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वी ं
किताब
परिचय ई किताब पाचीच अताचाि िे मद्म भयावहता से गूँजत गिज िे भयावह चीख कचयि बा। ई सीरिया िे अताचािी एद्टिस िे उतीपच पि आधारित अधाय हवे जेििा िे िुछ लोग एकपफेचीस, द मैडमैच िहल। पकहली सदी िे िोमच इकतहास मे अइसच दू गो अताचािी लोग िे रििाड् बा--दू सििा, िैकलगुला, दू सिा शाचदाि पागल। एह लेखच िे रप एगो भाषण िे ह। एतचा सावधाची से समय कदहल जाला भाषण िे उदय-अस; एिि ति् एतचा कवचाशिािी बा; एिि ति् एतचा अटल बा; एतचा गकहिाह टिि जोि; एिि ति् एतचा ठं डा--कि ऊ आपच जगह सिासि वाकटु ता िे चमूचा िे रप मे ले लेला। मुख बात बा--साहस। लेखि िे शुरआत पेरित ति् िे दश्च िे भावुि बयाच से िइल गइल बा. हमची िे एह बीसवीं सदी िे ति् िे युग िे रप मे सोचल पसंद बा आ एिि कवपिीत कमथि िे युग से िइल पसंद बा--कफि भी अइसच लेखच अइसच धािणा िे चुचौती बा। हमची िे एगो लेखि कमलेला जे शायद ईसाई युग से पकहले िे पकहला सदी िे िहले, ति् िे एगो साफसाफ दश्च िे बयाच िित बापे जवच आज भी टतचे शद्शाली बा जतचा कि दू हजाि साल पकहले िहे । यातचा िक मे अवलोिच िे सेकटं ग अदम बा। िोमल चीजच िे अचुिूल हमची िे आधुकचि िाच पि ई भयावह रप से पहाि ििे ला। लगाताि यातचा िे कवसाि (सकदयां बाद सेकचश इद्ककजशच िे साधच िे सुझाव दे वे वाला) िे कवसाि से हमची िे साद िे चौंिावे वाला तिीिा से कदहल गईल बा। बुढऊ, सात भाई आ माई िे सोइि पातच िे उदय भी टह उगता िे चिम ििे मे िुछ चा ििे ला जवचा से ई व्ा साहस िे जादू चलावत बा. ईसाई चच् िे पाचीच कपता लोग एह किताब िे (हमची िे लगे सीरियाई अचुवाद से कमलल बा) िे उच चैकति मूल आ कशका िे िचचा िे रप मे सावधाची से संिककत िइले बा, आ कचसंदेह ई िई गो शुरआती ईसाई शहीद लोग खाकति परिकचत िहे , जे एििा िे पढ िे शहादत िे कपच मे उतेकजत हो गइल िहे । अध ाय 1 िे बा
पेरित ति् से संबंकधत पाचीच िाल िे दश्च िे रपिे खा। सभता िबो एह से उच कवचाि िे हाकसल चइखे िइले. "दमच" िे एगो चचा् । पद 48 मे माचव जाकत िे पूिा दश्च िे सािां श कदहल गइल बा। 1 उचतम कडगी मे दाश्कचि ऊ सवाल बा जवचा पि हम चचा् ििे िे पसाव िखले बाची, याची कि िा पेरित िािण जुचूच पि सव्च शासि बा; आ एििा दश्च पि हम गंभीिता से िउिा सभे से धाच दे बे िे कचहोिा ििब.
2 िाहे कि चा खाली कवषय सामान रप से जाच िे शाखा िे रप मे जरिी बा, बलुि एह मे सबसे बप गुण िे पशंसा भी शाकमल बा, जवचा से हमाि मतलब आतसंयम से बा। 3 मचे कि अगि ति् िे संयम, पेटूपच आ िामवासचा िे कवपिीत जुचूच पि कचयंतण साकबत होखे त टििा िे भी साफ-साफ दे खावल जाला कि ऊ िागच पि, दु षता जइसच, नाय िे कविोधी आ मदा् चापच िे कविोध ििे वाला लोग पि, याची कि कोध आ पीपा आ भय पि। 4 बाकिि, िुछ लोग पूछ सिेला कि अगि िािण जुचूच िे माकलि होला त ऊ भुलाए आ अजाचता पि िाहे चा कचयंतण िाखेला? उचिि उदे द मजाि उपावे िे होला। 5 एिि जवाब ई बा कि ति् खुद मच मे कचकहत दोषच पि माकलि चा होला बलुि टह जुचूच भा चैकति दोषच पि माकलि होला जवच नाय आ मदा् चापच आ संयम आ कचण्य िे पकतिूल होला; आ टह लोग िा माकमला मे एिि िाि् वाई जुचूच िे समाप ििे िे चा होला बलुि हमची िा टह लोग िे सफलतापूव्ि कविोध ििे मे सकम बचावे िे होला. 6 हम िउआ सभे िे सामचे िई गो उदाहिण ले आ सित बाची, जवच कवकभन सोत से कलहल गइल बा, जहाँ ति् अपचा िे जुचूच पि माकलि साकबत िि कदहले बा, लेकिच अब ति िे सबसे बकढया उदाहिण जवच हम दे सित बाची उ बा गुण खाकति मिल लोग िे उदात आचिण, एकलजाबेथ, आ सात भाई आ महतािी। 7 िाहे कि ई सब लोग अपचा पीपा िे कतिसाि से, हँ , मौत ति, साकबत िि कदहल कि ति् िाग से शेर उठे ला। 8 हम इहाँ टह लोग िे गुण िे तािीफ मे बढा सिेची, ऊ लोग, माई िे साथे आदमी, एह कदच मित जवचा िे हमची िा चैकति सुंदिता आ भलाई िे पेम खाकति मचावेची जा, बाकिि एििा बजाय हम टह लोग िे टह समाच पि समाकचत ििब जवच टह लोग िे कमलल बा. 9 िाहे कि टह लोग िे कहमत आ सहचशद् खाकति जवच पशंसा, खाली दु कचया िे चा बलुि टह लोग िे जलाद लोग िे भी महसूस भइल, ऊ टह लोग िे टह अताचाि िे पतच िे लेखि बचा कदहलस जवचा िे तहत हमची िे िाष् िहे , ऊ लोग अपचा सहचशद् से अताचािी िे हिा कदहल, जेहसे कि टह लोग िे माधम से टह लोग िे दे श शु् हो गइल। 10 बाकिि हम वत्माच मे एह बात पि चचा् ििे िे मौिा कचिालब, हमची िे सामान कस्ां त से शुरआत िइला िे बाद, जइसे कि हमिा ििे िे आदत बा, आ तब हम टह लोग िे िहाची पि आगे बढब, सव्ज भगवाच िे मकहमा दे त। 11 त हमची िे पूछताछ ई बा कि िा िािण जुचूच पि सव्च माकलि बा। 12 बाकिि हमची िे ई परिभाकषत ििे िे पपी कि ति् िा ह आ जुचूच िा ह, आ जुचूच िे िेतचा रप बा आ िा ति् टह सब पि सव्च बा कि चा. 13 िािण हम बुद् िे जीवच िे सष कवचाि-कवमश् िे साथ पसंद ििे वाला मच माचत बाची। 14 हम बुद् िे जाच माचत बाची, ईशिीय आ माचवीय चीजच िे आ टिि िािण िे बािे मे। 15 हम एििा िे ववया िे तहत हाकसल िइल संस्कत माचत बाची, जवचा िे माधम से हमची िे पिमेशि िे बात िे उकचत आदि िे साथ सीखत बाची जा आ अपचा सां सारिि लाभ खाकति आदमी िे चीजच िे सीखत बाची जा। 16 अब बुद् नाय आ नाय, साहस आ संयम िे रप मे पिट होला।