यीशु मसीहक मृत ु, दफन आ पुन रुतन तखन मूसत इसतराक सभ बुजुर् सभ केँ बजत कऽ कहाथिन, “अपन कुा-परिवतिक अनुसति रकटत मेमनत थनकतथा कऽ फसह-पतबथन केँ मतरि थदयौक।” अहतँ सभ थहस्पक रुचत ाऽ कऽ ओथह खून मे डु बत थदयौक आ ओथह खून मे जे खून अथि ततथह सँ पतितँ आ दु नू कततक खंभत केँ मतरि थदयौक। अहतँ सभ मे सँ थकय् भ्ि धरि अपन घिक दिबजत पि नथह थनकात। थकरक तँ पिमेश् वि थमसक ा्क सभ केँ मतरि दे बतक ाेा ओथह मे सँ रुजरि जेततह। जखन ओ पतँ व पि आ दु नू कततक खंभत पि खून दे खततह तखन पिमेश् वि दिबजत पि सँ रुजरि जेततह आ थवनतशक केँ अहतँ सभक घि मे घुथस कऽ अहतँ सभ केँ मतरि नथह दे थिन। थनषतसन 12:2123 जँ केओ मृतुक य्ग पतप केने अथि आ ओकित मतिा जतय आ ओकित रति पि फतँ सी पि ाटकत दे बऽ तँ ओकि ातश भरि ितथत रति पि नथह िहत, मुदत अहतँ ओकित ओथह थदन क्न् तिहे ँ रतथ़ दे ब। (थकरक तँ जे फतँ सी पि ाटका अथि से पिमेश् विक अथभशप अथि।) जे अहतँ क पिमेश् वि पिमेश् वि अहतँ सभ केँ उतितथधकतिक रप मे दै त िथि, अशुद नथह ह्अय।” ववयत 21:22-23 कुकुि सभ हमित घेिने अथि, दु षक सभत हमित घेिने अथि, हमि हति आ परि बेधाक। हम अपन सभ हडी केँ कथह सकैत िी: ओ सभ हमित थदस तकैत अथि आ रकटक तकैत अथि। ओ सभ हमि वस केँ अपनत मे बतँ थट कऽ हमि वस पि थिटी ारतबैत अथि। भजन 22:16-18 सतथि सपतहक बतद मसीहक नतश भऽ जेततह, मुदत अपनत ाेा नथह। रकि अंत बतथ़ सँ ह्यत, आ युदक अंत धरि उजत़तत थनधत् रित कया रेा अथि। दतथनया 9:26 हम दतऊदक घितनत आ यरशाेमक थनवतसी सभ पि अनुगह आ थवनतीक आत् मत ढतरि दे ब, आ ओ सभ हमित थदस तकत, जकित ओ सभ बेधने अथि, आ ओकित ाेा श्क कित, जेनत थकय् अपन रकाौतत बेटतक श्क किै त अथि, आ ओकित ाेा कटु तत मे िहत, जेनत जे अपन जेि बचतक ाेा कटु तत मे प़ै त अथि। जकियतह 12:10 हम सभ सँ पथहने जे थकिु हमित सेह् भेटा अथि से अहतँ सभ केँ सौंपाहँ जे मसीह धम्शतस् तक अनुसति हमित सभक पतपक ाेा मरि रेातह। ओ दफनत रेातह आ तेसि थदन जीथब उिातह, शतसक अनुसति: 1 क्रिनी 15:3-4
यशतयतह भथवषवयत यशतयतह 53 1 हमित सभक खबरि मे के थवशतस केाक? पिमेश् विक बतँ थह केकित पि परट कया रेा अथि? 2 थकरक तँ ओ ओकित सतमने क्मा पौधत जकतँ बथ़ जतयत आ शुष जमीनक जथ़ जकतँ । आ जखन हनकत दे खबथन तखन क्न् रहन सौनय् नथह अथि जे हम सभ हनकि इचत किी। 3 ओ मनुष् य दतित थतिसृत आ थतिसृत कया जतइत अथि। रकटत दु खी आ श्क सँ परिथित ा्क, आ हम सभ हनकत सँ मुँह जेनत नुकत ाेाहँ । ओ थतिसृत भेातह, आ हम सभ हनकत आदि नथह किै त िाहँ । 4 ओ हमित सभक दु ःख केँ सहन कयाथन आ हमित सभक दु ःख केँ सहन कयाथन।
यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
5 मुदत हमित सभक अपितधक कतिणे ँ ओ घतया भेातह, हमित सभक अधम्क कतिणे ँ ओ ि्ट खत रेातह। आ हनकि पहति सँ हम सभ िीक भ’ रेा िी। 6 हम सभ बिद जकतँ भटका िी। हम सभ रक-रकटत अपन-अपन बतट थदस घुथम रेा िी। पिमेश् वि हनकत पि हमित सभक अधम्क द्ष ारत दे ाथन। 7 ओ दबा रेातह, आ दु ःखखत भेातह, मुदत ओ अपन मुँह नथह ख्ााथन, ओ मेमनत जकतँ वधक ाेा आना जतइत िथि, जेनत भे़ ँ त ओकि कतटथनहतिक स्झतँ रूंरत ह्इत अथि, ते ँ ओ अपन मुँह नथह ख्ाैत अथि। 8 ओ जेा आ न् यतय सँ थनकताा रेातह। कतिण, ओ जीथवत ा्कक दे श सँ कथट रेा िा, कतिण हमि पजत सभक अपितधक कतिणे ँ ओ मतरि दे ा रेा िा।” 9 ओ अपन मृतु मे दु ष् ट ा्कक संर आ धथनक ा्कक संर अपन कब बनौाथन। थकरक तँ ओ क्न् थहं सत नथह केने िा आ ने ओकि मुँह मे क्न् िा। 10 तइय् पिमेश् वि केँ नीक ातराथन जे ओ हनकत कुिाथिन। ओ ओकित दु खी क’ दे ाक, जखन अहतँ ओकि पतण केँ पतपक बथादतन बनत दे ब, तखन ओ अपन संततन केँ दे खख ाेत, ओ अपन थदन केँ ामत कित, आ पभुक पसरतत ओकि हति मे सफा ह्यत।” 11 ओ अपन पतणक कष केँ दे खख कऽ तृप ह्यत। कतिण, ओ हनकत सभक अधम् केँ सहन कित।” 12 ते ँ हम ओकित पैघ ा्कक संर भतर बतँ थट दे ब आ ओ ाूट केँ बावतन सभक संर बतँ थट दे त। थकरक तँ ओ अपन पतण केँ मृतुक ाेा उझथा दे ाथन। ओ बहत् ा्कक पतप उिौाथन आ अपितधी सभक ाेा थबनती कयाथन।
मती के सुस मतिति मती 26 1 यीशु ई सभ बतत समतप कऽ कऽ अपन थशष् य सभ केँ कहाथिन। 2 अहतँ सभ जनैत िी जे दू थदनक बतद फसह-पव्क पतबथन अथि आ मनुष् य-पुत केँ कूस पि ि़तबय ाेा ध्खत दे ा जतयत। 3 तखन पधतनपुि्थहत, धम्शतसी आ पजतक बू़-पुि्थहत सभ महतपुि्थहतक महा मे जमत भऽ रेातह। 4 ओ सभ थविति-थवमश् कयाथन जे ओ सभ ितुितई सँ यीशु केँ पकथ़ कऽ मतरि सकय। 5 मुदत ओ सभ कहाथिन, “पव्क थदन नथह, कही ं ा्कक बीि हं रतमत नथह भऽ जतय।” 6 यीशु जखन क़्ी थसम्नक घि मे बेतथनयत मे िातह। 7 रक स् ती हनकत ार अयाीह, थजनकत ार रकटत अातबतसिक थडबत िाथन, जतथह मे बहत कीमती मिहम िाथन, आ ओ भ्जनक समय मे हनकत मति पि ढतरि दे ाथन। 8 मुदत हनकि थशष् य सभ ई दे खख क्थधत भऽ कऽ कहाथिन, “ई क्न कतजक ाेा उजत़ा जत िहा अथि?” 9 ई मिहम बहत दतम मे बेथि कऽ रिीब सभ केँ दे ा जत सकैत िा। 10 यीशु ई बतत बुथझ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ स् ती केँ थकरक पिे शतन किै त िी? थकरक तँ ओ हमित पि नीक कतज केने िथि। 11 थकरक तँ अहतँ सभक संर रिीब सभ सथदखन िहै त अथि। मुदत हमित अहतँ सभ सथदखन नथह िी। 12 ओ हमि शिीि पि ई मिहम ढतरि दे ाथन आ हमित दफन किबतक ाेा कयाथन। 13 हम अहतँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे, जतर-जतय ई सुसमतिति सम् पूण् संसति मे पितरित ह्यत, ओतथह रथह स् तीक दतित कया रेा बतत सेह् कहा जतयत। 14 बतिह मे सँ रक र्टे यहदत इसरिय्ती नतमक पुि्थहत सभक ार रेातह। 15 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ हमित की दे ब आ हम ओकित अहतँ सभक हति मे सौंथप दे ब?” ओ सभ ितनीक तीस टु क़ीक ाेा हनकत संर वतित कयाथन। 16 ओथह समय सँ ओ हनकत ध्खत दे बतक अवसि तकैत िहातह।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
17 अखमीिी ि्टीक पव्क पथहा थदन थशष् य सभ यीशु ार आथब कऽ पुिाथिन, “अहतँ ितहै त िी जे हम सभ फसह-पतबथन अहतँ ाेा कतऽ तैयति किी?” 18 ओ कहाथिन, “ रहन आदमी ार नरि मे जतउ आ ओकित कह जे, ‘रुर कहै त िथि, ‘हमि समय ार आथब रेा अथि। हम अपन थशष्य सभक संर अहतँ क घि मे फसह-पतबथन मनतरब। 19 थशष्य सभ जेनत यीशु दतित थनयुय कया रेा िा, तेनत कयाथन। ओ सभ फसह-पतबथन तैयति कयाथन। 20 सतँ झ भेात पि ओ बतिह र्टे क संर बैथस रेातह। 21 ओ सभ भ्जन किै त कता ओ कहाथिन, “ हम अहतँ सभ केँ सते कहै त िी जे अहतँ सभ मे सँ थकय् हमित ध्खत दे त।” 22 ओ सभ बहत दु खी भऽ कऽ रक-रक र्टे ओकित कहऽ ारातह, “पभु, की हम िी?” 23 ओ उति दे ाथिन, “ जे हमित संर बत्न मे हति डु बतओत, से हमित ध्खत दे त।” 24 मनुष् यक पुत ओथहनत िाैत िथि जेनत हनकत बतिे मे थाखा अथि, मुदत थधकति ओथह आदमी पि, जकित दतित मनुष् यक पुत केँ ध्खत दे ा रेा अथि। ओथह आदमीक ाेा नीक िथहतैक जँ ओ जन नथह ाेने िथहतैक। 25 तखन हनकत ध्खत दे थनहति यहदत उति दे ाथिन, “रुर, की हम िी?” ओ ओकित कहाथिन, “ अहतँ कहाहँ ।” 26 ओ सभ भ्जन किै त कता यीशु ि्टी ाऽ कऽ आशीष दऽ कऽ ओकित त्थ़ कऽ थशष् य सभ केँ दऽ दे ाथिन आ कहाथिन, “ ाीह, खतउ। ई हमि दे ह अथि। 27 ओ पतात ाऽ कऽ धन् यवतद दऽ कऽ हनकत सभ केँ दे ाथिन आ कहाथिन, “ अहतँ सभ रथह मे सँ पीबू। 28 ई हमि नव थनयमक खून अथि जे पतपक कमतक ाेा बहत् ा्कक ाेा बहतओा रेा अथि। 29 मुदत हम अहतँ सभ केँ कहै त िी जे, हम आब सँ रथह बेा केि फा मे सँ ततबत धरि नथह पीब, जतबत धरि हम अहतँ सभक संर अपन थपततक ितज् य मे नव-नव बेा केि फा नथह पीब। 30 ओ सभ स्त रतथब कऽ जैतूनक पहत़ पि थनकथा रेातह। 31 तखन यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ आइ ितथत अहतँ सभ हमित कतिणे ँ आहत भऽ जतयब। 32 मुदत हम जीथब उिातक बतद अहतँ सभ सँ पथहने राीा जतयब। 33 पतुस उति दे ाथिन, “अहतँ क कतिणे ँ भाे सभ ा्क आहत भऽ जतय, मुदत हम कथहय् आहत नथह ह्यब।” 34 यीशु हनकत कहाथिन, “ हम अहतँ केँ सते कहै त िी जे आइ ितथत मुरत् बतजबत सँ पथहने अहतँ हमित तीन बेि असीकति किब।” 35 पतुस हनकत कहाथिन, “हम जँ अहतँ क संर मरि जतयब, मुदत हम अहतँ केँ असीकति नथह किब।” तथहनत सभ थशष सेह् कहाथिन। 36 तखन यीशु हनकत सभक संर रेटसमनी नतमक यतन पि आथब थशष् य सभ केँ कहाथिन, “ जखन धरि हम ओतऽ जतबऽ पति्नत किऽ जत िहा िी ततबत अहतँ सभ रतऽ बैसा िह।” 37 ओ पतुस आ जबदीक दु नू बेटत केँ अपनत संर ा’ रेातह। 38 तखन ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ हमि पतण मृत् यु धरि बहत दु खी अथि। 39 ओ कनेक आरू बथ़ कऽ मुँह पि खथस कऽ पति्नत कयाथन, “ हे हमि थपतत, जँ संभव ह् तँ ई पतात हमित सँ िथा जतउ। 40 यीशु थशष् य सभक ार आथब कऽ हनकत सभ केँ सुता पतथब कऽ पतुस केँ पुिाथिन, “ की, अहतँ सभ हमित संर रक घंटत धरि नथह जतथर सकाहँ ?” 41 जतररक आ पति्नत कर जे अहतँ सभ पिीकत मे नथह प़य। 42 ओ द्सि बेि जत कऽ पति्नत कयाथन, “ हे हमि थपतत, जँ ई पतात हमित सँ नथह िथा जतयत, जतबत हम रकित नथह पीब, तँ अहतँ क इचत पूित ह्यत।” 43 ओ फेि आथब कऽ हनकत सभ केँ सुता दे खाथन, कतिण हनकत सभक आँ खख भतिी िाथन। 44 ओ हनकत सभ केँ ि्थ़ फेि िथा रेातह आ तेसि बेि पति्नत कयाथन। 45 तखन यीशु अपन थशष् य सभक ार आथब हनकत सभ केँ कहाथिन, “ आब सुथत िह आ थवशतम कर। 46 उिू, हम सभ जतइ।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
47 जखन ओ बजैत िातह तखन बतिह मे सँ रक यहदत आ हनकत संर तावति आ ातिी ाऽ कऽ बहत ितस भी़ आथब रेातह। 48 हनकत ध्खत दे थनहति हनकत सभ केँ रकटत संकेत दे ाथिन जे, “हम जकित िुमत ाेब, ओ वैह अथि।” 49 ओ तुिन यीशु ार आथब कहाथिन, “हे रुर! आ िुमत ाेाक। 50 यीशु हनकत पुिाथिन, “ थमत, अहतँ थकरक आथब रेा िी?” तखन ओ सभ आथब कऽ यीशु पि हति ितखख कऽ हनकत पकथ़ ाेाक। 51 यीशुक संर िहथनहति मे सँ रक र्टे अपन हति पसतरि कऽ अपन तावति थनकतथा महतपुि्थहतक रकटत न्कि केँ मतरि दे ाक आ ओकि कतन कतथट ाेाक। 52 तखन यीशु हनकत कहाथिन, “ अपन तावति केँ फेि सँ ओकि जरह पि ितखख थदयौक। 53 की अहतँ स्िैत िी जे आब हम अपन थपतत सँ पति्नत नथह कऽ सकैत िी आ ओ हमित रखन बतिह सँ बेसी स् वर्दूतक सेनत दऽ दे ततह? 54 तखन ई धम्शतस् त क्नत पूित ह्यत जे रथह तिहे ँ ह्बऽ प़त? 55 ओही समय यीशु ा्क सभ केँ कहाथिन, “ की अहतँ सभ हमित पक़बतक ाेा तावति आ ातिी ा’ क’ ि्ि जकतँ थनकाा िी?” हम अहतँ सभक संर थनत मन् थदि मे थशकत दै त बैसा िही, मुदत अहतँ सभ हमित पि क्न् पक़ नथह िखाहँ । 56 मुदत ई सभ बतत रथह ाेा भेा जे पवक् तत सभक धम्शतस् त पूित भऽ जतय। तखन सभ थशष् य हनकत ि्थ़ कऽ भतथर रेातह। 57 यीशु केँ पक़ने ा्क सभ हनकत महतपुि्थहत कैफत ार ाऽ रेातह, जतय धम्शतसी आ बू़-पुितन सभ जमत िा। 58 मुदत पतुस हनकत पतितँ -पतितँ दू ि-दू ि धरि महतपुि्थहतक महा धरि रेातह आ अंत दे खबतक ाेा न्कि सभक संर बैथस रेातह। 59 मुख्यपुि्थहत सभ, पतिीन-पुि्थहत सभ आ सम्पूण् परिषद् यीशुक थवरद झूि रवतही तकाथन जे हनकत मतरि दे ा जतय। 60 मुदत थकय् नथह भेटा। अंत मे दू टत झूि रवतह आया, 61 ओ कहाथिन, “ई आदमी कहाक जे, हम पिमेश् विक मन् थदि केँ धस कऽ तीन थदन मे बनत सकैत िी।” 62 महतपुि्थहत उथि कऽ कहाथिन, “की अहतँ थकिु उति नथह दऽ िहा िी?” ई सभ अहतँ क थवरद की रवतही दै त अथि? 63 मुदत यीशु िुप िहातह। महतपुि्थहत हनकत उति दे ाथिन, “हम अहतँ केँ जीथवत पिमेश् विक शपि दै त िी जे अहतँ हमित सभ केँ ई बततउ जे अहतँ पिमेश् विक पुत मसीह िी वत नथह।” 64 यीशु हनकत कहाथिन, “ अहतँ कहाहँ , तइय् हम अहतँ सभ केँ कहै त िी जे आब अहतँ सभ मनुष् य-पुत केँ सतमर्क दथहनत कतत बैसा आ स् वर्क मेघ मे आथब िहा दे खब।” 65 तखन महतपुि्थहत अपन वस फतथ़ कऽ कहाथिन, “ओ थननत कयाथन अथि। हमित सभ केँ रवतहक आओि की आवशकतत अथि? दे खू, आब अहतँ सभ हनकि थननत सुनाहँ । 66 अहतँ सभक की थविति अथि? ओ सभ उति दे ाथिन, “ओ मृतुक द्षी िथि।” 67 तखन ओ सभ हनकत मुँह पि िूक फेथक कऽ मतरि दे ाकथन। आ द्सि ा्क हनकत हतिक हिेाी सँ मतरि दे ाकथन। 68 ओ कहाथन, “हे मसीह, हमित सभ केँ भथवषवतणी कर, जे अहतँ केँ मतरि दे ाक?” 69 पतुस बतहि महा मे बैसा िातह आ रकटत ा़की हनकत ार आथब कऽ कहाथिन, “अहतँ सेह् राीा थनवतसी यीशुक संर िाहँ ।” 70 मुदत यीशु हनकत सभक स्झतँ नकतिै त कहाथिन, “हमित नथह बुझा अथि जे अहतँ की कहै त िी।” 71 जखन यीशु ओसतित मे रेातह तँ रकटत आओि दतसी हनकत दे खख कऽ ओतऽ िहथनहति सभ केँ कहाथिन, “ई आदमी सेह् नतसितक यीशुक संर िा।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
72 ओ फेि शपि दऽ कऽ असीकति कयाथन, “हम ओथह आदमी केँ नथह थिनै त िी।” 73 थकिु समयक बतद ओथह ितम ित़ ा्क सभ हनकत ार आथब कऽ पतुस केँ कहाथिन, “अहतँ सेह् हनकत सभ मे सँ रक िी। थकरक तँ त्हि बतजब त्ित झऱत किै त अथि।” 74 तखन ओ रतरि प़य ारातह आ शपि दे बय ारातह, “हम ओथह आदमी केँ नथह थिनै त िी।” आ तुिन मुरत् कू भ रेा। 75 पतुस यीशुक विन म्न पत़ाथन जे हनकत कहाथिन, “मुरत् बतजबत सँ पथहने अहतँ हमित तीन बेि असीकति कऽ दे ब।” ओ बतहि थनकथा कऽ कटु कतनय ातरा। मती 27 1 भ्ि भेात पि सभ मुख्यपुि्थहत आ पजतक बू़-पुितन सभ यीशुक थवरद थविति कयाथन जे हनकत मतरि दे ा जतय। 2 ओ सभ ओकित बतखन कऽ ओकित ाऽ रेा आ ितजपता प्ख्युस थपाततुसक हति मे सौंप दे ाक। 3 तखन हनकत ध्खत दऽ दे ने िहथनहति यहदत हनकत द्षी िहितओा रेा दे खख अपनत केँ पशतततप कयाथन आ ओथह तीसटत ितनीक टु क़ी केँ मुख्यपुि्थहत आ बू़-पुि्थहत सभक समक आथन दे ाथन। 4 ओ कहाथन, “हम पतप केाहँ जे हम थनद्ष खूनक संर ध्खत कऽ दे ाहँ ।” ओ सभ पुिाथिन, “हमित सभक ाेा ई की अथि?” दे खू अहतँ ओथह बतत केँ। 5 ओ ितनीक टु क़ी सभ मन् थदि मे फेथक कऽ िथा रेातह आ फतँ सी पि फँथस रेातह। 6 मुखपुि्थहत सभ ितनीक टु क़ी सभ ाऽ कऽ कहाथिन, “क्ष मे ितखब उथित नथह अथि, थकरक तँ ई खूनक म्ा अथि।” 7 ओ सभ थविति-थवमश् कऽ कऽ पिदे शी सभ केँ रत़बतक ाेा कुमतिक खेत कीथन ाेाक। 8 ते ँ ओथह खेत केँ आइ धरि “खूनक खेत” कहा रेा। 9 तखन जेिेमी भथवषवयत दतित कहा रेा बतत पूित भऽ रेा जे, “ओ सभ ितनीक तीस टु क़ी ाऽ ाेाक, जे मूलवतनक दतम िा, जकि म्ा इसतराक सन् ततन सभ मे सँ कया रेा िा। 10 ओ सभ कुमतिक खेतक ाेा दे ाथन, जेनत पभु हमित दे ाथन। 11 यीशु ितजपताक समक ित़ भऽ रेातह आ ितजपता हनकत सँ पुिाथिन, “की अहतँ यहदी सभक ितजत िी?” यीशु हनकत कहाथिन, “ अहतँ कहै त िी।” 12 जखन हनकत पि मुखखयत पुि्थहत आ बू़-पुितन सभक आि्प ाराथन तँ ओ थकिु ओ उति नथह दे ाथिन। 13 तखन थपाततुस हनकत कहाथिन, “की अहतँ नथह सुनैत िी जे ओ सभ अहतँ पि कतेक रवतही दै त िथि?” 14 ओ हनकत कथहय् रक् शब नथह कहाथिन। रतेक जे ितजपता बहत आशय्िथकत भ' रेातह। 15 ओथह भ्ज मे ितजपताक आदथत िाथन जे ा्क सभक ाेा रकटत कैदी केँ ि्थ़ दै त िातह, जकित ओ सभ ितहै त िातह। 16 तखन हनकत सभक रकटत उलेखनीय कैदी िाथन, जकि नतम िा बिबत। 17 तखन ओ सभ जमत भेात पि थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ ितहै त िी जे हम अहतँ सभ केँ ककित ि्थ़ दी?” बिबत, आथक यीशु जकित मसीह कहा जतइत िै क? 18 ओ जनैत िातह जे ईषत् क कतिणे ँ ओ सभ हनकत बँिौने िथि। 19 जखन ओ नतयक आसन पि बैसा िातह तखन हनकि पती हनकत ार पिौाथन जे, “ओथह धम् पुरष सँ अहतँ क क्न् संबंध नथह अथि, कतिण आइ हनकत कतिणे ँ हमित सपनत मे बहत कष भेा अथि।” 20 मुदत मुख्यपुि्थहत आ बू़-पुितन सभ ा्क सभ केँ मनत ाेाक जे बिबत सँ पूथि कऽ यीशु केँ नष कऽ थदयौक। 21 ितजपता हनकत सभ केँ उति दे ाथिन, “अहतँ सभ रथह दु नू मे सँ के ितहै त िी जे हम अहतँ सभ केँ ि्थ़ दी? ओ सभ कहाकथन, “बिबत।” 22 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “तखन हम यीशु केँ की किब, जकित मसीह कहा जतइत अथि?” ओ सभ हनकत कहाथिन, “ओकित कूस पि ि़तओा जतय।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
23 ितजपता पुिाथिन, “ओ की अधातह केाथि?” मुदत ओ सभ आओि बेसी थिथियत उिा जे, “ओकित कूस पि ि़तओा जतय।” 24 जखन थपाततुस दे खाथन जे ओ थकिु ओ पितस नथह भऽ सकैत िथि, बा् थक हं रतमत भऽ िहा अथि, तँ ओ पतथन ाऽ कऽ भी़क स्झतँ हति ध् कऽ कहाथिन, “हम रथह धम् वखयक खून सँ थनद्ष िी। 25 तखन सभ ा्क उति दे ाथिन, “ओकि खून हमित सभ पि आ हमित सभक बचत सभ पि ह्।” 26 तखन ओ बिबत केँ हनकत सभक हति मे ि्थ़ दे ाथन आ यीशु केँ क़्त मतरि कऽ कूस पि ि़तबय ाेा सौंथप दे ाथन। 27 तखन ितजपताक थसपतही सभ यीशु केँ आम सभतरति मे ाऽ रेा आ समस सैथनक सभक दा केँ हनकत ार जमत कऽ ाेाक। 28 ओ सभ ओकि कप़त उततरि कऽ ाता िं रक वस पथहरि ाेाक। 29 ओ सभ कतँ टक मुकुट रतथ़ कऽ ओकि मति पि आ दथहनत हति मे ख़ ारत दे ाक आ ओकित सतमने िे हन झुकत कऽ ओकि मजतक उ़बैत कहाक जे, “हे यहदी सभक ितजत! 30 ओ सभ हनकत पि िूक फेथक कऽ ख़ ाऽ कऽ मति पि पहति कयाथन। 31 ओ सभ हनकि उपहतस केातक बतद हनकत सँ वस उततरि कऽ हनकि अपन वस पथहरि कऽ हनकत कूस पि ि़तबय ाेा ाऽ रेातह। 32 जखन ओ सभ बतहि थनकाैत िातह तखन हनकत सभ केँ कुिे नक रकटत आदमी भेटाथन, जकि नतम थसम्न िाथन। 33 ओ सभ र्ल्ित नतमक यतन पि पहँ िातह, अित् त् ख्प़ीक यतन पि पहँ िातह। 34 ओ सभ ओकित थपत थमातओा थसिकत पीबय ाेा दे ाक, मुदत ओकि सतद िखात पि ओ नथह पीबय ातरा। 35 ओ सभ हनकत कूस पि ि़त दे ाथिन आ थिटी ारत कऽ हनकि वस बतँ थट ाेाथन, जतथह सँ ई बतत पूित भऽ जतय जे पवक् तत दतित कहा रेा िा, “ओ सभ हमि वस ओकित सभ मे बतँ थट दे ाक आ हमि वस पि थिटी ारत दे ाक।” 36 ओ सभ बैथस कऽ ओतऽ हनकत दे खैत िहातह। 37 ओकि मति पि अपन आि्प ारत दे ाथिन जे, “ई यहदी सभक ितजत यीशु िथि।” 38 तखन हनकत संर दू टत ि्ि कूस पि ि़तओा रेा िा, रकटत दथहनत कतत आ द्सि बतमत कतत। 39 ओथह ितम सँ रुजिय बात ा्क सभ मति थहातबैत हनकत रतरि दे ाक। 40 ओ कहाथिन, “अहतँ जे मन् थदि केँ त्थ़ कऽ तीन थदन मे बनबैत िी, से अपनत केँ बितउ।” जँ अहतँ पिमेश् विक पुत िी तँ कूस पि सँ उतरि जतउ। 41 तथहनत मुख्यपुि्थहत सभ सेह् शतसी आ बू़-पुितन सभक संर हनकि उपहतस किै त कहाथिन। 42 ओ द्सि् केँ उदति कयाथन। अपनत केँ ओ नथह बित सकैत अथि। जँ ओ इसतराक ितजत िथि तँ आब कूस पि सँ उतरि जतथि आ हम सभ हनकत पि थवश् वतस किब। 43 ओ पिमेश् वि पि भि्सत कयाथन। जँ ओकित ितही तँ आब ओकित बितबऽ थदयौक, थकरक तँ ओ कहने िा जे हम पिमेश् विक पुत िी।” 44 हनकत संर कूस पि ि़ा ि्ि सभ सेह् हनकत दतँ त मे फेथक दे ाक। 45 ििम बजे सँ नवम बजे धरि पूित दे श मे अनति भ’ रेा। 46 किीब नौम बजे यीशु ज्ि-ज्ि सँ थिथियत उिातह, “ राी, राी, ातमत सबकनी?” अित् त् “हमि पिमेश् वि, हमि पिमेश् वि, अहतँ हमित थकरक ि्थ़ दे ाहँ ?” 47 ओतऽ ित़ थकिु ा्क सभ ई बतत सुथन कऽ कहाथिन, “ई आदमी रथायतह केँ बजत िहा अथि।” 48 रक र्टे तुित दौ़ा रकटत संज ाऽ कऽ ओथह मे थसिकत भरि कऽ ख़ पि ितखख ओकित पीबय दे ाक। 49 बतँ की ा्क सभ कहाथिन, “आउ, दे खब जे रथायतह ओकित बितबऽ आओत थक नथह।” 50 यीशु फेि ज्ि-ज्ि सँ थिथियत उिातह। 51 दे खू, मंथदिक पदत् ऊपि सँ नीितँ धरि दू भतर मे फतथट रेा िा। पृथी कतँ थप रेा आ पतिि फतथट रेा।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
52 कबि सभ खुजा। सुता पथवत ा्कक बहत ितस शिीि उथि रेा। 53 यीशु जीथब उिातक बतद कबि सभ सँ बतहि थनकथा पथवत नरि मे जत कऽ बहत् ा्कक समक परट भेातह। 54 जखन सेनतपथत आ हनकत संर जे यीशु केँ दे खैत िातह, भूकम आ घटनत सभ दे खख ओ सभ बहत भयभीत भऽ कऽ कहाथिन, “सते ई पिमेश् विक पुत िातह।” 55 ओतऽ बहत् स् तीरण दू ि सँ दे खैत िाीह जे राीा सँ यीशुक पतितँ -पतितँ हनकि सेवत कऽ िहा िाीह। 56 ओथह मे मरियम मरदाीनी, यतकूब आ य्सेसक मतय मरियम आ जबदीक सनतनक मतय मरियम सेह् िाीह। 57 सतँ झ भेात पि अरिमथियतक यूसुफ नतमक रकटत धनी आदमी अयातह जे यीशुक थशष् य सेह् िातह। 58 ओ थपाततुस ार जत कऽ यीशुक ातश मतँ थर ाेाक। तखन थपाततुस शव केँ ि़्बतक आजत दे ाथन। 59 यूसुफ ातश ाऽ कऽ रकटत सतफ थानन कप़त मे ापेथट ाेाक। 60 ओ ओकित अपन नव कब मे ितखख दे ाथिन, जे ओ िटतन मे कतथट ाेने िातह, तखन ओ रकटत पैघ पतिि केँ कबक दिबजत पि रु़कत कऽ िथा रेातह। 61 मरियम मरदाीनी आ द्सि मरियम कबक सतमने बैसा िाीह। 62 तैयतिीक थदनक बतद द्सि थदन मुख्यपुि्थहत आ फरिसी सभ थपाततुस ार आथब रेातह। 63 ओ कहाथन, “महतितज, हमित सभ केँ म्न अथि जे ओ ध्खेबतज जीथवत िहै त कहने िा जे, “तीन थदनक बतद हम जीथब उिब।” 64 ते ँ आजत थदयौक जे तेसि थदन धरि कब केँ सुिथकत ितखा जतय, जतथह सँ हनकि थशष् य सभ ितथत मे आथब कऽ ओकित ि्ित कऽ ा्क सभ केँ नथह कहथि जे, “ओ मृत् यु मे सँ जीथब उिा िथि।” 65 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ ार पहित अथि। 66 ओ सभ जत कऽ कब केँ पकत कऽ कऽ पतिि पि मुहि ारत कऽ पहित ारत दे ाक। मती 28 मे 1 थवशतम-थदनक अंत मे जखन सपतहक पथहा थदन भ्ि ह्बय ातरा तखन मरियम मरदाीनी आ द्सि मरियम कब दे खय ाेा अयाीह। 2 दे खू, रकटत पैघ भूकम भेा, कतिण पभुक स् वर्दूत स् वर् सँ उतरि कऽ दिबजत पि सँ पतिि केँ पतिू घुमत कऽ ओथह पि बैथस रेातह। 3 हनकि िेहित थबजाी जकतँ आ वस बफ् जकतँ उजि िाथन। 4 हनकि डि सँ िकक सभ थहाैत-डु ाैत मृत् यु जकतँ भऽ रेातह। 5 स् वर्दूत स् तीरण सभ केँ उति दे ाथिन, “अहतँ सभ नथह डे ितउ, थकरक तँ हम जनैत िी जे अहतँ सभ कूस पि ि़तओा रेा यीशु केँ तकैत िी।” 6 ओ रतय नथह िथि, थकरक तँ ओ जीथब रेा िथि, जेनत ओ कहाथन। आऊ, दे खू ओ यतन जतय पभु प़ा िातह। 7 जली-जली जत कऽ हनकि थशष् य सभ केँ कथह थदयौन जे ओ मृत् यु मे सँ जीथब उिा िथि। ओ अहतँ सभक आरू-पतिू राीा जतइत िथि। ओतथह अहतँ सभ हनकत दे खबथन। 8 ओ सभ भय आ बहत हष्क संर जली-जली कब सँ थवदत भऽ रेातह। आ अपन थशष् य सभ केँ खबरि अनबतक ाेा दौ़ा। 9 जखन ओ सभ हनकि थशष् य सभ केँ ई बतत कहय जत िहा िातह तँ यीशु हनकत सभ सँ भेट कऽ कऽ कहाथिन, “ सब जय ह्।” ओ सभ आथब कऽ हनकि परि पकथ़ कऽ हनकि आितधनत कयाथन। 10 तखन यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ नथह डर। 11 जखन ओ सभ जत िहा िातह तँ दे खाहँ जे पहिे दतिक थकिु ा्क नरि मे आथब कऽ मुख् यपुि्थहत सभ केँ सभटत कतजक बतत कहाकथन।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
12 जखन ओ सभ बू़-पुितन सभक संर जमत भऽ रेातह आ थविति-थवमश् कयाथन, तखन ओ सभ थसपतही सभ केँ पैघ पतइ दऽ दे ाथिन। 13 ओ कहाथिन, “कह जे, हनकि थशष् य सभ ितथत मे आथब कऽ हनकत ि्ित कऽ िथा रेातह जखन हम सभ सुता िाहँ ।” 14 जँ ई बतत ितजपताक कतन मे आथब जतयत तँ हम सभ हनकत मनत कऽ अहतँ सभ केँ सुिथकत ितखब। 15 ओ सभ पतइ ाऽ कऽ जेनत थसखतओा रेा िा, तेनत कऽ िहा िा। 16 तखन ररतिहटत थशष्य राीा नरि मे रेातह, जतऽ यीशु हनकत सभ केँ थनयुय केने िातह। 17 ओ सभ हनकत दे खख हनकि आितधनत कयाथन। 18 यीशु हनकत सभ ार आथब कऽ कहाथिन, “ सर् आ पृि् वी मे हमित सभटत सतमि्् य दे ा रेा अथि।” 19 ते ँ अहतँ सभ जतउ आ सभ जतथत केँ थपतत, पुत आ पथवत आत् मतक नतम सँ बपथतस् मत दऽ कऽ थसखतउ। 20 हम अहतँ सभ केँ जे थकिु आजत दे ने िी, तकित सभ केँ पतान किबतक ाेा थसखतउ। आमीन।
मिकु स के सुस मतिति मिकु स 14 1 दू थदनक बतद फसह-पतबथन आ अखमीिी ि्टीक पतबथन भेा, तखन मुख्यपुि्थहत आ धम्थशकक सभ ओकित िताबतजी मे पकथ़ कऽ मतरि दे ाक। 2 मुदत ओ सभ कहाथिन, “पव्क थदन नथह, कही ं ा्क मे हं रतमत नथह भ’ जतय।” 3 ओ क़्ी थसम्नक घि मे बेतथनयत मे जखन ओ भ्जन पि बैसा िातह तखन रकटत स् ती अातबतसिक थडबत ाऽ कऽ अयाीह, जकित मे बहत कीमती माबक माहम िा। ओ थडबत त्थ़ कऽ ओकि मति पि ढतरि दे ाक। 4 थकिु ा्क सभ अपनत मे क्थधत भऽ कऽ कहाथिन, “ई मिहम थकरक बबत् द कया रेा?” 5 तीन सय पेस सँ बेसी मे बेथि कऽ रिीब सभ केँ दऽ दे ा जत सकैत िा। ओ सभ हनकत पि ब़ब़तइत िहातह। 6 यीशु कहाथिन, “ओकित ि्थ़ थदयौक। अहतँ सभ ओकित थकरक पिे शतन किै त िी? हमित पि नीक कतज केने िथि। 7 थकरक तँ अहतँ सभक संर रिीब सभ सथदखन िहै त अथि आ जखन-जखन अहतँ सभ ितहै िी, तखन-तखन अहतँ सभ हनकत सभक भातई कऽ सकैत िी। 8 ओ जे थकिु कऽ सकाीह से कऽ सकाीह। 9 हम अहतँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे, जतर-जतय ई सुसमतिति सम् पूण् संसति मे पितरित ह्यत, ओतथह हनकत दतित कया रेा बतत सेह् हनकि सिणक ाेा कहा जतयत। 10 बतिह मे सँ रक यहदत इसरिय्ती मुख् यपुि्थहत सभक ार रेातह। 11 ई बतत सुथन ओ सभ खुश भऽ रेा आ ओकित पतइ दे बतक विन दे ाक। आ ओ ख्जैत िहातह जे क्नत सुथवधतपूव्क ओकित संर थवशतसघतत क' सकैत अथि। 12 अखमीिी ि्टीक पथहा थदन जखन ओ सभ फसह-पतबथन मतिै त िातह तखन हनकि थशष् य सभ हनकत कहाथिन, “अहतँ ितहै त िी जे हम सभ कतय जत कऽ फसह-पतबथनक भ्जन तैयति किी?” 13 ओ अपन दू टत थशष् य केँ पित कऽ कहाथिन, “ अहतँ सभ नरि मे जतउ, तखन अहतँ सभ सँ रक आदमी पतथनक घैा ाऽ कऽ भेट कित।” 14 ओ कतह भीति जतयत, अहतँ सभ घिक मतथाक केँ कह जे, ‘रुर कहै त िथि, ‘अथतथि कक कतय अथि, जतय हम अपन थशष् य सभक संर फसह-पतबथन खतरब? 15 ओ अहतँ सभ केँ ऊपिक रकटत पैघ क्िाी दे खतओत जे सुसखजत आ तैयति कया रेा अथि। 16 हनकि थशष् य सभ जत कऽ नरि मे आथब कऽ हनकत सभ केँ जेनत कहने िातह तेनत पतथब रेातह। 17 सतँ झ मे ओ बतिह र्टे क संर अबैत िथि। 8
यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
18 ओ सभ बैसा भ्जन किै त कता यीशु कहाथिन, “ हम अहतँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे अहतँ सभ मे सँ जे हमित संर भ्जन किै त अथि, से हमित ध्खत दे त।” 19 ओ सभ दु खी भऽ कऽ रक-रक कऽ हनकत पुिऽ ारातह, “की हम िी?” द्सि कहाकथन, “की हम िी?” 20 ओ हनकत सभ केँ उति दे ाथिन, “ ई बतिह मे सँ रक अथि जे हमित संर बत्न मे डु बकी ारत िहा अथि।” 21 मनुष् यक पुत जथहनत हनकत थवषय मे थाखा अथि, तेनत जतइ िथि। नीक िहै त जे ओथह आदमीक ाेा जँ कथहय् जन नथह ाेने िथहतैक। 22 जखन ओ सभ भ्जन किै त िा तखन यीशु ि्टी ाऽ कऽ आशीष दऽ कऽ त्थ़ कऽ ओकित सभ केँ दे ाथिन आ कहाथिन, “ ाीह, खतउ, ई हमि शिीि अथि।” 23 ओ पतात ाऽ कऽ धन् यवतद दऽ कऽ ओकित सभ केँ दऽ दे ाथिन। 24 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ ई हमि नव थनयमक खून अथि जे बहत् ा्कक ाेा बहतओा रेा अथि।” 25 हम अहतँ सभ केँ सत् य कहै त िी जे, जतबत धरि हम पिमेश् विक ितज् य मे नव-नव बेा केि फा नथह पीब। 26 ओ सभ स्त रतथब कऽ जैतूनक पहत़ पि थनकथा रेातह। 27 यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ आइ ितथत अहतँ सभ हमित कतिणे ँ आहत भऽ जतयब। 28 मुदत हम जीथब उिातक बतद अहतँ सभ सँ पथहने राीा जतयब। 29 पतुस हनकत कहाथिन, “भाे सभ आहत भऽ जतयत, मुदत हम नथह किब।” 30 यीशु हनकत कहाथिन, “ हम अहतँ केँ सते कहै त िी जे आइ ितथत मे मुरत् दू बेि बतजबत सँ पथहने अहतँ हमित तीन बेि असीकति किब।” 31 मुदत ओ आि ज्ि सँ बजातह, “जँ हम अहतँ क संर मरि जतयब तँ हम अहतँ केँ क्न् तिहे ँ असीकति नथह किब।” तथहनत सेह् कहाथन ओ सब। 32 ओ सभ रेटसमनी नतमक यतन पि पहँ िातह, तखन ओ अपन थशष् य सभ केँ कहाथिन, “ जतबत हम पति्नत किब ततबत अहतँ सभ रतय बैसा िह।” 33 ओ पतुस, यतकूब आ यूहन् नत केँ अपनत संर ाऽ कऽ बहत आशय्िथकत भऽ रेातह। 34 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ हमि पतण मृतुक ाेा बहत दु खी अथि। 35 ओ कनेक आरू बथ़ कऽ जमीन पि खथस प़ातह आ पति्नत कयाथन जे जँ संभव ह् तऽ समय हनकत सँ बीथत जतय। 36 ओ कहाथिन, “अबत, थपतत, अहतँ क ाेा सभ थकिु संभव अथि। ई पतात हमित सँ िीन थाअ, तितथप जे हम ितहै त िी से नथह, बा् थक अहतँ जे ितहै त िी। 37 यीशु आथब कऽ हनकत सभ केँ सुता दे खख पतुस केँ कहाथिन, “ थसम्न, की अहतँ सुता िी?” की अहतँ रक घंटत नथह जतथर सकैत िाहँ ? 38 अहतँ सभ जतरा िह आ पति्नत कर, जतथह सँ अहतँ सभ पिीकत मे नथह पथ़ जतयब। आतत सिमुि तैयति िै , ाेथकन शिीि कमज्ि िै । 39 ओ फेि जत कऽ पति्नत कऽ कऽ वैह बतत बजातह। 40 जखन ओ घुिातह तँ फेि हनकत सभ केँ सुता दे खाथन, थकरक तँ हनकत सभक आँ खख भतिी िाथन। 41 ओ तेसि बेि आथब हनकत सभ केँ कहाथिन, “ आब सुथत जतउ आ आितम कर। दे खू, मनुष् यक पुत पतपी सभक हति मे सौंपा रेा अथि। 42 उिू, िाू। दे खू, जे हमित ध्खत दे त से ार आथब रेा अथि।” 43 जखन ओ बजैत िातह तखन तुिन बतिह मे सँ रक यहदत आ हनकत संर तावति आ ातिी ाऽ कऽ बहत ितस भी़, मुखखयत पुि्थहत, शतसी आ बू़-पुितन सभक थदस सँ आथब रेातह। 44 हनकत ध्खत दे थनहति हनकत सभ केँ रकटत थनशतनी दऽ कऽ कहने िा जे, “हम जकित िुमत ाेब, ओ वैह अथि।” ओकित ाऽ कऽ सुिथकत ाऽ जतउ। 45 ओ अयात पि स्झे हनकत ार जत कऽ कहाथिन, “रुर, रुर! आ िुमत ाेाक। 46 ओ सभ हनकत पि हति ितखख हनकत पकथ़ ाेाथन।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
47 ओतय ित़ ा्क मे सँ रक र्टे तावति थनकतथा महतपुि्थहतक रकटत न्कि केँ मतरि कऽ ओकि कतन कतथट ाेाक। 48 यीशु हनकत सभ केँ उति दे ाथिन, “ की अहतँ सभ हमित पक़बतक ाेा तावति आ ातिी ाऽ कऽ ि्ि जकतँ थनकाा िी?” 49 हम सभ थदन अहतँ सभक संर मन् थदि मे थशकत दै त िाहँ , मुदत अहतँ सभ हमित नथह पक़ाहँ । 50 ओ सभ हनकत ि्थ़ कऽ भतथर रेातह। 51 रकटत युवक हनकत पतितँ -पतितँ आथब रेा िा, जे अपन नंरटे शिीि मे थानन कप़त पथहिने िा। युवक सभ हनकत पकथ़ ाेाकथन। 52 ओ थानक कप़त ि्थ़ कऽ नंरटे भऽ रेातह। 53 ओ सभ यीशु केँ महतपुि्थहतक ार ाऽ रेातह आ हनकत संर सभ मुखपुि्थहत, बू़-पुि्थहत आ शतसी सभ जमत भऽ रेातह। 54 पतुस हनकत पतितँ -पतितँ दू ि-दू ि धरि महतपुि्थहतक महा मे रेातह। 55 मुख्यपुि्थहत सभ आ सम् पूण् परिषद् यीशु केँ मतिबतक ाेा रवतही ततकय ारातह। आ क्न् नथह भेटा। 56 थकरक तँ बहत् ा्क हनकत थवरद झूि रवतही दै त िातह, मुदत हनकत सभक रवतही रक संर नथह िा। 57 थकिु ा्क उथि कऽ हनकत पि झूि रवतही दे ाथिन। “ 59 मुदत दु नूक रवतह सेह् रक संर नथह िा। 60 महतपुि्थहत बीि मे ित़ भऽ यीशु सँ पुिाथिन, “की अहतँ थकिु उति नथह दऽ िहा िी?” ई सभ अहतँ क थवरद की रवतही दै त अथि? 61 मुदत ओ िुप िहातह आ थकिु ओ उति नथह दे ाथन। फेि महतपुि्थहत हनकत सँ पुिाथिन, “की अहतँ मसीह, धनक पुत िी?” 62 यीशु कहाथिन, “ हम िी। 63 तखन महतपुि्थहत अपन कप़त फतथ़ कऽ कहाथिन, “हमित सभ केँ आओि रवतहक की ितही?” 64 अहतँ सभ थननत सुनाहँ । ओ सभ हनकत मृतुक द्षी िहिौाथन। 65 थकिु ा्क ओकित पि िूक फेकय ातरा, मुँह झतँ थप कऽ ओकित मतरि-पीट किय ातरा आ ओकित कहय ातरा जे, “भथवषवतणी कऽ थदयौक।” 66 जखन पतुस महा मे नीितँ मे िातह तखन महतपुि्थहतक रकटत दतसी आथब रेातह। 67 पतुस केँ रिम किै त दे खख ओ हनकत थदस तकाीह आ बजाीह, “अहतँ सेह् नतसितक यीशुक संर िाहँ ।” 68 मुदत ओ रथह बतत केँ नकतिै त कहाथिन, “हम नथह जनैत िी आ नथह बुझैत िी जे अहतँ की कहै त िी।” ओ ओसतित मे थनकथा रेातह। आ मुरत् िताक दा। 69 रकटत दतसी हनकत फेि सँ दे खख कऽ ित़ ा्क सभ केँ कहय ाराीह, “ई ओथह मे सँ रक िथि।” 70 ओ फेि रथह बतत केँ असीकति कयाथन। थकिु र कता बतद ओतय ित़ ा्क सभ फेि पतुस केँ कहाथिन, “अहतँ हनकत सभ मे सँ रक िी। 71 मुदत ओ रतरि प़य ारातह आ कसम खतय ारातह, “हम रथह आदमी केँ नथह थिनै त िी, जकित बतिे मे अहतँ सभ बजैत िी।” 72 आ द्सि बेि मुरत् कूि भऽ रेा। पतुस यीशु केँ कहा बतत म्न पत़ाथन, “ मुरत् दू बेि बतजबत सँ पथहने अहतँ हमित तीन बेि असीकति कऽ दे ब।” जखन ओ रथह बतत पि स्थि कऽ कतथन उिातह। मिकु स 15 1 भ्िे -भ्ि मुख् यपुि्थहत सभ बू़-पुितन सभ आ धम्-थशकक सभ आ समस परिषद् सँ थविति-थवमश् कयाथन आ यीशु केँ बतखन कऽ ाऽ रेातह आ थपाततुस केँ सौंप दे ाथिन। 2 थपाततुस हनकत पुिाथिन, “की अहतँ यहदी सभक ितजत िी?” यीशु उति दे ाथिन, “ अहतँ ई बतत कहै त िी।” 3 मुखपुि्थहत सभ हनकत पि बहत ितस आि्प ारौाथन, मुदत ओ थकिु ओ उति नथह दे ाथन।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
4 थपाततुस फेि पुिाथिन, “की अहतँ थकिु उति नथह दऽ िहा िी?” दे खू, ओ सभ अहतँ क थवरद कतेक रवतही दै त िथि। 5 मुदत यीशु रखन धरि थकिु ओ उति नथह दे ाथिन। ते ँ थपाततुस आशय्िथकत भ’ रेातह। 6 ओथह भ्ज मे ओ हनकत सभक ाेा रकटत कैदी केँ ि्थ़ दे ाथिन, जकित ओ सभ ितहथि। 7 बिबत नतमक रक र्टे िातह जे हनकत संर थवद्ह केथनहति ा्क सभक संर बतना िा आ थवद्ह मे हतत केने िातह। 8 ा्क सभ ज्ि-ज्ि सँ िीतति किय ातरा जे ओ हनकत सभक संर जेनत किै त िातह, तेनत किथि। 9 थपाततुस हनकत सभ केँ उति दे ाथिन, “की अहतँ सभ ितहै त िी जे हम यहदी सभक ितजत केँ अहतँ सभ केँ ि्थ़ दी?” 10 ओ जनैत िातह जे मुख्य पुि्थहत सभ हनकत ईषत् क कतिणे ँ सौंपने िथि। 11 मुदत मुख्यपुि्थहत सभ ा्क सभ केँ रथह ाेा पेरित कयाथन जे ओ बिबत केँ ि्थ़ दे बथन। 12 तखन थपाततुस हनकत सभ केँ फेि सँ कहाथिन, “तखन अहतँ सभ ओकित की किब जे अहतँ सभ यहदी सभक ितजत कहै त िी?” 13 ओ सभ फेि थिथियत उिा, “ओकित कूस पि ि़त थदयौक।” 14 तखन थपाततुस हनकत सभ केँ पुिाथिन, “ओ की अधातह कतज कयाथन?” ओ सभ आि बेसी थिथियत उिा, “ओकित कूस पि ि़त थदयौक।” 15 रथह तिहे ँ थपाततुस ा्क सभ केँ संतुष किऽ ितहै त िातह आ बिबत केँ हनकत सभक हति मे ि्थ़ दे ाथिन आ यीशु केँ क़्त मतरि कऽ कूस पि ि़तबय ाेा ि्थ़ दे ाथन। 16 थसपतही सभ हनकत पैट्रियम नतमक दातन पि ाऽ रेातह। आ पूित दा केँ रक ितम बजबैत िथि। 17 ओ सभ ओकित बैरनी िं रक कप़त पथहित कऽ कतँ टक मुकुट पतथन कऽ मति पि ारत दे ाक। 18 ओ हनकत पणतम किय ारातह, “हे यहदी सभक ितजत! 19 ओ सभ ओकि मति पि ख़ सँ मतरि दे ाक आ िूक फेकाक आ िे हन झुथक कऽ ओकि आितधनत कयाक। 20 ओ सभ हनकि उपहतस कऽ कऽ हनकत सँ बैरनी िं रक कप़त उततरि कऽ हनकत अपन कप़त पथहरि कऽ कूस पि ि़तबय ाेा ाऽ रेातह। 21 ओ सभ थसकनि आ रफसक थपतत कुिे थनयतक थसम्न केँ अपन कूस उितबऽ ाेा बतध किै त िथि। 22 ओ सभ हनकत र्ल्ित यतन पि ाऽ जतइत िथि, जकि अि् ह्इत अथि ख्प़ीक यतन।” 23 ओ सभ हनकत रनक संर मथदित पीबय दे ाथिन, मुदत हनकत नथह भेटाथन। 24 ओ सभ हनकत कूस पि ि़त कऽ हनकि वस बतँ थट कऽ हनकत सभ पि थिटी ारत दे ाथिन जे पतेक के की ाेबतक ितही। 25 तेसि घंटत भऽ रेाै आ ओ सभ हनकत कूस पि ि़त दे ाथिन। 26 ओकि आि्पक ऊपि थाखा रेा िा, “यहदी सभक ितजत।” 27 हनकत संर दू टत ि्ि केँ कूस पि ि़त दै त िथि। रकटत दथहनत कतत आ द्सि बतमत कतत। 28 धम्शतस् त पूित भऽ रेा जे कहै त अथि जे, “ओ अपितधी सभक संर थरना रेातह।” 29 ओथह ितम सँ रुजिै त ा्क सभ मति थहातबैत हनकत रतरि कऽ कऽ कहाथिन, “अह, अहतँ जे मन् थदि केँ त्थ़ कऽ तीन थदन मे बनबैत िी। 30 अपनत केँ बितउ आ कूस पि सँ उतरि जतउ। 31 तथहनत मुखखयत पुि्थहत सभ सेह् शतसी सभक संर उपहतस किै त कहाथिन, “ओ द्सि् केँ बित ाेाथन। अपनत केँ ओ नथह बित सकैत अथि। 32 इसतराक ितजत मसीह कूस पि सँ उतरि जतउ, जतथह सँ हम सभ दे खख कऽ थवश् वतस किी। हनकत संर कूस पि ि़तओा रेा ा्क सभ हनकत थननत कयाकथन। 33 ििम बजे भेात पि नवम बजे धरि पूित दे श पि अनति भऽ रेा।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
34 नौम बजे यीशु ज्ि-ज्ि सँ थिथियत उिातह, “ रा्ई, रा्ई, ातमत सबकनी?” जकि अि् अथि, “हमि पिमेश् वि, हमि पिमेश् वि, अहतँ हमित थकरक ि्थ़ दे ाहँ ?” 35 ओतय ित़ थकिु ा्क सभ ई बतत सुथन कऽ कहाथिन, “दे खू, ओ रथायतह केँ बजत िहा िथि।” 36 रक र्टे दौथ़ कऽ रकटत संज मे थसिकत भरि कऽ रकटत ख़ पि ितखख कऽ ओकित पीबय दे ाक आ कहाक, “अहतँ ि़्ू। दे खू जे रथायतस ओकित उततिय ाेा आओत थक नथह। 37 यीशु ज्ि-ज्ि सँ थिथियत उिातह आ भूत ि्थ़ दे ाथन। 38 मंथदिक पदत् ऊपि सँ नीितँ धरि दू भतर मे फतथट रेा। 39 जखन हनकत सतमने ित़ सेनतपथत दे खाथन जे ओ रनत थिथियत िहा िथि आ पतण ि्थ़ िहा िथि, तखन ओ कहाथिन, “ई आदमी सते पिमेश् विक पुत िातह।” 40 ओथह मे सँ स् तीरण सभ सेह् दू ि थदस तकैत िाीह, जतथह मे मरियम मरदाीनी, यतकूब ि्ट आ य्सेक मतय मरियम आ सा्मी िाीह। 41 (ओ राीा मे िहात पि हनकि पतितँ -पतितँ िाैत िातह आ हनकि सेवत किै त िातह।) आओि बहत ितस स् तीरण जे हनकत संर यरशाेम रेा िाीह। 42 आब जखन सतँ झ भऽ रेा िा, थकरक तँ ओ तैयतिी िा, अित् त् थवशतम-थदन सँ रक थदन पथहने। 43 अरिमतथियतक यूसुफ, रकटत आदिणीय सातहकति, जे पिमेश् विक ितज् यक पतीकत मे िातह, आथब कऽ थनभ्कततपूव्क थपाततुस ार रेातह आ यीशुक शिीिक ाेा तिसैत िातह। 44 थपाततुस आशय्िथकत भऽ रेातह जे ओ पथहने सँ मरि रेा िथि। 45 जखन ओ सेनतपथत केँ ई बतत बुथझ रेाथन तँ ओ ातश यूसुफ केँ दऽ दे ाथिन। 46 ओ नीक सन थानन कीथन कऽ ओकित नीितँ उततरि कऽ ओकित थानेन मे ापेथट कऽ रकटत कब मे ितखख दे ाक जे पतिि सँ कतटा रेा िा आ कबक दिबजत पि पतिि रु़कत दे ाक। 47 मरियम मरदाीनी आ य्सेक मतय मरियम हनकत कतय ितखा रेा िाथन से दे खाथन। मिकु स 16 1 थवशतम-थदन बीतात पि मरियम मरदाीनी आ यतकूब आ सा्मीक मतय मरियम मीि मसतात कीथन ाेाथन जतथह सँ ओ सभ आथब कऽ हनकत अथभषेक किथि। 2 सपतहक पथहा थदन भ्िे -भ्ि ओ सभ सूय्दय मे कब पि पहँ िातह। 3 ओ सभ आपस मे कहाथिन, “कबिक दिबजत पि सँ पतिि के रु़कत दे त?” 4 जखन ओ सभ दे खाक तँ दे खाक जे पतिि रु़थक रेा अथि, थकरक तँ ओ पतिि बहत पैघ िा। 5 ओ सभ कब मे पवेश किै त दे खाक जे रकटत युवक केँ दथहनत कतत बैसा िा, जे नमहि उजि वस पथहिने िा। ओ सभ घबित रेातह। 6 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “डिब नथह, अहतँ सभ नतसितक यीशु केँ ततथक िहा िी जे कूस पि ि़ा रेा िातह। ओ रतय नथह िथि, दे खू ओ सभ ओथह यतन पि जतय ओ सभ ओकित ितखख दे ने िातह।” 7 मुदत जतउ, हनकि थशष् य सभ आ पतुस केँ कथह थदअ जे ओ अहतँ सभ सँ पथहने राीा जतइत िथि। 8 ओ सभ जली-जली थनकथा कऽ कब सँ भतथर रेा। ओ सभ कतँ थप उिा आ िथकत भऽ रेा। थकरक तँ ओ सभ डित रेा िा। 9 सपतहक पथहा थदन जखन यीशु भ्िे -भ्ि जीथब उिातह तखन ओ पथहने मरियम मरदाीनी केँ पकट भेातह, थजनकत मे सँ ओ सततटत दु षततत केँ बतहि थनकताने िातह। 10 ओ सभ जत कऽ हनकत संर िहथनहति सभ केँ कहाथिन। 11 ओ सभ जखन ई सुथन कऽ जे ओ जीथवत िथि आ हनकत सँ दे खा रेातह, तखन ओ सभ थवश् वतस नथह कयाथन। 12 तकि बतद ओ सभ दू र्टे केँ िाैत-थफिै त आ दे श मे जतइत कता द्सि रप मे पकट भेातह। 13 ओ सभ जत कऽ शेष ा्क सभ केँ ई बतत कहाथिन।
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14 तकि बतद ओ ररतिह र्टे केँ भ्जनक समय मे दश्न कयाथन आ हनकत सभक अथवशतस आ कि्ि हदय सँ डतँ थट दे ाथन, थकरक तँ ओ सभ हनकत जीथब उिातक बतद जे सभ हनकत दे खने िातह, हनकत सभ पि थवश् वतस नथह कयाथन। 15 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ संसति मे जतउ आ सभ पतणी केँ सुसमतिति पिति कर।” 16 जे थवश् वतस कित आ बपथतस् मत ाैत अथि, से उदति पतओत। मुदत जे थवश् वतस नथह कित से द्षी िहितओा जतयत। 17 ई सभ थिन् ह सभ थवश् वतस कियवात सभक पतितँ िात। हमि नतम पि ओ सभ दु ष् टतत् मत सभ केँ भरतओत। ओ सभ नव भतषत मे बतजत। 18 ओ सभ सतँ प केँ पकथ़ ाेत। जँ ओ सभ क्न् घततक वसु पीबथि तँ ओकित सभ केँ क्न् नुकसतन नथह ह्यत। ओ सभ बीमति सभ पि हति ितखत आ ओ सभ िीक भऽ जेततह। 19 तखन पिमेश् वि हनकत सभ सँ बतत कयात पि हनकत स् वर् मे ाऽ रेातह आ पिमेश् विक दथहनत कतत बैसातह। 20 ओ सभ जत कऽ सभ ितम पिति कयाथन, पभु हनकत सभक संर कतज किै त िातह आ हनकत सभक बतद थिन् त सभक संर विन केँ पुष कयाथन। आमीन।
ाूक त के सुस मतिति ाूक त 22 मे 1 अखमीिी ि्टीक पतबथन ार आथब रेा िा, जकित फसह कहा जतइत अथि। 2 मुख्यपुि्थहत आ धम्थशकक सभ ओकित क्नत मतरि सकैत अथि। थकरक तँ ओ सभ ा्कसँ डे ितइत िा। 3 तखन शैततन बतिह र्टे क संखत मे सँ इसरिय्ती नतमक यहदत मे पवेश कयाथन। 4 यीशु जत कऽ मुख् यपुि्थहत आ सेनतपथत सभ सँ रपशप कयाथन जे ओ हनकत सभ केँ क्नत ध्खत दऽ सकैत िथि। 5 ओ सभ पसर भऽ हनकत पतइ दे बतक वतित कयाथन। 6 ओ विन दे ाथिन आ ा्कक अनुपखयथत मे हनकत सभ केँ ध्खत दे बतक अवसि तकाथन। 7 तखन अखमीिी ि्टीक थदन आथब रेा, जखन फसह-पतबथन केँ मतिबतक ितही। 8 ओ पतुस आ यूहन् नत केँ पिौाथन जे, “ जतउ आ हमित सभ केँ फसह-पतबथन तैयति कर जतथह सँ हम सभ भ्जन किी।” 9 ओ सभ हनकत पुिाथिन, “अहतँ ितहै त िी जे हम सभ कतऽ तैयति किी?” 10 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ दे खू, जखन अहतँ सभ नरि मे पवेश किब तखन रक आदमी अहतँ सभ सँ भेट कित, जे पतथन क घैा ा’ क’ िात। ओकि पतितँ -पतितँ ओथह घि मे जतउ जतय ओ पवेश किै त अथि। 11 अहतँ सभ घिक मतथाक केँ कहब जे, ‘रुर अहतँ केँ कहै त िथि जे, ‘अथतथि कक कतय अथि, जतय हम अपन थशष् य सभक संर फसह-भ्ज खतयब? 12 ओ अहतँ सभ केँ रकटत पैघ क्िाी दे खौततह जे सुसखजत अथि। 13 ओ सभ जत कऽ ओ सभ जेनत हनकत सभ केँ कहने िातह, तेनत पतथब रेातह। 14 जखन समय आथब रेा तखन ओ बतिह पेरित आ हनकत संर बैथस रेातह। 15 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ हमित कष सँ पथहने अहतँ सभक संर ई फसह भ्जन किबतक इचत अथि। 16 हम अहतँ सभ केँ कहै त िी जे, जतबत धरि पिमेश् विक ितज् य मे ई पूित नथह भऽ जतयत तत धरि हम आब रकि फा नथह खतरब। 17 ओ पतात ाऽ कऽ धनवतद दै त कहाथिन, “ ई ाऽ कऽ आपस मे बतँ थट थाअ। 18 हम अहतँ सभ केँ कहै त िी जे जत धरि पिमेश् विक ितज् य नथह आओत तत धरि हम बेा केि फा नथह पीब।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
19 ओ ि्टी ाऽ कऽ धनवतद दे ाथिन आ ओकित त्थ़ कऽ हनकत सभ केँ दे ाथिन, “ ई हमि शिीि अथि जे अहतँ सभक ाेा दे ा रेा अथि। 20 तथहनत भ्जनक बतद पतात सेह् कहै त िा जे, “ ई पतात हमि खून मे नव थनयम अथि जे अहतँ सभक ाेा बहौा रेा अथि।” 21 मुदत दे खू, जे हमित ध्खत दे त, ओकि हति हमित संर टे बुा पि अथि। 22 मनुष् यक पुत जेनत थनधत् रित कया रेा िा, तेनत जतइत िथि, मुदत थधकति ओथह आदमी पि, जकित दतित ओकित ध्खत दे ा रेा अथि। 23 ओ सभ आपस मे पूितति किऽ ारातह जे ई कतज किऽ वात मे सँ के अथि। 24 हनकत सभक बीि झऱत सेह् भेा जे हनकत सभ मे सँ केकित सभ सँ पैघ मतना जतयत। 25 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ रैि-यहदी सभक ितजत सभ हनकत सभ पि पभुभ िखैत िथि। आ जे ओकित सभ पि अथधकति िखैत अथि, ओकित पि्पकतिी कहा जतइत िै क। 26 मुदत अहतँ सभ रहन नथह िहब, मुदत जे अहतँ सभ मे पैघ अथि, से ि्टकत जकतँ ह्अय। जे मुखखयत अथि से सेवत किथनहति जकतँ । 27 थकरक तँ की पैघ अथि जे भ्जन पि बैसा अथि आ थक सेवत किऽ वात? की ओ भ्जन पि बैसा नथह अथि? मुदत हम अहतँ सभक बीि ओथहनत िी जेनत सेवत किऽ वात अथि।” 28 अहतँ सभ ओ सभ िी जे हमि पिीकत मे हमित संर बना िहातह। 29 हम अहतँ सभक ाेा रकटत ितज् य थनयुय किै त िी, जेनत हमि थपतत हमित ाेा थनधत् रित केने िथि। 30 अहतँ सभ हमि ितज मे हमि टे बुा पि खत-पीब आ थसंहतसन पि बैथस इसतराक बतिह र्तक नतय किब। 31 पिमेश् वि कहाथिन, “थसम्न, थसम्न, दे खू, शैततन अहतँ सभ केँ रहम जकतँ ितनबतक ाेा ितहै त अथि। 32 मुदत हम अहतँ क ाेा पति्नत केाहँ जे अहतँ क थवश् वतस कीण नथह ह्। 33 ओ हनकत कहाथिन, “पभु, हम अहतँ क संर जेा आ मृतु दु नू मे जेबतक ाेा तैयति िी।” 34 ओ कहाथिन, “ हम पतुस, हम अहतँ केँ कहै त िी जे आइ मुरत् नथह बतजत, ततथह सँ पथहने अहतँ तीन बेि रथह बतत सँ इनकति किब जे अहतँ हमित थिनै त िी।” 35 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ जखन हम अहतँ सभ केँ थबनत पस्, ख्प आ जूततक थबनत पिे ाहँ , तखन अहतँ सभ केँ क्न् िीजक कमी िा? ओ सभ कहाथिन, “थकिु नथह।” 36 तखन ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ मुदत आब, जकित ार पस् अथि, ओ ओकित ा’ ाेत आ तथहनत ओकि तावति सेह्। 37 हम अहतँ सभ केँ कहै त िी जे ई बतत हमित मे रखन धरि पूित हे बतक ितही जे, “ओ अपितधी सभक बीि मे थरना रेातह।” 38 ओ सभ कहाथिन, “पभु, दे खू, दू टत तावति अथि।” ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ बहत भऽ रेा।” 39 ओ अपन आदथत जकतँ जैतूनक पहत़ पि थनकथा रेातह। हनकि थशष् य सभ सेह् हनकि पतितँ -पतितँ िथा रेातह। 40 यीशु ओथह यतन पि पहँ िात पि हनकत सभ केँ कहाथिन, “ पति्नत कर जे अहतँ सभ पिीकत मे नथह प़य।” 41 ओ पतििक ढता पि हनकत सभ सँ हथट रेातह आ िे हन टे कने पति्नत कयाथन। 42 ओ कहाथन, “थपतत, जँ अहतँ ितहै त िी तँ ई पतात हमित सँ हटत थदयौक। 43 तखन स् वर् सँ रकटत स् वर्दूत हनकत सतमि्् य दऽ कऽ परट भेातह। 44 ओ पी़त कऽ कऽ आि् रंभीितत सँ पति्नत कयाथन आ पसीनत ओथहनत भऽ रेातह जेनत जमीन पि खसैत खूनक पैघ-पैघ बूंद। 45 यीशु पति्नत सँ उथि कऽ अपन थशष् य सभक ार पहँ िातह तँ हनकत सभ केँ दु ःख सँ सुता दे खाथन। 46 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ थकरक सुतैत िी?” उिू आ पति्नत कर, जतथह सँ अहतँ सभ पिीकत मे नथह पथ़ जतयब।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
47 जखन ओ रखन धरि बतजैत िातह तखन दे खाहँ जे बहत् ा्क आ बतिह र्टे मे सँ रक यहदत नतमक ा्क हनकत सभक आरतँ बथ़ कऽ यीशु ार आथब रेातह जे हनकत िुमत ाेथि। 48 यीशु हनकत पुिाथिन, “ यहदत, की अहतँ मनुष् य-पुत केँ िुमत दऽ कऽ ध्खत दऽ दै त िी?” 49 हनकत ारक ा्क सभ जखन हनकत बतद की ह्यत से दे खाथन तँ हनकत पुिाथिन, “पभु, की हम सभ तावति सँ मतरि दे ब?” 50 ओथह मे सँ रक र्टे महतपुि्थहतक न्कि केँ मतरि कऽ ओकि दथहनत कतन कतथट ाेाक। 51 यीशु उति दे ाथिन, “ अहतँ सभ रखन धरि सहन कर।” ओ हनकि कतन िूथब कऽ हनकत िीक कऽ दे ाथिन। 52 तखन यीशु हनकत ार आया मुख् यपुि्थहत सभ, मन् थदिक सेनतपथत सभ आ बू़-पुितन सभ केँ कहाथिन, “ की अहतँ सभ ि्ि जकतँ तावति आ ातिी ा’ कऽ थनकाा िी?” 53 जखन हम सभ थदन अहतँ सभक संर मन् थदि मे िाहँ तँ अहतँ सभ हमित पि हति नथह ब़बैत िाहँ । 54 तखन ओ सभ हनकत पकथ़ कऽ महतपुि्थहतक घि मे अनाथन। पतुस दू ि-दू ि धरि पतिू-पतिू िथा रेातह। 55 ओ सभ दातनक बीि मे आथर जित कऽ रक संर बैथस रेातह, तखन पतुस हनकत सभक बीि बैथस रेातह। 56 मुदत रकटत दतसी हनकत आथर ार बैसा दे खख कऽ हनकत थदस तकाथन आ कहाथिन, “ई आदमी सेह् हनकत संर िा।” 57 ओ हनकत नकतिै त कहाथिन, “मतिी, हम हनकत नथह थिनै त िी।” 58 थकिु र कताक बतद रक र्टे हनकत दे खख कहाथिन, “अहतँ सेह् हनकत सभक मे सँ िी।” पतुस कहाथिन, “यति, हम नथह िी।” 59 किीब रक घंटतक बतद रक र्टे थवश्वतसपूव्क कहाथिन, “सते ई आदमी सेह् हनकत संर िा। 60 पतुस कहाथिन, “यति, अहतँ की कहै त िी से हमित नथह बुझा अथि।” जखन ओ रखन धरि बजैत िातह तखन तुिन मुरत् खसथक रेा। 61 पभु घुथम कऽ पतुस थदस तकाथन। पतुस पभुक विन म्न पत़ाथन जे ओ हनकत कहने िातह, “ मुरत् बतजबत सँ पथहने अहतँ हमित तीन बेि असीकति कऽ दे ब।” 62 पतुस बतहि थनकथा कऽ कटु कतनय ातरा। 63 यीशु केँ पक़ने ा्क सभ हनकि उपहतस कऽ कऽ मतरि दे ाकथन। 64 ओ सभ हनकत आँ खख पि पटी बतखन कऽ हनकत मुँह पि पहति कयाथन आ पुिाथिन, “भथवषवतणी कर, अहतँ केँ के मतरि दे ाक?” 65 ओ सभ आि् बहत ितस बतत हनकत पि थननत कयाथन। 66 भ्ि ह्इते ा्कक बू़-पुि्थहत आ शतसी सभ रक ितम आथब कऽ हनकत अपन परिषद् मे ाऽ रेाथन आ कहाथिन। 67 की अहतँ मसीह िी? बततइर। ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ हम अहतँ सभ केँ कहब तँ अहतँ सभ थवश् वतस नथह किब। 68 जँ हमहँ अहतँ सभ सँ पूिब तँ अहतँ सभ हमित क्न् उति नथह दे ब आ ने हमित जतय दे ब। 69 आब मनुष् यक पुत पिमेश् विक सतमि्् यक दथहनत कतत बैसततह। 70 तखन ओ सभ पुिाथिन, “की अहतँ पिमेश् विक पुत िी?” ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ कहै त िी जे हम िी।” 71 ओ सभ पुिाथिन, “हमित सभ केँ आओि रवतहक की ितही?” थकरक तँ हम सभ हनके मुँह सँ सुनने िी। ाूक त 23 1 ओ सभ ा्क सभ उथि कऽ हनकत थपाततुस ार ाऽ रेातह। 2 ओ सभ हनकत पि आि्प ारतबय ारातह जे, “हमित सभ केँ ई आदमी जतथत केँ थवकृत किै त दे खाहँ आ कैसि केँ कि दे बत सँ मनत किै त दे खाहँ जे ओ सयं मसीह ितजत िथि।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
3 थपाततुस हनकत पुिाथिन, “की अहतँ यहदी सभक ितजत िी?” ओ हनकत उति दे ाथिन, “ अहतँ ई बतत कहै त िी।” 4 तखन थपाततुस मुखपुि्थहत आ ा्क सभ केँ कहाथिन, “हमित रथह आदमी मे क्न् द्ष नथह भेटैत अथि।” 5 ओ सभ आि भयंकि भऽ कऽ बतजा, “ओ राीा सँ ा’ कऽ रथह ितम धरि समस यहदी सभ मे थशकत दै त ा्क सभ केँ भ़कतबैत िथि।” 6 थपाततुस राीाक थवषय मे सुथन पुिाथिन जे की ओ आदमी राीा अथि। 7 जथहनत हनकत बुझाथन जे ओ हे ि्दे सक अथधकति केत मे िथि, तखन ओ हनकत हे ि्दे स ार पिौाथन, जे ओथह समय मे यरशाेम मे सेह् िातह। 8 हे ि्दे स यीशु केँ दे खख कऽ बहत खुश भऽ रेातह, थकरक तँ ओ बहत थदन सँ हनकत दे खबतक इचत िखैत िातह। आ हनकत आशत िाथन जे हनकत दतित कया रेा क्न् िमतति दे खा रेा ह्यत। 9 तखन ओ हनकत सँ बहत ितस बतत मे पूितति कयाथन। मुदत ओ ओकित थकिु उति नथह दे ाक। 10 मुख्य पुि्थहत आ धम्थशकक सभ ित़ भऽ हनकत पि घ्ि आि्प ारौाथन। 11 हे ि्दे स अपन युदकम् सभक संर हनकत घृणत कऽ कऽ हनकि मजतक उ़ौाथन आ रकटत सुनि वस पथहरि कऽ फेि सँ थपाततुस ार पित दे ाथिन। 12 ओही थदन थपाततुस आ हे ि्दे स रक संर द्सी भऽ रेातह, थकरक तँ पथहने दु नू र्टे क बीि शतुतत िाथन। 13 थपाततुस जखन ओ मुख् यपुि्थहत सभ, शतसक सभ आ ा्क सभ केँ बजौाथन। 14 हनकत सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ रथह आदमी केँ हमित ार अनाहँ जेनत ा्क केँ थवकृत कियवात अथि। 15 हे ि्दे स सेह् नथह, थकरक तँ हम अहतँ सभ केँ हनकत ार पिौने िाहँ । दे खू, ओकित संर क्न् मृतुक य्ग क्न् कतज नथह ह्इत िै क। 16 ते ँ हम ओकित डतँ थट दे ब आ ओकित ि्थ़ दे ब। 17 (थकरक तँ हनकत सभ केँ भ्ज मे रकटत केँ ि्थ़ दे बतक ितही।” 18 ओ सभ रके बेि थिथियत उिाथन, “रथह आदमी केँ दू ि कर आ हमित सभक ाेा बिबत केँ ि्थ़ थदअ।” 19 (ओ नरि मे थवद्ह आ हततक कतिणे ँ जेा मे डताा रेातह।) 20 थपाततुस यीशु केँ ि्थ़ दे बऽ ितहै त िातह आ फेि हनकत सभ सँ बतत कयाथन। 21 मुदत ओ सभ थिथियत उिाथन, “ओकित कूस पि ि़तउ, कूस पि ि़तउ।” 22 ओ तेसि बेि हनकत सभ केँ पुिाथिन, “ओ की अधातह कतज कयाथन?” हम ओकित मे मृतुक क्न् कतिण नथह भेटा अथि, ते ँ हम ओकित सजत दे ब आ ओकित ि्थ़ दे ब। 23 ओ सभ तुिन ज्ि-ज्ि सँ बजैत िातह जे हनकत कूस पि ि़तओा जतय। ओ सभ आ मुख्य पुि्थहत सभक आवतज पबा भऽ रेा। 24 तखन थपाततुस सजत दे ाथिन जे ओ सभ ओथहनत ह्अय। 25 ओ थवद्ह आ हततक कतिणे ँ जेा मे डताा रेा िा, जकित ओ सभ ितहने िा, ओकित सभ केँ ि्थ़ दे ाक। मुदत यीशु केँ हनकत सभक इचत मे सौंप दे ाथन। 26 जखन ओ सभ हनकत ाऽ जत िहा िा तखन ओ सभ कुिे थनयतक थसम्न केँ पकथ़ ाेाक आ ओकित पि कूस ितखख दे ाक जतथह सँ ओ यीशुक पतितँ -पतितँ ओकित ाऽ सकर। 27 यीशुक पतितँ -पतितँ बहत ितस ा्क आ स् तीरण सभ सेह् हनकत थवातप आ थवातप किै त िा। 28 यीशु हनकत सभ थदस घुथम कऽ कहाथिन, “ हे यरशाेमक बेटी सभ, हमित ाेा नथह कतनब, बा् थक अपनत आ अपन बचत सभक ाेा कतनब।” 29 दे खू, ओ थदन आथब िहा अथि जतथह मे ओ सभ कहततह जे, “धन अथि बंजि, ओ रभ् जे कथहय् नथह जनैत िा, आ ओ बचत जे कथहय् दू ध नथह दऽ िहा िा।” 30 तखन ओ सभ पहत़ सभ केँ कहय ातरत जे, “हमित सभ पि खथस प़त।” आ पहत़ी थदस, हमित सभकेँ झतँ थप थदयौक। 31 जँ ओ सभ हरियि रति मे ई सभ कतज कित तँ सुखा रति मे की ह्यत?
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
32 हनकत संर दू टत आओि अपितधी सेह् िा, जकित मतरि दे बतक ाेा ाऽ रेा िा। 33 ओ सभ जखन कावतिी नतमक यतन पि पहँ िातह, तखन ओ सभ हनकत आ अपितधी सभ केँ रकटत दथहनत कतत आ द्सि बतमत कतत कूस पि ि़त दे ाथन। 34 तखन यीशु कहाथिन, “ थपतत, हनकत सभ केँ कमत कर। थकरक तँ ओ सभ की किै त िथि से नथह जनैत िथि। ओ सभ ओकि वस बतँ थट कऽ थिटी ारत दे ाक। 35 ा्क सभ दे खख कऽ ित़ भऽ रेा। हनकत सभक संर शतसक सभ सेह् हनकि उपहतस किै त कहाथिन, “ओ द्सि् केँ बित ाेाथन। जँ ओ पिमेश् विक िुना मसीह िथि तँ अपनत केँ बितबथि। 36 थसपतही सभ सेह् हनकि उपहतस किै त हनकत ार आथब कऽ थसिकत ि़बैत िातह। 37 ओ कहाथिन, “अहतँ जँ यहदी सभक ितजत िी तँ अपनत केँ बितउ।” 38 हनकत ऊपि यूनतनी, ाैथटन आ थहबू भतषतक अकि मे थाखा िाथन, “ई यहदी सभक ितजत िथि।” 39 फतँ सी पि ाटका अपितधी मे सँ रक र्टे हनकत रतरि कऽ कऽ कहाथिन, “अहतँ जँ मसीह िी तँ अपनत केँ आ हमित सभ केँ बितउ।” 40 मुदत द्सि ा्क हनकत डतँ थट कऽ कहाथिन, “की अहतँ पिमेश् वि सँ नथह डे िैत िी, थकरक तँ अहतँ ओथहनत द्षी िहितओा रेा िी?” 41 हम सभ सते नतयपूव्क। कतिण, हमित सभ केँ अपन कतजक उथित फा भेटैत अथि। 42 ओ यीशु केँ कहाथिन, “पभु, जखन अहतँ अपन ितज् य मे आथब जतयब तखन हमित म्न पत़ू।” 43 यीशु हनकत कहाथिन, “ हम अहतँ केँ सते कहै त िी जे आइ अहतँ हमित संर सर् मे िहब।” 44 ारभर ििम बजे भऽ रेा िा आ नवम बजे धरि पूित पृि् वी पि अन् हति भऽ रेा। 45 िौद अनति भऽ रेा आ मखनिक पदत् बीि मे फतथट रेा। 46 यीशु ज्ि-ज्ि सँ थिथियत कऽ कहाथिन, “ थपतत, हम अपन आत् मत अहतँ क हति मे सौंथप िहा िी। ” 47 सेनतपथत ई बतत दे खख कऽ पिमेश् विक मथहमत कऽ कऽ कहाथिन, “ई तँ धम् ा्क िातह।” “ 49 हनकि सभ परिथित आ राीा सँ हनकत पतितँ -पतितँ आबय बात स् तीरण सभ दू ि ित़ भऽ कऽ ई सभ बतत दे खैत िहातह। 50 यूसुफ नतमक रक आदमी िा जे सलतहकति िा। ओ नीक ा्क आ धम् िातह। 51 (ओ हनकत सभक सातह आ कतज सँ सहमत नथह िातह।) ओ यहदी सभक नरि अरिमतथियतक िातह। 52 ई आदमी थपाततुस ार जत कऽ यीशुक ातश मतँ थर ाेाक। 53 ओ ओकित उततरि कऽ थानेन मे ापेथट कऽ रकटत रहन कब मे ितखख दे ाथिन जे पतिि मे कतटा रेा िा, जतथह मे पथहने कथहय् ककि् नथह ितखा रेा िा। 54 ओथह थदन तैयतिी भऽ रेा िा आ थवशतमक थदन आथब रेा िा। 55 राीा सँ हनकत संर आया स् ती सभ सेह् पतितँ -पतितँ िथा रेाीह आ कब केँ दे खख िहा िाीह जे हनकि ातश क्नत ितखा रेा िाथन। 56 ओ सभ घुरि कऽ मसतात आ मिहम तैयति कयाथन। आजतक अनुसति थवशतम-थदन थवशतम कयाथन। ाूक त 24 मे 1 सपतहक पथहा थदन भ्िे -भ्ि ओ सभ अपन बनतओा मसतात आ थकिु आन ा्क सभ केँ ा’ कऽ कब पि पहँ िातह। 2 ओ सभ पतिि कब पि सँ रु़थक कऽ रेा दे खाथन। 3 ओ सभ भीति रेातह, मुदत पभु यीशुक शव नथह भेटाथन। 4 जखन ओ सभ रथह थवषय मे बहत असमंजस मे पथ़ रेा िा, तखन दे खाहँ जे दू र्टे िमकैत वस पथहिने हनकत सभक ार मे ित़ िातह। 5 ओ सभ डित कऽ पृि् वी थदस मुँह झुकत कऽ कहाथिन, “अहतँ सभ मृत् युक बीि जीथवत ा्क केँ थकरक तकैत िी?”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
6 ओ रतय नथह िथि, बा् थक जीथब उिा िथि। 7 ओ कहाथन, “मनुष-पुत केँ पतपी ा्कक हति मे सौंपा जतय आ कूस पि ि़तओा जतय आ तेसि थदन जीथब उिय प़तैक।” 8 ओ सभ हनकि बतत म्न पत़ाथन। 9 ओ कब पि सँ घुिातह आ ई सभ बतत ररतिह र्टे केँ आ बतँ की सभ केँ कहाथिन। 10 मरियम मरदाीनी, य्आनत, यतकूबक मतय मरियम आ हनकत सभक संर िहथनहति आन स् तीरण सभ पेरित सभ केँ ई बतत सुनौाथन। 11 ओ सभ हनकत सभक बतत बेकति कित जकतँ बुझतइत िाथन, मुदत ओ सभ ओकित सभ पि थवशतस नथह कयाथन। 12 तखन पतुस उथि कऽ कब थदस दौ़ा रेातह। झुथक कऽ ओ थानेन कप़त सभ केँ अपनत-अपन थबिा दे खख कऽ थवदत भऽ रेातह। 13 ओथह थदन दू र्टे यरशाेम सँ किीब सतथि फीट दू ि इमतऊस नतमक रतम मे रेातह। 14 ओ सभ रथह सभ घटनतक थवषय मे रक संर रप कयाथन। 15 जखन ओ सभ रक संर रप-सप किै त िा, तखन यीशु हनकत सभक संर आथब रेातह। 16 मुदत हनकत सभक नजरि थटका िाथन जे ओ सभ हनकत नथह थिनथि। 17 यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ िाैत-िाैत आ दु खी ह्इत कता रक-द्सि सँ क्न तिहक संवतद ह्इत अथि? 18 हनकत सभ मे सँ रक र्टे थजनकि नतम ख्ओपतस िाथन, हनकत कहाथिन, “की अहतँ यरशाेम मे मतत पिदे शी िी आ रथह थदन मे ओथह ितम जे घटनत घटा अथि से नथह जनैत िी?” 19 यीशु हनकत सभ केँ पुिाथिन, “की बतत? ओ सभ हनकत कहाथिन, “नतसितक यीशुक थवषय मे, जे पिमेश् वि आ समस ा्कक समक कतज आ विन मे पितकमी पवक् तत िातह। 20 मुख्य पुि्थहत आ हमित सभक शतसक सभ हनकत मृतुक सजतय दे बतक ाेा सौंथप दे ाथन आ कूस पि ि़त दे ाथन। 21 मुदत हमित सभ केँ भि्सत िा जे ओ इसतरा केँ मुक् त किबतक िा, आ रथह सभक अथतरिय आइ ई सभ कतज भेातक तेसि थदन अथि। 22 हँ , हमित सभक संरथतक थकिु स् तीरण सभ सेह् हमित सभ केँ आशय्िथकत कऽ दे ाक जे कब पि भ्िे भ्ि िा। 23 जखन हनकत सभ केँ हनकि ातश नथह भेटाथन तँ ओ सभ आथब कऽ कहाथिन जे ओ सभ स् वर्दूत सभक दश्न सेह् दे खाथन जे ओ जीथवत िथि। 24 हमित सभक संर मे सँ थकिु र्टे कब पि रेातह आ ओथहनत दे खाथन जेनत स् तीरण सभ कहने िाीह। 25 तखन यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ हे मूख् सभ, आ पवक् तत सभक सभ बतत पि थवश् वतस किबत मे मंद हदय मे िहथनहति। 26 की मसीह केँ ई सभ कष भ्थर कऽ अपन मथहमत मे पवेश नथह किबतक ितही िा? 27 मूसत आ सभ पवक् तत सभ सँ शुर भऽ ओ सभ धम्शतस् त मे हनकत सभ केँ अपन थवषय मे बुझत दे ाथिन। 28 ओ सभ ओथह रतमक नजदीक आथब रेातह, जतय ओ सभ जतइत िातह। 29 मुदत ओ सभ हनकत बतध कऽ कऽ कहाथिन, “हमित सभक संर िह, थकरक तँ सतँ झ भऽ रेा अथि आ थदन बहत दू ि भऽ रेा अथि।” ओ हनकत सभक संर िहबतक ाेा भीति रेातह। 30 जखन ओ हनकत सभक संर भ्जन पि बैसा िातह तखन ओ ि्टी ाऽ कऽ आशीष दऽ हनकत सभ केँ त्थ़ कऽ दे ाथिन। 31 हनकत सभक आँ खख खुथज रेाथन आ ओ सभ हनकत थिनाथन। आ ओ हनकत सभक नजरि सँ थवाुप भ’ रेातह। 32 ओ सभ रक-द्सि सँ कहाथिन, “की हमित सभक हदय मे जिा नथह िा जखन ओ हमित सभ सँ बतट मे रप किै त िातह आ जतबत ओ हमित सभ केँ धम्शतस केँ ख्ाैत िातह?
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
33 ओही समय ओ सभ उथि कऽ यरशाेम घुरि रेातह आ हनकत सभक संर िहथनहति सभ ररतिह र्टे केँ जमत कया रेा दे खाथन। 34 ओ कहाथन, “पभु सते जीथब उिा िथि आ थसम्न केँ परट भऽ रेातह।” 35 ओ सभ बतट मे की-की भेा आ ि्टी त़्बत मे हनकत सभ केँ क्नत थिना रेाथन से कहाथिन। 36 जखन ओ सभ ई बतत कथह िहा िातह तखन यीशु हनकत सभक बीि ित़ भऽ कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ केँ शतखन ह्।” 37 मुदत ओ सभ आतंथकत आ भयभीत भऽ रेातह आ स्िाथन जे ओ सभ क्न् आत्मत केँ दे खख ाेने िथि। 38 ओ हनकत सभ केँ पुिाथिन, “ अहतँ सभ थकरक घबित रेा िी? आ अहतँ सभक हदय मे थविति थकरक उिै त अथि? 39 हमि हति आ परि दे खू जे हम सयं िी। थकरक तँ आत् मतक मतं स आ हडी नथह ह्इत िै क, जेनत अहतँ सभ हमित दे खैत िी। 40 ई बतत कथह कऽ ओ हनकत सभ केँ अपन हति आ परि दे खौाथन। 41 जखन ओ सभ खुशी सँ थवश् वतस नथह कऽ सकातह आ आशय्िथकत भऽ रेातह, तखन यीशु हनकत सभ केँ पुिाथिन, “ की अहतँ सभ केँ रतय भ्जन अथि?” 42 ओ सभ ओकित भुजा मतिक टु क़ी आ मधुक िततक टु क़ी दे ाक। 43 ओ ओकित सभ केँ ाऽ कऽ हनकत सभक समक भ्जन कयाथन। 44 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ हम अहतँ सभक संर िहै त कता अहतँ सभ केँ ई बतत कहने िही जे हमित थवषय मे मूसतक धम्-थनयम आ भथवषवयत आ भजन मे जे थकिु थाखा अथि, से पूित ह्बऽ प़त।” 45 तखन यीशु हनकत सभक बुखद ख्ााथन जतथह सँ ओ सभ धम्शतस् त केँ बुथझ सकथि। 46 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ रथह तिहे ँ धम्शतस् त मे थाखा अथि आ मसीह केँ तेसि थदन मृत् यु मे सँ जीथब उिबतक ितही। 47 यरशाेम सँ शुर भऽ कऽ सभ जतथत मे हनकि नतम पि पशतततप आ पतपक कमतक पिति कया जतय। 48 अहतँ सभ रथह बततक रवतह िी। 49 दे खू, हम अपन थपततक पथतजत अहतँ सभ पि पित िहा िी, मुदत अहतँ सभ यरशाेम नरि मे ततबत धरि िह जतबत धरि अहतँ सभ केँ ऊपि सँ सतमि्् य नथह भेथट जतयत। 50 ओ हनकत सभ केँ बेतथनयत धरि ाऽ रेातह आ हति उित कऽ हनकत सभ केँ आशीवत् द दे ाथन। 51 जखन यीशु हनकत सभ केँ आशीष दै त िातह तखन हनकत सभ सँ अार भऽ रेातह आ स् वर् मे ाऽ रेातह। 52 ओ सभ हनकि आितधनत कयाथन आ बहत हष् सँ यरशाेम घुरि रेातह। 53 ओ सभ थदन मन् थदि मे पिमेश् विक सुथत आ आशीष दै त िहातह। आमीन।
यूह रत के सुस मतिति यूहरत 18 1 यीशु ई बतत कथह कऽ ओ अपन थशष् य सभक संर थसद्न नदीक ओथह पति रेातह, जतऽ रकटत बरीित िा, जतथह मे ओ आ अपन थशष् य सभ पवेश कयाथन। 2 हनकत ध्खत दे थनहति यहदत सेह् ओथह यतन केँ जनैत िातह, थकरक तँ यीशु अपन थशष् य सभक संर बेिबेि ओतऽ घुमैत िातह। 3 तखन यहदत मुख् यपुि्थहत आ फरिसी सभ सँ रक दा आ अथधकतिी सभ केँ ा’ कऽ ाताटे न आ मशता आ हथियति ाऽ कऽ ओतऽ आथब रेातह। 4 यीशु हनकत पि आबय बात सभ बतत जतथन कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ ककित तकैत िी?” 5 ओ सभ हनकत उति दे ाथिन, “नतसितक यीशु।” यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ हम ओ िी।” यहदत जे हनकत ध्खत दे ाकथन, से हनकत सभक संर ित़ भऽ रेातह। 19
यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
6 जथहनत यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “हम ओ िी, तखन ओ सभ पतिू घुथम कऽ जमीन पि खथस प़ातह।” 7 ओ फेि पुिाथिन, “ अहतँ सभ ककित तकैत िी?” ओ सभ कहाथिन, “नतसितक यीशु।” 8 यीशु उति दे ाथिन, “ हम अहतँ सभ केँ कहने िी जे हम ओ िी। 9 रथह ाेा जे ओ कहने िातह जे, “ अहतँ हमित जे थकिु दे ाहँ , ततथह मे सँ हम क्न् रमत नथह दे ाहँ ।” 10 तखन थसम्न पतुस तावति ाऽ कऽ तावति थनकतथा महतपुि्थहतक सेवक केँ मतरि दे ाथिन आ ओकि दथहनत कतन कतथट ाेाथन। नौकिक नतम मलूस िा। 11 तखन यीशु पतुस केँ कहाथिन, “ अपन तावति मतन मे ितखू। 12 तखन ओथह दा आ सेनतपथत आ यहदी सभक सेनतपथत सभ यीशु केँ पकथ़ कऽ बतखन ाेाक। 13 पथहने हनकत हरत ार ाऽ रेाथन। थकरक तँ ओ कतइफतक ससुि िातह, जे ओथह वष् महतपुि्थहत िातह। 14 कैफत िा जे यहदी सभ केँ सातह दै त िा जे ा्क सभक ाेा रक आदमी मिब उथित। 15 थसम्न पतुस यीशुक पतितँ -पतितँ आ रकटत आओि थशष् य सेह् रेातह। 16 मुदत पतुस बतहि दिबजत पि ित़ िातह। तखन ओ द्सि थशष् य जे महतपुि्थहतक थिना िाथन से बतहि थनकथा कऽ दिबजत िखथनहति सँ बतत कऽ पतुस केँ भीति अनाथन। 17 दिबजत िखथनहति युवती पतुस केँ कहाथिन, “की अहतँ सेह् रथह आदमीक थशष् य मे सँ रक नथह िी?” ओ कहै त िथि, “हम नथह िी।” 18 क्यात सँ आथर ारत कऽ न्कि आ अथधकतिी सभ ओतथह ित़ िातह। िं ढत िा, ओ सभ रिम भ’ रेा, पतुस ओकित सभक संर ित़ भ’ क’ रिम भ’ रेा। 19 तखन महतपुि्थहत यीशु सँ हनकि थशष् य सभ आ हनकि थशकतक थवषय मे पुिाथिन। 20 यीशु हनकत उति दे ाथिन, “हम संसति सँ खुथा कऽ बजाहँ । हम कथहय् सभतघि मे आ मन् थदि मे थशकत दै त िाहँ , जतय यहदी सभ सथदखन सहतित ाैत िथि। आ रुप रपे ँ हम थकिु नथह कहाहँ । 21 अहतँ हमित थकरक पूिैत िी? हमि बतत सुनथनहति सभ सँ पूिू जे हम की कहथायथन। 22 ई बतत कथह कऽ ओतऽ ित़ रकटत अथधकतिी यीशु केँ हतिक हिेाी सँ मतरि कऽ कहाथिन, “की अहतँ महतपुि्थहत केँ रनत उति दऽ िहा िी?” 23 यीशु हनकत उति दे ाथिन, “ जँ हम अधातह बजाहँ तँ अधातहक रवतही थदअ। 24 हरत हनकत बतखन कऽ महतपुि्थहत कैफत ार पिौने िातह। 25 थसम्न पतुस ित़ भऽ कऽ रिम भऽ रेातह। ओ सभ हनकत पुिाथिन, “की अहतँ सेह् हनकि थशष् य मे सँ रक नथह िी?” ओ रकित नकतिै त कहाथिन, “हम नथह िी।” 26 महतपुि्थहतक रकटत सेवक, ओकि रिशेदति िा, थजनकि कतन पतुस कतथट दे ने िातह, ओ कहाथिन, “की हम अहतँ केँ हनकत संर बरीित मे नथह दे खाहँ ?” 27 तखन पतुस फेि सँ इनकति कयाथन आ तुिन मुरत् खसथक रेा। 28 तखन ओ सभ यीशु केँ कैफत सँ न् यतयताय मे ाऽ रेातह। ओ सभ न्यतयताय मे नथह रेातह, जतथह सँ ओ सभ अशुद नथह भ’ जतय। मुदत रथह ाेा जे ओ सभ फसह-पतबथन खत सकय। 29 तखन थपाततुस हनकत सभ ार जत कऽ पुिाथिन, “अहतँ सभ रथह आदमी पि की आि्प ारतबैत िी?” 30 ओ सभ उति दे ाथिन, “जँ ओ अपितधी नथह िथहतथि तँ हम सभ ओकित अहतँ क हति मे नथह सौंथपतहँ ।” 31 तखन थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ हनकत ाऽ जतउ आ अपन थनयमक अनुसति हनकि नतय कर।” यहदी सभ हनकत कहाथिन, “हमित सभक ाेा ककि् मतरि दे ब उथित नथह अथि। 32 रथह ाेा यीशुक ई बतत पूित भऽ जतय जे ओ क्न तिहक मृत् युक मृत् युक ाेा बजातह। 33 तखन थपाततुस फेि नतयशतात मे जत कऽ यीशु केँ बजत कऽ पुिाथिन, “की अहतँ यहदी सभक ितजत िी?” 34 यीशु हनकत उति दे ाथिन, “ की अहतँ ई बतत अपने सँ कहै त िी आ थक आन ा्क हमित थवषय मे कहाक?” 35 थपाततुस उति दे ाथिन, “की हम यहदी िी?” त्हि जतथत आ मुख्यपुि्थहत सभ त्ित हमित हति मे सौंपने अथि। 36 यीशु उति दे ाथिन, “ हमि ितज रथह संसतिक नथह अथि।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
37 थपाततुस हनकत पुिाथिन, “तखन की अहतँ ितजत िी?” यीशु उति दे ाथिन, “ अहतँ कहै त िी जे हम ितजत िी।” हम रथह ाेा जन ाेाहँ आ रथह ाेा हम संसति मे आया िी जे हम सतक रवतही दी। जे थकय् सत् य अथि से हमि आवतज सुनैत अथि। 38 थपाततुस हनकत पुिाथिन, “सत की ह्इत िै क?” ई बतत कथह कऽ ओ फेि यहदी सभक ार जत कऽ कहाथिन, “हमित हनकत मे क्न् द्ष नथह भेटैत अथि।” 39 मुदत अहतँ सभक पित अथि जे हम अहतँ सभ केँ फसह-पतबथन मे रक र्टे केँ ि्थ़ दे ब। 40 ओ सभ फेि थिथियत उिाथन, “ई आदमी नथह, बिबत।” आब बिबत डकैत िा। यूहरत 19 1 तखन थपाततुस यीशु केँ पकथ़ कऽ क़्त मतरि दे ाथिन। 2 थसपतही सभ कतँ टक मुकुट ि़त कऽ ओकि मति पि ारत दे ाक आ बैरनी िं रक वस पथहरि ाेाक। 3 ओ कहाथिन, “हे यहदी सभक ितजत! ओ सभ ओकित हति सँ मतरि दे ाकैक। 4 थपाततुस फेि जत कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “दे खू, हम हनकत अहतँ सभ ार अनैत िी जतथह सँ अहतँ सभ ई जतथन सकब जे हमित हनकत मे क्न् द्ष नथह भेटैत अथि।” 5 तखन यीशु कतँ टक मुकुट आ बैरनी िं रक वस पथहिने बतहि थनकाातह। थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “दे खू, ओ आदमी!” 6 मुख्यपुि्थहत आ अथधकतिी सभ हनकत दे खख थिथियत उिाथन, “ओकित कूस पि ि़तउ, कूस पि ि़तउ।” थपाततुस ओकित सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ ओकित ाऽ कऽ कूस पि ि़त थदयौक। 7 यहदी सभ हनकत उति दे ाथिन, “हमित सभक थनयम अथि, आ हमित सभक थनयमक अनुसति हनकत मिबतक ितही, थकरक तँ ओ अपनत केँ पिमेश् विक पुत बनत ाेाथन।” 8 थपाततुस ई बतत सुथन कऽ ओ आि भयभीत भऽ रेातह। 9 फेि न् यतयताय मे जत कऽ यीशु सँ पुिाथिन, “अहतँ कतऽ सँ िी?” मुदत यीशु हनकत क्न् उति नथह दे ाथिन। 10 तखन थपाततुस हनकत कहाथिन, “की अहतँ हमित सँ नथह बतथज िहा िी?” की अहतँ नथह जनैत िी जे हमित अहतँ केँ कूस पि ि़े बतक सतमर् अथि आ अहतँ केँ ि़्बतक सतमर् अथि? 11 यीशु उति दे ाथिन, “ अहतँ केँ हमित थवरद क्न् अथधकति नथह भऽ सकैत िा, जतबत अहतँ केँ ऊपि सँ ई अथधकति नथह दे ा जतयत। 12 तथहयत सँ थपाततुस हनकत ि़्बतक पयतस कयाथन, मुदत यहदी सभ थिथियत उिाथन, “जँ अहतँ रथह आदमी केँ ि्थ़ दै त िी तँ अहतँ कैसिक थमत नथह िी।” 13 थपाततुस ई बतत सुथन यीशु केँ बतहि ाऽ कऽ नतयक आसन पि बैथस रेातह जे फुटपति कहा जतइत अथि, मुदत थहबू मे रबतित कहा जतइत अथि। 14 फसह-पव्क तैयतिी आ ारभर ििम घंटत िा, तखन ओ यहदी सभ केँ कहाथिन, “दे खू, अहतँ सभक ितजत!” 15 मुदत ओ सभ थिथियत उिा, “ओकित दू ि कर, ओकित दू ि कर, कूस पि ि़त थदयौक।” थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “की हम अहतँ क ितजत केँ कूस पि ि़त दे ब?” मुखखयत पुि्थहत सभ उति दे ाथिन, “हमित सभ ार कैसिक अथतरिय क्न् ितजत नथह अथि।” 16 तखन यीशु हनकत कूस पि ि़तबय ाेा हनकत सभक हति मे सौंप दे ाथन। ओ सभ यीशु केँ ाऽ कऽ ाऽ रेातह। 17 ओ अपन कूस ाऽ कऽ रक ितम रेातह जकित थहबू भतषत मे र्ल्ित कहा जतइत िै क। 18 ओ सभ हनकत कूस पि ि़त दे ाथिन, आ दू र्टे हनकत संर, रक कतत आ बीि मे यीशु केँ कूस पि ि़त दे ाथिन। 19 थपाततुस रकटत उपतथध थाखख कूस पि ितखख दे ाथन। ओथह पि थाखा िा, “यहदी सभक ितजत नतसितक यीशु।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
20 तखन ई उपतथध बहत् यहदी सभ पथ़ िहा िा, थकरक तँ जतऽ यीशु केँ कूस पि ि़तओा रेा िा, ओतऽ नरिक समीप िा। 21 तखन यहदी सभक मुख् यपुि्थहत सभ थपाततुस केँ कहाथिन, “यहदी सभक ितजत, ई नथह थाखू। मुदत ओ कहाथन जे, “हम यहदी सभक ितजत िी।” 22 थपाततुस उति दे ाथिन, “हम जे थाखने िी से हम थाखने िी।” 23 तखन थसपतही सभ यीशु केँ कूस पि ि़त कऽ हनकि वस ाऽ कऽ ितरि भतर मे बतँ थट ाेाथन। आ ओकि क्ट सेह्, आब क्ट थबनत सीमक िा, जे ऊपि सँ पूित बुना िा। 24 ओ सभ आपस मे कहाथिन, “आउ, रकित फतथ़ कऽ नथह, बा् थक रकित ाेा थिटी ारतबी जे ई केकि ह्यत, जतथह सँ धम्शतस् त पूित भऽ जतय जे कहै त अथि जे, “ओ सभ हमि वस ओकित सभ मे बतँ थट दे ाक आ हमि वसक ाेा ओ सभ थिटी ारत दे ाक।” ते ँ थसपतही सभ ई सभ कतज केाक। 25 यीशुक कूस ार हनकि मतय, मतयक बथहन, ख्ओफतक पती मरियम आ मरियम मरदाीनी ित़ िाीह। 26 यीशु जखन अपन मतय आ ओथह थशष् य केँ ित़ दे खाथन, थजनकत सँ ओ पेम किै त िातह, तखन ओ अपन मतय केँ कहाथिन, “ ओथह स् ती, दे खू अहतँ क बेटत! 27 तखन ओ थशष केँ कहाथिन, “ दे खू, अहतँ क मतय! ओथह समय सँ ओ थशष ओकित अपन घि ाऽ रेातह। 28 रकि बतद यीशु ई जतथन जे आब सभ कतज पूित भऽ रेा अथि, जतथह सँ धम्शतस् त पूित भऽ जतय, ओ कहाथन, “ हमित पतस ातरा अथि।” 29 रकटत बत्न मे थसिकत भिा िा, आ ओ सभ रकटत संज मे थसिकत भरि कऽ थहस्प पि ारत कऽ हनकत मुँह मे ारत दे ाक। 30 यीशु थसिकत ाऽ कऽ कहाथिन, “ समतप भऽ रेा। ” 31 यहदी सभ थवशतम-थदन कूस पि शव पि नथह िहबतक तैयतिी िा, (थकरक तँ ओ थवशतम-थदन रकटत ऊँि थदन िा) थपाततुस सँ थवनती कयाथन जे हनकि सभक टतं र टू थट जतय आ ओकित सभ केँ ाऽ जतय। 32 तखन थसपतही सभ आथब कऽ पथहा आ द्सि जे हनकत संर कूस पि ि़ा रेा िा, ओकि टतं र त्थ़ दे ाक। 33 मुदत जखन ओ सभ यीशु ार पहँ थि कऽ दे खाक जे ओ मरि रेा िथि, तखन हनकि टतं र नथह त़्ाथन। 34 मुदत रकटत थसपतही भतात ाऽ कऽ ओकि कतत मे िे द कऽ दे ाक आ तुिन ओतऽ खून आ पतथन थनकथा रेा। 35 जे दे खाक से रवतही दे ाक आ ओकि रवतही सत् य अथि। 36 ई सभ बतत रथह ाेा भेा जे धम्शतस् त पूित भऽ जतय जे, “ओकि हडी नथह टू टत।” 37 फेि रकटत आओि धम्शतस् त कहै त अथि, “ओ सभ जकित बेधने िा, तकित थदस तकत।” 38 रकि बतद अरिमतथियतक यूसुफ यीशुक थशष् य िातह, मुदत यहदी सभक डि सँ रुप रप सँ थपाततुस सँ थवनती कयाथन जे ओ यीशुक शव केँ ाऽ जतथि। ओ यीशुक ातश ाऽ कऽ आथब रेातह। 39 थनक्दे मुस सेह् आथब रेातह जे पथहने ितथत मे यीशु ार आथब रेा िातह आ रंधक आ मुसबिक थमशण ारभर सौ पतउं ड भति अनने िातह। 40 तखन ओ सभ यीशुक शव केँ ाऽ कऽ सुरंधक संर थानन वस मे रतथ़ ाेाक, जेनत यहदी सभक रत़बतक तिीकत ह्इत िै क। 41 जतथह ितम हनकत कूस पि ि़तओा रेा िाथन, ओथह ितम रकटत बरीित िा। आ रतिी मे रकटत नव कब िा, जतथह मे रखन धरि मनुष् य कथहय् नथह ितखा रेा िा। 42 यहदी सभक तैयतिीक थदनक कतिणे ँ ओ सभ यीशु केँ ओतथह ितखख दे ाक। थकरक तँ कब ार ार िा। यूहरत 20 1 सपतहक पथहा थदन मरदाीनी मरियम भ्िे -भ्ि जखन अनति िा तखन कब पि अबैत िथि आ कब पि सँ पतिि उततिा दे खैत िथि।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
2 तखन ओ दौथ़ कऽ थसम्न पतुस आ द्सि थशष् य ार आथब कऽ कहाथिन, “ओ सभ पभु केँ कब सँ थनकतथा ाेाक, मुदत हमित सभ केँ ई नथह बुझा अथि जे ओ सभ हनकत कतय ितखख दे ाथन।” 3 पतुस आ ओ आन थशष् य सेह् कबि मे रेातह। 4 दु नू र्टे रक संर दौ़ा रेातह आ द्सि थशष् य पतुस केँ पितथ़ कऽ पथहने कब पि पहँ थि रेातह। 5 ओ झुथक कऽ भीति तकैत दे खाक जे सनीक कप़त प़ा अथि। तैय् रेा ओ भीति नथह। 6 तखन थसम्न पतुस हनकत पतितँ -पतितँ आथब कब मे रेातह आ थानक कप़त प़ा दे खाथन। 7 हनकत मतिक ितर कतत जे नैपथकन िाथन से थानन कप़तक संर नथह प़ा िाथन, बा् थक रक ितम रक ितम ापेटा िाथन। 8 तखन ओ द्सि थशष् य सेह् भीति रेातह जे पथहने कब पि आया िातह आ ओ दे खख थवश् वतस कयाथन। 9 ओ सभ रखन धरि ई धम्शतस् त नथह जनैत िा जे ओ मृत् यु मे सँ जीथब उिब। 10 तखन थशष्य सभ फेि अपन-अपन घि िथा रेातह। 11 मुदत मरियम कब पि बतहि ित़ भऽ कतथन िहा िाीह आ कतनैत कता ओ झुथक कऽ कब थदस तकाीह। 12 उजि वस मे दू टत स् वर्दूत केँ बैसा दे खाथन, रकटत मति पि आ द्सि परि पि, जतय यीशुक ातश प़ा िा। 13 ओ सभ हनकत पुिाथिन, “मथहात, अहतँ थकरक कतनैत िी?” ओ ओकित सभ केँ कहाथिन, “थकरक तँ ओ सभ हमि पभु केँ िीन ाेाक आ हमित नथह बुझा अथि जे ओ सभ ओकित कतय ितखख दे ाक।” 14 ई बतत कथह कऽ ओ पतिू घुथम कऽ यीशु केँ ित़ दे खाथन। 15 यीशु ओकित पुिाथिन, “ मतिी, अहतँ थकरक कतनैत िी? अहतँ केकित तकैत िी? ओ ओकित मताी बुथझ कहाथिन, “महतितज, जँ अहतँ ओकित रतय सँ ाऽ रेाहँ तँ हमित कह जे अहतँ ओकित कतय ितखख दे ाहँ आ हम ओकित ाऽ जतयब।” 16 यीशु ओकित कहाथिन, “मरियम।” ओ घुथम कऽ हनकत कहाथिन, “िब्नी!” जे कहब अथि, रुर। 17 यीशु ओकित कहाथिन, “हमित हति नथह ारतउ। कतिण, हम रखन धरि अपन थपतत ार नथह ि़ा िी। आ हमि पिमेश् वि आ अहतँ क पिमेश् वि केँ। 18 मरियम मरदाीनी आथब कऽ थशष् य सभ केँ कहाथिन जे ओ पभु केँ दे खख ाेने िथि आ ओ हनकत सँ ई बतत कहाथन। 19 ओही थदन सतँ झ मे सपतहक पथहा थदन जखन यहदी सभक भय सँ जतऽ थशष् य सभ जमत िातह, ओतऽ दिबजत सभ बंद भऽ रेा िा, तखन यीशु बीि मे ित़ भऽ कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभ केँ शतखन ह्।” 20 ई कथह कऽ ओ हनकत सभ केँ अपन हति आ कतत दे खौाथिन। तखन पभु केँ दे खख थशष् य सभ पसर भऽ रेातह। 21 तखन यीशु हनकत सभ केँ फेि कहाथिन, “अहतँ सभ केँ शतखन भेटय। 22 ई बतत कथह कऽ ओ हनकत सभ पि सतँ स ि्थ़ कऽ कहाथिन, “ पथवत आत् मत गहण कर। 23 जकि पतप अहतँ सभ कमत किै त िी, ओकित सभ केँ कमत कया जतइत िै क। आ जकि पतप अहतँ सभ ितखख ाैत िी, से पक़ा जतइत अथि। 24 जखन यीशु अयातह तखन बतिह र्टे मे सँ रक र्टे ि्मस, जकित थदथदमस कहा जतइत िा, हनकत सभक संर नथह िा। 25 आन थशष् य सभ हनकत कहाथिन, “हम सभ पभु केँ दे खाहँ ।” मुदत ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “जखन धरि हम हनकि हति मे नतखूनक ितप नथह दे खब आ नतखूनक ितप मे अपन आँ रुि नथह ितखब आ हनकि कतत मे हति नथह धऽ दे ब, तखन धरि हम थवशतस नथह किब।” 26 आि थदनक बतद फेि हनकि थशष् य सभ भीति आथब रेातह आ ि्मत सेह् हनकत सभक संर िातह, तखन यीशु दिबजत सभ बर कऽ कऽ आथब कऽ बीि मे ित़ भऽ रेातह आ कहाथिन, “ अहतँ सभ केँ शतखन ह्।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
27 तखन ओ ि्मस केँ कहाथिन, “ अपन आँ रुि रतय पहँ थि कऽ हमि हति दे खू। आ अपन हति रतऽ ब़त कऽ हमित कतत मे धकेथा थदअ। 28 ि्मत उति दे ाथिन, “हमि पभु आ हमि पिमेश् वि।” 29 यीशु हनकत कहाथिन, “ त्मत, हमित दे खख थवश् वतस कऽ ाेाहँ ।” 30 यीशु अपन थशष् य सभक समक सत् य आि् बहत ितस थिन् ह सभ कयाथन, जे रथह पुसक मे नथह थाखा अथि। 31 मुदत ई सभ रथह ाेा थाखा रेा अथि जे अहतँ सभ थवश् वतस किी जे यीशु पिमेश् विक पुत मसीह िथि। आ थवश् वतस कऽ कऽ अहतँ सभ हनकि नतम सँ जीवन पतथब सकब।” यूहरत 21 1 रथह बततक बतद यीशु थतबेरियतक समुद मे थशष् य सभ केँ फेि सँ दे खौाथन। आ रथह तिहे ँ ओ अपनत केँ दे खौाथन। 2 ओतऽ थसम्न पतुस, थदथदमुस नतमक ि्मत, राीा मे कतनत थनवतसी निनीा, जबीक पुत आ हनकि दू टत आओि थशष् य रक संर िातह। 3 थसम्न पतुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “हम मति मतिय जत िहा िी।” ओ सभ हनकत कहाथिन, “हम सभ सेह् अहतँ क संर जतइत िी।” ओ सभ आरू बथ़ कऽ तुिन जहतज मे बैथस रेातह। आ ओथह ितथत ओ सभ थकिु नथह पक़ाथन। 4 भ्ि भेात पि यीशु थकनति पि ित़ भऽ रेातह। 5 तखन यीशु हनकत सभ केँ पुिाथिन, “ बचत सभ, अहतँ सभ थकिु भ्जन की? ओ सभ हनकत उति दे ाथिन, “नथह।” 6 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ नतवक दथहनत कतत जता फेथक थदयौक, तखन अहतँ सभ केँ भेटत।” ओ सभ फेथक दे ाक, आब मतिक भिमतिक कतिणे ँ ओकित नथह खीथं ि सका। 7 ते ँ ओ थशष् य थजनकत सँ यीशु पेम किै त िातह, पतुस केँ कहाथिन, “ई पभु िथि।” थसम्न पतुस जखन ई सुथन कऽ जे पभु िथि, तखन ओ अपन मातहक वस हनकत ार बतखन दे ाथन, (थकरक तँ ओ नंरटे िातह) आ अपनत केँ समुद मे फेथक दे ाथन। 8 आन थशष्य सभ रकटत ि्ट नतव मे बैथस कऽ आथब रेातह। (थकरक तँ ओ सभ जमीनसँ दू ि नथह िा, बा् थक दू सय हति जकतँ िा) मतिक संर जता घीथि िहा िा। 9 ओ सभ जथहनत जमीन पि पहँ िातह तँ ओतऽ क्यातक आथर आ ओथह पि मति आ ि्टी थबिा दे खाथन। 10 यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अखन जे मति पक़ने िी, तकित सभ केँ आनू।” 11 थसम्न पतुस िथ़ कऽ जता खी ंथि कऽ जमीन पि पहँ िातह, जे रक सय तेपितस मति सँ भिा िा। 12 यीशु हनकत सभ केँ कहाथिन, “ आउ आ भ्जन कर।” थशष्य सभ मे सँ थकय् हनकत सँ ई पुिबतक थहमत नथह कयाथन जे, “अहतँ के िी?” ई जतथन जे ई पभु िथि। 13 तखन यीशु आथब कऽ ि्टी ाऽ कऽ ओकित सभ केँ आ मति सेह् दऽ दे ाथिन। 14 यीशु मृत् यु मे सँ जीथब उिातक बतद ई तेसि बेि अपन थशष् य सभ केँ अपनत केँ दे खौाथन। 15 ओ सभ भ्जन कऽ कऽ यीशु थसम्न पतुस केँ कहाथिन, “ थसम्न, य्नतसक पुत, की अहतँ हमित सँ रथह सभ सँ बेसी पेम किै त िी?” ओ हनकत कहाथिन, “हँ , पभु! अहतँ जनैत िी जे हम अहतँ सँ पेम किै त िी। ओ हनकत कहाथिन, “ हमि मेमनत केँ प्सब।” 16 ओ द्सि बेि पुिाथिन, “ थसम्न, य्नतसक पुत, की अहतँ हमित सँ पेम किै त िी?” ओ हनकत कहाथिन, “हँ , पभु! अहतँ जनैत िी जे हम अहतँ सँ पेम किै त िी। ओ ओकित कहाथिन, “ हमि भे़ ँ त केँ िितउ।” 17 ओ तेसि बेि पुिाथिन, “ थसम्न, य्नतक पुत, की अहतँ हमित सँ पेम किै त िी?” पतुस दु खी भेातह, कतिण ओ तेसि बेि हनकत कहाथिन, “की अहतँ हमित सँ पेम किै त िी?” ओ हनकत कहाथिन, “पभु, अहतँ सभ बतत जनैत िी। अहतँ जनैत िी जे हम अहतँ सँ पेम किै त िी। यीशु हनकत कहाथिन, “ हमि भे़ ँ त सभ केँ िितउ।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
18 हम अहतँ केँ सत् य कहै त िी, जखन अहतँ ि्ट िही तखन अहतँ अपनत केँ कमिबंद कऽ कऽ जतय ितहै त िाहँ , ओतऽ िाैत िाहँ । 19 ओ ई बतत बजैत िातह जे ओ क्न मृतु दतित पिमेश् विक मथहमत किथि। ई बतत कथह कऽ ओ हनकत कहाथिन, “ हमि पतितँ िाू।” 20 तखन पतुस घुथम कऽ दे खाथन जे ओ थशष् य थजनकत सँ यीशु पेम किै त िातह। ओ सभ भ्जनक समय हनकि ितती पि झुथक कऽ कहाथिन, “पभु, अहतँ केँ ध्खत दे बयवात के अथि?” 21 पतुस हनकत दे खख यीशु केँ पुिाथिन, “पभु, ई आदमी की कित?” 22 यीशु हनकत पुिाथिन, “ जँ हम ितहै त िी जे ओ जतबत धरि हम नथह आथब जतयब, ततबत धरि ओ थटका िहय तऽ अहतँ क की अथि?” हमित पतितँ िाू। 23 तखन भतइ सभक बीि ई बतत पितरित भऽ रेा जे ओ थशष् य नथह मरि जतय। मुदत, “ जँ हम ितहब जे जतबत धरि ओ हमित अयब ततबत धरि थटकय, त’ ई अहतँ क की अथि?” 24 ई ओ थशष् य िथि जे रथह बतत सभक रवतही दै त िथि आ ई सभ बतत थाखने िथि। 25 यीशु दतित कया रेा आि् बहत ितस कतज सेह् अथि, जे जँ पतेक केँ थाखा जतय तँ हमित बुझने जे संसति मे सेह् ओथह पुसक सभ केँ नथह ितखा जत सकैत िा जे थाखा जेबतक ितही। आमीन।
पेर ित् ं के कतय् पेर ित् ं के कतम 1
1 हे थिय्थफास, हम ओथह सभ बततक पूव्क गन बनौने िी जे यीशु जे थकिु किय ारातह आ थसखतबय ारातह। 2 जतबत धरि यीशु ऊपि उितओा रेातह, तकि बतद ओ पथवत आत् मत दतित ओथह पेरित सभ केँ आजत नथह दे ाथिन, थजनकत सभ केँ ओ िुनने िातह। 3 ओ हनकत सभ केँ िाीस थदन धरि दे खख कऽ पिमेश् विक ितज् यक थवषय मे बजैत बहत ितस अिूक पमतणक दतित अपनत केँ जीथवत दे खतओा रेातह। सभ हनकत सभक संर जमत भऽ हनकत सभ केँ आजत दे ाथिन जे यरशाेम सँ नथह जतउ, बा् थक थपततक पथतजतक पतीकत कर । 5 यूहन् नत पतथन सँ बपथतस् मत दे ाथन। मुदत अहतँ सभ केँ बहत थदनक बतद पथवत आत् मत सँ बपथतस् मत ाेा जतयत। 6 ओ सभ जखन रक ितम आथब कऽ हनकत सँ पुिाथिन, “पभु , की अहतँ रथह समय मे इसतराक ितज फेि सँ दऽ दे ब?” 7 ओ हनकत सभ केँ कहाथिन, “ अहतँ सभक कतज नथह अथि जे अहतँ सभ समय आ समय केँ जतनब, जे थपतत अपन सतमि्् य मे ितखने िथि।” 8 पथवत आत् मत अहतँ सभ पि आथब रेातक बतद अहतँ सभ केँ सतमि्् य भेटत, आ अहतँ सभ यरशाेम, समस यहथदयत, सतमरियत आ पृि् वीक अन् त भतर धरि हमि रवतह बनब। 9 ई सभ बतत कथह कऽ ओ सभ दे खैत िहातह। रकटत मेघ हनकत सभक नजरि सँ बतहि आथब रेाथन। 10 जखन ओ सभ स् वर् थदस तकैत िा, तखन ओ सभ उजि वस मे दू र्टे हनकत सभक ार मे ित़ िा। 11 ओ सभ सेह् कहाथिन, “हे राीा ा्क सभ, अहतँ सभ स् वर् थदस तकैत थकरक ित़ िी?” ई यीशु जे अहतँ सभ सँ स् वर् मे ि़तओा रेा िथि, तथहनत आओत जेनत अहतँ सभ हनकत स् वर् मे जतइत दे खाहँ ।
थनक्दे म स के सुस मतिति अध तय 1 1 हरत आ कतइफत, सुमत, दतम, रमताीरा, यहदत, ाेवी, नेपिाीम, थसकनि, क्िस आ अन यहदी सभ थपाततुस ार यीशुक थवषय मे रेातह आ हनकत पि बहत ितस अधातह अपितधक आि्प ारौाथन। 2 ओ कहाथिन, “हमित सभ केँ थवशतस अथि जे यीशु ब़ई यूसुफक पुत िथि, जे मरियम सँ जना भूथम िथि आ ओ अपनत केँ पिमेश् विक पुत आ ितजत घ्थषत किै त िथि। आ रतबे नथह, थवशतम-थदन केँ, आ हमित सभक पूव्जक थनयम केँ भंर किबतक पयतस सेह् किै त अथि।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
3 थपाततुस उति दे ाथिन। ओ की अथि जकि घ्षणत ओ किै त िथि ? आ की अथि जकित ओ भंर किबतक पयतस किै त िथि? 4 यहदी सभ हनकत कहाथिन, “हमित सभक रकटत रहन थनयम अथि जे थवशतम-थदन मे इातज किबत सँ मनत किै त अथि। मुदत ओ ओथह थदन ांऱत आ बहीि, पकतघतत सँ पीथ़त, आनि, क़्ी आ ितकसी दु नू केँ ओथह थदन दु ष थवथध सँ िीक किै त िथि। 5 थपाततुस उति दे ाथिन, “ओ अधातह तिीकत सँ ई क्नत कऽ सकैत िथि? ओ सभ उति दे ाथिन, “ओ जतदू रि िथि, आ दु ष् टतत् मत सभक ितजकुमति दतित दु ष् टतत् मत सभ केँ भरत दै त िथि। आ ते ँ सभ थकिु हनकि अधीन भऽ जतइत िथन। 6 तखन थपाततुस कहाथिन, “शैततन सभ केँ भरत दे ब अशुद आत् मतक कतज नथह, बा् थक पिमेश् विक सतमि्् य सँ थनकाा बुझतइत अथि।” 7 यहदी सभ थपाततुस केँ उति दे ाथिन, “हम सभ अहतँ क महतमथहम सँ थवनती किै त िी जे अहतँ हनकत अपन नतयताय मे हतथजि ह्बय ाेा बजतउ आ सयं हनकि बतत सुनू।” 8 तखन थपाततुस रकटत दू त केँ बजत कऽ कहाथिन, “मसीह केँ रतय क्न तिहे ँ आना जतयत?” 9 तखन दू त मसीह केँ जतथन कऽ हनकि आितधनत कयाथन। हति मे जे वस िा से जमीन पि पसतरि कऽ कहाथिन, “पभु, रथह पि िाू आ भीति जतउ, थकरक तँ ितजपता अहतँ केँ बजबैत िथि।” 10 जखन यहदी सभ दू तक कतज बुथझ रेातह आ ओ सभ थपाततुस केँ कहाथिन, “अहतँ हनकत दू त सँ नथह, म्नी सँ थकरक नथह बजतओा?—थकरक तँ दू त हनकत दे खख हनकि पूजत कयाथन आ हति मे जे वस िाथन से हनकत सतमने जमीन पि पसतरि दे ाथन आ हनकत कहाथिन, “पभु, ितजपता बजतउ।” त्ित। 11 तखन थपाततुस दू त केँ बजत कऽ कहाथिन, “अहतँ रनत थकरक केाहँ ?” 12 दू त उति दे ाथिन, “जखन अहतँ हमित यरशाेम सँ थसकनि पिे ाहँ , तखन हम यीशु केँ रकटत रदहत पि नीि आकृथत मे बैसा दे खाहँ , आ इबतनी सभक बचत सभ हति मे रतिक डतरि पक़ने, “ह्सतनत” थिथियत उिा। 13 द्सि ा्क सभ अपन वस िस् तत मे पसतरि कऽ कहाथिन, “हे स् वर् मे िहथनहति, हमित सभ केँ बितउ। धन अथि जे पभुक नतम सँ अबैत अथि। 14 तखन यहदी सभ दू तक थवरद थिथियत उिातह आ कहाथिन, “इबतनी सभक सन् ततन सभ थहबू भतषत मे अपन पशंसत कयाथन। अहतँ जे यूनतनी िी, थहबू भतषत क्नत बुथझ सकाहँ ? 15 दू त हनकत सभ केँ उति दे ाथिन, “हम रकटत यहदी सँ पुिथायथन, “ई की अथि जे बचत सभ इबतनी भतषत मे थिथियतइत अथि?” 16 ओ हमित ई बतत बुझबैत कहाथिन, “ओ सभ ह्सतनत केँ थिथियतइत िथि, जकि अि् ह्इत अथि जे, “हे पभु, हमित बितउ।” वत, हे पभु, उदति कर। 17 तखन थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ बचत सभक दतित कहा रेा बतत सभक रवतही थकरक दै त िी? दू त क्न िीज मे रात कतज केाक अथि? आ ओ सभ िुप भ’ रेातह। 18 तखन ितजपता दू त केँ कहाथिन, “जतउ आ क्न् तिहे ँ ओकित भीति अनबतक पयतस कर।” 19 मुदत दू त थनकथा कऽ पथहने जेकतँ कतज केाक। ओ कहाथिन, “पभु, भीति आथब जतउ, थकरक तँ ितजपता अहतँ केँ बजत िहा िथि।” 20 जखन यीशु झंडत ाऽ कऽ बैसा झंडत सभक बीि जतइत िातह तँ हनकत सभक ि्टी सभ पणतम कऽ यीशुक आितधनत कयाथन। 21 तखन यहदी सभ झंडत सभक थवरद आि् ज्ि सँ थिथियत उिा। 22 मुदत थपाततुस यहदी सभ केँ कहाथिन, “हमित बुझा अथि जे ई अहतँ सभ केँ नीक नथह ारैत अथि जे धजक ि्टी सभ सयं पणतम कऽ यीशुक आितधनत किै त अथि। मुदत अहतँ सभ झंडत सभक थवरद थकरक उद् घ्ष किै त िी जेनत ओ सभ पणतम कऽ पूजत करने ह्थि? 23 ओ सभ थपाततुस केँ उति दे ाथिन, “हम सभ झंडत सभ केँ पणतम किै त यीशुक आितधनत किै त दे खाहँ ।” 24 तखन ितजपता थसपतही सभ केँ बजत कऽ कहाथिन, “अहतँ सभ रनत थकरक केाहँ ?
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
25 झंडत सभ थपाततुस केँ कहाथिन, “हम सभ बुतपिस िी आ मंथदि मे दे वतत सभक आितधनत किै त िी। आ हनकि पूजत किबतक थवषय मे हमित सभ केँ क्नत थकिु स्िबतक ितही? हम सब मतत हति मे मतनक पक़ने िही आ ओ सब पणतम क हनकि पूजत किै त िा। 26 तखन थपाततुस सभतघिक शतसक सभ केँ कहाथिन, “की अहतँ सभ थकिु बावतन आदमी केँ िुथन कऽ ओकित सभ केँ झंडत पक़य थदयौक, तखन हम सभ दे खब जे ओ सभ झुथक जेततह थक नथह।” 27 तखन यहदी सभक बू़-पुितन सभ बतिह र्टे केँ बावतन आ सतमर्वतन बू़-पुितन सभ केँ ख्थज कऽ ओकित सभ केँ सपतट पकथ़ ाेाक आ ओ सभ ितजपताक स्झतँ ित़ भऽ रेा। 28 तखन थपाततुस दू त केँ कहाथिन, “यीशु केँ बतहि थनकताू आ क्न् तिहे ँ ओकित फेि सँ आथन थदयौक।” यीशु आ दू त दातन सँ बतहि थनकथा रेातह। 29 थपाततुस पथहने धजवतहक सभ केँ बजत कऽ शपि खयाथन जे जँ यीशु पथहने सन् ततन केँ ओथहनत नथह धतिण केने िथहतथि तँ हनकत सभक मति कतथट ाेततह। 30 तखन ितजपता यीशु केँ फेि सँ भीति आबय ाेा आजत दे ाथिन। 31 ओ दू त पथहने जेकतँ कतज केने िा, तेनत कऽ कऽ यीशु केँ बहत थवनती केाक जे ओ अपन वस पि िथा जतउ आ ओथह पि िथा कऽ भीति रेातह। 32 यीशु जखन भीति रेातह तँ पथहने जकतँ झंडत पणतम कऽ कऽ हनकि आितधनत कयाथन। अध तय 2 1 थपाततुस ई दे खख कऽ डित रेातह आ अपन आसन सँ उिय बात िातह। 2 मुदत जखन ओ उिबतक थविति किै त िातह तखन हनकि अपन पती जे दू ि ित़ िाीह, हनकत ार पिौाथन जे, “ओथह धम् पुरष सँ अहतँ क क्न् संबंध नथह अथि। कतिण, आइ ितथत रकटत दश्न मे हनकत थवषय मे हमित बहत कष भेा अथि। 3 ई बतत सुथन यहदी सभ थपाततुस केँ कहाथिन, “की हम सभ अहतँ केँ नथह कहथायथन जे, ‘ओ जतदू रि िथि?” दे खू, ओ अहतँ क पती केँ सपनत दे खौने िथि। 4 थपाततुस यीशु केँ बजत कऽ कहाथिन, “ओ सभ जे रवतही दै त अथि से अहतँ सुनाहँ , मुदत क्न् उति नथह दै त िी?” 5 यीशु उति दे ाथिन, “जँ हनकत सभ केँ बजबतक सतमर् नथह िहै त तँ ओ सभ नथह बतथज सकैत िातह। मुदत थकरक तँ सभ केँ अपन-अपन भतषतक आजत िथन जे नीक-बेजतय दु नू बतजब, ते ँ ओ रथह थदस तकैत िहथि। 6 मुदत यहदी सभक बू़-पुितन सभ यीशु केँ कहाथिन, “हम सभ की दे खब?” 7 पथहने हम सभ अहतँ क थवषय मे ई बतत जनैत िी जे अहतँ वथभितिक कतिणे ँ जन ाेने िी। द्सि, जे अहतँ क जनक कतिणे ँ बेताेहेम मे थशशु सभ केँ मतिा रेा। तेसि, जे त्हि बतप-मतर मरियम थमस थदस भतथर रेातह, थकरक तँ ओ सभ अपन ा्क पि भि्सत नथह क’ सकातह। 8 ओथह ितम ित़ थकिु यहदी सभ रथह सँ बेसी नीक बतत कहाथन, “हम सभ ई नथह कथह सकैत िी जे ओ वथभितिक कतिणे ँ जन ाेने िथि। मुदत हम सभ जनैत िी जे हनकि मतय मरियम यूसुफ सँ सरतई भऽ रेा िाीह, आ ते ँ ओ वथभितिक कतिणे ँ नथह भेा िाथन। 9 तखन थपाततुस ओथह यहदी सभ केँ कहाथिन जे हनकत वथभिति सँ जन ाेबतक बतत कहा रेाथन, “अहतँ सभक ई बतत सत् य नथह अथि, थकरक तँ सरतई भेा िा। 10 हरत आ कतइफत थपाततुस केँ कहाथिन, “रथह सभ ा्क केँ दे खबतक ितही जे थिथियतइत अथि जे ओ वथभिति मे जना िथि आ जतदू रि िथि। मुदत जे सभ ओकित वथभितिक कतिणे ँ जन ाेबत सँ असीकति किै त अथि, से सभ ओकि धम् परिवत्न कया आ थशष् य अथि। 11 थपाततुस हरत आ कतइफत केँ उति दे ाथिन, “ई सभ धम् परिवत्न केथनहति के िथि?” ओ सभ उति दे ाथिन, “ओ सभ बुतपिस ा्कक सन् ततन िथि आ यहदी नथह बथन हनकि अनुयतयी बथन रेा िथि।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
12 तखन राेजि, रसे रियस, र््थनयस, यतकूब, कतितस आ शमूरा, इसहतक आ थफनेस, थकसस आ अथगपत, हरत आ यहदत उति दे ाथिन, “हम सभ धम् परिवत्न नथह कऽ िहा िी, बा् थक यहदी सभक सन् ततन िी, आ सत् य बजैत िी, आ मरियमक सरतईक समय मे हम सभ उपखयत िाहँ । 13 तखन थपाततुस ई बतत बजथनहति बतिह र्टे केँ सम्थधत कऽ कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “हम अहतँ सभ केँ कैसिक जीवन सँ जतदू कऽ िहा िी जे अहतँ सभ थवशतसपूव्क ई बततउ जे ओ वथभितिक कतिणे ँ जना िथि वत नथह, आ जे बतत अहतँ सभ कहाहँ से सत अथि।” 14 ओ सभ थपाततुस केँ उति दे ाथिन, “हमित सभक रकटत थनयम अथि, जतथह सँ हमित सभ केँ शपि दे बऽ सँ मनत कया रेा अथि, ई पतप अथि। 15 तखन हरत आ कतइफत थपाततुस केँ कहाथिन, “ओ बतिह आदमी ई नथह मतनत जे हम सभ हनकत नीिनीि आ जतदू रिक रप मे जनैत िी, यदथप ओ ई नतटक किै त िथि जे ओ पिमेश् विक पुत आ ितजत िथि। 16 तखन थपाततुस सभ केँ बतहि थनकाबतक आजत दे ाथिन, थसवतय बतिह र्टे केँ जे कहै त िातह जे हनकि जन वथभिति मे नथह भेा अथि, आ यीशु केँ दू ि हथट कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “यहदी सभक मन मे यीशु केँ मतिबतक थविति थकरक अथि? 17 ओ सभ हनकत उति दे ाथिन, “ओ सभ थवशतम-थदन मे इातज किबतक कतिणे ँ ओ सभ क्थधत िथि।” थपाततुस कहाथिन, “की ओ सभ नीक कतजक ाेा ओकित मतरि दे तैक? ओ सभ हनकत कहाथिन, “हँ , सि।” अध तय 3 1 तखन थपाततुस क्ध सँ भिा हॉा सँ बतहि थनकथा यहदी सभ केँ कहाथिन, “हम समस संसति केँ रवतही दे बतक ाेा कहै त िी जे हमित ओथह आदमी मे क्न् द्ष नथह भेटैत अथि।” 2 यहदी सभ थपाततुस केँ उति दे ाथिन, “जँ ओ दु ष नथह िथहतथि तँ हम सभ हनकत अहतँ क स्झतँ नथह अनने िथहतहँ ।” 3 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “की अहतँ सभ हनकत ाऽ कऽ अपन थनयमक अनुसति पिीकत दै त िी।” 4 तखन यहदी सभ कहाथिन, “हमित सभक ाेा ककि् मतरि दे ब उथित नथह अथि।” 5 थपाततुस यहदी सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ केँ मतरि नथह दे बतक आजत अहतँ सभक अथि, मुदत हमि नथह।” 6 ओ फेि दातन पि जत कऽ यीशु केँ बजबैत पुिाथिन, “की अहतँ यहदी सभक ितजत िी?” 7 यीशु थपाततुस केँ कहाथिन, “की अहतँ ई बतत अपने सँ कहै त िी आथक यहदी सभ हमित बतिे मे अहतँ केँ ई बतत कहने िा?” 8 थपाततुस यीशु सँ पुिाथिन, “की हम यहदी िी?” पूित जतथत आ यहदी सभक शतसक अहतँ केँ हमित हति मे सौंपने अथि। अहतँ की केाहँ ? 9 यीशु उति दे ाथिन, “हमि ितज रथह संसतिक नथह अथि। मुदत आब हमि ितज रतय सँ नथह अथि। 10 थपाततुस कहाथिन, “तखन की अहतँ ितजत िी?” यीशु उति दे ाथिन, “अहतँ कहै त िी जे हम ितजत िी। हम रथह ाेा आया िी जे हम सतक रवतही दी। जे केओ सत् य मे अथि, से हमि आवतज सुनैत अथि। 11 थपाततुस हनकत पुिाथिन, “सत की ह्इत िै क?” 12 यीशु कहाथिन, “सत स् वर् सँ अथि।” 13 थपाततुस कहाथिन, “ते ँ सत् य पृि् वी पि नथह अथि।” 14 यीशु थपाततुस केँ कहाथिन, “थवश् वतस कर जे पृि् वी पि सत् य ओथह सभ मे अथि जे जखन हनकत सभ केँ न् यतय किबतक सतमि्् य भेटैत िथन तँ सत् य दतित शतथसत भऽ जतइत िथि आ सत् य न् यतय बनबैत िथि। अध तय 4 1 तखन थपाततुस यीशु केँ दातन पि ि्थ़ यहदी सभक ार जत कऽ कहाथिन, “हमित यीशु मे क्न् द्ष नथह भेटैत अथि।” 2 यहदी सभ हनकत कहाथिन, “मुदत ओ कहाथिन, “हम पिमेश् विक मन् थदि केँ नष कऽ सकैत िी आ तीन थदन मे ओकित फेि सँ बनत सकैत िी।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
3 थपाततुस हनकत सभ केँ पुिाथिन, “ओ क्न तिहक मखनिक थवषय मे बजैत िथि?” 4 यहदी सभ हनकत कहाथिन, “सुाेमतन जे थियताीस वष् धरि बनबैत िातह, से कहने िातह जे ओ नष कऽ दे ततह आ तीन थदन मे बनौततह।” 5 थपाततुस फेि हनकत सभ केँ कहाथिन, “हम ओथह आदमीक खून सँ थनद्ष िी। की अहतँ सभ रकित थदस तकैत िी। 6 यहदी सभ हनकत कहै त िथिन, “हनकि खून हमित सभ आ हमित सभक सनतन पि िहय।” तखन थपाततुस बू़-पुि्थहत आ ाेवी सभ केँ रक ितम बजत कऽ कहाथिन, “रनत कतज नथह कर। हमित अहतँ क आि्प मे (ओकित थवरद) क्न् रहन बतत नथह भेटा जे ओ बीमति ा्क केँ िीक किबतक आ थवशतम-थदन केँ त़्बतक थवषय मे मृतुक य्ग ह्। 7 पुि्थहत आ ाेवी थपाततुस केँ उति दे ाथिन, “सीजिक जतन सँ जँ केओ थननत कियवात अथि तँ ओ मृतुक य्ग अथि। मुदत ई आदमी पभुक थननत कयाक। 8 तखन ितजपता फेि यहदी सभ केँ आजत दे ाथिन जे ओ सभ दातन सँ बतहि थनकथा जतय। यीशु केँ बजत कऽ कहाथिन, “हम अहतँ केँ की किब?” 9 यीशु हनकत उति दे ाथिन, “जेनत धम्शतस् त मे थाखा अथि, तेनत कर।” 10 थपाततुस हनकत पुिाथिन, “ई क्नत थाखा अथि?” 11 यीशु हनकत कहाथिन, “मूसत आ पवक् तत सभ हमि कष् ट आ पुनरुतनक थवषय मे भथवषवतणी केने िथि।” 12 ई बतत सुथन यहदी सभ क्थधत भऽ थपाततुस केँ कहाथिन, “अहतँ आब ओथह आदमीक थननत थकरक सुनब?” 13 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “जँ ई सभ बतत अहतँ सभ केँ थननत बुझतइत अथि तँ की अहतँ सभ ओकित ाऽ कऽ अपन आँ रन मे आथन कऽ अपन थनयमक अनुसति ओकि मुकदमत कर।” 14 यहदी सभ थपाततुस केँ उति दै त िथिन, “हमि सभक थनयम कहै त अथि जे हनकत नौ तीस टत पहति किबतक बतधतत िथन, मुदत जँ रथह तिहे ँ ओ पभुक थननत किततह तँ हनकत पतिि मतिा जतयत।” 15 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “जँ हनकि ई बतत थननत अथि तँ की अहतँ सभ अपन थनयमक अनुसति हनकि पिीकण कर।” 16 यहदी सभ थपाततुस केँ कहै त अथि जे, “हमि सभक थनयम हमित सभ केँ आजत दै त अथि जे ककि् मृतु नथह दे ा जतय।” 17 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “ओकित कूस पि ि़तओा जेबतक उथित नथह।” 18 ितजपता जखन ओथह ितमक ा्क सभ आ यहदी सभ थदस तकाथन तँ ओ बहत् यहदी सभ केँ कतनैत दे खाथन आ यहदी सभक मुखखयत पुि्थहत सभ केँ कहाथिन, “सब ा्क हनकि मृतुक इचत नथह किै त अथि।” 19 यहदी सभक बुजुर् सभ थपाततुस केँ उति दे ाथिन, “हम सभ आ सभ ा्क रथह ाेा रतय आथब रेाहँ जे ओ मरि जतय।” 20 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “ओ थकरक मित? 21 ओ सभ हनकत कहाथिन, “थकरक तँ ओ अपनत केँ पिमेश् विक पुत आ ितजत कहै त िथि।” अध तय 5 1 मुदत थनक्दे मुस रकटत यहदी ितजपताक समक ित़ भऽ कऽ कहाथिन, “हे धम् नतयतधीश, हम अहतँ सँ थवनती किै त िी जे अहतँ हमित पि अनुगह कर आ थकिु शब बतजब।” 2 थपाततुस हनकत कहाथिन, “आरू बजैत िह।” 3 थनक्दे मुस कहाथिन, “हम यहदी सभक बू़-पुितन सभ, शतसी सभ, पुि्थहत आ ाेवी सभ आ यहदी सभक सभटत ा्क सभ सँ कहाहँ । अहतँ सभ रथह आदमीक संर की करितहँ ?
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
4 ओ रहन ा्क िथि जे कतेक् उपय्री आ रौिवशताी िमतति केने िथि, जे पथहने पृि् वी पि केओ केओ नथह केने िा आ ने कथहय् नथह कित। ओकित ि्थ़ थदयौक, आ ओकित क्न् हतथन नथह कर। जँ ओ पिमेश् वि सँ अयातह तँ ओकि िमतति, (ओकि िमततिी इातज) िाैत िहत। मुदत जँ मनुष् यक थदस सँ तँ ओ सभ अन् य भऽ जतयत। 5 रथह तिहे ँ मूसत जखन पिमेश् वि दतित थमस मे पितओा रेा िातह तँ थमसक ितजत थफिौनक समक पिमेश् विक आजत दे ा रेा िमत् कति सभ कयाथन। आ भाे ओथह दे शक जतदू रि, जनेस आ जमेस, अपन जतदू सँ वैह िमतति किै त िा जे मूसत केने िातह, तइय् ओ सभ कतज नथह क' सकातह जे मूसत केने िातह; 6 हे शतसी आ फरिसी सभ, जतदू रि सभ जे िमतति किै त िा, से पिमेश् विक नथह िा। मुदत जे सभ ओकित सभ पि कतज केने िा, आ सभ ओकित सभ पि थवश् वतस किऽ वात सभ नतश भऽ रेा। 7 आब रथह आदमी केँ जतय थदयौक। कतिण, जे िमतति अहतँ सभ हनकत पि आि्प ारतबैत िी, से पिमेश् विक अथि। आ ओ मृतुक य्ग नथह अथि। 8 तखन यहदी सभ थनक्दे मुस केँ कहाथिन, “की अहतँ हनकि थशष् य बथन हनकि पक मे बतत कऽ िहा िी?” 9 थनक्दे म हनकत सभ केँ पुिाथिन, “की ितजपता सेह् हनकि थशष बथन रेा िथि आ की ओ हनकत ाेा भतषण दै त िथि?” की सीजि ओकित ओथह उच पद पि नथह ितखख दे ाकैक? 10 ई बतत सुथन यहदी सभ कतँ थप उिातह आ थनक्दे म केँ दतँ त कटै त कहाथिन, “की अहतँ हनकि थशकत केँ सत् य मे गहण कऽ सकैत िी आ मसीहक संर अपन भतग पतथब सकैत िी?” 11 थनक्दे मुस उति दे ाथिन, “आमेन; हम हनकि थशकत आ हनकत संर हमि भतग पतप किब, जेनत अहतँ सभ कहाहँ । 12 तखन रकटत आओि यहदी उथि कऽ ितजपता सँ थकिु विन सुनबतक ाेा अनुमथत मंराक। 13 ितजपता कहाथिन, “जे म्न अथि से बतजू।” 14 ओ कहाथिन, “हम यरशाेम मे अ़तीस वष् धरि भे़ ँ तक प्खरि ार प़ा िही, बहत कमज्िी मे परिशम किै त िही आ रकटत रहन इातजक पतीकत मे िही जे रकटत स् वर्दूतक आरमन सँ कया जतयत, जे थनथशत समय मे पतथन केँ पिे शतन किै त िा। पतथन के पिे शतनी के बतद जे थकय् पथहने घुसा िा, ओकित जे बीमतिी िाैक, से िीक भ’ रेाै। 15 यीशु हमित ओतऽ सुस दे खख हमित कहाथिन, “की अहतँ िीक भऽ जतयब?” हम उति दे थायथन, “महतितज, हमित ार रहन केओ नथह अथि जे पतथन िकनतिूि भ’ जतइत अथि जे हमित प्खरि मे ितखख सकय।” 16 ओ हमित कहाथिन, “उिू, अपन ओितओन उित कऽ िाू।” हम तुिन िीक भऽ रेाहँ आ अपन ओितओन उित कऽ िााहँ । 17 तखन यहदी सभ थपाततुस केँ कहाथिन, “हमि पभु ितजपता, पति्नत कर जे हनकत सँ पूिू जे क्न थदन ओ अपन दु ब्ातत सँ िीक भेातह।” 18 ओ कमज्ि ा्क उति दे ाथिन, “थवशतम-थदन िा।” 19 यहदी सभ थपाततुस केँ कहाथिन, “की हम सभ ई नथह कहाहँ जे ओ थवशतम-थदन मे अपन इातज कऽ कऽ दु ष् टतत् मत सभक मुखखयतक दतित दु ष् टतत् मत सभ केँ भरत दै त िथि?” 20 तखन रकटत आओि 7 यहदी आथब कऽ कहाथिन, “हम आनि िाहँ , आवतज सुनैत िाहँ , मुदत ककि् नथह दे खख सकैत िाहँ । यीशु जत िहा िातह तखन हम ओथह ितम सँ रुजिै त भी़ केँ सुनाहँ आ पुिथायथन जे ओतय की अथि? 21 ओ सभ हमित कहाक जे यीशु ओथह ितम सँ रुजिै त िथि, तखन हम थिथियतइत कहथायथन, “हे दतऊदक पुत यीशु , हमित पि दयत कर।” ओ ित़ भऽ कऽ हमित हनकत ार ाऽ जेबतक आजत दे ाथन आ हमित कहाथिन, “अहतँ की ितहै त िी?” 22 हम कहथायथन, “पभु, हम अपन दथष पतप कऽ सकब।” 23 ओ हमित कहाथिन, “अहतँ क दथष िथा जतउ।” 24 रकटत आओि यहदी सेह् बतहि आथब कऽ कहाक, “हम क़्ी िाहँ , ओ हमित मतत अपन विन सँ िीक कऽ ाेाक, “हम ितहब, अहतँ शुद भऽ जतउ।” आ समथत हम अपन क़् सँ शुद भ’ रेाहँ ।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
25 रकटत आओि यहदी बतहि आथब कहाक, “हम टे ़ भ’ रेा िाहँ , आ ओ हमित अपन विन पि स्झ क’ दे ाथन।” 26 वेि्थनकत नतमक रकटत स् ती कहाथिन, “हमित बतिह वष् धरि खूनक ि्ट ातरा िा आ हम हनकि वसक कतत िूथब रेाहँ आ तुिन हमि खूनक बूंद रथक रेा।” 27 तखन यहदी सभ कहाथिन, “हमित सभक थनयम अथि जे स् ती केँ पमतणक रप मे नथह दे ा जतयत।” 28 द्सि बततक बतद रकटत आओि यहदी कहाथिन, “हम दे खाहँ जे यीशु केँ अपन थशष् य सभक संर थववतह मे बजतओा रेा िा, आ राीा पदे शक कतनत मे मथदितक अभतव िा। 29 जखन सभ मथदित पीथब रेा तखन ओ न्कि सभ केँ आजत दे ाथिन जे ओतऽ िहटत बत्न मे पतथन भरि थदयौक आ ओ सभ ओकित सभ केँ थकनति धरि भरि दे ाक आ ओ सभ ओकित सभ केँ आशीवत् द दे ाक आ पतथन केँ शितब मे बदथा दे ाक आ सभ ा्क रथह िमतति सँ आशय्िथकत भऽ पीथब रेा। 30 रकटत आओि यहदी ित़ भऽ कऽ कहाथिन, “हम यीशु केँ कफिनहमक सभतघि मे थशकत दै त दे खाहँ । सभतघि मे रकटत रहन आदमी िा, जकित मे दु षततत िाैक। ओ थिथियत उिाथन, “हमित ि़्ू।” , नतसितक यीशु, त्ित सँ हमित सभक की ाेनत-दे नत अथि? की अहतँ हमित सभक नतश किय ाेा आया िी? हम जनैत िी जे अहतँ पिमेश् विक पथवत िी। 31 यीशु ओकित डतँ टैत कहाथिन, “हे अशुद आत् मत, िुप िह आ ओथह आदमी मे सँ बतहि थनकाू। तखने ओ हनकत मे सँ बतहि थनकथा रेातह आ हनकत क्न् तिहक ि्ट नथह पहँ िौाथन। 32 रकटत फरिसी सेह् थनमथाखखत बतत कहाथिन। हम दे खाहँ जे राीा आ यहथदयत, समुदक कतत आ यिदनक कतत मे बहत् दे श सँ रकटत पैघ दा यीशु ार आथब रेा िा आ बहत ितस दु ब्ा ा्क हनकत ार आथब रेातह आ ओ सभ केँ िीक कऽ दे ाथन। 33 हम अशुद आत् मत सभक थिथियतइत सुनाहँ जे, “अहतँ पिमेश् विक पुत िी।” यीशु हनकत सभ केँ सख आजत दे ाथिन जे ओ सभ हनकत नथह बततबथि। 34 रकि बतद रकटत आओि वखय, जकि नतम सेनुरिओ िा, कहाकथन, “हम यीशु केँ कफिनहम मे दे खाहँ आ हनकत सँ थवनती केाहँ जे, “पभु, हमि सेवक ाकवतगस भ’ क’ घि मे प़ा अथि।” 35 यीशु हमित कहाथिन, “हम आथब कऽ हनकत िीक किब।” 36 मुदत हम कहथायथन, “पभु, हम रथह य्ग नथह िी जे अहतँ हमि ित मे आथब जतउ। मुदत खताी विन बतजू, तखन हमि सेवक िीक भ’ जतयत।” 37 यीशु हमित कहाथिन, “जतउ। जथहनत अहतँ थवश् वतस केाहँ , तेनत अहतँ क संर सेह् ह्अय।” ओही घ़ी सँ हमि न्कि िीक भ’ रेा। 38 तखन रकटत कुाीन ा्क कहाथिन, “कफिनहम मे हमि रकटत बेटत िा जे मृतुक बतट मे प़ा िा। जखन हम सुनाहँ जे यीशु राीा आथब रेा िथि तँ हम जत कऽ हनकत सँ थवनती केाहँ जे ओ हमि घि मे उतरि कऽ हमि बेटत केँ िीक किथि, थकरक तँ ओ मृतुक सीमत मे अथि। 39 ओ हमित कहाथिन, “जतउ, त्हि बेटत जीथवत अथि।” 40 ओथह समय सँ हमि बेटत िीक भऽ रेा। 41 रथह सभक अथतरिय बहत् यहदी सभ, सी-पुरष, थिथियत उिातह आ कहाथिन, “ओ सते पिमेश् विक पुत िथि, जे मतत अपन विन सँ सभ ि्र केँ िीक किै त िथि, आ थजनकत दु ष् टतत् मत सभ पूण् रप सँ अधीन िथि।” 42 ओथह मे सँ थकिु र्टे आरू कहाथन, “ई शखय पिमेश् विक अथतरिय ककि् सँ नथह आथब सकैत अथि।” 43 थपाततुस यहदी सभ केँ कहाथिन, “शैततन सभ अहतँ सभक वैद सभक अधीन थकरक नथह अथि? 44 थकिु ा्क कहाथिन, “शैततन केँ अधीन किबतक सतमर् पिमेश् वि सँ नथह थनकथा सकैत अथि।” 45 मुदत द्सि ा्क थपाततुस केँ कहाथिन जे ओ 1 ातजि केँ ितरि थदनक कब मे िहात पि मृत् यु मे सँ थजयत दे ाथन। 46 ितजपता ई बतत सुथन कतँ पैत यहदी सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभ केँ थनद्ष खून बहौात सँ की फतयदत ह्यत?”
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अध तय 6 1 तखन थपाततुस थनक्दे म आ ओथह पनह आदमी केँ बजत कऽ कहाथिन, “हम की किब, जखन थक ा्कक बीि मे हं रतमत भ’ िहा अथि।” 2 ओ सभ हनकत कहाथिन, “हमित सभ केँ नथह बुझा अथि। जे क्ातहा उिबैत अथि, तकित थदस तकथि। 3 तखन थपाततुस ा्क सभ केँ बजत कऽ कहाथिन, “अहतँ सभ जनैत िी जे अहतँ सभक पित अथि जे हम अहतँ सभक ाेा फसह-पतबथन मे रकटत कैदी केँ ि्थ़ दे ब। 4 हमित रकटत नतमी कैदी, रकटत हततित अथि, जकित बिबत कहा जतइत िै क आ यीशु थजनकत मसीह कहा जतइत िै क, थजनकत मे हमित मृतुक पतत थकिु नथह भेटैत िै क। ते ँ अहतँ सभ मे सँ क्न म्न अथि जे हम अहतँ सभ केँ ि्थ़ दी? 5 ओ सभ थिथियत कऽ कहै त अथि जे, “बिबत केँ हमित सभ केँ ि्थ़ थदअ।” 6 थपाततुस हनकत सभ केँ कहाथिन, “तखन हम यीशु केँ की किब, थजनकत मसीह कहा जतइत िथन?” 7 ओ सभ उति दे ाथिन, “ओकित कूस पि ि़तओा जतय।” 8 ओ सभ फेि थिथियत कऽ थपाततुस केँ कहाथिन, “अहतँ कैसिक थमत नथह िी, जँ अहतँ रथह आदमी केँ ि्थ़ दे ब?” थकरक तँ ओ पिमेश् विक पुत आ ितजत िथि। मुदत की अहतँ क पवृथत अथि जे ओ ितजत ह्थि, सीजि नथह? 9 तखन थपाततुस क्ध सँ भिा हनकत सभ केँ कहाथिन, “अहतँ सभक जतथत सथदखन थवद्ह कियवात िहा अथि, आ अहतँ सभ सथदखन ओथह सभक थवि्ध मे िहै त िी जे अहतँ सभक सेवत कियवात अथि?” 10 यहदी सभ उति दे ाथिन, “हमित सभक सेवत किऽ वात के िथि?” 11 थपाततुस हनकत सभ केँ उति दे ाथिन, “अहतँ सभक पिमेश् वि जे अहतँ सभ केँ थमसक कि्ि दतसतत सँ मुय कयाथन आ ाता सतरि केँ शुष भूथम जकतँ ाऽ रेातह आ जंरा मे अहतँ सभ केँ मरत आ बटे िक मतं स खुआ दे ाथन आ िटतन सँ पतथन अनाथन आ स् वर् सँ अहतँ सभ केँ रकटत थनयम दे ाथन। 12 अहतँ सभ ओकित सभ तिहे ँ क्थधत केाहँ आ अपनत ाेा रकटत थपघाा बि़तक ितहाहँ आ ओकि आितधनत केाहँ आ ओकित बथा ि़त कऽ कहथायैक, “हे इसतरा, ई सभ त्हि दे वतत िथि, जे अहतँ सभ केँ थमस दे श सँ बतहि थनकताने िथि।” 13 जतथह कतिणे ँ अहतँ सभक पिमेश् वि अहतँ सभक नतश किऽ ितहै त िातह। मुदत मूसत अहतँ सभक ाेा थबनती कयाथन आ अहतँ सभक पिमेश् वि हनकि बतत सुनाथन आ अहतँ सभक पतप कमत कयाथन। 14 तकि बतद अहतँ सभ क्थधत भऽ रेाहँ आ अपन पवक् तत मूसत आ हतरन केँ मतरि दे बऽ ितहै त िाहँ , जखन ओ सभ तमू मे भतथर रेातह, आ अहतँ सभ सथदखन पिमेश् वि आ हनकि पवक् तत सभक थवरद रुनरुनतइत िहाहँ । 15 ओ अपन नतयतधीशक आसन सँ उथि कऽ बतहि थनकथा जतइत िातह। मुदत यहदी सभ थिथियत उिा, “हम सभ सीजि केँ ितजत मतनैत िी, यीशु केँ नथह।” 16 ई वखय जनम ह्इते जतनी ा्कथन आथब हनकत विदतन ि़त दे ाथिन। जे बतत सुथन हे ि्दे स बहत घबित रेातह आ ओकित मतरि दे बऽ ितहै त िातह। 17 जखन हनकि थपतत केँ ई बतत बुझा िाथन तखन ओ हनकत आ अपन मतय मरियमक संर थमस दे श मे भतथर रेातह। हे ि्दे स जखन सुनाथन जे हनकि जन भेाथन तँ हनकत मतरि दे थिन। ओथह तिहे ँ बेताेहेम आ ओकि समस इातकत मे दू वष् आ ओथह सँ कम उमक सभ बचत सभ केँ पित कऽ मतरि दे ाक। 18 ई बतत सुथन थपाततुस भयभीत भऽ रेातह। ओ हलत किऽ वात ा्क सभ मे िुप िहबतक आजत दै त यीशु केँ कहाथिन, “की अहतँ ितजत िी?” 19 सभ यहदी थपाततुस केँ उति दे ाथिन, “ओ वैह वखय िथि थजनकत हे ि्दे स मतिय ितहै त िातह।” 20 तखन थपाततुस पतथन ाऽ कऽ ा्क सभक सतमने हति ध् कऽ कहाथिन, “हम रथह धम् वखयक खून सँ थनद्ष िी। अहतँ सभ रकित थदस दे खू। 21 यहदी सभ उति दे ाथिन, “हनकि खून हमित सभ आ हमित सभक सन् ततन पि िहय।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
22 तखन थपाततुस यीशु केँ हनकत स्झतँ अनबतक आजत दे ाथिन आ हनकत सँ ई बतत कहाथिन। 23 अहतँ क अपन जतथत अहतँ केँ ितजत बनेबतक आजत दे ाक। ते ँ हम, थपाततुस, अहतँ केँ पूव् ितजपताक थनयमक अनुसति क़्त मतिबतक सजत दै त िी। आ अहतँ पथहने बतना िहब, तखन ओथह यतन पि कूस पि ाटकत दे ा जतयब, जतय अहतँ रखन कैदी िी। आ त्ित संर दू टत अपितधी सेह्, जकि नतम थडमतस आ रेसतस अथि। अध तय 7 1 तखन यीशु आ दु नू ि्ि हनकत संर दातन पि सँ बतहि थनकाातह। 2 जखन ओ सभ र्ल्ित नतमक यतन पि पहँ िातह तँ हनकि वस उततरि कऽ हनकत सनी के कप़त सँ बतनाथन आ मति पि कतँ टक मुकुट ारत कऽ हति मे ख़ ारत दे ाथन। 3 ओ सभ हनकत संर कूस पि ि़तओा रेा दु नू ि्ि केँ सेह् ओथहनत कयाथन, हनकि दथहनत कतत दीमतस आ बतमत कतत रेसतस। 4 यीशु कहाथिन, “हे थपतत, हनकत सभ केँ कमत कर। थकरक तँ ओ सभ की किै त िथि से नथह जनैत िथि। 5 ओ सभ ओकि वस बतँ थट कऽ ओकि वस पि थिटी ारत दे ाक। 6 रथह बीि ा्क सभ ित़ भऽ रेा, आ यहदी सभक मुखखयत पुि्थहत आ बू़-पुितन सभ हनकि उपहतस किै त कहाथिन, “ओ द्सि् केँ बित ाेाक, जँ संभव ह् तऽ आब अपनत केँ बितउ। जँ ओ पिमेश् विक पुत िथि तँ आब कूस पि सँ उतरि जतथि।” 7 थसपतही सभ सेह् हनकि उपहतस केाक आ थसिकत आ थपत ाऽ कऽ ओकित पीबतक ाेा ि़त दे ाक आ कहाक जे, “अहतँ यहदी सभक ितजत िी तँ अपनत केँ बितउ।” 8 तखन ाॉख्रनस नतमक रकटत थसपतही भतात ाऽ कऽ 1 ओकि कतत मे िे द केाक आ तुिन खून आ पतथन थनकथा रेा। 9 थपाततुस कूस पि शीष्क थहबू , ाैथटन आ यूनतनी अकि मे थाखाथन, अित् त्। ई यहदी सभक ितजत िथि। 10 मुदत यीशुक संर कूस पि ि़तओा रेा दू टत ि्ि मे सँ रकटत, जकि नतम रेसतस िा, यीशु केँ कहाकथन, “अहतँ जँ मसीह िी तँ अपनत केँ आ हमित सभ केँ बितउ।” 11 मुदत जे ि्ि अपन दथहनत कतत कूस पि ि़तओा रेा िा, जकि नतम थडमतस िा, ओकित उति दे ाक आ कहाक जे, “की अहतँ पिमेश् वि सँ नथह डे िैत िी, जे रथह सजतय पतथब रेा िी?” हमित ा्कथन केँ वतसव मे अपन कतजक द्ष सही आ नतयपूव्क भेटैत अथि; मुदत ई यीशु , ओ की अधातह केाथि? 12 रथह कुहिातक बतद यीशु यीशु केँ कहाथिन, “पभु, जखन अहतँ अपन ितज् य मे आथब जतयब तखन हमित म्न पत़ू।” 13 यीशु उति दे ाथिन, “हम अहतँ केँ सते कहै त िी जे आइ अहतँ हमित संर जरत मे िहब।” अध तय 8 1 ारभर ििम बजे भऽ रेा आ नवम बजे धरि समस पृथी पि अनति भऽ रेा। 2 जखन सूय् गहण भेा िा तखन दे खू, मंथदिक पदत् ऊपि सँ नीितँ धरि फतथट रेा िा। पतिि सभ फतथट रेा आ कब सभ खुथज रेा आ सुता पथवत ा्क सभक बहत ितस ातश उथि रेा। 3 किीब नौम घंटत मे यीशु ज्ि-ज्ि सँ थिथियत उिातह, “हे ाी, हे ाी, ातमत जबनी?” जकि अि् अथि, “हमि पिमेश् वि, हमि पिमेश् वि, अहतँ हमित थकरक ि्थ़ दे ाहँ ?” 4 रथह बततक बतद यीशु कहाथिन, “थपतत, हम अपन आत् मत अहतँ क हति मे सौंथप िहा िी। आ ई कथह ओ भूत ि्थ़ दे ाथन। 5 मुदत सेनतपथत दे खख जे यीशु रथह तिहे ँ थिथियतइत आत् मत ि्थ़ दे ाथन, तखन ओ पिमेश् विक मथहमत कयाथन आ कहाथिन, “सते ई धम् ा्क िातह।” 6 ओतऽ ित़ सभ ा्क सभ ई दे खख बहत घबित रेा। आ बीता बतत पि थिंतन किै त हनकत ा्कथनक ितती पि पहति कयाथन आ फेि यरशाेम नरि मे घुरि रेातह।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
7 सेनतपथत ितजपताक ार जत कऽ जे थकिु रुजिा िा से हनकत कहाथिन। 8 ई सभ बतत सुथन कऽ ओ बहत दु खी भऽ रेातह। 9 यहदी सभ केँ बजत कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “की अहतँ सभ सूय्गहणक िमतति आ आन घटनत सभ दे खाहँ जे यीशु मिै त कता भेा िा?” 10 ई बतत सुथन यहदी सभ ितजपता केँ उति दे ाथिन, “सूय्गहण ओकि सतमतन पितक अनुसति भेा।” 11 मुदत मसीह सँ परिथित सभ ा्क सभ दू ि ित़ भऽ रेातह, जेनत राीा सँ यीशुक पतितँ -पतितँ आया स् तीरण सभ सेह् रथह सभ बतत केँ दे खैत िा। 12 अरिमथियतक यूसुफ नतमक रक आदमी, जे यीशुक थशष् य सेह् िा, मुदत यहदी सभक डि सँ खुथा कऽ नथह, ितजपताक ार आथब कऽ ितजपता सँ थवनती कयाक जे ओ यीशुक शव केँ कूस पि सँ उततिबतक अनुमथत दऽ दे थिन। 13 ितजपता हनकत िु टी दऽ दे ाथिन। 14 थनक्दे म ारभर सौ पतउं ड वजन के रंधक आ मुसबिक थमशण ा’ क’ अयातह। ओ सभ यीशु केँ कूस पि सँ न्ि सँ उततरि कऽ यहदी सभक बीि रत़बतक पितक अनुसति मसतात सँ थानन कप़त सँ बतखन दे ाथिन। 15 ओ ओकित रकटत नव कब मे ितखख दे ाथिन, जे यूसुफ बनौने िातह आ रकटत िटतन सँ कतथट कऽ कतथट दे ने िातह, जतथह मे कथहय् ककि् नथह ितखा रेा िा। ओ सभ कबिक दिबजत पि रकटत पैघ पतिि रु़कत दे ाक। अध तय 9 1 जखन अधम् यहदी सभ सुनाक जे यूसुफ यीशुक शव केँ भीख मतं थर कऽ रतथ़ दे ाक, तखन ओ सभ थनक्दे मुस केँ ख्थज ाेाक। आ ओ पनह र्टे जे ितजपताक समक रवतही दे ने िातह जे यीशु वथभितिक कतिणे ँ नथह भेा िथि, आ आन नीक ा्क जे हनकत पथत क्न् नीक कतज केने िातह। 2 मुदत जखन सभ यहदी सभक भय सँ नुकत रेातह तखन थनक्दे म असरिे हनकत सभ केँ दे खत कऽ कहाथिन, “रथह तिहक ा्क सभतघि मे क्नत पवेश कऽ सकैत अथि?” 3 यहदी सभ हनकत उति दे ाथिन, “मुदत अहतँ मसीहक संर थमथाकय सभतघि मे पवेश किबतक ाेा क्नत थहमत केाहँ ?” पिा्क मे त्हि भतग ओकित संर िहय। 4 थनक्दे मुस उति दे ाथिन, “आमेन; रहने ह्उ जे हम हनकत संर हनकि ितज मे अपन भतग पतथब सकब।” 5 तथहनत यूसुफ यहदी सभ ार आथब हनकत सभ केँ पुिाथिन जे अहतँ सभ हमित पि थकरक क्थधत िी जे हम थपाततुसक यीशुक ातशक ितहाहँ ? दे खू, हम ओकित अपन कब मे ितखख दे थायैक आ शुद थानेन मे ापेथट कऽ कबक दिबजत पि पतिि ितखख दे थायैक। 6 हम हनकत पथत उथित ववहति केाहँ । मुदत अहतँ सभ ओथह धम् वखय केँ कूस पि ि़त कऽ, ओकित पीबतक ाेा थसिकत दऽ कऽ, कतँ टक मुकुट पथहित कऽ, ओकि दे ह केँ क़्त सँ फतथ़ कऽ, आ ओकि खूनक अपितध केँ अहतँ सभ पि पति्नत कऽ कऽ अनतयपूव्क स् कयाहँ । 7 ई बतत सुथन यहदी सभ घबित रेा आ घबित रेा। ओ सभ यूसुफ केँ पकथ़ ाेाक आ थवशतम-थदन सँ पथहने हनकत बंदी मे ितखबतक आजत दे ाक। 8 ओ सभ हनकत कहाथिन, “सीकति कर। थकरक तँ रथह समय मे सपतहक पथहा थदन धरि अहतँ क क्न् अधातह किब उथित नथह अथि। मुदत हम सभ जनैत िी जे अहतँ केँ दफन किबतक य्ग नथह मतना जतयत। मुदत हम सभ अहतँ क मतं स हवतक थि़ै सभ आ पृि् वीक जतनवि सभ केँ दऽ दे ब।” 9 यूसुफ उति दे ाथिन, “ओ बतत घमंडी र्थायतक बतत जकतँ अथि, जे दतऊदक थवि्ध मे जीथवत पिमेश् वि केँ थननत कयाथन। मुदत अहतँ सभ शतसी आ वैद सभ जनैत िी जे पिमेश् वि भथवषवयत दतित कहै त िथि, “पथतश्ध हमि अथि, आ हम अहतँ सभ केँ 1 ओथह दु षततक बदात दे ब जे अहतँ सभ हमित धमकी दे ाहँ ।” 10 जतथह पिमेश् वि केँ अहतँ कूस पि ाटकौने िी, ओ हमित अहतँ क हति सँ बितबऽ मे सकम िथि। अहतँ क सभटत दु षतत अहतँ पि घुरि जतयत।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
11 ितजपता हति ध्बैत कहाथिन, “हम रथह नतयी वखयक खून सँ सतफ िी।” मुदत अहतँ सभ उति दे थायैक आ थिथियत उिाहँ , “हनकि खून हमित सभ आ हमित सभक सनतन पि िहय।” जेनत अहतँ सभ कहाहँ , अहतँ सभ अनन कता धरि नतश भऽ जतउ। 12 यहदी सभक बू़-पुितन सभ ई बतत सुथन कऽ बहत क्थधत भऽ रेातह। यूसुफ केँ पकथ़ कऽ ओ सभ ओकित ओथह क्िाी मे ितखख दे ाक जतय खख़की नथह िाैक। ओ सभ दिबजत बतखन कऽ ततात पि म्हि ारत दे ाक। 13 हरत आ कतइफत ओथह पि पहिे दति िखाथन आ पुि्थहत आ ाेवी सभक संर थवशतम-थदनक बतद सभ र्टे भेट किबतक ाेा थविति कयाथन आ ओ सभ य्जनत बनौाथन जे ओ सभ यूसुफ केँ क्न तिहे ँ मतरि दे थिन। 14 ओ सभ ई कतज कऽ कऽ हरत आ कतइफतक शतसक यूसुफ केँ बतहि अनबतक आदे श दे ाथिन। अध तय 10 1 सभ ा्क ई बतत सुथन कऽ ओ सभ पशंसत कयाथन आ आशय्िथकत भऽ रेातह, थकरक तँ क्िाीक ततात पि वैह म्हि भेटाथन आ यूसुफ नथह पतथब सकातह। 2 तखन हरत आ कतइफत थवदत भेातह, जखन सभ यूसुफक रेात पि पशंसत कऽ िहा िातह, तखन यीशुक कब पि नजरि िखथनहति रकटत थसपतही सभत मे बतथज िहा िा। 3 ओ सभ यीशुक कब पि पहित दै त कता भूकम आथब रेा। हम सभ दे खाहँ जे पिमेश् विक रकटत स् वर्दूत कबक पतिि केँ रु़कत कऽ ओकित पि बैसा िा। 4 हनकि िेहित थबजाी जकतँ आ वस बफ् जकतँ िाथन। आ हम सभ भय सँ मृत वखय जकतँ बथन रेाहँ । 5 हम सभ यीशुक कब पि रकटत स् वर्दूत केँ स् तीरण सभ केँ कहै त सुनाहँ , “डिब नथह। हम जनैत िी जे अहतँ यीशु केँ ततथक िहा िी जे कूस पि ि़ा रेा िातह; जेनत ओ भथवषवतणी केने िातह तेनत जीथब उिा िथि। 6 जतउ, आ ओथह ितम दे खू, जतय हनकत ितखा रेा िाथन। ओ तुिन जतउ, आ हनकि थशष् य सभ केँ कथह थदअ जे ओ मृत् यु मे सँ जीथब उिा िथि आ अहतँ सभ सँ पथहने राीा जतइत िथि। ओतय अहतँ सभ हनकत ओथहनत दे खब जेनत ओ अहतँ सभ केँ कहने िातह। 7 तखन यहदी सभ यीशुक कब पि नजरि िखथनहति सभ थसपतही सभ केँ बजत कऽ पुिाथिन, “ओ स् ती सभ के िथि, थजनकत सभ सँ स् वर्दूत रप कयाथन?” अहतँ सभ थकरक नथह पक़ाहँ ? 8 थसपतही सभ उति दे ाथिन, “हमित सभ केँ नथह बुझा अथि जे ओ स् तीरण के िाीह। रकि अथतरिय हम सभ भय सँ मृत वखय जकतँ बथन रेाहँ आ ओथह सीरण केँ क्नत पकथ़ सथकतहँ ? 9 यहदी सभ हनकत सभ केँ कहाथिन, “जथहनत पभु जीबैत िथि, हम सभ अहतँ सभ पि थवश् वतस नथह किै त िी।” 10 थसपतही सभ यहदी सभ केँ कहाथिन, “जखन अहतँ सभ यीशु केँ रतेक िमतति किै त दे खाहँ आ सुनाहँ आ हनकत पि थवश् वतस नथह कयाहँ , तखन अहतँ सभ हमित सभ पि क्नत थवश् वतस किब? अहतँ सभ नीक जकतँ कहाहँ , “जेनत पभु जीबैत िथि, थकरक तँ पभु सते जीबैत िथि।” 11 हम सभ सुनने िी जे अहतँ सभ यूसुफ केँ, जे यीशुक शव केँ रत़ने िातह, रकटत क्िाी मे, रकटत ततात मे बंद कऽ दे ाहँ , जकित पि म्हि ारतओा रेा िा। जखन अहतँ सभ ओकित ख्ााहँ तँ ओतऽ हनकत नथह भेटाथन। 12 तखन अहतँ सभ यूसुफ केँ पैदत कर, जकित अहतँ सभ क्िाी मे पहित दै त िाहँ , आ हम सभ यीशु केँ पैदत किब, जकि हम सभ कब मे पहित दै त िाहँ । 13 यहदी सभ उति दे ाथिन, “हम सभ यूसुफ केँ पैदत किब, की अहतँ सभ यीशु केँ पैदत किब।” मुदत यूसुफ अपन नरि अरिमथियत मे िथि। 14 थसपतही सभ उति दे ाथिन, “जँ यूसुफ अरिमथियत मे िथि आ यीशु राीा मे िथि तँ हम सभ स् वर्दूत केँ स् तीरण सभ केँ सूथित किै त सुनाहँ ।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
15 यहदी सभ ई बतत सुथन कऽ भयभीत भऽ रेातह आ आपस मे बजातह, “जँ ई सभ बतत सतव्जथनक भऽ जतय तँ सभ शिीि यीशु पि थवश् वतस कित।” 16 तखन ओ सभ बहत ितस पतइ जमत कऽ थसपतही सभ केँ दऽ कऽ कहाक, “की अहतँ सभ ा्क सभ केँ ई कहै त िी जे यीशुक थशष् य सभ ओथह ितथत मे आथब रेातह जखन अहतँ सभ सुता िही आ यीशुक शव ि्ित ाेाक। जँ ितजपता थपाततुस ई बतत सुथन ाेततह तँ हम सभ हनकत संतुष कऽ अहतँ सभ केँ सुिथकत कऽ दे बथन। 17 ओथहनत थसपतही सभ पतइ ाऽ कऽ यहदी सभक थनद् शक अनुसति बतजा। आ हनकत ा्कथनक रिप्ट् ा्क मे पसिा रेा। 18 रकटत पुि्थहत थफनेस, अदत सूाक मतसि आ ाेवी नतमक अरेउस, ओ तीनू राीा सँ यरशाेम आथब मुखपुि्थहत आ सभतघि मे िहथनहति सभ केँ कहाथिन। “ 20 पूित संसति मे जतउ, सभ जतथत केँ सुसमतिति पिति कर, ओकित सभ केँ थपतत, पुत आ पथवत आत् मतक नतम सँ बपथतस् मत दऽ थदयौक। जे केओ थवश् वतस कित आ बपथतस् मत ाेत, से उदति पतओत।” 21 यीशु अपन थशष् य सभ केँ ई बतत कथह कऽ हम सभ हनकत स् वर् मे ि़ै त दे खाहँ । 22 जखन मुख्यपुि्थहत आ बू़-पुि्थहत आ ाेवी सभ ई बतत सुथन कऽ रथह तीनू आदमी केँ कहाथिन, “इसतराक पिमेश् विक मथहमत कर आ हनकत स् वीकति कर जे अहतँ सभ जे बतत अहतँ सभ दे खाहँ आ सुनाहँ से सत् य अथि की नथह।” 23 ओ सभ उति दे ाथिन, “जथहनत हमित सभक पूव्ज सभक पभु, अबतहमक पिमेश् वि, इसहतकक पिमेश् वि आ यतकूबक पिमेश् वि जीथवत िथि, तेनत हम सभ यीशु केँ हनकि थशष् य सभ सँ रप किै त सुनाहँ आ जेनत हनकत स् वर् मे ि़ै त दे खाहँ , तेनत हम सभ अहतँ सभ केँ सत् य कहाहँ ।” 24 आरूक तीनू आदमी उति दे ाथिन आ ई बतत ज्थ़ कऽ कहाथिन, “जँ यीशु केँ जे बतत सुनाहँ आ हनकत स् वर् मे ि़ै त दे खाहँ , से हमित सभ केँ नथह िथहतय तँ पतपक द्षी भऽ जतयब।” 25 तखन मुख्य पुि्थहत सभ तुिन उथि कऽ धम्-थनयमक पुसक हति मे ाऽ कऽ रथह ा्क सभ केँ जतदू ट्नत कयाथन जे, “आब अहतँ सभ यीशुक थवषय मे जे बतत कहाहँ से आब नथह कहब।” 26 ओ सभ ओकित सभ केँ बहत ितस पतइ दे ाक आ ओकित सभक संर आन ा्क सभ केँ पित दे ाक जे ओकित सभ केँ अपन दे श मे पहँ ित दे ाक, जतथह सँ ओ सभ यरशाेम मे क्न् तिहे ँ नथह िहय। 27 तखन यहदी सभ सभ रक ितम जमत भऽ कऽ सभ सँ दु खद थिनत वय कऽ कऽ कहाथिन, “यरशाेम मे ई की असतधतिण घटनत घटा अथि?” 28 मुदत हरत आ कतइफत हनकत सभ केँ सत्भनत दै त कहाथिन, “हमित सभ केँ यीशुक कब पि पहित दे थनहति थसपतही सभ पि थवशतस थकरक किब जे ओ सभ स् वर्दूत कबक दिबजत सँ पतिि रु़कत दे ाक?” 29 शतयद हनकि अपन थशष् य सभ हनकत सभ केँ ई बतत कथह कऽ हनकत सभ केँ पतइ दऽ कऽ हनकत सभ केँ ई बतत कहबतक ाेा पतइ दऽ दे ाथिन। 30 रकि अथतरिय रथह बतत पि थविति कर जे पिदे शी सभ केँ क्न् शेय नथह दे ा जत सकैत अथि, थकरक तँ ओ सभ हमित सभ सँ बहत ितस िकम ाऽ ाेाक आ हमित सभ केँ जे थनद् श दे थायैक, ततथह अनुसतिे ँ ओ सभ हमित सभ केँ घ्षणत कयाक। हनकत सभ केँ यत तऽ हमित सभक पथत वफतदति िहबतक ितही, वत यीशुक थशष् य सभक पथत। अध तय 11 1 तखन थनक्दे म उथि कऽ कहाथिन, “हे इसतराक सनतन सभ, अहतँ सभ िीके कहै त िी, अहतँ सभ सुनाहँ जे ओ तीनू आदमी पिमेश् विक थनयमक शपि गहण कयाथन, जे कहाथन जे, “हम सभ यीशु केँ जैतूनक पहत़ पि अपन थशष् य सभक संर रप किै त दे खाहँ आ स् वर् मे ि़ै त दे खाहँ ।”
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2 धम्शतस् त हमित सभ केँ थसखतबैत अथि जे धन पवक् तत रथायतह केँ स् वर् मे ि़तओा रेाथन। पवक् तत सभक पुत सभ राीशत सँ पुिाथिन, “हमि सभक थपतत रथायतह कतय िथि?” ओ हनकत सभ केँ कहाथिन जे, हनकत स् वर् मे ि़तओा रेा अथि। 3 पिमेश् विक पवक् तत सभक पुत सभ हनकत कहाथिन, “शतयद आत् मत हनकत इसतराक क्न् पहत़ मे ाऽ रेा अथि, आ ओतऽ हमित सभ हनकत पतथब सकब।” ओ सभ राीशत सँ थवनती कयाथन आ ओ तीन थदन धरि हनकत सभक संर घुमैत िहातह, मुदत हनकत सभ केँ नथह भेटाथन। 4 हे इसतराक सनतन सभ, आब हमि बतत सुनू, आ हम सभ इसतराक पहत़ सभ मे ा्क सभ केँ पितबी, जतथह सँ कही ं आत् मत यीशु केँ ाऽ कऽ नथह रेा अथि आ ओतथह हम सभ हनकत पतथब कऽ तृप भऽ जतयब। 5 थनक्दे मसक सातह सभ ा्क केँ नीक ातरा। ओ सभ रहन ा्क सभ केँ पित दे ाक जे यीशु केँ तकैत िा, मुदत हनकत नथह भेटाथन, तखन ओ सभ घुरि कऽ कहाथिन, “हम सभ ितर कतत घुथम रेाहँ , मुदत यीशु केँ नथह भेथट सका, मुदत यूसुफ केँ हनकि नरि अरिमतथियत मे भेटा अथि।” 6 ई बतत सुथन कऽ शतसक सभ आ सभ ा्क पसर भऽ रेातह आ इसतराक पिमेश् विक सुथत कयाथन, थकरक तँ यूसुफ भेटातह, जकित ओ सभ क्िाी मे ितखख कऽ ितखख कऽ नथह पतथब सकातह। 7 जखन ओ सभ रकटत पैघ सभत बनत कऽ मुख्यपुि्थहत सभ पुिाथिन, “हमित सभ यूसुफ केँ क्न तिहे ँ हनकत सँ रप किबतक ाेा अपनत सभ ार आथन सकब?” 8 ओ सभ रकटत कतरज ाऽ कऽ हनकत थाखख कऽ कहाथिन, “अहतँ आ अहतँ क समस परिवतिक संर शतखन ह्।” हम सभ जनैत िी जे हम सभ पिमेश् वि आ अहतँ क थवरद आपथत कयाहँ । हमित सभ अपन थपततथपततक भेट किबत मे पसर भ' जतउ, कतिण जेा सँ अहतँ क भतरात पि हम सभ रकदम आशय्िथकत िाहँ । 9 हम सभ जनैत िी जे ई दु भत् वनतपूण् य्जनत िा जे हम सभ अहतँ क थवरद कया रेाहँ आ पभु अहतँ क खता िखाथन आ पभु अहतँ केँ हमित सभक य्जनत सँ मुय कयाथन। हे यूसुफ, जे सभ ा्कक बीि आदिणीय िी, अहतँ केँ शतखन ह्। 10 ओ सभ यूसुफक सततटत थमत केँ िुथन कऽ हनकत सभ केँ कहाथिन, “जखन अहतँ सभ यूसुफ ार पहँ िब तँ हनकत शतखनपूव्क पणतम कर आ हनकत ई पत दऽ थदयौक।” 11 ओ सभ जखन यूसुफ ार अयातह तँ ओ सभ शतखनपूव्क हनकत पणतम कयाथन आ पत हनकत दऽ दे ाथन। 12 यूसुफ ई बतत पथ़ कऽ कहाथिन, “पभु पिमेश् विक धन ह्उ जे हमित इसतराी सभ सँ मुय कयाथन जे ओ सभ हमि खून नथह बहत सकातह।” धन भरवतन्, जे हमित अहतँ क पतँ खखक नीितँ िकत केने िथि। 13 यूसुफ ओकित सभ केँ िुमत ाेाक आ ओकित सभ केँ अपन घि मे ाऽ रेा। द्सि थदन यूसुफ अपन रदहत पि िथ़ कऽ हनकत सभक संर यरशाेम िथा रेातह। 14 सभ यहदी सभ ई बतत सुथन हनकत सँ भेट किबतक ाेा थनकथा रेातह आ थिथियत उिाथन, “हे थपतत यूसुफ, अहतँ केँ रतय अयबत मे शतखनक संर िह।” 15 ओ उति दे ाथिन, “पभु दतित समरतत सभ ा्क केँ भेटय।” 16 ओ सभ हनकत िुमत ाेाक। आ थनक्दे मुस हनकत अपन घि ाऽ रेातह, जे रकटत पैघ मन्िं जनक ववयत करने िातह। 17 मुदत द्सि थदन तैयतिीक थदन मे हरत, कतइफत आ थनक्दे म यूसुफ केँ कहाथिन, “इसतराक पिमेश् विक समक सीकति कर आ हमित सभ सँ ओथह सभ प्क उति थदअ जे हम सभ अहतँ सँ पूिब। 18 हम सभ बहत घबित रेा िी जे अहतँ यीशुक शव केँ रतथ़ दे ाहँ । आ से' जखन हम सभ अहतँ केँ क्िाी मे बंद क' ाेने िही तखन अहतँ केँ नथह पतथब सकाहँ । तथहयत सँ अहतँ सभ हमित सभक बीि पकट ह्यबतक समय धरि हम सभ डित रेा िी। ते ँ पिमेश् विक समक हमित सभ केँ कह जे सभ थकिु भेा। 19 तखन यूसुफ उति दे ाथिन, “अहतँ सभ हमित तैयतिीक थदन भ्ि धरि कैद मे ितखख दे ाहँ ।” 20 जखन हम आधत ितथत मे पति्नत मे ित़ िाहँ तखन घि ितरिटत स् वर्दूत सँ घेिा िा। हम यीशु केँ सूय्क िमक जकतँ दे खाहँ आ डि सँ पृथी पि खथस प़ाहँ ।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
21 मुदत यीशु हमि हति पकथ़ कऽ हमित जमीन पि सँ उिौाथन, तखन ओस हमित पि थि़थक रेा। मुदत ओ हमि मुँह प्थि कऽ हमित िुमत ाेाक आ कहाक जे, “यूसुफ, नथह डे ितउ। हमित दे खू, थकरक तँ ई हम िी। 22 तखन हम हनकत थदस तकाहँ आ कहथायथन, “िब्नी रथायतह!” ओ हमित उति दे ाथिन, “हम रथायतह नथह, बा् थक नतसितक यीशु िी, थजनकि ातश अहतँ रतथ़ दे ाहँ ।” 23 हम हनकत कहथायथन, “हमित ओ कब दे खतउ जतथह मे हम अहतँ केँ ितखने िही।” 24 तखन यीशु हमित हति पकथ़ कऽ हमित ओथह ितम ाऽ रेातह जतय हम हनकत सुतत दे ने िाहँ आ हमित ओथह थानेन कप़त आ ापकी दे खौाथन जे हम हनकि मति पि ारत दे ने िाहँ । तखन हम बुथझ रेाहँ जे ई यीशु िथि, आ हम हनकि आितधनत कऽ कऽ कहथायथन, “पभुक नतम सँ जे अबैत अथि, से धन ह्।” 25 यीशु फेि हमित हति पकथ़ हमित अरिमथियत अपन घि थदस ा’ रेातह आ हमित कहाथिन, “अहतँ केँ शतखन ह्। मुदत िताीसम थदन धरि अपन घि सँ बतहि नथह थनकाू। मुदत हमित अपन थशष् य सभक ार जतय प़त। अध तय 12 1 जखन मुखपुि्थहत सभ ई सभ बतत सुथन कऽ िथकत भऽ रेातह आ मृत् यु जकतँ जमीन पि मुँह कऽ कऽ खथस प़ातह आ रक-द्सि केँ थिथियत उिाथन, “यरशाेम मे ई की असतधतिण थिन् ह?” हम यीशुक थपतत आ मततत केँ जनैत िी। 2 रकटत ाेवी कहाथिन, “हम हनकि बहत् समंधी सभ केँ जनैत िी, जे धतथम्क ा्क सभ केँ मन् थदि मे इसतराक पिमेश् वि केँ बथादतन आ ह्मबथा ि़बैत िथि।” 3 जखन महतपुि्थहत थशम्न हनकत क्ित मे ा’ ाेाथन। ओ हनकत कहाथिन, “पभु, आब अहतँ अपन सेवक केँ अपन विनक अनुसति शतखनपूव्क थवदत ह्मय थदयौक। कतिण, हमि आँ खख अहतँ क उदति केँ दे खाहँ , जे अहतँ सभ ा्कक स्झतँ तैयति केने िी। 4 थशम्न सेह् यीशुक मतय मरियम केँ आशीष दै त कहाथिन, “हम अहतँ केँ ओथह बचतक थवषय मे कहै त िी। ओ बहत् ा्कक पतन आ जीथब उिबतक ाेा आ रकटत रहन संकेतक ाेा थनयुय कया रेा िथि जकि थवि्ध मे कहा जतयत। 5 हँ , तावति त्हि अपन पतण मे सेह् िे दत आ बहत् हदयक थविति पकट ह्यत। 6 तखन सभ यहदी सभ कहाथिन, “आउ, ओथह तीनू आदमी केँ पितबी जे ओ सभ हनकत जैतूनक पहत़ पि अपन थशष् य सभक संर रप किै त दे खाथन।” 7 रकि बतद ओ सभ हनकत सभ सँ पुिाथिन जे अहतँ सभ की दे खाहँ । ओ रक मन सँ उति दे ाथिन, “इसतराक पिमेश् विक सतथरध मे हम सभ ई पुथष किै त िी जे हम सभ यीशु केँ जैतूनक पहत़ पि अपन थशष् य सभक संर रप किै त स् वर् मे ि़ै त दे खाहँ ।” 8 तखन हरत आ कतइफत हनकत सभ केँ अार-अार जरह पि ाऽ रेातह आ अार-अार जतँ ि कयाथन। ओ सभ सव्समथत सँ सत् य केँ सीकति कयाथन आ कहाथन जे, “ओ सभ यीशु केँ दे खाथन।” 9 तखन हरत आ कतइफत कहाथिन, “हमि सभक ववयत मे कहा रेा अथि जे, दू -तीन रवतहक मुँह सँ सभ बतत थसद ह्यत।” 10 मुदत हम सभ की कहाहँ ? धन हन्क पिमेश् वि केँ पसर कयाथन, आ पिमेश् विक विन दतित अनुवतद कया रेाथन। आ धन मूसतक दफन-यतन जतत अथि। 11 मुदत यीशु केँ थपाततुस केँ क़्त मतिा रेाथन, कतँ टक मुकुट पथहितओा रेाथन, िूक दे ा रेाथन, भतात सँ िे दा रेातह, कूस पि ि़तओा रेातह, कूस पि मरि रेातह आ रत़ा रेातह, आ हनकि शव आदिणीय यूसुफ केँ नव कब मे रत़ा रेाथन, आ ओ रवतही दै त िथि जे ओ हनकत जीथवत दे खाथन। 12 रथह पिमेश् वि सभ यीशु केँ जैतूनक पहत़ पि अपन थशष् य सभक संर रप किै त आ स् वर् मे ि़ै त दे खाथन। 13 तखन यूसुफ उथि रेातह। हरत आ कतइफत केँ कहाथिन, “अहतँ सभ केँ ई बतत कहा रेा अथि जे यीशु जीथवत िथि आ स् वर् मे िथा रेातह।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
14 ई बतत सिमुि आशय्क बतत अथि जे ओ मतत मृत् यु मे सँ जीथब ाेततह, बा् थक द्सि ा्क सभ केँ सेह् हनकि कब सँ जीथब ाेततह, जे यरशाेम मे बहत् ा्क सभ दे खने िथि। 15 आब हमित कनेक सुनू, हम सभ धन थशम्न, महतपुि्थहत केँ थिनै त िाहँ , जे यीशु केँ थशशु अवयत मे मखनि मे क्ित मे ा’ ाेाथन। 16 ओही थशम्न केँ अपन दू टत पुत िाथन, आ हम सभ हनकत सभक मृतु आ अंथतम संसति मे उपखयत िाहँ । 17 ते ँ जतउ, हनकत सभक कब दे खू, थकरक तँ ई सभ खुजा अथि आ ओ सभ जीथब रेा अथि। “ 19 मुदत आउ, हम सभ हनकत सभ ार जतइ आ हनकत सभक पथत उथित आदि आ सतवधतनीपूव्क ववहति किी। आ जँ हम सभ हनकत सभ केँ शपि ाेबय ाेा आथन सकब तँ शतयद ओ सभ अपन पुनरुतनक थकिु िहस बततओत। 20 ई बतत सुथन यहदी सभ बहत हथष्त भऽ रेातह। 21 तखन हरत आ कतइफत, थनक्दे म, यूसुफ आ रमतथारा अरिमथियत रेातह, मुदत हनकत सभ केँ अपन कब मे नथह भेटाथन। मुदत नरि मे घुमैत-थफिै त ओ सभ हनकत सभ केँ अपन भखय पि िे हन झुथक कऽ बतखन दे ाथन। 22 ओ सभ हनकत सभ केँ पिमेश् विक आदि आ आदिपूव्क पणतम किै त यरशाेम मे सभतघि मे ाऽ रेातह। 23 ओकित सभ केँ हति मे दऽ कऽ ओ सभ अद्न पिमेश् वि आ इसतराक पिमेश् विक नतम सँ शपि ाेाथन, जे हमित सभक पूव्ज सभ केँ धम्-थनयम आ पवक् तत सभक दतित बजौाथन, “जँ अहतँ सभ ओथह पि थवश् वतस किै त िी जे अहतँ सभ केँ मृत् यु मे सँ जीथब उिौाथन, जे यीशु िथि, तँ हमित सभ केँ कह जे अहतँ सभ की दे खाहँ आ क्नत अहतँ सभ मृत् यु मे सँ जीथब उिाहँ ।” 24 थशम्नक दु नू पुत ितरिनस आ ाेखनयस ई बतत सुथन कतँ थप उिातह। आ संरथह सर् थदस तकैत ओ सभ जीभ पि आँ रुि ितखख कूसक थनशतनी बनौाथन। 25 ओ सभ तुित बतजा, “हमित सभ मे सँ रक-रक र्टे केँ थकिु कतरज दऽ थदअ, आ हम सभ जे थकिु दे खाहँ से अहतँ सभक ाेा थाखख दे ब।” ओ सभ रक-रकटत बैथस कऽ थाखैत िहातह। अध तय 13 1 हे पभु यीशु आ थपतत, जे पिमेश् वि िी, मृत् युक पुनरुतन आ जीवन सेह्, हमित सभ केँ अपन िहस सभ केँ पिति किबतक अनुमथत थदअ, जे हम सभ मिातक बतद दे खाहँ , जे अहतँ क कूसक अथि। थकरक तँ हम सभ अहतँ क नतमक शपि ाेने िी। 2 अहतँ अपन सेवक सभ केँ ओथह रुप बतत सभक पिति किबत सँ मनत कऽ दे ाहँ जे अहतँ क ईशिीय सतमर् दतित निक मे कया रेा िा। 3 जखन हमित सभ केँ अपन पूव्ज सभक संर निकक रहीिं मे , अनतिक कतिी मे ितखा रेा, तखन अितनक सूय्क िं र स्नतक िं रक रप मे आथब रेा आ रकटत पयत् प बैरनी िं रक इज्त ओथह यतन केँ ि्शन केाक। 4 रथह बतत पि सभ मनुष् यक थपतत आदम सभ कुा-थपतत आ भथवषवयत सभक संर हथष्त भऽ कहाथिन, “ओ इज्त अनन इज्तक ििथयतत अथि, जे हमित सभ केँ अनन इज्त मे उततिबतक पथतजत कयाथन अथि।” 5 तखन यशतयतह पवक् तत थिथियत कऽ कहाथिन, “हम जखन पृि् वी पि जीथवत िही तखन हमि भथवषवतणीक अनुसति थपतत आ पिमेश् विक पुतक इज्त अथि।” 6 जबूा्न दे श आ यिदनक ओथह पतिक नेफताीम दे श, जे अनति मे िाैत िा, रकटत पैघ इज्त दे खाक। आ मृतुक ितयतक केत मे िहथनहति ाेा इज्त उिा अथि। आब ओ आथब रेातह, आ हमित सभ केँ जे मृतु मे बैसा िा, ओकित पबुद क’ दे ाथन। 7 जखन हम सभ अपनत सभ पि िमकैत इज्त मे आनखनत िाहँ तखन हमित सभक थपतत थशम्न हमित सभक बीि आथब सभ संरथत केँ बधतई दै त कहाथिन, “पिमेश् विक पुत पभु यीशु मसीहक मथहमत कर।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
8 हम हनकत अपनत क्ित मे उिौने िही जखन मखनि मे रकटत थशशु िा आ पथवत आत् मत दतित पेरित भऽ हनकत कहथायथन आ सीकति कयाथन, 1 “अखन हमि आँ खख अहतँ क उदति केँ दे खख ाेाक अथि, जे अहतँ सभ ा्कक स्झतँ तैयति केने िी, जे रकटत इज्त अथि जे रैि-यहदी सभ केँ आ अहतँ क पजत इसतराक मथहमत केँ पकतथशत किबतक ाेा तैयति कया रेा अथि।” 9 निकक रही ंि मे िहथनहति सभ पथवत ा्क सभ ई बतत सुथन कऽ आि आनखनत भऽ रेातह। 10 तकि बतद रकटत ि्ट सननतसी जकतँ थनकाा आ सभ र्टे पुिाथिन, “अहतँ के िी?” 11 ओ उति दे ाथिन, “हम जंरा मे कतनय बात यूहन् नत बपथतस् मत दे थनहति आ पिमेश् विक पवक् ततक आवतज िी, जे हनकि आरमन सँ पथहने अपन बतट तैयति किबतक ाेा रेा िातह आ पतपक कमतक ाेा अपन ा्क केँ उदतिक जतन दे बतक ाेा रेा िातह।” 12 हम यूहन् नत, जखन हम यीशु केँ पथवत आत् मत सँ पेरित भऽ हमित ार अबैत दे खाहँ तँ हम कहथायथन, “दे खू, पिमेश् विक मेमनत िथि, जे संसतिक पतप सभ केँ दू ि किै त िथि।” 13 हम हनकत यिदन नदी मे बपथतस् मत दे थायथन आ पथवत आत् मत कबूतिक रप मे हनकत पि उतिै त दे खाहँ आ स् वर् सँ रकटत आवतज सुनाहँ जे ई हमि थपय पुत िथि, थजनकत पि हम पसर िी।” 14 आब जखन हम हनकत सँ पथहने जत िहा िाहँ तखन अहतँ सभ केँ ई बुझेबतक ाेा रतय उतिाहँ जे पिमेश् विक पुत अथरात बेि हमित सभ ार आथब जेततह आ ऊपि सँ थदनक वसंत जकतँ हमित सभ ार आथब जेततह, जे अनति आ मृतुक ितयत मे िी। अध तय 14 1 हमि सभक थपतत आदम जखन ई बतत सुनाथन जे यीशु यिदन मे बपथतस् मत ाेने िथि, तखन ओ अपन पुत सेत केँ पुकतरि कऽ कहाथिन। 2 जखन हम अहतँ केँ जरतक फतटक पि पिौने िही तखन अहतँ अपन पुत सभ, कुापथत आ पवक् तत सभ केँ, जे सभ बतत सुनाहँ , से सुनाहँ , जखन हम अहतँ केँ जरतक फतटक पि पिौने िही, जतथह सँ पिमेश् वि सँ थवनती कया जतय जे जखन हम बीमति िहब तखन ओ हमि मति पि अथभषेक किथि। 3 तखन सेि, कुापथत आ भथवषवयत सभक ार आथब कहाथिन, “हम सेत, जखन हम जरतक फतटक पि पिमेश् वि सँ पति्नत कऽ िहा िाहँ , तखन पभुक स् वर्दूत केँ दे खाहँ , मतइका हमित पकट भऽ कऽ कहब जे, “हमित पभुक थदस सँ अहतँ ार पितओा रेा अथि।” हमित मतनव शिीिक अधकतत किबतक ाेा थनयुय कया रेा अथि। 4 हम अहतँ केँ सेत कहै त िी जे, पिमेश् वि सँ न्ि कऽ कऽ पति्नत नथह कर आ दयतक रतिक तेा ाेा हनकत सँ थवनती कर, जतथह सँ अहतँ क थपतत आदम केँ मति दद् क ाेा अथभषेक कया जतय। 5 थकरक तँ अहतँ रकित अंथतम थदन आ समय धरि क्न् तिहे ँ नथह पतथब सकैत िी, जतबत धरि पतँ ि हजति पतँ ि सय वष् बीथत नथह जतयत। 6 तखन पिमेश् विक पिमेश् विक पिम दयताु पुत मसीह पृि् वी पि आथब आदमक मनुखक शिीि केँ फेि सँ जीथब ाेततह आ संरथह मृत् युक शिीि केँ जीथब ाेततह। 7 तखन ओ अपन दयतक तेा सँ हनकत पि थवश् वतस कियवात सभ केँ अथभषेक किततह। आ ओकि दयतक तेा आरतमी पी़ी धरि िहत, जे पतथन आ पथवत आतत सँ अनन जीवनक ाेा जन ाेत। 8 जखन ओथह समय पिमेश् विक पिमेश् विक पिम दयताु पुत मसीह यीशु पृि् वी पि उतिततह तँ ओ हमित सभक थपतत आदम केँ दयतक रति मे जरत मे पवेश किौततह। 9 जखन सभ कुापथत आ पवक् तत सभ सेत सँ ई सभ बतत सुथन कऽ ओ सभ बेसी आनखनत भऽ रेातह। अध तय 15 1 जखन सभ पथवत ा्क सभ हथष्त भऽ िहा िातह तखन दे खू, शैततन, जे मृतुक ितजकुमति आ सेनतपथत िथि, निकक ितजकुमति केँ कहाथिन।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
2 सयं नतसित थनवतसी यीशु केँ गहण किबतक ाेा तैयति िह, जे घमंड किै त िातह जे ओ पिमेश् विक पुत िथि, मुदत ओ मृत् यु सँ डिै त िातह आ कहाथन जे, “हमि पतण मृत् यु धरि दु खी अथि।” 3 रकि अथतरिय ओ हमित आओि बहत् ा्क केँ बहत ि्ट पहँ िौाथन। कतिण, जकित हम आनि आ ांऱत केाहँ आ ओकित सभ केँ कतेक् शैततन सँ सततबैत िाहँ , ओ अपन विन सँ िीक क’ दे ाथन। हँ , आ जकित हम त्ित ार मृतक अनने िी, ओकित सभ केँ ओ जबिदसी त्ित सँ िीन ाैत अथि।” 4 रथह बतत पि निकक ितजकुमति शैततन केँ उति दे ाथिन, “ओ रतेक शखयशताी ितजकुमति के अथि, मुदत मृतु सँ डिय बात आदमी के अथि?” 5 पृि् वीक सभ सतमि्् य हमि सतमि्् यक अधीन अथि, जकित अहतँ अपन सतमि्् य दतित वश मे अनाहँ । 6 मुदत जँ अपन मतनवीय सभतव मे रतेक शखयशताी िथि तँ हम अहतँ केँ सततः पुथष किै त िी जे ओ अपन ईशिीय सभतव मे सव्शखयमतन िथि, आ हनकि सतमर्क थवि्ध केओ नथह क’ सकैत अथि। 7 जखन ओ कहाथिन जे मृत् यु सँ डिै त अथि, तँ ओ अहतँ केँ फँसतबऽ ाेा य्जनत बनौाथन। 8 तखन शैततन उति दऽ कऽ निकक ितजकुमति केँ कहाथिन, “अहतँ थकरक शंकत वय केाहँ आ नतसितक यीशु केँ, अहतँ क आ हमि शतु केँ गहण किबत मे थकरक डिै त िाहँ ? 9 हम हनकत पिीकत दे थायथन आ अपन बू़-पुितन यहदी सभ केँ हनकत पि उतुकतत आ क्ध सँ भ़कत दे थायथन? 10 हम हनकि कषक ाेा भतात तेज कऽ दे थायथन। हम थपत आ थसिकत थमात क' आजत दे थायथन जे ओ रकित पीबथि। हम ओकित कूस पि ि़े बतक ाेा कूस तैयति केाहँ , आ आइथबसक हति-पैि मे िे द किबतक ाेा कीा; आब ओकि मृतु नजदीक आथब रेा िै क, हम ओकित रतय आथन दे ब, त्हि आ हमित दु नूक अधीन।” 11 तखन निकक ितजकुमति उति दे ाथिन, “अहतँ हमित रखनथह कहाहँ जे ओ हमित सँ मृत् यु केँ जबिदसी िीथन ाेाक।” 12 जतबत धरि ओ सभ पृि् वी पि फेि सँ जीथवत नथह भऽ जतयत, ततबत धरि रतऽ ितखा रेा िा, ओकित सभ केँ अपन सतमि्् य सँ नथह, बा् थक पिमेश् वि सँ कया रेा पति्नतक कतिणे ँ रथह ितम सँ ाऽ रेा रेा। 13 तखन ओ नतसितक यीशु के िथि जे अपन विन दतित पिमेश् वि सँ थबनत पति्नत केने मृत् यु केँ हमित सँ दू ि कऽ दे ाथन? 14 शतयद वैह अथि जे ातजि केँ ितरि थदनक मृत् युक बतद हमित सँ िीन ाेाक आ दु र्न आ स़ा दु नू िा, आ थजनकत मे हमित मृतक रप मे समथत िा, तइय् ओ ओकित अपन सतमर् सँ फेि सँ जीथवत कऽ ाेाक। 15 शैततन उति दे ाथिन, निकक ितजकुमति केँ उति दे ाथिन, “ई वैह वखय िथि, नतसितक यीशु।” 16 ई बतत सुथन निकक ितजकुमति हनकत कहाथिन, “हम अहतँ केँ शपि दै त िी जे अहतँ क आ हमित अथधकति मे अथि जे अहतँ हनकत हमित ार नथह आथन थदअ।” 17 जखन हम हनकि विनक सतमर्क बतत सुनाहँ तँ हम डि सँ कतँ थप रेाहँ आ हमि सभ अधम् दा रकथह संर पिे शतन भऽ रेा। 18 हम सभ ातजि केँ ि्थक नथह सकाहँ , मुदत ओ अपनत केँ थहात दे ाक आ दु भत् वनतक सभ ाकणक संर ओ तुिन हमित सभ सँ दू ि भऽ रेा। आ जथह धिती मे ातजिक मृत् युक शव ितखा िा, से हनकत जीथवत कऽ दे ाकथन। 19 आब हम जनैत िी जे ओ सव्शखयमतन पिमेश् वि िथि जे रहन कतज कऽ सकैत िातह, जे अपन पभुभ मे पितकमी िथि आ अपन मतनवीय सभतव मे पितकमी िथि, जे मनुष् यक उदतिकतत् िथि। 20 ते ँ रथह वखय केँ रतऽ नथह आनू, थकरक तँ ओ सभ ा्क सभ केँ मुय कऽ दे त जकित हम अथवशतस मे जेा मे ितखख िहा िी आ ओकि पतपक बे़ी सँ बतना अथि आ ओकित सभ केँ अनन जीवन मे पहँ ित दे तैक।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
अध तय 16 1 जखन शैततन आ निकक ितजकुमति रक द्सित सँ रथह तिहक बतत कऽ िहा िातह तखन अितनक रिज आ हवतक झ्ंक जकतँ आवतज आया जे, “हे ितजकुमति सभ, अपन फतटक उितउ। हे अनन फतटक, अहतँ सभ उथि जतउ, आ मथहमतक ितजत भीति आथब जेततह। 2 निकक ितजकुमति ई बतत सुथन शैततन केँ कहाथिन, “हमित सँ हथट जतउ आ हमि आवतस सँ थवदत भ’ जतउ। जँ अहतँ शखयशताी य्दत िी तँ मथहमतक ितजतसँ ा़ू। मुदत त्ित ओकित सँ की ाेनत-दे नत अथि? 3 ओ ओकित अपन आवतस सँ बतहि फेथक दे ाक। 4 तखन ितजकुमति अपन अधम् अफसि सभ केँ कहाथिन, “कूिततक पीता केि फतटक सभ केँ बर कऽ ा्हतक सातख सँ तेज कर आ सतहसपूव्क ा़ू, जतथह सँ हम सभ बंदी नथह बथन जतयब।” 5 मुदत पथवत ा्कक समस दा ई बतत सुथन कऽ ओ सभ क्धक आवतज मे निकक ितजकुमति सँ बतजा। 6 अपन फतटक ख्ाू जतथह सँ मथहमतक ितजत पवेश किथि। 7 ईशिीय भथवषवयत दतऊद थिथियत उिातह, “की हम पृि् वी पि िहात पि सत् य भथवषवतणी नथह केने िही आ कहने िही जे, “हे ा्क पभुक भातई आ मनुष् यक सन् ततनक पथत हनकि अद् भुत कतजक ाेा सुथत किथि।” 8 ओ पीताक फतटक त्थ़ कऽ ा्हतक सातख सभकेँ कतथट कऽ कतथट दे ाक। ओ हनकत सभक अधम्क कतिणे ँ पकथ़ ाेाथन आ अधम्क कतिणे ँ ओ सभ दु ःखखत िथि। 9 रकि बतद रकटत आओि भथवषवयत अित् त पथवत यशतयतह सभ पथवत ा्क सभ सँ रथह तिहे ँ कहाथन जे, की हम पृि् वी पि जीबैत कता अहतँ सभ केँ िीक-िीक भथवषवतणी नथह केने िही? 10 मृत् यु सभ जीथवत िहत, जे सभ अपन कब मे अथि, ओ सभ जीथब उित आ पृि् वी पि जे अथि से सभ आनखनत ह्यत। कतिण, जे ओस पभुक थदस सँ आया अथि, से ओकित सभ केँ मुखय दे तैक।” 11 हम द्सि ितम कहथायथन, “हे मृतु, अहतँ क थवजय कतय अथि?” हे मृतु, अहतँ क डं क कतय अथि? 12 सभ पथवत ा्क यशतयतहक ई बतत सुथन कऽ निकक मुखखयत केँ कहाथिन, “अपन फतटक ख्था कऽ ा्हतक सातख सभ केँ हटत थदयौक। थकरक तँ अहतँ आब बतना िहब आ अहतँ क क्न् अथधकति नथह।” 13 तखन रिजबतक आवतज जकतँ रकटत पैघ आवतज भेा जे, “हे ितजकुमति सभ, अपन फतटक उितउ। हे निकक फतटक, अहतँ सभ उथि जतउ, आ मथहमतक ितजत भीति पवेश किततह। 14 निकक ितजकुमति रकथह आवतज केँ द्हि-बति बतजा बुथझ थिथियत उिा जेनत ओ अजतनी ह्, “ओ मथहमतक ितजत के अथि?” 15 दतऊद निकक मुखखयत केँ उति दे ाथिन, “हम ओथह आवतजक बतत बुझैत िी, थकरक तँ हम हनकि आत् मत सँ कहाहँ ।” आब, जेनत हम ऊपि कहने िी, हम अहतँ केँ कहै त िी, पभु बावतन आ शखयशताी, युद मे पितकमी पभु। 16 ओ कैदी सभक कुहिब सुनबतक ाेा आ मृतुक ाेा थनधत् रित ा्क सभ केँ ि़्बतक ाेा नीितँ तकाथन। 17 आब, हे रंदत आ दु र्खनत निकक ितजकुमति, अपन फतटक ख्ाू जतथह सँ मथहमतक ितजत पवेश किथि। थकरक तँ ओ स् वर् आ पृि् वीक पभु िथि। 18 दतऊद ई बतत कथह िहा िातह तखन पितकमी पभु मनुखक रप मे पकट भेातह आ ओथह यतन सभ केँ पबुद कयाथन जे पथहने अनति मे िा। 19 ओथह बे़ी सभ केँ त्थ़ दे ाक जे पथहने नथह त़्ा जत सकैत िा। आ अपन अजेय शखयक संर अधम्क कतिणे ँ रही ंि अनति मे तृप िहथनहति सभ ार आथब रेातह, आ पतपक कतिणे ँ मृतुक ितयत। अध तय 17 1 अधम् मृतु आ ओकि कूि अथधकतिी सभ ई बतत सुथन अपन अनेक ितज मे भय मे पथ़ रेातह, जखन ओ सभ इज्तक सषतत दे खख रेातह। 2 मसीह सयं हनकत सभक आवतस मे अितनक पकट भऽ रेातह। ओ सभ थिथियत कऽ कहाथिन, “हमित सभ अहतँ सँ बतना िी। अहतँ पभुक समक हमित सभक भमक अथभपतय किै त बुझतइत िी।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
3 अहतँ के िी, जकित मे भषततक क्न् थनशतनी नथह अथि, मुदत ओ उजा रप जे अहतँ क महतनततक पूण् पमतण अथि, जकित अहतँ रखन धरि क्न् धतन नथह दै त बुझतइत िी? 4 अहतँ के िी, रतेक शखयशताी आ रतेक कमज्ि, रतेक पैघ आ रतेक ि्ट, रकटत नीि आ तइय् पथहा शेणीक थसपतही, जे रकटत आम थसपतही जकतँ नौकिक रप मे आजत दऽ सकैत अथि? 5 मथहमत के ितजत, मृत आ जीथवत, यदथप रक बेि कूस पि मतिा रेा िा? 6 के कब मे मृत प़ा अथि आ हमित सभ ार जीथवत आथब रेा अथि, आ अहतँ क मृतु मे सभ पतणी कतँ थप रेा आ सभ ततित थहा रेा, आ आब अहतँ मृतकक बीि मे अपन सतंततत पतथब रेा िी आ हमित सभक सेनत केँ उपदव दै त िी? 7 अहतँ के िी, जे आद पतपक जंजीि मे बतना कैदी सभ केँ ि्थ़ कऽ ओकित सभ केँ पूव् सतंततत मे अनैत िी 8 अहतँ के िी, जे पतपक अनति मे आनि भऽ रेा ा्क सभ पि रतेक रौिवशताी आ ईशिीय पकतश पसतरि दे ाहँ ? 9 ओथह तिहे ँ सभ दु ष् टतत् मत सभक सेनत सभ सेह् ओथहनत भयतवहतत सँ पकथ़ ाेाक आ बहत आजतकतिी भय सँ थिथियत उिा आ कहाक। 10 हे यीशु मसीह, अहतँ रतेक शखयशताी आ मथहमतवतन आदमी िी, जे क्न् दतर नथह अथि, आ रतेक शुद जे क्न् अपितध नथह अथि? कतिण, पृथीक ओ थनिात संसति, जे रखन धरि हमित सभक अधीन िा, आ जतय सँ हमित सभ केँ कि भेटैत िा, हमित सभ केँ पथहने कथहय् रहन मृतक नथह पिौाक, कथहय् निकक ितजकुमति सभ केँ रथह तिहक उपहति नथह पिौाक। 11 ते ँ अहतँ के िी, जे रतेक सतहस सँ हमित सभक थनवतस मे पवेश किै त िी आ हमित सभ केँ पैघ-पैघ दं डक धमकी दे बत मे नथह डिै त िी, बख् आन सभ ा्क केँ ओथह जंजीि सँ बितबय के पयतस सेह् किै त िी, जतथह मे हम सभ ओकित पक़ने िी? 12 शतयद अहतँ ओ यीशु िी, थजनकि बतिे मे शैततन रखनथह हमित सभक ितजकुमति सँ बतजा िा जे कूस पि मिात सँ अहतँ केँ मृतुक शखय भेटय बात िा। 13 तखन मथहमतक ितजत मृतु केँ िौंदैत निकक ितजकुमति केँ पकथ़ ाेाक, ओकि सभटत शखय सँ वंथित कयाक आ हमित सभक पतथि्व थपतत आदम केँ अपन मथहमत मे अपनत संर ाऽ रेा। अध तय 18 1 तखन निकक ितजकुमति शैततन केँ पकथ़ ाेाक आ बहत संकेत दै त ओकित कहाक, “हे थवनतशक ितजकुमति, बेाजबूबक पितजय आ थनवत् सनक ाेखक, पिमेश् विक स् वर्दूत सभक थतिसति आ सभ धम् ा्कक घृणत! अहतँ केँ रथह तिहे ँ कतज किबतक ाेा की पवृत केाक? 2 अहतँ मथहमतक ितजत केँ कूस पि ि़तबय ितहै त िाहँ , आ हनकि थवनतश दतित हमित सभ केँ बहत पैघ ातभक पथतजत कया रेा अथि, मुदत मूख् जकतँ अहतँ रथह बतत सँ अनथभज िा। 3 आब दे खू जे नतसितक यीशु अपन रौिवशताी ईशिीयततक िमक सँ अनति आ मृतुक सभ भयतवह शखय केँ भरत दै त िथि। 4 ओ हमित सभक जेा सभ केँ ऊपि सँ नीितँ त्थ़ दे ाथन, सभ बंदी केँ थवदत कऽ दे ाथन, बतना सभ केँ ि्थ़ दे ाथन, आ जे सभ पथहने अपन यततनतक भति सँ कुहिबतक आदथत िा, आब हमित सभक अपमतन कया रेा अथि, आ हम सभ हनकत सभक पति्नत सँ पितथजत ह्यब जकतँ िी। 5 हमित सभक अधम्क पभुभ वश मे भ’ रेा अथि, आ आब मनुकक क्न् भतर हमित सभक अधीन मे नथह िथह रेा अथि, मुदत द्सि थदस, ई सभ हमित सभक थनभ्कततपूव्क अवहे ानत किै त अथि। 6 यदथप, पथहने, मृतक हमित सभक पथत अनतदिपूण् ववहतिक सतहस कथहय् नथह किै त िा, आ ने कैदी हे बतक कतिणे, कथहय् क्न् अवसि पि मस भ’ सकैत िा।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
7 हे शैततन, हे सभ दु षक ितजकुमति, अधम् आ परितयक थपतत, अहतँ रथह श्षणक पयतस थकरक किब, ई दे खैत जे हमित सभक कैदी सभ रखन धरि सथदखन उदति आ जीवनक कम सँ कम आशतक अभतव मे िहै त िा? 8 मुदत आब हनकत सभ मे सँ थकय् कथहय् कुहिै त नथह अथि आ ने ककि् मुँह पि कथनक् न्ि दे खतइ प़ै त अथि। 9 हे ितजकुमति शैततन, हे निकीय केतक महतन िकक, थनथषद रति सँ जे ातभ पतप केाहँ , आ सर्क हतथन, से आब कूसक ाक़ी सँ रमत ाेाहँ ; 10 जखन अहतँ मथहमतक ितजत यीशु मसीह केँ कूस पि ि़त दे ाहँ तखन अहतँ क सभ सुख समतप भऽ रेा। 11 अहतँ अपन आ हमि थहतक थवरद कतज केाहँ , जेनत अहतँ रखन ओथह पैघ यततनत आ अनंत दण सँ बुझब जे अहतँ भ्रय बात िी। 12 हे शैततन, सभ दु षततक ितजकुमति, मृतुक कतत् आ सभ घमंडक स्त, अहतँ केँ पथहने नतसितक यीशुक दु ष अपितधक थवषय मे पूितति किबतक ितही िा, तखन अहतँ केँ पतत िथातय जे ओ क्न् द्षी नथह िा जे मृतुक य्ग नथह अथि। 13 अहतँ ओकित कूस पि ि़तबय के सतहस थकरक केाहँ आ ने क्न् कतिण वत नतय केाहँ आ हमित सभक केत मे रकटत थनद्ष आ धम् वखय केँ उततिाहँ आ रथह तिहे ँ समस संसतिक सभ पतपी, अधम् आ अधम् ा्क केँ रमत दे ाहँ ? 14 जखन निकक ितजकुमति शैततन सँ रथह तिहे ँ बतथज िहा िातह तखन मथहमतक ितजत निकक ितजकुमति बेाजबूब केँ कहाथिन, शैततन, आदम आ ओकि धम् पुत सभक क्िाी मे, जे हमि अथि, ओ ितजकुमति सदतक ाेा अहतँ क पभुभक अधीन िहत। अध तय 19 1 तखन यीशु हति ब़त कऽ कहाथिन, “हे हमि सभ संत, जे हमि पथतरप मे सृथजत भेाहँ , जे थनथषद फाक रति आ शैततन आ मृतुक कतिणे ँ द्षी िहितओा रेा िी, हमित ार आथब जतउ। 2 आब हमि कूसक ाक़ीक कतत मे िह। रथह संसतिक ितजकुमति शैततन पि थवजय पतथब रेा अथि आ मृतु पि थवजय पतप कया रेा अथि | 3 तखने सभ पथवत ा्क सभ पिमेश् वि पिमेश् विक हति मे रक संर भऽ रेातह। पभु यीशु आदमक हति पकथ़ कऽ कहाथिन, “अहतँ आ अहतँ क सभ धम् संततन जे हमि अथि, शतखन ह्।” 4 तखन आदम यीशुक परि पि पथ़ कऽ न्ि कऽ कऽ थवनम भतषत आ ज्ि-ज्ि सँ हनकत सम्थधत कयाथन। 5 हे पभु, हम अहतँ क पशंसत किब, थकरक तँ अहतँ हमित ऊपि उिौाहँ आ हमि शतु सभ केँ हमित पि आनखनत नथह केाहँ । हे पभु हमि पिमेश् वि, हम अहतँ सँ पुकतिाहँ आ अहतँ हमित िीक कऽ दे ाहँ । 6 हे पभु, अहतँ हमि पतण केँ थितत सँ उततिाहँ । अहतँ हमित जीथवत ितखख दे ाहँ जे हम रडत मे नथह उतिब। 7 हे हनकि सभ पथवत ा्क, पभुक ाेा रतउ, आ हनकि पथवतततक सिण मे धनवतद थदअ। कतिण, ओकि क्ध कण भरि ाेा थटकैत िै क। ओकि पक मे जीवन िै क। 8 तथहनत सभ पथवत ा्क सभ यीशुक ििण मे पणतम कर रकथह सि मे बजातह, “हे संसतिक मुखयदततत, अहतँ आथब रेा िी, आ सभ थकिु पूित कऽ दे ाहँ जे अहतँ धम्-थनयम आ अपन पथवत पवक् तत सभक दतित कया रेा िा।” 9 अहतँ अपन कूस दतित जीथवत ा्क सभ केँ मुय कऽ दे ाहँ आ हमित सभ ार उतरि रेा िी, जतथह सँ कूसक मृतु दतित अहतँ हमित सभ केँ निक सँ मुय कऽ सकब आ अपन सतमि्् य सँ मृतु सँ मुय कऽ सकब। 10 हे पभु, जेनत अहतँ अपन मथहमतक झंडत केँ स् वर् मे ितखख दे ाहँ आ अपन म्कक थिन, अित् त् अपन कूस केँ पृि् वी पि ितखख दे ाहँ । ते,ँ पभु, अपन कूसक थवजयक थनशतनी निक मे ितखू, जतथह सँ मृतु आब थमथनओन नथह क' सकैत अथि। 11 तखन पिमेश् वि अपन हति ब़त कऽ आदम आ ओकि सभ पथवत ा्क पि कूसक थनशतनी बनौाथन।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
12 आदम केँ ओकि दथहनत हति सँ पकथ़ कऽ ओ निक सँ िथा रेातह आ पिमेश् विक सभ पथवत ा्क हनकत पतितँ -पतितँ िथा रेातह। 13 तखन ितजकीय भथवषवयत दतऊद थनभ्कततपूव्क थिथियत कऽ कहाथिन, 1 “हे पभु केँ रकटत नव रीत रतउ, थकरक तँ ओ अद् भुत कतज कयाथन। ओकि दथहनत हति आ ओकि पथवत बतँ थह ओकित थवजय पतप केाकैक। 14 पिमेश् वि अपन उदतिक बतत जनौाथन, अपन धतथम्कतत केँ अनजतन सभक समक मे खुथा कऽ दे खौाथन। 15 पथवत ा्क सभक भी़ उति दे ाथिन, “ओकि सभ संत केँ ई आदि अथि, “आमीन, पभुक सुथत कर।” 16 तकि बतद हबकूक पवक् तत 3 थिथियत कऽ कहाथिन, “अहतँ अपन ा्कक उदतिक ाेा थनकााहँ ।” 17 सभ पथवत ा्क कहाथिन, 4 “धन अथि जे पभुक नतम सँ अबैत अथि। थकरक तँ पभु हमित सभ केँ पबुद कयाथन अथि। ई हमि सभक पिमेश् वि िथि, अनन कता धरि। ओ हमित सभ पि अनन युर धरि ितज कित, आमीन। 18 रथह तिहे ँ सभ पवक् तत सभ हनकि सुथतक पथवत बतत सभ कहै त िातह आ पभुक पतितँ ातथर रेातह। अध तय 20 1 तखन पभु आदम केँ हति पकथ़ कऽ महतसर्दूत मतइका केँ सौंप दे ाथिन। दयत आ मथहमत सँ भिा जरत मे ाऽ रेातह। 2 दू र्टे बहत पतिीन ा्क हनकत सभ सँ भेट कयाथन आ पथवत ा्क सभ पुिाथिन, “अहतँ सभ के िी जे रखन धरि हमित सभक संर निक मे नथह रेा िी आ अहतँ सभक ातस जरत मे ितखख दे ा रेा अथि?” 3 हनकत सभ मे सँ रक र्टे उति दे ाथिन, “हम हन्क िी, जे पिमेश् विक विन दतित अनुवतद कया रेा अथि। 4 हम सभ रखन धरि रतय िाहँ , आ मृतुक सतद नथह ाेने िी, मुदत आब मसीह थवि्धीक आरमन पि ईशिीय संकेत आ िमतति सँ ाैस भ’ क’ वतपस आबय बात िी, हनकत संर युद मे ातरय ाेा, आ यरशाेम मे हनकत दतित मतिा जेबतक ाेा, आ सत़े तीन थदनक बतद फेि मेघ मे जीथवत ाऽ जतयब। 5 पथवत हन्क आ रथायतह जखन ई बतत सुनत िहा िातह तखन दे खू, रकटत आओि आदमी रकटत दयनीय आकृथत मे कूसक थिन अपन कतन पि ा’ क’ आया िा। 6 सभ पथवत ा्क हनकत दे खख पुिाथिन, “अहतँ के िी?” थकरक तँ त्हि मुँह ि्ि जकतँ अथि। आ कतन पि कूस थकरक उिबैत िी? 7 यीशु उति दे ाथिन, “अहतँ सभ िीके कहै त िी, थकरक तँ हम रकटत ि्ि िाहँ जे पृि् वी पि सभ तिहक दु ष् टतत कऽ िहा िाहँ ।” 8 यहदी सभ हमित यीशुक संर कूस पि ि़त दे ाक। आ हम पभु यीशु के कूस पि ि़तबै के समय सृथष मे जे आशय्जनक घटनत घटाै, ओकित दे खै िे थायै। 9 हम हनकत सभ वसुक सृथषकतत् आ सव्शखयमतन ितजत मतनैत िाहँ । हम हनकत सँ पति्नत किै त कहथायथन, “पभु, जखन अहतँ अपन ितज मे आथब जतयब तखन हमित म्न पत़ू।” 10 ओ तुिन हमि थवनती दे खख हमित कहाथिन, “हम अहतँ केँ सते कहै त िी जे आइ अहतँ हमित संर सर् मे िहब।” 11 ओ हमित कूसक ई थनशतनी दे ाथन जे, “ई ाऽ कऽ जरत जतउ। आ जँ जरतक पहिे दति स् वर्दूत अहतँ केँ पवेश नथह दे त तँ ओकित कूसक थनशतनी दे खत थदयौक आ ओकित कथह थदयौक जे आब कूस पि ि़तओा रेा यीशु मसीह हमित रतय अहतँ क ार पिौाथन। 12 जखन हम ई सभ बतत कऽ कऽ जरतक पहिे दति स् वर्दूत केँ ई सभ बतत कहथायथन आ ओ सुथन कऽ दिबजत ख्था कऽ हमित परििय किौाथन आ हमित जरत मे दथहनत कतत ितखख दे ाथन। 13 ओ कहाथन, “कथन कता रतऽ िह जतबत धरि सभ मनुष् यक थपतत आदम अपन सभ पुत सभक संर पवेश नथह किततह, जे यीशु मसीहक पथवत आ धतथम्क सेवक िथि, जे कूस पि ि़तओा रेा िातह।”
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
14 जखन ओ सभ ि्ि सँ ई सभ बतत सुनाथन तँ सभ कुापथत सभ रकथह सि मे बजातह, “हे सव्शखयमतन पिमेश् वि, अनन भातईक थपतत आ दयतक थपतत, अहतँ धन ह्उ, जे हनकत थवरद पतपी सभ पि रहन अनुगह कयाथन आ हनकत सभ केँ सर्क दयत मे अनाहँ आ हनकत सभ केँ अहतँ क पैघ आ आधतखतक भ्जनक बीि मे ितखख दे ाहँ आधतखतक रवं पथवत जीवन। आमीन। अध तय 21 1 ई सभ थदव आ पथवत िहस अथि जे हम सभ दे खाहँ आ सुनाहँ । हमित, ितरिनस आ ाेखनयस के भरवतन के अन िहस के घ्षणत किय के अनुमथत नै अथि, जेनत थक महतदू त मतइका हमित सब के आदे श दे ने िातह, 2 “अहतँ सभ हमि भतय सभक संर यरशाेम जतयब आ यीशु मसीहक पुनरुतनक घ्षणत आ मथहमत किै त पति्नत मे िहब, थकरक तँ ओ अहतँ सभ केँ अपनत संर मृत् यु मे सँ जीथब ाेने िथि।” 3 अहतँ सभ ककि् सँ रप नथह कर, बा् थक रूंरत बथन कऽ बैसब जतबत धरि ओ समय नथह आओत जखन पभु अहतँ सभ केँ अपन ईशिीयततक िहस सभ केँ कहबतक अनुमथत नथह दे ततह। 4 महतसर्दूत मतइका हमित सभ केँ आजत दे ाथन जे हम सभ यिदन नदीक ओथह पति, रकटत उतम आ म्ट दे श मे जतउ, जतय मसीहक पुनरुतनक पमतणक ाेा हमित सभक संर मृत् यु सँ जीथब उिा बहत् ा्क िथि। 5 थकरक तँ हमित सभ केँ मृतक सभ मे सँ मतत तीन थदनक अनुमथत अथि, जे सभ अपनत सभक मततत-थपततक संर अपन पभुक फसह मनतबऽ ाेा उिाहँ आ पभु मसीहक ाेा अपन रवतही दे बऽ ाेा उिाहँ । आ आब ककि् नजरि मे नथह आथब िहा अथि। 6 ई ओतबे अथि जतेक पिमेश् वि हमित सभ केँ अहतँ सभ सँ संबंध बनेबतक अनुमथत दे ाथन। ते ँ अहतँ सभ हनकि सुथत आ आदि कर आ पशतततप कर, तखन ओ अहतँ सभ पि दयत कित। पभु पिमेश् वि यीशु मसीह आ हमित सभक उदतिकतत् दतित अहतँ सभ केँ शतखन भेटय। आमीन, आमीन, आमीन। 7 ओ सभ ाेखन समतप कऽ कऽ दू अार-अार कतरज मे थाखातक बतद ििीन जे थाखने िातह से हरत, कैफत आ रमतथाराक हति मे दऽ दे ाथिन। 8 ाेखनयस सेह् अपन थाखा बतत थनक्दे मस आ यूसुफक हति मे दऽ दे ाथन। आ तुिन ओ सभ अथत उजि रप मे बदथा रेा आ आब नथह दे खा रेा | 9 मुदत ओ सभ जे थाखने िातह, से रकदम रकमत पतओा रेा, जतथह मे रक अकि द्सि अकि सँ कम-बेसी नथह िा। 10 जखन सभ यहदी सभ ििीन आ ाेखनयसक ई सभ आशय्िथकत संबंध सुथन रक-द्सि केँ कहाथिन, “सते ई सभ कतज पिमेश् वि दतित कया रेा अथि, आ पभु यीशु केँ अननकता धरि आशीवत् द दे ा जतय, आमीन।” 11 ओ सभ बहत थिंथतत, भय, कतँ थप कऽ घुमैत िहातह, आ सभ अपन-अपन ितती पि ि्ट किै त सभ अपनअपन घि थदस थवदत भेातह। 12 ई सभ बतत जे यहदी सभ अपन सभतघि मे यीशुक थवषय मे कहै त िातह, से सभ यूसुफ आ थनक्दे मस दतित तुिन ितजपता केँ कहा रेाथन। 13 थपाततुस रथह सभ कतज केँ थाखख कऽ ई सभटत ाेखत-ज्खत अपन हॉाक सतव्जथनक अथभाेख मे ितखख दे ाथन। अध तय 22 1 रथह बततक बतद थपाततुस यहदी सभक मन् थदि मे रेातह आ सभ शतसक आ शतसी आ धम्-थनयमक थशकतथवद सभ केँ रक ितम बजत कऽ हनकत सभक संर मन् थदिक रकटत िपाी मे रेातह। 2 सभ फतटक बंद किबतक आजत दै त हनकत सभ केँ कहाथिन, “हम सुनाहँ जे रथह मखनि मे अहतँ सभक रकटत पैघ थकततब अथि। ते ँ हम अहतँ सभ सँ ितहै त िी जे ई हमित स्झतँ आना जतय।
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यीशु मसीहक मृ त ु, दफन आ पुन रुतन
3 जखन मखनिक ितरिटत सेवक दतित ाऽ कऽ स्नत आ कीमती पतिि सँ सजा महतन पुसक आना रेा तँ थपाततुस सभ केँ कहाथिन, “हम अहतँ सभक पूव्ज सभक पिमेश् विक शपि दै त िी, जे ई मन् थदि बनौाथन आ आजत दे ाथन, जे अहतँ सभ हमित सँ सत् य नथह नुकतबी।” 4 अहतँ सभ ओथह पुसक मे थाखा सभ बतत केँ जनैत िी। ते ँ आब हमित कह जे, जँ अहतँ सभ केँ धम्शतस् त मे ओथह यीशुक क्न् बतत भेटा अथि, थजनकत अहतँ सभ कूस पि ि़त दे ाहँ आ संसतिक क्न समय मे हनकत रबतक ितही िा, से हमित दे खतउ।” 5 तखन ओ सभ हरत आ कतइफत केँ शपि दऽ कऽ आजत दे ाथिन जे ओ सभ अपनत संर िहथनहति सभ केँ िपित सँ बतहि थनकथा जतय। 6 ओ सभ मन् थदि आ िपेाक फतटक बर कऽ थपाततुस केँ कहाथिन, “हे नतयतधीश, अहतँ हमित सभ केँ रथह मन् थदिक थनमत् णक शपि दऽ दे ाहँ जे हम सभ अहतँ केँ सत् य आ उथित बतत बततबी।” 7 हम सभ यीशु केँ कूस पि ि़त दे ातक बतद ई नथह जतथन जे ओ पिमेश् विक पुत िथि, मुदत ई मतथन कऽ जे ओ अपन िमत् कति सभ क्न् जतदु ई कात दतित कयाथन, तखन हम सभ रथह मन् थदि मे रकटत पैघ सभत केँ बजौाहँ । 8 जखन हम सभ रक-द्सि मे यीशु दतित कया रेा िमतति सभक थवषय मे थविति-थवमश् कऽ िहा िाहँ तँ हमित सभ केँ अपन दे शक बहत् रवतह भेटा जे ओ सभ हनकत मिातक बतद जीथवत दे खाथन आ हनकि थशष् य सभक संर रपशप किै त सुनाथन आ आकतशक ऊँितई पि ि़ै त आ ओथह सभ मे पवेश किै त दे खाथन। 9 हम सभ दू र्ट रवतह केँ दे खाहँ , थजनकि ातश केँ यीशु मृत् यु मे सँ थजयत दे ाथन, ओ हमित सभ केँ बहत ितस थवथित कतज सभ केँ बतौाथन जे यीशु मृत् युक बीि कयाथन। 10 हमित सभक पित अथि जे पथतवष् रथह पथवत पुसक केँ सभतक समक ख्था कऽ ओतऽ पिमेश् विक सातहक ख्ज किै त िी। “ 12 हम सभ आरू स्िाहँ जे शतयद ओ इसतराक पिमेश् वि िातह जे मूसत केँ कहाथिन, “अहतँ सतकक स्दू क बनतउ।” रकि ामतई ढतई हति आ िौ़तई डे ़ हति आ ऊँितई डे ़ हति ह्यत। 13 पुितन थनयमक स्दू क थनमत् णक ाेा रथह सत़े पतँ ि हति सँ हम सभ बुझाहँ आ बुझाहँ जे सत़े पतँ ि हजति वष् (रक हजति) वष् मे यीशु मसीह क्न् शिीिक स्दू क वत तमू मे आथब जेततह। 14 हमित सभक शतस रवतही दै त अथि जे ओ पिमेश् विक पुत आ इसतराक पभु आ ितजत िथि। 15 हनकि कषक बतद हमित सभक मुख् यपुि्थहत सभ हनकत दतित कया रेा थिन् ह सभ दे खख आशय्िथकत भऽ रेातह, ते ँ हम सभ ओथह पुसक केँ ख्था कऽ यूसुफ आ यीशुक मतय मरियमक पी़ी धरिक सभ पी़ीक ख्ज कया रेाहँ । 16 हमित सभ केँ सृथषक थवविण भेटा जे ओ आकतश आ पृि् वी आ पथहा आदमी आदम केँ क्न समय मे बनौाथन आ ओतय सँ जापाय धरि दू हजति दू सय बतिह वष्क िा। 17 जापाय सँ अबतहम धरि नौ सय बतिह। अबतहम सँ मूसत धरि ितरि सय तीस। मूसत सँ ितजत दतऊद धरि पतँ ि सय दस। 18 दतऊद सँ ाऽ कऽ बेथबा्नक बंदी धरि पतँ ि सय वष्। आ बेथबा्नक बंदी सँ ा' क' मसीहक अवतति धरि, ितरि सय वष्। 19 जे सभक य्र सत़े पतँ ि हजति (रक हजति) ह्इत अथि। 20 रथह तिहे ँ ई पतीत ह्इत अथि जे यीशु थजनकत हम सभ कूस पि ि़त दे थायथन, ओ पिमेश् विक पुत यीशु मसीह िथि, आ सत् य आ सव्शखयमतन पिमेश् वि िथि। आमीन।
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