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Maithili - 4th Book of Maccabees

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वी ं

पुस ्

परिचय ई पोथी प्चीच अत्च्ि् मंद भय्वहत् सँ गूँजि िहल गि​िब्​् भय्वह चीत्ि ि्​्ँ अजि । ई सीरिय् ्ेिऽ अत्च्िी एन्ट्स ्ेिऽ उतीपच प॑ आध्रित एगो अध्य िे ्ै, िे्ि् ्ुि लोगऽ च॑ एजपफेचीस, द मैडमैच ्हल्ै । पजहल शत्बी् िोमच इजतह्स मे दू ट् एहच अत्च्िी दि् अजि--दोसि, ्ैजलगुल्, दोसि तेिसी प्गल. एजह लेखच् रप ए्ट् वक्​् अजि । एते् स्वध्चीपूव्​् समय जचध्​् रित ्यल गेल अजि भ्षण् उदय-अस; एते् जवच्श्​्िी अजि ए्ि त्​्; एते् अटल अजि ए्ि त्​्; एते् गहीिं ट्ि धक्; ए्ि त्​् एते् शीतल--िे ए्ि स्च सि्सि व्कटु त्​् चमूच् बजच लैत अजि । मुख ब्त अजि--स्हस। लेख् ्ेिऽ शुरआत पेरित त्​् ्ेिऽ दश्च ्ेिऽ भ्वु् ्थच स॑ होय िै । हमि् लो्जच ्ेँ एजह बीसम शत्बी ्ेँ त्​्​् युग बुझब ची् लगैत अजि आ ए्ि जवपिीत जमथ् युग सँ दे खब ची् लगैत अजि--तइयो एजह तिह् लेखच एहच ध्िण् ्ेँ चुचौती अजि। हमि् लो्जच ्ेँ ए्ट् एहच लेख् भेटैत अजि िे संभवतः ईस्ई युग सँ पजहचे पजहल शत्बी् िल्ह िे त्​्​् ए्ट् स् दश्च् ्थच ्िै त िजथ िे आइयो टतबे शनकश्ली अजि िते् दू हि्ि वष् पजहचे िल | य्तच् ्क मे अवलो्च ् सेजटं ग अदम अजि । ्ोमल चीि् अचु्ूल हमि आधुजच् ्​्च पि ई भय्वह पह्ि ्िै त अजि । कजम् य्तच्​् जवविण (सदी् ब्द सेजचश इन्कजिशच् स्धच् सुझ्व दै त) हमि् लो्जच् स्द् चौं्​्बय बल् तिी्​् सं जवस्ि सं ्यल गेल अजि. बूढ्, स्त भ्इ आ म्ँ ्े सोइ् चरित ्े उदय त्, ई वक् िे उगत् ्े स्थ स्हस ्े ि्दू ्िै िै , ट्ि् चिम ्िै मे ्ुि चै ्िै िै । ईस्ई चच् ्ेिऽ प्चीच जपत् च॑ ई पुस् (हमि् प्स ई सीरिय्ई अचुव्द स॑ िै ) ्॑ उच चैजत् मूल आर जशक् ्ेिऽ ्​्म ्े रप म॑ स्वध्ची स॑ संिजकत ्िल्ै, आर ई जचसंदेह प्िं जभ् ईस्ई शहीदऽ म॑ स॑ बहत लोगऽ लेली परिजचत िे लै, िे ए्ि् पढी ्॑ शह्दत ्े मैद्च प॑ उतेजित होय गेलऽ िे लै । अध ्य 1

पेरित त्​् ्े संबंध मे प्चीच ्​्ल ्े दश्च ्ी रपिे ख् | सभत् ्जहयो एजह सँ उच जवच्ि प्र चजह ्ेल् अजि । "दमच" ्े ए् चच्​् । शो् 48 मे म्चव ि्जत ्े समस दश्च ्े संकेप मे वण्च ्यल गेल अजि | 1 उचतम जडगी मे द्श्जच् ई प् अजि िे हम चच्​् ्िब्​् पस्व िखैत िी, अथ्​् त ्ी पेरित ्​्िण ि्ग-दे ष पि सव्च श्स् अजि; आ ए्ि दश्च पि हम गंभीित्पूव्​् अह्ँ ् ध्च दे बय लेल आगह ्िब।

2 ्​्िण िे जवषय स्म्नतः ज्च् श्ख्​् रप मे म्त आवश् चजह अजि, अजपतु एजह मे मह्चतम गुण् पशंस् सेहो श्जमल अजि, ि्जह सँ हमि अजभप्य आतसंयम सँ अजि। 3 अथ्​् तत िँ त्​् संयम, पेटूपच आ ्​्मु्त्​् पजत्ूल ि्ग पि जचयंतण ्ियवल् जसद भ' ि्य त' ट्ि् सेहो स् रप सँ दे ख्टल गेल अजि िे ट ि्ग पि, दु ्त् ि्​्ँ , न्य् जविोधी, आ पुरषष् जविोधी पि, अथ्​् त कोध आ पीप् आ भय पि। 4 मुद्, ज्िु गोटे पूजि स्ैत िजथ िे िँ ्​्िण ि्ग-दे ष् म्जल् अजि तँ ट जवसिण आ अज्चत् पि ज्ए् चजह जचयंतण िखैत अजि? हच्​् लो्जच् उदे श उपह्स ्िब िलजच। 5 ए्ि उति अजि िे त्​् सयं मच मे जचजहत दोष पि म्जल् चजह, अजपतु न्य आ पुरष्थ् आ संयम आ जचण्य् पजत्ूल ि्ग व् चैजत् दोष पि म्जल् अजि; आ हच्​् लो्जच् म्मल् मे ए्ि जकय् िुचूच ्ेँ सम्र ्िब चजह, अजपतु हम सभ ट्ि सफलत्पूव्​् जविोध ्िब् मे सकम बचेब्​् अजि । 6 हम अह्ँ सभ् सोझ्ँ अचे् उद्हिण आजच स्ैत िी, िे जवजभन सोत सँ लेल गेल अजि, ितय त्​् अपच् ्ेँ ि्ग-दे ष पि म्जल् स्जबत ्' दे चे अजि, मुद् एखच धरि िे सबसँ ची् उद्हिण हम द' स्ैत िी से अजि, सदत गुण् लेल मरि गेल लो्​् उद्त आचिण, एजलि्बेथ आ स्त भ्इ आ म्त्। 7 ज्ए् तँ ई सभ अपच पीप्​् जतिस्ि द्ि्, हँ , मृतु धरि, ई जसद ्यलजच िे त्​् ि्ग-दे ष सँ शेर उठै त अजि। 8 हम एतय हच्​् लो्जच् गुण् पशंस् मे पैघ ्' स्ैत िी, ट सभ, म्य् संग पुरष, िे एजह जदच मिै त िजथ, हम सभ चैजत् सौनय् आ भल्ई् पेम् लेल मच्बैत िी, मुद् हम हच्​् सभ ्ेँ िे सम्च प्र ्यलजच अजि, त्जह पि हच्​् सभ ्ेँ अजभचंदच ्िब। 9 ्​्िण, हच्​् लो्जच् स्हस आ सहचशनक् पशंस्, म्त संस्ि् चजह अजपतु हच्​् लो्जच् िल्द सभ् द्ि्, हच्​् सभ ्ेँ टजह अत्च्ि् पतच् लेख् बच् दे ल्जच ि्जह मे हमि ि्​्​् पपल िल, ट सभ अपच सहचशनक सँ अत्च्िी ्ेँ पि्जित ्िै त िल्ह, ि्जह सँ हच्​् सभ् म्धमे हच्ि दे श शुद भेल। 10 मुद् हम वत्म्च मे एजह पि चच्​् ्िब्​् अवसि जच्​्लब, िखच हम सभ स्म्न जसद्ं त सँ शुर ्िब, िेच् हमि् ्िब्​् आदजत अजि, आ तखच हम हच्​् लो्जच् ्थ् जदस आगू बढब, सव्ज पिमेशि् मजहम् ्िब। 11 तखच हमि् लो्जच् जिज्स् ई अजि िे ्ी ि्ग-दे ष पि त्​् सव्च म्जल् अजि। 12 मुद् हमि् सभ ्ेँ ई परिभ्जषत ्िब्​् च्ही िे त्​् ्ी अजि आ ि्ग ्ी अजि, आ ि्ग् ्ते् रप अजि, आ त्​् सभ पि सव्च अजि ्ी चजह। 13 ्​्िण हम बुनद् िीवच ्ेँ स् जवच्ि-जवमश् सँ पजसच ्ियवल् मच म्चैत िी। 14 हम बुनद ्ेँ पिमेशत वि आ मचुषत य आ ट्ि ्​्िण् ज्च बुझैत िी। “ 16 बुनद, न्य आ न्य, स्हस आ संयम् रप मे पगट होइत अजि। 17 मुद् न्य व् आतसंयम टजह सभ पि ह्वी होइत अजि, ्​्िण, ए्ि म्धमे, सत मे, त्​् ि्ग-दे ष पि अपच अजध्​्ि् पुज् ्िै त अजि।


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