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वी ं
पुस ्
परिचय ई पोथी प्चीच अत्च्ि् मंद भय्वहत् सँ गूँजि िहल गििब्् भय्वह चीत्ि ि््ँ अजि । ई सीरिय् ्ेिऽ अत्च्िी एन्ट्स ्ेिऽ उतीपच प॑ आध्रित एगो अध्य िे ्ै, िे्ि् ्ुि लोगऽ च॑ एजपफेचीस, द मैडमैच ्हल्ै । पजहल शत्बी् िोमच इजतह्स मे दू ट् एहच अत्च्िी दि् अजि--दोसि, ्ैजलगुल्, दोसि तेिसी प्गल. एजह लेखच् रप ए्ट् वक्् अजि । एते् स्वध्चीपूव्् समय जचध्् रित ्यल गेल अजि भ्षण् उदय-अस; एते् जवच्श््िी अजि ए्ि त््; एते् अटल अजि ए्ि त््; एते् गहीिं ट्ि धक्; ए्ि त्् एते् शीतल--िे ए्ि स्च सि्सि व्कटु त्् चमूच् बजच लैत अजि । मुख ब्त अजि--स्हस। लेख् ्ेिऽ शुरआत पेरित त्् ्ेिऽ दश्च ्ेिऽ भ्वु् ्थच स॑ होय िै । हमि् लो्जच ्ेँ एजह बीसम शत्बी ्ेँ त््् युग बुझब ची् लगैत अजि आ ए्ि जवपिीत जमथ् युग सँ दे खब ची् लगैत अजि--तइयो एजह तिह् लेखच एहच ध्िण् ्ेँ चुचौती अजि। हमि् लो्जच ्ेँ ए्ट् एहच लेख् भेटैत अजि िे संभवतः ईस्ई युग सँ पजहचे पजहल शत्बी् िल्ह िे त््् ए्ट् स् दश्च् ्थच ्िै त िजथ िे आइयो टतबे शनकश्ली अजि िते् दू हि्ि वष् पजहचे िल | य्तच् ्क मे अवलो्च ् सेजटं ग अदम अजि । ्ोमल चीि् अचु्ूल हमि आधुजच् ््च पि ई भय्वह पह्ि ्िै त अजि । कजम् य्तच्् जवविण (सदी् ब्द सेजचश इन्कजिशच् स्धच् सुझ्व दै त) हमि् लो्जच् स्द् चौं््बय बल् तिी्् सं जवस्ि सं ्यल गेल अजि. बूढ्, स्त भ्इ आ म्ँ ्े सोइ् चरित ्े उदय त्, ई वक् िे उगत् ्े स्थ स्हस ्े ि्दू ्िै िै , ट्ि् चिम ्िै मे ्ुि चै ्िै िै । ईस्ई चच् ्ेिऽ प्चीच जपत् च॑ ई पुस् (हमि् प्स ई सीरिय्ई अचुव्द स॑ िै ) ्॑ उच चैजत् मूल आर जशक् ्ेिऽ ््म ्े रप म॑ स्वध्ची स॑ संिजकत ्िल्ै, आर ई जचसंदेह प्िं जभ् ईस्ई शहीदऽ म॑ स॑ बहत लोगऽ लेली परिजचत िे लै, िे ए्ि् पढी ्॑ शह्दत ्े मैद्च प॑ उतेजित होय गेलऽ िे लै । अध ्य 1
पेरित त्् ्े संबंध मे प्चीच ््ल ्े दश्च ्ी रपिे ख् | सभत् ्जहयो एजह सँ उच जवच्ि प्र चजह ्ेल् अजि । "दमच" ्े ए् चच्् । शो् 48 मे म्चव ि्जत ्े समस दश्च ्े संकेप मे वण्च ्यल गेल अजि | 1 उचतम जडगी मे द्श्जच् ई प् अजि िे हम चच्् ्िब्् पस्व िखैत िी, अथ्् त ्ी पेरित ््िण ि्ग-दे ष पि सव्च श्स् अजि; आ ए्ि दश्च पि हम गंभीित्पूव्् अह्ँ ् ध्च दे बय लेल आगह ्िब।
2 ््िण िे जवषय स्म्नतः ज्च् श्ख्् रप मे म्त आवश् चजह अजि, अजपतु एजह मे मह्चतम गुण् पशंस् सेहो श्जमल अजि, ि्जह सँ हमि अजभप्य आतसंयम सँ अजि। 3 अथ्् तत िँ त्् संयम, पेटूपच आ ््मु्त्् पजत्ूल ि्ग पि जचयंतण ्ियवल् जसद भ' ि्य त' ट्ि् सेहो स् रप सँ दे ख्टल गेल अजि िे ट ि्ग पि, दु ्त् ि््ँ , न्य् जविोधी, आ पुरषष् जविोधी पि, अथ्् त कोध आ पीप् आ भय पि। 4 मुद्, ज्िु गोटे पूजि स्ैत िजथ िे िँ ््िण ि्ग-दे ष् म्जल् अजि तँ ट जवसिण आ अज्चत् पि ज्ए् चजह जचयंतण िखैत अजि? हच्् लो्जच् उदे श उपह्स ्िब िलजच। 5 ए्ि उति अजि िे त्् सयं मच मे जचजहत दोष पि म्जल् चजह, अजपतु न्य आ पुरष्थ् आ संयम आ जचण्य् पजत्ूल ि्ग व् चैजत् दोष पि म्जल् अजि; आ हच्् लो्जच् म्मल् मे ए्ि जकय् िुचूच ्ेँ सम्र ्िब चजह, अजपतु हम सभ ट्ि सफलत्पूव्् जविोध ्िब् मे सकम बचेब्् अजि । 6 हम अह्ँ सभ् सोझ्ँ अचे् उद्हिण आजच स्ैत िी, िे जवजभन सोत सँ लेल गेल अजि, ितय त्् अपच् ्ेँ ि्ग-दे ष पि म्जल् स्जबत ्' दे चे अजि, मुद् एखच धरि िे सबसँ ची् उद्हिण हम द' स्ैत िी से अजि, सदत गुण् लेल मरि गेल लो्् उद्त आचिण, एजलि्बेथ आ स्त भ्इ आ म्त्। 7 ज्ए् तँ ई सभ अपच पीप्् जतिस्ि द्ि्, हँ , मृतु धरि, ई जसद ्यलजच िे त्् ि्ग-दे ष सँ शेर उठै त अजि। 8 हम एतय हच्् लो्जच् गुण् पशंस् मे पैघ ्' स्ैत िी, ट सभ, म्य् संग पुरष, िे एजह जदच मिै त िजथ, हम सभ चैजत् सौनय् आ भल्ई् पेम् लेल मच्बैत िी, मुद् हम हच्् सभ ्ेँ िे सम्च प्र ्यलजच अजि, त्जह पि हच्् सभ ्ेँ अजभचंदच ्िब। 9 ््िण, हच्् लो्जच् स्हस आ सहचशनक् पशंस्, म्त संस्ि् चजह अजपतु हच्् लो्जच् िल्द सभ् द्ि्, हच्् सभ ्ेँ टजह अत्च्ि् पतच् लेख् बच् दे ल्जच ि्जह मे हमि ि््् पपल िल, ट सभ अपच सहचशनक सँ अत्च्िी ्ेँ पि्जित ्िै त िल्ह, ि्जह सँ हच्् सभ् म्धमे हच्ि दे श शुद भेल। 10 मुद् हम वत्म्च मे एजह पि चच्् ्िब्् अवसि जच््लब, िखच हम सभ स्म्न जसद्ं त सँ शुर ्िब, िेच् हमि् ्िब्् आदजत अजि, आ तखच हम हच्् लो्जच् ्थ् जदस आगू बढब, सव्ज पिमेशि् मजहम् ्िब। 11 तखच हमि् लो्जच् जिज्स् ई अजि िे ्ी ि्ग-दे ष पि त्् सव्च म्जल् अजि। 12 मुद् हमि् सभ ्ेँ ई परिभ्जषत ्िब्् च्ही िे त्् ्ी अजि आ ि्ग ्ी अजि, आ ि्ग् ्ते् रप अजि, आ त्् सभ पि सव्च अजि ्ी चजह। 13 ््िण हम बुनद् िीवच ्ेँ स् जवच्ि-जवमश् सँ पजसच ्ियवल् मच म्चैत िी। 14 हम बुनद ्ेँ पिमेशत वि आ मचुषत य आ ट्ि ््िण् ज्च बुझैत िी। “ 16 बुनद, न्य आ न्य, स्हस आ संयम् रप मे पगट होइत अजि। 17 मुद् न्य व् आतसंयम टजह सभ पि ह्वी होइत अजि, ््िण, ए्ि म्धमे, सत मे, त्् ि्ग-दे ष पि अपच अजध््ि् पुज् ्िै त अजि।