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Maithili - The Epistle of Ignatius to the Philadelphians

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फिलाडे ल्फा के लोग के इगेफेफि के पत अधाफ 1 1 इग् नेशि, जकरा निशोफोरि ि्हो कहल जाइत अनि, निता िरम् े् वर आ हमरा िभक पभर शीेर मिीहक मण् डली क्ँ िठा द् लनि, ज् एनेशा म् नफलाड् ल्शा म् अनि। ओ िभ िरम् े् वरक म् ल-नमलाि म् निकल रहलाह, आ हमरा िभक पभर क कष म् िनदखि आिल्त रहलाह आ हिकर िरिरुािक दारा िभ दशा म् िूण् भऽ ग् लाह खरेी; खाि क’ जँ ओ िभ निेि, आ प्लेिर ज् हिका िंग िनि, आ शीेर मिीहक मिक अिरिार निशर क डीकि िभक िंग एकता म् िनि; ओ अि​ि िनवत आत् मा दारा अि​ि इचाक अिरिार िभ दृता िँ िै िा ल्ि् िनि। 2 हम जिैत िी ज् ओ निेि अहाँ िभक िीच ओ िैघ ि्वा क्ँ अि​िा िँ िनह, आ ि् मिरष् श दारा आ ि् वि् मनहमा िँ कशलनि। िल् नक निता िरम् े् वर आ हमरा िभक पभर शीेर मिीहक प्म िँ। 3 जकर िंशमक हम पेंिा करै त िी; ज् अि​ि चरपी िॅ अि​ि िभिा वि् गप िॅ दोिर िॅ ि् िी काज करिा म् िकम अनि । नकएक तँ ओ आजाक अिरकूल अनि, ज् िा वीणा ओकर तारक अिरकूल अनि। 4 एनह ल्ल हमर पाण अि​ि मि क्ँ िरम् े् वर नदि िभ िँ ि् िी िरखी मािैत अनि, ई जानि ज् ओ िभ गर ण म् फलदाशी आ निद अनि। ल्रता िँ भरल, राग िँ मर क, आ जीनवत भगवािक िमस िंशमक अिरिार। 5 त् ँ ज् िा इजोत आ ित् श दर िूक ि​ि् ताि ि​िैत अनि। नवभाजि आ झूठ निदां त िँ भानग जाउ; मर दा जतश अहाँ क चरिाह िनि, ओतश अहाँ िभ भ् ड ँ ा जकाँ िािाँ-िािाँ चलैत िी। 6 नकएक तँ िहतो एहि भ् नडशा अनि ज् नमथा पिरताक िंग नवशािक शोग िर झाइत अनि, िरम् े् वरक िाि म् दौडश िला िभ क्ँ िं दी ि​िा दै त अनि। मर दा िहमनत म् हिका िभ क्ँ कोिो ्ाि िनह भ् ितनि। 7 त् ँ ओनह दर ष जडी-िू िी िँ िरह् ज कर, जकरा शीेर िनह िनहरै त िनि। कारण एहि निताक रोि​िी िनह अनि। ई िनह ज् अहाँ िभक िीच हमरा कोिो नवभाजि भ् िल अनि, िल् नक िभ तरहक िनवतता भ् िल अनि। 8 ज् िभ िरम् े् वर आ शीेर मिीहक अनि, ि् िभ अि​ि निेिक िंग ि्हो िनि। ज् िभ िशाताि क् िंग मण् डली क् एकता म् वाि​ि आनि जाशत, ि् िभ ि्हो िरम् े् वरक ि्वक ि​ित, जानह िँ ओ िभ शीेरक अिरिार जीनि िकनि। 9 भाइ लोकनि, धोखा िनह खाउ। जँ क्ओ मण् डलीक िािाँ-िािाँ चलत तँ ओकरा िरम् े् वरक राज् श िनह भ् ितै क। जँ नकशो कोिो आि नवचारक िािाँ चलैत अनि तँ ओ मिीहक व्दिािँ िहमत िनह अनि। 10 त् ँ अहाँ िभ एकनह िनवत शू क्ररस म् भाग ल्िाक पशाि कर। 11 नकएक तँ हमरा िभक पभर शीेर मिीहक एकिा ेरीर मात अनि। आ ओकर खूिक एकता म् एकिा पाला। एकिा व्दी; 12 जनहिा एकिा निेि िनि, हिकर प्लेि् री आ डीकि िभ हमर िह-ि्वक िनि, जानह िँ अहाँ िभ ज् नकिर करि, ि् िरम् े् वरक इचाक अिरिार कऽ िकि। अधाफ 2 1 हमर भाइ लोकनि, अहाँ िभक पनत हमरा ज् प्म अनि, ि् हमरा आओर िैघ ि​िा दै त अनि। आ अहाँ िभ म् िहत आिल्त भऽ हम अहाँ िभ क्ँ खतरा िँ िररनकत रखिाक पशाि करै त िी। वा कही ज् हम िनह, िल् नक शीेर मिीह। हिका म् िानल रहिाक कारण् ँ हम ओत् क ि् िी डरै त िी ज् एखि धरर मात कषक िाि म् िी। 2 मर दा िरम् े् वर िँ अहाँ िभक पाि्िा हमरा निद ि​िा द् त, जानह िँ हम ओनह भाग क्ँ िानि िकि ज् िरम् े् वरक दशा िँ हमरा द् ल ग् ल अनि। आ प्ररत िभ क्ँ कलीनिशाक प्लेि् रीक नवषश म् । 3 हम िभ ि्हो भनवषवका िभ िँ प्म करी, नकएक तँ ओ िभ ि्हो हमरा िभ क्ँ िरिमाचार िर िहँ चा द् लनि आ मिीह िर आेा करिाक आ हिकर आेा करिाक ल्ल। 4 ओ िभ हिका िर नवे् वाि कऽ कऽ शीेर मिीहक एकता म् उदार िानि ग् लाह। िनवत लोक िी, प्म करिाक शोग आ आशश् चनकत भऽ ग् ल। 5 ओ िभ शीेर मिीह िँ गवाही िानि ग् ल िी आ हमरा िभक आेाक िरिमाचार म् नगिल ग् ल अनि। 6 मर दा जँ क्ओ अहाँ िभ क्ँ शहदी िभक धम् -निशमक पचार करत तँ ओकर िात िनह िरिू। नकएक तँ खतिा िनह कएल ग् ल शहदी धम् िँ मिीहक नेका गहण करि िीक अनि। 7 मर दा जँ एको वा दोिर नकशो मिीह शीेरक नवषश म् िनह िाजै त अनि तँ हमरा ओ िभ मृ तकक सारक आ कब जकाँ िर झाइत अनि, जानह िर मात मिरष् श िभक िाम नलखल अनि। 8 त् ँ एनह िंिारक राजकरमारक दर ष कला आ जाल िँ िलाशि कर। कहीं हिकर धूत्ता िँ दिल क' क' अहाँ िभ अि​ि प्म म् ठं ढा िनह भ' जाशि। मर दा अनवभानजत हदशक िंग ि​ि गोि् एकनह ठाम आनि जाउ। 9 हम अि​ि िरम् े् वर क्ँ आेीष दै त िी ज् अहाँ िभक पनत हमरा िीक नवव्क अनि आ अहाँ िभ म् िँ नकिको एहि कोिो िात िनह अनि ज् ओ खरनल कऽ वा एकां त म् घमं ड कऽ िकैत िी ज् हम हिका ल्ल िहत नकिर वा कम काज म् िोनझल िनि ग् लहँ ।

10 हम नजिका िभक िीच गिेि क्ि् िी, तानह िभ िँ हम चाहै त िी ज् ई िात हिका िभक नवरद गवाह िनह ि​िश। 11 नकएक तँ नकिर लोक हमरा ेरीरक अिरिार धोखा द् िऽ चाहै त िल, मर दा आत् मा िरम् े् वरक रहिाक कारण् ँ धोखा िनह द् ल जाइत अनि। कारण, ओ कतश िँ अिै त अनि आ कतश जाइत अनि, दर िू क्ँ जिैत अनि, आ हदशक रहस क्ँ डाँ िैत अनि। 12 हम अहाँ िभक िीच म् कािलहँ । हम जोर-जोर िँ िजलहँ : निेि, आ प्लेि् री, आ नडकि िभक धाि राखू। 13 नकिर लोक िोचैत िल ज् हम ई िात एनह तरह् ँ कहलहँ ज् अहाँ िभक िीच ज् नवभाजि होशत ि् िनहि् िँ िर नझ रहल िी। 14 मर दा ओ हमर गवाह िनि, नजिका ल्ल हम िान म् िी ज् हम ककरो िँ नकिर िनह जिैत िलहँ । मर दा आत् मा एनह तरह् ँ िाजल, “निेि क् नि​िा नकिर िनह कर। 15 अि​ि ेरीर क्ँ िरम् े् वरक मि् नदर जकाँ राखू। भागि नडवीजि; मिीहक अिरशाशी ि​िू, ज् िा ओ अि​ि निताक अिरशाशी िलाह। 16 त् ँ हम एकताक ल्ल रनचत मिरख जकाँ क्लहँ । नकएक तँ जतऽ नवभाजि आ कोध अनि, ओतश िरम् े् वर िनह रहै त िनि। 17 मर दा जँ ओ िभ िरम् े् वरक एकता आ निेिक िररषद् म् घर रर जाइत िनि तँ पभर िभ क्ँ कमा कऽ दै त िनि​ि। 18 हम शीेर मिीहक कृिा िर भरोिा करै त िी ज् ओ अहाँ िभ क्ँ हर् क िं धि िँ मर क करताह। 19 तै शो हम अहाँ िभ क्ँ आगह करै त िी ज् अहाँ िभ झगडा िँ नकिर िनह कर, िल् नक मिीहक नेकाक अिरिार। 20 नकएक तँ हम नकिर लोकक िार् म् िरि​ि् िी ज् कहै त िनि। जाि् तक हमरा ई मू ल म् नलखल िनह भ् ित ताि् तक हम एकरा िरिमाचार म् नलखल िनह माि​ि। जखि हम कहनलशनि, “नलखल अनि।” ज् नकिर िामि् िलैक तकर उतर ओ िभ अि​ि भष पनत म् द् लक। 21 मर दा हमरा ल्ल शीेर मिीह िंिारक िभ अनविाेी सारकक ्ाि िर िनि। ओनह निम् ल सारक िभक िंग, ओकर कूि, आ मृ तर, िरिरुाि आ नवशाि ज् हिका दारा अनि। जकरा दारा हम चाहै त िी ज् अहाँ िभक पाि्िाक दारा धम् ठहरािी। 22 िररोनहत िभ ित् िीक िनि। मर दा ओनह महािररोनहत िँ िहत िीक िनि, नजिका िनवत ्ाि क्ँ िौंिल ग् ल िनि। आ ज् करा अिगर् िरम् े् वरक रहस िौंिल ग् ल अनि। 23 ओ निताक दरिजा िनि। जकरा दारा अबाहम, इिहाक, शाकूि आ िभ भनवषवका िभ पव्े करै त िनि। िंगनह प्ररत िभ, आ मं डली ि्हो। 24 ई िभ िात िरम् े् वरक एकता नदि िृै त अनि। तिानि िरिमाचार म् नकिर अनि। की एनह म् आि िभ पिं ध िँ कहीं ऊिर; अिा् त, हमरऽ उदारकता् , पभर शीेर मिीह क्रऽ पकिीकरण, ओकरऽ िीडा आर िरिरुाि। 25 नपश पवक् ता िभ हिका नदि चचा् करै त िलाह। मर दा िरिमाचार अनविाेी िूण्ता अनि। त् ँ जँ अहाँ िभ प्मक िंग नवे् वाि करि तँ िभ नमनलकश िीक अनि। अधाफ 3 1 िीररशा म् अनानकशाक मण् डलीक नवषश म् हमरा ई कहल ग् ल अनि ज् शीेर मिीह म् अहाँ िभक पाि्िा आ ओकरा पनत ज् आं त अनि, तानह िँ ओ ेालन म् अनि। अहाँ िरम् े् वरक मण् डली जकाँ कोिो डीकि क्ँ िरम् े् वरक राजदू तक रि म् ओतश ज् िाक ल्ल निशर क करि। जानह िँ ओ हिका िभक िंग आिल्त भऽ कऽ िरम् े् वरक िामक मनहमा करनि। 2 शीेर मिीह म् ओ आदमी धन होउ ज् एहि ि्वाक शोग िाओल जाशत। अहाँ िभ ि्हो मनहमामं नडत होशि।” 3 जँ अहाँ िभ इचर क िी तँ िरम् े् वरक कृिाक कारण् ँ अहाँ िभक ल्ल ई काज करि अिंभव िनह अनि। ज् िा नक आि िडोिी कलीनिशा िभ ि्हो हिका िभ क्ँ िठा द् ि् अनि, नकिर निेि, नकिर िररोनहत आ डीकि। 4 नकनलनिशाक डीकि नफलो, ज् अतंत शोग आदमी अनि, ओ एखिो िरम् े् वरक वचि म् हमरा ि्वा करै त िनि, आगािोिोनलिक ररशोि, ज् एकल िीक वलक िनि, ज् िीररशा िँ ि्हो हमरा िािाँ आनि ग् लाह, अि​ि जीविक कोिो िात िनह अहाँ िभक गवाही ि्हो नदअ। 5 हम सशं अहाँ िभक ल्ल िरम् े् वर क्ँ धनवाद दै त िी ज् अहाँ िभ हिका िभ क्ँ ओनहिा गहण करै त िी ज् िा पभर अहाँ िभ क्ँ गहण करताह। मर दा ज् िभ हिका िभक अिमाि कशलनि, हिका िभ क्ँ शीेर मिीहक कृिा िँ कमा कशल जाश। 6 तोआि म् रहनिहार भाश िभक प्म अहाँ िभ क्ँ पणाम करै त अनि। 7 हमरा िभक पभर शीेर मिीह हिका िभक आदर करनि। नजिका िर ओ िभ ेरीर, पाण आ आत् मा दर िू म् आेा करै त िनि। नवशाि मे, प्म मे , एकता मे । मिीह शीेर म् नवदाई हमर िाझा आेा।


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Maithili - The Epistle of Ignatius to the Philadelphians by Filipino Tracts and Literature Society Inc. - Issuu