकह सभ बातक वाखा अकछ। 161 ¶ हम उपर दे कलयकु: सर, आब कह जे ओकह पहाड सभक की कचंता अकछ, ओ सभ एतेक कभर ककएक अकछ; ककछर एक रपक, आ ककछर दोसर रपक। 162 सरुू, ओ कहलकु; ई बारह पहाड जे अहाँ दे खैत छी, से बारह जाकत अकछ जे समस संसार केँ बुबैत अकछ। ते ँ परमेश् वरक पराक पचार हुका सभक दारा कयल गेल अकछ। 163 मरदा, हम कहकलयकु, ओ सभ अलग-अलग ककएक अकछ, आ पतेक एक आक्कतक अकछ? ओ उपर दे लकु, सरुू। ओ बारह राद् जे समस संसार पर कबा करै त अकछ, ओ बारह लोक अकछ | 164 आ जेुा अहाँ एकह पहाड सभ केँ अलग-अलग दे खलहँ , तकहुा ई सभ अलग-अलग अकछ। ते ँ हम अहाँ केँ हरे क पहाडक अि् आ कम् खोलब। 165 मरदा पकहुे सर, हम कहकलयकु, हमरा ई दे खाउ। ई पहाड सब एतेक अलग दे नख, एकह टावरक कुमा् ण मे कोुा सहमत भ गेल अकछ; आ एक रं ग मे आुल गेल अकछ। आ गहीरं सँ कुकलल सभसँ कम उजल ुकह अकछ? 166 कारण, ओ उपर दे लकिु, जे सभ जाकत स् वग्क ुीचाँ अकछ, ओ परमेश् वरक पराक एककह ुाम सरु​ुे अकछ आ ओकरा पर कवश् वास करै त अकछ, जकरा दारा ओ सभ बजौल गेल अकछ। 167 ते ँ हुकर मोहर पाकब सभ एककह 1 समझ आ 2 जाुक भागीदार बकु गेल छकि। आ हुका लोककुक कवशास आ दाु एके रं ग रहल अकछ। आ ओ सभ एकह करमारर सभक आत् मा केँ हुकर ुामक संग लऽ गेल अकछ। 168 आ ते ँ एकह टावरक भवु एके रं गक बरझाइत छल, आ सूय्क चमक जकाँ चमकैत छल। 169 मरदा एक मु मे एकह तरहे ँ सहमत भेलाक बाद सभ गोटे क एकटा शरीर होबय लागल। मरदा ककछर गोटे अपुा केँ पदू कषत कयलकु, आ िम् लोकक पकार सँ फेकक दे ल गेलाह, आ फेर अपु पूव् अवया मे वापस आकब गेलाह, आ पकहुे सँ बेसी खराब भ' गेलाह। 170 ¶ कोुा, हम कहकलयकु, सर, ओ सभ बेसी खराब छल जे पभर केँ कचनै त छल? ओ उपर दे लकिु, “जे पभर केँ ुकह जुैत अकछ, ओ दर दतापूव्क जीबैत अकछ, त’ ओकर दर दताक दण ओकरा हाकजर होइत छै क। 171 मरदा जे पभर केँ कचनुे अकछ, ओकरा सभ दर दता सँ एकदम परहे ज करबाक चाही आ बेसी सँ बेसी िाकम्कताक सेवक बुबाक चाही। 172 आ की ओ तखु अहाँ केँ बेसी पाप ुकह करै त बरझाइत अकछ जकरा भलाईक पालु करबाक चाही, जँ ओ पापक भाग केँ पकसु करत। जे परमेश् वरक सामि्​् य केँ ुकह जु​ुे अपमाकुत करै त अकछ, ताकह सँ बेसी? 173 ते ँ ई सभ सपे म्तरक लेल कुयरक अकछ। मरदा जे सभ पभर केँ कचनुे छकि आ हुकर अद् भरत काज दे खुे छकि, जँ ओ सभ

दर दतापूव्क जीबैत छकि तँ हुका सभ केँ दर गरुा सजाय भेटतकु आ अुन काल िरर मरताह। 174 ते ँ जेुा अहाँ दे खलहँ जे पािर सभ टावर सँ बाहर फेकल गेलाक बाद जे असीक्त कयल गेल छल। दर द आ कूर आा​ा सभक हाि मे सौंपल गेल। अहाँ ओकह बरज् केँ एतेक शरद दे खलहँ जेुा ई सभटा एककह पािर सँ बुल हो। 175 ते ँ परमेश् वरक मण् डली जखु शरद भऽ जायत: (दर द आ ुकली, शरारती आ संकदग, आ सभ जे एकह मे दर द ववहार केलक, आ बाहर कुकाकल कऽ तरह-तरह के पाप केलक) एक शरीर बकु जायत, आ एकटा समझ, एक कवचार, एक कवशास आ एककह दाु होयत। 176 तखु परमेश् वरक परा हुका सभक बीच आुन्त हे ताह आ अपु लोक केँ शरद इचा सँ गहण करताह। 177 आ हम कहकलयकु; सर, ई सब बात पैघ आ समाुजुक अकछ; मरदा आब हमरा हर पहाडक पभाव आ सामर् दे खाउ, जाकह सँ पभर पर भरोसा करयवला पतेक पाणी जखु ई बात सरुत तखु ओकर महाु आ अद् भरत आ पकवा ुामक आदर करय। 178 सरुू, ओ कहलकु, एकह पहाडक कवकविता, अिा् त् बारह राद्क। 179 ¶ जे पकहल पहाड पर कवशास केुे छकि, जे कारी अकछ, ओ छकि जे कवशास सँ कवदोह केुे छकि; आ पभरक कवरद दर ष् ट बात बाजल। आ परमेश् वरक सेवक सभ केँ िोखा दे लक। 180 ई सभ म्तरक सजा पाओल गेल अकछ, ओकरा सभक लेल कोुो प्ाताप ुकह अकछ, आ ते ँ ओ सभ कारी अकछ, ककएक तँ ओकर सभक जाकत दर द अकछ। 181 दोसर पहाड जे कचकुा छल, ओकह मे सँ पाखंडी सभ, जे कवशास कएुे छकि, आ ुटखटताक गरर सभ छकि, आ ई सभ उपरोक सभक बगल मे छकि, कजुका सभ मे िाकम्कताक फल ुकह छकु। 182 जेुा हुका लोककुक पहाड बंजर आ फलहीु अकछ। तकहुा एहु तरहक लोक सभक ुाम वासव मे मसीहीक ुाम छकु, मरदा कवशास सँ खाली छकि। आ ुे हुका सभ मे सतक कोुो फल अकछ। 183 तैयो ओकरा सभ केँ प्ाताप करबाक गरंजाइश बचल छै क, जँ ओ सभ अचाुक ओकर पाछाँ लाकग जायत। 184 हम कहकलयकु, सर, प्ाताप करबाक गरंजाइश ककएक बचल अकछ, आ उपरोक पकारक लेल ुकह, ई दे नख जे ओकर पाप लगभग एके रं ग अकछ? 185 ते ँ ओ एकह सभ केँ प्ाताप कऽ कऽ जीवु मे घररब अकछ, ककएक तँ ओ सभ अपु पभरक कु्ा ुकह केलक आ ुे परमेश् वरक सेवक सभ केँ िोखा दे लक। ते ँ एकह बातक लेल ओ सभ कद उठाओत। 186 मरदा एखुो हुका सभ केँ प्ाताप करबाक गरंजाइश बचल अकछ, कारण ओ सभ पभरक कवरद कोुो दर ष् ट बात ुकह कहलकु। 187 ¶ जे तेसर पहाडक अकछ जाकह मे काँ ट आ काँ ट छल, ओ सभ अकछ जे कवशास केलक, मरदा ओकह मे सँ ककछर िकुक छल, ककछर बहत काज मे लागल छल: काँ ट ओकर िु अकछ, काँ ट, ओ काज जाकह मे ओ सभ लागल छल। 188 आब जे सभ बहत रास कारोबार आ कवकवि काज मे उलझल अकछ, ओ सभ परमेश् वरक सेवक सभक संग ुकह जरकड


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

जाइत अकछ, बल् कक ओकह काज सभ सँ बजाओल जाइत अकछ, जाकह सँ ओ सभ गला घोंटैत अकछ। 189 आ ते ँ जे िुी छकि, ककठुाई सँ परमेश् वरक सेवक सभक गप-सपक समक अपुा केँ समकप्त कऽ दै त छकि। एकह डर सँ जे कही ं हुका सभ सँ ककछर ुकह माँ गल जाय। ते ँ ई सभ परमेश् वरक राज् य मे पवेश करब ककठु अकछ। 190 जेुा मुरर काँ ट पर ुंगे पैर ककठुाई सँ चलैत अकछ, तकहुा एकह तरहक लोक सभ परमेश् वरक राज् य मे बहत कम पवेश करत। 191 तइयो एट अकछ। एकह सभ केँ प्ाताप करबाक लेल घररर गेलाह। जँ से ओ सभ जलीए ओकह कदस घररर जेताह। कक कारण जे पकहुे के कदु मे काज करय मे उपेका केुे छकि, आबय वाला समय मे ककछर भलाई क सकय. 192 ते ँ जँ ओ सभ प्ाताप कऽ कऽ िाकम्कताक काज करताह तँ ओ सभ जीकवत रहताह। मरदा जँ ओ सभ अपु अिलाह काज मे चलैत रहत तँ ओकह सीगणक हाि मे सौंपल जायत जे ओकर पाण छीु लेत। 193 ¶ रहल चाररम पहाडक, जाकह मे बहत रास जडी-बूटी छल, जकर ऊपरी भाग हररयर अकछ, मरदा जकड सरखायल अकछ, आ ककछर रौदक ताप सँ सश् कयला पर मररझा गेल अकछ; 194 ई संकदग लोक केँ दशा् बैत अकछ, जे कवशास कएुे छकि, आ ककछर आओर लोक जे पभर केँ अपु जीह मे ल' क' चलैत छकि, मरदा हुका हदय मे ुकह छकु, ते ँ हुकर घास सूखल छकु, आ जकड ुकह छकु; कारण, ओ सभ मा​ा शब मे जीबैत छकि, मरदा हुकर सभक काज मरर गेल अकछ। 195 ते ँ ई सभ ुे म्त अकछ आ ुे जीकवत, आ कविल संकदग अकछ। ककएक तँ संकदग सभ ुे हररयर होइत अकछ आ ुे शरष। अिा् त ुे म्त आ ुे जीकवत। 196 कारण जेुा जडी-बूटी सूय्क दश्ु पर सरनख जाइत अकछ। ते ँ संकदग लोककु जकहुा उतीडुक बात सरुैत छकि, आ असरकविाक डर होइत छकि, अपु मूकत् कदस घररर जाइत छकि, आ फेर हुकर सेवा करै त छकि, आ अपु पभरक ुाम िारण करबा मे लाज होइत छकि | 197 एकह तरहक मुरक तखु ुे म्त अकछ आ ुे जीकवत अकछ; तैयो ई सभ सेहो जीकवत रकह सकैत छकि, जँ ओ सभ एखु िरर प्ाताप करताह। मरदा जँ से ुकह तँ ओकह सीगणक हाि मे सौंपल जायत, जे ओकर पाण छीु लेत। 198 ¶ पाँ चम पहाडक कवषय मे जे चटाुी अकछ, मरदा हररयर घास अकछ, ओ सभ एकह तरहक छकि जे कवशास कएुे छकि, आ सपे कवशासी छकि, मरदा ककठुाई सँ कवशास करै त छकि। आ साहसी आ घमंडी होइत छकि। जे सब बात जाुय लेल माुल जायत, मरदा वासव मे ककछर ुकह जुैत अकछ। 199 ते ँ एकह कवशासक कारणे ँ हुका सभसँ जाु हकट गेल अकछ। आ एकटा दाुा अुरमाु ओकरा सभ मे पवेश कयल जाइत छै क | 200 मरदा ओ सभ अपुा केँ ऊँच आ बरनदमाु लोक जकाँ उठा लैत छकि। आ भले मूख् होकि, मरदा गरर बरझाइत हे ताह। 201 एकह मूख्ताक कारणे ँ ओ सभ मे सँ बहतो लोक अपुा केँ मकहमामंकडत करै त काल वि् आ शून भऽ गेल छकि। कारण साहस आ वि् कवशास बहत दर द आा​ा किक। 202 ते ँ एकह मे सँ बहतो लोक फेकक दे ल जाइत अकछ। मरदा दोसर लोक अपु गलती केँ सीकार क' क' प्ाताप क' क' जे जाुैत छकि, हुका सभक अिीु भ' गेल छकि।

203 आ एकह तरहक बाकी सभ केँ प्ाताप करबाक अुरमकत अकछ। ककएक तँ ओ सभ ओतेक दर द ुकह छल, ओतेक मूख् ुकह छल, ओतेक बरनदहीु छल। 204 ते ँ जँ ई सभ प्ाताप करत तँ ओ सभ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। मरदा जँ से ुकह तँ ओ सभ ओकह स् ाीगण सभक संग रहत, जे ओकरा सभ पर अपु दर ष् टताक पयोग करत। 205 ¶ छठम पहाडक पैघ-पैघ दरारक कवषय मे ओ सभ एहु छकि जे कवशास कएुे छकि। मरदा जाकह मे छोट-छोट दरार छल, ओ अकछ जे आपस मे कववाद भेल अकछ। आ हुका लोककुक झगडाक कारणे ँ कवशास मे डूकब जाइत छकि। 206 तैयो एकह मे सँ बहतो गोटे प्ाताप कयलकु, आ बाँ की सभ जखु हमर आजा सरुताह तखु प्ाताप कयलकु। कारण, हुका लोककुक कववाद छोट-छोट अकछ, आ ओ सभ सहजकह प्ाताप मे वापस आकब जेताह। 207 मरदा कजुका सभ मे पैघ दरार छकु, ओ कठोर पािर जकाँ हे ताह, जे कोि आ अपरािक पकत धाु राखत, आ आपस मे कोि सँ भरल रहताह। एकह लेल ई सभ बरज् पर सँ फेकक दे ल गेल अकछ आ ओकर भवु मे राखय सँ मुा कयल गेल अकछ। कारण, एकह तरहक लोक मरन्ल सँ जीकवत रहत। 208 हमर सभक परमेश् वर आ पभर , जे सभ ककछर पर राज करै त छकि, आ अपु सभ स्कद पर अकिकार रखैत छकि, हमरा सभक अपराि केँ मोु ुकह रखताह, बल् कक जे सभ अपु पाप सीकार करै त छकि, हुका सभ सँ सहजता सँ शान भऽ जाइत छकि। जेुा ओकरा बचाबय वा ुद करब ओकर सामर् मे हो। 209 मरदा हम, जेुा अहाँ सभक प्ाताप पर राखल गेल स् वग्दूत, अहाँ सभ केँ सलाह दै त छी जे अहाँ सभ मे जे ककयो एहु कोुो उदे श रखैत अकछ, ओ ओकरा एक कात रानख, आ प्ाताप मे घररर जाय। आ पभर अहाँ सभक पूव्क पाप केँ ठीक करताह, जँ अहाँ सभ एकह दर दा​ा​ा सँ अपुा केँ शरद करब। मरदा जँ अहाँ सभ ई काज ुकह करब तँ ओकरा म्तरक लेल सौंपल जायब।” 210 ¶ सातम पहाडक बात जाकह मे घास हररयर आ पुपैत छल आ पूरा पहाड कवशासी छल। सभ तरहक मवेशी ओकर घास खाइत छल, आ घास जतेक बेसी खाइत छल ओतेक बेसी फलैतफूलैत छल। 211 ओ सभ एहु छकि जे कवश् वास करै त छलाह, आ सकदखु ुीक आ सोझ छलाह। आ आपस मे कोुो मतभेद ुकह, मरदा एखुो एकह करमारर सभक आत् मा पकहरर परमेश् वरक सेवक सभ मे आुन्त होइत रहलाह। आ सभ मुरष् य पर दया करबाक लेल सकदखु आगू बढै त रहलाह, कबुा कोुो डाँ टुे आ कबुा कोुो कवचार-कवमश् केुे सभ मुरर केँ अपु मेहुकत सहजता सँ दै त रहलाह। 212 ते ँ पभर हुका सभक सरलता आ कुद्षता दे नख हुका सभक हािक काज मे बढौलकु आ हुका सभक सभ काज मे क्पा कयलकु। 213 मरदा हम, जे अहाँ सभक प्ाताप पर कुयरक स् वग्दूत छी, अहाँ सभ केँ आगह करै त छी जे एकह तरहक सभ लोक एककह काज मे रहय, जाकह सँ अहाँ क वंशज सदाक लेल जकड सँ ुकह उखाकड सकय। 214 ककएक तँ पभर अहाँ सभक परीकण कयलकु आ अहाँ सभ केँ हमरा सभक संखा मे कलनख दे लकु। अहाँ क सभ संताु परमेश् वरक पराक संग रहत। ककएक तँ अहाँ सभ हुकर आत् माक छी।”


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

215 ¶ आठम पहाडक कवषय मे जाकह मे बहत रास झरुा छल, जाकह सँ परमेश् वरक सभ पकारक सभ पाणी केँ पाकु दे ल जाइत छल। ओ सभ एहु छकि जे ओकह पेररत सभ पर कवश् वास कएुे छकि कजुका सभ पभर पचार करबाक लेल समस संसार मे पठौलकु। 216 ककछर गोटे कशकक भ’ क’ शरद आ कुशलतापूव्क पचार आ कशका दै त छकि, आ कोुो तरहक दर द इचाक समक ककुको ुकह झरकल छकि, बल् कक कुरं तर िम् आ सत मे चलैत रहलाह अकछ। 217 ते ँ ई सभ स् वग्दूत सभक बीच अपु-अपु गप-सप होइत अकछ। 218 ¶ परुः; जेुा ुवम पहाड जे मरभूकम अकछ आ साँ प सँ भरल अकछ। ओ सभ एहु छकि जे कवश् वास कएुे छकि, मरदा हुका पर बहत दाग छलकु। 219 ई सभ एहु मंाी छकि जे अपु सेवाक कुव्हु गलत तरीका सँ करै त छकि। कविवा आ अुािक समकप लूटैत। आ जे ककछर ओकरा सभ केँ भेटल छै क, ताकह मे सँ दोसरक ुकह, अपु सेवा कर। 220 ई सभ जँ एकह लोभ मे रहै त छकि तँ अपुा केँ म्तरक समक सौंपुे छकि, आ ुे हुका सभक लेल जीवुक कोुो आशा ुकह होयत। मरदा जँ ओ सभ िम् पररवत्ु कऽ लेताह आ अपु सेवा केँ ईमाुदारी सँ कुव्हु करताह तँ ओ सभ जीकब सकैत छकि। 221 रहल बात जे रक पाओल गेल छल, से एहु अकछ जे पभरक ुाम केँ ुकारर कऽ फेर पभर लग ुकह घररर गेल अकछ, मरदा जंगली आ जंगली भ’ गेल अकछ। परमेश् वरक सेवक सभ मे अपुा केँ ुकह लगाबैत; मरदा हुका सभसँ अलग भऽ कुेक लापरवाहीसँ अपु जाु गमा लेुे छकि । 222 ककएक तँ जकहुा बेि मे छोडल गेल बेल ककहयो ुकह पकहरल जाइत अकछ, तकहुा ुद भऽ जाइत अकछ आ खरपतवारक गला घोंटैत अकछ, आ समयक संग जंगली भऽ जाइत अकछ आ अपु माकलकक लेल उपयोगी ुकह भऽ जाइत अकछ। ते ँ एकह तरहक लोक अपुा सँ कुराश भ' क' खटा भ' क' अपु पभरक लेल बेकार होब' लागल अकछ। 223 मरदा एकह सभ केँ, आनखर, प्ाताप करबाक अुरमकत छै क, जँ ओ सभ अपु हदय सँ मसीह केँ असीकार करबाक लेल ुकह पाकब जायत। मरदा जँ एकह मे सँ ककयो ओकरा हदय सँ असीकार केुे पाओल जायत तऽ हम ुकह ककह सकैत छी जे एहु वनक जीवु पा​ा क' सकैत अकछ कक ुकह। 224 ते ँ हम कहै त छी जे जँ केओ असीकार केुे अकछ तँ ओ एकह कदु सभ पर प्ाताप करबाक लेल घररर कऽ आओत। कारण ई ुकह भ' सकैत अकछ जे आब जे ककयो पभर केँ असीकार करै त अकछ, से बाद मे उदार पाकब सकैत अकछ: तइयो पकहुे असीकार करय बला सभ केँ प्ाताप करबाक पसाव कयल गेल अकछ। 225 मरदा जे प्ाताप करत ओकरा एकह टावरक कुमा् ण समा​ा हे बासँ पकहुे अपु प्ाताप करबामे जलबाजी करबाक चाही, ुकह तँ ओकह सीगण दारा ओकरा म्तरक लेल सौंपल जायत। 226 मरदा जे अपंग अकछ से सभ छल। आ जे एक दोसरा मे घरकलकमकल जाइत अकछ, से सभ ओकह ुाग सभ केँ अकछ जे अहाँ ओकह पहाड मे घरकल-कमकल गेल दे खलहँ । 227 जकहुा साँ पक जहर मुरष् यक लेल घातक होइत अकछ। ते ँ एहु वनकक बात मुरर केँ संककमत आ ुद करै त अकछ | ते ँ ओ सभ अपु कवश् वास मे अपंग भऽ जाइत छकि, जाकह तरहक जीवु ओ सभ जीबैत छकि।

228 मरदा हुका सभ मे सँ ककछर गोटे प्ाताप कऽ कऽ उदार पाकब गेल छकि, आ तकहुा ओकह तरहक ककछर गोटे सेहो उदार पाकब लेताह, जँ ओ सभ प्ाताप करताह। मरदा जँ ुकह तँ ओकह सीगणक दारा मरर जेताह कजुकर शनक आ बल हुका सभ लग छकु | 229 ¶ दसम पहाडक कवषय मे, जाकह मे मवेशी केँ झाँ पुे गाछकबररछ छल, ओ सभ एहु अकछ जे कवशास केलक, आ ककछर गोटे कबशप, अिा् त मण् डली सभक गवु्र सेहो रहल अकछ। 230 दोसर, एहु पािर अकछ जे ुकली मे ुकह, मरदा पसर मोु सँ परमेश् वरक सेवक सभक मुोरं जु केलक। 231 तखु जे ुीच मंा​ालय पर राखल गेल अकछ। आ गरीब आ कविवा सभक रका केुे छकि। आ सकदखु पकतवता गप-सप करै त रहलाह, ते ँ हुका सभक रका पभर दारा सेहो कयल जाइत छकु। 232 जे ककयो एकह तरहे ँ काज करत, पभरक संग आदर कयल जाइत अकछ। आ ओकर सभक याु स् वग्दूत सभक बीच अकछ, जँ ओ सभ अु् त िरर पभरक आजा माुैत रहत। 233 ¶ गारहम पहाडक बात जाकह मे कतेको तरहक फल सँ लदल गाछ छल, ओ सभ एहु अकछ जे पभरक ुामक लेल कवशास कएुे अकछ आ म्तरक कशकार भ' गेल अकछ। आ तैयार मोु सँ सहै त रहलाह, आ पूरा मोु सँ अपु पाण छोकड दे ुे छकि। 234 हम कहकलयकु, “तखु सर, ई सभ फल सपे ककएक भेटैत अकछ, मरदा तइयो ककछर गोटे केँ ककछर सँ बेसी सर्र? 235 सरुू, ओ कहलकु: जे ककयो पभरक ुामक लेल कद भोगल अकछ, ओकरा पभरक आदरणीय माुल जाइत छै क। परमेश् वरक पराक ुामक कारणे ँ हुका सभक सभ अपराि मेटा दे ल जाइत छकु। 236 आब सरुू जे हुका लोककुक फल अलग-अलग ककएक होइत छकु, आ ककछर गोटे ककछर सँ बेसी ककएक छकि, जे सभ मकजस् े ट सभक समक आुल गेलाह आ पूछला पर पभर केँ असीकार ुकह कयलकु, बल् कक तैयार मोु सँ कद भोगलकु। ई सभ पभरक समक बेसी समाुजुक अकछ। ते ँ जे फल सभसँ बेसी गोरा होइत अकछ से ई सभ अकछ । 237 मरदा ओ सभ जे भयभीत आ संदेह मे पडल छल, आ अपुा आप मे कवचार-कवमश् क’ रहल छल जे मसीह केँ सीकार करबाक चाही वा असीकार करबाक चाही, मरदा तैयो कद भोकग गेल अकछ। हुका लोककुक फल छोट-छोट होइत छकु, कारण जे ई कवचार हुका लोककुक हदय मे आकब गेलकु | 238 ककएक तँ ुोकरक लेल ई कवचार करब दर द आ दर द कवचार अकछ जे ओ अपु माकलककेँ असीकार करत वा ुकह। ते ँ अहाँ सभ एकह तरहक कवचार रखकुहार सभ साविाु रह जे ई कवचार अहाँ सभ मे ुकह रहय आ अहाँ सभ परमेश् वरक लेल मरर जायब। 239 मरदा अहाँ सभ जे हुकर ुामक कारणे ँ म्तरक भोग करै त छी, पभरक आदर करबाक चाही, कारण ओ अहाँ सभ केँ अपु ुाम िारण करबाक योग माुैत छकि। आ अहाँ सभ अपु सभ पाप सँ मरक भऽ जायब।” 240 ते ँ अहाँ सभ अपुा केँ सरखी ककएक ुकह माुैत छी? हँ , सपे सोचू जे जँ अहाँ सभ मे सँ ककयो कद उठाबैत अकछ तँ ओ कोुो पैघ काज करै त अकछ? कारण, पभर अहाँ सभ केँ जीवु दै त छकि, मरदा अहाँ सभ एकरा ुकह बरझैत छी। ककएक तँ अहाँ सभक अपराि अहाँ सभ पर अताचार करै त छल। जँ अहाँ सभ हुकर


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

ुामक कारणे ँ कद ुकह भोकगतहँ तँ आब पभरक लेल मरर गेल रकहतहँ । 241 ते ँ हम अहाँ सभ केँ ई बात कहै त छी जे अहाँ सभ कवचार करै त छी जे अहाँ सभ हुका सीकार करब वा असीकार करब। सीकार कर जे अहाँ सभक परमेश् वरक लेल पभर छकि। कही ं ककहयो हुका असीकार कऽ कऽ अहाँ सभ बान मे ुकह रानख सकब।” 242 ककएक तँ सभ जाकत अपु माकलकक असीकार करयवला सेवक सभ केँ दं कडत करै त अकछ। अहाँ सभ की सोचैत छी जे पभर अहाँ सभक संग करताह, जे सभ ककछर क सामर् रखैत छकि? 243 ते ँ ई शंका सभ केँ हदय सँ हटा कदयौक, जाकह सँ अहाँ सभ परमेश् वरक लेल अु​ु् त काल जीकवत रहब। 244 रहल बात बारहम पहाडक जे उजर छल, तँ ओ सभ एहु छकि जे कुशल बचा जकाँ कवशास कएुे छकि, कजुकर कवचार मे ककहयो कोुो दर भा् वुा ुकह आयल छल, आ ुे हुका सभ केँ ककहयो पता चललकु जे पाप की छल, मरदा सकदखु अपु अखंडता मे बुल रहलाह। 245 ते ँ एकह तरहक लोक सभ केँ परमेश् वरक राज् यक उपराकिकार मे कोुो संदेह ुकह। कारण, ओ सभ ककहयो कोुो बात मे परमेश् वरक आजा केँ अशरद ुकह केुे छकि, बल् कक जीवु भरर एके दशा मे कुशलता सँ बुल रहलाह। 246 ओ कहलकु जे , जे ककयो दर भा् वुापूण् बचा जकाँ रहत। कजुका बारे मे हम एखु िरर कहुे छी, हुका सभ सँ बेसी आदरणीय होयत, ककएक तँ एहु सभ बचा केँ पभरक आदर कयल जाइत छकु आ सभ सँ पकहुे माुैत छकि।” 247 ते ँ अहाँ सभ िन छी जे अहाँ सभ सँ सभ दर भा् वुा दू र कय कुद्षता पकहरब। ककएक तँ अहाँ सभ पकहुे पभर केँ दे खब।” 248 ओ सभ पहाडक कवषय मे एकह तरहे ँ अपु वाखा समा​ा कयला पर हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हमरा ईहो दे खाउ जे मैदाु सँ बाहर कुकाकल कऽ असीक्त लोकक कोठली मे बरज् मे राखल गेल पािरक कवषय मे की अकछ। 249 ओकह गोल-गोल पािरक कवषय मे सेहो जे बरज्क कुमा् ण मे जोडल गेल छल। 250 ¶ ओ कहै त छकि जे आब ओकह पािर सभक कवषय मे सरुू जे मैदाु सँ बाहर कुकाकल कऽ टावरक भवु मे आकु दे ल गेल छल आ जेकरा असीक्त कयल गेल छल, ओकर कोठली मे राखल गेल छल। ओकह उजर पहाडक जकड किक। 251 एकह लेल ककएक तँ जे सभ ओकह पहाड पर कवश् वास कएुे छकि, ओ सभ बहत कुद्ष छलाह। एकह टावरक माकलक आजा दे लकु जे एकह पहाडक जकड मे जे लोक छकि हुका सभ केँ भवु मे राखल जाय। 252 ककएक तँ हुका बरझल छलकु जे जँ हुका सभ केँ एकह भवु मे राखल जायत तँ ओ सभ उजल रहत। आ ुे आब ककरो कारी बुाओल जायत। 253 मरदा जँ ओ एकह तरहे ँ शेष पहाडसँ जोकड दे ुे रकहतकि तँ ओकरा लगभग फेरसँ टावर घरमबाक आ ओकरा साफ करबाक आवशकता पकडतैक। 254 आब ई सभ उजर पािर ओ यरवक अकछ जे कवशास कएुे अकछ वा कवशास करत। ककएक तँ सभ एके तरहक अकछ। सरखी एकह तरहक अकछ, कारण ई कुद्ष अकछ। 255 आब ओकह गोल आ चमकैत पािर सभक कवषय मे सेहो सरुू। मरदा ओ सभ गोल-गोल भेटैत अकछ, ककएक तँ ओकर

सभक िु-समकप ओकरा सभ केँ सत सँ कुेक अनार क’ दे लक आ ओकर सभक आँ नख चकाचक क’ दे लक। 256 मरदा ओ सभ ककहयो पभर सँ हकट कऽ ुकह गेल छकि आ ुे हुका सभक मरँह सँ कोुो दर ष् ट बात कुकलल अकछ। मरदा सभ िम्, सद् गरण आ सत। 257 जखु पभर हुका सभक मु केँ दे खलकु जे ओ सभ सत् य केँ शोकभत करकि। ओ आजा दे लकिु जे ओ सभ ुीक-ुीक रहय आ ओकर िु-दौलत केँ कम कयल जाय। 258 ककएक तँ ओ ुकह चाहै त छलाह जे हुका सभ केँ पूरा तरहे ँ छीकु लेल जाय, जाकह सँ ओ सभ जे ककछर बचल अकछ ताकह सँ ककछर भलाई कऽ सककि आ परमेश् वरक लेल जीकब सककि। कारण ओहो सभ ुीक तरहक होइत अकछ। 259 ते ँ ओतऽ हुका सभ सँ कुेक ककट गेल छल, आ ते ँ हुका सभ केँ एकह बरज्क भवु मे राखल गेल। 260 ¶ बाँ की सभ जे एखुो गोल-गोल रहल, आ एकह बरज्क कुमा् णक योग ुकह भेटल, ककएक तँ ओकरा सभ केँ एखु िरर मोहर ुकह भेटल अकछ। ओकरा सभ केँ अपु जगह पर ल' गेलै, कारण ओ सभ बहत गोल-गोल भेकट गेलै। 261 मरदा एकह वत्माु संसार केँ ओकरा सभ सँ, आ ओकर िुक वि्ता सभ केँ काकट दे बऽ पडतैक। तखु ओ सभ परमेश् वरक राज् यक लेल योग भऽ जेताह। कारण, हुका सभ केँ परमेश् वरक राज् य मे पवेश करबाक चाही, ककएक तँ परमेश् वर एकह कुद्ष जाकत केँ आशीष दऽ दे ुे छकि। 262 ते ँ एकह तरहक केओ ुकह खकस पडत। ककएक तँ जँ ओकरा सभ मे सँ ककयो शैताुक पलोभु मे आपकप करकि, मरदा ओ जनलये अपु पभर परमेश् वर लग घररर जेताह। 263 हम प्ातापक दू त अहाँ केँ सरखी माुैत छी, जे ककयो छोट बचा जकाँ कुद्ष अकछ, कारण अहाँ क भाग पभरक समक ुीक आ समाुजुक अकछ। 264 हम अहाँ सभ केँ कहै त छी जे ई मोहर भेटल अकछ। सादगी राखू, आ जे अपराि अहाँ क कवरद कयल गेल अकछ से मोु ुकह राखू, आ ुे अपरािक स्कत मे दर भा् वुा, वा कटर ता मे जारी रह। 265 मरदा एक आा​ा बकु कऽ एकह दर द चीर-फाडक उपाय कर आ अहाँ सभ सँ दू र कर। जाकह सँ बरदक माकलक एकह पर आुन्त होकि। ककएक तँ ओ आुन्त हे ताह, जँ ओकरा सभटा सय पाओत।” 266 मरदा जँ एकह मे सँ कोुो भेड ँ ा कछकडयाएल भेटत तँ चरबाह सभक लेल किकार होयत। मरदा जँ चरबाह सभ कछकडयाइत रहत। भेड ँ ाक माकलक केँ की उपर दे तैक? की ओ सभ कहताह जे बरद सभसँ परे शाु भेलाह? मरदा हुका सभ पर कवश् वास ुकह कयल जायत। 267 कारण ई अकवशसुीय बात अकछ जे चरबाह केँ अपु भेड ँ ाक कारणे ँ कद भोगय पडतैक। ओ अपु झूठक लेल ओतबे बेसी सजा पाओत। 268 आब हम चरबाह छी। आ खास क' अहाँ क कहसाब दे ब' पडत। 269 ¶ ते ँ जाबत िरर टावर बुैत अकछ ता िरर अपु खाल राखू। जे शां कत पेम करै छै , ओकरा कसुी मे पभर कुवास करै छै । ककएक तँ शानन कपय अकछ। मरदा ओ कववाद करयवला आ दर भा् वुा सँ भरल लोक सँ दू र अकछ। 270 ते ँ जेुा अहाँ सभ केँ गहण कयल गेल अकछ, तेुा हुका पूरा आत् मा केँ परुया् कपत कर। जँ अहाँ फरलर केँ ुव आ पूण् वस दे ब तँ ओकरा फेर सँ सय भेटबाक आशा करब। जँ भरण-


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

पोषण करऽ वला ओकरा फाटल-फाकड कऽ अहाँ केँ वापस कऽ दे त तऽ की अहाँ ओकरा पाकब लेब? 271 की अहाँ एखु कोकित ुकह होयब; आ हुका ई ककह कऽ कु्ा कर। हम अपु वस अहाँ केँ पूरा-पूरा दऽ दे कलयैक। अहाँ ओकरा ककएक फाकड कऽ हमरा लेल बेकार कऽ दे लहँ ? आब अहाँ एकह मे जे ककराया केलहँ ताकह सँ हमरा कोुो काज ुकह। की अहाँ ई सभ बात एकटा फरलर केँ ुकह कहब, जे ओ अहाँ क वस मे फाडुे छल? 272 ते ँ जँ अहाँ अपु वसक कचना कररतहँ आ कशकायत कररतहँ जे अहाँ केँ ई वस ठीक ुकह भेटल अकछ। अहाँ की सोचैत छी जे पभर अहाँ केँ अपु आा​ा केँ पूरा तरहे ँ दे लकु, आ अहाँ ओकरा एकदम बेकार बुा दे कलयैक, जाकह सँ ओ अपु पभरक लेल कोुो काज ुकह? ककएक तँ अहाँ दारा भद भऽ कऽ आब ओकरा लेल कोुो लाभ ुकह। 273 ते ँ की पभर अहाँ क कम्क कारणे ँ अपु आत् माक कवषय मे सेहो एहुे ुकह करताह? कुसंदेह, हम कहकलयकु, ओ सभ गोटे क संग सेहो एहुे करताह कजुका ओ चोटक सरण मे आगू बढै त रहताह । 274 तखु पैरक ुीचाँ ुकह चलू ओ कहलक, ओकर दया। बल् कक ओकर आदर कर, ककएक तँ ओ अहाँ सभक अपरािक पकत एतेक िैय् रखैत अकछ, आ अहाँ सभ मे सँ ककयो जकाँ ुकह। मरदा प्ाताप कर, ककएक तँ से अहाँ सभक लेल लाभदायक होयत। 275 ¶ ई सभ बात जे ऊपर कलखल गेल अकछ, हम चरबाह, प्ाताप करबाक दू त, परमेश् वरक सेवक सभ केँ दे खौलहँ आ बाजल छी। 276 ते ँ जँ अहाँ सभ एकह बात सभ पर कवश् वास करब आ सरुब आ एकह सभ मे चलब आ अपु बाट ठीक करब तँ अहाँ सभ जीकवत रहब। मरदा जँ अहाँ सभ दर भा् वुा आ चोटक सरण मे रहब तँ एहु कोुो पापी परमेश् वरक लेल जीकवत ुकह रहत। 277 ई सभ बात जे हमरा दारा कहबाक छल, हम एकह तरहे ँ अहाँ सभ केँ सौंपलहँ । तखु चरबाह हमरा कहलकिु, “की अहाँ हमरा सँ सभ ककछर माँ कग लेलहँ ?” हम उपर दे कलयकु, सर, हमरा लग अकछ। 278 तखु ओ कहलकु जे , भवु मे राखल एकह पािर सभक ररक याुक कवषय मे अहाँ ककएक ुकह पूछलहँ जे हम अहाँ केँ सेहो ई बात बरझा सकब? हम उपर दे कलयकु, सर, हम कबसरर गेलहँ । तखु सरुू, एकह सभक कवषय मे ओ कहलकु। 279 ओ सभ ओ सभ छकि जे आब एकह आजा सभ केँ सरु​ुे छकि, आ पूरा मोु सँ प्ाताप केुे छकि। 280 जखु पभर दे खलकु जे हुकर सभक प्ाताप ुीक आ शरद अकछ, आ ओ सभ ओकह मे रकह सकैत छकि, तखु ओ हुका लोककुक पूव्क पाप केँ मेटा दे बाक आजा दे लकु। कारण, ई सभ ररक याु हुका सभक पाप छल, आ ते ँ ओ सभ एकह लेल बुाओल गेल अकछ जे ओ सभ पकट ुकह होकि। उपमा 10 1 हम ई परसक कलखलाक बाद ओ स् वग्दूत जे हमरा ओकह चरबाहक हाि मे सौंपुे छलाह, ओकह घर मे आकब कऽ ओछाओु पर बैकस गेलाह आ ओ चरबाह हुकर दकहुा कात ठाढ भऽ गेलाह।

2 तखु ओ हमरा बजा कऽ कहलकिु। हम अहाँ आ अहाँ क घर एकह चरबाहक हाि मे सौंपलहँ , जाकह सँ अहाँ क रका हुका दारा कयल जाय। हम कहकलयकु, हँ , पभर। 3 ते ँ जँ अहाँ सभ तरहक परे शाुी आ सभ कूरता सँ सररककत रहब आ सभ ुीक वचु आ काज मे सफल होयब। आ सभ सद् गरण आ िाकम्कता राखू। जे आजा ओ अहाँ केँ दे ुे छकि, ताकह पर चलू, आ अहाँ सभ पाप पर पभरध पाकब लेब।” 4 जँ अहाँ ओकह आजा सभक पालु करब तँ एकह संसारक सभ वासुा आ भोग अहाँ क अिीु रहत। आ हर ुीक काज मे सफलता अहाँ क पाछाँ चलत। 5 ते ँ ओकर गररधाकष्ण आ कवुमता केँ अपुा पकत गहण कर आ सभ केँ ककह कदयौक जे ओ परमेश् वरक समक बहत आदर आ पकसनद पाकब रहल छकि, आ अपु पद मे बहत पैघ आ सामर्वाु राजकरमार छकि। 6 समस संसार मे प्ाताप करबाक सामि्​् य मा​ा हुका लेल दे ल गेल अकछ। की अहाँ केँ ओ पैघ अकिकारक ुकह बरझाइत अकछ? 7 मरदा अहाँ सभ हुकर भलाई आ अहाँ सभक पकत जे कवुमता चबबैत छकि, तकरा तरच बरझैत छी। 8 ¶ हम हुका कहकलयकु; सर, जकहया स हमर घर मे आयल छकि तकहया स पूछू जे हम कोुो अववनयत काज केलहं अकछ, या कोुो काज मे हुका ठे स पहं चेलहं अकछ? 9 ओ कहलकु, हम जुैत छी जे अहाँ कोुो अववनयत काज ुकह केलहँ आ ुे बाद मे एहु कोुो काज करब। आ ते ँ हम ई सभ बात अहाँ सँ कहै त छी जाकह सँ अहाँ दढतापूव्क रहब। ककएक तँ ओ हमरा अहाँ क कवषय मे ुीक कहसाब दे ुे छकि। “ ओ हमरा सेहो हुका सभक ओतबे ुीक कहसाब दऽ सकैत छकि, आ हम पभरक संग सेहो एहुे काज क’ सकैत छी। 11 हम उपर दे कलयैक। सर, हम सब मुरर केँ भगवाुक अद् भरत काजक घोषणा करै त छी। आ हमरा आशा अकछ जे जे सभ हुका सभ सँ पेम करै त छकि आ पकहुे पाप केुे छकि, जखु ई सभ बात सरुताह, तखु ओ सभ प्ाताप करताह, आ जीवु केँ फेर सँ पाकब लेताह। 12 एकह लेल ओ कहलकु जे , एकह सेवा मे आगू बढू आ ओकरा पूरा कर। जे ककयो एकह चरबाहक आजाक अुरसार काज करत, से जीकवत रहत। आ एतय आ पभरक संग बहत आदर होयत। 13 मरदा जे सभ हुकर आजा ुकह माुैत अकछ, से सभ अपु पाण सँ भाकग जाइत अकछ आ ओकर कवरोिी बकु जाइत अकछ। जे हुकर आजाक पालु ुकह करै त अकछ, से सभ अपुा केँ म्तरक लेल सौंपल जायत आ सभ अपु-अपु खूुक दोषी ठहराओत। 14 मरदा हम अहाँ केँ कहै त छी जे , एकह आजा सभक पालु कर, तखु अहाँ केँ अपु सभ पापक इलाज भेटत। 15 ¶ तहमे हम एकह करमारर सभ केँ अहाँ क संग रहबाक लेल पठौुे छी। हम दे खलहँ जे ओ सभ अहाँ पर बहत दया करै त छकि। ते ँ अहाँ केँ ओ सभ अपु सहायकक रप मे राखब जाकह सँ अहाँ हुका दारा दे ल गेल आजा सभ केँ ुीक जकाँ पालु कऽ सकब। कारण ई आजा कबुा एकह करमारर सभक पालु ुकह कएल जा सकैत अकछ। 16 हम दे खैत छी जे ओ सभ कोुा अहाँ क संग रहय लेल तैयार छकि। हम हुका सभ केँ ईहो आजा दे बकु जे ओ सभ अहाँ क घर सँ ुकह चकल जाय।”


हरमास के चरवाहा की तीसरी परसक - उपमा

17 मा​ा अहाँ अपु घर केँ शरद कर, ककएक तँ ओ सभ सहजकह साफ-सरिरा घर मे रहत। ककएक तँ ओ सभ शरद आ पकतवता आ मेहुती छकि। आ सभ परमेश् वर पर क्पा करै त छकि। 18 ते ँ जँ अहाँ क घर शरद होयत तँ ओ सभ अहाँ क संग रहत। मरदा जँ ई ककहयो एतेक कम पदू कषत ुकह होयत तँ ओ सभ तररन अहाँ क घर सँ चकल जायत, कारण ई करमारर सभ कोुो तरहक पदू षण ुकह सकह सकैत अकछ। 19 हम हुका कहकलयकु। सर, हमरा आशा अकछ जे हम हुका सभ केँ एतेक पसर करब, जे ओ सभ सकदखु हमर घर मे रहबा मे आुन्त रहताह। आ जेुा जे अहाँ हमरा सौंपुे छी, ओ हमरा सँ कोुो कशकायत ुकह करै त अकछ। ते ँ ुे ओ सभ कोुो कशकायत करत। 20 तखु ओ ओकह चरबाह केँ कहलकिु, “हम दे खैत छी जे परमेश् वरक सेवक जीकवत रहत आ एकह आजा सभक पालु करत आ एकह करमारर सभ केँ शरद आवास मे राखत।” 21 ई ककह कऽ ओ हमरा फेर ओकह चरबाहक हाि मे सौंप दे लकिु आ करमारर सभ केँ बजा कऽ कहलकिु। हम दे खैत छी जे अहाँ सभ एकह आदमीक घर मे सहजकह रहब, हम हुका आ हुकर घर केँ अहाँ सभक समक सौंपैत छी, जाकह सँ अहाँ सभ हुकर घर सँ एकदम ुकह कुककल सकब।” आ ओ सभ सेचा सँ ई बात सरुलकु। 22 ¶ तखु ओ हमरा कहलकिु, “अपु सेवा मे मदा् ुा ढं ग सँ आगू बढू। परमेश् वरक बडका-बडका बात सभ मुरष् य केँ सरुाउ, आ अहाँ केँ एकह सेवा मे अुरगह भेटत।” 23 जे केओ एकह आजा सभक अुरसार चलत, से जीकवत रहत आ अपु जीवु मे सरखी रहत। मरदा जे ओकरा सभक उपेका करत से जीकवत ुकह रहत आ अपु जीवु मे दर खी रहत। 24 सभ केँ कह जे जे केओ ुीक काज कऽ सकैत अकछ, से ुीक काज मे अपुा केँ ुकह छोडू, ककएक तँ ई हुका सभक लेल लाभक अकछ। कारण हम चाहै त छी जे सभ मुरर जाकह असरकविा मे पडल अकछ ताकह सँ मरक भ' जाय। 25 ककएक तँ जे केओ कमी चाहै त अकछ आ अपु दै कुक जीवु मे असरकविा भोगैत अकछ, ओकरा बहत कद आ आवशकता होइत छै क। ते ँ जे ककयो एहु पाणी केँ आवशकता सँ मरक करै त अकछ, ओकरा अपुा केँ बहत आु् भेटैत छै क। 26 ककएक तँ जे केओ एहु असरकविा सँ दर खी होइत अकछ, ओकरा ओतबे यातुा दे ल जाइत छै क, जेुा ओकरा जंजीर मे बानल हो। एकह तरहक कवपकपक कारणे ँ बहतो लोक एकह तरहक कवपकप केँ सहु ुकह कऽ पाकब अपुा केँ ुद करबाक लेल सेहो चरकु लेलकु। 27 ते ँ जे एहु आदमीक कवपकप केँ जुैत अकछ आ ओकरा ओकह कवपकप सँ मरक ुकह करै त अकछ, ओ बहत पैघ पाप करै त अकछ आ अपु खूुक दोषी अकछ। 28 ते ँ जे सभ पभर सँ सामर् पाकब गेल अकछ, से सभ ुीक काज मे अपुा केँ वायाम कर। कही ं अहाँ सभ ओकरा सभ केँ पूरा करबा मे दे री ुकह करब, ताबत िरर बरज्क कुमा् ण पूरा ुकह भ' जायत। कारण अहाँ क लेल भवु बंद अकछ। 29 जाबत अहाँ सभ ुीक काज करबा मे जलबाजी ुकह करब, ताबत िरर बरज् समा​ा भऽ जायत आ अहाँ सभ ओकह मे सँ बाहर भऽ जायब। 30 हमरा सँ ई बात कऽ कऽ ओ चरबाह आ करमारर सभ केँ लऽ कऽ ओछाओु पर सँ उकठ गेलाह।

31 मरदा ओ हमरा कहलकु जे, ओ चरबाह आ करमारर सभ केँ हमर घर मे वापस पठा दे ताह। आमीु।


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Maithili - The Third Book of the Shepherd of Hermas, which is called His Similitudes by Filipino Tracts and Literature Society Inc. - Issuu