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Maithili - The Gospel of Nicodemus formerly called The Acts of Pontius Pilate

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निकोदे मस के सुसमाचार, जेकरा पनि​िे द एक्ट् स ऑफ पोन्टियुस नपलातुस किलऽ जाय छे लै अध्याय 1 1 हन्ना आ काइफा, सुम्मा, दतम, गमालिएि, यहूदा, िेवी, नेप्थिीम, लसकन्दर, कोरस आ अन्य यहूदी सभ लि​िातुस िग यीशुक लवषय मे गेिाह आ हुनका िर बहुत रास अधिाह अिराधक आरोि िगौिलन। 2 ओ कहिलथन, “हमरा सभ के​ेँ लवश्वास अलि जे यीशु बढ़ई यूसुफक िुत्र िलथ, जे मररयम सेँ जन्मि भूलम िलथ आ ओ अिना के​ेँ िरमेश् वरक िुत्र आ राजा घोलषत करै त िलथ। आ एतबे नलह, लवश्राम-लदन, आ हमरा सभक िूववजक लनयम के​ेँ भंग करबाक प्रयास सेहो करै त अलि। 3 लि​िातुस उत्तर दे िलथन। ओ की अलि जकर घोषणा ओ करै त िलथ ? आ की अलि जकरा ओ भंग करबाक प्रयास करै त िलथ? 4 यहूदी सभ हुनका कहिलथन, “हमरा सभक एकटा लनयम अलि जे लवश्राम-लदन मे इिाज करबा सेँ मना करै त अलि। मुदा ओ ओलह लदन िंगडा आ बहीर, िक्षाघात सेँ िीलडत, आन्हर, कोढ़ी आ राक्षसी दु नू के​ेँ दु ष्ट लवलध सेँ ठीक करै त िलथ। 5 लि​िातुस उत्तर दे िलथन, “ओ अधिाह तरीका सेँ ई कोना कऽ सकैत िलथ? ओ सभ उत्तर दे िलथन, “ओ जादू गर िलथ, आ दु ष् टात् मा सभक राजकुमार द्वारा दु ष् टात् मा सभ के​ेँ भगा दै त िलथ। आ ते ेँ सभ लकिु ओकर अधीन भऽ जाइत िै क। 6 तखन लि​िातुस कहिलथन, “शैतान सभ के​ेँ भगा दे ब अशुद्ध आत् माक काज नलह, बि् लक िरमेश् वरक सामथ्व य सेँ लनकि​ि बुझाइत अलि।” 7 यहूदी सभ लि​िातुस के​ेँ उत्तर दे िलथन, “हम सभ अहाेँक महामलहम सेँ लवनती करै त िी जे अहाेँ हुनका अिन न्यायािय मे हालजर होबय िेि बजाउ आ स्वयं हुनकर बात सुनू।” 8 तखन लि​िातुस एकटा दू त के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “मसीह के​ेँ एतय कोन तरहे ेँ आनि जायत?” 9 तखन दू त मसीह के​ेँ जालन कऽ हुनकर आराधना कयिलन। हाथ मे जे वस्त्र ि​ि से जमीन िर िसारर कऽ कहिलथन, “प्रभु, एलह िर चिू आ भीतर जाउ, लकएक तेँ राज्यिाि अहाेँ के​ेँ बजबैत िलथ।” 10 यहूदी सभ जखन दू तक काज बुलझ गेिाह तेँ ओ सभ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ ओकरा दू त द्वारा नलह, बिुक मोती सेँ लकएक नलह बजा दे िहुेँ ?—लकएक त’ दू त ओकरा दे खिक। हुनकर आराधना कयिलन आ हुनका हाथ मे जे वस्त्र ि​िलन से हुनका सामने जमीन िर िसारर कऽ कहिलथन, “प्रभु, राज्यिाि अहाेँ के​ेँ बजबैत िलथ।” 11 तखन लि​िातुस दू त के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “अहाेँ एना लकएक केिहुेँ ?” 12 दू त उत्तर दे िलथन, “जखन अहाेँ हमरा यरूशिेम सेँ लसकन्दर िठे िहुेँ , तखन हम यीशु के​ेँ एकटा गदहा िर नीच आकृलत मे बैसि दे खिहुेँ , आ इब्रानी सभक बच्चा सभ हाथ मे गािक डारर िकडने, “होसाना” लचलचया उठि। 13 दोसर िोक सभ अिन वस्त्र रस् ता मे िसारर कऽ कहिलथन, “हे स् वगव मे रहलनहार, हमरा सभ के​ेँ बचाउ। धन्य अलि जे प्रभुक नाम सेँ अबैत अलि। 14 तखन यहूदी सभ दू तक लवरुद्ध लचलचया उठिाह आ कहिलथन, “इब्रानी सभक सन् तान सभ लहब्रू भाषा मे अिन प्रशंसा कयिलन। अहाेँ जे यूनानी िी, लहब्रू भाषा कोना बुलझ सकिहुेँ? 15 दू त हुनका सभ के​ेँ उत्तर दे िलथन, “हम एकटा यहूदी सेँ िुिलियलन, “ई की अलि जे बच्चा सभ इब्रानी भाषा मे लचलचयाइत अलि?” 16 ओ हमरा ई बात बुझबैत कहिलथन, “ओ सभ होसाना के​ेँ लचलचयाइत िलथ, जकर अथव होइत अलि जे, “हे प्रभु, हमरा बचाउ।” वा, हे प्रभु, उद्धार करू। 17 तखन लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ सभ बच्चा सभक द्वारा कहि गेि बात सभक गवाही लकएक दै त िी? दू त कोन चीज मे गित काज केिक अलि? आ ओ सभ चुि भ’ गेिाह। 18 तखन राज्यिाि दू त के​ेँ कहिलथन, “जाउ आ कोनो तरहे ेँ ओकरा भीतर अनबाक प्रयास करू।” 19 मुदा दू त लनकलि कऽ िलहने जेकाेँ काज केिक। ओ कहिलथन, “प्रभु, भीतर आलब जाउ, लकएक तेँ राज्यिाि अहाेँ के​ेँ बजा रहि िलथ।” 20 जखन यीशु झंडा िऽ कऽ बैसि झंडा सभक बीच जाइत ि​िाह तेँ हुनका सभक चोटी सभ प्रणाम कऽ यीशुक आराधना कयिलन। 21 तखन यहूदी सभ झंडा सभक लवरुद्ध आरो जोर सेँ लचलचया उठि।

22 मुदा लि​िातुस यहूदी सभ के​ेँ कहिलथन, “हमरा बुझि अलि जे ई अहाेँ सभ के​ेँ नीक नलह िगैत अलि जे ध्वजक चोटी सभ स्वयं प्रणाम कऽ यीशुक आराधना करै त अलि। मुदा अहाेँ सभ झंडा सभक लवरुद्ध लकएक उद् घोष करै त िी जेना ओ सभ प्रणाम कऽ िूजा कएने होलथ? 23 ओ सभ लि​िातुस के​ेँ उत्तर दे िलथन, “हम सभ झंडा सभ के​ेँ प्रणाम करै त यीशुक आराधना करै त दे खिहुेँ।” 24 तखन राज्यिाि लसिाही सभ के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “अहाेँ सभ एना लकएक केिहुेँ ? 25 झंडा सभ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “हम सभ बुतिरस्त िी आ मंलदर मे दे वता सभक आराधना करै त िी। आ हुनकर िूजा करबाक लवषय मे हमरा सभ के​ेँ कोना लकिु सोचबाक चाही? हम सब मात्र हाथ मे मानक िकडने रही आ ओ सब प्रणाम क हुनकर िूजा करै त ि​ि। 26 तखन लि​िातुस सभाघरक शासक सभ के​ेँ कहिलथन, “की अहाेँ सभ लकिु बिवान आदमी के​ेँ चुलन कऽ ओकरा सभ के​ेँ झंडा िकडय लदयौक आ हम सभ दे खब जे तखन ओ सभ झुलक जेताह लक नलह।” 27 तखन यहूदी सभक बूढ़-िुरान सभ बारह गोट बिवान आ सक्षम बूढ़-िुरान सभ के​ेँ खोलज कऽ ओकरा सभ के​ेँ सिाट िकलड िेिक आ ओ सभ राज्यिािक सोझाेँ ठाढ़ भऽ गेि। 28 तखन लि​िातुस दू त के​ेँ कहिलथन, “यीशु के​ेँ बाहर लनकािू आ कोनो तरहे ेँ ओकरा फेर सेँ आलन लदयौक।” यीशु आ दू त दिान सेँ बाहर लनकलि गेिाह। 29 लि​िातुस िलहने ध्वजवाहक सभ के​ेँ बजा कऽ शिथ खयिलन जे जेँ यीशु िलहने सन् तान के​ेँ ओलहना नलह धारण केने रलहतलथ तेँ हुनका सभक माथ कालट िेताह। 30 तखन राज्यिाि यीशु के​ेँ फेर सेँ भीतर आबय िेि आज्ञा दे िलथन। 31 ओ दू त िलहने जेकाेँ करै त ि​ि, तेना कऽ कऽ यीशु के​ेँ बहुत लवनती केिक जे ओ अिन वस्त्र िर चलि जाउ आ ओलह िर चलि कऽ भीतर गेिाह। 32 यीशु जखन भीतर गेिाह तेँ िलहने जकाेँ झंडा प्रणाम कऽ कऽ हुनकर आराधना कयिलन। अध्याय 2 1 लि​िातुस ई दे खख कऽ डरा गेिाह आ अिन आसन सेँ उठय बिा ि​िाह। 2 मुदा जखन ओ उठबाक लवचार करै त ि​िाह तखन हुनकर अिन ित्नी जे दू र ठाढ़ ि​िीह, हुनका िग िठौिलन जे, “ओलह धमी िुरुष सेँ अहाेँक कोनो संबंध नलह अलि। कारण, आइ रालत एकटा दशवन मे हुनका लवषय मे हमरा बहुत कष्ट भेि अलि। 3 ई बात सुलन यहूदी सभ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “की हम सभ अहाेँ के​ेँ नलह कहलियलन जे, ‘ओ जादू गर िलथ?” दे खू, ओ अहाेँक ित्नी के​ेँ सिना दे खौने िलथ। 4 लि​िातुस यीशु के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “ओ सभ जे गवाही दै त अलि से अहाेँ सुनिहुेँ , मुदा कोनो उत्तर नलह दै त िी?” 5 यीशु उत्तर दे िलथन, “जेँ हुनका सभ के​ेँ बजबाक सामर्थ्व नलह रहैत तेँ ओ सभ नलह बालज सकैत ि​िाह। मुदा लकएक तेँ सभ के​ेँ अिन-अिन भाषाक आज्ञा िलन जे नीक-बेजाय दु नू बाजब, ते ेँ ओ एलह लदस तकैत रहलथ। 6 मुदा यहूदी सभक बूढ़-िुरान सभ यीशु के​ेँ कहिलथन, “हम सभ की दे खब?” 7 िलहने हम सभ अहाेँक लवषय मे ई बात जनैत िी जे अहाेँ व्यलभचारक कारणे ेँ जन्म िेने िी। दोसर, जे अहाेँक जन्मक कारणे ेँ बेतिेहेम मे लशशु सभ के​ेँ मारि गेि। तेसर, जे तोहर बाि-माए मररयम लमस्र लदस भालग गेिाह, लकएक तेँ ओ सभ अिन िोक िर भरोसा नलह क’ सकिाह। 8 ओलह ठाम ठाढ़ लकिु यहूदी सभ एलह सेँ बेसी अनुकूि बाजि, “हम सभ ई नलह कलह सकैत िी जे ओ व्यलभचारक कारणे ेँ जन्म िेने िलथ। मुदा हम सभ जनैत िी जे हुनकर माय मररयम यूसुफक संग सगाई भ’ गेि ि​िीह, आ ते ेँ ओ व्यलभचारक कारणे ेँ नलह भेि ि​िलन। 9 तखन लि​िातुस ओलह यहूदी सभ के​ेँ कहिलथन जे हुनका व्यलभचारक कारणे ेँ जन्म िेबाक बात कहि गेिलन, “अहाेँ सभक ई बात सत्य नलह अलि, लकएक तेँ सगाई भेि ि​ि। 10 हन्ना आ काइफा लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “एलह सभ िोक के​ेँ दे खबाक चाही जे लचलचयाइत अलि जे ओ व्यलभचार मे जन्मि िलथ आ जादू गर िलथ। मुदा जे सभ ओकरा व्यलभचारक कारणे ेँ जन्म िेबा सेँ अस्वीकार करै त अलि, से सभ ओकर धमव िररवतवन कयि आ लशष् य अलि। 11 लि​िातुस हन्ना आ काइफा के​ेँ उत्तर दे िलथन, “ई सभ धमव िररवतवन केलनहार के िलथ?” ओ सभ उत्तर दे िलथन, “ओ सभ बुतिरस्त िोकक सन् तान िलथ आ यहूदी नलह बलन हुनकर अनुयायी बलन गेि िलथ।” 12 तखन एलियाजर, एस्टे ररयस, एन्टोलनयस, याकूब, कारास आ शमूएि, इसहाक आ लफनेस, लिस्पस आ अलि​िा, हन्ना आ यहूदा उत्तर दे िलथन, “हम सभ धमव िररवतवन नलह कऽ रहि िी, बि् लक यहूदी सभक सन् तान िी, आ सत् य बजैत िी आ मररयमक समय उिखित ि​िहुेँ।” सगाई भ गेि ि​ि। 13 तखन लि​िातुस ई बात बजलनहार बारह गोटे के​ेँ सम्बोलधत कऽ कऽ हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “हम अहाेँ सभ के​ेँ कैसरक जीवन सेँ जादू कऽ रहि िी जे


अहाेँ सभ लवश्वासिूववक ई बताउ जे ओ व्यलभचारक कारणे ेँ जन्म िेने िलथ वा नलह, आ जे बात अहाेँ सभ कहिहुेँ से सत्य अलि।” 14 ओ सभ लि​िातुस के​ेँ उत्तर दे िलथन, “हमरा सभक एकटा लनयम अलि, जालह सेँ हमरा सभ के​ेँ शिथ दे बऽ सेँ मना कयि गेि अलि, ई िाि अलि। 15 तखन हन्ना आ काइफा लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “ओ बारह आदमी ई नलह मानत जे हम सभ हुनका नीच जन्मि आ जादू गरक रूि मे जनैत िी, यद्यलि ओ ई नाटक करै त िलथ जे ओ िरमेश् वरक िुत्र आ राजा िलथ लवश्वास करबासेँ, जे सुनबामे काेँलि जाइत िी। 16 तखन लि​िातुस सभ के​ेँ बाहर लनकिबाक आज्ञा दे िलथन, लसवाय बारह गोटे के​ेँ जे कहैत ि​िाह जे हुनकर जन्म व्यलभचार मे नलह भेि अलि, आ यीशु के​ेँ दू र हलट कऽ हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “यहूदी सभक मन मे यीशु के​ेँ मारबाक लवचार लकएक अलि?” 17 ओ सभ हुनका उत्तर दे िलथन, “ओ सभ लवश्राम-लदन मे इिाज करबाक कारणे ेँ ओ सभ िोलधत िलथ।” लि​िातुस कहिलथन, “की ओ सभ नीक काजक कारणे ेँ ओकरा मारर दे तैक? ओ सभ हुनका कहिलथन, “हेँ, सर।” अध्याय 3 1 तखन लि​िातुस िोध सेँ भरर गेिाह आ यहूदी सभ के​ेँ कहिलथन, “हम समस्त संसार के​ेँ गवाही दे बाक िेि कहैत िी जे हमरा ओलह आदमी मे कोनो दोष नलह भेटैत अलि।” 2 यहूदी सभ लि​िातुस के​ेँ उत्तर दे िलथन, “जेँ ओ दु ष्ट नलह रलहतलथ तेँ हम सभ हुनका अहाेँक सोझाेँ नलह अनने रलहतहुेँ।” 3 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “की अहाेँ सभ हुनका िऽ कऽ अिन लनयमक अनुसार िरीक्षा दै त िी।” 4 तखन यहूदी सभ कहिलथन, “हमरा सभक िेि ककरो मारर दे ब उलचत नलह अलि।” 5 लि​िातुस यहूदी सभ के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ सभ के​ेँ मारर नलह दे बाक आज्ञा अहाेँ सभक अलि, मुदा हमर नलह।” 6 ओ फेर दिान िर जा कऽ यीशु के​ेँ बजबैत िुि​िलथन, “की अहाेँ यहूदी सभक राजा िी?” 7 यीशु लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “की अहाेँ ई बात अिने सेँ कहैत िी आलक यहूदी सभ हमरा बारे मे अहाेँ के​ेँ ई बात कहने ि​ि?” 8 लि​िातुस यीशु सेँ िुि​िलथन, “की हम यहूदी िी?” िूरा जालत आ यहूदी सभक शासक अहाेँ के​ेँ हमरा हाथ मे सौंिने अलि। अहाेँ की केिहुेँ? 9 यीशु उत्तर दे िलथन, “हमर राज्य एलह संसारक नलह अलि। मुदा आब हमर राज्य एतय सेँ नलह अलि। 10 लि​िातुस कहिलथन, “तखन की अहाेँ राजा िी?” यीशु उत्तर दे िलथन, “अहाेँ कहैत िी जे हम राजा िी। हम एलह िेि आयि िी जे हम सत्यक गवाही दी। जे केओ सत् य मे अलि, से हमर आवाज सुनैत अलि। 11 लि​िातुस हुनका िुि​िलथन, “सत्य की होइत िै क?” 12 यीशु कहिलथन, “सत्य स् वगव सेँ अलि।” 13 लि​िातुस कहिलथन, “ते ेँ सत् य िृथ् वी िर नलह अलि।” 14 यीशु लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “लवश् वास करू जे िृथ् वी िर सत् य ओलह िोक सभक बीच अलि जे जखन हुनका सभ के​ेँ न् याय करबाक सामथ्व य भेटैत अलि तेँ ओ सभ सत् य द्वारा शालसत भऽ जाइत िलथ आ सही न् याय बनबैत िलथ। अध्याय 4 1 तखन लि​िातुस यीशु के​ेँ दिान िर िोलड यहूदी सभक िग जा कऽ कहिलथन, “हमरा यीशु मे कोनो दोष नलह भेटैत अलि।” 2 यहूदी सभ हुनका कहिलथन, “मुदा ओ कहिलथन, “हम िरमेश् वरक मन् लदर के​ेँ नष्ट कऽ सकैत िी आ तीन लदन मे ओकरा फेर सेँ बना सकैत िी।” 3 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ िुि​िलथन, “ओ कोन तरहक मखन्दरक लवषय मे बजैत िलथ?” 4 यहूदी सभ हुनका कहिलथन, “सुिेमान जे लियािीस वषव धरर बनबैत ि​िाह, से कहने ि​िाह जे ओ नष्ट कऽ दे ताह आ तीन लदन मे बनौताह।” 5 लि​िातुस फेर हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “हम ओलह आदमीक खून सेँ लनदोष िी। की अहाेँ सभ एकरा लदस तकैत िी। 6 यहूदी सभ हुनका कहैत िलथन, “हुनकर खून हमरा सभ आ हमरा सभक सन्तान िर रहय।” तखन लि​िातुस बूढ़-िुरोलहत आ िेवी सभ के​ेँ एक ठाम बजा कऽ कहिलथन, “एना काज नलह करू। हमरा अहाेँक आरोि मे (ओकरा लवरुद्ध) कोनो एहन बात नलह भेटि जे ओ बीमार िोक के​ेँ ठीक करबाक आ लवश्राम-लदन के​ेँ तोडबाक लवषय मे मृत्युक योग्य हो। 7 िुरोलहत आ िेवी लि​िातुस के​ेँ उत्तर दे िलथन, “सीजरक जान सेँ जेँ केओ लनन्दा करयविा अलि तेँ ओ मृत्युक योग्य अलि। मुदा ई आदमी प्रभुक लनन्दा कयिक। 8 तखन राज्यिाि फेर यहूदी सभ के​ेँ आज्ञा दे िलथन जे ओ सभ दिान सेँ बाहर लनकलि जाय। यीशु के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “हम अहाेँ के​ेँ की करब?”

9 यीशु हुनका उत्तर दे िलथन, “जेना धमवशास् त्र मे लिखि अलि, तेना करू।” 10 लि​िातुस हुनका िुि​िलथन, “ई कोना लिखि अलि?” 11 यीशु हुनका कहिलथन, “मूसा आ प्रवक् ता सभ हमर कष् ट आ िुनरुत्थानक लवषय मे भलवष्यवाणी केने िलथ।” 12 ई बात सुलन यहूदी सभ िोलधत भऽ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ आब ओलह आदमीक लनन्दा लकएक सुनब?” 13 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “जेँ ई सभ बात अहाेँ सभ के​ेँ लनन्दा बुझाइत अलि तेँ की अहाेँ सभ ओकरा िऽ कऽ अिन आेँ गन मे आलन कऽ अिन लनयमक अनुसार ओकर मुकदमा करू।” 14 यहूदी सभ लि​िातुस के​ेँ उत्तर दै त िलथन, “हमर सभक लनयम कहैत अलि जे हुनका नौ तीस टा प्रहार करबाक बाध्यता िलन, मुदा जेँ एलह तरहे ेँ ओ प्रभुक लनन्दा करताह तेँ हुनका िाथर मारि जायत। 15 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “जेँ हुनकर ई बात लनन्दा अलि तेँ की अहाेँ सभ अिन लनयमक अनुसार हुनकर िरीक्षण करू।” 16 यहूदी सभ लि​िातुस के​ेँ कहैत िलथ, “हमर सभक व्यविा मे हमरा सभ के​ेँ आज्ञा दे ि गेि अलि जे ककरो मृत्यु नलह दे ि जाय। 17 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “ओकरा िूस िर चढ़ाओि जेबाक उलचत नलह।” 18 राज्यिाि जखन ओलह ठामक िोक सभ आ यहूदी सभ लदस तकिलन तेँ ओ बहुतो यहूदी सभ के​ेँ कानैत दे खिलन आ यहूदी सभक मुखखया िुरोलहत सभ के​ेँ कहिलथन, “सब िोक हुनकर मृत्यु नलह चाहैत अलि।” 19 यहूदी सभक बुजुगव सभ लि​िातुस के​ेँ उत्तर दे िलथन, “हम सभ आ सभ िोक एलह िेि एतय आलब गेिहुेँ जे ओ मरर जाय।” 20 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “ओ लकएक मरत? 21 ओ सभ हुनका कहिलथन, “लकएक तेँ ओ अिना के​ेँ िरमेश् वरक िुत्र आ राजा कहैत िलथ।” अध्याय 5 1 मुदा लनकोदे मुस एकटा यहूदी राज्यिािक समक्ष ठाढ़ भऽ कऽ कहिलथन, “हे धमी न्यायाधीश, हम अहाेँ सेँ लवनती करै त िी जे अहाेँ हमरा िर अनुिह करू आ लकिु शब्द बाजब।” 2 लि​िातुस हुनका कहिलथन, “आगू बजैत रहू।” 3 लनकोदे म कहिलथन, “हम यहूदी सभक बूढ़-िुरान सभ, शास्त्री सभ, िुरोलहत सभ आ िेवी सभ आ यहूदी सभक सभटा िोक सभ सेँ कहिहुेँ। अहाेँ सभ एलह आदमीक संग की कररतहुेँ? 4 ओ एहन िोक िलथ जे कतेको उियोगी आ गौरवशािी चमत्कार केने िलथ, जे िलहने िृथ् वी िर केओ केओ नलह केने ि​ि आ ने कलहयो नलह करत। ओकरा िोलड लदयौक, आ ओकरा कोनो हालन नलह करू। जेँ ओ िरमेश् वर सेँ अयिाह तेँ ओकर चमत्कार, (ओकर चमत्कारी इिाज) चिैत रहत। मुदा जेँ मनुष् यक लदस सेँ तेँ ओ सभ अन् य भऽ जायत। 5 एलह तरहे ेँ मूसा जखन िरमेश् वर द्वारा लमस्र मे िठाओि गेि ि​िाह तेँ लमस्रक राजा लफरौनक समक्ष िरमेश् वरक आज्ञा दे ि गेि चमत् कार सभ कयिलन। आ भिे ओलह दे शक जादू गर, जनेस आ जम्ब्रेस, अिन जादू सेँ वैह चमत्कार करै त ि​ि जे मूसा केने ि​िाह, तइयो ओ सभ काज नलह क' सकिाह जे मूसा केने ि​िाह; 6 हे शास्त्री आ फररसी सभ, जादू गर सभ जे चमत्कार करै त ि​ि, से िरमेश् वरक नलह ि​ि। मुदा जे सभ ओकरा सभ िर काज केने ि​ि, आ सभ ओकरा सभ िर लवश् वास करऽ विा सभ नाश भऽ गेि। 7 आब एलह आदमी के​ेँ जाय लदयौक। कारण, जे चमत्कार अहाेँ सभ हुनका िर आरोि िगाबैत िी, से िरमेश् वरक अलि। आ ओ मृत्युक योग्य नलह अलि। 8 तखन यहूदी सभ लनकोदे मुस के​ेँ कहिलथन, “की अहाेँ हुनकर लशष् य बलन हुनकर िक्ष मे बात कऽ रहि िी?” 9 लनकोदे म हुनका सभ के​ेँ िुि​िलथन, “की राज्यिाि सेहो हुनकर लशष्य बलन गेि िलथ आ की ओ हुनका िेि भाषण दै त िलथ?” की सीजर ओकरा ओलह उच्च िद िर नलह राखख दे िकैक? 10 ई बात सुलन यहूदी सभ काेँलि उठिाह आ लनकोदे म के​ेँ दाेँत कटै त कहिलथन, “की अहाेँ हुनकर लशक्षा के​ेँ सत् य मे िहण कऽ सकैत िी आ मसीहक संग अहाेँक भाग्य िालब सकैत िी?” 11 लनकोदे मुस उत्तर दे िलथन, “आमेन; हम हुनकर लशक्षा आ हुनका संग हमर भाग्य प्राप्त करब, जेना अहाेँ सभ कहिहुेँ। 12 तखन एकटा आओर यहूदी उलठ कऽ राज्यिाि सेँ लकिु वचन सुनबाक िेि अनुमलत मंगिक। 13 राज्यिाि कहिलथन, “जे मोन अलि से बाजू।” 14 ओ कहिलथन, “हम यरूशिेम मे अडतीस वषव धरर भेड ेँ ाक िोखरर िग िडि रही, बहुत दु बविता मे िररश्रम क’ रहि ि​िहुेँ आ एकटा एहन इिाजक प्रतीक्षा मे ि​िहुेँ जे एकटा स् वगवदूतक आगमन सेँ कयि जायत, जे लनलित समय मे िालन


के​ेँ िरे शान करै त ि​ि।” ; िालन के िरे शानी के बाद जे लकयो िलहने घुसि ि​ि, ओकरा जे बीमारी ि​िैक, से ठीक भ’ गेिै। 15 यीशु हमरा ओतऽ सुस्त दे खख हमरा कहिलथन, “की अहाेँ ठीक भऽ जायब?” हम उत्तर दे लियलन, “महाराज, हमरा िग एहन केओ नलह अलि जे िालन चकनाचूर भ’ जाइत अलि जे हमरा िोखरर मे राखख सकय।” 16 ओ हमरा कहिलथन, “उठू, अिन ओिाओन उठा कऽ चिू।” हम तुरन्त ठीक भऽ गेिहुेँ आ अिन ओिाओन उठा कऽ चि​िहुेँ। 17 तखन यहूदी सभ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “हे हमर प्रभु राज्यिाि, हुनका सेँ ई िूिू जे कोन लदन ओ अिन दु बविता सेँ ठीक भेिाह।” 18 ओ कमजोर िोक उत्तर दे िलथन, “लवश्राम-लदन ि​ि।” 19 यहूदी सभ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “की हम सभ ई नलह कहिहुेँ जे ओ लवश्राम-लदन मे अिन इिाज कऽ कऽ दु ष् टात् मा सभक मुखखयाक द्वारा दु ष् टात् मा सभ के​ेँ भगा दै त िलथ?” 20 तखन एकटा आओर 7 यहूदी आलब कऽ कहिलथन, “हम आन्हर ि​िहुेँ, आवाज सुनैत ि​िहुेँ, मुदा ककरो नलह दे खख सकैत ि​िहुेँ। यीशु जा रहि ि​िाह तखन हम ओलह ठाम सेँ गुजरै त भीड के​ेँ सुनिहुेँ आ िुिलियलन जे ओतय की अलि? 21 ओ सभ हमरा कहिक जे यीशु ओलह ठाम सेँ गुजरै त िलथ, तखन हम लचलचयाइत कहलियलन, “हे दाऊदक िुत्र यीशु, हमरा िर दया करू।” ओ ठाढ़ भऽ कऽ हमरा हुनका िग अनबाक आज्ञा दे िलथन आ हमरा कहिलथन, “अहाेँ की चाहैत िी?” 22 हम कहलियलन, “प्रभु, हम अिन दृलष्ट प्राप्त कऽ सकब।” 23 ओ हमरा कहिलथन, “अहाेँक दृलष्ट चलि जाउ।” 24 एकटा आओर यहूदी सेहो बाहर आलब कऽ कहिक, “हम कोढ़ी ि​िहुेँ, ओ हमरा मात्र अिन वचन सेँ ठीक कऽ िेिक, “हम चाहब, अहाेँ शुद्ध भऽ जाउ।” आ सम्प्रलत हम अिन कोढ़ सेँ शुद्ध भ’ गेिहुेँ। 25 एकटा आओर यहूदी बाहर आलब कहिक, “हम टे ढ़ भ’ गेि ि​िहुेँ, आ ओ हमरा अिन वचन िर सोझ क’ दे िलन।” 26 तखन वेरोलनका नामक एकटा स् त्री कहिलथन, “हमरा बारह वषव धरर खूनक चोट िागि ि​ि आ हम हुनकर वस्त्रक कात िूलब गेिहुेँ आ तुरन्त हमर खूनक बूंद रुलक गेि। 27 तखन यहूदी सभ कहिलथन, “हमरा सभक लनयम अलि जे स् त्री के​ेँ प्रमाणक रूि मे नलह दे ि जायत।” 28 दोसर बातक बाद एकटा आओर यहूदी कहिलथन, “हम दे खिहुेँ जे यीशु के​ेँ अिन लशष् य सभक संग लववाह मे बजाओि गेि ि​ि, आ गिीि प्रदे शक काना मे मलदराक अभाव ि​ि। 29 जखन सभ मलदरा िीलब गेि तखन ओ नोकर सभ के​ेँ आज्ञा दे िलथन जे ओतऽ िहटा बतवन मे िालन भरर लदयौक आ ओ सभ ओकरा सभ के​ेँ लकनार धरर भरर दे िक आ ओ सभ ओकरा सभ के​ेँ आशीवावद दे िक आ ओलह िालन के​ेँ मलदरा मे बदलि दे िक िीलब गेिाह, एलह चमत्कार िर आियवचलकत भ' क'। 30 एकटा आओर यहूदी ठाढ़ भऽ कऽ कहिलथन, “हम यीशु के​ेँ कफरनहूमक सभाघर मे लशक्षा दै त दे खिहुेँ। सभाघर मे एकटा एहन आदमी ि​ि, जकरा मे दु ष्टात्मा ि​िैक। ओ लचलचया उठिलन, “हमरा िोडू।” , नासरतक यीशु, तोरा सेँ हमरा सभक की िेना-दे ना अलि? की अहाेँ हमरा सभक नाश करय िेि आयि िी? हम जनैत िी जे अहाेँ िरमेश् वरक िलवत्र िी। 31 यीशु ओकरा डाेँटैत कहिलथन, “हे अशुद्ध आत् मा, चुि रहू आ ओलह आदमी मे सेँ बाहर लनकिू। तखने ओ हुनका मे सेँ बाहर लनकलि गेिाह आ हुनका कोनो तरहक चोट नलह िहुेँचौिलन। 32 एकटा फररसी सेहो लनम्नलिखखत बात कहिलथन। हम दे खिहुेँ जे गिीि आ यहूलदया, समुद्रक कात आ यरदनक बहुत रास दे श सेँ बहुत रास दि यीशु िग आलब गेि ि​ि आ बहुत रास कमजोर िोक हुनका िग आलब गेिाह आ ओ सभ के​ेँ ठीक कऽ दे िलन। 33 हम अशुद्ध आत् मा सभक लचलचयाइत सुनिहुेँ जे, “अहाेँ िरमेश् वरक िुत्र िी।” यीशु हुनका सभ के​ेँ सख्त आज्ञा दे िलथन जे ओ सभ हुनका नलह बताबलथ। 34 एकर बाद एकटा आओर व्यखि, जकर नाम सेन्तुररओ ि​ि, कहिकलन, “हम यीशु के​ेँ कफरनहूम मे दे खिहुेँ आ हुनका सेँ लवनती केिहुेँ जे, “प्रभु, हमर सेवक िकवािस्त भ’ क’ घर मे िडि अलि।” 35 यीशु हमरा कहिलथन, “हम आलब कऽ हुनका ठीक करब।” 36 मुदा हम कहलियलन, “प्रभु, हम एलह योग्य नलह िी जे अहाेँ हमर ित मे आलब जाउ। मुदा खािी वचन बाजू, तखन हमर सेवक ठीक भ’ जायत।” 37 यीशु हमरा कहिलथन, “जाउ। जलहना अहाेँ लवश् वास केिहुेँ , तेना अहाेँक संग सेहो होअय।” ओही घडी सेँ हमर नोकर ठीक भ’ गेि। 38 तखन एकटा कुिीन िोक कहिलथन, “कफरनहूम मे हमर एकटा बेटा ि​ि जे मृत्युक बाट मे िडि ि​ि। जखन हम सुनिहुेँ जे यीशु गिीि आलब गेि िलथ तेँ हम जा कऽ हुनका सेँ लवनती केिहुेँ जे ओ हमर घर मे उतरर कऽ हमर बेटा के​ेँ ठीक करलथ, लकएक तेँ ओ मृत्युक सीमा मे अलि। 39 ओ हमरा कहिलथन, “जाउ, तोहर बेटा जीलवत अलि।”

40 ओलह समय सेँ हमर बेटा ठीक भऽ गेि। 41 एलह सभक अलतररि बहुतो यहूदी सभ, स्त्री-िुरुष, लचलचया उठिाह आ कहिलथन, “ओ सत्ते िरमेश् वरक िुत्र िलथ, जे मात्र अिन वचन सेँ सभ रोग के​ेँ ठीक करै त िलथ आ लजनकर अधीनि शैतान सभ िूणवतः अलि।” 42 ओलह मे सेँ लकिु गोटे आगू कहिलन, “ई शखि िरमेश् वरक अलतररि ककरो सेँ नलह आलब सकैत अलि।” 43 लि​िातुस यहूदी सभ के​ेँ कहिलथन, “शैतान सभ अहाेँ सभक वैद्य सभक अधीन लकएक नलह अलि? 44 लकिु िोक कहिलथन, “शैतान के​ेँ अधीन करबाक सामर्थ्व िरमेश् वर सेँ नलह लनकलि सकैत अलि।” 45 मुदा दोसर िोक लि​िातुस के​ेँ कहिलथन जे ओ 1 िाजर के​ेँ चारर लदनक कब्र मे रहिा िर मृत् यु मे सेँ लजया दे िलन। 46 राज्यिाि ई बात सुलन काेँिैत यहूदी सभ के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ सभ के​ेँ लनदोष खून बहौिा सेँ की फायदा होयत?” अध्याय 6 1 तखन लि​िातुस लनकोदे म आ ओलह िन्द्रह आदमी के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “हम की करब, जखन लक िोक सभक बीच मे हंगामा भ’ रहि अलि।” 2 ओ सभ हुनका कहिलथन, “हमरा सभ के​ेँ नलह बुझि अलि। जे कोिाहि उठबैत अलि, तकरा लदस तकलथ। 3 तखन लि​िातुस िोक सभ के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “अहाेँ सभ जनैत िी जे अहाेँ सभ के​ेँ ई प्रथा अलि जे हम अहाेँ सभक िेि फसह-िाबलन मे एकटा कैदी के​ेँ िोलड दे ब। 4 हमरा एकटा नामी कैदी, एकटा हत्यारा अलि, जकरा बरब्बा कहि जाइत िै क आ यीशु लजनका मसीह कहि जाइत िै क, लजनका मे हमरा मृत्युक िात्र लकिु नलह भेटैत िै क। ते ेँ अहाेँ सभ मे सेँ कोन मोन अलि जे हम अहाेँ सभ के​ेँ िोलड दी? 5 ओ सभ लचलचया कऽ कहैत अलि जे, “बरब्बा के​ेँ हमरा सभ के​ेँ िोलड लदअ।” 6 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “तखन हम यीशु के​ेँ की करब, लजनका मसीह कहि जाइत िलन?” 7 ओ सभ उत्तर दे िलथन, “ओकरा िूस िर चढ़ाओि जाय।” 8 ओ सभ फेर लचलचया कऽ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ कैसरक लमत्र नलह िी, जेँ अहाेँ एलह आदमी के​ेँ िोलड दे ब?” लकएक तेँ ओ िरमेश् वरक िुत्र आ राजा िलथ। मुदा की अहाेँक प्रवृलत्त अलि जे ओ राजा होलथ, सीजर नलह? 9 तखन लि​िातुस िोध सेँ भरि हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ सभक जालत सलदखन लवद्रोह करयविा रहि अलि, आ अहाेँ सभ सलदखन ओलह सभक लवरोध मे रहैत िी जे अहाेँ सभक सेवा करयविा अलि?” 10 यहूदी सभ उत्तर दे िलथन, “हमरा सभक सेवा करऽ विा के िलथ?” 11 लि​िातुस हुनका सभ के​ेँ उत्तर दे िलथन, “अहाेँ सभक िरमेश् वर जे अहाेँ सभ के​ेँ लमस्रक कठोर दासता सेँ मुि कयिलन आ िाि सागर के​ेँ शुष्क भूलम जकाेँ िऽ गेिाह आ जंगि मे अहाेँ सभ के​ेँ मन्ना आ बटे रक मांस खुआ दे िलन आ िालन अनिलन।” चट्टान िर सेँ लनकलि कऽ अहाेँ सभ के​ेँ स् वगव सेँ व्यविा दे िलन। 12 अहाेँ सभ ओकरा सभ तरहे ेँ िोलधत केिहुेँ आ अिना िेि एकटा लिघि​ि बिडाक चाहिहुेँ आ ओकर आराधना केिहुेँ आ ओकरा बलि चढ़ा कऽ कहलियैक, “हे इस्राएि, ई सभ तोहर दे वता िलथ, जे तोरा लमस्र दे श सेँ बाहर लनकालि दे िहुेँ।” 13 जालह कारणे ेँ अहाेँ सभक िरमेश् वर अहाेँ सभक नाश करऽ चाहैत ि​िाह। मुदा मूसा अहाेँ सभक िेि लबनती कयिलन आ अहाेँ सभक िरमेश् वर हुनकर बात सुनिलन आ अहाेँ सभक िाि क्षमा कयिलन। 14 तकर बाद अहाेँ सभ िोलधत भऽ गेिहुेँ आ अिन प्रवक् ता मूसा आ हारून के​ेँ मारर दे बऽ चाहैत ि​िहुेँ, जखन ओ सभ तम्बू लदस भालग गेिाह, आ अहाेँ सभ सलदखन िरमेश् वर आ हुनकर प्रवक् ता सभक लवरुद्ध गुनगुनाइत रहिहुेँ। 15 ओ अिन न्यायाधीशक आसन सेँ उलठ कऽ बाहर लनकलि जाइत ि​िाह। मुदा यहूदी सभ लचलचया उठि, “हम सभ सीजर के​ेँ राजा मानैत िी, यीशु के​ेँ नलह।” 16 ई व्यखि जनम होइते ज्ञानी िोकलन आलब हुनका वरदान चढ़ा दे िलथन। जे बात सुलन हेरोदे स बहुत घबरा गेिाह आ ओकरा मारर दे बऽ चाहैत ि​िाह। 17 जखन हुनकर लिता के​ेँ ई बात बुझि ि​िलन तखन ओ हुनका आ अिन माय मररयमक संग लमस्र दे श मे भालग गेिाह। हेरोदे स जखन सुनिलन जे हुनकर जन्म भेिलन तेँ हुनका मारर दे लथन। ओलह तरहे ेँ बेतिेहेम आ ओकर समस्त इिाका मे दू वषव आ ओलह सेँ कम उम्रक सभ बच्चा सभ के​ेँ िठा कऽ मारर दे िक। 18 ई बात सुलन लि​िातुस भयभीत भऽ गेिाह। ओ हल्ला करऽ विा िोक सभ मे चुि रहबाक आज्ञा दै त यीशु के​ेँ कहिलथन, “की अहाेँ राजा िी?” 19 सभ यहूदी लि​िातुस के​ेँ उत्तर दे िलथन, “ओ वैह व्यखि िलथ लजनका हेरोदे स मारय चाहैत ि​िाह।” 20 तखन लि​िातुस िालन िऽ कऽ िोक सभक सामने हाथ धो कऽ कहिलथन, “हम एलह धमी व्यखिक खून सेँ लनदोष िी। अहाेँ सभ एकरा लदस दे खू। 21 यहूदी सभ उत्तर दे िलथन, “हुनकर खून हमरा सभ आ हमरा सभक सन् तान िर रहय।”


22 तखन लि​िातुस यीशु के​ेँ हुनका सोझाेँ अनबाक आज्ञा दे िलथन आ हुनका सेँ ई बात कहिलथन। 23 अहाेँक अिन जालत अहाेँ के​ेँ राजा बनेबाक आज्ञा दे िक। ते ेँ हम, लि​िातुस, अहाेँ के​ेँ िूवव राज्यिािक लनयमक अनुसार कोडा मारबाक सजा दै त िी। आ अहाेँ िलहने बान्हि रहब, तखन ओलह िान िर िूस िर िटका दे ि जायब, जतय अहाेँ एखन कैदी िी। आ तोरा संग दू टा अिराधी सेहो, जकर नाम लडमास आ गेस्तास अलि। अध्याय 7 1 तखन यीशु आ दु नू चोर हुनका संग दिान िर सेँ बाहर लनकि​िाह। 2 जखन ओ सभ गोल्गोथा नामक िान िर िहुेँचिाह तेँ हुनकर किडा उतारर कऽ हुनका सनी के किडा सेँ बान्हिलन आ माथ िर काेँटक मुकुट िगा दे िलन आ हाथ मे खढ़ िगा दे िलन। 3 ओ सभ हुनका संग िूस िर चढ़ाओि गेि दु नू चोर के​ेँ सेहो ओलहना कयिलन, हुनकर दलहना कात दीमास आ बामा कात गेस्तास। 4 यीशु कहिलथन, “हे हमर लिता, हुनका सभ के​ेँ क्षमा करू। लकएक तेँ ओ सभ की करै त िलथ से नलह जनैत िलथ। 5 ओ सभ ओकर वस्त्र बाेँलट कऽ ओकर वस्त्र िर लचट्ठी िगा दे िक। 6 एलह बीच िोक सभ ठाढ़ भऽ गेि, आ यहूदी सभक मुखखया िुरोलहत आ बूढ़िुरान सभ हुनकर उिहास करै त कहिलथन, “ओ दोसरो के​ेँ बचा िेिक, जेँ संभव हो तऽ आब अिना के​ेँ बचाउ। जेँ ओ िरमेश् वरक िुत्र िलथ तेँ आब िूस िर सेँ उतरर जालथ।” 7 लसिाही सभ सेहो ओकर उिहास केिक आ लसरका आ लित्त िऽ कऽ ओकरा िीबाक िेि चढ़ा दे िक आ ओकरा कहिक जे, “अहाेँ यहूदी सभक राजा िी तेँ अिना के​ेँ बचाउ।” 8 तखन िॉखगगनस नामक एकटा लसिाही भािा िऽ कऽ 1 ओकर कात मे िे द केिक आ तुरन्त खून आ िालन लनकलि गेि। 9 लि​िातुस िूस िर शीषवक लहब्रू, िैलटन आ यूनानी अक्षर मे लिखिलन, अथावत्। ई यहूदी सभक राजा िलथ। 10 मुदा यीशुक संग िूस िर चढ़ाओि गेि दू टा चोर मे सेँ एकटा, जकर नाम गेस्तास ि​ि, यीशु के​ेँ कहिकलन, “अहाेँ जेँ मसीह िी तेँ अिना के​ेँ आ हमरा सभ के​ेँ बचाउ।” 11 मुदा जे चोर अिन दलहना कात िूस िर चढ़ाओि गेि ि​ि, जकर नाम लडमास ि​ि, ओकरा उत्तर दै त कहिकलन, “की अहाेँ िरमेश् वर सेँ नलह डे रैत िी, जे एलह सजाय िालब गेि िी?” हमरा िोकलन के​ेँ वास्तव मे अिन काजक दोष सही आ न्यायिूववक भेटैत अलि; मुदा ई यीशु, की अधिाह काज कयिलन? 12 एलह कुहरिाक बाद यीशु यीशु के​ेँ कहिलथन, “प्रभु, जखन अहाेँ अिन राज् य मे आलब जायब तखन हमरा मोन िाडू।” 13 यीशु उत्तर दे िलथन, “हम अहाेँ के​ेँ सत्ते कहैत िी जे आइ अहाेँ हमरा संग जन्नत मे रहब।” अध्याय 8 1 िगभग िठम बजे भऽ गेि आ नवम बजे धरर समस्त िृथ्वी िर अन्हार भऽ गेि। 2 जखन सूयव िहण भेि ि​ि तखन दे खू, मंलदरक िदाव ऊिर सेँ नीचाेँ धरर फालट गेि ि​ि। िाथर सभ फालट गेि आ कब्र सभ खुलज गेि आ सुति िलवत्र िोक सभक बहुत रास िाश उलठ गेि। 3 करीब नौम घंटा मे यीशु जोर-जोर सेँ लचलचया उठिाह, “हेिी, हेिी, िामा जब्तनी?” जकर अथव अलि, “हमर िरमेश् वर, हमर िरमेश् वर, अहाेँ हमरा लकएक िोलड दे िहुेँ ?” 4 एलह बातक बाद यीशु कहिलथन, “लिता, हम अिन आत् मा अहाेँक हाथ मे सौंलि रहि िी। आ ई कलह ओ भूत िोलड दे िलन। 5 मुदा सेनािलत दे खख जे यीशु एलह तरहे ेँ लचलचयाइत आत् मा िोलड दे िलन, तखन ओ िरमेश् वरक मलहमा कयिलन आ कहिलथन, “सत्ते ई धमी िोक ि​िाह।” 6 ओतऽ ठाढ़ सभ िोक सभ ई दे खख बहुत घबरा गेि। आ बीति बात िर लचंतन करै त हुनका िोकलनक िाती िर प्रहार कयिलन आ फेर यरूशिेम नगर मे घुरर गेिाह। 7 सेनािलत राज्यिािक िग जा कऽ जे लकिु गुजरि ि​ि से हुनका कहिलथन। 8 ई सभ बात सुलन कऽ ओ बहुत दु खी भऽ गेिाह। 9 यहूदी सभ के​ेँ बजा कऽ कहिलथन, “की अहाेँ सभ सूयविहणक चमत्कार आ आन घटना सभ दे खिहुेँ जे यीशु मरै त काि भेि ि​ि?” 10 ई बात सुलन यहूदी सभ राज्यिाि के​ेँ उत्तर दे िलथन, “सूयविहण ओकर सामान्य प्रथाक अनुसार भेि।” 11 मुदा मसीह सेँ िररलचत सभ िोक सभ दू र ठाढ़ भऽ गेिाह, जेना गिीि सेँ यीशुक िािाेँ -िािाेँ आएि स् त्रीगण सभ सेहो एलह सभ बात के​ेँ दे खैत रहिाह।

12 दे खू, अररमलथयाक एकटा आदमी यूसुफ नामक ि​ि, जे यीशुक लशष् य ि​ि, मुदा यहूदी सभक भय सेँ खुलि कऽ नलह, राज्यिािक िग आलब राज्यिाि सेँ लवनती कयिक जे ओ ओकरा िोलड दे बाक अनुमलत दऽ लदयौक िूस िर सेँ यीशुक शरीर। 13 राज्यिाि हुनका िु ट्टी दऽ दे िलथन। 14 लनकोदे म िगभग सौ िाउं ड वजन के गंधक आ मुसब्बरक लमश्रण ि’ क’ अयिाह। ओ सभ यीशु के​ेँ िूस िर सेँ नोर सेँ उतारर कऽ यहूदी सभक बीच गाडबाक प्रथाक अनुसार मसािा सेँ लिनन किडा सेँ बाखन्ह दे िलथन। 15 ओ ओकरा एकटा नव कब्र मे राखख दे िलथन, जे यूसुफ बनौने ि​िाह आ एकटा चट्टान सेँ कालट कऽ कालट दे ने ि​िाह, जालह मे कलहयो ककरो नलह राखि गेि ि​ि। ओ सभ कबरक दरबज्जा िर एकटा िैघ िाथर गुडका दे िक। अध्याय 9 1 जखन अधमी यहूदी सभ सुनिक जे यूसुफ यीशुक शव के​ेँ भीख मांलग कऽ गालड दे िक, तखन ओ सभ लनकोदे मुस के​ेँ खोलज िेिक। आ ओ िन्द्रह आदमी जे राज्यिािक समक्ष गवाही दे ने ि​ि जे यीशु व्यलभचारक कारणे ेँ नलह भेि िलथ, आ आन नीक िोक जे हुनका प्रलत कोनो नीक काज केने ि​िाह। 2 मुदा जखन सभ यहूदी सभक भय सेँ नुका गेिाह तखन लनकोदे म असगरे हुनका सभ के​ेँ दे खा कऽ कहिलथन, “एलह तरहक िोक सभाघर मे कोना प्रवेश कऽ सकैत अलि?” 3 यहूदी सभ हुनका उत्तर दे िलथन, “मुदा अहाेँ मसीहक संग लमलिकय सभाघर मे प्रवेश करबाक िेि कोना लहम्मत केिहुेँ ?” िरिोक मे तोहर भाग्य ओकरा संग रहय। 4 लनकोदे मुस उत्तर दे िलथन, “आमेन; एहने होउ जे हम हुनका संग हुनकर राज्य मे अिन भाग्य िालब सकब।” 5 तलहना यूसुफ यहूदी सभ िग आलब हुनका सभ के​ेँ िुि​िलथन जे अहाेँ सभ हमरा िर लकएक िोलधत िी जे हम लि​िातुसक यीशुक िाशक चाहिहुेँ? दे खू, हम ओकरा अिन कब्र मे राखख दे लियैक आ शुद्ध लिनेन मे ि​िेलट कऽ कब्रक दरबज्जा िर िाथर राखख दे लियैक। 6 हम हुनका प्रलत उलचत व्यवहार केिहुेँ। मुदा अहाेँ सभ ओलह धमी व्यखि के​ेँ िूस िर चढ़ा कऽ, ओकरा िीबाक िेि लसरका दऽ कऽ, काेँटक मुकुट िलहरा कऽ, ओकर दे ह के​ेँ कोडा सेँ फालड कऽ, आ ओकर खूनक अिराध के​ेँ अहाेँ सभ िर प्राथवना कयिहुेँ। 7 ई बात सुलन यहूदी सभ घबरा गेि आ घबरा गेि। ओ सभ यूसुफ के​ेँ िकलड िेिक आ लवश्राम-लदन सेँ िलहने हुनका बंदी मे राखबाक आज्ञा दे िक। 8 ओ सभ हुनका कहिलथन, “स्वीकार करू। लकएक तेँ एलह समय मे सप्ताहक िलहि लदन धरर अहाेँक कोनो अधिाह करब उलचत नलह अलि। मुदा हम सभ जनैत िी जे अहाेँ के​ेँ दफन करबाक योग्य नलह मानि जायत। मुदा हम सभ अहाेँक मांस हवाक लचडै सभ आ िृथ् वीक जानवर सभ के​ेँ दऽ दे ब।” 9 यूसुफ उत्तर दे िलथन, “ओ बात घमंडी गोलियतक बात जकाेँ अलि, जे दाऊदक लवरोध मे जीलवत िरमेश् वर के​ेँ लनन्दा कयिलन। मुदा अहाेँ सभ शास्त्री आ वैद्य सभ जनैत िी जे िरमेश् वर भलवष्यविा द्वारा कहैत िलथ, “प्रलतशोध हमर अलि, आ हम अहाेँ सभ के​ेँ ओलह 1 दु ष् टताक बदिा दे ब जे अहाेँ सभ हमरा धमकी दे िहुेँ।” 10 जालह िरमेश् वर के​ेँ अहाेँ िूस िर िटकौने िी, ओ हमरा अहाेँक हाथ सेँ बचाबऽ मे सक्षम िलथ। अहाेँक सभटा दु ष्टता अहाेँ िर घुरर जायत। 11 राज्यिाि हाथ धोबैत कहिलथन, “हम एलह न्यायी व्यखिक खून सेँ साफ िी।” मुदा अहाेँ सभ उत्तर दे लियैक आ लचलचया उठिहुेँ , “हुनकर खून हमरा सभ आ हमरा सभक सन्तान िर रहय।” जेना अहाेँ सभ कहिहुेँ , अहाेँ सभ अनन्त काि धरर नाश भऽ जाउ। 12 यहूदी सभक बूढ़-िुरान सभ ई बात सुलन कऽ बहुत िोलधत भऽ गेिाह। यूसुफ के​ेँ िकलड कऽ ओ सभ ओकरा ओलह कोठिी मे राखख दे िक जतय खखडकी नलह ि​िैक। ओ सभ दरबज्जा बाखन्ह कऽ तािा िर मोहर िगा दे िक। 13 हन्ना आ काइफा ओलह िर िहरे दार रखिलन आ िुरोलहत आ िेवी सभक संग लवचार कयिलन जे लवश्राम-लदनक बाद सभ गोटे भेंट करलथ आ ओ सभ योजना बना िेिलन जे यूसुफ के​ेँ कोन तरहे ेँ मारि जाय। 14 ओ सभ ई काज कऽ कऽ हन्ना आ काइफाक शासक यूसुफ के​ेँ बाहर अनबाक आदे श दे िलथन। अध्याय 10 1 ई बात सुलन सभ सभा िोक सभ प्रशंलसत भेि आ आियवचलकत भऽ गेि, लकएक तेँ ओकरा सभ के​ेँ कोठिीक तािा िर वैह मोहर भेटिैक आ यूसुफ नलह भेटिैक। 2 तखन हन्ना आ काइफा लवदा भेिाह आ जखन सभ यूसुफक गेिा िर प्रशंसा कऽ रहि ि​िाह तखन यीशुक कब्र रखलनहार एकटा लसिाही सभा मे बालज रहि ि​ि।


3 ओ सभ यीशुक कब्र िर िहरा दै त काि भूकम्प आलब गेि। हम सभ दे खिहुेँ जे िरमेश् वरक एकटा स् वगवदूत कब्रक िाथर के​ेँ गुडका कऽ ओलह िर बैसि ि​ि। 4 हुनकर चेहरा लबजिी जकाेँ आ वस्त्र बफव जकाेँ ि​िलन। आ हम सभ भय सेँ मृत व्यखि जकाेँ बलन गेिहुेँ। 5 हम सभ यीशुक कब्र िर एकटा स् वगवदूत के​ेँ स् त्रीगण सभ के​ेँ कहैत सुनिहुेँ, “डरब नलह। हम जनैत िी जे अहाेँ यीशु के​ेँ तालक रहि िी जे िूस िर चढ़ि गेि ि​िाह; जेना ओ भलवष्यवाणी केने ि​िाह तेना जीलब गेि िलथ। 6 जाउ, आ ओलह ठाम दे खू, जतय हुनका राखि गेि ि​िलन। ओ तुरन्त जाउ, आ हुनकर लशष् य सभ के​ेँ कलह लदअ जे ओ मृत् यु मे सेँ जीलब उठि िलथ आ अहाेँ सभ सेँ िलहने गिीि जाइत िलथ। ओतय अहाेँ सभ हुनका ओलहना दे खब जेना ओ अहाेँ सभ के​ेँ कहने ि​िाह। 7 तखन यहूदी सभ यीशुक कब्र िर नजरर रखलनहार सभ लसिाही सभ के​ेँ बजा कऽ िुि​िलथन, “ओ स् त्री सभ के िलथ, लजनका सभ सेँ स् वगवदूत गप्प कयिलन?” अहाेँ सभ लकएक नलह िकडिहुेँ? 8 लसिाही सभ उत्तर दे िलथन, “हमरा सभ के​ेँ नलह बुझि अलि जे ओ स् त्री सभ के ि​िीह। एकर अलतररि हम सभ भय सेँ मृत व्यखि जकाेँ बलन गेिहुेँ आ ओलह स्त्रीगण के​ेँ कोना िकलड सलकतहुेँ? 9 यहूदी सभ हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “जलहना प्रभु जीबैत िलथ, हम सभ अहाेँ सभ िर लवश् वास नलह करै त िी।” 10 लसिाही सभ यहूदी सभ के​ेँ कहिलथन, “जखन अहाेँ सभ यीशु के​ेँ एतेक चमत्कार करै त दे खिहुेँ आ सुनिहुेँ आ हुनका िर लवश् वास नलह कयिहुेँ, तखन अहाेँ सभ हमरा सभ िर कोना लवश् वास करब? अहाेँ सभ नीक जकाेँ कहिहुेँ, “जेना प्रभु जीबैत िलथ, लकएक तेँ प्रभु सत्ते जीबैत िलथ।” 11 हम सभ सुनने िी जे अहाेँ सभ यूसुफ के​ेँ, जे यीशुक शव के​ेँ गालड दे ने ि​िाह, एकटा कोठिी मे एकटा तािा मे बंद कऽ दे िहुेँ, जकरा िर मोहर िगाओि गेि ि​ि। जखन अहाेँ सभ ओकरा खोि​िहुेँ तेँ ओतऽ हुनका नलह भेटिलन। 12 तखन की अहाेँ सभ यूसुफ के​ेँ िैदा करू, जकरा अहाेँ सभ कोठिी मे िहरा दै त ि​िहुेँ , आ हम सभ यीशु के​ेँ िैदा करब, जकर हम सभ कब्र मे िहरा दै त ि​िहुेँ। 13 यहूदी सभ उत्तर दे िलथन, “हम सभ यूसुफ के​ेँ िैदा करब, की अहाेँ सभ यीशु के​ेँ िैदा करब।” मुदा यूसुफ अिन नगर अररमलथया मे िलथ। 14 लसिाही सभ उत्तर दे िलथन, “जेँ यूसुफ अररमलथया मे िलथ आ यीशु गिीि मे िलथ तेँ हम सभ स् वगवदूत के​ेँ स् त्रीगण सभ के​ेँ सूलचत करै त सुनिहुेँ।” 15 ई बात सुलन यहूदी सभ भयभीत भऽ कऽ आिस मे बजिाह, “जेँ ई सभ बात साववजलनक भऽ जाय तेँ सभ शरीर यीशु िर लवश् वास करत।” 16 तखन ओ सभ बहुत रास िाइ जमा कऽ लसिाही सभ के​ेँ दऽ कऽ कहिक, “की अहाेँ सभ िोक सभ के​ेँ ई कहैत िी जे यीशुक लशष् य सभ ओलह रालत मे आलब गेिाह जखन अहाेँ सभ सुति रही आ यीशुक िाश चोरा िेिक। जेँ राज्यिाि लि​िातुस ई बात सुलन िेताह तेँ हम सभ हुनका संतुष्ट कऽ अहाेँ सभ के​ेँ सुरलक्षत कऽ दे बलन। 17 ओलहना लसिाही सभ िाइ िऽ कऽ यहूदी सभक लनदे शक अनुसार बाजि। आ हुनका िोकलनक ररिोटव िोक मे िसरि गेि। 18 एकटा िुरोलहत लफनेस, अदा स्कूिक मास्टर आ िेवी नामक अगेउस, ओ तीनू गिीि सेँ यरूशिेम आलब मुख्यिुरोलहत आ सभाघर मे रहलनहार सभ के​ेँ कहिलथन। 19 हम सभ यीशु के​ेँ दे खिहुेँ , लजनका अहाेँ सभ िूस िर चढ़ा दे िहुेँ , ओ अिन एगारहटा लशष् य सभक संग गप्प करै त आ जैतूनक िहाड िर हुनका सभक बीच मे बैलस कऽ हुनका सभ के​ेँ कहैत िलथ 20 िूरा संसार मे जाउ, सभ जालत के​ेँ सुसमाचार प्रचार करू, ओकरा सभ के​ेँ लिता, िुत्र आ िलवत्र आत् माक नाम सेँ बिलतस् मा दऽ लदयौक। जे केओ लवश् वास करत आ बिलतस् मा िेत, से उद्धार िाओत।” 21 यीशु अिन लशष् य सभ के​ेँ ई बात कलह कऽ हम सभ हुनका स् वगव मे चढ़ै त दे खिहुेँ। 22 जखन मुख्य िुरोलहत आ बूढ़-िुरान आ िेवी ई सभ बात सुलन कऽ एलह तीनू आदमी के​ेँ कहिलथन, “इस्राएिक िरमेश् वरक मलहमा करू आ हुनका स् वीकार करू जे अहाेँ सभ जे बात अहाेँ सभ दे खिहुेँ आ सुनिहुेँ से सत् य अलि की नलह।” . 23 ओ सभ उत्तर दे िलथन, “जलहना हमरा सभक िूववज सभक प्रभु जीलवत िलथ, अब्राहमक िरमेश् वर, इसहाकक िरमेश् वर आ याकूबक िरमेश् वर, जेना यीशु के​ेँ हुनकर लशष् य सभक संग गप्प करै त सुनिहुेँ आ स् वगव मे चढ़ै त दे खिहुेँ।” , ते ेँ हम सभ सत्य अहाेँ सभसेँ सुना दे ने िी। 24 ओ तीनू आदमी उत्तर दे िलथन आ ई बात जोलड कऽ कहिलथन, “जेँ हम सभ यीशु के​ेँ जे बात सुनिहुेँ आ हुनका स् वगव मे चढ़ै त दे खिहुेँ, से हमरा सभक मालिक नलह रलहतहुेँ तेँ हम सभ िािक दोषी भऽ जायब।” 25 तखन मुख्य ‍ िुरोलहत सभ तुरन्त उलठ कऽ धमव-लनयमक िुस्तक हाथ मे िऽ कऽ एलह िोक सभ के​ेँ जादू -टोना कयिलन जे, “आब अहाेँ सभ यीशुक लवषय मे जे बात कहिहुेँ से आब नलह कहब।”

26 ओ सभ ओकरा सभ के​ेँ बहुत रास िाइ दे िक आ ओकरा सभक संग आन िोक सभ के​ेँ िठा दे िक जे ओकरा सभ के​ेँ अिन दे श मे िऽ जाय, जालह सेँ ओ सभ यरूशिेम मे कोनो तरहे ेँ नलह रलह सकय। 27 तखन यहूदी सभ सभ एक ठाम जमा भऽ कऽ सभ सेँ दु खद लचन्ता व्यि कऽ कऽ कहिलथन, “यरूशिेम मे ई की असाधारण घटना घटि अलि?” 28 मुदा हन्ना आ काइफा हुनका सभ के​ेँ सागवना दै त कहिलथन, “हमरा सभ के​ेँ यीशुक कब्र िर िहरा दे लनहार लसिाही सभ िर लवश्वास लकएक करब जे एकटा स् वगवदूत कब्रक दरबज्जा सेँ िाथर गुडका दे िक?” 29 शायद हुनकर अिन लशष् य सभ हुनका सभ के​ेँ ई बात कलह कऽ हुनका सभ के​ेँ िाइ दऽ कऽ हुनका सभ के​ेँ ई बात कहबाक िेि िाइ दऽ दे िलथन। 30 एकर अलतररि एलह बात िर लवचार करू जे िरदे शी सभ के​ेँ कोनो श्रेय नलह दे ि जा सकैत अलि, लकएक तेँ ओ सभ हमरा सभ सेँ बहुत रास रकम िऽ िेिक आ हमरा सभ के​ेँ जे लनदे श दे लियैक, तालह अनुसारे ेँ ओ सभ हमरा सभ के​ेँ घोषणा कयिक। हुनका सभ के​ेँ या तऽ हमरा सभक प्रलत वफादार रहबाक चाही, वा यीशुक लशष् य सभक प्रलत। अध्याय 11 1 तखन लनकोदे म उलठ कऽ कहिलथन, “हे इस्राएिक सन्तान सभ, अहाेँ सभ ठीके कहैत िी, अहाेँ सभ सुनिहुेँ जे ओ तीनू आदमी िरमेश् वरक व्यविाक शिथ िेिलन जे कहने ि​ि जे, “हम सभ यीशु के​ेँ जैतूनक िहाड िर अिन लशष् य सभक संग गप्प करै त दे खिहुेँ आ दे खिहुेँ।” ओकरा स्वगव मे चढ़ै त। 2 धमवशास् त्र हमरा सभ के​ेँ लसखाबैत अलि जे धन्य प्रवक् ता एलियाह के​ेँ स् वगव मे चढ़ाओि गेिलन। प्रवक् ता सभक िुत्र सभ एिीशा सेँ िुि​िलथन, “हमर सभक लिता एलियाह कतय िलथ?” ओ हुनका सभ के​ेँ कहिलथन जे, हुनका स् वगव मे चढ़ाओि गेि अलि। 3 िरमेश् वरक प्रवक् ता सभक िुत्र सभ हुनका कहिलथन, “शायद आत् मा हुनका इस्राएिक कोनो िहाड मे िऽ गेि अलि, आ ओतऽ हमरा सभ हुनका िालब सकब।” ओ सभ एिीशा सेँ लवनती कयिक आ ओ तीन लदन धरर हुनका सभक संग घुमैत रहिाह, मुदा ओ सभ हुनका नलह िालब सकिाह। 4 हे इस्राएिक सन्तान सभ, आब हमर बात सुनू, आ हम सभ इस्राएिक िहाड सभ मे िोक सभ के​ेँ िठाबी, जालह सेँ कहीं आत् मा यीशु के​ेँ िऽ कऽ नलह गेि अलि आ ओतलह हम सभ हुनका िालब कऽ तृप्त भऽ जायब। 5 लनकोदे मसक सिाह सभ िोक के​ेँ नीक िागि। ओ सभ एहन िोक सभ के​ेँ िठा दे िक जे यीशु के​ेँ तकैत ि​ि, मुदा हुनका नलह भेलट सकिलन। 6 ई बात सुलन कऽ शासक सभ आ सभ िोक प्रसन्न भऽ गेिाह आ इस्राएिक िरमेश् वरक स्तुलत कयिलन, लकएक तेँ यूसुफ भेटिाह, जकरा ओ सभ एकटा कोठिी मे राखख कऽ राखख कऽ नलह िालब सकिाह। 7 जखन ओ सभ एकटा िैघ सभा बना कऽ मुख्य ‍ िुरोलहत सभ िुि​िलथन, “हमरा सभ यूसुफ के​ेँ कोन तरहे ेँ हुनका सेँ गप्प करबाक िेि अिना सभ िग आलन सकब?” 8 ओ सभ एकटा कागज िऽ कऽ हुनका लिखख कऽ कहिलथन, “अहाेँ आ अहाेँक समस्त िररवारक संग शाखन्त हो।” हम सभ जनैत िी जे हम सभ िरमेश् वर आ अहाेँक लवरुद्ध आिलत्त कयिहुेँ। हमरा सभ अिन लिता-लिताक भेंट करबा मे प्रसन्न भ' जाउ, कारण जेि सेँ अहाेँक भागिा िर हम सभ एकदम आियवचलकत ि​िहुेँ । 9 हम सभ जनैत िी जे ई दु भाववनािूणव योजना ि​ि जे हम सभ अहाेँक लवरुद्ध कयि गेिहुेँ आ प्रभु अहाेँक ख्याि रखिलन आ प्रभु अहाेँ के​ेँ हमरा सभक योजना सेँ मुि कयिलन। हे यूसुफ, जे सभ िोकक बीच आदरणीय िी, अहाेँ के​ेँ शाखन्त हो। 10 ओ सभ यूसुफक सातटा लमत्र के​ेँ चुलन कऽ हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “जखन अहाेँ सभ यूसुफ िग िहुेँचब तेँ हुनका शाखन्तिूववक प्रणाम करू आ हुनका ई ित्र दऽ लदयौक।” 11 ओ सभ जखन यूसुफ िग अयिाह तेँ ओ सभ शाखन्तिूववक हुनका प्रणाम कयिलन आ ित्र हुनका दऽ दे िलन। 12 यूसुफ ई बात िलढ़ कऽ कहिलथन, “प्रभु िरमेश् वरक धन्य होउ जे हमरा इस्राएिी सभ सेँ मुि कयिलन जे ओ सभ हमर खून नलह बहा सकिाह।” धन्य भगवान्, जे हमरा अहाेँक िाेँखखक नीचाेँ रक्षा केने िलथ। 13 यूसुफ ओकरा सभ के​ेँ चुम्मा िेिक आ ओकरा सभ के​ेँ अिन घर मे िऽ गेि। दोसर लदन यूसुफ अिन गदहा िर चलढ़ कऽ हुनका सभक संग यरूशिेम चलि गेिाह। 14 सभ यहूदी सभ ई बात सुलन हुनका सेँ भेंट करबाक िेि लनकलि गेिाह आ लचलचया उठिलन, “हे लिता यूसुफ, अहाेँ के​ेँ एतय अयबा मे शाखन्त राखू।” 15 ओ उत्तर दे िलथन, “प्रभु द्वारा सम्पन्नता सभ िोक के​ेँ भेटय।” 16 ओ सभ हुनका चुम्मा िेिक। आ लनकोदे मुस हुनका अिन घर िऽ गेिाह, जे एकटा िैघ मनोरं जनक व्यविा कएने ि​िाह।


17 मुदा दोसर लदन तैयारीक लदन मे हन्ना, काइफा आ लनकोदे म यूसुफ के​ेँ कहिलथन, “इस्राएिक िरमेश् वरक समक्ष स्वीकार करू आ हमरा सभ सेँ ओलह सभ प्रश्नक उत्तर लदअ जे हम सभ अहाेँ सेँ िूिब। 18 हम सभ बहुत घबरा गेि िी जे अहाेँ यीशुक शव के​ेँ गालड दे िहुेँ। आ से' जखन हम सभ अहाेँ के​ेँ कोठिी मे बंद क' िेने रही तखन अहाेँ के​ेँ नलह िालब सकिहुेँ। तलहया सेँ अहाेँ सभ हमरा सभक बीच प्रकट होयबाक समय धरर हम सभ डरा गेि िी। ते ेँ िरमेश् वरक समक्ष हमरा सभ के​ेँ कहू जे सभ लकिु भेि। 19 तखन यूसुफ उत्तर दे िलथन, “अहाेँ सभ हमरा तैयारीक लदन भोर धरर कैद मे राखख दे िहुेँ।” 20 जखन हम आधा रालत मे प्राथवना मे ठाढ़ ि​िहुेँ तखन घर चाररटा स् वगवदूत सेँ घेरि ि​ि। हम यीशु के​ेँ सूयवक चमक जकाेँ दे खिहुेँ आ डर सेँ िृथ्वी िर खलस िडिहुेँ। 21 मुदा यीशु हमर हाथ िकलड कऽ हमरा जमीन िर सेँ उठौिलन, तखन ओस हमरा िर लिडलक गेि। मुदा ओ हमर मुेँह िोलि कऽ हमरा चुम्मा िेिक आ कहिक जे, “यूसुफ, नलह डे राउ। हमरा दे खू, लकएक तेँ ई हम िी। 22 तखन हम हुनका लदस तकिहुेँ आ कहलियलन, “रब्बोनी एलियाह!” ओ हमरा उत्तर दे िलथन, “हम एलियाह नलह, बि् लक नासरतक यीशु िी, लजनकर िाश अहाेँ गालड दे िहुेँ।” 23 हम हुनका कहलियलन, “हमरा ओ कब्र दे खाउ जालह मे हम अहाेँ के​ेँ राखने रही।” 24 तखन यीशु हमरा हाथ िकलड कऽ हमरा ओलह ठाम िऽ गेिाह जतय हम हुनका सुता दे ने ि​िहुेँ आ हमरा ओलह लिनेन किडा आ ि​िकी दे खौिलन जे हम हुनकर माथ िर िगा दे ने ि​िहुेँ। तखन हम बुलझ गेिहुेँ जे ई यीशु िलथ, आ हुनकर आराधना कऽ कऽ कहलियलन, “जे प्रभुक नाम सेँ अबैत िलथ, से धन्य हो।” 25 यीशु फेर हमरा हाथ िकलड हमरा अररमलथया अिन घर लदस ि’ गेिाह आ हमरा कहिलथन, “अहाेँ के​ेँ शाखन्त हो। मुदा चािीसम लदन धरर अिन घर सेँ बाहर नलह लनकिू। मुदा हमरा अिन लशष् य सभक िग जाय िडत। अध्याय 12 1 जखन मुख्य िुरोलहत सभ ई सभ बात सुलन कऽ चलकत भऽ गेिाह आ मृत् यु जकाेँ जमीन िर मुेँह कऽ कऽ खलस िडिाह आ एक-दोसर के​ेँ लचलचया उठिलन, “यरूशिेम मे ई की असाधारण लचन् ह?” हम यीशुक लिता आ माता के​ेँ जनैत िी। 2 एकटा िेवी कहिलथन, “हम हुनकर बहुतो सम्बंधी सभ के​ेँ जनैत िी, जे धालमवक िोक सभ के​ेँ मन् लदर मे इस्राएिक िरमेश् वर के​ेँ बलिदान आ होमबलि चढ़बैत िलथ।” 3 जखन महािुरोलहत लशमोन हुनका कोरा मे ि’ िेिलन। ओ हुनका कहिलथन, “प्रभु, आब अहाेँ अिन सेवक के​ेँ अिन वचनक अनुसार शाखन्तिूववक लवदा होमय लदयौक। कारण, हमर आेँ खख अहाेँक उद्धार के​ेँ दे खिहुेँ, जे अहाेँ सभ िोकक सोझाेँ तैयार केने िी। 4 लशमोन सेहो यीशुक माय मररयम के​ेँ आशीष दै त कहिलथन, “हम अहाेँ के​ेँ ओलह बच्चाक लवषय मे कहैत िी। ओ बहुतो िोकक ितन आ जीलब उठबाक िेि आ एकटा एहन संकेतक िेि लनयुि कयि गेि िलथ जकर लवरोध मे कहि जायत। 5 हेँ, तिवार तोहर अिन प्राण मे सेहो िे दत आ बहुतो हृदयक लवचार प्रकट होयत। 6 तखन सभ यहूदी सभ कहिलथन, “आउ, ओलह तीनू आदमी के​ेँ िठाबी जे ओ सभ हुनका जैतूनक िहाड िर अिन लशष् य सभक संग गप्प करै त दे खिलन।” 7 एकर बाद ओ सभ हुनका सभ सेँ िुि​िलथन जे अहाेँ सभ की दे खिहुेँ। ओ एक मन सेँ उत्तर दे िलथन, “इस्राएिक िरमेश् वरक सालन्नध मे हम सभ ई िुलष्ट करै त िी जे हम सभ यीशु के​ेँ जैतूनक िहाड िर अिन लशष् य सभक संग गप्प करै त स् वगव मे चढ़ै त दे खिहुेँ।” 8 तखन हन्ना आ काइफा हुनका सभ के​ेँ अिग-अिग जगह िर िऽ गेिाह आ अिग-अिग जाेँच कयिलन। ओ सभ सववसम्मलत सेँ सत् य के​ेँ स्वीकार कयिलन आ कहिलन जे, “ओ सभ यीशु के​ेँ दे खिलन।” 9 तखन हन्ना आ काइफा कहिलथन, “हमर सभक व्यविा मे कहि गेि अलि जे, दू -तीन गवाहक मुेँह सेँ सभ बात लसद्ध होयत।” 10 मुदा हम सभ की कहिहुेँ? धन्य हनोक िरमेश् वर के​ेँ प्रसन्न कयिलन, आ िरमेश् वरक वचन द्वारा अनुवाद कयि गेिलन। आ धन्य मूसाक दफन-िान ज्ञात अलि। 11 मुदा यीशु के​ेँ लि​िातुस के​ेँ कोडा मारि गेिलन, काेँटक मुकुट िलहराओि गेिलन, थूक दे ि गेिलन, भािा सेँ िे दि गेिाह, िूस िर चढ़ाओि गेिाह, िूस िर मरर गेिाह आ गाडि गेिाह, आ हुनकर शव आदरणीय यूसुफ के​ेँ नव कब्र मे गाडि गेिलन, आ ओ गवाही दै त िलथ जे ओ ओकरा जीबैत दे खिक। 12 एलह िरमेश् वर सभ यीशु के​ेँ जैतूनक िहाड िर अिन लशष् य सभक संग गप्प करै त आ स् वगव मे चढ़ै त दे खिलन।

13 तखन यूसुफ उलठ गेिाह। हन्ना आ काइफा के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ सभ के​ेँ ई बात कहि गेि अलि जे यीशु जीलवत िलथ आ स् वगव मे चलि गेिाह, अहाेँ सभ के​ेँ ई बात बहुत आियवचलकत भऽ सकैत अलि।” 14 सच मे ई आियवक बात अलि जे ओ मात्र मृत् यु मे सेँ जीलब िेताह, बि् लक आन िोक सभ के​ेँ सेहो हुनकर कब्र सेँ जीलब िेताह, जे यरूशिेम मे बहुतो िोक सभ दे खने िलथ। 15 आब हमरा कनेक सुनू, हम सभ धन्य लशमोन, महािुरोलहत के​ेँ लचन्हैत ि​िहुेँ, जे यीशु के​ेँ लशशु अविा मे मखन्दर मे कोरा मे ि’ िेिलन। 16 एलह लसमोन के​ेँ अिन दू टा िुत्र ि​िलन, आ हम सभ हुनका सभक मृत्यु आ अंलतम संस्कार मे उिखित ि​िहुेँ। 17 ते ेँ जाउ, हुनका सभक कब्र दे खू, लकएक तेँ ई सभ खुजि अलि आ ओ सभ जीलब गेि अलि। 18 लकिु गोटे प्राथवना मे हुनका िोकलनक आवाजक आवाज सुनने िलथ, मुदा ओ सभ ककरो सेँ गप्प नलह करताह, बि् लक ओ सभ मृत् यु जकाेँ गूंगा रहैत िलथ। 19 मुदा आउ, हम सभ हुनका सभ िग जाइ आ हुनका सभक प्रलत उलचत आदर आ सावधानीिूववक व्यवहार करी। आ जेँ हम सभ हुनका सभ के​ेँ शिथ िेबय िेि आलन सकब तेँ शायद ओ सभ अिन िुनरुत्थानक लकिु रहस्य बताओत। 20 ई बात सुलन यहूदी सभ बहुत हलषवत भऽ गेिाह। 21 तखन हन्ना आ काइफा, लनकोदे म, यूसुफ आ गमालिएि अररमलथया गेिाह, मुदा हुनका सभ के​ेँ अिन कब्र मे नलह भेटिलन। मुदा नगर मे घुमैत-लफरै त ओ सभ हुनका सभ के​ेँ अिन भखि िर ठे हुन झुलक कऽ बाखन्ह दे िलन। 22 ओ सभ हुनका सभ के​ेँ िरमेश् वरक आदर आ आदरिूववक प्रणाम करै त यरूशिेम मे सभाघर मे िऽ गेिाह। 23 ओकरा सभ के​ेँ हाथ मे दऽ कऽ ओ सभ अदोन िरमेश् वर आ इस्राएिक िरमेश् वरक नाम सेँ शिथ िेिलन, जे हमरा सभक िूववज सभ के​ेँ धमव-लनयम आ प्रवक् ता सभक द्वारा कहिलथन, “जेँ अहाेँ सभ ओलह िर लवश् वास करै त िी जे अहाेँ सभ के​ेँ मृत् यु मे सेँ लजया केने िलथ आ यीशु िलथ, तेँ कहू।” अहाेँ सभ की दे खिहुेँ आ कोना अहाेँ सभ मृत् यु मे सेँ जीलब उठिहुेँ।” 24 लशमोनक दु नू िुत्र चाररनस आ िेखियस ई बात सुलन काेँलि उठिाह। आ संगलह स्वगव लदस तकैत ओ सभ जीभ िर आेँ गुर राखख िूसक लनशानी बनौिलन। 25 ओ सभ तुरत बाजि, “हमरा सभ मे सेँ एक-एक गोटे के​ेँ लकिु कागज दऽ लदअ, आ हम सभ जे लकिु दे खिहुेँ से अहाेँ सभक िेि लिखख दे ब।” ओ सभ एक-एकटा बैलस कऽ लिखख कऽ लिखिलन। अध्याय 13 1 हे प्रभु यीशु आ लिता, जे िरमेश् वर िी, मृत् युक िुनरुत्थान आ जीवन सेहो, हमरा सभ के​ेँ अिन रहस्य सभक प्रचार करबाक अनुमलत लदअ, जे हम सभ मरिाक बाद दे खिहुेँ, जे अहाेँक िूसक अलि। लकएक तेँ हम सभ अहाेँक नामक शिथ िेने िी। 2 अहाेँ अिन सेवक सभ के​ेँ ओलह गुप्त बात सभक प्रचार करबा सेँ मना कऽ दे िहुेँ जे अहाेँक ईश्वरीय सामर्थ्व द्वारा नरक मे कयि गेि ि​ि। 3 जखन हमरा सभ के​ेँ अिन िूववज सभक संग नरकक गहींर मे, अन्हारक कारी मे राखि गेि, तखन अचानक सूयवक रं ग सोनाक रं गक रूि मे आलब गेि आ एकटा ियावप्त बैंगनी रं गक इजोत ओलह िान के​ेँ रोशन केिक। 4 एलह बात िर सभ मनुष् यक लिता आदम सभ कुि-लिता आ भलवष्यविा सभक संग हलषवत भऽ कहिलथन, “ओ इजोत अनन्त इजोतक रचलयता अलि, जे हमरा सभ के​ेँ अनन्त इजोत मे उतारबाक वचन दे ने िलथ।” 5 तखन यशायाह प्रवक् ता लचलचया कऽ कहिलथन, “हम जखन िृथ् वी िर जीलवत रही तखन हमर भलवष्यवाणीक अनुसार लिता आ िरमेश् वरक िुत्रक इजोत अलि।” 6 जबूिोन दे श आ यरदनक ओलह िारक नेफ्तिीम दे श, जे अन्हार मे चिैत ि​ि, एकटा िैघ इजोत दे खिक। आ मृत्युक िायाक क्षेत्र मे रहलनहार िेि इजोत उठि अलि। आब ओ आलब गेिाह, आ हमरा सभ के​ेँ जे मृत्यु मे बैसि ि​ि, ओकरा प्रबुद्ध क’ दे िलन। 7 जखन हम सभ अिना सभ िर चमकि इजोत मे आनखन्दत ि​िहुेँ तखन हमरा सभक लिता लशमोन हमरा सभक बीच आलब सभ संगलत के​ेँ बधाई दै त कहिलथन, “िरमेश् वरक िुत्र प्रभु यीशु मसीहक मलहमा करू।” 8 हम हुनका कोरा मे उठौने रही जखन मखन्दर मे एकटा लशशु ि​ि आ िलवत्र आत् मा सेँ प्रेररत भऽ हुनका कहलियलन आ स्वीकार कयिलन जे, 1 आब हमर आेँ खख अहाेँक उद्धार के​ेँ दे खख िेिक, जे अहाेँ सभ िोकक सोझाेँ तैयार केने िी , गैर-यहूदी सभ आ तोहर िोक इस्राएिक मलहमा के​ेँ प्रबुद्ध करबाक िेि एकटा इजोत। 9 नरकक गहींर मे रहलनहार सभ िलवत्र िोक सभ ई बात सुलन कऽ आर आनखन्दत भऽ गेिाह। 10 तकर बाद एकटा िोट सनन्यासी जकाेँ लनकि​ि आ सभ िुि​िक जे, “अहाेँ के िी?”


11 ओ उत्तर दे िलथन, “हम जंगि मे लचलचया रहि िी, यूहन् ना बिलतस् मा दे लनहार आ िरमेश् वरक प्रवक् ता, जे हुनकर आगमन सेँ िलहने अिन बाट तैयार करबाक िेि गेि ि​िाह आ अिन िोक के​ेँ उद्धारक ज्ञान दे बाक िेि िािक क्षमा। 12 हम यूहन् ना, जखन हम यीशु के​ेँ िलवत्र आत् मा सेँ प्रेररत भऽ हमरा िग अबैत दे खिहुेँ तेँ हम कहलियलन, “दे खू, िरमेश् वरक मेमना, दे खू ओ जे संसारक िाि सभ के​ेँ दू र करै त िलथ।” 13 हम हुनका यरदन नदी मे बिलतस् मा दे लियलन आ िलवत्र आत् मा कबूतरक रूि मे हुनका िर उतरै त दे खिहुेँ आ स् वगव सेँ एकटा आवाज सुनिहुेँ जे, “ई हमर लप्रय िुत्र िलथ, लजनका िर हम प्रसन्न िी।” 14 आब जखन हम हुनका सेँ िलहने जा रहि ि​िहुेँ तखन अहाेँ सभ के​ेँ ई िररचय कराबय िेि एतय उतरिहुेँ जे िरमेश् वरक िुत्र अलगिा बेर हमरा सभ िग आलब जेताह आ ऊिर सेँ लदन-वसंत जकाेँ हमरा सभ िग आलब जेताह, जे अन् हार मे िी आ... मृत्यु के िाया। अध्याय 14 1 हमर सभक लिता आदम जखन ई बात सुनिलन जे यीशु यरदन मे बिलतस् मा िेने िलथ, तखन ओ अिन िुत्र सेत के​ेँ िुकारर कऽ कहिलथन। 2 जखन हम अहाेँ के​ेँ जन्नतक फाटक िर िठौने रही तखन अहाेँ अिन िुत्र सभ, कुि​िलत आ प्रवक् ता सभ के​ेँ, जे सभ बात सुनिहुेँ, से सुनिहुेँ, जखन हम अहाेँ के​ेँ जन्नतक फाटक िर िठौने रही, जालह सेँ िरमेश् वर सेँ लवनती कयि जाय जे जखन हम बीमार रहब तखन ओ हमर माथ िर अलभषेक करलथ। 3 तखन सेठ, कुि​िलत आ भलवष्यविा सभक िग आलब कहिलथन, “हम सेत, जखन हम जन्नतक फाटक िर िरमेश् वर सेँ प्राथवना कऽ रहि ि​िहुेँ, तखन प्रभुक स् वगवदूत के​ेँ दे खिहुेँ , माइकि हमरा प्रकट भऽ कऽ कहब जे, “हम प्रभुक लदस सेँ अहाेँ िग िठाओि गेि िी।” ; हमरा मानव शरीरक अध्यक्षता करबाक िेि लनयुि कयि गेि अलि। 4 हम अहाेँ के​ेँ सेत कहैत िी जे, िरमेश् वर सेँ नोर कऽ कऽ प्राथवना नलह करू आ दयाक गािक तेि िेि हुनका सेँ लवनती करू जालह सेँ अहाेँ अिन लिता आदम के​ेँ माथ ददव क िेि अलभषेक कयि जाय। 5 लकएक तेँ अहाेँ एकरा अंलतम लदन आ समय धरर कोनो तरहे ेँ नलह िालब सकैत िी, जाबत धरर िाेँच हजार िाेँच सय वषव बीलत नलह जायत। 6 तखन िरमेश् वरक िरमेश् वरक िरम दयािु िुत्र मसीह िृथ् वी िर आलब आदमक मनुखक शरीर के​ेँ फेर सेँ जीलब िेताह आ संगलह मृत् युक शरीर के​ेँ जीलब िेताह। 7 तखन ओ अिन दयाक तेि सेँ हुनका िर लवश् वास करयविा सभ के​ेँ अलभषेक करताह। आ ओकर दयाक तेि आगामी िीढ़ी धरर रहत, जे िालन आ िलवत्र आत्मा सेँ अनन्त जीवनक िेि जन्म िेत। 8 जखन ओलह समय िरमेश् वरक िरमेश् वरक िरम दयािु िुत्र मसीह यीशु िृथ् वी िर उतरताह तेँ ओ हमरा सभक लिता आदम के​ेँ दयाक गाि मे जन्नत मे प्रवेश करौताह। 9 जखन सभ कुि-लिता आ प्रवक् ता सभ सेत सेँ ई सभ बात सुलन कऽ ओ सभ बेसी आनखन्दत भऽ गेिाह। अध्याय 15 1 जखन सभ िलवत्र िोक सभ हलषवत भऽ रहि ि​िाह तखन दे खू, शैतान, जे मृत्युक राजकुमार आ सेनािलत िलथ, नरकक राजकुमार के​ेँ कहिलथन। 2 स्वयं नासरतक यीशु के​ेँ िहण करबाक िेि तैयार रहू, जे घमंड करै त ि​िाह जे ओ िरमेश् वरक िुत्र िलथ, मुदा ओ मृत् यु सेँ डरै त ि​िाह आ कहिलन जे, “हमर प्राण मृत् यु धरर दु खी अलि।” 3 एकर अलतररि ओ हमरा आओर बहुतो िोक के​ेँ बहुत चोट िहुेँचौिलन। कारण, जकरा हम आन्हर आ िंगडा केिहुेँ आ ओकरा सभ के​ेँ कतेको शैतान सेँ सताबैत ि​िहुेँ, ओ अिन वचन सेँ ठीक क’ दे िलन। हेँ, आ जकरा हम तोरा िग मृतक अनने ि​िहुेँ , ओकरा सभ के​ेँ ओ जबरदस्ती तोरा सेँ िीन िैत अलि।” 4 एलह बात िर नरकक राजकुमार शैतान के​ेँ उत्तर दे िलथन, “ओ एतेक शखिशािी राजकुमार के अलि, मुदा मृत्यु सेँ डे राइत आदमी के अलि?” 5 िृथ् वीक सभ सामथ्व य हमर सामथ्व यक अधीन अलि, जकरा अहाेँ अिन सामथ्व य द्वारा वश मे अनिहुेँ। 6 मुदा जेँ अिन मानवीय स्वभाव मे एतेक शखिशािी िलथ तेँ हम अहाेँ के​ेँ सत्यतः िुलष्ट करै त िी जे ओ अिन ईश्वरीय स्वभाव मे सववशखिमान िलथ, आ हुनकर सामर्थ्वक लवरोध केओ नलह क’ सकैत अलि। 7 जखन ओ कहिलथन जे मृत् यु सेँ डरै त अलि, तखन ओ अहाेँ के​ेँ फेँसाबऽ चाहैत ि​ि, आ ई अहाेँ अनन्त युग धरर दु खी रहत। 8 तखन शैतान नरकक राजकुमार के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ शंका लकएक व्यि केिहुेँ आ नासरतक यीशु के​ेँ, अहाेँक आ हमर शत्रु के​ेँ िहण करबा मे लकएक डरै त ि​िहुेँ?

9 हम हुनका िरीक्षा दे लियलन आ अिन बूढ़-िुरान यहूदी सभ के​ेँ हुनका िर उत्सुकता आ िोध सेँ भडका दे लियलन? 10 हम हुनकर कष्टक िेि भािा तेज कऽ दे लियलन। हम लित्त आ लसरका लमिा क' आज्ञा दे लियलन जे ओ एकरा िीबलथ। हम ओकरा िूस िर चढ़े बाक िेि िूस तैयार केिहुेँ , आ आइलबसक हाथ-िैर मे िे द करबाक िेि कीि; आब ओकर मृत्यु िग आलब गेि िै क, हम ओकरा एतय आलन दे ब, तोहर आ हमरा दु नू गोटे क अधीन।” 11 तखन नरकक राजकुमार उत्तर दे िलथन, “अहाेँ हमरा एखनलह कहिहुेँ जे ओ हमरा सेँ मृत् यु के​ेँ जबरदस्ती िीलन िेिक।” 12 जाबत धरर ओ सभ िृथ् वी िर फेर सेँ जीलवत नलह भऽ जायत, ताबत धरर एतऽ राखि गेि अलि, ओकरा सभ के​ेँ अिन सामथ्व य सेँ नलह, बि् लक िरमेश् वर सेँ कयि गेि प्राथवना द्वारा एलह ठाम सेँ िऽ गेि गेि। 13 तखन ओ नासरतक यीशु के िलथ जे अिन वचन द्वारा िरमेश् वर सेँ लबना प्राथवना केने मृत् यु के​ेँ हमरा सेँ दू र कऽ दे िलन? 14 शायद वैह अलि जे िाजर के​ेँ चारर लदनक मृत् युक बाद हमरा सेँ िीन िेिक आ दु गवन्ध आ सडि दु नू ि​ि, आ लजनका मे हमरा मृतक रूि मे अलधकार ि​ि, तइयो ओ ओकरा अिन सामर्थ्व सेँ फेर सेँ जीलवत कऽ िेिक . 15 शैतान उत्तर दे िलथन, नरकक राजकुमार के​ेँ उत्तर दे िलथन, “ई वैह व्यखि िलथ, नासरतक यीशु।” 16 ई बात सुलन नरकक राजकुमार हुनका कहिलथन, “हम अहाेँ के​ेँ शिथ दै त िी जे अहाेँक आ हमरा अलधकार मे अलि जे अहाेँ हुनका हमरा िग नलह आलन लदअ।” 17 हम हुनकर वचनक सामर्थ्वक बात सुलन हम डर सेँ काेँलि गेिहुेँ आ हमर सभ अधमवक संगलत एकलह संग िरे शान भऽ गेिाह। 18 हम सभ िाजर के​ेँ रोलक नलह सकिहुेँ , मुदा ओ अिना के​ेँ लहिा दे िक आ दु भाववनाक सभ िक्षणक संग ओ तुरन्त हमरा सभ सेँ दू र भऽ गेि। आ जलह धरती मे िाजरक मृत् युक शव राखि ि​ि, से हुनका जीलवत कऽ दे िकलन। 19 आब हम जनैत िी जे ओ सववशखिमान िरमेश् वर िलथ जे एहन काज कऽ सकैत िलथ, जे अिन प्रभुव मे िरािमी िलथ आ अिन मानवीय स्वभाव मे िरािमी िलथ, जे मनुष् यक उद्धारकताव िलथ। 20 ते ेँ एलह व्यखि के​ेँ एतऽ नलह आनू, लकएक तेँ ओ सभ िोक के​ेँ मुि कऽ दे लथन, जकरा हम अलवश्वास मे जेि मे राखख रहि िी आ िािक बेडी सेँ बान्हि अलि आ ओकरा सभ के​ेँ अनन्त जीवन मे िहुेँचा दे त। अध्याय 16 1 जखन शैतान आ नरकक राजकुमार एक दोसरा सेँ एलह तरहक बात कऽ रहि ि​िाह तखन अचानक गरज आ हवाक झोंक जकाेँ आवाज आयि जे, “हे राजकुमार सभ, अिन फाटक उठाउ। हे अनन्त फाटक, अहाेँ सभ उलठ जाउ, आ मलहमाक राजा भीतर आलब जेताह। 2 नरकक राजकुमार ई बात सुलन शैतान के​ेँ कहिलथन, “हमरा सेँ चलि जाउ आ हमर आवास सेँ लवदा भ’ जाउ। जेँ अहाेँ शखिशािी योद्धा िी तेँ मलहमाक राजासेँ िडू। मुदा तोरा ओकरा सेँ की िेना-दे ना अलि? 3 ओ ओकरा अिन आवास सेँ बाहर फेलक दे िक। 4 तखन राजकुमार अिन अधमी अफसर सभ के​ेँ कहिलथन, “िूरताक िीति केर फाटक सभ के​ेँ बंद करू आ िोहाक सिाख सेँ तेज करू आ साहसिूववक िडू, जालह सेँ हम सभ बंदी नलह भ’ जायब।” 5 मुदा िलवत्र िोकक समस्त िोक ई बात सुलन कऽ ओ सभ िोधक आवाज मे नरकक राजकुमार सेँ बाजि। 6 अिन फाटक खोिू जालह सेँ मलहमाक राजा प्रवेश करलथ। 7 ईश्वरीय भलवष्यविा दाऊद लचलचया उठिाह, “की हम जखन िृथ्वी िर ि​िहुेँ तखन सत् य भलवष्यवाणी नलह कऽ सकिहुेँ जे, “हे िोक प्रभुक भिाई आ मनुष् यक सन् तानक प्रलत हुनकर अद् भुत काजक िेि हुनकर प्रशंसा करलथ।” 8 लकएक तेँ ओ िीतिक फाटक तोलड कऽ िोहाक सिाख सभके​ेँ फालड कऽ कालट दे िक। ओ हुनका सभक अधमवक कारणे ेँ िकलड िेिलन आ अधमवक कारणे ेँ ओ सभ दु ः खखत िलथ। 9 एकर बाद एकटा आओर भलवष्यविा अथावत िलवत्र यशायाह सभ िलवत्र िोक सभ सेँ एलह तरहे ेँ कहिलन जे, की हम िृथ् वी िर जीबैत काि अहाेँ सभ के​ेँ ठीकठीक भलवष्यवाणी नलह केने रही? 10 मृत् यु सभ जीलवत रहत, आ जे सभ अिन कब्र मे अलि, ओ सभ जीलब उठत आ िृथ् वी िर जे अलि से सभ आनखन्दत होयत। कारण, जे ओस प्रभुक लदस सेँ आयि अलि, से ओकरा सभ के​ेँ मुखि दे तैक।” 11 हम दोसर ठाम कहलियलन, “हे मृत्यु, अहाेँक लवजय कतय अलि?” हे मृत्यु, अहाेँक डं क कतय अलि? 12 सभ िलवत्र िोक यशायाहक ई बात सुलन कऽ नरकक मुखखया के​ेँ कहिलथन, “अिन फाटक खोलि कऽ िोहाक सिाख सभ उतारर लदयौक। लकएक तेँ अहाेँ आब बान्हि रहब आ अहाेँक कोनो अलधकार नलह।”


13 तखन गरजबाक आवाज जकाेँ एकटा िैघ आवाज भेि जे, “हे राजकुमार सभ, अिन फाटक उठाउ। हे नरकक फाटक, अहाेँ सभ उलठ जाउ, आ मलहमाक राजा भीतर प्रवेश करताह। 14 नरकक राजकुमार एकलह आवाज के​ेँ दोहर-बार बाजि बुलझ लचलचया उठि जेना ओ अज्ञानी हो, “ओ मलहमाक राजा के अलि?” 15 दाऊद नरकक मुखखया के​ेँ उत्तर दे िलथन, “हम ओलह आवाजक बात बुझैत िी, लकएक तेँ हम हुनकर आत् मा सेँ कहिहुेँ।” आब, जेना हम ऊिर कहने िी, हम अहाेँ के​ेँ कहैत िी, प्रभु बिवान आ शखिशािी, युद्ध मे िरािमी प्रभु। 16 ओ कैदी सभक कुहरब सुनबाक िेि आ मृत्युक िेि लनधावररत िोक सभ के​ेँ िोडबाक िेि नीचाेँ तकिलन। 17 आब, हे गंदा आ दु गवखन्धत नरकक राजकुमार, अिन फाटक खोिू, जालह सेँ मलहमाक राजा प्रवेश करलथ। लकएक तेँ ओ स् वगव आ िृथ् वीक प्रभु िलथ। 18 दाऊद ई बात कलह रहि ि​िाह तखन िरािमी प्रभु मनुखक रूि मे प्रकट भेिाह आ ओलह िान सभ के​ेँ प्रबुद्ध कयिलन जे िलहने अन्हार मे ि​ि। 19 ओलह बेडी सभ के​ेँ तोलड दे िक जे िलहने नलह तोडि जा सकैत ि​ि। आ अिन अजेय शखिक संग अधमवक कारणे ेँ गहींर अन्हार मे तृप्त रहलनहार सभ िग आलब गेिाह, आ िािक कारणे ेँ मृत्युक िाया। अध्याय 17 1 अधमी मृत्यु आ ओकर िूर अलधकारी सभ ई बात सुलन अिन अनेक राज्य मे भय मे िलड गेिाह, जखन ओ सभ इजोतक स्पष्टता दे खख गेिाह। 2 मसीह स्वयं हुनका सभक आवास मे अचानक प्रकट भऽ गेिाह। ओ सभ लचलचया कऽ कहिलथन, “हमरा सभ अहाेँ सेँ बान्हि िी। अहाेँ प्रभुक समक्ष हमरा सभक भ्रमक अलभप्राय करै त बुझाइत िी। 3 अहाेँ के िी, जकरा मे भ्रष्टताक कोनो लनशानी नलह अलि, मुदा ओ उज्ज्वि रूि जे अहाेँक महानताक िूणव प्रमाण अलि, जकरा अहाेँ एखन धरर कोनो ध्यान नलह दै त बुझाइत िी? 4 अहाेँ के िी, एतेक शखिशािी आ एतेक कमजोर, एतेक िैघ आ एतेक िोट, एकटा नीच आ तइयो िलहि श्रेणीक लसिाही, जे एकटा आम लसिाही जकाेँ नौकरक रूि मे आज्ञा दऽ सकैत अलि? 5 मलहमा के राजा, मृत आ जीलवत, यद्यलि एक बेर िूस िर मारि गेि ि​ि? 6 के मृतक कब्र मे िडि अलि आ हमरा सभ िग जीलवत आलब गेि अलि, आ अहाेँक मृत्यु मे सभ प्राणी काेँलि गेि, सभ तारा लहि गेि, आ आब अहाेँ मृतक मे सेँ मुखि िालब गेि िी आ हमरा सभक सेना के​ेँ िरे शान करै त िी? 7 अहाेँ के िी, जे मूि िािक जंजीर मे बान्हि कैदी सभ के​ेँ िोलड कऽ ओकरा सभ के​ेँ िूवव स्वतंत्रता मे अनैत िी 8 अहाेँ के िी, जे िािक अन्हार सेँ आन्हर भऽ गेि िोक सभ िर एतेक गौरवशािी आ ईश्वरीय प्रकाश िसारर दे िहुेँ ? 9 ओलह तरहे ेँ सभ दु ष् टात् मा सभक सेना सभ सेहो ओलहना भयावहता सेँ िकलड िेिक आ सभ आज्ञाकारी भय सेँ लचलचया उठि आ कहिक। 10 हे यीशु मसीह, अहाेँ एतेक शखिशािी आ मलहमावान आदमी िी, जे कोनो दाग नलह अलि, आ एतेक शुद्ध जे कोनो अिराध नलह अलि? कारण, िृथ्वीक ओ लनचिा संसार, जे एखन धरर हमरा सभक अधीन ि​ि, आ जतय सेँ हमरा सभ के​ेँ कर भेटैत ि​ि, हमरा सभ के​ेँ िलहने कलहयो एहन मृतक नलह िठौिक, एलह तरहक उिहार कलहयो नरकक राजकुमार सभ के​ेँ नलह िठौिक। 11 ते ेँ अहाेँ के िी, जे एतेक साहस सेँ हमरा सभक लनवास मे प्रवेश करै त िी आ हमरा सभ के​ेँ िैघ-िैघ दं डक धमकी दे बा मे नलह डरै त िी, बखि आन सभ िोक के​ेँ ओलह जंजीर सेँ बचाबय के प्रयास सेहो करै त िी, जालह मे हम सभ ओकरा िकडने िी? 12 शायद अहाेँ ओ यीशु िी, लजनका बारे मे शैतान एखनलह हमरा सभक राजकुमार सेँ बाजि ि​ि, जे िूस िर मृत्युक कारणे ेँ अहाेँ के​ेँ मृत्युक शखि भेटय बिा ि​ि। 13 तखन मलहमाक राजा मृत्यु के​ेँ रौंदैत नरकक राजकुमार के​ेँ िकलड िेिक, ओकर समस्त शखि सेँ वंलचत कयिक आ हमरा सभक िालथवव लिता आदम के​ेँ अिन मलहमा मे अिना संग िऽ गेि। अध्याय 18 1 तखन नरकक राजकुमार शैतान के​ेँ िकलड िेिक आ बहुत संकेत दै त ओकरा कहिक, “हे लवनाशक राजकुमार, बेिजबूबक िराजय आ लनवावसनक िेखक, िरमेश् वरक स् वगवदूत सभक लतरस्कार आ सभ धमी िोकक घृणा! अहाेँके​ेँ एलह तरहे ेँ काज करबाक िेि की झुकाव ि​ि? 2 अहाेँ मलहमाक राजा के​ेँ िूस िर चढ़ाबय चाहैत ि​िहुेँ , आ हुनकर लवनाश द्वारा हमरा सभ के​ेँ बहुत िैघ िाभक प्रलतज्ञा कयि गेि अलि, मुदा मूखव जकाेँ अहाेँ एलह बात सेँ अनलभज्ञ ि​ि। 3 आब दे खू, नासरतक यीशु अिन गौरवशािी ईश्वरीयताक चमक सेँ अन्हार आ मृत्युक सभ भयावह शखि के​ेँ भगा दै त िलथ।

4 ओ हमरा सभक जेि सभ के​ेँ ऊिर सेँ नीचाेँ तोलड दे िलन, सभ बंदी के​ेँ लवदा कऽ दे िलन, बान्हि सभ के​ेँ िोलड दे िलन, आ जे सभ िलहने अिन यातनाक भार सेँ कुहरबाक आदलत ि​ि, आब हमरा सभक अिमान कयि गेि अलि, आ हम सभ िरालजत होयब जकाेँ िी हुनका िोकलनक प्राथवना। 5 हमरा सभक अधमवक प्रभुव वश मे भ’ गेि अलि, आ आब मनुक्खक कोनो भाग हमरा सभक अधीन मे नलह रलह गेि अलि, मुदा दोसर लदस, ई सभ हमरा सभक लनभीकतािूववक अवहेिना करै त अलि। 6 यद्यलि, िलहने, मृतक हमरा सभक प्रलत अनादरिूणव व्यवहारक साहस कलहयो नलह करै त ि​ि, आ ने कैदी हेबाक कारणे, कलहयो कोनो अवसर िर मस्त भ’ सकैत ि​ि। 7 हे शैतान, हे सभ दु ष्टक राजकुमार, अधमव आ िररत्यि िोकक लिता, अहाेँ एलह शोषणक प्रयास लकएक करब, ई दे खैत जे हमरा सभक कैदी सभ एखन धरर सलदखन उद्धार आ जीवनक कम सेँ कम आशाक अभाव मे रहैत ि​ि? 8 मुदा आब हुनका सभ मे सेँ लकयो कलहयो कुहरै त नलह अलि आ ने ककरो मुेँह िर कलनको नोर दे खाइ िडै त अलि। 9 हे राजकुमार शैतान, हे नरकीय क्षेत्रक महान रक्षक, लनलषद्ध गाि सेँ जे िाभ प्राप्त केिहुेँ , आ स्वगवक हालन, से आब िूसक िकडी सेँ गमा िेिहुेँ ; 10 जखन अहाेँ मलहमाक राजा यीशु मसीह के​ेँ िूस िर चढ़ा दे िहुेँ तखन अहाेँक सभ सुख समाप्त भऽ गेि। 11 अहाेँ अिन आ हमर लहतक लवरुद्ध काज केिहुेँ, जेना अहाेँ एखन ओलह िैघ यातना आ अनंत दण्ड सेँ बुझब जे अहाेँ भोगय बिा िी। 12 हे शैतान, सभ दु ष्टताक राजकुमार, मृत्युक कताव आ सभ घमंडक स्रोत, अहाेँ के​ेँ िलहने नासरतक यीशुक दु ष्ट अिराधक लवषय मे िूिताि करबाक चाही ि​ि, तखन अहाेँ के​ेँ िता चलितय जे ओ कोनो दोषी नलह ि​ि जे मृत्युक योग्य नलह अलि। 13 अहाेँ ओकरा िूस िर चढ़ाबय के साहस लकएक केिहुेँ आ ने कोनो कारण वा न्याय केिहुेँ आ हमरा सभक क्षेत्र मे एकटा लनदोष आ धमी व्यखि के​ेँ उतारिहुेँ आ एलह तरहे ेँ समस्त संसारक सभ िािी, अधमी आ अधमी िोक के​ेँ गमा दे िहुेँ? 14 जखन नरकक राजकुमार शैतान सेँ एलह तरहे ेँ बालज रहि ि​िाह तखन मलहमाक राजा नरकक राजकुमार बेिजबूब के​ेँ कहिलथन, शैतान, आदम आ ओकर धमी िुत्र सभक कोठिी मे, जे सभ िलथ, ओ राजकुमार सदाक िेि अहाेँक प्रभुवक अधीन रहताह हमर. अध्याय 19 1 तखन यीशु हाथ बढ़ा कऽ कहिलथन, “हे हमर सभ संत, जे हमर प्रलतरूि मे सृलजत िी, जे लनलषद्ध फिक गाि आ शैतान आ मृत्युक द्वारा दोषी ठहराओि गेि िी, हमरा िग आलब जाउ। 2 आब हमर िूसक िकडीक कात मे रहू। एलह संसारक राजकुमार शैतान िर लवजय िालब गेि अलि आ मृत्यु िर लवजय प्राप्त कयि गेि अलि | 3 तखने सभ िलवत्र िोक सभ िरमेश् वर िरमेश् वरक हाथ मे एक संग भऽ गेिाह। प्रभु यीशु आदमक हाथ िकलड कऽ कहिलथन, “अहाेँ आ अहाेँक सभ धमी संतान जे हमर अलि, शाखन्त हो।” 4 तखन आदम यीशुक िएर िर िलड कऽ नोर कऽ कऽ लवनम्र भाषा आ जोर-जोर सेँ हुनका सम्बोलधत कयिलन। 5 हे प्रभु, हम अहाेँक प्रशंसा करब, लकएक तेँ अहाेँ हमरा ऊिर उठौिहुेँ आ हमर शत्रु सभ के​ेँ हमरा िर आनखन्दत नलह केिहुेँ। हे प्रभु हमर िरमेश् वर, हम अहाेँ सेँ िुकारिहुेँ आ अहाेँ हमरा ठीक कऽ दे िहुेँ। 6 हे प्रभु, अहाेँ हमर प्राण के​ेँ लचता सेँ उतारिहुेँ। अहाेँ हमरा जीलवत राखख दे िहुेँ जे हम गड्ढा मे नलह उतरब। 7 हे हुनकर सभ िलवत्र िोक, प्रभुक िेि गाउ, आ हुनकर िलवत्रताक स्मरण मे धन्यवाद लदअ। लकएक तेँ ओकर िोध क्षण भरर िेि लटकैत िै क। ओकर िक्ष मे जीवन िै क। 8 तलहना सभ िलवत्र िोक सभ यीशुक चरण मे प्रणाम कए एकलह स्वर मे बजिाह, “हे संसारक मुखिदाता, अहाेँ आलब गेि िी, आ सभ लकिु िूरा कऽ दे िहुेँ जे अहाेँ धमव-लनयम आ अिन िलवत्र प्रवक् ता सभक द्वारा कयि गेि ि​ि।” 9 अहाेँ अिन िूस द्वारा जीलवत िोक सभ के​ेँ मुि कऽ दे िहुेँ आ हमरा सभ िग उतरर गेि िी, जालह सेँ िूसक मृत्यु द्वारा अहाेँ हमरा सभ के​ेँ नरक सेँ मुि कऽ सकब आ अिन सामथ्व य द्वारा मृत्यु सेँ मुि कऽ सकब। 10 हे प्रभु, जेना अहाेँ अिन मलहमाक झंडा के​ेँ स् वगव मे राखख दे िहुेँ आ अिन मोक्षक लचन्ह, अथावत् अिन िूस के​ेँ िृथ् वी िर राखख दे िहुेँ। ते,ेँ प्रभु, अिन िूसक लवजयक लनशानी नरक मे राखू, जालह सेँ मृत्यु आब लमलनओन नलह क' सकैत अलि। 11 तखन प्रभु अिन हाथ बढ़ा कऽ आदम आ ओकर सभ िलवत्र िोक िर िूसक लनशानी बनौिलन। 12 आदम के​ेँ ओकर दलहना हाथ सेँ िकलड कऽ ओ नरक सेँ चलि गेिाह आ िरमेश् वरक सभ िलवत्र िोक हुनका िािाेँ-िािाेँ चलि गेिाह।


13 तखन राजकीय भलवष्यविा दाऊद लनभीकतािूववक लचलचया कऽ कहिलथन, 1 “हे प्रभु के​ेँ एकटा नव गीत गाउ, लकएक तेँ ओ अद् भुत काज कयिलन। ओकर दलहना हाथ आ ओकर िलवत्र बाेँलह ओकरा लवजय प्राप्त केिकैक। 14 िरमेश् वर अिन उद्धारक बात जनौिलन, अिन धालमवकता के​ेँ अनजान सभक समक्ष मे खुलि कऽ दे खौिलन। 15 िलवत्र िोक सभक भीड उत्तर दे िलथन, “ओकर सभ संत के​ेँ ई आदर अलि, “आमीन, प्रभुक स्तुलत करू।” 16 तकर बाद हबक्कूक प्रवक् ता 3 लचलचया कऽ कहिलथन, “अहाेँ अिन िोकक उद्धारक िेि लनकि​िहुेँ।” 17 सभ िलवत्र िोक कहिलथन, 4 “धन्य अलि जे प्रभुक नाम सेँ अबैत अलि। लकएक तेँ प्रभु हमरा सभ के​ेँ प्रबुद्ध कयिलन अलि। ई हमर सभक िरमेश् वर िलथ, अनन्त काि धरर। ओ हमरा सभ िर अनन्त युग धरर राज करत, आमीन। 18 एलह तरहे ेँ सभ प्रवक् ता सभ हुनकर स्तुलतक िलवत्र बात सभ बजैत ि​िाह आ प्रभुक िािाेँ चिैत ि​िाह। अध्याय 20 1 तखन प्रभु आदम के​ेँ हाथ िकलड कऽ महास्वगवदूत माइकि के​ेँ सौंि दे िलथन। दया आ मलहमा सेँ भरि जन्नत मे िऽ गेिाह। 2 दू गोटे बहुत प्राचीन िोक हुनका सभ सेँ भेंट कयिलन आ िलवत्र िोक सभ िुि​िलथन, “अहाेँ सभ के िी जे एखन धरर हमरा सभक संग नरक मे नलह गेि िी आ अहाेँ सभक िास जन्नत मे राखख दे ि गेि अलि?” 3 हुनका सभ मे सेँ एक गोटे उत्तर दे िलथन, “हम हनोक िी, जे िरमेश् वरक वचन द्वारा अनुवाद कयि गेि अलि। 4 हम सभ एखन धरर एतय ि​िहुेँ, आ मृत्युक स्वाद नलह िेने िी, मुदा आब मसीह लवरोधीक आगमन िर ईश्वरीय लचन् त्र आ चमत्कार सेँ िैस भऽ हुनका संग युद्ध मे िागय बिा िी, आ यरूशिेम मे हुनका द्वारा मारि जायब साढ़े तीन लदनक बाद फेर जीलवत मेघ मे िऽ जायब। 5 िलवत्र हनोक आ एलियाह जखन ई बात सुना रहि ि​िाह तखन दे खू, एकटा आओर आदमी एकटा दयनीय आकृलत मे िूसक लचन्ह अिन कान्ह िर ि’ क’ आयि ि​ि। 6 सभ िलवत्र िोक हुनका दे खख िुि​िलथन, “अहाेँ के िी?” लकएक तेँ तोहर मुेँह चोर जकाेँ अलि। आ कान्ह िर िूस लकएक उठबैत िी? 7 यीशु उत्तर दे िलथन, “अहाेँ सभ ठीके कहैत िी, लकएक तेँ हम एकटा चोर ि​िहुेँ जे िृथ् वी िर सभ तरहक दु ष् टता कऽ रहि ि​िहुेँ।” 8 यहूदी सभ हमरा यीशुक संग िूस िर चढ़ा दे िक। आ हम प्रभु यीशु के िूस िर चढ़ाबै के समय सृलष्ट में जे आियवजनक घटना घटिै, ओकरा दे खै िे लियै। 9 हम हुनका सभ वस्तुक सृलष्टकताव आ सववशखिमान राजा मानैत ि​िहुेँ। हम हुनका सेँ प्राथवना करै त कहलियलन, “प्रभु, जखन अहाेँ अिन राज्य मे आलब जायब तखन हमरा मोन िाडू।” 10 ओ तुरन्त हमर लवनती दे खख हमरा कहिलथन, “हम अहाेँ के​ेँ सत्ते कहैत िी जे आइ अहाेँ हमरा संग स्वगव मे रहब।” 11 ओ हमरा िूसक ई लनशानी दे िलन जे, “ई िऽ कऽ जन्नत जाउ। आ जेँ जन्नतक िहरे दार स् वगवदूत अहाेँ के​ेँ प्रवेश नलह करत तेँ ओकरा िूसक लनशानी दे खा लदयौक आ ओकरा कलह लदयौक जे आब िूस िर चढ़ाओि गेि यीशु मसीह हमरा एतय अहाेँक िग िठौिलन। 12 जखन हम ई सभ बात कऽ कऽ जन्नतक िहरे दार स् वगवदूत के​ेँ ई सभ बात कहलियलन आ ओ सुनिलन, तखन ओ तुरन्त फाटक खोलि कऽ हमरा िररचय करौिलन आ हमरा जन्नत मे दलहना कात राखख दे िलन। 13 ओ कहिलन, “कलन काि एतऽ रहू जाबत धरर समस्त मनुष् यक लिता आदम अिन सभ िुत्र सभक संग प्रवेश नलह करताह जे िूस िर चढ़ाओि गेि यीशु मसीहक िलवत्र आ धालमवक सेवक िलथ।” 14 जखन ओ सभ चोर सेँ ई सभ बात सुनिलन तेँ सभ कुि​िलत सभ एकलह स्वर मे बजिाह, “हे सववशखिमान िरमेश् वर, अनन्त भिाईक लिता आ दयाक लिता, जे िािी िोक सभ िर एहन कृिा कयिलन।” ओकरा, आ ओकरा सभ के​ेँ जन्नतक दया मे अनने अलि, आ ओकरा सभ के​ेँ तोहर िैघ आ आध्याखत्मक प्रावधानक बीच, आध्याखत्मक आ िलवत्र जीवन मे राखख दे िक। आमीन। अध्याय 21 1 ई सभ लदव्य आ िलवत्र रहस्य अलि जे हम सभ दे खिहुेँ आ सुनिहुेँ। हमरा, चाररनस आ िेखियस के भगवान के अन्य रहस्य के घोषणा करय के अनुमलत नै अलि, जेना लक महादू त माइकि हमरा सब के आदे श दे ने ि​िाह, 2 “अहाेँ सभ हमर भाय सभक संग यरूशिेम जायब आ यीशु मसीहक िुनरुत्थानक घोषणा आ मलहमा करै त प्राथवना मे रहब, लकएक तेँ ओ अहाेँ सभ के​ेँ अिना संग मृत् यु सेँ जीलब िेने िलथ।”

3 अहाेँ सभ ककरो सेँ गप्प नलह करू, बि् लक गूंगा बलन कऽ बैसब जाबत धरर ओ समय नलह आलब जायत जखन प्रभु अहाेँ सभ के​ेँ अिन ईश्वरीयताक रहस्य सभ के​ेँ कहबाक अनुमलत नलह दे ताह। 4 महास्वगवदूत माइकि हमरा सभ के​ेँ आज्ञा दे िलन जे हम सभ यरदन नदीक ओलह िार, एकटा उत्तम आ मोट दे श मे जाउ, जतय मसीहक िुनरुत्थानक प्रमाणक िेि हमरा सभक संग मृत् यु सेँ जीलब उठि बहुतो िोक िलथ। 5 लकएक तेँ हमरा सभ के​ेँ मृतक सभ मे सेँ मात्र तीन लदनक अनुमलत अलि, जे सभ अिना सभक माता-लिताक संग अिन प्रभुक फसह मनाबऽ िेि उठिहुेँ आ प्रभु मसीहक िेि अिन गवाही दे बऽ िेि उठिहुेँ। आ आब ककरो नजरर मे नलह आलब रहि अलि। 6 ई ओतबे अलि जतेक िरमेश् वर हमरा सभ के​ेँ अहाेँ सभ सेँ संबंध बनेबाक अनुमलत दे िलन। ते ेँ अहाेँ सभ हुनकर स्तुलत आ आदर करू आ ि​िाताि करू, तखन ओ अहाेँ सभ िर दया करत। प्रभु िरमेश् वर यीशु मसीह आ हमरा सभक उद्धारकताव द्वारा अहाेँ सभ के​ेँ शाखन्त भेटय। आमीन, आमीन, आमीन। 7 ओ सभ िेखन समाप्त कऽ कऽ दू अिग-अिग कागज मे लिखिाक बाद चरीन जे लकिु लिखिलन से हन्ना, काइफा आ गमालिएिक हाथ मे दऽ दे िलथन। 8 िेखियस सेहो अिन लिखि बात लनकोदे मस आ यूसुफक हाथ मे दऽ दे िलन। आ तुरन्त ओ सभ अलत उज्जर रूि मे बदलि गेि आ आब नलह दे खि गेि | 9 मुदा ओ सभ जे लिखने ि​िाह, से एकदम एकमत िाओि गेि, जालह मे एक अक्षर दोसर अक्षर सेँ कम-बेसी नलह ि​ि। 10 जखन सभ यहूदी सभ चरीन आ िेखियसक ई सभ आियवचलकत संबंध सुलन एक-दोसर के​ेँ कहिलथन, “सत्ते ई सभ काज िरमेश् वर द्वारा कयि गेि अलि, आ प्रभु यीशु के​ेँ अनन्तकाि धरर आशीवावद दे ि जाय, आमीन।” 11 ओ सभ बहुत लचंलतत, भय, काेँलि कऽ घुमैत रहिाह, आ सभ अिन-अिन िाती िर चोट करै त सभ अिन-अिन घर लदस लवदा भेिाह। 12 ई सभ बात जे यहूदी सभ अिन सभाघर मे यीशुक लवषय मे कहैत ि​िाह, से सभ यूसुफ आ लनकोदे मस द्वारा तुरन्त राज्यिाि के​ेँ कहि गेिलन। 13 लि​िातुस एलह सभ काज के​ेँ लिखख कऽ ई सभटा िेखा-जोखा अिन हॉिक साववजलनक अलभिेख मे राखख दे िलन। अध्याय 22 1 एलह बातक बाद लि​िातुस यहूदी सभक मन् लदर मे गेिाह आ सभ शासक आ शास्त्री आ धमव-लनयमक लशक्षालवद सभ के​ेँ बजौिलन आ हुनका सभक संग मन् लदरक एकटा चि​िी मे गेिाह। 2 सभ फाटक बंद करबाक आज्ञा दै त हुनका सभ के​ेँ कहिलथन, “हम सुनिहुेँ जे एलह मखन्दर मे अहाेँ सभक एकटा िैघ लकताब अलि। ते ेँ हम अहाेँ सभ सेँ चाहैत िी जे ई हमरा सोझाेँ आनि जाय। 3 जखन मखन्दरक चाररटा सेवक द्वारा िऽ कऽ सोना आ कीमती िाथर सेँ सजि महान िुस्तक आनि गेि तेँ लि​िातुस सभ के​ेँ कहिलथन, “हम अहाेँ सभक िूववज सभक िरमेश् वरक शिथ दै त िी, जे एलह मन् लदर के​ेँ बनौने ि​िाह आ बनबाक आज्ञा दे ने ि​िाह।” बनौने िी, जालह सेँ अहाेँ सभ सत् य के​ेँ हमरा सेँ नलह नुकाबी।” 4 अहाेँ सभ ओलह िुस्तक मे लिखि सभ बात के​ेँ जनैत िी। ते ेँ आब हमरा कहू जे, जेँ अहाेँ सभ के​ेँ धमवशास् त्र मे ओलह यीशुक कोनो बात भेटि अलि, लजनका अहाेँ सभ िूस िर चढ़ा दे िहुेँ आ संसारक कोन समय मे हुनका एबाक चाही ि​ि, से हमरा दे खाउ।” 5 तखन ओ सभ हन्ना आ काइफा के​ेँ शिथ दऽ कऽ आज्ञा दे िलथन जे हुनका सभक संग रहलनहार सभ िोक सभ के​ेँ चिरा सेँ बाहर लनकलि जाय। 6 ओ सभ मन् लदर आ चिेिक फाटक बन्न कऽ लि​िातुस के​ेँ कहिलथन, “हे न्यायाधीश, अहाेँ हमरा सभ के​ेँ एलह मखन्दरक लनमावणक शिथ दे िहुेँ जे अहाेँ के​ेँ सत् य आ उलचत बातक घोषणा करब।” 7 हम सभ यीशु के​ेँ िूस िर चढ़ा दे िाक बाद ई नलह जालन जे ओ िरमेश् वरक िुत्र िलथ, मुदा ई मालन कऽ जे ओ अिन चमत् कार सभ कोनो जादु ई किा द्वारा कयिलन, तखन हम सभ एलह मन् लदर मे एकटा िैघ सभा के​ेँ बजौिहुेँ। 8 जखन हम सभ एक-दोसर मे यीशु द्वारा कयि गेि चमत्कार सभक लवषय मे लवचार-लवमशव कऽ रहि ि​िहुेँ तेँ हमरा सभ के​ेँ अिन दे शक बहुतो गवाह भेटि जे ओ सभ हुनका मरिाक बाद जीलवत दे खिलन आ हुनकर लशष् य सभक संग गिशि करै त सुनिलन आ दे खिलन ओ आकाशक ऊेँचाई िर चलढ़ कऽ ओलह मे प्रवेश करै त िलथ। 9 हम सभ दू गोट गवाह के​ेँ दे खिहुेँ , लजनकर िाश के​ेँ यीशु मृत् यु मे सेँ लजया केने ि​िाह, जे यीशु मृत् यु मे कयि गेि बहुत रास लवलचत्र काज सभक बारे मे कहिलन। 10 हमरा सभक प्रथा अलि जे प्रलतवषव एलह िलवत्र िुस्तक के​ेँ सभाक समक्ष खोलि कऽ ओतऽ िरमेश् वरक सिाहक खोज करै त िी। 11 आरू हमरा लसनी कॅ सत्तर िुस्तकऽ में सें िलहिऽ िुस्तक में लमि​िै, जहाेँ माइकि महादू त आदम केरऽ तेसरऽ बेटा िलहिऽ आदमी सें बात करी रहिऽ िै


लक िाेँच हजार िाेँच सौ साि के बाद मसीह िरमेश् वर केरऽ सबसें लप्रय िुत्र िृथ्वी िर आबी गेिऽ िे िै 12 हम सभ आगू सोचिहुेँ जे शायद ओ इस्राएिक िरमेश् वर ि​िाह जे मूसा के​ेँ कहिलथन, “अहाेँ गवाहीक सगदू क बनाउ।” एकर िम्बाई ढाई हाथ आ चौडाई डे ढ़ हाथ आ ऊेँचाई डे ढ़ हाथ होयत। 13 िुरान लनयमक सगदू क लनमावणक िेि एलह साढ़े िाेँच हाथ सेँ हमरा सभ के​ेँ बुझि आ बुझि जे साढ़े िाेँच हजार वषव (एक हजार) वषव मे यीशु मसीह के​ेँ कोनो शरीरक सगदू क वा तम्बू मे आलब जेबाक अलि ; 14 हमरा सभक शास्त्र गवाही दै त अलि जे ओ िरमेश् वरक िुत्र आ इस्राएिक प्रभु आ राजा िलथ। 15 हुनकर कष्टक बाद हमरा सभक मुख् यिुरोलहत सभ हुनकर द्वारा कयि गेि लचन् ह सभ दे खख आियवचलकत भऽ गेिाह, ते ेँ हम सभ ओलह िुस्तक के​ेँ खोलि कऽ यूसुफ आ यीशुक माय मररयमक िीढ़ी धररक सभ िीढ़ीक खोज कयि गेिहुेँ दाऊदक वंशज; 16 हमरा सभ के​ेँ सृलष्टक लववरण भेटि जे ओ आकाश आ िृथ् वी आ िलहि आदमी आदम आ ओलह ठाम सेँ जिप्रिय धरर जे समय मे बनौिलन से दू हजार दू सय बारह वषवक ि​ि। 17 जिप्रिय सेँ अब्राहम धरर नौ सय बारह। अब्राहम सेँ मूसा धरर चारर सय तीस। मूसा सेँ राजा दाऊद धरर िाेँच सय दस। 18 दाऊद सेँ िऽ कऽ बेलबिोनक बंदी धरर िाेँच सय वषव। आ बेलबिोनक बंदी सेँ ि' क' मसीहक अवतार धरर, चारर सय वषव। 19 जे सभक योग साढ़े िाेँच हजार (एक हजार) होइत अलि। 20 एलह तरहे ेँ ई प्रतीत होइत अलि जे यीशु लजनका हम सभ िूस िर चढ़ा दे लियलन, ओ िरमेश् वरक िुत्र यीशु मसीह िलथ, आ सत् य आ सववशखिमान िरमेश् वर िलथ। आमीन।


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Maithili - The Gospel of Nicodemus formerly called The Acts of Pontius Pilate by Filipino Tracts and Literature Society Inc. - Issuu