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Hindi - 2nd Book of Adam and Eve

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आदम और हव् की दूसरी पुस क अध ्य 1 1 जब लुलुव् ने कैन की ब्ते सुनी,ं तो वह रोती हु अपने पपत् और म्त् के प्स गु और उने बत्य् पक कैन ने उसके भ्ु ह्पबल को म्र ड्ल् है । 2 तब वे सब लोग ऊंचे शब से पचल्ल, और मुंह पर थप् म्रे , और पसर पर धूल ड्ली, और अपने वस फ्​्े , और पनकलकर उस स्न पर पहं चे जह्ं ह्पबल म्र ड्ल् गय् थ्। 3 और उनोंने उसे मर् हआ भूपम पर प्​् प्य्, और उसके च्रों ओर पशु थे; और वे उस धम् के क्रण रोते और पचल्ते थे। उसके शरीर से, उसकी पपवतत् के क्रण, सुगन्त द्ों की सुग् आ रही थी। 4 और आदम उसे उठ्कर, उसके चेहरे पर आं सू बहते हल, खज्ने की गुफ् मे गय्, जह्ं उसने उसे रख्, और उसे सुगन्त मस्लों और ग्रस से भर पदय्। 5 और उसके ग्​्े ज्ने तक आदम और हव् ब्े शोक मे लक सौ च्लीस पदन तक रहे । ह्पबल स्ढे पनह वर् क् और कैन स्ढे सतह वर् क् थ्। 6 जब कैन के भ्ु क् शोक सम्प हो गय्, तब उसने अपनी बपहन लुलुव् को अपने म्त्-पपत् की अनुमपत के पबन् ही ब्ह पलय्; कोंपक वे अपने भ्री मन के क्रण उसे उससे अलग न कर सकते थे। 7 पफर वह पह्​् के नीचे बगीचे से दू र उस जगह के प्स गय् जह्ँ उसने अपने भ्ु को म्र ड्ल् थ्। 8 और उस जगह बहत से फलद्र वृक और वन वृक थे: और उसकी बपहन ने उसके पलये सन्न उत् की, जो धीरे धीरे बढते गल, और उस जगह को भर पदय्। 9 लेपकन आदम और हव् ह्पबल की अंतेपे के ब्द स्त स्ल तक लक-दू सरे के स्थ नही ं रहे । इसके ब्द, हव् गभ्वती हु और जब वह गभ्वती थी, तो आदम ने उससे कह्, "आओ, हम लक भें लेकर परमेशर को चढ्लँ और उससे प्थ्न् करे पक वह हमे लक सुनर ब्लक दे , पजससे हमे श्नन पमले और पजसक् पवव्ह हम ह्पबल की बहन से कर सके।" 10 तब उनोंने भें तैय्र की, और वेदी के समीप ले ज्कर यहोव् के स्मने चढ्य्, और उस से पबनती करने लगे, पक हम्री भें गहण कर, और हमे उतम सन्न दे । 11 और परमेशर ने आदम की यह प्थ्न् सुनकर उसकी भें गहण की। तब आदम, हव् और उनकी बेंी ने दणवतव करके उस गुप गुफ् के प्स उतरकर उस मे लक दीपक रख्, जो ह्पबल की लोथ के स्मने र्त और पदन जलत् रहे । 12 तब आदम और हव् उपव्स और प्थ्न् करते रहे जब तक पक हव् क् पसव क् समय नही ं आय्, तब उसने आदम से कह्, “मै चट्न की गुफ् मे ज्न् च्हती हँ , त्पक उसमे बचे पैद् कर सकूँ।” 13 उसने कह्, "ज्ओ और अपनी बेंी को अपने स्थ ले ज्ओ, जो तुम्री सेव् करे गी; परनु मै अपने पुत ह्पबल के शव के स्मने इसी खज्ने की गुफ् मे रहं ग्।"

14 तब हव् ने आदम की ब्त म्नकर अपनी बेंी समेत चली गु, परनु आदम अकेल् भण्र की गुफ् मे रह गय्। अध ्य दो 1 और हव् ने लक पुत को जन पदय् जो रप और रप मे अतंत सुनर थ्। उसकी सुनरत् उसके पपत् आदम के सम्न, वरन उससे भी अपधक सुनर थी। 2 तब हव् ने उसे दे खकर श्नन प्ु, और आठ पदन तक गुफ् मे रही; पफर उसने अपनी बेंी को आदम के प्स यह कहल् भेज् पक आकर ब्लक को दे ख और उसक् न्म रख। परनु बेंी अपने भ्ु के शव के प्स आदम के लौंने तक वही ं रही। और वह भी लौं आु। 3 लेपकन जब आदम आय् और उसने ब्लक के रप, रप और सुनरत् को दे ख्, तो वह उसके क्रण आनननत हआ और ह्पबल के क्रण श्नन प्य्। तब उसने ब्लक क् न्म शेत रख्, पजसक् अथ् है, "परमेशर ने मेरी प्थ्न् सुनी है और मुझे मेरे केश से छु ्​्य् है ।" लेपकन इसक् अथ् "शन् और स्मर्" भी है । 4 पफर जब आदम ने बची क् न्म रख् तो वह खज्ने की गुफ् मे लौं गय्; और उसकी बेंी अपनी म्ँ के प्स लौं गु। 5 परनु हव् अपनी गुफ् मे च्लीस पदन तक रही, जब तक पक वह पूरी न हो गु, तब वह आदम के प्स आु, और अपने स्थ ब्लक और अपनी बेंी को भी ले आु। 6 और वे नदी के पकन्रे आल, और आदम और उसकी बेंी ने तो ह्पबल के शोक के क्रण स्न पकय्; परनु हव् और ब्लक ने शुद होने के पलये स्न पकय्। 7 तब वे लौं आल, और भें लेकर पह्​् पर गल, और बचे के पलये भें चढ्ु; और परमेशर ने उनकी भें सीक्र की, और उन पर और उनके पुत शेत पर आशीर दी; और वे भण्र की गुफ् मे लौं आल। 8 आदम ने जीवन भर अपनी पती हव् को पफर कभी अपने प्स नही ं रख्, और न उसके कोु संत्न उत् हु; केवल वे प्ं च, कैन, लुलुव्, ह्पबल, अकपलय् और शेत। 9 परनु शेत बढत् गय्, और बलव्न होकर उपव्स और प्थ्न् करने लग्। अध ्य 3 1 हम्रे पपत् आदम को जब अपनी पती हव् से अलग हल स्त वर् बीत गल, तब शैत्न ने उसे अपनी पती से इस पक्र अलग हआ दे खकर ुर्​् की, और उसे पफर से हव् के स्थ रहने के पलल पववश पकय्। 2 तब आदम उठकर उस भण्र की गुफ् के ऊपर चढ गय्, और र्त-र्त भर वही ं सोय् करत् थ्। परनु पपतपदन जब उज्ल् होत्, तो वह गुफ् के प्स उतर आत्, और वह्ँ प्थ्न् करके आशीव्​् द लेत् थ्। 3 परनु जब स्ं झ हु, तब वह गुफ् की छत पर चढ गय्, और वही ं अकेल् सो गय्, इस डर से पक कही ं शैत्न उस पर पबल न हो ज्ल। और वह उनतीस पदन तक इसी रीपत से अलग रह्। 4 तब शैत्न ने, जो सब भल्ु से घृण् करत् थ्, जब आदम को अकेले उपव्स और प्थ्न् करते दे ख्, तो लक सुनर सी के रप मे उसके स्मने पकं हआ, और च्लीसवे पदन की र्त को उसके स्मने ख्ी होकर उससे कह्:--


आदम और हव् की दू सरी पुसक

5 “ऐ आदम, जब से तुम इस गुफ् मे रहते हो, हमने तुम्री वजह से ब्ी श्ं पत प्ु है, तुम्री दु आलँ हम तक पहँ ची है और हम तुम्रे ब्रे मे तसली प्ते है । 6 "परनु अब, हे आदम, जब तू सोने के पलल गुफ् की छत पर चढ गय् है, तो हमे तेरे पवरय मे संदेह हआ है , और तेरे हव् से अलग होने के क्रण हम पर ब्​् दु ःख आय् है । पफर, जब तू इस गुफ् की छत पर है , तो तेरी प्थ्न् पगं हो ज्ती है , और तेर् हदय इधर-उधर भंकत् है । 7 परनु जब तू गुफ् मे थ्, तब तेरी प्थ्न् इकटी हु आग के सम्न थी; वह हम तक उतरी, और तुझे पवश्म पमल्। 8 पफर मै तेरे उन पुतों के पलये भी शोपकत हआ जो तुझ से अलग हो गल; और तेरे पुत ह्पबल की हत् के पवरय मे भी मेर् शोक ब्​् है ; कोंपक वह धम् थ्; और धम् मनुर के पलये सब लोग शोक करते है । 9 परनु मै तेरे पुत शेत के जन के क्रण आनननत हआ; परनु थो्े समय ब्द हव् के क्रण बहत उद्स हआ, कोंपक वह मेरी बपहन है । कोंपक जब परमेशर ने तुझे भ्री नीद ं मे ड्ल कर तेरे प्स से पनक्ल्, तब उसके स्थ मुझे भी पनक्ल्; परनु उसे तेरे प्स रखकर पजल्य्, और मुझे नीचे कर पदय्। 10 "मै अपनी बहन के क्रण बहत पस् थ्, कोंपक वह तुम्रे स्थ थी। परनु परमेशर ने मुझसे पहले ही पपतत् की थी, और कह् थ्, 'शोक मत करो; जब आदम खज्ने की गुफ् की छत पर चढ ज्लग्, और अपनी पती हव् से अलग हो ज्लग्, तब मै तुझे उसके प्स भेजूंग्, और तू उससे पवव्ह करके उसके प्ं च बचे उत् करन्, जैसे हव् ने उसके प्ं च बचे उत् पकल थे।' 11 और अब, दे ख! परमेशर ने मुझसे जो व्द् पकय् थ् वह पूर् हआ है; कोंपक उसी ने मुझे तेरे प्स पवव्ह के पलये भेज् है ; कोंपक यपद तू मुझसे पवव्ह करे गी, तो मै तेरे पलये हव् की संत्नों से भी उतम और शेर संत्न उत् कर ं गी। 12 "पफर भी, तू अभी जव्न ही है ; इस संस्र मे अपनी जव्नी दु ःख मे न पबत्; परनु अपनी जव्नी के पदन आनन और आनंद मे पबत्। कोंपक तेरे पदन थो्े और तेरी परीक् ब्ी है । पहय्व ब्​्; इस संस्र मे आनन से अपने पदन पबत्। मै तुझ से पस् होऊँग्, और तू भी मेरे स्थ इसी रीपत से और पनडर होकर आनन मन्। 13 तब वह आदम के प्स आु और उसे गले लग् पलय्। 14 परनु जब आदम ने दे ख् पक वह उस से ह्र ज्लग्, तो उसने ब्े मन से परमेशर से प्थ्न् की, पक वह उसे उस से बच्ल। 15 तब परमेशर ने आदम के प्स अपन् वचन भेज्, और कह्, "हे आदम, वह वही है पजसने तुझे परमेशरव और मपहम् दे ने क् व्द् पकय् थ्; वह तेरे पपत अनुकूल नही ं है ; परनु वह कभी सी के रप मे, कभी सग्दूत के रप मे, कभी सप् के रप मे, और कभी दे वत् के रप मे तेरे स्मने पकं होत् है ; परनु वह यह सब केवल तेरी आत् को ने करने के पलल करत् है । 16 अब हे आदम, मै ने तेरे मन की ब्त समझकर तुझे ब्र ब्र उसके ह्थ से बच्य् है, पजस से तुझे जत्ऊं पक मै दय्लु परमेशर हं , और तेर् भल् च्हत् हं, और तेर् पवन्श नही ं च्हत्।

अध ्य 4 1 तब परमेशर ने शैत्न को आदे श पदय् पक वह अपने भयंकर रप मे आदम को पतक रप से पदख्ये। 2 परनु जब आदम ने उसे दे ख्, तो वह डर गय्, और उसे दे खकर क्ँ प उठ्। 3 और परमेशर ने आदम से कह्, "इस शैत्न और उसके भय्नक रप को दे खो, और ज्न लो पक उसी ने तुमे पक्श से अंधक्र मे, श्ं पत और पवश्म से के और दु ःख मे पगर् पदय् है । 4 और हे आदम, उस पर ध्न करो, पजसने अपने पवरय मे कह् थ् पक मै परमेशर हँ! क् परमेशर क्ल् हो सकत् है? क् परमेशर सी क् रप ध्रण करे ग्? क् परमेशर से भी अपधक शन्श्ली कोु है ? और क् उसे पर्पजत पकय् ज् सकत् है ? 5 "हे आदम, दे ख, वह तेरे स्मने हव् मे ब्​् हआ है, और भ्ग नही ं सकत्! इसपलये मै तुझ से कहत् हं, उस से मत डर; अब से स्वध्न रहन्, और उस से चौकस रहन्, च्हे वह तुझ से कुछ भी करे ।" 6 तब परमेशर ने शैत्न को आदम के स्मने से दू र कर पदय्, पजसे उसने बल पदय् और पजसके मन को उसने श्नन दी, और उससे कह्, "भण्र की गुफ् मे उतर ज्, और हव् से अलग न हो; मै तेरे भीतर की स्री पशुवत अपभल्र् को दब् दू ं ग्।" 7 उसी समय से वह आदम और हव् पर से हं गय्, और उनोंने परमेशर की आत् से पवश्म प्य्। परनु परमेशर ने आदम की सन्न मे से पकसी को पस् न पकय्, परनु केवल आदम और हव् को। 8 तब आदम ने यहोव् को दणवतव पकय्, कोंपक उसने उसे छु ्​्य् थ् और अपनी व्सन्ओं को त्ग पदय् थ्। तब वह गुफ् के ऊपर से उतर आय्, और पहले की न्ुं हव् के स्थ रहने लग्। 9 इस पक्र हव् से उसके अलग्व के च्लीस पदन पूरे हो गल। अध ्य 5 1 जब शेत स्त वर् क् थ्, तब वह भले बुरे क् त्न रखत् थ्, और पनयपमत रप से उपव्स और प्थ्न् करत् थ्, और अपनी स्री र्ते परमेशर से दय् और कम् के पलल प्थ्न् करने मे पबत्त् थ्। 2 वह पपतपदन अपन् चढ्व् चढ्ते समय अपने पपत् से भी अपधक उपव्स रखत् थ्; कोंपक उसक् मुख सुनर थ्, म्नो परमेशर क् कोु दू त हो। उसक् हदय भी उतम थ्, और वह अपनी आत् के उतम गुणों को सुरपकत रखत् थ्, और इसी क्रण वह पपतपदन अपन् चढ्व् चढ्त् थ्। 3 और परमेशर उसकी भें से पस् हआ, परनु उसकी पपवतत् से भी पस् हआ। और वह स्त वर् की आयु तक परमेशर और अपने पपत् और म्त् की इच् पूरी करत् रह्। 4 इसके ब्द जब वह अपनी भें चढ्कर वेदी से उतर रह् थ्, तो शैत्न लक सुनर सग्दूत के रप मे उसके स्मने पकं हआ, जो जोपत से चमक रह् थ्; और उसके ह्थ मे जोपत की ल्ठी थी, और वह भी जोपत क् पंु क् ब्​्े हल थ्। 5 उसने सुनर मुस्न के स्थ शेत क् स्गत पकय्, और मीठी-मीठी ब्ते कहकर उसे फुसल्ने लग्, "हे शेत, तू इस पह्​् पर कों रहत् है ? यह तो ऊब्-ख्ब् है , और इसमे पतर और रे त है, और ऐसे वृक है पजन पर अचे फल नही ं लगते;


आदम और हव् की दू सरी पुसक

यह ऐस् जंगल है , पजसमे न तो कोु बसी है , न कोु शहर; और न रहने के पलल कोु अच् स्न है । केवल गम्, थक्न और के ही के है ।" 6 उसने आगे कह्, "लेपकन हम लोग सुनर स्नों मे रहते है , इस पृथी से पभ् लक अन लोक मे। हम्र् लोक पक्शमय है और हम्री नसपत सव्तम है ; हम्री नसय्ँ अन सभी नसयों से अपधक सुनर है ; और हे सेठ, मै च्हत् हँ पक तुम उनमे से पकसी लक से पवव्ह कर लो; कोंपक मै दे खत् हँ पक तुम दे खने मे सुनर हो, और इस दे श मे तुम्रे योग लक भी सी नही ं है । इसके अपतरर्, इस संस्र मे रहने व्ले सभी लोग केवल प्ँ च आत्लँ है । 7 "लेपकन हम्री दु पनय् मे बहत से पुरर और युवपतय्ँ है , जो लक-दू सरे से अपधक सुनर है । इसपलल मै तुमे यह्ँ से ले ज्न् च्हती हँ , त्पक तुम मेरे समन्यों से पमल सको और पजससे च्हो पवव्ह कर सको। 8 “तब तू मेरे प्स रहे ग् और श्नन से रहे ग्; तू भी हम्री न्ुं तेज और पक्श से पररपूण् हो ज्लग्। 9 "तू हम्री दु पनय् मे रहे ग् और इस दु पनय् और इसके दु ख से आर्म करे ग्; तू पफर कभी थक् हआ य् कमजोर महसूस नही ं करे ग्; तू कभी भी कोु भें नही ं चढ्लग्, न ही दय् की य्चन् करे ग्; कोंपक तू पफर कभी प्प नही ं करे ग्, न ही व्सन्ओं से पभ्पवत होग्। 10 “और यपद तू मेरी ब्त म्ने, तो मेरी बेपंयों मे से लक से पवव्ह कर ले; कोंपक हम्रे यह्ं ऐस् करन् प्प नही,ं और न वह पशु-व्सन् पगन् ज्त् है ।” 11 "कोंपक हम्रे संस्र मे कोु परमेशर नही ं है ; परनु हम सब परमेशर है; हम सब जोपत के है , सग्य है, स्मथ् है , बलव्न है , और मपहम्व्न है ।" अध ्य 6 1 जब शेत ने ये ब्ते सुनी,ं तो वह चपकत हआ, और शैत्न की पवश्सघ्ती ब्तों पर मन लग्कर उससे कह्, क् तू कहत् है पक इस से भी कोु दू सर् जगत बन्य् गय् है , और इस जगत के प्पणयों से भी अपधक सुनर और प्णी है? 2 शैत्न ने कह्, "ह्ँ ; दे ख तूने मेरी ब्त सुनी है ; परनु मै पफर भी उनकी और उनके च्लचलन की पशंस् तेरे सुनते कर ँ ग्।" 3 परनु शेत ने उससे कह्, तेरे वचन और तेरे सुनर वण्न ने मुझे चपकत कर पदय् है । 4 परनु मै आज तेरे स्थ नही ं ज् सकत्; जब तक मै अपने पपत् आदम और अपनी म्त् हव् के प्स न ज्ऊं, और जो कुछ तू ने मुझ से कह् है , वह सब न कह दू ं । पफर यपद वे मुझे तेरे स्थ ज्ने की आत् दे , तो मै आऊंग्। 5 पफर शेत ने कह्, "मै अपने म्त्-पपत् की अनुमपत के पबन् कुछ भी करने से डरत् हँ, कही ं ऐस् न हो पक मै अपने भ्ु कैन और अपने पपत् आदम की न्ुं ने हो ज्ऊँ, पजनोंने परमेशर की आत् क् उलंघन पकय् थ्। परनु दे ख, तू इस स्न को ज्नत् है ; कल यही ं आकर मुझसे पमल।" 6 जब शैत्न ने यह सुन्, तो उसने शेत से कह्, “यपद तू अपने पपत् आदम को वही ब्त बत्लग् जो मैने तुझसे कही है, तो वह तुझे मेरे स्थ आने नही ं दे ग्। 7 लेपकन मेरी ब्त सुनो; अपने म्त्-पपत् से मत कहन् पक मैने तुमसे क् कह् है; बन् आज मेरे स्थ हम्री दु पनय् मे चलो;

जह्ँ तुम सुंदर चीजे दे खोगे और वह्ँ आनंद मन्ओगे, और आज मेरे बचों के बीच मौज-मसी करोगे, उने पनह्रोगे और खूब आनंद मन्ओगे; और हमेश् खुश रहोगे। पफर मै तुमे कल इसी जगह व्पस ले आऊँग्; लेपकन अगर तुम मेरे स्थ रहन् च्हो, तो ऐस् ही हो।" 8 तब शेत ने उतर पदय्, “मेरे पपत् और मेरी म्त् की आत् मुझ पर छ्ु हु है ; और यपद मै पकसी पदन उनसे पछप ज्ऊँ, तो वे मर ज्लँ गे, और परमेशर मुझे उनके पवरद प्प करने क् दोरी ठहर्लग्। 9 और यपद वे न ज्ने पक मै इस स्न पर अपनी भें चढ्ने आय् हँ , तो वे लक घ्ी भी मुझसे अलग न होंगे; और न मै पकसी और स्न पर ज्ऊँग्, जब तक वे मुझे अनुमपत न दे । परनु वे मेरे स्थ बहत कृप् करते है , कोंपक मै उनके प्स शीघ लौं आत् हँ । 10 तब शैत्न ने उससे कह्, “यपद तू लक र्त उनसे पछप ज्ल, और भोर होते ही उनके प्स लौं आल, तो तुझे क् होग्?” 11 परनु जब शेत ने दे ख् पक वह ब्ते करत् रहत् है, और उसे छो्त् नही,ं तो वह दौ्कर वेदी के प्स गय्, और परमेशर की ओर ह्थ फैल्कर उस से बचने की पबनती की। 12 तब परमेशर ने अपन् वचन भेज् और शैत्न को श्प पदय्, जो उसके प्स से भ्ग गय्। 13 परनु शेत वेदी के प्स गय् और मन ही मन यह कहत् रह्, "वेदी ही भें क् स्न है , और परमेशर वही ं है; पद् अप् उसे भस कर दे गी; इसपलये शैत्न मुझे ह्पन न पहँ च् सकेग्, और न मुझे वह्ँ से ले ज् सकेग्।" 14 तब शेत वेदी से उतरकर अपने म्त्-पपत् के प्स गय्, और म्ग् मे उने प्कर उसक् शब सुनने के पलये तरसने लग्, कोंपक वह बहत दे र से वह्ं ठहर् थ्। 15 तब वह सग्दूत के रप मे आकर उने बत्ने लग् पक शैत्न की ओर से उस पर क्-क् बीत् है । 16 जब आदम ने उसकी यह ब्त सुनी, तो उसने उसके मुँह को चूम् और उसे उस सग्दूत से स्वध्न पकय्, और कह् पक यह शैत्न है जो इस पक्र तेरे स्मने पकं हआ थ्। तब आदम शेत को स्थ लेकर भण्र की गुफ् के प्स गय्, और वह्ँ आनननत हआ। 17 परनु उस पदन से लेकर अब तक आदम और हव् उसे कभी न छो्े गे, च्हे वह कही ं ज्ल, च्हे भें चढ्ने के पलये य् पकसी और वसु के पलये। 18 यह चमत्र शेत के स्थ तब हआ जब वह नौ वर् क् थ्। अध ्य 7 1 जब हम्रे पपत् आदम ने दे ख् पक शेत क् मन खर् है, तो उस ने उस से पवव्ह कर लेन् च्ह्, ऐस् न हो पक शतु दू सरी ब्र उस पर पगं होकर उस पर पबल हो ज्ल। 2 तब आदम ने अपने पुत शेत से कह्, हे मेरे पुत, मै च्हत् हं पक तू अपनी बपहन अकपलय् से, जो ह्पबल की बपहन है , पवव्ह कर ले, पक वह तेरे पलये सन्न उत् करे , जो परमेशर ने हम से जो पपतत् की है उसके अनुस्र पृथी मे भर ज्लं । 3 "हे मेरे पुत, मत डर; इसमे कोु अपम्न की ब्त नही ं है । मै च्हती हँ पक तू पवव्ह कर ले, कही ं ऐस् न हो पक शतु तुझ पर ह्वी हो ज्ल।"


आदम और हव् की दू सरी पुसक

4 परनु शेत पवव्ह करन् नही ं च्हत् थ्; परनु अपने म्त्पपत् की आत् म्नकर उसने लक शब भी न कह्। 5 तब आदम ने उसक् पवव्ह अकपलय् से कर पदय्, और वह पनह वर् क् थ्। 6 जब वह बीस वर् क् हआ, तब उसके लक पुत उत् हआ, पजसक् न्म उसने लनोश रख्; और पफर उसके और भी पुत उत् हल। 7 पफर लनोश ब्​् हआ, उसने पवव्ह पकय् और केन्न को जन पदय्। 8 केन्न भी ब्​् हआ, और ब्ह पकय्, और महललेल को जन पदय्। 9 वे पूव्ज आदम के जीवनक्ल मे पैद् हल थे, और खज्ने की गुफ् के प्स रहते थे। 10 तब आदम की आयु नौ सौ तीस वर् की हु, और महललेल की लक सौ वर् की। परनु महललेल जब ब्​् हआ, तो उसने उपव्स और प्थ्न् और कपठन पररशम करन्, और हम्रे पपत् आदम के अननम पदनों तक पपय समझ्। अध ्य 8 1 जब हम्रे पपत् आदम ने दे ख् पक उसक् अंत पनकं है , तो उसने अपने पुत शेत को बुल्य्, जो खज्ने की गुफ् मे उसके प्स आय्, और उसने उससे कह्:-2 "हे शेत, मेरे बेंे, अपने बचों और अपने पोतों के बचों को मेरे प्स ले आ, पक मै मरने से पहले उन पर आशीव्​् द बरस्ऊं।" 3 जब शेत ने अपने पपत् आदम की ये ब्ते सुनी ं, तब वह उसके प्स से चल् गय्, और आं सू बह्ते हल अपने बेंे-बेपंयों और पोतों को इकट् करके अपने पपत् आदम के प्स ले आय्। 4 परनु जब हम्रे पपत् आदम ने उने अपने च्रों ओर दे ख्, तो उन से अलग होने के क्रण रोय्। 5 जब उनोंने उसे रोते दे ख्, तो सब पमलकर रोल और उसके मुँह पर पगरकर कहने लगे, “हे हम्रे पपत्, तू हम से कैसे अलग हो सकत् है ? और पृथी तुझे कैसे गहण करे गी और हम्री आँ खों से कैसे पछप्लगी?” उनोंने इसी पक्र बहत पवल्प पकय् और लक ही पक्र के शब कहे । 6 तब हम्रे पपत् आदम ने उन सब को आशीव्​् द पदय्, और आशीव्​् द दे ने के ब्द शेत से कह्, 7 "हे सेठ, मेरे बेंे, तुम इस संस्र को ज्नते हो - पक यह दु ःख और थक्न से भर् है ; और तुम ज्नते हो पक इसमे हम्री परीक्ओं से हम पर क्-क् बीत् है । इसपलल अब मै तुमे इन शबों मे आत् दे त् हँ: पनद्र बने रहो, शुद और न्यी बनो, और परमेशर पर भरोस् रखो; और शैत्न की ब्तों पर, य् उसके द्र् पदख्ये ज्ने व्ले भूत-पेतों पर भरोस् मत करो। 8 परनु जो आत्लं मै आज तुझे सुन्त् हं , उने म्नन्; और अपने पुत लनोश को भी वही दे न्; और लनोश उसे अपने पुत केन्न को दे ; और केन्न अपने पुत महललेल को दे ; पक यह आत् तेरे सब वंश मे सद् बनी रहे । 9 "हे सेठ, मेरे बेंे, जब मै मर ज्ऊं, तो मेरे शरीर को ले ज्ओ और इसे ग्रस, अगर और तेजप्त से लपें दो, और मुझे इस खज्ने की गुफ् मे छो् दो, पजसमे वे सभी पचन है जो परमेशर ने हमे बगीचे से पदल थे। 10 "हे मेरे पुत, इसके ब्द जल पलय आलग् और सभी प्पणयों को डु बो दे ग्, तथ् केवल आठ प्णी ही बचेगे।

11 परनु हे मेरे पुत, उस समय तेरे सन्न मे से जो लोग बच ज्लं , वे मेरे शव को इस गुफ् से ब्हर ले ज्लं ; और जब वे उसे अपने स्थ ले ज्लं , तब जो ब्​् हो वह अपने पुतों को आत् दे पक मेरे शव को न्व मे तब तक रखे जब तक पक जल पलय श्न न हो ज्ल, और वे जह्ज से ब्हर न आ ज्लं । 12 तब वे जलपलय से बचने के तुरन ब्द मेरे शरीर को लेकर पृथी के बीच मे रख दे गे। 13 कोंपक पजस स्न पर मेर् शरीर रख् ज्लग्, वह पृथी के बीचोंबीच है ; परमेशर वही ं से आलग् और हम्रे स्रे घर्नों क् उद्र करे ग्। 14 परनु अब, हे मेरे पुत शेत, तू अपने लोगों क् पध्न हो ज्; उनकी दे खभ्ल कर और परमेशर क् भय म्नते हल उन पर पनगर्नी रख; और उने अचे म्ग् पर ले चल; और उने आत् दे पक परमेशर के पलये उपव्स करे ; और उने समझ् दे पक शैत्न की न सुने, ऐस् न हो पक वह उने ने कर दे । 15 इसपलये तू अपने और अपने पोतों के पोतों को कैन की सन्न से अलग कर दे ; और न तो उनके स्थ मेलजोल रखन्, और न उनके क्मों मे उनके पनकं आन्। 16 तब आदम ने शेत पर, और उसके वंश पर, और उसके सब वंशों पर आशीर बरस्ु। 17 तब उसने अपने पुत शेत और अपनी पती हव् की ओर पफरकर उनसे कह्, यह सोन्, यह धूप और यह ग्रस, जो परमेशर ने हमे पचन करके पदय् है , रख छो्ो; कोंपक आने व्ले पदनों मे स्री सृपे जल-पलय से डूब ज्लगी। परनु जो लोग जह्ज मे ज्लं गे, वे सोन्, धूप और ग्रस, और मेरी दे ह भी अपने स्थ ले ज्लं गे; और वे सोन्, धूप और ग्रस, और मेरी दे ह भी पृथी के बीच मे रख दे गे। 18 "पफर बहत पदनों के ब्द वह नगर लूं पलय् ज्लग् पजसमे मेरी दे ह के स्थ सोन्, धूप और ग्रस पमलेग्। परनु जब वह लूं् ज्लग्, तब सोन्, धूप और ग्रस भी रखी हु लूं के स्थ रख पलय् ज्लग्; और जब तक मनुर द्र् रच् गय् परमेशर क् वचन न आल, तब तक उनमे से कुछ भी ने न होग्; जब र्ज् उने ले ज्कर उसके र्ज् होने के पम्ण के रप मे सोन्, सग् और पृथी के परमेशर होने के पम्ण के रप मे धूप, और उसकी पी्​् के पम्ण के रप मे ग्रस चढ्लं गे। 19 "और ठण् भी, इस ब्त क् पतीक है पक वह शैत्न और हम्रे सब शतुओं पर जय प्लग्; और धूप, इस ब्त क् पतीक है पक वह मरे हओं मे से जी उठे ग्, और सग् और पृथी की वसुओं से ऊपर मह्न पकय् ज्लग्; और ग्रस, इस ब्त क् पतीक है पक वह क्व् पपत पीलग्, और शैत्न के द्र् नरक की पी्​् सहे ग्। 20 “और अब, हे मेरे पुत शेत, दे ख, मै ने तुझ पर गुप भेदों को पगं पकय् है , जो परमेशर ने मुझ पर पगं पकल थे। तू अपने और अपने लोगों के पलये मेरी आत् क् प्लन कर।” अध ्य 9 1 जब आदम ने शेत को आत् दे न् सम्प पकय्, तो उसके अंग पशपथल हो गल, उसके ह्थ-प्ँ व ढीले प् गल, उसक् मुँह गूँग् हो गय्, और उसकी जीभ से बोलन् पब्ुल बंद हो गय्। उसने अपनी आँ खे बंद कर लीं और प्ण त्ग पदल। 2 परनु जब उसके पुतों ने दे ख् पक वह मर गय् है , तो क् पुरर, क् सी, क् बूढे, क् बचे, सब रोते हल उस पर पगर प्े ।


आदम और हव् की दू सरी पुसक

3 आदम की मृतु पृथी पर उसके नौ सौ तीस वर् पूरे होने पर हु; बरमूदेह म्ह के पंदहवे पदन, सूय् के पहस्ब से नौवे घं​ंे पर। 4 यह शुकव्र क् पदन थ्, पजस पदन वह बन्य् गय् थ्, और पजस पदन उसने पवश्म पकय् थ्; और पजस समय उसकी मृतु हु, वह वही समय थ् पजस समय वह बगीचे से ब्हर आय् थ्। 5 तब शेत ने उसकी अची तरह से दे ह को लपें्, और पपवत वृकों और पपवत पव्त की बहत सी सुगन्त वसुओं से उसक् शव सुगन्त पकय्; और उसकी लोथ को गुफ् के भीतरी भ्ग मे, धूपद्न की ओर, रख पदय्; और उसके स्मने लक जलत् हआ दीवं रख पदय्। 6 तब उसके बचे उसके स्मने ख्े होकर स्री र्त उसके पलये रोते और पवल्प करते रहे , और पौ फंने तक रोते रहे । 7 तब शेत और उसक् ब्​् पुत लनोश, और लनोश क् पुत केन्न, यहोव् के पलये अची अची भेंे ले कर ब्हर गल, और उस वेदी के प्स आल पजस पर आदम भें चढ्य् करत् थ्। 8 परनु हव् ने उनसे कह्, "जब तक हम परमेशर से पबनती न करे पक वह हम्री भें सीक्र करे , और अपने द्स आदम के प्ण को अपने प्स रख ले, और उसे पवश्म के पलये ऊपर ले ज्ल, तब तक ठहरो।" 9 तब वे सब ख्े होकर प्थ्न् करने लगे। अध ्य 10 1 जब वे प्थ्न् कर चुके, तो परमेशर क् वचन आय् और उनके पपत् आदम के पवरय मे उने श्नन दी। 2 इसके ब्द उनोंने अपने और अपने पपत् के पलल भें चढ्ु। 3 और जब उनोंने अपनी भें चढ्नी सम्प की, तो परमेशर क् वचन शेत के प्स पहं च्, जो उनमे सबसे ब्​् थ्, और उससे कह्, "हे शेत, शेत, शेत, तीन ब्र। जैसे मै तेरे पपत् के संग रह्, वैसे ही तेरे संग भी रहं ग्, जब तक पक वह वचन पूर् न हो ज्ल जो मैने तेरे पपत् से कह् थ्, पक मै अपन् वचन भेजकर तुझे और तेरे वंश को बच्ऊंग्। 4 परनु जैसे तू ने अपने पपत् आदम के पवरय मे आत् दी थी, वैसे ही तू भी उसकी आत् म्नन्, और अपने भ्ु कैन के वंश से अलग रखन्। 5 और परमेशर ने शेत से अपन् वचन व्पस ले पलय्। 6 तब शेत, हव् और उनके बचे पह्​् से नीचे खज्ने की गुफ् मे आल। 7 परनु आदम पपहले मनुर थ् पजसकी आत् अदन के दे श मे, अथ्​् त भण्र की गुफ् मे मरी; कोंपक उससे पपहले उसके पुत ह्पबल को छो् कोु नही ं मर् थ्, जो हत् करके मर गय्। 8 तब आदम की स्री सन्न उठकर अपने पपत् आदम के पलये रोती रही, और उसको धूप जल्ती रही, यह सब लक सौ च्लीस पदन तक हआ। अध ्य 11 1 आदम और हव् की मृतु के ब्द, शेत ने अपनी सन्नों और अपनी सन्नों को कैन की सन्नों से अलग कर पदय्। कैन और उसकी सन्न नीचे ज्कर पप्म की ओर उस स्न के नीचे रहने लगे, जह्ँ उसने अपने भ्ु ह्पबल को म्र ड्ल् थ्।

2 परनु शेत और उसके पुत अपने पपत् आदम के पनकं रहने के पलये उतर की ओर भण्र की गुफ् न्म पह्​् पर रहने लगे। 3 और शेत न्म जेर जो लम्, भल्, और उतम मन और दढ बुनद व्ल् थ्, वह अपनी पज् क् मुनखय् हआ, और उनकी सेव्-ंहल, और मन पफर्व, और नमत् से की, और उनमे से पकसी को कैन की सन्न के प्स ज्ने न पदय्। 4 परनु उनकी अपनी पपवतत् के क्रण उने "परमेशर की सन्न" न्म पदय् गय्, और वे पगरे हल सग्दूतों की सेन् के स्न पर परमेशर के स्थ थे; कोंपक वे अपनी गुफ् मे, अथ्​् तव खज्ने की गुफ् मे, परमेशर की सुपत करते और उसके पलये भजन ग्ते रहे । 5 तब शेत अपने पपत् आदम और अपनी म्त् हव् के शवों के स्मने ख्​् होकर र्त पदन प्थ्न् करत् रह्, और अपने और अपने बचों के पलये दय् की य्चन् करत् रह्; और यह भी पक जब पकसी ब्लक के पवरय मे उसे कोु कपठन क्म हो, तो परमेशर उसे समपत दे । 6 परनु शेत और उसके पुत स्ं स्ररक क्मों मे रपच न रखते थे, परनु सग्य क्मों मे लगे रहते थे; कोंपक परमेशर की सुपत, सुपत और भजन के पसव् उनक् और कोु ध्न नही ं थ्। 7 इसपलल वे हर समय सग्दूतों की आव्जे परमेशर की सुपत और मपहम् करते हल सुनते थे; च्हे वे व्पंक् के भीतर से हों, च्हे परमेशर द्र् पकसी क्म से भेजे ज्ते हों, च्हे वे सग् को ज्ते हों। 8 कोंपक शेत और उसके बचों ने अपनी पपवतत् के क्रण उन सग्दूतों को सुन् और दे ख् थ्, और पफर वह ब्री उनसे ज्द् दू र नही,ं बन् पसर् पंदह आध्नतक ह्थ की दू री पर थी। 9 अब लक आनतक ह्थ मनुर के तीन ह्थ के बर्बर है , जो कुल पमल्कर पैत्लीस ह्थ होत् है । 10 शेत और उसके बचे उस ब्पंक् के नीचे पह्​् पर रहते थे; वे न बोते थे, न क्ंते थे; वे दे ह के पलये कुछ भोजन नही ं करते थे, यह्ँ तक पक गेहँ भी नही ं, केवल भें चढ्ते थे। वे उस पह्​् पर उगने व्ले, जह्ँ वे रहते थे, फलों और सुगन्त वृकों के फल ख्ते थे। 11 तब शेत और उसके ब्े बेंे च्लीस पदन तक उपव्स करते रहे , कोंपक जब हव् उस ओर बहती थी, तो शेत के पररव्र को बगीचे के वृकों की सुग् आती थी। 12 वे सुखी, पनद्र और पनडर थे, उनमे न तो ुर्​् थी, न कोु बुर् क्म, न ही कोु घृण्। उनमे कोु प्शपवक व्सन् नही ं थी; उनके मुँह से न तो कोु अपशब पनकले , न कोु श्प; न कोु बुरी सल्ह, न ही कोु छल। कोंपक उस समय के लोग कभी शपथ नही ं लेते थे, परनु कपठन पररनसपतयों मे, जब शपथ लेनी ही प्ती थी, तो वे धम् ह्पबल के लह की शपथ लेते थे। 13 परनु वे अपने बचों और नसयों को पपतपदन गुफ् मे उपव्स, प्थ्न् और परमपध्न परमेशर की उप्सन् करने के पलल पववश करते थे। वे अपने पपत् आदम की दे ह से अपने को धन म्नते थे, और उससे अपने को अपभरेक करते थे। 14 और वे ऐस् तब तक करते रहे जब तक शेत क् अन पनकं न आ गय्।


आदम और हव् की दू सरी पुसक

अध ्य 12 1 तब धम् शेत ने अपने पुत लनोश को, और लनोश के पुत केन्न को, और केन्न के पुत महललेल को बुल्कर उन से कह्, 2 "चूँपक मेर् अंत पनकं है, मै उस वेदी के ऊपर लक छत बन्न् च्हत् हँ पजस पर भें चढ्ु ज्ती है ।" 3 उनोंने उसकी आत् म्नकर, क् बूढे, क् जव्न, सब के सब ब्हर गल और उनोंने क्ी मेहनत करके वेदी के ऊपर लक सुनर छत बन्ु। 4 और शेत ने ऐस् करने मे यह सोच् थ् पक पह्​् पर उसके बचों पर आशीव्​् द आलग्; और वह अपनी मृतु से पहले उनके पलल भें चढ्लग्। 5 जब छत क् क्म पूर् हो गय्, तो उसने उने बपल चढ्ने की आत् दी। उनोंने पररशम करके बपल चढ् दी, और अपने पपत् शेत के प्स ले आल, और शेत ने उने वेदी पर चढ्य्, और परमेशर से प्थ्न् की, पक वह उनकी बपल सीक्र करे , और अपने बचों के प्णों पर दय् करे , और उने शैत्न के ह्थ से बच्ल। 6 और परमेशर ने उसकी भें सीक्र की, और उस पर और उसकी सन्न पर आशीर दी। तब परमेशर ने शेत से पपतत् की, "उस मह्न स्ढे प्ँ च पदन के अन मे, पजसके पवरय मे मैने तुझसे और तेरे पपत् से पपतत् की है , मै अपन् वचन भेजकर तुझे और तेरे वंश को बच्ऊँग्।" 7 तब शेत और उसके पुत और उसके पोतों के पुत इकटे हल, और वेदी से उतरकर भण्र की गुफ् के प्स गल; वह्ं उनोंने प्थ्न् की, और हम्रे पपत् आदम की दे ह मे अपने को धन कह्, और उस दे ह से अपने को अपभरेक पकय्। 8 परनु शेत कुछ पदन तक भण्र की गुफ् मे रह्, और पफर मृतु तक दु ख भोगत् रह्। 9 तब उसक् जेठ् पुत लनोश, उसक् पुत केन्न, केन्न क् पुत महललेल, महललेल क् पुत येरेद, और येरेद क् पुत हनोक, अपनी-अपनी नसयों और ब्लकों समेत शेत से आशीव्​् द लेने उसके प्स आल। 10 तब शेत ने उनके पलये प्थ्न् की, और उने आशीव्​् द पदय्, और धम् ह्पबल के लोह की शपथ पदल्कर कह्, हे मेरे बचो, मै तुम से पबनती करत् हं , पक तुम मे से कोु इस पपवत और पनम्ल पव्त से नीचे न उतरने प्ल। 11 उस हत्रे और प्पी कैन की सन्न से, पजसने अपने भ्ु को घ्त पकय्, मेल-पमल्प न करन्; कोंपक हे मेरे बचों, तुम ज्नते हो, पक हम उसके और उसके सब प्पों से इसपलये भ्गते है, पक उसने अपने भ्ु ह्पबल को घ्त पकय्। 12 यह कहकर शेत ने अपने जेठे पुत लनोश को आशीव्​् द पदय्, और उसे आत् दी पक जीवन भर हम्रे पपत् आदम की दे ह के स्मने पपवतत् से सेव् पकय् करे , और समय-समय पर उस वेदी के प्स भी ज्य् करे पजसे शेत ने बनव्य् थ्। और उसने उसे आत् दी पक जीवन भर अपने लोगों की सेव् धम्, न्य और पपवतत् से पकय् करे । 13 तब शेत के अंग ढीले प् गल, उसके ह्थ-प्ं व ढीले प् गल, उसक् मुंह गूंग् हो गय् और बोल नही ं सकत् थ्; और वह प्ण छो् बैठ्, और नौ सौ ब्रहवे वर् के दू सरे पदन, अथ्​् तव अबीब महीने के सत्ुसवे पदन को, हनोक बीस वर् क् होकर मर गय्।

14 तब उनोंने शेत की लोथ को स्वध्नी से लपें्, और उस पर सुग्द् भरकर उसे हम्रे पपत् आदम की लोथ के द्पहनी ओर, भण्र की गुफ् मे रख पदय्, और उसके पलये च्लीस पदन तक पवल्प पकय्, और जैसे उनोंने हम्रे पपत् आदम के पलये पकय् थ्, वैसे ही उसके पलये भी भें चढ्ु। 15 शेत की मृतु के ब्द लनोश अपनी पज् क् पध्न हआ, और अपने पपत् की आत् के अनुस्र उसे धम् और न्य से चर्त् थ्। 16 परनु जब लनोश आठ सौ बीस वर् क् हआ, तब कैन के बहत से वंश उत् हल; और वे ब्र ब्र ब्ह करते और श्रीररक क्मों मे लीन रहते थे, और अन मे पह्​् के नीचे क् दे श उनसे भर गय्। अध ्य 13 1 उन पदनों मे कैन के वंश क् लेमेक न्म लक अ्​् रहत् थ्, और उसके अतून न्म लक पुत थ्, और उन दोनों के प्स बहत सी ग्य-बैल थीं। 2 परनु लेमेक की आदत थी पक वह उने लक जव्न चरव्हे के प्स चर्ने के पलल भेजत् थ्, जो उनकी दे खभ्ल करत् थ्; और श्म को घर आकर अपने द्द्, अपने पपत् अतून और अपनी म्ँ हजीन् के स्मने रोत् थ्, और उनसे कहत् थ्, "मै उन मवेपशयों को अकेले नही ं चर् सकत्, कही ं ऐस् न हो पक कोु उनमे से कुछ मुझसे छीन ले, य् उनके क्रण मुझे म्र ड्ले।" कोंपक कैन की संत्नों मे बहत डकैती, हत् और प्प थ्। 3 तब लेमेक को उस पर दय् आु, और उसने कह्, "सचमुच, वह अकेल् ही इस स्न के लोगों से पर्पजत हो ज्लग्।" 4 तब लेमेक उठ्, और अपन् धनुर पलय् जो उसने बचपन से, अथ्​् तव अ्​् होने से पहले रख् थ्, और ब्े -ब्े तीर, पचकने पतर, और अपन् लक गोफन पलय्, और जव्न चरव्हे के स्थ खेत मे गय्, और मवेपशयों के पीछे ख्​् हो गय्; और जव्न चरव्ह् मवेपशयों की रखव्ली करत् रह्। लेमेक कु पदनों तक ऐस् ही करत् रह्। 5 जब से परमेशर ने कैन को त्ग पदय् थ् और उसे श्प पदय् थ्, तब से वह न तो पकसी स्न पर पंक सकत् थ् और न उसे चैन पमलत् थ्; परनु वह लक स्न से दू सरे स्न पर भंकत् रहत् थ्। 6 घूमते-घूमते वह लेमेक की पपतयों के प्स आय् और उनसे उसके ब्रे मे पूछ्। उनोंने उससे कह्, “वह तो पशुओ ं के स्थ खेत मे है ।” 7 तब कैन उसे ढू ँ ढने गय्; और जब वह मैद्न मे आय्, तो जव्न चरव्हे ने उसक् शोर सुन्, और उसके स्मने से चरते हल पशुओ ं की आहं भी सुनी। 8 तब उसने लेमेक से पूछ्, “हे मेरे पभु , क् वह कोु जंगली पशु है य् ड्कू?” 9 लेमेक ने उससे कह्, “मुझे समझ् दे पक जब वह ऊपर आल तो पकस ओर दे खत् है ।” 10 तब लेमेक ने धनुर चढ्कर उस पर तीर चढ्य्, और गोफन मे लक पतर लग्य्; और जब कैन खुले मैद्न से पनकल्, तब चरव्हे ने लेमेक से कह्, तीर चल्, वह आ रह् है । 11 तब लेमेक ने तीर कैन पर चल्य्, और ऐस् लग् पक वह उसके पंजर मे ज् लग्। और लेमेक ने गोफन मे से लक पतर


आदम और हव् की दू सरी पुसक

उसके मुंह पर म्र्, और वह उसके मुंह पर लग्, और उसकी दोनों आं खे फूं गुं; तब कैन तुरन पगरकर मर गय्। 12 तब लेमेक और जव्न चरव्हे ने उसके प्स आकर उसे भूपम पर प्​् प्य्। तब जव्न चरव्हे ने उससे कह्, "हे मेरे पभु, वह तो हम्र् द्द् कैन है , पजसे तू ने म्र ड्ल् है ।" 13 तब लेमेक को बहत दु ःख हआ, और अपने दु ःख की क्व्हं से उसने त्ली बज्ु, और अपनी हथेली से उस युवक के पसर पर म्र्, और वह मर् हआ स् पगर प्​्; परनु लेमेक ने सोच् पक यह छल है ; इसपलये उसने लक पतर उठ्कर उस पर म्र्, और उसके पसर पर तब तक म्र् जब तक वह मर नही ं गय्। अध ्य 14 1 जब लनोश नौ सौ वर् क् हआ, तब शेत और केन्न के सब पुत और उसके जेठे पुत अपनी-अपनी नसयों और ब्लकों समेत उसके प्स इकटे हल, और उस से आशीव्​् द म्ं गने लगे। 2 तब उसने उनके पलये प्थ्न् की, और उने आशीव्​् द पदय्, और धम् ह्पबल के लह की शपथ पदल्कर उनसे कह्, “तुम्रे बचों मे से कोु इस पपवत पव्त से नीचे न उतरे , और न वे हत्रे कैन के बचों के स्थ कोु संगपत करे ।” 3 तब लनोश ने अपने पुत केन्न को बुल्कर उससे कह्, "हे मेरे पुत, दे ख, अपने लोगों पर ध्न दे , और उने धम् और पनद्रत् मे नसर कर; और जीवन भर हम्रे पपत् आदम के शरीर के स्मने ख्​् रहकर सेव् करत् रह।" 4 इसके ब्द लनोश नौ सौ पच्सी वर् की आयु मे पवश्म मे गय्; और केन्न ने उसे घ्यल करके उसके पपत् आदम के ब्ुं ओर भण्र की गुफ् मे रख पदय्; और उसके पूव्जों की रीपत के अनुस्र उसके पलये भें चढ्ु। अध ्य 15 1 लनोस की मृतु के ब्द, केन्न ध्पम्कत् और पनद्रत् मे अपने लोगों क् मुनखय् बन गय्, जैस् पक उसके पपत् ने उसे आत् दी थी; वह खज्ने की गुफ् के अंदर आदम के शरीर के स्मने भी सेव् करत् रह्। 2 जब वह नौ सौ दस वर् क् हआ, तो उस पर दु ःख और केश आ प्​्। और जब वह पवश्म मे पवेश करने पर थ्, तो सब पपतरों ने अपनी-अपनी नसयों और ब्लकों समेत उसके प्स आकर उने आशीव्​् द पदय्, और धम् ह्पबल के लह की शपथ पदल्कर कह्, “तुम मे से कोु इस पपवत पव्त से नीचे न उतरे , और न हत्रे कैन की सन्न से मेल-पमल्प रखे।” 3 उसके जेठे पुत महललेल को यह आत् उसके पपत् से पमली, और उसके पपत् ने उसे आशीव्​् द पदय् और मर गय्। 4 तब महललेल ने उसके शव मे सुग्द् भरकर उसे उसके पुरख्ओं के प्स भण्र की गुफ् मे रख पदय्; और उनोंने अपने पुरख्ओं की रीपत के अनुस्र उसके पलये भें चढ्ु। अध ्य 16 1 तब महललेल अपनी पज् के ऊपर ख्​् होकर, उने धम् और पनद्रत् से चर्त् रह्, और उन पर पनगर्नी रखत् रह्, पक वे कैन की सन्न से कोु सम् न रखे।

2 वह हम्रे पपत् आदम के शरीर के स्मने खज्ने की गुफ् मे प्थ्न् और सेव् करत् रह्, और परमेशर से अपने और अपने लोगों पर दय् करने की प्थ्न् करत् रह्; जब तक वह आठ सौ सतर वर् क् नही ं हो गय्, तब वह बीम्र प्​्। 3 तब उसके सभी बचे उसे दे खने और उन सब पर उसक् आशीव्​् द म्ं गने के पलल उसके प्स इकटे हल, इससे पहले पक वह इस दु पनय् को छो् दे । 4 तब महललेल उठकर अपने पबछौने पर आं सू बह्त् हआ बैठ गय्, और अपने ब्े पुत येरेद को बुल्कर अपने प्स आय्। 5 तब उसने उसके चेहरे को चूम् और उससे कह्, "हे येरेद, मेरे बेंे, मै तुझे उसकी शपथ दे त् हँ पजसने सग् और पृथी को बन्य् है , पक तू अपने लोगों की रक् कर और उने ध्पम्कत् और पनद्रत् से चर्; और उनमे से पकसी को इस पपवत पव्त से कैन के वंश के प्स न ज्ने दे , ऐस् न हो पक वह उनके स्थ ने हो ज्ल। 6 “हे मेरे पुत, सुन, उनके क्रण इस पृथी पर ब्​् पवन्श होग्; परमेशर जगत से कोपधत होग्, और उने जल से न्श करे ग्। 7 परनु मै यह भी ज्नत् हं पक तेरे वंश के लोग तेरी ब्त नही ं म्नेगे, और वे इस पह्​् से उतरकर कैन की सन्न से मेलपमल्प करे गे, और उनके स्थ न्श हो ज्लं गे। 8 “हे मेरे पुत! उनको पशक् दे और उन पर पनगर्नी रख, कही ं ऐस् न हो पक उनके क्रण तुझ पर कोु दोर लगे।” 9 महललेल ने अपने पुत येरेद से कह्, “जब मै मर ज्ऊँ, तो मेरे शरीर पर सुग्द् लग्कर उसे मेरे पूव्जों के शवों के प्स भण्र की गुफ् मे रख दे न्; पफर तू मेरे शरीर के प्स ख्​् होकर परमेशर से प्थ्न् करन्; और उनकी सेव् करन्, और जब तक तू सयं पवश्म मे पवेश न करे , तब तक उनके स्मने अपन् क्म पूर् करन्।” 10 तब महललेल ने अपने सब पुतों को आशीव्​् द पदय्; और अपने पबछौने पर लें गय्, और अपने पुरख्ओं की न्ुं पवश्म पकय्। 11 परनु जब येरेद ने दे ख् पक उसक् पपत् महललेल मर गय् है, तब वह बहत रोय्, और बहत उद्स हआ, और उसके ह्थ और प्ं व चूमे; और उसके सब पुतों ने भी ऐस् ही पकय्। 12 तब उसके पुतों ने उसके शव मे सुग्द् भरकर उसे उसके पुरख्ओं के प्स रख पदय्, और उठकर उसके पलये च्लीस पदन तक पवल्प करते रहे । अध ्य 17 1 तब येरेद ने अपने पपत् की आत् म्नी और अपनी पज् पर पसंह के सम्न श्सन पकय्। उसने उने धम् और पनद्रत् से चर्य् और पबन् उसकी सल्ह के उने कोु क्म न करने की आत् दी। कोंपक वह उनके पवरय मे डरत् थ्, पक कही ं वे कैन के वंश मे न चले ज्लँ । 2 इसपलल उसने उने ब्र-ब्र आदे श पदय्; और अपने जीवन के च्र सौ असीवे वर् के अंत तक ऐस् ही करत् रह्। 3 इन वर् के अंत मे, उसे यह संकेत पदख्ु पदय्। जब जेरेड अपने पूव्जों के शवों के स्मने लक शेर की तरह ख्​् थ्, प्थ्न् कर रह् थ् और अपने लोगों को चेत्वनी दे रह् थ्, तो शैत्न उससे ुर्​् करने लग् और उसने लक सुंदर आभ्स पैद् पकय्, कोंपक जेरेड अपने बचों को उसकी सल्ह के पबन् कुछ भी करने नही ं दे त् थ्।


आदम और हव् की दू सरी पुसक

4 तब शैत्न अपने तीस सैपनकों के स्थ उसके स्मने पकं हआ, जो सुनर पुररों के रप मे थे; शैत्न सयं उनमे सबसे ब्​् और लम् थ्, और उसकी द्ढी भी सुनर थी। 5 वे गुफ् के मुह्ने पर ख्े हो गल और गुफ् के भीतर से येरेद को पुक्रने लगे। 6 वह उनके प्स ब्हर आय् और उने सुनर, जोपत से पररपूण् और अतन सुनर पुररों के सम्न प्य्। वह उनकी सुनरत् और रप दे खकर अचम् करने लग्, और मन ही मन सोचने लग्, पक क् ये कैन की सन्न के नही ं है? 7 पफर उसने मन मे सोच्, "कोंपक कैन की सन्न इस पह्​् की ऊँच्ु तक नही ं पहँ च सकती, और न उनमे से कोु इतन् सुनर है पजतन् ये पदख्ु दे ते है ; और इन मनुरों मे मेरे कुंु म क् लक भी नही ं है ; इसपलये वे अवश परदे शी होंगे।" 8 तब येरेद और उन दोनों ने लक दू सरे को नमस्र पकय्, और उसने उन मे से जो पुरपनये थ्, उससे कह्, "हे मेरे पपत्, मुझे अपने आ्य्कम् क् अथ् समझ्इल, और मुझे बत्इल पक ये लोग आपके स्थ कौन है; कोंपक ये मुझे अजनबी मनुर लगते है ।" 9 तब वह पुरपनये रोने लग्, और सब लोग भी उसके स्थ रोने लगे; और उसने येरेद से कह्, "मै आदम हं , पजसे परमेशर ने पपहले बन्य्; और यह मेर् पुत ह्पबल है , पजसे उसके भ्ु कैन ने म्र ड्ल्, और पजसके मन मे शैत्न ने उसे म्र ड्लने की ब्त ड्ली थी। 10 “तो यह मेर् पुत शेत है , पजसे मैने यहोव् से म्ँ ग् थ्, और पजसने उसे मुझे पदय्, पक वह ह्पबल के बदले मुझे श्नन दे । 11 तो यह मेर् पुत लनोश है , जो शेत क् पुत है , और वह केन्न है, जो लनोश क् पुत है , और वह महललेल है , जो तेरे पपत् केन्न क् पुत है । 12 परनु येरेद उनके रप और उस वृद की ब्तों पर आ्य् करत् रह्। 13 तब वृद ने उससे कह्, “हे मेरे पुत, आ्य् मत कर; हम उस ब्री के उतर की ओर व्ले दे श मे रहते है, पजसे परमेशर ने सृपे से पपहले बन्य् थ्। उसने हमे उसमे रहने न पदय्, परनु उसी ब्री के भीतर बस्य्, पजसके नीचे अब तुम रहते हो। 14 परनु जब मै प्प करने लग्, तब उसने मुझे उस गुफ् से पनक्ल पदय्, और मै इस गुफ् मे रहने के पलये छो् पदय् गय्; और मुझ पर ब्े ब्े संकं आ प्े ; और जब मेरी मृतु पनकं आु, तब मैने अपने पुत शेत को आत् दी पक अपने लोगों की भल्ु करे ; और यह आत् मेरी पीढी पीढी के अन तक लक दू सरे को सौंपी ज्ल। 15 "परनु हे मेरे पुत येरेद, हम तो सुनर पदे शों मे रहते है , परनु तू यह्ं दु ःख मे रहत् है, जैस् पक तेरे पपत् महललेल ने मुझे बत्य् थ्; पक लक ब्ी ब्ढ आलगी और स्री पृथी को डु ब् दे गी। 16 इसपलल, हे मेरे पुत, तुम्रे डर के म्रे मै उठ् और अपने बचों को स्थ लेकर यह्ं आय् पक हम तुझसे और तेरे बचों से पमले; परनु मै ने तुझे इस गुफ् मे ख्​् रोत् हआ प्य्, और तेरे बचे इस पह्​् पर गम् और के मे इधर उधर पबखरे प्े है । 17 परनु हे मेरे पुत, जब हम र्स् भूलकर यह्ं तक आ गल, तो इस पह्​् के नीचे हम को और भी मनुर पमले; जो सुनर दे श मे रहते है , जो वृकों, फलों और सब पक्र की हरी भरी वनसपतयों से भर् है ; वह लक बगीचे के सम्न है; सो जब हम ने उने दे ख्,

तो समझ् पक वे तुम हो; परनु जब तक तुम्रे पपत् महललेल ने मुझे न बत्य्, पक वे ऐसे नही ं है । 18 "अब, हे मेरे पुत, मेरी सल्ह म्न, और तू और तेरे बचे उनके प्स ज्। तब तू इन सब केों से, पजनमे तू है , पवश्म प्लग्। परनु यपद तू उनके प्स न ज्ल, तो उठ, अपने बचों को लेकर हम्रे स्थ हम्रे बगीचे मे आ; तू हम्रे सुनर दे श मे रहे ग्, और इस स्रे के से, जो तू और तेरे बचे इस समय झेल रहे है , पवश्म प्लग्।" 19 लेपकन जब येरेद ने उस बुजुग् से यह ब्त सुनी, तो उसे आ्य् हआ; और वह इधर-उधर गय्, लेपकन उस वक उसे अपने बचों मे से लक भी नही ं पमल्। 20 तब उसने उस वृद से कह्, “तुम लोग आज तक कों पछपे रहे ?” 21 बुजुग् ने जव्ब पदय्, “अगर तुम्रे पपत् ने हमे न बत्य् होत्, तो हम कभी न ज्नते।” 22 तब येरेद को पवश्स हो गय् पक उसकी ब्ते सच थीं। 23 तब उस वृद ने येरेद से पूछ्, “तुम कों यह्ँ आल हो?” उसने कह्, “मै अपने बचों मे से लक को ढू ँ ढ रह् थ् पक उसे बत्ऊँ पक मै तुम्रे स्थ ज् रह् हँ और वे उन लोगों के प्स आ रहे है पजनके ब्रे मे तुमने मुझसे कह् थ्।” 24 जब बुजुग् ने येरेड क् इर्द् सुन्, तो उसने उससे कह्, "अभी उस इर्दे को छो् दो, और हम्रे स्थ चलो; तुम हम्र् दे श दे खोगे; अगर पजस दे श मे हम रहते है वह तुमे पसंद आत् है , तो हम और तुम यह्ँ लौं आलँ गे और अपने पररव्र को भी स्थ ले ज्लँ गे। लेपकन अगर हम्र् दे श तुमे पसंद नही ं आत्, तो तुम अपने घर व्पस आ ज्ओगे।" 25 और बुजुग् ने येरेद से आगह पकय् पक वह चल् ज्ल, इससे पहले पक उसक् कोु बें् आकर उसे कुछ और सल्ह दे । 26 तब येरेद गुफ् से पनकलकर उनके स्थ और उनके बीच मे चल्, और जब तक वे कैन के पुतों के पह्​् की चोंी पर न पहँ चे, तब तक उनोंने उसे श्नन दी। 27 तब उस वृद ने अपने लक स्थी से कह्, “हम गुफ् के मुह्ने पर कुछ भूल गल है , और वह वही चुन् हआ वस है पजसे हम येरेद को पहन्ने के पलल ल्ल थे।” 28 तब उसने उनमे से लक से कह्, "तुम लोग लौं ज्ओ; और जब तक तुम व्पस नही ं आते, हम यही ं तुम्री पतीक् करे गे। तब हम येरेद को वस पहन्लँ गे और वह हम्रे सम्न सुनर, रपव्न और हम्रे स्थ हम्रे दे श मे आने के योग होग्।" 29 तब वह ्न् व्पस चल् गय्। 30 परनु जब वह थो्ी ही दू र रह गय्, तो उस वृद ने उसे बुल्कर कह्, “जब तक मै ऊपर आकर तुझ से ब्ते न कर ँ , तब तक ठहर।” 31 तब वह चुपच्प ख्​् रह्, और वृद उसके प्स आकर कहने लग्, "लक ब्त हम गुफ् मे भूल गल थे, वह यह है पक जो दीपक गुफ् के अनर और उसके अनर की लोथों के ऊपर जलत् है , उसे बुझ् दे न्। पफर जली से हम्रे प्स आ।" 32 वह चल् गय्, और वह पुरपनय् अपने स्पथयों और येरेद के प्स लौं आय्। तब वे पह्​् से नीचे उतरे , और येरेद भी उनके स्थ थ्; और वे कैन के घर के प्स लक सोते के प्स ठहरे , और अपने स्थी की ब्ं जोहते रहे , पक वह येरेद के पलये वस ले आल। 33 पफर, वह गुफ् मे व्पस गय्, दीपक बुझ्य्, और उनके प्स आय्, अपने स्थ लक भूत ल्य् और उने पदख्य्। जब


आदम और हव् की दू सरी पुसक

येरेड ने उसे दे ख्, तो वह उसकी सुंदरत् और सुंदरत् पर आ्य्चपकत हआ, और मन ही मन पस् हआ पक यह सब सच है । 34 जब वे वह्ं ठहरे हल थे, तो उन मे से तीन जन कैन के घर मे ज्कर कहने लगे, “आज हम्रे और हम्रे स्पथयों के ख्ने के पलये जल के सोते के प्स कुछ भोजनवसु ले आओ।” 35 परनु जब कैन के पुतों ने उने दे ख्, तो वे उन पर अचम् करने लगे, और सोचने लगे, “ये तो दे खने मे पकतने सुनर है , और हम ने तो पहले कभी ऐसे नही ं दे खे।” तब वे उठकर उनके स्थ जल के सोते के प्स गल, पक अपने स्पथयों को दे खे। 36 उने वे इतने सुंदर लगे पक उनोंने अपने-अपने स्नों पर पचल्कर कह्, “सब लोग आकर इन सुंदर प्पणयों को दे खो।” पफर उनोंने अपने च्रों ओर सी-पुररों को इकट् कर पलय्। 37 तब उस पुरपनये ने उन से कह्, हम तुम्रे दे श मे परदे शी है ; तुम और तुम्री नसय्ं हम्रे पलये कुछ अच् ख्ने-पीने को ले आओ, पक हम तुम्रे स्थ पवश्म करे । 38 जब उन लोगों ने उस पुरपनये की ये ब्ते सुनी,ं तो कैन के पुतों मे से हर लक अपनी पती को, और हर लक अपनी बेंी को ले आय्; और इस पक्र बहत सी नसय्ँ उनके प्स आुं; और हर लक अपने य् अपनी पती के पलल येरेद से ब्ते करने लगी; सब लक ही ब्त कहने लगी।ं 39 लेपकन जब येरेद ने दे ख् पक वे क् कर रहे है , तो उसक् मन उनसे पवमुख हो गय्; उसने न तो उनक् ख्न् ख्य् और न ही उनक् प्नी पपय्। 40 जब उस ने यह दे ख्, तो वह उन से अलग हो गय्, और उस से कह्, उद्स मत हो; मै ब्​् बूढ् हं, जैस् तू मुझे करत् दे खेग्, वैस् ही तू भी करन्। 41 तब उसने अपने ह्थ फैल्कर लक सी को ले पलय्, और उसके प्ं च स्पथयों ने भी येरेद के स्मने वैस् ही पकय्, पक वह भी उनके सम्न करे । 42 लेपकन जब येरेद ने उने बदन्म करते दे ख् तो वह रो प्​् और मन ही मन कहने लग्, मेरे पूव्जों ने तो कभी ऐस् नही ं पकय्। 43 तब उस ने ह्थ फैल्कर ब्े रोते हल ब्े मन से परमेशर से पबनती की, पक मुझे उनके ह्थ से बच्। 44 जैसे ही जेरेड ने प्थ्न् करन् शुर पकय्, ललर अपने स्पथयों के स्थ भ्ग गय्; कोंपक वे प्थ्न् सल पर नही ं रह सकते थे। 45 तब येरेद ने पीछे मु्कर दे ख्, परनु उने दे ख न सक्, और अपने आप को कैन के बचों के बीच मे ख्​् प्य्। 46 तब उसने रोते हल कह्, "हे परमेशर, मुझे इस ज्पत के स्थ ने न कर, पजसके पवरय मे मेरे पूव्जों ने मुझे चेत्वनी दी थी; कोंपक अब, हे मेरे पभु परमेशर, मै सोचत् थ् पक जो मुझे पदख्ु पदल वे मेरे पूव्ज थे; परनु अब मै ने उने शैत्न प्य् है , पजनोंने मुझे इस सुंदर आभ्स के द्र् फुसल्य्, और मैने उन पर पवश्स कर पलय्। 47 परनु अब मै तुझ से पवनती करत् हँ , हे परमेशर, जैसे तू ने मुझे उन दु े्त्ओं से छु ्​्य् थ्, वैसे ही तू मुझे इस ज्पत से छु ्​्, पजनके बीच मै अब रह रह् हँ । अपने दू त को भेज, जो मुझे उनके बीच से पनक्ल ले; कोंपक मुझ मे उनके बीच से पनकलकर पनकलने की शन् नही ं है । 48 जब येरेद ने अपनी प्थ्न् सम्प की, तो परमेशर ने अपने दू त को उनके बीच भेज्, पजसने येरेद को ले ज्कर पह्​् पर

ख्​् पकय्, और उसे म्ग् पदख्य्, उसे सल्ह दी, और पफर उसके प्स से चल् गय्। अध ्य 18 1 येरेद के बचे घं​ंों उसके प्स आते थे, उसक् आशीव्​् द लेते थे और अपने हर क्म के पलल उसकी सल्ह म्ं गते थे; और जब उसके प्स कोु क्म होत् थ्, तो वे उसे पूर् कर दे ते थे। 2 परनु इस ब्र जब वे गुफ् मे गल तो उनोंने येरेद को नही ं प्य्, परनु दीपक बुझ् हआ प्य्, और पूव्जों के शव इधरउधर पबखरे प्े थे, और परमेशर की शन् से उनमे से यह आव्जे आ रही थीं, "शैत्न ने पेत के द्र् हम्रे पुत को धोख् पदय् है , और वह उसे ने करन् च्हत् है , जैसे उसने हम्रे पुत कैन को ने पकय् थ्।" 3 उनोंने यह भी कह्, “हे सग् और पृथी के परमेशर, हम्रे पुत को शैत्न के ह्थ से बच्, पजसने उसके स्मने लक ब्​् और झूठ् आभ्स पदख्य् थ्।” उनोंने परमेशर की शन् से अन ब्ते भी कही।ं 4 परनु जब येरेद के पुतों ने ये आव्जे सुनी,ं तो वे डर गल, और अपने पपत् के पलल रोने लगे; कोंपक वे नही ं ज्नते थे पक उनके स्थ क् हआ थ्। 5 और उस पदन वे सूय्​् स तक उसके पलये रोते रहे । 6 तब येरेद उद्स चेहरे के स्थ आय्, मन और शरीर से दु खी, और अपने पूव्जों के शरीर से अलग होने के क्रण दु ःखी। 7 परनु जब वह गुफ् के पनकं पहँ च्, तो उसके बचों ने उसे दे ख पलय्, और जली से गुफ् की ओर गल, और उसके गले से पलपंकर रोते हल कहने लगे, “हे पपत्, आप कह्ँ थे और हमे कों छो्कर चले गल, जैस् पक आप करते नही ं थे?” और पफर कहने लगे, “हे पपत्, जब आप अदश हल, तो हम्रे पूव्जों के शवों पर क् दीपक बुझ गय्, शव इधर-उधर पबखर गल, और उनमे से आव्जे आने लगी।ं ” 8 जब येरेद ने यह सुन् तो वह दु ःखी हआ और गुफ् मे गय्; और वह्ँ उसने ल्शे पबखरी हु, दीपक बुझ् हआ प्य्, और पपत् सयं शैत्न के ह्थ से उसके उद्र के पलल प्थ्न् कर रहे थे। 9 तब येरेद उन शवों पर पगर प्​् और उने गले लग्कर बोल्, "हे मेरे पूव्जों, आपकी मधसत् से परमेशर मुझे शैत्न के ह्थ से बच्ल! और मै आपसे पवनती करत् हँ पक परमेशर मुझे सुरपकत रखे और मेरी मृतु के पदन तक मुझे उससे बच्ल रखे।" 10 तब हम्रे पपत् लडम की आव्ज को छो्कर सभी आव्जे बंद हो गुं, पजनोंने परमेशर की शन् से येरेड से ब्त की, जैसे कोु अपने स्थी से ब्त करत् है , और कह्, "हे येरेड, मेरे बेंे, शैत्न के ह्थों से तुमे बच्ने के पलल परमेशर को भें चढ्ओ; और जब तुम उन भेंों को ल्ओ, तो ऐस् हो पक तुम उने उसी वेदी पर चढ्ओ पजस पर मैने भें चढ्ु थी। तब भी, शैत्न से स्वध्न रहो; कोंपक उसने मुझे ने करने की इच् से कु ब्र अपनी पेतों के स्थ मुझे धोख् पदय्, लेपकन परमेशर ने मुझे उसके ह्थ से बच्य्। 11 अपनी पज् के लोगों को आत् दे पक वे उसके पवरद स्वध्न रहे , और परमेशर को भें चढ्न् न छो्े । 12 तब आदम की आव्ज भी बंद हो गु; और येरेद और उसके बचों को इस पर अचरज हआ। तब उनोंने शवों को वैसे ही रख पदय् जैसे वे पहले थे; और येरेद और उसके बचे पूरी र्त, पदन पनकलने तक, प्थ्न् करते रहे ।


आदम और हव् की दू सरी पुसक

13 तब येरेद ने भें चढ्कर वेदी पर चढ्य्, जैस् आदम ने उसे आत् दी थी। पफर जब वह वेदी के प्स गय्, तो उसने परमेशर से दय् और अपने प्प की कम् के पलल प्थ्न् की, जो दीपक के बुझ ज्ने के क्रण हआ थ्। 14 तब परमेशर ने वेदी पर येरेद को दश्न पदय् और उसे और उसके बचों को आशीव्​् द पदय्, और उनकी भें सीक्र की; और येरेद को वेदी से पपवत अप् लेने और उसके स्थ आदम के शरीर पर पक्श ड्लने व्ले दीपक को जल्ने की आत् दी। अध ्य 19 1 तब परमेशर ने उस पर अपनी पपतत् पफर पकं की जो उसने आदम से की थी; और उसे 5500 वर् समझ्ल, और पृथी पर अपने आने क् भेद भी बत्य्। 2 तब परमेशर ने येरेद से कह्, "वह आग जो तूने दीपक जल्ने के पलये वेदी से ली है , वह शवों को पक्श दे ने के पलये तेरे प्स रहे ; और जब तक आदम क् शव उसमे से न पनकले, तब तक वह गुफ् से ब्हर न पनकले। 3 परनु, हे जेरेड, आग क् ध्न रखन्, पक वह दीपक मे जलती रहे ; और जब तक तुमे दश्न के द्र् आदे श न पमले, तब तक गुफ् से ब्हर मत ज्न्, न ही पकसी पेत के द्र्। 4 "तब तू अपनी पज् के लोगों को पफर आत् दे पक वे कैन की सन्न से मेल-पमल्प न रखे, और न उनकी सी च्ल सीखे; कोंपक मै वह ुशर हँ जो बैर और कुपंल क्मों से पीपत नही ं रखत्।" 5 परमेशर ने येरेद को और भी बहत सी आत्लँ दी,ं और उसे आशीर दी, और पफर अपन् वचन उससे व्पस ले पलय्। 6 तब येरेद अपने बचों के स्थ प्स आय्, आग ली, और गुफ् मे उतरकर आदम के शरीर के आगे दीपक जल्य्; और उसने अपनी पज् को वे आत्लँ दी ं जो परमेशर ने उससे कही थीं। 7 यह पचन येरेद के स्थ उसके च्र सौ पच्सवे वर् के अंत मे घपंत हआ; और अन बहत से आ्य्कम् की तरह, हम उनक् वण्न नही ं करते। परनु संपकपत् के क्रण, और अपनी कथ् को लम् न करने के पलल, हम केवल यही लक वण्न करते है । 8 और येरेद अपने बचों को असी वर् तक पशक् दे त् रह्; परनु उसके ब्द वे उसकी आत्ओं क् उलंघन करने लगे, और उसकी सल्ह के पबन् बहत से क्म करने लगे। वे लकलक करके पपवत पव्त से नीचे उतरने लगे, और कैन की सन्न के स्थ पमलकर गंदी संगपत करने लगे। 9 अब हम तुमे वह क्रण बत्लँ गे पजसके पलल येरेद के बचे पपवत पव्त से नीचे गल थे। अध ्य 20 1 जब कैन उस अ्क्रमय दे श मे चल् गय्, और उसके ल्के-ब्ले बहत हो गल, तब पजन मे से लक क् न्म गनून थ्, वह अंधे लेमेक क् पुत थ्, उसी ने कैन को म्र ड्ल्। 2 परनु इस जन के पवरय मे तो शैत्न उसके ल्कपन ही से उसमे सम् गय्, और उसने न्न् पक्र के तुरपहय्ं, नरपसंगे, स्रं गी, झ्ं झ, स्रं गी, वीण्, स्रं गी और ब्ं सुली बन्ुं, और वह हर समय और हर घ्ी उने बज्त् रह्।

3 और जब वह उन पर बज्त् थ्, तो शैत्न उनमे सम् ज्त् थ्, और उनके बीच से सुनर और मधुर धपन पनकलती थी, जो हदय को मोह लेती थी। 4 तब उसने उन पर बज्ने के पलये दल-दल इकटे पकल; और जब वे बज्ने लगे, तो कैन की सन्न पस् हु; और वे आपस मे प्प करके आग की न्ुं जलने लगे; और शैत्न ने लक दू सरे के मन मे आग लग्कर उनके मन मे क्मव्सन् बढ् दी। 5 शैत्न ने जनून को भी मपदर् बन्ने की पशक् दी थी; और ये जनून शर्बख्नों मे झुण के झुण इकट् करते थे, और उनके ह्थों मे हर पक्र के फल और फूल ल्ते थे, और वे लक स्थ पीते थे। 6 इस पक्र उस जनून ने प्प को बहत बढ् पदय्; और वह अपभम्न से क्म करने लग्, और कैन की सन्न को सब पक्र के घोर दु े क्म करने की पशक् दी, पजसे वे ज्नते भी नही ं थे; और उसने उने बहत से ऐसे क्म करने को कह्, पजने वे पहले नही ं ज्नते थे। 7 जब शैत्न ने दे ख् पक वे गनून की ब्त म्न लेते है , और उसकी हर ब्त म्नते है, तो वह बहत आनननत हआ, और गनून की समझ को बढ् पदय्, यह्ं तक पक उसने लोह् लेकर उससे युद के हपथय्र बन् पलल। 8 जब वे नशे मे थे, तो उनमे घृण् और हत् बढ गु; लक आदमी दू सरे के पवरद पहं स् करने लग्, त्पक उसे बुरी पशक् दे सके, और उसके बचों को उसके स्मने ले ज्कर अशुद कर दे । 9 और जब लोगों ने दे ख् पक वे ह्र गल है, और दू सरों को भी दे ख् जो पर्पजत नही ं हल, तो जो ह्र गल थे वे गनून के प्स आल, उसके प्स शरण ली, और उसने उने अपन् स्थी बन् पलय्। 10 और प्प उनमे बहत बढ गय्, यह्ं तक पक मनुर अपनी बपहन, य् बेंी, य् म्त्, व् अनों से भी पवव्ह करने लग्; यह्ं तक पक उन मे पफर कोु भेद न रह्, और वे अधम् क् होत् है यह भी न ज्नते थे; पर दु ेत् करते गल, और पृथी प्प से अशुद हो गु, और उनोंने परमेशर जो न्यी है , पजस ने उने उत् पकय् थ्, उसक् कोध भ्क्य्। 11 परनु जेनून ने पपवत पव्त के नीचे दल दल करके इकटे पकल, जो नरपसंगे और सब अन ब्जे बज् रहे थे, पजनक् वण्न हम पहले कर चुके है ; और उनोंने ऐस् इसपलये पकय् पक शेत के पुत जो पपवत पव्त पर थे, वे उसे सुन ले। 12 परनु जब शेत के लोगों ने यह शब सुन्, तो वे अचम् करने लगे, और झुण बन्कर पह्​् की चोंी पर ख्े होकर नीचे व्लों को दे खने लगे; और वे लक वर् तक ऐस् ही करते रहे । 13 उस वर् के अन मे जब गनून ने दे ख् पक वे धीरे धीरे उसकी ओर नखंचे चले आ रहे है , तब शैत्न ने उसमे पवेश करके उसे न्न् पक्र के वसों के पलये रं ग्ु की वसुलं बन्न् पसख्य्, और ल्ल, बैजनी और और क्-क् रं गन् पसख्य्। 14 और कैन के पुत जो यह सब करते थे, और सुनरत् और भ्कीले वसों से चमकते थे, वे सब पक्र के घृपणत क्म करते हल, सीग ं ों, भ्कीले वसों और घु्दौ् के स्थ, वैभव से भरे हल पव्त के नीचे इकटे हल। 15 इस बीच शेत की सन्न जो पपवत पव्त पर थी, सग्दूतों की सेन् के स्न पर जो पगर प्ी थी, प्थ्न् और परमेशर की सुपत कर रही थी; इसी क्रण परमेशर ने उने सग्दूत कह् थ्, कोंपक वह उनसे बहत आनननत थ्।


आदम और हव् की दू सरी पुसक

16 परनु इसके ब्द, उनोंने न तो उसकी आत् म्नी, न ही उस वचन को जो उसने उनके पूव्जों से पकय् थ्; बन् उनोंने उपव्स और प्थ्न् करन् छो् पदय्, और अपने पपत् येरेद की सल्ह को भी छो् पदय्। और वे सुबह से श्म तक कैन के बचों को, उनके क्मों को, उनके सुंदर वसों और आभूरणों को दे खने के पलल पह्​् की चोंी पर इकट् होते रहे । 17 तब कैन के वंशजों ने नीचे से ऊपर की ओर दे ख्, और शेत के वंशजों को पह्​् की चोंी पर दल बन्कर ख्े दे ख्; और उने नीचे आने के पलल पुक्र्। 18 परनु शेत के पुतों ने ऊपर से उनसे कह्, “हम म्ग् नही ं ज्नते।” तब लेमेक के पुत गनून ने उने यह कहते सुन् पक हम म्ग् नही ं ज्नते, और सोचने लग् पक मै उने कैसे नीचे उत्र ँ । 19 तब शैत्न ने र्त को उसको दश्न दे कर कह्, “पजस पह्​् पर वे रहते है , वह्ँ से उनके उतरने क् कोु म्ग् नही;ं परनु जब वे कल आलँ , तो उनसे कह दे न्, ‘पह्​् की पप्म पदश् मे आओ; वह्ँ तुमे लक जलध्र् क् म्ग् पमलेग्, जो दो पह्प्यों के बीच से पह्​् के नीचे तक बहती है ; उसी म्ग् से हम्रे प्स आओ।’” 20 जब पदन हआ, तो गनून ने अपनी रीपत के अनुस्र पह्​् के नीचे नरपसंगे फूँके और नग्​्े बज्ल, और शेत के पुतों ने यह सुन्, और अपनी रीपत के अनुस्र चले आल। 21 तब गनून ने नीचे से उनसे कह्, “पह्​् की पप्मी ओर ज्ओ, वह्ँ तुमे नीचे उतरने क् र्स् पमलेग्।” 22 जब शेत के पुतों ने ये ब्ते सुनी,ं तो वे गुफ् मे येरेद के प्स लौं गल, और जो कुछ उनोंने सुन् थ्, उसे बत्य्। 23 जब येरेद ने यह सुन् तो वह दु ःखी हआ; कोंपक वह ज्नत् थ् पक वे उसकी सल्ह क् उलंघन करे गे। 24 इसके ब्द शेतवंपशयों मे से लक सौ पुरर इकटे हल, और आपस मे कहने लगे, आओ, हम कैनवंपशयों के प्स चले, और दे खे पक वे क् करते है , और उनके स्थ आनन मन्लँ । 25 लेपकन जब येरेद ने उन सौ आदपमयों की यह ब्त सुनी, तो उसक् मन बहत दु खी हआ और वह बहत दु ःखी हआ। तब वह ब्े जोश से उठ् और उनके बीच ख्​् होकर, धम् ह्पबल के लह की शपथ ख्कर उने यह शपथ पदल्ु, "तुममे से कोु भी इस पपवत और पनम्ल पव्त से नीचे न उतरे , पजस पर हम्रे पूव्जों ने इसे बसने क् आदे श पदय् है ।" 26 परनु जब येरेद ने दे ख् पक उनोंने उसकी ब्ते गहण नही ं कीं, तो उसने उनसे कह्, "हे मेरे अचे और पनद्र और पपवत बचों, ज्न लो पक जब तुम लक ब्र इस पपवत पव्त से नीचे उतर ज्ओगे, तो परमेशर तुमे पफर कभी इस पर लौंने की अनुमपत नही ं दे ग्।" 27 उसने पफर उनको शपथ नखल्कर कह्, “मै हम्रे पपत् आदम की मृतु की, और ह्पबल, शेत, इनोश, केन्न, और महललेल के लह की शपथ ख्त् हँ पक मेरी सुनो, और इस पपवत पह्​् से नीचे न उतरो; कोंपक पजस पदन तुम इसे छो्ोगे उसी पदन तुम जीवन और दय् से वंपचत हो ज्ओगे , और तुम अब परमेशर की सन्न नही ं, परनु शैत्न की सन्न कहल्ओगे।” 28 परनु उनोंने उसकी ब्ते न म्नी।ं 29 उस समय हनोक ब्​् हो चुक् थ्, और परमेशर के पपत अपनी जलन मे उठकर कहने लग्, हे शेत के बेंो, क् छोंे , क् ब्े , मेरी सुनो; जब तुम हम्रे पूव्जों की आत् क् उलंघन करके इस पपवत पव्त से नीचे उतरोगे, तो यह्ं पफर कभी न आने प्ओगे।

30 परनु वे हनोक के पवरद उठे , और उसकी ब्ते न म्नी,ं परनु पपवत पव्त से नीचे उतर गल। 31 और जब उनोंने कैन की बेपंयों को दे ख्, उनके सुनर रप को, और उनके रं गे हल ह्थ-प्ँ वों को, और उनके चेहरों पर गहने गुदव्ल हल, तो उनके अनर प्प की आग भ्क उठी। 32 तब शैत्न ने शेत के पुतों के स्मने उने अपत सुनर बन् पदय्, और कैन की बेपंयों की दपे मे शेत के पुतों को अपत सुनर बन् पदय्; यह्ं तक पक कैन की बेपंय्ं शेत के पुतों पर पहं सक पशुओ ं के सम्न व्सन् करने लगी,ं और शेत के पुत भी कैन की बेपंयों पर यह्ं तक व्सन् करने लगे, पक उनके स्थ घृपणत क्म करने लगे। 33 परनु जब वे इस अशुदत् मे प् गल, तो पजस म्ग् से आल थे उसी म्ग् से लौंकर पपवत पव्त पर चढने क् पयत पकय्, परनु वे चढ न सके, कोंपक उस पपवत पव्त के पतर उनके स्मने आग की न्ुं चमक रहे थे, पजस क्रण वे पफर ऊपर नही ं चढ सके। 34 और परमेशर उनसे कोपधत हआ, और उनसे प्​्त्प पकय्, कोंपक वे मपहम् से नीचे आ गल थे, और इस पक्र उनोंने अपनी पपवतत् य् पनद्रत् खो दी थी य् त्ग दी थी, और प्प की अशुदत् मे पगर गल थे। 35 तब परमेशर ने येरेद के प्स अपन् वचन भेज्, और कह्, "तेरे ये बचे , पजने तूने 'मेरे बचे' कह् थ्, दे ख, उनोंने मेरी आत् क् उलंघन पकय् है और वे पवन्श और प्प के ध्म मे चले गल है । जो बचे है उनके प्स लक दू त भेज, पक वे नीचे न ज्लं और ने न हो ज्लं ।" 36 तब येरेद पभु के स्मने रोय् और उससे दय् और कम् म्ँ गी। लेपकन वह च्हत् थ् पक उसकी आत् उसके शरीर से पनकल ज्ल, बज्य इसके पक वह परमेशर से ये शब सुने पक उसके बचे पपवत पव्त से नीचे उतर रहे है । 37 परनु उसने परमेशर की आत् म्नकर उने उपदे श पदय्, पक उस पपवत पव्त से नीचे न उतरो, और कैन की सन्न से मेल-पमल्प न रखो। 38 परनु उनोंने उसके वचन पर ध्न नही ं पदय्, और उसकी समपत को नही ं म्न्। अध ्य 21 1 इसके ब्द लक और दल इकट् हआ, और वे अपने भ्इयों की दे खभ्ल करने चले; परनु वे भी अपने भ्इयों की तरह न्श हो गल। और ऐस् ही होत् गय्, और दल पर दल होत् गय्, यह्ं तक पक उनमे से थो्े ही लोग बचे। 2 तब येरेद शोक से ्​्कुल हो गय्, और उसकी बीम्री इतनी बढ गु पक उसकी मृतु क् पदन पनकं आ गय्। 3 तब उसने अपने जेठे पुत क् न्म हनोक, और हनोक के पुत मतूशेलह, और मतूशेलह के पुत लेमेक, और लेमेक के पुत नूह क् न्म रख्। 4 जब वे उसके प्स आल, तब उसने उनके पलये प्थ्न् की और उने आशीर दी, और उनसे कह्, तुम धम् और पनद्र पुतो हो; इस पपवत पव्त से नीचे न उतरो; कोंपक दे खो, तुम्रे बेंे और तुम्रे पोतों के बचे भी अपनी घृपणत क्म-व्सन् और परमेशर की आत् के उलंघन के क्रण इस पपवत पव्त से नीचे उतर आल है , और उससे दू र हो गल है ।


आदम और हव् की दू सरी पुसक

5 परनु मै परमेशर की स्मथ् से ज्नत् हं पक वह तुमे इस पपवत पव्त पर नही ं छो्े ग्, कोंपक तुम्री सन्न ने उसकी और अपने पूव्जों की आत् क् उलंघन पकय् है , जो हमे उनसे पमली थी। 6 परनु हे मेरे पुतो, परमेशर तुम को लक अजनबी दे श मे ले ज्लग्, और तुम पफर कभी इस बगीचे और इस पपवत पव्त को अपनी आं खों से दे खने के पलल व्पस नही ं आओगे। 7 “इसपलये, हे मेरे बेंो, अपने अपने मन की सोचो, और परमेशर की आत् जो तुम्रे प्स है उसे म्नो। और जब तुम इस पपवत पव्त से पकसी अनज्न दे श मे ज्ओ, तो हम्रे पपत् आदम की लोथ, और उसके स्थ ये तीन अनमोल वसुलं, अथ्​् त सोन्, लोब्न, और ग्रस, ले ज्ओ; और इने उस स्न पर रखो जह्ं हम्रे पपत् आदम की लोथ रहे गी। 8 "और हे मेरे बेंो, तुममे से जो बचेग्, उसके प्स परमेशर क् वचन आलग्, और जब वह इस दे श से ज्लग्, तो हम्रे पपत् आदम की दे ह को अपने स्थ ले ज्लग्, और उसे पृथी के मध मे उस स्न पर रख दे ग्, जह्ं उद्र क् क्य् होग्।" 9 तब नूह ने उससे पूछ्, “हममे से कौन बचेग्?” 10 और येरेद ने उतर पदय्, "तू ही वह है जो बच् रहे ग्। और तू हम्रे पपत् आदम के शरीर को गुफ् से ले ज्लग्, और जब जलपलय आलग्, तब उसे अपने स्थ जह्ज मे रख लेग्। 11 और तेर् पुत शेम, जो तेरे पनज भ्ग से उत् होग्, वही हम्रे पपत् आदम की लोथ को पृथी के मध मे उस स्न पर रखेग् जह्ं से उद्र आलग्। 12 तब येरेद ने अपने पुत हनोक की ओर मु्कर उससे कह्, "हे मेरे पुत, तू इसी गुफ् मे रह और जीवन भर हम्रे पपत् आदम के शरीर की सेव् ंहल करत् रह; और अपने लोगों को धम् और पनद्रत् से चर्।" 13 और येरेद ने और कुछ नही ं कह्। उसके ह्थ ढीले हो गल, उसकी आँ खे बंद हो गुं, और वह अपने पूव्जों की तरह पवश्म मे चल् गय्। उसकी मृतु नूह के तीन सौ स्ठवे वर् मे, और उसके अपने जीवन के नौ सौ असीवे वर् मे , तखसस के ब्रहवे पदन, शुकव्र को हु। 14 परनु जब येरेद मर गय्, तो शेत के बचों के पलल जो उसके पदनों मे म्रे गल थे, ब्े शोक के क्रण उसके चेहरे पर आँ सू बहने लगे। 15 तब हनोक, मतूशेलह, लेमेक और नूह, ये च्रों उसके पलये रोल, और उसके शव मे सुग्द् भरकर उसे भण्र की गुफ् मे रख पदय्, और उठकर उसके पलये च्लीस पदन तक पवल्प करते रहे । 16 जब शोक के ये पदन पूरे हो गल, तो हनोक, मतूशेलह, लेमेक और नूह मन मे उद्स रहे , कोंपक उनक् पपत् उनसे दू र चल् गय् थ्, और उनोंने उसे पफर कभी न दे ख्। अध ्य 22 1 परनु हनोक ने अपने पपत् येरेद की आत् म्नी, और गुफ् मे सेव् करत् रह्। 2 यह वही हनोक है पजसके पवरय मे बहत से आ्य्कम् हल, और पजसने लक पपसद पुसक भी पलखी; परनु उन आ्य्कम् क् वण्न इस स्न मे नही ं पकय् ज् सकत्। 3 इसके ब्द शेत के वंश के लोग, अथ्​् तव उनके पुत और नसय्ँ , भंककर पगर प्े । और जब हनोक, मतूशेलह, लेमेक और नूह

ने उने दे ख्, तो उनके मन अपवश्स और संदेह मे प् गल; और वे रोते हल परमेशर से दय् की पबनती करने लगे, पक वह हम्री रक् करे , और हमे उस दु े पीढी से पनक्ल ले। 4 हनोक तीन सौ पच्सी वर् तक पभु के समुख अपनी सेव् करत् रह्, और उस समय के अन मे परमेशर के अनुगह से उसे म्लूम हआ, पक परमेशर उसे पृथी से उठ् लेन् च्हत् है । 5 पफर उसने अपने बेंे से कह्, “हे मेरे बेंे, मै ज्नत् हँ पक परमेशर पृथी पर जल पलय ल्न् च्हत् है , और हम्री सृपे को ने करन् च्हत् है । 6 और तुम इस पह्​् पर इस लोगों के अननम श्सक हो; कोंपक मै ज्नत् हँ पक इस पपवत पह्​् पर तुम मे से कोु भी सन्न उत् करने व्ल् न रहे ग्; और न तुम मे से कोु अपने लोगों पर पभुत् करे ग्; और न इस पह्​् पर तुम्र् कोु ब्​् समुद्य बचेग्। 7 पफर हनोक ने उनसे कह्, “अपने प्णों पर ज्गते रहो, और परमेशर के भय और उसकी सेव् मे दढ बने रहो, और सचे पवश्स से उसकी आर्धन् करो, और धम्, और पनद्रत्, और न्य, और मन पफर्व और पपवतत् से उसकी सेव् करो।” 8 जब हनोक ने उनको आत्लं दे दी,ं तो परमेशर ने उसे उस पव्त से जीवन के दे श मे पहं च् पदय्, जो धपम्यों और चुने हओं के पनव्सस्न, आनन के सग्लोक मे, और उस जोपत मे जो सग् तक पहं चती है ; वह जोपत जो इस संस्र की जोपत से परे है ; कोंपक परमेशर की जोपत ही है, जो स्रे संस्र मे ्​्प है , परनु पजसे कोु स्न नही ं सम् सकत्। 9 इस पक्र, कोंपक हनोक परमेशर के पक्श मे थ्, वह मृतु की पहँ च से ब्हर थ्; जब तक परमेशर ने उसे मरने नही ं पदय्। 10 हम्रे पूव्जों और उनकी सन्न मे से मतूशेलह, लेमेक और नूह को छो्, हम्रे पूव्जों और उनकी सन्न मे से कोु भी उस पपवत पव्त पर नही ं बच्। कोंपक शेर सब पव्त से उतरकर कैन की सन्न के स्थ प्प मे प् गल। इसपलल उने उस पव्त पर ज्ने से मन् पकय् गय्, और उन तीन पुररों को छो् कोु भी उस पर नही ं रह्।


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