दोसर पत क्लेम क् कोररन् थो य क् अध ्थ 1 1 भ्इ लोकनि, हलर् सभ क्ँ थीशु लसीह क्ँ परल्श् वरक ि् थ्थक जक्ँ बुझब्क च्ही। आ ि् हलर् सभक्ँ अपि उद्रक नवषथल् कल सोचब्क च्ही। 2 जँ हल सभ हिक् पनर िीच सोचैर छी रँ हिक् सँ नकछु छोमछोम ब्र भ्मब्क आश् ल्त र्खब। 3 जँ हल सभ एि् करब रँ। हल सभ प्प करब। ई िनह सोनच ज् हलर् सभ क्ँ करथ सँ बज्ओल ग्ल अनछ, क्कर् द्र् आ कोि स्ि पर बज्ओल ग्ल अनछ। आ थीशु लसीह हलर् सभक ल्ल कर्क कष भोगब्क ग्रय मी द् लनि। 4 रखि हल सभ ओकर् कोि पनरतल द् ब? आनक कोि तल ज् ओ हलर् सभ क्ँ द् लनि र्नह थोग भ' सकैर अनछ? 5 क्रण, हलर् सभ क्ँ अपि पनवतर्क सयबयध ल् हिक् सँ कर्क पैघ ल्भ अनछ? ओ हलर् सभ क्ँ रोशि कथलनि: नपर्क रप ल् ओ हलर् सभ क्ँ अपि सयर्ि कहि् छनि; ओ हलर् सभक्ँ बच् ल्लक अनछ ज् ह् र्थल आ अनवि्शी छल। 6 हल सभ हिकर की पशयस् करब? आनक ज् नकछु हलर् सभ क्ँ भ्मल अनछ, रकर उतर कोि इि्ल द् ल ज् सकैर अनछ? 7 हल सभ अपि सलझ ल् दोषपूण् छलहँ । प्िर आ लकडीक पूज् करब; सोि्, च्िी आ पीरल, ज् लिुष् थक ह्िक क्ज अनछ। आ हलर सभक सलस जीवि लृतुक अनरररक नकछु िनह छल। 8 एनह ल्ल हल सभ अन्र ल् घ्रल आ आँ नखक सोझ्ँ एहि धुयध द् नख ऊपर रकलहँ आ हिकर इच्क द्र् ओनह ल्घ क्ँ एक क्र र्नख द् नलथैक ज्नह ल् हल सभ घ्रल छलहँ । 9 ओ हलर् सभ पर दथ् करै र छल्ह आ हलर् सभक पनर आय र ल् चनकर भऽ कऽ हलर् सभ क्ँ उद्र कथलनि। हलर् सभ ल् बहर गलरी आ नवि्श द् खलहँ । ओ द् खलहँ ज् हलर् सभ क्ँ उद्रक कोिो आश् िनह छल, बल् नक ल्त हिक् द्र्। 10 नकएक रँ ओ हलर् सभ क्ँ बजौलनि ज् िनह छलहँ । आ हलर् सभक्ँ जीव द् बऽ ल्ल नकछु ओ िनहसँ पसर भ्ल। अध ्थ 2 1 ह् बयजर, ज् पसव िनह करै र छी, आिन्र रह, ज् पसव िनह करै र छी, ओकर् रोनड कऽ क्िब। क्रण ज् उजडल अनछ, ओकर पनर सँ ब्सी सयर्ि होइर छै क। 2 ओ एनह ब्र ल् कहलनि ज्, “ह् बयजर ज् बच् िनह दै र अनछ, स् हलर् सभक नवषथ ल् कहलनि, नकएक रँ हलर् सभक लण् डली ओकर् सयर्ि द् ब् सँ पनहि् बयजर छल।” 3 आ त्र; जखि ओ कहलनि, “ज् पसव िनह करै र छी, क्िब।” ओ एनह ररह् ँ इश्र् कथलनि ज् पसव करथवल् सीगणक ढय ग सँ हल सभ परल्श् वर सँ पचुर ल्त् ल् प्ि्ि् करब िनह छोनड दी।
4 आ ब्द ल् ज् नकछु होथर, र्नह ल्ल ज् उजडल अनछ, ओकर पनर सँ ब्सी सयर्ि अनछ, र् ँ ई जोडल ग्ल, क्रण ज् हलर् सभक लोक ज् परल्श् वर द्र् छोडल ग्ल बुझ्इर अनछ, आब हिक् पर नवश् व्स कऽ रहल अनछ, ओ सभ ओनह लोक सभ सँ ब्सी भऽ ग्ल अनछ ज् सभ परल्श् वरक सयग बुझ्इर छल। 5 दोसर धल्श्स् त कहै र अनछ, “हल धल् लोक सभ क्ँ िनह बल् नक प्पी सभ क्ँ पश्र्प करब्क ल्ल बजबथ ल्ल आथल छी।” जकर अि् ई अनछ ज् ज् ह् र् ग्ल छल ओकर् उद्र भ्मब्क च्ही। 6 नकएक रँ ई ब्र सत् लह्ि आ अद् भुर अनछ, ज् एखि धरर ठ्ढ अनछ, बल् नक खनस रहल अनछ रकर् सभक पुनष करब। 7 लसीह क्ँ रनहि् िीक ल्गलनि ज् ओ ज् ह् र्थल छल रकर् उद्र करनि। जखि ओ सयस्र ल् अथल्ह रखि ओ बहरो क्ँ बच् ल्लनि आ हलर् सभ क्ँ ज् पनहि् सँ ह् र्थल छलहँ , रकर् बज् ल्लनि। 8 ओ हलर् सभ पर एर्क दथ् कथलनि। आ लुखरय र्नह ल्ल हल सभ ज् जीनवर छी, आब आब लृर द् वर्क बनलद्ि िनह करै र छी, आ ि् हिक् सभक कोिो पूज् करै र छी, बन् हिक् द्र् सतक नपर्क ज्ि ल् आनब ग्ल छी। 9 हल सभ कोि ररह् ँ ई द् ख् सकब ज् हल सभ हिक् नचनै र छी, लुद् जकर् द्र् हल सभ हिक् नचनलहँ , रकर् असीक्र िनह कऽ सकब? 10 नकएक रँ ओ सथय कहै र छनि, “ज् क्ओ हलर् लिुष् थक सलक सीक्र करर, ओकर् हल अपि नपर्क सलक सीक्र करब।” र् ँ ई हलर् सभक इि्ल अनछ जँ हल सभ ओनह ब्र क्ँ सीक्र करब जकर् द्र् हलर् सभ क्ँ उद्र भ्ल अनछ। 11 लुद्, हलर् सभ क्ँ हिक् कोि ब्र ल् सीक्र करब्क च्ही?—अि्् र, हिकर आज्क आज्क अवह् लि् िनह करब, ल्त ठोर सँ िनह, बल् नक पूर् लोि आ लि सँ हिकर आर्धि् करब। क्रण, ओ थश्थ्ह ल् कहै र छनि, “ई लोक हलर् अपि ठोर सँ आदर करै र अनछ, लुद् ओकर हदथ हलर् सँ दू र अनछ।” 12 रखि हल सभ हिक् ल्त पभु िनह कहब। नकएक रँ स् हलर् सभक्ँ िनह बच्ओर। क्रण, ओ कहै र छनि ज् , ज् हलर् पभु, पभु , स् कहर, स् सभ उद्र िनह प्ओर, बल् नक ज् ध्नल्कर् करै र अनछ। 13 र् ँ भ्इ लोकनि, हल सभ अपि क्जक द्र् हिक् सीक्र करी। एक दोसर् सँ प्ल क' क'; वनभच्र िनह करब, एकदोसर पर अधल्ह िनह ब्जब आ एक-दोसर सँ ईर्् िनह करब। लुद् सयथली, दथ्लु, िीक भ' क'। 14 एक-दोसरक कषक आपसी बोध स्हो करी। आ धिक लोभ िनह कर, बल् नक हल सभ अपि िीक क्ज सँ परल्श् वर क्ँ सीक्र करी, आ ज् सभ आि क्ज करै र अनछ, रकर् द्र् िनह। 15 हल सभ लिुष् थक भथ िनह, बल् नक परल्श् वर सँ ड् रब। एनह ल्ल जँ हल सभ एहि दु ष क्ज करररहँ रँ पभु कहि् छनि: भल् अह्ँ सभ हलर् सयग हलर कोर् ल् स्हो जुनड ज्उ आ हलर आज्क प्लि िनह करी, लुद् हल अह्ँ सभ क्ँ त्नक द् ब आ अह्ँ सभ क्ँ कहब ज् : हलर् सँ हनम ज्उ; हल िनह जिैर छी ज् अह्ँ सभ करथ सँ आथल छी, अह्ँ सभ अधल्क क्ज करथवल्।