हरमास के चरवाहा के दोसर ककताब, जेक रा हुकक आजा कहलक जाय छै पररचय 1 जखु हम घर मे पाराुा केलहु, आ पलंग पर बैकस गेलहु, तखु एकटा आदमी चरबाहक आदकत मे, उजर वस पकहरुे, पीठ पर अपु बैग आ हार मे लाठी लेुे, आदरपूरा ुजरर सु हमरा लग आकब गेल आ हमरा पराम केलक। 2 हम हुकर पराम घुरा दे कलयकु आ तुरन ओ हमरा लग बैकस कक कहलकरु, “हमरा ओकह पूज दू त दारा पठाओल गेल अकछ जे हम अहाु क जीवुक शेष कदु अहाु क संग रहब।” 3 मुदा हम सोचलहु जे ओ हमरा परखबाक लेल आयल छकर, आ हुका कहकलयकु, “अहाु के छी?” ककएक तु हम जुैत छी जे हम केकरा पकत समकपात छी। ओ हमरा कहलकरु, “की अहाु हमरा ुकह कचनै त छी?” हम जवाब दे कलयकु जे ुकह। हम छी, ओ कहलकु, ओ चरबाह जकर दे खभाल मे अहाु पहु चाओल गेल छी। 4 जाबत ओ बजैत छलाह तखु हुकर आकार बदकल गेलकु। जखु हमरा बुझल छल जे हम हुका संग सौंपल गेल छी, तखु हमरा लाज भेल, आ अचाुक हमरा पर एकटा भय आकब गेल, आ हम एकदम उदास भ' गेलहु, ककएक त' हम हुका संग एतेक मूखातापूवाक बात केुे रही। 5 मुदा ओ हमरा कहलकरु, “लाज ुकह कर, बल् कक हम जे आजा अहाु केु दे बक जा रहल छी, ताकह सु अहाु क मोु मे शक् पार कर।” ओ कहलकरु, “हमरा पठाओल गेल अकछ जे अहाु केु ओ सभ बात फेर सु दे खाबय लेल जे अहाु पकहुे दे खलहु अकछ, मुदा कवशेष रप सु ओकह मे सु जे अहाु केु बेसी उपयोगी होयत।” 6 आ सभसु पकहुे हमर आजा आ उपमा कलखू , शेष जे हम अहाु केु दे खाएब, तेुा कलखब। मुदा हम ते ु अहाु केु सबसु पकहुे हमर आजा आ उपमा कलखबाक आजा दै त छी, जाकह सु बेर-बेर पक़ क' अहाु ओकरा ओतेक सहजता सु मोु मे राकख सकब। 7 तकर बाद हम हुकर आजा आ उपमा कलखलहु , जेुा ओ हमरा कहलकु। 8 जु अहाु सभ सुकु कक ओकरा सभक पालु करब आ ओकरा सभक अुुसार चलब आ शुद मोु सु ओकरा सभ मे वायाम
करब तु पभु सु ओ सभ बात भेटत जे अहाु सभ केु पकतजा केुे छकर। 9 मुदा जु अहाु सभ हुका सभक बात सुकु कक पशाताप ुकह करब, बल् कक अहाु सभ अपु पाप मे आरो ब़ै त रहब तु हुका दारा अहाु सभ केु दं कित कयल जायत। 10 ई सभ बात जे पशाताप करबाक स् वगादूत चरबाह हमरा कलखबाक आजा दे लकु। कमांि 1 1 सबसु पकहुे ई माुू जे एकेटा परमेश् वर छकर जे सभ ककछु ुकहक सभ वसु केु सृकजत आ रप मे बुौलकु। 2 ओ सभ बात केु बुझैत छकर, आ मात अपार छकर, ककरो बूझल ुकह जा सकैत अकछ। 3 जकरा ुे कोुो शबसु पररभाकषत कएल जा सकैत अकछ, आ ुे मुसु कलुा कएल जा सकैत अकछ। 4 ते ु हुका पर कवश् वास कर। आ ओकरा सु िर। आ ओकरा सु िरै त सभ अधलाह सु परहे ज कर। 5 ई सभ बात राखू, आ सभ काम-वासुा आ अधमा केु अपुा सु दू र राखू , आ धाकमाकताक पररधाु पकहर, आ जु अहाु एकह आजाक पालु करब तु परमेश् वरक लेल जीकवत रहब। कमांि 2 1 ओ हमरा कहलकरु, “कुद्ष आ कबुा वेश मे रह। ते ु अहाु एकटा एहु कशशु जकाु बुब जे कोुो एहु दु भाा वुा ुकह जुैत अकछ जे मुुकक जीवु केु ुष करै त अकछ। 2 खास कक ई दे खू जे अहाु ककरो अधलाह ुकह बाजब आ ुे ककरो ककरो अधलाह बजैत सेवा सु सुुब। 3 जु अहाु ई बात ुकह माुब तु अहाु सेहो जे सुुैत छी, तकरा कुना पर कवश् वास कक कक अधलाह बजकुहारक पाप मे सहभागी बुब आ अहाु केु सेहो पाप होयत, ककएक तु अहाु ओकह पर कवश् वास कएुे छी जे अपु भाय पर अधलाह बजैत अकछ। 4 हास एकटा कवुाशकारी वसु अकछ। एकटा अकुत, दु ष आता; जे ककहयो शां कत मे ुकह चलैत अकछ, बक् सकदखु कववाद मे रहै त अकछ। ते ु एकह सु परहे ज कर आ अपु भाय सु बेसी शाकन राखू।
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
5 एकटा पकवत कुतता पकहर, जाकह मे पाप ुकह हो, मुदा सभ ककछु आुन सु भरल अकछ। आ अपु पररशमक भलाई कर। 6 जे ककयो अभाव मे अकछ, तकरा सभ केु कबुा कोुो भेद केु दक कदयौक, एकह मे कोुो संदेह ुकह कर जे अहाु केकरा दै त छी। 7 मुदा सभ केु कदअ, ककएक तु परमेश् वर चाहै त छकर जे हम सभ अपु सभ वरदाु सभ केु दे ब। ते ु जे सभ गहर करै त अकछ, से सभ परमेश् वर केु ई कहसाब दे करु जे ओ सभ ककएक पाकब लेलक आ कोु काजक लेल। 8 जे सभ कबुा कोुो आवश् यकता के गहर करै त अकछ, से ओकर कहसाब दे त। मुदा जे दे त से कुद्ष होयत। 9 ओ अपु कताव केु ओकहुा पूरा कयलकु जेुा परमेश् वर सु पार कयलकु। केकरा दे बाक चाही, आ केकरा ुकह दे बाक कोुो कवकल ुकह। आ ई सेवा ओ सादगी आ भगवाुक मकहमा लेल केलकु। 10 ते ु हम जे आजा अहाु केु दे ुे छी, तेुा एकह आजा केु पालु कर। ताकक तोहर पशाताप कुशल पाओल जाय आ तोहर घर मे ुीक भ' जाय। आ शुद हदय राखू। कमांि 3 1 ओ हमरा कहलकरु, “सत सु पेम कर। आ जे सभ बात अहाु क मुुह सु कुकलैत अकछ से सत हो। 2 जाकह आत् मा परमेश् वर जे आत् मा अहाु क शरीर मे रहबाक लेल दे ुे छकर, से सभ मुुष् यक पकत सत् य भेटय। पभुक मकहमा होउ जे अहाु केु एहु आत् मा दे लकु। 3 एकह लेल जे सभ झूठ बाजैत अकछ, पभु केु असीकार करै त अकछ आ पभुक लुटेरा बकु जाइत अकछ, मुदा जे ककछु हुका सु भेटल छल से परमेश् वर केु ुकह दै त अकछ। 4 ओ सभ झूठ बाजबा सु मु् आत् मा पाकब गेलाह, ते ु जु ओ सभ ओकरा झूठ बाजक बला बुा दै त छकर तु पभु दारा हुका सभ केु सौंपल गेल बात केु अशुद कक दै त छकर आ धोखेबाज बकु जाइत छकर। 5 ई बात सुकु कक हम कटु काुलहु । हमरा काुैत दे कख ओ हमरा कहलकरु, “अहाु ककएक काुैत छी?” आ हम कहकलयकु, कारर, सर, हमरा संदेह अकछ जे हमरा उदार भ' सकैत अकछ कक ुकह? 6 ओ हमरा सु पुछलकरु, “ककयैक?” हम उतर दे कलयकु, कारर सर, हम अपु जीवु मे ककहयो एकटा सचा शब ुकह बजलहु ; मुदा सकदखु छे डखाुी मे रहै त छलाह, आ सभ लोक केु सतक बदला मे झूठक पुकष करै त छलाह। आ हमरा कवरोध केओ केओ ुकह केलक, बल् कक सभ हमर बातक शेय दे लक। तखु हम कोुा जीब, ई दे कख जे हम एकह तरहे,ु तरीका सु केलहु? 7 ओ हमरा कहलकरु, “अहाु ुीक आ सत् य सोचैत छी।” अहाु केु परमेश् वरक सेवक जकाु सत् य मे चलबाक चाही, आ सत् यक आत् माक संग कोुो दु ष् ट कववेक केु ुकह जोडबाक चाही आ ुे परमेश् वरक पकवत आ सत् य आत् मा केु दु खी करबाक चाही। 8 हम हुका उतर दे कलयकु, माकलक, हम पकहुे ककहयो एकह बात सभ केु एतेक लगु सु ुकह सुुुे छलहु । ओ उतर दे लकरु, “आब अहाु हुका सभक बात सुुैत छी, आब सु सावधाु रह जे पकहुे जे बात अहाु अपु काजक लेल झूठ बाजल छलहु , तकरा अहाु क वतामाु सत सु शेय भेटय।”
9 आगामी समयक लेल जु अहाु सत् य बाजब तु ओकह बात सभक शेय सेहो दे ल जा सकैत अकछ। आ एकह तरहे ु अहाु जीवु पाकब सकैत छी। 10 जे केओ ई आजा माुत आ ओकरा पालु करत आ सभ झूठ बाजब सु हकट जायत, ओ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। कमांि 4 1 संगकह ओ कहलकरु, “हम अहाु केु आजा दै त छी जे अहाु अपुा केु पकतवता राखू। आ अहाु कोुो आु कववाह वा वकभचारक कोुो कवचार केु अपु हदय मे पवेश ुकह कदयौक। 2 मुदा अहाु सभ कदु पभुक पकत मोु राखू, आ अहाु ककहयो पाप ुकह करब। ककएक तु जु अहाु क मोु मे एहु अधलाह कवचार उठत तु अहाु पैघ पापक दोषी भक जायब। आ एहु काज करकुहार सभ मृतुक बाट पर चलैत छकर। 3 ते ु अपुा कदस ताकू आ एहु कवचार सु अपुा केु बचाउ। कारर, जतय धमाा ताक हदय मे पकतवता रहै त अकछ, ओतकह कोुो अधलाह कवचार ककहयो ुकह उठबाक चाही। 4 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हमरा अहाु सभ सु कुेक गप करबाक अुुमकत कदअ।” ओ हमरा आगू कहबाक आजा दे लकु। हम उतर दे कलयकु, “महाराज, जु पभु पर कवश् वास करयवला पुरषक पती भक जायत आ वकभचार मे ओकरा पककड लेत। की मुुष पाप करै त अकछ जे ओकरा संग एखुो जीकवत रहै त अकछ? 5 ओ हमरा कहलकरु, “जखु धरर ओ ओकर पाप सु अुकभज रहत ता धरर ओकरा संग रहबा मे कोुो दोष ुकह करै त अकछ। मुदा जु केओ अपु पती केु दोषी ठहरौुे बुकझ जायत, आ ओ अपु पाप सु पशाताप ुकह करत, बल् कक अपु वकभचार मे चलैत रहत, आ तइयो पुरष ओकरा संग रहै त रहत, तखु ओ ओकर पाप मे दोषी भ' जायत आ ओकरा संग ओकर वकभचार मे भाग लेत। 6 हम हुका कहकलयकु, “जु स् ती अपु पाप करै त रहत तु की हे बाक चाही?” ओ उतर दे लकरु, “ओकर पकत ओकरा छोकड दे करु आ ओ असगरे रहकरु।” मुदा जु ओ अपु स् ती केु छोकड कक दोसर कववाह कक लेत तु ओ वकभचार सेहो करै त अकछ। 7 हम कहकलयकु, “जु ओ स् ती केु पशाताप कक कक अपु पकत लग घुरर जेबाक लेल तैयार भक जायत तु की ओकरा पकत दारा गहर ुकह कयल जायत?” ओ हमरा कहलकरु, “हु; जु ओकर पकत ओकरा ुकह गहर करत तु ओ पाप करत आ अपुा पर पैघ अपराध करत। मुदा ओकरा अपराधी केु गहर करबाक चाही, जु ओ पशाताप करै त अकछ। मात पाया ुकह। 8 परमेश् वरक सेवक सभक लेल पशाताप एकेटा अकछ। एकह लेल जे पुरष अपु पती केु छोकड दै त अकछ, ओकरा दोसर केु ुकह लेबाक चाही, ककएक तु ओ पशाताप क’ सकैत अकछ। 9 ई काज पुरष आ सी दु ुू मे एक समाु अकछ। आब ओ सभ वकभचार करै त छकर, जे मात अपु मां स केु पदू कषत करै त छकर, बक् मूकता सेहो बुबैत छकर। जु कोुो स् ती एकह तरहक कोुो काज मे कटकल रहत आ पशाताप ुकह करै त अकछ तु ओकरा सु हकट जाउ आ ओकरा संग ुकह रह, ुकह तु अहाु सेहो ओकर पाप मे भाग लेब। 10 मुदा ते ु ई आजा दे ल गेल अकछ जे पुरष आ सी दु ुू केु अकववाकहत रहबाक चाही, ककएक तु एहु लोक सभ पशाताप कक सकैत छकर।
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
11 आ हम एकह मे एकह सभ काजक कोुो अवसर ुकह दै त छी। बल् कक जे कोुो आपकत केुे अकछ, ओकरा आब आपकत ुकह करबाक चाही। 12 मुदा हुका सभक पूवाक पापक लेल, परमेश् वर कजुका चंगाई करबाक सामर्ा य छकु, ओकर उपाय दे ताह। ककएक तु हुका सभ वसुक सामरा छकु। 13 हम हुका सु फेर पुछकलयकु आ कहकलयकु, “पभु हमरा ई योग बुझुे छकर जे अहाु हमरा संग कुत रहब, हमरा ककछु शब बाजू, ककएक तु हम ककछु ुकह बुझैत छी आ हमर मोु कठोर भक गेल अकछ। आ अपु समझ खोलू, कारर हम बहत ुीरस छी, आ ककछु ओ ुकह पकडै त छी। 14 ओ हमरा उतर दे लकरु, “हम पशाताप करबाक सेवक छी आ पशाताप करयवला सभ केु समझ दै त छी।” की अहाु केु पशाताप करब बहत बुकदमाुी ुकह बुझाइत अकछ? कारर जे एहु करै त अकछ ओकरा बहत समझ भेटैत छै क । 15 ककएक तु ओ बुकदमाु अकछ जे पभुक ुजरर मे पाप कयलक आ दु ष काज कयलक, आ अपुा भीतर मोु पाडै त अकछ जे ओ अपराध कयलक, आ पशाताप करै त अकछ आ आब दु षता ुकह करै त अकछ, बल् कक ुीक काज करै त अकछ, आ अपु आता केु ुम करै त अकछ आ ओकरा दु ाख दै त अकछ, कारर ओ अपराध कयलक। ते ु अहाु सभ दे खैत छी जे पशाताप करब बहत पैघ बुकद अकछ। 16 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हम पापी छी, एकह लेल हम सभ बातक कवषय मे सोच-कवचार करै त छी, जाकह सु हम ई जाकु सकब जे हमरा जीकवत रहबाक लेल की करबाक अकछ। कारर हमर पाप बहत अकछ। 17 ओ हमरा कहलकरु, “अहाु जु हमर एकह आजा सभक पालु करब तु अहाु जीकवत रहब।” जे केओ ई आजा सुुत आ पालु करत, ओ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। 18 ¶ हम हुका कहकलयकु, “हम एखुह ककछु गुर लोककु सु सुुुे छी जे बपकतसाक अकतरर् कोुो दोसर पशाताप ुकह होइत छै क। जखु हम सभ पाकु मे उतरर कक अपु पापक कमा पाकब लैत छी। आ तकर बाद हमरा सभ केु आब पाप ुकह करबाक चाही, बल् कक शुदता मे रहबाक चाही। 19 ओ हमरा कहलकरु, “अहाु केु ठीक-ठीक जाुकारी दे ल गेल अकछ।” तैयो आब अहाु सभ बातक कजजासा करै त छी, हम अहाु केु ई बात सेहो पगट करब। 20 ककएक तु जे सभ ुव-ुव कवश् वास केुे छकर आ ुे आब कवश् वास करताह, हुका सभ केु पापक कोुो पशाताप ुकह होइत छकु, बल् कक हुका सभक कमा कयल जाइत छकु। 21 मुदा, जे सभ कवश् वासक लेल बजाओल गेल अकछ आ जकहया सु कोुो घोर पाप मे पकड गेल अकछ, पभु पशाताप करबाक कुयुक् कयलकु अकछ, ककएक तु परमेश् वर सभ मुुष् यक हदयक कवचार आ ओकर दु बालता आ शैताुक अुेक दु षता केु जुैत छकर, जे सकदखु परमेश् वरक सेवक सभक कवरद ककछु ग़ै त रहै त छकर आ दु भाा वुापूवाक हुका सभक लेल जाल कबछबैत छकर। 22 ते ु हमर सभक दयालु पभु अपु सृकष पर दया कयलकु आ ओकह पशाताप केु कुधाा ररत कयलकु आ हमरा एकर शक् दे लकु। आ ते ु हम अहाु केु कहै त छी जे, ओकह महाु आ पकवत आहाुक बाद जु केओ शैताु आ पापक दारा परीका मे पकड जायत तु ओकरा एकेटा पशाताप होइत छै क। मुदा जु ओ बेर-बेर पाप करत आ पशाताप करत तु एहु वक् केु कोुो फायदा
ुकह होयत। ककएक तु ओ परमेश् वरक लेल ककठु जीवु जीओत।” 23 हम कहकलयकु, “महाराज, हम एकह आजा सभ केु एकह तरहे ु लगु सु माुैत छी, हम फेर सु जीकवत भ’ गेल छी।” कारर, हम बुझैत छी जे जु हम आगू अपु पाप मे आओर ककछु ुकह जोडब तक हम उदार पाकब सकब। 24 ओ कहलकरु, “अहाु उदार पाकब जायब।” 25 हम फेर हुका कहकलयकु, “महाराज, अहाु हमरा धैयापूवाक सुुैत छी जे अहाु हमरा एकटा बात आओर दे खबैत छी।” ओ कहै त छकर जे ई की अकछ। 26 हम कहकलयकु, “जु कोुो पकत-पती मरर जायत आ जे ककयो बचल अकछ से दोसर कववाह कक लेत तक की ओ एकह तरहे ु पाप करै त अकछ?” जे कववाह करै त अकछ से कहै त अकछ जे ओ पाप ुकह करै त अकछ, मुदा जु ओ अकववाकहत रहत तु ओकरा पभुक समक अपुा केु बहत आदर भेटतैक। 27 ते ु अपु पकतवता आ कवुमता केु राखू , तखु अहाु परमेश् वरक लेल जीकवत रहब। आब सु हम जे बात अहाु सु कहै त छी, तकरा पालु कर आ अहाु केु आजा कदअ जे जकहया सु हम अहाु केु सौंपल गेल छी आ अहाु क घर मे रहब।” 28 जु अहाु हमर एकह आजा सभक पालु करब तु अहाु क पूवाक पाप कमा कयल जायत। आ तकहुा आु लोक सभ केु कमा कयल जायत, जे हमर एकह आजा सभक पालु करत। कमांि 5 1 ओ कहै त छकर जे धैया राखू आ धैया राखू। तेुा अहाु सभ दु षमा पर पभुभ राखब आ सभ धाकमाकता केु पूरा करब।” 2 जु अहाु धैया राखब तु पकवत आत् मा जे अहाु मे रहै त छकर, से शुद हे ताह आ कोुो दु ष् ट आत् मा दारा अु् हार ुकह होयत। मुदा आुन सु भरल रहला सु बक़ जायत, आ जाकह शरीर मे ओ रहै त अकछ, ओकह शरीर मे भोज करत, आ आुन सु आ बहत शाकन सु पभुक सेवा करत। 3 मुदा जु अहाु पर कोुो कोध आकब जायत तु अहाु मे जे पकवत आत् मा अकछ, से तुरन सोझ भक जेताह आ अहाु सु हकट जेताह। 4 ककएक तु ओ दु षाताक गला घोंटैत अकछ आ पभुक सेवा करबाक सतंतता ुकह अकछ जेुा ओ चाहै त छल ककएक तु ओ कोधसु दु खी अकछ। अता जखु ई दु ुू आता एक संग रहै त अकछ तखु मुुकक लेल कवुाशकारी होइत अकछ । 5 जेुा ककयो ककु कृकम लक कक मधुक बताु मे राकख दे ल जाय, तखु पूरा मधु कबगकड जायत। आ बहत कम माता मे मधु बहत कम कृकम सु भष भ' जाइत छै क, आ मधुक कमठास खतम भ' जाइत छै क, आ आब ओकर पभुक सीकाया ुकह रकह जाइत छै क, कारर पूरा मधु तीत भ' जाइत छै क, आ ओकर उपयोग खतम भ' जाइत छै क | 6 मुदा जु मधु मे कोुो कृकम ुकह दे ल जाय तु ओ अपु पभुक लेल मधुर आ लाभकारी होइत अकछ। एकह तरहे ु सहुशीलता मधु सु मधुर होइत छै क, आ ओकह मे रहकुहार पभुक लेल लाभकारी होइत छै क। 7 मुदा कोध बेकार अकछ। ते ु जु कोध सहुशीलताक संग कमकल जायत तु आता वकरत भक जाइत अकछ आ ओकर पाराुा परमेश् वरक लेल कोुो लाभ ुकह। 8 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हम कोधक पाप बुझय चाहै त छी, जाकह सु हम एकह सु अपुा केु बचा सकब।” ओ हमरा
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
कहलकरु, “अहाु एकरा बुकझ जायब। आ जु अहाु एकह सु अपुा केु ुकह बचा लेब तु अहाु अपु समस घरक संग अपु आशा गमा दे ब। ते ु एकह सु कवदा भ' जाउ। 9 हम धमाक दू त अहाु क संग छी। आ जे ककयो एकह सु हकट जायत, जे सभ मोु सु पशाताप करत, ओ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। हम हुका सभक संग रहब आ सभ केु राखब।” 10 ककएक तु जे सभ पशाताप केुे छकर, हुका परम पकवत दू त दारा धम् ठहराओल गेल अकछ, जे उदारक सेवक छकर। 11 आब, ओ कहै त छकर, कोधक दु षता सुुू। ई कतेक दु ष आ आहत करयवला अकछ, आ परमेश् वरक सेवक सभ केु कोुा उखाकड फेकैत अकछ। ककएक तु ई कवश् वास सु भरल लोक सभ केु चोट ुकह पहु चा सकैत अकछ ककएक तु परमेश् वरक सामर्ा य हुका सभक संग अकछ। मुदा संकदग आ कवशासहीु लोक केु उखाकड दै त अकछ। 12 ककएक तु जकहुा-जखु ओ एहु लोक सभ केु दे खैत अकछ, ओ हुका सभक हदय मे अपुा केु फेकक दै त अकछ। आ ते ु सीपुरष कोुो बातक लेल, जीवुक वसुक लेल, वा रोजी-रोटीक लेल, वा कोुो वरा शबक लेल कटु ता मे रहै त अकछ, जु ककयो संयोगवश एकह मे खकस पडय। वा कोुो कमतक काररे,ु वा ऋरक काररे,ु वा एकह तरहक पकृकतक कोुो आु फालतू चीजक काररे।ु 13 परमेश् वरक सेवक सभक लेल ई सभ मूखातापूरा, फालतू आ वरा अकछ। मुदा समता पबल होइत छै क, आ जबरदसी; आ बहत शक्क अकछ, आ बहत कवसार मे बैसल अकछ। हु समुख अकछ, शाकन मे आुकनत अकछ। आ हर समय ुमता सु परमेश् वरक मकहमा करब। 14 ई धीरज कवश् वास सु भरल लोक सभक संग रहै त अकछ। मुदा कोध मूखातापूरा, हलुक आ खाली अकछ। आब मूखाताक काररे ु कटु ता पैदा होइत अकछ। कटु ता, कोध दारा; कोध, कोध दारा। आ एतेक रास दु ष कसदां त सु उत् ई कोध, एकटा पैघ आ असाध पाप करै त अकछ | 15 जखु ई सभ बात ओही आदमी मे रहै त अकछ जाकह मे पकवत आत् मा रहै त छकर, तखु ओ पात ओकरा सभ केु ुकह राकख सकैत अकछ, बल् कक दौडै त अकछ। ओ कवदा भक जाइत अकछ आ ुम लोकक संग रहै त अकछ। 16 जखु ओ ओकह आदमी सु कवदा भ’ जायत, जाकह मे ओ रहै त छल। कक मुुष पकवत आता सु वंकचत होय जाय छै , आरो बाद मे दु षाता से भरलो जाय छै , आरो बुरा कवचार से आनर होय जाय छै । एकह तरहे ु सभ कोकधत मुुकक संग होइत छै क। 17 ते ु अहाु कोध सु हकट कक समता धारर कर आ कोधक कवरोध कर। ते ु अहाु परमेश् वर दारा कवुमता आ शुदताक संग भेटब।” ते ु सावधाु रह जे एकह आजाक उपेका ुकह कर। 18 जु अहाु एकह आजाक पालु करब तु अहाु आु आजा सभक पालु कक सकब जे हम अहाु केु आजा दे ब। 19 ते ु आब एकह आजा सभ मे अपुा केु मजबूत कर जाकह सु अहाु परमेश् वरक लेल जीकब सकब। जे केओ एकह आजा सभक पालु करत, से परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। कमांि 6 1 हम अहाु केु अपु पकहल आजा मे कहुे छलाह जे अहाु कवशास आ भय आ पशाताप केु पालु कर। हु सर, हम कहकलयकु।
2 ओ आगू बजलाह: मुदा आब हम अहाु केु एकह आजा सभक गुर दे खब, जाकह सु अहाु एकर पभाव बुकझ सकब। कोुा नायी आ अनायी के लेल एक समाु कुधाा ररत कयल गेल अकछ | 3 ते ु अहाु धम् लोक पर कवश् वास कर, मुदा अधम् केु कोुो शेय ुकह कदयौक। कारर, धाकमाकता सही बाट के पालु करै त अकछ, मुदा अधमा अधलाह बाट के पालु करै त अकछ। 4 ते ु अहाु सही बाट पर चकल जाउ आ अधलाह केु छोकड कदयौक। कारर, अधलाह मागाक ुीक अंत ुकह होइत छै क, बल् कक बहत रास ठोकर होइत छै क। ई उबड-खाबड आ काु ट-काु ट सु भरल अकछ, आ कवुाश कदस ल' जाइत अकछ। आ ओकह मे चलय बला सभ केु आहत करयवला अकछ। 5 मुदा जे सभ सही बाट पर चलैत अकछ, ओ सभ समाुता आ कबुा कोुो अपराधक संग चलैत अकछ। कारर ई खुरदु रा ुकह अकछ आ ुे काु टदार। 6 ते ु अहाु दे खैत छी जे एकह बाट पर चलब कोुा ुीक अकछ। ते ु अहाु जायब, ओ कहै त छकर, आ आु सभ लोक, जे सभ मोु सु परमेश् वर पर कवश् वास करै त छकर, तकरा सभक माधमे ओ। 7 आब, ओ कहै त छकर। सबसु पकहुे बुझू जे कवशासक की होइत छै क। मुुषक संग दू टा स् वगादूत अकछ। एकटा धमाक, दोसर अधमाक। 8 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हम कोुा बुझब जे मुुकक संग एहु दू टा स् वगादूत छकर?” सुुू कहै त अकछ ओ, आ बुझ।ू 9 धमाक स् वगादूत, कोमल आ कवुम, सौम आ शान छकर। ते ु जखु ओ अहाु क हदय मे आकब जाइत छकर तु तुरन अहाु सु धाकमाकता, कवुय, पकतवता, उदारता, कमा, दाु आ धमापरायरताक गप करै त छकर। 10 जखु ई सभ बात अहाु क हदय मे आकब जायत तखु ई जाकु कलअ जे धमाक स् वगादूत अहाु क संग छकर। ते ु एकह स् वगादूत आ हुकर काज सभक बात सुुू। 11 अधमाक स् वगादूतक काज सेहो सीखू। ओ सभसु पकहुे कटु , कोकधत आ मूखा अकछ। ओकर काज कवुाशकारी होइत छै क आ परमेश् वरक सेवक सभ केु उखाकड फेकैत छै क। ते ु जखु ई सभ बात अहाु क मोु मे आकब जायत। अहाु हुकर काज सु बुझब जे ई अधमाक स् वगादूत छकर।” 12 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, हम ई सभ बात कोुा बुझब?” सुुू कहै त अकछ ओ, आ बुझ।ू जखु कोध वा कटु ता आकब जायत तखु ई जाकु कलअ जे ओ अहाु मे अकछ। 13 तकहुा जखु बहत रास चीज आ ुीक भोजु आ ुशाक इवा होइत अकछ। जखु दोसरक जे ककछु अकछ तकर पेम, घमंि, आ बहत रास बाजब आ महभाकां का, आ एहुे तरहक बात अहाु पर आकब जायत। 14 ते ु जखु ई सभ बात अहाु क हदय मे उठत तखु ई जाकु कलअ जे अधमाक स् वगादूत अहाु क संग छकर। ते ु अहाु हुकर काज केु जुैत छी, ते ु सभ सु हकट जाउ आ हुका कोुो शेय ुकह कदयौक। 15 ते ु एकह दु ुू स् वगादूतक काज अहाु लग अकछ। आब बुझू आ धाकमाक स् वगादूत पर कवश् वास कर, ककएक तु ओकर कशका ुीक अकछ। 16 ककएक तु मुुष् य ककहयो एतेक खुश ुकह रहय। तइयो जु ओकर हदय मे दोसर सगादूतक कवचार उठै त छै क तु ओकह पुरष वा सी केु पापक आवशकता अवश छै क |
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
17 मुदा जु पुरष वा स् ती केु एतेक दु ष ककहयो ुकह होउ, जु धाकमाक स् वगादूतक काज ओकर हदय मे आकब जाय तु ओकह पुरष वा स् ती केु ककछु भलाई करबाक आवशकता पडतैक। 18 ते ु अहाु दे खैत छी जे धाकमाक स् वगादूतक पाछाु चलब कोुा ुीक अकछ। ते ु जु अहाु हुकर पाछाु लागब आ 2 हुकर काजक अधीु रहब तु परमेश् वरक अधीु रहब। जे सभ हुकर काजक अधीु रहत, से परमेश् वरक अधीु सेहो रहत। कमांि 7 1 ओ कहै त छकर जे परमेश् वर सु िे राउ आ हुकर आजा सभक पालु कर। जु अहाु हुकर आजाक पालु करब तु अहाु सभ काज मे सामरा बुब आ अहाु क सभ काज उतम होयत। ककएक तु परमेश् वरक भय सु अहाु सभ काज ुीक जकाु करब। 2 ई ओ भय अकछ जकरा सु अहाु केु पभाकवत करबाक चाही जाकह सु अहाु उदार पाकब सकब। मुदा शैताु सु ुकह िे राउ, ककएक तु जु अहाु पभु सु िे रब तु हुका पर अहाु क पभुभ होयत। कारर ओकरा मे कोुो शक् ुकह छै क। 3 जु हुका मे कोुो सामरा ुकह अकछ तु हुका िरबाक चाही। मुदा जकरा मे अतन सामरा छै क, ओकरा िरबाक चाही। मुदा जकरा मे कोुो शक् ुकह छै क, ओकरा सभ केु कतरसृत कयल जाइत छै क। 4 शैताुक काज सु िे राउ, ककएक तु ओ सभ अधलाह अकछ। कारर, पभुक भय सु अहाु िरब आ शैताुक काज ुकह करब, बल् कक ओकरा सभ सु अपुा केु सुरककत राखब। 5 ते ु दू तरहक भय अकछ। जु अहाु अधलाह ुकह करब तु पभु सु िे राउ आ ुकह करब। मुदा जु अहाु भलाई करक चाहै छी तु पभुक भय पबल आ पैघ आ मकहमामंकित अकछ। 6 ते ु परमेश् वर सु िे राउ आ अहाु जीकवत रहब। मुदा जे ओकरा सभ केु ुकह राखैत अकछ, आ ुे ओकरा सभ मे जीवु छै क। कमांि 8 1 ओ कहलकु जे हम अहाु केु कहुे छी जे पभुक दू तरहक पारी होइत अकछ आ दू तरहक परहे ज होइत अकछ। ते ु अहाु केु ककछु बात सु परहे ज करबाक चाही, आ ककछु सु ुकह। 2 हम उतर दे कलयैक, “महाराज, हमरा जाकह बात सु परहे ज करबाक अकछ आ जे ुकह करबाक अकछ, से हमरा घोषरा कर।” सुुू, ओ कहलकु। अधलाह सु अपुा केु बचाउ, आ ुकह कर। मुदा ुीक काज सु परहे ज ुकह कर, बल् कक कर। जु ुीक काज सु परहे ज करब आ ओकरा ुकह करब तु पाप करब।” ते ु सभ अधलाह सु परहे ज कर, तखु अहाु सभ धाकमाकता केु बुझब।” 3 हम कहकलयकु, “कोु अधलाह काज अकछ जकरा सु हमरा परहे ज करबाक चाही? सुुू, ओ कहलकु: वकभचार सु, ुशा सु, दं गा सु, अकत भोजु सु, साकदषता आ बेईमाुी सु, घमंि सु, धोखा सु, झूठ बाजबा सु, हास सु, पाखंि सु, चोट सु सरर सु आ सब दु ष बात सु। 4 ई सभ अधमाक काज अकछ, जाकह सु परमेश् वरक सेवक केु परहे ज करबाक चाही। ककएक तु जे एकह सभ बात सु अपुा केु ुकह रोकक सकैत अकछ, से परमेश् वरक लेल ुकह जीकब सकैत अकछ।
5 मुदा ओ कहलकु जे, एकह तरहक बातक बाद की होइत अकछ, से सुुू, ककएक तु आओर बहत रास एहु बात अकछ जाकह सु परमेश् वरक सेवक केु परहे ज करबाक चाही। चोरीसु, आ ठकसु; झूठ गवाही सु, लोभ सु, घमंि सु आ एकह तरहक आु सभ बात सु। 6 की ई सभ बात अहाु केु अधलाह बुझाइत अकछ वा ुकह? सचमुच परमेश् वरक सेवक सभक लेल ओ सभ बहत दु ष अकछ। ते ु परमेश् वरक सेवक केु एकह सभ काज सु परहे ज करबाक चाही। 7 ते ु अपुा केु ओकरा सभ सु बचाउ, जाकह सु अहाु परमेश् वरक लेल जीकब सकब आ जे सभ एकह सभ सु परहे ज करै त छकर, हुका सभक बीच मे कलखल जाउ। आ एकह तरहे ु हम अहाु केु दे खा दे लहु जे अहाु केु कोु-कोु बात सु बचबाक चाही। 8 कोुो ुीक काज सु परहे ज ुकह कर, बल् कक ओकरा कर। ओ कहलकु जे , ओकह ुीक काज सभक की गुर अकछ जे अहाु केु करबाक चाही, जाकह सु अहाु उदार पाकब सकब। सबसु पकहुे कवशास अकछ; पभुक भय; दाु; सहमकत; कहसेदारी; सत; धीरज; पकतवता। 9 मुुष् यक जीवु मे एकह सभ सु ुीक ककछु ुकह अकछ। जे ई सभ काज अपु जीवु मे राखत आ करत। अकगला बेर सुुू जे एकह सभक बाद की अकछ। 10 कवधवा सभक सेवा करबाक लेल। अुार आ गरीब केु कतरसार ुकह करब। परमेश् वरक सेवक सभ केु आवशकता सु मु् करबाक लेल। अकतकर सतार करब; (ककएक तु सतार मे कखुो काल पैघ फल भेटैत अकछ) कववाद ुकह कर, बल् कक चुप रह। 11 सभ मुुष् यक ऊपर कवुम रहबाक लेल। वृदक आदर करब; धम् बुबाक लेल मेहुत करब। भाईचारा के समाु करब; अपमाु सहु करब; दीघाकालीु रहब; जे सभ कवश् वास सु खकस पडल अकछ ओकरा सभ केु ुकह फेकक दे ब, बल् कक ओकरा सभ केु बदकल दे ब आ ओकरा सभ केु हौसला ब़े बाक लेल। पापी सभ केु उपदे श दे ब। जे हमरा सभक ऋरी अकछ, तकरा सभ केु दमु ुकह करबाक चाही। आ एहुे तरहक आु सभ चीज। 12 ई सभ बात अहाु केु ुीक बुझाइत अकछ वा ुकह? हम कहकलयकु, “एकह शब सु ुीक की भ’ सकैत अकछ? ओ कहलकु, एकह आजा सभ मे जीबू, आ ओकरा सभ सु हकट ुकह जाउ। जु अहाु एकह सभ आजाक पालु करब तु परमेश् वरक लेल जीकवत रहब।” जे सभ एकह आजा सभक पालु करत, से सभ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। कमांि 9 1 फेर ओ हमरा कहलकरु। अहाु सु सभ संदेह केु दू र कर। आ जखु पभु सु ककछु माु गब तखु कोुो बात पर कोुो तरहक प् ुकह कर। अपुा भीतर कहै त छी जे, हम पभु सु ककछु माु गब आ ओकरा कोुा गहर क’ सकब, जखु कक हम हुका कवरद एतेक पैघ पाप केलहु? 2 एकह तरहे ु ुकह सोचू, बल् कक पूरा मोु सु पभु कदस घुमू आ कबुा कोुो संदेहक हुका सु माु गू, तखु अहाु पभुक दया केु बुझब। कोुा ओ अहाु केु ुकह छोडत, बल् कक अहाु क पारक आगह पूरा करत।
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
3 परमेश्वर मुुष्य जकाु ुकह छकर, जे हुका परमेश् वरक चोट पर धाु दै त छकर। मुदा चोट कबसरर जाइत अकछ, आ अपु पारी पर दया करै त अकछ। 4 ते ु एकह संसारक सभ कुकमा सु अपु हदय केु शुद कर। आ हम जे आजा अहाु केु परमेश् वर सु पकहुे दे ुे छी, तकरा पालु कर। अहाु जे ुीक चीज माु गब से भेटत, आ अहाु क सभ कवुती मे ककछु ओ कमी ुकह होयत। जु अहाु कबुा कोुो संदेहक पभु सु माु गब। 5 मुदा जे सभ एहु ुकह अकछ, ओकरा सभ जे ककछु माु गैत अकछ, ओकरा सभ मे सु कोुो चीज ुकह भेटतैक। ककएक तु जे सभ कवश् वास सु भरल अकछ, सभ ककछु कवश्वास सु माु गैत अकछ आ पभु सु गहर करै त अकछ, ककएक तु ओ सभ कुकवावाद माु गैत अकछ। मुदा जे संदेह करै त अकछ, तकरा परमेश् वरक लेल शायदे जीकवत रहत, जाबत तक ओ पशाताप ुकह करत। 6 ते ु अपु हदय केु शंका सु शुद कर आ कवशास राखू आ परमेश् वर पर भरोसा कर। मुदा आ जु संयोगवश ककछु माु गबाक चाही आ (तुरंत) ुकह भेटैत अकछ, तइयो ते ु संदेह ुकह कर, कारर अहाु केु एखुकह अपु आताक याचुा ुकह भेटल अकछ। 7 भक सकैछ जे अहाु अपु परीकाक काररे ु एखु धरर एकरा ुकह पाकब लेब, ुकह तु कोुो एहु पापक लेल जे अहाु ुकह जुैत छी। मुदा माु गब ुकह छोडू, तखु पाकब लेब। ुै तु जु अहाु माु गब छोकड दे ब तु परमेश् वरसु ुकह, अपुासु कशकायत कर जे ओ अहाु केु जे चाहै त छलहु से ुकह दे लकु। 8 ते ु एकह संदेह पर कवचार कर जे ई कतेक कूर आ कवुाशकारी अकछ। आ कोुा ई बहतो केु कवशास सु जकड सु उखाकड दै त अकछ, जे बहत कवशासी आ द़ छल। कारर, ई संदेह शैताुक बेटी अकछ, आ परमेश् वरक सेवक सभक संग बहत दु ष ववहार करै त अकछ। 9 ते ु एकरा कतरसृत कर, आ अहाु एकह पर सभ अवसर पर शासु करब। द़ आ सश् कवश् वास राखू, ककएक तु कवश् वास सभ ककछु क पकतजा करै त अकछ आ सभ ककछु कसद करै त अकछ। मुदा संदेह कवशास ुकह करत, जे ओकरा ककछु ओ भेटत, जे ककछु क' सकैत अकछ। 10 ते ु अहाु दे खैत छी जे कोुा कवश् वास ऊपर सु, परमेश् वरक कदस सु अबैत अकछ। आ बहत शक् रखैत अकछ। मुदा संदेह एकटा सां साररक आत् मा अकछ, आ शैताु सु कुकलैत अकछ, आ ओकरा मे कोुो शक् ुकह अकछ। 11 ते ु अहाु कवश् वासक गुरक पालु कर आ संदेह सु हकट जाउ, जाकह मे कोुो गुर ुकह अकछ, आ अहाु परमेश् वरक लेल जीकवत रहब। जे सभ ई सभ काज करै त अकछ, सभ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। कमांि 10 1 सभ उदासी केु अहाु सु दू र राखू। कारर ई संदेह आ कोधक बकहु करक। कोुा सर, हम कहकलयकु, ई सबहक बकहु अकछ? कारर उदासी, आ कोध, आ संदेह हमरा एक दोसरा सु बहत कभ् बुझाइत अकछ। 2 ओ उतर दे लकरु, “की अहाु बेबुकुयाद छी जे अहाु एकरा ुकह बुझैत छी?” ककएक तु उदासी सभ आत् मा सभ सु बेसी दु ष् ट आ परमेश् वरक सेवक सभक लेल सभ सु अधलाह अकछ। आ फेर, बचा लैत अकछ।
3 सर, हम कहकलयकु, “हम बहत मूखा छी, आ ई सभ बात ुकह बुझैत छी।” हम ई ुकह बुकझ सकैत छी जे ई कोुा सता सकैत अकछ, आ तइयो बचा सकैत अकछ। सुुू, ओ कहलकु, आ बुझ।ू जे ककहयो सतक खोज ुकह केलक, आ ुे परमेशरक मकहमा के बारे मे पूछताछ केलक, बक् केवल कवशास केलक, ओ कवधम् के काज मे लागल अकछ। 4 एकटा आओर झूठ बाजक वला पवक् ता छकर जे परमेश् वरक सेवक सभक मु केु ुष कक दै त छकर। अराा त जे संकदग अकछ, ओकर ुकह जे पभु पर पूरा भरोसा रखैत अकछ। आब ओ संकदग लोक सभ हुका लग आकब जाइत छकर जेुा कोुो कदव आत् मा हुका सु पूछैत छकर जे हुका सभक संग की होयत। 5 आ ई झूठ बाजक वला भकवषव्ा जे हुका मे ईशरीय आत् माक कोुो शक् ुकह रखैत छकर, हुका सभक माु गक अुुसार उतर दै त छकर आ हुकर सभक आता केु अपु इवाुुसार पकतजा सु भरै त छकर। मुदा ओ भकवषव्ा वरा छकर, आ जे सभ सयं वरा छकर हुका सभ केु वराक उतर दै त छकर। 6 जे ककछु वरा मुुष्य हुका सु माु गैत अकछ, ओ ओकरा वराक उतर दै त अकछ। तैयो ओ ककछु बात सचाई मे बजैत छकर। ककएक तु शैताु ओकरा अपु आत् मा सु भरर दै त छै क, जाकह सु ओ ककछु धम् केु उखाकड फेकय। 7 ते ु जे केओ पभु पर कवश् वास मे मजगूत अकछ आ सत् य केु पकहरुे अकछ। मुदा जे सभ संदेह करै त छकर आ पाया गैर-यहदी सभ जकाु पशाताप करै त छकर, हुका सभ सु परामशा कर आ मूकताक सेवा करै त अपुा लेल पैघ पापक ढे र लगा लैत छकर। 8 एकह लेल जे सभ एहु अकछ, सभ अवसर पर हुका सभ सु पूछताछ कर। मूकताक पूजा करब; आ मूखा आ सत सु रकहत छकर। 9 परमेश् वर कदस सु जे आत् मा दे ल गेल अकछ, तकरा माु गबाक आवशकता ुकह अकछ। मुदा ईशरीयताक शक् रहला सु सब ककछु अपुे आप बजैत अकछ। ककएक तु ओ ऊपर सु, परमेश् वरक सामर्ा य सु अबैत अकछ। 10 मुदा जे मुुष् यक इवाक अुुसार आ वतामाु संसारक आु-आु बहत रास काजक कवषय मे बजैत अकछ, से परमेश् वरक संबंध मे ुकह बुझैत अकछ। कारर, ई आत् मा सभ एहु काज सभक काररे ु अनार भक जाइत अकछ, आ भष आ टू टलफूटल भ’ जाइत अकछ। 11 ुीक बेल जकाु जु ओकरा उपेका कयल जाइत छै क, खरपतवार आ काु ट सु दबल जाइत छै क आ अंतता ओकरा दारा मारल जाइत छै क। तकहुा एहु आता पर कवशास करय बला पुरष सेहो छकर। 12 ओ सभ बहत रास काज आ काज मे पकड जाइत छकर, आ बुकदहीु भक जाइत छकर, आ जखु ओ सभ परमेश् वरक कवषय मे सोचैत छकर तु ओ सभ ककछु ुकह बुझैत छकर। 13 मुदा जे सभ पभुक भय माुैत अकछ आ परमेश् वरक कवषय मे सत् य केु खोजैत अकछ आ पभुक पकत अपु सभटा कवचार रखैत अकछ। हुका सभ सु जे ककछु कहल गेल अकछ से पककड कलअ आ तुरन बुझ,ू ककएक तु हुका सभ मे पभुक भय छकु। 14 ककएक तु जतक पभुक आत् मा रहै त छकर, ओतय बहत रास बुकद सेहो बक़ जाइत अकछ। ते ु पभुक संग जुकड जाउ, आ सभ बात बुकझ जायब। 15 हे अबुकदमाु, आब सीखू! उदासी पकवत आत् मा केु कतेक परे शाु करै त अकछ आ कोुा उदार करै त अकछ। जखु संकदग आदमी कोुो काज मे लागल रहै त अकछ, आ अपु संदेहक
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
काररे ु ओकरा पूरा ुकह करै त अकछ, तखु ई उदासी ओकरा मे पवेश करै त अकछ, आ पकवत आता केु दु खी करै त अकछ, आ ओकरा दु खी करै त अकछ। 16 फेर कोध जखु ककरो कोुो काज मे पकड जाइत छै क तखु ओ बहत भावुक भ’ जाइत छै क। तखु फेर ओकर हदय मे उदासी पवेश करै त अकछ, जे कोध सु भावुक भ' गेल छल, आ ओ अपु काज सु परे शाु भ' जाइत अकछ, आ पशाताप करै त अकछ, ककएक त' ओ गलत काज केुे अकछ। 17 ते ु ई दु ाख उदार दै त बुझाइत अकछ, ककएक तु ओ अपु दु षमा सु पशाताप करै त अकछ। मुदा आु दु ुू बात, जेुा कक पकहुे कहल गेल छल, संदेह आ उदासी, आता केु परे शाु करै त अकछ: संदेह, कारर ओकर काज सफल ुकह भेल: आ उदासी, कारर ओ पकवत आता केु कोकधत केलक। 18 ते ु अपुा सु उदासी दू र कर आ पकवत आत् मा केु कष ुकह कर जे अहाु मे रहै त छकर, जाकह सु ओ परमेश् वर सु कवुती ुकह कक अहाु सु कवदा ुकह भक जाय। कारर, पभुक आत् मा जे शरीर मे रहबाक लेल दे ल गेल अकछ, ओ एहु दु ाख ुकह सहै त अकछ। 19 ते ु अहाु हु सी-खुशीक वस पकहरर कलअ, जे पभुक अुुगह सकदखु भेटैत अकछ, आ अहाु एकह मे आुकनत रहब। ककएक तु हर हु समुख आदमी ुीक करै त अकछ। आ ुीक चीजक साद लैत अकछ, आ उदासी केु कतरसार करै त अकछ। 20 मुदा दु खी लोक सकदखु दु ष काज करै त अकछ। पकहल, ओ दु षता करै त अकछ, ककएक तु ओ पकवत आत् मा केु दु खी करै त अकछ, जे मुुष् य केु दे ल गेल अकछ, जे हु सी-खुशीक सभावक अकछ। आ फेर ओ बीमार करै त अकछ, कारर ओ दु खी भ' क' पभु सु पाराुा करै त अकछ, आ ओकरा पूवाक दया केु पकहल बेर धनवादक सीकार ुकह करै त अकछ, आ जे माु गैत अकछ से परमेश् वर सु ुकह भेटैत अकछ। 21 ककएक तु दु खी लोकक पाराुा सकदखु परमेश् वरक वेदी पर च़बाक पभाव ुकह करै त अकछ। हम हुका कहकलयकु, “महाराज, दु खी लोकक पाराुा परमेश् वरक वेदी पर च़बाक गुर ककएक ुकह अकछ? कारर, ओ कहलकु जे, हुका हदय मे उदासी बुल रहै त छकु। 22 ते ु जखु मुुष् यक पाराुाक संग उदासी होयत तु ओकरा परमेश् वरक वेदी पर शुद रप सु च़बाक आगह ुकह होयत। कारर, जेुा मकदरा केु कसरका मे कमलाओल जाइत छै क, तकहुा पकहुे जे कमठास छलैक, से ुकह होइत छै क। ते ु उदासी पकवत आता के सार कमकशत होय के कारर, आदमी के पाराुा के वैनक ुै होय के सहु करै छै जेुा कक अनरा होतै । 23 ते ु अहाु अपुा केु दु ाख सु शुद कर, जे अधलाह अकछ, आ अहाु परमेश् वरक लेल जीकवत रहब। आु सभ लोक परमेश् वरक लेल जीकवत रहत, जे उदासी केु एक कात राकख पस्ता पकहरर लेत। कमांि 11 1 ओ हमरा चौकी पर बैसल ककछु आदमी आ एकटा कुस् पर बैसल दे खौलकु। सर, हम कहकलयकु, हम हुका सभ केु दे खैत छी। ओ उतर दे लकरु, “ओ सभ कवशासी छकर। आ जे कुस् पर बैसल अकछ से सां साररक आत् मा अकछ। 2 ओ कवश् वासीक सभा मे ुकह अबैत अकछ, बल् कक ओकरा सु बचैत अकछ। मुदा ओ अपुा केु संकदग आ खाली मे जोकड लैत
छकर; आ कोु-कोु आ ुुकायल जगह पर हुका सभ केु भकवषवारी करै त छकर। आ हुका सभक हदयक सभ इवाक अुुसार बजैत हुका सभ केु पस् करै त छकर | 3 खाली बताु मे अपुा केु राकख कक ओ टू कट ुकह जाइत अकछ, बल् कक एक दोसर पर कफट बैसैत अकछ। मुदा जखु यीशु परमेश् वरक आत् मा सु भरल धम् लोक सभक संग आकब पभु सु पाराुा करै त छकर। ओ मुुष खाली भ' गेल अकछ, कारर ओ सां साररक आता ओकरा सु उकड जाइत अकछ, आ ओ गूंगा अकछ, आ ककछु ुकह बाकज सकैत अकछ। 4 जेुा कोुो भंिार मे मकदरा वा तेल रोकब। आ ओकह बताु सभक बीच एकटा खाली जारकु राखल जायत। आ बाद मे ओकरा खोलबाक लेल आकब जायब, तकहुा अहाु ओकरा रोकुे रहब, तेुा ओ खाली भकवषव्ा सभ जखु धम् लोकक आत् मा सभक बीच अबैत छकर, तखु ओ सभ ओकहुा पाओल जाइत छकर जेुा ओ सभ आयल छलाह। 5 हम कहकलयकु, “तखु मुुष् य ओकरा सभ केु कोुा बूकझ सकैत अकछ?” दु ुू तरहक पुरष केु दे खैत हम की कहय जा रहल छी ताकह पर कवचार कर; जकहुा हम अहाु सु बात करै त छी तकहुा अहाु परमेश् वरक पवक् ता आ झूठक पवक् ता केु परखब।” 6 पकहुे ओकह आदमी केु परखू जे परमेश् वरक आत् मा अकछ। कारर, जे आत् मा ऊपर सु अकछ, कवुम आ शान अकछ। आ सभ दु षता सु कवदा भक जाइत अकछ। आ वतामाु संसारक वरा इवा सु; आ अपुा केु सभ मुुष्य सु बेसी कवुम बुा लैत अकछ। आ जखु ओकरा सु पूछल जाइत छै क तखु ककरो उतर ुकह दै त छै क; आ ुे एक-एकटा केु, ककएक तु परमेश् वरक आत् मा मुुष् य सु जखु चाहकर तखु ुकह, बल् कक जखु परमेश् वर चाहकर तखु बजैत छकर। 7 एकह लेल जखु परमेश् वरक आत् मा धारर करयवला मुुष् य परमेश् वर पर कवश् वास रखकुहार धम् सभक मर् िली मे आकब पभु सु पाराुा करत। तखु परमेश् वरक पकवत स् वगादूत ओकह आदमी केु धन आत् मा सु भरर दै त छकर, आ ओ परमेश् वरक पेररा सु मंिली मे बजैत छकर। 8 ते ु परमेश् वरक आत् मा एकह तरहे ु जाकु जाइत अकछ, ककएक तु जे केओ परमेश् वरक आत् मा दारा बजैत अकछ, ओ पभुक इवाुुसार बजैत अकछ। 9 आब सां साररक आत् माक कवषय मे सुुू, जे शून आ मूखातापूरा आ गुरहीु अकछ। आ सभ सु पकहुे जे मुुष् य केु आत् मा भेटबाक चाही, (जखु कक ओकरा वासव मे ई ुकह छै क), ओ अपुा केु ऊुच करै त अकछ, आ पकहल आसु मे रहबाक इवा रखैत अकछ, आ दु ष आ वचु सु भरल अकछ। 10 अपु समय भोग-कवलास आ सभ तरहक कामुकता मे कबताबैत अकछ। आ अपु भकवषवारीक फल भेटैत छै क। जे जु ुकह भेटैत अकछ तु ओ कदव ुकह करै त अकछ। 11 की परमेश् वरक आत् मा केु इुाम आ ईशरीय भेटबाक चाही? ई एहु करब परमेश् वरक भकवषव्ा ुकह बुैत अकछ। 12 एकह तरहे ु अहाु सभ एकह तरहक पतेक पवक् ताक जीवु दे खैत छी। ते ु ओकह मुुष केु अपु जीवु आ कमा सु कसद कर जे कहै त अकछ जे ओकरा पकवत आत्मा अकछ। आ परमेश् वरक आत् मा पर कवश् वास कर जे परमेश् वरक कदस सु अबैत अकछ आ ओकह मे सामर्ा य अकछ। मुदा पाकराव आ खाली आता पर कवशास ुकह कर, जे शैताु सु आयल अकछ, जकरा मे कवशास ुकह अकछ आ ुे गुर।
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
13 आब सुुू जे हम अहाु केु जे उपमा कहय जा रहल छी। पारर लक कक सगा कदस फेकक कदयौक। वा पाकुक टोंटी लक कक ओतकह च़ाउ। आ दे खू जे अहाु सगा धरर पहु कच सकैत छी कक ुकह। 14 सर, हम कहकलयकु, ई कोुा भ’ सकैत अकछ? कारर जे अहाु जे बात कहलहु ताकह मे सु कोुो काज संभव ुकह अकछ। ओ उतर दे लकरु, “जेुा ई सभ काज ुकह कयल जा सकैत अकछ, तकहुा पाकराव आत् मा सेहो कबुा गुरक आ पभावहीु अकछ।” 15 ऊपर सु जे सामरा अबैत अकछ, तकरा एकह पकतरप मे आओर दू र धरर बुझ।ू ओला के दाुा जे ुीचा खसैत अकछ से अतंत छोट होइत अकछ; आ तैयो जखु मुुकक मार पर खकस पडै त अकछ तखु ओकरा कोुा पीडा दै त छै क? 16 आ फेर। घरक मल पर कवचार कर : कोुा धरती पर खसैत छोट-छोट बूंद पारर मे खोखला काज करै त अकछ | 17 तकहुा ऊपर सु आकब कक पृर् वी पर खसय बला छोट-छोट वसु सभ मे बहत सामरा होइत छै क। ते ु एकह आत् मा सु जुडू, जे सामर्ा य रखैत अकछ। आ दोसर जे खाली अकछ ताकह सु कवदा भ' जाउ। कमांि 12 1 फेर ओ हमरा कहलकरु। अहाु सु सभ अधलाह कामुा हटाउ, आ ुीक आ पकवत कामुा पकहर। ककएक तु ुीक कामुा पकहरा कक अहाु अधलाह चीज सु घृरा करब आ जेुा चाहब ओकरा लगाम लगा लेब। मुदा कोुो दु ष इवा भयावह होइत छै क आ ओकरा वश मे करब ककठु होइत छै क । 2 ई बहत भयावह आ जंगली अकछ, आ अपु जंगलीपु सु मुुष केु भस कक दै त अकछ। आ खास क' जु परमेश् वरक कोुो सेवक संयोगवश एकह मे खकस पडय, कसवाय ओ बहत बुकदमाु ुकह, तखु ओ एकह सु बबाा द भ' जाइत अकछ। ककएक तु ई ओकह लोक सभ केु ुष कक दै त अकछ जकरा लग ुीक इवाक वस ुकह अकछ आ वतामाु संसारक काज मे लागल अकछ। आ ओकरा सभ केु मृतुक लेल सौंकप दै त अकछ। 3 सर, हम कहकलयकु, कोुो दु ष इवाक कोु काज होइत छै क जे मुुष केु मृतु मे पहु चाबैत छै क? हमरा दे खा कदअ, जाकह सु हम ओकरा सभ सु कवदा भ’ सकब।” सुुू ओ कहलकु, जे काज सु दु ष इवा परमेश् वरक सेवक सभ केु मृतु मे पहु चाबैत अकछ। 4 सभसु पकहुे तु दोसर पुरषक स् तीक लोभ करब दु ष इवा अकछ। वा कोुो स् ती दोसरक पकतक लोभक लेल। धु-दौलतक साकदष भोजुक इवा सेहो करब। आ ुशा मे धुत सेहो। आ बहत रास आुन। 5 ककएक तु बहत ुाजुकता मे मूखाता होइत छै क। आ परमेश् वरक सेवक सभक लेल बहतो भोगक आवशकता ुकह अकछ। ते ु एहु वासुा दु ष आ कवुाशकारी अकछ जे परमेश् वरक सेवक सभ केु मृत् यु भक जाइत अकछ। ककएक तु एहु सभ वासुा शैताु सु अकछ। 6 ते ु केओ सभ अधलाह कामुा सु हकट जायत, ओ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। मुदा जे हुका सभक अधीु रहत से सभ अुन काल धरर मरत।” कारर ई दु ष कामुा घातक अकछ। ते ु अहाु धाकमाकताक इवा पकहरर कक पभुक भय सु सशस भक सभ दु ष कामुकताक कवरोध कर। 7 ककएक तु ई भय ुीक कामुा मे रहै त अकछ। आ जखु दु ष लोभ अहाु केु पभुक भय सु लैस आ ओकर कवरोध करत तखु
ओ अहाु सु दू र उकड जायत आ अहाु क सोझाु ुकह दे खायत, बक् अहाु क कवच सु िे रा जायत। 8 अहाु केु कवजय भेटत आ ताकह लेल अहाु केु मुकुट पकहराओल जायत। आ ओकह इवा केु पार करब जे ुीक अकछ। जे कवजय अहाु पार केुे छी से परमेश् वर केु दक दे ब आ जे अहाु सयं करय चाहै त छी से कक कक हुकर सेवा करब। 9 जु अहाु ुीक इवाक सेवा करब आ ओकर अधीु रहब। अहाु अपु दु ष कामुा पर पभुभ पाकब सकब। ओ सभ अहाु क इवाुुसार अहाु क अधीु रहत।” 10 हम कहकलयकु, “महाराज, हम ओकह इवाक सेवा करब बुझब जे ुीक अकछ?” ओ कहै त छकर जे , सुुू, परमेश् वर सु िे राउ आ हुका पर भरोसा कर, आ सत् य आ धाकमाकता सु पेम कर आ ुीक काज कर। 11 जु अहाु ई सभ काज करब तु परमेश् वरक अुुकचत सेवक बुब। आ ओकर सेवा करब, आ जे सभ आु लोक एकह तरहे ु ुीक इवाक सेवा करत, से परमेश् वरक लेल जीकवत रहत। 12 ई बारह आजा पूरा कक कक ओ हमरा कहलकरु, “अहाु लग ई आजा अकछ, ओकह मे चलू। आ पशाताप करय वाला के सुुय वाला के आगह कर जे ओ अपु जीवु के शेष कदु अपु पशाताप के शुद राखय। 13 हम जे सेवा अहाु केु सौंपल गेल छी से पूरा मेहुकत सु पूरा कर, आ अहाु केु एकह सु बहत लाभ भेटत। जे सभ पशाताप करत आ तोहर वचु पर कवश् वास करत, ओकरा सभ केु अुुगह भेटतैक।” हम अहाु क संग छी आ हुका सभ केु कवश् वास करबाक लेल बाध करब। 14 हम हुका कहकलयकु, “महाराज, ओ आजा सभ पैघ आ उतम अकछ, आ ओकह आदमीक हदय केु उताकहत करबा मे सकम अकछ जे ओकरा सभ केु पालु क’ सकैत अकछ।” मुदा, सर, हम ुकह ककह सकैत छी, की कोुो पुरष दारा ओकर अवलोकु कयल जा सकैत अकछ? 15 ओ उतर दे लकरु, “अहाु ई आजा सभ केु सहजता सु पालु करब, आ ई सभ कठोर ुकह होयत। 16 मुदा आब हम अहाु केु कहै त छी जे जु अहाु एकह आजा सभक पालु ुकह करब, मुदा ओकर उपेका करब तु अहाु केु ुकह उदार होयत, आ ुे अहाु क सनाु आ ुे अहाु क घरक लोक। ककएक तु अहाु ई कुराय कक लेुे छी जे ई सभ मुुष् य ुकह राकख सकैत अकछ। 17 ई सभ बात ओ हमरा बहत कोकधत भक कक कहलकरु जे ओ हमरा बहत भयभीत कक दे लकरु। फर ओ अपु चेहरा बदकल लेलक, जाकह सु एकटा मैट ओकर तामस ुकह सकह सकल। 18 जखु ओ हमरा एकदम परे शाु आ भकमत दे कख ओ आरो संयम आ हु सी-खुशी सु बजय लगलाह, “हे मूखा आ बुकदहीु! 19 अकुत, परमेश् वरक मकहमा केु ुकह जुैत छकर जे ओ कतेक पैघ आ अद् भुत छकर। ओ मुुषक लेल संसार केु बुौलकु आ सभ पारी केु ओकर अधीु कयलकु। 20 ओ कहलकु जे, ओ एकह सभ आजा केु पूरा करबा मे सकम छकर, जे सभक हदय मे पभु छकर, मुदा जे सभक मुुह मे पभु मात छकर, आ हुकर हदय कठोर अकछ आ ओ सभ पभु सु दू र छकर। एहु वक्क लेल ई आजा ककठु आ ककठु होइत छै क | 21 ते,ु अहाु सभ जे कवश् वास मे खाली आ हलुक छी, अहाु सभक हदय मे पभु परमेश् वर केु राखू आ अहाु सभ ई बुझब जे एकह आजा सभ सु बेसी सहज ककछु ुकह अकछ, आ ुे एकह सु बेसी सुखद, आ ुे एकह सु बेसी कोमल आ पकवत।
हरमास के चरवाहा की दू सरी पुसक - आजा
22 अपुा केु अपु परमेश् वर परमेश् वर कदस मुडू आ शैताु आ ओकर भोग केु छोकड कदयौक, ककएक तु ओ सभ दु ष, कटु आ अशुद अकछ। आ शैताु सु ुकह िे राउ, ककएक तु ओकरा अहाु सभ पर कोुो अकधकार ुकह अकछ। 23 हम अहाु सभक संग छी, पशाताप करबाक दू त, जे हुका पर पभुभ रखैत छी। शैताु सते मुुष केु िराबैत अकछ। मुदा ओकर आतंक वरा अकछ। ते ु हुका सु िे राउ ुकह, तखु ओ अहाु सभ सु भाकग जायत। 24 हम हुका कहकलयकु। सर, हमरा अहाु सु ककछु शब बाजब सुुू। ओ उतर दे लकरु, “आगू कहब जे , मुुष् य परमेश् वरक आजाक पालु करक चाहै त अकछ। 25 मुदा शैताु कठोर होइत अकछ आ अपु सामर्ा य सु परमेश् वरक सेवक सभ पर राज करै त अकछ। ओ कहलकु जे , ओ परमेश् वरक सेवक सभ पर राज ुकह कक सकैत छकर, जे सभ मोु सु हुका पर भरोसा करै त छकर। 26 शैताु झगडा कक सकैत अकछ, मुदा ओकरा सभ पर कवजय ुकह पाकब सकैत अकछ। 27 जु अहाु सभ हुकर कवरोध करब तु ओ अहाु सभ सु भकमत भक कक भाकग जायत। मुदा जे सभ कवश् वास मे पूरा ुकह अकछ, ओ शैताु सु िे राइत अकछ जेुा ओकरा कोुो पैघ शक् हो। कारर शैताु परमेश् वरक i सेवक सभ केु परीका दै त अकछ आ जु ओकरा सभ केु खाली पाकब लैत अकछ तु ओकरा सभ केु ुष कक दै त अकछ। 28 ककएक तु जकहुा मुुष् य बताु सभ मे ुीक मकदरा भरर कक आधा भरर कक ककछु बताु मे राकख कक ओकह बताु सभक परीकर आ साद लेबक अबैत अकछ तु ओ सभ भरल बताु सभ केु परखैत ुकह अकछ, ककएक तु ओ जुैत अकछ जे ओ सभ ुीक अकछ। मुदा जे आधा भरल अकछ ओकर साद लैत अकछ, जाकह सु ओ खटा ुकह भ' जाय। (ककएक तु आधा भरल बताु जलीए खटा भक जाइत अकछ आ मकदराक साद सेहो खतम भक जाइत अकछ।) ते ु शैताु परमेश् वरक सेवक सभ लग अबैत अकछ जे ओकरा सभ परखबाक लेल अबैत अकछ। 29 जे सभ कवश् वास सु भरल अकछ से सभ ओकर कवरोध करै त अकछ आ ओ ओकरा सभ सु कवदा भक जाइत अकछ, ककएक तु ओकरा सभ मे पवेश करबाक लेल कोुो जगह ुकह भेटैत छै क, तखु ओ ओकह लोक सभ लग जाइत अकछ जे कवशास सु भरल ुकह अकछ आ ओकरा पवेशक साु रहबाक काररे ु ओ ओकरा सभ मे जाइत अकछ आ ओकरा सभक संग जे चाहै त अकछ से करै त अकछ आ ओ सभ ओकर सेवक बकु जाइत अकछ। 30 मुदा हम, पशातापक दू त, अहाु सभ केु कहै त छी, शैताु सु ुकह िे राउ, कारर हम अहाु सभ लग पठाओल गेल छी, जाकह सु हम अहाु सभक संग रहब, जे सभ अहाु सभक पूरा मोु सु पशाताप करत, आ हम अहाु सभ केु कवश् वास मे द़ कक सकब। 31 ते ु अहाु सभ जे सभ अपु अपराधक काररे ु परमेश् वर आ अपु उदार केु कबसरर गेल छी, अहाु सभ कवश् वास कर। आ अहाु क पाप मे जोकड दे ला सु अहाु क जीवु बहत भारी भ' गेल अकछ। 32 जु अहाु सभ पूरा मोु सु पभुक कदस घुरब आ हुकर इवाुुसार हुकर सेवा करब। ओ अहाु सभक पूवाक पाप सु ठीक करत, आ अहाु सभ शैताुक सभ काज पर पभुभ राखब।” 33 तखु ओकर ककुको धमकी मे ुकह िे राउ, ककएक तु ओ सभ मृत् युक ुस जकाु बेवजह होइत अकछ। मुदा हमर बात सुुू
आ सवाशक्माु पभु सु िे राउ, जे अहाु सभक उदार आ कवुाश करबा मे सकम छकर। आ हुकर आजाक पालु कर जाकह सु अहाु सभ परमेश् वरक लेल जीकवत रहब।” 34 हम हुका कहकलयकु। सर, हम आब पभुक सभ आजा मे पुकष भ' गेल छी जखु कक अहाु हमरा संग छी, आ हम जुैत छी जे अहाु शैताुक सभ शक् केु तोकड दे ब। 35 जु हम सभ पभुक सहायता सु अहाु सभक दारा दे ल गेल एकह आजा सभक पालु कक सकब तु हम सभ हुका पर कवजय पार करब। 36 ओ कहलकु, जु पभुक पकत अपु हदय केु शुद करब तु अहाु ओकरा सभक पालु करब। ओ सभ सेहो ओकह सभ केु राखत जे वतामाु संसारक वरा इवा सु अपु हदय केु शुद करत आ परमेश् वरक लेल जीकवत रहत।