रोमन मन ल इग्नाटि के पत अध्ट 1 1 इग्नाटि, जे ल् निटोफोरि तको केहे ज्िे, ओ चच् म जे न परम उच नपत् के पत्प ले दट् प्टे ह्वट, अउ उं कर एकम्त पुत टीशु मिीह; नपट, अउ उं कर इच् के म्धम ले प्ु ब जे न ि्ो चीज के इच् करिे जे न हमर ईशर टीशु मिीह के पेम के मु त्न्क ह्वट जे न रोम के के त के जगह म भी अधकत् करत ह्वट; अउ जे ल् मै ईि् मिीह के न्म म उं कर ि्ो आज् के दे ह अउ आत् दु नों म एकजु ा होए के रप म नमन करत ह्वं, अउ ईशर के अनुगह ले भरे ररनहि; ईि् मिीह हमर ईशर म ि्ो आनंद। 2 क््र के आखरी म भगव्न ले अपन प्ि्न् के म्धम ले तुँ हर चेहर् दे खे ्र नमले ह्वट, जे ल् मै ्हत च्हत ररनहि; ईि् मिीह म ्ं धे होए के िेती मोल् आश् ह्वट के तुँ हर िल्म करे के ख्नतर लं्् िमट लगही, अगर टे ईशर के इच् होही के वो मोल् अंत तक प्टे के ख्नतर दे जे कर मै ल्लि् करत ह्वं। 3 क््र के शुरआत िुघ्र ढं ग ले ननपा्र् होगे ह्वट, टनद मोर ख्नतर जे न ननटु क करे गे ह्वट ओल् प्र करे के ख्नतर न्न् ््ध् के, अनुगह होही। 4 फेर मोल् तुँ हर पेम के डर ह्वट, नइ होवट के टे कर ले मोल् चोा लग ज्ए। क््र नक तुँ हर मन जउन मन करही, ओल् करन् आि्न हे ; फेर मोर ्र भगव्न ल प्न् कनिन होही, कहं मोल् छोडही। 5 फेर मै टे नइ करहं नक तु म मनखे मन ल पिर कर, ्ल् ईशर जे ल् तू भी कृप् कर। क््र नक न त एखर ््द भगव्न के तीर ज्ट के अइिन मउक् नमलही; न ही तको अ् चुप रइही, कभू ्निढट् ्ु त् के हकद्र होही। क््र नक मोर कोनत ले तू चुप रइही त मोल् भगव्न के भ्गीद्र ्न्ट ज्ही। 6 फेर टनद तू मोर िरीर ले पेम करही, त मोर फेर ले अपन प्ठ्म चलही। जे कर िेती तु म मोर ले ्डक् दट् नइ कर िकत ह्वटं , टे कर ले ज्द् मोल् परमे शर के ्नल दे ज्टे के कष दे िकत ह्वटं , अ् ज् वेदी पनहली ले तइट्र होगे ह्वट: 7 नक ज् तू पेम म एक िं्र् इकट् होही, त् मिीह टीशु के म्धम ले नपत् ल धनव्द दे िकट; नक ओमन िीररट् के एक न्शप ल तुँ हर प्ि ल्टे के वचन दे ह्वट, जे ल् पूव् ले पन्म म ्ु ल्टे ज्त ह्वट। 8 क््र नक िंि्र ले अस होन् मोर ्र भल् हे , परमे शर को; जे खर ले ओखर तीर फेर उि िकट। ९ ए मन ह कभू कोनों ले ईर्् नइ करे हे ; ए मन ह दू िर ल पढ्ट हे । अइिन म कहं नक अ् ओ क्म ल आप खुदे करट, जउन ल अपन ननद् श म दू िर मन ल ननध्् ररत करे हे । 10 निररफ मोर ख्नतर प्ि्न् करव, नक परमे शर मोल् भीतरी अउ ््हरी दू नों त्कत दे , नक मै न निररफ कहं, ्ल् करही; न ही निररफ ईि्ई कहे ज्ही, ्ल् एक प्ट ज्ही। 11 क््र नक टनद मोल् ईि्ई प्ट ज्ही, त फेर मै प्त रप ले एक कहे ज् िकत हे । अउ वफ्द्र िमझे ज्ही, ज् अ् मै दु ननट् के आगू पका नइ होही। 12 कुछु अच् नइ हे , उहे दे खे ज्त हे । 13 क््र नक हमर परमे शर ईि् मिीह ्लो अ् ््प म होट के िेती अतक् ज्द् नदखत हे । 14 एक ईि्ई ह मत के क्म नइ होही; फेर मन के मह्नत् के, ख्िकर ज् ओल् दु ननट् नफरत करत ह्वट। अध्ट 2 1 मै नगरज््र मन ल नलखत हवं , अउ ओ ि्ो ल ्त्वत हवं, नक ज् तक मोर ््ध् नइ आवट, त् तक परमे शर ्र मरे ्र तै ट्र हवट। 2 मै तुँ हर ले नवनती करत हवं नक तू मोर पनत ्े मौिम िद्वन् नइ दे ख्व। मोल् जं गली ज्नवर के भोजन होए के कष दे वट; जे कर ले मै ईशर के प्लर कर्ो। 3 क््र नक मै भगव्न के गे हं हवं; अउ मै जं गली ज्नवर मनके द्ं त ले जमीन होगे , त्नक मिीह के शुब रोाी नमल िकट। 4 ्ल् ज्नवर मन ल पोर्नहत करट, त्नक वो मोर कब ्न िकट; अउ मोर िरीर के कुछु नइ छोड िकट; नक मरे होए म भू लभु लैट् कोनो ल परे ि्नी नइ होही। 5 त् मै िही म्टने म टीशु मिीह के चेल् ्नूंग्, ज् दु ननट् मोर शरीर के तको नइ दे खही, अइिन म मिीह ले मोर ख्नतर प्ि्न् कर, त्नक टे उपकरण ले मोल् परमे शर के ्नलद्न ्न्टे ज् िके। 6 पतरि अउ पौलुि के रप म मै तुँ हर आज् नइ दे वत ह्वं। ओमन पेनेत ररनहि, मै ननंद् मनखे ररनहि; ओमन आज्द ररनहि, फेर मै आज तक िेवक तको हवं : 7 फेर टनद मै कष भोगूं ग्, त् मै ईि् मिीह के आज्द ्न्ो, अउ मु क होके उिही। अऊ अ् ्ं धन म होए के िेती िीखत ह्वं, कोनो ््त के इच् नइ करट। 8 िीररट् ले रोम तक तको मै िमु द अउ जमीन दू नों के रद् ले ज्नवर मन ले लडत ह्वं; र्त अउ नदन दू नों : दि ते दुआ ले ्ं धे होन्, म्ने िैननक मनके अइिन ्ै ड को; जे न मन िंग भले ही हर तरह के दट् के ववह्र करे ज्िे, फेर टे कर ख्नतर ्ु र् ह्वट। 9 फेर उं कर चोा ले मोर ज्द् ननद् श ह्वट; फेर अइिन म उनचत नइ हवट। 10 मोर ख्नतर तइट्र करे गे जं गली ज्नवर के मज् ले िकत ह्वं; जे कर तको मोर इच् ह्वट के मोर उपर अपन ि्ो उगत् के पटोग करट।
11 अउ जे ल् ओ उदे द के ख्नतर मै पोर्नहत कर्ो, त्नक वो मन मोल् भस करन् ननन्त कर िकट, अउ मोर िेव् नइ करट जइिे ओमन कतकोन करे ह्वट, जे ल् डर के िेती ओमन छु ए नइ ह्वट। लेनकन, अउ अगर वो मन से च् ले नइ करही, त ओमन ल एखर ्र भडक्ही। 12 ए म्मल् म कम् कर; ए मउक् म ओमन ज्निे नक कोन नकिम ले मोर ्र ल्भद्टक हे । अ् मै चेल् ्ने लगत ह्वं। न ही कोनो ््त मोल् पेररत करही, च्हे वो दद हो ट् अदद, जे न म ईि् मिीह ल प् िकत ह्वं। 13 आगी लग्ट, अउ िली्; जं गली ज्नवर मनके कपनी मन ल दे ज्ट; हडी ाू ाे अउ िदस मनके फ्डे दे ; पूर् शरीर के ाु कड् म न्खरन्, अउ शैत्न के ि्ो दु ष ट्तन् मोर उपर आवे; निररफ मोल् ईि् मिीह के मज् लेवट। 14 िंि्र के ि्ो छोर, अउ ओकर र्ज ले मोल् कुछ नइ नमलही: मै पृथी के परम छोर तक श्िन करे के ्ज्ट ईि् मिीह के ख्नतर मरन् पिंद करही। ओल् मै खोजत ह्वं जे न हमर ख्नतर मररि; ओल् मोर इच् ह्वट, वो हमर ख्नतर फेर उिे । इही ल्भ मोर ख्नतर न्ि्टे गे ह्वट। 15 मोर भ्ई मन ल कम् कर, तु म मोर जीटे म कोनो ््ध् नइ ड्लट। न ही दे खके मोर भगव्न के प्ि ज्टे के इच् ह्वट, ए दु ननट् के ख्नतर, आप मोल् ओकर ले अलग कर िकत ह्वटं ; न ही टे कर कोनो भी इच् ले मोल् कम करे ज्त ह्वट। मोल् शुब पक्श म पवेश करे के कष दीि : नजह्ं होए म िचमु च ईशर के िेवक होही। 16 मोर भगव्न के अनुर्ग के अनुकरण करे के अनुमनत दीि। टनद कोनो के अपन भीतर ह्वट त ओल् मोर इच् म नवच्र करट; अउ ओल् मोर उपर करण् होवट, जइिे ज्नत होवट के मै कइिे िीध् होवत ह्वं। अध्ट 3 1 ए िंि्र के र्जकुम्र फइन मोल् ले ज्िे, अउ मोर ईशर के पनत मोर िंकल ल भष करिे। अइिन म आप मन म कोनों भी ओखर मदद नइ करट : ्ल् मोर िंग ट्नन भगव्न के िंग जु डव। 2 ईि् मिीह ले ््त नइ करट, अउ फेर दु ननट् के ल्लच करट। कोनो ईर्् तको िंग नइ रहट; न् ह्ल्ँ नक मै खुदे ज् तुँ हर प्ि आ्ो, तभो ले तको ओकर ख्नतर पेररत कर, फेर तको मोर ््त नइ िुनट; ्ल् अ् मै तको जे न नलखत ह्वं, ओम् नवश्ि करव। 3 क््र नक भले मै नजं द् हवं, फेर ए लेखन म फेर मोर इच् मरे के हवट। मोर पेम ल िूली म चढ्टे ज्िे; अउ मोर भीतर जउन आगी ह्वट ओल् कोनो प्नी के इच् नइ ह्वट; फेर नजं द् होके मोर भीतर विंत होवत कहत ह्वट के ््प के प्ि आओ। 4 मै भष्च्र के भोजन म न िुख लेवत ह्वं, न ए नजनगी के िुख म िुख लेवत ह्वं। 5 मै परमे शर के रोाी के क्मन् करत हवं जे न टीशु मिीह के दे ह ह्वट, द्ऊद के ्ीज के; अउ जे न पेट के मै ल्लि् करत ह्वं, वो ओकर खून ह्वट, जे न अनवन्शी पेम ह्वट। 6 मनखे मनके रीनत ररव्ज के ््द मोर अ् जीटे के कोनो इच् नइ ह्वट, न ही म, टनद आप िहमनत दीहीं। अइिन म आप मन इलचत होव, त्नक आप खुद भी ईशर ल मनभ्वन होवट। ए मउक् म कतकोन शब म आप मन ल पोर्नहत करिे; ए मउक् म ओमन प्ि्न् करीन नक आप मन ह नवश्ि करट। 7 ईि् मिीह ह तुँ हर मन ल दे ख्ही नक मै िचमु च ्ोलत हवं। मोर मुँ ह न्न् छल के ह्वट, अउ ््प ह िही म्टने म टे कर ले ्ोले ह्वट। अइिन म मोर ख्नतर प्ि्न् करव, त्नक मै जे न च्हत हवं ओल् पूर् कर िकूं। 8 म दे ह के ््द तको नइ नलखे ह्वट, ्ल् ईशर के इच् के मु त्न्क नलखे ह्वट। अगर मोल् तकलीफ होही, त तुँ हर मोर ले पेम करे ह्वट; फेर अगर मोल् ख्ररज कर दे ज्ही त तको मोर ले नफरत करे ह्वट। 9 अपन प्ि्न् म िीररट् के चच् ल िुरत् करव, जे न अ् मोर ्ज्ट अपन चरव्ह् के ख्नतर ईशर के भोग करत ह्वट: टीशु मिीह केवल टे कर दे खरे ख करट, अउ अपन द्न। 10 फेर मोल् ओम् ले एक के रप म नगने म तको शम् आत ह्वट: क््र के न तो मै टोग हवं, उं कर म ि्ले कम होए के िेती अउ ननटत मौिम ले पैद् होए व्ल् के रप म। फेर दट् के म्धम ले मै कोनो होए के प्लर करे ह्वं, अगर मै ईशर के प्ि पहं च्ो। 11 मोर आत् तको नमन करत ह्वट; अउ चच् मनके द्न जे न ह ईि् मिीह के न्म म मोल् गहण करे ह्वट; ट्ती के रप म नइ होही। क््र नक जउन मन रद् म मोर तीर नइ ररहीन, ओमन ्लो मोर आगू अवइट् िहर म नमले ्र गे हवट। 12 टे ््त मै तुँ हर ल सन्् ले नलखत ह्वं, इनफिुि के चच् के ि्ले टोग के द्र्। 13 अ् मोर िंग ह्वट, िंग म कई आन लोगन ्ोकि, मोर ि्ले नपट ह्वट। जउन मन िीररट् ले आट हे , अउ मोर आगू रोम, भगव्न के मनहम् ्र गे हवट, ओमन ल मै िमझत हव नक तू उं खर मन ले अननभज नइ हव। 14 अइिन म तु म उं कर ख्नतर िंकेत करही, नक मै ननका आकर ं ग्, क््र के वो ि्ो परमे शर अउ तु म दु नों के टोग ह्वटं : जे ल् टे नफा ह्वट के तू ि्ो ््त म त्ज् हो। 15 इही ््त म तको नलखे ह्वट, नितं ्र के कैलेड के नौव्ं नदन पनहले। अंत तक मज्ू त हो, ईि् मिीह के धैट् म।