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Maithili - The General Epistle of Barnabas

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बरनबास के सामान पत अध ाय 1 1 हमर बेटा-बेटी सभ केँ, हमरा सभक पभर यीशर मसीहक नाम सँ, जे हमरा सभ सँ पेम कयलनन, शान् सँ अहाँ सभ केँ सभटा सरख। 2 हम अहाँ सभ मे परमेश् वरक महान आ उतम ननयमक प्रर जान बरनि अहाँ सभक धन आ पशरसनीय पारी मे बहु आनन्ु छी, नकएक ुँ अहाँ सभ मे जे कृपा कलम कयल गेल छल से अहाँ सभ केँ एुेक योग रप सँ पार कयल गेल अनछ। 3 एनह लेल हम आन् सँ भरल छी आ आशा करै ु छी जे ओ उदार करनि। जाबु धरर हम परमेश् वरक शरद फवारा सँ अहाँ सभ मे एकटा आु् मा समानहु दे नख रहल छी। 4 हम एनह बाु पर नवशास करै ु छी आ एनह बाु पर पूर् नवशास भऽ गेलहँ जे जनहया सँ हम अहाँ सभ सँ गप करय लगलहँ ुनहया सँ पभरक धम्-ननयमक माग् मे हमरा सामान सँ बेसी नीक सफलुा भेटल अनछ जे मसीह मे अनछ। 5 एनह काररे ँ भाइ लोकनन, हमहँ ई सो्ैु छी जे हम अहाँ सभ सँ अपन पार सँ बेसी पेम करै ु छी। 6. ुे ँ एनह बाु पर नव्ार कर जे जँ हम अहाँ सभ केँ जे नकछर भेटल अनछ ुानह मे सँ एक भाग केँ सरपेनेु करबाक धान राखब ुँ ई हमर इनाम मे आनब जायु जे हम एहन नीक आता सभक सेवा केलहँ । हम अहाँ सभ केँ नकछर शब मे नलखबाक लेल लगन केलहँ । जे अहाँ सभक नवश् वासक सरग-सरग जान सेहो नसद हो। 7 ुे ँ पभर दारा ुीन टा बाु ननधा् ररु कयल गेल अनछ। जीवनक आशा; एकर आरम आ समानर। 8 नकएक ुँ परमेश् वर हमरा सभ केँ पवक् ुा सभक दारा ओ सभ बीुल बाु सभ केँ सरनौलनन अनछ। आ हमरा सभक लेल जे आबय बला अनछ, ओकर आरर भ खोनल दे लक। 9 ुे ँ हमरा सभ केँ ई उन्ु होयु, जेना ओ कहने छनि, और पनवत रप सँ आ हनकर वेदीक नजदीक आनब जायब। 10 ुे ँ हम एकटा नशककक रप मे ननह, बल् नक अहाँ सभ मे सँ एक गोटे क रप मे अहाँ सभक सोिाँ नकछर एहन बाु रखबाक पयास करब जानह सँ अहाँ सभ कुेको काररे ँ आओर आनन्ु भऽ सकब। अध ाय 2 1 ुखन नदन बहु खराब भऽ गेल अनछ, आ पनुदर दी केँ एनह सरसारक सामि्​् य भेनट गेल अनछ, हमरा सभ केँ पभरक धानम्क न् याय सभक नवेय मे जाँ ् करबाक लेल आओर बेसी मेहनु करबाक ्ाही। 2 आब हमरा सभक नवश् वासक सहायक भय आ धैय् अनछ। हमर सह-लडाकू, दीर्कालीन आ सरयम। 3 जाबु ई सभ पभरक सरबरध मे शरद रहब, बरनद आ समि, नवजान आ जान, हनका सभक सरग आनन्ु रह। 4 परमेश् वर सभ पवक् ुा सभक दारा हमरा सभ केँ ई पगट कयलनन जे हनका हमरा सभक बनलदान वा होमबनल वा बनलदानक कोनो अवसर ननह छनन। पभर कहै ु छनि जे अहाँ सभक बनलदानक भरमार हमरा लेल कोन काज लेल अनछ।

5 हम मेढक होमबनल आ पोसल पशरक ्ब् सँ भरल छी। हम बैल आ बकरीक खून मे आनन्ु ननह छी 6 जखन अहाँ सभ हमरा समक दश्न करऽ अयब। अहाँ क हाि सँ के ई माँ ग केलक अनछ? आब अहाँ सभ हमर आँ गन मे ननह ्लब। 7 आब वि् बनलदान ननह आनब, धूप हमरा लेल रृनरु अनछ। अहाँ क अमावसा आ नवशाम-नदन; सभाक आहान हम दू र ननह क' सकैु छी, ई अधम् निक, गरभीर सभा सेहो; अहाँ क अमावसा आ अहाँ क ननधा् ररु भोज सँ हमर पार रृरा करै ु अनछ। 8 एनह लेल परमेश् वर ई सभ बाु सभ केँ समार कऽ दे लनिन, जानह सँ हमरा सभक पभर यीशर मसीहक नव ननयम, जे एनह ुरहक कोनो आवश् यकुाक जरआ सँ रनहु अनछ, ओनह मे सयर मनरे् य सभक आु् मक बनलदान भेटय। 9 नकएक ुँ परमेश् वर एखन धरर के सभ केँ फेर सँ कहै ु छनिन। की हम अहाँ क पूव्ज सभ नमस दे श सँ बाहर ननकलला पर होमबनल के नवेय मे कोनो आजा दे लहँ ? 10 मरदा हम हनका सभ केँ ई आजा दे नलयनन जे , “अहाँ सभ मे सँ नकयो अपन पडोसीक पनु अपन मोन मे दर े् ट कलना ननह कर आ िूठ शपि सँ पेम ननह कर।” 11 ुे ँ हमरा सभ केँ अपन दयालर नपुाक योजना केँ बरिबाक ्ाही। नकएक ुँ ओ हमरा सभ सँ गप करै ु छनि, जे इचर क छनि जे हम सभ जे बनलदानक नवेय मे एकनह ुरहक तरनट मे पडल छी, हनका लग कोना पहँ ्ब से ुाकब आ ुाकब। 12 एनह लेल ओ हमरा सभ केँ एनह ुरहे ँ कहै ु छनि, “परमेश् वरक बनलदान (एकटा टू टल-फूटल आु् मा अनछ) एकटा टू टलफूटल आ पशाुाप कयल हदय केँ परमेश् वर नुरसृु ननह करुाह। 13 ुे ँ भाइ लोकनन, हमरा सभ केँ एनह बाु सभ केँ आओर बेसी लगन सँ पूछुाछ करबाक ्ाही जे हमरा सभक उदारक नवेय मे अनछ, जानह सँ शतर हमरा सभ मे कोनो पवेश ननह करनि आ हमरा सभ केँ आु् मक जीवन सँ वरन्ु कऽ सकनि। 14 ुे ँ ओ फेर हनका सभ सँ एनह बाु सभक नवेय मे बजैु छनि। अहाँ सभ आइ जेकाँ उपवास करै ु छी, ुेना उपवास ननह कर, जानह सँ अहाँ सभक आवाज ऊँ् पर सरनल जाय। 15 की ई एहन उपवास अनछ जे हम ्रनने छी? एक नदन जे मनरे् य अपन आु् मा केँ कष दे ु? की ई बरलश जकाँ माि िरका दे ब आ ओकरा नी्ाँ बोरा आ राख पसारर दे ब? की अहाँ एकरा उपवास आ पभरक लेल सीकाय् नदन कहब? 16 मरदा ओ हमरा सभ केँ एनह बाु पर कहै ु छनि। की ई ओ वु ननह अनछ जे हम दर षुाक पटी खोलबाक लेल, भारी बोि केँ उुारबाक लेल आ दबल-कर्लल लोक केँ मरक करबाक लेल ्रनने छी। आ की अहाँ सभ हर जरआ ुोनड दै ु छी? 17 की ई ननह जे अहाँ अपन रोटी भूखल लोक केँ बाँ नट दे ब आ जे गरीब केँ बाहर फेकल गेल अनछ ओकरा अपन रर मे अनब? जखन अहाँ नरगटे दे खब जे ओकरा िाँ नप दै ु छी आ अपन शरीर सँ अपना केँ ननह नरका लैु छी। 18 ुखन अहाँ क इजोु भोर जकाँ फँनस जायु आ अहाँ क साव जली-जली उडु। ुोहर धानम्कुा ुोहर आगू बढु, पभरक मनहमा ुोहर इनाम होयु। 19 ुखन अहाँ बजाउ आ पभर उतर दे निन। अहाँ कानब आ ओ कहु जे हम एुय छी।” जँ अहाँ अपन बी् सँ जरआ, आँ गरर ननकालब आ वि् बजब केँ दू र कऽ दे ब। आ जँ अहाँ अपन पार केँ भूखल लोकक नदस खी् र ैु छी। आ पीनडु आता केँ ुृर कर।


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Maithili - The General Epistle of Barnabas by Filipino Tracts and Literature Society Inc. - Issuu