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Maithili - The Order of the House of the Rechabites

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रे काबियो ं के घर के क् 2 राजा 10:15-28 15 ओतऽ सँ विदा भेला पर ओ रे काबक पुत योनादाब केँ हनका सँ भें करऽ अयला पर प्ाण कयलवन आ कहलविन, “की अहाँ क णोन ठीक अवि जेना हणर णोन अहाँ क हदयक संग अवि?” यहोनादाब उतर दे लविन, “ई अवि।” जँ से अवि तँ हणरा अपन हाि वदअ। ओ हनका अपन हाि दऽ दे लविन। ओ ओकरा रि णे बैसा लेलक। 16 ओ कहलविन, “हणरा संग आवब कऽ दे खू जे हणर परणेश् िरक पवत उताह अवि।” ते ँ ओ सभ हनका रि णे सिार करा दे लविन। 17 जखन ओ साणररया णे अयलाह तँ ओ साणररया णे अहाबक जे सभ बचल िल, तकरा णारर दे लविन जाबत धरर ओ ओकरा नष नवह कऽ दे लविन। 18 येह सभ लोक केँ एक ठाण जणा कऽ कऽ कहलविन, “अहाब बालक सेिा कवन कऽ कऽ कऽ गेलाह। णुदा येह हनकर बहत सेिा करताह।” 19 आब बालक सभ पिक् ता, हनकर सभ सेिक आ हनकर सभ पुरोवहत केँ हणरा लग बजाउ। ककरो कणी नवह होउ, वकएक तँ हणरा बालक लेल बहत पैघ बवलदान करबाक अवि। जे वकयो अभाि णे रहत, ओ जीवित नवह रहत। णुदा येह ई काज चतुराई सँ कयलवन, जावह सँ ओ बालक उपासक सभ केँ नष कऽ सकवि। 20 येह कहलविन, “बालक लेल एकंा गौरिशाली सभाक घोष्ा कर।” ओ सभ एकर घोष्ा कयलक। 21 येह सणस इसाएल णे पठौलवन, आ बालक सभ उपासक लोक सभ आवब गेलाह, जावह सँ एको आदणी नवह बचल जे नवह आयल िल। ओ सभ बालक घर णे आवब गेलाह। बालक घर एक िोर सँ दोसर िोर धरर भरल िल। 22 ओ ओवह िसक समारवनहार केँ कहलविन, “बाल केर सभ उपासक सभक लेल िस वनकालू।” ओ ओकरा सभ केँ िस लऽ कऽ अनलवन। 23 येह आ रे काबक पुत यहोनादाब बालक घर णे गेलाह आ बालक उपासक सभ केँ कहलविन, “दे खू जे एतय अहाँ सभक संग परणेश् िरक सेिक णे सँ वकयो नवह अवि, वसिाय बालक उपासक णात।” 24 जखन ओ सभ बवल-बवल आ होणबवल चढाबय लेल भीतर गेलाह तँ येह बाहर सतर आदणी केँ वनयुक कयलवन आ कहलविन, “जँ हण अहाँ सभक हाि णे अनने िी, ओवह णे सँ वकयो बवच गेल तँ जे ओकरा िोव़ दे तैक तँ ओकर पा् ओकर जानक बदला णे भेंतैक।” 25 होणबवल चढाबैत दे री येह पहरे दार आ सेनापवत सभ केँ कहलविन, “ भीतर जा कऽ ओकरा सभ केँ णारर वदयौक। वकयो साणने नवह आबय। ओ सभ ओकरा सभ केँ तलिारक धार सँ णारर दे लक। पहरे दार आ सेनापवत सभ ओकरा सभ केँ बाहर वनकावल कऽ बालक घरक नगर णे चवल गेलाह। 26 ओ सभ बालक घर सँ णूवतत सभ केँ बाहर वनकावल कऽ जरा दे लक। 27 ओ सभ बालक णूवतत केँ तोव़ दे लक आ बालक घर केँ तोव़ कऽ आइ धरर ओकरा ड् ा​ा घर बना दे लक। 28 एवह तरहे ँ येह इसाएल णे सँ बाल केँ नष कऽ दे लविन।


आ याबेज णे रहवनहार शासी सभक िंशज। वतराती, वशणेती आ सुकाती। ई सभ केनी लोक िवि जे रे काबक घरक वपता हे णत सँ आयल िलाह। 1 इवतहास 2:55 णुदा गोबरक फांक बेतहकेरे णक शासक रे काबक पुत णल्याह केँ ठीक कयलवन। ओ ओकरा बनौलवन आ ओकर दरबजा, ताला आ सलाख सभ ठाढ कयलवन। नहे माह 3:14 वयणतयाह 35:1-19 1 यहदाक राजा योवशयाहक पुत यहोयाकीणक सणय णे परणेश् िरक वदस सँ वयणतयाह केँ ई िचन आयल। 2 रे काबीक घर णे जा कऽ ओकरा सभ सँ गप कर आ ओकरा सभ केँ परणेश् िरक घर णे, एकंा कोठली णे आवन कऽ ओकरा सभ केँ शराब पीबऽ वदयौक। 3 तखन हण वयणतयाहक पुत याजवनयाह, हबवजवनयाक पुत, हनकर भाय सभ, हनकर सभ पुत सभ आ रे काबीक सणस घराना केँ लऽ गेलहँ । 4 हण ओकरा सभ केँ परणेश् िरक घर णे, परणेश् िरक इगवलयाक पुत हाननक पुत सभक कोठली णे अनलहँ , जे णुखौवत सभक कोठलीक कात णे िल, जे दरबजाक रखिाला शलुणक पुत णासेयाहक कोठलीक ऊपर िल। 5 हण रे काबीक घरक पुत सभक सोझाँ णवदरा सँ भरल घैल आ पाला रालख दे वलयैक आ ओकरा सभ केँ कहवलयैक, “अहाँ सभ णवदरा पीबू।” 6 णुदा ओ सभ कहलविन, “हण सभ णवदरा नवह पीब, वकएक तँ हणरा सभक वपता रे काबक पुत योनादाब हणरा सभ केँ आजा दे ने िलाह जे, “अहाँ सभ आ ने अहाँ सभ आ ने अपन पुत सभ सदा-सदा लेल णवदरा नवह पीब।” 7 ने घर बनाउ, ने बीया बोउ, ने अंगूरक बाग लगाउ आ ने कोनो बाग, बल् वक अहाँ सभ वदन भरर डे रा णे रहब। जावह सँ अहाँ सभ ओवह दे श णे बहत वदन धरर रहब जतय अहाँ सभ परदे शी िी।” 8 एवह तरहे ँ हण सभ अपन वपता रे काबक पुत योनादाबक जे वकिु आजा दे लवन अवि, तकर बात णानलहँ जे हण सभ, अपन पती, बेंा आ बेंी सभ, भरर वदन णवदरा नवह पीब। 9 आ ने हणरा सभक लेल घर बनाबऽ जावह णे रहब। 10 णुदा हण सभ डे रा णे रवह कऽ आजा णानलहँ आ हणरा सभक वपता योनादाबक आजाक अनुसार काज केलहँ । 11 बाबुलक राजा नबूकदनेसर जखन ओवह दे श णे अयलाह तखन हण सभ कहवलयवन, “कली सभक सेना आ अराणी सभक सेना सँ डरै त आऊ आ यरशलेण चवल जाउ।” 12 तखन परणेश् िरक िचन वयणतयाह केँ कहलविन। 13 सेनाक परणेश् िर, इसाएलक परणेश् िर ई कहै त िवि। जाउ, यहदा आ यरशलेणक वनिासी सभ केँ कवह वदअ जे, “की अहाँ सभ केँ हणर बात सुनबाक वशका नवह भेंत?” पभु कहै त िवि। 14 रे काबक पुत योनादाबक ई बात पूरा होइत अवि जे ओ अपन पुत सभ केँ णवदरा नवह पीबाक आजा दे लवन। वकएक तँ आइ धरर ओ सभ वकयो नवह पीबैत अवि, बल् वक अपन वपताक आजाक पालन करै त अवि। णुदा अहाँ सभ हणर बात नवह णानलहँ । 15 हण अपन सभ सेिक पिक् ता सभ केँ भोरे उवठ कऽ पठा कऽ अहाँ सभ लग पठौने िी जे, “अहाँ सभ एक-एक गोंे अपन दु ष् ं रस् ता सँ घुरर कऽ अपन काज सभ केँ सुधार, आ दोसर दे िता सभक पािाँ नवह जाउ आ हनकर सेिा करबाक लेल नवह जाउ, आ अहाँ सभ ओवह दे श णे रहब जे हण अहाँ सभ केँ आ अपन पूितज सभ केँ दे ने िी। 16 वकएक तँ रे काबक पुत योनादाबक पुत सभ अपन वपताक आजाक पालन कयलवन। णुदा ई लोक हणर बात नवह णानलक।

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17 ते ँ सेना सभक परणेश् िर, इसाएलक परणेश् िर, ई कहै त िवि। दे खू, हण यहदा आ यरशलेण णे रहवनहार सभ पर ओ सभ दु ष् ंता आवन दे ब जे हण हनका सभक विरु कयल गेल िी। हण हनका सभ केँ बजौने िी, णुदा ओ सभ कोनो उतर नवह दे लक। 18 वयणतयाह रे काबीक घराना केँ कहलविन, “सेना सभक परणेश् िर, इसाएलक परणेश् िर ई कहै त िवि। वकएक तँ अहाँ सभ अपन वपता योनादाबक आजाक पालन कयलहँ आ हनकर सभ आजाक पालन कयलहँ आ हनकर सभ आजाक अनुसार पालन कयलहँ । 19 ते ँ सेना सभक परणेश् िर, इसाएलक परणेश् िर ई कहै त िवि। रे काबक पुत योनादाब हणरा साणने सदासदा लेल एक आदणी ठाढ रहय नवह चाहत।

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