फिलाडे ल्फा के लोग के इगेफेफि के पत अधाफ 1 1 इग् नेशि, जकरा निशोफोरि ि्हो कहल जाइत अनि, निता िरम् े् वर आ हमरा िभक पभर शीेर मिीहक मण् डली क्ँ िठा द् लनि, ज् एनेशा म् नफलाड् ल्शा म् अनि। ओ िभ िरम् े् वरक म् ल-नमलाि म् निकल रहलाह, आ हमरा िभक पभर क कष म् िनदखि आिल्त रहलाह आ हिकर िरिरुािक दारा िभ दशा म् िूण् भऽ ग् लाह खरेी; खाि क’ जँ ओ िभ निेि, आ प्लेिर ज् हिका िंग िनि, आ शीेर मिीहक मिक अिरिार निशर क डीकि िभक िंग एकता म् िनि; ओ अिि िनवत आत् मा दारा अिि इचाक अिरिार िभ दृता िँ िै िा ल्ि् िनि। 2 हम जिैत िी ज् ओ निेि अहाँ िभक िीच ओ िैघ ि्वा क्ँ अििा िँ िनह, आ ि् मिरष् श दारा आ ि् वि् मनहमा िँ कशलनि। िल् नक निता िरम् े् वर आ हमरा िभक पभर शीेर मिीहक प्म िँ। 3 जकर िंशमक हम पेंिा करै त िी; ज् अिि चरपी िॅ अिि िभिा वि् गप िॅ दोिर िॅ ि् िी काज करिा म् िकम अनि । नकएक तँ ओ आजाक अिरकूल अनि, ज् िा वीणा ओकर तारक अिरकूल अनि। 4 एनह ल्ल हमर पाण अिि मि क्ँ िरम् े् वर नदि िभ िँ ि् िी िरखी मािैत अनि, ई जानि ज् ओ िभ गर ण म् फलदाशी आ निद अनि। ल्रता िँ भरल, राग िँ मर क, आ जीनवत भगवािक िमस िंशमक अिरिार। 5 त् ँ ज् िा इजोत आ ित् श दर िूक िि् ताि ििैत अनि। नवभाजि आ झूठ निदां त िँ भानग जाउ; मर दा जतश अहाँ क चरिाह िनि, ओतश अहाँ िभ भ् ड ँ ा जकाँ िािाँ-िािाँ चलैत िी। 6 नकएक तँ िहतो एहि भ् नडशा अनि ज् नमथा पिरताक िंग नवशािक शोग िर झाइत अनि, िरम् े् वरक िाि म् दौडश िला िभ क्ँ िं दी ििा दै त अनि। मर दा िहमनत म् हिका िभ क्ँ कोिो ्ाि िनह भ् ितनि। 7 त् ँ ओनह दर ष जडी-िू िी िँ िरह् ज कर, जकरा शीेर िनह िनहरै त िनि। कारण एहि निताक रोििी िनह अनि। ई िनह ज् अहाँ िभक िीच हमरा कोिो नवभाजि भ् िल अनि, िल् नक िभ तरहक िनवतता भ् िल अनि। 8 ज् िभ िरम् े् वर आ शीेर मिीहक अनि, ि् िभ अिि निेिक िंग ि्हो िनि। ज् िभ िशाताि क् िंग मण् डली क् एकता म् वािि आनि जाशत, ि् िभ ि्हो िरम् े् वरक ि्वक िित, जानह िँ ओ िभ शीेरक अिरिार जीनि िकनि। 9 भाइ लोकनि, धोखा िनह खाउ। जँ क्ओ मण् डलीक िािाँ-िािाँ चलत तँ ओकरा िरम् े् वरक राज् श िनह भ् ितै क। जँ नकशो कोिो आि नवचारक िािाँ चलैत अनि तँ ओ मिीहक व्दिािँ िहमत िनह अनि। 10 त् ँ अहाँ िभ एकनह िनवत शू क्ररस म् भाग ल्िाक पशाि कर। 11 नकएक तँ हमरा िभक पभर शीेर मिीहक एकिा ेरीर मात अनि। आ ओकर खूिक एकता म् एकिा पाला। एकिा व्दी; 12 जनहिा एकिा निेि िनि, हिकर प्लेि् री आ डीकि िभ हमर िह-ि्वक िनि, जानह िँ अहाँ िभ ज् नकिर करि, ि् िरम् े् वरक इचाक अिरिार कऽ िकि। अधाफ 2 1 हमर भाइ लोकनि, अहाँ िभक पनत हमरा ज् प्म अनि, ि् हमरा आओर िैघ ििा दै त अनि। आ अहाँ िभ म् िहत आिल्त भऽ हम अहाँ िभ क्ँ खतरा िँ िररनकत रखिाक पशाि करै त िी। वा कही ज् हम िनह, िल् नक शीेर मिीह। हिका म् िानल रहिाक कारण् ँ हम ओत् क ि् िी डरै त िी ज् एखि धरर मात कषक िाि म् िी। 2 मर दा िरम् े् वर िँ अहाँ िभक पाि्िा हमरा निद ििा द् त, जानह िँ हम ओनह भाग क्ँ िानि िकि ज् िरम् े् वरक दशा िँ हमरा द् ल ग् ल अनि। आ प्ररत िभ क्ँ कलीनिशाक प्लेि् रीक नवषश म् । 3 हम िभ ि्हो भनवषवका िभ िँ प्म करी, नकएक तँ ओ िभ ि्हो हमरा िभ क्ँ िरिमाचार िर िहँ चा द् लनि आ मिीह िर आेा करिाक आ हिकर आेा करिाक ल्ल। 4 ओ िभ हिका िर नवे् वाि कऽ कऽ शीेर मिीहक एकता म् उदार िानि ग् लाह। िनवत लोक िी, प्म करिाक शोग आ आशश् चनकत भऽ ग् ल। 5 ओ िभ शीेर मिीह िँ गवाही िानि ग् ल िी आ हमरा िभक आेाक िरिमाचार म् नगिल ग् ल अनि। 6 मर दा जँ क्ओ अहाँ िभ क्ँ शहदी िभक धम् -निशमक पचार करत तँ ओकर िात िनह िरिू। नकएक तँ खतिा िनह कएल ग् ल शहदी धम् िँ मिीहक नेका गहण करि िीक अनि। 7 मर दा जँ एको वा दोिर नकशो मिीह शीेरक नवषश म् िनह िाजै त अनि तँ हमरा ओ िभ मृ तकक सारक आ कब जकाँ िर झाइत अनि, जानह िर मात मिरष् श िभक िाम नलखल अनि। 8 त् ँ एनह िंिारक राजकरमारक दर ष कला आ जाल िँ िलाशि कर। कहीं हिकर धूत्ता िँ दिल क' क' अहाँ िभ अिि प्म म् ठं ढा िनह भ' जाशि। मर दा अनवभानजत हदशक िंग िि गोि् एकनह ठाम आनि जाउ। 9 हम अिि िरम् े् वर क्ँ आेीष दै त िी ज् अहाँ िभक पनत हमरा िीक नवव्क अनि आ अहाँ िभ म् िँ नकिको एहि कोिो िात िनह अनि ज् ओ खरनल कऽ वा एकां त म् घमं ड कऽ िकैत िी ज् हम हिका ल्ल िहत नकिर वा कम काज म् िोनझल िनि ग् लहँ ।
10 हम नजिका िभक िीच गिेि क्ि् िी, तानह िभ िँ हम चाहै त िी ज् ई िात हिका िभक नवरद गवाह िनह ििश। 11 नकएक तँ नकिर लोक हमरा ेरीरक अिरिार धोखा द् िऽ चाहै त िल, मर दा आत् मा िरम् े् वरक रहिाक कारण् ँ धोखा िनह द् ल जाइत अनि। कारण, ओ कतश िँ अिै त अनि आ कतश जाइत अनि, दर िू क्ँ जिैत अनि, आ हदशक रहस क्ँ डाँ िैत अनि। 12 हम अहाँ िभक िीच म् कािलहँ । हम जोर-जोर िँ िजलहँ : निेि, आ प्लेि् री, आ नडकि िभक धाि राखू। 13 नकिर लोक िोचैत िल ज् हम ई िात एनह तरह् ँ कहलहँ ज् अहाँ िभक िीच ज् नवभाजि होशत ि् िनहि् िँ िर नझ रहल िी। 14 मर दा ओ हमर गवाह िनि, नजिका ल्ल हम िान म् िी ज् हम ककरो िँ नकिर िनह जिैत िलहँ । मर दा आत् मा एनह तरह् ँ िाजल, “निेि क् नििा नकिर िनह कर। 15 अिि ेरीर क्ँ िरम् े् वरक मि् नदर जकाँ राखू। भागि नडवीजि; मिीहक अिरशाशी ििू, ज् िा ओ अिि निताक अिरशाशी िलाह। 16 त् ँ हम एकताक ल्ल रनचत मिरख जकाँ क्लहँ । नकएक तँ जतऽ नवभाजि आ कोध अनि, ओतश िरम् े् वर िनह रहै त िनि। 17 मर दा जँ ओ िभ िरम् े् वरक एकता आ निेिक िररषद् म् घर रर जाइत िनि तँ पभर िभ क्ँ कमा कऽ दै त िनिि। 18 हम शीेर मिीहक कृिा िर भरोिा करै त िी ज् ओ अहाँ िभ क्ँ हर् क िं धि िँ मर क करताह। 19 तै शो हम अहाँ िभ क्ँ आगह करै त िी ज् अहाँ िभ झगडा िँ नकिर िनह कर, िल् नक मिीहक नेकाक अिरिार। 20 नकएक तँ हम नकिर लोकक िार् म् िरिि् िी ज् कहै त िनि। जाि् तक हमरा ई मू ल म् नलखल िनह भ् ित ताि् तक हम एकरा िरिमाचार म् नलखल िनह मािि। जखि हम कहनलशनि, “नलखल अनि।” ज् नकिर िामि् िलैक तकर उतर ओ िभ अिि भष पनत म् द् लक। 21 मर दा हमरा ल्ल शीेर मिीह िंिारक िभ अनविाेी सारकक ्ाि िर िनि। ओनह निम् ल सारक िभक िंग, ओकर कूि, आ मृ तर, िरिरुाि आ नवशाि ज् हिका दारा अनि। जकरा दारा हम चाहै त िी ज् अहाँ िभक पाि्िाक दारा धम् ठहरािी। 22 िररोनहत िभ ित् िीक िनि। मर दा ओनह महािररोनहत िँ िहत िीक िनि, नजिका िनवत ्ाि क्ँ िौंिल ग् ल िनि। आ ज् करा अिगर् िरम् े् वरक रहस िौंिल ग् ल अनि। 23 ओ निताक दरिजा िनि। जकरा दारा अबाहम, इिहाक, शाकूि आ िभ भनवषवका िभ पव्े करै त िनि। िंगनह प्ररत िभ, आ मं डली ि्हो। 24 ई िभ िात िरम् े् वरक एकता नदि िृै त अनि। तिानि िरिमाचार म् नकिर अनि। की एनह म् आि िभ पिं ध िँ कहीं ऊिर; अिा् त, हमरऽ उदारकता् , पभर शीेर मिीह क्रऽ पकिीकरण, ओकरऽ िीडा आर िरिरुाि। 25 नपश पवक् ता िभ हिका नदि चचा् करै त िलाह। मर दा िरिमाचार अनविाेी िूण्ता अनि। त् ँ जँ अहाँ िभ प्मक िंग नवे् वाि करि तँ िभ नमनलकश िीक अनि। अधाफ 3 1 िीररशा म् अनानकशाक मण् डलीक नवषश म् हमरा ई कहल ग् ल अनि ज् शीेर मिीह म् अहाँ िभक पाि्िा आ ओकरा पनत ज् आं त अनि, तानह िँ ओ ेालन म् अनि। अहाँ िरम् े् वरक मण् डली जकाँ कोिो डीकि क्ँ िरम् े् वरक राजदू तक रि म् ओतश ज् िाक ल्ल निशर क करि। जानह िँ ओ हिका िभक िंग आिल्त भऽ कऽ िरम् े् वरक िामक मनहमा करनि। 2 शीेर मिीह म् ओ आदमी धन होउ ज् एहि ि्वाक शोग िाओल जाशत। अहाँ िभ ि्हो मनहमामं नडत होशि।” 3 जँ अहाँ िभ इचर क िी तँ िरम् े् वरक कृिाक कारण् ँ अहाँ िभक ल्ल ई काज करि अिंभव िनह अनि। ज् िा नक आि िडोिी कलीनिशा िभ ि्हो हिका िभ क्ँ िठा द् ि् अनि, नकिर निेि, नकिर िररोनहत आ डीकि। 4 नकनलनिशाक डीकि नफलो, ज् अतंत शोग आदमी अनि, ओ एखिो िरम् े् वरक वचि म् हमरा ि्वा करै त िनि, आगािोिोनलिक ररशोि, ज् एकल िीक वलक िनि, ज् िीररशा िँ ि्हो हमरा िािाँ आनि ग् लाह, अिि जीविक कोिो िात िनह अहाँ िभक गवाही ि्हो नदअ। 5 हम सशं अहाँ िभक ल्ल िरम् े् वर क्ँ धनवाद दै त िी ज् अहाँ िभ हिका िभ क्ँ ओनहिा गहण करै त िी ज् िा पभर अहाँ िभ क्ँ गहण करताह। मर दा ज् िभ हिका िभक अिमाि कशलनि, हिका िभ क्ँ शीेर मिीहक कृिा िँ कमा कशल जाश। 6 तोआि म् रहनिहार भाश िभक प्म अहाँ िभ क्ँ पणाम करै त अनि। 7 हमरा िभक पभर शीेर मिीह हिका िभक आदर करनि। नजिका िर ओ िभ ेरीर, पाण आ आत् मा दर िू म् आेा करै त िनि। नवशाि मे, प्म मे , एकता मे । मिीह शीेर म् नवदाई हमर िाझा आेा।