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Maithili - Psalms of Solomon

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सुलेमान के भजन परिचय अठािह युद गीतक ई संगह एकटा पाचीन सेमममटक लेखकक उपहाि मिक । मूल पाणु मलमप नष होय गेलऽ छै लेमकन सौभाग स॑ यूनानी अनुवाद सुिम्त छै , आर हाल ही म॑ वू ही गीतऽ के सीरियाई संसिक सामने ऐलऽ छै आर पमहलऽ बाि १९०९ म॑ डॉ. िे डल है रिस न॑ अंगेजी म॑ पकामात किलकै । लेखन के मतमि ईसा पूव् पिम ाताबी के मध मे सामपत होय सकै छै , कैने मक ई गीतऽ के मवषय पमेय केिऽ मिमलसीन मे किलऽ गेलऽ काम आर ४८ ईसा पूव् मे ममस मे ओकिऽ मृतु के छै ई भजन केिऽ एगो महतपूक् सान छे लै आर पािं मभक कलीमसया मे एकिऽ वापक पसाि छे लै । ईसाई युग केिऽ पमहलऽ कुछ ाताबी केिऽ मवमभन कोडे क आर इमतहासऽ मे एकिऽ अकि उलेख किलऽ जाय छै । बाद मे अवायीय कािके ँ ओ सभ हे िा गेलाह; आ कतेको ाताबीक बीतलाक बाद मात हमिा लोकमनक उपयोगक लेल बिामद भेल अमछ । एमह छं द सभक तुिही सन लय केि सामहततक मूलक अमतरिक हमिा लोकमन केँ एतय एकटा पत्दाय दािा मलखल गेल पाचीन इमतहास केँ झकझोिय बला अधाय अमछ | पोमेय पम्मसँ बाहि अबैत छमि । मकलाबंदी पि बैटरिं गिामक पयोग किै त छमि । ओकि मसपाही सभ वेदी केँ अाुद किै त अमछ। एकटा भयावह कैरियि के बाद ममस मे मािल गेल छै ि। एमह भजन सभक "धमय" मे हम सभ िरिसी सभ केँ दे खैत छी; "पापी" मे हम सभ सदु की सभ केँ दे खैत छी। ई एकटा पैघ संकट के कष मे पडल एकटा पैघ लोक के महाकाव अमछ. अध ाय 1 हम जखन मवपम् मे छलहँ तखन पभु सँ पुकािलहँ । जखन पापी सभ आकमक किै त छल तखन पिमेा् वि मदस। अचानक हमिा सोझाँ युदक अलाम् सुनबा मे आयल; हम कहमलयमन, ओ हमि बात सुनताह, कािक हम धम् सँ भिल छी। हम मोन मे सोचैत छलहँ जे हम धम् सँ भिल छी।

कािक हमि समनता नीक छल आ बचा मे धमनक भ' गेल छलहँ । हनका लोकमनक धन समस धिती मे पसिल, आ हनका सभक ममहमा पृथीक अन धरि। ओ सभ तािा धरि ऊँच कयल गेल। ओ सभ कहलक जे कमहयो पंखा नमह किब। मुदा ओ सभ अपन समृतद मे ढीठ भ गेलाह। ओ सभ बूझल नमह िहलाह। हनका लोकमनक पाप गुप छलमन, आ हमिा सेहो हनका सभक कोनो जान नमह छल। हनका लोकमनक अपिाध हनका सभ सँ पमहनेक गैि-यहदी सभक अपिाध सँ बेसी भ’ गेलमन। ओ सभ पभुक पमवत वसु सभ केँ सव्िा दू मषत कयलमन। अध ाय 2 पापी जखन घमंडी भ' गेल, तखन ओ एकटा मारि-पीडक मेढक संग गढवाली दे बाल सभ केँ खसा दे लक। आ अहाँ ओकिा नमह िोकलहँ । मवदे ाी िाष् अहाँ क वेदी पि चढल, चपलसँ गव्सँ िौंदैत िहलाह; मकएक तँ यरालेमक पुत सभ पिमेा् विक पमवत वसु सभ केँ अाुद कऽ दे ने छल। पिमेा् विक बमलदान केँ अधम् सँ अपमवत कएने छलाह। ते ँ ओ कहलमन जे , हनका सभ केँ हमिा सँ दू ि िेमक मदयौक। पिमेा् विक सम् एकिा अाुद भऽ गेल। एकि एकदम बेइजती भेल; बेटा-बेटी म गंभीि बंदी छल, सीलबंद छल हनका लोकमनक गिदमन, बां डेड छल िाष् सभक बीच। जेना हनका सभक पाप हनका सभक संग कयलमन अमछ। मकएक तँ ओ ओकिा सभ केँ जे सभ मवजयी भेल छल, ओकि हाि मे छोमड दे ने छमि। ओ हनका सभ पि दया किबा सँ मुँह घुमा दे ने छमि। छोट-बड आ ओकि बचा सभ एक संग; मकएक तँ ओ सभ एक-एकटा अधलाह काज कऽ कऽ नमह सुनलाह। आका​ा तमसा गेल। पृि् वी हनका सभ सँ घृका किै त छल। मकएक तँ ओ सभ जे काज केलमि से एमह पि केओ नमह केने छल। आ धिती सभकेँ मचनलक तोहि धम् नाय हे पिमेा् वि।


सुलेमान के भजन

ओ सभ यरालेम मे वेशा सभक बदला मे ओकिा उपहास किबाक लेल िातख दे लक। मदनक पूक् इजोत मे हि पमियाक भीति घुमस गेल। ओ सभ अपन अपिाधक उपहास किै त छलाह, जेना हनका सभक आदमत छलमन। मदनक पूक् इजोत मे ओ सभ अपन अधम् पकट कयलमन। यरालेमक बेटी सभ अहाँ क मनक्यक अनुसाि अाुद भऽ गेल। कािक जे ओ सभ अपाकृमतक संभोगसँ अपनाकेँ अाुद कएने छलाह । एमह सब बातक लेल हमिा आं त आ भीतिक अंग मे दद् होइत अमछ । आ तैयो हम अहाँ केँ धमय ठहिा दे ब, हे पिमेा् वि, सोझ हदय सँ। कािक, हे पिमेा् वि, तोहि न् याय मे तोहि धामम्कता पदमा्त अमछ। मकएक तँ अहाँ पापी सभक कम्क अनुसाि पमतिल दे लहँ । हँ, हनका सभक पापक अनुसाि, जे बहत दु ष छल। अहाँ हनका सभक पाप केँ उजागि कऽ दे लहँ जामह सँ अहाँ क न् याय पगट भऽ जाय। अहाँ हनका लोकमनक सृमत केँ धिती सँ मेटा दे लहँ । पिमेा् वि एकटा धमय नायाधीा छमि, आ ओ वतकक कोनो आदि नमह किै त छमि । मकएक तँ जामत सभ यरालेम केँ िौंदैत मनना किै त छल। ओकि सौनय् वैभवक मसंहासनसँ नीचाँ घसीटल गेल । ओ सुनि वसक बदला बोिा पमहिने छलीह, मुकुटक बदला मािक चार कात िसी छलैक । पिमेा् वि जे गौिवा​ाली मुकुट ओकिा पि लगा दे ने छलाह, से ओ उतारि दे लमिन। बेइजती मे ओकि सौनय् जमीन पि िेकल छलैक। हम दे तख पभु केँ मवनती कय कहमलयमन। बहत मदन सँ हे पभु, तोहि हाि इसाएल पि भािी पडल अमछ, जामत सभ केँ ओकिा सभ पि अनबा मे। कािक, ओ सभ कोध आ उग कोध मे अमवचलतापूव्क खेलकूद केने छमि। आ ओ सभ समाप कऽ दे त, जाबत धरि अहाँ , हे पभु, हनका सभ केँ अपन कोध मे डाँ मट नमह दे ब। मकएक तँ ओ सभ केने छमि। ई उताह मे नमह, बल् मक आत् माक वासना मे। बलाताि के दमष स हमिा सब पि अपन कोध उमझलैत। हे पिमेा् वि, हनका सभक माि पि पमतिल दे बा मे दे िी नमह कर। अजगिक घमंड केँ बेइजती मे बदलबाक लेल। आ हमिा बेसी काल इं तजाि नमह भेल जे भगवान हमिा ओ ढीठ दे खा दे लमि ममस के पहाड पि मािल गेल, कम सँ कम महसाब-मकताबक मानब, जमीन आ समुद पि; ओकि दे ह सेहो, लहि पि एमि-ओमि बहल, बहत ढीठपन सँ, ओकिा गाडय बला केओ नमह छलैक, कािक ओ ओकिा बेइजती सँ असीकाि क' दे ने छलैक।

ओ मनन केलक जे ओ मनुक अमछ, आ बादक छोि पि नमह मचंतन; ओ कहलमन: हम भूमम आ समुदक सामी िहब। आ ओ ई नमह मचनलमन जे भगवाने महान छमि, अपन महान ातक मे पिाकमी। ओ आका​ाक िाजा छमि, आ िाजा आ िाजक नाय किै त अमछ। ओ हमिा ममहमा मे ठाढ किै त छमि। आ घमंडी लोक केँ अपमान मे अनन मवना​ा मे उतािै त अमछ। कािक ओ सभ हनका नमह मचनै त छलाह। आब दे खू, अहाँ सभ पृि् वीक िाजकुमाि सभ, पिमेा् विक न् याय। कािक, ओ एकटा पैघ िाजा आ धमय छमि, जे स् वग्क नीचाँ क सभ मकछु क नाय किै त छमि। हे जे बुतद सँ पभुक भय मानैत छी, पिमेा् विक आाीष कर। कािक, पभुक दया ~e हनका पि जे हनका डिै त अमछ, m नाय; तामक ओ धमय आ पापी मे भेद किमि, पापी सभक कम्क अनुसाि सदाक पमतिल मदअ। धमय पि दया कर, ओकिा पापीक केा सँ मुक कर। आ पापी के जे सान किै त धमा् ा​ा के पमतिल दै त अमछ। कािक, जे धैय्पूव्क हनका पुकािै त छमि, हनका सभक लेल पभु नीक छमि। अपन पुणा​ा​ा पि अपन दयानुसाि किै त, हनका सब के सब समय हनका सब के बल मे सामपत किब। पभु केिऽ सेवकऽ के सामने सदा के लेलऽ धन होय । अध ाय 3 हे हमि पाक, अहाँ मकएक सुतल छी। आ पभुक आाीष नमह? एकटा नव गीत गाउ, सुमत योग पिमेा् वि केँ। हनकि जागिकक मवरद गाउ आ जागरक िह, मकएक तँ नीक भजन पिमेा् विक लेल पसन हदय सँ गाओल जाइत अमछ। धमा् ा​ा सब समय पभु के सिक किै त छमि, धनवाद आ पभुक नायक धामम्कताक घोषकाक संग। धमय पभुक दं ड केँ मतिसाि नमह किै त अमछ। हनकि इचा समदखन पभुक सम् िहै त छमन। धामम्क लोक ठोकि खाइत अमछ आ पभु केँ धमय मानैत अमछ। ओ खमस पडै त अमछ आ दे खैत अमछ जे पिमेा् वि ओकिा संग की किताह। ओ ताकैत अमछ जे ओकि उदाि कतय सँ आओत। धमय लोकमनक दढता हनका सभक उदािकता् पिमेा् वि मदस सँ अमछ। पाप पि धमय पापक घि मे नमह ठहिै त अमछ। धमा् ा​ा अपन घिक खोज किै त िहै त अमछ। ओकि दािा गलती सँ कयल गेल सब अधम् केँ सव्िा दू ि किबाक लेल।


सुलेमान के भजन

ओ अजानताक पापक पायम्त किै त छमि, उपवास क' क' आ अपन पाक केँ कष दै त छमिन। पभु हिे क पुणा​ा​ा आ ओकि घिाना मनद्ष मानैत छमि। पापी ठोकि खाइत अमछ आ अपन पाक केँ शाप दै त अमछ जमहया ओकि जन भेल छलैक, आ ओकि मायक पसव। ओ जीमवत िहै त पाप मे पाप जोडै त अमछ। ओ खसैत अमछ--स्े ओकि पतन दु खद अमछ--आ आब नमह उठै त अमछ। पापी के मवना​ा सदा के लेल छै , आ जखन धमय लोकक दा्न होयत तखन हनकि सिक नमह कयल जायत। ई पापी सभक भाग अमछ सदा-सदा लेल। मुदा जे सभ पभुक भय मानैत अमछ से अनन जीवन मे जीमब उठत। हनका सभक जीवन पभुक इजोत मे िहतमन आ आब समाप नमह होयत। अध ाय 4 हे अपमवत मनुष, अहाँ पुणक परिषद् मे मकएक बैसल छी। ई दे तख जे तोहि हदय पभु सँ दू ि अमछ। इसाएल के पिमेा् वि के अपिाध के साि उकसाना? वाकी मे आडं बि, बाहिी पतीत मे आडं बि सब मनुष सँ पिे , की ओ नाय मे पापी सभक मनना किबा मे कठोि वाकी किै त अमछ। ओकि हाि पमहने ओकिा पि अमछ जेना ओ उताह मे काज केने होमि। आ तैयो ओ सयं अनेक पापक आ बेहदापनक आदि मे दोषी अमछ। ओकि नजरि मबना कोनो भेदक पतेक सी पि िहै त छै क; ापि सँ संकुमचत भेला पि ओकि जीह पडल िहै त छै क। िामत मे आ गुप रप मे ओ अदश जकाँ पाप किै त अमछ। अपन आँ तख सँ ओ हिे क दु ष संमधक सी सँ गप किै त छमि | ओ हि घि मे हँ सी-खुाी सँ पवेा किबा मे तेज होइत छमि जेना मनद्ष होमि । पिमेा् वि हनका सभ केँ दू ि किमिन जे पाखंडी लोकक संगमत मे िहै त छमि। एतेक तक मक एहन के जीवन सेहो ओकि मां स आ गिीबी के भषाचाि के संग। भगवान् मनुष-मपयक कम् पकट किमि, एहन के हँ सी आ उपहासक संग कम्; जामह सँ पुणा​ा​ा सभ अपन पिमेा् विक न् याय केँ धमय मानमि। जखन पापी सभ धमय सभक सोझाँ सँ दू ि भ' जाइत छमि। ओहो मनुष्‍य-पसन किमन‍हाि जे धोखाधरि‍ मव‍मनयम बजबैत अमछ। ओकि नजरि कोनो आदमीक घि पि मटकल िहै त छै क जे एखनो सुिम्त अमछ। तामक ओहो सभ साँ प जकाँ . . . अपिाधी के वचन के साि, ओकि वचन छल छल जे ओ अपन दु ष इचा पूिा क' सकय।

ओ परिवाि सभ केँ अनाि जकाँ मछमडयाबय सँ कमहयो नमह रकैत छमि। हँ , ओ अपन अमनयममत इचाक कािके ँ घि उजामड दै त अमछ। ओ ई कमह कऽ धोखा दै त अमछ जे, “दे खमनहाि आ नाय कियवला केओ नमह अमछ।” एक घि मे अिाजकता भरि दै त अमछ, आ तखन ओकि नजरि अमगला घि पि मटकल िहै त छै क, इचा के पाँ तख दे बय वाला ाब स एकिा नष किब। तइयो एमह सब सँ ओकि आा​ा सीओल जकाँ , तृप नमह होइत छै क | हे पभु , ओकि भाग अहाँ क सामने अपमामनत होउ। कुहिै त आगू बमढ जाउ, आ ा​ामपत भ' क' घि आमब जाउ। हे पभु , ओकि जीवन विा आ अभाव आ अभाव मे बीमत जाय। ओकि नीद ं पीडासँ आ जागिक भमसँ घेिल िहय । िामत मे ओकि पलक सँ नीद ं हमट जाय; हािक हि काज मे बेइजती सँ असिल िहय। खाली हाि घि आमब अपन घि, आ ओकि घि मे ओमह सभ चीज सँ ाून िहय जामह सँ ओ अपन भूख तृप क' सकैत छल। ओकि बुढापा मनःसंतान एकाकीपन मे बीतय मदयौक जाबत धरि ओकि मृतु दािा हमट नमह जायत। मनुख-मपय लोकक मां स जंगली जानविक कािके ँ िामट जाय। आ अिाजकक हडी सूय्क नजरि मे बेइजत भ' क' पडल िहय। काग पाखंडी सभक आँ तख चुभय मदयौक। मकएक तँ ओ सभ मनुष् य सभक अनेक घि सभ केँ उजामड कऽ उजामड दे लक। आ ओकिा सभ केँ अपन काम-वासना मे मछमडया दे लक। ओ सभ पिमेा् विक सिक नमह कयलमन अमछ। आ ने एमह सभ बात मे पिमेा् वि सँ भयभीत भेलाह। मुदा ओ सभ पिमेा् विक कोध भडका दे ने छमि आ हनका पिे ा​ान कएने छमि। ओ ओकिा सभ केँ पृथी पि सँ दू ि किमि, कािक छल सँ मनद्षक आा​ा केँ बहकाबैत छलाह | धन छमि ओ सभ जे अपन मनद्षता मे पभुक भय मानैत छमि। पभु हनका सभ केँ धोखाधडी आ पापी सभ सँ मुक किताह। आ अधम् (पुरष) के हि ठोकि स हमिा सब के बचाउ। पिमेा् वि हनका सभ केँ ना​ा किमि जे अनादिपूव्क सभ अधम् किै त छमि। कािक, धामम्कता मे हमिा सभक पिमेा् वि पिमेा् वि एकटा पैघ आ पिाकमी नायाधीा छमि। हे पभु, अहाँ क दया ओमह सभ पि हो जे अहाँ सँ पेम किै त अमछ। अध ाय 5 हे पभु पिमेा् वि, हम हष् सँ अहाँ क नामक सुमत किब। जे अहाँ क धामम्क नाय केँ जनैत अमछ, हनका सभक बीच मे। कािक, अहाँ नीक आ दयालु छी, गिीबक ािक छी।


सुलेमान के भजन

जखन हम अहाँ लग कानब तखन चुपचाप हमिा अवहे लना नमह कर। मकएक तँ केओ पिाकमी सँ लूट नमह लैत अमछ। तखन जे अहाँ बनौने छी तामह मे सँ के ल' सकैत अमछ, मसवाय अहाँ सयं दे ब? कािक, मनुष आ ओकि भाग तोिा सोझाँ तिाजू मे पडल अमछ। जे अहाँ क मवमहत अमछ तामह मे ओ जोमड नमह सकैत अमछ, जामह सँ बढा सकय। हे भगवान, जखन हम सभ मवपम् मे पडै त छी तखन हम अहाँ क सहायताक लेल पुकािै त छी, आ अहाँ हमिा सभक याचना केँ पाछा नमह दै त छी, कािक अहाँ हमि सभक पिमेा् वि छी। हमिा सभ पि अपन हाि भािी नमह किाउ। कही ं आवशकताक कािके ँ हम सभ पाप नमह किी। भले अहाँ हमिा सभ केँ पुनसा् मपत नमह किब, मुदा हम सभ दू ि नमह िहब। मुदा हम सभ अहाँ क लग आमब जायब। मकएक तँ जँ हम भूखल छी तँ अहाँ लग पुकािब, हे पिमेा् वि। आ अहाँ हमिा दे ब। मचडै -चुनमुनी आ माछ अहाँ पोसैत छी, एमह मे अहाँ मैदान मे बिखा दै त छी जामह सँ हरियि घास उगय। ते, हि जीवक लेल से पी मे चािा तैयाि किब; आ जँ भूखल छमि तँ अहाँ मदस मुँह उठबैत छमि। िाजा आ ा​ासक आ लोकक पोषक अहाँ किै त छी, हे पिमेा् वि; आ गिीब आ गिीबक के सहायक अमछ, जँ अहाँ नमह, हे पभु? आ अहाँ सुनब--मकएक त' अहाँ छोमड के नीक आ कोमल अमछ?-दया मे अपन हाि खोमल मवनमक आा​ा केँ पसन किब। मनुषक भलाई अमनचापूव्क दे ल जाइत छै क आ ...; आ जँ मबना बडबडाने दोहिाबैत छमि तँ ओहो अद् भुत अमछ । मुदा अहाँ क दान भलाई आ धन मे पैघ अमछ, आ जकि आा​ा तोिा पि िाखल गेल अमछ, ओकिा विदानक कोनो कमी नमह होयत। समस धिती पि अहाँ क दया अमछ, हे पभु, भलाई मे। ओ धन अमछ जकिा पिमेा् वि ओकिा उमचत पया् पता पदान किबा मे सिक किै त छमि। जँ केओ बेसी पचुिता किै त अमछ तँ ओ पाप किै त अमछ। धम्क संग मधम साधन पया् प अमछ, आ एमह सँ पभुक आाीवा् द धम्क संग पचुिता भ' जाइत अमछ। जे सभ पभुक भय मानैत छमि से सभ नीक विदान मे आनतनत होइत छमि। तोहि भलाई तोहि िाज मे इसाएल पि अमछ। पभुक ममहमा धन अमछ, मकएक तँ ओ हमिा सभक िाजा छमि।

अध ाय 6 सुखी ओ आदमी अमछ जकि हदय पभुक नाम पुकािबाक लेल तसि अमछ; जखन ओ पभुक नाम मोन पाडत तखन ओकिा उदाि भेटतैक। हनकि बाट पभु दािा सम कयल गेल अमछ। आ ओकि हािक काज ओकि पिमेा् वि पभु दािा सुिम्त कयल गेल अमछ। जे मकछु ओ अपन अधलाह सपना मे दे खैत अमछ, ओकि आा​ा पिे ा​ान नमह होयत; जखन ओ नदी आ समुदक टहलबला सँ गुजित तखन ओ मनिा​ा नमह होयत। ओ नीद ं सँ उमठ कऽ पभुक नामक आाीष दै त छमि। जखन ओकि मोन ा​ातन होइत छै क तखन ओ अपन पिमेा् विक नाम गाबैत अमछ। ओ अपन समस घिक लेल पभु सँ मवनती किै त छमि। पभु पिमेा् विक पिमेा् विक पिमेा् विक पाि्ना सुनैत छमि। आ आा​ा केिऽ हि आगह जे हनका आा​ा किै छै , पभु पूिा किै छै । धन छमि पभु, जे हनका पि मनशलता सँ पेम कियवला पि दया किै त छमि। अध ाय 7 हे पिमेा् वि, अपन मनवास हमिा सभसँ दू ि नमह कर। कही ं ओ सभ हमिा सभ पि जे बेवजह घृका किै त अमछ, तामह पि हमला नमह कित। कािक, हे पिमेा् वि, अहाँ ओकिा सभ केँ असीकाि कऽ दे लहँ । हनका लोकमनक पएि अहाँ क पमवत उ्िामधकाि केँ नमह िौंदय। अपन पसनता मे हमिा सभ केँ सयं ताडब। मुदा हमिा सभ केँ जामत-जामत सभक हाि मे नमह मदयौक। कािक, जँ अहाँ महामािी पठबैत छी तँ अहाँ सयं एकिा हमिा सभक मवषय मे आजा दै त छी। मकएक तँ अहाँ दयालु छी। आ हमिा सभ के भस क' दे बाक हद धरि नमह तमसाएब। जाबत तोहि नाम हमिा सभक बीच िहत, हमिा सभ केँ दया भेटत। आ जामत सभ हमिा सभ पि हावी नमह होयत। मकएक तँ अहाँ हमिा सभक ढाल छी। आ जखन हम सभ अहाँ केँ पुकािै त छी तखन अहाँ हमिा सभक बात सुनैत छी। कािक, अहाँ इसाएलक वंाज पि अनन काल धरि दया किब आ अहाँ ओकिा सभ केँ असीकाि नमह किब। मुदा हम सभ, अहाँ क जुआक नीचाँ समदखन िहब, आ तोहि दं डक छडीक नीचाँ । जामह समय मे अहाँ हमिा सभक सहायता किब, अहाँ हमिा सभ केँ सामपत किब।


सुलेमान के भजन

जामह मदन अहाँ हनका सभक सहायता किबाक पमतजा केने िही, ओमह मदन याकूबक घिाना पि दया किब। अध ाय 8 मवपम् आ युदक आवाज हमि कान सुनल अमछ। वध आ मवपम्क घोषका किै त तुिहीक आवाज, बहत लोकक आवाज जेना अतमधक तेज हवाक आवाज, जेना नेगेब मे पचंड आमग केि तूिान। हम मोन मे कहमलयमन, “पिमेा् वि हमिा सभक न् याय किै त छमि। एकटा एहन आवाज जे पमवत नगि यरालेम मदस बढै त सुनैत छी जे सुनलहँ तामह पि हमि कमि टू मट गेल, ठे हन डगमगा गेल; हदय डिा गेल, हडी सन जकाँ मनिा​ा भ’ गेल। हम कहमलयमन: ओ सभ धम् मे अपन बाट सामपत किै त छमि। हम सग् आ पृथीक सृमष सँ भगवानक नाय पि सोचैत छलहँ ; हम पिमेा् वि केँ हनकि न् याय मे धामम्क मानलहँ जे पमहने सँ अमछ। पिमेा् वि हनका सभक पाप केँ मदनक पूक् इजोत मे उघाि कयलमन। समस धिती पिमेा् विक धामम्क न् याय सभ केँ जामन लेलक। भूममगत गुप सान पि हनका लोकमनक अधम् हनका कोमधत किबाक लेल कयल गेल छलमन; ओ सभ भम उतन केलक, बेटा मायक संग आ बाप बेटीक संग; वमभचाि केलक, हि आदमी अपन पडोसीक पतीक संग। ओ सभ एक-दोसि सँ वाचा किै त छलाह, एमह सभ बात केँ छूमब कऽ ापि गहक कयलमन। ओ सभ पिमेा् विक पमवत सान केँ लूमट लेलक जेना कोनो बदला लेबय बला नमह हो। ओ सभ सभ तिहक अाुदता सँ सोझे आमब कऽ पभुक वेदी केँ दबा दे लक। मामसक धम्क खून सँ ओ सभ बमलदान सभ केँ अाुद किै त छलाह जेना ई सभ साधािक मां स हो। ओ सभ कोनो पाप केँ अछूत नमह छोडलमन, जामह मे ओ सभ गैि-यहदी सभ सँ आगू नमह बढल। ते ँ पिमेा् वि हनका सभक लेल भटकबाक आत् मा ममला दे लमन। ओ सभ एक कप मबना पतला ािाब पीबय दे लमिन जामह सँ ओ सभ ना​ा मे धु् भ' जामि। ओ पृथीक छोि सँ जे अमछ, जे पबल पहाि किै त अमछ, तकिा अनलमन। ओ यरालेम आ ओकि दे ाक मवरद युदक आदे ा दे लमन। दे ाक िाजकुमाि सभ खुाी-खुाी हनका सँ भेट किय लेल गेलाह। धन हो तोहि बाट! अहाँ सभ आऊ, ा​ातनक संग पवेा कर। ओ सभ खुिदु िा बाट सभकेँ सम बना लेलक, ओकि पवेासँ पमहने; ओ सभ यरालेमक िाटक खोललक, ओकि दे बाल पि मुकुट पमहिा दे लक।

जमहना मपता अपन पुत सभक घि मे पवेा किै त छमि, तमहना ओ ा​ातनपूव्क यरालेम मे पवेा कयलमन। ओतमह ओ अपन पएि बहत सुिम्त भ' क' सामपत केलमन। ओ ओकि मकला आ यरालेमक दे बाल पि कबा क लेलक। कािक, जखन ओ सभ भटकैत छल, तखन पिमेा् वि हनका सुिम्त रपे ँ लऽ गेलाह। ओ हनका सभक िाजकुमाि सभ आ सभ बुतदमान सभ केँ नष कऽ दे लमन। ओ यरालेम मे िहमनहाि सभक खून अाुदताक पामन जकाँ उझमल दे लमन। ओ हनका सभक बेटा-बेटी सभ केँ लऽ गेलाह, जकिा ओ सभ अाुदता मे जन लेने छलाह। ओ सभ अपन पूव्ज जकाँ अपन अाुदताक अनुसाि कयलमन। ओ सभ यरालेम आ पिमेा् विक नामक लेल पमवत कयल गेल वसु सभ केँ अाुद कऽ दे लक। मुदा पिमेा् वि पृि् वीक जामत सभ पि अपन न् याय मे अपना केँ धामम्क दे खौलमन अमछ। आ पिमेा् विक पुण सेवक सभ अपन बीच मे मनद्ष मेमना जकाँ अमछ। सुमत के योग पभु छमि जे अपन धामम्कता मे समस पृथी पि नाय किै त छमि | दे खू, आब हे पिमेा् वि, अहाँ हमिा सभ केँ अपन धामम्कता मे अपन नाय दे खौलहँ । हमि सभक आँ तख अहाँ क मनक्य दे तख लेलक, हे पिमेा् वि। हम अहाँ क नाम केँ धमय ठहिौने छी जे सदाक लेल समामनत होइत अमछ। कािक, अहाँ धामम्कताक पिमेा् वि छी, जे इसाएलक नाय किै त छी। हे पिमेा् वि, हमिा सभ पि अपन दया घुमू आ हमिा सभ पि दया कर। दया आ भलाईक संग इसाएलक मतति-मबति लोक सभ केँ एक ठाम जमा कर। अहाँ क मवशास हमिा सभक संग अमछ। जँ हम सभ अपन गिदमन कठोि कएने छी, मुदा अहाँ हमिा सभक दणमनहाि छी। हे हमि पिमेा् वि, हमिा सभ केँ अनदे खी नमह कर, कही ं जामत सभ हमिा सभ केँ नमह मनगलत, जेना मकयो उदाि कियवला नमह हो। मुदा अहाँ ाुरए सँ हमि सभक पिमेा् वि छी। आ अहाँ पि हमि सभक आा​ा अमछ, हे पभु; आ हम सभ अहाँ सँ नमह हटब। कािक, अहाँ क नाय हमिा सभ पि नीक अमछ। हमि आ हमि बचा सभक सदाक लेल अहाँ क नीक पसनता हो; हे पभु , हमि उदािकता् , हम सब आब कमहयो नमह महलब। पभु अपन पुणवान लोकमनक मुँह सँ अपन नायक सुमत किबाक योग छमि; आ पिमेा् विक इसाएल केँ सदाक लेल धन हो।


सुलेमान के भजन

अध ाय 9

अध ाय 10

जखन इसाएल पिदे ा मे बंदी बना कऽ लऽ गेल गेल। जखन ओ सभ हनका सभ केँ मुक कियवला पभु सँ दू ि भऽ गेलाह। पभु जे उ्िामधकाि हनका सभ केँ दे ने छलाह, तामह सँ ओ सभ िेमक दे ल गेलाह। पिमेा् विक वचनक अनुसाि इसाएलक लोक सभ पत् येक जामत मे मतति-मबति कयल गेल छल। हे पिमेा् वि, हमिा सभक अपिाधक कािके ँ अहाँ अपन धामम्कता मे धामम्क ठहिाओल जाउ। कािक, अहाँ पृि् वीक सभ लोकक नायी छी। मकएक तँ अहाँ क जान सँ केओ अनाय किै त अमछ, से नुकायल नमह अमछ। आ तोहि पुणा​ा​ा सभक सतम् अहाँ क सोझाँ अमछ, हे पभु; तखन हे भगवान, अहाँ क जान सँ मनुष कतय नुका सकैत अमछ? हमि सभक िचना हमि सभक अपन पसंद आ ातकक अधीन अमछ अपन हािक काज मे सही-गलत किब; आ अपन धम् मे अहाँ मनुषक पुत सभक दा्न किै त छी। जे धामम्कता किै त अमछ, से पभुक संग अपना लेल जीवन जमा किै त अमछ। जे गलत काज किै त अमछ, से अपन पाक मवना​ाक लेल गमा लैत अमछ। मकएक तँ पिमेा् विक न् याय सभ मनुष् य आ ओकि घिक लोक केँ धामम्कता सँ दे ल गेल अमछ। हे पिमेा् वि, अहाँ ककिा लेल नीक छी, मसवाय पभुक आहान कियवला सभक लेल? ओ आा​ा केँ पाप सँ ाुद किै त छमि जखन ओ सीकाि किै त अमछ, जखन ओ सीकाि किै त अमछ। कािक, एमह सभ बातक कािके ँ हमिा सभ पि लाज अमछ आ मुँह पि यू। ओ ककिा पाप ्मा किै त छमि, मसवाय पाप केमनहाि के? अहाँ धमय लोकमन केँ आाीवा् द दै त छी, आ हनका सभ केँ जे पाप कयलमन अमछ, तामह पि हनका सभ केँ डाँ ट नमह दै त छी। आ पाप किमनहाि पि अहाँ क भलाई अमछ, जखन ओ सभ प्ाताप किै त अमछ। आ, आब, अहाँ हमि सभक पिमेा् वि छी, आ हम सभ ओ लोक छी, जकिा सँ अहाँ पेम केने छी। हे इसाएलक पिमेा् वि, दे खू आ दया कर, मकएक तँ हम सभ अहाँ क छी। आ हमिा सभ पि अपन दया नमह हटाउ, कही ं ओ सभ हमिा सभ पि आकमक नमह किय। अहाँ सभ जामत सँ अबाहमक वंाज केँ चुनलहँ । आ हमिा सभ पि अपन नाम िातख दे लमन, हे पभु , आ अहाँ हमिा सभ केँ सदाक लेल असीकाि नमह किब। अहाँ हमिा सभक पूव्ज सभक संग हमिा सभक मवषय मे एकटा वाचा केलहँ । आ हम सभ अहाँ पि आा​ा किै त छी, जखन हमि सभक पाक अहाँ मदस घुित। पभुक दया इसाएलक घिाना पि अनन काल धरि िहय।

धन अमछ ओ आदमी जकिा पभु डाँ टैत मोन किै त छमि। आ जकिा ओ अधलाहक बाट सँ आघात सँ िोकैत छमि पाप सँ ाुद भऽ जाय, जामह सँ ओ पाप बढय। जे पीठ पि पहािक लेल तैयाि किै त अमछ, से ाुद भ' जायत। कािक, जे सभ दं ड सहै त अमछ, तकिा सभक लेल पभु भलाई किै त छमि। मकएक तँ ओ धमय लोकक बाट सोझिबैत छमि। आ अपन दण सँ ओकिा सभ केँ मवकृत नमह किै त अमछ। पभुक दया ओमह सभ पि अमछ जे हनका सँ सत् य पेम किै त अमछ। आ पभु दयापूव्क अपन सेवक सभक सिक किै त छमि। कािक, गवाही अनन वाचाक मनयम मे अमछ। पभु केिऽ गवाही हनकऽ दा्न मे मनुष केिऽ िासा पि छै । हमि पभु अपन नाय मे सदा के लेल नायी आ दयालु छमि, इसाएल हष् मे पभुक नामक सुमत कित। आ पुणा​ा​ा लोकक सभा मे धनवाद दे त। इसाएलक आनन मे पिमेा् वि गिीब सभ पि दया किताह। मकएक तँ पिमेा् वि सदाक लेल नीक आ दयालु छमि। इसाएलक सभा सभ पिमेा् विक नामक ममहमा कित। पभुक उदाि इसाएलक घिाना पि अनन आननक लेल हो! अध ाय 11 पमवत लोक सभ केँ बजाबय लेल मसयोन मे तुिही बजाउ। यरालेम मे सुसमाचाि सुनयवला के आवाज सुनाउ। मकएक तँ पिमेा् वि इसाएल पि दया कऽ कऽ हनका सभक दा्न कयलमन। हे यरालेम, ऊँचाई पि ठाढ भ’ क’ दे खू, अपन सनान सभ केँ। पूव् आ पम्म सँ, पभु दािा एक ठाम जमा कयल गेल; उ्ि मदस सँ ओ सभ अपन पिमेा् विक पसनता मे अबैत छमि, दू िक दीप सभसँ पिमेा् वि ओकिा सभकेँ जमा कएने छमि। ऊँच पहाड सभ केँ ओ ओकिा सभक लेल मैदान मे नीचाँ क' दे ने छमि। पहाडी सभ अपन पवेा दाि पि भामग गेल। ओमह ठामसँ गुजिै त काल जंगल ओकिा सभकेँ आशय दै त छलैक; भगवान् हनका सभक लेल हिे क मधुि गंधक गाछ उगाबय लगलाह, जामह सँ इसाएल अपन पिमेा् विक ममहमाक आगमन मे ओमह ठाम सँ गुजरि सकय। हे यरालेम, अपन गौिवा​ाली वस पमहर। अपन पमवत वस तैयाि कर। मकएक तँ पिमेा् वि इसाएलक मवषय मे अनन काल धरि नीक बात कहै त छमि। पभु इसाएल आ यरालेमक मवषय मे जे कहने छमि से किमि। पभु इसाएल केँ अपन गौिवा​ाली नाम सँ उठबैत िहमिन। पभुक दया इसाएल पि अनन काल धरि िहय।


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अध ाय 12 हे पभु , हमि पाक केँ अधम् आ दु ष सँ मुक कर। जे जीह अमनयममत आ मनना किै त अमछ, आ झूठ आ छल बाजैत अमछ। दु षक जीहक वचन अनेक तिहे ँ मोडल अमछ। जेना कोनो लोकक बीच आमग ओकि सौनय् केँ जिा दै त छै क। ते ँ ओ घि-घि मे झूठ जीह भिबा मे आनतनत होइत छमि, उलासक गाछ सभ कामट कऽ जे अपिाधी सभ केँ आमग लगाबैत अमछ। मनननीय ठोि के माधम स घि-घि के युद मे ा​ाममल किब। भगवान् मनद्ष सँ दू ि उलंघन किमनहािक ठोि केँ अभाव मे आमन क' दू ि किमि आ मनना किऽ वला सभक हडी सभ पभुक भयभीत कियवला सभ सँ दू ि-दू ि धरि मछमडया जाय! जालामुखी आमग मे पुणा​ा​ा सँ दू ि मनना कियवला जीह नष भ' जाउ! पभु ओमह ा​ान आा​ा केँ सुिम्त िाखमि जे अधम् सँ घृका किै त अमछ। आ पभु ओमह आदमी केँ घि मे ा​ातनक पालन कियवला केँ सामपत किमि। पभुक उदाि हनकि सेवक इसाएल पि सदाक लेल िहय। पापी सभ एक संग पभुक सामनध मे ना​ा भऽ जाय। मुदा पभुक पुणा​ा​ा सभ केँ पभुक पमतजाक उ्िामधकाि भेटय। अध ाय 13 पभुक दमहना हाि हमिा झाँ मप दे ने अमछ। पभुक दमहना हाि हमिा सभ केँ बखलमन। पभुक बाँ मह हमिा सभ केँ ओमह तलवाि सँ बचा लेलक जे ओमह मे सँ गुजिल छल। अकाल आ पापीक मृतु सँ। ाोिगुल किय बला जानवि ओकिा सभ पि दौडल। दाँ त सँ मां स िामड दे लक। आ दाढसँ हडीकेँ कुचललक। मुदा एमह सभ बात सँ पभु हमिा सभ केँ उदाि कयलमन। धमा् ा​ा अपन गलतीक कािके ँ पिे ा​ान भ’ गेलाह। कही ं ओकिा पापी सभक संग नमह लऽ जाय। पापी के उखाडब भयावह होइत छै क। मुदा एमह सभ बात मे सँ एकोटा धमय केँ नमह छूबैत अमछ। कािक, धमा् ा​ा केँ पापक लेल दं मडत किब, जे अजानता मे कयल गेल अमछ, से एक समान नमह होइत छै क। आ पापी सभक उखामड िेकब। गुप रप सँ धमा् ा​ा केँ दतणत कयल जाइत छै क। कही ं पापी धमय पि आनतनत नमह होमि। कािक, ओ धमय केँ मपय पुत जकाँ सुधािै त छमि। आ ओकि दं ड जेठ बचा जकाँ होइत छै क। मकएक तँ पभु अपन पुणा​ा​ा सभ केँ बखबैत छमि। आ हनका सभक गलती केँ अपन दण सँ मेटा दै त छमि। कािक, धमय लोकक जीवन अनन काल धरि िहत। मुदा पापी सभ मवना​ा मे लऽ जेताह,,

आ हनका लोकमनक सािक आब नमह भेटत। मुदा पुणा​ा​ा पि पभुक दया अमछ। आ हनका सँ डिय बला पि हनकि दया। अध ाय 14 पभु विादाि छमि जे हनका सत् य पेम किै त छमि। जे हनकि दण सहै त छमि, हनका सभ केँ। जे सभ हनकि आजाक धामम्कता मे चलैत छमि। ओमह ववसा मे जे ओ हमिा सभ केँ जीबय लेल आजा दे ने छलाह। पभुक पुणा​ा​ा सभ एमह सँ सदाक लेल जीबैत िहताह; पभु केिऽ जनत, जीवन केिऽ गाछ, हनकऽ पुणा​ा​ा छै । हनका लोकमनक िोपनी सदाक लेल जमड जमा लेने अमछ; ओ सभ स् वग्क भरि मदन उखाडल नमह जायत। पिमेा् विक भाग आ उ्िामधकाि इसाएल अमछ। मुदा पापी आ अपिाधी सभ एहन नमह अमछ। जे अपन पापक संगमत मे मबताओल संम्प मदन केँ पेम किै त छमि; हनका लोकमनक आनन ्मकक भषाचाि मे छमन, आ भगवानक सिक नमह किै त छमि। मकएक तँ मनुष् य सभक बाट सभ हनका सामने सभ समय बूझल िहै त अमछ। आ हदयक िहस केँ पूिा किबा सँ पमहने ओ जनैत छमि। ते ँ हनका सभक उ्िामधकाि सीओल आ अनाि आ मवना​ा अमछ ओ सभ ओमह मदन नमह भेटत जखन धमय लोकमन केँ दया भेटतमन। मुदा पभुक पुणा​ा​ा केँ आनन मे जीवनक उ्िामधकाि भेटतमन। अध ाय 15 जखन हम मवपम् मे छलहँ तखन हम पभुक नाम पुकािलहँ । हम याकूबक पिमेा् विक सहायताक आा​ा केलहँ आ उदाि पामब गेलहँ । कािक गिीबक आा​ा आ ािक अहाँ छी, हे भगवान। कािक, हे पिमेा् वि, अहाँ केँ सत मे धनवाद दे बाक अमतरिक के बलवान अमछ? आ तोहि नामक धनवाद दे बा छोमड मनुक कोन ातका​ाली होइत अमछ? हदयक आनन मे गीतक संग एकटा नव भजन, जीभक सुसतजत वादक संग ठोिक िल, २. पुण आ धमा् ा​ा हदय सँ ठोि के पमहल िल-जे ई सभ चढाओत से कमहयो अधलाह नमह महलत। आमग के लौ आ अधमय के मवरद कोध ओकिा नमह छूओत। जखन ई पापी सभक मवरद पभुक मुँह सँ मनकलैत अमछ। पापी के सब दव के ना​ा किय लेल, कािक, पिमेा् विक मना​ानी धमय लोक सभ पि अमछ जामह सँ ओ सभ उदाि पामब सकय। धमय लोक सँ अकाल आ तलवाि आ महामािी दू ि िहत।


सुलेमान के भजन

मकएक तँ ओ सभ धमा् ा​ा सभसँ ओमहना भामग जेताह जेना युदमे पीछा किै त छल। मुदा ओ सभ पापी सभक पाछाँ -पाछाँ चलत आ ओकिा सभ केँ पकमड लेत। अधम् किऽ वला सभ पिमेा् विक न् याय सँ नमह बमच सकैत अमछ। जेना युदक अनुभवी ातु ओकिा सभ केँ पछामड दे तैक। कािक, मवना​ाक मना​ान हनका सभक कपाि पि अमछ। पापी सभक उ्िामधकाि मवना​ा आ अनाि अमछ। ओकि सभक अधम् ओकिा सभक पाछाँ -पाछाँ नीचाँ क सीओल धरि चलत। हनका सभक उ्िामधकाि हनका सभक संतान सँ नमह भेटतमन। पाप पापी सभक घि उजामड दे त। पभुक नायक मदन पापी सभ अनन काल धरि नष भऽ जायत। जखन पिमेा् वि अपन न् याय सँ पृि् वी पि अबैत छमि। मुदा जे सभ पभुक भय मानैत छमि, हनका सभ केँ ओमह मे दया भेटतमन। आ अपन पिमेा् विक करका सँ जीबैत िहताह। मुदा पापी सभ सदा-सदा लेल नष भऽ जायत। अध ाय 16 जखन हमि आा​ा पभु सँ दू ि भ' क' सुतल छल, तखन हम लगभग गडा मे मिसल गेल छलहँ । जखन हम पिमेा् वि सँ दू ि छलहँ तखन हमि पाक मृतुक लेल उझमल गेल छल। हम पापीक संग सीओलक िाटक लग गेल छलहँ । जखन हमि पाक इसाएलक पिमेा् वि पिमेा् वि सँ मवदा भेल-जँ पभु अपन अनन दया सँ हमि सहायता नमह केने िमहतमि । ओ हमिा चुभल जेना घोडा केँ चुभल जाइत छै क, जामह सँ हम हनकि सेवा क' सकब। हमि उदािक आ सहायक हि समय हमिा बचा लेलक। हे पिमेा् वि, हम अहाँ क धनवाद दे ब, कािक अहाँ हमि उदाि मे हमिा सहायता केलहँ । आ हमिा मवना​ाक लेल पापी सभक संग नमह मगनने अमछ। हे भगवान, हमिा पि अपन दया दू ि नमह कर। आ ने अहाँ क सािक हदय सँ जा धरि हम मरि नमह जायब। हे पिमेा् वि, हमिा दु ष पाप सँ दू ि िातख हमिा पि िाज कर, आ हि दु ष स् ती सँ जे सिल लोक केँ ठोकि खाबैत अमछ। आ अमनयममत सीक सौनय् हमिा बहका नमह किय। आ ने कोनो एहन जे अलाभकािी पापक अधीन हो। हमि हािक काज अहाँ क सम् सामपत कर, आ अहाँ क सिक मे हमि याता केँ सुिम्त िाखू। हमि जीह आ ठोि केँ सतक वचन सँ ि्ा कर; कोध आ बेवजह कोध हमिासँ दू ि िातख दे लक। गुनगुनाहट आ दु ःख मे अधीिता हमिा सँ दू ि दू ि भ' जाउ जखन हम पाप किब तखन अहाँ हमिा ताडब दै त छी जामह सँ हम अहाँ लग घुरि सकब। मुदा सदावना आ हँ सी-खुाी सँ हमि आा​ाक समि्न कर;

जखन अहाँ हमि आा​ा केँ मजबूत किब तखन जे हमिा दे ल जायत से हमिा लेल पया् प होयत। कािक जँ अहाँ सामर् नमह दै त छी तँ गिीबी के संग दं ड के सहन क सकैत अमछ? जखन मनुष केँ ओकि भषाचाि सँ डाँ टल जाइत छै क। अहाँ क पिी्ा हनकि ािीि मे आ गिीबीक कष मे अमछ। जँ धमय एमह सभ पिी्ा मे सहन कित तँ ओकिा पभुक दया भेटतैक। अध ाय 17 हे पभु , अहाँ हमि सभक िाजा छी सदा-सदा, कािक, हे पिमेा् वि, अहाँ मे हमिा सभक पाकी ममहमा किै त अमछ। पृथी पि मनुषक जीवनक मदन कतेक मदनक अमछ? जेना ओकि मदन छै क, तमहना ओकिा पि आा​ा िाखल छै क। मुदा हम सभ अपन उदािकता् पिमेा् वि पि आा​ा किै त छी। कािक, हमिा सभक पिमेा् विक सामि्​् य सदाक लेल दयाक संग अमछ। आ हमिा सभक पिमेा् विक िाज् य न् याय मे जामत सभ पि अनन काल धरि िहत। हे पभु , अहाँ दाऊद केँ इसाएलक िाजा बनेबाक लेल चुनलहँ । आ अपन वंा केँ छूमब कऽ ापि खा लेलक जे ओकि िाज तोहि सोझाँ कमहयो नमह खतम भऽ जाय। मुदा, हमिा सभक पापक लेल पापी सभ हमिा सभक मवरद उठल। ओ सभ हमिा सभ पि आकमक कए बाहि मनकामल दे लक। जे अहाँ हनका सभसँ वचन नमह दे ने छलहँ , से ओ सभ हमिा सभसँ महं सासँ छीमन लेलक । ओ सभ कोनो तिहे ँ तोहि समानजनक नामक ममहमा नमह केलक। जे हनका लोकमनक उतृषता छलमन, तकि सान पि एकटा सां सारिक िाजतंत सामपत कयलमन; ओ सभ उिल-पुिल भिल अहं काि मे दाऊदक मसंहासन केँ उजामड दे लक। मुदा, हे पिमेा् वि, अहाँ ओकिा सभ केँ नीचाँ िेमक दे मलयैक आ ओकिा सभक संतान केँ पृथी सँ हटा दे मलयैक। एमह मे हनका सभक मवरद एकटा एहन आदमी उठल जे हमिा सभक जामत सँ पिे छल। हे पिमेा् वि, हनका सभक पापक बदला अहाँ हनका सभक पमतिल दे मलयमन। जे हनका सभक कम्क अनुसािे ँ ई बात हनका सभ पि आमब गेलमन। भगवान् हनका सभ पि कोनो दया नमह दे खौलमन; ओ हनका सभक बीया तकलमन आ एको गोटे केँ मुक नमह होमय दे लमन। पभु अपन सभ नाय मे मवशासी छमि जे ओ पृथी पि किै त छमि। अमनयममत लोक हमिा सभक भूमम केँ उजामड दे लक जामह सँ ओमह मे मकयो नमह िहय। छोट-बड आ अपन बचा सभ मममलकय नष क' दे लक।


सुलेमान के भजन

अपन कोधक ताप मे ओ ओकिा सभ केँ पम्म मदस धरि मवदा क’ दे लमन। आ ओ दे ाक ा​ासक सभ केँ बेमहसाब उपहासक सोझाँ उतारि दे लमन। एमलयन होय के कािक दु शन गव् स॑ काम किलकै, आ ओकि हदय हमिा सभक भगवान् सँ पिाया छल। ओ जे मकछु यरालेम मे कयलमन। जेना ाहि मे जामत सेहो अपन दे वता केँ। आ मममशत लोकक बीच मे वाचाक सन् तान सभ बुिाई मे ओकिा सभ सँ आगू बमढ गेल। हनका सभ मे सँ मकयो एहन नमह छल जे यरालेमक बीच दया आ सत् य केँ काज किै त छल। जे सभ धमा् ा​ा सभक सभाघि सभ सँ पेम किै त छल, से सभ ओकिा सभ सँ भामग गेल। जेना अपन खोंतासँ उडै त गौिै या। ओ सभ मरभूमम मे भटकैत िहलाह जामह सँ हनकि जान हामन सँ बमच जाय। पिदे ा मे िहमनहाि सभक नजरि मे जे मकयो हनका सभ सँ जीमवत बचल छल, से अनमोल छल। पूिा धिती पि अधम लोक सभ मछमडया गेल छलाह। आका​ा बिखा केँ पृथी पि खसय सँ िोकने छल। झिना िोकल गेल छल जे गहीिं सँ बािहमासी उभिै त छल, जे ऊँच पहाडसँ नीचाँ बहै त छल । मकएक तँ हनका सभ मे सँ मकयो एहन नमह छल जे धामम्कता आ नायक काज किै त छल। हनका सभक मुतखया सँ लऽ कऽ छोट-छोट सभ पापपूक् छलाह। िाजा अपिाधी छलाह, नायाधीा आजा नमह मानैत छलाह, आ लोक पापपूक् छलाह। हे पभु , दे खू, हनका सभक िाजा दाऊदक पुत केँ ठाढ कर। हे पिमेा् वि, जामह समय मे अहाँ दे खैत छी जे ओ अहाँ क सेवक इसाएल पि िाज किमि। ओ अधमय ा​ासक सभ केँ चकनाचूि कऽ दे मिन। आ एमह लेल जे ओ यरालेम केँ ओमह जामत सभ सँ ाुद किमि जे ओकिा मवना​ाक लेल िौंदैत अमछ। बुतदमानी सँ, धामम्कतापूव्क ओ पापी सभ केँ उ्िामधकाि सँ बाहि मनकामल दे त। ओ पापीक घमंड केँ कुमािक बत्न जकाँ नष कऽ दे त। लोहाक छडीसँ ओकि सभ वसुकेँ तोमड दे त। ओ अपन मुँहक वचन सँ अभक जामत सभक ना​ा कित। हनकि डाँ टला पि िाष् सभ हनका आगू सँ भामग जायत। ओ पापी सभ केँ हदयक मवचािक कािके ँ डाँ टत। ओ एकटा पमवत लोक केँ एकमतत कित, जकिा ओ धामम्कता मे नेतृत कित। ओ अपन पिमेा् वि पिमेा् वि दािा पमवत कयल गेल लोकक गोत सभक न् याय कित। ओ अधम् केँ िेि हनका सभक बीच नमह िहय दे ताह। आ ने केओ अधलाह केँ जनमनहाि हनका सभक संग िहत। ओ ओकिा सभ केँ जामन लेत जे ओ सभ अपन पिमेा् विक पुत छमि।

ओ ओकिा सभ केँ ओमह दे ा पि ओकि सभक गोतक अनुसाि बाँ मट दे त। आ ने पवासी आ ने पिदे ाी आब ओकिा सभक संग पवास कित। ओ अपन धामम्कताक बुतद सँ लोक आ जामत सभक नाय कित। सेलाह। ओकिा अपन जुआक नीचाँ गैि-जातीय जामत सभ ओकि सेवा किऽ पडतैक। ओ पभुक ममहमा एहन सान पि किताह जे समस पृि् वी पि नजरि आमब सकय। ओ यरालेम केँ पमहने जकाँ पमवत कऽ कऽ ाुद किताह। एमह तिहे ँ हनकि ममहमा दे खबाक लेल पृि् वीक छोि सँ जामत सभ आओत। बेहोा भ' गेल अपन बेटा सभ केँ उपहाि मे ल' क'। आ पभुक ममहमा दे खबाक लेल, जामह सँ पिमेा् वि हनकि ममहमा कयलमन। ओ हनका सभक ऊपि एकटा धमय िाजा हे ताह, जे पिमेा् विक मा्ा दे ल गेल अमछ। हनका सभक बीच हनकि जीवन मे कोनो अधम् नमह होयत। मकएक तँ सभ पमवत हे ताह आ ओकि िाजा पभुक अमभमषक हे ताह। ओ घोडा, सवाि आ धनुष पि भिोसा नमह कित। आ ने युदक लेल सोना-चानी अपना लेल बढाओत। आ ने युदक मदनक लेल भीड सँ मवशास जुटाओत। पभु सयं ओकि िाजा छमि, जे पिमेा् विक आा​ाक कािके ँ पिाकमी छमि, हनकि आा​ा छमि। हनका सामने सब जामत भयभीत होयत। मकएक तँ ओ अपन मुँहक वचन सँ पृथी केँ सदाक लेल मारि दे त। ओ पभुक लोक सभ केँ बुतद आ आनन सँ आाीवा् द दे ताह। ओ सयं पाप सँ ाुद हे ताह, जामह सँ ओ एकटा पैघ लोक पि ा​ासन किमि। ओ अपन वचनक सामर् सँ ा​ासक सभ केँ डाँ टत आ पापी सभ केँ दू ि कित। आ अपन पिमेा् वि पि भिोसा कऽ कऽ ओ अपन मदन भरि ठोकि नमह खायत। मकएक तँ पिमेा् वि हनका अपन पमवत आत् मा दािा पिाकमी बनौताह। आ बुतदमानी के भावना के माधम स, बल आ धम् के साि। पभुक आाीष हनका संग िहतमन। हनकि आा​ा पभु पि िहतमन, तखन हनका पि के जीत सकैत अमछ? ओ अपन काज मे पिाकमी आ पिमेा् विक भय मे बलवान बनत। ओ मनषा आ धामम्कतापूव्क पभुक भेड ँ ाक चिबाह कित। आ ओकिा सभ मे सँ मकयो अपन चािागाह मे ठोकि नमह खाय दे त। ओ सभ ठीक-ठाक नेतृत किताह, आ हनका सभ मे कोनो घमंड नमह होयत जे हनका सभ मे सँ ककिो दमन कयल जाय।


सुलेमान के भजन

ई इसाएलक िाजाक ममहमा होयत, मजनका पिमेा् वि जनैत छमि। ओ ओकिा सुधािबाक लेल इसाएलक घिानाक ऊपि उठौताह। ओकि वचन महग सोना सँ बेसी परिषृत होयत, जे सबसँ नीक अमछ। सभा मे ओ पमवत लोकक जामत-जामत सभक नाय किताह। हनकि वचन पमवत लोकक बीच मे पमवत लोकक वचन जकाँ होयत। धन होउ जे ओमह मदन मे होयत। एमह मे ओ सभ इसाएलक ओमह सौभाग केँ दे खताह जे पिमेा् वि गोत सभक एकतीकिक मे पूिा किताह। पभु इसाएल पि अपन दया जली किमि! ओ हमिा सभ केँ अपमवत ातु सभक अाुदता सँ मुक किमि! पभु सयं हमिा लोकमनक िाजा छमि सदा-सदा। अध ाय 18 पभु, तोहि दया तोहि हािक काज पि सदाक लेल अमछ; तोहि भलाई इसाएल पि एकटा समृद विदानक संग अमछ। तोहि आँ तख ओकिा सभ मदस तकैत अमछ जे ओकिा सभ मे सँ ककिो अभाव नमह होइत छै क। अहाँ क कान सुनैत अमछ गिीबक आा​ा भिल पाि्ना। तोहि नाय दया सँ समस पृथी पि मनषामदत होइत अमछ। आ तोहि पेम इसाएलक सन् तान अबाहमक वंाक पमत अमछ। तोहि दण हमिा सभ पि ओमहना अमछ जेना जेठ, एकलौता पुत पि। अजानता मे कयल गेल मूख्ता सँ आजाकािी आा​ा केँ पाछू घुमाबय लेल। पिमेा् वि इसाएल केँ दया आ आाीवा् दक मदनक मवरद ाुद किमि, पसंद के मदन के मवरद जब धन हे ताह जे ओमह मदन मे होयत। ओ अपन अमभमषक केँ वापस अनैत छमि। एमह तिहे ँ ओ सभ पभुक भलाई दे खताह जे ओ आगामी पीढीक लेल किताह। पभुक अमभमषक केँ अपन पिमेा् विक भय मे दं डक दं डक नीचाँ । बुतद आ धामम्कता आ सामर्क आत् मा मे; जामह सँ ओ पिमेा् विक भय सँ पतेक मनुष् य केँ धामम्कताक काज मे मनद् मात किमि। जामह सँ ओ पभुक सम् सभ केँ सामपत किमि। दया के मदन मे भगवान के भय मे जीने वाला एक अचा पीढी। सेलाह। हमि सभक पिमेा् वि महान आ ममहमावान छमि, जे सव्च सान पि िहै त छमि। साल दि साल ऋतु मनधा् रित किबाक लेल सग्क इजोत हनका सभक माग् मे सामपत कयलमन अमछ। आ ओ सभ ओमह बाट सँ नमह भटकल अमछ जे ओ ओकिा सभ केँ मनधा् रित केने छलाह। भगवान् के भय मे िोज अपनऽ िासा पि चलै छै ,

जामह मदन पिमेा् वि हनका सभ केँ सृमष केलमि, तमहया सँ आ सदाक लेल। आ जमहयासँ ओ ओकिा सभकेँ सृमष केने छमि, तमहयासँ ओ सभ गलती नमह केने छमि। पुिान पीढी स अपन बाट स नमह हमट सकलाह, जाबत पिमेा् वि हनका सभ केँ अपन सेवक सभक आजा सँ एहन किबाक आजा नमह दे लमन।


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