मौत , दफन अउर पुन रुतन तब मूसत इसतरा के सब बुजुर् ाोर के बोावाे आ कहान कक, “अपनत पररवतर के कहसतब से ररो मेमनत कनकता के फसह के मतर दी।ं ” आ तू ाोर कहसोप के रुचत ाेके ओकरत के ओह खून मे डु बत के ओकरत मे जवन खून बत ओकरत से कांटा आ दु नु सतइड के खंभत के मतर दी ं। आ तोहनी मे से केह सबेरे तक अपनत घर के दु आर पर नत कनकाी। कतहे कक यहोवत कमस के ाोर के मतरे खतकतर रुजर जइहे । आ जब ऊ छतरी आ दु नु सतइड के खंभत पर खून दे खतई त पभु दरवतजत के पतर से रुजर जइहे आ नतश करे वतात के रउरत घरन मे घुस के रउरत के मतरे नत दीहे . कनकतसी 12:21-23 मे कदहा रइा बत अरर केह मौत के ातयक पतप कइाे बत आ ओकरत के मतर कदहा जतव आ तू ओकरत के पेड पर ाटकत दे ब त ओकर ातश रतत भर पेड पर नत रहे , बतककर तू ओकरत के ओह कदन कवनो तरह से दफनत दी ं। (कतहे कक फतं सी पर ाटका परमेस् वर के अकभशप बत) ततकक तोहतर दे श अशुद नत होखे जवन तोहतर परमेशर यहोवत तोहरत के कवरतसत मे दे ाे बतडे । ववयत 21:22-23 मे कदहा रइा बत कतहे कक कुकुर हमरत के घेराे बतडे , दु षन के सभत हमरत के घेर ाेाे बतडे , हमरत हतथ अवुरी रोड के छे द दे ाे बतडे । हम आपन सब हडी बतत सकीाे: उ ाोर हमरत के दे खत रहे ाे अवुरी रकटक दे खत रहे ाे। उ ाोर हमरत कपडत के बतँ ट के हमरत वस पर किटी डतात बतडे । भजन संकहतत 22:16-18 मे कदहा रइा बत सतठ दू हफत बतद मसीह के कटवत कदहा जतई, ाेककन अपनत खतकतर नत, आ आवे वतात रतजकुमतर के ाोर शहर आ पकवत यतन के नष कर कदही। आ ओकर अंत बतढ के सतथे होई आ युद के अंत तक उजतड होखा तय बत। दतकनया 9:26 मे कदहा रइा बत हम दतऊद के घरतनत आ यरशाेम के कनवतसी ाोर पर अनुगह आ कनहोरत के आतत डता दे ब आ ऊ ाोर हमरत पर जेकरत के ऊ ाोर छे दाे बत, ओकरत खतकतर शोक करी, जइसे केह अपनत रकाौतत बेटत खतकतर शोक मनतवेात आ ओकरत खतकतर कडुआ होई, जइसे कक जे अपनत जेठ बचत खतकतर कडुआ होात। जकरयतह 12:10 मे कदहा रइा बत कतहे कक हम सबसे पकहाे तोहनी के उहे दे ाे बतनी जवन हमरत भी कमाा बत कक मसीह हमनी के पतप खतकतर शतस के अनुसतर मर रईाे। अउर कक उ दफन हो रइान अउर तीसरत कदन उ जी उठान, पकवतशतस के अनुसतर: 1 कुररन्यों 15:3-4
यशतयतह भकवषवयत के ह यशतयतह 53 के बत 1 हमनी के खबर के के कवशतस कइाे बत? आ पभु के बतँ कह केकरत पर परट भइा बत? 2 कतहे कक ऊ ओकरत सतमने ररो कोमा पौधत कनयर बढी आ सूखा जमीन से कनकाा जड कनयर, ओकर कवनो रप नइखे आ नत ही सुनरतत। आ जब हमनी के ओकरत के दे खब जत त कवनो अइसन सुंदरतत नइखे जवनत के हमनी के ओकरत के ितहत होखी ं जत.
ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
3 ऊ आदमी के कतरस्त आ ठु करत कदहा जतात। दु खी आ दु ख से पररकित आदमी, आ हमनी के ओकरत से आपन िेहरत जइसे ाुकतइा रहनी जत। ओकरत के कतरसतर कइा जतत रहे आ हमनी के ओकर आदर नत करत रहनी जत। 4 उ हमनी के दु ख के सहन कईाे बतडे अवुरी हमनी के दु ख के उठत ाेाे बतडे , ाेककन हमनी के उनुकत के मतरा, भरवतन के मतरा अवुरी दु खी मतनत रहनी। 5 ाेककन उ हमनी के अपरतध के िाते घतया हो रईा, हमनी के अपरतध के िाते उ कुिाा रईा। आ उनकर िोट से हमनी के ठीक हो रइा बतनी जत। 6 हमनी के सब भेड कनहन भटक रईा बतनी। हमनी के हर रक के अपनत रतसत पर मोड दे ाे बतनी जत। आऊ परमेस् वर हमनी सब के पतप ओकरत पर डता दे ाे बतडन। 7 ऊ दबाा रइा आ दु खी भइा, तबो ऊ आपन मुँह नत खोाान, ऊ मेमनत कनयर वध खतकतर ाे आवा रइा बत, जइसे भेड के कतटत ाोर के सतमने रूंरत होखे, ओइसही ं ऊ आपन मुँह नत खोाेात। 8 ऊ जेा से आ नतय से ाे जतइा रइा आ ओकर पीढी के के बततई? कतहे कक उ कजंदत ाोर के दे श से कट रईा रहाे, कतहे कक उ हमरत ाोर के अपरतध से मतरा रईा रहाे। 9 ऊ अपनत मरात मे दु षन के सतथे आ अमीर ाोर के सतथे आपन कब बनवाे। कतहे कक उ कवनो कहं सत नत कईाे रहाे अवुरी नत उनुकत मुंह मे कवनो धोखत रहे । 10 तबो यहोवत ओकरत के कुिाा पसंद कइास। ऊ ओकरत के दु खी कर कदहाे बत, जब तू ओकर जतन पतप के बकादतन बनतइब त ऊ ओकर संततन दे खतई, ऊ आपन कदन ामहर करी आ ओकरत हतथ मे यहोवत के पसरतत बढी। 11 ऊ अपनत आतत के कष के दे ख के त्प हो जतई। कतहे कक ऊ ओह ाोर के अपरतध के सहन करीहे . 12 रही से हम ओकरत के बडकत ाोर के सतथे कहसत बतँ ट दे ब आ ऊ ाूट के बँटवतरत मजबूत ाोर से करी। कतहे कक ऊ आपन पतर के मौत के ओर उझा कदहाे बत, आ ओकरत के अपरतधी ाोर के सतथे करना रइा। उ बहत ाोर के पतप उठत के अपरतधी ाोर खतकतर कबनती कईाे।
मती के सुस मतितर के बतरे मे बततवा रइा बत मती 26 के बत 1 जब ईसत ई सब बतत पूरत कइान त ऊ अपनत िेान से कहान। 2 तू ाोर जतनत बतड़ कक दू कदन बतद फसह के परब होात आ आदमी के बेटत के सूाी पर िढतवे खतकतर धोखत कदहा जतात। 3 तब मुख यतजक, शतसी आउर ाोर के बुजुर् ाोर कतइफत नतम के महतयतजक के महा मे जुट रईाे। 4 उ ाोर ईसत के िताबतजी से पकड के मतर दे वे खतकतर कवितर कईाे। 5 ाेककन उ ाोर कहाे, “पब के कदन नत, कही ं ाोर के बीि हं रतमत मत होखे।” 6 जब यीशु बेथतनी मे कशमोन कोढी के घर मे रहाे। 7 ररो मेहरतर उनकरत ारे बहत कीमती मरहम के अाबतसर के कडबत ाेके आके उनकर मतथत पर डता कदहाी जब उ खतनत खतत रहाे। 8 जब उनकर िेात ाोर ई दे ख के रुसत मे आके कहान कक, “ई कवनत कतम खतकतर बेकतर हो रहा बत?” 9 कतहे कक इ मरहम बहत मे बेि के ररीबन के कदहा जत सकत रहे । 10 जब यीशु ई बतत समझ रइान त उ ाोर से कहान, “ तू ाोर ओह औरत के कतहे परे शतन करत बतड़? कतहे कक ऊ हमरत पर ररो बकढयत कतम कइाे बतडी. 11 कतहे कक तोहनी के सतथे ररीब ाोर हमेशत रहे ात। ाेककन हमरत के तोहनी के हमेशत नत रहे । 12 कतहे कक उ हमरत दे ह पर इ मरहम डता के हमरत दफनतवे खतकतर कइाी। 13 हम तोहनी से सि कहत हई कक जहतँ भी इ सुसमतितर के पितर पूरत दु कनयत मे होई, उहतँ इ बतत भी बततवा जतई जवन इ मकहात कईाे कबयत। 2
ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
14 बतरह मे से ररो यहदत इसररयोती नतम के ररो मुख यतजक के ारे रईा। 15 उ ाोर से कहास, “तू हमरत के कत दे ब आ हम ओकरत के तोहनी के सौंप दे ब? उ ाोर ओकरत से तीस ितं दी के टु कडत के वतदत कईाे। 16 तब से उ ओकरत के धोखत दे वे के मौकत खोजत रहाे। 17 कबनत खमीर रोटी के पव् के पकहात कदन िेात ाोर यीशु से पूछाे, “तू ितहत बतडू कक हम तोहरत खतकतर फसह के पव् कहतँ तैयतर करी?ं 18 ऊ कहान, “ अइसन आदमी के ारे शहर मे जतके ओकरत से कह़ कक रुर कहत बतडन कक हमतर समय आ रइा बत। हम अपनत िेान के सतथे तोहरत घर मे फसह के पव् मनतवेब। 19 िेात ाोर उहे कइा जवन यीशु के कनयुनय कइाे रहाे। उ ाोर फसह के परब के तैयतरी कईाे। 20 जब सतँ झ हो रइा त ऊ बतरह रो के सतथे बइठ रइान। 21 जब उ ाोर खतनत खतत रहाे त उ कहाे, “ हम तोहनी से सि कहत बतनी कक तोहनी मे से केह हमरत के धोखत दे कदही।” 22 ऊ ाोर बहते दु खी होके हर केह ओकरत से कहे ातरा कक, “पभु, कत हम हईं?” 23 ऊ जवतब कदहान, “ जे हमरत सतथे पकवतन मे हतथ डु बतवेात, उहे हमरत के धोखत कदही।” 24 आदमी के बेटत ओइसही ं िात बत जइसे ओकरत बतरे मे काखा बत, बतककर हतय ऊ आदमी पर जेकरत दतरत मनुष के बेटत के धोखत कदहा रइा बत! ओह आदमी खतकतर बकढयत रकहत अरर ऊ पैदत नत भइा रकहत. 25 तब ओकरत के धोखत दे वे वतात यहदत कहास, “रुर, कत हम हईं?” उ ओकरत से कहास, तू कहाे बतडू। 26 जब उ ाोर खतनत खतत रहाे त यीशु रोटी ाेके आशीष दे ाे अवुरी ओकरत के तोड के िेान के दे ाे अवुरी कहाे, “ ाे जत, खत ाी।ं ई हमतर दे ह ह। 27 ऊ पतात ाेके धनवतद दे त कहान कक, “ तू सभे रकरत के पी ाी ं। 28 कतहे कक ई हमतर नयत कनयम के खून ह जवन पतप के मतफी खतकतर बहत ाोर खतकतर बहतवा रइा बत। 29 ाेककन हम तोहनी से कहत हई कक हम अब से रह बेा के फा के तब तक नत पीब जब तक कक हम अपनत कपतत के रतज मे तोहनी के सतथे नयत बेा के फा नत पीब। 30 ऊ ाोर ररो भजन रत के जैतून के पहतड पर कनका रइान। 31 तब यीशु उनकरत से कहान, “ आज रतत तोहनी सब हमरत से नतरतज होखब, कतहे कक काखा बत कक हम िरवतहत के मतर दे ब आ भेड के भेड कबखर जतईब।” 32 ाेककन हम जी उठात के बतद तोहनी से पकहाे राीा मे िा जतईब। 33 पतरस जवतब कदहान, “भाे सब ाोर तोहरत से नतरतज हो जतव, ाेककन हम कबो नतरतज नत होखब।” 34 यीशु ओकरत से कहान, “ हम तोहरत से सि कहत बतनी कक आज रतत मे मुरत् बतजात से पकहाे तू हमरत से तीन बेर इनकतर कऱ।” 35 पतरस ओकरत से कहान, “हम तोहरत सतथे मरब तबो तोहरत से इनकतर नत करब।” ओइसही ं सब िेात ाोर भी कहाे। 36 तब यीशु ओह ाोर के सतथे रेटसमनी नतम के जरह पर अइाे आ िेान से कहान कक जबाे हम ओकहजत जतके पतथ्नत करी ं तबाे तू ाोर इहतँ बईठ जत। 37 उ पतरस आ जबदी के दु नो बेटत के अपनत संरे ाेके रईाे अवुरी दु खी अवुरी बहत भतरी होखे ाराे। 38 तब ऊ ओह ाोर से कहास, “ हमतर आतत बहत दु खी बत, मौत तक। 39 ऊ तनी आरे बढ के मुँह पर करर के पतथ्नत कइान, “ हे हमतर कपतत, अरर संभव होखे त ई पतात हमरत से िाे दी ं। 40 ऊ िेान के ारे अइाे आ ओह ाोर के सुता दे खान आ पतरस से पूछाे, “ कत, तू ाोर हमरत सतथे रक घंटत भी जतरा नत रह पवनी?” 41 जतरा आ पतथ्नत करी ं कक तू ाोर परीकत मे मत जतईं, आत् मत त इचु क बत, ाेककन शरीर कमजोर बत। 42 ऊ दू सर बेर िा के पतथ्नत कइान, “ हे हमतर कपतत, अरर ई पतात हमरत से नत खतम हो पतई, जबाे हम रकरत के नत पीब त तोहतर इचत पूरत हो जतव।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
43 ऊ आके फेर से ओह ाोर के सुता दे खान कतहे कक ओह ाोर के आँ ख भतरी रहे । 44 ऊ ओह ाोर के छोड के फेर से िा रइान आ तीसरत बेर उहे बतत कह के पतथ्नत कइान। 45 तब ऊ अपनत िेान के ारे आके कहान, “ अब सुत जत आ आरतम कऱ। 46 उठ, हमनी के िाा जत, दे ख, उ हमरत के धोखत दे वे वतात नजदीक आ रईा बत। 47 जब उ अभी तक बोात रहाे त दे ख, बतरह मे से ररो यहदत आ रईाे अवुरी उनुकत संरे तावतर अवुरी ातठी ाेके पमुख यतजक अवुरी ाोर के बुजुर् के बहत भीड आईा। 48 ओकरत के धोखत दे वे वतात ओ ाोर के ररो कनशतनी दे के कहास कक हम जेकरत के िुमत ाेब, उहे ह। 49 ऊ तुरते यीशु के ारे आके कहान, “हे मतकाक, जय हो। आ ओकरत के िुमत ाेत रहाे. 50 यीशु ओकरत से कहान, “ कमत, तू कतहे आइा बतडू?” तब उ ाोर आके यीशु पर हतथ डता के ओकरत के पकड काहाे। 51 दे ख, यीशु के सतथे रहा ाोर मे से ररो आपन हतथ बढत के आपन तावतर कनकता के महतयतजक के ररो नौकर के मतर कदहास आ ओकर कतन कतट कदहास। 52 तब यीशु ओकरत से कहान, “ अपनत तावतर के फेर से ओकरत जरह पर रख द, कतहे कक तावतर पकडे वतात सब तावतर से नतश हो जइहे ।” 53 कत तू सोित हव कक अब हम अपनत कपतत से पतथ्नत नईखी क सकत अवुरी उ हमरत के बतरह से जतदे सर्दूत के सेनत दे कदहे ? 54 ाेककन धम्शतस के बतत कईसे पूरत होई कक अईसन होखे के ितही? 55 ओही घरी यीशु भीड से कहान, “ कत तू ाोर हमरत के पकडे खतकतर तावतर आ ातठी ाेके िोर के नखातफ कनकाा बतनी? हम रोज तोहनी के सतथे मंकदर मे पढतवत बईठत रहनी आ तोहनी हमरत पर कवनो पकड नत रखनी। 56 ाेककन इ सब रह से भईा कक भकवषवयत ाोर के शतस पूरत होखे| तब सब िेात ओकरत के छोड के भतर रईाे। 57 यीशु के पकडे वतात ाोर उनुकत के महतयतजक कैफत के ारे ाे रईाे, जहतं शतसी अवुरी बुजुर् ाोर जुटा रहाे। 58 ाेककन पतरस ओकरत पीछे -पीछे दू र से महतयतजक के महा मे िा रईाे अवुरी अंत दे खे खतती नौकरन के संरे बईठ रईाे। 59 मुनखयत यतजक, बुजुर् आऊ पूरत मंडाी यीशु के मतरे खतकतर झूठत रवतही खोजत रहाे। 60 ाेककन केह के नत कमाा, हँ , भाे ही बहत झूठत रवतह आईा रहाे, ाेककन उ ाोर के केह नत कमाा। आनखर मे दू रो झूठत रवतह आइा, 61 ऊ कहास, “ई आदमी कहास कक हम भरवतन के मंकदर के उजतड के तीन कदन मे बनतवे मे सकम बतनी।” 62 महतयतजक उठ के पूछाे, “कत तू कुछ जवतब नईख़ दे त?” ई ाोर तोहरत नखातफ कत रवतह बत? 63 ाेककन यीशु िुप रहाे। महतयतजक जवतब कदहान, “हम तोहरत के कजंदत परमेशर के कसम दे त बतनी कक तू हमनी के बततईं कक तू परमेशर के बेटत मसीह हईं कक नत।” 64 यीशु ओकरत से कहान, “तू कहाे बतडू, ाेककन हम तोहसे कहत हई कक अब तू ाोर मनुष के बेटत के शनय के दतकहनत ओर बईठा आ सर् के बतदा मे आवत दे खब।” 65 तब महतयतजक आपन कपडत फतड के कहाे, “उ कनंदत कईाे बतडे । हमनी के रवतह के अउरी कवन जररत बत? दे ख़, अब तू ाोर उनकर कनंदत सुनाे बतड़। 66 तोहनी के कत ातरत बत? उ ाोर जवतब दे के कहाे, “उ मौत के दोषी बत।” 67 तब उ ाोर ओकरत िेहरत पर थूक के मतर कदहास। आ कुछ ाोर ओकरत के हतथ के हथेाी से मतर कदहा। 68 ऊ कहाे, “हे मसीह, हमनी के भकवषवतरी कऱ कक तोहरत के मतरे वतात के ह? 69 पतरस महा मे बतहर बईठा रहाे अवुरी ररो ाईकी उनुकत ारे आईा अवुरी कहास कक, “तू भी राीा के यीशु के संरे रहनी।” 70 ाेककन उ सब के सतमने इनकतर करत कहाे कक, “हमरत नईखे मताूम कक तू कत कहत बतडू।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
71 जब उ बरतमदत मे कनकाा त ररो अवुरी नौकरतनी उनुकत के दे ख के कहास कक, इ आदमी भी नतसरत के यीशु के संरे रहे । 72 उ फेर कसम खत के इनकतर कईाे , “हम ओह आदमी के नईखी जतनत।” 73 कुछ दे र बतद ओकरत ारे खडत ाोर आके पतरस से कहास, “तू भी ओह ाोर मे से ररो हउअ। कतहे कक तोहतर बतत तोहरत के झकझोर दे ात। 74 तब उ रतरी दे वे ाराे अवुरी कसम खतर ाराे कक, हम ओ आदमी के नईखी जतनत। आ तुरते मुरत् के िताक दा। 75 पतरस के यीशु के विन यतद आ रईाे कक उ कहाे रहाे कक, मुरत् के बतजे से पकहाे तू हमरत से तीन बेर इनकतर क दे ब। उ बतहर कनका के कडुआ रोअत रहाे। मती 27 के बत 1 जब सबेरे भइा त सब मुनखयत यतजक आउर ाोर यीशु के मतरे के सातह ाेाे| 2 जब उ ाोर ओकरत के बतन के ाे रईाे अवुरी ओकरत के रतजपता पोंकतयुस कपाततुस के सौंप दे ाे। 3 तब यहदत जे उनकरत के धोखत दे ाे रहे , त उ अपनत के दोषी ठहरतवा दे ख के पशतततप क के तीस ितं दी के टु कडत मुख यतजक आ बुजुर् ाोर के ारे वतपस ाे अईाे। 4 ऊ कहान कक हम पतप कइाे बतनी कक हम कनद्ष खून के धोखत दे ाे बतनी। उ ाोर कहास, “हमनी के कत बत? दे ख़ तू त़ ओह बतत के। 5 ितँ दी के टु कडत मंकदर मे फेक के िा रईाे अवुरी जतके फतं सी प ाटक रईाे। 6 मुख यतजक ितनी के टु कडत ाेके कहाे, “खजतनत मे डताा जतयज नईखे, कतहे की इ खून के कीमत ह।” 7 उ ाोर मंथन क के अपनत से कुमतर के खेत खरीद के परदे सी ाोर के दफनत दे ाे। 8 रही से ओह खेत के आज ाे “खून के खेत” कहा रइा। 9 तब जेरेमी भकवषवयत के दतरत कहा रइा बतत पूरत हो रइा कक, “उ ाोर ितनी के तीस टु कडत ाे काहाे, जवन कक कीमत वतात के दतम रहे , जवनत के कीमत इसतरा के ाोर मे से ाोर मतनत रहे । 10 उ कुमतर के खेत खतकतर दे कदहास, जईसे कक पभु हमरत के कनयुय कईाे रहाे। 11 यीशु रतजपता के सतमने खडत होके रतजपता ओकरत से पूछाे कक, “कत तू यहदी ाोर के रतजत हउअ?” यीशु ओकरत से कहान, “ तू कहत बतड़।” 12 जब ओकरत पर मुख यतजक आ बुजुर् ाोर के आरोप ातरा त ऊ कुछ नत कदहान। 13 कपाततुस ओकरत से कहान, “कत तू नइख़ सुनत कक ऊ ाोर तोहरत नखातफ केतनत रवतही दे त बत? 14 ऊ ओकरत के कबो रक शब नत कहान। रतनत कक रतजपता बहत अिरज मे पड रईाे। 15 उ भोज मे रतजपता के आदत रहे कक उ ाोर के ररो कैदी के छोड दे त रहाे, जवनत के उ ाोर ितहत रहाे। 16 तब ओह ाोर के ररो उलेखनीय कैदी रहे , जेकर नतम बरबत रहे । 17 जब ऊ ाोर रकटत भइा त कपाततुस ओह ाोर से कहान, “तू ाोर केकरत के छोडा ितहत बतनी?” बरबत, यत यीशु जेकरत के मसीह कहा जतात? 18 उ जतनत रहाे कक ईषत् के िाते उ ाोर उनुकत के बित ाेाे बतडे । 19 जब ऊ नतय आसन पर बइठा त उनकर मेहरतर उनकत ारे भेजाी कक, “कत ओह धम् आदमी से तोहरत कवनो ाेनत-दे नत नइखे, कतहे कक आज हम ओकरत िाते सपनत मे बहत कष भोराे बतनी।” 20 ाेककन मुख यतजक आ बुजुर् ाोर भीड के मनत काहाे कक उ ाोर बरबत से पूछ के यीशु के नतश करस| 21 रतजपता ओह ाोर से पूछाे, “तू ाोर दु नो मे से कवन ितहत बतनी कक हम तोहनी के छोड दी?ं उ ाोर कहाे, बरबत। 22 कपाततुस उनकरत से कहान, “त हम यीशु के कत करब, जेकरत के मसीह कहा जतात?” उ सब ओकरत से कहास कक, “उनुकत के सूाी पर िढतवा जतव।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
23 रतजपता कहास, “कतहे , उ कवन बुरतई कईाे बत? ाेककन उ ाोर अउरी किलतत कहाे कक, “उनुकत के सूाी पर िढतवा जतव।” 24 जब कपाततुस दे खान कक उ कुछु ओ नत जीत पवाे , बन् हं रतमत हो रहा बत, त उ पतनी ाेके भीड के सतमने हतथ धो के कहाे, “हम रह धम् आदमी के खून से कनद्ष बतनी। 25 तब सब ाोर जवतब कदहास, “उनकर खून हमनी आ हमनी के ाइकन पर होखे।” 26 तब ऊ बरबत के छोड कदहान आ जब ऊ यीशु के कोडत मतर के सूाी पर िढतवे खतकतर सौंप कदहान। 27 तब रतजपता के कसपतही यीशु के आम सभतरतर मे ाे रईाे अवुरी पूरत सैकनक के दा के उनुकत ारे बटोराे। 28 उ ाोर उनकर कपडत उततर के ाता रं र के वस पकहनाे। 29 ऊ ाोर कतँ ट के मुकुट रढ के ओकरत मतथत पर आ दतकहनत हतथ मे खढ ारत के ओकरत सोझत घुटनत टे क के मजतक उडतवत कहास कक, “यहकदयन के रतजत, जय हो!” 30 ऊ ाोर ओकरत पर थूक के खढ ाेके ओकरत मतथत पर मतर कदहास। 31 उनकर मजतक उडतवे के बतद उ ाोर उनकर कपडत उततर के उनकर आपन कपडत पकहन के सूाी पर िढतवे खतकतर ाे रईाे। 32 जब उ ाोर बतहर कनकाा त उ ाोर के ररो कुरे न के आदमी कमाा, जेकर नतम शमौन रहे । 33 जब उ ाोर रोारोथत नतम के जरह यतनी खोपडी के जरह प पहं िाे। 34 ऊ ाोर ओकरत के कपत मे कमात के कसरकत पीये कदहान आ जब ऊ ओकर सतद िख काहाे त ऊ नत कपयाे. 35 ऊ ाोर ओकरत के सूाी पर िढत के किटी डता के ओकर कपडत बतँ ट कदहा, ततकक भकवषवयत के कहा बतत पूरत होखे कक, “उ ाोर हमतर कपडत ओ ाोर के बीि बतँ ट कदहा आ हमरत कपडत पर किटी डताा।” 36 बईठ के उ ाोर उहतँ के दे खत रहाे। 37 ओकरत मतथत पर काखा आरोप ारत कदहान कक “ई यहदी यहदी ाोर के रतजत हउवे .” 38 ओकरत सतथे दू रो िोर के सूाी पर िढतवा रइा, ररो दतकहनत ओर आ ररो बतईं ओर। 39 ओकहजत से रुजरत ाोर आपन मतथत कहातवत ओकरत के कनंदत कइा। 40 ऊ कहान कक, “जे मंकदर के उजतड के तीन कदन मे बनव़, त अपनत के बित ाी ं।” अरर तू परमेशर के बेटत हउअ त कूस से उतर जत। 41 ओइसही ं मुख यतजक ाोर भी शतसी आ बुजुर् ाोर के सतथे उनकर मजतक उडतवत कहाे| 42 उ दोसरत के बित काहाे। खुद के ऊ बित नत सके. अरर उ इसतरा के रतजत हवे त अब उ कूस से उतरे , त हमनी के ओकरत प कवशतस करब। 43 ऊ भरवतन पर भरोसत कइान। अरर ओकरत के ितहत होखे त अब ओकरत के बितवे, कतहे कक उ कहाे कक, हम परमेशर के बेटत हई। 44 िोर भी जे उनकरत सतथे सूाी पर िढतवा रइा रहे , उहे उनकर दतँ त मे डता कदहास। 45 छठवतँ बजे से ाेके नौवतं बजे ाे पूरत दे श पर अनतर हो रइा। 46 ारभर नौवतं बजे यीशु जोर से किलत के कहाे, “ राी, राी, ातमत सबकथतनी?” मतने कक हे भरवतन, हमतर भरवतन, तू हमरत के कतहे छोड दे ाे बतडू? 47 उ ाोर मे से कुछ ाोर इ बतत सुन के कहास, “ई आदमी रकायतस के बोातवतत।” 48 रक आदमी तुरते दौड के ररो संज ाेके ओकरत मे कसरकत भर के ररो खढ पर डता के पीये कदहास। 49 बतकी ाोर कहास, “िा़, दे खा जतव कक रकायतह ओकरत के बितवे खतकतर अइहे कक नत?” 50 यीशु फेर जोर से किलत के भूत के छोड कदहान। 51 मंकदर के पदत् ऊपर से नीिे तक दु भतर मे फतट रईा रहे । आ धरती कतँ प रइा आ िटतन फतट रइा। 52 कब खुा रइा। आ सुता संत ाोर के कई रो ातश उठा। 53 उनकर जी उठात के बतद कब से बतहर कनका के पकवत शहर मे जतके बहत ाोर के सतमने पकट भईाे।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
54 जब सेनतपकत आउर उनकरत सतथे रहा ाोर जे यीशु के दे खत रहान, भूकंप आ घटनत के दे खान त उ ाोर बहत डे रत रईाे आ कहान कक, “सिहँ ई परमेशर के बेटत हउवे।” 55 उहतँ बहत मेहरतर दू र से दे खत रहाी, जवन राीा से यीशु के पीछे -पीछे िात रहाी आ उनकर सेवत करत रहाी। 56 जेकरत मे मररयम मरदाीनी, यतकूब आ यूसुस के महततरी मररयम आ जबदी के संततन के महततरी रहाी। 57 जब सतँ झ हो रइा त अररमतकथयत के ररो धनी आदमी यूसुफ नतम के आइा, जे खुद यीशु के िेात रहाे। 58 ऊ कपाततुस के ारे जतके यीशु के ातश के भीख मंराे। तब कपाततुस ातश के छोडे के आदे श कदहान। 59 यूसुफ ातश के ाेके ररो सतफ कानन कपडत मे ापेट काहाे। 60 ऊ ओकरत के अपनत नयत कब मे रख कदहान जवन ऊ िटतन मे उकेराे रहाे आ कब के दु आर पर ररो बडहन पुर ाुढकत के िा रइान. 61 मररयम मरदाीनी आ दू सर मररयम कब के सतमने बईठा रहाी। 62 तैयतरी के बतद अकरात कदने मुख यतजक आ फरीकसयन कपाततुस के ारे रकजुट हो रईाे। 63 कहान, मकाकतर, हमनी के इयतद बत कक उ धोखेबतज कजंदत रहाे त कहाे रहाे कक, तीन कदन के बतद हम जी उठब। 64 रह से आजत दी ं कक कब के तीसरत कदन तक पकत कर कदहा जतव, नत त रतत मे ओकर िेात आके ओकरत के िोरत के ाोर से नत कहस कक ऊ मुवान मे से जी उठा बत, रहसे आनखरी राती पकहात राती से भी खरतब हो जतई। 65 कपाततुस उनसे कहाे, “तोहरत ारे पहरत बत, जतके जतनत हो सके ओकरत के पकत कऱ।” 66 उ ाोर जतके कब के पकत क के पुर प मुहर ारत के पहरत ारत दे ाे। मती 28 के बत 1 सब के कदन के अंत मे जब हफत के पकहात कदन भोर होखे ातरा त मररयम मरदाीनी आ दू सर मररयम कब दे खे अइाी। 2 दे ख़, ररो बडहन भूकंप आइा, कतहे कक पभु के दू त सर् से उतर के आके दु आर से पुर के पीछे घुमत के ओकरत पर बइठ रइान। 3 उनकर िेहरत कबजाी कनयर रहे आ उनकर कपडत बफ् कनयर उजर रहे । 4 ओकरत डर से रखवतात ाोर कहात-डु ात मरा आदमी कनहन हो रईाे। 5 तब सर्दूत ओह औरतन से कहास, “तू ाोर मत डे रतईं, कतहे कक हम जतनत बतनी कक तू ाोर यीशु के खोजत बतनी जेकरत के सूाी पर िढतवा रइा रहे । 6 उ इहतँ नईखन, कतहे कक उ जी उठा बतडे , जईसे उ कहाे रहाे। आ, दे ख़ ऊ जरह जहतँ पभु पडा रहाे। 7 जली से जतके उनकर िेान के बततईं कक ऊ मुवान मे से जी उठा बतडन। आ दे ख़, ऊ तोहनी से पकहाे राीा जतत बत। उहतँ तू ाोर ओकरत के दे खब़, हम तोहके बतत दे ाे बतनी। 8 उ ाोर डर आ बहत खुशी से जली से कब से कनका रईाे। आ अपनत िेान के खबर ाे आवे खतकतर दौडा। 9 जब उ ाोर अपनत िेान के बततवे जतत रहाे त दे ख, यीशु ओ ाोर से कमा के कहाे, “ सब ाोर के जय हो।” उ ाोर आके उनकर रोड पकड के उनकर आरतधनत कईाे। 10 तब यीशु उनकरत से कहान, “ डर मत, जत के हमरत भतई ाोर के बतत दी ं कक उ ाोर राीा मे जतके उहतँ हमरत के दे नखहे । 11 जब उ ाोर जतत रहाे त दे ख, पहरत के कुछ ाोर शहर मे आके मुख यतजकन के सब कतम के बतरे मे बततवत रहाे। 12 जब उ ाोर बुजुर् ाोर के सतथे जुट रईाे आ बततिीत कईाे त उ ाोर सैकनकन के भतरी पईसत दे ाे। 13 ऊ कहान, “कह़ कक उनकर िेात रतत मे आके हमनी के सुतत घरी उनकरत के िोरत के ाे रइान।” 14 अरर इ बतत रतजपता के कतन मे आई त हम ओकरत के समझत के तोहनी के सुरककत क दे ब।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
15 उ ाोर पईसत ाेके उ ाोर के कसखतवा के मुततकबक कतम कईाे अवुरी इ बतत आज तक यहदी ाोर के बीि आम तौर प िातत। 16 तब ररतरह रो िेात राीा ररो पहतड पर िा रइान जहतँ यीशु ओह ाोर के कनयुय कइाे रहाे। 17 उ ाोर उनकत के दे ख के उनकर आरतधनत कईाे, ाेककन कुछ ाोर के शक भईा। 18 यीशु आके ओनसे कहान, “ हमरत के सर् आ धरती मे सब शनय कदहा रइा बत।” 19 रह से तू ाोर जतके सब जतकत के कपतत, बेटत आ पकवत आतत के नतम से बपकतसत दे के कसखतईं। 20 हम जवन कुछ भी आजत दे ाे बतनी, ओकरत के पतान करे के कसखतईं, आ दे ख़, हम दु कनयत के अंत तक हमेशत तोहनी के सतथे रहब। आमीन के बत।
मरकु स के सुस मतितर के बतरे मे बततवा रइा बत मरकु स 14 के बत 1 दू कदन बतद फसह के परब आ कबनत खमीर के रोटी के परब भइा आ मुख यतजक आ शतसी ाोर खोजत रहा कक कइसे ओकरत के िताबतजी मे पकड के मतरा जत सकेात। 2 ाेककन उ ाोर कहाे, “पब के कदन नत, कही ं ाोर के बीि हं रतमत मत होखे।” 3 कसमोन कोढी के घर मे बेथतनी मे जब ऊ खतनत खतत रहाे त ररो मेहरतर आइा रहाी जेकरत ारे ररो अातबतसर के कडबत रहे जवनत मे िीर के बहत कीमती मरहम रहे । आ ऊ बकत के तोड के ओकरत मतथत पर डता कदहाी। 4 कुछ ाोर के मन मे रुसत आवत रहे आ कहान कक, “इ मरहम के बबत् दी कतहे भइा?” 5 कतहे कक ई तीन सौ पेस से अकधकत मे बेि के ररीबन के कदहा जत सकत रहे । आ उ ाोर ओकरत नखातफ बडबडतत रहाे। 6 यीशु कहान, “उनके छोड दी।ं तूँ ओकरत के कतहे परे शतन करत बतड़? उ हमरत पर ररो बकढयत कतम कइाे बतडी। 7 कतहे कक ररीब ाोर तोहनी के सतथे हमेशत रहे ात आ जब भी तू ाोर ओकरत के भातई कर सकेनी, ाेककन हमरत ारे हमेशत नईखी। 8 उ जवन कर सकत रहाी, उ हमरत शरीर के दफनतवे खतकतर अकभषेक करे खतकतर पकहाे से आईा बतडी। 9 हम तोहनी से सि कहत हई कक जहतं भी इ सुसमतितर पूरत दु कनयत मे पितररत होई, उहतँ के इ सुसमतितर के बतरे मे भी उनुकत यतद मे कहा जतई। 10 बतरह ाोर मे से ररो यहदत इसररयोती मुख यतजकन के ारे रईाे कक उनुकत के ओ ाोर के सौंप दे वे। 11 इ सुन के उ ाोर खुश हो रईाे अवुरी उनुकत के पईसत दे वे के वतदत कईाे। आ ऊ खोजत रहाे कक कइसे सुकवधत से ओकरत सतथे धोखत कर सकेात. 12 कबनत खमीर के रोटी के पकहात कदन जब उ ाोर फसह के पव् के मतरत रहाे त उनुकर िेान उनुकत से पूछाे, “तू ितहत बतडू कक हमनी के कहतँ जतके फसह के पव् के तैयतरी करी ं जत?” 13 ऊ अपनत दू रो िेान के भेज के कहान कक शहर मे जतके पतनी के घडत ाेके ररो आदमी कमा जतई। 14 जहतँ भी उ घर मे जतई, घर के मतकाक से कहब कक रुर कहततरे कक, 'अकतकथ कक कहतँ बत, जहवत हम अपनत िेान के संरे फसह खतरब?' 15 ऊ तोहरत के ररो बडहन ऊपरी कमरत दे खत दी जवन सुसनजत आ तइयतर बत, ओकहजत हमनी खतकतर तइयतर कऱ. 16 उनकर िेात ाोर कनका के शहर मे आके उ ाोर के कहात के मुततकबक कमाा। 17 सतँ झ के ऊ बतरह ाोर के सतथे आवेान। 18 जब उ ाोर बईठ के खतनत खतत रहाे त यीशु कहाे, “ हम तोहनी से सि कहत बतनी कक तोहनी मे से जे हमरत संरे खतनत खतत होई, उ हमरत के धोखत कदही।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
19 उ ाोर दु खी होखे ाराे अवुरी रक-रक क के उनुकत से पूछे ाराे कक, “कत हम हई?” ररो अउरी कहास, “कत हम हईं?” 20 उ जवतब दे के कहास, “ ई बतरह मे से ररो ह जवन हमरत संरे बत्न मे डु बकी ारतवेात।” 21 मनुष के बेटत सिमुि िात बत, जईसे कक ओकरत बतरे मे काखा बत, ाेककन हतय ओ आदमी के, जेकरत दतरत मनुष के बेटत के धोखत कदहा रईा बत। ओह आदमी खतकतर बकढयत रकहत अरर ऊ कबो पैदत नत भइा रकहत. 22 जब उ ाोर खतनत खतत रहाे त यीशु रोटी ाेके आशीष दे ाे अवुरी ओकरत के तोड के ओ ाोर के दे ाे अवुरी कहाे, “ ाे, खत ाी,ं इ हमतर दे ह ह।” 23 ऊ पतात ाेके धनवतद दे के ओह ाोर के दे कदहान आ सब ाोर ओकरत से पी काहाे। 24 ऊ ओह ाोर से कहान कक ई हमतर नयत कनयम के खून ह जवन बहत ाोर खतकतर बहतवा रइा बत। 25 हम तोहनी से सि कहत हई कक जब तक हम बेा के फा नत कपयब, जब तक हम परमेशर के रतज मे नयत बेा के फा नत पीब। 26 उ ाोर ररो भजन रत के जैतून के पहतड पर कनका रईाे। 27 यीशु उनसे कहान, “ आज रतत तोहनी सब हमरत से नतरतज होखब, कतहे कक काखा बत कक हम िरवतहत के मतर दे ब आ भेड कततर-कबतर हो जइहे ।” 28 ाेककन हम जी उठात के बतद तोहरत से पकहाे राीा मे िा जतईब। 29 पतरस ओकरत से कहान, “भाे सब ाोर ठे स ातरी, ाेककन हम नत करब।” 30 यीशु ओकरत से कहान, “ हम तोहरत से सि कहत बतनी कक आजु रतत मे मुरत् के दू बेर बतजात से पकहाे तू हमरत से तीन बेर इनकतर कऱ।” 31 ाेककन उ अउरी जोर से बोााे, “अरर हम तोहरत सतथे मरब त हम तोहरत के कवनो तरह से इनकतर नत करब।” ठीक ओसही भी कहास उ सब ाोर। 32 उ ाोर रेतसमनी नतम के जरह प पहं िाे त उ अपनत िेान से कहास, “ जब तक हम पतथ्नत करब तब तक इहतँ बईठ जत।” 33 ऊ पतरस, यतकूब आ यूहरत के अपनत सतथे ाेके िा रइान आ ऊ बहते अिरज मे पड रइान आ बहते भतरी हो रइान. 34 उ ाोर से कहास, “ हमतर आतत मौत तक दु खी बत। 35 ऊ तनी आरे बढ के जमीन पर करर रइान आ पतथ्नत कइान कक अरर संभव होखे त ऊ समय ओकरत से बीत जतव. 36 ऊ कहान, “अबत हे कपतत, तोहरत खतकतर सब कुछ संभव बत। ई पतात हमरत से छीन ाी,ं बतककर हम जवन ितहत बतनी ऊ नत, बाुक जवन तू ितहत बतड़. 37 ऊ आके ओह ाोर के सुता दे खान आ पतरस से कहान, “ शमौन, कत तू सुता बतड़?” कत तू रक घंटत तक जतरा नत रह सकत रहाू? 38 जतरा रह़ आ पतथ्नत करी ं कक कही ं परीकत मे मत पड जतइब। आतत सिमुि तैयतर बत, ाेककन शरीर कमजोर बत। 39 ऊ फेर जतके पतथ्नत कइान आ उहे बतत कहान। 40 जब उ वतपस अईाे त उ ाोर के फेर से सुता दे खाे, कतहे की ओ ाोर के आं ख भतरी रहे , नत ही उ ाोर के पतत नत रहे कक उनुकत के कत जवतब कदहा जतर। 41 ऊ तीसरी बेर आके ओह ाोर से कहास, “ अब सुत जत आ आरतम कऱ। दे ख़, आदमी के बेटत के पतपी ाोर के हतथ मे सौंपा रइा बत। 42 उठ, हमनी के िाा जत। दे ख़, जे हमरत के धोखत दे त बत, ऊ नजदीक आ रइा बत। 43 जब ऊ अबही ं बोात रहाे त तुरते बतरह मे से ररो यहदत आ ओकरत सतथे तावतर आ ातठी ाेके पमुख यतजक आ शतसी आ बुजुर् ाोर के बहत भीड आ रइान।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
44 जे ओकरत के धोखत दे ाे रहे , उ ओ ाोर के ररो कनशतनी दे ाे रहे कक, “हम जेकरत के िुमत ाेब, उहे ह। ओकरत के ाेके, ओकरत के सुरककत ाे जत। 45 जब ऊ अइाे त सीधे उनकरत ारे जतके कहाे, “रुर, रुर! आ ओकरत के िुमत ाेत रहाे. 46 ऊ ाोर ओकरत पर हतथ रख के ओकरत के पकड काहा। 47 ओकहजत खडत ाोर मे से ररो तावतर कनकता के महतयतजक के ररो नौकर के मतर के ओकर कतन कतट कदहास। 48 यीशु जवतब कदहान, “ कत तू ाोर हमरत के पकडे खतकतर तावतर आ ातठी ाेके िोर के नखातफ कनकाा बतनी? 49 हम रोज मंकदर मे तोहनी के सतथे कशकत दे त रहनी, ाेककन तू हमरत के नत पकडनी, ाेककन पकवतशतस के पूरत होखे के ितही। 50 उ सब ओकरत के छोड के भतर रईाे। 51 ररो युवक ओकरत पीछे -पीछे िाा, जेकरत नंरत शरीर के ितरों ओर कानन के कपडत ढाा रहे । आ नवही ाोर ओकरत के पकड काहाे। 52 उ कानन के कपडत छोड के नंरत होके भतर रईाे। 53 उ ाोर यीशु के महतयतजक के ारे ाे रईाे अवुरी उनुकत संरे सभ मुनखयत यतजक, बुजुर् अवुरी शतसी ाोर जुटा रहाे। 54 पतरस ओकरत पीछे -पीछे दू र से महतयतजक के महा मे िा रईाे अवुरी उ नौकरन के संरे बईठ के आर मे ररम हो रईाे। 55 मुख यतजक आ पूरत मंडाी यीशु के हतत करे खतकतर रवतही खोजत रहाे। आ कवनो नत कमाा. 56 कतहे कक बहत ाोर उनकरत नखातफ झूठत रवतही दे त रहाे, ाेककन उ ाोर के रवतही रक संरे नत रहे । 57 कुछ ाोर उठ के ओकरत नखातफ झूठ रवतही दे के कहास। 58 हमनी के उनुकत के कहत सुनाे रहनी जत कक, “हम हतथ से बना इ मंकदर के नष क दे ब अवुरी तीन कदन के भीतर कबनत हतथ से बना मंकदर के कनमत् र करब।” 59 ाेककन नत त ओ ाोर के रवतह रक दू सरत से सहमत भईा। 60 महतयतजक बीि मे खडत होके यीशु से पूछाे, “कत तू कुछु ओ जवतब नइखी ं दे त?” ई ाोर तोहरत नखातफ कत रवतह बत? 61 ाेककन उ िुप रहाे अवुरी कुछूओ जवतब नत दे ाे। फेर महतयतजक ओकरत से पूछाे, “कत तू मसीह, धन के बेटत हउअ?” 62 यीशु कहान, “ हम हईं, त तू ाोर आदमी के बेटत के शनय के दतकहनत ओर बईठा आ सर् के बतदा मे आवत दे खब।” 63 तब महतयतजक आपन कपडत फतड के कहास, “हमनी के अउरी रवतह के कत जररत बत? 64 तू ाोर कनंदत सुनाे बतड़, तोहनी के कत ातरत बत? आ सब ाोर ओकरत के मौत के दोषी ठहरवाे। 65 कुछ ाोर ओकरत पर थूक फेके ातरा, ओकर िेहरत ढं क के ओकरत के मतरे ातरा आ कहे ातरा कक, “भकवषवतरी कऱ” आ नौकर ाोर ओकरत के हतथ के हथेाी से मतर कदहा। 66 जब पतरस महा मे नीिे रहाे त महतयतजक के ररो नौकरतनी आ रईाी। 67 जब उ पतरस के ररम करत दे खाी त उनुकत ओर दे खाी अवुरी कहाी, “तू भी नतसरत के यीशु के संरे रहनी।” 68 ाेककन उ इनकतर करत कहाे, “हम नईखी जतनत अवुरी नत समझत बतनी कक तू कत कहत बतनी।” उ बरतमदत मे कनका रईाे। आ मुरत् के िताक दा के भी। 69 ररो नौकरतनी ओकरत के फेर से दे ख के ओकहजत खडत ाोर से कहे ाराी कक, “ई ओह ाोर मे से ररो ह।” 70 आ ऊ रकरत के फेर से इनकतर कर कदहान। कुछ दे र बतद ओकहजत खडत ाोर फेर से पतरस से कहास कक, “तू जरर ओह ाोर मे से ररो हउअ, कतहे कक तू राीा के हउअ आ तोहतर बतत रकरत से सहमत बत।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
71 ाेककन उ रतरी दे वे ाराे अवुरी कसम खतर ाराे, “हम र आदमी के नईखी जतनत, जेकरत बतरे मे तू बोात रह।” 72 आ दू सरत बेर मुरत् कूर हो रइा। पतरस यीशु के कहा बतत के यतद कइान कक मुरत् दू बेर बतजात से पकहाे तू हमरत से तीन बेर इनकतर कऱ। आ जब ऊ रह बतरे मे सोिा त ऊ रोवे ातरा. मरकु स 15 के बत 1 तुरते सबेरे मुख यतजक ाोर बुजुर्, शतसी आऊ पूरत पररषद के ाोर से बततिीत क के यीशु के बतन के ाे रईाे अवुरी कपाततुस के सौंप दे ाे। 2 कपाततुस ओकरत से पूछाे, “कत तू यहदी ाोर के रतजत हउअ?” उ जवतब दे के कहास, “ तू कहत बतडू।” 3 मुख यतजक ाोर उनकरत पर बहत बतत के आरोप ारवाे, ाेककन उ कुछु ओ जवतब नत दे ाे। 4 कपाततुस फेर से पूछाे, “कत तू कुछु ओ जवतब नइख़ दे त?” दे ख़ कक ऊ ाोर तोहरत नखातफ केतनत बतत के रवतही दे त बत. 5 ाेककन यीशु अभी तक कुछु ओ नत उठवाे। जवनत से कपाततुस अिरज मे पड रईाे। 6 उ भोज मे ररो कैदी के छोड कदहान, जेकरत के उ ाोर ितहत रहे । 7 बरबत नतम के ररो आदमी रहाे, जवन कक उनुकत संरे कवदोह करे वतात ाोर के संरे बतना रहे , जवन कक कवदोह मे हतत क दे ाे रहाे। 8 ऊ ाोर जोर-जोर से किलतत भीड उनकरत से कनहोरत करे ातरा कक उ ओइसन कतम करस जइसन उ ाोर के सतथे कइाे रहान। 9 कपाततुस ओह ाोर के जवतब कदहान, “कत तू ाोर ितहत बतनी कक हम यहदी ाोर के रतजत के तोहनी खतकतर छोड दी?ं 10 कतहे कक उ जतनत रहाे कक मुख यतजक उनुकत के ईषत् के िाते सौंप दे ाे बतडे । 11 ाेककन मुनखयत यतजक ाोर ाोर के आगह कईाे कक उ बरबत के छोड दे वे के ितही। 12 कपाततुस कफर से पूछाे, “तब तोहनी कत ितहत बतनी कक हम जेकरत के यहदी ाोर के रतजत कहत बतनी? 13 ऊ ाोर फेर से किलत के कहास कक, “उनुकत के सूाी पर िढत द़।” 14 कपाततुस उनसे पूछाे, “उ कत बुरतई कईाे? ऊ ाोर अउरी जोर से किलत के कहास कक, “उनुकत के सूाी पर िढत द़।” 15 कपाततुस ाोर के संतुष करे के इचु क होके बरबत के छोड कदहान आ यीशु के कोडत मतर के सूाी पर िढतवे खतकतर सौंप कदहान। 16 कसपतही ाोर ओकरत के पैटोररयम नतम के हॉा मे ाे रईाे। आ पूरत बैड के रक सतथ बोातवेाे। 17 ऊ ाोर ओकरत के बैरनी रं र के कपडत पकहन के कतँ ट के मुकुट पकहन के ओकरत मतथत पर ारत कदहा। 18 ऊ ओकरत के नमसतर करे ारान, “हे यहदी ाोर के रतजत! 19 ऊ ाोर ओकरत मतथत पर खढ से मतर के थूक कदहा आ घुटनत टे क के ओकर पूजत कइा। 20 जब उ ाोर उनकर मजतक उडतवा त बैरनी रं र के कपडत उततर के उनकर कपडत पकहन के सूाी पर िढतवे खतकतर कनका रईाे। 21 ऊ ाोर कसकंदर आ रफस के बतप कसरे कनयत के ररो शमौन के आपन कूस उठतवे खतकतर मजबूर कर कदहान, जे ओकहजत से रुजरत रहाे। 22 उ ाोर ओकरत के रोलोथत के जरह ाे रईाे , जवनत के मताब ह कक खोपडी के जरह ह। 23 उ ाोर ओकरत के रंधक मे कमात के शरतब पीये दे ाे, ाेककन उनुकत नत कमाा। 24 जब ऊ ाोर ओकरत के सूाी पर िढत के ओकर कपडत बतँ ट के ओकरत पर किटी डता के हर केह के कत ाेबे के ितही ं। 25 तीसरत घंटत हो रइा आ ऊ ाोर ओकरत के सूाी पर िढत कदहा। 26 उनकर आरोप के ऊपर काखा रहे कक यहदी ाोर के रतजत। 27 ओकरत सतथे दू रो िोर के सूाी पर िढत दे ाे। ररो दतकहनत हतथ मे आ दोसर बतईं ओर।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
28 पकवत शतस पूरत हो रईा, जवन कहत रहे कक, “उ अपरतधी ाोर के सतथे करना रईा।” 29 ओकहजत से रुजरत ाोर उनकरत के रतरी मतरत आपन मतथत कहातवत कहाे, “अरे , तू जे मंकदर के उजतड के तीन कदन मे बनवाे बतड़। 30 अपनत के बित के कूस से उतर के आ जत। 31 ओइसही ं मुख यतजक ाोर भी शतसी ाोर के सतथे मजतक उडतवत कहाे, “उ दू सरत के बित काहाे। खुद के ऊ बित नत सके. 32 इसतरा के रतजत मसीह के अब कूस से उतरे के ितही ं ततकक हमनी के दे ख के कवशतस कर सकीाे। उनकरत सतथे सूाी पर िढतवा ाोर उनकत के कनंदत कइा। 33 छठवतँ बजे भइा त नौवतं बजे ाे पूरत दे श पर अनतर हो रइा। 34 नौवतं बजे यीशु जोर से किलत के कहाे , “ राोई, राोई, ातमत सबकथतनी?” जवनत के मताब बत कक, हमतर भरवतन, हमतर भरवतन, तू हमरत के कतहे छोड दे ाे बतडू? 35 ओकहजत खडत कुछ ाोर ई बतत सुन के कहास, “दे ख़, उ रकायतस के बोातवततरे ।” 36 रक आदमी दौड के ररो संज मे कसरकत भर के ररो खढ पर डता के ओकरत के पी के कहास कक, “त दू र के बतत बत! दे खा जतव कक रकायतस ओकरत के उततरे अइहे कक नत. 37 ईसत जोर से किलत के आपन भूत छोड कदहान। 38 मंकदर के पदत् ऊपर से नीिे तक दु भतर मे फतट रईा। 39 जब उनकरत सतमने खडत सेनतपकत दे खास कक उ अतनत किलतत बत आ भूत छोड दे ाे बत, त उ कहास, “ई आदमी सिमुि परमेशर के बेटत ह।” 40 उहतँ मेहरतर ाोर भी दू र से दे खत रहाी, जेकरत मे मररयम मरदाीनी, यतकूब छोट आ योसेस के महततरी मररयम आ साोमी रहाी। 41 (जब ऊ राीा मे रहान त उनकरत पीछे -पीछे िाा आ उनकर सेवत कइान) आ अउरी बहत मेहरतर जे उनकरत सतथे यरशाेम िाी। 42 अब जब सतँ झ हो रइा, कतहे कक ऊ तइयतरी के कदन रहे , मतने कक सब के कदन से पकहाे के कदन। 43 अररमतकथयत के यूसुफ, ररो आदररीय सातहकतर, जे परमेशर के रतज के इं तजतर करत रहाे, आके कनभ्कतत से कपाततुस के ारे रईाे अवुरी यीशु के ातश के ातासत करत रहाे। 44 कपाततुस अिरज मे पड रईाे कक उ पकहाही मर िुका बतडे , त उ सेनतपकत के बोात के पूछाे कक कत उ अभी मर िुका बतडे । 45 जब उ सेनतपकत के बतरे मे जतन रईाे त उ ातश यूसुफ के दे दे ाे। 46 ऊ बकढयत कानन खरीद के ओकरत के उततर के कानन मे ापेट के ररो कब मे सुतत कदहान जवन िटतन से कतटा रहे आ कब के दु आर पर पुर ाुढकत कदहान. 47 मररयम मरदाीनी आ योसेस के महततरी मररयम दे खाी कक उनुकत के कहतँ रतखा रइा बत। मरकु स 16 के बत 1 जब सब के कदन बीत रईा त मररयम मरदाीनी, यतकूब आ साोमी के महततरी मररयम मीठ मसतात खरीदाे रहाी ततकक उ ाोर आके उनुकत के अकभषेक कर सकस। 2 हफत के पकहात कदन सबेरे-सबेरे उ ाोर सूरज उरते कब के ारे पहं िाे। 3 उ ाोर आपस मे पूछाे, “के हमनी के कब के दु आर से पुर के ाुढकत कदही?” 4 जब उ ाोर दे खाे त दे खाे कक उ पुर ाुढक रईा बत, कतहे की उ बहत बड रहे । 5 कब मे घुसते दे खान कक ररो नवही ररो ामहर सफेद कपडत पकहनाे दतकहनत ओर बईठा बत। आ उ ाोर डे रत रईाे। 6 ऊ ओह ाोर से कहान कक मत डे रतईं, तू ाोर नतसरत के यीशु के खोजत बतड़ जेकरत के सूाी पर िढतवा रइा रहे । उ इहतँ नईखन, दे ख़ उ जरह जहतँ उ ाोर ओकरत के रखाे बत। 7 ाेककन जतके उनकर िेान आ पतरस के बततईं कक उ रउवतं से पकहाे राीा जतत हउवे।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
8 उ ाोर जली से कनका के कब से भतर रईाे। कतहे कक ऊ ाोर कतँ पत रहे आ अिरज मे पड रइान आ नत केह से कुछ कहान. कतहे कक उ ाोर डे रत रईा रहाे। 9 जब यीशु हफत के पकहात कदन सबेरे जी उठान त सबसे पकहाे मररयम मरदाीनी के सतमने पकट भईाे, जेकरत मे से उ सतत रो दु षततत के कनकतााे रहाे। 10 ऊ ाोर शोक मनतवत आ रोवत घरी उनकरत सतथे रहा ाोर के बतवाी। 11 जब उ ाोर सुन के कक उ कजंदत बतडे अवुरी उनुकत से दे खा रईा बतडे त उ ाोर कवशतस नत कईाे। 12 ओकरत बतद ऊ दू रो ाोर के घूमत-कफरत आ दे हतत मे जतत घरी दोसरत रप मे पकट भइान। 13 उ ाोर जतके बिे वतात ाोर के इ बतत बतवाे अवुरी नत उ ाोर उनुकत प कवशतस कईाे। 14 ओकरत बतद उ ररतरह ाोर के खतनत खतत घरी पकट भईाे अवुरी उ ाोर के अकवशतस अवुरी कठोर कदा से डतं टाे, कतहे की उ ाोर उनुकत जी उठात के बतद उनुकत के दे खे वतात ाोर प कवशतस नत कईाे। 15 उ ाोर से कहान, “ तू ाोर पूरत दु कनयत मे जतके हर पतरी के सुसमतितर सुनतईं।” 16 जे कवशतस करी आ बपकतसत ाेात, उ उदतर पतई। ाेककन जे कवशतस नत करी ओकरत के सजत कमा जतई। 17 आ कवशतस करे वतात ाोर के बतद इ किनतर होई। हमरत नतम से उ ाोर शैततन के भरत कदहे । ऊ ाोर नयत भतषत मे बोकाहे । 18 उ ाोर सतँ प के उठत ाीहे । आ अरर ऊ ाोर कवनो जतनाेवत िीज पी ाेत बत त ओकरत से कवनो नुकसतन नत होखी. बेमतर ाोर पर हतथ डता के ठीक हो जइहे । 19 तब पभु उनसे बतत कईात के बतद उनुकत के सर् मे ाे जतके परमेशर के दतकहनत ओर बईठ रईाे। 20 उ ाोर बतहर कनका के हर जरह पितर करत रहाे, पभु ओ ाोर के संरे कतम करत रहाे अवुरी ओकरत बतद संकेत के संरे विन के पुकष कईाे। आमीन के बत।
ाूक त के सुस मतितर के बतरे मे बततवा रइा बत ाूक त 22 के बत 1 अब खमीर के रोटी के परब नजदीक आ रईा, जवनत के फसह कहा जतात। 2 मुख यतजक आ शतसी ाोर ओकरत के कइसे मतर सके, ओकरत के खोजत रहे । कतहे कक उ ाोर जनतत से डे रतत रहाे। 3 तब शैततन इसररयोती नतम के यहदत मे घुस रईा। 4 ऊ अपनत रतसत से कनका के मुख यतजक आ सेनतपकत ाोर से बततिीत कइान कक ऊ ओकरत के कइसे धोखत दे सकेात। 5 उ ाोर खुश होके उनुकत के पईसत दे वे के वतदत कईाे। 6 ऊ वतदत कइान आ भीड के अनुपनयकत मे उनकरत के धोखत दे वे के मौकत खोजत रहान। 7 तब अखमीरी रोटी के कदन आईा जब फसह के पव् के मतरा जररी रहे । 8 ऊ पतरस आ यूहरत के भेजान कक, “ जत के हमनी के फसह के पव् तइयतर कऱ, ततकक हमनी के खतनत खतईं जत।” 9 उ ाोर ओकरत से पूछाे, “तू ितहत बतडू कक हमनी के कहतँ तैयतर करी ं जत?” 10 ऊ ओह ाोर से कहान, “ दे ख़, जब तू ाोर शहर मे घुसब़ त़ पतनी के घडत ाेके ररो आदमी कमा जतई। ओकरत पीछे -पीछे ओह घर मे घुस जतात जहतँ ऊ घुसेात। 11 घर के मतकाक से कहब कक रुर तोहरत से कहततरे कक, उ अकतकथ कक कहतँ बत, जहवत हम अपनत िेान के संरे फसह खतरब? 12 ऊ तोहके ऊपर के ररो बडहन कमरत दे खत दी जवन सुसनजत बत, ओकहजत तइयतर कऱ। 13 उ ाोर जतके उ ाोर के कहात के मुततकबक कमाा। 14 जब समय आईा त उ बतरह रो पेररत भी बईठ रईाे। 15 उ ाोर से कहान, “ हम दु ख से पकहाे तोहनी के सतथे ई फसह के पव् खतर के इचु क बतनी। 13
ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
16 हम तोहनी से कहत हई कक जब तक परमेशर के रतज मे पूरत नत हो जतई तब तक हम रकर फा नत खतरब। 17 ऊ पतात ाेके धनवतद कदहान आ कहाे, “ ई ाे के आपस मे बतँ ट ाी ं। 18 हम तोहनी से कहत हई कक जब तक परमेशर के रतज नत आई तब तक हम बेा के फा नत पीब। 19 ऊ रोटी ाेके धनवतद कदहान आ ओकरत के तोड के ओह ाोर के कदहान आ कहान कक ई हमतर दे ह ह जवन तोहनी खतकतर कदहा रइा बत. 20 ओइसही ं रतत के खतनत खइात के बतद पतात भी कहत रहे कक, “ ई पतात हमरत खून से नयत कनयम ह जवन तोहनी खतकतर बहतवा रइा बत।” 21 ाेककन दे ख, हमरत के धोखत दे वे वतात के हतथ हमरत संरे मेज प बत। 22 आदमी के बेटत जइसन तय कइा रइा रहे , ओइसही ं िात बत, बतककर कधकतर बत कक ऊ आदमी जेकरत दतरत ओकरत के धोखत कदहा रइा बत! 23 उ ाोर आपस मे पूछततछ करे ाराे कक उ ाोर मे से के इ कतम करे वतात बत। 24 ओह ाोर के बीि झरडत भी हो रइा कक ओह ाोर मे से केकरत के सबसे बड मतना जतव। 25 ऊ ओह ाोर से कहान, “ रैर-यहदी के रतजत ाोर ओह ाोर पर पभुभ रतखेात। आ जे ओह ाोर पर अकधकतर रतखेात ओकरत के उपकतरी कहा जतात. 26 ाेककन तू ाोर अइसन नत होखब, ाेककन जे तोहनी मे से बड बत, उ छोटकत कनहन होखे। आ जे मुनखयत बत, उ सेवत करे वतात के कनहन। 27 कतहे कक खतनत खतर बईठा भत सेवत करे वतात के बड बत? कत उ भोजन करे बईठा नत ह? ाेककन हम तोहनी के बीि मे ओइसही ं बतनी जइसे सेवत करे ात। 28 तू उहे हईं जे हमरत परीकत मे हमरत सतथे कटका रहाू। 29 हम तोहनी खतकतर ररो रतज के कनयुनय करत बतनी, जइसे हमतर कपतत हमरत खतकतर कनयुय कइाे बतडन। 30 ततकक तू ाोर हमरत रतज मे हमरत मेज पर खतईं-पी सकीाे आ कसंहतसन पर बइठ के इसतरा के बतरह रो रोत के नतय कर सकीाे। 31 पभु कहान, “शमौन, शमौन, दे ख़, शैततन तोहरत के ाेबे के ितहत बत कक ऊ तोहनी के रेहं कनयर छतन सके। 32 ाेककन हम तोहरत खतकतर पतथ्नत कइाे बतनी कक तोहतर कवशतस कमजोर मत होखे, आ जब तू फेर से बदा जतईब त अपनत भतई ाोर के मजबूत कऱ। 33 ऊ ओकरत से कहास, “पभु, हम तोहरत सतथे जेा आ मौत दु नु मे जतर खतकतर तइयतर बतनी।” 34 ऊ कहास, “ पतरस, हम तोहरत से कहत बतनी कक आज मुरत् नत बतजत, ओकरत से पकहाे कक तू हमरत के जतने से तीन बेर इनकतर कऱ।” 35 ऊ ओह ाोर से कहास, “ जब हम तोहनी के कबनत पस् , न्प आ जूतत के भेजाे रहनी त तोहनी के कवनो कमी रहे ? उ ाोर कहास, कुछु ओ नत। 36 तब ऊ ओह ाोर से कहास, “जेकरत ारे पस् बत, ऊ ओकरत के ाे ाेव आ ओइसही ं ओकर तावतर ाे जतव, आ जेकरत ारे तावतर नइखे, ऊ आपन कपडत बेि के खरीद ाेव। 37 कतहे कक हम तोहनी से कहत बतनी कक हमरत मे जवन काखा काखा बत, उ अबही ं पूरत होखे के ितही ं कक ऊ अपरतधी ाोर मे करना रइा कतहे कक हमरत बतरे मे बतत के अंत हो रइा बत। 38 उ ाोर कहास, “पभु, दे ख, इहतँ दु रो तावतर बत।” ऊ ओह ाोर से कहान, “ बहत हो रइा बत.” 39 ऊ बतहर कनका के अपनत आदत के अनुसतर जैतून के पहतड पर िा रइान। उनकर िेात ाोर भी उनकरत पीछे -पीछे िाा। 40 जब उहतँ उहतँ पहँ िाे त उ ाोर से कहाे, “ पतथ्नत करी ं कक तू ाोर परीकत मे मत पड जतइब।” 41 ऊ ओह ाोर से ारभर पुर के ढता से दू र हो रइान आ घुटनत टे क के पतथ्नत कइान. 42 ऊ कहान, “ हे कपतत, अरर तू ितहत बतड़ त ई पतात हमरत से हटत दी,ं बतककर हमतर इचत नत, तोहतर इचत पूरत होखे.”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
43 ऊ सर् से ररो सर्दूत उनकत के मजबूत करत पकट भइान। 44 ऊ तडप के अउरी रंभीरतत से पतथ्नत कइान आ उनकर पसीनत जमीन पर कररत खून के बडहन बूंद जइसन हो रइा। 45 जब उ पतथ्नत से उठ के अपनत िेान के ारे पहं िाे त उ ाोर के दु ख से सुता दे खाे। 46 उ ाोर से कहास, “ तू ाोर कतहे सुतत बतडू? उठ के पतथ्नत करी ं कक कही ं परीकत मे मत पड जतइब। 47 जब उ अभी तक बोात रहाे त दे खास कक ररो भीड आ बतरह ाोर मे से ररो यहदत नतम के आदमी ओ ाोर के आरे बढ के यीशु के िुंबन करे के नजदीक आ रईाे। 48 ाेककन यीशु ओकरत से पूछाे, “ यहदत, कत तू आदमी के बेटत के िुमत ाेके धोखत दे रहा बतडू?” 49 जब ओकरत आसपतस के ाोर ओकरत बतद कत होखे वतात दे ख के कहास, “पभु, कत हमनी के तावतर से मतर दे ब जत?” 50 ओहमे से ररो महतयतजक के नौकर के पीट के ओकर दतकहनत कतन कतट कदहास। 51 यीशु जवतब कदहान, “ तू ाोर अब तक सहन कऱ।” आऊ उनकर कतन छू के ठीक कर कदहान। 52 तब यीशु उनकरत ारे आइा मुख यतजक, मंकदर के सेनतपकत आ बुजुर् ाोर से कहाे, “ कत रउवतं तावतर आ ातठी ाेके िोर के नखातफ कनकाा बतनी?” 53 जब हम रोज तोहनी के सतथे मंकदर मे रहनी त तू हमरत नखातफ हतथ नत बढवनी, ाेककन इहे तोहतर समय ह आ अनतर के ततकत ह। 54 तब उ ाोर ओकरत के ाेके महतयतजक के घर मे ाे रईाे। पतरस दू र-दू र तक पीछे -पीछे िा रईाे। 55 जब उ ाोर दातन के बीि मे आर जरत के रक संरे बईठ रईाे त पतरस ओ ाोर के बीि बईठ रईाे। 56 ररो नौकरतनी ओकरत के आर के ारे बईठा दे ख के ओकरत के रंभीरतत से दे खास अवुरी कहास कक, इ आदमी भी उनुकत संरे रहे । 57 उ ओकरत से इनकतर करत कहाे, “मेरी, हम ओकरत के नईखी जतनत।” 58 कुछ दे र बतद ररो अउरी आदमी उनकत के दे ख के कहास, “तू भी ओह ाोर मे से हउअ।” पतरस कहास, “यतर, हम नइखी।” 59 करीब रक घंटत के बतद ररो आदमी भरोसत से कहास कक, “सि मे इ आदमी भी ओकरत संरे रहे , कतहे कक उ राीा के हवे।” 60 पतरस कहास, “यतर, हम नइखी जतनत कक तू कत कहत बतडू।” आ जब ऊ अभी तक बोात रहाे त तुरते मुरत् कूर हो रइा। 61 पभु मुड के पतरस के ओर दे खाे। पतरस पभु के विन के यतद कइान कक ऊ कइसे कहाे रहाे कक मुरत् बतजे से पकहाे तू हमरत से तीन बेर इनकतर कऱ। 62 पतरस बतहर कनका के कडुआ रोअत रहाे। 63 यीशु के पकडे वतात ाोर उनकर मजतक उडतवत मतर कदहास। 64 जब उ ाोर उनकर आँ ख पर पटी बतं ध के उनकर िेहरत पर मतर के पूछाे कक, “भकवषवतरी कह़, तोहरत के के मतर कदहास?” 65 उ ाोर उनकरत नखातफ अउरी बहत बतत के कनंदत करत रहाे। 66 कदन होते ही ाोर के बुजुर् आउर मुनखयत यतजक आ शतसी ाोर रकजुट होके उनकत के अपनत मंडाी मे ाे रईाे आ कहान| 67 कत तू मसीह हउअ? बततईं हमनी के। ऊ ओह ाोर से कहान कक अरर हम तोहनी के बततइब त तू ाोर कवशतस नत करब़। 68 अरर हमहँ तोहसे पूछब त तू ाोर हमरत के जवतब नत दे ब़ आ नत हमरत के जतर दे ब़। 69 रकरत बतद मनुष के बेटत परमेशर के शनय के दतकहनत ओर बईठ जतई। 70 तब उ सब कहास, “कत तू परमेशर के बेटत हउअ?” ऊ ओह ाोर से कहान, “ तू ाोर कहत बतड़ कक हम हईं.” 71 उ ाोर पूछाे, “हमनी के अउरी रवतही के कत जररत बत? कतहे कक हम खुदे उनकर मुँह सुनाे बतनी।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
ाूक त 23 के बत 1 उ ाोर के पूरत भीड उठ के ओकरत के कपाततुस के ारे ाे रईा। 2 उ ाोर ओकरत प आरोप ारतवे ाराे, “हमनी के इ आदमी के रतष् के कबरतडत दे खनी अवुरी कैसर के कर दे वे से मनत करत दे खनी कक उ खुद मसीह रतजत हवे।” 3 कपाततुस ओकरत से पूछाे, “कत तू यहदी ाोर के रतजत हउअ?” ऊ जवतब कदहान आ कहान कक तू कहत बतड़. 4 कपाततुस मुख यतजक आ ाोर से कहाे, “हमरत रह आदमी मे कवनो दोष नइखे ातरत।” 5 उ ाोर अउरी भयंकर होके कहत रहाे कक, “उ राीा से ाेके इ जरह तक पूरत यहदी दे श मे कशकत दे त ाोर के भडकतवेात।” 6 जब कपाततुस राीा के बतरे मे सुनाे त पूछाे कक कत उ आदमी राीा के हवे। 7 जइसही ं ऊ पतत िाा कक ऊ हे रोदे स के अकधकतर केत के हवे, ऊ ओकरत के हे रोदे स के ारे भेज कदहान, जे ओह घरी यरशाेम मे भी रहाे। 8 हे रोदे स जब यीशु के दे खाे त उ बहत खुश हो रईाे, कतहे कक उ बहत कदन से उनुकत के दे खे के ितहत रहाे, कतहे की उ उनुकत बतरे मे बहत बतत सुनाे रहाे। आ उनुकत उमेद रहे कक ऊ अपनत ओर से कवनो िमततर दे खाे होखीहे . 9 तब ऊ ओकरत से बहत शबन मे पूछततछ कइान। ाेककन उ ओकरत के कुछूओ जवतब नत दे ाे। 10 तब मुख यतजक आ शतसी ाोर खडत होके ओकरत पर कडत आरोप ारवास। 11 हे रोदे स अपनत ाडतकू ाोर के सतथे उनकरत के बदनतम कइास आ मजतक उडत कदहास आ ररो बकढयत वस पकहन के कपाततुस के ारे भेज कदहास। 12 ओही कदन कपाततुस आ हे रोदे स के दोसी हो रइा कतहे कक पकहाे दु नु जतनत के बीि दु शनी रहे । 13 कपाततुस जब ऊ मुख यतजक, शतसक आ ाोर के रकटत कइान। 14 ओह ाोर से कहान, “तू ाोर रह आदमी के हमरत ारे ाे आइा बतड़ जइसे कक ऊ ाोर के कबरतडत बत, आ दे ख़ कक हम तोहनी से सतमने ओकरत के जतँ ि के रह आदमी मे कवनो दोष नइखी ं पतवा जवनत के बतरे मे तू ओकरत पर आरोप ारतवत बतडू। 15 नत, नत ही हे रोदे स, कतहे कक हम तोहके ओकरत ारे भेजाे बतनी। आ दे ख़, ओकरत सतथे मौत के ातयक कवनो कतम नइखे होखत। 16 हम ओकरत के ततडब आ ओकरत के छोड दे ब। 17 (कतहे कक ओकरत के भोज मे ररो के छोड दे वे के पडी।) 18 उ ाोर रके बेर किलत के कहास कक, “रह आदमी के छोड के बरबत के हमनी के छोड दी ं। 19 (उ शहर मे ररो खतस कवदोह आ हतत के कतरर जेा मे डता कदहा रइा।) 20 कपाततुस यीशु के छोडे के इचु क होके ओ ाोर से फेर से बतत कईाे| 21 ाेककन उ ाोर किलत के कहास, “उनुकत के सूाी पर िढत द़, सूाी पर िढत द़।” 22 ऊ तीसरत बेर ओह ाोर से पूछान, “कतहे , ऊ कवन बुरतई कइाे बत?” हम ओकरत मे कवनो मौत के कतरर नईखी कमाा, रहसे हम ओकरत के सजत दे ब अवुरी ओकरत के छोड दे ब। 23 उ ाोर तुरते तेज आवतज मे कहास कक उनुकत के सूाी पर िढतवा जत सके। आ उनकर आ मुख यतजकन के आवतज हतवी हो रइा। 24 कपाततुस सजत सुनवाे कक उ ाोर के मतं र के मुततकबक होखे। 25 जेकरत के उ ाोर बरतवत आ हतत के आरोप मे जेा मे डता कदहा रइा रहे , ओकरत के छोड कदहान। ाेककन उ यीशु के ओ ाोर के मज् के मुततकबक सौंप दे ाे। 26 जब ऊ ाोर ओकरत के ाे रइा त ऊ ाोर ररो कसरे कनयन के ररो शमौन के पकड काहा आ ऊ ाोर ओकरत पर कूस डता कदहा कक ऊ यीशु के बतद ओकरत के उठत सके. 27 उनकरत पीछे -पीछे बहत ाोर आ मेहरतर ाोर भी उनकर कवातप आ कवातप करत रहे ।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
28 ाेककन यीशु ओह ाोर के ओर मुड के कहान, “ यरशाेम के बेटी ाोर, हमरत खतकतर मत रोईं, बाुक अपनत खतकतर आ अपनत ाइकन खतकतर रोईं। 29 कतहे कक दे ख़, ऊ कदन आवे वतात बत जब ऊ ाोर कह दी कक, “धन बत बंजर, ऊ रभ् जवन कबो नत पैदत कइास, आ ऊ बचत जवन कबो दू ध नत पवास।” 30 तब ऊ ाोर पहतडन से कहे ातरी कक हमनी पर करर जतईं। आ पहतडी तक, हमनी के ढं क ाी ं। 31 अरर उ ाोर हररयर पेड मे इ कतम करीहे त सूखा पेड मे कत होई? 32 दू रो अउरी अपरतधी भी रहाे, जेकरत के ओकरत सतथे हतत करे खतकतर ाे जतइा रइा। 33 जब उ ाोर कावतरी नतम के जरह प पहं िाे त उ ाोर उनुकत अवुरी अपरतधी के ररो दतकहनत ओर अवुरी दू सरत बतयतं ओर सूाी प िढत दे ाे। 34 तब यीशु कहान, “ बतबू, ओ ाोर के मतफ कऱ। कतहे कक ऊ ाोर नइखे जतनत कक ऊ ाोर कत करत बत. उ ाोर उनकर कपडत बतं ट के किटी खेााे। 35 ाोर दे खत खडत हो रइा। उ ाोर के सतथे शतसक भी उनकर मजतक उडतवत कहाे, “उ दोसरत के बित काहाे। अरर उ परमेशर के िुना मसीह हवे त उ खुद के बितवे। 36 कसपतही भी उनकर मजतक उडतवत उनकरत ारे आके कसरकत िढवाे| 37 ऊ कहान कक अरर तू यहदी ाोर के रतजत हउअ त अपनत के बित ाी ं। 38 ओकरत ऊपर गीक, ाैकटन आ कहबू के अकर मे काखा रहे कक ई यहदी ाोर के रतजत ह। 39 फतं सी पर ाटका अपरतधी मे से ररो दोषी ओकरत के रतरी दे त कहास कक, “अरर तू मसीह हउअ त अपनत के आ हमनी के बित ाी।ं ” 40 ाेककन दू सरकत ओकरत के डतं टत कहास, “कत तू भरवतन से डे रतत नइख़ कक तू ओही सजत मे बतड़? 41 आ हमनी के सतँ िह नतयसंरत बतनी जत। कतहे कक हमनी के अपनत कतम के उकित इनतम कमाेात, ाेककन इ आदमी कवनो रात कतम नईखे कईाे। 42 ऊ यीशु से कहान, “पभु, जब तू अपनत रतज मे अइब़ त हमरत के यतद कऱ।” 43 यीशु ओकरत से कहान, “ हम तोहरत से सि कहत बतनी कक आज तू हमरत सतथे जरत मे रहब।” 44 छठवतँ बजे के करीब रहे आ नौवतं बजे तक पूरत धरती पर अनतर हो रइा। 45 सूरज अनतर हो रइा आ बीि मे मंकदर के पदत् फतट रइा। 46 जब यीशु जोर से किलत के कहाे, “ बतबू, हम आपन आतत तोहरत हतथ मे सौंप दे ाे बतनी । 47 जब सेनतपकत के कतम दे खान त उ परमेशर के मकहमत करत कहाे, “सिहँ इ ररो धम् आदमी रहाे।” 48 उ सब ाोर जवन सब ाोर ओह दश्न मे रकटत हो रईा रहे , उ सब कतम दे ख के आपन छतती पीट के वतपस आ रईाे। 49 उनकर सब जतन-पहितन आ राीा से उनकर पीछे -पीछे आवे वताी मेहरतर ाोर दू र खडत होके ई सब दे खत रहाी। 50 यूसुफ नतम के ररो आदमी ररो सातहकतर रहाे। उ ररो अचत आदमी आ धम् रहाे। 51 (उहे ओह ाोर के सातह आ कतम से सहमत नत रहाे) उ यहदी ाोर के शहर अररमतकथयत के रहाे, उ खुद परमेशर के रतज के इं तजतर करत रहाे। 52 इ आदमी कपाततुस के पतस जतके यीशु के ातश के भीख मतं रास| 53 ऊ ओकरत के उततर के कानन मे ापेट के ररो कब मे रख कदहान जवन पुर मे उकेरा रहे , जवनत मे कबो केह के नत कबछतवा रइा रहे । 54 उ कदन तइयतरी के कदन रहे आ सब के कदन आवत रहे । 55 राीा से उनकरत सतथे आइा मेहरतर ाोर भी पीछे -पीछे िा के कब के दे खाी आ उनकर ातश कइसे कबछतवा रइा बत। 56 उ ाोर वतपस आके मसतात आ मरहम तैयतर कईाे। आजत के अनुसतर सब के कदन आरतम कइान।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
ाूक त 24 के बत 1 हफत के पकहात कदन सबेरे-सबेरे उ ाोर जवन मसतात तैयतर कईाे रहाे, ओकरत संरे कुछ अवुरी ाोर ाेके कब के ारे पहं िाे। 2 उ ाोर कब से पुर के ाुढकतवा दे खाे। 3 उ ाोर अंदर घुसा त पभु यीशु के ातश नत कमाा। 4 जब उ ाोर रह बतरे मे बहत अिरज मे पडा रहाे त दे ख, उ ाोर िमकत कपडत पकहनाे दु आदमी ओ ाोर के बरा मे खडत रहाे। 5 जब ऊ ाोर डे रत के धरती के सतमने मुँह झुकत के कहास, “तू ाोर मुअा ाोर के बीि मे कजंदत ाोर के कतहे खोजत बतड़? 6 उ इहतँ नईखन, ाेककन जी उठा बतडे , यतद करी ं कक जब उ राीा मे रहाे, त उ रउआ से कईसे कहाे रहाे। 7 ऊ कहान कक, “मनुष के बेटत के पतपी ाोर के हतथ मे सौंपा के सूाी पर िढतवा जररी बत आ तीसरत कदन जी उठा जररी बत।” 8 उ ाोर उनकर बतत यतद कइान। 9 कब से ावट के ररतरह ाोर आ बतकी सब ाोर के इ सब बतत बतवाे। 10 मररयम मरदाीनी, योआनत, यतकूब के महततरी मररयम आ अउरी मेहरतर ाोर पेररत ाोर के ई बतत बतवाी। 11 उ ाोर के बतत बेकतर के ककसत कनहन ातरा, ाेककन उ ाोर ओकरत प कवशतस नत कईाे। 12 पतरस उठ के कब के ओर भतर रईाे। झुक के ऊ कानन के कपडत के अपनत से कबछा दे खान आ जवन भइा ओकरत से अपनत मन मे अिरज से िा रइान. 13 ओही कदन उनमे से दू रो इमतऊस नतम के रतँ व मे िा रइान जवन यरशाेम से करीब सतठ फातल र दू र रहे । 14 उ ाोर रक संरे इ सब घटनत के बतरे मे बकतयतवत रहाे। 15 जब उ ाोर रक संरे बतकही करत रहाे अवुरी िित् करत रहाे, त यीशु खुद नजदीक आके ओ ाोर के संरे िा रईाे। 16 ाेककन उ ाोर के नजर कटका रहे कक उ ाोर उनुकत के नत जतनस। 17 ऊ ओह ाोर से पूछाे, “ िात-िात आ दु खी होके रक-दू सरत से कवन-कवन संवतद बत? 18 ओह ाोर मे से ररो जेकर नतम न्ओपतस रहे , ओकरत से कहास कक, “कत तू यरशाेम मे खताी परदे शी हउअ आ आजका उहतँ के घटनत के बतरे मे नइख जतनत?” 19 ऊ ओह ाोर से पूछाे, “कत बतत बत? उ ाोर ओकरत से कहास, “नतसरत के यीशु के बतरे मे , जे परमेशर आ सब ाोर के सतमने कतम आ बतत मे शनयशताी भकवषवयत रहाे। 20 कइसे मुख यतजक आ हमनी के शतसक ओकरत के मौत के सजत सुनतवे खतकतर सौंप कदहाे आ ओकरत के सूाी पर िढत कदहाे। 21 ाेककन हमनी के भरोसत रहे कक उहे इसतरा के छु डतवे वतात रहाे, अवुरी रकरत अातवे आज इ कतम भईात के तीसरत कदन बत। 22 हँ , हमनी के सतथी के कुछ मेहरतर भी हमनी के अिरज मे डता कदहाी, जवन कक कब पर सबेरे-सबेरे रहाी। 23 जब उनकर ातश नत कमाा त उ ाोर आके कहाे कक उ ाोर सर्दूत के ररो दश्न भी दे खाे बतडे , जवन कहत रहाे कक उ कजंदत बतडे । 24 हमनी के सतथे कुछ ाोर कब पर जतके उहे दे खाे जइसन कक मेहरतर ाोर कहाे रहे , ाेककन उ ाोर ओकरत के नत दे खाे। 25 तब ऊ ओह ाोर से कहान, “ हे मूख् ाोर आ भकवषवयत ाोर के कहा सब बतत पर कवशतस करे मे धीमत कदा वतात ाोर।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
26 कत मसीह के इ सब कष उठत के अपनत मकहमत मे पवेश नत करे के ितहत रहे ? 27 मूसत आऊ सब भकवषवयत ाोर से शुर होके उ सब पकवतशतस मे उनकरत के बतरे मे बततवत रहान। 28 ऊ ाोर ओह रतँ व के नजदीक आ रइा जहतँ ऊ ाोर जतत रहे आ ऊ अइसे कइा जइसे कक ऊ अउरी आरे बढा ितहत होखे. 29 ाेककन उ ाोर ओकरत के मजबूर क के कहास कक, “हमनी के संरे रह, कतहे कक सतं झ हो रईा बत अवुरी कदन बहत दू र हो रईा बत।” आ ऊ ओह ाोर के सतथे रहे खतकतर भीतर िा रइान. 30 जब उ ओ ाोर के संरे खतनत खतत रहाे त उ रोटी ाेके आशीष दे ाे अवुरी तोड के ओ ाोर के दे ाे। 31 उ ाोर के आँ ख खुा रईा अवुरी उ ाोर उनुकत के जतन रईाे। आ ऊ ओह ाोर के नजर से रतयब हो रइा. 32 उ ाोर रक दू सरत से कहास, “कत हमनी के मन मे नत जरा जब उ रतसत मे हमनी से बतत करत रहाे अवुरी जब उ हमनी के पकवतशतस के बतत खोात रहाे? 33 ओही घरी उ ाोर उठ के यरशाेम ावट के ररतरह ाोर आ ओह ाोर के सतथे मौजूद ाोर के रकटत होके दे खाे। 34 ऊ कहान कक पभु सिहँ जी उठा बतडन आ कसमोन से पकट भइा बतडन। 35 उ ाोर बतवाे कक रतसत मे कत भईा रहे अवुरी रोटी तोडे मे उनुकत के कइसे जतना जतात। 36 जब उ ाोर इहे बतत करत रहाे त यीशु खुद ओ ाोर के बीि मे खडत होके कहाे, “ रउआ ाोर के शतं कत होखे।” 37 ाेककन उ ाोर डे रत रईाे अवुरी डे रत रईाे अवुरी सोिाे कक उ ाोर कवनो आतत के दे खाे बतडे । 38 ऊ ओह ाोर से कहान, “ तू ाोर कतहे घबरत रइा बतड़? आ तोहनी के कदा मे कतहे कवितर उठत बत? 39 हमतर हतथ आ रोड दे ख़ कक हम खुदे हईं, हमरत के संभता के दे ख़। कतहे कक आतत के मतं स आ हडी नत होात, जइसन कक रउआ हमरत के दे खत बतनी। 40 ई बतत कहान त ऊ ाोर के आपन हतथ-रोड दे खत कदहान। 41 जब उ ाोर अभी तक खुशी से कवशतस नत कईाे अवुरी अिरज मे रहाे, त उ ओ ाोर से कहाे , “ कत तोहनी के इहतँ कवनो खतनत बत? 42 उ ाोर ओकरत के भूसा मछरी के टु कडत आ मधुकोश के टु कडत दे कदहाे। 43 ऊ ओकरत के ाेके ओह ाोर के सतमने खइाे। 44 उ ाोर से कहान, “ हम तोहनी के सतथे रहात के समय तोहनी से कहाे रहनी कक उ सब बतत पूरत होखे के ितही ं जवन मूसत के ववयत, भकवषवयत आ भजन मे हमरत बतरे मे काखा रहे । 45 तब उ उनकर समझ खोा कदहान ततकक उ ाोर पकवतशतस के समझ सके। 46 उ ाोर से कहान, “कानखत मे काखा बत कक मसीह के तीसरत कदन कष उठतवे के आ मुवान मे से कजर के ितही ं। 47 आउर यरशाेम से शुर होके सब जतकत के बीि उनकरत नतम से पशतततप आ पतप के मतफी के पितर होखे। 48 तू ाोर रह बतत के रवतह हउअ। 49 हम अपनत कपतत के वतदत तोहनी पर भेजत बतनी, ाेककन जब तक तोहनी के ऊपर से शनय नत कमा जतई, तब तक तू यरशाेम शहर मे रहब। 50 ऊ ओह ाोर के बेथतनी तक ाे रइान आ हतथ उठत के आशीष कदहान। 51 जब ऊ ओह ाोर के आशीष दे त रहाे त ऊ ओह ाोर से अारत हो रइान आ सर् मे ाे जतइा रइान. 52 ऊ ाोर उनकर आरतधनत कइा आ बहत खुशी से यरशाेम ावट रइा। 53 ऊ ाोर मंकदर मे ारतततर भरवतन के सुकत आ आशीष करत रहान। आमीन के बत।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
यूह रत के सुस मतितर के बतरे मे बततवा रइा बत यूहरत 18 के बत 1 जब यीशु इ बतत कहान त उ अपनत िेान के सतथे सीड् ोन नदी के पतर िा रईाे, जहवतँ ररो बरीित रहे , जवनत मे उ आऊ आपन िेात ाोर घुसा। 2 ओकरत के धोखत दे वे वतात यहदत भी उ जरह के जतनत रहाे, कतहे कक यीशु अपनत िेान के संरे अकर उहतँ घूमत रहाे। 3 यहदत मुख यतजक आ फरीकसयन से आदमी आ अफसरन के ररो दा ाेके ाताटे न, मशता आ हकथयतर ाेके उहतँ अइाे। 4 यीशु अपनत पर आवे वतात सब बतत के जतन के कनका के पूछाे, “ तू केकरत के खोजत बतनी?” 5 उ ाोर ओकरत के जवतब दे ाे, “नतसरत के यीशु।” यीशु उनकरत से कहान, “ हम उ हईं।” ओकरत के धोखत दे वे वतात यहदत भी ओ ाोर के संरे खडत हो रईाे। 6 जइसही ं ऊ ओह ाोर से कहान कक, “हम ऊ हईं, ऊ ाोर पीछे हट के जमीन पर करर रइान.” 7 तब उ फेर से पूछाे कक, “ तू केकरत के खोजत बतनी?” उ ाोर कहाे, “नतसरत के यीशु।” 8 यीशु जवतब कदहान, “ हम तोहनी के बतत दे ाे बतनी कक हम उ हईं। 9 ततकक उ कहा बतत पूरत होखे कक तू हमरत के जवन दे ाे बतडू, ओकरत मे से हम कवनो के रंवत नईखी कईाे। 10 तब कसमोन पतरस तावतर ाेके तावतर कनकता के महतयतजक के सेवक के मतर कदहान आ ओकर दतकहनत कतन कतट कदहान। नौकर के नतम मताकुस रहे । 11 तब यीशु पतरस से कहाे, “ अपनत तावतर के मतन मे डता द, जवन पतात हमतर कपतत हमरत के दे ाे बतडे , कत हम ओकरत के नत पीब? 12 तब के दा आउर सेनतपकत आ यहकदयन के अफसर यीशु के पकड के बतन काहाे। 13 ऊ पकहाे हरत के ारे ाे रइान। कतहे कक उ कैफत के ससुर रहाे, जवन कक ओही सता महतयतजक रहाे। 14 कतइफत उहे रहान जे यहदी ाोर के सातह कदहान कक ाोर खतकतर रक आदमी के मौत होखा जररी बत। 15 शमौन पतरस यीशु के पीछे -पीछे िाा आ ररो अउरी िेात भी, उ िेात महतयतजक के जतनत रहाे आ यीशु के सतथे महतयतजक के महा मे िा रईाे| 16 ाेककन पतरस बतहर दु आर पर खडत रहाे। तब ऊ दू सर िेात जे महतयतजक के जतना-पहितना रहे , बतहर कनका के दरबजत के रखवताी से बतत क के पतरस के भीतर ाे अइाे। 17 दरवतजत के रखवताी ाइकी पतरस से कहास, “कत तू भी रह आदमी के िेात मे से ररो नत हउअ?” ऊ कहत बतडन कक हम नइखी.ं 18 कोयात से आर जरत के नौकर आ अकधकतरी उहतँ खडत रहाे। कतहे कक ठं डत रहे आ ऊ ाोर ररम हो रइा आ पतरस ओह ाोर के सतथे खडत होके ररम हो रइा। 19 तब महतयतजक यीशु से उनकर िेान आ उनकर कशकत के बतरे मे पूछाे| 20 यीशु जवतब कदहान, “ हम दु कनयत से खुा के बोात रहनी। हम कबो आरतधनताय मे, आ मंकदर मे , जहतँ यहदी ाोर हमेशत सहतरत ाेात। आ रुप रप से हम कुछ नइखी कहाे। 21 तू हमरत से कतहे पूछत बतडू? जे हमरत के सुनाे बत, ओकरत से पूछी ं कक हम कत कहाे बतनी। 22 जब ऊ ई बतत कहान त ओकहजत खडत ररो अफसर यीशु के हथेाी से मतर के कहास, “कत तू महतयतजक के अईसन जवतब दे त बतड़?” 23 यीशु जवतब कदहान, “ अरर हम बुरत बतत कहाे बतनी त बुरतई के रवतही दी,ं ाेककन अरर ठीक बत त तू हमरत के कतहे मतरत बतडू? 24 हरत ओकरत के बतन के महतयतजक कैफत के ारे भेजाे रहाे। 25 शमौन पतरस खडत होके ररम हो रइान। उ ाोर उनकरत से पूछाे, “कत तू भी उनकर िेात मे से ररो नत हउअ?” उ रकरत से इनकतर क के कहाे, हम नईखी। 20
ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
26 महतयतजक के ररो सेवक उनकर ररशेदतर रहाे, जेकर कतन पतरस कतट दे ाे रहाे, उ कहास कक, कत हम तोहरत के उनुकत संरे बरइित मे नत दे खनी? 27 पतरस फेर से इनकतर कर कदहान आ तुरते मुरत् कूद रइा। 28 तब उ ाोर यीशु के कैफत से नतय के हॉा मे ाे रईाे। उ ाोर खुद नतय कक मे नत रईाे कक कही ं उ ाोर अशुद नत हो जतस। ाेककन उ ाोर फसह के पव् के खतर खतकतर। 29 कपाततुस ओह ाोर के ारे जतके पूछाे, “तू ाोर रह आदमी पर कवन आरोप ारतवत बतनी? 30 उ ाोर जवतब दे ाे, “जकद उ अपरतधी नत रकहत त हम ओकरत के तोहरत हतथ मे नत सौंप दे ाे रहते।” 31 कपाततुस ओह ाोर से कहान, “तू ाोर ओकरत के ाेके अपनत कनयम के अनुसतर ओकर नतय करी ं।” यहदी ाोर ओकरत से कहास, “हमनी के केह के मतरा जतयज नईखे। 32 ततकक यीशु के बतत पूरत होखे, जवन उ कहाे रहाे कक उ कवनत मौत के बतरे मे बततवत रहाे। 33 तब कपाततुस फेर से नतय के घर मे घुस के यीशु के बोावाे आ पूछाे, “कत तू यहदी ाोर के रतजत हउअ?” 34 यीशु जवतब कदहान, “ कत तू ई बतत अपनत बतरे मे कहत बतड़ कक दोसर ाोर हमरत बतरे मे बतवाे बत? 35 कपाततुस जवतब कदहान, “कत हम यहदी हईं?” तोहतर जतकत आ मुख यतजक तोहरत के हमरत ारे सौंप दे ाे बतडे , तू कत कईाे बतडू? 36 यीशु जवतब कदहान, “ हमतर रतज रह दु कनयत के नत ह, अरर हमतर रतज रह दु कनयत के रकहत त हमतर सेवक ाडत कक हम यहदी ाोर के हतथ मे नत सौंप दी ं। 37 कपाततुस ओकरत से पूछाे, “त कत तू रतजत हउअ?” यीशु जवतब कदहान, “ तू कहत हव कक हम रतजत हईं।” हम रही खतकतर पैदत भइा बतनी आ रही से हम दु कनयत मे अइनी कक हम सचतई के रवतही दे ब। जे भी सचतई के बत, उ हमतर आवतज सुनेात। 38 कपाततुस ओकरत से कहान, “सचतई कत ह? इ कहात के बतद उ कफर से यहदी ाोर के ारे रईाे अवुरी कहाे कक, “हमरत उनुकत मे कवनो दोष नईखे।” 39 तोहनी के ररो ररवतज बत कक हम फसह के कदन तोहनी खतकतर ररो के छोड दे ब, कत तू ाोर यहदी ाोर के रतजत के छोड दे ब? 40 तब सब ाोर फेर से किलत के कहास, “ई आदमी नत, बरबत ह।” अब बरबत ररो डकैत रहाे। यूहरत 19 के बत 1 कपाततुस यीशु के पकड के कोडत मतर कदहान। 2 कसपतही ाोर कतँ ट के मुकुट बनत के ओकरत मतथत पर पकहनाे आ बैरनी रं र के वस पकहनाे। 3 ऊ कहास, “यहकदयन के रतजत, जय हो! आ ऊ ाोर ओकरत के हतथ से मतर कदहा। 4 कपाततुस फेर से कनका के कहान, “दे ख़, हम ओकरत के तोहनी के ारे ाे आवत बतनी ततकक तोहनी के पतत िा सके कक हमरत ओकरत मे कवनो दोष नइखे कमात।” 5 तब यीशु कतँ ट के मुकुट आ बैरनी रं र के वस पकहनाे कनकााे। कपाततुस ओह ाोर से कहान, “दे ख़ ऊ आदमी!” 6 जब मुख यतजक आ अफसर ाोर उनकत के दे खाे त किलत के कहान कक, “उनुकत के सूाी पर िढत द़, सूाी पर िढत द़।” कपाततुस ओह ाोर से कहान, “तू ाोर ओकरत के ाेके सूाी पर िढत द़, कतहे कक हमरत ओकरत मे कवनो दोष नइखे कमात।” 7 यहदी ाोर ओकरत के जवतब कदहा, “हमनी के ररो कनयम बत, आ हमनी के कनयम के अनुसतर ओकरत के मर जतर के ितही,ं कतहे कक उ अपनत के परमेशर के बेटत बनवाे बत।” 8 कपाततुस इ बतत सुन के अउरी डे रत रईाे। 9 कफर से नतयताय मे जतके यीशु से पूछाे, “तू कहतँ से आइा बतडू?” ाेककन यीशु ओकरत के कवनो जवतब नत दे ाे। 10 कपाततुस ओकरत से कहान, “कत तू हमरत से बतत नइख़?” कत तू नइख जतनत कक हमरत तोहरत के सूाी पर िढतवे के अकधकतर बत आ तोहरत के छोडे के अकधकतर बत?
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
11 यीशु जवतब कदहान, “ जब तक तोहरत के ऊपर से नत कदहा जतई, तब तक तोहरत हमरत नखातफ कवनो अकधकतर नत हो सकत रहे । 12 तब से कपाततुस ओकरत के छोडे के कोकशश कईाे , ाेककन यहदी ाोर किलतत कहाे कक, “अरर तू र आदमी के छोड दे ब त तू सीजर के दोस नत हव। 13 कपाततुस ई बतत सुन के यीशु के बतहर ाे अइाे आ नतय के आसन पर बईठ रइान जवन कक फुटपतथ कहा जतात, ाेककन कहबू भतषत मे रबतथत कहा जतात। 14 फसह के पव् के तइयतरी आ ारभर छठवतँ घंटत के समय रहे आ ऊ यहदी ाोर से कहाे, “दे ख़ तोहतर रतजत! 15 ाेककन उ ाोर किलत के कहास कक, “उन के दू र कर दी,ं ओकरत के सूाी पर िढत दी ं।” कपाततुस उनकरत से कहान, कत हम तोहनी के रतजत के सूाी पर िढत दे ब? मुख यतजक ाोर जवतब कदहास, “हमनी के कैसर के अातवत कवनो रतजत नईखे।” 16 तब उ उनकरत के सूाी पर िढतवे खतकतर सौंप कदहान। उ ाोर यीशु के ाेके िा रईाे। 17 ऊ आपन कूस ाेके ररो अइसन जरह पर िा रइान जवनत के कहबू भतषत मे रोलोथत कहा जतात। 18 उहतँ उ ाोर ओकरत के सूाी पर िढवाे, आ दू रो अउरी ाोर के दु नो ओर से रक आ बीि मे यीशु के सूाी पर िढवाे। 19 कपाततुस ररो शीष्क काख के कूस पर रख कदहान। काखा रहे , “नतसरत के यीशु यहकदयन के रतजत।” 20 तब ई उपतकध बहत यहदी ाोर पढत रहे कतहे कक जहतँ यीशु के सूाी पर िढतवा रइा रहे उ जरह शहर के नजदीक रहे । 21 तब यहदी ाोर के मुख यतजक कपाततुस से कहाे, “यहकदयन के रतजत, मत काखी ं। ाेककन उ कहाे कक, हम यहदी ाोर के रतजत हई। 22 कपाततुस जवतब कदहान, “हम जवन काखाे बतनी उहे काखाे बतनी।” 23 तब कसपतही यीशु के सूाी पर िढत के उनकर कपडत ाेके हर कसपतही के ितर भतर मे रखाे| आ ओकर कोट भी, अब कोट कबनत सीम के रहे , ऊपर से पूरत बुना रहे । 24 उ ाोर आपस मे कहास कक, “हमनी के रकरत के फतड के नत, बन् रकरत खतकतर किटी डताा जतव कक उ केकर होई, ततकक पकवतशतस पूरत होखे, जवन कहत बत कक, उ ाोर हमतर कपडत ओ ाोर के बीि बतं टाे अवुरी हमरत कपडत खतती किटी खेााे। रही से कसपतही ाोर इ सब कतम कईाे। 25 यीशु के कूस के ारे उनकर मतई, उनकर मतई के बकहन, न्ओफत के पती मररयम आ मररयम मरदाीनी खडत रहाी। 26 जब यीशु अपनत मतई आ िेात के बरा मे खडत दे खान, जेकरत से उ पतर करत रहाे, त उ अपनत महततरी से कहाे, “ मेरी, दे ख तोहतर बेटत!” 27 तब उ िेान से कहास, “ दे ख़ तोहतर मतई!” तब से उ िेात ओकरत के अपनत घरे ाे रईा। 28 रकरत बतद यीशु इ जतन के कक अब सब कुछ पूरत हो रईा बत, ततकक पकवतशतस के बतत पूरत हो सके, उ कहाे, “ हम पतसत बतनी।” 29 ररो बत्न मे कसरकत भरा रहे आ ऊ ाोर ररो संज मे कसरकत भर के कहसोप पर डता के ओकरत मुँह मे डता कदहा। 30 जब यीशु कसरकत ाेहाे त उ कहाे, “ खत हो रईा। ” 31 रही से यहदी ाोर ई तइयतरी रहे कक सब के कदन कूस पर ातश नत रहे , (कतहे कक ऊ सब के कदन ररो ऊँि कदन रहे ) कपाततुस से कनहोरत कइाे कक उनकर रोड टू ट जतव आ ओकरत के ाे जतइा जतव। 32 तब कसपतही ाोर आके पकहात आ दू सरत के रोड तोड कदहा जवन ओकरत सतथे सूाी पर िढतवा रइा रहे । 33 जब उ ाोर यीशु के ारे पहं िाे अवुरी दे खाे कक उ पकहाही मर िुका बतडे , त उनुकर रोड नत तोडाे। 34 ाेककन ररो कसपतही भतात से ओकर बरा मे छे द क कदहास अवुरी तुरंत उहतँ से खून अवुरी पतनी कनकाा।
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35 जे रकरत के दे खास उ रवतही कदहास अवुरी ओकर रवतही सही बत, अवुरी उ जतनत बत कक उ सही कहतत, ततकक आप ाोर कवशतस कर सकी। 36 ई सब रह से भइा कक शतस पूरत होखे कक, “उनकर हडी नत टू टी।” 37 ररो अउरी शतस मे कहा रइा बत कक, “उ ाोर जेकरत के छे दाे बत, ओकरत के दे खत होईहे ।” 38 रकरत बतद अररमतकथयत के यूसुफ यीशु के िेात रहान, ाेककन यहदी ाोर के डर से रुप रप से कपाततुस से कनहोरत कईाे कक उ यीशु के ातश ाे जतस। उ आके यीशु के ातश ाेके िा रईाे। 39 कनकोदे मस भी अइाे, जे पकहाे रतत मे यीशु के ारे आके रंधक आ मुसबर के कमशर ाेके अइाे, जवन ारभर सौ पतउं ड वजन के रहे । 40 तब उ ाोर यीशु के ातश ाेके मसतात के संरे कानन के कपडत मे घतव दे ाे, जईसे कक यहदी ाोर के दफनतवे के तरीकत ह। 41 जहतँ उनुकत के सूाी पर िढतवा रइा रहे , ओकहजत ररो बरइित रहे । आ बरइित मे ररो नयत कब रहे , जवनत मे अबही ं ाे केह के नत कबछतवा रइा रहे । 42 यहदी ाोर के तैयतरी के कदन के िाते उ ाोर यीशु के उहतँ सुतत दे ाे। कतहे कक कब नजदीक रहे । यूहरत 20 के बत 1 हफत के पकहात कदन मरदाीनी मररयम सबेरे-सबेरे कब के पतस अईाी आ कब से पुर के हटतवा दे खाी। 2 तब उ भतर के शमौन पतरस आ दू सरत िेात के ारे रईाी, जेकरत से यीशु बहत पतर करत रहाे अवुरी कहाी कक, उ ाोर पभु के कब से कनकता दे ाे बतडे , ाेककन हमनी के नईखी जतनत कक उ ाोर उनुकत के कहतँ रखाे बतडे । 3 पतरस आउर उ दू सर िेात कब के पतस िा रईाे | 4 दु नो ाोर रक संरे भतर रईाे अवुरी दू सरत िेात पतरस से आरे भतर रईाे अवुरी पकहाे कब के पतस पहं ि रईाे। 5 ऊ झुक के भीतर दे खत दे खान कक कानन के कपडत पडा बत। कफर भी रईा उ अंदर नत। 6 तब शमौन पतरस ओकरत पीछे -पीछे आके कब मे जतके कानन के कपडत पडा दे खाे। 7 उनकर मतथत के बरा मे ातरा नैपककन कानन के कपडत के सतथे नत पडा रहे , बाुक रक जरह रक जरह पर रक सतथ ापेटा रहे । 8 तब उ दू सर िेात भी अंदर रईा, जवन पकहाे कब के पतस आईा रहाे, उ दे ख के कवशतस कईाे। 9 उ ाोर अभी तक पकवतशतस के बतरे मे नत जतनत रहाे कक उनुकत मुवान मे से जी उठा जररी बत। 10 तब िेात ाोर फेर से अपनत घरे िा रइान। 11 ाेककन मररयम कब के पतस रोवत-रोवत बतहर खडत रहाी। 12 उ सफेद कपडत मे दु रो सर्दूत बईठा दे खास, ररो मतथत प अवुरी दू सरत रोड प, जहतं यीशु के ातश पडा रहे । 13 उ ाोर ओकरत से पूछाे, “मेरी, तू कतहे रोवत बतडू? उ ओ ाोर से कहाी, कतहे कक उ ाोर हमरत पभु के छीन ाेाे बतडे अवुरी हमरत नईखे मताूम कक उ ाोर उनुकत के कहतँ रखाे बतडे । 14 इ कहात के बतद उ पीछे मुड के यीशु के खडत दे खाी, ाेककन इ नत बुझाी कक उ यीशु हवे। 15 यीशु ओकरत से पूछाे, “ मेरी, तू कतहे रोवत बतडू? तू केकरत के खोजत बतडू? उ ओकरत के मताी समझ के कहाी, “महतरतज, अरर तू ओकरत के इहतँ से ाे रईा बतडू त बततव कक तू ओकरत के कहतँ रखाे बतडू, हम ओकरत के ाेके िा दे ब।” 16 यीशु ओकरत से कहान, “मररयम।” ऊ मुड के ओकरत से कहाी, “रबोनी!” जवनत के मताब बत कक रुर। 17 यीशु ओकरत से कहान, “हमरत के मत छूईं। कतहे कक हम अभी तक अपनत कपतत के पतस नईखी िढा, ाेककन अपनत भतई ाोर के ारे जतके कहब कक हम अपनत कपतत अवुरी आपके कपतत के ारे िढततनी। आ हमरत भरवतन आ तोहतर भरवतन के।
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18 मररयम मरदाीनी आके िेान के बतवाी कक उ पभु के दे खाे बतडी अवुरी उ उनुकत से इ बतत कहाे बतडे । 19 ओही कदन सतँ झ के हफत के पकहात कदन जब यहदी ाोर के डर से िेात ाोर के दरवतजत बंद हो रईा रहे , त यीशु बीि मे खडत होके कहाे, “ रउआ ाोर के शतं कत होखे।” 20 इ कहात के बतद उ ओ ाोर के आपन हतथ अवुरी बरा दे खवाे। तब िेात ाोर पभु के दे ख के खुश हो रईाे। 21 तब यीशु फेर से कहान, “ तू ाोर के शतं कत होखे, जइसे हमतर कपतत हमरत के भेजाे बतडे , ओइसही ं हम तोहनी के भेजत बतनी। 22 ई कहात के बतद उ ओह ाोर पर सतँ स ाेहाे आ कहान कक पकवत आतत के गहर कऱ। 23 जेकर पतप तू मतफ करब़, ओकरत के मतफ कर कदहा जतात। आ जेकर पतप के तू ाोर रखाे बतड़, ओकरत के रोका जतात। 24 जब यीशु अइाे त बतरह ाोर मे से ररो थोमस, जेकरत के कडकडमस कहा जतात, उ ाोर के सतथे नत रहे । 25 बतकी िेात ाोर ओकरत से कहास, “हम पभु के दे खाे बतनी।” ाेककन उ ओ ाोर से कहास कक जब तक हम उनुकत हतथ मे नतखून के छतप नत दे खब अवुरी नतखून के छतप मे आपन अंरुरी नत डताब अवुरी उनुकत बरा मे हतथ नत डताब, तब तक हम कवशतस नत करब। 26 आठ कदन बतद कफर से उनकर िेात ाोर आ थोमस भी भीतर रहाे, तब यीशु दरवतजत बंद होके अईाे आ बीि मे खडत होके कहाे, “ तोहरत खतकतर शतं कत होखे।” 27 तब ऊ थोमस से कहास, “ अपनत अँरुरी इहतँ पहँ ि के हमतर हतथ दे ख़। आऊ आपन हतथ इहतँ पहँ ि के हमरत बरा मे धकेा द़, आ अकवशतसी मत होख़, ाेककन कवशतस करे वतात होख़। 28 थोमस जवतब कदहान, “हमतर पभु आ हमतर भरवतन।” 29 यीशु ओकरत से कहान, “थोमस, कतहे कक तू हमरत के दे खाे बतड़, तू कवशतस कर ाेाे बतड़। 30 यीशु अपनत िेान के सतमने सतँ िह अउरी बहत िमततर कइान जवन रह ककततब मे नइखे काखा। 31 ाेककन इ सब रही खतकतर काखा रइा बत कक तू ाोर कवशतस कर सकीाे कक यीशु मसीह, परमेशर के बेटत हवे। आ कवशतस करके तोहनी के उनकर नतम से जीवन कमा सके। यूहरत 21 के बत 1 रह सब के बतद यीशु कतबेररयतस के समुंदर मे िेात ाोर के सतमने कफर से दे खत कदहान। आ रही तरह से ऊ अपनत के दे खत कदहान. 2 उहतँ शमौन पतरस, कदकदमस नतम के थोमस, राीा के कतनत के नतनरा, जबदी के बेटत आउर उनकर दू रो अउरी िेात ाोर रक सतथ रहे । 3 शमौन पतरस उनकरत से कहान, “हम मछरी मतरे जतत बतनी।” उ ाोर ओकरत से कहास कक हमहँ तोहरत सतथे िात बतनी। उ ाोर कनका के तुरंत ररो जहतज मे बईठ रईाे। आ ओह रतत ऊ ाोर कुछ नत पकडा. 4 जब सबेरे भईा त यीशु ककनतरे खडत हो रईाे , ाेककन िेान के इ नत मताूम रहे कक उ यीशु हवे। 5 तब यीशु उनकरत से पूछाे, “ ाइकत ाोर, कत तोहनी के कवनो भोजन बत? उ ाोर ओकरत के जवतब दे ाे कक नत। 6 ऊ ओह ाोर से कहान कक, “ जता के दतकहनत ओर फेक दी ं त तोहनी के कमा जतई.” रहसे उ ाोर फेकत रहाे, ाेककन अब मछरी के भीड के िाते उ ाोर ओकरत के नत खीि ं पवाे। 7 रह से उ िेात जेकरत से यीशु पतर करत रहाे, पतरस से कहास, “ई पभु हवे।” जब शमौन पतरस सुनास कक इ पभु हवे त उ आपन मछु आरत के िोात ओकरत से बतन के समुनर मे फेक कदहान। 8 बतकी िेात ाोर ररो छोट नतव मे िढ के अइाे। (कतहे कक ऊ ाोर जमीन से दू र नत रहे , बाुक दू सौ हतथ जइसन रहे ) मछरी से जता घसीटत रहे । 9 जइसही ं ऊ ाोर जमीन पर पहँ िा त उहतँ कोयात के आर ातरा आ ओकरत पर मछरी आ रोटी कबछतवा रइा।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
10 यीशु उनकरत से कहान, “ अब जवन मछरी पकडाे बतनी, ओकरत के ाे आव़।” 11 शमौन पतरस िढ के जता खी ंि के जमीन पर पहँ ि रइान, जवन कक रक सौ तीस रो मछरी से भरा रहे , आ सब ाोर के संखत रतनत रहे , ाेककन जता नत टू टा। 12 यीशु उनकरत से कहान, “ आके खतनत खतईं।” िेान मे से केह उनकत से पूछे के कहमत नत कइास कक तू के हउअ? ई जतनत कक ई पभु हवे। 13 तब यीशु आके रोटी ाेके ओह ाोर के आ मछरी भी दे ाे। 14 मुवान मे से जी उठात के बतद अब ई तीसरत बतर बत जब यीशु अपनत िेान के सतमने आपन बतत दे खतवत रहान। 15 जब उ ाोर खतनत खइाे त यीशु शमौन पतरस से पूछाे, “ शमौन, योनत के बेटत, कत तू हमरत से रह ाोर से जतदे पतर करे ान?” ऊ ओकरत से कहास, “हँ , पभु; तू जतनत बतडू कक हम तोहरत से पतर करे नी। उ ओकरत से कहास, “ हमतर मेमनत के िरव़।” 16 ऊ दू सर बेर फेर से कहास, “ यूनतस के बेटत शमौन, कत तू हमरत से पतर करे ान?” ऊ ओकरत से कहास, “हँ , पभु; तू जतनत बतडू कक हम तोहरत से पतर करे नी। उ ओकरत से कहास, “ हमतर भेड के िरव़।” 17 ऊ तीसरत बेर ओकरत से कहास, “ शमौन, योनत के बेटत, कत तू हमरत से पतर करे ान?” पतरस दु खी हो रइान कतहे कक ऊ तीसरत बेर ओकरत से कहाे, “कत तू हमरत से पतर करत बतड़?” उ ओकरत से कहास, “पभु, तू सब कुछ जतनत बतडू। तू जतनत बतडू कक हम तोहरत से पतर करे नी। यीशु ओकरत से कहान, “ हमतर भेडन के िरतव़।” 18 हम तोहरत से सतँ ि कहत बतनी कक जब तू छोट रहाू त तू अपनत के कमरबंद क के जहतँ ितहत रहाू ओकहजत िात रहाू, ाेककन जब तू बूढ होखब त तू आपन हतथ बढतईब, आ दोसर तोहरत के कमरबंद क के जहतँ नत ितहत रहाू ओकहजत ाे जतई। 19 इ बतत उ इ बततवत रहाे कक उ कवनत मौत से परमेशर के मकहमत करीहे । ई बतत कहके कहान, “ हमरत पीछे िा़.” 20 पतरस घूम के दे खान कक ऊ िेात जेकरत से यीशु पतर करत रहाे। उहो रतत के खतनत खतत घरी अपनत छतती पर झुक के कहास, “हे पभु, तोहरत के धोखत दे वे वतात के ह?” 21 पतरस ओकरत के दे ख के यीशु से कहास, “पभु, इ आदमी कत करी?” 22 यीशु ओकरत से कहान, “ जकद हम ितहत बतनी कक जबाे हम नत आईब तब तक उ कटका रहस त तोहरत खतकतर कत बत? तू हमरत पीछे -पीछे िा जत। 23 तब भतई ाोर के बीि इ बतत फैाा कक उ िेात नत मरे । ाेककन, अरर हम ितहब कक जब तक उ हम नत आईब, तब तक उ कटका रहस त तोहरत खतकतर कत होई? 24 इहे िेात ह जवन रह बततन के रवतही दे त बत आ इ सब काखाे बत। 25 अउर भी बहत सतरत कतम बत जवन यीशु कइाे रहान, जवन अरर हर रक के काखा होखे त हमरत ातरत बत कक दु कनयत मे भी उ ककततब नत हो सकत रहे जवन काखा होखे के ितही।ं आमीन के बत।
पेर रत ाोर के कतम पेर रतो ं के कतम 1
1 हे कथयोकफास, हम पकहाे के गंथ बनवाे बतनी, जवन कुछ यीशु करे आ कसखतवे के शुर कइाे रहाे। 2 जब तक उनकरत के ऊपर उठतवा रईा, ओकरत बतद उ पकवत आतत के दतरत ओह पेररत ाोर के आजत नत दे ाे रहाे, जेकरत के उ िुनाे रहाे। 3 ऊ अपनत कष के बतद िताीस कदन तक उनकरत से कजनत दे खतवत रहान। 4 आऊ ओह ाोर के सतथे रकटत होके आजत कदहान कक ऊ ाोर यरशाेम से नत कनकाे, बाुक कपतत के वतदत के इं तजतर करे , जवन कक तू ाोर हमरत बतरे मे सुनाे बतड़। 5 कतहे कक यूहरत सिमुि पतनी से बपकतसत दे ाे रहाे। ाेककन तोहनी के बहत कदन बतद पकवत आतत से बपकतसत ाेवे के पडी।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
6 जब उ ाोर रकटत भईाे त उ ाोर उनुकत से पूछाे कक, “हे पभु, कत तू रही समय इसतरा के रतज फेर से दे ब?” 7 उ ाोर से कहान, “ ई तोहनी के कतम नइखे कक उ समय भत मौसम के बतरे मे जतनी,ं जवन कपतत अपनत अकधकतर मे रखाे बतडे । 8 पकवत आतत के अईात के बतद तोहनी के शनय कमा जतई आ यरशाेम, पूरत यहकदयत, सतमररयत आ धरती के अंत तक हमतर रवतह बनब। 9 जब उ ाोर इ बतत कहाे त उ ाोर के ऊपर उठतवा रईा। आ बतदा ओकरत के ओह ाोर के नजर से दू र ाे काहास। 10 जब उ ाोर िढत-िढत आकतश के ओर मजबूती से दे खत रहाे, त दे खाे कक उ सफेद कपडत पकहनाे दु आदमी ओ ाोर के बरा मे खडत रहाे। 11 उ ाोर इहो कहास कक, “हे राीा के ाोर, तू ाोर सर् के ओर दे खत कतहे खडत हो जतनी जत?” इहे यीशु, जे तोहनी से सर् मे ाे जतइा रइा बत, ओइसहीं अइहे जइसे तोहनी के सर् मे जतत दे खाे बतनी।
कनकोदे म स के सुस मतितर अध तय 1 के बत 1 हरत, कैफत, सुमत, दतम, रमताीरा, यहदत, ाेवी, नेपथाीम, कसकंदर, कोरस आ अउरी यहदी ाोर कपाततुस के पतस यीशु के बतरे मे रइान आ उनकरत पर बहत बुरत अपरतध के आरोप ारवाे। 2 ऊ कहान, “हमनी के भरोसत बत कक यीशु बढई यूसुफ के बेटत हवे, जवन मररयम से पैदत भइा भूकम हवे आ ऊ अपनत के परमेशर के बेटत आ रतजत बततवेाे। आ खताी अतने नत, बाुक सब के कदन के भंर करे के कोकशश करे ात, आ हमनी के पुरखत ाोर के कनयम के भंर करे के कोकशश करे ात। 3 कपाततुस जवतब कदहान; ऊ कत ह जवनत के ऊ घोषरत करे ात? आ ऊ कत ह जवनत के ऊ भंर करे के कोकशश करे ात? 4 यहदी ाोर ओकरत से कहान, “हमनी के ररो कनयम बत जवन सब के कदन इातज करे से मनत करे ात। बतककर ऊ ओह कदन ांरडत आ बकहर, पकतघतत से पीकडत, आनर, कोढी आ रतकसी दु नु के दु ष तरीकत से ठीक कर दे ात. 5 कपाततुस जवतब कदहान, “उ दु ष तरीकत से ई कतम कइसे कर सकेात? ऊ ाोर जवतब कदहा, “उ जतदू रर ह, आ शैततन के रतजकुमतर के दतरत शैततन के भरतवेात। आ रही से सब कुछ ओकरत अधीन हो जतात। 6 कपाततुस कहाे, “शैततन के भरतवे के कतम कवनो अशुद आतत के कतम नत ातरत बत, बन् परमेशर के शनय से कनकाा ह।” 7 यहदी ाोर कपाततुस से कहान, “हम तोहरत महतमकहम से कनहोरत करत बतनी कक ओकरत के अपनत नतयताय मे पेश होखे खतकतर बोातवा जतव आ खुद ओकर बतत सुना जतव.” 8 कपाततुस ररो दू त के बोात के पूछाे, “मसीह के इहतँ कवनत तरीकत से ाे आवा जतई? 9 तब दू त कनका के मसीह के जतन के उनकर आरतधनत कइास। हतथ मे जवन वस रहे ओकरत के जमीन प पसतर के कहास, “पभु, रही प िा जत अवुरी भीतर जत, कतहे कक रतजपता तोहरत के बोातवततरे ।” 10 जब यहदी ाोर दू त के कइा कतम के पतत िाा त ऊ ाोर कपाततुस से किलत के कहास, “तू ओकरत के दू त से नत बाुक मोती से कतहे नत बोावनी?—कतहे कक दू त ओकरत के दे खाे त ओकर पूजत कइास आ हतथ मे जवन वस रहे ओकरत के ओकरत सतमने जमीन पर पसतर कदहास आ ओकरत से कहास कक, “पभु, रतजपता बोातवेात।” तोहरत के। 11 कपाततुस दू त के बोात के कहान, “तू अईसन कतहे कईाे बतडू?” 12 दू त जवतब कदहास, “जब तू हमरत के यरशाेम से कसकंदर भेजनी त हम यीशु के ररो रदहत प नीि आक्कत मे बईठा दे खनी अवुरी इबतकनयन के ाईकत हतथ मे पेड के डतढ ाेके किलतत कहाे, “होसतनत।” 13 दू सर ाोर रतसत मे आपन कपडत पसतर के कहास, “हे सर् मे बतनी, हमनी के बितईं। धन बत जे पभु के नतम से आवेात। 14 तब यहदी ाोर दू त के नखातफ किलत के कहास, “इबतकनयन के ाइकत ाोर कहबू भतषत मे आपन पशंसत कइा। आ तू जे यूनतनी हईं, कहबू के कइसे समझ सकत रहाू?
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
15 दू त ओह ाोर के जवतब कदहास, “हम ररो यहदी से पूछनी कक इ कत ह जवन ाइकत इबतनी भतषत मे किलतत बतडे ? 16 उ हमरत के समझतवत कहाे कक, उ ाोर होसतनत के किलतत बतडे , जवनत के मताब इ बत कक, हे पभु, हमरत के बितई। यत, हे पभु, बितव। 17 कपाततुस ओह ाोर से कहान, “तू खुदे ाइकन के कहा बततन के रवतही कतहे दे त बतनी, जवन कक तोहनी के िुपी से बत? कवनत मे दू त रात कइाे बत? आ ऊ ाोर िुप हो रइा. 18 तब रतजपता दू त से कहास, “जत के कवनो तरीकत से ओकरत के भीतर ाे आवे के कोकशश कऱ।” 19 ाेककन दू त कनका के पकहाे जइसन कइास। ऊ कहास, “पभु, भीतर आ जत, कतहे कक रतजपता तोहरत के बोातवततरे ।” 20 जब यीशु झंडत ाेके िात झंडत के बीि से अंदर जतत रहाे, त उ ाोर के िोटी परतम क के यीशु के पूजत कईाे। 21 रह पर यहदी ाोर झंडत के नखातफ अउरी जोर से किलत उठा। 22 कपाततुस यहकदयन से कहान, “हम जतनत बतनी कक तोहनी के ई बतत नइखे ातरत कक धज के िोटी खुदे झुक के यीशु के आरतधनत करत रहे । बतककर तू ाोर झंडत के नखातफ कतहे किलतत बतड़ जइसे कक ऊ ाोर झुक के पूजत कइाे होखे? 23 उ ाोर कपाततुस से कहास कक हमनी के झंडत के परतम करत दे खनी अवुरी यीशु के पूजत करत दे खनी। 24 तब रतजपता कसपतही ाोर के बोात के कहास, “तू ाोर अयीसन कतहे कईनी? 25 कसपतही ाोर कपाततुस से कहास कक हमनी के सब बुतपरस हईं जत आ मंकदरन मे दे वतत ाोर के पूजत करे नी जत। आ हमनी के उनकर पूजत करे के बतरे मे कइसे कुछ सोिे के ितही ं? हमनी के खताी हतथ मे मतनक पकडाे रहनी जत आ उ ाोर परतम क के उनुकर पूजत करत रहाे। 26 तब कपाततुस सभतघर के शतसकन से कहाे, “कत तू ाोर खुदे कुछ बावतन आदमी के िुन के ओह ाोर के झंडत पकडे दी,ं त हमनी के दे खब जत कक तब उ ाोर झुक जइहे कक नत।” 27 यहकदयन के बुजुर् ाोर बतरह रो सबसे मजबूत आ सकम बुढऊ ाोर के खोज के ओह ाोर के झंडत पकडाे आ ऊ ाोर रतजपता के सतमने खडत हो रइा। 28 कपाततुस दू त से कहान, “यीशु के बतहर कनकता के कवनो तरीकत से ओकरत के वतपस ाे आव़।” ईसत आ दू त दातन से बतहर कनका रइान। 29 कपाततुस ओह सैकनकन के बोात के ककररयत खइाे आ ककररयत खइाे कक अरर ऊ ाोर पकहाे से झंडत नत उठवाे रकहत त ऊ ओह ाोर के मतथत कतट ाेत। 30 तब रतजपता यीशु के फेर से भीतर आवे के आदे श कदहान। 31 दू त पकहाे जइसन कइान आ यीशु से बहते कनहोरत कइान कक ऊ अपनत वस पकहन के िा जतसु आ ओकरत पर िढ के भीतर िा रइान. 32 जब यीशु भीतर रइान त झंडत पकहाे जइसन झुक के उनकर आरतधनत कइान। अध तय 2 के बत 1 कपाततुस इ दे ख के डे रत रईाे अवुरी अपनत बईठे से उठे वतात रहाे। 2 जब ऊ उठे के सोित रहाे त दू र पर खडत उनकर खुद के मेहरतर उनकत ारे भेजाी आ कहाी कक, “कत ओह धम् आदमी से तोहरत कवनो ाेनत-दे नत नइखे; कतहे कक आज रतत के ररो दश्न मे उनुकत बतरे मे बहत कष उठतवे के पडा बत। 3 ई सुन के यहदी ाोर कपाततुस से कहास, “कत हम तोहरत से नत कहनी कक ऊ जतदू रर ह?” दे ख़, ऊ तोहतर मेहरतर के सपनत दे खवाे बत। 4 कपाततुस यीशु के बोात के कहान, “तू सुनाे हव कक उ ाोर तोहरत नखातफ जवन रवतही दे त बत, उ कवनो जवतब नइखे दे त?”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
5 यीशु जवतब कदहान, “अरर उ ाोर के बोाे के शनय नत रकहत त उ ाोर नत बोा सकत रहाे। बतककर कतहे कक हर केह के आपन जीभ के आजत बत कक ऊ नीमन आ बतउर दु नु बोाे, रहसे ऊ रकरत पर नजर रतखे . 6 ाेककन यहदी ाोर के बुजुर् ाोर यीशु से पूछाे, “हमनी के कत दे खब जत? 7 सबसे पकहाे हम तोहरत बतरे मे इ जतनत हई कक तू वकभितर से पैदत भईा बतडू। दू सरत, कक तोहरत जनम के कहसतब से बेताेहेम मे कशशु के हतत हो रईा। तीसरत ई कक तोहतर बतप-मतई मररयम कमस भतर रइान, कतहे कक ऊ ाोर अपनत ाोर पर भरोसत नत कर पतवत रहे । 8 कुछ यहदी ाोर जे खडत रहाे, उ ाोर अउरी अचत बतत कहाे, “हम इ नईखी कह सकत कक उ वकभितर से पैदत भईा बतडे । ाेककन हमनी के जतनत बतनी जत कक उनकर महततरी मररयम के सरतई यूसुफ से भइा रहे , आ रही से उनकर जनम वकभितर से नत भइा रहे । 9 कपाततुस ओह यहदी ाोर से कहान कक ऊ वकभितर से पैदत भइा बतडन, “तोहतर ई बतत सही नइखे, कतहे कक सरतई भइा रहे , कतहे कक ऊ ाोर रवतही दे त बत कक रउरत अपनत जतकत के हवे।” 10 हरत आ कैफत कपाततुस से कहाे, “ई सब ाोर के भीड दे खा जतव, जवन ाोर किलतत बत कक उ वकभितर से पैदत भईा बत अवुरी जतदू रर ह। ाेककन जे ाोर ओकरत के वकभितर से पैदत होखे से इनकतर करे ात, उ ाोर ओकर धम् पररवत्न करे वतात अवुरी िेात हवे। 11 कपाततुस हरत आ कैफत से कहान कक धम् पररवत्न करे वतात के हवे? उ ाोर जवतब दे ाे, उ ाोर बुतपरस के संततन हवे अवुरी यहदी नत बन रईाे , बताुक उनुकर अनुयतयी हवे। 12 तब रकाजतबेथ, रसे ररयस, रं टोकनयस, यतकूब, कतरतस, शमूरा, इसहतक, कफनेस, ककसस आ अकगपत, हरत आ यहदत जवतब कदहाे, “हमनी के धम् पररवत्न करे वतात नत हईं जत, बाुक यहदी ाोर के संततन हईं जत आ सचतई बोात बतनी जत आ मररयम के सरतई के समय मौजूद रहनी जत। 13 कपाततुस इ बतत कहे वतात बतरह आदमी के संबोकधत करत कहाे, “हम तोहनी के सीजर के जतन से जतदू करत बतनी कक तू ाोर कवशतस से बततईं कक उ वकभितर से पैदत भईा बतडे कक नत, अवुरी जवन बतत तू ाोर बतवाे बतनी, उ बतत सही बत। 14 उ ाोर कपाततुस के जवतब दे ाे, “हमनी के ररो कनयम बत, जवनत के तहत हमनी के कसम खतर से मनत कईा रईा बत, इ पतप ह। 15 तब हरत आ कतइफत कपाततुस से कहाे, “उ बतरह आदमी इ नत मतनीहे कक हमनी के उनुकत के नीि पैदत भईा अवुरी जतदू रर के रप मे जतनततनी, हतातं कक उ अपनत के भरवतन के बेटत अवुरी रतजत के नतटक करततरे । 16 कपाततुस उ बतरह आदमी के छोड के बतहर कनकाे के आदे श दे ाे, जवन कक कहाे रहाे कक उ वकभितर से नत पैदत भईा बतडे अवुरी यीशु दू र से हट जतस अवुरी उनुकत से कहाे कक, “यहदी ाोर के यीशु के मतरे के मन कतहे बत? 17 उ ाोर जवतब दे ाे, “उ ाोर नतरतज बतडे कतहे कक उ सब के कदन इातज कईाे रहाे।” कपाततुस कहाे, कत उ ाोर ओकरत के नीमन कतम के िाते मतर कदहे ? उ ाोर ओकरत से कहास, हँ , मकाकतर। अध तय 3 के बत 1 तब कपाततुस कोध से भरा हॉा से बतहर कनका के यहदी ाोर से कहाे, “हम पूरत दु कनयत के रवतही दे वे खतकतर बोातवततनी कक हमरत ओ आदमी मे कवनो दोष नईखे।” 2 यहदी ाोर कपाततुस से कहान, “जकद उ दु ष नत रकहत त हमनी के ओकरत के तोहरत सोझत नत ाे अइाे रहती ं जत।” 3 कपाततुस उनसे कहान, “कत तू ाोर ओकरत के ाेके अपनत कनयम के अनुसतर ओकर परीकर कऱ?” 4 तब यहदी ाोर कहास, “हमनी के केह के मतरा जतयज नईखे।” 5 कपाततुस यहकदयन से कहान, “रहसे तू ाोर के हतत मत करे के आजत तोहनी के ह, ाेककन हमतर नत ह।” 6 ऊ फेर से दातन मे जतके यीशु के अकेाे बोावाे आ पूछाे, “कत तू यहदी ाोर के रतजत हउअ?”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
7 यीशु कपाततुस से कहान, “कत तू ई बतत अपनत बतरे मे कहत बतड़ कक यहदी ाोर हमरत बतरे मे तोहरत के बतवाे बत?” 8 कपाततुस यीशु से पूछाे, “कत हम यहदी हईं?” पूरत रतष् आ यहदी ाोर के शतसक तोहरत के हमरत हतथ मे सौंप दे ाे बतडे । तू कत कइाे बतडू? 9 ईसत जवतब कदहान, “हमतर रतज रह दु कनयत के नत ह, अरर हमतर रतज रह दु कनयत के रकहत त हमतर सेवक ाडत रकहत, आ हमरत के यहदी ाोर के हतथ मे नत सौंपा जतइत। ाेककन अब हमतर रतज इहतँ से नईखे। 10 कपाततुस कहाे, “तब कत तू रतजत हउअ?” यीशु जवतब कदहान, “तू कहत हव कक हम रतजत हईं। आ रही खतकतर हम आइा बतनी कक हम सचतई के रवतही दी ं। आ जे भी सचतई के बत, उ हमतर आवतज सुनेात। 11 कपाततुस ओकरत से पूछाे, “सचतई कत ह? 12 यीशु कहान, “सचतई सर् से ह।” 13 कपाततुस कहाे, “रही से सचतई धरती पर नइखे।” 14 यीशु कपाततुस से कहाे, “कवशतस कऱ कक धरती पर ओह ाोर के बीि मे सचतई बत, जेकरत ारे नतय करे के शनय होात त ऊ सचतई से िाेात आ सही नतय बनतवेात। अध तय 4 के बत 1 कपाततुस यीशु के दातन मे छोड के यहदी ाोर के ारे रईाे अवुरी कहाे , “हमरत यीशु मे कवनो दोष नईखे ातरत।” 2 यहदी ाोर ओकरत से कहास, “ाेककन उ कहास कक हम परमेशर के मंकदर के नष क सकततनी अवुरी तीन कदन मे ओकरत के फेर से बनत सकततनी।” 3 कपाततुस उनसे पूछाे, “उ कवन मंकदर के बतरे मे कहत बतडे ?” 4 यहदी ाोर ओकरत से कहास कक, “सुाेमतन जवन कछयताीस सता तक बनवाे रहाे, उ कहाे रहाे कक उ नष क कदहे अवुरी तीन कदन मे बन जईहे । 5 कपाततुस फेर से कहान, “हम ओह आदमी के खून से कनद्ष बतनी। कत तू ाोर रकरत के दे खत बतडू। 6 यहदी ाोर ओकरत से कहत बत कक ओकर खून हमनी आ हमनी के ाइकन पर होखे। तब कपाततुस बुजुर् आ शतसी, यतजक आ ाेवी ाोर के रकटत क के कहाे कक, “अइसन कतम मत करी।ं हमरत तोहरत आरोप मे (उनुकत नखातफ) कवनो बतत नइखे कमाा कक ऊ बेमतर ाोर के ठीक करे आ सब के कदन तोडे , जवन मौत के ातयक होखे. 7 यतजक आ ाेवी ाोर कपाततुस से कहान, “कैसर के जतन से अरर केह कनंदत करे त उ मौत के ातयक बत। ाेककन इ आदमी पभु के कनंदत कईाे बत। 8 तब रतजपता कफर से यहदी ाोर के हॉा से बतहर कनकाे के आदे श कदहान। यीशु के बोातवत कहान कक हम तोहरत के कत करब? 9 यीशु ओकरत से जवतब कदहान, “जइसन काखा बत, ओइसने करी।ं ” 10 कपाततुस ओकरत से पूछाे, “ई कइसे काखा बत? 11 यीशु ओकरत से कहान, “मूसत आ भकवषवयत ाोर हमरत दु ख आ जी उठात के बतरे मे भकवषवतरी कइाे बत। 12 ई सुन के यहदी ाोर नखकसयत के कपाततुस से कहाे, “तू अब ओह आदमी के कनंदत कतहे सुनब़?” 13 कपाततुस ओह ाोर से कहान, “जकद ई बतत तोहनी के कननत ातरत बत त कत तू ओकरत के ाेके अपनत आँ रन मे ाे आव़ आ अपनत कनयम के अनुसतर ओकर मुकदमत िातईं। 14 यहदी ाोर कपाततुस के जवतब दे त कहाे कक, हमनी के कनयम मे कहा रईा बत कक, उनुकत के नौ तीस रो कोडत मतरे के बत, ाेककन जदी उ र तरह से पभु के कनंदत करी त ओकरत प पुर मतरा जतई। 15 कपाततुस उनकरत से कहान, “जकद उनकर उ बतत कनंदत ह त कत रउवतं उनकरत के आपन ववयत के अनुसतर परीकर कऱ।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
16 यहदी ाोर कपाततुस से कहत बत कक, “हमनी के ववयत हमनी के केह के मतरे के आदे श दे त बत, हमनी के ितहत बतनी जत कक उ कूस पर िढतवा जत सके, कतहे कक उ कूस पर मतरे के हकदतर बत। 17 कपाततुस उनसे कहान, “उनुकत के सूाी पर िढतवा ठीक नइखे , ओकरत के खताी कोडत मतर के भेज कदहा जतव।” 18 जब रतजपता उहतँ मौजूद ाोर आ यहदी ाोर के दे खाे त बहत यहदी ाोर के रोवत दे खाे अवुरी यहदी के मुख यतजक से कहाे, “सब ाोर उनुकर मौत के इचत नईखे करत।” 19 यहदी ाोर के बुजुर् ाोर कपाततुस से कहान, “हम आ सब ाोर रही मकसद से इहतँ आईा रहनी कक उ मर जतस।” 20 कपाततुस उनसे कहान, “उ कतहे मरत बत?” 21 उ ाोर ओकरत से कहास, कतहे कक उ अपनत के परमेशर के बेटत अवुरी रतजत बततवेाे। अध तय 5 के बत 1 ाेककन कनकोदे मस ररो यहदी रतजपता के सतमने खडत होके कहास, “हे धम् नतयतधीश, हम तोहरत से कनहोरत करत बतनी कक तू हमरत पर कुछ शब बोाे के आजतदी से अनुगह कऱ।” 2 कपाततुस ओकरत से कहान, “बहत रह़।” 3 कनकोदे मस कहाे, “हम यहदी ाोर के बुजुर्, शतसी, यतजक आ ाेवी आऊ यहदी ाोर के भीड से कहाे रहनी। तू ाोर रह आदमी के कत करब़? 4 ऊ अइसन आदमी हवे जे बहत उपयोरी आ रौरवशताी िमततर कइाे बतडन, जइसन कक धरती पर केह पकहाे कबो नत कइाे होखे आ नत करी। ओकरत के जतर दी ं आ ओकरत के कवनो नुकसतन मत करी;ं अरर ऊ भरवतन से आइा बत त ओकर िमततर, (उनकर िमततरी इातज) जतरी रही; ाेककन अरर आदमी से कमाा त उ बेकतर हो जईहे । 5 रह तरह से मूसत जब परमेशर कमस मे भेजाे रहाे त कमस के रतजत कफरौन के सतमने जवन िमततर परमेशर के आजत दे ाे रहाे, उ िमततर कईाे। आ भाे ओह दे श के जतदू रर, जनेस आ जमेस, अपनत जतदू से उहे िमततर कइाे रहाे जवन मूसत कइाे रहाे, बतककर ऊ सब ऊ कतम नत कर पवाे जवन ऊ कइाे रहाे. 6 हे शतसी आ फरीकसयन, जतदू रर ाोर जवन िमततर करत रहे , उ परमेशर के नत रहे । ाेककन जे ाोर ओकरत के कतम कईाे रहे , उ सब नतश हो रईाे , जवन कक ओ ाोर प कवशतस कईाे रहाे। 7 अब रह आदमी के जतर दी।ं कतहे कक जवनत िमततर खतकतर तू ओकरत पर आरोप ारतवत बतडू, ऊहे िमततर परमेस् वर के ह। आ ऊ मौत के ातयक नइखे. 8 यहदी ाोर कनकोदे मस से कहास, “कत तू ओकर िेात बन के ओकरत पक मे भतषर दे त बतडू?” 9 कनकोदे मस उनकरत से पूछाे, “कत रतजपता भी उनकर िेात बन रईा बत आ कत उ उनकरत खतकतर भतषर दे त बत?” कत सीजर उनकत के ओह ऊँि पद पर नत रखाे रहाे? 10 ई सुन के यहदी ाोर कतँ प उठा आ कनकोदे मस के दतँ त कटवत के कहास, “कत तू उनकर कशकत के सचतई के रप मे गहर कर सकेनी आ मसीह के सतथे आपन भतग पत सकेनी! 11 कनकोदे मस जवतब कदहान, “आमीन; हम ओकर कशकत आ ओकरत सतथे आपन भतग पत ाेब, जइसन कक रउआ कहाे बतनी। 12 तब ररो अउरी यहदी उठ के रतजपता से कुछ बतत सुने खतकतर अनुमकत मंरास। 13 रतजपता कहास, “तोहरत मन के बतत कह़।” 14 उ कहाे, “हम यरशाेम के भेड के कुंड के ककनतरे अडतीस सता तक पडा रहनी, बहत कमजोरी के तहत मेहनत करत रहनी अवुरी इातज के इं तजतर करत रहनी, जवन कक ररो सर्दूत के आवे से होई, जवन कक रक समय मे पतनी के परे शतन कईाे रहे । आ जे भी पतनी के परे शतनी के बतद पकहाे कदम रखास, ओकरत जवन बेमतरी रहे ओकरत से ठीक हो रईा। 15 जब यीशु हमरत के ओकहजत सुस दे ख के हमरत से कहान, “कत तू ठीक होखा ितहत बतडू?” हम जवतब कदहनी, “महतरतज, हमरत ारे केह नइखे कक जब पतनी घबरत जतात त हमरत के कुंड मे डता सके।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
16 उ हमरत से कहास, “उठ, आपन कबछौनत उठत के िा जत।” आ हम तुरते ठीक हो रइनी आ आपन कबछौनत उठत के िा रइनी। 17 यहदी ाोर कपाततुस से कहास, “हमनी के पभु रवन्र, पतथ्नत करी ं कक उ कवनत कदन उ कमजोरी से ठीक हो रईाे। 18 कमजोर आदमी जवतब कदहास, “सबत के कदन रहे ।” 19 यहदी ाोर कपाततुस से कहास, “कत हमनी के इ नत कहनी जत कक उ सब के कदन आपन इातज करतवत रहाे अवुरी दु षततत के रतजकुमतर के मदद से दु षततत के बतहर कनकतात रहाे? 20 तब ररो अउरी 7 यहदी कनकाा आ कहास, “हम आनर रहनी, आवतज सुन सकत रहनी, ाेककन केह के नत दे ख सकत रहनी। जब यीशु जतत रहाे त हम भीड के ओकहजत से रुजरत सुननी त पूछनी कक उहतँ कत बत? 21 उ ाोर हमरत के बतवाे कक यीशु ओकहजत से रुजरत रहाे, तब हम किलत के कहनी कक, “दतऊद के बेटत यीशु, हमरत पर दयत कऱ।” ऊ खडत होके हमरत के अपनत ारे ाे आवे के आदे श कदहान आ हमरत से कहान कक तू कत ितहत बतडू? 22 हम कहनी कक पभु, हम आपन दश्न कर सकीाे। 23 उ हमरत से कहास, “तोहतर दे ख ाे आव, हम दे खनी अवुरी खुश होके धनवतद दे त उनुकत पीछे -पीछे िा रईनी। 24 ररो अउरी यहदी भी कनका के कहास, “हम कोढी रहनी, उ हमरत के खताी अपनत बतत से ठीक क कदहास, “हम ितहब, तू सतफ हो जत।” आ कफाहता हम अपनत कोढ से सतफ हो रईनी। 25 ररो अउरी यहदी कनका के कहास, “हम टे ढ हो रईनी, उ हमरत के अपनत बतत से सीधत क दे ाे।” 26 वेरोकनकत नतम के ररो औरत कहाी कक, “हम बतरह सता से खून के टु कडन से पीकडत रहनी अवुरी हम उनुकत कपडत के ककनतरत के छूवनी अवुरी तुरंत हमतर खून के झोंकत बंद हो रईा। 27 यहदी ाोर कहाे, “हमनी के ररो कनयम बत कक कवनो औरत के सबूत के रप मे नत होखे कदहा जतई।” 28 दू सर बतत के बतद ररो अउरी यहदी कहास, “हम दे खनी कक यीशु के अपनत िेान के सतथे कबयतह मे बोातवा रइा रहे आ राीा के कतनत मे शरतब के कमी रहे । 29 जब सब शरतब पी रइा त ऊ नौकरन के आदे श कदहान कक ऊ ाोर छह रो बत्न मे पतनी भर दे व आ ऊ ाोर ओकरत के ककनतरत तक भर कदहा आ ऊ ओह ाोर के आशीवत् द कदहान आ पतनी के शरतब मे बदा कदहान आ सभे ाोर रह िमततर से है रतन हो रइान. 30 ररो अउरी यहदी खडत होके कहास, “हम यीशु के कफरनहम के आरतधनताय मे पढतवत दे खाे रहनी। आरतधनताय मे ररो आदमी रहे , जेकरत मे ररो शैततन रहे । ऊ किलत के कहास, “हमरत के छोड दी;ं नतसरत के यीशु , तोहरत से हमनी के कत संबंध बत? कत तू हमनी के नतश करे आइा बतड़? हम जतनत बतनी कक तू भरवतन के पकवत हउअ। 31 यीशु ओकरत के डतं टत कहाे, “अशुद आतत, िुप रह़ आ ओह आदमी से बतहर कनका जत। आ कफाहता उ ओकरत से बतहर कनका रईाे अवुरी ओकरत के कवनो नुकसतन नत पहं िवाे। 32 ररो फरीसी भी कनमकानखत बतत कहाे रहाे। हम दे खनी कक राीा आ यहकदयत, समुंदर के ककनतरे आ यरदन के आसपतस के कई दे शन से ररो बडहन दा यीशु के ारे आइा आ बहत कमजोर ाोर उनकरत ारे आइा आ ऊ सब के ठीक कर कदहान। 33 हम अशुद आतत के किलतत सुननी कक तू परमेशर के बेटत हउअ। आऊ यीशु ओह ाोर के कडत आजत कदहान कक ऊ ाोर ओकरत के नत बततवे। 34 रकरत बतद ररो अउरी आदमी, जेकर नतम सेतुररयो रहे , कहास, “हम यीशु के कफरनहम मे दे खाे रहनी, त हम उनुकत से कनहोरत कईनी कक, “हे पभु , हमतर सेवक ाकवत से पीकडत घर मे पडा बत।” 35 यीशु हमरत से कहाे, “हम आके ओकरत के ठीक करब।” 36 ाेककन हम कहनी कक पभु, हम रह ातयक नईखी कक तू हमरत छत के नीिे आ जत। ाेककन खताी विन बोा़, त हमतर सेवक ठीक हो जतई।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
37 यीशु हमरत से कहान, “जत जत। आ जइसे तू कवशतस कइाे बतडू, ओइसही ं तोहरत सतथे होखे। आ ओही घडी से हमतर सेवक ठीक हो रइा। 38 तब ररो कुाीन आदमी कहास, “कफरनहम मे हमतर ररो बेटत रहे , जवन मौत के नयकत मे पडा रहे । जब हम सुननी कक यीशु राीा आ रईा बतडे त हम जतके उनुकत से कनहोरत कईनी कक उ हमरत घरे उतर के हमरत बेटत के ठीक करस, कतहे की उ मौत के नयकत मे बत। 39 उ हमरत से कहास, जत, तोहतर बेटत कजंदत बत। 40 तब से हमतर बेटत ठीक हो रईा। 41 रह ाोर के अातवत अउरी कई रो यहदी ाोर, मरद मेहरतर, किलत के कहास, “ऊ सिमुि परमेशर के बेटत हवे, जे खताी अपनत विन से सब बेमतरी के ठीक करे ान, आ जेकरत के शैततन पूरत तरह से अधीन होाे।” 42 उ ाोर मे से कुछ ाोर आरे कहाे,, इ शनय भरवतन के अातवे केह से नत कनका सकतत। 43 कपाततुस यहदी ाोर से कहाे, “शैततन तोहनी के डतकर के अधीन कतहे नईखन करत? 44 उ ाोर मे से कुछ ाोर कहा कक, “शैततन के अधीन करे के शनय परमेशर से नत कनका सकेात।” 45 ाेककन दू सर ाोर कपाततुस से कहास कक उ 1 ातजर के ितर कदन तक कब मे रहात के बतद कजंदत कईाे रहाे। 46 ई बतत सुन के रतजपता यहकदयन के भीड से कतँ पत कहास, “तोहरत कनद्ष खून बहतवे से कत फतयदत होई? अध तय 6 के बत 1 तब कपाततुस कनकोदे मस आ पनह आदमी के बोावाे कक यीशु वकभितर से पैदत नत भइाे, उ ाोर से कहान कक हम कत करब, कतहे कक ाोर के बीि हं रतमत हो रहा बत। 2 उ ाोर ओकरत से कहास, “हमनी के नईखी जतनत। उ ाोर रकरत ओर दे खस जे हं रतमत उठतवेात। 3 कपाततुस कफर भीड के बोात के कहाे, “तू ाोर जतनत बत कक तोहनी के ररो ररवतज बत कक हम फसह के पव् मे तोहनी के ररो कैदी के छोड दे ब। 4 हमरत ारे ररो नतमी कैदी, हततरत बत, जेकरत के बरबत कहा जतात, आ यीशु जेकरत के मसीह कहा जतात, जेकरत मे हमरत कवनो अइसन िीज नइखे कमात जवन मौत के हकदतर होखे। रह से ओहमे से कवन मन बत कक हम तोहके छोड दी ं? 5 उ सब किलत के कहत बतडे कक, “बरबत के हमनी के छोड द।” 6 कपाततुस उनकरत से कहान, “तब हम यीशु के कत करब, जेकरत के मसीह कहा जतात?” 7 उ सब जवतब दे त रहाे कक, “उनुकत के सूाी प िढतवा जतर।” 8 उ ाोर फेर किलत के कपाततुस से कहास, “तू कैसर के दोस नत हउअ, अरर तू रह आदमी के छोड दे ब़?” कतहे कक ऊ बतत कदहाे बतडन कक ऊ भरवतन के बेटत हउवे आ रतजत हउवे . बतककर कत रउरत रह बतत के झुकतव बत कक ऊ रतजत होखे के ितही,ं सीजर नत? 9 तब कपाततुस कोध से भरा ओ ाोर से कहान, “तोहतर रतष् हमेशत से कवदोह करे वतात रहा बत, आ तोहनी हमेशत से ओह ाोर के नखातफ बतनी जे तोहनी के सेवत करे वतात बत?” 10 यहदी ाोर जवतब कदहास, “हमनी के सेवत करे वतात के हवे?” 11 कपाततुस ओह ाोर के जवतब कदहान, “तोहतर परमेशर जे तोहनी के कमस के कडत रुातमी से बित के ाता सतरर के पतर कर के अइसे ाे अइाे जइसे कक ऊ सूखा भूकम होखे आ जंरा मे तोहनी के मरत आ बटे र के मतं स से नखयत कदहाे, आ िटतन से पतनी ाे अइाे आ सर् से तोहनी के ववयत दे ाे। 12 तू ाोर ओकरत के हर तरह से भडकत के अपनत खतकतर ररो कपघाा बछडत के मतं र कइनी आ ओकर पूजत कइनी आ ओकरत के बका कदहा आ कहनी कक, हे इसतरा, ई तोहतर दे वतत हवे , जे तोहरत के कमस दे श से बतहर कनकतााे बतडन 13 जवनत के िाते तोहतर परमेशर तोहरत के नतश करे के इचु क रहाे। ाेककन मूसत तोहनी खतकतर कबनती कइान आ तोहतर भरवतन ओकर बतत सुन के तोहतर अपरतध मतफ कर कदहान।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
14 ओकरत बतद तू ाोर अपनत भकवषवयत मूसत आ हतरन के मतरे के ितहत रहाू जब ऊ ाोर तमू मे भतर रइा रहे आ तू ाोर हमेशत परमेशर आ उनकर भकवषवयत ाोर के नखातफ रुनरुनतत रहाू। 15 उ अपनत नतय के आसन से उठ के बतहर कनकाा ितहत रहाे। ाेककन यहदी सब किलतत रहाे कक, हमनी के सीजर के रतजत मतनत बतनी जत, नत कक यीशु के। 16 इ आदमी के जनम के जइसही ं जतनी ाोर आके ओकरत के वरदतन िढवाे। जवन सुन के हे रोदे स बहत घबरत रईाे अवुरी उनुकत के मतर दे वे के ितहत रहाे। 17 जब उनकर बतबूजी के ई बतत पतत िाा त उ अपनत महततरी मररयम के संरे कमस भतर रईाे। हे रोदे स जब आपन जनम सुनाे रहाे त ओकरत के मतर दे ाे रहाे। आ ओकरत कहसतब से बेताेहेम आ ओकरत पूरत इातकत मे दू सता से कम उकमर के सब ाइकन के भेज के मतर कदहास। 18 कपाततुस ई बतत सुन के डे रत रइान। आ हलत मितवे वतात ाोर के बीि िुप करतवे के आदे श दे त उ यीशु से कहाे, “कत तू रतजत हउअ?” 19 सब यहदी कपाततुस के जवतब दे ाे कक उहे उहे आदमी हवे जेकरत के हे रोदे स मतरे के कोकशश कईाे रहाे। 20 कपाततुस पतनी ाेके ाोर के सतमने हतथ धो के कहाे, “हम रह धम् आदमी के खून से कनद्ष बतनी। तू ाोर रकरत के दे ख़। 21 यहदी ाोर जवतब दे ाे, “उनकर खून हमनी आ हमनी के ाइकन पर होखे।” 22 तब कपाततुस यीशु के अपनत सोझत ाे आवे के आदे श कदहान आ ओकरत से कनमकानखत शबन मे कहान। 23 तोहतर जतकत तोहरत के रतजत बनतवे के आजत दे ाे बत। रह से हम कपाततुस, पकहाे के रवन्र ाोर के कनयम के अनुसतर तोहरत के कोडत मतरे के सजत दे त बतनी। आ कक पकहाे तोहरत के बतना जतव, ओकरत बतद ओह जरह पर कूस पर ाटकतवा जतव जहतँ तू अब कैदी बन रइा बतड़. आ तोहरत सतथे दू रो अपरतधी भी, जेकर नतम कडमतस आ रेसतस ह। अध तय 7 के बत 1 तब यीशु ओकरत सतथे दु नो िोर भी दातन से बतहर कनका रईाे। 2 जब ऊ ाोर रोारोथत नतम के जरह पर पहँ िा त ओकर कपडत उततर के ओकरत के कानन के कपडत से बतन के ओकरत मतथत पर कतँ ट के मुकुट ारत के ओकरत हतथ मे ररो खढ डता कदहा। 3 ओइसही ं उ ाोर उनकरत सतथे सूाी पर िढतवा दु नु िोर के सतथे कइान, उनकर दतकहनत ओर दीमतस आ बतईं ओर रेसतस। 4 ाेककन यीशु कहाे, “हे बतबू, ओ ाोर के मतफ कर द। कतहे कक ऊ ाोर नइखे जतनत कक ऊ ाोर कत करे ात. 5 उनकर कपडत बतँ ट के उनकर वस पर किटी डतात रहाे। 6 रह बीि मे ाोर खडत हो रइा आ यहदी ाोर के मुख यतजक आ बुजुर् ाोर उनकर मजतक उडतवत कहाे कक, “उ दोसरत के बित काहाे , अरर हो सके त अब अपनत के बितवे”। अरर उ परमेशर के बेटत हवे त अब उ कूस से उतरे । 7 कसपतही भी उनकर मजतक उडतवत रहान आ कसरकत आ कपत ाेके ओकरत के पीये खतकतर िढवाे आ कहान कक अरर तू यहदी ाोर के रतजत हउअ त अपनत के बित ाी ं। 8 तब ाॉन्रनस, ररो कसपतही, भतात ाेके, 1 ओकर बरा मे छे द कइास, आ तुरंत खून आ पतनी कनकाा। 9 आ कपाततुस कूस पर शीष्क कहबू, ाैकटन आ यूनतनी अकर मे काखाे , यतनी कक 1999 मे रस. इहे यहदी ाोर के रतजत ह। 10 ाेककन यीशु के सतथे सूाी पर िढतवा रईा दु नो िोर मे से ररो, जेकर नतम रेसतस रहे , उ यीशु से कहास, “अरर तू मसीह हई त अपनत के अवुरी हमनी के बितई।" 11 ाेककन जे िोर के दतकहनत हतथ पर सूाी पर िढतवा रइा रहे , जेकर नतम दीमतस रहे , ओकरत के डतं ट के कहास, “कत तू भरवतन से डे रतत नइख़, जेकरत के रह सजत के सजत कमाा बत?” हमनी के वतकई मे अपनत कतम के दोष सही आ नतयसंरत तरीकत से कमाेात; ाेककन इ यीशु , उ कवन बुरतई कईाे बतडे ?
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12 रह कुहरात के बतद उ यीशु से कहाे, “पभु, जब तू अपनत रतज मे अइब त हमरत के यतद कऱ।” 13 यीशु जवतब कदहान, “हम तोहरत से सि कहत बतनी कक आज तू हमरत सतथे जरत मे रहब।” अध तय 8 के बत 1 छठवतँ बजे के करीब रहे आ नौवतं बजे तक पूरत धरती पर अनतर हो रइा। 2 जब सूरज गहर हो रइा रहे , तब मंकदर के पदत् ऊपर से नीिे तक फतट रइा रहे । िटतन भी फतट रइा आ कब खुा रइा आ सुता संत ाोर के कई रो ातश उठ रइा। 3 ारभर नौवतं बजे यीशु जोर से किलत के कहाे, “हे ाी, हे ाी, ातमत जबकथनी?” जवनत के मताब इ बत कक, हमतर भरवतन, हमतर भरवतन, तू हमरत के कतहे छोड दे ाे बतडू? 4 रह सब के बतद यीशु कहाे, “हे कपतत, हम आपन आतत तोहरत हतथ मे सौंप दे ाे बतनी। आ ई कह के ऊ भूत छोड कदहान. 5 ाेककन जब सेनतपकत दे खाे कक यीशु अईसन किलतत आतत के छोड दे ाे, त उ परमेशर के मकहमत कईाे अवुरी कहाे, “सि मे इ ररो धम् आदमी रहाे।” 6 ओकहजत खडत सब ाोर ई दे ख के बहते घबरत रइा। आ बीता बतत पर किंतन करत ओह ाोर के छतती पर िोट कइान आ फेर यरशाेम शहर ावट रइान. 7 सेनतपकत रतजपता के ारे जतके जवन कुछ बीता रहे ओकरत के बतवाे। 8 जब उ इ सब बतत सुन के बहत दु खी हो रईाे। 9 यहकदयन के रकटत करत कहान, “कत तू ाोर सूरज गहर के िमततर दे खाे बतड़ आ ईसत मरत घरी भइा बतकी घटनत के? 10 यहकदयन के ई बतत सुन के रतजपता से कहान कक सूरज के गहर ओकरे सतमतन ररवतज के अनुसतर भइा। 11 ाेककन मसीह के पररकित सब ाोर दू र खडत होके राीा से यीशु के पीछे -पीछे िाा मेहरतर ाोर भी इ सब बतत के दे खत रहे | 12 अररमकथयत के ररो आदमी यूसुफ नतम के ररो आदमी, जे यीशु के िेात भी रहाे, ाेककन यहदी ाोर के डर से खुा के नत, रतजपता के ारे आके रतजपता से कनहोरत कईाे कक उ यीशु के ातश के कूस से ाे जतर के अनुमकत दे स। 13 रतजपता ओकरत के छु टी दे कदहान। 14 कनकोदे मस अपनत सतथे ारभर सौ पतउं ड वजन के रंधक आ मुसबर के कमशर ाेके अइाे। उ ाोर यीशु के कूस से ाोर के उततर के मसतात वतात कानन के कपडत से बतन कदहाे, जवन कक यहदी ाोर के बीि दफनतवे के ररवतज के मुततकबक रहे । 15 ओकरत के ररो नयत कब मे रख कदहान जवन यूसुफ बनवाे रहाे आ ररो िटतन से कतट के कतट कदहाे रहाे, जवनत मे कबो केह के नत डताा रइा रहे । आ ऊ ाोर कब के दु आर पर ररो बडहन पुर ाुढकवाे। अध तय 9 के बत 1 जब अधम् यहदी ाोर सुना कक यूसुफ यीशु के ातश के भीख मतं र के दफनत दे ाे बतडे त उ ाोर कनकोदे मस के खोजत रहाे। आ ऊ पनह आदमी जे रतजपता के सतमने रवतही दे ाे रहाे कक यीशु वकभितर से पैदत नत भइा रहाे, आ अउरी अचत ाोर जे उनकत सतथे कवनो अचत कतम कइाे रहाे। 2 जब उ सब यहदी ाोर के डर से ाुकत रईाे त अकेाे कनकोदे मस उनके सतमने आपन बतत कहत कहाे, “रह तरह के ाोर आरतधनताय मे कईसे जत सकततरे ? 3 यहदी ाोर ओकरत से जवतब कदहास, “ाेककन मसीह के सतथे कमान वतात आरतधनताय मे घुसे के कहमत कईसे भईा? पराोक मे तोहतर भतग ओकरत सतथे होखे। 4 कनकोदे मस जवतब कदहान, “आमीन; अइसही ं होखे कक ओकरत रतज मे हमतर भतग ओकरत सतथे होखे।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
5 ओइसही ं यूसुफ जब यहदी ाोर के ारे अइाे त ओह ाोर से पूछाे कक तू ाोर हमरत पर कतहे नतरतज बतड़ कक हम कपाततुस के यीशु के ातश के ितहत बतनी? दे ख़, हम ओकरत के अपनत कब मे रखाे बतनी आ ओकरत के सतफ कानन मे ापेट के कब के दु आर पर पुर ारत दे ाे बतनी। 6 हम ओकरत सतथे सही कतम कइाे बतनी। बतककर तू ाोर ओह धम् आदमी के सूाी पर िढतवे मे, ओकरत के कसरकत पी के, ओकरत के कतँ ट के मुकुट पकहन के, ओकरत दे ह के कोडत से फतड के, ओकरत खून के अपरतध के पतथ्नत मे , अनतय से है रतन हो रइा बतड़. 7 ई बतत सुन के यहदी ाोर परे शतन आ परे शतन हो रइान। उ ाोर यूसुफ के पकड के सब के कदन से पकहाे कहरतसत मे रतखे के आदे श दे ाे अवुरी सब के कदन खतम होखे तक उहतँ रहाे। 8 उ ाोर ओकरत से कहास, “कबूा कऱ। कतहे कक रह घरी जबाे हफत के पकहात कदन नत आवे तबाे तोहरत कवनो नुकसतन नत कइा जतयज नइखे . ाेककन हम जतनत बतनी कक तोहरत के दफनतवे ातयक नत मतना जतई। बतककर हम तोहतर मतं स हवत के किरई आ धरती के जतनवरन के दे ब। 9 यूसुफ जवतब कदहान, “ई बतत घमंडी रोकायत के बतत जइसन बत, जे दतऊद के नखातफ बोात कजंदत परमेशर के कनंदत कइाे रहाे। बतककर तू शतसी आ डतकर ाोर जतनत बतड़ कक भरवतन भकवषवयत के मतधम से कहाे बतडन कक बदात ाेबे के कतम हमतर ह, आ हम तोहनी के 1 बुरतई के बदात दे ब जवन तू हमरत से धमकी दे ाे बतनी। 10 जवनत परमेशर के तू कूस पर ाटकवाे बतडू, उ हमरत के तोहरत हतथ से बितवे मे सकम बत। तोहतर सब बुरतई तोहरत पर वतपस आ जतई। 11 रतजपता जब हतथ धोवान त कहान कक हम रह नतयी आदमी के खून से सतफ हो रइा बतनी। ाेककन तू ाोर जवतब दे के किलत के कहनी कक ओकर खून हमनी आ हमनी के ाइकन पर होखे। जइसन कक तू ाोर कहाे बतड़, तू ाोर हमेशत खतकतर नतश हो जत। 12 ई बतत सुन के यहकदयन के बुजुर् ाोर बहत नतरतज हो रइान। यूसुफ के पकड के ररो कोठरी मे रखाे जहतँ नखडकी नत रहे । उ ाोर दरवतजत के जकड के ततात प मोहर ारत दे ाे। 13 हरत आ कतइफत ओकरत पर पहरत दे के यतजक आ ाेवी ाोर के सतथे सातह काहाे कक सब के कदन के बतद सब ाोर कमाे के ितही ं आ उ ाोर यूसुफ के कवनत तरह से मतरे के योजनत बनत काहाे। 14 जब उ ाोर इ कतम कईाे त शतसक हरत अवुरी कैफत यूसुफ के बतहर ाे आवे के आदे श दे ाे। अध तय 10 के बत 1 जब सब ाोर इ सुन के दे ख के अिरज मे पड रईाे , कतहे कक उ ाोर के कोठरी के ततात प उहे मोहर कमाा, ाेककन यूसुफ के नत कमाा। 2 तब हरत आ कतइफत कनका रइान आ जब ऊ सब ाोर यूसुफ के रइात के ततरीफ करत रहाे त दे खान कक यीशु के कब के रखवतात ररो कसपतही सभत मे बोात रहे । 3 जब उ ाोर यीशु के कब के पहरत दे त रहाे त भूकंप आईा। हमनी के दे खनी जत कक परमेशर के ररो दू त कब के पुर के ाुढकत के ओकरत पर बईठा बत। 4 उनकर िेहरत कबजाी कनहन रहे अवुरी उनुकर कपडत बफ् कनहन रहे । आ हमनी के डर से मरा आदमी जइसन हो रइनी जत। 5 हमनी के ररो सर्दूत के यीशु के कब पर मेहरतर ाोर से कहत सुननी जत कक, “डर मत; हम जतनत बतनी कक तू यीशु के खोजत बतडू जेकरत के सूाी पर िढतवा रइा रहे ; ऊ जइसन कक ऊ भकवषवतरी कइाे रहाे, ओइसने कजंदत हो रइा बत. 6 आके उ जरह दे ख़ जहतँ ओकरत के कबछतवा रइा रहे । आऊ तुरते जतके अपनत िेान के बततईं कक ऊ मुवान मे से जी उठा बतडन आ तोहरत से पकहाे राीा मे िा जइहे । उहतँ तू ाोर ओकरत के ओइसन दे खब जइसे ऊ तोहके बतवाे बत। 7 तब यहदी ाोर यीशु के कब के रखवतात सब सैकनकन के रकटत क के पूछाे, “उ मेहरतर के हई, जेकरत से सर्दूत बतत कईाे रहाे?” तू ाोर कतहे नत पकडनी?
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
8 कसपतही ाोर जवतब कदहास, “हमनी के नईखी जतनत कक उ मेहरतर के रहाी। रकरत अातवत हमनी के डर से मरा आदमी कनहन बन रईनी जत, अवुरी हमनी के ओ मकहात के कईसे पकड सकत रहनी। 9 यहदी ाोर उनकरत से कहान, “जइसे पभु जीयत बतडन, हम तोहनी पर कवशतस नइखी करत।” 10 कसपतही ाोर यहकदयन से कहास कक जब रउवतं यीशु के रतनत िमततर करत दे खनी आ सुननी त उनकर कवशतस नत कईनी त हमनी के कवशतस कईसे करी?ं तू ाोर बकढयत से कहनी कक जइसे पभु कजंदत बतडे , कतहे कक पभु सिमुि कजंदत बतडे । 11 हम सुनाे बतनी कक यीशु के ातश के दफनतवे वतात यूसुफ के ररो कोठरी मे ररो ततात के नीिे बंद क दे ाे बतनी जवनत प सीा ारतवा रहे । जब तोहनी ओकरत के खोानी त ओकरत के उहतँ नत कमाा। 12 तब कत तू ाोर यूसुफ के पैदत कऱ जेकरत के तू ाोर कोठरी मे रखाे रहाू, आ हमनी के कब मे पहरत दे के यीशु के पैदत कर दे ब जत। 13 यहदी ाोर जवतब दे ाे, “हम यूसुफ के पैदत करब, कत तू यीशु के पैदत कर दे ब?” ाेककन यूसुफ अपनत शहर अररमतकथयत मे बतडे । 14 कसपतही ाोर जवतब कदहास, “जकद यूसुफ अररमतकथयत मे बतडे , आ यीशु राीा मे बतडे त हमनी के सर्दूत के मकहात ाोर के बततवत सुनाे रहनी जत। 15 ई बतत सुन के यहदी ाोर डे रत रइान आ आपस मे कहान कक अरर कवनो तरीकत से ई बतत सतव्जकनक हो जतव त हर शरीर यीशु पर कवशतस करी। 16 तब उ ाोर बहत सतरत पईसत बटोर के कसपतही ाोर के दे के कहाे, “कत रउवत ाोर के बततवत बतनी कक जब रउवतं सुता रहनी त रतत मे यीशु के िेात आके यीशु के ातश िोरत ाेाे रहाे। आ अरर रतजपता कपाततुस के ई बतत सुना जतव त हमनी के ओकरत के संतुष क के तोहरत के सुरककत कर दे ब जत। 17 कसपतही ाोर पईसत ाेके यहदी ाोर के कनद् श के मुततकबक कहास। आ ओह ाोर के ररपोट् कवदे शन मे जनतत मे फइा रइा. 18 ररो यतजक कफनेस, अदत ररो सूा के मतसर आ ररो ाेवी, जेकर नतम अरेउस रहे , उ तीनों राीा से यरशाेम आके मुख यतजक आ सभतघर मे रहे वतात सब ाोर के बतवाे। 19 हमनी के यीशु के दे खाे बतनी जत, जेकरत के तू ाोर सूाी पर िढवाे रहाू, उ अपनत ररतरह रो िेान से बतत करत आ जैतून के पहतड पर ओह ाोर के बीि मे बइठ के कहत रहान। 20 पूरत दु कनयत मे जतके सब जतकत के सुसमतितर के पितर करी,ं कपतत, बेटत आ पकवत आतत के नतम से बपकतसत दी ं। आ जे केह कबसवतस करी आ बपकतसत ाी, ओकर उदतर होई। 21 जब उ अपनत िेान से इ बतत कहाे त हमनी के उनुकत के सर् मे िढत दे खनी। 22 जब मुख यतजक, बुजुर् आ ाेवी ाोर इ बतत सुनाे त उ ाोर र तीनों आदमी से कहाे, “इसतरा के परमेशर के मकहमत करी ं अवुरी उनुकत से कबूा करी ं कक उ बतत सही बत कक नत, जवन तू दे खाे अवुरी सुनाे बतनी।” 23 उ ाोर जवतब दे ाे, “जइसे हमनी के पुरखन के पभु, अबतहम के परमेशर, इसहतक के परमेशर, आ यतकूब के परमेशर कजंदत बतडे , ओसही हमनी के यीशु के अपनत िेान से बतत करत सुनाे रहनी जत, आ जइसे हमनी के उनुकत के सर् मे िढत दे खाे रहनी जत, ओसही हमनी के तोहनी के सचतई बतत दे ाे बतनी जत। 24 दू र के तीनों आदमी जवतब दे के इ बतत जोडाे, “जकद हमनी के उ बतत के मतकाक नत होखब जवन हमनी के यीशु के बोात सुनाे रहनी जत आ हमनी के उनुकत के सर् मे िढत दे खाे रहनी जत त हमनी के पतप के दोषी होखब जत।” 25 तब मुख यतजक तुरते उठ के ववयत के ककततब हतथ मे ाेके रह ाोर के जतदू िातवत कहाे कक, “आब तोहनी यीशु के बतरे मे जवन बतत कहाे बतनी, ओकरत के अब नत बततईब।” 26 ऊ ाोर ओह ाोर के ढे र रकम दे के अपनत सतथे अउरी ाोर भेज के ओह ाोर के अपनत दे श मे ाे जतस ततकक ऊ ाोर कवनो तरह से यरशाेम मे नत रक सके। 27 तब यहदी ाोर सभे रकटत होके सबसे दु खद किंतत जतवाे कक, “यरशाेम मे जवन असतधतरर घटनत भईा बत, उ कत ह?
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
28 हरत आ कैफत ओह ाोर के कदातसत दे त कहाे, “हमनी के ईसत के कब के रखवताी करे वतात सैकनकन पर कतहे कवशतस करे के ितही ं कक ररो सर्दूत कब के दु आर से पुर के ाुढकत कदहाे बत?” 29 शतयद उनकर खुद के िेात ाोर इ बतत कह के उ ाोर के पईसत दे ाे कक उ ाोर अयीसन कहे अवुरी उ ाोर खुद यीशु के ातश ाेके िा रईाे। 30 रकरत अातवत रह बतत पर कवितर करी ं कक परदे सी ाोर के कवनो शेय नत कदहा जत सकेात कतहे कक उ ाोर भी हमनी के बहत सतरत रकम ाे ाेाे बतडे अवुरी हमनी के जवन कनद् श दे ाे रहनी, ओकरत मुततकबक उ ाोर हमनी के घोषरत कईाे बतडे । उ ाोर के यत त हमनी के पकत वफतदतर होखे के ितही,ं यत यीशु के िेान के पकत। अध तय 11 के बत 1 तब कनकोदे मस उठ के कहास, “हे इसतरा के ाोर, रउआ ाोर सही कहत बतडू, रउआ सभे सुनाे बतनी कक उ तीनों आदमी परमेशर के ववयत के कसम खइाे बतडे , जवन कहाे रहाे कक, हमनी के यीशु के जैतून के पहतड प अपनत िेान के संरे बतत करत दे खाे बतनी जत, अवुरी हमनी के उनुकत के सर् मे िढत दे खाे बतनी। 2 पकवत शतस हमनी के कसखतवेात कक धन भकवषवयत रकायतह के सर् मे ाे जतइा रइा। राीशत से भकवषवयत ाोर के बेटत पूछाे कक, “हमनी के बतप रकायतह कहतँ बतडे ?” ऊ ओह ाोर से कहान कक ऊ सर् मे ाे जतइा रइा बतडन. 3 भकवषवयत ाोर के बेटत ाोर ओकरत से कहास, “शतयद आतत ओकरत के इसतरा के कवनो पहतड मे ाे रईा होई, त शतयद उहतँ हमनी के ओकरत के कमा जतई।” उ ाोर राीशत से कनहोरत कईाे अवुरी उ तीन कदन तक राीशत के संरे घूमत रहाे, ाेककन उनुकत के नत कमाा। 4 हे इसतरा के ाोर, अब हमतर बतत सुनी ं आ हमनी के इसतरा के पहतडन मे आदमी के भेजा जतव, कही ं शतयद आतत यीशु के ाेके िा रइा होखे आ शतयद उहतँ हमनी के उनुकत के पत के त्प हो जतईं जत। 5 कनकोदे मस के सातह सब ाोर के खुश कइास। उ ाोर अइसन आदमी के भेजाे जवन यीशु के खोजत रहाे, ाेककन उनुकत के नत कमाा, उ ाोर वतपस आके कहाे, “हमनी के ितरो ओर घूमनी, ाेककन यीशु के नत कमाा, ाेककन हमनी के यूसुफ के उनुकत शहर अररमकथयत मे कमा रईा बतनी।” 6 ई बतत सुन के शतसक आऊ सब ाोर खुश होके इसतरा के परमेशर के सुकत कईाे , कतहे कक यूसुफ कमा रईाे, जेकरत के उ ाोर ररो कोठरी मे बंद क के रखाे रहाे, ाेककन नत कमाा रहाे। 7 जब उ ाोर ररो बडहन सभत बनवाे त मुनखयत यतजक ाोर पूछाे, “हमनी के यूसुफ के अपनत ारे ाे आवे के बत कक उ ाोर से बतत करस?” 8 ररो कतरज ाेके उ ाोर ओकरत के काख के कहास कक, “तोहरत आ तोहरत सब पररवतर के शतं कत होखे।” हम जतनत बतनी कक हम भरवतन आ तोहरत नखातफ ठे स पहँ िवाे बतनी। हमनी के आपन बतप-दतदत के भेट करे मे खुश हो जत, कतहे कक हम तोहरत जेा से भतर के रकदम है रतन रहनी। 9 हमनी के जतनत बतनी जत कक ई दु भत् वनतपूर् सातह रहे जवन हमनी के तोहरत नखातफ ाेाे रहनी जत आ पभु तोहतर दे खभता कइाे रहाे आ पभु खुद तोहरत के हमनी के योजनत से बित ाेाे रहाे। यूसुफ, तोहरत शतं कत होखे, जे सब ाोर के बीि आदररीय बत। 10 उ ाोर यूसुफ के सतत रो दोसन के िुन के कहास, “जब तू ाोर यूसुफ के ारे अइब त ओकरत के शतं कत से नमसतर करी ं आ ओकरत के ई किटी दे दी।ं ” 11 रही कहसतब से जब उ ाोर यूसुफ के ारे पहं िाे त उ ाोर शतं कत से उनुकत के नमसतर कईाे अवुरी किटी दे दे ाे। 12 यूसुफ रकरत के पढ के कहाे, “परमेशवर परमेस् वर के धन होखे, जे हमरत के इसतराी ाोर से बित काहाे कक उ ाोर हमतर खून नत बहवाे।” धन होखे भरवतन, जे हमरत के तोहरत पतँ ख के नीिे रकत कइाे बतडन।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
13 यूसुफ ओ ाोर के िुमत ाेके अपनत घर मे ाे रईाे। अकरात कदने यूसुफ अपनत रदहत पर सवतर होके ओह ाोर के सतथे यरशाेम िा रइान। 14 जब सब यहदी ाोर इ बतत सुन के ओकरत से कमाे कनकाा आ किलत के कहास कक, “हे कपतत यूसुफ, तोहरत इहतँ आवे मे शतं कत कमा जत।” 15 ऊ जवतब कदहान, “पभु के तरफ से सम्नद सब ाोर के कतम करे ।” 16 उ सब ओकरत के िुमत ाेाे। आ कनकोदे मस ररो बडहन मनोरं जन के तइयतरी क के ओकरत के अपनत घरे ाे रइान. 17 बतककर अकरात कदने तइयतरी के कदन हरत, कैफत आ कनकोदे मस यूसुफ से कहान कक, “इसतरा के परमेशर के सतमने कबूा कऱ आ हमनी से जवन सवता पूछब जत, ओकर जवतब दे दी ं। 18 हमनी के बहत घबरत रईा बतनी जत कक तू यीशु के ातश के दफनत दे ाे बतडू। आ कक' जब हम तोहरत के ररो कोठरी मे बंद क दे ाे रहनी त तोहरत के नत पत पवनी। आ हमनी के तब से डे रतत रहनी जत, जब तक कक तोहरत हमनी के बीि मे पकट होखे के समय तक। रह से भरवतन के सतमने हमनी के बततईं कक जवन कुछ भइा बत। 19 तब यूसुफ जवतब दे ाे, “तू हमरत के तैयतरी के कदन सबेरे तक कैद मे रखाे बतडू।” 20 जब हम आधत रतत के पतथ्नत मे खडत रहनी त घर के ितरो सर्दूत से घेराे रहाे। हम यीशु के सूरज के िमक कनहन दे खनी अवुरी डर से धरती प करर रईनी। 21 ाेककन यीशु हमरत हतथ के पकड के हमरत के जमीन से उठत काहाे, तब हमरत पर ओस कछडक रईा। ाेककन उ हमतर िेहरत पोंछ के हमरत के िुमत ाेाे अवुरी कहास कक, यूसुफ, मत डे रत। हमरत के दे ख़, कतहे कक ई हम हईं। 22 तब हम ओकरत के दे खनी आ कहनी कक रबोनी रकायतस! उ हमरत के जवतब दे ाे, “हम रकायतस नत हई, बताुक नतसरत के यीशु हई, जेकर ातश तू दफनत दे ाे बतडू।” 23 हम ओकरत से कहनी कक हमरत के उ कब दे खत द जवनत मे हम तोहरत के रखाे बतनी। 24 तब यीशु हमरत हतथ पकड के हमरत के ओकहजत ाे रइान जहतँ हम ओकरत के सुतत दे ाे रहनी आ हमरत के कानन के कपडत आ नैपककन दे खत कदहान जवन हम उनकत मतथत पर ारवाे रहनी। तब हम जतन रइनी कक ई यीशु हवे, आऊ उनकर आरतधनत कइनी आ कहनी कक पभु के नतम से आवे वतात के धन होखे। 25 यीशु हमरत के हतथ पकड के फेर से हमरत के अररमकथयत ाे रइान आ हमरत से कहाे, “तोहरत के शतं कत होखे। ाेककन िताीसवतँ कदन तक अपनत घर से बतहर मत कनकाी।ं बतककर हमरत अपनत िेान कत ारे जतर के पडी. अध तय 12 के बत 1 जब मुख यतजक ाोर इ सब बतत सुन के अिरज मे पड रईाे अवुरी मुदत् कनहन जमीन प मुंह क के करर रईाे अवुरी रक दू सरत से किलतत कहाे कक, “यरशाेम मे जवन असतधतरर कनशतनी भईा बत, उ कत ह? हमनी के ईसत के कपतत आ महततरी के जतनत बतनी जत। 2 ररो ाेवी कहास, “हम उनकर कई रो ररशेदतरन के जतनत बतनी, जवन धतकम्क ाोर ह, जे ाोर मंकदर मे इसतरा के परमेशर के बकादतन आ होमबका िढतवे के आदत बत। 3 जब कशमोन महतयतजक ओकरत के अपनत कोरत मे ाे काहाे। ऊ ओकरत से कहास, “पभु, अब तू अपनत सेवक के अपनत विन के अनुसतर शतं कत से जतर दी ं। कतहे कक हमतर आँ ख तोहतर उदतर के दे खाे कबयत जवन तू सब ाोर के सतमने तइयतर कइाे बतड़, जवन रैर-यहदी ाोर के रोशन करे खतकतर ररो रोशनी आ तोहरत ाोर इसतरा के मकहमत। 4 कशमोन ओइसही ं यीशु के महततरी मररयम के आशीष कदहान आ कहान कक हम तोहरत के ओह बचत के बतरे मे बततवत बतनी। ऊ बहत ाोर के पतन आ जी उठात खतकतर आ ररो अइसन कनशतनी खतकतर कनयुय कइा रइा बत जवनत के नखातफ बोाा जतई। 5 हँ , तावतर तोहतर आतत मे भी छे द करी आ बहत ाोर के मन के कवितर पकट हो जतई।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
6 तब सब यहदी कहाे, “हमनी के ओ तीनों आदमी के ारे भेजा जतर, जवन ाोर कहाे कक उ ाोर उनुकत के जैतून के पहतड प अपनत िेान के संरे बतत करत दे खाे बतडे । 7 रकरत बतद उ ाोर पूछाे कक उ ाोर कत दे खाे बतनी। उ रक मन से जवतब कदहान, “इसतरा के परमेशर के सतमने हमनी के पुकष करत बतनी जत कक हमनी के यीशु के जैतून के पहतड पर अपनत िेान से बतत करत आ सर् मे िढत दे खाे बतनी जत। 8 तब हरत आ कतइफत अार-अार जरह पर ाे जतके अार-अार जतं ि कईाे। जे सव्समकत से सचतई के कबूा कईाे अवुरी कहाे कक, उ ाोर यीशु के दे खाे बतडे । 9 तब हरत आ कैफत कहाे, "हमनी के ववयत कहत बत कक दू -तीन रवतह के मुँह से हर बतत के पुकष हो जतई।" 10 ाेककन हम कत कहाे बतनी? धन हनोक भरवतन के खुश कइान आ भरवतन के विन से अनुवतद कइा रइान; आ धन मूसत के दफन-या के बतरे मे जतना जतात। 11 ाेककन यीशु के कपाततुस के हतथ मे सौंपा रइा, कोडत मतरा रइा, कतँ ट के मुकुट पकहरतवा रइा, थूक कदहा रइा, भतात से छे दा रइा, सूाी पर िढतवा रइा, कूस पर मर रइान आ दफनत कदहा रइान आ उनकर ातश आदररीय यूसुफ के ररो नयत कब मे दफनत कदहा रइा आ ऊ रवतही दे त बतडन कक ऊ उनकत के कजंदत दे खाे बतडन. 12 रकरत अातवे इ ाोर घोषरत कईाे कक उ ाोर उनुकत के जैतून के पहतड प अपनत िेान के संरे बतत करत अवुरी सर् मे िढत दे खाे बतडे । 13 तब यूसुफ उठ के उठान। हरत आ कैफत से कहास, “तू ाोर के बहत आशय् हो सकेात कक तोहनी के बततवा रईा बत कक यीशु कजंदत बतडे अवुरी सर् मे िा रईा बतडे । 14 वतकई मे अिरज के बतत बत कक उ खताी मुवान मे से नत जी उठस, बन् दोसरत के कब से भी कजंदत करस, जेकरत के यरशाेम मे बहत ाोर दे खाे बत। 15 अब हमतर तनी सुनी,ं हमनी के सब केह धन कशमोन, महतयतजक के जतनत रहनी जत, जे यीशु के ररो कशशु के रप मे मंकदर मे अपनत कोरत मे ाे ाेाे रहाे। 16 उहे कशमोन के आपन दू रो बेटत रहाे आ हमनी के सब केह ओह ाोर के मौत आ अंकतम संसतर मे मौजूद रहनी जत। 17 रह से जतके ओह ाोर के कब दे ख़, कतहे कक ई ाोर खुाा बत आ ऊ ाोर जी उठा बत, आ दे ख़, ऊ ाोर अररमतकथयत शहर मे रक संरे भनय के कतम मे समय कबततवत बत। 18 कुछ ाोर पतथ्नत मे उनकर आवतज के आवतज सुनाे बत, ाेककन उ ाोर केह से बतत नत करीहे , ाेककन उ ाोर मरा आदमी कनहन रूंरत रहततरे । 19 बतककर आके हमनी के ओह ाोर के ारे जतके ओह ाोर के सतथे पूरत आदर आ सतवधतनी से ववहतर करी ं जत। आ अरर हमनी के ओह ाोर के ककररयत खतर खतकतर ाे आ सकेनी जत त शतयद ऊ ाोर हमनी के अपनत जी उठात के कुछ रहस बतत दी. 20 इ बतत सुन के यहदी ाोर बहत खुश हो रईाे। 21 तब हरत आ कैफत, कनकोदे मस, यूसुफ आ रमताीरा अररमतकथयत रइान, ाेककन उ ाोर के कब मे नत कमाा। बतककर शहर मे घूमत-घूमत ऊ ाोर ओह ाोर के भनय पर घुटनत टे क के बतनत रहे । 22 तब उ ाोर उनकरत के परमेस् वर के आदर आ आदर से परतम करत यरशाेम के आरतधनताय मे ाे अइाे आ फतटक बंद क के पभु के ववयत के ककततब ाे काहाे। 23 उ ाोर के हतथ मे रख के उ ाोर अदोनई आ इसतरा के परमेशर के नतम से ककररयत खइाे, जे हमनी के पुरखत ाोर से ववयत आ भकवषवयत ाोर से कहान कक, “जकद रउवतं उनकरत पर कवशतस करत बतनी कक जे रउवतं के मरात से कजंदत कइाे बत, उ यीशु ह, त बततईं कक रउवतं कत दे खाे बतनी आ कइसे मरात से कजंदत भइा बतनी।” 24 कशमोन के दु नो बेटत ितररनस आ ाेन्यस इ बतत सुन के कतँ प रईाे अवुरी परे शतन हो रईाे अवुरी करतह उठाे। आ सतथे-सतथे सर् के ओर दे खत उ ाोर जीभ पर अँरुरी रख के सूाी के कनशतनी बनवाे।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
25 तुरते उ ाोर बोााे, “हमनी मे से हर केह के कुछ कतरज दे दी,ं त हमनी के जवन कुछ दे खाे बतनी जत, ओकरत के तोहनी खतकतर काख दे ब जत।” उ ाोर रक-रक करके बईठ के काखाे कक अध तय 13 के बत 1 हे पभु यीशु आ कपतत, जे परमेशर हई, मुअा ाोर के पुनरुतन आ जीवन भी हई, हमनी के आपन रहस बततवे के अनुमकत दी,ं जवन हमनी के मरात के बतद दे खाे रहनी जत, जवन तोहतर कूस के ह। कतहे कक हम तोहरत नतम के ककररयत ाेाे बतनी। 2 कतहे कक तू अपनत सेवकन के ओह रुप बततन के बततवे से मनत कर दे ाे बतडू जवन नरक मे तोहरत ईशरीय शनय से कइा रइा रहे । 3 जब हमनी के अपनत बतप-दतदत के सतथे नरक के रकहरतई मे, अनतर के कररयतपन मे रखा रइा, त अितनक सोनत कनयर सूरज के रं र ाउका आ बैरनी रं र के ररो पयत् प रोशनी ओह जरह के रोशन करत रहे । 4 अभी रह बतत पर सब मनुष के कपतत आदम, सब कुापकत आ भकवषवयत ाोर के सतथे खुश होके कहाे, “उ इजोत अनन पकतश के रिकयतत ह, जे हमनी के अनन पकतश मे ाे जतर के वतदत कइाे बत। 5 तब यशतयतह भकवषवयत किलत के कहाे, “हम धरती पर कजंदत रहनी त हमतर भकवषवतरी के अनुसतर इहे कपतत आऊ परमेशर के बेटत के रोशनी ह।” 6 जबुान के दे श आ यरदन के पतर नेफताीम के दे श, जवन ाोर अनतर मे िात रहे , ररो बडहन रोशनी दे खास। आ जे ाोर मौत के परछतई के इातकत मे रहे , ओकरत खतकतर रोशनी पैदत हो रइा बत। अब ऊ आ रइा बतडन आ हमनी के जे मौत मे बइठा बतनी जत, ओकरत के रोशन कर कदहाे बतडन. 7 जब हमनी के सब केह हमनी पर िमका उजतात मे खुश रहनी जत त हमनी के कपतत कशमोन हमनी के बीि मे आके सब ाोर के बधतई दे त कहाे, “परमेशवर के बेटत पभु यीशु मसीह के मकहमत करी।ं ” 8 हम ओकरत के अपनत कोरत मे ाेके जब मंकदर मे ररो कशशु रहे आ पकवत आतत के भतव से ओकरत से कहनी आ कबूा कइनी, 1 कक अब हमतर आँ ख तोहतर उदतर के दे खाे कबयत जवन तू सब ाोर के सतमने तइयतर कइाे बतडू, जवन ररो रोशनी ह जवन रैर-यहदी ाोर आ अपनत ाोर इसतरा के मकहमत के रोशन करे । 9 ई बतत सुन के नरक के रहरतई मे मौजूद सब संत ाोर अउरी खुश हो रईाे। 10 ओकरत बतद ररो छोट संनतसी कनयर कनकाा आ हर केह पूछास कक तू के हउअ? 11 जेकरत पर ऊ जवतब कदहान, “हम जंरा मे किलतत आदमी के आवतज हईं, यूहरत बपकतसत दे वे वतात आ परम परमेशर के भकवषवयत, जे अपनत आवे से पकहाे अपनत ाोर के पतप के मतफी खतकतर उदतर के जतन दे वे खतकतर रईा रहाे। 12 हम यूहरत, जब हम यीशु के पकवत आतत से पभतकवत होके हमरत ारे आवत दे खनी त हम कहनी, “दे ख़, परमेशर के मेमनत, दे ख़, जे दु कनयत के पतप के दू र करे ात।” 13 हम ओकरत के यरदन नदी मे बपकतसत कदहनी आ पकवत आतत के कबूतर के रप मे ओकरत पर उतरत दे खनी आ सर् से ररो आवतज सुननी कक ई हमतर कपय बेटत ह, जेकरत से हम बहत खुश बतनी। 14 अब जब हम उनकत से आरे जतत रहनी त हम इहतँ से पतत ारतवे खतकतर उतरा बतनी कक परमेशर के बेटत अकरात बेर हमनी के घरे अइहे आ ऊपर से कदन के बसंत के तरह हमनी के ारे अइहे , जे अनतर आ मौत के परछतई मे बतनी। अध तय 14 के बत 1 जब पकहात आदमी हमनी के कपतत आदम इ बतत सुनाे कक यीशु यरदन मे बपकतसत ाेाे बतडे , त उ अपनत बेटत सेत के आवतज दे के कहाे। 2 अपनत बेटत, कुापकत आ भकवषवयत ाोर के ऊ सब बतत बततईं जवन तू मतइका, महतदू त से सुनाे रहाू जब हम तोहरत के जरत के फतटक पर भेजाे रही ं कक भरवतन से कनहोरत करी ं कक जब हम बेमतर होखी ं त ऊ हमरत मतथत पर अकभषेक करसु .
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3 तब सेठ, कुापकत आ भकवषवयत ाोर के नजदीक आके कहास, “हम सेठ जब हम जरत के फतटक पर भरवतन से पतथ्नत करत रहनी त पभु के दू त के दे खनी, मतइका हमरत से पकट होके कहत रहाे कक, “हम पभु के ओर से तोहरत ारे भेजा रईा बतनी। हमरत के मतनव कनकतय के अधकतत करे खतकतर कनयुय कइा रइा बत. 4 हम तोहरत सेत से कहत बतनी कक, रोवत-रोवत भरवतन से पतथ्नत मत कर, आ ओकरत से दयत के पेड के तेा के कनहोरत करी,ं जवनत से तोहरत कपतत आदम के मतथत दद् के िाते अकभषेक करी।ं 5 कतहे कक तू कवनो तरीकत से रकरत के अंकतम कदन आ समय तक नत पत सकेनी जब तक कक पतं ि हजतर पतं ि सौ सता नत बीत जतई। 6 तब मसीह, परमेशर के सबसे दयताु बेटत, आदम के मनुष के शरीर के कजंदत करे खतकतर धरती पर अइहे , आ सतथ ही सतथ मुवान के ातश के कजंदत करे खतकतर, आ जब उ अइहे त यरदन मे बपकतसत ाीहे । 7 तब उ अपनत दयत के तेा से अपनत पर कवशतस करे वतात सब ाोर के अकभषेक करीहे । आ उनकर दयत के तेा आवे वताी पीकढयन तक जतरी रही, जे पतनी आ पकवत आतत से अनन जीवन खतकतर पैदत होई। 8 जब ओह समय परमेस् वर के सबसे दयताु बेटत मसीह यीशु धरती पर उतररहे , त उ हमनी के कपतत आदम के जरत मे , दयत के पेड के ारे ाे अइहे । 9 जब सब कुापकत आ भकवषवयत ाोर सेत से इ सब बतत सुना त उ ाोर अउरी खुश हो रईाे| अध तय 15 के बत 1 जब सब संत ाोर खुश रहाे, त दे ख, शैततन, मौत के रतजकुमतर आ कपतन, नरक के रतजकुमतर से कहास। 2 खुद नतसरत के यीशु के गहर करे के तैयतरी करी,ं जे घमंड करत रहान कक उ परमेशर के बेटत हई, ाेककन कफर भी मौत से डे रतत आदमी कहाे रहाे कक, हमतर पतर मौत तक दु खी बत। 3 रकरत अातवे उ हमरत अवुरी बहत ाोर के बहत िोट पहं िवाे। कतहे कक जेकरत के हम आनर आ ांरडत बनवनी आ जेकरत के कई शैततन से सततवनी, उ अपनत विन से ठीक कर कदहान। हँ , आ जेकरत के हम तोहरत ारे मरा ाे अइनी, ऊ जबरदसी तोहरत से छीन ाेात। 4 रह बतत पर नरक के रतजकुमतर शैततन से कहान, “ऊ रतनत शनयशताी रतजकुमतर के ह, आ कफर भी मौत से डे रतत आदमी ह?” 5 कतहे कक धरती के सब ततकतवर ाोर हमरत शनय के अधीन बत, जेकरत के तू अपनत शनय से अधीन करवाे बतडू। 6 बतककर अरर ऊ अपनत मतनवीय सभतव मे अतनत शनयशताी होखसु त हम तोहरत के सचतई से पुकष करत बतनी कक ऊ अपनत कदव सभतव मे सव्शनयमतन हउवे आ केह ओकरत शनय के कवरोध नत कर सके. 7 जब ऊ कहान कक मौत से डे रतत बतडन त ऊ तोहरत के फँसतवे के योजनत बनवाे बतडन आ ऊ तोहरत खतकतर अनन युर तक दु खी रही. 8 तब शैततन नरक के रतजकुमतर से कहास, “तू कतहे संदेह जतवनी आ नतसरत के यीशु, तोहतर आ हमतर दु नु के गहर करे से डे रतत रहाू? 9 रहा बतत हम ओकरत के परीकत दे नी आ अपनत पुरतन ाोर के यहदी ाोर के ओकरत नखातफ जोश आ कोध से भडकत कदहनी? 10 हम ओकरत दु ख खतकतर भतात तेज कइनी। हम कपत आ कसरकत कमात के आजत दे नी कक ऊ रकरत के पी ाेव। हम ओकरत के सूाी पर िढतवे खतकतर कूस तइयतर कइनी, आ नतखून आइकबस के हतथ-रोड मे छे दे खतकतर; आ अब ओकर मौत नजदीक आ रइा बत, हम ओकरत के रकहजत ाे आवत बतनी, तोहरत आ हमरत दु नु के अधीन होके. 11 तब नरक के रतजकुमतर जवतब कदहास, “तू हमरत से अभी कहाे बतडू कक उ हमरत से मुअा ाोर के जबरदसी छीन ाेाे बत।”
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
12 जे ाोर के इहतँ से तब तक रखा रइा जब तक कक उ ाोर धरती पर नत कजर, उ ाोर के अपनत शनय से नत, बन् परमेशर से कईा रईा पतथ्नत से इहतँ से ाे जतइा रईा। 13 तब ऊ नतसरत के यीशु के हवे जे अपनत विन से कबनत परमेशर से पतथ्नत कइाे मुवान के हमरत से हटत कदहाे बतडन? 14 शतयद उहे ह जे ातजर के ितर कदन मरात के बतद हमरत से छीन ाेाे रहाे, उ बदबू आ सड रईा रहाे, अवुरी हमरत ारे मरा आदमी के रप मे रहे , ाेककन उ अपनत शनय से उनुकत के फेर से कजंदत क दे ाे रहाे। 15 शैततन जवतब दे के नरक के रतजकुमतर से कहास कक उहे आदमी नतसरत के यीशु हवे। 16 ई बतत सुन के नरक के रतजकुमतर ओकरत से कहास, “हम तोहरत के कसम दे त बतनी कक तोहरत आ हमरत के अकधकतर से बत कक तू ओकरत के हमरत ारे मत ाे आव़।” 17 जब हम उनकर विन के ततकत के बतरे मे सुननी त हम डर से कतँ प रईनी आ हमतर सब अधम् ाोर रके सतथे परे शतन हो रईा। 18 हमनी के ातजर के रोक नत पवनी जत, ाेककन उ अपनत के कहात दे ाे अवुरी दु भत् वनत के सभ कनशतन के संरे उ तुरंत हमनी से दू र हो रईाे। आ उहे धरती जवनत मे ातजर के ातश कटका रहे , उहे धरती ओकरत के कजंदत कनकता कदहास। 19 अब हम जतनत बतनी कक उ सव्शनयमतन परमेशर हवे जे अइसन कतम कर सकेाे, जे अपनत पभुभ मे परतकमी हवे, आ अपनत मतनवीय सभतव मे परतकमी हवे, जे मनुष के उदतरकतत् हवे। 20 रह से रह आदमी के इहतँ मत ाे आव़, कतहे कक ऊ ओह सब ाोर के मुय कर दी जेकरत के हम अकवशतस के तहत जेा मे रखाे बतनी आ पतप के बेडी से बतना बतनी आ अनन जीवन मे ाे जतई। अध तय 16 के बत 1 जब शैततन आ नरक के रतजकुमतर रक दू सरत से अईसन बतत करत रहाे, त अितनक ररज आ हवत के झोंकत कनहन आवतज आईा कक, हे रतजकुमतर ाोर, आपन फतटक उठतई। हे अनन फतटक, तू ाोर उठ जत, आ मकहमत के रतजत भीतर आ जइहे । 2 ई बतत सुन के नरक के रतजकुमतर शैततन से कहास, “हमरत से दू र हो जत आ हमरत आवतस से कनका जत। अरर तू ररो शनयशताी योदत हउअ त मकहमत के रतजत से ाड़। ाेककन तोहरत ओकरत से कत संबंध बत? 3 ऊ ओकरत के अपनत आवतस से बतहर कनकता कदहास। 4 रतजकुमतर अपनत अधम् अफसरन से कहाे, “कूरतत के पीता के फतटक बंद कर के ाोहत के सातख से तेज कर दी ं आ कहमत से ाडी,ं कही ं हमनी के बंदी नत बन जतईं जत।” 5 जब ई बतत सुन के पूरत पकवत ाोर के ाोर नरक के रतजकुमतर से कोध के जोर से बोाा। 6 आपन फतटक खोा़ ततकक मकहमत के रतजत भीतर आ सके। 7 ईशरीय भकवषवयत दतऊद किलत के कहाे, “कत हम धरती पर रहात पर सही मे भकवषवतरी नत कइाे रही ं कक अरर ाोर पभु के भातई खतकतर आ मनुष के संततन खतकतर उनकर अद् भुत कतम खतकतर उनकर सुकत करस। 8 कतहे कक उ पीता के फतटक के तोड के ाोहत के सातख के कतट दे ाे बतडे । उ ओह ाोर के अधम् के िाते पकड ाेाे बतडे अवुरी उनुकत अधम् के िाते उ ाोर दु खी बतडे । 9 रकरत बतद ररो अउरी भकवषवयत, पकवत यशतयतह, सब पकवत ाोर से अइसने बतत कहाे कक, कत हम धरती पर कजंदत रहनी त तोहनी से सही भकवषवतरी नत कइाे रहनी? 10 मरा ाोर कजंदत रही, आ जे ाोर अपनत कब मे बत, उ ाोर कजंदत होई, आ जे धरती पर बत, उ ाोर आनननत होई। कतहे कक पभु से कनकाा ओस ओह ाोर के मुनय कदही। 11 हम दोसरत जरह कहनी, हे मौत, तोहतर जीत कहतँ बत? हे मौत, तोहतर डं क कहतँ बत? 12 जब सब संत ाोर यशतयतह के इ बतत सुन के नरक के रतजकुमतर से कहास, “अब आपन फतटक खोा के ाोहत के सातख ाे ाी।ं कतहे कक तू अब बतना रहब़ आ ओकरत ारे कवनो ततकत नइखे।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
13 तब ररज के आवतज कनयर ररो बडहन आवतज आइा कक, हे रतजकुमतर ाोर आपन फतटक उठतईं। आ नरक के फतटक, तू ाोर ऊपर उठतवा जत आ मकहमत के रतजत भीतर घुस जतई। 14 नरक के रतजकुमतर उहे आवतज के दोहरतवत दे ख के किलत उठा जइसे ऊ अजतनी हो रइा होखे, ऊ मकहमत के रतजत के ह? 15 दतऊद नरक के रतजकुमतर से कहान, “हम ओह आवतज के बतत समझत बतनी कतहे कक हम ओकरत आतत से कहाे बतनी।” आ अब जइसन कक हम ऊपर कहाे बतनी, हम तोहरत से कहत बतनी, पभु बावतन आ शनयशताी, युद मे परतकमी पभु: ऊ मकहमत के रतजत हवे, आ ऊ सर् आ धरती मे पभु हवे। 16 ऊ कैकदयन के करतह सुने खतकतर नीिे दे खाे बत आ मरात के कनयत ाोर के छोडे खतकतर। 17 आ अब, हे रंदत आ बदबूदतर नरक के रतजकुमतर, आपन फतटक खोा़ ततकक मकहमत के रतजत भीतर घुस सके। कतहे कक ऊ आकतश आ धरती के मतकाक हवे। 18 जब दतऊद इ बतत कहत रहाे त परतकमी पभु ररो आदमी के रप मे पकट भईाे अवुरी उ जरह के रोशनी दे ाे, जवन कक पकहाे अनतर मे रहे । 19 ऊ बेडी के तोड कदहास जवन पकहाे नत टू टा जत सकत रहे । आ अपनत अजेय शनय से ओह ाोर के दौरत कइास जे अधम् से रकहरतह अनतर मे त्प हो जतात, आ पतप से मौत के परछतई। अध तय 17 के बत 1 अधम् मौत आ ओकर कूर अफसर ाोर ई बतत सुन के अपनत कई रतजन मे डर से गस हो रइान, जब ऊ ाोर रोशनी के सतफ-सुथरतपन दे खास। 2 मसीह खुदे अितनक ओह ाोर के आवतस मे पकट हो रइान। उ ाोर किलत के कहास कक हमनी के तोहरत से बतना बतनी जत। तू पभु के सतमने हमनी के भम के इरतदत करत ातरत बतडू। 3 तू के हउअ, जेकरत ारे भषतितर के कवनो कनशतनी नइखे, बाुक ऊ उजा रप जवन तोहतर महतनतत के पूरत पमतर बत, जवनत के तू अभी तक कवनो धतन नइखे दे त? 4 तू के हउअ, रतनत शनयशताी आ रतनत कमजोर, रतनत बड आ रतनत छोट, नीि आ कफर भी पकहात दजत् के कसपतही, जे आम कसपतही के रप मे नौकर के रप मे कमतन दे सकेात? 5 मकहमत के रतजत, मरा आ कजंदत, भाे रक बेर कूस पर मतरा रइा रहाे? 6 के कब मे मरा पडा बत आ हमनी के ारे कजंदत उतरा बत आ तोहरत मरात मे सब जीव कतँ प रइा बत आ सब ततरत कहा रइा बत आ अब तू मरा ाोर के बीि मे आपन आजतदी कमाा बत आ हमनी के सेनत के परे शतन करत बतडू? 7 तू के हउअ, जे मूा पतप से जंजीर मे बतना कैकदयन के छोड के पकहाे के आजतदी मे ाे आव़ 8 तू के हउअ, जे पतप के अनतर से आनर हो रइा ाोर पर अतनत मकहमतमंकडत आ कदव पकतश फइावाे बतड़? 9 रही तरह से सब शैततन के ाशरी भी ओतने भयतवहतत से पकडा रईाे अवुरी बहत आजतकतरी भय से किलत के कहाे। 10 हे यीशु मसीह, ई कहतँ से आइा कक तू ररो अइसन आदमी हउअ जवन मकहमत मे अतनत शनयशताी आ रौरवशताी हउअ, अतनत उजा हउवे कक ओकरत पर कवनो दतर नइखे, आ अतनत शुद बत कक ओकरत पर कवनो अपरतध नइखे? कतहे कक धरती के ऊ कनिात दु कनयत जवन अबाे हमनी के अधीन रहे आ जहतँ से हमनी के कर कमात रहे , ऊ हमनी के पकहाे कबो अइसन मरे वतात आदमी नत भेजाे रहे , कबो नरक के रतजकुमतरन के रह तरह के उपहतर नत भेजाे रहे . 11 तू के हउअ, जे अतनत कहमत से हमनी के कनवतस के बीि मे घुस के हमनी के सबसे बड सजत के धमकी दे वे से नत डे रतत बतडू, बाुक बतकी सब ाोर के ओह जंजीर से बितवे के कोकशश भी करत बतडू, जवनत जंजीर मे हमनी के पकडाे बतनी जत? 12 शतयद तू उ यीशु हउअ, जेकरत बतरे मे शैततन अभी हमनी के रतजकुमतर से कहाे बतडू कक कूस पर मरात से तू मौत के शनय पतवे वतात रहाू।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
13 तब मकहमत के रतजत मौत के रौंद के नरक के रतजकुमतर के पकड काहाे, ओकर पूरत शनय से वंकित क दे ाे अवुरी हमनी के पतकथ्व कपतत आदम के अपनत संरे अपनत मकहमत मे ाे रईाे। अध तय 18 के बत 1 तब नरक के रतजकुमतर शैततन के ाेके बहत संकेत के सतथ कहास, “हे कवनतश के रतजकुमतर, बेाजबुा के हतर आ कनवत् सन के ाेखक, परमेशर के सर्दूतन के कतरसतर आ सब धम् ाोर के घ्रत! अइसन कतम करे खतकतर तोहरत कवन झुकतव रहे ? 2 तू मकहमत के रतजत के सूाी पर िढतवे के ितहत रहाू, आ ओकरत कवनतश से हमनी के बहत बड फतयदत के वतदत कर दे ाे बतडू, ाेककन ररो मूख् के तरह अनजतन रहे कक तू कत बतत करत रहाू। 3 अब दे ख़ कक नतसरत के यीशु अपनत रौरवशताी ईशरीयतत के िमक से अनतर आ मौत के सब भयतवह शनय के भरत दे त बतडन। 4 उ हमनी के जेा के ऊपर से नीिे तक तोड दे ाे बतडे , सभ बंदी के बखत् स क दे ाे बतडे , बतना सभ ाोर के छोड दे ाे बतडे अवुरी जवन कक पकहाे अपनत यततनत के बोझ से करतहात के आदत रहे , अब हमनी के अपमतन कईाे बतडे अवुरी हमनी के ओ ाोर के दु आ से हतर रईात कनहन बतनी। 5 हमनी के अधम् के पभुभ वश मे हो रइा बत आ अब मतनव जतकत के कवनो कहसत हमनी के अधीनतत मे नइखे रह रइा, बतककर दोसरत तरफ ई सब हमनी के कनभ्कतत से धजी उडतवत बत. 6 हतातं कक, पकहाे, मुअा ाोर हमनी के पकत अनतदरपूर् ववहतर के कहमत नत करत रहे , नत ही कैदी होखात के नतते कबो कवनो मौकत प मस हो सकत रहे । 7 हे शैततन, हे सब दु षन के रतजकुमतर, अधम् आ पररतय ाोर के कपतत, तू रह कतरनतमत के कोकशश कतहे करब, कतहे कक हमनी के कैदी ाोर अब तक हमेशत मुनय आ जीवन के कम से कम उमीद से रकहत रहे ? 8 ाेककन अब ओ ाोर मे से केह कबहँ करतहत नईखे अवुरी नत ही कवनो के िेहरत प ाोर के झटकत दे खतई दे तत। 9 हे रतजकुमतर शैततन, हे नरकीय केतन के महतन रकक, जवन भी फतयदत तू कनकषद पेड से कमाा रहे , आ जरत के नुकसतन, तू अब सूाी के ाकडी से रँवत दे ाे बतडू; 10 तब तोहतर सुख खतम हो रइा जब तू मकहमत के रतजत यीशु मसीह के सूाी पर िढवनी। 11 तू अपनत आ हमरत कहत के नखातफ कतम कइाे बतडू, जइसन कक तू ओह बडहन यततनत आ अनंत सजत से तू अभी महसूस करब़ जवन तू भोरे वतात बतड़। 12 हे शैततन, सब बुरतई के रतजकुमतर, मौत के रिकयतत आ सब घमंड के सोत, तोहरत पकहाे नतसरत के यीशु के बुरत अपरतध के पूछततछ करे के ितहत रहे , आ तब तोहरत पतत िकात कक उ मौत के ातयक कवनो दोषी नईखन। 13 तू कबनत कवनो कतरर भत नतय के ओकरत के सूाी पर िढतवे के सतहस कतहे कइनी आ हमनी के इातकत मे ररो कनद्ष आ धम् आदमी के उततर कदहनी आ रह से पूरत दु कनयत के सब पतपी, अधम् आ अधम् ाोर के रँवत कदहनी? 14 जब नरक के रतजकुमतर शैततन से अईसन बतत करत रहाे, त मकहमत के रतजत नरक के रतजकुमतर बेाजबूब शैततन से कहाे, रतजकुमतर हमेशत खतकतर तोहरत पभु के अधीन रही, आदम अवुरी ओकर धम् बेटत के कमरत मे, जवन कक हमतर हवे। अध तय 19 के बत 1 तब यीशु आपन हतथ बढत के कहान, “हे हमतर सब संत, जे हमरत पकतरप मे बना बतनी, हमरत ारे आ जत, जेकरत के कनकषद फा वतात पेड आ शैततन आ मौत के दोषी ठहरतवा रइा बत। 2 अब हमरत कूस के ाकडी के ारे कजय़। शैततन, रह दु कनयत के रतजकुमतर, पर कवजय पतवेात आ मौत पर जीत हो जतात।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
3 तब सब पकवत ाोर परम परमेशर के हतथ मे रक सतथ जुड रईा। पभु यीशु आदम के हतथ पकड के कहान, “तोहरत आ तोहतर सब धम् संततन के शतं कत होखे जवन हमतर ह।” 4 तब आदम यीशु के रोड मे करर के रोवत-रोवत, कवनम भतषत आ जोर-जोर से उनकरत से संबोकधत कइान। 5 हे पभु, हम तोहतर बडतई करब, कतहे कक तू हमरत के ऊपर उठवाे बतडू आ हमरत दु शनन के हमरत पर खुश नत कइाे बतडू। हे पभु हमतर भरवतन, हम तोहरत से पुकतरनी आ तू हमरत के ठीक कर दे ाे बतडू। 6 हे पभु तू हमरत पतर के कब से ाे आइा बतडू। तू हमरत के कजंदत रखाे बतडू कक हम रडत मे नत उतरीं। 7 हे उनकर सब संत ाोर पभु के रतईं आ उनकर पकवततत के यतद मे धनवतद दी ं। कतहे कक ओकर कोध रक पा खतकतर ही रहे ात। ओकरत पक मे कजनरी बत। 8 रही तरह से सब संत ाोर यीशु के रोड मे सजदत क के रक आवतज मे कहाे, “हे संसतर के मुनयदततत, तू आईा बतडू, आ जवन सब बतत तू ववयत आ अपनत पकवत भकवषवयत ाोर के दतरत भकवषवतरी कईाे रहाू, ओकरत के पूरत कर ाेाे बतडू।” 9 तू अपनत कूस से कजंदत ाोर के छु डत दे ाे बतडू आ हमनी के ारे उतरा बतडू, ततकक कूस के मौत से तू हमनी के नरक से मुय कर सकीाे, आ अपनत शनय से मौत से बित सकीाे। 10 हे पभु, जइसे तू अपनत मकहमत के झंडत के सर् मे रखाे बतडू, आ अपनत मुनय के कनशतनी, धरती पर आपन कूस के खडत कर दे ाे बतडू! त हे पभु, नरक मे अपनत कूस के जीत के कनशतनी ारत द, ततकक मौत अब कमकनयन नत कर सके। 11 तब पभु आपन हतथ बढत के आदम आ उनकर सब पकवत ाोर पर कूस के कनशतनी बनवाे। 12 आदम के दतकहनत हतथ से पकड के उ नरक से िढ रईाे अवुरी परमेशर के सभ पकवत ाोर उनुकत पीछे पीछे िा रईाे। 13 तब रतजकीय भकवषवयत दतऊद कनभ्कतत से किलत के कहाे, 1 हे पभु के ररो नयत रीत रतईं, कतहे कक उ अद् भुत कतम कईाे बतडे । उनकर दतकहनत हतथ आ उनकर पकवत बतं ह उनकत के जीत दे ाे बत। 14 पभु आपन उदतर के बतरे मे बतत दे ाे बतडन, उ आपन धतकम्कतत रैर-यहदी ाोर के सतमने खुा के दे खत कदहाे बतडन। 15 संत ाोर के भीड जवतब कदहास, “उनकर सब संत ाोर के इ समतन बत, हमन, पभु के सुकत करी।ं ” 16 ओकरत बतद हबकूक भकवषवयत 3 किलत के कहाे, “तू अपनत ाोर के उदतर खतकतर कनकाा बतडू। 17 सब संत ाोर कहान, 4 धन बत जे पभु के नतम से आवेात। कतहे कक पभु हमनी के रोशन कइाे बतडन। ई हमनी के भरवतन हउवन हमेशत खतकतर; उ हमनी पर अनन युर तक रतज करीहे , आमीन। 18 रही तरह से सब भकवषवयत उनकर सुकत के पकवत बतत कहत रहाे आ पभु के पीछे िात रहाे। अध तय 20 के बत 1 तब पभु आदम के हतथ पकड के आदम के मुख दू त मतइका के दे कदहान। आ दयत आ मकहमत से भरा जरत मे ाे रइान। 2 दू रो बहत पुरतन आदमी ओह ाोर से कमा के संत ाोर पूछाे, “तू के हईं जे अभी तक हमनी के सतथे नरक मे नइखी ं रइा आ आपन ातश जरत मे रखाे बतनी?” 3 ओह ाोर मे से ररो जवतब कदहास, “हम हनोक हईं, जेकर अनुवतद परमेशर के विन से भइा बत। 4 हमनी के इहतँ अब तक रहा बतनी जत, आ मौत के सतद नईखी िखाे, ाेककन अब मसीह कवरोधी के आवे के समय वतपस आवे वतात बतनी जत, ईशरीय संकेत आ िमततर से ाैस होके, उनकरत सतथे ाडतई मे शतकमा होखे खतकतर, आ यरशाेम मे उनकरत दतरत मतरा जतर के बत, आ सतढे तीन कदन के बतद कफर से कजंदत बतदा मे ाे जतइा जतर वतात बत। 5 जब पकवत हनोक आ रकायतस ई बतत बततवत रहाे त दे ख, ररो अउरी आदमी ररो दयनीय आक्कत मे कूस के कनशतन के अपनत कंधत पर ाेके आइा। 6 जब सब संत ाोर ओकरत के दे खाे त पूछाे, “तू के हउअ?” कतहे कक तोहतर िेहरत िोर जइसन बत। आ तू अपनत कतन पर कूस कतहे ाेके िात बतड़?
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
7 ऊ जवतब कदहान, “तू ाोर सही कहत बतड़, कतहे कक हम ररो िोर रहनी जे धरती पर तरह तरह के बुरतई कइाे रहनी।” 8 यहदी ाोर हमरत के यीशु के सतथे सूाी पर िढत कदहा। आ हम ओह आशय्जनक िीजन के दे खनी जवन पभु यीशु के सूाी पर िढतवे के समय स्कष मे भइा रहे । 9 हम ओकरत के सब कुछ के रिकयतत आ सव्शनयमतन रतजत मतनत रहनी। हम ओकरत से पतथ्नत कइनी कक पभु, जब तू अपनत रतज मे अइब़ त हमरत के यतद कऱ। 10 उ हमरत कनहोरत के दे ख के हमरत से कहाे, “हम तोहरत से सि कहत बतनी कक आज तू हमरत संरे जरत मे रहब।” 11 उ हमरत के कूस के इ कनशतनी दे ाे कक, “रह के ाेके जरत मे िा जत; आ अरर जरत के पहरत दे वे वतात सर्दूत तोहरत के नत पवेश करी त ओकरत के कूस के कनशतनी दे खत के ओकरत से कह दी ं कक ईसत मसीह जे अब सूाी पर िढतवा रइा बत, हमरत के इहतँ तोहरत ारे भेजाे बतडन। 12 जब हम अईसन कईनी आ जरत के पहरत दे वे वतात सर्दूत के इ सब बतत बतवनी अवुरी उ सुनाे, त उ तुरंत फतटक खोा के हमरत के पररिय दे ाे अवुरी हमरत के जरत मे दतकहनत ओर रख दे ाे। 13 ऊ कहान कक, “तनी दे र इहतँ रह़ जब तक कक सब मनुष के बतप आदम अपनत सब बेटत के सतथे भीतर नत जतई, जे यीशु मसीह के पकवत आ धम् सेवक हवे, जेकरत के सूाी पर िढतवा रइा रहे ।” 14 जब उ ाोर िोर से इ सब कववरर सुनाे त सब कुापकत रक आवतज मे कहाे, “हे सव्शनयमतन परमेशर, अनन भातई के कपतत अवुरी दयत के कपतत, तू धन हो, जवन कक उनुकत नखातफ पतपी ाोर प अयीसन अनुगह कईाे अवुरी उनुकत के जरत के दयत मे ाे आईा अवुरी उनुकत के अपनत बड अवुरी आधतनतक भोजन के बीि मे रतख दे ाे आधतनतक आ पकवत जीवन के बतरे मे बततवा रइा बत। आमीन के बत। अध तय 21 के बत 1 इहे कदव आ पकवत रहस ह जवन हमनी के दे खा आ सुननी जत। हमरत, ितररनस आ ाेन्यस के भरवतन के बतकी रहस के घोषरत करे के इजतजत नइखे, जइसन कक महतदू त मतइका हमनी के आदे श कदहाे रहाे, 2 तोहनी हमरत भतई ाोर के सतथे यरशाेम िाब आ यीशु मसीह के जी उठात के घोषरत आ मकहमत करत पतथ्नत मे रहब, कतहे कक उ तोहनी के अपनत सतथे मुवान मे से कजंदत कर दे ाे बतडे । 3 आउर तू ाोर केह से बतत मत कऱ, बाुक रूंरत आदमी के रप मे तब तक बइठा रहब जब तक कक जब तक पभु तोहनी के अपनत ईशरीयतत के रहस बततवे के अनुमकत नत कदहे । 4 महतदू त मतइका हमनी के आजत कदहान कक हमनी के यरदन के पतर, ररो बेहतरीन आ मोट दे श मे जतइब जत, जहतँ मसीह के जी उठात के पमतर खतकतर हमनी के सतथे मुवान से जी उठा बहत ाोर बत। 5 कतहे कक हमनी के मरा ाोर से खताी तीन कदन के अनुमकत बत, जे हमनी के मततत-कपतत के सतथे हमनी के पभु के फसह मनतवे खतकतर उठा बतनी जत आ पभु मसीह खतकतर आपन रवतही दे वे खतकतर हमनी के यरदन के पकवत नदी मे बपकतसत ाेाे बतनी जत। आ अब केह के नजर नइखे आवत. 6 ई ओतने बत जतनत परमेशर हमनी के तोहनी से संबंध बनतवे के अनुमकत दे ाे बतडन। रह से तू ाोर ओकर सुकत आ आदर करी ं आ पशतततप करी,ं त ऊ तोहनी पर दयत करी। पभु परमेशर यीशु मसीह आ हमनी सब के उदतरकतत् से तोहनी के शतं कत होखे। आमीन, आमीन, आमीन के बत। 7 ऊ ाोर काख के दू रो अार-अार कतरज मे काखात के बतद, ितररनस जवन काखाे रहाे, ओकरत के हरत, कैफत आ रमतकारा के हतथ मे दे कदहान। 8 ाेन्यस भी अपनत काखा बतत के कनकोदे मस आ यूसुफ के हतथ मे दे कदहान। आ तुरते ओह ाोर के रोरत से अकधकत रप मे बदा कदहा रइा आ अब नत ाउका. 9 ाेककन उ ाोर जवन काखाे रहाे उ रकदम से सहमत पतवा रईा, जवनत मे रक अकर दू सरत से कम-बेसी नत रहे ।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
10 जब यहदी ाोर के सभे भीड ितररनस आ ाेन्यस के ई सब आशय्जनक संबंध सुन के रक दू सरत से कहास, “सिहँ इ सब कतम परमेशर के दतरत कइा रइा बत, आ पभु यीशु के हमेशत खतकतर धनवतद कदहा जतव, आमीन।” 11 उ ाोर बहत किंतत, डर, कतँ प के घूमत-घूमत अपनत छतती प िोट करत हर रक अपनत घरे िा रईाे। 12 ाेककन तुरते इ सब बतत जवन यहदी ाोर अपनत सभतघर मे यीशु के बतरे मे बततवत रहाे, उ सब यूसुफ अवुरी कनकोदे मस के ओर से रतजपता के बततवा रईा। 13 कपाततुस इ सब ाेनदे न काख के अपनत हॉा के सतव्जकनक ररकतड् मे रखाे। अध तय 22 के बत 1 रकरत बतद कपाततुस यहदी ाोर के मंकदर मे रईाे अवुरी सभ शतसक अवुरी शतसी अवुरी ववयत के कसवक के रकटत क के मंकदर के ररो िैपा मे िा रईाे। 2 आऊ सब फतटक बंद करे के आजत दे त कहान, “हम सुनाे बतनी कक रह मंकदर मे तोहनी के ररो बडहन ककततब बत। रही से हम तोहरत से ितहत बतनी कक रकरत के हमरत सोझत ाे आवा जत सके। 3 जब मंकदर के ितर रो सेवक ाोर के ाेके सोनत आ कीमती पुर से सजतवा बडकत ककततब ाे आवा रईा त कपाततुस उ सब से कहाे, “हम तोहनी के तोहनी के पूव्ज के भरवतन के कसम खतत बतनी, जे रह मंकदर के बनतवे के आजत दे ाे रहाे, कक तू ाोर हमरत से सचतई मत कछपतईं।” 4 तू ाोर ओह ककततब मे काखा सब बतत जतनत बतड़। अब हमरत के बततईं कक अरर तू ाोर पकवतशतस मे ओह यीशु के बतरे मे कुछ कमाा बत जेकरत के तू ाोर सूाी पर िढवाे रहाू आ दु कनयत के कवनत समय मे आवे के ितही ं त हमरत के बततईं। 5 तब हरत आ कतइफत के ककररयत खइात के बतद उ ाोर अपनत सतथे मौजूद बतकी सब ाोर के िपरता से बतहर कनकाे के आदे श दे ाे| 6 ऊ ाोर मंकदर आ िैपा के फतटक बंद क के कपाततुस से कहास, “हे नतयतधीश, तू हमनी के रह मंकदर के कनमत् र से ककररयत खइाे बतडू कक हम तोहरत के जवन सचतई आ सही बत, ओकरत के बतत दी ं। 7 हमनी के यीशु के सूाी पर िढतवे के बतद इ नत जतनत रहनी जत कक उ परमेशर के बेटत हवे, ाेककन इ मतन के कक उ कुछ जतदु ई कात से आपन िमततर कईाे बतडे , त हमनी के र मंकदर मे ररो बड सभत के बोावनी। 8 जब हमनी के रक दू सरत के बीि यीशु के कइा िमततर के बतरे मे कवितर करत रहनी जत त हमनी के अपनत दे श के बहत रवतह कमाा, जे बततवत रहाे कक उ ाोर उनुकत के मरात के बतद कजंदत दे खाे बतडे अवुरी उनुकत के अपनत िेान के संरे बततिीत करत सुनाे रहाे अवुरी उनुकत के आकतश के ऊँितई प िढत अवुरी ओ ाोर मे घुसत दे खाे रहाे। 9 हमनी के दू रो रवतह के दे खनी जत, कजनकर ातश के यीशु मुवान मे से कजंदत कईाे रहाे, उ ाोर हमनी के कई रो अजीब कतम के बतरे मे बतवाे रहाे जवन यीशु मुवान के बीि कईाे रहाे, जवनत के बतरे मे हमनी के हतथ मे कानखत कववरर बत। 10 हमनी के हर सता इ पकवत ककततब के सभत के सतमने खोा के उहतँ परमेशर के सातह के खोज करे के ररवतज ह। 11 हमनी के सतर ककततब मे से पकहात ककततब मे कमाा बत, जहतँ कमकेा महतदू त पकहात आदमी आदम के तीसरत बेटत से बतत करत बतडे , इ कववरर कक पतं ि हजतर पतं ि सौ सता बतद परमेशर के सबसे कपय बेटत मसीह धरती प आईा रहाे। 12 हमनी के आरे सोिनी जत कक शतयद उ इसतरा के भरवतन ही हवे जे मूसत से कहाे रहाे कक, “तू रवतही के स्दू क बनतइब।” रकर ांबतई डे ढ हतथ आ िौडतई डे ढ हतथ आ ऊँितई डे ढ हतथ होखी। 13 पुरतन कनयम के स्दू क के कनमत् र खतकतर रह सतढे पतँ ि हतथ से हमनी के ई बुझतइा आ जतन रईनी जत कक सतढे पतँ ि हजतर सता (रक हजतर) सता मे, यीशु मसीह के ररो शरीर के स्दू क यत तमू मे आवे के बत; 14 आ रही से हमनी के शतस रवतही दे त बत कक उ परमेशर के बेटत हउवे आ इसतरा के पभु आ रतजत हउवे।
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ईसत मसीह के मौत, दफन अउर पुन रुतन
15 कतहे कक उनकर दु ख के बतद हमनी के मुख यतजक ाोर उनकरत सतधन से कइा रइा कनशतनी से आशय्िककत हो रइान, हमनी के ओह ककततब के खोा के यूसुफ आ यीशु के महततरी मररयम के पीढी तक के सब पीढी के खोज कइनी जत, ई मतन के कक उ दतऊद के वंशज हवे। 16 हमनी के स्कष के कबबरन कमाा आ ऊ कवनत समय मे आकतश, धरती आ पकहात आदमी आदम के बनवाे रहान आ उहतँ से ाेके जापाय तक दू हजतर दू सौ बतरह सता के रहा। 17 जापाय से ाेके अबतहम तक नौ सौ बतरह ाोर। अबतहम से ाेके मूसत तक ितर सौ तीस ाोर। मूसत से ाेके रतजत दतऊद तक पतं ि सौ दस ाोर। 18 दतऊद से ाेके बेकबाोन के बंदी तक पतं ि सौ सता तक। आ बेकबाोन के बंदी से ाेके मसीह के अवततर तक, ितर सौ सता। 19 जवन सब के योर सतढे पतं ि हजतर (हजतर) के होात। 20 इहे बुझततत कक हमनी के सूाी पर िढतवा यीशु मसीह परमेशर के बेटत हउवे आ सचत आ सव्शनयमतन परमेशर हवे। आमीन के बत।
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