अध्य के ब् 1 1 हे धरती के न्य्धीध, धर् से पेर करीं, प्र के ब्रे रे अच्छ से सोचीं आ स्दगी से ओकर् के खोजीं। 2 क्हे कक उ उ लोग के करल जइहे जे ओकर् के परीक् न् दे सर। आ जे ओकर् पर अकिश्स न् करे ल्, ओकर् से खरद के दे ख्िेल्। 3 क्हे कक बेिकूफी ्रल किच्र ्गि्न से अलग हो ज्ल् आ उनकर धक् के परीक् कइल् पर अबरक्र्न के ड्ं टत रहे ल्। 4 क्हे कक दर ््् िन्पू्् आत् रे बरक् न् पिेध करी। न् ही प्प के अधीन होखे ि्ल् धरीर रे रहे के च्हीं। 5 क्हे कक अनरध्सन के पकित आत् धोख् से ््ग ज्छ आ सरझहीन किच्र से दू र हो ज्छ आ अधर् के आिे पर न् कटकी। 6 क्हे कक बरक् एगो पेरी आत् ह। आ कनंद् करे ि्ल् के ओकर ब्त से बरी न् करी, क्हे कक ्गि्न ओकर ब्गडोर के गि्ह हउिे आ ओकर कदल के सच् दे खे ि्ल् आ ओकर जी् के सरनत हउिे. 7 क्हे कक प्र के आत् दर कनय् के ्र दे ल् आ जिन् रे सब करछ ब् ओकर् आि्ज के ज्न होल्। 8 एह से जे अधर् के ब्त कहे ल्, ओकर् के कछप्िल न् ज् सकेल्, आ जब ऊ सज् दे ल् त बदल् ओकर् से न् गरजरी। 9 क्हे कक अ्् लोग के सल्ह रे पूछत्छ कइल ज्छ आ ओकर िचन के आि्ज प्र के स्रने ओकर दर ष क्र के पकटीकर् ख्कतर आछ। 10 क्हे कक छर्् के क्न सब ब्त सरनेल् आ गरनगरन्हट के धोर कछपल नइखे। 11 एह से गरनगरन्हट से स्िध्न रहीं जिन बेक्र ब्। आ आपन जी् के बकबक करे से परहे ज करीं क्हे कक अतन् गरप किनो धब नइखे जिन बेक्र हो ज्छ आ जिन ररँह झूठ बोलेल् ऊ ज्न के र्र दे ल्. 12 अपन् जीिन के गलती रे रौत के खोज रत करीं, आ अपन् ह्थ के क्र से किन्ध के अपन् ऊपर रत खींचीं। 13 क्हे कक पररेशर रौत के न् बनिले, न् ही उ कजंद् लोग के न्ध रे खरध ब्डे । 14 क्हे कक उ सब करछ के एह से बनिले कक उ लोग के अक्त होखे, आ दर कनय् के पीढी स् रहे । आ ओह लोग रे न्ध के जहर नइखे आ न् ही धरती पर रौत के र्ज ब्। 15 (क्हे कक धर् अरर ह।) 16 लेककन अ्् लोग अपन् क्र आ ब्त से एकर् के बोलिले, क्हे कक जब उ लोग एकर् के आपन दो् बने के सोचले त उ लोग एकर् के बेक्र क दे ले अिररी एकर् से ि्च् कछले, क्हे की उ लोग एकर् रे कहस् लेिे ल्यक ब्डे । अध्य के ब् 2 1 क्हे कक अ्् लोग अपन् आप रे तक् करत ब्, लेककन सही नछखन कक, हरनी के जीिन छोट अिररी थक्ऊ ब्, अिररी आदरी के रौत रे एकर किनो उप्य नछखे।
2 क्हे कक हरनी के जनर से किनो तरह के स्हकसकत् रे पैद् ्इल ब्नी ज्, आ हरनी के ब्द रे अइसन होखब ज् जइसे हरनी के कबो न् ्इल होखीं ज्, क्हे कक हरनी के न्क के छे द रे स्ँ स धरँआ कनयर ब् आ हरनी के कदल के गकत रे तनी कचंग्री ब्। 3 छ बरझ् के हरनी के धरीर र्ख रे बदल ज्छ आ हरनी के आत् कोरल हि् के रप रे ग्यब हो ज्छ। 4 आ हरनी के न्र सरय के स्थ ्रल् ज्छ आ केह के हरनी के क्र य्द न् होछ आ हरनी के कजनगी ब्दल के कनध्न कनहन बीत ज्छ अिररी धरंध कनहन कबखर् ज्छ, जिन कक के बीर से ्ग्िल ज्ल् सूरज, आ ओकर गर् से ह्िी हो ज्ल्। 5 हरनी के सरय एगो परछ्छ ह जिन बीतत ब्। हरनी के अंत के ब्द किनो ि्पसी नछखे, क्हे कक एकर् प ते जी से ररहर ल्गल ब्, त्कक केह फेर से न् आिे। 6 एह से आ ज्, हरनी के रौजूद नीरन चीजन के ्ोग करीं ज्, आ हरनी के जली से जि्नी के जइसन प््ी के इ्ेर्ल करीं ज्। 7 हरनी के रहं ग् धर्ब आ ररहर से ्रीं ज्, आ बसंत के किनो फूल हरनी के प्स से न् गरजरे के च्हीं। 8 हरनी के गरल्ब के कली के ररकरट पकहरे के च्हीं, ओकर् पकहले कक ऊ रररझ् ज्ि। 9 हरनी रे से केह अपन् क्ररकत् के कहस् के कबन् न् ज्ए, हरनी के हर जगह अपन् खरधी के कनध्न छोड दे िे, क्हे कक इहे हरनी के कहस् ह अिररी हरनी के ््ग इहे ब्। 10 हरनी के गरीब धर् के अत्च्र करीं ज्, किधि् के न् छोडीं ज्, न् ही बरढ लोग के परर्न धूसर ब्ल के आदर करीं ज्। 11 हरनी के त्कत न्य के कनयर होखे, क्हे कक करजोर के किनो रोल न् प्िल ज्ल्। 12 एह से हरनी के धर् लोग के इं तज्र रे रहे के च्हीं। क्हे कक ऊ हरनी के ब्री ख्कतर नइखे आ ऊ हरनी के क्र के किपरीत स्फ ब्, ऊ हरनी के क्नून के ठे स पहँ च्िे से ड्ं टत ब् आ हरनी के कधक् के उलंलन पर हरनी के बदन्री पर आपक् करत ब्. 13 ऊ ्गि्न के ज्न होखे के द्ि् करे ल् आ ऊ अपन् के प्र के संत्न कहे ल्। 14 उ हरनी के किच्र के ड्ं ट दे िे ख्कतर बन्िल गछल रहले। 15 उ हरनी के दे खे रे ्ी दर खी ब्, क्हे कक ओकर जीिन दोसर् के कनहन नछखे , ओकर र््् अलग तरीक् के ब्। 16 हरनी के ओकर् ब्रे रे नकली र्नल ज्ल्, उ हरनी के र््् से गंदगी कनहन परहे ज करे ल्, उ धर् के अंत के ब्रे रे बत्िेल्, त्कक उ आधीष प्िेल् अिररी अपन् के लरंड करे ल् कक ्गि्न ओकर कपत् हिे। 17 हरनी के दे खल ज्ि कक ओकर ब्त सही ब् कक न्, आ हरनी के परीक् करीं ज् कक ओकर अंत रे क् होछ। 18 अगर धर् आदरी पररेशर के बेट् ह त उ ओकर रदद करी अिररी ओकर् के अपन् दर शन के ह्थ से बच्छ। 19 आछं हरनी के ओकर नमत् के ज्न सकीले आ ओकर धैय् के परख कर सकीले।
20 हरनी के ओकर् के धर्न्क रौत के सज् सरन्िल ज्ि, क्हे कक ओकर् आपन ब्त से ओकर आदर कइल ज्छ। 21 उ लोग अइसन ब्त के कलन् कछले अिररी धोख् दे ले, क्हे कक उ लोग के बरर्छ उ लोग के आनर क दे ले ब्। 22 रहल ब्त पररेशर के रहस के त उ लोग न् ज्नत रहले, न् उ लोग ध्कर्कत् के रजदू री के उमीद करत रहले अिररी न् कनद्ष आत् के इन्र के सरझत रहले। 23 क्हे कक पररेशर आदरी के अरर बन्िे ख्कतर बनिले ब्डन आ ओकर् के अपन् अनंत क्ल के पकतरप बनिले ब्डन। 24 कफर ्ी धैत्न से छर्् के चलते दर कनय् रे रौत आछल, आ जे उनकर पक से पकडे ि्ल् लोग ओकर् के प्िेल्। अध्य के ब् 3 1 लेककन धर् लोग के प्् पररेशर के ह्थ रे ब्, आ ओकर् के किनो य्तन् न् छूछ। 2 अज्नी लोग के नजर रे उ लोग ररत बरझ्इल आ उनकर ज्ए के दर ख र्नल ज्ल्। 3 हरनी से उ लोग के ज्ए के पूर् न्ध हो गछल, लेककन उ लोग ध्ं कत रे ब्डे । 4 ्ले ही उ लोग के रन रे सज् करल ज्ि, लेककन उ लोग के आध् अररत् से ्रल ब्। 5 तनी सज् करलल् के ब्द उ लोग के बहत इन्र करली, क्हे कक पररेशर ओ लोग के परख के अपन् ख्कतर योग प्िलन। 6 जइसे ्टी रे सोन् के परीक् कइले ब्डन आ होरबकल के रप रे गह् कइले ब्डन। 7 आउर उनके दर षर् के सरय उ लोग चरककहे आ ठूंठ के बीच रे कचंग्री कनहन इधर-उधर ््ग जइहे । 8 उ लोग र्ष्न के न्य करीहे आ लोग पर र्ज करीहे आ उनकर प्र हरेध् ख्कतर र्ज करीहे । 9 जे उनकर् पर ्रोस् करी, उ सच्छ के सरकझहे आ पेर रे किश्सी लोग उनकर् स्थे रही, क्हे कक उनकर् पकित लोग पर अनरगह आ दय् ब् आ ऊ अपन् चरनल लोग के दे ख््ल करे ल्। 10 लेककन अ्् लोग के अपन् कलन् के ररत्कबक सज् कदहल ज्छ, जिन कक धर् लोग के उपेक् क के प्र के छोड दे ले ब्डे । 11 क्हे कक जे बरक् आ प्लन-पोष् के तर च सरझेल् ऊ दयनीय होल् आ ओकर आध् वथ् होल्, ओकर रेहनत कनषल होल् आ ओकर क्र बेक्र होल्। 12 उनकर रेहर्र रूख् हिे आ उनकर लइक् दर ष हिे। 13 उनकर संत्न श्कपत ब्। एही से धन ब् उ बंजर जे अधर् ब्, जिन प्प के कबछौन् के न् ज्नत कबय्, उ प््ी के द्न रे फल प्छ। 14 धन ब् ऊ नपरंसक जे अपन् ह्थ से किनो अपर्ध न् कइले ब् आ न् ही ्गि्न के कखल्फ बरर्छ के कलन् कइले ब्, क्हे कक ओकर् के किश्स के किधेष िरद्न कदहल ज्छ आ प्र के रंकदर रे ओकर रन के अकधक् सीक्य् किर्सत कदहल ज्छ।
15 क्हे कक अच् पररशर के फल रकहर्रंकडत होल् आ बरक् के जड कबो न् कगरी। 16 रहल ब्त वक्च्री के संत्न के त उ लोग अपन् कस् न् होछहे अिररी अधर् के कबछौन् के बीज के जड से उख्ड कदहल ज्छ। 17 क्हे कक उ लोग लंब् सरय तक कजंद् रही, लेककन उ लोग के किनो परि्ह न् होछ अिररी उ लोग के अंकतर यरग के किनो इजत न् होछ। 18 य् अगर उ लोग जली रर ज्स त उ लोग के किनो उमीद नछखे , न् परीक् के कदन रे किनो कदल्स्। 19 क्हे कक अधर् पीढी के अंत ्य्िह ब्। अध्य के ब् 4 1 बेहतर ब् कक संत्न न् होखे आ सद् गर् होखे, क्हे कक ओकर सर् अरर होल्, क्हे कक छ ्गि्न आ आदरी के ्ी ज्नल ज्ल्। 2 जब ऊ रौजूद होल् त आदरी एकर् पर उद्हर् दे ल्। आ जब ऊ खतर हो ज्ल् त ओकर इच् होल्, ऊ ररकरट पकहरे ल् आ जीत प् के हरेध् ख्कतर जीत ह्कसल करे ल् आ कनर्ल इन्र ख्कतर पय्स करत रहे ल्. 3 लेककन अ््न के बढत संत्न न् पनपी, न् ही करीन् के कफसलन से गकहर्ह जड जर्छ, न् किनो ते ज नींि रखी। 4 क्हे कक उ लोग करछ सरय ख्कतर ड्ढ रे फलत-फूलत रहे ल्। तबो आकखरी रे न् खड् होके हि् से कहल ज्छ आ हि् के त्कत से जड से उख्ड फेकल ज्छ। 5 अपू्् ड्ढ टू ट ज्छ, ओकर फल बेक्र हो ज्छ, ख्ए ख्कतर प्कल न् होछ, हँ , बेक्र रे करल ज्छ। 6 गैरक्नूनी कबछौन् से पैद् ्इल लइक्-लइकी अपन् र्छ-ब्बूजी के कखल्फ बरर्छ के गि्ह होले। 7 लेककन ्ले ही धर् के रौत से रोकल ज्ि, लेककन उ आर्र रे रही। 8 क्हे कक इजतद्र उकरर न् होल् जिन सरय के लंब्छ रे खड् होल् आ न् स्ल के संख् से न्पल ज्ल्। 9 लेककन बरक् आदरी ख्कतर धूसर ब्ल ह, आ बेद्ग जीिन बरढ्प् ह। 10 ऊ पररेशर के खरध कइलन आ उनकर कपय रहलन, एह से प्पी लोग के बीच रे रहत उनकर् के बदल कदहल गइल। 11 हँ , ओकर् के जली से ले ज्इल गइल कक दर षत् ओकर सरझ रे बदल्ि न् कर दे ि, न् धोख् ओकर् आत् के बहक्िे। 12 क्हे कक नटखट के ज्दू छर्नद्र ब्त के असष कर दे ल्। आ क्ररकत् के ्टकल स्ध्र् रन के करजोर कर दे ल्। 13 ऊ कर सरय रे कस् हो गइलन आ बहत कदन रे पूर् हो गइलन। 14 क्हे कक उनकर प्् प्र के खरध करत रहे , एही से उ जली से ओकर् के दर षन के बीच से ले ज्ए रे ल्गल रहले। 15 लोग छ दे ख के न् सरझल आ न् ही छ ब्त अपन् रन रे रखल कक उनकर अनरगह आ दय् उनकर पकित लोग पर ब् आ उ अपन् चरनल लोग के आदर करे लन।
16 एह तरह से जिन धर् ररल ब्, उ अ्् लोग के दोषी ठहर्छ जिन कजंद् ब्डे । आ जि्नी जिन जलीए अधर् लोग के कछ स्ल आ बरढ्प् रे कस् हो ज्ल्। 17 क्हे कक उ लोग बरक्र्न के अंत दे ख के इ न् सरकझहे कक पररेशर अपन् सल्ह से ओकर् ब्रे रे क् फैसल् कछले ब्डे अिररी प्र ओकर् के किन् रकसद से सररककत रखले ब्डे । 18 उ लोग ओकर् के दे ख के कतरस्र करीहे । ब्ककर ्गि्न ओह लोग के कतरस्र करे ख्कतर हँ स जइहे आ ब्द रे ऊ लोग एगो नीच ल्ध आ ररअल लोग के बीच हरेध् ख्कतर अपर्नजनक हो जइहे . 19 क्हे कक ऊ ओह लोग के फ्ड के र्थ् से नीचे कगर् दीहे कक ऊ लोग बेजरब्न हो जइहे. आ ऊ ओह लोग के नींि से कहल् दीहे । आ उ लोग एकदर उज्ड हो जइहे आ दर ख रे रह जइहे । आ ओह लोग के स्रक न्ध हो ज्छ. 20 जब उ लोग अपन् प्प के कहस्ब लग्छ त उ लोग डे र् के आ जछहे अिररी उ लोग के अपर्ध से उनरक् सोझ् किश्स हो ज्छ। अध्य के ब् 5 1 तब धर् आदरी बहत कहमत से ओह लोग के स्रने खड् हो ज्छ जे ओकर् के दर ख दे ले ब् आ अपन् रेहनत के किनो कहस्ब न् दे ले ब्। 2 जब उ लोग एकर् के दे ख के ्यंकर डर से परे ध्न हो जइहे आ उनकर उ््र के अजीबपन दे ख के अचरज रे पड जइहे, जिन कक उ लोग के इं तज्र से ्ी बहत दू र ब्। 3 उ लोग पश्त्प करत आ आत् के पीड् से कर्हत लोग रन रे कहत होछ कक, “छ उहे रहले, जेकर हरनी के कबोकबो रज्क उड्ित रहनी ज् अिररी कनंद् के कह्ित रहे । 4 हरनी के रूख् लोग उनकर ज्न के प्गलपन आ अंत के बेइजत र्नत रहनी ज्। 5 ऊ ्गि्न के संत्न रे कइसे कगनल ज्ल् आ ओकर ््ग पकित लोग रे कइसे ब्! 6 एही से हरनी के सच्छ के र््् से ्टक गछल ब्नी ज्, आ ध्कर्कत् के रोधनी हरनी के न् चरकल आ ध्कर्कत् के सूरज हरनी पर न् उठल। 7 हरनी के दर षत् आ किन्ध के र््् रे थक गछनी ज्, हँ , हरनी के रे कग््न से गरजरल ब्नी ज्, जह्ँ किनो र््् न् रहे , लेककन प्र के र््् के ब्रे रे हरनी के एकर् के नछखी ज्नत। 8 लरंड से हरनी के क् फ्यद् ्इल ब्? हरनी के लरंड से धन हरनी के किन ्ल्छ दे ले ब्? 9 ऊ सब ब्त परछ्छ कनहन आ जली से गरजरत खं्् कनहन बीत गछल ब्। 10 आ जइसे किनो जह्ज प्नी के लहरन के ऊपर से गरजरे ल्, जिन् के गरजरल् पर ओकर कनध्न न् करल प्िेल् आ न् ही लहर रे कील के र्््। 11 य् जइसे जब किनो कचरछ हि् रे उड गइल होखे त ओकर र््् के किनो कनध्नी न् करलेल्, बलरक ओकर् प्ँ ख के चोट से पीटल हल् हि् के ते ज आि्ज आ गकत से
अलग हो ज्ल्। आ ओकर् ब्द किनो कनध्नी न् करल प्छ कक ऊ कह्ँ गइल रहली. 12 जइसे किनो कनध्न पर तीर र्रल ज्ल् त ऊ हि् के अलग कर दे ल् जिन तर रते फेर से एकट् हो ज्ल् आ आदरी के पत् न् चले कक ऊ कह्ँ से गरजरल ब्। 13 ओइसहीं हरनी के जनर के ही अपन् अंत तक पहं चे लगनी ज् आ हरनी के किनो सद् गर् के कनध्नी न् रहे । लेककन हरनी के बरर्छ रे ्स हो गछल रहनी। 14 क्हे कक अ्् लोग के आध् हि् से उडल धूल कनयर होल्। जइसे कक एगो प्तर झ्ग जिन तू फ्न के स्थे ्ग् कदहल ज्ल्; जइसे कक धरँआ जिन तू फ्न से इधर-उधर कबखर ज्ल् आ एक कदन ्र रके ि्ल् रेहर्न के य्द के रप रे बीत ज्ल्। 15 लेककन धर् लोग हरेध् ख्कतर कजंद् रहे ल्। उनकर इन्र ्ी प्र के प्स ब् आ उनकर दे ख््ल परर उच् के प्स ब्। 16 एही से ओह लोग के प्र के ह्थ से एगो रकहर्रंकडत र्ज आ एगो सरनर ररकरट करली, क्हे कक ऊ अपन् द्कहन् ह्थ से ओह लोग के ढं क के र्खी आ अपन् ब्ं ह से ओह लोग के रक् करी। 17 ऊ पूर् किच ख्कतर आपन छर्् के अपन् लगे ले ज्छ आ ओह प््ी के अपन् दर शनन के बदल् लेबे ख्कतर आपन हकथय्र बन् दी. 18 उ छ्ती के पटी कनहन ध्कर्कत् अिररी हे लरेट के जगह सच् न्य पकहनहे । 19 ऊ पकितत् के अजेय ढ्ल के रप रे ले ली। 20 ओकर कड् कोध के ऊ तलि्र ख्कतर ते ज कर दी आ दर कनय् ओकर् स्थे अज्नी लोग से लडी। 21 तब द्कहन् कनध्न् लग्िे ि्ल् िज ब्हर कनकल जइहे । आ ब्दल से, जइसे कक बकढय् से खींच्इल धनरष से , कनध्न पर उड ज्छ। 22 आ कोध से ्रल ओल् पतर के धनरष से कनकलल कनयर फेकल ज्छ आ सररंदर के प्नी ओह लोग पर ्डक ज्छ आ ब्ढ ओह लोग के कनर्रत् से डूब् दी। 23 हँ , एगो ते ज हि् ओह लोग के कखल्फ खड् हो ज्छ आ तू फ्न कनयर ओह लोग के उड् दी, एह तरह से अधर् पूर् धरती के तब्ह कर दी आ बरर्छ पर्करी लोग के कसंह्सन के उख्ड कदही। अध्य के ब् 6 1 हे र्ज् लोग, सरनीं आ सरझीं। हे धरती के छोर के न्य करे ि्ल् लोग, सीखऽ। 2 हे लोग के र्ज करे ि्ल् लोग क्न दीं आ ज्कत के ्ीड रे लरंड करीं। 3 क्हे कक प्र के ओर से तोहनी के अकधक्र कदहल गइल ब् आ परर्त् के ओर से प्रत कदहल गइल ब्, जे तोह्र क्र के परीक् करी आ तोह्र सल्ह के खोज करी। 4 क्हे कक उनकर र्ज के सेिक होखल् के न्ते तू लोग सही न्य न् कइनी, न् वि्् के प्लन कइनी आ न् ही पररेशर के सल्ह के प्लन कइनी।
5 ऊ ्य्िह आ ते जी से तोहनी पर आ ज्छ, क्हे कक ऊंच जगह पर रहे ि्ल् लोग ख्कतर तीख् न्य होछ। 6 क्हे कक दय् जकलये नीच लोग के र्फ कर दी, लेककन पर्करी लोग के बहत य्तन् कदहल ज्छ। 7 क्हे कक जे सबकरछ पर प्र ब्, उ केह के वक् से न् डे र्छ, न् केह के रह्नत् के दे ख के डर से खड् होछ, क्हे कक उ छोट-बड के बन् दे ले ब् अिररी स्के एक सर्न कचंत् करे ले। 8 लेककन पर्करी लोग पर एगो कड् परीक् आछ। 9 एह से हे र्ज् लोग, हर तोहनी से कहत ब्नी कक तू लोग बरक् सीखीं आ न् कगर ज्छं। 10 क्हे कक जे पकितत् के पकित रखेल्, ओकर् के पकित र्नल ज्छ, आ जे अइसन ब्त सीखले ब्, उ लोग के जि्ब करल ज्छ। 11 एही से हर्र ब्त पर आपन सेह लग्छं। ओह लोग के इच् करीं, त तोहनी के कधक् करल ज्छ। 12 बरक् रकहर्रंकडत होल् आ कबो न् खतर होल्, हँ , ओकर् से पेर करे ि्ल् लोग से ओकर् के आस्नी से दे खल ज्ल् आ ओकर् के खोजे ि्ल् लोग के करल ज्ल्। 13 ऊ अपन् के च्हत लोग के पकहले अपन् के बत्िे से रोकत कबय्। 14 जे ओकर् के जली खोजत होछ ओकर् किनो बड पसि न् होछ, क्हे कक उ ओकर् के अपन् दर आर प बछठल प्छ। 15 एह से ओकर् ब्रे रे सोचल बरक् के कस्त् ह, आ जे ओकर् ख्कतर ज्गल ब्, उ जली से बेपरि्ह हो ज्छ। 16 क्हे कक ऊ अपन् ल्यक लोग के खोजत लूरत रहे ली, र््् रे ओह लोग के अनरकूलत् दे ख्िेली आ हर किच्र रे ओह लोग से करलत रहे ली। 17 क्हे कक ओकर असली धररआत अनरध्सन के इच् ह। आ अनरध्सन के दे ख््ल पेर ह; 18 पेर ओकर कनयर के प्लन ह। आ ओकर कनयरन पर ध्न कदहल अकिन्धी के आश्सन ह। 19 अकिन्धी हरनी के पररेशर के नजदीक ले आिेल्। 20 एही से बरक् के इच् एगो र्ज रे ले आिेल्। 21 हे लोग के र्ज् लोग, अगर तोहनी के कसंह्सन आ र्जदं ड रे ररल ब्, त बरक् के आदर करीं, त्कक तू लोग हरेध् ख्कतर र्ज करीं। 22 रहल ब्त बरक् के त ऊ क् हछ आ कइसे ऊपर आइल ब्डी, त हर तोहके बत्इब आ तोहनी से रहस न् कछप्छब, बलरक ओकर् जन के धररआत से ही ओकर् के खोजब आ ओकर् ब्रे रे ज्न के रोधनी रे ले आछब आ... सच्छ के ऊपर न् गरजरी। 23 न् हर छर्् के ्स कर के चलब। क्हे कक अइसन आदरी के बरक् से किनो स्झीद्री न् होछ। 24 लेककन ज्नी लोग के ्ीड दर कनय् के ्ल्छ ह, आ बरक्र्न र्ज् लोग के सह्र् ह। 25 एह से हरर् ब्त से कधक् गह् करऽ आ छ तोहर् के ्ल्छ करी।
अध्य के ब् 7 1 हरहँ नशर आदरी हछं, सबके जइसन आऊ धरती से पकहले बनल आदरी के संत्न हछं। 2 हरर् र्छ के पेट रे दस रहीन् के सरय रे खून से संकरकचत होके आदरी के संत्न आ नींद के स्थे करले ि्ल् सरख के र्ं स बनल रहे । 3 जब हर जनरनी त हर आर हि् रे खींच के धरती पर कगर गइनी जिन कक ओही तरह के पकरकत के ह, आ सबसे पकहले जिन आि्ज हर सरननी ऊ कचल्त रहे , जइसे कक ब्की लोग करे ले। 4 हरर् के लपेट के कपड् रे दू ध कपय्िल गइल आ ऊ कचंत् से। 5 क्हे कक अइसन किनो र्ज् नइखे जेकर जनर के धररआत दोसर होखे। 6 क्हे कक सब आदरी के जीिन रे एके गो पिेध होल् आ अइसने लोग के ब्हर कनकले के र््् ब्। 7 एही से हर प्थ्न् कइनी आ हरर् के सरझ करलल। 8 हर र्जदं ड आ कसंह्सन से पकहले ओकर् के पसंद करत रहनी आ ओकर् तर लन् रे धन के करछर ओ न् र्नत रहनी। 9 हर ओकर् से किनो कीरती पतर के तर लन् न् कइनी क्हे कक ओकर् ब्रे रे सब सोन् तनी ब्लू कनयर ब् आ च्ँ दी के ओकर् स्रने र्टी के रप रे कगनल ज्छ। 10 हर ओकर् से स्व आ सरंदरत् से अकधक् प्र करत रहनी आ रोधनी के जगह ओकर् के प्िे के चरननी क्हे कक ओकर् से आिे ि्ल् रोधनी कबो न् बरझेल्। 11 ओकर् स्थे सब बकढय् चीज हरर् लगे करलल आ ओकर् ह्थ रे असंख धन करलल। 12 हर ओह सब रे खरध ्इनी क्हे कक बरक् ओह लोग के आगे चलत रहे ल् आ हर न् ज्नत रहनी कक ऊ ओह लोग के रहत्री हछ। 13 हर रेहनत से सीखनी आ ओकर् से उद्रत् से ब्त करे नी। 14 क्हे कक उ आदरी ख्कतर एगो खज्न् हछ जिन कबो न् खतर होखेले, जिन् के इ्ेर्ल करे ि्ल् लोग पररेशर के दो् बन ज्ल्, आ सीखल् से करले ि्ल् िरद्न के चलते त्रीफ हो ज्ल्। 15 ्गि्न हरर् के जइसन च्हत ब्नी ओइसन बोले के आ हरर् के कदहल चीजन ख्कतर जइसन उकचत ग््ध्र् करे के अनररकत दे ले ब्डन, क्हे कक उहे बरक् के ओर ले ज्ल् आ बरक्र्न के कनद् कधत करे ल्। 16 क्हे कक हरनी के आ हरनी के ब्त उनकर् ह्थ रे ब्। सब बरक् ्ी, आ क्रीगरी के ज्न ्ी। 17 क्हे कक उ हरर् के ओह चीजन के ब्रे रे करछ ज्नक्री दे ले ब्डन, जिन कक दर कनय् के कनर्् ् आ ततन के क्रक्ज के ब्रे रे ज्ने के ब्। 18 सरय के धररआत, अंत आ बीच, सूरज के लरर्ि आ रौसर के बदल्ि। 19 स्लन के चकर आ त्र् के क्कत। 20 जीि-जनर के स््ि आ जंगली ज्निरन के कोध, हि् के कहं स् आ आदरी के तक्, पौध् के किकिधत् आ जड के गर्।
21 आऊ सब ब्त जिन गरप ब् य् पकट ब्, उ सब हर ज्नत ब्नी। 22 क्हे कक हर चीज के क्र करे ि्ली बरक् हरर् के कसखिलस, क्हे कक ओकर् रे एगो सरझद्र आत् पकित ब्, एकही, कछ तरह के, सूक, जीिंत, स्फ, कनर्ल, स्द्, आहत न् होखे ि्ल्, अच् क्र से पेर करे ि्ल् जली, जिन् के न् कदहल ज् सके, ्ल्छ करे ख्कतर तइय्र, 23 आदरी के पकत दय्लर, अकडग, कनकशंत, परि्ह से रर्, पूर् धक् ि्ल्, सब करछ के दे खरे ख करे ि्ल्, आ पूर् सरझ, धर् आ सूक आत् से गरजरे ि्ल्। 24 क्हे कक बरक् किनो गकत से ्ी ज्द् कहलत-डर लत होले , उ अपन् धर्त् के चलते सब करछ से गरजरत रहे ली। 25 क्हे कक उ पररेशर के धक् के स्ँ स हछ आ सि्धक्र्न के रकहर् से बहत धर् प््ि हछ। 26 क्हे कक ऊ अनन पक्ध के चरक ह, पररेशर के धक् के बेद्ग आछन् हछ आ उनकर ्ल्छ के पकतरप हछ। 27 एकल होखल् के न्ते ऊ सब करछ कर सकेली आ अपन् रे रह के सब करछ नय् बन्िेली आ हर यरग रे पकित आत् रे लरस के ओह लोग के पररेशर के दो् आ ्किरि्् बन् दे ली। 28 क्हे कक पररेशर केह से पेर न् करे लन, कसि्य बरक् के स्थ रहे ि्ल् के। 29 क्हे कक ऊ सूरज से आ त्र् के कर से ्ी सरंदर ब्डी। 30 क्हे कक एकर् ब्द र्त आिेल्, लेककन बरक् के कखल्फ कररीकत ह्िी न् होछ। अध्य के ब् 8 1 बरक् एक छोर से दू सर् छोर तक जोरद्र तरीक् से पहं चेले अिररी उ सब चीज के रीठ तरीक् से विक्त करे ले। 2 हर ओकर् से प्र करत रहनी, आ जि्नी से ओकर् के खोजत रहनी, ओकर् के आपन जीिनस्थी बन्िे के इच् रहे , आ हर ओकर् सरंदरत् के पेरी रहनी। 3 ऊ ्गि्न से पररकचत होके आपन करलीनत् के बड्छ करे ली, हँ , सब चीजन के र्कलक खरद ओकर् से प्र कइलन। 4 क्हे कक उ पररेशर के ज्न के रहस से पररकचत हछ आ उनकर क्र के पेरी हछ। 5 अगर एह जीिन रे धन के इच् होखे; बरक् से ्ी धनी क् ब् जिन सब क्र करे ल्? 6 आ अगर कििेक क्र करे ल् त; जेकर् रे से के ब्, ओकर् से ज्दे धूत् रजदू र ब्? 7 अगर आदरी ध्कर्कत् से पेर करे ल् त ओकर रेहनत गर् ह, क्हे कक ऊ संयर आ कििेक, न्य आ धैय् के कसख्िेले, जिन अइसन चीज ह, जइसे कक आदरी के जीिन रे एकर् से ज्द् फ्यद् करछ न् हो सकेल्। 8 अगर आदरी के बहत अनर्ि के इच् होखे त उ परर्न ब्त के ज्नत कबय् अिररी आिे ि्ल् ब्त के सही तरीक् से अनरर्न लग्िेले, उ ््ष् के सूकत् के ज्नत कबय् अिररी अन्र ि्क के सरझ् सकेले, उ चरत्र अिररी चरत्र अिररी रौसर अिररी सरय के लटन् के पकहले से दे खत कबय्।
9 एही से हर ओकर् के अपन् संगे रहे ख्कतर ले ज्ए के इर्द् रखनी, क्हे कक उ इ ज्न के कक उ नीरन ब्त के सल्ह दे िे ि्ली होछ अिररी कचंत् अिररी दर ख रे कदल्स् कदही। 10 ओकर् ख्कतर हर ्ीड के बीच आदर करब आ बडक् लोग के आदर, ्ले हर छोट ब्नी। 11 हर न्य रे जली लरंडी होखब आ बडक् लोग के नजर रे हर्र पधंस् होखब। 12 जब हर आपन जी् पकडब त उ लोग हरर् फररसत के इं तज्र करीहे अिररी जब हर बोलब त उ लोग हरर् के बकढय् से क्न कदहे । 13 ओकर् से हर अररत् प् लेब आ हरर् ब्द आिे ि्ल् लोग ख्कतर एगो अनन सर् छोडब। 14 हर लोग के विक्त करब आ र्ष् हरर् अधीन हो जइहे । 15 ्य्िह अत्च्री लोग हरर् ब्रे रे सरनल् पर डे र् जइहे । हर ्ीड के बीच अच् आ यर् रे िीर करलब। 16 हर अपन् लर रे अइल् के ब्द ओकर् स्थे आर्र करब, क्हे कक ओकर ब्त रे किनो कडि्हट न् होल्। आ ओकर् स्थे रहे रे किनो दर ख न् होल्, बलरक उल्स आ उल्स होल्। 17 जब हर अपन् रन रे एह ब्तन पर किच्र कइनी आ रन रे रनन कइनी कक बरक् से जरड्ि कइसे अररत् ह। 18 आ ओकर दो्ी करलल् से बहत खरधी होल्। आ ओकर् ह्थ के क्र रे अनंत धन ब्। आ ओकर् स्थे समे लन के पयोग रे कििेक; आ ओकर् से बकतय्िे रे एगो बकढय् ररपोट् ; हर खोजत लूर गइनी कक ओकर् के अपन् लगे कइसे ले ज्इल ज्ि. 19 क्हे कक हर एगो चरटील् लइक् रहनी आ ओकर रन बकढय् रहे । 20 बकल हर कनरन होके कनद्ष धरीर रे आ गछनी। 21 तबकहयो जब हर बरझनी कक जबले ्गि्न ओकर् के न् दे सर, हर ओकर् के दोसर् तरीक् से न् प् सकीं। आ छहो एगो बरक् के कबंदर रहे कक ऊ केकर िरद्न हछ; हर प्र से प्थ्न् कइनी आ उनकर् से कनहोर् कइनी आ पूर् रन से कहनी। अध्य के ब् 9 1 हे हर्र पूि्ज के पररेशर, दय् के प्र, जे तोहर् िचन से सब करछ बनिले ब्नी। 2 तोहर् बरक् से आदरी के कनयर् कइले कक ऊ तू जिन प््ी बनिले ब्डऽ ओकर् पर ओकर प्रत र्खे। 3 आ दर कनय् के न्य आ ध्कर्कत् के अनरस्र विक्त करीं आ सीध् रन से न्य करीं। 4 हरर् के बरक् दऽ, जिन तोहर् कसंह्सन के लगे बइठल ब्। आ हरर् के अपन् लइकन के बीच से रत ठर कर्छं। 5 क्हे कक हर तोह्र नौकर आ तोह्र द्सी के बेट् करजोर हछं, कर सरय के हछं आ न्य आ क्नून के सरझे ख्कतर बहत छोट हछं। 6 आदरी के संत्न के बीच ्ले ही आदरी कबो एतन् कस् न् होखे, लेककन अगर तोह्र बरक् ओकर् संगे न् होछ त ओकर् के किनो ब्त न् र्नल ज्छ।
7 तू हरर् के अपन् लोग के र्ज् आ अपन् बेट्-बेटी के न्य्धीध बने ख्कतर चरनले ब्डू। 8 तू हरर् के आपन पकित पह्ड पर एगो रंकदर बन्िे के आज् दे ले ब्डू, जिन् धहर रे तू रहत ब्डू, ओह धहर रे एगो िेदी बन्िे के जिन पकित तमू से करलत जरलत ब्, जिन तू धरर से तइय्र कइले ब्डू। 9 बरक् तोहर् स्थे रहे , जिन तोह्र क्र के ज्नत रहे आ दर कनय् के बन्िे के सरय रौजूद रहे , आ ज्नत रहे कक तोहर् नजर रे क् सीक्य् ब् आ तोहर् आज् रे क् सही ब्। 10 हे ओकर् के अपन् पकित आक्ध से आ अपन् रकहर् के कसंह्सन से ्ेज दीं, त्कक उ हरर् संगे रेहनत करस, त्कक हर ज्न सकी कक तोहर् क् पसंद ब्। 11 क्हे कक उ सब करछ ज्नत कबय् आ सरझत कबय्, आ हरर् के अपन् क्र रे संयर से अगरि्छ करी अिररी हरर् के अपन् धक् रे बच् के र्खी। 12 एही तरे हर्र क्र सीक्य् हो ज्छ आ तब हर तोहर् लोग के ध्कर्क न्य करब आ अपन् कपत् के आसन पर बछठे ल्यक होखब। 13 क्हे कक उ किन आदरी ह जे पररेशर के सल्ह के ज्न सकेल्? ्् के सोच सकेल् कक प्र के इच् क् ह? 14 क्हे कक नशर आदरी के किच्र दयनीय ब् आ हरनी के षडंत अकनकशत ब्। 15 क्हे कक न्ध होखे ि्ल् धरीर आत् के दब् दे ल् आ र्टी के तमू बहत करछ पर कचंतन करे ि्ल् कदर्ग के बोझ दे ल्। 16 हरनी के धरती पर रौजूद चीजन के ब्रे रे ध्यदे सही अंद्ज् लग्िल ज् सकेल् आ रेहनत से हरनी के स्रने के चीजन के खोजल ज् सकेल्। 17 आ तोह्र सल्ह के ज्नत होछ कक जबले तू बरक् न् दे ब आ ऊपर से आपन पकित आत् न् ्ेजब? 18 एही से धरती पर रहे ि्ल् लोग के र््् रे सरध्र ्इल आ आदरी के ऊ ब्त कसख्िल गइल जिन तोहर् नीक ल्गेल् आ बरक् के द्र् उ््र करलल। अध्य के ब् 10 1 उ दर कनय् के पकहल् बनल कपत् के बच् के रखली, जिन अकेले बनल रहले अिररी ओकर् के कगरल् से ब्हर कनक्ल दे ली। 2 आऊ ओकर् के सब चीजन पर र्ज करे के अकधक्र कदहलन। 3 लेककन जब अधर् लोग अपन् कोध रे ओकर् से दू र हो गछल त उ अपन् ््छ के हत् के कोध रे न्ध हो गछल। 4 जेकर् क्र् से धरती जलपलय रे डूब गइल, बरक् ओकर् के फेर से बच् कलहलस आ धर् लोग के र््् के एगो छोट कीरत के लकडी के टर कड् रे कनद् कधत कइलस। 5 एकर् अल्ि्ं , र्ष् लोग अपन् दर ष स्कजध रे लकजत होके धर् लोग के पत् लग् के ओकर् के पररेशर के स्रने कनद्ष बन् के रखली आ ओकर् के अपन् बेट् के पकत कोरल कर्् के कखल्फ रजबूत रखली।
6 जब अ्् लोग के न्ध हो गइल त ऊ ओह धर् आदरी के बच् कदहली जिन प्ं च धहरन पर कगरल आग से ््ग गइल। 7 आजर ले धरँआ उड्िे ि्ल् उज्ड ्ूकर आ फल दे िे ि्ल् पौध् जिन कबो न् प्क प्िेल्, ओकर दर षत् के गि्ही ब्, आ नरक के खड् खं्् अकिश्सी आत् के स्रक ह। 8 क्हे कक उ लोग बरक् के ब्रे रे न् ख्ली इहे चोट न् पहं चिले कक उ लोग अच् ब्त के न् ज्नत रहले। लेककन उ लोग के पीछे दर कनय् के स्रने आपन रूख्त् के य्द ्ी छोड गछले, त्कक जिन् चीज रे उ लोग ठे स पहं चिले रहले , ओकर् रे उ लोग एतन् ्ी कछपल न् रहले। 9 लेककन बरक् ओकर् के पीड् से रर् कर कदहलस। 10 जब धर् लोग अपन् ््छ के कोध से ््ग गछल त उ ओकर् के सही र्ह पर ले गछली, ओकर् के पररेशर के र्ज के ब्रे रे बत्ित रहली अिररी पकित चीज के ज्नक्री दे ली, उनरक् के य्त् रे अरीर बनिली अिररी उनरक् रेहनत के फल के बढ् दे ली। 11 जे लोग ओकर् पर अत्च्र करत रहे ओकर लो् रे ऊ ओकर् स्थे खड् होके ओकर् के अरीर बन् कदहली। 12 ऊ ओकर् दर शनन से बच्ि कइली आ ओकर् के इं तज्र रे पडल लोग से सररककत रखली आ एगो कड् संलष् रे ओकर् के जीत कदहली। त्कक ऊ ज्न सके कक ्ल्छ स्से रजबूत होल्। 13 जब धर् के बेचल गइल त ऊ ओकर् के न् छोडली, बलरक ओकर् के प्प से रर् कर कदहली आ ओकर् स्थे गड् रे उतरली। 14 जबले ऊ ओकर् पर र्ज के र्जदं ड आ ओकर् पर अत्च्र करे ि्ल् लोग के कखल्फ अकधक्र न् ले अइली, तब तक ओकर् के बंद न् छोड कदहली। 15 उ धर् लोग आ कनद्ष संत्न के ओह र्ष् से बच् कलहली जिन ओह लोग के अत्च्र करत रहे । 16 उ प्र के सेिक के आत् रे लरस गछली अिररी चरत्र अिररी चरत्र रे ्य्िह र्ज् के स्रन् कछली। 17 धर् लोग के रेहनत के इन्र कदहलन, अद् ्रत तरीक् से र्ग्दध्न कइलन आ कदन रे ओह लोग ख्कतर ढं कल आ र्त रे त्र् के रोधनी बनल। 18 ओह लोग के ल्ल स्गर के बीच से ले अइले आ बहत प्नी रे ले गइलन। 19 ब्ककर ऊ ओह लोग के दर शनन के डूब् कदहली आ गकहर्ह के तल से ब्हर फेक कदहली. 20 एही से धर् लोग अ्् लोग के लूटत रहले , हे प्र, तोह्र पकित न्र के ्रकत करत रहले अिररी एक रन से तोह्र ह्थ के बड्छ कछले, जिन कक ओ लोग ख्ती लडत रहे । 21 क्हे कक बरक् गूंग् लोग के ररँह खोल कदहलस आ जे लोग बोल न् प्िेल्, ओकर जी् के ि्कटर बन् कदहलस। अध्य के ब् 11 1 उ पकित ्किरि्् के ह्थ रे उनकर क्र के सरर् कइली।
2 ऊ लोग ओह जंगल रे ज्के जह्ँ किनो र््् न् रहे , ओकहज् डे र् खड् कइल। 3 उ लोग अपन् दर शनन के कखल्फ खड् होके अपन् किरोकधयन से बदल् लेत रहले। 4 जब ऊ लोग प्स ल्गल त ऊ लोग तोहर् के परक्रत रहे आ चकरक पतर से प्नी करल गइल आ कठोर पतर से ओह लोग के प्स बरझ गइल। 5 क्हे कक जिन् चीज से उनकर दर शनन के सज् करलल, उहे चीज से उ लोग के जररत पडल। 6 क्हे कक गंद् खून से परे ध्न हरेध् बहत नदी के जगह। 7 तू ओह आज् के सष ड्ं ट ख्कतर जिन् से कधधर के र्रल गइल रहे , तू ओह लोग के अइसन तरीक् से ्रपूर प्नी दे ले रहलू जिन् के उमीद ऊ लोग न् कइले रहे । 8 तब प्स से लोष्् करत कक तू ओह लोग के किरोकधयन के कइसे सज् दे ले ब्डू। 9 जब उ लोग पर परीक् रे आित रहले , लेककन दय् से सज् करलत रहले , त उ लोग ज्नत रहले कक कइसे अ्् लोग के कोध रे न्य कछल ज्ल् अिररी उ लोग धर् लोग के अल्िे दोसर् तरीक् से प्सल रहले। 10 क्हे कक तू एह लोग के सल्ह कदहनी आ कोकधध करत रहलू, ब्प के रप रे, लेककन दू सर् के कठोर र्ज् के रप रे तू दोषी कदहनी आ सज् कदहनी। 11 च्हे उ लोग अनरपक्त रहले ्् रौजूद रहले , उ लोग एके कनहन परे ध्न रहले। 12 क्हे कक ओह लोग पर दर गरन् दर ख आउर पकहले के ब्त के य्द करे ख्कतर कर्ह उठल। 13 जब उ लोग अपन् सज् से दू सर् के फ्यद् उठ्िे के ब्त सरनले त उ लोग के प्र के ब्रे रे करछ ््ि रहे । 14 क्हे कक ऊ लोग कतरस्र से आदर करत रहे , जब ऊ बहत पकहले कधधर के फेकल् पर फेकल गइल रहे , आ आकखर रे जब ऊ लोग जिन ्इल ओकर् के दे ख के ओकर पधंस् करत रहे । 15 लेककन उ लोग के दर षत् के रूख्त्पू्् योजन् के चलते, जिन् से उ लोग बेिकूफी ्रल स्ँ प अिररी नीच ज्निर के पूज् करत रहले, एहसे तू बदल् लेिे ख्ती ओ लोग प बेिजह ज्निर के ्ीड ्ेज दे नी। 16 त्कक उ लोग ज्नस कक आदरी जिन् से प्प करे ल्, ओकर् के सज् ्ी करल ज्छ। 17 क्हे कक तोह्र सि्धक्र्न ह्थ, जिन पद्थ् के दर कनय् के कबन् रप के बनिले , ओकर् बीच रे ््लू ्् उग धेर के ्ीड ्ेजे के स्धन के करी न् रहे । 18 य् अनज्न जंगली ज्निर, कोध से ्रल, नय् सरकजत, य् त आग के ि्ष य् कबखर्इल धरँआ के गंद् गंध के स्ँ स कनक्लत ब्डे , य् आँ ख से ्य्नक चरक कनक्लत ब्डे । 19 जिन् के नरकस्न न् ख्ली एके बेर रे ्ेज सकेल्, बलरक ्य्नक नज्र् ्ी ओ लोग के पूर् तरह से न्ध कर सकेल्। 20 हँ , आ एह लोग के कबन् ऊ लोग एके धर्क् से कगर गइल रकहत, बदल् लेबे के सत्िल गइल आ तोहर् धक् के स्ँ स से कबखर गइल रकहत, ब्ककर तू सब करछ न्प आ संख् आ िजन के कहस्ब से करब् कइले ब्डऽ।
21 क्हे कक तू हर सरय जब रन करे त आपन बडहन त्कत दे ख् सकेनी। आ तोहर् ब्ँ कह के त्कत के के स्रन् कर सकेल्? 22 क्हे कक तोहर् स्रने पूर् दर कनय् तर्जू के एगो छोट द्न् कनयर ब्, जइसे कक ्ोर के ओस के बूंद धरती पर कगरत ब्। 23 लेककन तू सब पर दय् करत ब्डू। क्हे कक तू सब करछ कर सकेलऽ आ आदरी के प्प के आँ कख करचौनी कर सकेनी क्हे कक ऊ लोग सरध्रे ि्ल् ब्. 24 क्हे कक तू जिन करछ ब् ओकर् से प्र करे लऽ आ जिन करछ बनिले ब्डऽ ओकर् से लर्् न् करे लऽ क्हे कक अगर तू ओकर् से नफरत करत रकहतऽ त तू कबो किनो चीज न् बनिले रकहतऽ। 25 अगर तोह्र इच् न् रकहत त किनो चीज कइसे कटक सकत रहे ? ्् संरककत कइल गइल ब्, अगर तोहर् द्र् न् बोल्िल गइल? 26 लेककन तू सबके बखत ब्डू, क्हे कक हे प्र, तू प््ी के पेरी, उ लोग तोह्र ह। अध्य के ब् 12 1 क्हे कक तोह्र अकिन्धी आत् सब करछ रे ब्। 2 एही से तू ओह लोग के तकनक्-रनी सज् दे त ब्डऽ आ जिन् के अपर्ध कइले ब् ओकर् के य्द कर के चेत्ित ब्नी कक हे प्र, आपन बरर्छ छोड के तोहर् पर किश्स कर सके। 3 क्हे कक तोह्र इच् रहे कक हरनी के पररखन के ह्थ से तोहर् पकित दे ध के परर्न कनि्सी दर नर के नष कर दीं। 4 तू ओकर् से नफरत करत रहलू कक ऊ ज्दू -टोन् आ दर ष बकलद्न के लरक्त क्र करे ल्। 5 आऊ लइक्-लइकी के हत् करे ि्ल्, आ आदरी के र्ं स ख्ए ि्ल् आ खून के ्ोज के कनद् यत् से ्ी। 6 अपन् रूकत् पूजक दल के बीच से उनकर य्जक आ र्त्कपत् जे रदद से िंकचत प््ी के अपन् ह्थ से र्रत रहले। 7 त्कक जिन दे ध के तू सब से ऊपर र्नत ब्डू, ओकर् के पररेशर के संत्न के एगो योग उपकनिेध करल सके। 8 तबकहयो तू ओह लोग के ्ी आदरी के रप रे बखले रहलू आ अपन् सेन् के अगदू त ततै य् ्ेजनी कक ऊ लोग के धीरे -धीरे न्ध करस। 9 छ न् कक तू अ्् लोग के लड्छ रे धर् लोग के ह्थ रे ले आिे रे असरथ् रहलू , न् ही कूर ज्निरन से, य् एक कच् धब से एके बेर रे न्ध न् कर पिनी। 10 लेककन तू ओह लोग पर आपन फैसल् के धीरे -धीरे प्लन करत, तू ओह लोग के पश्त्प के जगह दे कदहनी, आ छ न् ज्नत रहलू कक ऊ लोग एगो नटखट पीढी हिे आ ओह लोग के दर ््् िन् पैद् ्इल ब् आ ओह लोग के कचंतन कबो न् बदली। 11 क्हे कक छ धरर से ही एगो अक्धप िंध रहे । न् त केह के डर से ओह लोग के र्फी दे हनी जिन् रे उ लोग प्प कछले रहले। 12 क्हे कक के कही कक तू क् कइले ब्डू? क् तोह्र न्य के के स्रन् करी? क् तोहर् के न्ध होखे ि्ल् र्ष्न
ख्कतर के आरोप लग्छ, जेकर् के तू बनिले ब्डू? य् तोहर् कखल्फ के खड् होके अधर् लोग के बदल् लेिे ख्कतर आछ? 13 क्हे कक तोहर् अल्ि् किनो ्गि्न नइखे जे सबके परि्ह करे ले , जेकर् के तू बत् सकत ब्नी कक तोह्र न्य गलत नइखे। 14 जेकर् के तू सज् दे ले ब्डू ओकर् ख्कतर न् त र्ज् ्् अत्च्री तोहर् कखल्फ आपन ररँह न् खड् कर प्छ। 15 एही से जइसे तू खरद धर् हछं, तूँ सब ब्त के धर् तरीक् से विक्त करत ब्डू, आ ओकर् के सज् दे िे के हकद्र न् होखे ि्ल् के दोषी ठहर्िल अपन् धक् से सहरत न् सरझत ब्डू। 16 क्हे कक तोह्र धक् धर् के धररआत ह, आ क्हे कक तू सबके र्कलक हउअ, छ तोहर् के सबके पकत करप् करे ले। 17 जब आदरी किश्स न् करी कक तू पूर् त्कत के ब्डू त तू आपन त्कत दे ख्िे आ ओकर् के ज्ने ि्ल् लोग के बीच तू ओकर कहमत के पकट करऽ। 18 लेककन तू अपन् धक् रे रह्रत ह्कसल क के न्य के न्य करीं आ हरनी के बहत अनरगह से विक्त करीं, क्हे कक तू जब रन करे त स्् के पयोग कर सकेनी। 19 लेककन अइसन क्र से तू अपन् लोग के कसखिले ब्डू कक धर् आदरी दय्लर होखे के च्हीं, आ अपन् लइकन के एगो बकढय् आध् पैद् कइले ब्डऽ कक तू प्प ख्कतर पश्त्प करऽ। 20 अगर तू अपन् लइक्-लइकी के दर शनन आ फ्ँ सी के सज् प्िे ि्ल् लोग के अतन् सोच-सरझ के सज् दे ब आ ओकर् के सरय आ जगह दे ब कक ऊ लोग अपन् दर ््् िन् से रर् हो सके. 21 तू अपन् बेट् लोग के केतन् स्िध्नी से न्य कइनी, जेकर् ब्प-द्द् के ककररय् खइले ब्डऽ आ बकढय् ि्द् कइले ब्डऽ? 22 एह से जब तू हरनी के त्डत ब्डू, हरनी के दर शनन के हज्र गरन् ज्द् कोड् र्रत ब्डू, त्कक जब हरनी के न्य करब ज् त हरनी के तोह्र ्ल्छ के ब्रे रे ध्न से सोचे के च्हीं आ जब हरनी के खरद के न्य होखे त हरनी के दय् के तल्ध करे के च्हीं। 23 एही से जब आदरी उथल-परथल आ अधर् तरीक् से कजयले ब्, तू ओह लोग के कलनौन् क्र से सत् दे ले ब्डू। 24 क्हे कक उ लोग गलती के र््् से बहत दू र ्टक गछले अिररी ओ लोग के दे ित् के रप रे पकडले रहले, जिन कक अपन् दर शन के ज्निर के बीच ्ी कतरस्र कछल ज्त रहले अिररी धोख् ख्त रहले, क्हे की उ लोग बेबरकनय्द बच् कनहन रहले। 25 एह से तू ओह लोग के रज्क उड्िे ख्कतर न्य ्ेजले ब्डू, जइसे कक लइक्-लइकी के कबन् तक् के। 26 लेककन जे लोग ओह सरध्र से सरध्र न् च्हसर , जिन् रे ऊ ओह लोग के स्थे रेल करल्प कइले रहले, ऊ लोग ्गि्न के ल्यक न्य रहसूस करीहे । 27 दे खऽ कक जब ऊ लोग सज् करलत रहे त ऊ लोग किन् ब्त से न्र्ज रहे , र्ने कक जेकर् के ऊ लोग दे ित् सरझत रहे । अब ओह लोग रे सज् करलल् पर जब ऊ लोग छ दे ख के ओकर् के सच् ्गि्न र्न कलहल, जेकर् के ज्ने से
पकहले इनक्र करत रहे , आ एही से ओह लोग पर चरर दण आ गइल। अध्य के ब् 13 1 कनशय ही सब आदरी स््ि से वथ् हिे, जे पररेशर से अनज्न हिे , आ जिन अच् चीज दे खल ज् रहल ब्, ओकर् से न् ज्न पिले, न् ही क्र पर किच्र करके क्र के र्कलक के सीक्र कइले। 2 लेककन आग, य् हि्, य् ते ज हि्, य् त्र् के चकर, य् ते ज प्नी य् सग् के रोधनी के दर कनय् के ध्सन करे ि्ल् दे ित् र्नल ज्ल्। 3 जेकर सरंदरत् से अगर उ लोग खरध होके दे ित् बन् लेले रहले। ओह लोग के पत् चल ज्ि कक ओह लोग के प्र केतन् बकढय् ब्डन क्हे कक सरंदरत् के पकहल् लेखक ओह लोग के बनिले ब्डन. 4 लेककन अगर उ लोग अपन् धक् आ गर् से अचरज रे पड गछले त उ लोग के ब्त से सरझे कक उ लोग के बन्िे ि्ल् केतन् त्कतिर ब्डे । 5 क्हे कक प््ी के रह्नत् आ सरंदरत् से ओह लोग के कनर्् त् के आनरप्कतक रप से दे खल ज्ल्। 6 लेककन एकर् ख्कतर उ लोग के दोष कर ब्, क्हे कक उ लोग ध्यद गलती से ्गि्न के खोजत ब्डे अिररी उनरक् के खोजे के च्हत ब्डे । 7 क्हे कक उ लोग उनकर क्र रे पररकचत होके उनकर् के पूर् तरह से खोजत ब्डे आ अपन् दकष पर किश्स करे लन, क्हे कक जिन चीज दे खल ज्ल् उ सरनर होल्। 8 ब्ककर न् ही ओह लोग के र्फ करे के च्हीं। 9 अगर उ लोग एतन् करछ ज्न सकत रहले कक उ लोग दर कनय् के ओर कनध्न् बन् सकत रहले। कइसे ऊ लोग जली ओकर प्र के पत् न् चलल? 10 लेककन उ लोग दयनीय ब्डे अिररी ररअल चीज रे उनरकर आध् ब्, जिन कक उनरक् के दे ित् कहे ले, जिन कक आदरी के ह्थ के क्र ह, सोन्-च्ं दी, त्कक उ लोग ज्निर अिररी बेक्र पतर के क्र के दे ख्िे एगो प्चीन ह्थ के। 11 एगो बढछ जिन लकडी क्टे ल्, ओकर् ब्द एगो पेड के आरी से क्ट के च्रो ओर के सब छ्ल के करधलत् से उत्र के ओकर् के सरनर बन् के ओकर् के आदरी के ज्न के सेि् ख्कतर एगो बत् न बन् लेल्। 12 अपन् क्र के कचर् अपन् ख्न् के सजि्िे रे खरच कइल् के ब्द ऊ अपन् के ्र कलहले ब्। 13 जिन कचर् बेरतलब के क्र करत रहे , ओकर् के लकडी के टे ढ टर कड् आ ग्ँ ठ से ्रल होखल् के न्ते , जब ओकर् लगे अउरी करछ करे के न् रहे , त ओकर् के पूर् रेहनत से उकेर के ओकर् के अपन् सरझ के कौधल से बनिले ब्, आ... एकर् के आदरी के पकतरप के रप रे फैधन कइले ब्; 14 य् कफर ओकर् के किनो नीच ज्निर कनहन बन् के ओकर् के कसंदूर रं ग से कबछ् के ओकर् के ल्ल रं ग से रं ग दे ले अिररी ओकर् हर जगह के ढं क दे ले। 15 ओकर् ख्कतर एगो सरगर कोठरी बन् के ओकर् के दे ि्ल रे रख के लोह् से जकड कदहलन।
16 क्हे कक उ एकर् के कगर न् दे िे के इं तज्र कछले, क्हे कक उ ज्नत रहले कक उ अपन् के बच्िे रे असरथ् ब्। क्हे कक छ एगो रूकत् ह आ ओकर् रदद के जररत ब्। 17 तब ऊ अपन् संपक् ख्कतर, अपन् रेहर्र आ लइकन ख्कतर प्थ्न् कर्िेल् आ जेकर् लगे ज्न नइखे ओकर् से ब्त करे रे ल्ज न् आिेल्। 18 स्व ख्कतर ऊ करजोर के परक्रत ब्, क्हे कक जीिन ररल चीज से प्थ्न् करे ल्। क्हे कक जेकर् लगे रदद करे के कर से कर स्धन ब् ओकर् से सह्यत् किनमत् से कनहोर् करे ल् आ बकढय् य्त् ख्कतर ऊ ओह चीज से र्ँ गेल् जे आगे गोड न् र्ख सके. 19 आऊ अपन् ह्थ के फ्यद् प्िे आ प्िे ख्कतर आ बकढय् सफलत् ख्कतर ओकर् से करे के करत् र्ँ गेल् जे किनो क्र करे रे असरथ् ब्। अध्य के ब् 14 1 फेर से केह जह्ज चल्िे ख्कतर तै य्र होके उग लहर से गरजरे ि्ल् लकडी के टर कड् के आि्ज दे ल् जिन ओकर् के ढोिे ि्ल् बत् न से ्ी ज्द् सडल ब्। 2 क्हे कक सचहँ ल्् के इच् उहे सोचलस आ रजदू र अपन् हनर से ओकर् के बनिले। 3 हे कपत्, तोह्र वि्् एकर् के चल्िेल्, क्हे कक तू सररंदर रे र््् बन् लेले ब्डू, आ लहर रे सररककत र््् बनिले ब्डू। 4 छ दे ख्ित कक तू हर खतर् से बच् सकेनी, हँ , ्ले केह कबन् कल् के सररद रे चल गइल होखे। 5 कफर ्ी तू न् च्हत रहलू कक तोह्र बरक् के क्र बेक्र होखे आ एही से आदरी आपन ज्न एगो छोट लकडी के टर कड् रे सौंप दे िे, आ करजोर बत् न रे खररदर र् सररंदर से गरजरल् से बच्िल ज्ल्। 6 क्हे कक परर्न सरय रे जब लरंडी कदगज लोग के न्ध होखत रहे त तोहर् ह्थ से चलत दर कनय् के आध् एगो करजोर बत् न रे ््ग गछल अिररी हर यरग के पीढी के बीज छोड गछल। 7 क्हे कक धन ब् ऊ लकडी जिन् से ध्कर्कत् आिेल्। 8 ह्थ से बनल चीज के ्ी अक्धप ब्, जइसे कक ओकर् के बन्िे ि्ल् के ्ी। आ छ, क्हे कक न्ध होखे ि्ल् होखल् के चलते एकर् के ्गि्न कहल ज्त रहे । 9 क्हे कक अ्् आ उनकर अ्् दर नर ्गि्न के लर्् करे ि्ल् हिे। 10 क्हे कक जिन बनल ब् ओकर् के बन्िे ि्ल् के संगे सज् कदहल ज्छ। 11 एह से गैर-यहदी लोग के रूकत् पर ्ी दं ग हो ज्छ क्हे कक पररेशर के सरकष रे उ लोग कलनौन् आ आदरी के आत् ख्कतर ठोकर आ अज्नी के गोड ख्कतर ज्ल बन गइल ब्। 12 क्हे कक रूकत् के कलन् से आध्कतक वक्च्र के धररआत ्इल आ ओकर आकिष्र जीिन के न्ध होखे। 13 न् ही उ लोग धरर से ही रहे आ न् ही हरेध् ख्कतर रही। 14 क्हे कक रनरर के वथ् रकहर् से उ लोग दर कनय् रे आछल ब्डे अिररी एहीसे उ लोग के अंत जली हो जछहे ।
15 क्हे कक जब असरय धोक से ग् ब्प अपन् लइक् के रूकत् बन् के जलीए छीन लेल् त अब ओकर् के दे ित् के रप रे आदर दे त रहे , जिन तब एगो ररल आदरी रहे आ अपन् अधीन रहल लोग के संस्र आ बकलद्न दे कदहलस। 16 एह तरह से सरय के स्थ एगो अ्् पथ् के रजबूती के रप रे प्लन कइल गइल आ र्ज् लोग के आज् के अनरस्र उकेरल रूकत् के पूज् कइल गइल। 17 जेकर् के लोग दू र रहत रहले , ओकर् के स्रने आदर न् कर सकत रहले, दू र से ओकर चेहर् के नकली कपड् लेके एगो र्ज् के छकि बनिले, जिन् के उ लोग सम्कनत करत रहले , त्कक उ लोग अपन् आगे बढल् से ओकर् के च्पलूसी करस अनरपक्त रहे, जइसे कक ऊ रौजूद होखे. 18 स्थ ही क्रीगर के एकल लगन अज्नी के अउरी अंधकिश्स के ओर ले ज्ए रे जरर रदद कछलस। 19 क्हे कक ऊ ध्यद अकधक्र रे आदरी के खरध करे के इचर क होके आपन पूर् कौधल के सबसे बकढय् फैधन के सर्नत् बन्िे ख्कतर रजबूर कर कदहलस। 20 एही से ्ीड क्र के अनरगह से लर्् के अब ओकर् के एगो दे ित् र्न कलहलस, जिन् के करछ पकहले त इजत करलत रहे । 21 छ दर कनय् के धोख् दे बे के रौक् रहे क्हे कक आदरी आफत ्् अत्च्र के सेि् करत पतर आ स्क के अपचकलत न्र दे त रहले . 22 उ लोग ख्कतर इहे क्फी न् रहे कक उ लोग पररेशर के ज्न रे गलती कछले| ब्ककर जह्ँ ऊ लोग अज्नत् के बडहन यर् रे कजयत रहे , ऊ अतन् बडहन किपक् ओह लोग के ध्ं कत कहत रहे . 23 जब उ लोग अपन् लइकन के बकलद्न रे र्रत रहले , य् गरप रप से रस-ररि्ज करत रहले , य् अजीब-अजीब संस्र के र्ी करत रहले। 24 उ लोग न् त जीिन के न् कबय्ह के कनद्ष रखले, लेककन य् त केह दोसर् के गद्र तरीक् से र्र दे ले, य् वक्च्र से दर खी कछले। 25 एह से सब आदरी रे खून, गैर इर्दतन हत्, चोरी, छे डख्नी, भष्च्र, बेिफ्छ, उथल-परथल, झूठ गि्ही के र्ज कइलस। 26 ्ल् आदरी के परे ध्न कइल, ्ल्छ के ्रल् कदहल, आत् के अधर् कइल, दय् बदलल, कबय्ह रे अवि््, वक्च्र आ कनल्ज अधर्त्। 27 क्हे कक रूकत् के पूज् जिन् के न्र न् बत्िल ज्ि, उ सब बरर्छ के धररआत, क्र् अिररी अंत ह। 28 क्हे कक य् त उ लोग र् होके प्गल हो ज्ल्, य् झूठ के ्किरि््ी करे ल्, य् अन्य के कजएल्, य् कफर हल् रे अपन् के ग्री दे िेल्। 29 क्हे कक उनकर ्रोस् रूकत् पर ब्, जिन् के किनो ज्न नइखे। ्ले ऊ लोग झूठ् ग्री दे त ब्, ब्ककर ऊ लोग के किनो नरकस्न न् होखे के लउकत ब्. 30 लेककन दर नो क्र् से उ लोग के न्यसंगत सज् कदहल ज्छ, क्हे कक उ लोग रूकत् के ध्न रे र्खत ्गि्न के ब्रे रे कनरन न् सोचले अिररी पकितत् के कतरस्र करत धोख् के ककररय् खछले।
31 क्हे कक उ लोग के अकधक्र न् ह जेकर् के कसर ख्ल्, लेककन प्पी लोग के न्यसंगत बदल् ह जिन हरेध् अ्् के अपर्ध के सज् दे िेल्। अध्य के ब् 15 1 लेककन हे ्गि्न, तू करप्लर आ सच् हउअ, धैय्ि्न आ दय् से सब करछ के विक्त करे ि्ल् हउअ। 2 अगर हरनी के प्प करब ज् त तोह्र धक् के ज्न के तोह्र हछ ज्, लेककन हरनी के प्प न् करब ज्, इ ज्न के कक हरनी के तोह्र कगनल गछल ब्नी ज्। 3 क्हे कक तोहर् के ज्नल पूर् ध्कर्कत् ह, हँ , तोहर् धक् के ज्नल अररत् के जड ह। 4 क्हे कक न् त आदरी के धर्रती आकिष्र हरनी के धोख् कदहलस आ न् ही किनो रूकत् के रं ग-कबरं ग से द्गद्र, कचतक्र के कनषल रेहनत। 5 जिन् के दे ख के रूख् लोग के ल्लस् करे ख्कतर लर््िेल् आ एही से ऊ लोग एगो ररल रूकत् के रप के च्हत करे ल् जिन् के स्ँ स नइखे। 6 जे ओकर् के बन्िेल्, ओकर् के च्हत ब्, आ ओकर पूज् करे ले , दर नो बरर्छ के पेरी हिे अिररी ओकर् प ्रोस् करे ल्यक ब्। 7 क्हे कक करम्र कोरल र्टी के संचय करे ि्ल् हर बत् न के बहत रेहनत से हरनी के सेि् ख्कतर बन्िेल्, हँ , उहे र्टी से ऊ बत् न बन्िेल् जिन स्फ-सरथर् क्र ख्कतर क्र करे ल् आ ओही तरह से उल् क्र करे ि्ल् सब बत् न ्ी बन्िेल्, लेककन जिन ब् दर नो रे से किनो पक्र के पयोग, करम्र खरद न्य्धीध होल्। 8 ऊ अपन् रेहनत के अशील तरीक् से इ्ेर्ल करत, उहे र्टी से एगो वथ् दे ित् बन्िेल्, उहे दे ित् जिन करछ पकहले खरद धरती से बनल रहे , आ करछ दे र रे ऊ ओही रे ि्पस आ ज्ल् जब ओकर उध्र कदहल गइल ज्न हो ज्छ र्ं ग कइले ब्डन. 9 ब्ककर ओकर कचंत् छ नइखे कक ओकर् ढे र रेहनत होखे आ न् ओकर उकरर कर होखे, बलरक सोन्र आ च्ं दी के क्र करे ि्ल् लोग से बेहतर होखे के कोकधध करे ल् आ पीतल के क्र करे ि्ल् लोग जइसन क्र करे के कोकधध करे ल् आ नकली चीज बन्िे के आपन रकहर् र्नेल्। 10 ओकर रन र्ख ब्, ओकर आध् धरती से ्ी नीच ब् आ ओकर ज्न र्टी से कर कीरती ब्। 11 क्हे कक उ अपन् बन्िे ि्ल् के न् ज्नत रहले , आ जे ओकर् रे एगो सककय आत् के पेर्् दे ले रहले अिररी कजंद् आत् के स्ं स लेले रहले। 12 लेककन उ लोग हरनी के जीिन के धगल र्नत रहले अिररी इह्ँ के सरय के फ्यद् के ब्ज्र र्नत रहले, क्हे कक उ लोग कहत्रे कक हरनी के हर र््् रे चलत होछ, ्ले उ बरर् तरीक् से होखे। 13 क्हे कक स्ं स्ररक पद्थ् से ्ंगरर बत् न आ उकेरल रूकत् बन्िे ि्ल् छ आदरी अपन् के सब से बेसी न्र्ज करे ि्ल् ज्नत ब्। 14 तोहर् लोग के सब दर शन जे ओह लोग के अधीन ब्, ऊ बहते रूख् हिे आ बहते बच् से ्ी दयनीय हिे।
15 क्हे कक उ लोग गैर-यहदी के सब रूकत् के दे ित् र्नत रहले , जिन् के न् त आं ख के क्र ब्, न् स्ँ स लेिे ख्कतर न्क के, न् सरनल् के क्न के, न् ह्थ के अँगररी के सं््ले रे। आ रहल ब्त ओह लोग के गोड के त ऊ लोग चले रे धीर् ब्. 16 क्हे कक आदरी ओह लोग के बनिले ब् आ जे अपन् आत् के उध्र लेले ब्, ओकर् के बनिले ब्, लेककन केह अपन् जइसन दे ित् के न् बन् सकेल्। 17 क्हे कक ऊ नशर होके दर ष ह्थ से ररल चीज के क्र करे ल्, क्हे कक ऊ जिन् चीजन के पूज् करे ल् ओकर् से ऊ खरदे बकढय् ब्, जबकक ऊ एक बेर कजंद् रहलन ब्ककर कबो न्. 18 हँ , ऊ लोग ओह ज्निरन के ्ी पूज् करत रहे जिन सबसे लरक्त होल्, क्हे कक एक दोसर् के तर लन् रे करछ लोग दोसर् से ्ी बरर् होल्। 19 न् ही उ लोग ओतन् सरंदर नछखन, जेतन् कक ज्निर के पकत ि्ं कछत होखे के च्ही, लेककन उ लोग ्गि्न के ्रकत अिररी उनरकर आधीष के कबन् चल गछले। अध्य के ब् 16 1 एही से ओह लोग के उकचत सज् कदहल गइल आ ज्निरन के ्ीड से सत्िल गइल। 2 जिन् सज् के बदले तू अपन् लोग के स्थे दय्लरत् से विह्र करके ओह लोग ख्कतर एगो अजीब स्द के र्ं स, बटे र तक के ख्न् बन् के ओह लोग के ्ूख के ्डक्िे के क्र कइनी। 3 एह ख्कतर कक ऊ लोग ्ोजन के च्हत रे से ओह लोग के बीच ्ेजल ज्निरन के कररप दकष से लर्् कर सके, जिन् के च्हत होखे के च्हीं। ब्ककर कर सरय ख्कतर गरीबी के कधक्र होखे ि्ल् एह लोग के किनो अजीब स्द के ््गीद्र बन्िल ज् सकेल्. 4 क्हे कक अत्च्र करे ि्ल् लोग पर गरीबी आिे के जररत रहे , जिन् से ऊ लोग बच न् सकत रहे , ब्ककर एह लोग के ख्ली छ बत्िल ज्ि कक ओह लोग के दर शनन के कइसे सत्िल गइल. 5 जब ज्निरन के ्य्िह उगत् एह लोग पर आइल आ ऊ लोग टे ढ स्ँ प के डं क से न्ध हो गइल त तोह्र कोध हरेध् ख्कतर न् रहल। 6 लेककन उ लोग करछ सरय ख्कतर परे ध्न हो गछले त्कक उ लोग के सल्ह कदहल ज् सके कक उ लोग के उ््र के कनध्नी होखे त्कक उ लोग के तोह्र वि्् के आज् के य्द करस। 7 क्हे कक जे अपन् के ओकर् ओर ररडल ओकर् के उ दे खल् से न्, बलरक तोहर् से बच्िल गछल, जिन कक सबके उ््रकत्् हछ। 8 एही रे तू अपन् दर शनन के कबूल करिनी कक तू ही हर बरर्छ से ररक् दे िे ि्ल् हउअ। 9 ओह लोग ख्कतर कटडी आ रकी के क्ट के र्र कदहल गइल आ न् ही ओह लोग के ज्न के किनो उप्य करलल क्हे कक ऊ लोग अइसनक् लोग के सज् प्िे ल्यक रहे ।
10 तोह्र बेट् जहरील् अजगर के द्ँ त न् जीत पिले, क्हे कक तोह्र दय् हरेध् ओ लोग प रहे अिररी ओकर् के ठीक करत रहे । 11 क्हे कक उ लोग के चर्न कदहल गछल रहे कक उ लोग तोह्र ब्त के य्द करस। आ जली से उ््र हो गइलन कक गकहर्ह ्रल्ए रे न् कगर के ऊ लोग लग्त्र तोह्र ्ल्छ के रन रे रहे . 12 क्हे कक न् त जडी-बूटी, न् रंद करे ि्ल् प्सर ओह लोग के ठीक करे ि्ल् रहे , बलरक हे प्र, तोह्र िचन रहे जिन सब करछ ठीक करे ल्। 13 क्हे कक तोहर् रे जीिन आ ररतर के धक् ब्, तू नरक के फ्टक के ओर ले ज्के कफर से ऊपर ले आिेल्। 14 आदरी अपन् दर ््् िन् से हत् करे ल्, आ आत् जब कनकल ज्ल् त ि्पस न् आिेल्। न् त उठल आत् फेर से आिेल्। 15 लेककन तोहर् ह्थ से बचल सं्ि नइखे। 16 क्हे कक तोहर् के ज्ने से इनक्र करे ि्ल् अ्् लोग के तोह्र ब्ँ कह के त्कत से कोड् र्रल गइल, अनज्न बरख्, ओल् आ बरख् से ओह लोग के सत्िल गइल, जिन् से ऊ लोग न् बच पिलस आ आग से ्स हो गइल। 17 क्हे कक सबसे अचरज के ब्त ब् कक प्नी रे आग के त्कत ज्द् रहे , जिन कक सब चीज के बरझ्िेल्, क्हे कक दर कनय् धर् लोग ख्कतर लडत रहे ल्। 18 क्हे कक करछ सरय रे आग के लौ कर हो गछल रहे त्कक उ अ्् लोग के कखल्फ ्ेजल गछल ज्निर के न् जर् सके। लेककन खरद दे ख सकत रहले आ सरझ सकत रहले कक उ लोग पररेशर के न्य से सत्िल गछल ब्डे । 19 दोसर् सरय रे ऊ आग के धक् से अकधक् प्नी के बीच रे जरे ल् त्कक ऊ किनो अन्यी दे ध के फल के न्ध कर सके। 20 एकर् बदले तू अपन् लोग के सग्दूतन के ख्न् कखय्ित रहलू आ ओकर् के सग् से कबन् रेहनत के रोटी ्ेज कदहनी जिन हर आदरी के खरधी के संतरष करे रे सकर होखे आ हर स्द के ररत्कबक होखे। 21 क्हे कक तोह्र रोजी-रोटी तोह्र करठ्स के तोहर् लइकन के बत्ित रहे आ ख्ए ि्ल् के ्ूख के सेि् करत रहे आ हर आदरी के पसंद के कहस्ब से अपन् के सं््लत रहे । 22 ब्ककर बफ् आ बरफ आग के सहन कइलस आ न् कपललल, त्कक ऊ लोग ज्न सके कक ओल् रे जरत आ बरख् रे चरकत आग दर शनन के फल के न्ध कर कदहलस। 23 लेककन इ फेर से आपन त्कत तक ्रल् गछल, त्कक धर् लोग के पोष् हो सके। 24 क्हे कक जिन प््ी तोह्र सेि् करे ल्, जिन कक बन्िे ि्ल् ह, ऊ अधर् लोग के सज् ख्कतर आपन त्कत बढ्िेल् आ जे लोग तोहर् पर ्रोस् करे ल्, ओकर् ख्कतर आपन त्कत कर करे ल्। 25 एही से तब ्ी छ हर तरह के रप रे बदल गइल आ तोह्र अनरगह के आज्क्री रहल जिन जररतरंद लोग के इच् के अनरस्र सब करछ के पोष् करे ल्।
26 हे प्र, जेकर् से तू प्र करे लऽ, तोह्र संत्न ज्नस कक फल के बढे से आदरी के पोष् न् होल्, बलरक तोह्र िचन ह जिन तोहर् पर ्रोस् करे ि्ल् लोग के बच्िेल्। 27 जिन आग से न्ध न् ्इल रहे , ऊ तनी धूप से गरर होके जलीए कपलल गइल। 28 एह से पत् चल ज्ि कक हरनी के सूरज के तोहर् के धनि्द दे िे से रोके के च्हीं आ कदन के बसंत रे तोहर् से प्थ्न् करे के च्हीं। 29 क्हे कक अधर् लोग के आध् ज्ड् के खरखर ठं ढ् कनहन कपलल ज्छ अिररी बेक्र प्नी कनहन ््ग ज्छ। अध्य के ब् 17 1 क्हे कक तोह्र कन््य बहत बड ब्, आ ओकर् के व् न् कइल ज् सकेल्, एही से अपोकषत प््ी गलत हो गइल ब्। 2 जब अधर् लोग पकित र्ष् पर अत्च्र करे के सोचत रहे । ऊ लोग अपन् लर रे बंद होके, अन्र के कैदी, आ लरहर र्त के बंधन से ब्नल, ध्शत पयोजन से कनि्् कसत होके पडल रहे । 3 क्हे कक जब उ लोग अपन् गरप प्प रे लरक् के लेटत रहले , तब तक उ लोग ्ूल ज्ए के एगो कररय् पद्् के नीचे कबखर गछल रहले, ्य्नक रप से है र्न रहले अिररी अजीब-अजीब पकटीकर् से परे ध्न रहले। 4 क्हे कक ओह लोग के पकडे ि्ल् कोन् ओह लोग के डर से न् रोकल ज् सकत रहे , लेककन प्नी के कगरत आि्ज जइसन आि्ज सरन्छ दे त रहे आ ््री चेहर् से दर खद दध्न दे ख्छ दे त रहे । 5 आग के किनो धक् ओह लोग के रोधनी न् दे सकत रहे आ न् ही त्र् के ते ज लौ ओह ्य्िह र्त के रोधन करे ख्कतर सहन कर सकत रहे । 6 ख्ली उ लोग के स्रने एगो आग बहत ्य्िह ल्गल, क्हे कक उ लोग बहत डे र् के जिन ब्त दे खले रहले, ओकर् के उ लोग न् दे खले नजर से ्ी बरर् सरझले। 7 रहल ब्त कल् ज्दू के भर के त ओह लोग के नीचे ड्ल कदहल गइल आ ओह लोग के बरक् के लरंड के बेइजती से ड्ं ट कदहल गइल. 8 क्हे कक जे लोग बेर्र आत् से आतं क आ परे ध्नी के ्ग्िे के ि्द् कछले रहले, उ लोग खरद डर से बेर्र रहले अिररी हँ से के ल्यक रहले। 9 ्ले ही किनो ्य्िह ब्त ओह लोग से डे र्त न् रहे । तबो ओकहज् से गरजरत ज्निरन से डे र्इल आ स्ँ प के कससकी र्रत। 10 ऊ लोग डर से रर गइलन आ एह ब्त से इनक्र करत कक ऊ लोग हि् दे खले ब्, जिन् से किनो पक से बचल न् ज् सकत रहे । 11 क्हे कक बरर्छ के दोषी अपन् गि्ही से बहत डर्िन् होल् आ कििेक से दब्िल हरेध् दर खद ब्त के पूि्् नरर्न लग्िेल्। 12 क्हे कक डर करछर ओ न् ह, कसि्य ओह सह्यत् के धोख् दे िे के जिन तक् दे िेल्। 13 ्ीतर से उमीद कर होखल् के चलते अज्नत् के ओ क्र् से ज्दे कगन्िेल्, जिन कक य्तन् दे िेल्।
14 लेककन उ लोग ओह र्त उहे नींद सरतल रहले , जिन सचररच असहनीय रहे अिररी जिन अकनि्य् नरक के तल से उनरक् प आछल रहे । 15 करछ हद तक र्कसी पकटीकर् से परे ध्न आ करछ हद तक बेहोध हो गइलन, ओह लोग के कदल बेहोध हो गइल, क्हे कक अच्नक एगो डर आ गइल, जिन् के इं तज्र न् कइल गइल रहे । 16 एही से जे ्ी उह्ँ कगरल रहे , ओकर् के कबन् लोह् के सल्ख के जेल रे बंद कर कदहल ज्त रहे । 17 क्हे कक ऊ ककस्न होखस, च्हे चरि्ह् होखे, ्् खेत रे रजदू र होखे, ओकर् के पकड के उ जररत के सहन कछलस, जिन् से न् बचल ज् सकत रहे , क्हे कक उ सब लोग अन्र के एक जंजीर से ब्नल रहले। 18 च्हे ऊ सीटी के हि् होखे, ्् फइलल ड्ढन के बीच कचरछ के सररील् आि्ज होखे, ्् प्नी के रन््िन झरन् होखे जिन जोर से बहत होखे। 19 य् नीचे कगरल पतर के ्य्नक आि्ज, य् किनो दौड जिन कूदत ज्निरन के न् दे खल ज् सकत रहे , य् अकधकतर जंगली ज्निरन के गज्न् आि्ज, य् खोखल् पह्ड से उछलत गूंज; एह सब ब्त से उ लोग डर से बेहोध हो गछले। 20 क्हे कक पूर् दर कनय् स्फ रोधनी से चरकत रहे आ केह के रेहनत रे ब्ध् न् आइल। 21 ख्ली ओह लोग के ऊपर एगो ््री र्त फइलल रहे , जिन अन्र के रूकत् रहे जिन ब्द रे ओह लोग के गह् करे ि्ल् रहे , लेककन कफर ्ी उ लोग अपन् ख्कतर अन्र से ्ी ज्द् दर खी रहले। अध्य के ब् 18 1 कफर ्ी तोह्र संत लोग के एगो बहत बडहन रोधनी रहे , जेकर आि्ज सरन के आकरकत न् दे ख के, क्हे कक उ लोग ्ी उहे कष न् ्ोगले रहे , उ लोग खरध र्नत रहले। 2 लेककन अब उ लोग के किनो नरकस्न न् ्छल, जेकर् से पकहले उ लोग के संगे अन्य ्छल रहे , एहसे उ लोग ओ लोग के धनि्द दे ले अिररी र्फी रंगले कक उ लोग दर शन रहले। 3 जिन् के बदले तू ओह लोग के एगो जरत आग के खं्् दे ले ब्डू, जिन कक अनज्न य्त् के र्ग्दध्क बने आ एगो बेह्कनक्रक सूरज के सम्न से रनोरं जन करे ख्कतर। 4 ऊ लोग रोधनी से िंकचत होखे आ अन्र रे बंद होखे के ल्यक रहे , जे तोह्र बेट् लोग के बंद रखले रहे , जेकर् द्र् वि्् के अकिन्धी रोधनी दर कनय् के कदहल ज्ए ि्ल् रहे । 5 जब उ लोग संत लोग के बच् के र्रे के ठ्न लेले रहले, एगो बच् के ब्हर फेक के बच्िल गछल, त तू ओ लोग के लछकन के ्ीड के लेके एगो धक्ध्ली प्नी रे पूर् तरह से नष क दे नी। 6 हरनी के पररख् लोग के ओह र्त के ब्रे रे पकहले से पर्क्त कइल गइल रहे कक ऊ लोग छ पक् ज्नत रहे कक ऊ लोग किन् कसर पर किश्स कइले ब्, आ ब्द रे ऊ लोग खरध हो सके। 7 तोह्र लोग रे से धर् लोग के उ््र आ दर शनन के किन्ध दर नो सीक्र कइल गइल।
8 क्हे कक तू हरनी के किरोकधयन के जिन् से सज् कदहनी, उहे हरनी के रकहर् कदहनी, जेकर् के तू बोलिले रहलू। 9 क्हे कक अच् आदरी के धर् संत्न गरप रप से बकलद्न दे त रहले आ एके सहरकत से एगो पकित कनयर बनिले रहले कक संत लोग एके अच्छ आ बरर्छ के ््गीद्र कनहन होखस, अब कपत् लोग अब ्रकत के गीत ग्ित रहले। 10 लेककन दू सर् ओर दर शनन के बेर्र कचल्हट सरन्छ पडल आ किल्प करे ि्ल् लइकन ख्कतर धोक रन्िे ि्ल् आि्ज कनकलल। 11 र्कलक आ नौकर के एके तरह से सज् कदहल गइल। आ जइसे र्ज् के तरह, आर आदरी के ्ी ओइसहीं दर ख ्इल। 12 एह से उ सब करल के एक तरह के रौत के स्थ असंख ररल रहले। न् ही कजंद् लोग ओह लोग के दफन्िे ख्कतर पय्् प रहे , क्हे कक एके पल रे ओह लोग के सबसे करलीन संत्न के न्ध हो गइल। 13 क्हे कक उ लोग ज्दू -टोन् के चलते किनो ब्त प किश्स न् करत रहले। जेठ बच् के न्ध ्इल् पर ऊ लोग एह लोग के ्गि्न के बेट् र्न कलहल. 14 क्हे कक जब सब करछ चरपच्प चरपी रे रहे आ र्त ओकर् ते ज गकत के बीच रे रहे । 15 तोह्र सि्धक्र्न िचन तोहर् र्जकसंह्सन से सग् से उछल के उतरल, जइसे कक एगो ्यंकर यर् के आदरी किन्ध के दे ध के बीच रे उछल गइल। 16 ऊ आपन बेढंग् आज् के ते ज तलि्र कनयर ले अइनी आ खड् होके सब करछ रौत से ्र कदहलस। ऊ आक्ध के छूिलस, ब्ककर धरती पर खड् हो गइल। 17 अच्नक ्य्नक सपन् के दध्न ओह लोग के बहत परे ध्न कर कदहलस आ अनदे खी रे आतं क आ गइल। 18 एगो इह्ँ फेकल आ एगो उह्ँ , आध् ररल, अपन् रौत के क्र् बत्ित रहे । 19 क्हे कक उ लोग के परे ध्न करे ि्ल् सपन् पकहले से पत् चलत रहे कक कहीं उ लोग न्ध न् हो ज्स अिररी न् ज्नस कक उ लोग क्हे दर खी रहले। 20 हँ , रौत के चखल् से धर् लोग के ्ी छू गइल आ जंगल रे ्ीड के न्ध हो गइल, लेककन कोध बहत दे र न् कटकल। 21 तब कनद्ष आदरी जली से ओह लोग के बच्ि करे ख्कतर खड् हो गइल। आ अपन् उकचत सेि् के ढ्ल, प्थ्न् आ धूप के प्यकशत के लेके, अपन् के कोध के कखल्फ खड् कर कदहलस आ एह तरह से किपक् के अंत कर कदहलस, छ लोष्् करत कक ऊ तोह्र सेिक ह। 22 उ न्ध करे ि्ल् पर न्, न् त ब्ं ह के बल से, बलरक एक िचन से दं कडत करे ि्ल् के िध रे क कदहलस, जिन कक कपत्-कपत् के संगे कछल गछल ककररय् अिररी ि्च् के आरोप लग्ित रहले। 23 जब ररअल लोग के बीच रे खड् होके एक दू सर् पर ढे र हो गइल त ऊ कोध के रोक के कजंद् लोग के र््् अलग कर कदहलस। 24 क्हे कक लरहर कपड् रे पूर् दर कनय् रहे आ पतर के च्र पंक् रे ब्प-कपत् के रकहर् उकेरल रहे आ तोह्र रह्रकहर ओकर् र्थ् के ररकरट पर। 25 न्ध करे ि्ल् एह लोग के जगह दे कदहलस आ डे र् गइल, क्हे कक छ सब ख्ली कोध के स्द लेबे ख्कतर क्फी रहे ।
अध्य के ब् 19 1 रहल ब्त अ्् लोग के त अंत तक कबन् दय् के उनकर् पर कोध आ गछल, क्हे कक उ पकहले से ज्नत रहले कक उ लोग क् करीहे । 2 कइसे उ लोग के ज्ए के अनररकत दे के जलब्जी रे ्ेज के उ लोग पश्त्प क के उनकर पीछ् करत रहले। 3 जब उ लोग अ्ी तक ररअल लोग के कब प धोक रन्ित रहले अिररी किल्प करत रहले, त उ लोग एगो अिररी रूख्त्पू्् च्ल जोडले अिररी ्गोड् के रप रे ओ लोग के पीछ् कछले, जेकर् के उ लोग न् ज्ए के कनहोर् कछले रहले। 4 क्हे कक जिन् ््ग के ऊ लोग ल्यक रहे , ऊ ओह लोग के एह अंत तक खींच कलहलस आ पकहले से ्इल ब्तन के ्रल् कदहलस, त्कक ऊ लोग ओह सज् के पूर् कर सके जिन ओह लोग के य्तन् से कर रहे । 5 तोह्र लोग एगो अद् ्रत र््् से गरजरे , लेककन उ लोग के एगो अजीब रौत करल सके। 6 क्हे कक पूर् प््ी अपन् तरह के नय् रप रे नय् रप से बनल ब्, जिन ओकर् के कदहल गइल आज् के सेि् करत रहे त्कक तोह्र लइकन के कबन् किनो चोट के प्लन कइल ज् सके। 7 जइसे कक एगो ब्दल डे र् पर छ्य् ड्लत ब्। आ जह्ँ पकहले प्नी खड् रहे , ओकहज् सूखल जरीन लउकत रहे । आ ल्ल स्गर से कबन् किनो ब्ध् के र््् कनकलल; आ कहं सक ध्र् से ब्हर एगो हररयर खेत: 8 तोहर् ह्थ से बच्िे ि्ल् सब लोग तोह्र अद् ्रत अचरज के दे ख के ओकहज् से गरजरत रहले। 9 हे प्र, जे उ लोग के बच्िे ि्ल् ब्, तोह्र ्रकत करत उ लोग लोड् कनहन उछलत रहले अिररी रेरन् कनहन उछलत रहले। 10 क्हे कक उ लोग अ्ी तक परदे सी दे ध रे पि्स करत लरी जिन क्र ्छल रहे , ओकर् ब्रे रे य्द करत रहले कक कइसे जरीन रे रिेधी के जगह रकी पैद् ्छल अिररी नदी रछरी के जगह बेग के ्ीड उड्ित रहे । 11 लेककन ओकर् ब्द उ लोग एगो नय् पीढी के कचरछ के दे खले, जब उ लोग ्ूख के चलते न्जरक ख्न् रंगले। 12 क्हे कक बटे र ओह लोग के संतरकष ख्कतर सररंदर से ऊपर आित रहे । 13 आ प्पी लोग पर गरज के बल से कबन् पकहले के कनध्नी के सज् न् करलल क्हे कक ऊ लोग अपन् बरर्छ के कहस्ब से न्यसंगत रप से कष उठ्ित रहे , क्हे कक ऊ लोग परदे सी लोग के स्थे अउरी कठोर आ नफरत करे ि्ल् विह्र करत रहे । 14 क्हे कक सदोर के लोग ओह लोग के न् गह् कइल, जेकर् के ऊ लोग अइल् पर न् ज्नत रहे , ब्ककर छ लोग दो्न के गरल्र बन् कदहल जिन ओह लोग के बहत हकद्र रहे । 15 ख्ली इहे न्, बकल ध्यद ओह लोग के करछ आदर कइल ज् सकेल् क्हे कक ऊ लोग परदे सी लोग के दो्ी न् करत रहे ।
16 लेककन उ लोग ओह लोग के बहत दर खी करत रहले , जेकर् के उ लोग ्ोज के संगे करल गछल रहले अिररी उ लोग के संगे पकहलही से उहे कनयर रे ध्करल हो गछल रहले। 17 एह से छ लोग अंधत् से ्ी र्रल गइल, जइसे कक धर्् त् के दर आर पर ल्गल लोग, जब ्य्नक बहत अन्र से लेरल रहे आ हर केह अपन् दर आर से र््् खोजत रहे । 18 क्हे कक तत अपन् आप रे एक तरह के त्लरेल से बदलल रहे , जइसे कक ्ोत रे सर रे धरन के न्र बदल ज्ल्, आ तबकहयो हरेध् धकन होल्। जिन कक जिन क्र ्इल ब् ओकर् के दे ख के बकढय् से बूझल ज् सकेल्. 19 क्हे कक स्ं स्ररक चीज प्नी रे बदल गइल रहे आ जिन चीज पकहले प्नी रे तै रत रहे , अब जरीन पर चल गइल। 20 प्नी रे आग के धक् रहे , उ आपन गर् के ्रल् गछल, आ प्नी आपन बरझ्िे ि्ल् स््ि के ्ूल् गछल। 21 दू सर् ओर, आग के लपट न्धि्न जीि के र्ं स के बब्् द न् कछलस, ्ले ही उ लोग ओकह रे चलत रहले। न् त ऊ बफ्ल् तरह के सग्य र्ं स के कपललल जिन कपलले के अनरकूल पकरकत के रहे . 22 हे प्र, तू हर ब्त रे अपन् लोग के बड्छ कइनी आ ओकर रकहर् कइनी आ न् ही ओकर् के हल् रे दे खनी, बलरक हर सरय आ हर जगह ओह लोग के सह्यत् कइनी।