दक्षि दे बिक ईसिई प्ि दक्षि - वस, भोजन, यि पिइ जे गरीब लोक के दे ल जिइत अकि |
सुस मिचिर पत सिवधिन रह जे मनुष् यक सम् अपन कभ्ि नकि कर जिकि सँ ओ सभ दे खब। ते ँ जखन अििँ अपन कभ्ि दे ब तँ अपनि सोझिँ मे तुरिी नकि बजिउ जेनि पिखंडी सभ सभिघर आ गली-गली मे करै त अकि, जिकि सँ हनकि सभ केँ मनुष् यक मकिमि भेटय। िम अििँ सभ केँ सत् य किै त िी जे हनकि सभ केँ अपन फल भेटैत िकन। मुदि जखन अििँ कभ्ि करब तखन अििँ क बिमि ििथ केँ ई नकि बुझल जिय जे अििँ क दकिनि ििथ की करै त अकि, जिकि सँ अििँ क कभ्ि गुप रिय। मती 6:1-4 यीशु उतर दे लकथन, “ एकटि आदमी यरशलेम सँ यरीिो जि कऽ चोर सभक बीच खकस पडल, जे ओकर कपडि उतिरर कऽ घियल कऽ कऽ ओकरि आधि मृत िोकड कऽ चकल गेल।” संयोगवश एकटि पुरोकित ओकि बिट सँ उतरर गेलिि आ हनकि दे खख ओ ओकि पिर सँ गुजरर गेलिि। तकिनि एकटि लेवी ओकि ठिम पहँ चलि पर आकब कऽ हनकि कदस तकलक आ ओकि कित सँ गुजरर गेल। मुदि जखन ओ यिति करै त िलिि तखन एकटि सिमरी हनकि जतय िलिि, तखन हनकि पर दयि आकब गेलकन, आ हनकि लग जि कए हनकर घिव केँ तेल आ मकदरि ढिरर कऽ अपन जिनवर पर बैसि दे लकन आ एकटि सरिय मे लऽ गेलकन आ हनकर दे खभिल कयलकन। दोसर कदन जखन ओ कवदि भेलिि तँ दू टि पिइ कनकिकल कऽ सेनि केँ दऽ दे लकथन आ किलकथन, “ओकर दे खभिल कर। अििँ जे ककिु बेसी खच् करब तखन िम फेर आकब जियब तखन िम अििँ केँ पकतफल दे ब।” अििँ सोचैत िी जे एकि तीनू मे सँ के चोर सभक बीच खकस पडलिक पडोसी िल? ओ किलकथन, “जे ओकरि पर दयि केलक।” तखन यीशु हनकि किलकथन, “ जिउ आ अििँ सेिो एिने कर।” लूकि १०:३०-३७ मुदि जे ककिु अििँ सभ लग अकि, तिकि सँ कभ्ि कदअ। दे खू, अििँ सभक लेल सभ ककिु शुद अकि। लूकि 11:41 जे ककिु अकि से बेकच कऽ कभ्ि कदअ। अपनि लेल झोरि जे पुरिन नकि िोइत अकि, आकिश मे एकटि एिन खजिनि जे ्ीष नकि िोइत अकि, जतय चोर लग नकि अबैत अकि आ ने पतंग भ् नकि करै त अकि। किरष, जतय अििँ क खजिनि रित, ओतकि अििँ क मोन सेिो रित। लूकि 12:33-34