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Maithili - The Book of 2nd Kings

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२ राजा अध ाय 1 1 अहाबक मृत्क बाद मोआब इसाराक विरु विदोह केाक। 2 अहवजया सामररया मे अपन उपरका कोठाी मे रकटा जा​ाी मे खवस पडा​ाह आ बीमार भऽ गेा​ाह आ दू त पठा कऽ कहाविन, “जाउ, रकोनक दे िता बा​ाजबूब सँ पूवि वाअ जे की हम रवह रोग सँ ठीक भऽ जायब।” 3 म्दा परमेश् िरक स् िग्दूत वतशबी रवायाह केँ कहाविन, “उवठ कऽ सामररयाक राजाक दू त सभ सँ भेट करबाक ाेा जाउ आ हनका सभ केँ कहविन जे, “की इसारा मे कोनो परमेश् िर नवह रहबाक कारणे ँ नवह जे अहाँ सभ रकोनक दे िता बा​ाजबूब सँ पूिताि करऽ जा रहा िी?” 4 आब परमेश् िर ई कहै त िवि जे, “अहाँ जावह ओिाओन पर चढा िी, ओवह ओिाओन सँ नवह उतरब, बा् वक मरर जायब।” रवायाह चवा गेा​ाह। 5 जखन दू त सभ हनका वदस घ्रा​ाह तँ ओ हनका सभ केँ कहाविन, “अखन अहाँ सभ वकरक घ्रर गेा िी?” 6 ओ सभ हनका कहाविन, “रकटा आदमी हमरा सभ सँ भेट करय ाेा आवब कऽ हमरा सभ केँ कहाकवन, “जाउ, अहाँ सभ केँ पठे वनहार राजा ाग घ्वम कऽ कह जे , ‘परमेश् िर ई कहै त िवि, ‘की रवह ाेा नवह जे अहाँ इसारा मे कोनो परमेश् िर नवह िवि, जे अहाँ रकोनक दे िता बा​ाजबूब सँ पूिताि करबाक ाेा पठौने िी? ते ँ अहाँ जावह ओिाओन पर चढा िी तावह पर सँ नवह उतरब, बा् वक मरर जायब। 7 ओ हनका सभ केँ प्िाविन, “जे अहाँ सभ सँ भेट कर’ ाेा आवब कऽ अहाँ सभ केँ ई बात कहने िा, से केहन िा?” 8 ओ सभ हनका उतर दे ाविन, “ओ रोम-रोम बा​ा आदमी िा आ कमर मे चमडाक पटी बानने िा।” ओ कहाविन, “ई वतशबी रवायाह िवि।” 9 तखन राजा अपन पचास सैवनकक संग पचास सैवनकक सेनापवत हनका ाग पठौावन। ओ हनका ाग चवा गेा​ाह, ओ रकटा पहाडीक चोटी पर बैसा िा​ाह। ओ हनका कहाविन, “हे परमेश् िरक आदमी, राजा कहने िवि जे , “उतर।” 10 रवायाह उतर दे ाविन आ पचासक सेनापवत केँ कहाविन, “जँ हम परमेश् िरक आदमी िी तँ स् िग् सँ आवग उतरर कऽ अहाँ आ अहाँ क पचास गोटे केँ भस कऽ वदअ।” स् िग् सँ आवग उतरर ओकरा आ ओकर पचास गोटे केँ भस कऽ दे ाक। 11 फेर ओ अपन पचास सैवनकक संग रकटा आओर सेनापवत हनका ाग पठौावन। यीश् उतर दे ाविन, “हे परमेश् िरक आदमी, राजा ई कहने िवि जे, “जली उतर।” 12 रवायाह हनका सभ केँ उतर दे ाविन, “जँ हम परमेश् िरक ाोक िी तँ स् िग् सँ आवग उतरर कऽ अहाँ आ अहाँ क पचास गोटे केँ भस कऽ वदअ।” परमेश् िरक आवग स् िग् सँ उतरर कऽ हनका आ हनकर पचास गोटे केँ भस कऽ दे ाकवन। 13 ओ अपन पचास गोटे क संग तेसर पचासक सेनापवत केँ फेर पठौावन। पचास सैवनकक तेसर सेनापवत चवढ कऽ रवायाहक समक ठे हन पर खवस पडा​ाह आ हनका सँ विनती कयावन आ कहाविन, “हे परमेश् िरक आदमी, हम अहाँ सँ विनती करै त िी जे हमर पाण आ अहाँ क रवह पचास नौकर सभक पाण अहाँ क नजरर मे बहमू​ू हो।”

14 दे खू, स् िग् सँ आवग उतरर कऽ पचास िर्क द् नू सेनापवत केँ पचास िर्क संग जरा दे ाक। 15 परमेश् िरक स् िग्दूत रवायाह केँ कहाविन, “ओकरा संग उतर। ओ उवठ कऽ हनका संग राजा ाग गेा​ाह। 16 ओ हनका कहाविन, “परमेश् िर ई कहै त िवि जे , अहाँ रकोनक दे िता बा​ाजबूब सँ पूिताि करबाक ाेा दू त पठौने िी, की ई रवह ाेा नवह जे इसारा मे हनकर िचन पूिबाक ाेा कोनो परमेश् िर नवह िवि?” ते ँ अहाँ ओवह ओिाओन पर सँ नवह उतरब जावह पर अहाँ चढा िी, बा् वक मरर जायब। 17 ओ परमेश् िरक िचनक अन्सार मरर गेा​ाह जे रवायाह कहने िा​ाह। यहदा के राजा यहोशाफात के प्त यहोराम के दोसर सा​ा मे यहोराम ओकरोॅ जगह पर राज कराकै। कारण हनका कोनो बेटा नवह िावन। 18 अहवजयाहक शेर घटनाकम जे ओ केावन, की ओ इसाराक राजा सभक इवतहासक प्सक मे नवह वाखा अवि? अध ाय 2 1 जखन परमेश् िर रवायाह केँ बिंडर सँ स् िग् मे ा’ जेताह तखन रवायाह राीशाक संग वगागा​ा सँ चवा गेा​ाह। 2 रवायाह राीशा केँ कहाविन, “हम अहाँ सँ रतवह रह। वकरक तँ परमेश् िर हमरा बेतेा पठौावन अवि।” राीशा हनका कहाविन, “जेना परमेश् िर जीबैत िवि आ जवहना अहाँ क पाण जीवित िवि, हम अहाँ केँ नवह िोडब।” ते ँ ओ सभ बेिेा मे उतरर गेा​ाह। 3 बेतेा मे रहवनहार पिक् ता सभक प्त सभ राीशा ाग आवब कऽ हनका कहाविन, “की अहाँ जनैत िी जे आइ परमेश् िर अहाँ क मावाक केँ अहाँ क माि सँ िीन ाेताह?” ओ कहाविन, “हँ , हम ई बात जनैत िी। च्प रह। 4 रवायाह हनका कहाविन, “राीशा, रतय रह। वकरक तँ परमेश् िर हमरा यरीहो पठौावन अवि।” ओ कहाविन, “जेना परमेश् िर जीबैत िवि आ जेना अहाँ क पाण जीवित िवि, हम अहाँ केँ नवह िोडब।” ते ँ ओ सभ यरीहो आवब गेा​ाह। 5 यरीहो मे रहवनहार पिक् ता सभक प्त सभ राीशा ाग आवब कऽ हनका कहाविन, “की अहाँ जनैत िी जे आइ परमेश् िर अहाँ क मावाक केँ अहाँ क माि सँ िीन ाेताह?” ओ उतर दे ाविन, “हँ , हम ई बात जनैत िी। च्प रह। 6 रवायाह हनका कहाविन, “हमरा, रतवह रह। वकरक तँ परमेश् िर हमरा यरदन नगर पठा दे ावन अवि।” ओ कहाविन, “जेना परमेश् िर जीबैत िवि आ जेना अहाँ क पाण जीवित िवि, हम अहाँ केँ नवह िोडब।” आ द् नू गोटे आगू बवढ गेा​ाह। 7 पिक् ता सभक प्त सभ मे सँ पचास गोटे दू र-दू र धरर दे खबाक ाेा ठाढ भऽ गेा​ाह। 8 रवायाह अपन िस ाऽ कऽ ओकरा ापेवट कऽ पावन केँ मारर दे ाक आ द् नू रमर-ओमर बँवट गेा आ द् नू गोटे श्ष जमीन पर ओवह पार भऽ गेा। 9 जखन ओ सभ ओवह पार गेा​ाह तँ रवायाह राीशा केँ कहाविन, “हमरा अहाँ सँ हँ टबा सँ पवहने पूिू जे हम अहाँ क ाेा की करब।” राीशा कहाविन, “हमरा पर अहाँ क आत् माक द् ग्ना भाग हो।” 10 ओ कहाविन, “अहाँ कवठन बात माँ गाहँ , तिावप जँ अहाँ हमरा अहाँ सँ हँ टा​ा पर हमरा दे खब तँ अहाँ क ाेा रहन होयत। म्दा जँ से नवह तँ से नवह होयत। 11 जखन ओ सभ गप-सप करै त आगू बवढ रहा िा, तखन दे खाहँ जे आवग केर रि आ आवग केर घोडा सभ दे खा गेा आ


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