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Maithili - Prayers and Stories of Confession, Repentance, Restoration, and Praise

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स ्वीकारो, पशीचीप, पुन र ीसप न, एवं सुत च व् पीरसन ी एवं वरीएँ | चीवक् अय्य 33:27-30 27 ओ मनुष् य वेँ चवैच अति आ जँ तवया वहै च अति जे, “हम पीप वेलहँ आ उतचच यीच वेँ तववृच वऽ दे लहँ , मुदी हमकी वाना फीयदी नतह भेल।” 28 ओ अपन पीर वेँ गडी मे जेयी सँ यचीओच, आ ओवक पीर इजाच दे खच। 29 दे ख्, ई सभ यीच पकमेश् वक मनुष् यव संग येक-येक वीज वकै च ितर। 30 अपन पीर वेँ गडी सँ वीपस अनयीव लेल, ज्तवच लावव इजाच सँ पयुब हायय लेल। अय्य 36:5-15 5 दे ख्, पकमेश् वक पकीकम् ितर आ ववका तचकस् वीक नतह वकै च ितर। 6 ओ दु षव जीन नतह यचीयैच अति, यल् तव गक्य वेँ अतिवीक दै च अति। 7 ओ िम् लाव सभ सँ अपन नजरक नतह हटीयैच ितर, मुदी ओ सभ कीजी सभव संग तसंहीसन पक यैसल ितर। हँ , ओ ओवकी सभ वेँ अनन वील िरक रीतपच वकै च ितर, आ ओ सभ ऊँच वयल जीइच ितर। 8 जँ ओ सभ येड् मे यीर् वऽ वषव डाक् मे यी्ल कहच। 9 चखन ओ ओवकी सभ वेँ ओवक सभव वीज आ ओवक सभव अपकीि सभ वेँ दे खयैच ितर जे ओ सभ येस् वयल गेल अति। 10 ओ हनवी सभव वीन वेँ अनुशीसनव लेल खालैच ितर आ आजी दै च ितरन जे ओ सभ अिमस सँ घुरक जीतर। 11 जँ ओ सभ हनवक आजी मीनैच ितर आ हनवक सेवी वकै च ितर चँ ओ सभ अपन तदन समृरब मे तयचीओच आ अपन वषस भाग-तवलीस मे तयचीओच। 12 मुदी जँ ओ सभ आजी नतह मीनच चँ चलवीक सँ नीश भऽ जीयच आ अनजीन मे मरक जीयच।

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स्वीकारो, पशीचीप, यहील्, एवं सुतच व् पीरसनी एवं वरीएँ |

13 मुदी पीखंड् सभ हदय मे कािव ढे क लगी दै च अति, जखन ओ ओवकी सभ वेँ यीर् दै च अति चखन ओ सभ वीनैच नतह अति। 14 ओ सभ जवीन् मे मरक जीइच अति आ ओवक सभव ज्वन अशुब लावव य्च अति। 15 ओ गक्य सभ वेँ अपन वष मे उबीक वकै च अति आ ओवकी सभव वीन खालैच अति। अय्य 42:1-6 1 चखन अय्य पकमेश् वक वेँ उतक दे लतरन। 2 हम जनैच ि् जे अहीँ सभ वीज वऽ सवैच ि् आ अहीँ सँ वाना तवचीक नतह कावल जी सवैच अति। 3 वे अति जे तयनी जीनव सलीह नुवी लैच अति? चे ँ हम ई वहलहँ जे हम नतह युझलहँ । हमकी लेल येस् अद् भुच यीच, जे हमकी नतह युझल िल। 4 हम अहीँ सँ तवनच् वकै च ि्, सुन्, हम यीजय, हम अहीँ सँ मीँ ग वकय आ अहीँ हमकी सँ यीच वकय। 5 हम वीनव सुनली सँ अहीँ व यीके मे सुनने ि्, मुदी आय हमक आँ रख अहीँ वेँ दे रख कहल अति। 6 चे ँ हम अपनी आप सँ घृरी वकै च ि्, आ ि्की आ भस मे पशीचीप वकै च ि्।

सैम सन नीयीि्श 16:28-31 28 तशमशान पकमेश् वक वेँ यजी वऽ वहलतरन, “हे पकमेश् वक, हमकी मान पीड् आ हमकी यल तदअ, हे पकमेश् वक, मीत एचये एव येक, जीतह सँ हम अपन दु न् आँ रखव यदली मे पतलश् च् सभ सँ चुकन उठी सवय।” 29 तशमशान ओतह य्चव द् टी खंभी वेँ पवतड लेलव जीतह पक घक ठीढ िल आ जीतह पक ओ घक ठीढ िल, एवटी अपन दतहनी आ दासक यीमी हीर सँ। 30 तशमशान वहलतरन, “हमकी पतलस् सभव संग मकय तदअ।” ओ अपन समस शरो सँ परीम वयलतन। घक मीतलव सभ आ ओतह मे कहतनहीक सभ लाव पक खतस पडल। चे ँ जे मृच् यु वेँ ओ अपन मृतुव समय मे मीकलतन, ओ सभ ओतह मृच् यु सँ येस् िल जे ओ अपन ज्वन मे मीकलतन। 31 चखन हनवक भीय सभ आ हनवक तपचीव सम् प्रस घकीनी उचरक वऽ हनवी लऽ वऽ लऽ गेलतन आ हनवी साकी आ एसीओलव य्च मे हनवक तपची मनाआव दफन मे गीतड दे लतन। ओ य्स वषस इसीएलव न् यीय वयलतन।

डे त वड भजन 6:1-10 1 हे पकमेश् वक, हमकी अपन काि मे डीँ ट नतह तदअ आ ने अपन गकम नीकीजग् मे हमकी चीडय। 2 हे पभु, हमकी पक दयी वर। हम वमजाक ि्, हे पभु, हमकी ठ्व वर। तवएव चँ हमक हड् सभ पके शीन अति। 3 हमक पीर सेहा घयकीहतट मे अति, मुदी अहीँ , हे पभु, अहीँ वचेव तदन िरक? 4 हे पकमेश् वक, घुरक जीउ, हमक पीर वेँ यचीउ। 5 मृच् यु मे अहीँ व सकर नतह हाइच अति। 6 हम अपन वुहकै च रीतव गेल ि्। भरक कीतच हमकी हे लयीव लेल अपन तयिीओन यनी दै च ि्; हम अपन साफी पक नाक सॅ पीतन दै च ि् । 7 दु खव वीकरे ँ हमक आँ रख भस भऽ गेल अति। हमक सभ दु शनव वीकरे ँ ई य्ढ भ’ जीइच अति। 8 हे सभ अिमस वकऽ वली सभ, हमकी सँ हतट जीउ। तवएव चँ पकमेश् वक हमक वीनयीव आवीज सुनने ितर। 9 पकमेश् वक हमक तवनच् सुनलतन। हमक पीरसनी पकमेश् वक गहर वकचीह।

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स्वीकारो, पशीचीप, यहील्, एवं सुतच व् पीरसनी एवं वरीएँ |

10 हमक सभ शतु लर्च हाउ आ यहच पके शीन हाउ, ओ सभ घुरक वऽ घुरक वऽ अचीनव लर्च भऽ जीय। भजन 51:1-19 1 (पमुख संग्चवीक वेँ, दीऊदव भजन, जखन नीरन भतवषवोी यचशेयी गेलीव यीद हनवी लग अयलीह।) हे पकमेश् वक, अपन दयीव अनुसीक हमकी पक दयी वर। 2 हमकी हमक अिमस सँ प्की चकहे ँ िाउ, आ हमकी पीप सँ शुब वर। 3 हम अपन अपकीि स्वीक वकै च ि्, आ हमक पीप सतदखन हमकी साझीँ कहै च अति। 4 हम अहीँ व तवरब मीत पीप वेलहँ आ अहीँ व नजरक मे ई अिलीह वीज वेलहँ , जीतह सँ अहीँ यजैच वील िम् ठहकी सवय आ जखन अहीँ नीय वकय चखन सष भऽ जीयय। 5 दे ख्, हम अिमस मे आवीक लेलहँ । आ पीप मे हमक मीय हमकी गभस मे कीरख लेलतन। 6 दे ख्, अहीँ भ्चकव भीग मे सच् य चीहै च ि्, आ नुवीयल भीग मे अहीँ हमकी युरबव परकचय दे य। 7 हमकी तहसाप सँ शुब वर, हम शुब भ’ जीयय, हमकी िाउ, हम यफस सँ उ्क भ’ जीयय। 8 हमकी हषस आ हषसव यीच सुनीउ। जीतह सँ अहीँ जे हड् चातड दे लहँ से आनर्च हा।” 9 हमक पीप सँ अपन मुँह नुवी वऽ हमक सभ अिमस मेटी तदअ। 10 हे पकमेश् वक, हमकी मे शुब हदयव सृजन वर। आ हमकी भ्चक एवटी सह् भीवनी वे नव्न्वकर वर। 11 हमकी अपन साझीँ सँ द् क नतह फेतव तदअ। आ अपन पतवत आच् मी हमकी सँ नतह ि्न्।” 12 अपन उबीकव आन् हमकी फेक सँ दऽ तदअ। आ अपन मुो आच् मी सँ हमकी सहीकी तदअ। 13 चखन हम अपकीि् सभ वेँ अहीँ व यीट तसखीएय। पीप् सभ चाकी तदस यदतल जेचीह।” 14 हे पकमेश् वक, हे हमक उबीकव पकमेश् वक, हमकी ख्नव अपकीि सँ मुो वर। 15 हे पभु , हमक ठाक खाल्। हमक मुँह चाहक सुतच वकच।” 16 अहीँ यतलदीन नतह चीहै च ि्। अनरी हम ओवकी दऽ दे य, अहीँ हामयतल मे पसर नतह हाइच ि्। 17 पकमेश् वकव यतलदीन सभ ट् टल-फ्टल आच् मी अति, ट् टल-फ्टल आ पशीचीतपच हदय वेँ हे पकमेश् वक, अहीँ तचकस् वीक नतह वकय। 18 अपन पसरची मे तसयानव लेल न्व वीज वर, यरशलेमव दे यील यनीउ। 19 चखन अहीँ िीतमसवचीव यतलदीन, हामयतल आ सम्रस हामयतल सँ पसर हायय। भजन 86:1-17 1 (दीऊदव पीरसनी।) हे पभु, वीन झुवीउ, हमक यीच सुन्, तवएव चँ हम गक्य आ गक्य ि्। 2 हमक आती वेँ यचीउ; तवएव चँ हम पतवत ि्, हे हमक पकमेश् वक, अहीँ पक भकासी वकऽ वली सेवव वेँ यचीउ।” 3 हे पभु, हमकी पक दयी वर, तवएव चँ हम अहीँ लग तनत पुवीकै च ि्। 4 अपन सेववव पीर वेँ आनर्च वर, वीकर, हे पभु, हम अहीँ व लेल अपन पीर उठयैच ि्। 5 हे पभु, अहीँ न्व ि् आ कमी वकयीव लेल चैयीक ि्। आ जे सभ अहीँ वेँ पुवीकै च अति, चवकी पक दयीव पचुकची। 6 हे पकमेश् वक, हमक पीरसनी पक वीन वर। आ हमक तवनच्व आवीज पक धीन तदयौव। 7 हम अपन तवपततव तदन अहीँ वेँ पुवीकय, तवएव चँ अहीँ हमकी उतक दे य। 8 हे पभु, दे वची सभव य्च अहीँ व सदश तवया नतह अति। आ ने अहीँ व वीज जवीँ वाना वीज अति। 9 हे पभु, जे सभ जीतच अहीँ यनौने ि्, से सभ आतय वऽ अहीँ व समक आकीिनी वकच। आ चाहक नीमव मतहमी वकच। 10 अहीँ महीन ि् आ आशयसव वीज वकै च ि्। 11 हे पभु, हमकी अपन यीट तसखीउ। हम चाहक सत मे चलय, चाहक नीम सँ डकयीव लेल हमक मान वेँ एवजुट वर।

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स्वीकारो, पशीचीप, यहील्, एवं सुतच व् पीरसनी एवं वरीएँ |

12 हे हमक पकमेश् वक, हम अहीँ व सुतच प्की मान सँ वकय। 13 हमकी पतच अहीँ व दयी यहच पैघ अति, आ अहीँ हमक पीर वेँ न्चीँ व नकव सँ मुो वऽ दे लहँ । 14 हे पकमेश् वक, घमंड् लाव सभ हमकी तवरब उतठ गेल अति आ तहं सव लावव सभी हमक पीरव खाज मे लीगल अति। आ अहीँ वेँ हनवी सभव साझीँ नतह कीरख दे लहँ ।” 15 मुदी, हे पभु, अहीँ दयीलु, वृपीलु, िैयसवीन आ दयी आ सत सँ भकल पकमेश् वक ि्। 16 हे हमकी तदस घुतम वऽ हमकी पक दयी वर। अपन दीस् वेँ अपन सीमरस दऽ तदयौव आ अपन दीस्व येटी वेँ यचीउ।” 17 हमकी न्वव तनशीन् दे खीउ। जे हमकी सँ घृरी वकै च अति, से दे रख वऽ लर्च भऽ जीय। भजन 103:1-22 1 (दीऊदव भजन।) हे हमक पीर, पकमेश् वकव आश्ष वर। 2 हे हमक पीर, पकमेश् वकव आश्ष वर, आ हनवक सभटी लीभ नतह तयसरक जीउ। 3 ओ अहीँ व सभटी अपकीि कमी वकै च ितर। जे चाहक सभ काग वेँ ठ्व वकै च अति। 4 जे चाहक पीर वेँ तवनीश सँ मुो वकै च अति। जे अहीँ पक दयी आ वामल दयीव मुवुट पतहकयैच ितर। 5 जे अहीँ व मुँह न्व यीच सँ चृप वकै च अति। जीतह सँ चाहक जवीन् गरड जवीँ नव भ' जीइच अति। 6 पकमेश् वक सभ उत्तडच लावव लेल िीतमसवची आ नीय वकै च ितर। 7 ओ म्सी वेँ अपन यीट-यीट, इसीएलव सन् चीन सभ वेँ अपन वीजव जीनवीक् दे लतन। 8 पकमेश् वक दयीलु आ वृपीलु ितर, काि मे मंद ितर आ दयी मे पचुक ितर। 9 ओ सतदखन डीँ टच नतह, आ ने अपन काि वेँ सदीव लेल कीखच। 10 ओ हमकी सभव पीपव यीद हमकी सभव संग ववहीक नतह वयलतन। आ ने हमकी सभव अिमसव अनुसीक फल दे लतन। 11 जतहनी पृर् व् सँ ऊपक स् वगस ऊँच अति, चतहनी हनवी डकय यली लाव सभव पतच हनवक दयी ओचये पैघ अति। 12 प्य पतशम सँ जचेव द् क अति, ओ हमकी सभव अपकीि वेँ हमकी सभ सँ द् क वयलतन। 13 जतहनी तपची अपन संचीन पक दयी वकै च अति, चतहनी पकमेश् वक हनवी डकय यली सभ पक दयी वकै च ितर। 14 तवएव चँ ओ हमकी सभव फेम वेँ जनैच ितर। ओवकी मान पडै च िै व जे हम सभ ि्की ि्। 15 मनुखव ज्वन घीस जवीँ हाइच िै व, खेचव फ्ल जवीँ फलैच-फ्लैच अति। 16 तवएव चँ हवी ओवकी ऊपक सँ गुजकै च अति आ ओ चतल गेल अति। ओवक रीन आय ओवकी नतह तच्च।” 17 मुदी पकमेश् वकव दयी अनन सँ अनन िरक हनवी सँ डकय यली सभ पक कहै च ितन आ हनवक िीतमसवची सनीन सभव सन् चीन सभ पक कहै च ितन। 18 जे सभ हनवक वीची वेँ पीलन वकै च ितर आ जे हनवक आजी सभ वेँ मनन वकै च ितर, हनवी सभ वेँ प्की वकयीव लेल। 19 पकमेश् वक स् वगस मे अपन तसंहीसन चैयीक वयलतन अति। ओवक कीज सभ पक कीज वकै च अति। 20 हे हनवक स् वगसद्च सभ, जे सभ सीमर्स य मे उतृष ि् आ हनवक आजीव पीलन वकै च ि् आ हनवक वचनव आवीज सुनैच ि्, पभुव आश्ष वर। 21 अहीँ सभ हनवक सभ सेनी, अहीँ सभ पकमेश् वकव आश्ष वर। अहीँ सभ हनवक सेवव सभ, जे हनवक मन मे वीज वकै च ि्। 22 पभुव आश्ष वर, हनवक सभटी वीज हनवक पभुव सभ स् रीन मे। भजन 130:1-8 1 हे पभु, हम गह्कं मे सँ अहीँ वेँ पुवीकलहँ ।

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स्वीकारो, पशीचीप, यहील्, एवं सुतच व् पीरसनी एवं वरीएँ |

2 पभु, हमक आवीज सुन्, अहीँ व वीन हमक तवनच्व आवीज पक धीन कीखय। 3 हे पभु, जँ अहीँ अिमसव तनशीन् लगीय् चँ वे ठीढ हायच? 4 मुदी अहीँ व संग कमी अति जीतह सँ अहीँ डरक जीयय। 5 हम पभुव पच्की वकै च ि्, हमक पीर पच्की वकै च अति, आ हनवक वचन पक आशी वकै च ि्। 6 हमक पीर भाक मे जीगल लाव सँ येस् पभुव पच्की वकै च अति। 7 इसीएल पकमेश् वक पक आशी कीख्, तवएव चँ पकमेश् वकव दयी अति आ हनवी संग पचुक माक भेटैच अति। 8 ओ इसीएल वेँ अपन सभ पीप सँ मुो वकच।

मनशे हे पभु, हमकी सभव प्वसज अबीहम, इसहीव आ यीव्य आ हनवी सभव िीतमसव वंशव सवसशरोमीन पकमेश् वक। जे आवीश-पृथ् वेँ ओवक सभ आभ्षरव संग यनौने ितर। जे चाहक आजीव वचन सँ समुद वेँ यीर् दे ने अति। जे गह्कं मे यंद वऽ दे ने ि् आ ओवकी पक चाहक भयीवह आ गौकवशील् नीम सँ माहक लगी दे ने ि्। तजनवी सँ सभ लाव डकै च अति आ अहीँ व सीमरसव साझीँ वीँ तप कहल अति। वीकर, अहीँ व मतहमीव मतहमी नतह सहल जी सवैच अति, आ पीप् सभव पतच अहीँ व कातिच िमव् दे ययवली यीच महतव अति, मुदी अहीँ व दयीलु पतचजी अरीह आ अरीह अति। वीकर, अहीँ पकम पकमेश् वक ि्, यहच दयीलु, िैयसवीन, यहच दयीलु आ मनुष् यव दु ष् टचीव पतच पशीचीप वकै च ि्। हे पभु, अहीँ अपन महीन भलीईव अनुसीक अहीँ व तवरब पीप वेतनहीक सभ वेँ पशीचीप आ कमी वकयीव पतचजी वेलहँ आ पीप् सभ वेँ अपन अनंच दयी सँ पशीचीप वकयीव वचन दे लहँ जीतह सँ ओ सभ उबीक पीतय सवय। चे ँ हे पभु, जे िम् लावव पकमेश् वक ि्, अहीँ िम् लाव सभव लेल पशीचीप वकयीव लेल नतह दे लहँ जेनी अबीहम, इसहीव आ यीव्य वेँ, जे अहीँ व तवरब पीप नतह वेने ितर। मुदी अहीँ हमकी पीप् वेँ पशीचीप वकयीव लेल तनिीस रकच वऽ दे लहँ , तवएव चँ हम समुदव यीलु सँ येस् पीप वेलहँ ।” हे पभु, हमक अपकीि यतढ गेल अति, हमक अपकीि यतढ गेल अति, आ हम अपन अिमसव यहलचीव वीकरे ँ सगसव ऊँचीई दे खयीव आ दे खयीव याग नतह ि्। हम लाहीव यहच कीस पट् ल’ व’ झुवल ि्, जे हम अपन मीर नतह उठी सवैच ि् आ ने वाना मुरो पीतय सवैच ि्, वीकर हम अहीँ व काि भडवी दे लहँ आ अहीँ व सीमने अिलीह वेलहँ , हम अहीँ व इची नतह वेलहँ आ ने अहीँ व आजीव पीलन वेलहँ , हम घृतरच वीज ठीढ वएलहँ आ अपकीि वेँ यढी दे लहँ । आय हम अपन हदयव ठे हन झुतव वऽ अहीँ सँ वृपीव तवनच् वकै च ि्। हम पीप वेलहँ , हे पभु, हम पीप वेलहँ आ हम अपन अपकीि वेँ स्वीक वकै च ि्, चे ँ हम अहीँ सँ तवनमचीप्वसव तवनच् वकै च ि् जे, हे पभु, हमकी कमी वर, हमकी कमी वर आ हमक अपकीि सँ हमकी नष नतह वर। हमकी लेल अिलीह सुकतकच व' व' हमकी पक सदी-सदी लेल काि नतह वर। आ ने हमकी पृथ्व तनचली भीग मे दाष् ठहकीउ। अहीँ पकमेश् वक ि्, पशीचीप वकतनहीक सभव पकमेश् वक ि्। अहीँ अपन सभ भलीई हमकी मे दे खय, तवएव चँ अहीँ हमकी अयाग वेँ उबीक वकय। चे ँ हम ज्वन भरक चाहक सुतच वकय, तवएव चँ आवीशव सभ सीमर्स य चाहक सुतच वकै च अति, आ मतहमी अनन वील िरक चाहक अति। आम्न।

यानी यानी २:१-१० 1 चखन यानी मीिव पेट सँ अपन पकमेश् वक पकमेश् वक सँ पीरसनी वयलतन। 2 ओ वहलतरन, “हम अपन दु ःखव वीकरे ँ पकमेश् वक वेँ पुवीकलहँ आ ओ हमक यीच सुनलतन। हम नकवव पेटसँ तचतचयी उठलहँ आ अहीँ हमक आवीज सुनलहँ । 3 अहीँ हमकी गह्कं मे , समुदव य्च मे फेतव दे ने िलहँ । यीतढ हमकी चीर वीच घेकने िल।

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स्वीकारो, पशीचीप, यहील्, एवं सुतच व् पीरसनी एवं वरीएँ |

4 चखन हम वहतलयतन, “हम अहीँ व नजरक सँ यीहक भ’ गेल ि्। चैया हम फेक अहीँ व पतवत मर्क तदस चवय। 5 पीतन हमकी चीर वीच घेकने िल, आती िरक, गह् ंक हमकी चीर वीच यर व’ दे लव, खकपचवीक हमक मीर मे लपेटल िल। 6 हम पहीडव चलहट् मे उचकलहँ । िकच् अपन सलीखव संग हमकी चीर वीच लेल िल, चइया हे हमक पकमेश् वक पकमेश् वक, अहीँ हमक पीर वेँ तवनीश सँ उचीरक दे लहँ ।” 7 जखन हमक पीर हमकी भ्चक येहाश भऽ गेल चखन हम पकमेश् वकव सकर वयल, आ हमक पीरसनी अहीँ व पतवत मन् तदक मे अहीँ लग आतय गेल। 8 जे सभ झ्ठव वरसचीव पीलन वकै च अति, से सभ अपन दयी िातड दै च अति। 9 मुदी हम अहीँ वेँ िनवीदव आवीज मे यतलदीन दे य। हम जे पर वेने ि् से चुवी दे य। उबीक पभुव अति। 10 पकमेश् वक मीि सभ सँ यीजल आ ओ यानी वेँ शुष भ्तम पक उल् वऽ दे लव।

अजरकयीह अजरकयी 1:1-22 वे पीरसनी 1 ओ सभ आतग मे चलैच कहलीह, पकमेश् वकव सुतच वकै च आ पभुव आश्ष दै च िलीह। 2 चखन अजरकयी ठीढ भऽ वऽ एतह चकहे ँ पीरसनी वयलतन। आतग वे य्च मुँह खातल वऽ वहलतरन। 3 हे पभु, हमकी सभव प्वसजव पकमेश् वक, अहीँ िन ि्। 4 अहीँ हमकी सभव संग जे तविु वेलहँ , चीतह मे अहीँ िम् ि्। 5 अहीँ हमकी सभ पक आ हमकी सभव प्वसजव पतवत नगक यरशलेम पक जे सभ यीच अनलहँ , चीतह मे अहीँ सच् य न् यीय वेलहँ । 6 हम सभ अहीँ सँ तवदी भऽ पीप वऽ वऽ अिमस वयलहँ । 7 हम सभ सभ यीच मे उलंघन वेलहँ , आ ने अहीँ व आजीव पीलन वेलहँ आ ने ओवक पीलन वेलहँ आ ने अहीँ व आजीव अनुसीक वेलहँ जीतह सँ हमकी सभ वेँ न्व लीगय। 8 चे ँ जे तविु अहीँ हमकी सभ पक अनलहँ आ जे तविु हमकी सभव संग वेलहँ , से सभ सच् य न् यीय मे वयलहँ । 9 अहीँ हमकी सभ वेँ अिम शतु सभव हीर मे सौंपलहँ , जे पकमेश् वकव घृतरच अति, आ एवटी अनीय् कीजी आ समस संसीक मे सभ सँ दु ष कीजीव हीर मे। 10 आय हम सभ अपन मुँह नतह खातल सवैच ि्, हम सभ अहीँ व सेवव सभव लेल लीज आ तन्ी यतन गेल ि्। आ जे अहीँ व आकीिनी वकै च अति। 11 चैया अपन नीमव वीकरे ँ हमकी सभ वेँ प्रस रप सँ नतह िाड् आ ने अपन वीची वेँ चातड तदयौव। 12 अपन तपय अबीहमव लेल, अपन सेवव इसहीव आ अपन पतवत इसीएलव लेल, हमकी सभ सँ अपन दयी वेँ द् क नतह वर। 13 अहीँ हनवी सभ सँ यीच वऽ वऽ वचन दे लहँ जे अहीँ हनवी सभव संचीन वेँ स् वगसव चीकी जवीँ आ समुदव वीच मे पडल यीलु जवीँ यढी दे य। 14 हे पभु, हम सभ वाना जीतच सँ वम भऽ गेल ि् आ अपन पीपव वीकरे ँ समस संसीक मे एतह तदनव न्चीँ कीखल गेल ि्। 15 एतह समय मे वाना कीजवुमीक वी पवव् ची वी नेची, हामयतल, यतल, यतल, ि्प, आ अहीँ व समक यतल चढयीव आ दयी वकयीव रीन नतह अति। 16 चैया पशीचीतपच हदय आ तवनम आच् मी सँ अपनी सभ वेँ स्वीक वयल जीय। 17 जेनी मेढव आ यैल वे हामयतल आ दस हजीक माट मेमनी वे हामयतल मे भेटैच अति, चतहनी आइ हमकी सभव यतलदीन अहीँ व नजरक मे कहय आ हमकी सभ वेँ प्की चकहे ँ अहीँ व पीिीँ पडयीव अनुमतच तदअ, तवएव चँ जे अहीँ पक भकासी वकै च अति, से सभ लर्च नतह हायच। 6


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18 आय हम सभ मान सँ अहीँ व पीिीँ -पीिीँ चलैच ि्, अहीँ सँ डकै च ि् आ अहीँ व मुँह चवैच ि्। 19 हमकी सभ वेँ लर्च नतह वर, यल् तव अपन दयी आ अपन दयीव पचुकचीव अनुसीक हमकी सभ पक ववहीक वर। 20 अपन चमतीरकव वीजव अनुसीक हमकी सभ वेँ सेहा यँचीउ, हे पभु, अपन नीमव मतहमी वर। 21 ओ सभ अपन समस सीमर्स य आ सीमर्स य मे लर्च भऽ जीय आ ओवक सीमर्स य ट् तट जीय। 22 ओ सभ ई जीतन लेतर जे अहीँ पकमेश् वक ि्, एवलौची पकमेश् वक ि् आ समस संसीक पक मतहमीवीन ि्।

नहे म ीयीह नहे मीह 1:1-11 1 हीवतलयीव पुत नहे मीहव वचन। य्सम वषस मे तवसेउ मीस मे हम शुशीन महल मे िलहँ । 2 हमक एवटी भीय हीनन् आ यहदीव तविु लाव आतय गेलीह। हम हनवी सभ सँ यंद् मे सँ यचल यहद् सभव तवषय मे पुितलयतन आ यरशलेमव तवषय मे। 3 ओ सभ हमकी वहलतरन, “ओचय पीं च मे यंद् मे जे यचल अति, ओ सभ यहच वष आ तन्ी मे अति। 4 ई यीच सुतन हम यैतस वऽ वीतन वऽ वीतन वऽ तविु तदन शाव वकै च कहलहँ आ उपवीस वऽ वऽ स् वगसव पकमेश् वकव समक पीरसनी वेलहँ । 5 ओ वहलतरन, “हे स् वगसव पकमेश् वक, महीन आ भयीवह पकमेश् वक, जे हनवी सँ पेम वकै च ितर आ हनवक आजीव पीलन वकै च ितर, हनवी सभव लेल वीची आ दयीव पीलन वकै च ि्। 6 आय अहीँ व वीन धीन कीख् आ आँ रख खुतज जीउ, जीतह सँ अहीँ अपन सेववव पीरसनी सुतन सवय जे हम एखन तदन-कीतच अहीँ व साझीँ मे पीरसनी वकै च ि्, जे अहीँ व सेवव इसीएलव संचीन सभव लेल पीरसनी वकै च ि्, आ इसीएलव संचीन सभव पीप वेँ स्वीक वर, जे हम सभ अहीँ व तवरब पीप वेलहँ । 7 हम सभ अहीँ व तवकाि मे यहच भष ववहीक वेलहँ , आ ने आजी, तनयम आ नीय आ नीयव पीलन नतह वेलहँ , जे अहीँ अपन सेवव म्सी वेँ आजी दे ने िलहँ । 8 हम अहीँ सँ तवनच् वकै च ि् जे अहीँ अपन सेवव म्सी वेँ जे यीच आजी दे ने कह्, से मान कीख् , “जँ अहीँ सभ उलंघन वकय चँ हम अहीँ सभ वेँ जीतच-जीतच मे तितडयी दे य।” 9 मुदी जँ अहीँ सभ हमकी तदस घुतम वऽ हमक आजी सभव पीलन वकय आ ओवक पीलन वकय। जँ अहीँ सभ मे सँ स् वगसव अन् च भीग िरक फेवल गेल ि्, मुदी हम ओवकी सभ वेँ ओतह ठीम सँ जमी वऽ वऽ ओतह रीन पक पहँ ची दे य जीतह ठीम हम अपन नीम कखयीव लेल चुनने ि्।” 10 ई सभ अहीँ व सेवव आ अहीँ व पजी अति, जवकी अहीँ अपन पैघ सीमर्स य आ अपन यलशील् हीर सँ मुो वएने ि्। 11 हे पभु, हम अहीँ सँ तवनच् वकै च ि् जे आय अहीँ व वीन अपन सेवव पीरसनी आ अहीँ व नीम सँ डकयीव इची कखतनहीक सेवव सभव पीरसनी पक धीन कीख्। तवएव चँ हम कीजीव पीली-पीन् िलहँ ।

पभु वे पीरसन ी मत् 6:9-13 9 चे ँ अहीँ सभ एतह चकहे ँ पीरसनी वर, “हे हमक सभव तपची जे स् वगस मे ि्, अहीँ व नीम पतवत हाअय।” 10 चाहक कीज आऊ। जेनी सगस मे हाइच अति चतहनी पृथ् पक सेहा अहीँ व इची प्की हा। 11 आइ हमकी सभ वेँ काजव काट् तदअ। 12 अपनी सभव ऋर कमी वर, जेनी हम सभ अपन ऋर् वेँ कमी वकै च ि्। 13 हमकी सभ वेँ पक्की मे नतह लऽ जीउ, यल् तव हमकी सभ वेँ अिलीह सँ यचीउ। आम्न।

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ल्वी ११:१-४ 1 जखन ओ एव ठीम पीरसनी वऽ कहल िलीह चखन हनवक एवटी तशष् य हनवी वहलतरन, “पभु, हमकी सभ वेँ पीरसनी वकय तसखीउ जेनी य्हन् नी अपन तशष् य सभ वेँ सेहा तसखयैच िलीह।” 2 ओ हनवी सभ वेँ वहलतरन, “ जखन अहीँ सभ पीरसनी वकै च ि् चँ वह जे, ‘हमक सभव तपची जे स् वगस मे ि्, अहीँ व नीम पतवत हाअय।” चाहक कीज आऊ। चाहक इची प्की हाउ, जेनी सगस मे , पृथ् मे सेहा। 3 हमकी सभ वेँ तदन-पतचतदन अपन तदनव काट् तदअ। 4 आ हमकी सभव पीप कमी वर। तवएव चँ हम सभ सेहा कमी वऽ दै च ि् जे हमकी सभव ऋर् अति। आ हमकी सभ वेँ पक्की मे नतह लऽ जीउ। मुदी हमकी सभ वेँ अिलीह सँ यचीउ।

वक वलेक क वे ल्वी 18:9-14 9 ओ ई दषीन ओतह तविु लाव सभ वेँ वहलतरन जे अपनी पक भकासी वकै च िल जे ओ सभ िीतमसव अति आ दासक वेँ तचकसीक वकै च िल। 10 द् गाटे पीरसनी वकयीव लेल मन् तदक मे चतल गेलीह। एवटी फरकस्, आ दासक वक वस्ल्। 11 फरकस् ठीढ भऽ वऽ मने -मन पीरसनी वयलतन, “पकमेश् वक, हम अहीँ वेँ िनवीद दै च ि् जे हम आन लाव जवीँ ल्टपीट वकयवली, अनीय्, वतभचीक् वी एतह वकदीची जवीँ नतह ि्।” 12 हम सपीह मे द् येक उपवीस वकै च ि्, जे तविु अति चीतह मे सँ दसम भीग दै च ि्। 13 वक लेतनहीक द् क ठीढ भऽ वऽ स् वगस तदस एचेव नजरक नतह उठौलतन, यल् तव हनवक िीच् पक चाट लगी वऽ वहलतरन, “पकमेश् वक हमकी पीप् पक दयी वकतरन।” 14 हम अहीँ सभ वेँ वहै च ि् जे ई आदम् दासक सँ येस् िम् भऽ वऽ अपन घक गेल। जे अपनी वेँ नम वकै च अति, से ऊँच वयल जीयच।”

असॉट् ड शाव पकमेश् वक कीतच मे सुलेमीन वेँ पगट भऽ वहलतरन, “हम अहीँ व पीरसनी सुनलहँ आ एतह रीन वेँ अपनी लेल यतलदीनव घक चुनने ि्।” जँ हम सगस वेँ यंद वऽ दे य जीतह सँ यकखी नतह हा, वी तटड् सभ वेँ दे श वेँ खीययीव आजी दे य, वी जँ हम अपन लाव मे महीमीक् पठी दे य। जँ हमक लाव जे हमक नीम सँ यजीओल गेल अति, ओ अपनी वेँ नम यनी वऽ पीरसनी वकच आ हमक मुँह चीवच आ अपन दु ष् ट यीट सँ हतट जीयच। चखन हम स् वगस सँ सुनय आ हनवी सभव पीप कमी वकय आ हनवी सभव दे श वेँ ठ्व वकय। आय हमक आँ रख खुजल कहच आ वीन एतह ठीम जे पीरसनी वयल जीइच अति चीतह पक सुनैच कहच। 2 इतचहीस 7:12-15 तवएव चँ िम् आदम् सीच येक खतस पडै च अति आ ज्तय उठै च अति, मुदी दु ष अिलीह मे पतड जीयच। न्तचवचन 24:16 िाउ, सीफ वर; हमक आँ रखव साझीँ सँ अहीँ व वीजव अिलीह वेँ द् क वर। अिलीह वकय िातड तदयौव। न्व वकय स्ख्; नीय चीव्, उत्तडच वे कीहच तदयौ, अनीर वे नीय वर, तविवी वे लेल तनहाकी वर। पकमेश् वक वहै च ितर जे आय आतय वऽ एव संग तवचीक-तवमशस वर। तवकतमज् कं ग जवीँ लील भ’ गेल हाइ, मुदी ऊन जवीँ भ’ जेचै। यशीयीह 1:16-18 पभु वे दयी वे वीकर िै तव हम् नष नै हाय जीय तियै , वै्​् तव हनवऽ वररी क्र नै हाय िै । ओ सभ भाके -भाक नव हाइच अति, अहीँ व तवश् वीस पैघ अति। तवलीप ३:२२-२३

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आऊ, हम सभ पकमेश् वक लग घुरक जीइ, तवएव चँ ओ फीतड दे लतन आ ओ हमकी सभ वेँ ठ्व वकचीह। ओ मीरक दे लव, आ हमकी सभ वेँ यीर् दे च।” द् तदनव यीद ओ हमकी सभ वेँ पुनज्तवच वकचीह, चेसक तदन मे ओ हमकी सभ वेँ ज्तय लेचीह आ हम सभ हनवक नजरक मे ज्तवच कहय। हाशे 6:1-2 चे ँ हम पकमेश् वक तदस चवय। हम अपन उबीकव पकमेश् वकव पच्की वकय, हमक पकमेश् वक हमक यीच सुनचीह। हे हमक शतु, हमकी पक आनर्च नतह हाउ, जखन हम खसय चखन हम उठय। जखन हम अ्ीक मे यैसय चखन पकमेश् वक हमकी लेल इजाच यनचीह। हम पकमेश् वकव काि सहन वकय, तवएव चँ हम हनवी तवरब पीप वेलहँ , जीयच िरक ओ हमक यीच नतह वकच आ हमकी लेल नीय नतह वकच। म्वी 7:7-9 चखन हमकी सभ लग एवटी पैघ महीपुकातहच ितर जे स् वगस मे चतल गेल ितर, पकमेश् वकव पुत य्शु, आउ, हम सभ अपन वचन वेँ मजय्च् सँ पवतड ल्। वीकर, हमकी सभव एहन महीपुकातहच नतह अति, जवकी अपन दु यसलचीव भीव सँ नतह िु तय सवैच अति। मुदी सभ चकहे ँ हमकी सभ जवीँ पलातभच भेलीह, मुदी पीप नतह। चे ँ आउ, हम सभ तनभ्वचीप्वसव अनुगहव तसंहीसन पक आतय जीउ, जीतह सँ हमकी सभ वेँ दयी भेटय आ आवशवचीव समय मे सहीयची वकयीव लेल वृपी भेतट जीय। इबीतनयां 4:14-16 जँ हम सभ वहै च ि् जे हनवी संग संगतच अति आ अ्ीक मे चलैच ि् चँ झ्ठ यजैच ि् आ सत वेँ नतह वकै च ि्, मुदी जँ हम सभ इजाच मे चलैच ि्, जेनी ओ इजाच मे ितर, चँ हमकी सभ वेँ एव-दासकव संगतच अति आ हनवक पुत य्शु मस्हव ख्न हमकी सभ वेँ सभ पीप सँ शुब वकै च अति। जँ हम सभ वहै च ि् जे हमकी सभ लग वाना पीप नतह अति चँ हम सभ अपनी वेँ िाखी दै च ि्, आ सत हमकी सभ मे नतह अति। जँ हम सभ अपन पीप स्वीक वकै च ि् चँ ओ तवशीस् आ नीय् ितर जे हमकी सभव पीप कमी वकतर, आ हमकी सभ वेँ सभ अिमस सँ शुब वकतर। 10जँ हम सभ वहै च ि् जे हम सभ पीप नतह वेलहँ चँ ओवकी झ्ठ यीजऽ दै च ि् आ ओवक वचन हमकी सभ मे नतह अति। 1 य्हरी 1:6-10 अपन पीप स्वीक वकयी मे लीज नतह वर। आ नद्व िीक पक यल नतह। उपदे शव 4:26 मुदी जे सभ पशीचीप वकै च िल, चवकी सभ वेँ ओ ओवकी सभ वेँ वीपस वकयीव अनुमतच दे लतन, आ िैयस मे तवफल कहतनहीक सभ वेँ सीनतनी दे लतन। पभु लग घुरक जीउ आ अपन पीप िाड्, हनवक मुँह पक अपन पीरसनी वर आ वम अपकीि वर। पकमेश् वकव तदस घुतम जीउ आ अिमस सँ मुड्, तवएव चँ ओ अहीँ वेँ अन् हीक मे सँ सीवव इजाच मे लऽ जीयच आ अहीँ घृतरच वीज सँ घृरी वकय। उपदे शव 17:24-26 हे हमक सनीन सभ, सीनतनी कीख्, पकमेश् वक सँ पुवीर, तवएव चँ अहीँ सभ वेँ ओतह यीचव सकर वयल जीयच जे अहीँ सभ पक ई सभ यीच अनने िलीह।” तवएव चँ जतहनी अहीँ सभ पकमेश् वक सँ भटवयीव तवचीक िल, चतहनी घुरक वऽ हनवी दस गुनी येस् चीवय। तवएव चँ जे वेओ अहीँ सभ पक ई तवपतत अनने अति, से अहीँ सभ वेँ उबीकव संग अनन आन् आनच। हे यरशलेम, न्व मान कीख्, तवएव च’ जे अहीँ वेँ ई नीम दे लव, से अहीँ वेँ सीनतनी दे च। यरव ४:२७-३०

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