Skip to main content

Chhattisgarhi - The Epistle of Ignatius to the Philadelphians

Page 1

फिलाडे ल्फा के लोगन ल इगाफाफि के पत अधाफ 1 1 इग्नाटि, जे ल् निटोफोरि तको केहे ज्िे, भगव्न नित् के चच् अउ हमर पभर टीशर मिीह, जे न एनशट् के नफल्डे ल्ट् म ह्वट; जे न दट् ि्टे ह्वट, ईशर के त्लमे ल म ल्र होके, अउ हमर पभर के जर नून म िद् आनल्त होके, अउ उं कर िरनरु्न के म्धम ले िूर् दट् म िूर् होवत ह्वट: जे ल् मै ईि् मिीह के खून म भी नमन करत ह्वं, जे न हमर श्शत अउ अशरद आनंद ह्वट; ख्िकर टनद वो निशि, अउ पेलेार जे न उं कर िंग ह्वटं , अउ ईि् मिीह के मन के मर त्निक ननटर क डीकन के िंग एकत् म ह्वटं ; जे ल् ओमन अिन िनवत आत् ले िूर् दृत् म अिन मज् के मर त्निक ि​िे ह्वट: 2 जे न निशि ल मै ज्नत ह्वं, ओल् तरँ हर िीच वो मह्न िेवक्ई नमले ह्वट, न खरद के, न मनखे मन द्र्, न वि् मनहम् िे; फेर ईशर नित् अउ हमर पभर ईि् मिीह के पेम ले । 3 जे कर िंटम के मै पिंि् करिे; जे न अिन चरपी ले अिन ि​िो वि् ि्त ले आन ले ज्द् करे म िकम ह्वट। क्िर के ओल् आज् म नफा करे गे ह्वट, जइिे वीण् अिन त्र तक। 4 टे कर िेती मोर आत् ईशर के पनत उं कर मन के ि​िले ज्द् पिर म्नत ह्वट, टे ल् ि​िो िरण म फलद्टी ज्नत ह्वट, अउ निद ह्वट; ल्रत् ले भरिूर, जर नून ले मर क, अउ जीनवत भगव्न के ि​िो िंटम के अनरि्र। 5 अइिन म जइिे पक्श अउ ित दू नों के िंत्न िन ज्िे; नवभ्जन अउ झूठ् निद्ं त ले भ्गन्; फेर नजह्ं तरँ हर चरव्ह् ह्वट, उह्ं टे , भे ड के रि म अनरिरण करत ह्वटं । 6 क्िर के अइिे कई भे नडट् ह्वटं जे न झूठ् िरख के िंग नवश्ि के टोग लगत ह्वटं जे न ईशर के नदश् म चलइट् मनल् िं दी िन्त ह्वटं ; फेर कॉनकॉड् म ओमन ल कोनों जघ् नइ नमलही। 7 अइिन िर र्ई जडी-िू ाी ले िरहे ज करव जे ल् टीशर ह नइ िनहनिे; क्िर नक अइिन ि्ि के िौध्रोिण नइ हे । अइिे नइ ह्वट के मोल् तको िीच कोनो नवभ्जन नमले ह्वट, िल् ि​िो पक्र के िनवतत् नमले ह्वट। 8 क्िर नक जतक् िरमे शर के अउ ईि् मिीह के हवट, उतक् अिन निशि के िंग घलो हवट। अउ जतक् मन िश्त्ि के िंग चच् के एकत् म लहाही, इह्ं तक के टे मन तको िरमे शर के िेवक होही, त्नक वो टीशर के मर त्निक जी िकट। ९ धोख् नइ होवट भ्ई; टनद कोनो ओकर अनरिरण करत ह्वट जे न चच् म नवभ्जन करत ह्वट, त ओल् ईशर के र्ज के नवर्ित म नइ नमलही। टनद कोनो आन र्ट के ि्द चलत ह्वट त वो मिीह के जर नून ले िहमत नइ ह्वट। 10 क्िर के तरँ हर ए िरट्ि होवट के ि​िो उही िनवत निरंिक म भ्ग लेव। 11 क्िर नक हमर पभर टीशर मिीह के निररफ एक म्ं ि हवट; अउ उं कर खून के एकत् म एक कि; एक वेदी; 12 जइिे एक निशि तको ह्वट, उं कर पेलेाे री के िंग अउ डीकन मोर ि्िी-िेवक ह्वटं : त्नक आि जे न भी करव, ओल् िरमे शर के इच् के मर त्निक कर िकट। अधाफ 2 1 मोर भ्ई, तरँ हर पनत मोर जउन पेम ह्वट ओकर ले मोल् अउ िडक् िनत ह्वट; अउ तरँ हर मन म गजि खरशी होके मै तको खतर् ले िररनकत रखे के पट्ि करत ह्वं; ट् फेर मै नइ, िल् ईि् मिीह; जे म् िं धे होए म ज्द् डरत ह्वं, क्िर के अभी तक केवल कष के रद् म ह्वट। 2 फेर िरमे शर ले तरँ हर प्ि्न् ले मोल् निद होही, त्नक मै ओ भ्ग तक िहं च िकूं, जे न िरमे शर के दट् ले मोल् आवंनात करे गे ह्वट: मिीह के दे ह के रि म िरिम्च्र के नतर भ्गन्; अउ पेररतों ल चच् के पेलेाे री के रि म। 3 हमन ल भनवषदक् मन ले घलो पेम करट, क्िर नक ओमन घलो हमन ल िरिम्च्र तक िहं च्ट हे , अउ मिीह म आश् र्खे िर अउ ओखर ले अिेक् करे िर घलो पेररत करे हे । 4 जे म् तको नवश्ि करत ह्वट के वो ईि् मिीह के एकत् म उद्र होए ररनहि; िनवत मनखे होन्, पेम करे के ल्टक, अउ आशट् म ररनहि; 5 जे न ल ईि् मिीह ले गव्ही नमले ह्वट, अउ हमर आम आश् के िरिम्च्र म नगने गे ह्वट। 6 फेर टनद कोनों टहदी क्नून के पच्र तरँ हर ल करही, त ओल् नइ िरनट; क्िर के खतन् होए व्ल् ले मिीह के निद्ं त ल ि्न् िनि़ट् ह्वट, जे कर ले टहदी धम् नइ नमले ह्वट। 7 फेर टनद ट् तो एक, ट् दू िर, मिीह टीशर के िंिंध म नइ िोलत ह्वटं , त वो मोल् लगत ह्वटं फेर मृ त के स्रक अउ कब के रि म, जे कर उिर निररफ मनखे मनके न्म नलखे गे ह्वटं । 8 अइिन म ए िंि्र के र्जकरम्र के दर ष कल् अउ फंद् ले भ्ग ज्; नइ होवट के कोनो भी िमट उं कर च्ल्की ले उतीनडत होके तको अिन द्न म ठं ड् हो ज्ए। फेर अनवभ्नजत मन के िंग ि​िो एक िंग एके ठऊर म आएं । 9 अउ मै अिन िरमे शर ल आशीव्​् द दे वत हवं नक तरँ हर पनत मोर अच् अंतर्त् ह्वट, अउ तरँ हर िीच कोनो के ि्ि खरलके ट् ननजी रि ले घमं ड करे के ि्त नइ ह्वट, के मै ओकर िंग िहत ट् िोरिहत म िर रिेनिम रे हे ह्वं।

10 अउ जउन ि​िो झन ले गोठि्त करे हे , उं खर मन ले क्मन् करिे, नक ए ह उं खर लखल्फ गव्ह नइ िनट। 11 क्िर नक ह्ल्ँ नक कतकोन मन ह दे ह के मर त्निक मोल् धोख् दे िे, फेर िरमे शर ले होट के िेती आत् ल धोख् नइ दे ज्िे; क्िर के टे दू नों ज्नत ह्वट के टे कह्ं ले आिे अउ कह्ं ज्िे, अउ नदल के रहस ल दर ि्र् ि्नित करत ह्वट। 12 म तको िीच होए के िखत रोटे ररनहि; मै जोरदरह् आव्ज ले नकनहन: निशि, अउ पेलेाे री, अउ डीकन म ह्नजर होव। 13 अि कतकोन मनखे मन म्निे नक ए ि्त ल तरँ हर िीच अवइट् नवभ्जन के िूव्​् नरम्न के रि म कनहन। 14 फेर वो मोर ि्की ह्वट जे कर ख्नतर मै िं धन म ह्वटं के मै कोनो भी मनखे ले करछ नइ ज्निे। फेर आत् िोले , इही िर लदम्न म नकनहन : निशि के निन् करछ नइ करे : 15 अिन शरीर ल भगव्न के मं नदर के रि म र्खव : पेम एकत्; नडवीजन ले भ्गत ह्वटं ; मिीह के अनरट्टी िन, जइिे वो अिन नित् के ररनहि। 16 अइिन म एकत् िर रनचत मनखे के रि म जइिे िने मोर िने हे , वइिने करीन। क्िर के नजह्ं िं ाव्र्, अउ कोध ह्वट, उह्ं भगव्न ननव्ि नइ करट। 17 फेर िरमे शर के एकत् अउ निशि के िररषद म लहाे म पभर ह िश्त्ि करइट् ि​िो ल म्फ कर दे िे। 18 क्िर नक मै ईि् मिीह के अनरगह म भरोि् करिे नक ओमन तरँ हर हर िं धन ले मर क करही। 19 फेर मै तरँ हर मन ल उिदे श दे वत हवं नक िंघष् ले करछर नइ करट, िल् मिीह के ननद् श के मर त्निक करट। 20 क्िर नक कतकोन मनखे मनके ि्रे म िरने हे , जउन मन कहे हे ; जि तक ओल् मू ल म नलखे नइ नमलही, ति तक िरिम्च्र म नलखे ज्टे म नवश्ि नइ करही। अऊ जि नकनहन के नलखे गे ह्वट; ओमन अिन भष क्िी म उं कर आगू के ि्त के जव्ि दीि। 21 फेर मोर िर ईि् मिीह ह दर ननट् के ि​िो अभष स्रक मनके जघ् हवट; िंग म वो अशरद स्रक, उं कर कॉि, अउ मृ तर, अउ िरनरु्न, अउ वो आ्​् जे न उं कर डहर ले ह्वट; जे कर ले मै तरँ हर प्ि्न् के म्धम ले उनचत होए के क्मन् करत ह्वं। 22 िरज्री मन िचमर च अच् ह्वटं ; फेर िहत िनि़ट् मह्ट्जक ह्वट जे कर ख्नतर होली के िनवत पनतिद होए ह्वट; अउ जे ल् अकेले भगव्न के रहस िौंिे गे ह्वट। 23 उ ह ि्ि के द्र हवट; जे कर ले इब्हीम, अउ इिह्क, अउ ट्कूि, अउ ि​िो भनवषदक् पवेश करत ह्वटं ; िंगेिंग पेररत, अउ चच् घलो ि्नमल हे । 24 अउ टे ि​िो ि्त एकत् के पवृनृ रखत ह्वट जे न ईशर के ह्वट। ह्उिीा द गॉसे ल म करछ ह्वट। क् एम् आन ि​िो वव्​् ले िहत उिर ह्वट; अि्​् तत, हमर उद्रकत्​् , पभर टीशर मिीह के पकान, उं कर जर नून अउ िरनरु्न। 25 क्िर नक नपट भनवषदक् मन ह ओल् िंदनभ् त करीन; फेर िरिम्च्र अभष्च्र के िूण्त् ह्वट। अइिन म ि​िो नमलके अच् ह्वट, टनद द्न के िंग नवश्ि करव। अधाफ 3 1 अि जइिे एं नाओक के चच् के िंिंध म जे न िीररट् म ह्वट, दे खके मोल् ित्टे ज्त ह्वट के तरँ हर प्ि्न् अउ टे शू मिीह म टे कर पनत तरँ हर जउन आं त ह्वट, ओकर म्धम ले टे श्ं नत म ह्वट; टे तरँ , िरमे शर के चच् के रि म, कोनो डीकन ल उं कर ि्ि ईशर के र्जदू त के रि म ज्टे के ख्नतर ननटर क करही; जे कर ले वो एक िंग नमले म उं कर िंग खरशी मन् िकट, अउ भगव्न के न्म के मनहम् कर िकट। 2 धन होवट के टीशर मिीह म वो मनखे होही, जे न अइिन िेवक्ई के टोग ि्ट ज्ही; अउ आि खरद तको मनहम्मं नडत होही। 3 अि टनद आि इचर क होव, त ईशर के कृि् िर अइिन करन् अिंभव नइ हे ; िंगेिंग दू िर िडोिी नगरज्घर मन ह घलो ओमन ल भे जे हे , कतकोन निशि, कतकोन िरज्री अउ डीकन। 4 एक ि​िले टोग मनखे निनलनिट् के डीकन नफलो के िंिंध म वो अभी भी ईशर के वचन म मोर िेव् करत ह्वट: अग्िोिोनलि के ररटि के िंग नमलके, एक नवलकण अच् वलक, जे न िीररट् ले तको मोर अनरिरण करे ह्वट, अिन जीवन के िंिंध म नइ : टे तको तरँ हर गव्ही दे त ह्वटं । 5 अउ मै खरदे तरँ हर ख्नतर िरमे शर के धनव्द दे वत हवं नक तू ओल् ओइिने गहण करव जइिे पभर तरँ ल् गहण करही। फेर जउन मन उं खर अिम्न करीन, उं खर मन िर ईि् मिीह के कृि् ले ओमन ल म्फ करे ज्ट। 6 तोआि म रहइट् भ्ई मनके द्न तरँ हर नमन करत ह्वट: नजह्ं ले भी अि मै िर रहि के नलखत ह्वं, जे ल् इनफिरि अउ सन्​् के लोगन मन ह िम्न के ख्नतर मोर िंग एक िंग भे जे ररनहि। 7 हमर पभर ईि् मिीह उं कर िम्न करट; जे म् ओमन दे ह अउ आत् अउ आत् दू नों म आश् रखत ह्वटं ; आ्​् म, पेम म, एकत् म। मिीह टीशर म नवद्ई हमर ि्झ् आश्।


Turn static files into dynamic content formats.

Create a flipbook
Chhattisgarhi - The Epistle of Ignatius to the Philadelphians by Filipino Tracts and Literature Society Inc. - Issuu