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Maithili - 2nd Esdras

Page 1

अध्य 1 1 अजरियासक पुत एस्ास प्कव ताक दोसि पुसक, जे हे ल्यासक पुत छल, जे सदामियाक पुत छल, आ अकीतोबक पुत सादोकक पुत छल। 2 अमकयासक पुत, मिनेसक पुत, हे लीक पुत, अिरियासक पुत, अजीईक पुत, ि​िीिोथक पुत, अनान क पुत, ओमजयासक पुत, बोरिथक पुत, अबीसे ईक पुत , मिनेसक पुत, एमलयाजिक पुत। 3 ले ्ीक ्ं शक हारनक पुत। जे िािसक िाजा आर् लेसक शासनकाल िे िादी दे श िे बं दी िे छल। 4 प्ुक ्चन हि​िा लग आमब कऽ कहलमथन। 5 जाउ, हि​ि लोक स् केँ ओकि पाप-किन आ ओकि बचा स् केँ ओकि दु षव रता दे खाउ जे ओ स् हि​िा म्रु कयल गे ल अमछ। जामह सँ ओ स् अपन बचा स्क बचा स् केँ ई कमह सकय। 6 मकएक तँ हनका स्क पू्नज स्क पाप बम़ गे ल अमछ, मकएक तँ ओ स् हि​िा मबसरि गे ल अमछ आ पिदे शी दे ्ता स् केँ च़ा दे लक। 7 की हि ओ नमह छी जे हनका स् केँ मिस दे श सँ , दासताक घि सँ मनकामल दे लहँ? िु दा ओ स् हि​िा कोर िे उकसा दे लक आ हि​ि म्चाि केँ मतिस्त कयलक। 8 तखन अहाँ अपन िाथक केश उतारि कऽ ओकिा स् पि स्रा अरलाह िेमक मदयौक, मकएक तँ ओ स् हि​ि मनयिक आजा नमह िानलक, बलव मक ई म्​्ोही लोक अमछ। 9 हि कतेक मदन ररि हनका स् केँ सहन किब, मजनका स्क ले ल हि एतेक ्लाई केलहँ ? 10 हि हनका स्क ले ल बहत िास िाजा स् केँ नष कऽ दे लहँ । हि मि​िौन केँ ओकि नोकि आ ओकि सिस शल्क सं ग िारि दे लहँ । 11 हि ओकिा स्क सोझाँ स् जामत केँ नष कऽ दे लहँ आ पूिब िे दू पां तक लोक स् केँ मछम़या दे लहँ , सोि आ मसदोन िे । 12 ते ँ अहाँ हनका स् केँ ई कह जे , प्ु ई कहै त छमथ। 13 हि अहाँ स् केँ सिु ् िे लऽ गे लहँ आ शुर िे अहाँ स् केँ एकरा पैघ आ सु िम्त बार दे लहँ । हि अहाँ केँ िू सा केँ एकरा नेता आ हारन केँ पुिोमहतक रप िे दे मलयैक। 14 हि अहाँ स् केँ आमग केि खं्ा िे इजोत दे लहँ , आ अहाँ स्क बीच हि बहत पैघ चिताि केलहँ । तइयो अहाँ स् हि​िा मबसरि गे लहँ, प्ु कहै त छमथ। 15 स्न शल्िान प्ु ई कहै त छमथ, “बरे ि अहाँ स्क ले ल एकरा मनशानी जकाँ छल। हि अहाँ स्क ि्ाक ले ल डे िा दऽ दे लहँ । 16 अहाँ स् अपन शतु स्क म्नाशक ले ल हि​ि नाि पि म्जयी नमह ्ेलहँ , बलव मक आइ ररि अहाँ स् समदखन गु नगु नाइत छी। 17 हि अहाँ स्क ले ल जे ला् केलहँ से कतय अमछ? जखन अहाँ स् जं गल िे ्ूखल आ पासल छलहँ तखन की अहाँ स् हि​िा लग नमह पुकािलहँ । 18 ओ कहलमथन, “अहाँ हि​िा स् केँ िािबाक ले ल एमह िर्ूमि िे मकएक अनलहँ ?” हि​िा स्क ले ल एमह जं गल िे ि​िबा सँ नीक छल जे हि स् मिसक से ्ा कएने िही। 19 तखन हि​िा अहाँ स्क शोक पि दया आमब गे ल आ अहाँ स् केँ िना खा कऽ दे मलयैक। ते ँ अहाँ स् सव ्गन दूत स्क िोरी खयलहँ । 20 जखन अहाँ स् मपयासल छलहँ तखन की हि पाथि केँ िाम़ कऽ पामन नमह बहै त छलहँ? गि्क कािणे ँ हि अहाँ केँ गाछक पातसँ झाँ मप दे मलयैक।

21 हि अहाँ स्क बीच एकरा िलदाि दे श बाँ मर दे लहँ , अहाँ स्क सोझाँ कनान, ि​िे सी आ पमलसी स् केँ बाहि मनकामल दे लहँ । प्ु कहै त छमथ। 22 स्न शल्िान प्ु ई कहै त छमथ, “जखन अहाँ स् अिोिी स्क नदी िे मनजन न िे छलहँ आ पासल छलहँ आ हि​ि नािक मनना किै त छलहँ । 23 हि अहाँ स्क मननाक कािणे ँ आमग नमह दे मलयैक, बलव मक एकरा गाछ पामन िे िेमक दे मलयैक आ नदी केँ िीठ कऽ दे मलयैक। 24 हे याकूब, हि तोिा की किब? अहाँ यहदा, हि​ि आजा नमह िानब, हि हि​िा दोसि जामत मदस घुिा दे ब, आ ओकिा स् केँ हि अपन नाि दे ब, जामह सँ ओ स् हि​ि मनयिक पालन किमथ।” 25 अहाँ स् हि​िा छोम़ दे लहँ तँ हिहँ अहाँ स् केँ छोम़ दे ब। जखन अहाँ स् चाहै त छी जे हि अहाँ स् पि क्पा किी, तखन हि अहाँ स् पि कोनो दया नमह किब। 26 जखन कखनो अहाँ स् हि​िा पुकािब तँ हि अहाँ क बात नमह सु नब, मकएक तँ अहाँ स् अपन हाथ खून सँ अशु​ु कऽ दे लहँ आ अहाँ क पएि गै ि इिादतन हता किबा िे तेज अमछ। 27 प्ु कहै त छमथ जे अहाँ स् हि​िा ओमहना नमह छोम़ दे लहँ, बलव मक अहाँ स् अपना केँ छोम़ दे लहँ । 28 स्न शल्िान प्ु ई कहै त छमथ, “की हि अहाँ स् केँ अपन पुत स्क मपता, बे री स्क िाँ आ अपन छोर-छोर बचा स्क दू र मपयामन जकाँ पाथनना नमह केलहँ । 29 अहाँ स् हि​ि पजा बनब आ हि अहाँ क पि​िे शव ्ि बनब। अहाँ स् हि​ि सं तान बनब आ हि अहाँ स्क मपता बमन जायब? 30 हि अहाँ स् केँ ओमहना जिा केलहँ जे ना िु ग् अपन पाँ लखक नीचाँ अपन िु ग् स् केँ जिा किै त अमछ। हि अहाँ केँ अपन िुँ हसँ बाहि मनकामल दे ब। 31 जखन अहाँ स् हि​िा च़ा दे ब तँ हि अहाँ स् मदस िुँ ह घुिा दे ब, मकएक तँ हि अहाँ क अिा्सा आ खतना केँ छोम़ दे लहँ । 32 हि अपन से ्क प्कव ता स् केँ अहाँ स् लग पठौलहँ , मजनका स् केँ अहाँ स् पकम़ कऽ िारि दे मलयैक आ हनका स्क शिीि केँ िाम़ दे लहँ , मजनकि खून हि अहाँ स्क हाथ सँ िाँ गब।” 33 स्न शल्िान प्ु ई कहै त छमथ, “अहाँ क घि उजा़ ्’ गे ल अमछ, हि अहाँ स् केँ ओमहना बाहि िेमक दे ब जे ना ह्ाक ठूंठ खाइत अमछ।” 34 अहाँ स्क सनान स् िल नमह दे त। मकएक तँ ओ स् हि​ि आजा केँ मतिस्त कयलक आ हि​िा सािने जे अरलाह काज अमछ से कयलक। 35 हि अहाँ क घि स् ओमह लोक केँ दऽ दे ब जे आओत। जे हि​िा बािे िे एखन ररि नमह सु नने अमछ, हि​िा पि म्शव ्ास कित। हि ओकिा स् केँ कोनो चिताि नमह दे खौने छी, िु दा ओ स् हि​िा जे आजा दे लहँ से पूिा कित।” 36 ओ स् कोनो प्कव ता केँ नमह दे खने छमथ, तैयो ओ स् अपन पाप केँ िोन पा़त आ ओकिा स् केँ सीकाि कित। 37 हि आबय बला लोक स्क क्पाक ग्ाह बनैत छी, मजनकि छोर-छोर बचा स् हषन िे आनलनत होइत छमथ, िु दा ओ स् हि​िा शिीिक आँ लख सँ नमह दे खने छमथ, िु दा आतव िा िे हि​ि बात पि म्शास किै त छमथ। 38 आब, ्ाइ, दे खू केहन िमहिा; आ पूब मदस सँ आबय बला लोक स् केँ दे खू। 39 हि हनका स् केँ अबाहि, इसहाक आ याकूब, ओमसयास, आिोस आ िीमकया, योएल, अल्या आ योनास केँ अगु आक रप िे दे बमन। 40 नाहि, अबाकूक, सोिोमनया, अगेउस, जकियाह आ िलाकी, जे प्ुक सव ्गन दूत से हो कहल जाइत अमछ।


अध्य 2 1 प्ु ई कहै त छमथ, “हि एमह लोक स् केँ दासता सँ बाहि मनकामल कऽ हनका स् केँ अपन आजा स् प्कव ता स्क दािा दे लहँ । ओ स् हनका स्क बात नमह सु नैत छल, बलव मक हि​ि सलाह केँ तुच बु झैत छल। 2 जे िाय ओकिा स् केँ जन दे लक, ओकिा स् केँ कहलमथन, “हे बचा स्, जाउ। मकएक तँ हि म्र्ा छी आ परित् छी। 3 हि अहाँ स् केँ पसनता सँ पालन-पोषण केलहँ । िु दा हि अहाँ स् केँ दु ख आ ्ाि सँ गिा दे लहँ, मकएक तँ अहाँ स् अपन पि​िे शव ्ि पि​िे शव ्िक सि् पाप कयलहँ आ हनका सािने अरलाह काज कयलहँ ।” 4 आब हि अहाँ स्क सं ग की किब? हि म्र्ा आ परित् छी, हे हि​ि बचा स्, जाउ, प्ु सँ दया िाँ गू। 5 हे मपता, हि अहाँ केँ एमह बचा स्क िाय पि ग्ाह बनयबाक ले ल पुकािै त छी जे हि​ि ्ाचाक पालन नमह किमथ। 6 अहाँ ओकिा स् केँ भि िे आनब आ ओकि िाय केँ लू र िे आनब, जामह सँ ओकिा स्क कोनो सं तान नमह हो। 7 ओ स् जामत-जामत िे मतति-मबति ्ऽ जाय आ ओकि स्क नाि प्थव ्ी सँ बाहि ्ऽ जाय। 8 मरकाि अमछ, असुि, अहाँ जे अरि् केँ अहाँ िे नुका दै त छी! हे दु ष लोक, हि सदोि आ अिोिाक सं ग की केलहँ से िोन िाखू। 9 जकि दे श गडाक रु क़ी आ ्सक ढे ि िे प़ल अमछ। 10 प्ु एस्ास केँ ई कहै त छमथ, “हि​ि लोक केँ कमह मदयौक जे हि ओकिा स् केँ यरशले ि िाज द’ दे बमन, जे हि इसाएल केँ दे ब’ चाहै त छलहँ ।” 11 हि हनका स्क िमहिा से हो अपना मदस लऽ कऽ एमह स् केँ अनन तमू स् दऽ दे ब जे हि हनका स्क ले ल तैयाि केने िही। 12 हनका स् लग जी्नक गाछ िहतमन जे िरु ि सु गनक ि​िहि बनत। ओ स् ने िे हनत कित आ ने थामक जायत। 13 जाउ, आ अहाँ स् केँ ्ेमर जायत, अहाँ स् सँ मकछु मदनक ले ल पाथनना कर जामह सँ ओ स् छोर ्ऽ जाय। 14 सव ्गन आ प्थव ्ी केँ ग्ाही बनाउ। हि अरलाह केँ रु क़ारु क़ा क’ क’ नीक केँ स् मजत केलहँ , कािण हि जीबै त छी, प्ु कहै त छमथ। 15 िाँ , अपन बचा स् केँ गला लगा मलअ आ ओकिा स् केँ खुशी सँ पालन-पोषण कर, ओकि पएि केँ खं्ा जकाँ तेज कर, मकएक तँ हि अहाँ केँ चुनने छी, प्ु कहै त छमथ। 16 हि ओकिा स् केँ अपन सव थान सँ मजया कऽ कबि सँ बाहि मनकालब, मकएक तँ हि इसाएल िे अपन नाि जनैत छी। 17 हे बचा स्क िाय, नमह डे िाउ, मकएक तँ हि अहाँ केँ चुनने छी, प्ु कहै त छमथ। 18 अहाँ क सहायताक ले ल हि अपन से ्क एसाय आ जे िेिी केँ पठा दे ब, मजनकि सलाह पि हि अहाँ ले ल बािह रा गाछ पम्त कएने छी जे म्म्र िल सँ लदल अमछ। 19 दू र आ िरु सँ बहै त ओतेक झिना आ सातरा पिाकिी पहा़, जामह पि गु लाब आ कुिु द उगै त अमछ, जामह सँ हि अहाँ क बचा स् केँ आनन सँ ्िब। 20 म्र्ाक सं ग उमचत कर, अनाथ स्क नाय कर, गिीब केँ द’ मदयौक, अनाथक ि्ा कर, नंगरे केँ कप़ा पमहिाउ। 21 रू रल-िूरल आ किजोि लोक केँ ठीक कर, लं ग़ा केँ मतिसाि किबाक ले ल नमह हँ सू, अपंग स्क ि्ा कर आ आनि केँ हि​ि सषता िे आबय मदयौक। 22 बू ़ आ छोर केँ अपन दे बाल िे िाखू।

23 जतय कतह ि् तव यु केँ ्ेरत, ओकिा स् केँ लऽ कऽ गाम़ मदयौक। 24 हे हि​ि पजा, लसथि िह आ म्शाि कर, मकएक तँ अहाँ क शानता एखनो आमब िहल अमछ। 25 हे नीक पोषक, अपन बचा स्क पोषण कर। अपन पएि सथामपत कर। 26 जँ हि अहाँ केँ जे नोकि दे ने छी, तकिा स् िे सँ एको गोरे क नाश नमह होयत। कािण, हि अहाँ क सं खा िे सँ हनका स् केँ िाँ गब।” 27 थामक कऽ नमह जाउ, मकएक तँ जखन म्पम् आ कषक मदन आओत तँ दोसि लोक कानत आ दु खी ्ऽ जायत, िु दा अहाँ हमषनत िहब आ पचुिता पापव त किब। 28 जामत-जामत अहाँ सँ ईरान कित, िु दा ओ स् अहाँ क म्रु मकछु नमह कऽ सकैत अमछ, प्ु कहै त छमथ। 29 हि​ि हाथ अहाँ केँ झाँ मप दे त, जामह सँ अहाँ क सनान निक नमह दे खय। 30 हे िाँ , अपन सं तान स्क सं ग आनलनत िह। कािण, हि तोिा उुाि किबौक, प्ु कहै त छमथ।” 31 अपन सु तल बचा स् केँ िोन पा़ू, मकएक तँ हि ओकिा स् केँ प्थव ्ीक कात सँ मनकामल कऽ ओकिा स् पि दया किब। 32 जाबत ररि हि नमह आमब कऽ ओकिा स् पि दया नमह किब, ताबत ररि अपन बचा स् केँ गला लगाउ, मकएक तँ हि​ि इनाि स् बहै त अमछ आ हि​ि क्पा खत नमह होयत। 33 हि एस्स केँ ओिे ब पहा़ पि प्ुक आजा ्ेरल जे हि इसाएल जायब। िु दा जखन हि हनका स् लग अयलहँ तँ ओ स् हि​िा घ्णा कऽ दे लक आ प्ुक आजा केँ मतिस्त कयलक। 34 एमह ले ल हि अहाँ स् केँ कहै त छी जे , हे गै ि-यहदी स्, जे सु नैत छी आ बु झैत छी, अपन चिबाह केँ ताकू, ओ अहाँ स् केँ अनन म्शाि दे त। मकएक तँ ओ सं सािक अनव त िे आओत, से नजदीक आमब गे ल अमछ।” 35 िाजक िलक ले ल तैयाि िह, मकएक तँ अनन इजोत अहाँ स् पि अनन काल ररि चिकत। 36 एमह सं सािक छाया सँ ्ागू , अपन िमहिाक आनन गहण कर, हि अपन उुािकतान केँ खुमल कऽ ग्ाही दै त छी। 37 हे अहाँ स् केँ जे ्िदान दे ल गे ल अमछ से गहण कर आ आनलनत ्ऽ कऽ जे अहाँ स् केँ सव ्ग्य िाजव य िे लऽ गे ल अमछ तकिा केँ रनव य्ाद कर। 38 उमठ कऽ ठा़ ्ऽ कऽ दे खू जे पि​िे शव ्िक पाबमन िे िोहि लगाओल गे ल लोकक सं खा कतेक अमछ। 39 ओ स् सं सािक छाया सँ म्दा ्ऽ गे ल अमछ। आ प्ुक गौि्शाली ्स गहण कयलमन अमछ। 40 हे मसयोन, अपन सं खा लऽ कऽ जे स् उजि ्स पमहिने छमथ आ जे स् प्ुक मनयिक पालन केने छमथ, तकिा स् केँ बं द कऽ मदयौक। 41 तोहि सं तानक सं खा पूिा ्ऽ गे ल अमछ, जकिा ले ल अहाँ तिसै त छलहँ , प्ुक सािरन सँ म्नती कर जे अहाँ क लोक जे शुर सँ बजाओल गे ल अमछ, पम्त ्’ जाय।” 42 हि एस् मसयोन प्न त पि एकरा पैघ लोक केँ दे खलहँ , जकिा हि नमह मगन सकलहँ , आ ओ स् गीत-गान िे प्ुक सु मत कयलमन। 43 हनका स्क बीच िे एकरा यु्क छल जे स् सँ बे सी ऊँच कद छल, आ हनका स्क िाथ पि ओ िु कुर पमहिने छलाह आ ओ बे सी ऊँच छलाह। जे किा दे लख हि बहत आशयनचमकत ् गे लहं । 44 हि सव ्गन दूत सँ पुछमलयमन, “िहािाज, ई स् की अमछ?”


45 ओ हि​िा कहलमथन, “ई स् नशि ्स उतारि अि​ि ्स पमहरि कऽ पि​िे शव ्िक नाि सीकाि कयलमन। 46 तखन हि सव ्गन दूत केँ कहमलयमन, “कोन यु्क अमछ जे ओकिा स्क िु कुर पमहिाबै त अमछ आ ओकिा स्क हाथ िे हथेली दै त अमछ?” 47 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “ई पि​िे शव ्िक पुत छमथ, जकिा ओ स् सं साि िे सीकाि कयलमन अमछ।” तखन हि हनका लोकमनक बहत पशंसा किय लगलहँ जे प्ुक नािक ले ल एतेक कठोितापू्नक ठा़ छलाह। 48 तखन सव ्गन दूत हि​िा कहलमथन, “जाउ आ हि​ि लोक स् केँ कमह मदअ जे अहाँ अपन पि​िे शव ्ि पि​िे शव ्िक कतेक पैघ आशयन दे खलहँ ।” अध्य 3 1 नगिक धस ्ेलाक तीसि ्षन िे हि बाबु ल िे छलहँ आ अपन मबछाओन पि घबिाहमर िे पम़ गे लहँ आ हि​ि िोन िे म्चाि आमब गे ल। 2 हि मसयोनक उजा़ आ बे मबलोन िे िहमनहाि लोकक रन-समम् दे खलहँ । 3 हि​ि आतव ‍िा बहत ़्मक उठल आ हि पि​िे शव ्ि केँ ्य सँ ्िल ्चन बाजऽ लगलहँ । 4 हे प्ु, जे शासन किै त छी, अहाँ शुर िे कहने िही, जखन अहाँ प्थव ्ी िोपने िही, आ से असगिे आ लोक स् केँ आजा दे ने िही। 5 आदि केँ मबना पाणी दे ह दे लमन, जे अहाँ क हाथक काज छल, आ हनका िे जी्नक साँ स दे लकमन आ ओ अहाँ क सोझाँ जीम्त ्’ गे लाह। 6 अहाँ ओकिा सगन िे ल’ जाइत छी, जे अहाँ क दमहना हाथ पमहने सँ पमहने लगा दे ने छल। 7 अहाँ ओकिा अपन बार सँ पेि किबाक आजा दे मलयैक। 8 स् लोक अपन-अपन िज्क अनुसाि चलै त छल, आ अहाँ क सि् अदव ्ुत काज किै त छल आ अहाँ क आजा स् केँ मतिस्त किै त छल। 9 आ सियक कि िे अहाँ िेि सं साि िे िहमनहाि लोक स् पि जलपलय अनलहँ आ ओकिा स् केँ नष कऽ दे लहँ । 10 हनका स् िे सँ एक-एक गोरे िे जे ना आदि केँ ि् तु ्ेलमन, तमहना हनका स्क ले ल जल-पलय से हो ्ेलमन। 11 तैयो अहाँ ओकिा स् िे सँ एक गोरे केँ छोम़ दे लहँ , जे नाि छल नूह केँ अपन घिक लोकक सं ग, मजनका िे सँ स् रि् लोक मनकलल। 12 जखन प्थव ्ी पि िहमनहाि लोक स् ब़य लगलाह आ हनका स् केँ बहत िास सं तान पैदा कयलमन आ पैघ लोक बमन गे लाह, तखन ओ स् िेि सँ पमहल लोक स् सँ बे सी अ्​् होबय लगलाह। 13 जखन ओ स् अहाँ सँ पमहने एतेक दु षतापू्नक जीम्त िहलाह, तखन अहाँ हनका स् िे सँ एकरा एहन आदिी चुनलहँ , जकि नाि अबाहि छल। 14 अहाँ हनका सँ पेि किै त छलहँ आ िात हनका सँ अपन इचा दे खबै त छलहँ । 15 ओ हनका सं ग अनन कालक ्ाचा कयलमन आ हनका पमतजा कयलमन जे अहाँ हनकि ्ं शज केँ कमहयो नमह छो़ब। 16 अहाँ हनका इसहाक केँ दे मलयैक आ इसहाक केँ याकूब आ एसा् से हो दे मलयैक। याकूबक बात तँ अहाँ ओकिा अपना ले ल चुमन कऽ एसा्क कात िे िालख दे मलयैक।

17 जखन अहाँ हनकि ्ं शज केँ मिस दे श सँ बाहि मनकामल कऽ हनका स् केँ मसनै पहा़ पि लऽ गे लहँ । 18 आकाश केँ पणाि कऽ अहाँ प्थव ्ी केँ तेज कऽ दे मलयैक, सिस सं साि केँ महला दे मलयैक आ गहीिं केँ काँ मप दे मलयैक आ ओमह युगक लोक स् केँ पिे शान कऽ दे मलयैक। 19 अहाँ क िमहिा चारि िारक सँ गु जिल, आमग, ्ूकम, ह्ा आ ठं ढा। जामह सँ अहाँ याकूबक ्ं शज केँ रिन -मनयि आ इसाएलक पी़ी केँ लगन दे ब।” 20 तइयो अहाँ हनका स् सँ कोनो दु षव र हदय नमह छीमन ले लहँ जामह सँ अहाँ क व्सथा हनका स् िे िल दे त। 21 पमहल आदि जे दु षव र हदय रािण केने छलाह, अपिार कयलमन आ हनका पिाजय ्ेलमन। आ हनका सँ जनिल स् लोक से हो एहने होउ।” 22 एमह तिहे ँ दु बनलता सथायी ्ऽ गे ल। आ जम़क दु ्ान ्नापूणन लोकक हदय िे कानून (ओहो); ते ँ नीक लोक स् चमल गे ल आ अरलाह स् लसथि िमह गे ल। 23 ते ँ सिय बीमत गे ल आ ्षनक सिापन ्ऽ गे ल। 24 अहाँ हनका आजा दे मलयमन जे अहाँ अपन नािक ले ल एकरा नगि बनाउ आ ओमह िे अहाँ केँ रू प आ बमल च़ाबमथ। 25 ई बात बहत ्षन ररि ्ेल तखन नगि िे िहमनहाि लोक स् अहाँ केँ छोम़ दे लक। 26 आदि आ ओकि स् पी़ी स् जे काँ काज केने छल, तमहना स् काज िे कयलक। 27 एमह तिहे ँ अहाँ अपन नगि केँ अपन शतु स्क हाथ िे सौंपलहँ । 28 तखन की हनका स्क काज बे मबलोन िे िहमनहाि स् सँ नीक अमछ जामह सँ हनका स् केँ मसयोन पि प्ुभ ्ेरय? 29 जखन हि ओतऽ पहँ चलहँ आ अनमगनत अरिन दे खलहँ , तखन एमह तीस ्षन िे हि​ि पाण बहत िास दु षिन किय्ला केँ दे खलक कान, जे हि​ि िोन हि​िा िेल ्’ गे ल। 30 हि दे खलहँ जे कोना अहाँ ओकिा स् केँ पाप किय दै त छी आ दु षव र किमनहाि स् केँ बखबै त छी। 31 हि​िा िोन नमह अमछ जे ई बार कोना छोम़ दे ल जा सकैत अमछ। 32 की इसाएलक अमतरि् आन लोक अहाँ केँ मचनै त अमछ? याकूब जे काँ तोहि ्ाचा पि कोन पी़ी म्शव ्ास केलक? 33 तैयो हनका स्क इनाि नमह दे खाइत अमछ, आ हनका स्क परिशिक कोनो िल नमह होइत छमन, कािण हि एमि-ओमि जामत-जामत िे घुमि गे लहँ आ दे खैत छी जे ओ स् रन-दौलत बमह िहल अमछ आ अहाँ क आजा पि नमह सोचैत अमछ। 34 ते ँ अहाँ आब हि​िा स्क दु षव रता केँ तिाजू िे तौमल मलअ आ हनकि स्क से हो जे सं साि िे िहमनहाि अमछ। तमहना तोहि नाि इसाएल छोम़ कतह नमह ्ेरत।” 35 प्थव ्ी पि िहमनहाि स् कमहया अहाँ क नजरि िे पाप नमह केलक? आमक कोन लोक अहाँ क आजा केँ एतेक पालन केलक? 36 अहाँ दे खब जे इसाएल नाि सँ अहाँ क उपदे शक पालन केलक। िु दा म्रि् नमह। अध्य 4 1 हि​िा लग पठाओल गे ल सव ्गन दूत, जकि नाि उरिएल छल, हि​िा उ्ि दे लमथन। 2 ओ कहलमथन, “अहाँ क िोन एमह सं साि िे दू ि ररि गे ल अमछ, आ की अहाँ पि​िे शव ्िक बार केँ बु झबाक ले ल सोचैत छी?” 3 तखन हि कहमलयमन, “हँ , हि​ि िामलक।” ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “हि​िा पठाओल गे ल अमछ जे अहाँ केँ तीन रा बार दे खाबय आ तीनरा सिानता अहाँ क सोझाँ िाखब।


4 जँ अहाँ हि​िा एकरा एहन बात कमह सकब तँ हि अहाँ केँ ओमह बार से हो दे खा दे ब जकिा अहाँ दे खय चाहै त छी, आ हि अहाँ केँ ई दे खा दे ब जे दु ष हदय कतय सँ अबै त अमछ। 5 हि कहमलयमन, “हे प्ु, कह।” तखन ओ हि​िा कहलमथन, “जाउ, हि​िा आमग केि ्ाि तौमल, ्ा ह्ाक रिाका नामप, ्ा बीतल मदन हि​िा िेि सँ बजाउ।” 6 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “कोन एहन काज कऽ सकैत अमछ जे अहाँ हि​िा सँ एहन बात पूमछ सकैत छी?” 7 ओ हि​िा कहलमथन, “जँ हि अहाँ सँ पूमछ सकैत छी जे सिु ्क बीच िे कतेक पैघ आ्ास अमछ, ्ा गहीिं िे कतेक झिना अमछ, ्ा आकाश सँ ऊपि कतेक झिना अमछ, ्ा कोन-कोन झिना मनकलै त अमछ।” सगन : 8 अहाँ हि​िा कहब जे , “हि कमहयो गहीिं िे नमह उतिलहँ , आ ने एखन ररि निक िे नमह गे लहँ, आ ने कमहयो सगन िे च़लहँ ।” 9 तैयो आब हि अहाँ सँ िात आमग आ ह्ा, आ ओमह मदनक म्षय िे पूछने छी जामह सँ अहाँ अलग नमह ्ऽ सकैत छी, िु दा अहाँ हि​िा ओकि कोनो उ्ि नमह दऽ सकैत छी। 10 ओ हि​िा कहलमथन, “अहाँ क अपन बात आ जे अहाँ क सं ग पैघ ्ेल अमछ, की अहाँ नमह जामन सकैत छी। 11 तखन अहाँ क पात पि​िाताक बार कोना बु मझ सकैत अमछ, आ सं साि आब बाहिी रप सँ भष ्’ गे ल अमछ, जामह सँ हि​िा नजरि िे जे भषाचाि सष अमछ, तकिा बु झल जा सकैत अमछ? 12 तखन हि हनका कहमलयमन, “हि​िा स् केँ कोनो तिहे ँ नमह िहब, एमह सँ नीक जे हि स् दु षता िे जीम्त िहब आ कष ्ोगब आ ई नमह जामन जे मकएक अमछ।” 13 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “हि एकरा जं गल िे िै दान िे गे लहँ , तखन गाछ-मबरिछ स् म्चाि-म्िशन क’ ले लक। 14 ओ कहलमथन, “आउ, जाउ, सिु ्क सं ग यु​ु किब जामह सँ ओ हि​िा स्क सोझाँ चमल जाय आ हि​िा स् केँ आओि जं गल बना सकब।” 15 सिु ्क बाम़ से हो ओमहना म्चाि कए कहलक, “आउ, चलू, हि स् चम़ कऽ िै दानक जं गल केँ अपना ्श िे किी, जामह सँ ओतमह से हो अपना स् केँ दोसि दे श बना सकब।” 16 लक़ीक म्चाि वथन ्ेल, मकएक तँ आमग आमब कऽ ओकिा ्स कऽ दे लक। 17 सिु ्क बाम़क म्चाि से हो ओमहना बे काि ्ऽ गे ल, मकएक तँ बालु ठा़ ्ऽ कऽ ओकिा स्केँ िोमक दे लक। 18 जँ अहाँ एखन एमह दु नूक बीच नाय करितहँ तँ केकिा रि् ठहिाबऽ करितहँ ? आमक अहाँ ककिा दोषी ठहिाबऽ? 19 हि उ्ि दे मलयमन, “स्े ई िू खनतापूणन म्चाि अमछ जे दु नू गोरे क कलना कयल गे ल अमछ, मकएक तँ जिीन जं गल िे दे ल गे ल अमछ आ सिु ् िे से हो ओकि बाम़ सहन किबाक सथान अमछ।” 20 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “अहाँ सही नव याय केलहँ , िु दा अपना केँ से हो मकएक नमह नव याय किै त छी?” 21 जमहना जिीन लक़ी केँ दे ल गे ल अमछ आ सिु ् ओकि बाम़ केँ दे ल गे ल अमछ, तमहना प्थव ्ी पि िहमनहाि स् प्थव ्ी पि िहमनहाि स् केँ छोम़ मकछु नमह बु मझ सकैत अमछ जे आकाशक ऊँचाई सँ ऊपि अमछ। 22 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “हे प्ु, हि अहाँ सँ म्नती किै त छी जे हि​िा बु झबाक चाही। 23 मकएक तँ हि​िा ई बात नमह छल जे हि स् ऊँच-ऊँच बातक म्षय िे मजजासु िहब, बलव मक हि​िा स्क लग सँ मनत गु जिै त लोक स्क मजजासा किब, अथान त एमह ले ल इसाएल गै ि-यहदी स्क ले ल अपिामनत किबाक ले ल छोम़ दे ल गे ल अमछ आ अहाँ जामह लोक स् सँ पेि केलहँ , तकिा कोन कािण सँ दे ल गे ल अमछ

अ्​् जामत स् केँ, आ हि​िा स्क पू्नज स्क मनयि केँ मकएक अने ष कयल गे ल अमछ आ मललखत ्ाचा स् केँ अने ष कयल गे ल अमछ। 24 हि स् मरडी बमन सं साि सँ बाहि चमल जाइत छी, आ हि​िा स्क जी्न आशयन आ ्य अमछ, आ हि स् दया किबाक योग नमह छी। 25 तखन ओ अपन नािक की कित, जकिा दािा हि​िा स् केँ बजाओल गे ल अमछ? एमह स्क बात हि पूछने छी। 26 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “अहाँ जतेक बे सी खोज किब, ओतेक बे सी आशयनचमकत होयब। मकएक तँ सं साि जली-जली सिाप ्ऽ जाइत अमछ। 27 आगािी सिय िे रामिन क लोक स्क पमतजा कयल गे ल बात स् केँ नमह बु मझ सकैत छी, मकएक तँ ई सं साि अरिन आ दु बनलता सँ ्िल अमछ। 28 िु दा जे ना मक मथ ngs अहाँ हि​िा सँ पूछैत छी, हि अहाँ केँ कहब। मकएक तँ अरलाह बोिल अमछ, िु दा ओकि म्नाश एखन ररि नमह आयल अमछ। 29 जँ बोओल गे ल अमछ से उला नमह ्ऽ जायत आ जतऽ अरलाह बोओल गे ल अमछ से नमह बीमत जायत, तखन ओ नीक जकाँ बोओल गे ल ओ नमह आमब सकैत अमछ। 30 मकएक तँ आदिक हदय िे अरलाह बीयाक दाना शुरए सँ िोपल गे ल अमछ आ ई कतेक अ्ल् केँ अखन ररि अनलक? जाबत ररि कुरबाक सिय नमह आओत ता ररि ई कतेक पैदा कित? 31 आब अपना पि मचंतन कर जे अरलाह बीयाक दाना कतेक पैघ दु षिन क िल दे लक। 32 जखन कान कारल जायत, जे अनमगनत अमछ, तखन ओ कतेक पैघ िशन ्ित? 33 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “ई स् कोना आ कमहया होयत?” हि​िा स्क ्षन मकएक कि आ अरलाह अमछ? 34 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “अहाँ पि​िे शव ्ि सँ आगू नमह ब़ू, मकएक तँ अहाँ क जलबाजी हनका सँ ऊपि िहबाक वथन अमछ, मकएक तँ अहाँ बहत बे सी बम़ गे लहँ ।” 35 की रि् लोक स् से हो अपन कोठली िे एमह बात पि प् नमह पूछैत छल जे , “हि कतेक मदन ररि एमह तिहक आशा िाखब?” हि​िा स्क इनािक िशनक िल कमहया आओत? 36 एमह बात पि िहासगन दूत उरिएल हनका स् केँ उ्ि दे लमथन आ कहलमथन, “जखन अहाँ स् िे बीयाक सं खा ्रि जायत तखनो, मकएक तँ ओ सं साि केँ तिाजू िे तौलने छमथ।” 37 ओ सिय नापने छमथ। ओ सियक मगनती केने छमथ। आ ओ ओकिा स्केँ नमह महलाबै त अमछ आ ने महलाबै त अमछ, जाबत ररि उ् िाप पूिा नमह ्' जायत। 38 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “हे प्ु, जे शासन किै त छी, हि स् अरिन सँ ्िल छी।” 39 प्थव ्ी पि िहमनहाि स्क पाप स्क कािणे ँ हि​िा स्क ले ल ई बात ्ऽ सकैत अमछ जे रिान ता स्क िशन नमह ्िल अमछ। 40 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “एकरा ग्न्ती सव ती लग जाउ आ ओकिा सँ पूछू जे जखन ओकि नौ िास पूिा ्ऽ जायत, की ओकि कोलख िे जन आब ओकिा ्ीति िालख सकैत अमछ।” 41 तखन हि कहमलयमन, “नमह, प्ु, से नमह क’ सकैत छमथ।” ओ हि​िा कहलमथन, “कबि िे आताक कोठली सीगणक ग्न जकाँ होइत छै क। 42 जमहना पस् किऽ ्ला सव ती पस्क आ्शकता सँ बचबाक ले ल जलबाजी किै त अमछ। 43 शुरए सँ दे खू, अहाँ जे दे खय चाहै त छी, से अहाँ केँ दे खाओल जायत।


44 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “जँ हि​िा अहाँ क नजरि िे अनुगह ्ेरल अमछ आ जँ सम् ्’ गे ल अमछ आ जँ हि​िा उमचत अमछ। 45 तखन हि​िा ई दे खा मदअ जे बीतल सिय सँ बे सी आबय बला अमछ आ मक आबय बला सँ बे सी बीतल। 46 जे बीतल अमछ से हि जनैत छी, िु दा की आबय बला अमछ से हि नमह जनैत छी। 47 ओ हि​िा कहलमथन, “दमहना कात ठा़ ्ऽ जाउ, आ हि अहाँ केँ उपिा बु झा दे ब।” 48 तखन हि ठा़ ्ऽ दे खलहँ जे हि​िा सोझाँ सँ एकरा गि​ि जिै त ्ंडाि गु जरि िहल छल। 49 तकि बाद हि​िा सोझाँ एकरा पामनदाि िे घ गु जरि गे ल आ एकरा तूिानक सं ग बहत बिखा ्ेल। आ जखन तूिानी बिखा बीमत गे ल तखन बूं द लसथि िमह गे ल। 50 तखन ओ हि​िा कहलमथन, “अपन म्चाि कर। जे ना बिखा बूं द सँ बे सी होइत छै क आ आमग रुँ आ सँ बे सी होइत छै क। िु दा बूं द आ रुँ आ पाछू िहै त अमछ, ते ँ जे िाता बीतल अमछ से बे सी बे सी ्' गे ल। 51 तखन हि पाथनना कऽ कऽ कहमलयमन, “की अहाँ सोचैत छी, हि ओमह सिय ररि जीमब सकैत छी?” आमक ओमह मदन िे की होयत? 52 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “जे बात अहाँ हि​िा सँ िाँ गैत छी, तकि म्षय िे हि अहाँ केँ मकछु -मकछु कमह सकैत छी। मकएक तँ हि ई बात नमह जनैत छी। अध्य 5 1 िु दा जमहना-जमहना सं केत आमब िहल अमछ, दे खू, एहन मदन आओत जे प्थव ्ी पि िहमनहाि लोक स् बहत सं खा िे पक़ल जायत, आ सतक बार नुकायल िहत, आ दे श म्शव ्ास सँ बं जि ्ऽ जायत। 2 िु दा अरिन ओमह सँ बे सी बम़ जायत जे अहाँ एखन दे खैत छी आ जे अहाँ बहत पमहने सु नने छी। 3 जे दे श अहाँ एखन जम़ जिा ले ने दे खैत छी, तकिा अचानक उज़ल दे खब। 4 िु दा पि​िे शव ्ि जँ अहाँ केँ जीम्त िहबाक अनुिमत दे त तँ तेसि तुिहीक बाद अहाँ दे खब जे िामत िे अचानक सू यन आ मदन िे तीन बे ि चान चिमक जायत। 5 लक़ी सँ खून खमस प़त आ पाथि ओकि आ्ाज मनकालत आ लोक स् तस ्ऽ जायत। 6 ओ िाजव‍य कित, जकिा ओ स् प्थव ्ी पि िहमनहाि केँ नमह ताकैत अमछ, आ मच़ै स् एक सं ग ्ामग जायत। 7 सदोि सिु ् िाछ िेकत आ िामत िे हला कित जे बहतो लोक नमह जनैत अमछ, िु दा स् ओकि आ्ाज सु नत। 8 कतेको ठाि भि ्ऽ जायत, आ आमग बे ि-बे ि िेि सँ बाहि ्ऽ जायत, जं गली जान्ि स् अपन सथान बदमल ले त, आ िामसक रिन क सीगण स् िा्स स् केँ जन दे त। 9 िीठ िे निकीन पामन ्ेरत, आ स् मित एक-दोसि केँ नष कऽ ले ताह। तखन बु लु नुका जायत आ बु लु अपन गु प कोठली िे ्ापस आमब जायत। 10 बहतो लोकक खोज होयत, िु दा नमह ्ेरत, तखन प्थव ्ी पि अरिन आ असं यि बम़ जायत। 11 एक दे श दोसि दे श सँ पूछत जे , “की रिन जे िनुषव य केँ रामिन क बना दै त अमछ से चमल गे ल अमछ।” hrough तोिा? ओ कहत जे नमह। 12 ओमह सिय िे िनुषव य आशा कित, िु दा मकछु नमह ्ेरत, ओ िे हनत कित, िु दा ओकि बार ठीक नमह होयत।

13 अहाँ केँ एहन मचन दे खाबय ले ल हि​िा छोम़ दे ल गे ल अमछ। जँ अहाँ िेि सँ पाथनना किब आ एखन जकाँ कानब आ मदन ्रि उप्ास किब तँ आओि पैघ बात सु नब।” 14 तखन हि जामग गे लहँ आ हि​ि सिस शिीि िे अतमरक ्य गे ल आ हि​ि िोन तस ्ऽ गे ल जे बे होश ्ऽ गे ल। 15 तखन जे सव ्गन दूत हि​िा सं ग गप किऽ आयल छलाह, हि​िा पकम़ कऽ सानभना दे लमन आ हि​िा पयि पि ठा़ कयलमन। 16 दोसि िामत िे लोकक से नापमत सलामथएल हि​िा लग आमब कऽ कहलमथन, “अहाँ कतऽ गे लहँ?” आ अहाँ क चेहिा एतेक ्ािी मकएक अमछ? 17 की अहाँ नमह जनैत छी जे इसाएल हनका स्क बं दी दे श िे अहाँ क हाथ िे सौंपल गे ल अमछ? 18 तखन उमठ कऽ िोरी खाउ आ हि​िा स् केँ नमह छो़ू, जे ना ओ चिबाह अपन ्े़ ँ ा केँ कूि ्ेम़याक हाथ िे छोम़ दै त अमछ। 19 तखन हि हनका कहमलयमन, “हि​िा सँ हमर जाउ आ हि​िा लग नमह आमब जाउ।” हि​ि कहल बात सु मन ओ हि​िा मदस सँ चमल गे लाह। 20 हि सात मदन ररि शोक आ कानैत उप्ास केलहँ , जे ना उिीएल सव ्गन दूत हि​िा आजा दे ने छलाह। 21 सात मदनक बाद हि​ि हदयक म्चाि िेि सँ बहत दु खी ्ऽ गे ल। 22 हि​ि आता केँ बु झबाक आतव िा आमब गे ल आ हि िेि पि​िे शव ्िक सं ग गप किऽ लगलहँ । 23 ओ कहलमथन, “हे प्ु, जे प्थव ्ीक स् लक़ी आ ओकि स् गाछ िे शासन किै त छी, अहाँ अपन एकिात बे ल चुनलहँ । 24 अहाँ सिस सं सािक स् दे श िे सँ एकरा गडा चुनलहँ आ ओकि स् िूल िे सँ एकरा कुिु द। 25 सिु ्क स् गहीिं ्ाग िे सँ एकरा नदी केँ ्रि दे मलयैक। 26 जे स् मच़ै स् स् मजत अमछ, तामह िे सँ अहाँ एकरा कबू तिक नाि िालख दे लहँ । 27 लोकक ्ी़ िे अहाँ केँ एक-एकरा पजा ्ेरल अमछ, आ एमह लोक केँ, जकिा सँ अहाँ पेि किै त छलहँ, अहाँ स् केँ एकरा एहन मनयि दे लहँ जे स् केँ नीक लगै त अमछ। 28 आब, हे प्ु, अहाँ एमह एक गोरे केँ बहतो लोक केँ मकएक सौंपलहँ? एक जम़ पि अहाँ दोसि लोक केँ तैयाि केलहँ आ अपन एकिात लोक केँ बहतो लोक िे मकएक मछम़या दे लहँ ? 29 जे स् अहाँ क पमतजाक म्िोर केलक आ अहाँ क ्ाचा पि म्शव ्ास नमह केलक, से स् ओकिा दबा दे लक। 30 जँ अहाँ अपन लोक स् सँ एतेक घ्णा किै त छलहँ तँ ओकिा स् केँ अपन हाथ सँ दं मडत किबाक चाही। 31 हि ई बात कमह कऽ पमहने िामत िे हि​िा लग आयल सव ्गन दूत हि​िा लग पठाओल गे लाह। 32 ओ हि​िा कहलमथन, “हि​ि बात सु नू, हि अहाँ केँ मश्ा दे ब। हि जे बात कहै त छी से सु नू, आ हि अहाँ केँ आओि बात कहब।” 33 हि कहमलयमन, “हे हि​ि प्ु, आगू ब़ू।” तखन ओ हि​िा कहलमथन, “तो ँ इसाएलक ले ल बहत मचंमतत छी। 34 हि कहमलयमन, “नमह, प्ु, िु दा हि बहत दु खक बात कमह िहल छी, मकएक तँ हि पि​िे शव ्िक बार बु झबाक आ हनकि नव यायक मकछु ्ाग ताकबाक ले ल हि​ि लगाि हि घ़ी हि​िा कष दै त अमछ।” 35 ओ हि​िा कहलमथन, “अहाँ नमह कऽ सकैत छी।” हि कहमलयमन, “प्ु, मकएक? तखन हि​ि जन कोन िे ्ेल छल? तखन हि​ि िायक कोलख हि​ि कब मकएक नमह छल, जामह सँ हि याकूबक पस् आ इसाएलक थकान ्िल परिशि नमह दे लखतहँ ? 36 ओ हि​िा कहलमथन, “जे स् एखन ररि नमह आयल अमछ, तकिा हि​िा मगनू, हि​िा ओमह कू़ा केँ जिा कर जे मछम़या गे ल अमछ, हि​िा िेि सँ हरियि बनाउ जे िूल िु िझा गे ल अमछ।


37 हि​िा बन जगह स् खोमल कऽ ओमह िे बं द ह्ा स् केँ हि​िा सोझाँ आनू, हि​िा आ्ाजक पमतरप दे खाउ। 38 हि कहमलयमन, “हे प्ु, जे प्ु, ई स् बात के जामन सकैत अमछ, िु दा जे िनुषव यक सं ग अपन मन्ास नमह िखैत अमछ?” 39 हि​ि बात हि अबु लुिान छी, तखन हि एमह बात स्क बािे िे कोना कमह सकैत छी जे अहाँ हि​िा सँ पूछैत छी? 40 तखन ओ हि​िा कहलमथन, “जे ना अहाँ एमह िे सँ कोनो बात नमह कऽ सकैत छी जे हि कहलहँ अमछ, तमहना अहाँ हि​ि मनणनय आ अं त िे ओ पेि नमह पामब सकैत छी जे हि अपन लोक स्क पमत ्चन दे ने छी।” 41 हि कहमलयमन, “हे प्ु, अहाँ अन ररि सु िम्त िहमनहाि स्क लग िे छी। 42 ओ हि​िा कहलमथन, “हि अपन नव याय केँ अं गूठी सँ उपिा दे ब। 43 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “की अहाँ स् केँ एके बे ि नमह बना सकैत छी जे स् बनल अमछ आ आब अमछ आ जे आबऽ ्ला अमछ। जे अहाँ अपन नव याय जली कऽ सकब? 44 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “जी् बनौमनहाि सँ बे सी जलबाजी नमह कऽ सकैत अमछ। आ ने सं साि एके बे ि िे ओकिा स् केँ पकम़ सकैत अमछ जे ओमह िे स् मजत होयत। 45 हि कहमलयमन, “जे ना अहाँ अपन से ्क केँ कहने छी जे , अहाँ जे स् केँ जी्न दै त छी, से एके बे ि िे ओमह पाणी केँ जी्न दऽ दे मलयैक जे अहाँ बनौने छी आ ओ पाणी ओकिा रािण कऽ ले लक आब एके बे ि िे उपलसथत िह। 46 ओ हि​िा कहलमथन, “एकरा सव तीक कोलख सँ पूमछ कऽ कह जे , “जँ अहाँ सं तान जनबै त छी तँ एकक बाद एक सं ग मकएक नमह किै त छी?” ते ँ हनका सँ पाथनना कर जे दस रा बचा पैदा किमथ n एके बे ि िे । 47 हि कहमलयमन, “ओ नमह कऽ सकैत छमथ, िु दा दू ि-दू ि ररि ई काज किऽ प़तमन।” 48 तखन ओ हि​िा कहलमथन, “हि तमहना प्थव ्ीक ग्न केँ अपन सिय िे ओमह िे बोओल गे ल लोक स् केँ दऽ दे लहँ ।” 49 जमहना छोर बचा ्​् ुक ्सु नमह पैदा कऽ सकैत अमछ, तमहना हि अपन बनाओल सं साि केँ से हो ओमहना समािलहँ । 50 हि पुछमलयमन आ कहमलयमन, “अहाँ हि​िा आब बार दऽ दे लहँ तँ हि अहाँ क सोझाँ बाजब, मकएक तँ हि​िा स्क िाय, मजनका बािे िे अहाँ हि​िा कहलहँ जे ओ छोर छमथ, आब उम ब़य लग आमब गे ल छमथ।” 51 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “एकरा सव ती सँ पूछू जे सं तान होइत अमछ, तखन ओ अहाँ केँ कमह दे तीह।” 52 ओकिा कमह मदयौक, “अहाँ जकिा स् केँ अहाँ आब पैदा केने छी, से स् पमहने के लोक जकाँ मकएक अमछ, िु दा कद कि अमछ?” 53 ओ अहाँ केँ उ्ि दे तीह, “जौ्नक बल िे जन ले मनहाि स् एके तिहक होइत अमछ, आ जे युगक सिय िे जखन ग्न ्ीण ्’ जाइत अमछ, से दोसि तिहक होइत अमछ।” 54 ते ँ अहाँ स् से हो सोचू जे अहाँ स् अहाँ स् सँ पमहने जे लोक स् सँ कि अमछ। 55 अहाँ स् सँ कि जे स् अहाँ स्क पाछाँ आमब िहल अमछ, से स् ओमह पाणी स् जकाँ अमछ जे आब बू ़ होबऽ लागल अमछ आ यु्ा्सथाक सािथवन य सँ आगू बम़ गे ल अमछ। 56 तखन हि कहमलयमन, “प्ु, हि अहाँ सँ म्नती किै त छी जे जँ हि​िा अहाँ क नजरि िे अनुगह ्ेरल अमछ तँ अहाँ अपन से ्क केँ दे खा मदअ जकिा दािा अहाँ अपन स् मष केँ पि्ाह किै त छी।”

अध्य 6 1 ओ हि​िा कहलमथन, “आमद िे जखन प्थव ्ी बनल छल, तखन सं सािक सीिा स् ठा़ छल ्ा कमहयो ह्ा बहै त छल। 2 ओकिा गिजै त आ हलुक होबय सँ पमहने, ्ा कमहयो सगन क नीं् नमह िाखल गे ल। 3 गोि िूल दे खबा सँ पमहने ्ा चलय बला शल्क सथापना सँ पमहने असं ख सगन दूत स्क जिा़्ा सँ पमहने। 4 ्ा आकाशक नाप स्क नाि नमह ले ला सँ पमहने ह्ाक ऊँचाई ऊपि उमठ गे ल छल, ्ा मसयोन िे मचिनी स् गि​ि होइत छल। 5 आब पाप किमनहाि लोकक आम्षाि तकबा सँ पमहने जे स् म्शव ्ास केँ ्ंडािक रप िे जिा कऽ ले ने छमथ, तामह पि िोहि लगाओल गे ल छल। 6 तखन हि एमह स् बात पि म्चाि केलहँ आ ई स् असगिे हि​िा दािा बनल अमछ, आ ककिो दािा नमह। 7 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “सियक म्चे द की होयत?” ्ा पमहलु का आ ओकि बादक शुरआत कमहया होयत? 8 ओ हि​िा कहलमथन, “अबाहि सँ इसहाक ररि जखन याकूब आ एसा् हनका सँ जनलमन तखन याकूबक हाथ पमहने एसा्क ए़ी पक़ने छलमन।” 9 मकएक तँ एसा् सं सािक अनव त अमछ आ याकूब सं सािक शुरआत अमछ। 10 िनुषव‍यक हाथ ए़ी आ हाथक बीचिे अमछ। 11 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “हे प्ु प्ु, जँ हि​िा अहाँ क नजरि िे अनुगह ्ेरल अमछ। 12 हि अहाँ सँ म्नती किै त छी जे अहाँ अपन से ्क केँ अपन मचनक अं त दे खाउ, जामह िे अहाँ हि​िा अं मति िामत िे ्ाग दे लहँ । 13 तखन ओ हि​िा कहलमथन, “अपन पएि पि ठा़ ्ऽ कऽ एकरा पबल आ्ाज सु नू।” 14 ई एकरा पैघ गमत जकाँ होयत। िु दा जतऽ अहाँ ठा़ छी से नमह महलत।” 15 ते ँ जखन ई बजै त अमछ तँ डर नमह, मकएक तँ ्चन अनक अमछ आ प्थव ्ीक नीं् बु झल गे ल अमछ। 16 आ मकएक? कािण, एमह बात स्क बाजब काँ मप उठै त अमछ आ महलै त अमछ, मकएक तँ ओ जनैत अमछ जे एमह बात स्क अं त बदलब जरिी अमछ। 17 ई बात सु मन हि अपन पएि पि ठा़ ्ऽ कऽ सु नलहँ आ दे खलहँ जे एकरा आ्ाज बामज िहल छल आ ओकि आ्ाज बहतो पामनक आ्ाज जकाँ छल। 18 ओ कहलक, “दे खू, ओ मदन आमब िहल अमछ, जखन हि प्थव ्ी पि िहमनहाि स्क सि् आमब कऽ दे खब। 19 ओ हनका स् सँ पूछताछ किऽ लगताह जे ओ स् की अमछ जे अपन अरिन क कािणे ँ अनायपू्नक चोर पहँ चाओल गे ल अमछ आ मसयोनक केश कखन पूिा होयत। 20 जखन सं साि सिाप ्ऽ जायत, तखन हि ई स् मचन दे खब। 21 एक ्षनक बचा स् अपन आ्ाज सँ बाजत, ग्न्ती िमहला स् तीन-चारि िासक असिय सं तान पैदा कित आ ओ स् जीम्त िहत आ जीमब उठत। 22 अचानक बोओल गे ल जगह मबना बोएल दे खाओल जायत, ्रि गे ल ्ंडाि अचानक खाली ्’ जायत। 23 तुिही बाजत, जे सु नला पि स् केओ अचानक ्य्ीत ्ऽ जायत। 24 ओमह सिय िे मित शतु जकाँ एक-दोसि सँ ल़त आ प्थव ्ी ओमह िे िहमनहाि स्क सं ग ्य ्ऽ कऽ ठा़ ्ऽ जायत, झिना


स्क झिना स् ठा़ ्ऽ जायत आ तीन घंरा िे ओ स् नमह दौ़त। 25 जे केओ एमह स् बात सँ बचैत अमछ जे हि अहाँ केँ कहने छी, से बचत आ हि​ि उुाि आ अहाँ क सं सािक अं त दे लख जायत। 26 जे िनुषव यक गहण कयल गे ल अमछ, से दे लख ले त, जे जनि सँ ि् तव युक साद नमह ले ने अमछ। 27 मकएक तँ अरलाह केँ सिाप कयल जायत आ छल-कपर बु झा जायत। 28 म्शव ्ासक बात तँ ओ पनपत, भषाचाि पि म्जय पामब जायत आ सतव य जे एतेक मदन ररि िल नमह दे ने अमछ, ओकि पचाि कयल जायत। 29 जखन ओ हि​िा सँ गप कयलमन , दे खू, हि कमन-िमन हनका मदस तकैत िहलहँ , मजनका सोझाँ हि ठा़ छलहँ । 30 ई बात ओ हि​िा कहलमन। हि आबै बला िामत के सिय अहाँ के दे खाबय ले ल आयल छी। 31 जँ अहाँ आओि बे सी पाथनना किब आ सात मदन िेि उप्ास किब तँ हि अहाँ केँ मदन िे जतेक पैघ बात सु नलहँ तामह सँ बे सी बात कहब। 32 मकएक तँ पि​िे शव ्िक सि् अहाँ क आ्ाज सु नल जाइत अमछ, मकएक तँ पिाकिी अहाँ क रामिन क व्हाि दे लख िहल अमछ आ अहाँ क पमतवता से हो दे लख िहल अमछ जे तोहि यु्ा्सथासँ अमछ। 33 ते ँ ओ हि​िा पठौलमन जे ई स् बात अहाँ केँ कहब आ अहाँ केँ ई कहब जे , “सानभना िह आ नमह डे िाउ।” 34 आब बीतल सिय िे जलबाजी नमह कर आ वथन बात नमह सोचू जामह सँ बादक सिय सँ जलबाजी नमह कर। 35 एकि बाद हि िेि कामन कऽ सात मदन ररि उप्ास केलहँ जामह सँ ओ तीन सपाह पूिा कऽ सकब जे ओ हि​िा कहलमन। 36 आठि िामत िे हि​ि िोन िेि सँ पिे शान ्’ गे ल आ हि पि​िाताक सि् गप किय लगलहँ । 37 हि​ि आतव िा बहत आमग लगा दे लक आ हि​ि पाण म्पम् िे पम़ गे ल। 38 हि कहमलयमन, “हे प्ु, अहाँ स् मषक पािं ् सँ पमहल मदन सँ बामज िहल छलहँ आ ई कहलहँ । आकाश आ प्थी बनय। आ तोहि ्चन एकरा मसु काज छल। 39 तखन आतव िा छल आ चार कात अनव हाि आ िौन छल। िनुकक आ्ाजक आ्ाज एखन ररि नमह बनल छल। 40 तखन अहाँ अपन खजाना िे सँ एकरा सु नि इजोत मनकलबाक आजा दे लहँ जामह सँ अहाँ क काज पकर हो। 41 दोसि मदन अहाँ आकाशक आतव िा बनौलहँ आ ओकिा अलग किबाक आ पामन िे म्​्ाजन किबाक आजा दे लहँ जामह सँ एक ्ाग ऊपि चमल जाय आ दोसि ्ाग नीचाँ िहय। 42 तेसि मदन अहाँ आजा दे लहँ जे प्थव ्ीक सात्ाँ ्ाग िे पामन जिा कयल जाय। 43 मकएक तँ जमहना अहाँ क ्चन ब़ल तँ काज ्ऽ गे ल। 44 मकएक तँ तुिन ब़का-ब़का आ असं ख िल आ सादक ले ल अनेक आ म्म्र सु ख, अपरि्तननीय िं गक िूल आ अदव ्ुत गं रक गं र ्ेल। 45 चारि​ि मदन अहाँ आजा दे लहँ जे सू यन चिकय आ चान ओकिा इजोत किय आ तािा स् कि िे िहय। 46 ओ ओकिा स् केँ िनुषव यक से ्ा किबाक आजा दे लमथन। 47 पाँ चि मदन अहाँ सात्ाँ ्ाग केँ कहमलयमन जे पामन जिा कयल गे ल छल जे ओमह सँ जी्-जनु, मच़ै -चुनिु नी आ िाछ पैदा होयत। 48 मकएक तँ गूं गा पामन आ जी्न िमहत पामन पि​िे शव ्िक आजाक अनुसाि जी्-जनु उतन कयलक जामह सँ स् लोक अहाँ क आशयनकािक काजक पशंसा किमथ।

49 तखन अहाँ दू रा जी्-जनु केँ मनयु् केलहँ, एकरा केँ हनोक आ दोसि केँ ले म्यथन कहलहँ । 50 एक केँ दोसि सँ अलग कऽ दे लक, मकएक तँ साति ्ाग अथान त जतऽ पामन जिा कयल गे ल छल, ओतऽ दु नू गोरे केँ नमह पकम़ सकैत छल। 51 अहाँ हनोक केँ एक ्ाग दे मलयैक जे तेसि मदन सु खा गे ल छल, जामह िे ओ ओमह ्ाग िे िहय, जामह िे एक हजाि पहा़ी अमछ। 52 िु दा अहाँ ले म्याथन केँ सात्ाँ ्ाग अथान त निहि ्ाग दे मलयैक। आ जकिा चाहै छी आ कखन ओकिा खाय ले ल िालख दे ने छी। 53 छठि मदन अहाँ प्थव ्ी केँ आजा दे मलयैक जे ओ अहाँ क सोझाँ पशु, पशु आ िे गत पाणी पैदा किय। 54 एमह स्क बाद आदि से हो, जकिा अहाँ अपन स् स् मषक िामलक बनौलहँ । 55 हे प्ु, हि अहाँ क सि् ई स् बात कहलहँ , मकएक तँ अहाँ हि​िा स्क ले ल सं साि केँ बनौने छी 56 आदि सँ आयल आन लोक स्क म्षय िे अहाँ कहलहँ जे ओ स् मकछु नमह अमछ, बलव मक थूक जकाँ बनैत अमछ। 57 आब, हे प्ु, दे खू, ई जामत-जामत स्, जे कमहयो मकछु नमह बु झल जाइत छल, हि​िा स्क िामलक बनय लागल अमछ आ हि​िा स् केँ खाय लागल अमछ। 58 िु दा हि स् अहाँ क पजा, जकिा अहाँ अपन जे ठ पुत, अपन एकलौता आ अपन पखि पेिी कहलहँ , हनका स्क हाथ िे दे ल गे ल अमछ। 59 जँ आब सं साि हि​िा स्क ले ल बनल अमछ तँ हि​िा स् केँ सं सािक सं ग उ्िामरकाि मकएक नमह अमछ? ई कतेक मदन ररि मरकत? अध्य 7 1 जखन हि ई बात कमह कऽ सिाप कऽ ले लहँ तँ ओ सव ्गन दूत हि​िा लग पठौल गे लाह जे पमहने िामत िे हि​िा लग पठाओल गे ल छल। 2 ओ हि​िा कहलमथन, “एस्ा, उमठ कऽ सु नू जे हि अहाँ केँ कहय ले ल आयल छी।” 3 हि कहमलयमन, “हे हि​ि पि​िे शव ्ि, बजै त िह।” तखन ओ हि​िा कहलमथन, “सिु ् एकरा चौ़ा जगह पि डूबल अमछ, जामह सँ ओ गहीिं आ पैघ हो।” 4 िु दा बाजू क प्े श दाि सं कीणन आ नदी जकाँ छल। 5 तखन सिु ् िे के जा कऽ ओकिा दे लख कऽ ओकिा पि शासन किऽ सकैत छल? जँ सं कीणन िे नमह गे ल तऽ चौ़ा िे कोना आमब सकैत छल? 6 एकरा आि गप से हो अमछ। एकरा नगि बनाओल जाइत अमछ आ चौ़ा खेत िे िाखल जाइत अमछ आ स् नीक ्सु सँ ्िल अमछ। 7 ओकि प्े श दाि सं कीणन अमछ आ खसबाक ले ल खतिनाक जगह पि िाखल गे ल अमछ, जे ना दमहना कात आमग आ बािा कात गहीिं पामन हो। 8 आ दु नूक बीच एकरा एकिात बार, ओहो आमग आ पामनक बीच, एतेक छोर जे ओ ने िन एके बे ि ओतय जाउ। 9 जँ आब ई नगि कोनो आदिी केँ उ्िामरकािक रप िे दे ल गे ल हो, जँ ओ कमहयो ओमह खतिा सँ नमह गु जित तऽ ओकिा ई उ्िामरकाि कोना ्ेरतैक? 10 हि कहमलयमन, “हे प्ु।” तखन ओ हि​िा कहलमथन, “इसाएलक ्ाग से हो तमहना अमछ।”


11 कािण, हि हनका स्क ले ल सं साि केँ बनौने छी, आ आदि जखन हि​ि मनयिक उलंघन कयलमन तखन आब ई मनयि कयल गे लमन। 12 तखन एमह सं सािक प्े श दाि सं कीणन ्ऽ गे ल, दु ख आ कष सँ ्िल, ओ स् कि आ अरलाह, खतिा सँ ्िल, आ बहत कषदायक अमछ। 13 मकएक तँ पाचीन सं सािक प्े श दाि चौ़ा आ मनमशं त छल आ अि​ि िल दै त छल। 14 जँ जीम्त लोक स् एमह कष आ वथन ्सु स् िे प्े श नमह किबाक ले ल िे हनमत किै त अमछ तँ ओ स् कमहयो ओमह स् केँ नमह पामब सकैत अमछ जे ओकिा स्क ले ल िाखल गे ल अमछ। 15 आब अहाँ मकएक मचंमतत ्ऽ िहल छी, मकएक तँ अहाँ िात नाश्ान आदिी छी? आ अहाँ मकएक महलै त छी, जखन मक अहाँ नशि छी? 16 अहाँ स् मकएक नमह सोचलहँ जे आबऽ ्ला बात पि म्चाि कयल गे ल अमछ। 17 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “हे शासन किऽ ्ला प्ु, अहाँ अपन मनयि िे ई मनरान रित कएने छी जे रिान ता केँ ई स् उ्िामरकाि ्ेरय, िु दा अ्​् लोकक नाश ्ऽ जाय।” 18 तैयो रि् लोक स् कष कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ कऽ आशा िाखत। 19 ओ हि​िा कहलमथन। पि​िे शव ्ि सँ ऊपि कोनो नायारीश नमह अमछ आ पि​िे शव ्ि सँ बे सी बु लु िखमनहाि केओ नमह अमछ। 20 एमह जी्न िे बहतो लोक नष ्ऽ जाइत छमथ, कािण ओ स् पि​िे शव ्िक मनयि केँ मतिस्त किै त छमथ जे हनका स्क सोझाँ िाखल गे ल अमछ। 21 मकएक तँ पि​िे शव ्ि अयला स् केँ ई कषव र आजा दे ने छमथ जे ओ स् जे ना आयल छलाह तेना जीबाक ले ल की किबाक चाही आ दं ड सँ बचबाक ले ल की पालन किबाक चाही। 22 तैयो ओ स् हनकि आजा नमह िानैत छलाह। िु दा हनका म्िोर िे बजै त छल आ वथन बातक कलना किै त छल। 23 अपन दु षिन सँ अपना केँ रोखा दे लक। आ पि​िे शव ्िक म्षय िे कहलमथन जे ओ नमह छमथ। ओ अपन बार नमह जनैत छल। 24 िु दा ओ स् ओकि रिन -मनयि केँ मतिस्त कऽ कऽ ओकि ्ाचा केँ असीकाि कऽ दे लक। हनकि मनयि िे ओ स् म्शव ्ास नमह कयलमन आ हनकि काज नमह कयलमन। 25 ते ँ हे एसडडा, मकएक तँ खाली स् खाली ्सु अमछ आ ्रि ले ल ्िल ्सु अमछ। 26 दे खू, सिय आओत जे हि अहाँ केँ जे सं केत कहने छी से पूिा होयत, आ कमनयाँ पकर होयत आ ओ बाहि मनकलै त दे खल जायत, जे आब प्थी सँ हमर गे ल अमछ। 27 जे केओ उपिो् अरलाह स् सँ िु ् ्ऽ जायत, से हि​ि चिताि दे खत। 28 हि​ि पुत यीशु हनका सं ग िहमनहाि स्क सं ग पगर होयत आ चारि सय ्षनक ्ीति जे स् बचल अमछ से स् आनलनत ्ऽ जायत। 29 एमह ्षनक बाद हि​ि पुत िसीह आ स् जी्न पामब कऽ िरि जे ताह। 30 पमहने सं साि िे सात मदन ररि पुिना िौन िे बदमल जायत, जे ना मक पमहने नाय िे ्ेल छल, जामह सँ केओ नमह िहत। 31 सात मदनक बाद जे सं साि एखन ररि नमह जागल अमछ, ओ जीमब उठत आ जे नष ्ऽ गे ल अमछ से िरि जायत 32 प्थव ्ी ओकिा िे सु तल लोक स् केँ िेि सँ बनाओत, आ िौन िे िहमनहाि स् केँ रू िा से हो, आ गु प सथान स् ओमह पाण स् केँ उुाि कित जे ओकिा स् केँ सौंपल गे ल छल।

33 पि​िे शव ्ि पि​िे शव ्ि नव यायक आसन पि पगर ्ऽ जे ताह, आ दु ःख-ददन सिाप ्ऽ जायत आ दीघन-रीनताक अं त ्ऽ जायत। 34 िु दा नाय िात िहत, सतव य ठा़ िहत आ म्शव ्ास िजगू त ्ऽ जायत। 35 ओकि बाद काज होयत, आ िल दे खाओल जायत, आ नीक काज बलशाली होयत, आ अरलाह काज पि कोनो मनयि नमह होयत। 36 तखन हि कहमलयमन, “अबाहि पमहने सदोि्ासीक ले ल पाथनना केलमन आ िू सा जं गल िे पाप किय बला पू्नज स्क ले ल। 37 आकानक सिय िे यीशु हनका बाद इसाएलक ले ल। 38 शिू एल आ दाऊद म्नाशक ले ल आ सु लेिान पम्त सथान पि जे बाक ले ल। 39 बिखा ्ेल लोक स्क ले ल हे मलयास। आ ि् तकक ले ल, जामह सँ ओ जीम्त िहमथ। 40 सनहे िीबक सिय िे लोकक ले ल इजमकयाह आ बहतो लोकक ले ल। 41 एखन तमहना, जखन मक भषाचाि बम़ गे ल अमछ, दु षता बम़ गे ल अमछ, आ रि् लोक स् अ्​् स्क ले ल पाथनना किै त अमछ। 42 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “ई ्तनिान जी्न ओ अं त नमह अमछ जतय बहत िमहिा िहत। ते ँ ओ स् किजोि लोकक ले ल पाथनना केने छमथ। 43 िु दा म्नाशक मदन एमह सियक अं त होयत आ आबय बला अि​िताक आिं ् होयत, जामह िे म्नाश बीमत गे ल अमछ। 44 सं यि सिाप ्ऽ गे ल अमछ, अम्शास कमर गे ल अमछ, रामिन कता बम़ गे ल अमछ आ सत उगै त अमछ। 45 तखन मकयो नष ्ेल लोक केँ नमह बचा सकैत अमछ आ जे म्जय पामब गे ल अमछ ओकिा पि अताचाि नमह कऽ सकैत अमछ। 46 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “ई हि​ि पमहल आ अं मति कहब अमछ जे ई नीक िहै त जे प्थव ्ी आदि केँ नमह दऽ दे मलयैक। 47 आब एमह सिय िे िनुषव यक कोन ला् अमछ जे ओ ्ािी पम़ कऽ जीबै त अमछ आ ि् तव युक बाद दं डक पती्ा किै त अमछ? 48 हे आदि, अहाँ की केलहँ? मकएक तँ अहाँ पाप केने छी, िु दा अहाँ असगिे नमह, बलव मक हि स् जे अहाँ क मदस सँ आयल छी। 49 जँ हि​िा स् केँ अि​ि सियक पमतजा कयल गे ल अमछ तँ हि​िा स् केँ कोन ला् होयत s हि स् ओ काज केलहँ जे ि् तु अनैत अमछ? 50 आ हि​िा स् केँ अनन आशाक पमतजा कयल गे ल अमछ, जखन मक हि स् बहत दु ष बमन गे ल छी? “ 52 आ पि​िे शव ्िक िमहिा ओमह स्क ि्ाक ले ल िाखल जाइत अमछ जे सा्रान जी्न जीबै त अमछ, जखन मक हि स् स् सँ बे सी दु ष बार पि चलै त छी? “ 54 (मकएक तँ हि स् अमपय सथान पि चललहँ ।) 55 जे स् पिहे ज केने छमथ, हनकि िुँ ह तािा स्क ऊपि चिकत, जखन मक हि​िा स्क चेहिा अनाि सँ बे सी कािी ्ऽ जायत? 56 जाबत हि स् जीबै त छलहँ आ अरिन किै त छलहँ , तखन हि स् ई नमह सोचैत छलहँ जे ि​िलाक बाद हि स् एमह ले ल कष ्ोगब शुर किी। 57 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “ओमह यु​ुक लसथमत ई अमछ जे प्थव ्ी पि जन ले मनहाि िनुर ल़त। 58 जँ ओ पिामजत ्ऽ जायत तँ अहाँ जे ना कहने छी तेना ओ कष ्ोगत। 59 िू सा जीबै त काल लोक स् सँ ओ जी्न एमह तिहे ँ कहने छलाह जे , “अहाँ जी्न केँ चुनू जामह सँ अहाँ जीम्त िहब।”


60 िु दा ओ स् हनका पि म्शव ्ास नमह कयलमन आ ने हनका बादक प्कव ता स् आ ने हि जे हनका स् सँ गप केने छी। 61 एमह ले ल जे हनका स्क म्नाश िे एहन ्ािीपन नमह हो, जे उुािक ले ल िनाओल गे ल लोक स् पि आनन होयत। 62 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “हे प्ु, हि जनैत छी जे पि​िे शव ्ि केँ दयालु कहल गे ल अमछ, मकएक तँ ओ ओमह स् पि दया किै त अमछ जे एखन ररि सं साि िे नमह आयल अमछ। 63 आ ओमह स् पि से हो जे हनकि व्सथा मदस घुिैत अमछ। 64 ओ रै यन िखैत छमथ आ पाप केमनहाि स् केँ अपन स् मष जकाँ सहनशील छमथ। 65 ओ पखि अमछ, मकएक तँ ओ जतऽ जरित हो, ओतऽ दे बऽ ले ल तैयाि अमछ। 66 आ ईहो जे ओ बहत दयालु छमथ, मकएक तँ ओ ्तनिान िे िहमनहाि आ ्ूतकाल आ आबय बला लोक पि बे सी सँ बे सी दया किै त छमथ। 67 जँ ओ अपन दया नमह ब़ौताह तँ सं साि ओमह िे उ्िामरकािी स्क सं ग नमह िहत। 68 ओ ्िा किै त छमथ। मकएक तँ जँ ओ अपन ्लाईक कािणे ँ एहन नमह करितमथ जामह सँ अरिन कयलमनहाि स् ओकिा स् सँ हलुक ्ऽ सकमथ तँ लोकक दस हजाि्ाँ ्ाग जीम्त नमह िहताह। 69 जँ ओ अपन ्चन सँ ठीक ्ेल स् केँ िाि नमह कऽ कऽ ओमह म्​्ाद केँ दू ि नमह किमथ। 70 असं ख ्ी़ िे शायद बहत कि बचल िहबाक चाही। अध्य 8 1 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “पि​ि पि​िे शव ्ि एमह सं साि केँ बहतो लोकक ले ल बनौलमन, िु दा आबय बला सं साि कि ले ल।” 2 हि अहाँ केँ एकरा उपिा कहब, एस्। जे ना अहाँ प्थव ्ी सँ िाँ गैत छी तँ ओ अहाँ केँ कहत जे ई बहत िास ढाल दै त अमछ जामह सँ िामरक बतनन बनैत अमछ, िु दा सोना सँ कि रू िा मनकलै त अमछ। 3 बहतो स् मष अमछ, िु दा कि लोकक उुाि होयत। 4 हि उ्ि दे मलयैक, “हे हि​ि पाण, बु मझ कऽ मनगल जाउ आ बु लु केँ खाउ।” 5 अहाँ कान दे बऽ ले ल तैयाि छी आ ्म्र्ाणी किऽ ले ल तैयाि छी। 6 हे प्ु, जँ अहाँ अपन से ्क केँ कष नमह दे ब जे हि स् अहाँ क सोझाँ पाथनना किी, आ अहाँ हि​िा स्क हदयक बीज, आ सं स्मत केँ हि​िा स्क सिझ िे दे ब, जामह सँ एकि िल ्ेरय। जे नष ्ऽ गे ल अमछ, जे िनुखक सथान रािण किै त अमछ, से कोना जीबै त अमछ? 7 अहाँ असगि छी, आ हि स् अहाँ क हाथक एके क्मत छी, जे ना अहाँ कहलहँ । 8 जखन िायक ग्न िे शिीिक मनिान ण ्ऽ जाइत अमछ आ अहाँ ओकिा अं ग-अं ग दै त छी तखन अहाँ क पाणी आमग आ पामन िे सु िम्त िहै त अमछ आ अहाँ क कािीगिी नौ िास ररि अहाँ क स् मष केँ सहै त िहै त अमछ जे ओकिा िे स् मजत अमछ। 9 िु दा जे मकछु िाखैत अमछ आ सं िम्त अमछ से दु नू सु िम्त िहत। 10 अहाँ शिीिक अं ग-अं ग सँ , िाने सन सँ दू र दे बाक आजा दे लहँ, जे सनक िल अमछ। 11 जाबत ररि अहाँ ओकिा अपन दयाक अरीन नमह किब, ताबत ररि जे चीज बनल अमछ, से मकछु सिय ररि पोमषत होयत। 12 अहाँ एकिा अपन रामिन कताक सं ग पोसलहँ आ अपन व्सथा िे पोसलहँ आ अपन मनणनय सँ एकिा सु रािलहँ । 13 अहाँ ओकिा अपन स् मष जकाँ िारि दे ब आ ओकिा अपन काज जकाँ जीम्त किब।

14 ते ँ जँ अहाँ ओमह लोक केँ नष कऽ दे ब जे एतेक िे हनमत सँ बनाओल गे ल अमछ, तँ ई अहाँ क आजाक अनुसाि मनयु् किब सहज काज अमछ जामह सँ ओ बनल ्सु सु िम्त िहय। 15 आब हे प्ु, हि बाजब। सािानतः िनुर केँ सशन किय्ला, अहाँ बे सी नीक जकाँ जनैत छी; िु दा अहाँ क लोक केँ छूमब िहल छी, जकिा ले ल हि दु ःखी छी। 16 अहाँ क उ्िामरकािक ले ल, जकि कािणे ँ हि शोक किै त छी। आ इसाएलक ले ल, जकिा ले ल हि ्ािी छी। आ याकूबक ले ल, जकिा ले ल हि घबिाइत छी। 17 ते ँ हि अहाँ क सि् अपना ले ल आ हनका स्क ले ल पाथनना किब शुर किब, मकएक तँ हि स् एमह दे श िे िहमनहाि स्क पतन दे खैत छी। 18 िु दा आबय बला नायारीशक तेज गमत हि सु नलहँ । 19 ते ँ हि​ि आ्ाज सु नू आ हि​ि बात बु झ,ू आ हि अहाँ क सि् बाजब। एस्ासक ्चनक शुरआत ई अमछ, जे हनका ऊपि उठाओल गे लमन, आ हि एस सहायता, 20 हे प्ु, अहाँ अनन काल िे िहमनहाि जे ऊपि सँ आकाश आ ह्ा िे ्सु स् केँ दे खैत छी। 21 जकि मसं हासन अिू ल अमछ। जकि िमहिा नमह बु झल जा सकैत अमछ। हनका स्क सोझाँ सव ्गन दूत स्क से ना स् काँ पैत ठा़ अमछ। 22 जकि से ्ा ह्ा आ आमग िे पचमलत अमछ। मजनकि ्चन सत अमछ, आ कहा्त मनिं ति अमछ। मजनकि आजा िजगू त अमछ आ मनयि ्या्ह अमछ। 23 ओकि नजरि गहीिं िे सु खा दै त छै क आ कोर पहा़ केँ मपघमल दै त छै क। जकि ग्ाह सतव य अमछ। 24 हे अपन से ्कक पाथनना सु नू, आ अपन स् मषक म्नती पि कान कर। 25 जाबत हि जीबै त िहब ताबत ररि हि बाजब आ जाबत ररि हि​िा िे बु लु िहत ता ररि हि उ्ि दे ब। 26 हे अपन लोकक पाप मदस नमह दे खू। िु दा जे स् सतव य सँ अहाँ क से ्ा किै त अमछ, तकिा स् पि।” 27 जामत-जामत स्क अरलाह आम्षाि पि धान नमह मदयौक, बलव मक जे स् अहाँ क ग्ाही केँ केश िे पालन किै त अमछ, ओकि इचा पि धान मदयौक। 28 जे स् अहाँ क सािने नकली चलै त अमछ, तकिा स् पि नमह सोचू, बलव मक हनका स् केँ िोन िाखू जे अहाँ क इचानुसाि अहाँ क ्य केँ जनैत अमछ। 29 जे स् पशु जकाँ जीम्त अमछ, तकिा स् केँ नष किब अहाँ क इचा नमह हो। िु दा जे स् अहाँ क रिन -मनयि केँ सष रप सँ मसखबै त छमथ, तकिा मदस तकबाक ले ल। 30 अहाँ ओमह पि आकोश नमह कर जे जान्ि सँ बे सी खिाब िानल जाइत अमछ। िु दा जे स् समदखन अहाँ क रामिन कता आ िमहिा पि ्िोसा िखैत छमथ, हनका स् सँ पेि कर। 31 हि स् आ हि​िा स्क पू्नज एमह तिहक िोग सँ तस छी। 32 जँ अहाँ हि​िा स् पि दया किबाक इचा िखैत छी तँ अहाँ हि​िा स्क पमत दयालु कहल जायब, जे स् रिन क कोनो काज नमह िखैत छी। 33 मकएक तँ रि् लोक स् केँ जे बहत िास नीक काज अहाँ क सं ग िाखल अमछ, हनका स् केँ अपन काज सँ िल ्ेरतमन। 34 िनुख की अमछ जे अहाँ ओकिा पि नािाज होयब? ्ा नाश किय्ला पी़ी की होइत छै क जे अहाँ ओकिा पमत एतेक करु िहब? 35 मकएक तँ सतव य िे ओ स् जन ले मनहाि िे केओ नमह अमछ, बलव मक ओ दु षव र काज केने अमछ। आ म्शासी िे एहन केओ नमह अमछ जे अरलाह नमह केने हो।


36 हे प्ु, जँ अहाँ ओकिा स् पि दया किब, जकिा स् नीक काजक ्िोसा नमह िखैत अमछ, तँ एमह िे अहाँ क रामिन कता आ अहाँ क ्लाईक पचाि होयत। 37 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “अहाँ मकछु बात ठीक-ठीक बाजल छी आ अहाँ क बातक अनुसाि होयत।” 38 हि ओ स् ि​िबा सँ पमहने, नव याय सँ पमहने आ म्नाश सँ पमहने पाप केमनहाि स्क स्ा् पि नमह सोचब। 39 िु दा रि् लोकमनक स्ा् पि हि आनलनत िहब आ हनका स्क याता, उुाि आ इनाि जे हनका स् केँ ्ेरतमन से से हो िोन पा़ब। 40 जे ना हि एखन बजलहँ , तेना होयत। 41 मकएक तँ जमहना मकसान जिीन पि बहत बीया बोबै त अमछ आ बहत िास गाछ िोपैत अमछ, िु दा अपन सिय िे नीक बोनल नमह उठै त अमछ आ ने स् िोपल जम़ नमह लै त अमछ सं साि िे ; स् उुाि नमह पाओत। 42 तखन हि उ्ि दे मलयैक, “जँ हि​िा क्पा ्ेरल अमछ तँ हि बाजब।” 43 जमहना मकसानक बीया जँ नमह उठै त अमछ आ सिय पि अहाँ क ्षान नमह ्ेरैत अमछ तँ नाश ्ऽ जाइत अमछ। जँ बे सी बिखा आमब कऽ ओकिा भष कऽ दै त अमछ। 44 तमहना िनुख से हो नाश ्ऽ जाइत अमछ, जे तोहि हाथ सँ बनल अमछ आ तोहि अपन पमतरप कहल जाइत अमछ, मकएक तँ अहाँ ओमह सिान छी, जकिा ले ल अहाँ स् मकछु बनौने छी आ ओकिा मकसानक बीया सँ उपिा दे लहँ । 45 हि​िा स् पि कोर नमह कर, बलव मक अपन लोक केँ दया कर आ अपन उ्िामरकाि पि दया कर, मकएक तँ अहाँ अपन स् मष पि दयालु छी। 46 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “उपलसथत ्सु स् एखनक ले ल अमछ आ आगािी लोक स्क ले ल आबय बला अमछ।” 47 अहाँ हि​िा सँ बे सी हि​ि स् मष सँ पेि किबा िे बहत कि आमब गे ल छी। 48 एमह िे से हो अहाँ पि​िे शव ्िक सि् आशयनचमकत छी। “ 50 मकएक तँ जे स् बादक सिय िे सं साि िे िहत, ओकिा स्क सं ग बहत िास पैघ दु ःख होयत, मकएक तँ ओ स् बहत घिं ड सँ चलै त अमछ। 51 िु दा अहाँ अपना ले ल बु झू आ अहाँ सन लोकक िमहिा ताकब। 52 मकएक तँ अहाँ स्क ले ल सगन खुजल अमछ, जी्नक गाछ िोपल गे ल अमछ, आबय बला सिय तैयाि कयल गे ल अमछ, पचुिता तैयाि कयल गे ल अमछ, नगि बनाओल गे ल अमछ आ म्शािक अनुिमत अमछ, हँ , पूणन ्लाई आ बु लु। “ 54 दु ख बीमत जाइत अमछ, आ अं त िे अि​िताक खजाना दे खाओल जाइत अमछ। 55 ते ँ आब अहाँ नष होिय बला लोकक ्ी़क म्षय िे कोनो प् नमह पूछू। 56 मकएक तँ ओ स् सव ्तनव त पामब पि​िे शव ्ि केँ मतिसव काि कयलमन, हनकि व्सथा केँ मतिसाि कयलमन आ हनकि बार छोम़ दे लमन। 57 ओ स् ओकि रि् लोक केँ दबा दे लक। 58 ओ स् िन िे कहलमथन, “पि​िे शव ्ि नमह छमथ। हँ , आ ई जामन जे हनका स् केँ ि​िय प़तमन। 59 मकएक तँ जमहना उपिो् बात स् अहाँ स् केँ गहण कित, तमहना हनका स्क ले ल पास आ पी़ा तैयाि कयल गे ल अमछ।

60 िु दा जे स् स् मष ्ेल अमछ, तकिा स् लग अमछ जे ओकिा स् केँ बनौने छल, ओकि नाि अशु​ु क’ दे लक आ ओकिा स्क ले ल जी्न तैयाि किय बला लोकक पमत क्तघ नमह कयलक। 61 एमह ले ल आब हि​ि नव याय लग आमब गे ल अमछ। 62 ई स् बात हि स् लोक केँ नमह, बलव मक अहाँ आ अहाँ सन मकछु गोरे केँ दे खौलहँ । तखन हि उ्ि दे मलयैक। 63 हे प्ु, आब अहाँ हि​िा ओमह आशयनक ्ि​िाि दे खौलहँ जे अहाँ अं मति सिय िे किब शुर किब, िु दा कोन सिय िे अहाँ हि​िा नमह दे खलहँ । अध्य 9 1 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “अहाँ सिय केँ अपना िे बहत िे हनमत सँ नामप मलअ। 2 तखन अहाँ बु झब जे ्ै ह सिय अमछ जामह िे पि​िाता ओमह सं साि िे घुिब शुर किताह जे ओ बनौने छलाह। 3 एमह ले ल जखन सं साि िे ्ूकम आ लोकक हला दे खबा िे आओत। 4 तखन अहाँ नीक जकाँ बु मझ जायब जे पि​िे शव ्ि अहाँ सँ पमहने सँ पमहने सँ ओमह बात स्क बात कहै त छलाह। 5 मकएक तँ जमहना सं साि िे बनल स् मकछु क आिं ् आ अनव त होइत छै क आ अनव त पगर होइत छै क। 6 तमहना पि​िे शव ्िक सियक शुरआत आशयन आ सािरन पूणन काज िे होइत छै क आ अं त प्ा् आ सं केत िे होइत छै क। 7 जे केओ उुाि पाओत आ अपन किन आ म्शव ्ास दािा, जामह सँ अहाँ स् म्शव ्ास केलहँ, से बमच सकैत अमछ। 8 उ् सं कर सँ बचाओल जायत आ हि​ि उुाि हि​ि दे श िे आ हि​ि सीिा िे दे खब, कािण हि ओकिा स् केँ शुर सँ अपना ले ल पम्त कयने छी। 9 तखन ओ स् करण लसथमत िे होयत, जे आब हि​ि िागन क दु रपयोग क’ िहल अमछ। 10 जे स् अपन जी्न िे ला् पामब गे ल छमथ, िु दा हि​िा नमह मचनलमन। 11 जे स् हि​ि मनयि सँ घ्णा किै त छल, जाबत तक ओकिा स् केँ सतंतता छलै क, आ जखन पशाताप किबाक सथान ओकिा स्क ले ल खुजल छलै क, से नमह बु झल छलै क, बलव मक ओकिा तुच बु झलक। 12 ्एह पी़ा सँ ि​िलाक बाद एकिा जनैत हे तैक। 13 ते ँ अहाँ एमह बातक मजजासा नमह कर जे अ्​् केँ कोना दं मडत कयल जायत आ कमहया दे ल जायत। 14 तखन हि उ्ि दे मलयैक। 15 हि पमहने कहने छी, आब बामज िहल छी आ बाद िे से हो कहब जे उुाि पाबमनहाि सँ बे सी जे नाश ्ऽ जायत। 16 जे ना लहरि बूं दसँ पैघ होइत अमछ। 17 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “जमहना खेत अमछ, तमहना बीया से हो अमछ। जे ना िूल होइत छै क, िं ग से हो एहने होइत छै क; जे ना िजदू ि अमछ, तेहन काज से हो अमछ। जमहना मकसान सयं होइत अमछ, तमहना ओकि खेती-बा़ी से हो अमछ, मकएक तँ ओ सं सािक सिय छल। 18 आब जखन हि ओमह सं साि केँ, जे एखन ररि नमह बनल छल, ओकिा स् केँ आब जीम्त लोक िे िहबाक ले ल तैयाि केलहँ , तखन मकयो हि​िा म्िोर िे नमह बाजल। 19 तखन स् मकयो आजा िानैत छल, िु दा आब एमह सं साि िे जे स् मष ्ेल अमछ, ओकि आचाि-म्चाि सनातन बीया दािा आ एकरा


एहन मनयिक कािणे ँ जे अनजान ्ऽ गे ल अमछ, तकिा दािा नष ्ऽ गे ल अमछ। 20 हि दु मनयाँ पि म्चाि केलहँ आ दे खलहँ जे ओमह िे आयल षडं त स्क कािणे ँ खतिा छल। 21 हि दे खलहँ आ ओकिा बहत बखलहँ आ हि​िा ले ल एकरा अं गूिक गु चा आ एकरा पैघ लोकक पौरा िालख दे लहँ । 22 तखन जे ्ी़ वथन िे जनल छल, तकिा नाश ्ऽ जाय। हि​ि अं गूि आ हि​ि पौरा िाखल जाय। कािण, हि बहत िे हनमत सँ एकिा मसु कयलहँ ।” 23 िु दा, जँ अहाँ सात मदन आओि रमक जायब, (िु दा अहाँ ओमह िे उप्ास नमह किब। 24 िु दा िूलक खेत िे जाउ, जतय घि नमह बनैत अमछ, आ खेतक िूल िात खाउ। िां सक साद नमह मलअ, शिाब नमह पीबू, िु दा िूल िात खाउ;) 25 आ पि​िे शव ्ि सँ मनत पाथनना किै त िहब, तखन हि आमब कऽ अहाँ सँ गप किब। 26 हि ओमह खेत िे गे लहँ जे ना ओ हि​िा आजा दे ने छलाह। ओतमह हि िूलक बीच बै सल खेतक ज़ी-बू री खाइत छलहँ आ ओकि िां स हि​िा त्प किै त छल। 27 सात मदनक बाद हि घास पि बै सल िही आ हि​ि िोन पमहने जकाँ हि​िा िोन िे पिे शान ्’ गे ल। 28 हि अपन िुँ ह खोमल कऽ पि​िे शव ्िक सि् गप किऽ लगलहँ आ कहमलयमन। 29 हे प्ु, अहाँ जे हि​िा स् केँ अपना केँ दे खाबै त छी, अहाँ हि​िा स्क पू्नज केँ जं गल िे , जतय केओ नमह चलै त अमछ, बं जि सथान िे , जखन ओ स् मिस सँ मनकललाह, तखन अहाँ केँ दे खाओल गे ल छल। 30 अहाँ कहलहँ , “हे इसाएल, हि​ि बात सु नू। हे याकूबक ्ं शज, हि​ि बात पि मनशान लगाउ।” 31 दे खू, हि अहाँ स् िे अपन व्सथाक बीज बोमन िहल छी, आ ओ अहाँ स् िे िल दे त, आ अहाँ स् एमह िे अनन काल ररि आदि-िान िहब। 32 िु दा हि​िा स्क पू्नज जे रिन-मनयि केँ गहण कयलमन, से नमह पालन कयलमन आ अहाँ क मनयिक पालन नमह कयलमन। 33 तैयो जे स् ओकिा गहण केने छल, तकिा नाश ्ऽ गे ल, मकएक तँ ओ स् जे मकछु ओकिा स् िे बोओल गे ल छल, तकिा नमह िखलक। 34 दे खू, ई पथा अमछ जे जखन जिीन िे बीया ्ेरैत छै क, ्ा सिु ् िे जहाज, ्ा कोनो बतनन िे ्ोजन ्ा पेय पदाथन ्ेरैत छै क। 35 जे मकछु बोओल गे ल अमछ, ्ा ओमह िे िेकल गे ल अमछ, ्ा गहण कयल गे ल अमछ, से नष ्ऽ जाइत अमछ, िु दा हि​िा स्क सं ग नमह िहै त अमछ, िु दा हि​िा स्क सं ग एहन नमह ्ेल अमछ। 36 हि स् जे रिन -मनयि गहण केने छी से पापक कािणे ँ नष ्ऽ जाइत छी आ जे स् रिन -मनयि गहण केने छी से से हो नष ्ऽ जाइत छी 37 िु दा रिन -मनयि नाश नमह होइत अमछ, बलव मक ओमह िे िहै त अमछ ओकि बल। 38 जखन हि ई स् बात िोन िे कहमलयमन तऽ हि आँ लख सँ पाछू घुमि कऽ दे खलहँ आ दमहना कात एकरा सव ती केँ दे खमलयैक, आ दे खलहँ जे ओ शोक कऽ कऽ जोि-जोि सँ कामन िहल छलीह आ हदय िे बहत दु खी छलीह आ हनका से हो कप़ा िामर गे ल छलै क, िाथ पि िाख छलै क। 39 तखन हि अपन म्चाि छोम़ कऽ हनका मदस घुमि गे लहँ । 40 ओ हनका पुछलमथन, “अहाँ मकएक कानैत छी? अहाँ अपन िोन िे एतेक दु खी मकएक छी?

41 ओ हि​िा बजलीह, “िहािाज, हि​िा छोम़ मदयौक, जामह सँ हि अपना केँ म्लाप किी आ अपन दु ख िे ्​् लु किी, मकएक तँ हि िोन िे बहत पिे शान छी आ बहत नीचाँ आमब गे ल छी।” 42 हि हनका कहमलयमन, “अहाँ केँ की बीिाि अमछ?” हि​िा कह. 43 ओ हि​िा कहलमथन, “हि अहाँ क से ्क बं जि छलहँ आ हि​िा कोनो सं तान नमह छल, यदमप हि​ि पमत तीस ्षन छल। 44 ओमह तीस ्षन िे हि मदन-िामत आ हि घंरा आन मकछु नमह केलहँ, िु दा पि​िाता सँ अपन पाथनना केलहँ । 45 तीस ्षनक बाद पि​िे शव ्ि हि​िा अहाँ क दासी सु नलमन, हि​ि दु दनशा केँ दे खलमन, हि​ि सं कर पि म्चाि कयलमन आ हि​िा एकरा बे रा दे लमन स्न शल्िान। 46 हि हनका बहत परिशि सँ पोसलहँ । 47 ते ँ जखन ओ पैघ ्ेलाह आ सव तीगणक सिय पि आमब गे लाह तँ हि ्ोज-्ात केलहँ । अध्य 10 1 जखन हि​ि बे रा अपन म्​्ाहक कोठली िे प्े श कयलमन तखन ओ खमस प़लाह आ िरि गे लाह। 2 तखन हि स् ब्ी उखाम़ दे मलयैक आ हि​ि स् प़ोसी हि​िा सानभना दे बय ले ल उमठ गे ल। 3 जखन ओ स् हि​िा सानभना दे बऽ चमल गे लाह तँ हि चुप ्ऽ सकैत छलहँ । तखन हि िामत िे उमठ कऽ ्ामग गे लहँ आ एतय एमह खेत िे आमब गे लहँ , जे ना अहाँ दे खैत छी। 4 आब हि नगि िे घुरि कऽ नमह, बलव मक एतऽ िहब, आ ने खाएब आ ने पीब, बलव मक ि​िबा ररि लगाताि शोक किब आ उप्ास किब। 5 तखन हि जामह धान िे छलहँ से छोम़ कऽ हनका सँ कोमरत ्ऽ कऽ कहमलयमन। 6 अहाँ स् सँ बे सी िू खन सव ती, की अहाँ हि​िा स्क शोक नमह दे खैत छी, आ हि​िा स्क सं ग की होइत अमछ? 7 हि​िा स्क िाय मसयोन स् तिहक ्ाि सँ ्िल अमछ, आ बहत म्नम अमछ आ बहत दु खी शोक किै त अमछ? 8 आब हि स् शोक किै त छी आ दु खी छी, मकएक तँ हि स् ्ािी पम़ गे ल छी, की अहाँ एकरा बे राक ले ल दु खी छी? 9 प्थव ्ी सँ पूमछ मलअ, तँ ओ अहाँ केँ कहतीह जे ओएह केँ ओतबे लोकक पतन पि शोक किबाक चाही। 10 मकएक तँ पमहने स् लोक हनका सँ मनकलल आ हनका सँ स् आन लोक स् आओत, आ दे खू, ओ स् लग्ग स् म्नाश मदस चलै त अमछ आ ओकि स्क ्ी़ एकदि जम़ सँ उखाम़ गे ल अमछ। 11 तखन ओ ओमह सँ बे सी शोक किऽ ्ला जे एतेक लोक केँ गिा ले ने छमथ। आ अहाँ नमह, जे एक गोरे क अमतरि् दु ःखी छी? 12 िु दा जँ अहाँ हि​िा कहै त छी जे , ‘हि​ि म्लाप प्थीक म्लाप जकाँ नमह अमछ, मकएक तँ हि अपन ग्नक िल गिा ले लहँ , जकिा हि पी़ाक सं ग जन दे लहँ आ दु खक सं ग जन दे लहँ । 13 िु दा प्थव ्ी एहन नमह अमछ, मकएक तँ प्थव ्ीक किक अनुसाि ओमह िे जे ्ी़ छल, तेना जे ना आयल छल, ओमहना चमल गे ल अमछ। 14 तखन हि अहाँ केँ कहै त छी जे जे ना अहाँ शि सँ जनि दे लहँ । तमहना प्थव ्ी अपन िल अथान तव िनुषव य, शुरए सँ ओकिा बनौमनहाि केँ दे लक अमछ। 15 ते ँ आब अपन दु ःख केँ अपना िे िाखू आ अहाँ पि जे मकछु ्ेल अमछ से साहसपू्नक सहन कर।


16 जँ अहाँ पि​िे शव ्िक रामिन कताक मनशय केँ सीकाि किब तँ सिय पि अपन पुत केँ गहण किब आ सव तीगण स्क बीच पशंसा कयल जायत। 17 तखन अपन पमत लग नगि िे जाउ। 18 ओ हि​िा कहलमथन, “हि से नमह किब। 19 हि हनका सँ आओि गप कऽ कऽ कहमलयमन। 20 एहन नमह कर, बलव मक सलाह पामब मलअ। हि​िा दािा: मकएक तँ मसयोनक कतेक म्पम् अमछ? यरशले ि के दु ख के सं बंर िे सानभना मिलै । 21 अहाँ दे खैत छी जे हि​ि स्क पम्त सथान उजा़ ्ऽ गे ल अमछ, हि​ि ्े दी तोम़ दे ल गे ल अमछ, हि​ि स्क िलनि नष ्ऽ गे ल अमछ। 22 हि​ि स्क ्जन-गीत जिीन पि िाखल गे ल अमछ, हि​ि स्क गीत चुप ्’ गे ल अमछ, हि​ि स्क हषनक अं त ्’ गे ल अमछ, हि​ि स्क दीपकक इजोत बु मझ गे ल अमछ, हि​ि स्क ्ाचाक सनदू क खिाब ्’ गे ल अमछ, हि​ि स्क पम्त ्सु स् अशु​ु ्’ गे ल अमछ आ ओकि नाि हि​िा स् पि बजाओल गे ल अमछ, लग्ग अपम्त ्' गे ल अमछ: हि​ि स्क बचा स् केँ ललजत कयल गे ल अमछ, हि​ि स्क पुिोमहत स् जिा दे ल गे ल अमछ, हि​ि स्क ले ्ी स् बं दी िे चमल गे ल अमछ, हि​ि स्क कुिारि स् अशु​ु ्' गे ल अमछ आ हि​ि स्क पती स् केँ लू रल गे ल अमछ। हि​ि स्क रि् लोक स् लऽ गे ल, हि​ि स्क छोर-छोर बचा स् नष ्' गे ल, हि​ि स्क यु्क स् केँ दास िे आनल गे ल, आ हि​ि स्क बल्ान लोक स् किजोि ्' गे ल। 23 आ, जे स्सँ पैघ अमछ, मसयोनक िोहि आब अपन आदि गिा ले ने अमछ। मकएक तँ ओ हि​िा स् सँ घ्णा किय्ला स्क हाथ िे सौंपल गे ल छमथ। 24 आ ते ँ अपन पैघ ्ाि केँ महला मदयौक आ दु ःखक ्ी़ केँ दू ि कर, जामह सँ पिाकिी िेि सँ दया किमथ आ पि​िाता अहाँ केँ अहाँ क शि सँ म्शाि आ आिाि दे मथन। 25 हि हनका सं ग गप किै त काल दे खलहँ जे हनकि चेहिा अचानक बहत चिमक गे लमन आ हनकि चेहिा चिमक गे लमन, जामह सँ हि हनका सँ डे िा गे लहँ आ सोचलहँ जे ई की ्ऽ सकैत अमछ। 26 तखन ओ अचानक बहत ्य्ीत ्ऽ कऽ मचमचया उठलीह जे ओमह सव तीक हला सु मन प्थव ्ी काँ मप गे ल। 27 हि दे खलहँ तँ ओ सव ती हि​िा आब नमह दे खा सकलीह, िु दा ओतऽ एकरा नगि बनल छल आ क ब़का-ब़का जगह नीं् पि सँ दे खा िहल छल, तखन हि डरि गे लहँ आ जोि-जोि सँ मचमचया उठलहँ । 28 पमहने हि​िा लग आयल उिीएल सव ्गन दूत कतय छमथ? कािण, ओ हि​िा बहत िास सिामर िे िँसा दे लमन, आ हि​ि अं त म्नाश िे बदमल गे ल अमछ आ हि​ि पाथनना केँ डाँ रबाक ले ल। 29 जखन हि ई बात कमह िहल छलहँ तखन ओ हि​िा लग आमब हि​िा मदस तकलमन। 30 दे खू, हि ि् तक जकाँ प़ल छी आ हि​ि बु लु हि​िा सँ हमर गे ल। 31 अहाँ केँ की म्पम् अमछ? आ अहाँ एतेक मचंमतत मकएक छी? अहाँ क बु लु आ अहाँ क हदयक म्चाि मकएक पिे शान अमछ? 32 हि कहमलयमन, “मकएक तँ अहाँ हि​िा छोम़ दे मलयैक, िु दा हि अहाँ क बातक अनुसाि काज केलहँ आ खेत िे गे लहँ , आ दे खू, हि दे खलहँ आ तैयो दे खैत छी जे हि ई बात नमह कऽ सकैत छी।” 33 ओ हि​िा कहलमथन, “िु दादक रप िे ठा़ ्’ जाउ, हि अहाँ केँ सलाह दे ब।” 34 तखन हि कहमलयमन, “हे हि​ि िामलक, हि​िा िे बाजू । के्ल हि​िा नमह छो़ू, कही ं हि अपन आशा सँ कुंमठत ्' क' िरि जायब।

35 हि दे खलहँ जे हि नमह जनैत छलहँ आ सु नैत छी जे हि नमह जनैत छी। 36 की हि​ि इल्य रोखा खा गे ल अमछ आ मक हि​ि पाण सपना िे अमछ? 37 आब हि अहाँ सँ म्नती किै त छी जे अहाँ अपन से ्क केँ ई दशनन दे खाउ। 38 तखन ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “हि​ि बात सु नू, हि अहाँ केँ सू मचत किब, आ अहाँ केँ कमह दे ब जे अहाँ मकएक डिै त छी, मकएक तँ पि​िे शव ्ि अहाँ केँ बहत िास गु प बात पगर किताह।” 39 ओ दे लख ले लमन जे अहाँ क बार ठीक अमछ, मकएक तँ अहाँ अपन पजाक ले ल समदखन दु खी िहै त छी आ मसयोनक ले ल बहत म्लाप किै त छी। 40 ते ँ अहाँ एखन जे दशनन दे खलहँ तकि अथन इएह अमछ। 41 अहाँ एकरा सव ती केँ शोक किै त दे खलहँ आ ओकिा सानभना दे बय लगलहँ । 42 िु दा आब अहाँ ओमह सव तीक उपिा नमह दे लख िहल छी, बलव मक अहाँ केँ एकरा नगि बनल दे खाओल गे ल। 43 जखन ओ अहाँ केँ अपन पुतक ि् तुक म्षय िे कहने छलीह, तकि सिारान ई अमछ। 44 ई सव ती जकिा अहाँ दे खलहँ से मसयोन अमछ। 45 हि कहै त छी जे ओ अहाँ केँ कहने छलीह जे ओ तीस ्षन ररि बं जि छमथ। 46 िु दा तीस ्षनक बाद सु लेिान नगिक मनिान ण कयलमन आ बमल च़ौलमन। 47 ओ अहाँ केँ कहने छलीह जे ओ हनका शि सँ पोसै त छलीह। 48 िु दा ओ अहाँ केँ कहने छलीह जे , “हि​ि बे रा अपन म्​्ाह कोठली िे आमब कऽ म्िल ्ऽ गे ल आ िरि गे ल।” 49 दे खू, अहाँ ओकि उपिा दे खलहँ आ ओ अपन पुतक शोक िना कऽ ओकिा सानभना दे बय लगलहँ । 50 आब पि​िे शव ्ि दे लख िहल छमथ जे अहाँ ओकिा ले ल अशु​ु रपे ँ दु खी छी आ ओकिा ले ल अहाँ क पूिा िोन कष कऽ िहल छी, तेना ओ अहाँ केँ ओकि िमहिा आ ओकि सौनयनक उजलता दे खौलमन। 51 ते ँ हि अहाँ केँ ओमह खेत िे िहबाक ले ल कहमलयमन जतय कोनो घि नमह बनल छल। 52 हि जनैत छलहँ जे पि​िे शव ्ि अहाँ केँ ई बात बताओत। 53 ते ँ हि अहाँ केँ ओमह खेत िे जे बाक आजा दे लहँ , जतय कोनो ्​्नक नीं् नमह छल। 54 जामह ठाि पि​िे शव ्ि अपन नगि केँ दे खाबय लगै त छमथ, ओमह ठाि ककिो ्​्न ठा़ नमह ्ऽ सकैत अमछ। 55 ते ँ नमह डे िाउ, अहाँ क िोन नमह ्य्ीत होउ, बलव मक ्ीति जा कऽ ्​्नक सौनयन आ िहानता दे खू, जतेक अहाँ क आँ लख दे लख सकैत अमछ। 56 तखन अहाँ जतेक कान बु मझ सकैत अमछ, तकिा सु नब। 57 अहाँ बहतो सँ बे सी रन छी आ पि​िाताक सं ग बजाओल गे ल छी। आ तमहना मकछु ए लोक से हो। 58 िु दा काल् िामत िे अहाँ एतमह िहब। “ ते ँ हि ओमह िामत आ दोसि िामत सु मत गे लहँ , जे ना ओ हि​िा आजा दे ने छलाह। अध्य 11 1 तखन हि सपना दे खलहँ जे सिु ् सँ एकरा गऱ उठल छल, जकि बािह रा पंखबला पाँ लख आ तीन रा िाथ छल।


2 हि दे खलहँ जे ओ अपन पाँ लख स् प्थव ्ी पि पसारि दे लक आ ह्ाक स् ह्ा ओकिा पि बहल आ जिा ्’ गे ल। 3 हि दे खलहँ आ ओकि पंख िे सँ आन म्पिीत पंख मनकलल। ओ स् छोर-छोर पंख आ छोर-छोर बमन गे ल। 4 िु दा ओकि िाथ आिाि िे छलै क, बीच िे िाथ दोसि सँ पैघ छलै क, िु दा शेषक सं ग ओकिा आिाि छलै क। 5 हि दे खलहँ जे गऱ अपन पंखक सं ग उम़ कऽ प्थव ्ी पि आ ओमह िे िहमनहाि स् पि िाज कऽ िहल छल। 6 हि दे खलहँ जे सव ्गन क नीचाँ क स् ्सु हनका अरीन अमछ आ मकयो हनका म्िोर िे नमह बाजल, आ प्थव ्ी पि कोनो एको पाणी नमह। 7 हि दे खलहँ जे गऱ अपन पँछ पि उमठ कऽ अपन पंख स् सँ बामज कऽ कहलक। 8 एके बे ि िे जागरक नमह िह, स् अपन-अपन जगह पि सु तब आ एक-एकरा जागरक िह। 9 िु दा िाथ स् अं मति सियक ले ल सु िम्त िहय। 10 हि दे खलहँ जे ओ आ्ाज हनकि िाथ सँ नमह, बलव मक हनकि शिीिक बीच सँ मनकलल। 11 हि ओकि म्पिीत पंख मगनलहँ आ दे खलहँ जे आठ रा छल। 12 हि दे खलहँ जे दमहना कात एकरा पंख उमठ कऽ िाज किै त अमछ घ सिस प्थी पि; 13 एमहना ्ेल जे जखन ओ िाज केलक तखन ओकि अं त आमब गे ल आ ओकि सथान आब नमह दे खा प़ल। आ िाजव ‍य केलमन आ बहत नीक सिय मबता दे लमन। 14 जखन ओ िाजव ‍य ्ेल तखन ओकि अं त से हो पमहलु का जकाँ ्ऽ गे ल जे ओ आब नमह दे खाइत छल। 15 तखन ओकिा लग एकरा आ्ाज आमब कऽ कहलक। 16 अहाँ जे एतेक मदन ररि प्थव ्ी पि शासन किै त िहलहँ , सु नू। 17 अहाँ क बाद केओ अहाँ क सिय आ आरा सिय तक नमह पहँ चत। 18 तखन तेसि उठल आ पमहने दोसि जकाँ िाजव य कयलक। 19 एक-एक कऽ स् शेषक सं ग एक-एक कऽ चलै त गे ल, जे ना स् मकयो िाज किै त छल आ िेि आब नमह दे खाइत छल। 20 तखन हि दे खलहँ जे कालकि िे पाछाँ क पंख दमहना कात ठा़ ्’ गे ल, जामह सँ ओ स् से हो शासन किय। मकछु काल िे ओ स् आब पगर नमह ्ेलाह। 21 मकएक तँ हनका स् िे सँ मकछु गोरे ठा़ ्ऽ गे लाह, िु दा शासन नमह कयलमन। 22 एकि बाद हि दे खलहँ जे बािहरा पंख आब नमह दे खाइत छल आ ने दू रा छोर-छोर पंख। 23 गऱक दे ह पि आब नमह छल, बलव मक तीन रा िाथ जे आिाि किै त छल आ छह रा छोर-छोर पाँ लख छल। 24 तखन हि ईहो दे खलहँ जे छहरा िे सँ दू रा छोर-छोर पंख अलग ्’ गे ल आ दमहना कातक िाथक नीचाँ िमह गे ल, कािण चार अपनअपन सथान पि िहै त छल। 25 हि दे खलहँ , पाँ लखक नीचाँ जे पंख छल, से स् अपना केँ ठा़ कऽ कऽ शासन किबाक म्चाि केलक। 26 हि दे खलहँ जे एक गोरे ठा़ ्ऽ गे ल छल, िु दा मकछु ए काल िे ओ आब नमह दे खाओल गे ल। 27 दोसि लोक पमहलु का सँ बे सी जली चमल गे ल। 28 हि दे खलहँ आ दे खलहँ , जे दू गोरे बचल छल, से स् अपना केँ िाज किबाक ले ल सोमच िहल छल। 29 ओ स् एना सोमच कऽ दे खलक जे आिाि िे प़ल िाथ िे सँ एकरा िाथ जामग गे ल। मकएक तँ ओ आन दु नू िाथसँ पैघ छल।

30 तखन हि दे खलहँ जे आन दु नू िाथ ओकिा सं ग जो़ल गे ल अमछ। 31 दे खू, िाथ अपन सं ग िहमनहाि स्क सं ग घुमि गे ल आ पाँ लखक नीचाँ जे दु नू पंख िाज किऽ चाहै त छल, से खा गे ल। 32 िु दा ई मसि सिस प्थव ्ी केँ ्य्ीत कऽ दे लक आ प्थव ्ी पि िहमनहाि स् लोक पि बहत अताचािक सं ग शासन कयलक। आ जे स् पाँ लख छलै क तामह सँ बे सी दु मनयाँ क शासन छलै क। 33 एकि बाद हि दे खलहँ जे बीच िे जे िाथ छल से अचानक पाँ लख जकाँ नमह दे खाइत छल। 34 िु दा दू रा िाथ िमह गे ल छल, जे प्थव ्ी पि आ ओमह िे िहमनहाि लोक स् पि से हो ओमहना शासन किै त छल। 35 हि दे खलहँ जे दमहना कातक िाथ बािा कातक िाथ खा गे ल। 36 तखन हि एकरा आ्ाज हि​िा कहलक, “अपन सोझाँ दे खू आ जे मकछु दे खैत छी तामह पि म्चाि कर।” 37 हि दे खलहँ , जे ना कोनो गज् त मसं ह जं गल सँ ्गाओल गे ल अमछ। 38 सु नू, हि अहाँ सँ गप किब, औि पि​िे शव ्ि अहाँ केँ कहताह। 39 की अहाँ ओमह चार पाणी िे सँ बचल नमह छी, जकिा हि अपन सं साि िे िाज किौलहँ , जामह सँ ओकि सियक अं त ओकिा स्क िाधिे पहँ मच जाय? 40 चारि​ि आमब कऽ पू्नक स् जान्ि पि म्जय पाप कयलक आ बहत ्य्ीत ्ऽ सं साि पि आ बहत दु षव र अताचािक सं ग सं सािक सिस कमै स पि अमरकाि िखलक। ओ एतेक मदन ररि छल-पपंच सँ प्थी पि िहलाह। 41 अहाँ प्थव ्ी पि सतव य नाय नमह केलहँ । 42 मकएक तँ अहाँ नम लोक स् केँ कष दे लहँ , शां मतमपय लोक स् केँ आहत केलहँ , झूठ बाजमनहाि स् सँ पेि कयलहँ , आ िल दे बय्ला स्क आ्ास केँ नष कऽ दे लहँ आ एहन लोकक दे बाल स् केँ खसा दे लहँ जे अहाँ क कोनो हामन नमह केलक। 43 ते ँ अहाँ क दु षिन पि​िे शव ्िक लग आमब गे ल अमछ आ अहाँ क घिं ड पिाकिी पि​िे शव ्ि लग आमब गे ल अमछ। 44 पि​िे शव ्ि से हो घिं डी सिय केँ दे खलमन, आ दे खू, ओ सिय सिाप ्’ गे ल अमछ आ ओकि घ्मणत काज पूिा ्’ गे ल अमछ। 45 ते ँ हे गऱ, ने तोहि ्या्ह पाँ लख, ने तोहि दु ष पंख, ने तोहि दु ्ान ्नापूणन िाथ, आ ने तोहि आहत किय्ला पंजा आ ने तोहि स्रा वथन शिीि। 46 एमह तिहे ँ सिस प्थव ्ी सव मथि ्ऽ कऽ अहाँ क महं सा सँ िु ् ्ऽ कऽ घुरि कऽ आओत आ ओकिा बनौमनहािक नव याय आ दयाक आशा िाखय। अध्य 12 1 जखन मसं ह गऱ केँ ई बात कमह िहल छल तखन हि दे खलहँ । 2 दे खू, जे िाथ बमच गे ल छल आ चार पाँ लख आब नमह दे खा िहल छल, आ दु नू गोरे ओमह मदस जा कए िाज किबाक ले ल ठा़ ्’ गे लाह, आ हनका लोकमनक िाज छोर ्’ गे ल छल आ हं गािा सँ ्िल छल। 3 हि दे खलहँ , आ दे खलहँ , ओ स् आब नमह दे खाओल गे ल, आ गऱक पूिा शिीि जरि गे ल छल जामह सँ रिती बहत ्य गे ल। ओ हि​िा आता केँ कहलमथन। 4 दे खू, अहाँ हि​िा सं ग ई काज केलहँ जे अहाँ स्​्च पि​िे शव ्िक बार तकैत छी। 5 दे खू, हि अपन िन िे थामक गे ल छी, आ अपन आतव िा बहत किजोि छी। आ हि​िा िे बहत कि शल् अमछ, कािण जे बहत ्य हि आइ िामत िे पीम़त छलहँ ।


6 ते ँ हि आब स्​्च सँ म्नती किब जे ओ हि​िा अं त ररि सानभना दे मथ। 7 हि कहमलयमन, “प्ु जे शासन किै त छी, जँ हि​िा री अहाँ क दमष िे , आ जँ हि अहाँ क सं ग बहतो लोकक सि् रि् ठहिाओल गे ल छी, आ जँ हि​ि पाथनना अहाँ स्क सोझाँ आमब गे ल अमछ। 8 तखन हि​िा सानभना मदअ आ अपन से ्क केँ एमह ्या्ह दशननक अथन आ सष अं ति दे खाउ, जामह सँ अहाँ हि​ि पाण केँ पूणनतः सानभना दऽ सकब। 9 मकएक तँ अहाँ हि​िा अं मति सियक दशनन किबाक योग िानलहँ । 10 ओ हि​िा कहलमथन, “दशननक अथन ई अमछ। 11 गऱ, जकिा अहाँ सिु ् सँ ऊपि उठै त दे खलहँ , ओ िाज अमछ जे अहाँ क ्ाय दामनयलक दशनन िे दे खल गे ल छल। 12 िु दा ई बात हनका नमह बु झाओल गे लमन, ते ँ आब हि अहाँ केँ ई बात कमह िहल छी। 13 दे खू, एहन मदन आओत जे प्थव ्ी पि एकरा िाज उठत आ ओकिा सँ पमहने जे स् िाज छल, तामह सँ बे सी ओकिा ्य्ीत कयल जायत। 14 ओही िे बािह िाजा एक के बाद एक िाज कित। 15 ओमह िे सँ दोसि िाजव ‍य होबय लागत आ बािह िे सँ कोनो एक सँ बे सी सिय ओकिा ्ेरतैक। 16 बािह पाँ लख एमह बात केँ दशान बैत अमछ जे अहाँ दे खलहँ । 17 जँ अहाँ जे आ्ाज बजै त सु नलहँ आ िाथ सँ नमह बलव मक ओकि शिीिक बीच सँ मनकलै त दे खलहँ , तकि अथन ई अमछ। 18 ओमह िाजक सियक बाद बहत पैघ झग़ा होयत आ ओ असिलताक खतिा िे ठा़ होयत, तथामप ओ तखन नमह खसत, बलव मक िेि सँ अपन पािम िे आमब जायत। 19 अहाँ ओकिा पाँ लख पि समर गे ल आठ रा छोर-छोर पंखक नीचाँ क पंख दे खलहँ , तकि अथन ई अमछ। 20 हनका िे आठरा िाजा उठताह, मजनकि सिय छोर होयत आ ओकि ्षन तेज होयत। 21 ओमह िे सँ दू गोरे नष ्ऽ जायत, िध सिय लग आमब िहल अमछ, चारि गोरे केँ ताबत ररि िाखल जायत जाबत ररि ओकि अं त नजदीक नमह आमब जायत, िु दा दू गोरे केँ अं त ररि िाखल जायत। 22 अहाँ तीनरा िाथ केँ आिाि किै त दे खलहँ , तकि अथन ई अमछ। 23 अपन अं मति सिय िे पि​िे शव ्ि तीन िाज ठा़ किताह आ ओमह िे बहत िास चीज केँ न्ीकिण किताह आ प्थव ्ी पि हनका स्क प्ुभ होयत। 24 ओमह िे िहमनहाि स् िे सँ पमहने जे स् छल, तामह सँ बे सी अताचाि कयल जाइत अमछ। 25 मकएक तँ ई स् हनकि दु षव रता पूिा कित आ हनकि अं मति अनव त सिाप कऽ ले ताह। 26 जखन मक अहाँ दे खलहँ जे पैघ िाथ आब नमह दे खाइत अमछ, ई तातयन अमछ जे ओमह िे सँ एक गोरे अपन मबछौन पि िरि जायत, िु दा तइयो पी़ाक सं ग। 27 मकएक तँ जे दू गोरे बचल अमछ से तल्ािसँ िािल जायत। 28 एकक तल्ाि दोसि केँ खा जायत, िु दा अं त िे ओ सयं तल्ाि सँ खमस प़त। 29 अहाँ दे खलहँ जे पाँ लखक नीचाँ दू रा पंख दमहना कातक िाथ पि सँ गु जिै त छल। 30 ई बोर किाबै त अमछ जे ई स् ओ स् छमथ, मजनका स् पि​िे शव ्ि अपन अं त ररि िखलमन अमछ। 31 ओ मसं ह जकिा अहाँ जं गल सँ उमठ कऽ गज् त गऱ सँ गप किै त दे खलहँ आ ओकि अरिन क कािणे ँ ओकिा स्रा बात सँ डाँ रैत दे खलहँ ।

32 ई अम्मष् छमथ, जे पि​िे शव ्ि हनका स्क ले ल आ हनका स्क दु षव रताक ले ल अनव त ररि िालख दे ने छमथ। 33 मकएक तँ ओ ओकिा स् केँ नव यायक सिय िे जीम्त अपन सोझाँ िालख दे त आ ओकिा स् केँ डाँ रत आ ओकिा स् केँ सु रारि दे त। 34 हि​ि बाँ की लोक स् केँ ओ दया सँ बचाओत, जे हि​ि सीिा पि दबाओल गे ल अमछ, आ ताबत ररि ओकिा स् केँ आनलनत कित, जाबत ररि हि अहाँ सँ शुर सँ कहने िही। 35 ई ओ सपना अमछ जे अहाँ दे खलहँ आ एकि वाखा ई स् अमछ। 36 अहाँ केँ िात पि​िाताक एमह िहस केँ जानबाक योगता ्ेरल अमछ। 37 ते ँ ई स् बात जे अहाँ दे खलहँ अमछ, तकिा मकताब िे मललख कऽ नुका मदयौक। 38 ओ स् ओमह लोकक बु लुिान स् केँ मसखाउ, जकि हदय केँ अहाँ जनैत छी, ई स् गु प बात स् केँ बु मझ कऽ िालख सकैत अमछ। 39 िु दा अहाँ एतय सात मदन आओि पती्ा कर, जामह सँ अहाँ केँ ई दे खाओल जाय जे पि​िाता अहाँ केँ जे मकछु कहय चाहै त छमथ। आ एतबे कमह ओ अपन बार पि चमल गे लाह। 40 जखन स् लोक दे खलक जे सात मदन बीमत गे ल अमछ आ हि नगि िे िेि नमह आमब िहल छी, तखन ओ स् छोर-छोर सँ पैघ ररि स् केँ एक ठाि जिा कऽ ले लक आ हि​िा लग आमब कऽ कहलक। 41 हि स् अहाँ केँ की दोष दे लहँ? आ हि स् अहाँ पि की अरलाह केलहँ जे अहाँ हि​िा स् केँ छोम़ कऽ एतमह बै सल छी? 42 मकएक तँ स् प्कव ता स् िे सँ अहाँ हि​िा स्क ले ल िात बमच गे ल छी, जे ना मक एकरा बूं दक गु चा आ अनाि जगह पि िोिब्ी जकाँ आ आँ री-तूिान सँ सु िम्त मठकाना ्ा जहाज जकाँ । 43 की हि​िा स् लग जे अरलाह अबै त अमछ से पयान प नमह अमछ? 44 जँ अहाँ हि​िा स् केँ छोम़ दे ब तँ हि​िा स्क ले ल कतेक नीक िहै त, जँ हि स् से हो मसयोनक बीच िे जरि गे ल िमहतहँ ? 45 हि स् ओतमह िरि गे ल लोक स् सँ नीक नमह छी। ओ स् जोि-जोि सँ कानय लगलाह। तखन हि हनका स् केँ उ्ि दे मलयैक। 46 हे इसाएल, सानभना िाखू। हे याकूबक घिाना, ्ािी नमह होउ। 47 मकएक तँ अहाँ स् पि​िे शव ्िक सिण कयल गे ल अमछ आ पिाकिी अहाँ स् केँ पिी्ा िे नमह मबसिल अमछ। 48 हि अहाँ स् केँ नमह छो़लहँ आ ने अहाँ स् सँ म्दा ्ेल छी, बलव मक एमह ठाि आमब गे ल छी जे मसयोनक उज़बाक ले ल पाथनना किब आ अहाँ स्क नीचाँ क लोक स्क ले ल दया िाँ गब उि अ्यािण। 49 आब अहाँ स् एक-एक कऽ घि जाउ, आ एमह मदनक बाद हि अहाँ स् लग आमब जायब। 50 लोक स् ओमहना नगि िे म्दा ्ेल जे ना हि ओकिा स् केँ आजा दे ने िही। 51 िु दा सव ्गन दूतक आजाक अनुसाि हि सात मदन ररि खेत िे लसथि िहलहँ । आ ओमह मदन िे खेतक िूल खाइत छलहँ , आ हि​ि ज़ीबू रीक िां स खाइत छलहँ । अध्य 13 1 सात मदनक बाद िामत िे सपना दे खलहँ । 2 सिु ् सँ ह्ा उठल जे ओकि स् लहरि केँ महला दे लक। 3 हि दे खलहँ जे ओ आदिी हजािो आकाशक सं ग िजबू त ्ऽ गे ल।


4 जखन कखनो हनकि िुँ ह सँ आ्ाज मनकलै त छलमन तखन हनकि आ्ाज सु नमनहाि स् जरि गे लाह, जे ना रिती आमग केँ बू मझ कऽ ्ीण ्ऽ जाइत अमछ। 5 एकि बाद हि दे खलहँ जे सिु ् सँ मनकलल आदिी केँ अपना ्श िे किबाक ले ल आकाशक चारि ह्ा सँ बहत िास लोक जिा ्’ गे ल छल 6 िु दा हि दे खलहँ जे ओ अपना ले ल एकरा पैघ पहा़ गम़ कऽ ओमह पि उम़ गे ल छल। 7 िु दा हि ओमह ्ेत ्ा सथान केँ दे लखतहँ जतय पहा़ी उकेिल छल, िु दा हि नमह दे लख सकलहँ । 8 एकि बाद हि दे खलहँ जे हनका ्श िे किबाक ले ल जिा ्ेल स् लोक स् बहत ्य्ीत ्ऽ गे लाह, िु दा ल़बाक साहस कयलमन। 9 जखन ओ आमब िहल ्ी़क महं सा दे लख ओ ने हाथ उठौलमन आ ने तल्ाि पक़लमन आ ने कोनो यु​ुक औजाि। 10 िु दा हि िात दे खलहँ जे ओ अपन िुँ ह सँ आमग केि रिाका जकाँ आ ठोि सँ जालािु खी साँ स छोम़ दे लमन आ जीह सँ मचंगािी आ तूिान मनकामल दे लमन। 11 ओ स् एक सं ग मिमल गे ल। आमग के रिाका, जालािु खी साँ स आ पैघ तूिान; जे ्ी़ ल़ै ले ली तैयाि छे लै , ओकिा पि जोि-जोि से मगिी गे लै आिो ओकिा मसनी कॅ एक-एक क जिा दे लकै, जे किा से अचानक असं ख ्ी़ िे से कुछ ्ी पता नै चललै , मस्ाय खाली रू ल आिो रुँ आ के गं र के . 12 तकि बाद हि ओमह आदिी केँ पहा़ पि सँ उतिै त दे खलहँ आ ओकिा लग एकरा आओि शालन किऽ ्ला ्ी़ बजौलहँ । 13 बहत लोक हनका लग आमब गे लाह, जामह सँ मकछु गोरे पसन ्ेलाह, मकछु दु खी ्ेलाह, मकछु गोरे बानल गे लाह आ मकछु गोरे च़ाओल गे ल लोक िे सँ आमन ले लमन। 14 अहाँ अपन से ्क केँ शुरए सँ ई स् चिताि दे खौलहँ आ हि​िा ई योग बु झलहँ जे अहाँ हि​ि पाथनना केँ गहण किी। 15 एखन ररि हि​िा एमह सपनाक अथन दे खाउ। 16 हि अपना बु मझ िे ग्न्ती ्ऽ िहल छी, ओमह मदन िे जे स् बचल िहत, तकिा स् केँ बहत बे सी मरकाि अमछ। 17 मकएक तँ जे स् नमह बचल छल, तकिा ्ािी पम़ गे ल छल। 18 आब हि बु झैत छी जे अं मति सिय िे जे मकछु िाखल गे ल अमछ, से हनका स्क सं ग आ जे स् पाछू िमह गे ल अमछ, तकिा स्क सं ग होयत। 19 ते ँ ओ स् ब़का सं कर आ बहत िास आ्शव यकता िे पम़ जाइत छमथ, जे ना ई सपना स् कहै त अमछ। 20 िु दा जे खतिा िे प़ल अमछ, ओकिा ले ल एमह स् िे एना आसान अमछ, जखन मक ओ सं साि िे िे घ जकाँ चमल जाय आ अं मति सिय िे घमरत घरना स् केँ नमह दे खय। ओ हि​िा उ्ि दे लमथन। 21 हि अहाँ केँ ओमह दशननक अथन दे खा दे ब आ जे बात अहाँ िाँ गने छी से अहाँ केँ खोलब। 22 अहाँ पाछू िमह गे ल लोक स्क म्षय िे कहलहँ , तकि अथन ई अमछ। 23 जे ओमह सिय िे सं कर सहै त अमछ, से अपना केँ सु िम्त िखलक। 24 ते ँ ई जामन मलअ जे ि् तव यु सँ बे सी रन अमछ जे पछु आएल अमछ। 25 दशननक अथन इएह अमछ जे अहाँ सिु ्क बीच सँ एक आदिी केँ ऊपि अबै त दे खलहँ । 26 ्एह ्ै ह छमथ मजनका पि​िे शव ्ि पि​िे शव ्ि एकरा पैघ सिय िखलमन अमछ, जे अपना दािा अपन स् मष केँ बचाओत। 27 अहाँ दे खलहँ जे हनकि िुँ ह सँ ह्ा, आमग आ आँ री-तूिान जकाँ मनकमल िहल छल।

28 हनका लग ने तल्ाि आ ने कोनो यु​ुक औजाि छलमन, बलव मक हनकि दौ़-रू प हनका ्श िे किय बला सिस ्ी़ केँ नष कऽ दे लकमन। ई वाखा अमछ : १. 29 दे खू, ओ मदन आमब िहल अमछ जखन पि​िे शव ्ि प्थव ्ी पि िहमनहाि स् केँ उुाि दे बऽ लागत। 30 ओ प्थव ्ी पि िहमनहाि स् केँ आशयनचमकत कऽ ले ताह। 31 एक गोरे दोसि सँ ल़बाक मजमा ले त, एक नगि दोसि नगि, एक ठाि दोसि, एक लोक दोसि, आ एक ्ेत दोसि सँ ल़त। 32 ओ सिय होयत जखन ई स् घरना घमरत होयत आ जे मचनव त हि अहाँ केँ पमहने दे खौने िही से होयत, तखन हि​ि पुतक पचाि होयत, जकिा अहाँ च़ै त दे खलहँ । 33 जखन स् लोक हनकि आ्ाज सु नत तखन एक-एक गोरे अपन-अपन दे श िे एक-दोसिक सं ग ल़ाइ छोम़ दे त। 34 असं ख ्ी़ एक ठाि जिा ्ऽ जायत, जे ना अहाँ ओकिा स् केँ दे खलहँ , जे आमब कऽ लम़-झग़ा कऽ ओकिा पि म्जय पाबऽ चाहै त अमछ। 35 िु दा ओ मसयोन पहा़क चोरी पि ठा़ िहताह। 36 तखन मसयोन आमब कऽ स् िनुषव य केँ तैयाि कयल जायत। जे ना अहाँ मबना हाथक उकेिल पहा़ी केँ दे खलहँ । 37 ई हि​ि पुत ओमह जामत स्क दु ष आम्षाि केँ डाँ रत, जे अपन दु ष जी्नक कािणे ँ तूिान िे पम़ गे ल अमछ। 38 ओ ओकिा स्क अरलाह म्चाि आ जामह यातना सँ ओकिा स् केँ कष दे बऽ प़तैक, जे लौ जकाँ अमछ, ओकिा स्क सोझाँ िालख दे तैक। 39 अहाँ दे खलहँ जे ओ एकरा आओि शां मतमपय ्ी़ हनका लग जिा कयलमन। 40 ओ दस गोत अमछ, जे ओमसया िाजाक सिय िे अपन दे श सँ बं दी बना कऽ लऽ गे ल छल, जकिा अशू िक िाजा सलिानासि ओकिा स् केँ बं दी बना कऽ ल’ गे ल छल आ ओ ओकिा स् केँ पामन पि ल’ गे ल छल आ ओ स् दोसि दे श िे आमब गे ल . 41 िु दा ओ स् आपस िे ई सलाह ले लक जे ओ स् जामत-जामतक ्ी़ केँ छोम़ कऽ दोसि दे श िे चमल जे ताह, जतय कमहयो िनुषव यजामत नमह िहै त छल। 42 ओ स् ओतऽ अपन मनयि स् केँ पालन किमथ जे ओ स् अपन दे श िे कमहयो नमह पालन कयलमन। 43 ओ स् नदीक सं कीणन सथानक कात िे यूफेमरस िे प्े श कयलमन। 44 मकएक तँ पि​िे शव ्ि हनका स्क ले ल मचनव त दे खबै त छलाह आ जाबत ररि ओ स् पाि नमह ्ऽ गे लाह ताबत ररि जलपलय केँ लसथि कयलमन। 45 ओमह दे श िे डे ़ ्षनक बहत िास बार छल। 46 ओ स् बादक सिय ररि ओतमह िहलाह। आ आब जखन ओ स् आबय लागत। 47 पि​िे शव ्ि रािक झिना स् केँ िेि सँ िोकत जामह सँ ओ स् ओमह िे सँ गु जरि सकय। 48 िु दा अहाँ क पजा िे जे स् पाछू िमह गे ल अमछ से स् हि​ि सीिा िे ्ेरैत अमछ। 49 जखन ओ जिा ्ेल जामत स्क ्ी़ केँ नष कऽ दे त तखन ओ अपन बचल लोक स्क ि्ा कित। 50 तखन ओ हनका स् केँ ब़का-ब़का चिताि किमथन। 51 तखन हि कहमलयमन, “हे शासन किऽ ्ला प्ु, हि​िा ई बात दे खाउ। 52 ओ हि​िा कहलमथन, “जमहना अहाँ सिु ्क गहीिं िे जे मकछु अमछ, तकिा नमह तामक सकैत छी आ ने जामन सकैत छी .


53 ई ओमह सपनाक वाखा अमछ जे अहाँ दे खलहँ आ जामह सपना सँ अहाँ एतमह िात हलुक ्ऽ गे लहँ । 54 मकएक तँ अहाँ अपन बार छोम़ कऽ हि​ि रिन -मनयि पि अपन परिशि लगा कऽ ओकिा खोजलहँ । 55 अहाँ अपन जी्न केँ बु लुिानी सँ व्लसथत कयलहँ आ अपन िाय केँ बु झबाक ले ल बजौलहँ । 56 ते ँ हि अहाँ केँ स्​्च पि​िे शव ्िक खजाना दे खौलहँ , तीन मदनक बाद हि अहाँ केँ आन बात कहब आ अहाँ केँ पिाकिी आ आशयनक बात कहब। 57 तखन हि खेत िे मनकमल गे लहँ , पि​िे शव ्िक सु मत आ रन्ादक कािणे ँ जे ओ सिय पि कयलमन। 58 एमह ले ल जे ओ ओमह पि शासन किै त छमथ आ जे मकछु सिय पि प़ै त अमछ, तामह पि हि तीन मदन ररि ओतमह बै सल िही। अध्य 14 1 तेसि मदन हि एकरा ओक गाछक नीचा बै सल िही आ दे खलहँ जे हि​िा सािने एकरा झा़ी िे सँ आ्ाज आयल जे , “एस्ा, एस्ा।” 2 हि कहमलयमन, “हि एतय छी, प्ु आ हि अपन पएि पि ठा़ ्’ गे लहँ ।” 3 तखन ओ हि​िा कहलमथन, “जखन हि​ि लोक मिस िे से ्ा किै त छल, तखन हि झा़ी िे अपना केँ िू सा केँ पगर केने िही आ हनका सँ गप केने िही। 4 हि हनका पठा कऽ अपन लोक केँ मिस दे श सँ बाहि मनकामल कऽ ओमह पहा़ पि पहँ चा दे मलयमन, जतय हि हनका बहत मदन ररि अपना लग िालख दे ने छलहँ । 5 ओ हनका बहत िास आशयनक बात कहलमथन आ हनका सिय आ अनव मतक िहस स् दे खौलमन। आजा दे लमथन, “ 6 ई स् बात अहाँ सु नाबह आ ई स् नुका कऽ िाखब। 7 आब हि अहाँ केँ कहै त छी। 8 हि जे मचनव ह, जे सपना दे खलहँ आ जे अथन सु नलहँ , तकिा अहाँ अपन िोन िे िालख मदयौक। 9 अहाँ स् सँ दू ि ्ऽ जायब आ आब सँ अहाँ हि​ि पुत आ अहाँ सन लोकक सं ग िहब जाबत ररि सियक अं त नमह ्ऽ जायत। 10 मकएक तँ सं साि अपन ज्ानी गिा ले ने अमछ आ सिय बू ़ होबऽ लागल अमछ। 11 मकएक तँ सं साि बािह ्ाग िे बँ रल अमछ आ ओकि दस ्ाग पमहने सँ चमल गे ल अमछ आ दस्ाँ ्ागक आरा ्ाग। 12 दसि ्ागक आरा ्ागक बाद जे मकछु िमह जाइत अमछ। 13 आब अपन घि केँ व्लसथत कर आ अपन लोक केँ डाँ मर मदयौक, म्पम् िे प़ल लोक केँ सानभना मदयौक आ आब म्नाश केँ ताग कर। 14 अहाँ सँ नशि म्चाि केँ छोम़ मदयौक, िनुरक ्ाि केँ िेमक मदयौक, आब किजोि स्ा् केँ छोम़ मदयौक। 15 जे म्चाि अहाँ पि ्ािी प़ै त अमछ, तकिा एक कात िाखू आ एमह सिय स् सँ पलायन किबाक ले ल जलबाजी कर। 16 मकएक तँ अहाँ जे दे खलहँ तामह सँ पैघ अरलाह आगाँ िे होयत। 17 दे खू, युग-युगक सं ग सं साि कतेक किजोि ्ऽ जायत, ओमह िे िहमनहाि लोक स् पि ओतबे दु षव रता बम़ जायत। 18 मकएक तँ सिय बहत दू ि ्ऽ गे ल अमछ आ पटा पि काज किब कमठन अमछ, मकएक तँ एखन जे दशनन अहाँ दे खलहँ से जललये आमब िहल अमछ। 19 तखन हि अहाँ क सि् उ्ि दे मलयैक।

20 दे खू, प्ु, हि जे ना अहाँ हि​िा आजा दे ने छी तेना जा कऽ उपलसथत लोक स् केँ डाँ रब। एमह तिहे ँ सं साि अनाि िे पम़ गे ल अमछ आ ओमह िे िहमनहाि लोक स् इजोत सँ िमहत अमछ। 21 ते ँ अहाँ क व्सथा जरि गे ल अमछ तोहि जे काज ्ेल अमछ आ जे काज शुर होयत से केओ नमह जनैत अमछ। 22 िु दा जँ हि​िा अहाँ क सोझाँ िे अनुगह ्ेरल अमछ तँ पम्त आतव िा हि​िा िे पठाउ आ हि ओमह स् बात केँ मललख दे ब जे शुर सँ सं साि िे ्ेल अमछ जे अहाँ क व्सथा िे मलखल अमछ, जामह सँ लोक अहाँ क बार तामक सकय आ ओ स् जे अं मति मदन िे जीम्त िहत, जीम्त ्' सकैत अमछ। 23 ओ हि​िा उ्ि दे लमथन, “जाउ, लोक स् केँ एक ठाि जिा कर आ ओकिा स् केँ कह जे चालीस मदन ररि अहाँ केँ नमह तकैत अमछ।” 24 िु दा दे खू, अहाँ अपना केँ बहत िास बेा-गाछ तैयाि कऽ दै त छी आ अपना सं ग सिे आ, दबरिया, से लेमिया, एकनुस आ असीएल केँ ल’ जाउ, जे ई पाँ च गोरे जली-जली मलखबाक ले ल तैयाि अमछ। 25 एमह ठाि आमब कऽ हि तोहि हदय िे बु लुक दीया जिा दे ब, जे जाबत ररि अहाँ जे काज मलखब शुर किब से पूिा नमह ्ऽ जायत। 26 जखन अहाँ काज कऽ ले ब तखन मकछु बात पचाि किब आ मकछु बात जानी लोकमन केँ गु प रप सँ दे खा दे ब। 27 तखन हि हनकि आजानुसाि बाहि मनकमल गे लहँ आ स् लोक केँ एक ठाि जिा कऽ कऽ कहमलयमन। 28 हे इसाएल, ई बात सु नू। 29 हि​िा स्क पू्नज स् शुर िे मिस िे पिदे शी छलाह, जतय सँ ओ स् िु ् ्ेलाह। 30 ओ स् जी्नक मनयि केँ गहण कयलमन, जकि पालन ओ स् नमह कयलमन। 31 तखन ओ दे श, मसयोन दे श, अहाँ स्क बीच मचटी िे बँ मर गे ल, िु दा अहाँ स्क पू्नज आ अहाँ स् अरिन कयलहँ आ पि​िे शव ्ि अहाँ स् केँ आजा दे ल गे ल बार स्क पालन नमह कयलहँ । 32 ओ रि् नायारीश छमथ, ते ँ ओ अहाँ स् केँ जे मकछु दे ने छलाह, से सिय पि अहाँ स् सँ ल’ ले लमन। 33 आब अहाँ स् एतय छी आ अहाँ स्क बीच िे अहाँ स्क ्ाय स् से हो छमथ। 34 ते ँ जँ अहाँ स् अपन बु लु केँ अपना ्श िे िाखब आ अपन हदय िे सु राि किब तँ अहाँ स् जीम्त िहब आ ि​िलाक बाद अहाँ स् केँ दया ्ेरत। 35 मकएक तँ ि् तव युक बाद नव याय आओत, जखन हि स् िेि जीम्त िहब। 36 ते ँ एमह चालीस मदन िे आब केओ हि​िा लग नमह आबय आ ने हि​िा खोजय। 37 ते ँ हि स् ओमह पाँ चो आदिी केँ अपना आजाक अनुसाि लऽ गे लहँ आ हि स् खेत िे जा कऽ ओतमह िमह गे लहँ । 38 दोसि मदन हि​िा एकरा आ्ाज बजौलक जे , “एसडडा, िुँ ह खोमल कऽ जे हि तोिा पीबय दै त छी, से पीबू ।” 39 तखन हि अपन िुँ ह खोललहँ तँ ओ हि​िा लग एकरा ्िल पाला पहँ मच गे लाह जे पामन जकाँ ्िल छल, िु दा ओकि िं ग आमग जकाँ छल। 40 हि ओकिा लऽ कऽ पीमब ले लहँ , आ जखन हि ओकिा पीमब ले लहँ तँ हि​ि िोन बु झबाक बात कहलक आ हि​ि छाती िे बु लु बम़ गे ल, मकएक तँ हि​ि आतव िा हि​ि स् मत केँ िजगू त कऽ दे लक। 41 हि​ि िुँ ह खुमज गे ल आ आब बन नमह ्ेल। 42 पि​िे शव ्ि ओमह पाँ चो आदिी केँ बु मझ दे लमन आ ओ स् ओमह िामत केि अदव ्ुत दशनन स् मललख दे लमन जे ओ स् नमह जनैत छलाह।


43 िहल हि​ि बात। हि मदन िे बजै त छलहँ , िामत िे जीह नमह पक़ने छलहँ । 44 चालीस मदन िे ओ स् दू सय चारि पोथी मलखलमन। 45 चालीस मदन पूिा ्ेला पि पि​िे शव ्ि कहलमथन, “अहाँ जे स् पमहने मलखने छी से खुमल कऽ पचाि कर, जामह सँ योग आ अयोग लोक स् ओकिा पम़ सकय। 46 िु दा स्रि अं मति स्रि केँ िाखू, जामह सँ अहाँ ओकिा स् केँ िात ओमह लोकक हाथ िे सौंमप सकब जे लोक िे बु लुिान अमछ। 47 मकएक तँ हनका स् िे बु लुक झिना, बु लुक िवािा आ जानक राि अमछ। 48 आ हि एना केलहँ । अध्य 15 1 दे खू, अहाँ हि​ि लोक स्क कान िे ओ ्म्र्ाणीक ्चन बाजू , जे हि अहाँ क िुँ ह िे िाखब। 2 ओ स् म्शव ्ासपूणन आ सतव य अमछ। 3 अहाँ क म्रु कलना स् सँ नमह डे िाउ, जे अहाँ क म्िोर िे बाजै त अमछ, ओकि अम्शास अहाँ केँ पिे शान नमह किय। 4 कािण, स् अम्शासी अपन अम्शास िे ि​ित। 5 दे खू, प्ु कहै त छमथ, हि सं साि पि म्पम् आमन दे ब। तल्ाि, अकाल, ि् तु आ म्नाश। 6 मकएक तँ दु षता सिस प्थव ्ी केँ अमतशय दु षव र कऽ दे ने अमछ आ ओकि स्क आघातकािी काज पूिा ्ऽ गे ल अमछ। 7 ते ँ प्ु कहै त छमथ। 8 हि आब हनका स्क दु षताक म्षय िे अपन जीह नमह पक़ब, जे ओ स् अशु​ु किै त छमथ, आ ने हनका स् केँ ओमह काज िे सहन किब, जामह िे ओ स् दु षतापू्नक वायाि किै त छमथ बस लगाताि मशकायत कर। 9 एमह ले ल, प्ु कहै त छमथ, हि हनका स्क बदला ले बऽ प़त आ हनका स्क बीच सँ स् मनद्ष खून हि​िा ले ल गहण किब। 10 दे खू, हि​ि लोक केँ झुंड जकाँ ्रक ले ल लऽ जा िहल अमछ। 11 िु दा हि ओकिा स् केँ एकरा पिाकिी हाथ आ पसिल बाँ मह सँ आमन दे ब आ पमहने जकाँ मिस केँ म्पम् सँ िारि दे ब आ ओकि सिस दे श केँ नष कऽ दे ब। 12 मिस शोक कित आ ओकि नीं् पि ओमह म्पम् आ दं ड सँ िािल जायत जे पि​िे शव ्ि ओकिा पि आनताह। 13 जिीन जोतमनहाि स् शोक कित, मकएक तँ ओकि बीया रिाका आ ओला आ ्या्ह न्तक सं ग ्ीण ्ऽ जायत। 14 मरकाि अमछ सं साि आ ओमह िे िहमनहाि स्क ले ल! 15 मकएक तँ तल्ाि आ ओकि म्नाश लग आमब गे ल अमछ आ एक गोरे ठा़ ्ऽ कऽ ल़त री दोसि, आ हाथ िे तल्ाि। 16 मकएक तँ िनुषव यक बीच म्​्ोह होयत आ एक-दोसि पि आकिण कित। ओ स् अपन िाजा आ िाजकुिाि स्क कोनो पि्ाह नमह कित आ ओकि स्क काजक कि ओकिा स्क अमरकाि िे ठा़ िहत। 17 िनुषव य कोनो नगि िे जे बाक इचा कित, िु दा ओ नमह जा सकैत अमछ। 18 अपन घिं डक कािणे ँ नगि स् तस ्ऽ जायत, घि-घि नष ्ऽ जायत आ िनुषव य स् ्य्ीत ्ऽ जायत। 19 िनुषव य अपन प़ोसी पि दया नमह कित, बलव मक िोरीक अ्ा् आ बहत कषक कािणे ँ तल्ाि सँ ओकि घि स् केँ उजाम़ कऽ ओकि स्क सिव पम् लू मर ले त। 20 दे खू, पि​िे शव ्ि कहै त छमथ, हि प्थव ्ीक स् िाजा स् केँ एकठाि बजा कऽ हि​िा आदि किमथ। एक-दोसिक म्रु अपना

केँ घुिाबऽ आ जे काज ओकिा स्क सं ग कयल गे ल अमछ ओकि बदला ले बऽ। 21 जमहना आइयो ओ स् हि​ि चुनल लोक स्क सं ग कऽ िहल छमथ, तमहना हिहँ किब आ हनका स्क कोिा िे बदला दे ब। प्ु पि​िे शव ्ि ई कहै त छमथ। 22 हि​ि दमहना हाथ पापी स् केँ नमह छो़त आ प्थव ्ी पि मनद्ष खून बहौमनहाि स् पि हि​ि तल्ाि नमह रकत। 23 ओकि कोर सँ आमग मनकमल गे ल अमछ आ प्थव ्ीक नीं् आ पापी स् केँ ्स कऽ दे ने अमछ, जे ना जिाओल गे ल ्ूसा। 24 मरकाि अमछ जे पाप किै त अमछ आ हि​ि आजाक पालन नमह किै त अमछ। प्ु कहै त छमथ। 25 हि ओकिा स् केँ नमह छो़ब। 26 मकएक तँ प्ु अपना म्रु पाप किय्ला स् केँ जनैत छमथ, आ ते ँ हनका स् केँ ि् तु आ म्नाशक ले ल सौंमप दै त छमथ। 27 आब पूिा प्थी पि म्पम् आमब गे ल अमछ आ अहाँ स् ओमह िे िहब। 28 एकरा ्या्ह दशनन आ पूब मदस सँ ओकि रप दे खू। 29 ओतऽ अिबक अजगिक जामत स् बहत िास िथ ल’ कऽ मनकलत आ ओकि ्ी़ केँ ह्ा जकाँ प्थी पि लऽ जायत, जामह सँ स् ओकिा सु नमनहाि स् डरि कऽ काँ मप सकय। 30 कोर सँ कोमरत कि​िनी स् जं गलक जं गली सु अि जकाँ बाहि मनकलत आ बहत शल्क सं ग आमब कऽ ओकिा स्क सं ग यु​ु िे शामिल होयत आ अशू िक दे शक मकछु ्ाग उजाम़ दे त। 31 तखन अजगि स् अपन स्ा् केँ िोन पा़ै त हा्ी होयत। आ जँ ओ स् अपना केँ सताबय ले ल बहत शल्क सं ग षडं त बना कऽ अपना केँ घुिा ले ताह। 32 तखन ई स् घबिाहमर िे खून बहौताह आ अपन सािथवन य सँ चुप ्ऽ कऽ ्ामग जे ताह। 33 अशू िक दे श सँ शतु ओकिा स्क घेिाबं दी कित आ ओकिा स् िे सँ मकछु केँ ्स कऽ दे तैक आ ओकि स्क से ना िे ्य आ ्य आ ओकि िाजा स्क बीच झग़ा होयत। 34 दे खू िे घ पूब आ उ्ि सँ दम्ण मदस, आ ओ स् दे खबा िे बहत ्या्ह अमछ, जे कोर आ तूिान सँ ्िल अमछ। 35 ओ स् एक-दोसि केँ िारि दे त आ प्थव ्ी पि बहत िास तािा स् केँ िारि दे त। तल्ाि सँ पेर ररि खून होयत। 36 िनुषव यक गोबि ऊँरक ग़ ररि। 37 प्थव ्ी पि बहत ्य्ीत आ काँ पत, आ जे स् कोर दे खैत अमछ, से स् ्य्ीत ्ऽ जायत आ ओकिा स् पि काँ पत। 38 तखन दम्ण, उ्ि आ एकरा आओि ्ाग पमशि मदस सँ बहत पैघ तूिान आओत। 39 पूब मदस सँ तेज ह्ा उठत आ ओकिा खोलत। ओ िे घ जकिा ओ कोर िे उठौलमन, आ तािा जे पूब आ पमशि ह्ा िे ्य पैदा किबाक ले ल झकझोरि दे लक, से नष ्’ जायत। 40 ब़का-ब़का िे घ कोर आ तािा सँ ्िल-पूिल िुलाओल जायत, जामह सँ ओ स् प्थव ्ी आ ओमह िे िहमनहाि स् केँ ्य्ीत कऽ दे त। ओ स् ऊँच-ऊँच आ पखि सथान पि एकरा ्या्ह तािा उझिा दे त। 41 आमग, ओला, उ़ै त तल्ाि आ बहत िास पामन, जामह सँ स् खेत आ स् नदी, बहत िास पामन सँ ्िल हो। 42 ओ स् नगि आ दे बाल, पहा़ आ पहा़ी, जं गलक गाछ, घासपातक घास आ ओकि खेत तोम़ दे त। 43 ओ स् द़तापू्नक बाबु ल जा कऽ ओकिा डिाओत। 44 ओ स् ओकिा लग आमब ओकिा घेिाबं दी कित, तािा आ स्रा कोर ओकिा पि उझमल दे तैक, तखन रू िा आ रुँ आ आकाश मदस चमल जायत आ ओकि आसपासक स् लोक ओकिा म्लाप कित।


45 जे स् ओकि अरीन िमह गे ल अमछ, से स् ओकिा डिाबऽ ्ला स्क से ्ा कित। 46 अहाँ एमशया, जे बाबु लक आशा िे ्ाग लै त छी आ ओकि वल्गत िमहिा छी। 47 अहाँ केँ मरकाि अमछ, अहाँ दयनीय, मकएक तँ अहाँ अपना केँ हनका सन बना ले लहँ । तोहि बे री स् केँ ्े शा्​् म् िे सजौने छी, जामह सँ ओ स् तोहि पेिी-पेमिका स् केँ पसन किमथ आ ग्न किमथ, जे स् समदखन अहाँ क सं ग ्े शा्​् म् किय चाहै त छमथ। 48 अहाँ ओकि स् काज आ आम्षाि िे घ्मणत लोकक पाछाँ चललहँ । 49 हि अहाँ पि म्पम् पठा दे ब। म्र्ा, गिीबी, अकाल, तल्ाि आ िहािािी, जे अहाँ क घि केँ म्नाश आ ि् तु सँ उजम़ मदयौक। 50 अहाँ क शल्क िमहिा िूल जकाँ सु खायत, अहाँ क ऊपि जे गि् पठाओल गे ल अमछ से उठत। ्े तोिा। 52 प्ु कहै त छमथ जे की हि ईरान सँ अहाँ क म्रु एहन काज करितहँ । 53 जँ अहाँ नशा िे रु ् ्ेला पि हि​ि चुनल लोक केँ समदखन नमह िारितहँ । 54 अपन चेहिाक सौनयनक ्णनन कर? 55 अहाँ क ्े शा्​् म्क िल अहाँ क कोिा िे िहत, ते ँ अहाँ केँ पमतिल ्ेरत। 56 जमहना अहाँ हि​ि चुनल लोक स्क सं ग केलहँ , प्ु कहै त छमथ, तमहना पि​िे शव ्ि अहाँ क सं ग एहन किताह आ अहाँ केँ दु षव रता िे सौंमप दे ताह 57 तोहि बचा स् ्ूख सँ िरि जायत आ तल्ाि सँ खमस प़त, तोहि नगि स् रू मर जायत आ तोहि स्रा खेत िे तल्ाि सँ नष ्ऽ जायत। 58 पहा़ िे िहमनहाि लोक स् िोरीक ्ूख आ पामनक पासक कािणे ँ ्ूख सँ िरि जायत आ अपन िां स खायत आ अपन खून पीमब जायत। 59 अहाँ स् दु खी जकाँ सिु ् िे आमब कऽ िेि सँ म्पम् पामब जायब। 60 ओमह बार िे ओ स् बे काि नगि पि दौम़ जायत आ अहाँ क दे शक मकछु ्ाग केँ नष कऽ दे त आ अहाँ क िमहिा केँ मकछु ्ाग केँ नष कऽ दे त आ जे नष ्ेल बामबलोन िे ्ापस आमब जायत। 61 अहाँ ओकिा स्क दािा ठूंठ जकाँ िेमक दे ल जायब आ ओ स् अहाँ क ले ल आमग जकाँ ्ऽ जायत। 62 तोिा आ तोहि नगि स्, तोहि दे श आ तोहि पहा़ स् केँ नष कऽ दे त। तोहि स्रा जं गल आ िलदाि गाछ आमग िे जरि जायत। 63 तोहि सनान स् केँ ओ स् बं दी बना कऽ लऽ जे ताह, आ दे खू, तोहि जे मकछु अमछ, ओकिा लू मर कऽ तोहि चेहिाक सौनयन केँ मबगाम़ दे त। अध्य 16 1 हे बाबु ल आ एमशया, तोहि मरकाि! मरकाि अमछ, मिस आ सीरिया! 2 बोिा आ केशक कप़ा पमहिने िह, अपन बचा स्क म्लाप कर आ खेद कर। मकएक तँ अहाँ क म्नाश लग आमब गे ल अमछ। 3 अहाँ स् पि तल्ाि पठाओल गे ल अमछ, आ ओकिा के घुिा सकैत अमछ? 4 अहाँ स्क बीच आमग पठाओल गे ल अमछ आ ओकिा के बु झा सकैत अमछ? 5 अहाँ स् लग म्पम् पठाओल गे ल अमछ आ ओकिा स् केँ ्गाब’ बला कोन अमछ?

6 की केओ ्ूखल मसं ह केँ जं गल िे ्गा सकैत अमछ? आमग जखन ज़य लागल अमछ तखन मकयो ठूंठ िे बु झा सकैत अमछ? 7 की कोनो िजबू त तीिं दाजक जे तीि चलाओल जाइत अमछ, तकिा िेि घुिा सकैत अमछ? 8 पिाकिी प्ु म्पम् स् केँ पठाबै त छमथ आ के अमछ जे ओकिा ्गा सकैत अमछ? 9 ओकि कोर सँ आमग मनकलत आ ओकिा के बु झाबय ्ाला के अमछ? 10 ओ मबजली मगिाओत, आ के नमह डित? ओ गिजत, आ के नमह डित? 11 प्ु रिकी दे मथन, आ हनकि सामनध िे केकिा एकदि सँ चूणन नमह कयल जायत? 12 प्थी आ ओकि नीं् महलै त अमछ। सिु ् गहीिं सँ लहरि सँ उठै त अमछ, ओकि लहरि आ ओकि िाछ स् से हो प्ुक सि् आ हनकि सािरन क िमहिाक सि् तस ्ऽ जाइत अमछ। 13 मकएक तँ ओकि दमहना हाथ जे रनुष केँ िो़ै त अमछ, से िजबू त होइत छै क, ओकि बाण जे ओ चलाबै त अमछ, से तेज होइत छै क, आ जखन ओकिा सं सािक छोि ररि चलाबय लागत तखन नमह छूरत। 14 दे खू, म्पम् स् पठाओल गे ल अमछ, आ जाबत ररि ओ प्थी पि नमह आमब जायत ता ररि िेि नमह आमब जायत। 15 आमग जरि गे ल अमछ, जाबत ररि ओ प्थव ्ीक नीं् केँ ्स नमह कित ता ररि नमह बु झल जायत। “ 17 हि मरकाि छी! हाय हि​िा! ओमह मदन िे हि​िा के बचाओत? 18 दु ख आ बहत शोकक आिं ्। अकाल आ बहत ि् तुक पािं ्; यु​ुक पािं ् होयत, आ शल् स् ्य िे ठा़ ्’ जायत। बु िाई के आिं ्! जखन ई स् अरलाह आओत तखन हि की किब? 19 दे खू, अकाल आ म्पम्, केश आ केश केँ सु रािक ले ल को़ाक रप िे पठाओल गे ल अमछ। 20 िु दा एमह स् बातक कािणे ँ ओ स् अपन दु षव रता सँ नमह घुिताह आ ने पकोप सँ समदखन िोन नमह िाखत। 21 दे खू, प्थी पि ्ोजन एतेक ससा होयत जे ओ स् अपना केँ नीक बु झत, आ तखनो प्थी पि बु िाई, तल्ाि, अकाल आ बहत भि उतन होयत। 22 प्थव ्ी पि िहमनहाि िे सँ बहतो लोक अकाल िे नाश ्ऽ जायत। आ दोसि, जे ्ूख सँ बचैत अमछ, तल्ाि नष कित। 23 ि् तव यु केँ गोबि जकाँ बाहि िेमक दे ल जायत, आ ओकिा स् केँ सानभना दे मनहाि केओ नमह िहत, मकएक तँ प्थव ्ी उजम़ जायत आ नगि स् उजा़ल जायत। 24 प्थव ्ी के जोतय आ ओकिा बोनय ले ल केओ नमह बचत 25 गाछ-मबरिछ िल दे त आ के जिा कित? 26 अं गूि पकत आ के चलत? मकएक तँ स् सव थान िनुषव यक ले ल उजा़ ्ऽ जायत। 27 एक आदिी दोसि केँ दे खबाक आ ओकि आ्ाज सु नबाक इचा िाखत। 28 एक नगि िे दस रा बचल िहत आ दू रा खेत िे , जे िोरका गाछी आ पाथिक िाँ क िे नुका जायत। 29 जे ना जै तूनक बगीचा िे पतेक गाछ पि तीन-चारि जै तून बमच जाइत अमछ। 30 ्ा जे ना अं गूिक बगीचा जिा ्ेला पि मकछु झंुड बमच जाइत अमछ जे दं ग बगीचा िे लगन सँ खोजै त अमछ। 31 तमहना ओमह मदन िे तीन-चारि गोरे िमह जे ताह जे तल्ाि सँ अपन घि िे जाँ च कित।


32 प्थी उजा़ ्ऽ जायत, ओकि खेत पुिान ्ऽ जायत, ओकि बार आ ओकि स् बार काँ र-काँ र सँ ्िल ्ऽ जायत, मकएक तँ ओमह िे ककिो याता नमह कित। 33 कुिारि स् शोक कित, जकिा िे ्ि नमह होयत। सीगण शोक कित, जकिा पमत नमह होयत। हनकि बे री स् शोक कित, जकि कोनो सहायक नमह िहत। 34 यु​ु िे ओकि स्क ्ि स् नष ्ऽ जे ताह आ ओकि पमत स् अकाल िे नाश ्ऽ जे ताह। 35 हे प्ुक से ्क स्, आब ई स् बात सु नू आ बु झ।ू 36 दे खू, प्ुक ्चन केँ सीकाि कर। 37 दे खू, म्पम् स् लग आमब िहल अमछ, िु दा मशमथल नमह अमछ। 38 जमहना न्ि िास िे ग्न्ती सव ती अपन पुतक जन दै त अमछ तँ दू -तीन घंराक बाद ओकि ग्न िे बहत ददन होइत छै क, जे बचाक जन ्ेला पि एको ्ण मशमथल नमह होइत छै क। 39 तमहना प्थव ्ी पि म्पम् आबय िे मशमथल नमह होयत, आ सं साि शोक कित आ ओकिा पि चार कात दु ख आओत। 40 हे हि​ि पजा, हि​ि ्चन सु नू, अहाँ स् अपन यु​ुक ले ल तैयाि िह, आ ओमह दु षिन िे प्थव ्ी पि तीथनयाती जकाँ िह। 41 जे बे चैत अमछ, ओ ्ागय बला जकाँ होअय। 42 जे मकयो ्व ्सव ‍त िे िहमनहाि, ओमहना कोनो ला् नमह ्ेरैत अमछ। 43 जे बोनैत अमछ से जे ना िसल नमह कामर सकैत अमछ। 44 जे स् म्​्ाह किै त अमछ, से स् जे ना सं तान नमह पाबै त अमछ। जे म्​्ाह नमह किै त अमछ से म्र्ा जकाँ । 45 ते ँ जे स् वथन परिशि किै त अमछ। 46 मकएक तँ पिदे शी लोक स् ओकि िल कामर ले त आ ओकि सिव पम् लू रत, ओकि घि उखाम़ ले त आ अपन बचा स् केँ बं दी बना ले त, मकएक तँ ओकिा स् केँ बं दी आ अकाल िे सं तान ्ेरतैक। 47 जे स् अपन वापाि िे डकैती िे कबा किै त अमछ, ओ स् अपन शहि, अपन घि, अपन समम् आ अपन-अपन वल् केँ ओतेक बे सी सजाबै त अमछ। 48 प्ु कहै त छमथ जे हनका स्क पापक कािणे ँ हि हनका स् पि ओतेक बे सी कोमरत िहब। 49 जे ना ्े शा सतव य ईिानदाि आ सदव गु णी सव ती सँ ईरान किै त अमछ। 50 तमहना रिन अरिन सँ घ्णा कित, जखन ओ अपना केँ रोखा दे तीह आ ओकिा िुँ ह पि आिोप लगाओत, जखन ओ आओत जे प्थव ्ी पि जे पाप पि लगन सँ खोजै त अमछ ओकि बचा् कित। 51 ते ँ अहाँ स् एमह तिहक नमह बनू आ ने ओकि काज स्क सिान। 52 मकएक तँ प्थव ्ी सँ अरव यिता दू ि ्ऽ जायत आ अहाँ स्क बीच रामिन कताक िाजव य होयत। 53 पापी ई नमह कहय जे ओ पाप नमह केने अमछ, मकएक तँ पि​िे शव ्ि ओकि िाथ पि आमग क कोयला जिा दे त जे प्ु पि​िे शव ्ि आ हनकि िमहिाक सि् कहै त अमछ जे , “हि पाप नमह केलहँ ।” 54 दे खू, प्ु िनुरक स् काज, ओकि कलना, ओकि म्चाि आ ओकि हदय केँ जनैत छमथ। 55 ओ स् िात ई ्चन बाजल, “प्थी बनय।” ओ बनल छल: सगन बनय। आ एकि स् मष ्ेल। 56 हनकि ्चन िे तािा स् बनल छल आ ओकि सं खा ओ जनैत छमथ। 57 ओ गहीिं आ ओकि खजाना स् केँ खोजै त अमछ। ओ सिु ् आ ओमह िे की अमछ से नापने छमथ।

58 ओ सिु ् केँ पामन िे बं द कऽ दे लक आ अपन ्चन सँ प्थी केँ पामन पि लरका दे लक। 59 ओ आकाश केँ कोठिी जकाँ पसारि दै त छमथ। पामन पि ओ एकि नीं् िखने छमथ। 60 िर्ूमि िे ओ पहा़क चोरी पि पामन के झिना आ पोखरि बनौलमन, जामह सँ ऊँच-ऊँच पाथि सँ बाम़ आमब कऽ रिती केँ पामन दे ल जाय। 61 ओ िनुषव य केँ बनौलमन आ अपन हदय केँ शिीिक बीच िे िालख दे लमन आ ओकिा साँ स, जी्न आ बु लु दे लमन। 62 हँ , आ स्न शल्िान पि​िे शव ्िक आतव िा, जे स् मकछु बनौलमन आ प्थव ्ीक िहस िे स् नुकायल बातक खोज किै त छमथ। 63 ओ अहाँ स्क आम्षाि आ अहाँ स्क िोन िे की सोचैत छी, से स् पाप किऽ ्ला स् केँ से हो जामन िहल छमथ आ अपन पाप केँ नुकाबऽ चाहै त छमथ। 64 ते ँ प्ु अहाँ स्क स् काज केँ ठीक-ठीक खोमज ले ने छमथ आ अहाँ स् केँ ललजत कऽ दे मथन। 65 जखन अहाँ स्क पाप सािने आमब जायत तखन अहाँ स् िनुषव यक सि् ललजत होयब आ ओमह मदन अहाँ स्क पाप अहाँ स्क आिोप लगाबय्ला होयत। 66 अहाँ स् की किब? अहाँ स् अपन पाप केँ पि​िे शव ्ि आ हनकि सव ्गन दूत स्क सि् कोना नुका दे ब? 67 दे खू, पि​िे शव ्ि सयं नायारीश छमथ, हनका सँ डे िाउ। 68 दे खू, बहत िास ्ी़क पजमलत कोर अहाँ स् पि पजमलत अमछ आ ओ स् अहाँ स् िे सँ मकछु गोरे केँ दू ि कऽ ले त आ अहाँ स् केँ बे काि ्ऽ कऽ िू मतन स्क ले ल च़ाओल गे ल ्सु स् सँ ्ोजन कित। 69 जे स् ओकिा स् केँ सहित होयत, ओकिा उपहास आ अपिामनत कयल जायत आ पएि पि दबाओल जायत। 70 मकएक तँ स् ठाि आ आगािी नगि स् िे प्ुक ्य दे खमनहाि स् पि बहत पैघ म्​्ोह होयत। 71 ओ स् बताह लोक जकाँ होयत, जे ककिो नमह छो़त, िु दा प्ुक ्य दे खमनहाि केँ लू मर कऽ नष कऽ दे त। 72 मकएक तँ ओ स् अपन सिव पम् उजाम़ कऽ लऽ कऽ घिसँ बाहि िेमक दे त। 73 तखन ओ स् मचनल जे ताह जे हि​ि चुनल गे ल छमथ। आमग िे सोना जकाँ पिी्ण कयल जायत। 74 हे हि​ि मपयजन स्, सु नू, प्ु कहै त छमथ। 75 अहाँ स् नमह डे िाउ आ ने शंका कर। मकएक तँ पि​िे शव ्ि अहाँ क िागन दशनक छमथ। 76 हि​ि आजा आ उपदे शक पालन किमनहाि स्क िागन दशनक, प्ु पि​िे शव ्ि कहै त छमथ, “अहाँ स्क पाप अहाँ स् केँ ्ाि नमह दऽ मदयौक आ अहाँ स्क अरिन केँ अपना केँ नमह उठय।” 77 मरकाि अमछ जे स् अपन पाप सँ बानल अमछ आ अपन इमन सँ झाँ पल अमछ एहन गु ण जे ना खेत िे झा़ी सँ झाँ पल अमछ आ ओकि बार काँ र सँ झाँ पल अमछ, जामह सँ ककिो याता नमह ्' सकय! 78 ओकिा कप़ा उतािने छोम़ दे ल जाइत छै क आ ओकिा सं ग ्स किबाक ले ल आमग िे िेमक दे ल जाइत छै क।


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