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Maithili - The First Book of the Shepherd of Hermas, which is called His Visions

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हरमास के चरवाहा के पहहल पुस क, जेक रा ओकर दर्श कहल गेल अहि |

दहष 1 1 जे हमरा पोसशे िल, ओ रोम मे एकटा शौकराशी केँ बेहच दे लक। हजशका कतेको वर्क बाद दे खलहँ तँ हशका मोश पह़ गेलहश आ बहहश जकाँ पेम करऽ लगलहँ । हकिु समयक बाद एहश भेल, जे हम ओकरा टाइबर शदीमे शहाइत दे खलहु ; हम ओकरा हदस हाथ बढा कऽ ओकरा शदी सँ बाहर हशकाहल दे हलयहश। 2 जखश हम हशका दे खख मशे-मश सोचैत िलहँ जे , “सुनरता आ हरषाचार दु शूक लेल जँ हमरा एहश पती रहहतैक तऽ हम कतेक खुर रहब।” ई बात हम मशे-मश सोचलहँ ; आ शे हम आब सोचलहँ । मुदा हकिु ए हदशक बाद जखश हम चलैत रही आ एहह हवचार सभ पर हचुतश करै त रही तखश हम अपशा आप मे सोचैत भगवाशक एहह पारीक आदर करय लगलहँ ; कतेक कुलीश आ सुनर िलीह। 3 कशेक चललाक बाद शीद ु आहब गेल। आत् मा हमरा पकह़ कऽ दहहशा कात हदस लऽ गेल, जाहह ठाम सँ केओ शहह गुजरर सकैत िल। ई पाथरक बीचक एकटा साश िल, बहत ख़ा, आ पाहश लेल अगम। 4 हम एहह ठाम सँ गुजरर कऽ एकटा मैदाश मे आहब गेलहँ । ओतहह ठे हश पर खहस कऽ हम पभु सँ पाथ्शा करय लगलहँ आ अपश पाप सीकार करय लगलहँ । 5 जखश हम पाथ्शा कऽ रहल िलहँ तखश स् वग् खुहज गेल आ हम ओहह स् ती केँ दे खलहँ , जकरा हम लालच केशे रही, स् वग् सँ हमरा पराम कऽ रहल िल आ कहै त िल, “हे रमास, जय! हम ओकरा हदस तकैत उतर दे हलयहश, “महहला, अहाँ एतय की करै त िी?” ओ हमरा उतर दे लहथश, “हमरा परमेर् वरक समक अहाँ पर पापक आरोप लगाबय लेल उठाओल गेल अहि।” 6 महोदया, हम कहहलयहश, की अहाँ हमरा बुझा दे ब? शहह, ओ बजलीह, मुदा हम जे बात अहाँ केँ कहय जा रहल िी से सुशू। जे परमेर् वर स् वग् मे रहै त िहथ, आ सभ हकिु केँ रून सँ बशौशे

िहथ आ अपश पहवत मर् डलीक लेल बढा दे शे िहथ, ओ अहाँ पर कोहोत िहथ, कारर अहाँ हमरा हवरु पाप केलहँ । 7 हम हशका कहहलयहश, “हे महोदय, जँ हम अहाँ क हवरु पाप केलहँ तँ हमरा कह जे हम अहाँ केँ कतय, कोश ठाम, वा कहहया अहाँ सँ कोशो अयोग वा बेईमाश बात कहलहँ ? 8 की हम अहाँ केँ सहदखश सी जकाँ शहह माशैत िी? की हम अहाँ केँ सहदखश बहहश जकाँ आदर शहह केशे िी? तखश अहाँ हमरा हवरु एहह दु र् ट बात सभक कलशा हकएक करै त िी? 9 तखश ओ हमरा हदस मुसुराइत बजलीह, “अहाँ क हदय मे शटखटताक इचा उहठ गेल अहि। की अहाँ केँ ई कोशो अोलाह बात शहह बुझाइत अहि जे ोमा् ा​ाक हदय मे कोशो दु ष इचा उहठ जाय? 10 एहश लोकक लेल ई पाप अहि आ से बहत पैघ अहि। हकएक तँ ोम् मशुर्‍य जे ोाहम्क अहि से सोचैत अहि। जाबत ओ एशा करत आ सोझ चलैत रहत, ताबत ोरर पभु स् वग् मे अपश सभ काज मे हशका अशुकूल बशत। 11 मुदा जे सभ अपश मोश मे दु र् ट हवचार करै त अहि, ओ सभ अपशा केँ मृत् यु आ बुदी बशा लैत अहि। आ खास क' ओ सभ जे एहह सुसार सँ पेम करै त िहथ, आ अपश ोशक गौरव करै त िहथ, आ आबय बला शीक बात केँ परवाह शहह करै त िहथ। ओकर सभक आा​ा ऊपर-शीचाँ भटकैत िै क, आ कत’ ठीक करबाक चाही से शहह बुझल िै क। 12 ई बात ओहह लोक सभक अहि जे दु हवोा-हवचारक लोक सभ पभु पर भरोसा शहह करै त िहथ आ अपश जीवश केँ हतरसार आ उपेका करै त िहथ। 13 मुदा अहाँ पभु सँ पाथ्शा कर, तखश ओ अहाँ क पाप, अहाँ क समस घरक आ अपश सभ पहवत लोकक पाप केँ ठीक करताह। 14 जहहशा ओ ई बात बजलीह तहहशा आकार बुद भऽ गेल आ हम उदासी आ भय सँ हशगल गेलहँ । ओ मशे-मश कहै त िलहँ , “जँ पापक काररे ँ ई बात हमरा पर लगाओल जायत तँ हम कोशा उुार पाहब सकब?” 15 हम अपश अशेक आ पैघ पापक लेल पभु सँ कोशा हवशती कऽ सकब? हम कोश वचश सँ हशका सँ हवशती करब जे ओ हमरा पर दया करहथ? “ 17 एकटा बूहढया हाथ मे हकताब लऽ कऽ चमकैत वस मे आहब कऽ असगरे बैहस कऽ हमरा पराम कयलहश आ कहलहथश,


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

“हे रमास, जय! आ हम दु ख सँ भरल आ काहश रहल िलहँ , उतर दे हलयहश, “हाय, लेडी! 18 ओ हमरा कहलहथश, “हे हरमास, जे ोैय्वाश आ हवशम आ सहदखश हँ समुख रहबाक आदहत रखैत िलहँ , अहाँ हकएक दु खी िी? हम उतर दे हलयहश आ कहहलयहश, “महहला, हमरा पर एकटा उतम सी दारा अपमाश कयल गेल अहि, जे हमरा कहै त अहि जे हम ओकरा हवरु पाप केलहँ ।” 19 ओ उतर दे लहथश, “परमेर् वरक सेवक सँ एहश कोशो बात दू र रहय।” मुदा भ' सकैि जे ओकर इचा तोहर हदय मे उहठ गेल हो। हकएक तँ एहश हवचार परमेर् वरक सेवक सभ केँ पापक दोरी ठहराबैत अहि। 20 आ शे परमेर् वरक सेवक मे एहश घृहरत हवचार रहबाक चाही। मुदा खास क' हरमास, जे सभ दु ष काम-वासशा सँ अपशा केँ समारै त अहि, आ सभ सादगी सँ भरल अहि, आ बहत हशद्रता सँ भरल अहि। 21 मुदा परमेर् वर अहाँ पर ओतेक कोहोत शहह िहथ जे अहाँ सभक लेल ओतेक कोहोत शहह िहथ, जतेक हक अहाँ क घरक लोक परमेर् वर आ अपश माता-हपताक हवरु दु र् टता कयलहश। 22 आ एहह लेल अहाँ अपश पुत सभक पहत सेहक काररे ँ अपश घरक लोक केँ सलाह शहह दे लहँ , बल् हक ओकरा सभ केँ दु षतापूव्क जीब’ दे हलयैक। एहह लेल परमेर् वर अहाँ पर कोहोत िहथ, मुदा अहाँ क घर मे कयल गेल सभटा दु र् टता केँ ओ ठीक करताह।” कारर, हशका लोकहशक पाप आ अोम्क काररे ँ अहाँ लौहकक काज मे पूर् रपेर समाप भ' गेल िी। 23 मुदा आब परमेर् वरक दया अहाँ पर आ अहाँ क घर पर दया कयलहश आ अहाँ केँ बहत सान्शा दे लहश। खाली तोहर बात, भटकब शहह, बल् हक समबुखु रह आ अपश घर केँ आराम हदयौक। 24 जहहशा मजदू र अपश काज हशकाहल कऽ ओकरा चढबैत अहि। तहहशा अहाँ सभ हदश ओहह बात केँ हसखाबैत रहब जे बस एकटा पैघ पाप केँ काहट दे ल गेल अहि। ते ँ अपश पुत सभ केँ उपदे र दे ब शहह िो़ू, हकएक तँ पभु जशैत िहथ जे ओ सभ मश सँ पशाताप करत आ जीवशक पुसक मे हलखल जायत। 25 ई बात कहह कऽ ओ हमरा सुग जोह़ दे लहथश। की अहाँ हमरा पढब सुशब?—हम हशका उतर दे हलयहश, लेडी, हम करब। 26 ओ बजलीह, सुशू। आ पोथी खोलैत ओ पढलीह, गौरवराली, महाश आ अद् भुत, एहश बात जे हम अपश सृहत मे शहह राखख सकलहँ । कारर, ओ सभ भयावह वचश िल, जे केओ सहश शहह क' सकैत िल। 27 मुदा हम हशकर अुहतम बात हमरा मोश मे राखख दे हलयैक। कारर, ओ सभ कम िल, आ हमरा सभक लेल बहत उपयोगी िल। 28 दे खू पराकमी पभु , जे अपश अदृ रख् आ अपश उतम बुखु सँ सुसार केँ बशौलहश, आ अपश गौरवराली सलाह सँ अपश सृहष केँ सुनर बशौलहश, आ अपश रख्क वचश सँ सग् केँ खसर कयलहश आ पाहश पर पृथी केँ शीवु कयलहश। आ एहह रख्राली गुर सँ अपश पहवत कलीहसया केँ साहपत कयलहश, जकरा ओ आरीवा् द दे शे िहथ | 29 दे खू, ओ आकार, पहा़, पहा़ आ समुद सभ केँ हटा दे त। हशकर चुशल गेल लोकक लेल सभ बात सष कयल जायत। जाहह सँ ओ हशका सभ केँ ओहह पहतता केँ बहत आदर आ

हर्क सुग दे हथश। जँ ओ सभ परमेर् वरक आता सभक पालश करत, जे ओकरा सभ केँ बहत हवर् वास सँ भेटल अहि।” 30 पहढ कऽ ओ कुस् पर सँ उहठ गेलीह। चाररटा युवक आहब कऽ कुस् केँ पूब हदस ल’ गेल। 31 ओ हमरा अपशा लग बजौलहश आ हमर िाती केँ िु हब कऽ कहलहथश, “की हमर पढब अहाँ केँ शीक लागल? हम उतर दे हलयहश, लेडी, ई अुहतम बात हमरा पसर करै त अहि; मुदा पहहशे जे भेल से कठोर आ कहठश िल। 32 ओ हमरा कहलहथश, “ई सभ अुहतम बात ोम् लोकक लेल अहि, मुदा उपरो् बात हवदोही आ गैर-यहदी सभक लेल अहि।” 33 जखश ओ हमरा सुग गप क’ रहल िलीह तखश दू गोटे हशका कान पर ल’ क’ पूब हदस चहल गेलाह जतय कुस् िल। 34 ओ हँ सी-खुरी सँ चहल गेलीह। जाइत काल हमरा कहलहथश, “हम्स, हँ सैत रह।” दहष 2 1 जखश हम कुमाक बाट पर रही, लगभग ओही समय जखश हम एक साल पहहशे गेल रही, तखश हमरा पहहशे जे दर्श िल, से मोश प़य लगलहँ । आ फेर ओ आत् मा हमरा लऽ गेल, आ हमरा ओही साश पर लऽ गेल, जतय हम एक साल पहहशे िलहँ । 2 जखश हम ओहह साश पर पहँ चलहँ तँ हम ठे हश पर खहस प़लहँ आ पभु सँ पाथ्शा करऽ लगलहँ आ हशकर शामक महहमा करऽ लगलहँ जे ओ हमरा योग माशैत िहथ आ हमर पूव् पाप हमरा पकट कयलहश। 3 जखश हम पाथ्शा सँ उठलहँ तँ दे खलहँ जे हमरा सामशे ओहह बुहढया केँ दे खलहँ , हजशका हम अुहतम वर् सँ दे खशे िलहँ , ओ एकटा हकताब मे चलैत आ पढै त िलीह। 4 ओ हमरा कहलहथश, “की अहाँ ई सभ बात परमेर् वरक चुशल लोक सभ केँ कहह सकैत िी?” हम उतर दे हलयहश आ कहहलयहश, “लेडी, एतेक बात हम अपश सृहत मे शहह राखख सकैत िी, मुदा पोथी हदअ, हम हलखख दे ब।” 5 ओ कहै त िहथ जे एकरा ल’ हलअ आ दे खू जे अहाँ एकरा फेर सँ हमरा वापस कऽ दै त िी। 6 जहहशा हमरा ई भेटल िल, हम खेतक एक ठाम जा कऽ एकएकटा अकरक पहतहलहप हलखलहँ , कारर हमरा कोशो अकर शहह भेटल। 7 जखश हम हकताब मे हलखल बात समाप केलहँ तखश अचाशक ओ हकताब हमरा हाथ सँ बाहर हशकहल गेल, मुदा हम ओकरा शहह दे खलहँ । 8 पनह हदशक बाद जखश हम उपवास कऽ कऽ पभु सँ हवर्‍वासपूव्क हवशती केलहँ तँ हमरा ओहह लेखशक ताश हमरा पगट भेल। आब लेखश ई िल : १. 9 अहाँ क वुर, हे हरमास! पभुक हवरु पाप केशे िहथ आ हशका सभक पैघ दु षताक काररे ँ अपश माता-हपता केँ ो​ोखा दऽ दे शे िहथ। आ ओकरा सभ केँ अपश माता-हपताक हवशासघाती कहल गेल अहि, आ अपश हवशासघात मे आगू बढल अहि। 10 आब ओ सभ अपश आश पाप मे अशीलता आ अपश शटखटताक अरु​ुता मे जोह़ दे लक। मुदा अहाँ एहह सभ बात सँ अपश पुत सभ केँ डाँ हट हदयौक। आ तोहर पती, जे तोहर बहहश हे तीह। आ ओकरा अपश जीह परहे ज करब सीखय, जाहह सँ ओ हशुदा करै त अहि।


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

11 जखश ओ ई सभ बात सुशत तखश ओ अपशा केँ सुयम कऽ लेतीह आ दया पाहब लेतीह। 12 जखश अहाँ हशका सभ केँ एहह बात सभ सँ हशना करब, जे पभु अहाँ केँ पगट करबाक आता दे शे िहथ, तखश हशका सभ केँ सेहो हरका दे ल जायत। 13 तखश हशका सभक पाप कमा कयल जायत, जे ओ सभ एखश ोरर केशे िहथ आ आइ ोरर पाप केहशहार सभ पहवत लोकक पाप कमा कयल जायत। जँ ओ सभ मोश सँ पशाताप करत, आ अपश हदय सँ सभ सुदेह केँ दू र करत। 14 हकएक तँ परमेर् वर अपश चुशल लोकक हवरय मे अपश महहमाक रपथ गहर कएशे िहथ जे जँ केओ एखशह पाप करत तँ ओकरा उुार शहह भेटतैक। 15 ोम् लोकक पशातापक अुत होइत िै क। पशाताप के हदश सब सुत के पूरा होय जाय िै ; मुदा गैर-यहदी सभक लेल अुहतम हदश ोरर पशाताप होइत िै क। 16 ते ँ अहाँ मर् डली पर काज करयवला सभ केँ कहह हदअ। जाहह सँ ओ सभ अपश बाट केँ ोाहम्कता मे ववखसत करहथ, जाहह सँ ओ सभ पहतता केँ बहत महहमा सँ पूर् रपेर गहर करहथ। 17 ते ँ अहाँ सभ ोाहम्कताक काज करऽ वला सभ दढतापूव्क ठाढ रह आ ओकरा पूरा करै त रह, जाहह सँ अहाँ सभक हवदा होबय बला पहवत स् वग्दूत सभक सुग हो। 18 अहाँ सभ ोन िी, जे सभ ओहह पैघ परीका केँ सहश करत आ जे केओ अपश जाश केँ अनार शहह करत। 19 परमेर् वर अपश पुतक शाम सँ रपथ खा लेशे िहथ जे जे केओ अपश पुत आ हशका अस् वीकार करत, ओ अपश जाश सँ डे रा कऽ आबय बला सुसार मे सेहो ओकरा असीकार करत। 20 मुदा जे सभ हशका कहहयो असीकार शहह करत, ओ अपश अतहोक दया सँ हशका सभक अशुकूल बशत। 21 मुदा अहाँ , हे हरमास! अपश बेटा सभ जे अोलाह केशे िहथ, तकरा शहह मोश पा़ू, आ शे अपश बहहशक उपेका कर, बल् हक ई धाश राखू जे ओ सभ अपश पूव्क पापक सुोार करहथ। 22 जँ अहाँ हशका सभक अोलाह काज पर धाश शहह दे ब तँ हशका सभ केँ एहह हरका सँ हरका भेटतहश। 23 हकएक तँ अोलाहक सरर करला सँ मृतु होइत िै क, मुदा ओकरा हबसरर गेला सँ अशन जीवश। 24 मुदा अहाँ सभ, हे सुनासी लोकहश! तोहर घरक अपराोक काररे ँ बहत रास साु साररक सुकट सँ गुजरल िी, हकएक तँ अहाँ ओकरा सभ केँ उपेका कऽ दे लहँ जे अहाँ क शहह िल। आ अहाँ अपश पैघ काज मे पूर् रपेर डूबल िी। 25 तथाहप, एहह काररे ँ अहाँ उुार पाहब जायब, जे अहाँ जीहवत परमेर् वर सँ शहह हहट गेल िी, आ अहाँ क सादगी आ एकल कहशषता अहाँ केँ सुरहकत राखत, जँ अहाँ ओहह मे रहब। 26 हँ , ओ सभ एहश सभ केँ उुार करत जे एहश काज करै त अहि आ हशद्रता आ सादगी मे चलैत अहि। 27 जे सभ एहह तरहक लोक सभ अोम्क हवरो​ो मे हवजयी होयत आ अशन जीवश ोरर रहत। 28 ोन अहि जे सभ ोाहम्कता करै त अहि, ओ सभ अशन काल ोरर शष शहह होयत। 29 मुदा अहाँ कहब जे , “एकटा पैघ परीका आहब रहल अहि।” जँ शीक लागय तँ फेर ओकरा शकारब।

30 पभु हशका हदस घुरहशहार सभक लग मे िहथ, जेशा हक हे लम आ मोदलक हकताब मे हलखल अहि, जे जुगल मे इसाएलक लोक सभ केँ भहवषवारी केशे िलाह। 31 यौ भाइ लोकहश, जखश हम सुतल रही तखश एकटा शीक युवक दारा हमरा ई बात पगट कयल गेलहश जे, “अहाँ ओहह बुहढयाक बारे मे की सोचैत िी, हजशका सँ अहाँ केँ ई पुसक भेटल अहि। ओ के िहथ ? हम जवाब दे हलयहश, एकटा हसहबल। 32 अहाँ गलती कऽ रहल िी, ओ कहलहश, “ओ शहह िहथ।” हम जबाब दे हलयहश, तखश ओ के िहथ सर? ओ हमरा उतर दे लहथश, “ई परमेर् वरक मर् डली अहि।” 33 हम हशका कहहलयहश, “तखश ओ बूढ हकएक दे खाइत िहथ?” ओ कहलहश जे , ओ एहह लेल बुहढया िहथ, कारर ओ सभ सृहष मे पहहल िलीह आ सुसार हशका लेल बशल िलहश। 34 एकर बाद हम अपश घर मे घर मे एकटा दर्श दे खलहँ आ ओ बुहढया, जकरा हम पहहशे दे खशे िलहँ , हमरा लग आहब पुिलहथश जे की हम हशकर हकताब एखश ोरर मर् डलीक बुजुग् सभ केँ पहँ चा दे शे िी? हम उतर दे हलयहश जे एखश ोरर शहह भेल अहि। 35 ओ उतर दे लहथश, “अहाँ शीक काज केलहँ , हकएक तँ हमरा हकिु आओर बात कहबाक अहि, मुदा जखश हम सभटा बात समाप कऽ लेब तखश चुशल लोक सभ ओकरा सष बुहझ जेताह।” 36 दू टा हकताब हलखख कऽ एकटा केमेट आ एकटा गारे केँ पठा हदयौक। केमेट ओकरा परदे र मे पठा दे तैक, हकएक तँ ओकरा ई करबाक अशुमहत िै क। 37 मुदा अहाँ एहह शगर मे मर् डलीक बूढ-पुराश सभक सुग पढब। दहष 3 1 भाइ लोकहश, हम जे दर्श दे खलहँ से ई िल। 2 हम बेर-बेर उपवास कऽ कऽ पभु सँ पाथ्शा केशे रही जे ओ हमरा ओहह पगटीकरर केँ पगट करहथ जे ओ बुहढया दारा हमरा दे खबाक पहतता केशे िलाह। ओही राहत ओ हमरा पकट भेलीह आ हमरा कहलहथश। 3 अहाँ एहह तरहे ँ अपशा केँ कष दै त िी आ सभ हकिु जाशबाक एतेक इचा रखैत िी, ते ँ खेत मे आहब जाउ, जतय अहाँ चाहै त िी, आ लगभग िठम घुटा मे, हम अहाँ केँ पकट होयब आ अहाँ केँ जे दे खब से दे खा दे ब। 4 हम हशका सँ पुिहलयहश, “महहला, खेतक कोश भाग मे? ओ उतर दे लहथश, जतय चाहब, केवल शीक आ हशजी जगह चुशू। हम बाजब आ ओकरा ओ जगह बताबऽ सँ पहहशे ओ हमरा कहलहथश, “हम जतय चाहब ओतय आहब जायब।” 5 एहह लेल, भाइ लोकहश, हम खेत मे िलहँ आ समयक पालश करै त ओहह साश पर पहँ चलहँ जतय हम हशका आबय लेल हशोा् ररत केशे रही। 6 हम दे खलहँ जे एकटा चौकी राखल अहि। ओ एकटा हलशेशक तहकया िल, आ ओकर ऊपर महीश हलशेशक आवरर पसरल िल। 7 जखश हम ई सभ बात एहह तरहे ँ कमबु होइत दे खलहँ आ ओहह ठाम ककरो शहह िल, तखश हम आशय्चहकत भऽ गेलहँ , आ हमर केर ठाढ भ’ गेल आ एक तरहक भयावहता हमरा पकह़ लेलक। कारर हम असगर िलहँ ।


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

8 मुदा अपशा मोश मे आहब गादक महहमा केँ मोश पाह़ आ साहस कऽ कऽ हम ठे हश पर खहस प़लहँ आ पहहशे जकाँ फेर अपश पाप सीकार करय लगलहँ । 9 जखश हम ई काज कऽ रहल िलहँ तखश ओ बुहढया ओहह िह युवक सभक सुग ओतऽ आहब गेलीह, हजशका हम पहहशे दे खशे िलहँ , आ हमरा पाथ्शा करै त काल हमरा पािू ठाढ भ’ गेलीह आ हमरा पाथ्शा करै त आ पभुक समक अपश पाप सीकार करै त सुशलहश। 10 हमरा िूहब कऽ ओ बजलीह, “अखश मात अपश पापक लेल पाथ्शा करब िोह़ हदयौक। ोाहम्कताक लेल सेहो पाथ्शा कर, जाहह सँ अहाँ केँ ओकर हकिु हहसा अपश घर मे भेटय।” 11 ओ हमरा ओहह ठाम सँ उठा कऽ हमरा हाथ पकह़ कऽ आसश पर अशलहश। आ युवक सभ केँ कहलहथश। जाउ, आ बशाउ। 12 जहहशा ओ सभ चहल गेलाह आ हम सभ असगर भऽ गेलहँ तँ ओ हमरा कहलहथश, “एतय बैसू।” हम हशका उतर दे हलयहश : लेडी, जे पैघ िहथ हशका पहहशे बैसय हदयौक। ओ उतर दे लहथश, जेशा हम बोली लगाबैत िी तेशा बैस जाउ। 13 जखश हम दहहशा कात बैसय चाहै त िलहँ तखश ओ हमरा शहह िो़लीह, बल् हक हमरा हाथ सँ एकटा सुकेत दे लहश जे हम बामा कात बैसब। 14 जखश हम सोचैत िलहँ जे ओ हमरा दहहशा कात बैसय शहह दे हथश, तखश ओ हमरा कहलहथश, “हम्स, अहाँ हकएक दु खी िी? 15 जे साश दहहशा कात अहि से हशका सभक अहि जे सभ पहहशे सँ परमेर् वर लग पहँ हच गेल िहथ आ हशकर शामक काररे ँ कष भोहग रहल िहथ। मुदा अहाँ बशत हशका सभक सुग बैसबा सँ पहहशे अहाँ क लेल एखश बहत हकिु बचल अहि। 16 मुदा जेशा अहाँ अपश हशशलता मे करै त िी, तेशा अहाँ हशका सभक सुग बैसब, जेशा आश सभ लोक अपश काज करै त िहथ आ जे हकिु सहलहश से सहै त िहथ। 17 हम हशका कहहलयहश, “महहला, हम जाशब जे हशका सभ केँ की कष भेलहश? तखश सुशू, ओ बजलीह: जुगली जाशवर, को़ा, जेल, आ ओकर शामक लेल कूस। 18 एहह लेल पहवतताक दहहशा हाथ हशका सभक अहि आ जे सभ परमेर् वरक शामक लेल कष उठाओत। मुदा बामा बाँ कीक अहि। 19 मुदा वरदाश आ पहतता दु शूक अहि, दहहशा कात आ बामा कातक। केवल ई जे दहहशा कात बैसल हशका सभक हकिु महहमा आश सभ सँ ऊपर िहश। 20 मुदा अहाँ हशका सभक सुग दहहशा कात बैसबाक इचा रखैत िी, मुदा अहाँ क दोर बहत अहि। मुदा अहाँ अपश दोर सँ रु​ु भऽ जायब, जेशा हक सभ सुदेह शहह करयवला सभ आइ ोरर कयल गेल सभ पाप सँ रु​ु भऽ जायत। 21 ई बात कहह कऽ ओ चहल जाइत िलीह। 22 ते ँ हम हशका पयरक सोझाँ खहस पह़ कऽ पभुक लेल हशका सँ हवशती करऽ लगलहँ जे ओ हमरा ओहह दर्श केँ दे खाबय जे ओ पहतता केशे िलीह। 23 फेर ओ हमरा हाथ पकह़ कऽ बामा कातक आसश पर बैसा दे लहश। एकटा चमकैत ि़ी उठा कऽ हमरा कहलहथश, “की अहाँ ओ महाश वसु दे खैत िी?” हम जबाब दे हलयहश, लेडी, हमरा हकिु शहह बुझाइत अहि। 24 ओ उतर दे लहथश, “की अहाँ केँ एकटा पैघ बुज् शहह दे खाइ प़ै त अहि जे पाहश पर चमकैत चौकोर पाथर सँ बशल अहि?”

25 हकएक तँ ओकरा सुग आयल एहह िहटा युवक सभ चौक पर बुज् बशौशे िल। 26 मुदा कतेको हजार लोक पाथर अशलक। हकयो गहीरु मे सँ हशकाहल लेलक, हकयो जमीश सँ लऽ कऽ िह युवक केँ दऽ दे लक। आ ओ सभ ओकरा सभकेँ लऽ कऽ बशौलक। 27 जे पाथर गहीरु मे सँ हशकालल गेल िल, तकरा सभ केँ भवश मे राखख दे लक। कारर, ओ सभ पाहलर कएल गेल िल, आ ओकर सभक चौकोर एक दोसराक ठीक-ठीक जवाब दै त िल, आ ते ँ एक-दोसर केँ एतेक तरहे ँ जो़ल गेल िल जे ओ सभ कतय जो़ल गेल िल, ओतय कोशो जगह शहह दे खल जा सकैत िल, एतेक ोरर जे पूरा टावर एक पाथरक बशल बुझाइत िल। 28 मुदा जमीश पर सँ उतारल गेल आश पाथरक हकिु केँ ओ सभ असीकार कऽ दे लक आ हकिु केँ भवश मे हफट कऽ दे लक। 29 जे सभ असीकार कयल गेल िल, तकरा सभ केँ काहट कऽ बुज् सँ दू र फेहक दे लक। मुदा कतेको आओर टावरक चार कात प़ल िल, जकर ओ सभ भवश मे कोशो उपयोग शहह केलक। 30 एहह मे सँ हकिु खुरदु रा िल, हकिु मे दरार िल, हकिु उजर आ गोल िल, जे बुज्क हशमा् रक लेल उहचत शहह िल। 31 मुदा हम दे खलहँ जे आश पाथर सभ बुज् सँ दू र फेकल गेल आ राजमाग् मे खहस प़ल, मुदा बाट मे शहह चलैत रहल, मुदा बाट सँ मरभूहम मे गु़हक गेल। 32 हम दोसर लोक केँ आहग मे खहस कऽ जरै त दे खलहँ । दोसर लोक पाहश लग खहस प़ल, तइयो ओहह मे शहह गु़हक सकल, यदहप पाहश मे खसबाक बहत इचा िल। 33 जखश ओ हमरा ई सभ बात दे खौशे िलीह तखश ओ चहल गेल रहहतहथ, मुदा हम हशका कहहलयहश, “हे महोदय, हमरा ई सभ दे खख कऽ ई सभ बातक अथ् शहह बुझबा मे की फायदा?” 34 ओ हमरा उतर दे लहथश, “अहाँ बहत ोूत् िी, जे टावर सँ सुबुहोत बात सभ केँ जाशय चाहै त िी। हँ, हम कहहलयहश, महोदया, जाहह सँ हम हशका सभ केँ भाइ सभक समक सुशाबी, आ ओ सभ आशखनत भ’ जाय आ ई सभ बात सुहश परमेर् वरक महहमा बहत महहमा सँ करहथ। 35 तखश ओ बजलीह, “सते बहतो लोक हशका सभक बात सुशत आ जखश सुशत तखश हकयो आशखनत होयत आ हकयो काशत।” आ तैयो ई सभ सेहो जँ पशाताप करताह तँ सेहो आशखनत हे ताह। 36 ते ँ सुशू जे हम बुज्क दषानक हवरय मे की कहब, आ तकर बाद आब हमरा सँ पगटीकररक हवरय मे कोशो आगह शहह कर। 37 हकएक तँ ई सभ पगटीकरर पूरा भऽ गेल अहि। मुदा अहाँ पकटीकररक इचा शहह िो़ू, कारर अहाँ बहत जररी िी। 38 जँ अहाँ जे बुज् बशबैत दे खैत िी, से हम सयु िी, अथा् त मर् डली, जे एखश आ एखश ोरर अहाँ केँ पकट भेल अहि। ते ँ अहाँ बुज्क हवरय मे की चाहै त िी से पूिू, तखश हम अहाँ केँ ई पगट कऽ दे ब जाहह सँ अहाँ पहवत लोक सभक सुग आशखनत होयब।” 39 हम हशका कहहलयहश, “महहला, अहाँ हमरा एक बेर एहह सभ बातक पगटीकरर अहाँ सँ गहर करबाक योग बुझशे िलहँ , ते ँ हमरा ई सभ बात बताउ।” 40 ओ हमरा उतर दे लहथश, “जे हकिु अहाँ केँ पगट करबाक योग अहि से पगट होयत।” 41 हम हशका सँ पुिहलयहश, “महहला, पाहशक ऊपर बुज् हकएक बशल अहि? ओ उतर दे लहथश, “हम पहहशे अहाँ केँ कहशे रही जे


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

अहाँ बहत बुखुमाश िलहँ जे भवशक हवरय मे लगश सँ पूिताि करब, ते ँ अहाँ केँ सत भेटत।” 42 ते ँ सुशू जे बुज् पाहश पर हकएक बशल अहि। कारर, एकर शीवु सव्रख्माश आ समाशजशक शामक वचश सँ होइत अहि, आ परमेर् वरक अदृ रख् आ गुर दारा सहारा दे ल गेल अहि | 43 हम हशका कहहलयहश, “ई सभ बात बहत परुसशीय अहि। मुदा, लेडी, ओ िह टा युवक के िहथ जे हशमा् र करै त िहथ? 44 ओ बजलीह, ओ सभ परमेर् वरक स् वग्दूत सभ िहथ, जे सभ पहहशे हशयु् कयल गेल िहथ आ हशका सभ केँ परमेर् वर अपश सभ पारी केँ सौुहप दे शे िहथ जे ओ सभ ओकरा सभ केँ फेम करहथ आ ओकरा सभक हशमा् र करहथ आ ओकरा सभ पर रासश करहथ। कारर, एहह सभ दारा टावरक हशमा् र समाप भ' जायत। 45 आ बाँ की के अहि जे ओकरा सभ केँ पाथर अशैत अहि? 46 ओ सभ परमेर् वरक पहवत स् वग्दूत सेहो िहथ। मुदा दोसर एहह सभसँ बेसी उतम अहि। एहह लेल जखश बुज्क पूरा हशमा् र समाप भऽ जायत तखश सभ गोटे बुज्क बगल मे एक सुग भोज करत आ परमेर् वरक महहमा करत, हकएक तँ बुज्क हशमा् र समाप भऽ गेल अहि। 47 हम हशका सँ पुिहलयहश, “हम पाथरक खसहत आ ओकर अथ् बुझब जे ई की अहि?” 48 ओ हमरा कहलहथश, “की अहाँ सभ सँ शीक िी जे ई बात अहाँ केँ पगट कयल जाय?” हकएक तँ अहाँ सँ पहहशे आ अहाँ सँ शीक आश लोक सभ अहि, हजशका सामशे ई सभ दर्श पगट होयत। 49 तैयो परमेर् वरक शामक महहमामुडश करबाक लेल, जे सभ सुदेह करै त िहथ आ मोश मे सोचैत िहथ जे ई सभ बात एहश अहि वा शहह, ताहह लेल अहाँ केँ पगट कयल गेल अहि आ पगट होयत। 50 ओकरा सभ केँ कहह हदयौक जे ई सभ बात सत् य अहि आ ओकरा सभ मे एहश कोशो बात शहह अहि जे सत् य शहह अहि। मुदा सभ दढ आ सही मायशे मे साहपत अहि। 51 तखश भवश मे पाथरक हवरय मे सुशू। 52 चौकोर आ उजर पाथर जे अपश जो़ मे ठीक-ठीक एक सुग होइत अहि, ओ अहि पेररत, हबरप, वैद आ सेवक, जे परमेर् वरक दयाक दारा भीतर आहब गेल िहथ, आ रासश कयलहश, आ परमेर् वरक चुशल लोक सभ केँ पहवत आ हवशमतापूव्क हरका दे लहश आ सेवा कयलहश, जे सभ सुहत गेल िहथ आ एखश ोरर बचल िहथ। आ हशका सभक सुग सहदखश सहमत रहलाह अहि, आ अपशा मे राखन रखशे िहथ, आ एकदोसर केँ सुशशे िहथ। 53 जाहह काररे ँ टावरक हशमा् र मे हशका लोकहशक जो़ ठीकठीक एक दोसरा सँ हमलैत अहि। “ 55 हे महोदया, आश पाथर की अहि जे पृथ् वी पर आशल गेल अहि? हमरा बुझल रहै त जे ओ सभ की िहथ। 56 ओ उतर दे लहथश, “जे सभ जमीश पर प़ल अहि आ पाहलर शहह कयल गेल अहि, ओ सभ परमेर् वर केँ मुजूर कयलहश अहि, हकएक तँ ओ सभ पभुक हशयम मे चलैत अहि आ हशकर आता मे अपश बाट चलबैत अहि।” 57 जे सभ बुज्क हशमा् र मे आहश कऽ राखल जाइत अहि, से सभ हवर् वास मे रहहशहार युवा आ हवशासी अहि। आ एहह सभ

केँ स् वग्दूत सभ शीक काज करबाक सलाह दै त िहथ, कारर ओ अोम् हशका सभ मे शहह भेटैत अहि। 58 मुदा ओ सभ के िहथ हजशका सभ केँ असीकार कऽ कऽ बुज्क कात मे राखख दे लहश? 59 ओ सभ एहश िहथ जे पाप कएशे िहथ आ पशाताप करबाक लेल तैयार िहथ। जाहह काररे ँ ओ सभ बुज् सँ दू र शहह फेकल जाइत अहि, कारर जँ ओ सभ पशाताप करत तँ ओ सभ भवशक लेल उपयोगी होयत। 60 ते ँ जे सभ पशाताप करऽ वला अहि, से सभ जँ पशाताप करत तँ हवर् वास मे मजगूत भऽ जायत। अथा् त जँ ओ सभ एखश पशाताप करहथ, जखश हक टावर बशैत अहि। कारर जँ भवश समाप भ' जायत तखश ओकरा सभ केँ राखय लेल कोशो जगह शहह रहत, मुदा ओकरा सभ केँ असीकार कयल जायत। कारर ओकरा खाली ई सौभाग िै जे आब टावर मे बाहर भ' जेतै। 61 मुदा की अहाँ सभ जशैत िी जे ओ सभ के िहथ जे काहट कऽ बुज् सँ दू र फेहक दे ल गेल? लेडी, हम कहहलयहश, हम एकर इचा रखैत िी। 62 ओ सभ अोम्क सश् ताश िहथ, जे मात पाखुड मे हवर् वास करै त िलाह, मुदा अपश दु र् ट रस् ता सँ शहह हहट गेलाह। एहह काररे ँ हशका सभ केँ उुार शहह भेटतहश, हकएक तँ ओ सभ अपश पापक काररे ँ भवश मे कोशो उपयोगी शहह िहथ। 63 ते ँ पभुक को​ो आ ओकरा सभ पर कोहोत करबाक काररे ँ ओ सभ काहट कऽ दू र फेहक दे ल गेल अहि। 64 आश पाथरक बहत रास पाथर जे बुज्क चारकात राखल दे खलहँ, मुदा भवश सभ मे शहह राखल गेल। जे उब़-खाब़ अहि, ओ सभ अहि जे सत केँ जशैत अहि, मुदा ओहह मे शहह बशल अहि, आ शे सुत सभ सँ जु़ल अहि, आ ते ँ बेकार अहि। 65 जकरा सभ मे दरार अहि, से सभ एक-दोसरक हवरु अपश हदय मे मतभेद रखैत अहि आ राखन मे शहह रहै त अहि। जे अपश भाइ सभक सुग उपखसत भेला पर हमतवत होइत िहथ, मुदा एक-दोसर सँ हवदा होइते हशकर सभक दु षता एखशो हशका सभक हदय मे बशल रहै त िहश। 66 जे सभ अपुग आ िोट अहि, से सभ सते हवर् वास कएशे अहि, मुदा एखशो बहत हद तक दु र् टता सँ भरल अहि। 67 मुदा, उजर आ गोल-गोल पाथर की अहि, आ जे टावरक हशमा् रक लेल उहचत शहह अहि? 68 ओ हमरा उतर दे लहथश, “अहाँ कतेक हदश ोरर मूख् आ बेबुहशयाद रहब, सभ हकिु पूिब आ हकिु शहह बुझब? 69 ओ सभ एहश िहथ जे सते हवर् वास रखैत िहथ, मुदा एहह सुसारक ोश-समहत सँ ोारर करै त िहथ। एहह लेल जखश कोशो तरहक हवपहत उतर होइत अहि, तखश ओ सभ अपश ोशदौलत आ कारोबारक काररे ँ पभुक असीकार करै त िहथ। 70 हम हशका कहहलयहश, “ई सभ पभुक लेल कहहया लाभाथ् होयत?” ओ कहै त िहथ जे जखश हशका लोकहशक ोश-समहत कहट जायत, जाहह मे ओ सभ आशखनत भ' जेताह, तखश ओ सभ पभुक लेल हशकर हशमा् रक लेल लाभदायक होयत। 71 हकएक तँ जहहशा गोल-गोल पाथर जा ोरर ओकरा काहट कऽ हकिु शहह फेहक दे ल जायत, तकर पैघ भाग चौकोर शहह भऽ सकैत अहि, तहहशा एहह सुसार मे ोहशक लोक सभ, जाबत ोरर ओकर ोशक कटौती शहह कयल जायत, पभुक लेल लाभकारी शहह भऽ सकैत अहि। 72 ई बात अपश अशुभव सँ सीखू। जखश अहाँ ोहशक िलहँ तखश अहाँ बेकार िलहँ । मुदा आब अहाँ लाभदायक िी आ


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

ओहह जीवशक लेल योग िी जे अहाँ उठौशे िी। हकएक तँ अहाँ सेहो एक बेर ओहह पाथर मे सँ एक िलहँ । 73 रहल बाँ की पाथर जे अहाँ बुज् सँ दू र फेहक कऽ बाट मे दौ़ै त दे खलहँ आ बाट सँ बाहर मरभूहम मे खहस प़ल, ओ सभ एहश अहि जे सते हवशास कएशे अहि, मुदा अपश सुदेहक काररे ँ सचा बाट िोह़ दे लक, ई सोहच जे ओकरा सभ केँ शीक बाट भेहट सकैत अहि। मुदा ओ सभ भटकैत अहि आ दयशीय अहि, उजा़ बाट मे जाइत अहि। 74 तखश जे पाथर आहग मे खहस प़ल आ जरर गेल, ओ सभ ओहह पाथर सभ अहि जे जीहवत परमेर् वर सँ सदाक लेल हवदा भऽ गेल अहि। आ शे हशका सभक हदय मे पशाताप करबाक बात कहहयो अबैत िहश, जे सेह ओ सभ अपश काम-वासशा आ दु षता सभ केँ सहै त िहथ जे ओ सभ करै त िहथ। 75 आब ओ सभ की अहि जे पाहश लग खहस प़ल आ पाहश मे शहह गु़हक सकल? 76 ओ सभ एहश िहथ जे वचश सुशशे िहथ आ पभुक शाम मे बपहतस् मा लेबाक लेल तैयार िलाह। मुदा सत जे महाश पहवतताक आवृकता अहि ताहह पर हवचार करै त अपशा केँ हहट कऽ फेर सँ अपश दु ष वासशाक पालश कयलहश। 77 एहह तरहे ँ ओ टावरक वाया समाप केलहश। 78 मुदा हम एखशो तताल होइत हशका सँ पुिहलयहश, “की ओहह सभ पाथर पर पशाताप करबाक अशुमहत अहि जे एहह तरहे ँ फेकल जाइत अहि?” आ टावरक हशमा् रक अशुकूल शहह िल; आ की हशका सभ केँ एहह बुज् मे जगह भेटतहश? 79 ओ बजलीह, ओ सभ पशाताप क’ सकैत िहथ, मुदा एहह बुज् मे शहह आहब सकैत िहथ। मुदा ओकरा सभ केँ बहत शीचाँ राखल जायत, आ एकर बाद ओ सभ दु ःखखत भ’ क’ अपश पापक हदश पूरा क’ लेत। 80 एहह काररे ँ ओ सभ दू र भऽ जेताह, हकएक तँ ओ सभ ोाहम्कताक वचश गहर कएशे िहथ। 81 मुदा जँ हशका सभक हदय मे ई ताश शहह रहतहश तँ हशका सभक हदयक कठोरताक काररे ँ उुार शहह भेटतहश। 82 हम हशका सँ एहह सभ बातक हवरय मे पूहि कऽ कहलहथश, “की अहाँ आओर हकिु दे खय चाहै त िी?” आ दे खबाक इचा होइत हम मुँह पर बहत हँ समुख भ गेलहँ । 83 ओ हमरा हदस घुहम कऽ कशेक मुसुराइत हमरा कहलहथश, “की अहाँ सातटा स् ती केँ टावरक चारकात दे खैत िी?” लेडी, हम कहहलयहश, हम हशका सभ केँ दे खैत िी। 84 ओ उतर दे लहथश जे एहह बुज् केँ पभुक आताक अशुसार हशका सभक दारा सहारा दे ल गेल अहि। 85 ओहह मे सँ पहहल जे अपश हाथ सँ पक़शे अहि, ओकरा हवशास कहल जाइत िै क, ओकरा दारा चुशल गेल लोक सभक उुार होयत। अहगला, जे कहटबु अहि, आ पुरर सश लगैत अहि, ओकर शाम अहि परहे ज: ओ आसाक बेटी अहि। 86 ते ँ जे केओ हशकर पािाँ चलत, से जीवश भरर सुखी रहत, हकएक तँ ओ सभ अोलाह काज सँ परहे ज करत, ई माशैत जे जँ ओ सभ कामुकता सँ अपशा केँ समारत तँ ओ अशन जीवशक उतराहोकारी होयत। आ की, लेडी, हम कहहलयहश, बाकी पाँ च गोटे ? 87 ओ उतर दे लहथश, ओ सभ एक-दोसरक बेटी िहथ। ओहह मे पहहल केँ सादगी कहल जाइत िै क; अहगला मासूहमयत; तेसर हवशय; तखश अशुरासश; आ सभसँ अुहतम अहि दाश। ते ँ जखश

अहाँ हशका सभक मायक काज पूरा कऽ लेब तखश सभ काज कऽ सकब। 88 लेडी, हम कहहलयहश, हमरा बुझल रहत जे एहह मे सँ पतेक मे कोश हवरेर गुर अहि। 89 तखश सुशू, ओ उतर दे लहथश। हशका लोकहशक गुर समाश िहश, आ हशका लोकहशक गुर एक दोसरा सँ गु​ुथल रहै त िहश, आ जनहह जकाँ एक दोसराक पािाँ प़ै त िहश | 90 हवशास सँ सुयम हशकलैत अहि; सुयम, सादगी सँ; सादगी, मासूहमयत सँ; मासूहमयत, हवशमता सँ; हवशय, अशुरासश एवु दाश से। ते ँ एहह सभक काज पहवत, पहतवता आ उहचत अहि। 91 ते ँ जे केओ एहह सभक सेवा करत आ ओकर सभक काज केँ दढतापूव्क पक़त, ओ परमेर् वरक पहवत लोक सभक सुग बुज् मे रहत। 92 तखश हम हशका सँ समयक हवरय मे पुिहलयहश जे की आब अन आहब गेल अहि। 93 मुदा ओ जोर-जोर सँ हचहचया उठलीह, “हे मूख्! की अहाँ केँ टावर एखश ोरर भवश शहह बुझाइत अहि? जखश बुज् बशत आ बशत तखश ओकर अुत भ’ जायत। आ सते ई जखलये पूरा भ' जेतै। 94 मुदा आब हमरा सँ कोशो प् शहह पूिू। जे कहल गेल अहि से अहाँ आ सभ सुत केँ अहाँ क आा​ाक सूहत् लेल पया् प भ' सकैत अहि। कारर, ई सभ बात मात अहाँ केँ शहह पगट कयल गेल अहि, बल् हक अहाँ सभ केँ पगट करबाक लेल। 95 ते ँ हे हम्स, तीश हदशक बाद अहाँ केँ ई बात बुझय प़त जे हम अहाँ केँ कहय लगैत िी, जाहह सँ अहाँ एकरा सुत लोकहशक काश मे बाहज सकब। जखश ओ सभ ओकरा सभ केँ सुहश कऽ पूरा कऽ लेत तखश ओ सभ ओकर सभक अोम् सँ रु​ु भऽ जाय आ अहाँ ओकरा सभक सुग। 96 हे हमर पुत सभ, हम अहाँ सभ केँ बहत सादगी, हशद्रता आ हवशमता मे परमेर् वरक पेमक लेल पोसशे िी, जे अहाँ सभ पर ोाहम्कता मे खसल अहि, जाहह सँ अहाँ सभ पाप आ दु षता सँ पहवत आ ोम् ठहराबी। मुदा अहाँ सभ अपश अोलाह काज सँ शहह रकब। 97 आब हमर बात सुशू, एक-दोसर मे राखन कर, एक-दोसर केँ भेट कर आ एक-दोसर केँ सागत कर, आ असगरे परमेर् वरक पारी सभक भोग शहह कर। 98 जररतमुद केँ मुफ मे दऽ हदयौक। हकएक तँ हकिु गोटे बेसी मु् भोजश कऽ कऽ अपश ररीर मे दु ब्लता उतर कऽ लैत िहथ आ अपश ररीर पर चोट पहँ चाबैत िहथ। जखश हक दोसरक माु स जे भोजश शहह रखैत अहि, ओ मुरझा जाइत अहि, कारर ओकरा पया् प पोरर चाही, आ ररीरक सेवश भ' जाइत िै क। 99 ते ँ ई सुयम अहाँ सभक लेल आहत करै त अहि, जे सभ अहि, आ चाहहशहार सभ सँ बात शहह करै त िी। जे नाय अहाँ पर आबय बला अहि, ताहह लेल तैयारी कर। 100 अहाँ सभ बेसी शामी िी, भूखल लोक सभक खोज कर, जाबत ोरर बुज् एखश ोरर अोूरा अहि। हकएक तँ जखश बुज् बशत तखश अहाँ सभ शीक काज करबा लेल तैयार रहब आ ओहह मे कोशो साश शहह भेटत। 101 ते ँ अहाँ सभ जे अपश ोश-दौलत पर घमुड करै त िी, सावोाश रह, जाहह सँ ओ सभ अभाव मे प़ल लोक सभ कुहरै त शहह जाय आ ओकर आह परमेर् वर लग शहह आहब जाय आ


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

अहाँ सभ अपश सम् पहतक सुग बुज्क फाटकक बाहर बुद शहह भऽ जायब। 102 दे खू, हम आब अहाँ सभ केँ चेताबैत िी जे मर् डली पर हशयु् िी आ सभ सँ ऊँच आसश सँ पेम करै त िी, अहाँ सभ दु र् टता करऽ वला सभ जकाँ शहह बशू। 103 आ ओ सभ सते अपश जहर केँ हडबा मे लऽ कऽ चलैत अहि, मुदा अहाँ सभ अपश जहर आ सुकमर केँ हदय मे समाहहत करै त िी, आ ओकरा सभ केँ रु​ु शहह करब, आ अपश इखनय केँ रु​ु हदय सँ शहह हमला दे ब, जाहह सँ अहाँ सभ महाश राजा पर दया पाहब सकब। 104 हमर बचा सभ, सावोाश रह जे अहाँ क मतभेद अहाँ सभक जाश सँ वुहचत शहह करय। अहाँ सभ परमेर् वरक चुशल लोक सभ केँ कोशा हरका दे ब, जखश हक अहाँ सभ केँ सुोारबाक आवृकता अहि? ते ँ एक-दोसर केँ सलाह हदअ आ अहाँ सभक बीच राखन मे रह, जाहह सँ हम अहाँ सभक हपताक समक ठाढ भऽ अहाँ सभक हहसाब-हकताब पभुक समक दऽ सकब।” 105 जखश ओ हमरा सँ गप-सप समाप क’ लेलहश तखश हशमा् र करयवला िह टा युवक आहब हशका बुज् पर ल’ गेलहश। आ चारर गोटे ओहह आसश पर बैहस गेलाह जाहह पर ओ बैसल िलीह आ ओहो सभ फेर बुज् हदस चहल गेलाह। हम एहह सभक चेहरा शहह दे खलहँ , कारर हशका लोकहशक पीठ हमरा हदस िलहश। 106 जखश ओ जाइत िलीह तखश हम हशका सँ कहहलयहश जे ओ हमरा ओहह तीशू रपक की बात अहि, जाहह मे ओ हमरा पकट भेल िलीह, से हमरा पकट करहथ। 107 मुदा ओ हमरा उतर दे लहथश, “अहाँ केँ एहह बात सभक हवरय मे दोसर सँ पूिय प़त, जाहह सँ ओ सभ अहाँ केँ पकट कयल जाय।” 108 भाइ लोकहश, अुहतम वर् मे पहहल दर्श मे ओ हमरा बहत बूढ भ’ क’ कुस् पर बैसल पकट भेलीह। 109 दोसर दर्श मे हशकर चेहरा सते युवावसा मे िलहश, मुदा हशकर माु स आ केर बूढ िलहश। मुदा ओ हमरा सुग ठाढ भ' क' गप केलहश, आ पहहल बेर सँ बेसी हँ समुख िलीह. 110 तेसर दर्श मे ओ सभ तरहे ँ बहत िोट आ आँ खख मे सुनर िलीह। मात हशका मे वृुक केर िलहश; तइयो ओ हँ समुख लगैत िलीह, आ एकटा सीट पर बैहस गेलीह। 111 ते ँ हम एहह बात सभक हवरय मे बहत दु खी िलहँ , जाबत ोरर हम ओहह दर्श केँ शहह बुहझ सहकतहँ । 112 ते ँ हम ओहह बुहढया केँ राहत मे दर्श मे दे खलहँ जे ओ हमरा कहै त िलीह जे , “सब पाथ्शा केँ अपमाहशत करबाक आवृकता अहि।” ते ँ उपवास कर आ जे माँ गब से पभु सँ सीखब।” हम ते ँ एक हदश उपवास केलहँ । 113 ओही राहत एकटा युवक हमरा लग पकट भेल आ कहलक, “अहाँ अपश पाथ्शा मे एहह तरहे ँ बेर-बेर पकाहरतवावक इचा हकएक करै त िी? सावोाश रह जे बहत बात पूहि कऽ अहाँ ररीर केँ चोट शहह पहँ चाबी। ई पकाहरतवाव अहाँ क लेल पया् प हो। 114 की अहाँ ओहह पकाहरतवाव सँ बेसी उलेखशीय पकाहरतवाव दे खख सकैत िी जे अहाँ केँ पहहशे सँ भेटल अहि? 115 हम उतर दे हलयहश आ कहहलयहश, “महाराज, हम ई मात एकटा बात पूिैत िी जे हमरा सामशे आयल बुहढयाक तीशू आकृहतक हववरर पर, जाहह सँ पकाहरतवाव पूर् भ’ जाय।”

116 ओ हमरा उतर दे लहथश, “अहाँ बुखुहीश शहह िी, मुदा अहाँ क रुका अहाँ केँ एहश बशा दै त अहि। हकएक तँ अहाँ सभक हदय पभुक सुग शहह अहि।” 117 हम उतर दे हलयहश, “मुदा हम सभ ई सभ बात अहाँ सभ सँ बेसी धाश सँ सीखब।” 118 तखश सुशू, ओ कहै त िहथ, जाहह आु क़ाक हवरय मे अहाँ पूिताि करै त िी। 119 आ पहहशे पहहल दर्श मे ओ अहाँ केँ कुस् पर बैसल बुहढयाक आकार मे पकट भेलीह, कारर अहाँ क दु ब्लता आ हदयक सुदेहक काररे ँ अहाँ क बूढ आा​ा स़ल आ रख्हीश भऽ गेल िल। 120 हकएक तँ जहहशा बूढ भऽ गेल िहथ हशका सभ केँ अपशा केँ शवीकरर करबाक आरा शहह िहश आ शे हशका सभक हवदा करबाक अहतरर् कोशो आरा शहह िहश। ते ँ अहाँ सभ अपश साु साररक काज सभ सँ कमजोर भ' क' अपशा केँ आलस मे समहप्त क' दे लहँ , आ पभु पर अपश आगह केँ शहह फेहक दे लहँ । 121 मुदा सर, हमरा बुझल रहै त जे ओ कुस् पर हकएक बैसल िलीह? 122 ओ उतर दे लहथश, हकएक तँ कमजोर केओ अपश दु ब्लताक काररे ँ कुस् पर बैसल रहै त अहि, जाहह सँ ओकर कमजोरी केँ कायम राखल जा सकय। ते ँ पहहल दर्शक आकृहत दे खू। 123 दोसर दर्श मे अहाँ ओकरा ठाढ दे खलहँ , आ ओकर चेहरा युवावसाक आ पूव्क दर्श सँ बेसी हँ समुख। मुदा ओकर माु स आ केर पाचीश िल। ओ कहलहश, ई दषान सेहो सुशू। 124 जखश हकयो बूढ भ' जाइत अहि तखश ओ अपश दु ब्लता आ गरीबीक काररे ँ अपशा सँ हशरार भ' जाइत अहि, आ जीवशक अुहतम हदशक अहतरर् हकिु शहह आरा करै त अहि। 125 मुदा अचाशक हशका पर उतराहोकार बहच जाइत िहश, आ ओ सुशैत िहथ आ उहठ जाइत िहथ। आ हँ समुख भ' क' शव रख् पहहरै त िहथ। आब ओ आब बैसल शहह, ठाढ भ' जाइत अहि, आ अपश पूव्क दु ख सँ मु् भ' जाइत अहि। आ बैसल शहह, बल् हक मदा् शा काज करै त अहि। 126 ते ँ अहाँ सभ, परमेर् वर अहाँ सभ पर दया आ अहाँ क आत् मा केँ शवीशीकरर करबाक काररे ँ परमेर् वर अहाँ सभ केँ पकट कयल गेल पगटीकरर केँ सुहश कऽ अहाँ सभ अपश दु ब्लता केँ एक कात राखख दे हलयैक आ अहाँ सभ केँ सामथ्​् य आहब गेल आ अहाँ सभ हवर् वास मे मजबूत भऽ गेलहँ । परमेर् वर अहाँ क सामथ्​् य दे खख आशखनत भऽ गेलाह। 127 एहह लेल ओ अहाँ सभ केँ बुज्क हशमा् रक काज दे खौलहश, आ अहाँ सभ केँ आश बात सेहो दे खाओत, जँ अहाँ सभ एकदोसर मे पूरा मोश सँ राु हत रहब। 128 मुदा तेसर दर्श मे अहाँ ओकरा एखश ोरर िोट, गोरी आ हँ समुख आ हशहशुत चेहराक दे खलहँ । 129 हकएक तँ जेशा दु खी केँ कोशो रुभ समाचार अबैत अहि, ओ तुरन अपश दु ख हबसरर जाइत अहि आ सुशल रुभ समाचारक अहतरर् आश हकिु शहह माशैत अहि। आ रेर समयक लेल ओकरा सान्शा भेटैत िै क आ ओकर आत् मा ओकरा भेटल आशनक काररे ँ शव होइत िै क। 130 आ जे अहाँ ओकरा बेच पर बैसल दे खलहँ, ताहह लेल ई एकटा मजबूत खसहतक दोतक अहि। कारर बेच मे चारर फीट होइत िै क आ मजबूती सँ ठाढ होइत िै क | आ सुसार सयु सेहो चारर त् दारा समहथ्त अहि |


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

131 ते ँ जे सभ पूर् रप सँ पशाताप करत, ओ सभ युवा होयत। जे सभ अपश पाप सँ पूरा मोश सँ मुह़ जाइत अहि, से सभ स् हथर भऽ जायत।” 132 आ आब अहाँ सभ लग पकाहरतवाव पूर् रपेर अहि, आओर एहह सँ आगूक कोशो बात अहाँ सभ केँ पगट करबाक लेल आओर शहह माँ गू। 133 मुदा जँ कोशो बात पगट होमय बला अहि तँ ओ अहाँ सभ केँ पगट कयल जायत। दहष 4 1 यौ भाइ लोकहश, पहहशे दर्शक बीस हदशक बाद हम एकटा दर्श दे खलहँ । जे सुकट आहब रहल अहि ओकर पहतहशहो्। हम खेतक बाट मे चलैत रही। 2 जाहह ठाम हम गेल रही, साव्जहशक बाट सँ करीब दस फलाल ग अहि। ई एकटा एहश तरीका अहि जकर बहत कम बेर लोक जाइत अहि: 3 हम असगरे चलैत काल पभु सँ हवशती केलहँ जे ओ अपश पहवत मर् डली दारा हमरा जे पकाहरतवाव कयलहश अहि, तकरा पुहष करहथ। 4 ओ अपश सभ सेवक केँ पशाताप कराबय चाहै त िलाह जे आहत भ’ गेल िलाह, जाहह सँ हशकर महाश आ समाशजशक शामक महहमा होबाक चाही, आ एहह लेल जे ओ हमरा योग बुझैत िलाह, जकरा ओ अपश चमतार करहथ, आ, जे हम हशकर आदर करी आ हशका ोनवाद दी। 5 दे खू, हकिु एहश आवाज हमरा उतर दे लक। सुदेह शहह, हरमास। ते ँ हम अपशा भीतर सोचय लगलहँ आ कहय लगलहँ । हम हकएक रुका करब, ई दे खख जे हम एहह तरहे ँ पभुक दारा हशपटल गेल िी आ एहश गौरवराली बात दे खलहँ ? 6 भाइ लोकहश, हम कशेक दू र गेल िलहँ , तखश हम दे खलहँ जे एकटा ोूरा स् वग् मे उहठ गेल अहि। हम अपशा भीतर कहय लगलहँ , की कोशो मवेरीक झुड आहब रहल अहि, जे एहश ोूरा उठबैत अहि? 7 हमरासँ करीब एक फरलाु ग दू र िल। आ दे खू हम ोूरा बेसी स बेसी उठै त दे खलहँ , एतेक जे हमरा रुका होबय लागल जे एहह मे हकिु असाोारर बात िै क। 8 रौद कशेक चमकल आ दे खलहँ जे हम एकटा पैघ जाशवर हे ल जकाँ दे खलहँ । ओकर मुँहसँ आहग सश हटडी हशकहल गेलै। ओहह जाशवरक ऊँचाई करीब सौ फीट िलैक, आ ओकर माथ माहटक पैघ बत्श जकाँ िलैक। 9 हम काशय लगलहँ आ पभु सँ पाथ्शा करऽ लगलहँ जे ओ हमरा एहह सँ मु् करहथ। तखश हम जे वचश सुशशे िलहँ से मोश पा़लहँ । सुदेह शहह, हरमास। 10 एहह लेल, भाइ लोकहश, परमेर् वरक हवर् वास ोारर कऽ कऽ आ मोश पाह़ कऽ जे हमरा ब़का-ब़का बात हसखबैत िल, हम अपशा केँ ररीरक रप मे ओहह जाशवरक हाथ मे सौुहप दे हलयैक। 11 ओ जाशवर एहश तरहे ँ आहब गेल जेशा एक बेर कोशो रहर केँ खा सकैत िल। 12 हम ओकरा लग पहँ चलहँ, तखश ओ जाशवर अपश पूरा टोली जमीश पर पसारर दे लक आ अपश जीह िोह़ हकिु शहह हशकाललक आ एक बेर अपशा केँ हहलैत शहह गेल जाबत हम ओकरा लग सँ शहह गुजरर गेलहँ ।

13 ओहह जाशवरक माथ पर चारर रु गक िल। पहहशे कारी, फेर लाल आ खूशी रु ग, फेर सोशाक, आ फेर उजर। 14 हम ओहह ठाम सँ गुजरर कऽ करीब तीस फीट आगू बढलाक बाद दे खलहँ जे एकटा कुमारर कना हमरा सँ भेट भेल, जेशा ओ एखशहह अपश कहशयाँ क कोठली सँ बाहर हशकलल हो, सभ उजर जूता पहहरशे, आ मुँह पर घूुघट पहहरशे आ चमकैत केर सँ झाँ पल। 15 हम अपश पूव्क दर्श सँ बुहझ गेलहँ जे ई मर् डली अहि, आ तकर बाद हम आओर हँ समुख भऽ गेलहँ । ओ हमरा सलाम केलहश जे , हे यार, जय! हम शमसार वापस क' क' कहहलयहश, लेडी, हे ल! 16 ओ हमरा उतर दे लहथश, “हे मशुर् य, अहाँ केँ हकिु शहह भेटल? हम उतर दे हलयहश, लेडी, ओतय हमरा एहश जाशवर भेटल, जे एकटा पूरा लोक केँ खाबय मे सकम बुझाइत िल; मुदा परमेर् वरक सामथ्​् य आ हशकर एकल दयाक काररे ँ हम ओहह सँ बहच गेलहँ । 17 अहाँ एहह सँ शीक जकाँ बहच गेलहँ , ओ बजलीह, हकएक तँ अहाँ अपश समस हचना परमेर् वर पर राखख दे लहँ आ हशका लेल अपश हदय खोललहँ , ई माशैत जे अहाँ हशकर महाश आ समाशजशक शामक अहतरर् कोशो आश दारा सुरहकत शहह भऽ सकैत िी। 18 एहह लेल परमेर् वर अपश स् वग्दूत केँ पठौलहश जे ओ जाशवरक ऊपर िहथ, हजशकर शाम हे गीश अहि, आ हशकर मुँह रोकलहश जे ओ अहाँ केँ शहह खा जाय। अहाँ अपश हवशासक काररे ँ आ एहह लेल जे अहाँ एहश भयावह जाशवरक लेल कोशो सुदेह शहह केलहँ, एकटा पैघ परीका सँ बहच गेलहँ । 19 ते ँ जाउ, परमेर् वरक चुशल लोक सभ केँ ओ सभ पैघ काज सभ केँ बताउ जे ओ अहाँ क लेल कयलहश। अहाँ ओकरा सभ केँ कहब जे ई जाशवर ओहह परीका मे जे आबय बला परीका अहि, ओकर आकृहत अहि।” 20 जँ अहाँ सभ अपशा केँ तैयार कऽ लेशे होयब तँ अहाँ सभ एहह सँ बहच सकैत िी, जँ अहाँ सभक हदय रु​ु आ हशद्र होयत। आ जँ अहाँ सभ अपश रेर भरर हदश हबशा कोशो हरकायत केशे परमेर् वरक सेवा करब। 21 अपश सभटा हचना पभु पर राखू, तखश ओ ओकरा सभ केँ हशद् हरत करताह। हे सुदेहवादी, परमेर् वर पर हवर् वास कर, हकएक तँ ओ सभ काज कऽ सकैत िहथ। ओ अहाँ सँ अपश को​ो केँ मोह़ सकैत अहि, आ अहाँ केँ मदहद आ सुरका दु शू पठा सकैत अहि। 22 होकार अहि सुदेहक लेल, जे सभ ई बात सुशत आ ओकरा हतरसृत करत। 23 तखश हम हशका सँ ओहह जाशवरक माथ पर चारर रु गक हवरय मे पुिहलयहश। मुदा ओ हमरा उतर दे लहथश। अहाँ फेर हजतासु िी जे अहाँ एहह बात सभक हवरय मे पूिैत िी। मुदा हम हशका कहहलयहश, लेडी, हमरा दे खा हदअ जे ई सभ की अहि। 24 ओ बजलीह, सुशू। जे कारी अहाँ दे खलहँ से ओहह सुसार केँ दरा् बैत अहि जाहह मे अहाँ रहै त िी । अह्मय आ खूशी रु गक तातय् अहि जे एहह युग केँ आहग आ खूश सँ शष करय प़त। 25 सोशाक भाग अहाँ सभ िी जे ओहह मे सँ बहच गेलहँ । जहहशा सोशा आहग मे परखल जाइत अहि आ लाभदायक बशैत अहि, तहहशा अहाँ सभ सेहो एहह सुसारक लोक सभक बीच मे रहहशहार सभ सेहो एहह तरहे ँ परीकर कयल गेल िी।


हरमास के चरवाहा की पथम पुसक - दर्श

26 ते ँ जे सभ अन ोरर हटकल रहत आ ओकरा सभक दारा परीका मे पाहब कऽ ओकरा सभ केँ रु​ु कयल जायत। आ जहहशा सोशा एहह परीका सँ रु​ु भ' जाइत अहि आ अपश कचरा गमा लैत अहि, तहहशा अहाँ सभ सेहो सभ दु ख आ हवपहत केँ फेहक दे ब आ बुज्क हशमा् रक लेल रु​ु भ' जायब। 27 मुदा उजर रु ग आबय बला सुसारक समय केँ दरा् बैत अहि जाहह मे परमेर् वरक चुशल लोक सभ रहताह। 28 ते ँ अहाँ पहवत लोक सभक काश मे ई बात कहब शहह िो़ू। एतय अहाँ सभ केँ ओहह महासुकटक आकृहत अहि जे आबय बला अहि। जे जँ अहाँ सभ चाहब तँ अहाँ सभक लेल हकिु शहह होयत। ते ँ हम जे बात अहाँ सभ केँ कहलहँ से मोश मे राखू। 29 ई बात कहह कऽ ओ हवदा भऽ गेलीह। मुदा हम शहह दे खलहँ जे ओ कतय गेलीह। मुदा अचाशक हमरा एकटा हला सुशाई प़ल आ हम डरै त पािू घुहम गेलहँ, कारर हमरा लागल जे ओ जाशवर हमरा हदस आहब रहल अहि।


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Maithili - The First Book of the Shepherd of Hermas, which is called His Visions by Filipino Tracts and Literature Society Inc. - Issuu