Skip to main content

Bhojpuri - 2nd Esdras

Page 1

अध्य 1 के ब् 1 एस्द् भविषियद के दू ्र वकतदब, ्रयदह के बेटद, अजररयद के बेटद, हे ल्यद् के बेटद, ्ददवियद के बेटद, ्ददोक के बेटद, अकीतोब के बेटद। 2 अवकयद् के बेटद, विने् के बेटद, हे ली के बेटद, अिररयद के बेटद, अजीई के बेटद, िरीिोथ के बेटद, अनदन के बेटद, ओवजयद के बेटद, बोररथ के बेटद, अबी्ेई के बेटद , विने् के बेटद, एवलयदजर के बेटद, 3 ले िी के गोत के हदरन के बेटद। जिन िददी के दे श िे , िदर् के रदजद आट् ले् के शद्नकदल िे कैद रहे । 4 पभर के िचन हिरद लगे आइल वक 5 जदके हिरद लोग के पदप के कदि आ ओह लोग के लइकन के आपन बररदई दे खद द जिन ऊ लोग हिरद लखलदि कइले बद। तदवक उ लोग अपनद लइकन के लइकन के बतद ्के। 6 कदहे वक उ लोग के बदप-दददद के पदप बढ गईल बद, कदहे वक उ लोग हिरद के भरलद गईल बदडे अिर री परदे ्ी दे ितद के चढद दे ले बदडे । 7 कद हि उहे नद हईं जे विस के दे श ्े, गरलदिी के घर ्े वनकदल के ले अइनी? ले वकन उ लोग हिरद के गरसद िे डदल दे ले बदडे अिर री हिरद ्लदह के तरच ्िझले बदडे । 8 तब तू अपनद िदथद के बदल उतदर के ओह लोग पर ्ब बररदई डदलऽ, कदहे वक ऊ लोग हिरद वनयि के पदलन नद कइल, बदवकर ई एगो वि्ोही लोग ह। 9 हि कब तक ओह लोग के छोडब, जेकरद िे हि एतनद भलदई कईले बदनी? 10 हि ओह लोग खदवतर बहत रदजद के नष कर दे ले बदनी। विरौन के ओकर नौकर आ ओकर पूरद तदकत के ्दथे हि िदर दे ले बदनी। 11 हि ओह लोग के ्दिने ्ब जदवत के नष कर दे ले बदनी आ पूरब िे हि दू गो पदं त, ्ोर आ ्ीदोन के लोग के वततर-वबतर क दे ले बदनी आ ओह लोग के ्ब दर शनन के िदर दे ले बदनी। 12 एह ्े तू ओह लोग ्े कहऽ वक पभर इहे कहत बदडन। 13 हि तोहनी के ्िरंदर के बीच ्े ले के चलत रहनी आ शर र िे तोहके एगो बडहन आ ्ररव्त रदसद दे ले रहनी। हि तोहके िू्द के एगो नेतद खदवतर दे ले बदनी आ हदरन के एगो यदजक खदवतर दे ले बदनी। 14 हि तोहनी के आग के खं भद िे रोशनी दे ले बदनी आ तोहनी के बीच िे बहत बड चितदर कईले बदनी। तबो तू हिरद के भरलद गइल बदडऽ, पभर कहत बदडन। 15 ्िन शलयिदन पभर इ कहत बदडन वक बटे र तोहनी खदवतर एगो वनशदनी के रप िे रहे । हि तोहनी के र्द खदवतर डे रद दे ले बदनी, विर भी तू उहदँ बडबडदत रहलू । 16 तोहनी के दर शनन के विनदश खदवतर हिरद नदि ्े जीत नद विलल, ले वकन आज तक तू लोग गरनगरनदत बदडू। 17 हि जिन िदयदद तोहरद खदवतर कइले बदनी ऊ कहदँ बद? जब तू लोग जंगल िे भूखल आ पद्ल रहलू त कद तू हिरद ्े नद वचलदत रहलू ? 18 ऊ कहलन वक तू हिनी के िदरे खदवतर कदहे हिनी के एह जंगल िे ले आइल बदडू? हिनी खदवतर विस के ्ेिद कइल बेहतर रवहत, एह जंगल िे िरलद ्े। 19 तब हि तोहरद शोक पर तर् खद के तोहरद के िनद खद के दे नी। एही ्े तू लोग सगनदूतन के रोटी खइनी। 20 जब तोहनी के पद् लदगल रहे त कद हि चटदन के िदड के पदनी नद बहत रहे ? गरिी खदवतर हि तोहरद के पेड के पतई ्े ढं क दे ले रहनी। 21 हि तोहनी के बीच एगो िलददर दे श बदं टनी, तोहनी के ्दिने कनदन, िरे ्ी आ पवलसी के बदहर वनकदल दे नी। पभर कहत बदडन। 22 ्िन शलयिदन पभर इहे कहत बदडन वक जब तू लोग जंगल िे अिोरी लोग के नदी िे पद्ल रहनी आ हिरद नदि के वनंदद करत रहलू ।

23 हि तोहनी के वनंदद के चलते आग नद दे ले रहनी, बलर क पदनी िे पेड िेक दे नी अिर री नदी के िीठ क दे ले रहनी। 24 हे यदकूब, हि तोहरद के कद करब? तू , यहदद, हिदर बदत नद िदनब, हि हिरद के दो्रद जदवत के ओर िोड दे ब, आ ओह लोग के हि आपन नदि दे ब, तदवक उ लोग हिदर वनयि के पदलन कर्। 25 तू लोग हिरद के छोड दे ले बदडू, हि तोहनी के भी छोड दे ब। जब तू लोग हिरद ्े कृपद करे के चदहत बदडू त हि तोहरद पर किनो दयद नद करब। 26 जब भी तू हिरद के परकदरबऽ त हि तोहनी के बदत नद ्रनब, कदहे वक तू लोग आपन हदथ खू न ्े अशर द कर दे ले बदडऽ आ तोहदर गोड गैर इरददतन हतद करे िे तेज हो गइल बदडऽ। 27 पभर कहत बदडन वक तोहनी के जइ्न हिरद के छोडल गइल बद, ओइ्न नद, बलर क आपन खर द के छोड वदहले बदडऽ। 28 ्िन शलयिदन पभर इहे कहत बदडन वक कद हि तोहरद के अपनद बेटद के बदप, बेटी के रप िे िदई आ अपनद छोट बचद के दू ध वपयदिे के तरह पदथननद नद कइले बदनी। 29 वक तू हिदर लोग बनी ं आ हि तोहदर भगिदन बनब। वक तू हिदर लइकद बनबऽ आ हि तोहदर बदप बनबऽ? 30 हि तोहनी के ओइ्ही ं बटोरले बदनी जइ्े िरग् अपनद िरग् के अपनद पदँ ख के नीचे बटोरे ले , ले वकन अब हि तोहनी के कद करब? हि तोहरद के अपनद चेहरद ्े बदहर वनकदल दे ब। 31 जब तू हिरद के चढद दे बऽ त हि तोहरद ्े िरँह िोड ले ब, कदहे वक हि तोहनी के अिदिसद आ खतनद के छोड दे ले बदनी। 32 हि तोहनी के लगे आपन ्ेिक भविषियद भेजले बदनी, जेकरद के तू लोग पकड के िदर दे ले बदडऽ आ ओह लोग के लदश के टर कडदटर कडद कर दे ले बदनी, जेकर खू न हि तोहरद हदथ ्े िदँ गब, पभर कहत हउिे । 33 ्िन शलयिदन पभर इहे कहत बदडन वक तोहदर घर उजदड हो गइल बद, हि तोहरद के ओइ्ही ं बदहर वनकदल दे ब जइ्े हिद के ठूंठ िदरे ले । 34 तोहदर लइकद-लइकी िल नद पैदद करीहे । कदहे वक उ लोग हिरद आजद के तरच ्िझ के हिरद ्ोझद बररदई के कदि कईले बदडे । 35 हि तोहदर घर ओह लोग के दे ब जिन आिे िदलद बद। जिन हिरद बदरे िे अभी तक नद ्रनले बदडे त हिरद प विशद् करीहे । जेकरद के हि किनो वनशदनी नईखी दे खिले , ले वकन उ लोग हि जिन आजद दे ले बदनी, उहे पूरद करीहे । 36 उ लोग किनो भविषियद के नईखन दे खले , विर भी उ लोग अपनद पदप के यदद क के ओकरद के सीकदर करीहे । 37 हि आिे िदलद लोग के कृपद के गिदह बनत बदनी, जेकर छोट-छोट लइकद खर शी िे आनल्त होले , आ भले उ लोग हिरद के शरीर के आँ ख ्े नद दे खले होख्, ले वकन हि जिन बदत कहत बदनी ओकरद पर आतद िे विशद् करे लन। 38 अब भदई, दे खऽ किन िवहिद बद; आ पूरब ्े आिे िदलद लोग के दे खऽ। 39 जेकरद के हि अबदहि, इ्हदक, यदकूब, ओव्यद्, आिो्, िीवकयद, योएल, अल्यद् आ योनद् के नेतद के रप िे दे ब। 40 नहि, अबदकूक, ्ोिोवनयद, अगेउ्, जकरयदह आ िलदकी, जेकरद के पभर के दू त भी कहल जदलद। अध्य 2 के ब् 1 पभर इहे कहत बदडन वक हि एह लोग के गरलदिी ्े बदहर वनकदलले बदनी आ भविषियद लोग के ्ेिक के ददरद आपन आजद दे ले बदनी। जेकरद के उ लोग नद ्रनले , ले वकन हिरद ्लदह के तरच ्िझत रहले । 2 ओह लोग के पैदद करे िदली िहतदरी ओह लोग ्े कहली वक, हे लइकद लोग जद। कदहे वक हि विधिद हईं आ छोडल गइल बदनी।


3 हि तोहरद के खर शी ्े पदलन पोषण कइले बदनी। ले वकन हि तोहके दर ख आ भदरी ्े गंिद दे ले बदनी, कदहे वक तू लोग अपनद परिे्​् िर के ्दिने पदप कइले बदडऽ आ ओकरद ्दिने बररद कदि कइले बदडऽ। 4 अब हि तोहनी के कद करब? हि विधिद आ छोडल गइल हईं, हे हिदर लइकद, जदके पभर ्े दयद िदँ गऽ। 5 हे बदबूजी, हि तोहरद के एह लइकन के िहतदरी के गिदही खदवतर परकदरत बदनी, जिन हिदर िदचद के पदलन नद करे । 6 तदवक तू ओह लोग के उलझन िे डदल दी ं आ ओह लोग के िहतदरी के लू ट िे डदल दी ं तदवक ओह लोग के ्ंतदन नद होखे । 7 ऊ लोग गैर-यहदी लोग के बीच वबखरदइल होखे आ ओह लोग के नदि धरती ्े हटद वदहल जदि, कदहे वक ऊ लोग हिरद िदचद के तरच ्िझले बद। 8 अ्रर, तोहरद पर वधकदर बद, जे तोहरद िे अधिन के वछपदित बदडऽ! हे दर ष लोग, यदद करऽ वक हि ्दोि आ अिोरद के कद कइले रहनी। 9 जेकर दे श गडद आ रदख के ढे र िे पडल बद, हि ओही लोग के भी करब जे हिदर बदत नद ्रनेलद, ्िन शलयिदन पभर कहत बदडन। 10 पभर एस्द् ्े इ कहत हउिे वक, “हिरद लोग ्े कहऽ वक हि ओह लोग के यरशले ि के रदज दे दे ब जिन हि इसदएल के दे ब।” 11 हि ओह लोग के िवहिद भी अपनद लगे ले के एह लोग खदवतर अनन तमू दे ब जिन हि ओह लोग खदवतर तइयदर कइले रहनी। 12 िीठ ्रगंध के िरहि के रप िे उ लोग के जीिन के पेड होई। नद िेहनत करीहे , नद थक जइहे । 13 जद, तोहनी के विल जदई, तोहनी ्े करछ वदन खदवतर पदथननद करी ं वक ऊ छोट हो जदि, तोहनी खदवतर रदज पवहले ्े तइयदर हो गइल बद। 14 आकदश आ धरती के गिदही बनदईं। कदहे वक हि बररदई के टर कडदटर कडद क के अचदई के रचले बदनी, कदहे वक हि वजंदद बदनी, पभर कहत हउिे । 15 िदई, अपनद लइकन के गले लगद के खर शी ्े पदलन पोषण करऽ, ओह लोग के गोड खं भद वनयर तेज करऽ, कदहे वक हि तोहरद के चरनले बदनी, पभर कहत बदडन। 16 िरअल लोग के हि अपनद जगह ्े वजंदद क के कब ्े बदहर वनकदल दे ब, कदहे वक हि इसदएल िे आपन नदि जदनत बदनी। 17 हे लइकन के िहतदरी, ित डे रद, कदहे वक हि तोहरद के चरनले बदनी, पभर कहत बदडन। 18 तोहरद िदद ्े हि अपनद ्ेिक ए्े आ जेरेिी के भेजब, वजनकर ्लदह के िरतदवबक हि तोहरद खदवतर बदरह गो पेड के पवित क के तैयदर कईले बदनी, जिन वक कई तरह के िल ्े भरल बद। 19 दू ध आ शहद ्े बहत ओतने िवदरद आ ्दत गो परदकिी पहदड, जिनद पर गरलदब आ करिरद के िूल उगेलद, जिनद ्े हि तोहदर लइकन के खर शी ्े भर दे ब। 20 विधिद के ्दथे ्ही करी ं, अनदथ के नदय करी,ं गरीब के दे , अनदथ के बचदि करी,ं नंगद के कपडद पवहन दी ं। 21 टू टल-िूटल आ किजोर के ठीक करऽ, लं गडद के वतरसदर करे खदवतर ित हँ ्ऽ, अपंग के बचदि करऽ आ आनर के हिरद ्दि-्दि के ्दिने आिे दी ं। 22 बूढ आ जिदन के अपनद दे िदल के भीतर रदखऽ। 23 जहदँ -जहदँ िरअल लोग के विल जदई, ओकरद के ले के दिनद दऽ, आ हि अपनद जी उठलद िे तोहरद के पवहलद सथदन दे ब। 24 हे हिदर लोग, लसथर रहऽ आ आरदि करऽ, कदहे वक तोहदर शदं वत अबवहयों आ गइल बद। 25 हे बवढयद न्न, अपनद लइकन के पोषण करऽ; ओह लोग के गोड सथदवपत कर दी.ं 26 रहल बदत जे हि तोहरद के दे ले बदनी, ओहिे ्े केह के नदश नद होई। कदहे वक हि तोहरद ्ंखद िे ्े ओह लोग के िदँ गब।

27 थक ित, कदहे वक जब विपव् आ भदरीपन के वदन आई त दू ्र लोग रोिे आ दर खी हो जइहे, ले वकन तू खर श होखब आ भरिदर होखब। 28 गैर-यहदी लोग तोहरद ्े ईषदन करी, ले वकन उ तोहरद लखलदि करछ नद कर पदई। 29 हिदर हदथ तोहरद के ढं क दी, तदवक तोहदर लइकद नरक नद दे ख्र। 30 हे िदई, अपनद लइकन के ्दथे आनल्त रहऽ। कदहे वक हि तोहरद के बचद ले ब, पभर कहत बदडन। 31 अपनद ्रतल लइकन के यदद करऽ, कदहे वक हि ओह लोग के धरती के वकनदरे ्े वनकदल के ओह लोग पर दयद करब, कदहे वक हि दयदलर हईं, ्िन शलयिदन पभर कहत बदडन। 32 जबले हि नद आके ओह लोग पर दयद नद करब तबले अपनद लइकन के गले लगदईं कदहे वक हिदर करआँ बहत बद आ हिदर कृपद खति नद होखी. 33 हि एस्द् के ओरे ब पहदड पर पभर के आजद विलल वक हि इसदएल िे जदइब। बदवकर जब हि ओह लोग के लगे अइनी त ऊ लोग हिरद के बेकदर कर वदहल आ पभर के आजद के तरच ्िझ वदहल. 34 आ एही ्े हि तोहनी ्े कहत बदनी वक हे गैर-यहदी लोग, जे ्रनत आ ्िझत बद, अपनद चरिदहद के तलदश करी ं, ऊ तोहनी के अनन विशदि वदही। कदहे वक उ दर वनयद के अंत िे आिे िदलद नजदीक आ गईल बद। 35 रदज के इनदि खदवतर तइयदर रही ं कदहे वक अनन रोशनी तोहनी पर हिेशद खदवतर चिकत रही। 36 एह ्ं्दर के परछदई ्े भदग जद, आपन िवहिद के आन् गहण करऽ, हि अपनद उददरकतदन के खर ल के गिदही दे त बदनी। 37 हे तोहनी के वदहल िरददन के गहण करी ं आ खर श होके, जे तोहनी के सग्य रदज िे ले गइल बद, ओकर धनिदद दी।ं 38 उठ के खडद होके दे खऽ वक पभर के परब िे िरहर लगदिल लोग के ्ंखद केतनद बद। 39 ऊ लोग दर वनयद के परछदई ्े दू र हो गइल बद। आ पभर के गौरिशदली िस विलल बद। 40 हे व्योन, आपन ्ंखद ले के, जे लोग उजर कपडद पवहनले बद, जे पभर के वनयि के पूरद कईले बद, ओकरद के बंद कर द। 41 तोहदर ्ंतदन के ्ंखद पूरद हो गइल, जेकरद खदवतर तू तर्त रहलू , पभर के शलय ्े वनहोरद करऽ वक तोहदर लोग जिन शर र ्े बोलदिल गइल बद, पवित होखे । 42 हि एस्द व्योन पहदड पर एगो बडहन लोग के दे खनी, जेकरद के हि वगन नद पिनी, आ उ ्ब गीतन ्े पभर के सरवत करत रहले । 43 ओह लोग के बीच िे एगो लिहर कद के निही रहे , जिन बदकी लोग ्े लिहर रहे , आ ओह लोग के हर िदथद पर िरकरट पवहनले रहे आ ऊ अउरी ऊँच रहे । जिनद पर हि बहते अचरज िे पड गइनी. 44 हि सगनदूत ्े पूछनी, “िहदरदज, इ ्ब कद ह?” 45 उ हिरद ्े कहल्, “ई उ लोग हिे जे नशर कपडद उतदर के अिर कपडद पवहनले बदडे अिर री भगिदन के नदि कबूल कईले बदडे । 46 तब हि सगनदूत ्े कहनी वक किन निही ओह लोग के िरकरट पवहन के हदथ िे हथेली दे त बद? 47 उ हिरद ्े कहल्, “ई परिेशर के बेटद हिे , जेकरद के उ लोग दर वनयद िे कबूल कईले बदडे ।” तब हि ओह लोग के बहते तदरीि करे लगनी जे पभर के नदि खदवतर अतनद कठोरतद ्े खडद रहले . 48 तब सगनदूत हिरद ्े कहल् वक, जदके हिरद लोग के बतदईं वक तू अपनद पभर परिेशर के किन-किन बड चितदर दे खले बदडू। अध्य 3 के ब् 1 शहर के बबदन द भइलद के ती्िदँ ्दल िे हि बेवबलोन िे रहनी आ वबछौनद पर घबरदहट िे पडल रहनी आ िन िे िन िे विचदर आ गइल।


2 हि व्योन के उजदड आ बेवबलोन िे रहे िदलद लोग के धन दे खनी। 3 हिदर आतद बहत लखव्यद गइल वक हि परिदतद ्े भय ्े भरल बदत कहे लगनी। 4 हे पभर, जे शद्न धदरण करे नी, तू शर र िे कहले रहलू जब तू धरती रोपले रहलू , आ ऊ अकेले , आ जनतद के आजद दे ले रहलू । 5 आदि के एगो शरीर दे वदहलन जिन तोहरद हदथ के बनदिल रहे आ ओकरद िे जीिन के ्दँ ् वदहल् आ ऊ तोहरद ्दिने वजंदद हो गइल। 6 आ तू ओकरद के जनत िे ले जदइले , जिन तोहदर ददवहनद हदथ धरती के ्दिने आिे ्े पवहले रोपल रहे । 7 तू ओकरद के आपन रदसद ्े पेि करे के आजद दे हनी, जिनद के उ उलं घन कईल् अिर री तररंत ओकरद अिर री ओकरद पीढी िे िौत के वनयरलय क दे नी, जिनद िे ्े जदवत, कबीलद, लोग अिर री जदवत-जदवत पैदद भईल। 8 हर लोग अपनद िज् के वह्दब ्े चलत रहे आ तोहरद ्दिने अद् भरत कदि करत रहे आ तोहदर आजद के वतरसदर करत रहे । 9 आ ्िय के ्दथ विर ्े तू दर वनयद िे रहे िदलद लोग पर बदढ ले अइनी आ ओकरद के नदश कर वदहनी। 10 हर केह िे जइ्े आदि के िौत भइल, ओइ्ही ं ई लोग खदवतर जलपलय भइल। 11 एकरद बददो तू ओहिे ्े एगो नूह के अपनद घरदनद के ्दथे छोड दे हनी। 12 जब धरती पर रहे िदलद लोग के ्ंखद बढे लदगल आ उ लोग के बहत ्ंतदन पैदद भइल आ एगो बडहन लोग हो गइल त ऊ लोग िेर ्े पवहलकद लोग ्े अवधकद अभय होखे लदगल। 13 जब ऊ लोग तोहरद ्े पवहले अतनद दर षतद ्े वजयत रहे त तू ओह लोग िे ्े एगो आदिी चरननी, जेकर नदि इबदहीि रहे । 14 तू ओकरद ्े पदर करत रहलू आ खदली ओकरद ्े तू आपन िज् दे खदित रहलू । 15 ओकरद ्े अनन कदल के िदचद कइलन आ ओकरद ्े िददद कइलन वक तू ओकरद ्ंतदन के कबो नद छोडब। 16 ओकरद के तू इ्हदक के दे ले रहलू आ इ्हदक के यदकूब आ ए्दि भी दे ले बदडू। रहल बदत यदकूब के त तू ओकरद के अपनद खदवतर चरन के ए्दि के लगे रखले बदडू, आ एही ्े यदकूब के भीड बहत हो गईल। 17 जब तू उनकर िं शज के विस ्े वनकदल के व्नदई पहदड पर ले अइनी। 18 आ आकदश के झरकद के धरती के तेज कर वदहनी, पूरद दर वनयद के वहलद वदहनी आ गवहरदई के कदँ प वदहनी आ ओह जिदनद के आदिी के परे शदन कर वदहनी। 19 तोहदर िवहिद चदर गो िदटक ्े गरजरत रहे , आग, भूकंप, हिद आ ठं डद के िदटक ्े। तदवक यदकूब के िं शज के विसथद आ इसदएल के पीढी के लगन दे दी।ं 20 तबहँ तू ओह लोग ्े एगो दर ष वदल नद हटद पिनी वक तोहदर विसथद ओह लोग िे िल दे ्के। 21 कदहे वक पवहलद आदि जे दर ष िन के धदरण करत रहले , उ अपरदध कईले अिर री उनरकद प विजय पद ले ले। आ ओकरद ्े पैदद भइल ्ब लोग भी अइ्ने होखे । 22 एह तरह ्े किजोरी के सथदयी बनद वदहल गइल। आ जड के दर भदन िनद िदलद लोग के वदल िे कदनून (उहो); एह ्े अचदई चल गइल आ बररदई लसथर रह गइल। 23 तब ्िय बीत गईल आ ्दल के अंत हो गईल, तब तू ददऊद नदि के एगो नौकर के खडद कईनी। 24 तू ओकरद के आपन नदि खदवतर एगो शहर बनदिे के आजद दे ले बदडू, आ ओकरद िे तोहरद खदवतर धूप आ बवल चढदिे के आजद दे ले बदडू।

25 जब ई कदि बहत ्दल तक भइल त शहर िे रहे िदलद लोग तोहरद के छोड वदहल। 26 ्ब कदि िे आदि आ ओकर ्ब पीढी के जइ्न कइलन कदहे वक ओह लोग के िन िे भी दर ष िन रहे । 27 आ एही ्े तू आपन शहर के अपनद दर शनन के हदथ िे दे वदहनी। 28 त कद उ लोग के कदि बदबरल िे रहे िदलद लोग ्े बेहतर बद वक उ लोग व्योन पर रदज कर ्के? 29 जब हि उहदँ अइनी आ बेशरिदर अधिन के दे खले रहनी त एह ती्िदँ ्दल िे हिदर पदण बहत दर षन के दे खल् कदन, जे्े हिदर वदल हिरद के िेल कर वदहल्। 30 कदहे वक हि दे खले बदनी वक तू कइ्े ओह लोग के पदप करे दे त बदडऽ आ दर षन के बखत बदडऽ, आ अपनद लोग के नदश कर वदहनी आ अपनद दर शनन के बचद के रखले बदडऽ आ एकर ्ंकेत नद दे ले बदडऽ। 31 हिरद इयदद नइखे वक ई रदसद कइ्े छोडल जद ्केलद वक कद उ लोग व्योन के लोग ्े बेहतर बदबरल के हिे ? 32 कद इसदएल के अलदिद तोहरद के जदने िदलद किनो दो्र लोग बद? यदकूब के जइ्न तोहदर िदचद पर किन पीढी वब्िद् कइले वबयद? 33 तबो ओह लोग के इनदि नइखे लउकत आ ओह लोग के िेहनत के किनो िल नइखे , कदहे वक हि गैर-यहदी लोग के बीच ्े इहदँ -उहदँ गइल बदनी आ दे खत बदनी वक ऊ लोग धन-दौलत िे बहत बद आ तोहदर आजद के बदरे िे नइखे ्ोचत। 34 एह ्े तू अब हिनी के दर षतद के तरदजू िे तौलऽ आ दर वनयद िे रहे िदलद लोग के भी। आ एही तरे तोहदर नदि इसदएल के छोड के कही ं नद विली। 35 धरती पर रहे िदलद लोग तोहरद ्ोझद कब पदप नद कइले? कद लोग तोहदर आजद के अतनद पदलन कइले बद? 36 तू पदबऽ वक इसदएल के नदि ्े तोहदर आजद के पदलन कइले बद। बदवकर विधि् लोग के नद। अध्य 4 के ब् 1 हिरद लगे भेजल सगनदूत, जेकर नदि उरीएल रहे , उ हिरद के जिदब दे ले। 2 ऊ कहल्, “तोहदर िन एह ्ं्दर िे बहत दू र हो गइल बद आ कद तू परि परिदतद के रदसद ्िझे के ्ोचत बदडऽ? 3 तब हि कहनी, हँ , हिदर िदवलक। ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “हिरद के भेजल गइल बद वक हि तोहरद के तीन रदसद दे खदईं आ तीन गो ्िदनतद तोहरद ्ोझद बतदईं. 4 अगर तू हिरद के एगो बतद ्कत बदडू त हि तोहरद के उ रदसद दे खद दे ब जिनद के तू दे खल चदहत बदडू, आ हि तोहरद के दे खद दे ब वक दर ष वदल कहदँ ्े आिे लद। 5 हि कहनी, हे िदवलक, बतदिऽ। तब उ हिरद ्े कहल् वक, जद, हिरद के आग के िजन तौल, चदहे हिद के धिदकद नदप, चदहे बीतल वदन के दोबदरद बोलदि। 6 तब हि पूछनी, “कौन आदिी अइ्न कर ्केलद वक तू हिरद ्े अइ्न बदत िदँ गऽ?” 7 ऊ हिरद ्े कहले , “अगर हि तोहरद ्े पूछब वक ्िरंदर के बीच िे केतनद बडहन आिद् बद, भद गवहरदह के शर रआत िे केतनद झरनद बद, यद आकदश ्े ऊपर केतनद झरनद बद, भद किनद के वनकलल बद सगन: 8 शदयद तू हिरद ्े कहब वक हि कबो गवहरदह िे नद उतरनी, नद अभी तक नरक िे , नद हि कबो सगन िे चढनी। 9 तबवहयो अब हि तोहरद ्े खदली आग आ हिद के बदरे िे पूछले बदनी, आ ओह वदन के बदरे िे जिनद ्े तू गरजरल बदडू, आ जिनद चीजन ्े तू


अलगद नद हो ्केलऽ, बदवकर तबवहयों तू हिरद के ओह लोग के किनो जिदब नइखीं दे ्कत। 10 उ हिरद ्े कहलन वक, “कद तू आपन बदत आउर जे तोहरद ्दथे पलल-बढल बद, कद तू नइखऽ जदनत; 11 तब तोहदर बतनन परिदतद के रदसद के कइ्े ्िझ पदई, आ दर वनयद अब बदहर ्े वबगड गइल बद, तदवक हिरद नजर िे जिन भषदचदर लउकत बद ओकरद के ्िझ ्के? 12 तब हि ओकरद ्े कहनी वक हिनी के बररदई िे वजंदद रहब आ कष भोगत रहब आ ई नद जदन पइब वक कदहे हिनी के नद होखब जद। 13 ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “हि एगो जंगल िे िैददन िे चल गइनी आ पेड-पौधद के बदत हो गइल। 14 ऊ कहल्, “आ जद, हिनी के जदके ्िरंदर ्े लडदई करी ं जद तदवक ऊ हिनी के ्दिने ्े चल जदि आ हिनी के अउरी जंगल बनद ्कीले ।” 15 ्िरंदर के बदढ भी ओही तरह ्े ्लदह ले के कहल्, “चलऽ, हिनी के ऊपर जदके िैददन के जंगल के अपनद िश िे कर लीं, तदवक उहदँ भी हिनी के दू ्र दे श बनद ्कीले ।” 16 लकडी के बदरे िे ्ोच बेकदर हो गईल, कदहे वक आग आके ओकरद के भस क वदहल्। 17 ्िरंदर के बदढ के बदरे िे ्ोच भी ओइ्ही ं बेितलब हो गइल, कदहे वक बदलू खडद होके ओह लोग के रोक वदहल्। 18 अगर तू अब एह दर नो के बीच नदयी होखब त केकरद के धि् ठहरदिे के कदि शर र करब? भद तू केकरद के दोषी ठहरदिऽ? 19 हि जिदब दे नी, “्चहँ इ दर नो लोग के िन िे िूखनतदपूणन विचदर बद, कदहे वक जिीन जंगल के वदहल गईल बद अिर री ्िरंदर के भी ओकर बदढ के ्हन करे के जगह बद। 20 तब उ हिरद के जिदब दे ले, “तू ्ही िै्लद कईले बदडू, ले वकन तू खर द के भी नदय कदहे नईखी करत? 21 जइ्े जिीन जंगल के आ ्िरंदर ओकरद बदढ के वदहल गइल बद, ओइ्ही ं धरती पर रहे िदलद लोग धरती पर िौजूद चीजन के अलदिद करछ नद ्िझ पदई आ आकदश ्े ऊपर रहे िदलद खदली चीजन के ्िझ ्केलद जिन आकदश के ऊंचदई ्े ऊपर बद। 22 तब हि जिदब वदहनी, “हे पभर, हि तोहरद ्े वनहोरद करत बदनी वक हिरद ्िझ होखे दी ं। 23 कदहे वक हिरद िन िे ऊंच चीजन के बदरे िे उतरकतद नद रहे , बलर क हिनी के पद् ्े रोज गरजरे िदलद लोग के बदरे िे वजजद्द करे के िन रहे , यदनी वक एह ्े इसदएल के गैर-यहदी लोग के वनंदद के रप िे छोड वदहल गइल बद आ जिनद लोग ्े तू पदर कइले बदडू, ओकरद के किनद कदरण ्े वदहल गइल बद अभय रदष्न के ओर ्े आ हिनी के पररखन के विसथद के कदहे नदश कर वदहल गइल बद आ वलखल िदचद के बेकदर हो गइल बद. 24 हिनी के वटडी बन के दर वनयद ्े बदहर वनकल जदनी जद आ हिनी के जीिन अचरज आ डर बद, आ हिनी के दयद पदिे के लदयक नईखी। 25 तब उ अपनद नदि के कद करीहे , जिनद ्े हिनी के बोलदिल गईल बदनी जद? एह ्ब के हि पूछले बदनी। 26 तब ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “तू जेतनद खोजब, ओतने अचरज िे पडब। कदहे वक दर वनयद जली ्े गरजरत बद। 27 आगदिी ्िय िे धि् लोग ्े जिन िददद कइल गइल बद, ओकरद के ्िझ िे नद आ पदई कदहे वक ई ्ं्दर अधिन आ किजोरी ्े भरल बद। 28 ले वकन जइ्े वक वथ के बदरे िे ngs जिनद के तू हिरद ्े पूछत बदडू, हि तोहरद के बतद दे ब; कदहे वक बररदई बोिल गइल बद, बदवकर ओकर विनदश अबहीं नइखे आइल. 29 अगर बोिल के उलद नद होखे आ जहदँ बररदई बोिल जदलद उ जगह नद बीत ्केलद त उ नीिन के बोिल िदलद जगह नद आ ्केलद।

30 कदहे वक आदि के वदल िे शर रए ्े बररद बीज के ददनद बोिल गइल बद आ अब तक ई केतनद अभलय पैदद कइले बद? आ जबले करटनी के ्िय नद आ जदई तबले ई केतनद पैदद करी? 31 अब खर दे िनन करी ं वक बररद बीज के ददनद केतनद बड बररदई के िल दे ले बद। 32 जब कदन कदट वदहल जदई, जिन वक अनवगनत बद, त उ केतनद बड िंवजल भर जदई? 33 तब हि पूछनी वक ई ्ब कइ्े आ कब होई? कदहे हिनी के ्दल कि आ बररद बद? 34 ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “तू परिदतद ्े आगे ित बढऽ, कदहे वक तोहदर जलबदजी बेकदर बद वक ऊ ओकरद ्े ऊपर हो गइल बदडऽ, कदहे वक तू बहत जददे हो गइल बदडू।” 35 कद धि् लोग के आतद भी अपनद कोठरी िे इ ्ब बदत ्े ्िदल नद पूछल् वक हि कब तक एह तरीकद ्े आशद करब? हिनी के इनदि के िशन के िल कब आई? 36 उरीएल िहददू त ओह लोग के जिदब दे के कहले, “जब तोहनी िे बीज के ्ंखद भर जदई, कदहे वक उ दर वनयद के तरदजू िे तौलले बदडे ।” 37 ऊ नदप ्े ्िय नदपले बदडन। आ वगनती के वह्दब ्े ऊ ्िय वगनले बदडन। आ जबले उय िदप पूरद नद हो जदि तबले ऊ ओह लोग के नद वहलदिे लद नद वहलदिे लद. 38 तब हि जिदब दे नी, “हे शद्न करे िदलद पभर, हिनी के ्ब केह अधिन ्े भरल बदनी जद।” 39 हिनी के खदवतर शदयद ई हो ्केलद वक धरती पर रहे िदलद लोग के पदप के चलते धि् लोग के िशन नद भरल होखे । 40 त उ हिरद के जिदब दे ले अिर री कहल् वक, “किनो गभनिती िवहलद के लगे जदके ओकरद ्े पूछ लीं वक जब उ नौ िहीनद पूरद हो जदई, त उनरकर गभन ओकरद भीतर जददद ्िय तक जन के ्िय तक रदखे ।” 41 तब हि कहनी वक नद हे पभर , उ नद कर ्केली। उ हिरद ्े कहले , “कब िे आतद के कोठरी िेहरदर के पेट वनहन होखे लद। 42 जइ्े प्ि करे िदली औरत प्ि के जररत ्े बचे िे जलबदजी करे ले, ओइ्ही ं इ जगह उनके ्ौंपल चीजन के बचदिे िे जली करे ले । 43 शर र ्े दे खऽ, जिन तू दे खल चदहत बदडऽ, ऊ तोहरद के दे खदिल जदई। 44 तब हि जिदब दे नी, “जवद हिरद तोहरद नजर िे अनरगह विलल बद आ ्ंभि हो ्केलद आ अगर हि उवचत होखब त” 45 तब हिरद के दे खद द वक पवहले ्े अवधकद आिे िदलद बद वक आिे िदलद ्े अवधकद बीतल। 46 जिन बीतल बद, हि जदनत बदनी, ले वकन जिन आिे िदलद बद, हि नईखी जदनत। 47 उ हिरद ्े कहल् वक, ददवहनद ओर खडद हो जद, त हि तोहरद के एकर ्िदनतद बतद दे ब। 48 हि खडद होके दे खनी वक हिरद ्ोझद ्े एगो गरि जरत अँग ्े गरजरत रहे आ जब लौ खति हो गइल त हि दे खनी त दे खनी वक धरँआ लसथर हो गइल। 49 एकरद बदद हिरद ्ोझद पदनी के बददल गरजरल अिर री तूिदन के ्ंगे बहत बरखद भईल। आ जब तूिदनी बरखद बीत गइल त बूंद लसथर रह गइल. 50 तब उ हिरद ्े कहल्, “अपनद िन िे विचदर करऽ। जइ्े बरखद बूंद ्े अवधकद होलद आ जइ्े आग धरँआ ्े अवधकद होलद. बदवकर बूंद आ धरँआ पीछे रह जदलद, त जिन िदतद बीतल बद ऊ अवधकद ्े अवधकद हो गइल. 51 तब हि पदथननद कइनी आ कहनी वक हि तब तक वजंदद रह ्कत बदनी? भद ओह वदनन िे कद होई?


52 ऊ हिरद ्े जिदब वदहलन, “जिनद वचनन के तू हिरद ्े पूछत बदडऽ, त हि तोहरद के करछ हद तक बतद ्कत बदनी, ले वकन तोहरद जदन के बदरे िे हि तोहरद के बतदिे खदवतर नद भेजल गइल बदनी। कदहे वक हि एकरद के नइखी जदनत। अध्य 5 के ब् 1 बदवकर जइ्े -जइ्े ्ंकेत आिे िदलद बद, दे खऽ, ऊ वदन आिे िदलद बद वक धरती पर रहे िदलद लोग के बहत ्ंखद िे पकडल जदई आ ्चदई के रदसद वछपल जदई आ दे श विशद् ्े बंजर हो जदई। 2 ले वकन अधिन जिन अब दे खत बदडू भद जिन तू बहत पवहले ्रनले बदडू, ओकरद ्े बढ जदई। 3 जिनद दे श के तू अब जड िदलद दे खत बदडू, ओकरद के अचदनक उजडल दे खदई वदही। 4 ले वकन अगर परिदतद तोहरद के वजए के अनरिवत दे ले त ती्रद तररही के बदद तू दे खब वक रदत िे अचदनक ्ूरज आ वदन िे तीन बेर चं्िद िेर ्े चिक जदई। 5 लकडी ्े खू न वगर जदई आ पतर आपन आिदज वनकदली आ लोग घबरद जदई। 6 उहे रदज करी, जेकरद के उ लोग धरती पर रहे िदलद के इं तजदर नद करीहे अिर री वचरई एक ्ंगे भदग जईहे । 7 ्दोि के ्िरंदर िछरी के बदहर वनकदल के रदत िे हलद िचदई, जिनद के बहत लोग नईखन जदनत, ले वकन ्ब लोग ओकर आिदज ्रनदई। 8 कई जगहद भी उलझन हो जदई आ आग अेर िेर ्े बदहर भेजल जदई आ जंगली जदनिर आपन जगह बदल जइहे आ िदव्क धिन के िेहरदर लोग रद्​् पैदद करीहे । 9 िीठ िे खदरद पदनी विल जदई आ ्ब दोस एक दू ्रद के नदश कर वदहे । तब बरलद लर कद जदई आ ्िझ अपनद गरप कोठरी िे िदप् आ जदई। 10 बहत लोग के खोजल जदई, ले वकन नद विलल, तब धरती पर अधिन आ अ्ंयि बढ जदई। 11 एक दे श भी दू ्रद ्े पूछी वक, कद धिन जिन आदिी के धि् बनदिे लद, उ चल गईल बद hrough तोहरद के? आ कहत होई वक नद। 12 ओही ्िय आदिी के आशद होई, ले वकन करछर ओ नद विली, उ िेहनत करी, ले वकन उनरकर रदह ठीक नद होई। 13 हि तोहरद के अइ्न वचन दे खदिे खदवतर छोड दे ले बदनी। अगर तू िेर ्े पदथननद करब, आ अब वनहन रोिे ब अिर री वदन तक उपिद् करब त अिर री बड बदत ्रनब। 14 तब हि जदग गईनी त हिरद पूरद शरीर िे बहत भय के भदि आ गईल अिर री िन परे शदन हो गईल वक उ बेहोश हो गईल। 15 हिरद ्े बदत करे आइल सगनदूत हिरद के पकड के वदलद्द वदहल् आ हिरद के गोड पर खडद कर वदहल्। 16 दू ्रकद रदत िे जनतद के ्ेनदपवत ्लदवथएल हिरद लगे आके पूछले वक, “तू कहदँ गईल बदडू?” आ तोहदर चेहरद एतनद भदरी कदहे बद? 17 कद तू नइख जदनत वक इसदएल के अपनद बंदी के दे श िे तोहरद लगे ्ौंपल गइल बद? 18 तब उठ के रोटी खदईं आ हिनी के ित छोडीं, जइ्े वक चरिदहद अपनद भेड के कूर भेवडयद के हदथ िे छोड के चल जदलद। 19 तब हि ओकरद ्े कहनी वक हिरद ्े दू र हो जद आ हिरद लगे ित आ जद। हिदर बदत ्रन के उ हिरद ्े चल गईले । 20 हि ्दत वदन तक शोक आ रोित रहनी, जइ्े वक उरीएल सगनदूत हिरद के आजद दे ले रहले । 21 ्दत वदन के बदद हिरद िन के िन िेर ्े बहत दर खी हो गईल।

22 हिरद आतद िे ्िझददरी के आतद ठीक हो गईल अिर री हि िेर ्े परिदतद ्े बदत करे लगनी। 23 ऊ कहलन, “हे पभर जे धरती के हर लकडी आ ओकर ्ब पेडन िे ्े रदज करे िदलद, तू अपनद के एके गो बेल चरनले बदडऽ। 24 पूरद दर वनयद के ्ब दे शन िे ्े तू एगो गडद चरनले बदडू, आ ओकरद ्ब िूलन िे ्े एगो वलली चरनले बदडू। 25 ्िरंदर के ्ब गहरदई िे ्े तू एक नदी भर दे ले बदडू, आ ्ब बनल शहर िे ्े तू अपनद खदवतर व्योन के पवित क दे ले बदडू। 26 जिन भी वचरई पैदद भइल बद ओकरद िे ्े तू तोहरद के एगो कबूतर के नदि रखले बदडू, आ जिन भी ि​िे शी बनल बद ओकरद िे ्े एक भेड के इं तजदि कइले बदडऽ। 27 लोग के भीड के बीच ्े तोहरद के एगो लोग विलल बद, आ एह लोग के जेकरद ्े तू पदर करत रहलू , ओकरद के तू एगो अइ्न वनयि दे ले बदडू जिन ्बके िंजूर बद। 28 अब हे पभर , तू एह एक लोग के बहत लोग के कदहे ्ौंप दे ले बदडू? आ एक जड पर तू दो्रद के तइयदर कइले बदडऽ आ अपनद एके गो लोग के बहते लोग के बीच कदहे वबखरिले बदडऽ? 29 जे लोग तोहदर िददद के उलं घन करत रहे आ तोहदर िदचद पर विशद् नद करत रहे , उ लोग ओकरद के दबद वदहले बद। 30 अगर तू अपनद लोग ्े एतनद निरत करत रहलू तबो ओकरद के अपनद हदथ ्े ्जद दे िे के चदही। 31 जब हि इ बदत कहनी त हिरद लगे जिन सगनदूत हिरद लगे आईल रहले , उ हिरद लगे भेजल गईले । 32 उ हिरद ्े कहल् वक, हिदर बदत ्रन, हि तोहरद के व्खद दे ब। हि जिन बदत कहत बदनी ओकरद के ्रनऽ आ हि तोहरद के अउरी बतदइब। 33 हि कहनी, हे पभर , बोलत रहऽ। तब उ हिरद ्े कहल्, “तू इसदएल खदवतर बहत परे शदन बदडू। 34 हि कहनी, “हे पभर , हि बहत दर ख के बदत कहनी, कदहे वक हि परिदतद के रदसद ्िझे आ उनकर नदय के करछ वहसद खोजे िे िेहनत करत बदनी, हर घंटद हिदर लगदि हिरद के पीडद दे लद। 35 ऊ हिरद ्े कहल्, “तू नद कर ्कऽ।” हि कहनी, कदहे हे पभर ? तब हिदर जनि किनद िे भइल रहे ? भद तब हिदर िदई के पेट हिदर कब कदहे नद रहे वक हि यदकूब के प्ि आ इसदएल के थकदन िदलद िेहनत नद दे ख पिनी? 36 उ हिरद ्े कहले , “अभी तक नद आइल चीजन के वगनती करऽ, वबखरदइल कचरद हिरद के एकटद करऽ, िररझल िूलन के िेर ्े हररयर बनद दऽ। 37 हिरद के जिन जगह बंद बद ओकरद के खोल के हिरद के ओह हिद के ्दिने ले आि जिन ओकरद िे बंद बद, हिरद के आिदज के छवि दे खदईं, तब हि तोहरद के उ बदत बतद दे ब जिनद के जदने के तू िेहनत करत बदडू। 38 हि कहनी, हे शद्न करे िदलद पभर , ई ्ब के जदनत होई, ले वकन जे आदिी के ्ंगे आपन वनिद् नईखे करत? 39 हिदर बदत त हि बेबरवनयदद हईं, त हि ई बदत कइ्े कह ्कीले जिन तू हिरद ्े पूछले बदडू? 40 तब उ हिरद ्े कहल्, “जइ्े तू हि जिन बदत कहले बदनी, ओइ्ही ं तू हिदर िै्लद िे ्े किनो कदि नद कर ्कब, ओ्ही तू हिदर िै्लद के बदरे िे नद पतद लगद पईब, नद आलखर िे उ पेि के बदरे िे जिन हि अपनद लोग ्े िददद कईले बदनी। 41 हि कहनी वक दे ख, हे पभर , तू अंत तक ्ररव्त लोग के नजदीक बदडू, अिर री उ लोग कद करीहे , जिन हिरद ्े पवहले रहे , चदहे हिनी के अभी बदडे , चदहे हिनी के बदद आिे िदलद लोग?


42 उ हिरद ्े कहले , “हि अपनद िै्लद के अंगूठी ्े तरलनद करब, जई्े अंवति के ढील नद होखे लद, ओ्ही पवहलद के तेज नद होखे लद। 43 हि जिदब वदहनी, “कद तू उन के एके बेर िे नद बनद पिनी वक जिन बनल बद, अब बद, आ आिे िदलद बद। तदवक तू जली ्े आपन िै्लद दे खद ्कीले ? 44 तब ऊ हिरद के जिदब वदहलन आ कहलन वक, पदणी बनदिे िदलद ्े बे्ी जली नद हो ्के. नद त दर वनयद एके बेर िे ओह लोग के पकड ्के जिन ओहिे ्ृवजत होखी. 45 हि कहनी, जइ्े तू अपनद ्ेिक ्े कहले बदडू वक तू जे ्बके जीिन दे त बदडू, ओकरद के एके बेर िे वजवनगी दे ले बदडू, जिनद के तू बनिले बदडू अिर री जीि ओकरद के पैदद क दे ले बद अब एके बेर िे िौजूद हो जदईं. 46 उ हिरद ्े कहल्, “किनो औरत के गभन ्े पूछी ं आ ओकरद ्े कहऽ वक अगर तू ्ंतदन पैदद कर रहल बदडू त एक के बदद एक ्ंगे कदहे नद? एह ्े ओकरद ्े पदथननद करी ं वक ऊ द् बचद पैदद कर् एन एके बेर िे। 47 हि कहनी, “उ नद कर ्केली, ले वकन ्िय के दू री पर कदि करे के पडी।” 48 तब उ हिरद ्े कहल्, “हि धरती के गभन अपनद ्िय िे बोिल लोग के दे दे ले बदनी।” 49 जइ्े एगो छोट लइकद बूढ लोग के चीज नद पैदद कर ्केलद, ओइ्ही ं हि अपनद बनदिल दर वनयद के वनपटदरद कइले बदनी। 50 हि पूछनी, “तू अब हिरद के रदसद दे दे ले बदडू त हि तोहरद ्ोझद बदत करब, कदहे वक हिनी के िदई, जेकरद बदरे िे तू हिरद के बतिले बदनी वक उ छोट बदडी, अब उिर के करीब आ गईल बदडी। 51 ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “किनो िेहरदर ्े पूछी ं जिन ्ंतदन पैदद करे ले , त ऊ तोहरद के बतद दी.” 52 ओकरद ्े कहऽ वक तू जेकरद के अब पैदद कइले बदडू, ऊ लोग पवहले के लोग जइ्न कदहे बद, ले वकन कद कि बद? 53 ऊ तोहरद के जिदब दीहे वक जिदनी के तदकत िे पैदद होखे िदलद एके तरह के होलद आ उविर के ्िय िे पैदद होखे िदलद लोग दो्रद तरह के होलद. 54 एह ्े तू इहो ्ोची ं वक तोहनी के कद तोहरद ्े पवहले के लोग ्े कि बद। 55 तोहनी ्े कि तोहनी के बदद आिे िदलद लोग भी उ जीि के रप िे बद जिन अब बूढ होखे लदगल बद आ जिदनी के तदकत ्े गरजर चरकल बद। 56 तब हि कहनी, पभर, हि तोहरद ्े वनहोरद करत बदनी वक अगर हिरद तोहरद पर अनरगह विलल बद त अपनद ्ेिक के दे खद दी,ं जेकरद ददरद तू अपनद पदणी के परिदह करत बदडू।

अध्य 6 के ब् 1 ऊ हिरद ्े कहले, “शर रआत िे जब धरती बनल रहे त दर वनयद के ्ीिद खडद होखे भद कबो हिद बहत रहे । 2 गरजत आ ह्द होखे ्े पवहले , भद कबो जनत के नीिं रखे ्े पवहले । 3 गोरद िूल दे खे ्े पवहले , भद कबो चलल शलय के सथदवपत होखे ्े पवहले , सगनदूतन के अ्ंख भीड एकटद होखे ्े पवहले । 4 यद कबो आकदश के नदप के नदि नद होखे ्े पवहले हिद के ऊंचदई ऊपर उठदिल जदत रहे , यद कबो व्योन के वचिनी गरि हो गईल रहे ।

5 पवहले के ्दलन के खोजल गइल, भद अब पदप करे िदलद लोग के आविषदर के खोजल गइल, ओकरद ्े पवहले वक ऊ लोग के िोहर लगदिल गइल रहे जे लोग विशद् के खजदनद के रप िे बटोरले बद। 6 तब हि ई ्ब बदत पर विचदर कइनी आ ई ्ब अकेले हिरद ्े बनल बद आ केह दो्रद के िदधि ्े नद, हिरद ्े भी ई ्ब के अंत होई आ केह दो्रद के ददरद नद। 7 तब हि पूछनी वक ्िय के अलगदि कद होई? भद पवहलद के अंत आ ओकरद बदद के शर रआत कब होई? 8 उ हिरद ्े कहले , “अबदहि ्े ले के इ्हदक तक जब यदकूब अिर री ए्दि उनरकद ्े पैदद भईले , त यदकूब के हदथ पवहले ए्दि के एडी के पकडले रहे । 9 कदहे वक ए्दि दर वनयद के अंत ह आ यदकूब दर वनयद के शर रआत ह। 10 आदिी के हदथ एडी आ हदथ के बीच िे बद, दू ्र ्िदल, एस्, तू ित पूछऽ। 11 तब हि जिदब दे नी, “हे शद्न करे िदलद पभर , अगर हिरद पर तोहरद अनरगह विलल बद। 12 हि तोहरद ्े वनहोरद करत बदनी वक, अपनद ्ेिक के आपन वनशदनी के अंत दे खदईं, जिनद ्े तू हिरद के आलखरी रदत िे भदग वदहनी। 13 उ हिरद ्े कहल्, “अपनद गोड पर खडद होके एगो तेज आिदज ्रनऽ।” 14 आ ई एगो बडहन गवत जइ्न होई। ले वकन जहदँ तू खडद बदडू, उ जगह नद वहलल जदई। 15 एही ्े जब ई बदत कहत बद त डे रद ित, कदहे वक िचन अंत के ह आ धरती के नीिं ्िझल गइल बद। 16 आ कदहे? कदहे वक एह बदतन के बदत कदँ प जदलद आ वहल जदलद, कदहे वक ऊ जदनत बद वक एह बदतन के अंत बदले के पडी. 17 जब हि ई बदत ्रननी त हि अपनद गोड पर खडद होके ्रननी आ दे खनी वक एगो आिदज बोलत रहे आ ओकर आिदज बहत पदनी के आिदज जइ्न रहे । 18 ऊ कहल्, “दे खऽ, ऊ वदन आित बद वक हि नजदीक आके धरती पर रहे िदलद लोग के िरलदकदत करे लगब। 19 आ उ लोग ्े पूछतदछ करे लदगी वक उ लोग कद हिे जे अपनद अधिन ्े अनदय के चोट पहं चिले बद आ व्योन के कब कब पूरद होई। 20 जब दर वनयद, जिन खति होखे लदगी, खति हो जदई, त हि ई वनशदन दे खद दे ब। 21 एक ्दल के लइकद अपनद आिदज ्े बोवलहे , गभनिती िेहरदर तीन चदर िहीनद के अ्िय ्ंतदन पैदद करीहे आ ऊ वजंदद हो जइहे आ वजंदद हो जइहे . 22 अचदनक बोिल जगह वबनद बोिल लउकी, भरल भंडदर अचदनक खदली हो जदई। 23 तररही के आिदज ्रन के हर आदिी अचदनक डे रद जदई। 24 ओह घरी दोस दर शन वनहन एक दू ्रद ्े लवडहे अिर री धरती ओकरद िे रहे िदलद लोग के ्ंगे डर ्े खडद हो जदई, िवदरद के झरनद लसथर हो जदई अिर री तीन घंटद िे नद भदगी। 25 जे भी हि तोहरद के बतदिल ्ब बदत ्े बच जदई आ हिरद उददर आ तोहरद दर वनयद के अंत दे ख पदई। 26 जेकरद के गहण कइल गइल बद, ऊ लोग एकरद के दे ख ली, जे अपनद जनि ्े िौत के सदद नद चखले होई, आ ओवहजद के लोग के वदल बदल के दो्रद अथन िे बदल जदई। 27 कदहे वक बररदई के दू र हो जदई आ धोखद के बरझदिल जदई। 28 रहल बदत विशद् के त उ िलत-िूलत होई, भषदचदर पर विजय पदई अिर री ्चदई जिन एतनद वदन ्े वबनद िल के रहल बद, ओकर घोषणद होई।


29 आ जब उ हिरद ्े बदत कईले , दे खऽ, हि धीरे -धीरे ओकरद ओर दे खत रहनी जेकरद ्दिने हि खडद रहनी। 30 उ हिरद ्े इ बदत कहले । हि तोहरद के आिे िदली रदत के ्िय दे खदिे आइल बदनी। 31 अगर तू अउरी पदथननद करब आ ्दत वदन के उपिद् करब त हि तोहरद के वदन िे जिन बदत ्रनले बदनी ओकरद ्े बडहन बदत बतदइब। 32 कदहे वक तोहदर आिदज परिदतद के ्दिने ्रनल जदलद, कदहे वक परदकिी तोहदर धि् विहदर दे खले बद, तोहदर पवतवतद भी दे खले बद, जिन तोहरद जिदनी ्े ही रहल बद। 33 एही ्े उ हिरद के भेजले बदडे वक हि तोहरद के इ ्ब बदत बतद ्कीले अिर री तोहरद ्े कहब वक, '्दं तनद वदही अिर री ित डे रदई।' 34 आउर बीतल ्िय के ्दथ जली ित करी ं आ बेकदर बदत ्ोचे िे ित जदईं वक बदद के ्िय ्े जली ित करी।ं 35 एकरद बदद हि िेर ्े रोित-रोित ्दत वदन के उपिद् कईनी तदवक उ तीन ्पदह के पूरद कर ्की। 36 आठिीं रदत िे हिदर िन िेर ्े परे शदन हो गइल आ हि परिदतद के ्दिने बदत करे लगनी। 37 कदहे वक हिरद आतद िे बहत आग लदग गईल रहे अिर री हिदर आतद ्ंकट िे रहे । 38 हि कहनी, हे पभर , तू ्ृवष के शर रआत ्े ही पवहलद वदन ्े कहत रहलू । आकदश आ धरती बनल होखे ; आ तोहदर िचन एगो व्द कदि रहे । 39 तब आतद रहे आ चदरो ओर अनदर आ चरपी रहे । आदिी के आिदज के आिदज अभी तक नद बनल रहे । 40 तब तू आजद दे हनी वक तोहदर खजदनद ्े एगो ्रंदर रोशनी वनकले तदवक तोहदर कदि पकट हो ्के| 41 दू ्रद वदन तू आकदश के आतद बनिनी आ ओकरद के अलग करे आ पदनी के बीच िे बंटिदरद करे के आदे श दे नी तदवक एक भदग ऊपर चढ ्के आ दू ्रद भदग नीचे रह ्के। 42 ती्रद वदन तू आजद दे हनी वक धरती के ्दतिदँ वहसद िे पदनी बटोरल जदि, छह भदग तू ्रखद के रखले बदडू, एही ्े वक एह िे ्े करछ लोग भगिदन के रोपले आ जोत िे तोहदर ्ेिद करे । 43 कदहे वक जइ्हीं तोहदर िचन वनकलल, कदि पूरद हो गइल। 44 कदहे वक तररते बडहन आ अ्ंख िल आ सदद खदवतर बहते आ गोतदखोर ्रख, अपररितननीय रं ग के िूल आ अद् भरत गंध के गंध आइल आ ती्रद वदन ई कदि भइल। 45 चउथद वदन तू आजद दे ले रहलू वक ्ूरज चिके, चदँ द ओकरद के रोशनी दे िे आ तदरद कि िे रहे । 46 उ लोग के आदिी के ्ेिद करे के वजमद वदहल् जिन वक होखे िदलद रहे । 47 पदं चिद वदन तू ्दतिदँ भदग ्े कहनी वक जहदँ पदनी बटोरल बद वक ऊ जीि-जंतर, वचरई आ िछरी पैदद करी। 48 कदहे वक गूंगद पदनी आ वबनद जीिन के परिेशर के आजद ्े जीि-जनर पैदद कइल् तदवक ्ब लोग तोहदर अचरज के सरवत कर ्के। 49 तब तू दू गो जीि के वनयरलय कइनी, एगो के हनोक आ दू ्रद के ले वियथन कहलऽ। 50 एक के दो्रद ्े अलगद कर वदहल्, कदहे वक ्दतिदँ भदग, यदनी जहदँ पदनी एकटद भइल रहे , उहदँ दर नर के नद पकडल जद ्कत रहे । 51 तू हनोक के एक वहसद दे ले रहलू जिन ती्रद वदन ्ूख गईल रहे तदवक उ ओही वहसद िे रह्, जिनद िे हजदर पहदडी बद। 52 ले वकन ले वियथन के ्दतिदँ वहसद दे हनी, जिन वक नि बद। आ जेकरद के तू चदहत बदडू, ओकरद के खदए खदवतर रखले बदडू। 53 छठिदँ वदन तू धरती के आजद दे हनी वक ऊ तोहरद ्ोझद जदनिर, पशर आ रे गत जीि पैदद करे ।

54 एह लोग के बदद आदि भी, जेकरद के तू अपनद ्ब ्ृवष के िदवलक बनिले बदडू, हिनी के ्ब केह उनरकद ्े आऊ उ लोग भी जेकरद के तू चरनले बदडू। 55 हे पभर , हि तोहरद ्दिने ई ्ब बदत कहले बदनी कदहे वक तू हिनी खदवतर दर वनयद के बनिले बदडू 56 आदि ्े वनकलल बदकी लोग के बदरे िे तू कहले बदडू वक उ लोग थूक वनहन करछूओ नईखे, अिर री ओ लोग के भरिदर के तरलनद बतनन ्े वगरल बूंद ्े कईले बदनी। 57 अब हे पभर, दे खऽ, ई गैर-यहदी लोग, जिन कबो करछर ओ नद िदनल जदलद, हिनी के िदवलक बने लदगल बद आ हिनी के खदए लदगल बद। 58 ले वकन हिनी के तोहदर लोग, जेकरद के तू आपन जेठ बचद, आपन एकलौतद आ आपन गंभीर पेिी कहले बदडू, उ लोग के हदथ िे ्ौंपल गईल बदनी। 59 अगर अब दर वनयद हिनी के खदवतर बनल बद त हिनी के दर वनयद के ्ंगे विरद्त कदहे नद विलत बद? ई कब ले वटकल रही? अध्य 7 के ब् 1 जब हि इ बदत कहनी त उ सगनदूत हिरद लगे भेजल गईल, जिन वक हिरद लगे पवहले के रदत िे भेजल गईल रहे । 2 उ हिरद ्े कहल्, “एस्द, उठ के उ बदत ्रनऽ जिन हि तोहरद के बतदिे आइल बदनी।” 3 हि कहनी, हे भगिदन, बोलत रहऽ। तब उ हिरद ्े कहल्, “्िर् एगो चौडद जगह पर वटकल बद, तदवक उ गवहरदह आ बड होखे ।” 4 ले वकन के् के दे खल जदि त पिे श ददर ्ंकरी रहे आ नदी वनहन रहे । 5 तब के ्िर्र िे जदके ओकरद के दे ख ्केलद आ ओकरद पर रदज कर ्केलद? अगर ऊ ्ंकरी ्े नद गरजरत त चौडद िे कइ्े आ ्कत रहे ? 6 एगो अउरी बदत भी बद। एगो शहर बनल बद आ चौडद खे त पर बनल बद आ ऊ ्ब बवढयद चीजन ्े भरल बद। 7 एकर पिे श ददर ्ंकरी बद आ वगरे खदवतर खतरनदक जगह पर रखल बद, जइ्े ददवहनद ओर आग आ बदईं ओर गवहरद पदनी होखे । 8 आ दर नर के बीच एके गो रदसद, उहो आग आ पदनी के बीच, एतनद छोट वक ओ ने आदिी एके बेर िे उहदँ जद। 9 अगर अब ई शहर किनो आदिी के विरद्त के रप िे वदहल गइल होखे , अगर ऊ ओकरद ्ोझद रदखल खतरद ्े कबो नद गरजर पदई त ओकरद ई उ्रदवधकदर कइ्े विली? 10 हि कहनी, “हे पभर।” तब उ हिरद ्े कहल्, “इसदएल के वहसद भी ओइ्ने बद।” 11 कदहे वक हि ओह लोग खदवतर दर वनयद के बनिले बदनी आ जब आदि हिदर वनयि के उलं घन कइलन त अब तय भइल वक अब पूरद हो गइल बद. 12 तब एह ्ं्दर के पिे श ददर ्ंकरी हो गइल, दर ख आ कष ्े भरल, उ बहत कि आ बररद, खतरद ्े भरल, आ बहत कषददयक बद। 13 कदहे वक पररदन दर वनयद के पिे श ददर चौडद आ पकद रहे आ अिर िल दे त रहे । 14 अगर वजए िदलद लोग एह ्ंकट आ वथन चीजन िे घर्े खदवतर िेहनत नद करे त उ लोग के कबो नद पद ्के जिन वक उ लोग खदवतर रखल बद। 15 अब तू कदहे परे शदन हो रहल बदडू, कदहे वक तू एगो नदशिदन आदिी हउअ? आ तू कदहे वहलत बदडू, जबवक तू त नशर बदडू? 16 तू अपनद िन िे ितनिदन बदत के बजदय आिे िदलद बदत के कदहे नद ्ोचले बदडू?


17 तब हि जिदब दे नी, “हे शद्न करे िदलद पभर , तू अपनद वनयि िे तय कइले बदडऽ वक धि् लोग के ई ्ब के उ्रदवधकदर विले , ले वकन अभय लोग के नदश होखे के चदहीं।” 18 विर भी धि् लोग के कष उठदिे के पडी आ उ लोग के उमीद बद वक उ लोग बररदई के कष उठद ले ले बद, ले वकन उ लोग चौडदई के नद दे ख पदई। 19 उ हिरद ्े कहले । भगिदन ्े ऊपर किनो नदयदधीश नइखे आ परि ्े ऊपर के ्िझ िदलद केह नइखे । 20 कदहे वक एह जीिन िे बहत लोग नदश हो जदलद, कदहे वक उ लोग परिेशर के विसथद के तरच ्िझेलद। 21 कदहे वक परिेशर आइल लोग के कडद आजद दे ले बदडन वक उ लोग जइ्े आइल रहले ओइ्ही ं वजए खदवतर कद करे के चदहीं आ ्जद ्े बचे खदवतर कद पदलन करे के चदहीं। 22 विर भी उ लोग उनकर आजद नद िनले । ले वकन ओकरद लखलदि बोलल आ बेकदर बदत के कलनद कइल्। 23 आ अपनद दर ष कदि ्े धोखद दे त रहले । आ परि ऊँच के बदरे िे कहलन वक ऊ नइखे ; उ आपन रदसद नद जदनत रहले । 24 ले वकन उ लोग उनकर विसथद के तरच ्िझले बदडे अिर री उनरकर िदचद के नकदर दे ले बदडे । उनकर वनयि िे उ लोग ि​िदददर नद रहलन आ उनकर कदि नद कइले बदडन। 25 एही ्े हे ए्द्, कदहे वक खदली खदली चीज ह आ भरल खदवतर भरल चीज ह। 26 दे खऽ, ऊ ्िय आई जब हि जिन टोकन तोहरद के बतिले बदनी ऊ पूरद हो जदई आ दर लवहन पकट हो जदई आ ऊ ्दिने आित दे खल जदई जिन अब धरती ्े हट गइल बद. 27 जे भी कहल बररदई ्े िरय हो जदई, उ हिदर अचरज दे खदई। 28 कदहे वक हिदर बेटद यीशर ओकरद ्दथे रहे िदलद लोग के ्दथे पगट हो जइहे आ चदर ्ौ ्दल के भीतर जे बचे िदलद लोग खर श हो जइहे । 29 एह ्दलन के बदद हिदर बेटद ि्ीह आ जीिन िदलद ्ब लोग िर जइहे । 30 आ दर वनयद ्दत वदन तक पररदन चरपी िे बदल जदई, जइ्े वक पवहले के नदय िे भइल रहे , तदवक केह नद रह पदई। 31 ्दत वदन के बदद जिन दर वनयद अभी तक नद जदगल बद, उ वजंदद हो जदई अिर री जिन दर वनयद खरदब हो गईल बद, उ िर जदई 32 धरती अपनद िे ्रतल लोग के िेर ्े बनद वदही, आ चरपी िे रहे िदलद लोग के धूल भी बहदल करी आ गरप जगह ओह आतद के बचदई जिन ओकरद के ्ौंपल गइल रहे । 33 आउर परिदतद नदय के आ्न पर पकट हो जइहे आ दर ख खति हो जदई आ लिहर ्हनशीलतद के अंत हो जदई। 34 ले वकन खदली नदय ही रह जदई, ्चदई खडद रही आ विशद् िजबूत हो जदई। 35 ओकरद बदद कदि होई, आ इनदि दे खदिल जदई, आ नीिन कदि जोरददर होई, आ बररद कदि के किनो वनयि नद होई। 36 तब हि कहनी वक, “अबदहि पवहले ्दोवियन खदवतर पदथननद कइले रहले आ िू्द जंगल िे पदप करे िदलद पररखन खदवतर पदथननद कइले रहले । 37 आकदन के ्िय िे इसदएल खदवतर यीशर उनकरद बदद। 38 शिूएल आ ददऊद के विनदश खदवतर आ ्रलैिदन के पवित सथदन िे आिे िदलद लोग खदवतर। 39 बरखद भइल लोग खदवतर हे वलयद्। आ िरअल लोग खदवतर, तदवक उ वजंदद होखे । 40 ्नहे रीब के ्िय िे इजवकयद् के लोग खदवतर आ बहत लोग के बहत लोग खदवतर।

41 अब भी ओइ्ही ं जब नदश बढल बद आ दर षतद बढ गइल बद आ धि् लोग अभयन खदवतर पदथननद करत बद, अब भी अइ्न कदहे नद होई? 42 उ हिरद के जिदब वदहलन, “ई ितनिदन जीिन उ अंत नद ह जहदँ बहत िवहिद बनल रहे लद। एही ्े उ लोग किजोर लोग खदवतर पदथननद कईले बदडे । 43 ले वकन पलय के वदन एह ्िय के अंत होई, आ आिे िदलद अिरतद के शर रआत होई, जिनद िे विनदश बीत चरकल बद। 44 ्ंयि के अंत हो गइल बद, बेि​िदई कट गइल बद, धिन बढ गइल बद आ ्चदई उग गइल बद। 45 तब केह नदश होखे िदलद के बचदिे िे ्​्ि नद होई आ नद ही जीत पदिे िदलद के दबदिे िे ्​्ि नद होई। 46 तब हि जिदब दे नी, “ई हिदर पवहलद आ आलखरी बदत ह वक धरती आदि के नद वदहल रवहत, नद त जब धरती ओकरद के वदहल गईल त ओकरद के पदप करे ्े रोक वदहल्। 47 कदहे वक अब एह ्िय िे आदिी के कतनद िदयदद बद वक ऊ लोग भदरी पडदि िे वजयत बद आ िरलद के बदद ्जद के इं तजदर करत बद? 48 हे आदि, तू कद कइले बदडऽ? कदहे वक भले तू पदप कइले बदडू, ले वकन तू अकेले नद वगरल बदडू, बलर क हिनी के ्ब जे तोहरद ्े आइल बदनी जद। 49 अगर हिनी के अिर ्िय के िददद कइल गइल बद त हिनी के कद िदयदद होई s हिनी के उ कदि कइले बदनी जद जिन िौत ले आिे लद? 50 आ हिनी के अनन आशद के िददद कइल गइल बद, जबवक हिनी के बहत दर ष होखलद के नदते बेकदर हो गइल बदनी जद? 51 आ वक हिनी खदवतर सदव आ ्ररव्त वनिद् के जगह रखल गइल बद, जबवक हिनी के दर ष तरीकद ्े वजयले बदनी जद? 52 आऊ परि परिदतद के िवहिद ओह लोग के बचदिे खदवतर रखल जदि जे ्दिधदन जीिन जीयत बद, जबवक हिनी के ्ब्े दर ष रदसद पर चलल बदनी जद? 53 आ एगो अइ्न जनत दे खदिल जदि जिनद के िल हिेशद खदवतर बनल रहे लद, जिनद िे ्रर्द आ दिदई बद, कदहे वक हिनी के ओकरद िे नद घर्ब जद? 54 (कदहे वक हिनी के अवपय जगहन पर चलल बदनी जद।) 55 आ परहे ज करे िदलद लोग के चेहरद तदरद ्े ऊपर चिकी जबवक हिनी के चेहरद अनदर ्े भी कररयद हो जदई? 56 जबले हिनी के वजयत रहनी जद आ अधिन करत रहनी जद, तब तक हिनी के इ नद ्ोचनी जद वक हिनी के िरलद के बदद एकरद खदवतर कष उठदिे के शर र हो जदई। 57 तब ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “जिन धरती पर जनिल आदिी लडी, ओकर हदलत इहे बद। 58 वक अगर उ हदर गईल त उ तू कहलद के िरतदवबक कष उठदई, ले वकन जदी ओकरद जीत विल गईल त उनरकद उ बदत विल जदई जिन हि कहतदनी। 59 इहे जीिन ह जिनद ्े िू्द वजंदद रहते लोग ्े कहले रहले वक, “अपनद जीिन के चरन के वजंदद रहब।” 60 तबवहयो उ लोग उनकरद पर विशद् नद कइल, नद उनकर बदद के भविषियद, नद हि जे उनकरद ्े बदत कइले बदनी। 61 एह ्े वक ओह लोग के विनदश िे अतनद भदरीपन नद होखे , जिन वक उददर खदवतर िनदिे िदलद लोग पर खर शी होई। 62 हि जिदब दे नी, “हे पभर , हि जदनत बदनी वक परिदतद के दयदलर कहल जदलद, कदहे वक ऊ ओह लोग पर दयद करे लद जे अभी तक दर वनयद िे नइखे आइल। 63 आउर जे उनकर विसथद के ओर िरडत बद, उ लोग पर भी। 64 ऊ धैयन रदखे लद आ पदप करे िदलद लोग के अपनद पदणी के रप िे लं बद ्िय तक ्हन करे लद।


65 आ वक ऊ भरपूर बद, कदहे वक ऊ जहदँ जररत बद, उहदँ दे बे खदवतर तइयदर बद. 66 आ ई वक ऊ बहते दयदलर हउिे कदहे वक ऊ ओह लोग पर अवधकद ्े अवधकद दयद करत बद जे िौजूद बद, जिन पवहले के बद, आ आिे िदलद लोग पर भी. 67 अगर उ आपन दयद नद बढदई त दर वनयद ओह लोग के ्दथे नद रवहत जे ओकरद िे िदरर् बद। 68 आ ऊ िदि कर दे लद। कदहे वक अगर उ अपनद भलदई के चलते अयी्न नद कईले वक अधिन के कदि करे िदलद लोग ओकरद ्े कि होखे , त आदिी के द् हजदरिदं वहसद वजंदद नद रह पदई। 69 आऊ नदयदधीश होके अगर उ अपनद िचन ्े ठीक होखे िदलद लोग के िदि नद कर् आ वि​िदद के भीड के दू र नद कर्। 70 अ्ंख भीड िे शदयद बहत कि बचल होखे के चदहीं। अध्य 8 के ब् 1 ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “परिेशिर एह दर वनयद के बहत लोग खदवतर बनिले बदडन, ले वकन आिे िदलद दर वनयद के बहत कि खदवतर बनिले बदडन।” 2 हि तोहरद के एगो उपिद बतदइब, एस्​्। जइ्े जब तू धरती ्े पूछब त ऊ तोहरद ्े कह दी वक ऊ बहते ्दँ चद दे लद जिनद ्े िदटी के बतनन बनदिल जदलद, बदवकर ्ोनद के धूल कि होलद, एही तरह ्े एह ितनिदन दर वनयद के चदल बद। 3 बहत लोग के रचनद भइल बद, ले वकन बहत कि लोग के उददर होई। 4 हि जिदब दे नी, “हे हिदर पदण, ्िझ के वनगल जद आ बरलद के खद जद।” 5 कदहे वक तू कदन दे बे के तइयदर हो गइल बदडऽ आ भविषिदणी करे के तइयदर बदडऽ, कदहे वक तोहरद लगे अब खदली वजए के जगह नइखे । 6 हे पभर, अगर तू अपनद ्ेिक के कष नद दे ब वक हिनी के तोहरद ्दिने पदथननद कर ्कीले , आ तू हिनी के वदल के बीज, आ ्ंसृवत के हिनी के ्िझ िे दे ब, तदवक ओकर िल विले । जे आदिी के जगह ले बे िदलद बद, ऊ हर आदिी कइ्े वजयत बद? 7 कदहे वक तू अकेले बदडू, आ हिनी के ्ब केह तोहरद हदथ ्े बनल बद, जइ्े तू कहले बदडू। 8 जब िदई के गभन िे शरीर के वनिदन ण हो जदलद आ तू ओकरद के अंग दे ब त तोहदर पदणी आग आ पदनी िे ्ररव्त हो जदलद आ तोहदर कदरीगरी नौ िहीनद तक तोहदर पदणी के ्हन करे लद जिन ओकरद िे बनल बद। 9 ले वकन जिन रखले बद आ रखले बद, उ दर नों ्ररव्त रही, आ जब ्िय आई त ्ंरव्त गभन अपनद िे बढल चीज के ्ौंप दे ले। 10 कदहे वक तू शरीर के अंग ्े, िदने वक सन ्े दू ध दे िे के आजद दे ले बदडू, जिन सन के िल ह। 11 जब तक तू ओकरद के अपनद दयद िे नद डदलब, तब तक जिन चीज बनल बद, ओकरद के करछ ्िय तक पोषण विले । 12 तूँ एकरद के अपनद धदविनकतद के ्दथे पो्ले बदडऽ आ ओकरद के अपनद विसथद िे पो्ले बदडऽ आ अपनद नदय ्े ओकरद के ्रधदरले बदडऽ। 13 तू ओकरद के आपन पदणी के रप िे िरबऽ आ ओकरद के आपन कदि के रप िे वजंदद करबऽ। 14 एह ्े अगर तू ओकरद के नष कर दे ब जिन एतनद िेहनत ्े बनल रहे त तोहरद आजद ्े वनयरय कइल आ्दन कदि बद तदवक जिन चीज बनल बद ओकरद के बचदिल जद ्के। 15 अब हे पभर, हि बदत करब। ्दिदन रप ्े आदिी के छूिे िदलद, तू ्ब्े बवढयद जदनत बदडू; ले वकन तोहरद लोग के छूित बदनी, जेकरद खदवतर हि दर खी बदनी।

16 आ तोहदर विरद्त खदवतर, जेकरद खदवतर हि शोक िनदित बदनी। आ इसदएल खदवतर, जेकरद खदवतर हि भदरी बदनी। आ यदकूब खदवतर, जेकरद खदवतर हि परे शदन बदनी। 17 एही ्े हि अपनद खदवतर आ ओह लोग खदवतर तोहरद ्दिने पदथननद करे लगब, कदहे वक हि ओह दे श िे रहे िदलद हिनी के वगरल दे खत बदनी। 18 ले वकन हि ्रनले बदनी वक आिे िदलद नदयदधीश के तेज गवत। 19 एह ्े हिदर आिदज ्रनी ं आ हिदर बदत ्िझीं आ हि तोहरद ्दिने बोलब। एस्द् के ऊपर उठदिे ्े पवहले के बदत के शर रआत इहे ह, आ हि s ्हदयतद, 20 हे पभर , तू अनन कदल िे रहे िदलद जे ऊपर ्े आकदश आ हिद िे चीजन के दे खत बदडऽ। 21 जेकर व्ंहद्न अिूल बद। जेकर िवहिद के ्िझ िे नद आ ्के। जेकरद ्दिने सगनदूतन के ्ेनद कदँ पत खडद बद। 22 जेकर ्ेिद हिद आ आग िे होलद। जेकर बदत ्ही बद, आ कहदित वनरं तर बद; जेकर आजद िजबूत बद आ वनयि भयदिह बद। 23 जेकर नजर गवहरदई के ्रखद दे लद आ आकोश पहदड के वपघलद दे लद। जिनद के ्चदई गिदह बद। 24 हे अपनद ्ेिक के पदथननद ्रनऽ आ अपनद ्ृवष के वनहोरद पर ्रनऽ। 25 जबले हि वजंदद रहब तबले हि बोलब आ जबले हिरद लगे ्िझ रही तबले हि जिदब दे ब। 26 हे अपनद लोग के पदप के ित दे खऽ। ले वकन जे ्चदई ्े तोहदर ्ेिद करे ले, ओकरद प। 27 गैर-यहदी लोग के दर ष आविषदर के धदन ित दी ं, बलर क ओह लोग के इचद के धदन रदखी ं जे कष िे तोहदर गिदही के पदलन करे लद। 28 जे लोग तोहरद ्दिने नकली चलल बद, ओकरद बदरे िे ित ्ोची, ले वकन उ लोग के यदद रदखी, जिन तोहदर इचद के िरतदवबक तोहदर डर के जदन गईल बद। 29 जदनिर वनयर वजए िदलद लोग के नदश कइल तोहदर इचद नद होखे । ले वकन जे तोहदर विसथद के ्दि-्दि व्खिले बदडे , ओकरद के दे खे के चदही। 30 जे जदनिरन ्े भी बररद िदनल जदलद, ओकरद पर तू नद आकोश ित करऽ। ले वकन जे लोग हिेशद तोहरद धदविनकतद आ िवहिद पर भरो्द रदखे लद, ओकरद ्े पेि करी।ं 31 हिनी के आ हिनी के बदप-दददद अइ्न बेिदरी ्े तस हो जदनी जद, ले वकन हिनी के पदपी लोग के चलते तू दयदलर कहल जदईब। 32 अगर तोहरद हिनी पर दयद करे के इचद बद त तू हिनी के दयदलर कहल जदई, जिन वक धिन के किनो कदि नइखे । 33 कदहे वक धि् लोग जेकरद लगे बहत अचद कदि तोहरद लगे रखल बद, उ लोग के आपन कदि ्े इनदि विली। 34 कदहे वक आदिी कद ह वक तू ओकरद ्े नदरदज हो जद? भद नदशिदन पीढी कद होलद वक तू ओकरद पर अतनद कडरआ होखऽ? 35 कदहे वक ्दँ च िे पैदद भइल लोग िे केह नइखे , बलर क ऊ बररदई कइले बद। आ विशदव्यन िे केह अइ्न नइखे जे गलत कदि नद कइले होखे . 36 हे पभर, अगर तू ओह लोग पर दयद करब, जेकरद नीिन कदि के भरो्द नइखे त एही ्े तोहदर धदविनकतद आ तोहदर भलदई के बदत हो जदई। 37 तब ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “तू करछ बदत ्ही कहले बदडऽ आ तोहरद बदत के िरतदवबक होई।” 38 हि ओह लोग के सभदि पर नद ्ोचब जे िौत ्े पवहले , नदय ्े पवहले आ विनदश ्े पवहले पदप कइले बद। 39 ले वकन हि धि् लोग के सभदि पर आनल्त होखब आ ओह लोग के तीथनयदतद, उददर आ इनदि के भी यदद करब जिन ओह लोग के विली।


40 जइ्े हि अब कहले बदनी, ओइ्ही ं होई। 41 जइ्े वक्दन जिीन पर ढे र बीज बोिे लद आ ढे र पेड लगदिे लद आ तबवहयो जिन चीज अपनद ्िय िे बवढयद ्े बोिल जदलद ऊ नद उठे लद आ नद ही ्ब रोपल जड जिदिे लद, ओइ्ही ं बोिल िदलद के भी होलद दर वनयद िे होखे के चदहीं; उ ्ब के उददर नद होई। 42 तब हि जिदब दे नी, “अगर हिरद कृपद विलल बद त हि बोले दी।ं ” 43 जइ्े वक्दन के बीज नदश हो जदलद, अगर उ नद उठल आ ठीक ्िय पर तोहदर बरखद नद विलल त उ नदश हो जदलद। भद अगर बहते बरखद होके ओकरद के खरदब कर दे ि त. 44 ओइ्ही ं आदिी भी नदश हो जदलद जिन तोहरद हदथ ्े बनल बद आ ओकरद के तोहदर पवतरप कहल जदलद, कदहे वक तू ओकरद जइ्न बदडू, जेकरद खदवतर तू ्ब करछ बनिले बदडू आ ओकरद के वक्दन के बीज ्े तरलनद कइले बदडू। 45 हिनी पर गरसद ित करऽ बलर क अपनद लोग के बखऽ आ अपनद विरद्त पर दयद करऽ कदहे वक तू अपनद ्ृवष पर दयदलर हउअ। 46 तब ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “उपलसथत चीज ितनिदन खदवतर बद आ आिे िदलद लोग खदवतर आिे िदलद चीज बद।” 47 कदहे वक तू हिरद ्े जददे हिरद पदणी ्े पदर करे िे बहत कि आ गईल बदडू, ले वकन हि बहत बेर तोहरद अिर री ओकरद नजदीक आईल बदनी, ले वकन अधि् के कबो नद। 48 एही ्े तू परिदतद के ्दिने अचंवभत हो रहल बदडू। 49 एह ्े वक तू अपनद के अपनद के नम बनद ले ले बदडू, आउर अपनद के धि् लोग के बीच बहत िवहिद पदिे के लदयक नद िदनले बदडू। 50 कदहे वक बदद के ्िय िे दर वनयद िे रहे िदलद लोग के बहत बड दर ख होई, कदहे वक उ लोग बहत घिंड ्े चलल बदडे । 51 ले वकन तू अपनद खदवतर ्िझीं आ तोहरद जइ्न लोग के िवहिद के तलदश करी ं। 52 कदहे वक तोहनी खदवतर जनत खर लल बद, जीिन के पेड लगदिल गइल बद, आिे िदलद ्िय तइयदर हो गइल बद, भरपूर चीज तइयदर हो गइल बद, शहर बनल बद आ आरदि के अनरिवत बद, हँ, पूरद भलदई आ बरलद। 53 तोहनी ्े बररदई के जड िरहर लगद वदहल गइल बद, किजोरी आ पतई तोहरद ्े वछपल बद, आ भषदचदर के भरलदए खदवतर नरक िे भदग गइल बद। 54 दर ख बीत जदलद आ अंत िे अिरतद के खजदनद दे खदिल जदलद। 55 एह ्े नदश होखे िदलद लोग के भीड के बदरे िे अब किनो ्िदल ित पूछी ं। 56 जब उ लोग आजददी पद ले ले रहले त परि ऊँच के तरच ्िझत रहले , उनरकर विसथद के वतरसदर करत रहले अिर री उनरकर रदसद छोड दे ले। 57 उ लोग ओकर धि् लोग के रौंदले बद। 58 उ लोग िन िे कहलन वक भगिदन नइखन। हँ , आ ई जदनत वक ओह लोग के िरहीं के पडी. 59 जइ्े वक पवहले के बदत तोहनी के गहण करी, ओइ्ही ं ओह लोग खदवतर पद् आ पीडद तइयदर हो गइल बद, कदहे वक उनकर इचद नद रहे वक आदिी के अविनदशी होखे । 60 ले वकन जे रचल गइल बद, ओकरद लगे बद जे ओह लोग के बनिले बद ओकर नदि अशर द कर वदहलन आ जे ओह लोग खदवतर जीिन तइयदर कइले बद ओकर शर कगरजदर नद कइलन. 61 आ एही ्े हिदर िै्लद अब नजदीक आ गईल बद। 62 ई बदत हि ्ब आदिी के नद, तोहरद आ तोहरद जइ्न करछ लोग के बतद दे ले बदनी। तब हि जिदब दे नी आ कहनी वक 63 दे ख, हे पभर , अब तू हिरद के उ चितदर के भीड दे खिले बदडू, जिन तू अंवति ्िय िे करे लगब, ले वकन किनद ्िय िे तू हिरद के नद दे खिले बदडू।

अध्य 9 के ब् 1 तब उ हिरद के जिदब वदहलन, “्िय के नदप के पूरद िेहनत ्े करऽ। 2 तब तू ्िझब वक उहे ्िय ह जिनद िे परिदतद उ दर वनयद के घूिे लदगी जिन उ बनिले बदडे । 3 एही ्े जब दर वनयद िे भूकंप आ लोग के हं गदिद दे खदई वदही। 4 तब तू बवढयद ्े ्िझब वक परि ऊ बदत तोहरद ्े पवहले ्े ही कहले रहलन। 5 जइ्े वक दर वनयद िे बनल हर चीज के शर रआत आ अंत होलद आ अंत पकट होलद। 6 एही तरे परिदतद के ्िय के शर रआत आशयन आ शलयशदली कदि ्े होलद आ अंत पभदि आ ्ंकेत ्े होलद। 7 जे केह उददर पदई आ अपनद कदि आ विशद् ्े बच पदई, जिनद ्े तू विशद् कइले बदडऽ। 8 उय खतरद ्े बचदिल जदई आ हिरद दे श िे आ हिरद ्ीिद िे हिदर उददर दे खदई वदही, कदहे वक हि शर र ्े ही हिरद खदवतर ओह लोग के पवित कइले बदनी। 9 तब उ लोग करण हदलत िे हो जइहे, जे अब हिरद रदसद के दर रपयोग कइले बदडन, आ जे लोग ओह लोग के दर खी होके िेकले बद, ऊ लोग यदतनद िे रह जदई। 10 कदहे वक जे लोग के जीिन िे िदयदद विलल बद, ले वकन उ हिरद के नईखन जदनत। 11 जे लोग हिरद विसथद ्े घृणद करत रहे , जब तक वक उ लोग के आजददी रहे , आ जब अभी तक पशदतदप के जगह खर लल रहे , उ लोग एकरद के नद ्िझले , ले वकन एकरद के तरच ्िझत रहले । 12 उहे पीडद ्े िरलद के बदद एकरद के जदनल जररी बद। 13 एह ्े तू इ उतरक ित होखऽ वक अभय लोग के कइ्े ्जद वदहल जदई आ कब, बदवकर पूछी ं वक धि् लोग के कइ्े उददर होई, दर वनयद केकर ह आ दर वनयद केकरद खदवतर बनदिल गइल बद। 14 तब हि जिदब दे नी वक 15 हि पवहले कहले बदनी, अब बोलत बदनी आ बदद िे भी इ बदत कहब वक उददर पदिे िदलद लोग ्े जददद नदश होखे िदलद लोग िे ्े बहत जददद बद। 16 जइ्े जइ्े लहर बूंद ्े बड होलद। 17 ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “जइ्न खे त बद, ओइ्ही ं बीज भी बद। जइ्े िूल होलद, रं ग भी अइ्ने होलद; जइ्े कदिगदर बद, कदि भी अइ्ने बद। जइ्े वक्दन खर द होलद, ओइ्ही ं ओकर खे ती भी होलद, कदहे वक ऊ दर वनयद के ्िय रहे । 18 अब जब हि दर वनयद के जिन अभी तक नद बनल रहे , उ लोग के अभी वजंदद रहे खदवतर तैयदर कईनी त केह हिरद लखलदि नद बोलल। 19 तब हर केह आजद िदनत रहे , ले वकन अब एह दर वनयद िे जिन ्ृवजत बद, ओकर वशषदचदर एगो ्नदतन बीज आ एगो कदनून ्े नदश हो गइल बद जिन खोजल नद जद ्केलद। 20 हि दर वनयद के बदरे िे ्ोचनी त दे खनी वक ओकरद िे जिन चदल चलल रहे ओकरद चलते खतरद पैदद हो गईल रहे । 21 हि दे खनी आ ओकरद के बहत बखनी आ हिरद खदवतर एगो गरचद के अंगूर आ एगो बडहन लोग के पौधद रखले बदनी। 22 तब ऊ भीड नदश हो जदि जिन बेकदर िे पैदद भइल रहे । आ हिदर अंगूर आ हिदर पौधद रदखल जदि। कदहे वक हि बहत िेहनत ्े एकरद के व्द बनद दे ले बदनी। 23 एकरद बदिजूद अगर तू ्दत वदन अउरी रके के चदहत बदडू, (ले वकन तू ओह लोग िे उपिद् नद करबऽ।


24 ले वकन िूल िदलद खे त िे जदके जहदँ घर नद बनल होखे , उ खदली खे त के िूल खदईं। नद िदं ् के सदद लीं, नद शरदब पीईं, बलर क खदली िूल खदईं;) 25 आउर परिदतद ्े लगदतदर पदथननद करत रहब वक हि तोहरद ्े बदत करे आके कहब। 26 हि ओह खे त िे चल गइनी जिन अरदथ कहल जदलद, जइ्े वक उ हिरद के आजद वदहले रहले । आ उहदँ हि िूलन के बीच बइठ के खे त के जडी-बूटी खदत रहनी आ ओही के िदं ् हिरद के तृप करत रहे । 27 ्दत वदन बदद हि घद् पर बईठ गईनी आ हिदर िन पवहले वनहन परे शदन हो गईल। 28 हि आपन िरँह खोल के परि उचद के ्दिने बदत करे लगनी आ कहनी। 29 हे पभर, तू जे हिनी के ्दिने आपन बदत दे खदित बदडू, तू हिनी के पररखद लोग के विस ्े वनकललद के ्िय जंगल िे , जिनद जगह प केह नद चले लद, ओवहजद दे खदिल गईल रहलू । 30 तू कहनी वक, हे इसदएल, हिदर बदत ्रनऽ। आ यदकूब के िं शज, हिदर बदत पर वनशदन लगदईं। 31 कदहे वक दे खऽ, हि तोहनी िे आपन विसथद बोअत बदनी आ ऊ तोहनी िे िल वदही आ ओकरद िे तोहनी के हिेशद खदवतर ्मदन विल जदई। 32 ले वकन हिनी के पररखन जे विसथद के गहण कइले रहले , उ लोग एकर पदलन नद कइले आ तोहदर वनयि के पदलन नद कइले , आ भले तोहदर विसथद के िल नदश नद भइल, नद नदश हो ्कल, कदहे वक ऊ तोहदर रहे । 33 ले वकन जे लोग एकरद के गहण कइले रहे , उ नदश हो गइल कदहे वक उ लोग जिन चीज ओह लोग िे बोिल गइल रहे ओकरद के नद रखले रहे । 34 आ दे खऽ, ई ररिदज ह वक जब जिीन िे बीज भद ्िर्र के जहदज भद किनो बतनन के खदनद भद पेय पददथन विल जदलद, त ऊ नदश हो जदलद जिनद िे ऊ बोिल गइल रहे भद िेकल गइल रहे . 35 जिन चीज बोिल गइल बद, ओकरद िे डदलल गइल बद, भद विलल बद, ऊ नदश हो जदलद आ हिनी के ्दथे नद रहे लद, ले वकन हिनी के ्दथे अइ्न नइखे भइल। | 37 ले वकन विसथद नदश नद होलद, ले वकन ओकरद िे रहे लद ओकर बल के बद। 38 जब हि िन िे ई बदत कहनी त आँ ख ्े पीछे िरड के दे खनी त ददवहनद ओर एगो िेहरदर दे खनी त दे खनी वक ऊ शोक िनदित रहली आ जोर ्े रोित रहली आ िन िे बहते दर खी रहली आ उहो कपडद िदटल रहे आ िदथद पर रदख रहे । 39 तब हि आपन विचदर छोड दे नी वक हि अपनद भीतर रहनी आ हिरद के ओकरद ओर िोड दे नी। 40 उ ओकरद ्े कहल्, “तू कदहे रोित बदडू? िन िे एतनद दर खी कदहे बदडू? 41 ऊ हिरद ्े कहली, “िहदरदज, हिरद के छोड दी ं वक हि अपनद के विलदप कर ्कीले आ अपनद दर ख के अउरी बढद ्कीले , कदहे वक हि अपनद िन िे बहते परे शदन बदनी आ बहते नीच हो गइल बदनी. 42 हि ओकरद ्े कहनी वक तोहरद कद बेिदरी बद? हिरद के बतदईं. 43 ऊ हिरद ्े कहली, “हि तोहदर नौकर बंजर रहनी आ किनो ्ंतदन नद भइल, भले हिदर पवत ती् ्दल के रहे । 44 ओह ती् ्दल िे हि वदन-रदत आ हर घंटद अउरी करछ नद कइनी, बलर क परिदतद ्े आपन पदथननद कइनी। 45 ती् ्दल बदद भगिदन हिरद के तोहदर दद्ी के बदत ्रनले , हिरद दर ख के दे खले , हिदर परे शदनी के बदरे िे ्ोचले अिर री हिरद के एगो बेटद दे ले, अिर री हि ओकरद ्े बहत खर श भईनी, ओ्ही हिदर पवत अिर री

हिदर ्भ पडो्ी भी खर श भईले अिर री हिनी के उनरकर बहत आदर कईनी ्िन शलयिदन के ह। 46 हि ओकरद के बहत िेहनत ्े पो्नी। 47 जब उ बड होके उनकर िेहरदर होखे के ्िय पर अइले त हि भोज बनिनी। अध्य 10 के ब् 1 जब हिदर बेटद अपनद वबयदह के कोठरी िे घर्ल त उ वगर के िर गईल। 2 तब हिनी के ्ब केह रोशनी उखदड वदहनी जद आ हिदर ्ब पडो्ी हिरद के वदलद्द दे िे खदवतर उठले , त हि रदत िे दू ्रद वदन तक आरदि कईनी। 3 जब उ ्ब हिरद के वदलद्द दे िे के कदि छोड दे ले रहले त हि चरप हो गईनी। तब हि रदत िे उठ के भदग गइनी आ इहदँ एह खे त िे आ गइनी, जइ्े वक तू दे खत बदडऽ। 4 अब हिदर इरददद बद वक हि शहर िे नद लिटब, बलर क इहदँ रहब, नद खदएब नद पीयेब, बलर क िरलद तक लगदतदर शोक िनदिे के आ उपिद् करे के। 5 तब हि जिनद िनन िे रहनी, ओकरद के छोड के ओकरद ्े गरसद िे बोलनी। 6 तू ्ब ्े ऊपर िूखन औरत, कद तू हिनी के शोक नईखी दे खत अिर री हिनी के कद होखतद? 7 कइ्े हिनी के िदई व्योन ्ब भदरीपन ्े भरल बदडी, आ बहत विनम बदडी, बहत दर खी बदडी? 8 अब हिनी के ्ब केह शोक िनदित बदनी आ दर खी बदनी जद, कदहे वक हिनी के ्ब केह भदरी पड गइल बदनी जद, कद तू एके बेटद खदवतर दर खी बदडू? 9 कदहे वक धरती ्े पूछी ं त ऊ तोहरद के बतद दी वक ओकरद पर उगे िदलद एतनद लोग के पतन के शोक िनदिे के चदहीं। 10 कदहे वक पवहले ्े ्ब लोग ओकरद ्े वनकलल आ बदकी ्ब लोग ओकरद ्े वनकली आ दे खऽ वक ऊ लोग लगभग ्ब लोग विनदश िे चलत बद आ ओह लोग के भीड एकदि ्े उखदडल बद। 11 त ओकरद ्े जददे शोक करे के होई, जिन वक एतनद भीड के गंिद चरकल बदडी। आ तू नद, जिन एक आदिी के छोड के पछतदित बदडू? 12 ले वकन अगर तू हिरद ्े कहब वक हिदर विलदप धरती के विलदप वनहन नईखे , कदहे की हि अपनद पेट के िल गंिद दे ले बदनी, जिन हि दर ख ्े पैदद कईले रहनी अिर री दर ख के ्ंगे पैदद कईले रहनी। 13 ले वकन धरती अइ्न नइखे , कदहे वक धरती के कि के अनर्दर ओकरद िे िौजूद भीड खति हो गइल बद। 14 तब हि तोहरद ्े कहत बदनी वक जइ्े तू िेहनत ्े पैदद कइले बदडू। ओइ्ही ं धरती भी आपन िल, यदनी आदिी, शर र ्े ही ओकरद के बनदिे िदलद के दे ले वबयद। 15 अब आपन दर ख अपनद भीतर रखीं आ जिन तोहरद पर आइल बद ओकरद के वहमत ्े ्हत रहऽ। 16 कदहे वक अगर तू परिे्​् िर के धदविनक होखे के वनशय िदनब त ्िय रहते अपनद बेटद के गहण करब आ िेहरदर लोग के बीच ओकर पशं ्द होखब। 17 तब शहर िे अपनद पवत के लगे जद। 18 उ हिरद ्े कहली वक हि अयी्न नद करब, हि शहर िे नद जदईब, ले वकन इहदँ हि िरब। 19 हि ओकरद ्े अउरी बदत कइनी आ कहनी। 20 अइ्न ित करी,ं बलर क ्लदह ले त रही।ं हिरद ददरद: कदहे वक व्योन के कतनद विपव् बद? यरशले ि के दर ख के ्ंबंध िे वदलद्द वदहल जदि।


21 कदहे वक तू दे खत बदडऽ वक हिनी के पवित सथदन उजदड हो गइल बद, हिनी के िे दी टू ट गइल बद, हिनी के िंवदर नष हो गइल बद। 22 हिनी के भजन के गदनद जिीन पर वबछदिल गइल बद, हिनी के गीत चरप हो गइल बद, हिनी के उलद् के अंत हो गइल बद, हिनी के दीयद के रोशनी बरझ गइल बद, हिनी के िदचद के ्नदू क वबगड गइल बद, हिनी के पवित चीजन के अशर द हो गइल बद आ ओकर नदि अशर द हो गइल बद हिनी पर बोलदिल गइल बद लगभग अपवित हो गइल बद: हिनी के लइकन के शविमदद कर वदहल गइल बद, हिनी के यदजकन के जरद वदहल गइल बद, हिनी के ले िी लोग कैद हो गइल बद, हिनी के करंिदरी लोग अशर द हो गइल बद आ हिनी के िेहरदर लोग के लू ट वदहल गइल बद; हिनी के धि् लोग के ले जदइल गइल, हिनी के छोटछोट लोग के नदश कर वदहल गइल, हिनी के निही लोग के गरलदि बनद वदहल गइल आ हिनी के बलिदन लोग किजोर हो गइल बद; 23 आ, जिन ्ब्े बड बद, व्योन के िरहर अब आपन इजत खो दे ले बद। कदहे वक उ हिनी ्े निरत करे िदलद के हदथ िे ्ौंपल गईल बदडी। 24 एह ्े आपन बडहन भदरीपन के वहलद दऽ आ दर ख के भीड के दू र कर दऽ तदवक परदकिी तोहरद पर िेर ्े दयद कर् आ परिदतद तोहरद के तोहरद िेहनत ्े आरदि आ आरदि दे ्र. 25 जब हि ओकरद ्े बवतयदित रहनी त दे खनी वक अचदनक ओकर चेहरद बहत चिक गईल अिर री चेहरद चिक गईल, जिनद ्े हि ओकरद ्े डे रद गईनी अिर री ्ोचनी वक इ कद हो ्कतद। 26 अचदनक उ बहत भयभीत होके वचलद उठली, जिनद ्े उ औरत के शोर ्े धरती वहल गईल। 27 हि दे खनी त दे खनी वक उ िेहरदर हिरद ्े अब नद लउकल, ले वकन उहदँ एगो शहर बनल रहे , आ एगो बडकद जगह नीिं ्े दे खदित रहे , तब हि डे रद गईनी, आ जोर ्े वचलद के कहनी। 28 उरीएल सगनदूत कहदँ बदडे , जिन पवहले हिरद लगे आईल रहले ? कदहे वक ऊ हिरद के कई गो ्िदवध िे वगरद वदहले बदडन आ हिदर अंत भष हो गइल बद आ हिदर पदथननद डदं ट दे बे खदवतर. 29 जब हि ई बदत कहत रहनी त दे खनी वक उ हिरद लगे आके हिरद ओर दे खले । 30 हि िरल आदिी वनहन ले ट गईल बदनी अिर री हिदर ्िझ हिरद ्े छीन वलहल गईल, उ हिरद के ददवहनद हदथ पकड के वदलद्द दे ले अिर री हिरद के गोड प खडद क दे ले। 31 तोहरद के कद बेिदरी बद? आ तू कदहे एतनद बेचैन बदडू? आ तोहदर ्िझ आ तोहदर िन के विचदर कदहे परे शदन बद? 32 हि कहनी, कदहे वक तू हिरद के छोड दे ले बदडू, ले वकन हि तोहदर बदत के िरतदवबक कदि कईनी अिर री खे त िे चल गईनी, अिर री दे ख, हि दे खले बदनी, ले वकन दे खतदनी वक हि इ बदत कहे िे ्​्ि नईखी। 33 उ हिरद ्े कहल्, “िदन होके खडद हो जद, हि तोहरद के ्लदह दे ब।” 34 तब हि कहनी वक, हे िदवलक, हिरद िे बोलत रहऽ। खदली हिरद के ित छोडीं, कही ं हि अपनद उमीद ्े करंवठत होके िर नद जदइब। 35 हि दे खले बदनी वक हि नद जदनत रहनी आ ्रनत बदनी वक हि नइखी जदनत। 36 कद हिदर इं ् धोखद हो गइल बद वक हिदर आतद ्पनद िे बद? 37 अब हि तोहरद ्े वनहोरद करत बदनी वक तू अपनद ्ेिक के एह दशन न के दे खद दी ं। 38 तब उ हिरद के जिदब वदहलन, “हिरद के ्रनऽ, हि तोहरद के बतद दे ब वक तू कदहे डे रदत बदडू, कदहे वक परिदतद तोहरद के बहत गरप बदत बतदई।” 39 ऊ दे खले बद वक तोहदर रदसद ्ही बद, कदहे वक तू अपनद लोग खदवतर लगदतदर दर खी रहे लद आ व्योन खदवतर बहते विलदप करत रहे लद।

40 एह ्े उ दशन न के ितलब इहे बद जिन तू हदल िे दे खले बदडू। 41 तू एगो िेहरदर के शोक िनदित दे खनी आ ओकरद के वदलद्द दे बे लगनी। 42 अब तू अब ओह औरत के उपिद नइखऽ दे खत बदडऽ, बदवकर तोहरद के एगो शहर बनल लउकल बद। 43 उ अपनद बेटद के िौत के बदरे िे तोहरद के बतिले रहली, त एकर ्िदधदन इहे बद। 44 ई िेहरदर जेकरद के तू दे खले बदडू, ऊ व्योन ह, आ जब ऊ तोहरद ्े कहल्, जिनद के तू बनल शहर के रप िे दे खत बदडऽ। 45 हि कहत बदनी वक ऊ ती् ्दल ्े बंजर बदडी, ऊ ती् ्दल ह जिनद िे उनरकद िे किनो चढदई नद भइल रहे । 46 ले वकन ती् ्दल बदद ्रलेिदन शहर के वनिदन ण क के बवल चढिले अिर री ओकरद बदद बंजर के एगो बेटद पैदद कईले । 47 ऊ तोहरद के बतिली वक ऊ ओकरद के िेहनत ्े पो्ली, ऊ यरशले ि के वनिद् रहे । 48 ले वकन जब उ तोहरद ्े कहली वक, “हिदर बेटद अपनद वबयदह के कोठरी िे आके ्ंजोग ्े वि​िल हो गईल अिर री िर गईल।” 49 दे खऽ, तू ओकर उपिद दे खनी आ अपनद बेटद खदवतर शोक िनदिे के चलते ओकरद के वदलद्द दे बे लगनी, आ ्ंजोग ्े ई बदत तोहरद खदवतर खर लल बद। 50 कदहे वक अब परिदतद दे खत बद वक तू ओकरद खदवतर दर खी बदडू आ ओकरद खदवतर तोहदर पूरद िन ्े दर खी बदडू, ओइ्ही ं ऊ तोहरद के ओकर िवहिद आ ओकर ्रंदरतद के चिक दे खिले बद। 51 एही ्े हि तोहरद के ओह खे त िे रहे के कहनी जहदँ किनो घर नद बनल रहे । 52 कदहे वक हि जदनत रहनी वक परिदतद तोहरद के ई बदत बतदई। 53 एही ्े हि तोहके खे त िे जदए के आदे श दे ले रहनी, जहिदँ किनो भिन के नीिं नद रहे । 54 कदहे वक जिनद जगह पर परिदतद आपन शहर दे खदिे लदगेलद, उहदँ केह के भिन खडद नद हो ्केलद। 55 एह ्े ित डे रदईं, तोहदर िन डे रदए ित, बलर क भीतर जदके इिदरत के ्रंदरतद आ िहदनतद के ओतनद दे खऽ, जेतनद तोहदर आँ ख दे ख ्केले । 56 तब तू जेतनद ्रनब, ओतनद तोहदर कदन ्िझ िे आ ्केलद। 57 कदहे वक तू बहत लोग ्े ऊपर धन बदडू आ परिदतद के नदि ्े बोलदिल गइल बदडू। आ ओइ्ही ं बहते कि लोग बद. 58 ले वकन कदल रदत िे तू इहदँ रहब। 59 एही तरे परिदतद तोहरद के ऊंच चीजन के दशन न करीहे जिन अंवति ्िय िे धरती पर रहे िदलद लोग के ्दथे परिदतद करीहे । त हि ओह रदत आ एगो अउरी रदत ्रतल रहनी, जइ्े वक ऊ हिरद के आजद वदहले रहले . अध्य 11 के ब् 1 तब हि एगो ्पनद दे खनी त दे खनी वक ्िरंदर ्े एगो चील उठल, जिनद के बदरह गो पंख िदलद पदँ ख आ तीन गो व्र रहे । 2 हि दे खनी वक ऊ पूरद धरती पर आपन पदँ ख िइलिली आ हिद के ्ब हिद ओकरद पर बहल आ इकटद हो गइल। 3 हि दे खनी वक ओकरद पंख िे ्े अउरी विपरीत पंख वनकलल। आ छोट-छोट पंख आ छोट-छोट हो गइल। 4 ले वकन ओकर िदथद आरदि ्े रहे , बीच के व्र दू ्रद ्े बड रहे , ले वकन बदकी के ्ंगे आरदि करत रहे । 5 हि दे खनी वक चील अपनद पंख के ्ंगे उडत रहे अिर री धरती अिर री ओकरद िे रहे िदलद लोग प रदज करत रहे । 6 हि दे खनी वक सगन के नीचे के ्ब चीज ओकरद अधीन बद आ केह ओकरद लखलदि नद बोलल, नद धरती पर किनो पदणी।


7 हि दे खनी वक चील अपनद पोंछ पर उठ के ओकरद पंख ्े कहल्। 8 एके बेर िे जदगल ित होखऽ, हर केह अपनद जगह पर ्रतऽ आ दे खत रहऽ। 9 ले वकन व्र के आलखरी खदवतर ्ररव्त रदखल जदि। 10 हि दे खनी वक आिदज ओकरद िदथद ्े नद वनकलल, बलर क ओकरद दे ह के बीच ्े वनकलल। 11 हि ओकर उलद पंख वगन के दे खनी वक आठ गो पंख रहे । 12 हि दे खनी त दे खनी वक ददवहनद ओर एगो पंख उठल बद आ रदज करत बद पूरद धरती पर घ; 13 जब ऊ रदज कइल् त ओकर अंत हो गइल आ ओकर जगह अब नद लउकल। आ रदज कइलन आ बहत बवढयद ्िय वबतदिल; 14 जब ऊ रदज कइल् त ओकर अंत भी पवहलकद वनयर हो गइल आ ऊ अब नद लउकल। 15 तब एगो आिदज आइल आ कहल्। 16 तू जे एतनद वदन ्े धरती पर रदज कइले बदडऽ, ्रनऽ, हि तोहरद ्े ई कहत बदनी वक तू अब नद लउके ्े पवहले । 17 तोहरद बदद केह तोहरद ्िय के नद पहँ च पदई आ नद ओकर आधद ्िय तक। 18 तब ती्रद उठल आ पवहले के दो्रद वनहन रदज कईल् अिर री अब उहो नद दे खदई दे ल्। 19 एक के बदद एक ्ब बचे िदलद लोग के ्दथे चलल, जइ्े वक हर केह रदज करत रहे आ िेर नद लउकत रहे । 20 तब हि दे खनी आ दे खनी वक ओकरद बदद के पंख ददवहनद ओर खडद हो गइल तदवक उहो रदज कर ्के। करछ लोग रदज कइलन, बदवकर करछ दे र िे ऊ लोग अब नद लउकल। 21 कदहे वक उ लोग िे ्े करछ लोग खडद हो गईल रहे , ले वकन रदज नद कईले | 22 एकरद बदद हि दे खनी वक बदरह गो पंख अब नद लउकल आ नद ही दू गो छोट पंख। 23 चील के दे ह पर अउरी किनो नद रहे , बलर क तीन गो व्र जिन आरदि करत रहे आ छह गो छोट पदँ ख रहे । 24 तब हि दे खनी वक छह गो िे ्े दू गो छोट-छोट पंख अलग हो गइल आ ददवहनद ओर के िदथद के नीचे रह गइल कदहे वक चदरो अपनद जगह पर बनल रहे । 25 हि दे खनी वक पदँ ख के नीचे जिन पंख रहे , उ अपनद के खडद होखे के ्ोचत रहे । 26 हि दे खनी वक एक आदिी खडद हो गईल रहे , ले वकन करछ दे र िे उ अब नद लउकल। 27 दो्रकद पवहलकद ्े जली दू र हो गइल। 28 हि दे खनी आ दे खनी वक जे दू गो बचल रहले , उहो अपनद िन िे रदज करे के ्ोचले । 29 जब उ लोग अई्न ्ोचले त दे खले वक आरदि िे ्े एगो व्र जदग गईल, जिन वक बीच िे रहे । कदहे वक ऊ बदकी दू गो व्र ्े बडहन रहे । 30 तब हि दे खनी वक दू गो अउरी व्र ओकरद ्दथे जरड गइल बद। 31 दे खऽ वक ओकरद ्दथे रहे िदलद लोग के ्दथे व्र घरि गइल आ पदँ ख के नीचे के दू गो पंख खद गइल जिन रदज करे के चदहत रहे । 32 ले वकन इ व्र पूरद धरती के डे रद वदहल् अिर री बहत अतदचदर के ्ंगे धरती प रहे िदलद ्भ लोग प रदज क दे ल्। आ ओकरद िे दर वनयद के शद्न ओह ्ब पदँ ख ्े अवधकद रहे जिन पवहले रहे . 33 एकरद बदद हि दे खनी वक बीच िे जिन व्र रहे उ अचदनक पदँ ख वनहन नद लउकल। 34 ले वकन उ दर नो व्र रह गईल, जिन वक धरती प अिर री ओकरद िे रहे िदलद लोग प भी रदज करत रहले । 35 हि दे खनी वक ददवहनद ओर के व्र बदईं ओर के व्र के खद गईल।

36 तब हि एगो आिदज ्रनत बदनी जिन हिरद ्े कहल् वक, “अपनद ्ोझद दे खऽ आ जिन चीज तू दे खत बदडऽ ओकरद पर विचदर करऽ।” 37 हि दे खनी वक जंगल ्े एगो गजनत शे र वनहन भगदित दे खनी त दे खनी वक उ एगो आदिी के आिदज चील के लगे भेज के कहल्। 38 ्रनऽ, हि तोहरद ्े बदत करब आ परिदतद तोहरद ्े कह्र वक 39 कद तू ओह चदरो जदनिरन िे ्े बचल नद हउअ, जेकरद के हि अपनद दर वनयद िे रदज बनिले बदनी, तदवक ओह लोग के ्िय के अंत ओह लोग के िदधि ्े होखे ? 40 चउथद आके पवहले के ्ब जदनिरन पर हरद वदहल्, आ बहत भय ्े दर वनयद पर आ पूरद धरती के कमद् पर बहत दर ष अतदचदर ्े अवधकदर रखल्। आ एतनद वदन तक ऊ धोखद ्े धरती पर रहले । 41 कदहे वक धरती के तू ्चदई ्े नदय नद कईले बदडू। 42 कदहे वक तू नम लोग के दर ख दे ले बदडू, शदं वतवपय लोग के दर ख दे ले बदडू, झूठद लोग ्े पदर कईले बदडू, िल पैदद करे िदलद लोग के आिद् के नष क दे ले बदडू, अिर री अयी्न लोग के दे िदल वगरद दे ले बदडे , जिनद के तोहरद किनो नरक्दन नद भईल। 43 एही ्े तोहदर गलत विहदर परिदतद के पद् आ गईल बद आ तोहदर घिंड परदकिी के पद् आ गईल बद। 44 परिदतद भी घिंडी ्िय के दे खले बदडन आ दे खऽ वक ऊ ्िय खति हो गइल बद आ उनकर वघनौनद कदि पूरद हो गइल बद। 45 आ एही ्े, हे चील, नद तोहदर भयदिह पदँ ख, नद तोहदर दर ष पंख, नद तोहदर दर भदन िनदपूणन व्र, नद तोहदर चोट पहं चदिे िदलद पंजद, नद तोहदर पूरद बेकदर दे ह। 46 तदवक तोहदर वहं ्द ्े िरय होके पूरद धरती तरोतदजद हो जदि आ िदप् आ जदि आ ओकरद के बनदिे िदलद के नदय आ दयद के आशद रदखे ।

अध्य 12 के ब् 1 जब शे र चील ्े इ बदत कहल् त हि दे खनी। 2 दे खऽ, जिन व्र बचल रहे आ चदरो पदँ ख अब नद लउकल आ दर नर जदनद ओकरद लगे जदके रदज करे खदवतर खडद हो गइलन आ ओह लोग के रदज छोट हो गइल आ हं गदिद ्े भरल रहे । 3 हि दे खनी आ दे खनी वक ऊ लोग अब नद लउकल आ चील के पूरद शरीर जरर गइल जिनद ्े धरती बहते डे रद गइल. आ हिरद आतद ्े कहलन वक 4 दे खऽ, तू हिरद ्दथे ई कदि कइले बदडऽ वक तू परिदतद के रदसद खोजत बदडऽ। 5 दे खऽ, हि िन िे थक गइल बदनी आ आतद िे बहत किजोर बदनी। आ हिरद िे बहते कि तदकत बद, कदहे वक आजर रदत जिनद बहते डर ्े हि पीवडत भइनी. 6 एही ्े हि अब ्ि्च ्े वनहोरद करब वक उ हिरद के अंत तक वदलद्द दे ्। 7 हि कहनी, पभर जे शद्न करे लद, अगर हिरद टी ्े पवहले कृपद विलल बद hy दवष, आ अगर हि तोहरद ्दथे बहत लोग के ्दिने धि् ठहरदिल जदइब, आ अगर हिदर पदथननद ्चिरच तोहरद ्दिने आ जदि। 8 त हिरद के वदलद्द दी ं आ अपनद ्ेिक के एह भयदिह दशन न के वदखद आ ्दि-्दि अंतर दे खदईं, तदवक तू हिरद आतद के पूरद तरह ्े वदलद्द दे ब। 9 कदहे वक तू हिरद के अंवति ्िय दे खदिे लदयक ्िझले बदडू। 10 उ हिरद ्े कहले , “दशन न के वदखद इहे ह।


11 चील, जेकरद के तू ्िरंदर ्े ऊपर उठत दे खनी, उ रदज ह जिन तोहदर भदई ददवनयल के दशन न िे दे खल गईल रहे । 12 ले वकन ओकरद के नद बतदिल गईल रहे , एह्े अब हि तोहके बतदित बदनी। 13 दे खऽ, ऊ वदन आई जब धरती पर एगो रदज उठी आ ओकरद ्े पवहले के ्ब रदजन ्े ओकरद ्े डर लदगी। 14 ओही िे बदरह गो रदजद एक के बदद एक रदज करीहे । 15 जिनद िे ्े दू ्रद के रदज होखे लदगी अिर री बदरह िे ्े किनो ्े जददे ्िय होई। 16 बदरह गो पदँ ख इहे बतदिे लद जिन तू दे खले बदडू। 17 जिन आिदज तू बोलत ्रनले बदडू आ जिनद आिदज के तू िदथद ्े नद वनकलत दे खले बदडू, बलर क ओकरद दे ह के बीच ्े वनकलत दे खले बदडू, एकर ितलब इहे बद। 18 वक ओह रदज के ्िय के बदद बहत झगडद हो जदई आ ऊ अ्िल होखे के खतरद िे खडद हो जदई, विर भी ऊ तब नद वगरी, बलर क िेर ्े अपनद शर रआत िे िदप् आ जदई। 19 तू ओकरद पदँ ख ्े वचपकल आठ गो छोट-छोट पंख के पदँ ख ्े वचपकल दे खले बदडू, एकर वदखद इहे बद। 20 ओकरद िे आठ गो रदजद पैदद हो जइहे , वजनकर ्िय छोट होई आ उविर तेज होई। 21 ओहिे ्े दू गो नदश हो जइहे आ बीच के ्िय नजदीक आित बद, चदर गो के तबले रदखल जदई जबले ओकर अंत नजदीक नद आिे लदगी, बदवकर दू गो के अंत तक रदखल जदई. 22 तू तीन गो व्र के आरदि करत दे खले बदडू, एकर ितलब इहे बद। 23 अपनद अंवति ्िय िे परिदतद तीन गो रदज खडद करीहे आ ओहिे बहते चीजन के निीकरण करीहे आ ओह लोग के धरती पर रदज हो जदई. 24 आ ओहिे रहे िदलद लोग के बहत अतदचदर के ्दथ, अपनद ्े पवहले के ्ब लोग ्े ऊपर, एही ्े ओह लोग के चील के व्र कहल जदलद। 25 कदहे वक इहे लोग उनकर बररदई के पूरद करी आ उनकर अंवति अंत पूरद करी। 26 आ जब तू दे खनी वक बडकद व्र अब नद लउकल, ई त इहे दशदन ित बद वक ओहिे ्े केह अपनद वबछौनद पर िर जदई आ तबवहयो ददन ्े िर जदई. 27 कदहे वक जे दू गो बचल बद, ओकरद के तलिदर ्े िदर वदहल जदई। 28 कदहे वक एक के तलिदर दू ्रद के खद जदई, ले वकन आलखर िे उ खर द तलिदर ्े वगर जदई। 29 तू दे खनी वक पदँ ख के नीचे दू गो पंख ददवहनद ओर के िदथद के ऊपर ्े गरजरत बद। 30 ई बतदिे लद वक ई उहे हिे , जेकरद के परिदतद अपनद अंत तक रखले बदडन, ई छोट रदज ह आ ्ंकट ्े भरल ह, जइ्न वक तू दे खले रहलू । 31 शे र, जेकरद के तू जंगल ्े उठ के गजनत दे खनी आ चील ्े बोलत आ ओकरद अधिन के कदरण तू ्रनल ्ब बदत ्े डदं टत दे खनी। 32 इहे अवभवषय हिे , जेकरद के परिदतद अंत तक ओह लोग खदवतर आ ओह लोग के दर षतद खदवतर रखले बदडन, ऊ ओह लोग के डदं ट दीहे आ ओह लोग के कूरतद ्े डदं टत रहीहे । 33 कदहे वक उ नदय के ्िय ओ लोग के वजंदद अपनद ्ोझद रदख के ओ लोग के डदं ट के ्रधदर करीहे । 34 कदहे वक उ हिरद बदकी लोग के दयद ्े बचदई, जिन वक हिरद ्ीिद प दबदिल गईल बद, अिर री उ नदय के वदन के आिे तक उनरकद के खर श करीहे , जिनद के बदरे िे हि शर र ्े तोहरद ्े कहले बदनी। 35 इहे ्पनद ह जिन तू दे खले रहलू आ एकर वदखद इहे ह। 36 तू खदली परिदतद के ई रहस जदने के योग हो गइल बदडू। 37 एह ्े ई ्ब बदत जिन तू दे खले बदडू, ओकरद के एगो वकतदब िे वलख के वछपद द।

38 आ ओह लोग के जदनी लोग के व्खदईं, जेकर वदल तू जदनत बदडू, एह बदत के ्िझ ्केले आ ओकरद के रख ्केले । 39 ले वकन तू खर द इहदँ ्दत वदन अउरी इं तजदर करऽ तदवक तोहरद के ई बतदिल जद ्के वक जिन भी परिदतद तोहरद के बतदिे के चदहत बद। आ एतनद कह के ऊ अपनद रदसद पर चल गइलन. 40 जब ्ब लोग दे खल वक ्दत वदन बीत गइल बद आ हि शहर िे नद आित बदनी त छोटकद ्े ले के बडकद तक के ्ब लोग के एकटद क के हिरद लगे आके कहल्। 41 हि तोहरद के कद ठे ् पहँ चिले बदनी? हिनी के तोहरद लखलदि किन बररदई कईले बदनी जद वक तू हिनी के छोड के इहदँ बईठ गईल बदडू? 42 कदहे वक ्ब भविषियद लोग िे ्े तू हिनी के खदली करंड के गरचद के रप िे आ अनदर जगह पर िोिब्ी के रप िे आ तूिदन ्े बचदिल एगो अडद भद जहदज के रप िे छोड वदहल गइल बदडू। 43 कद हिनी के ्दिने जिन बररदई आईल बद उ पयदन प नईखे ? 44 अगर तू हिनी के छोड दे ब त हिनी के केतनद बवढयद रवहत, अगर हिनी के भी व्योन के बीच िे जरद वदहल गईल रवहत? 45 हिनी के ओवहजद िरल लोग ्े बवढयद नईखी। आ ऊ लोग जोर-जोर ्े रोित रहे । तब हि ओह लोग के जिदब वदहनी। 46 हे इसदएल, ्दं तनद ्े भरल रहऽ। हे यदकूब के घरदनद, भदरी ित होखऽ। 47 कदहे वक परिदतद के तोहनी के यदद कइल गइल बद आ परदकिी तोहनी के परी्द िे नद भरलदइल बद। 48 रहल बदत हिदर त हि तोहरद के नद छोडले बदनी आ नद तोहरद ्े दू र हो गइल बदनी, बलर क एह जगह पर आइल बदनी वक व्योन के उजदड होखे खदवतर पदथननद करी ं आ तोहनी के नीच ्ंपव् पर दयद िदँ ग ्कीले उर अभयदरण के बद। 49 अब हर एक घरे जदइब आ एह वदनन के बदद हि तोहरद लगे आ जदईब। 50 तब लोग शहर िे चल गईल, जई्े हि आजद दे ले रहनी। 51 ले वकन हि ्दत वदन तक खे त िे लसथर रहनी, जई्े वक सगनदूत हिरद के कहले रहले । आ खदली ओह वदनन िे खे त के िूल के खदत रहनी आ जडी-बूटी के हिदर िदं ् खदत रहनी। अध्य 13 के ब् 1 ्दत वदन बदद रदत िे ्पनद दे खनी। 2 दे खऽ, ्िरंदर ्े एगो हिद उठल वक ऊ ओकर ्ब लहर के वहलद वदहल्। 3 हि दे खनी वक ऊ आदिी हजदरन आकदश के ्दथे िजबूत हो गइल आ जब ऊ आपन चेहरद घरिद के दे खल् त ओकरद नीचे जिन करछ लउकत रहे ऊ ्ब कदँ प गइल। 4 जब भी आिदज उनकर िरँह ्े वनकलल त उनकर आिदज ्रनल ्ब लोग जरत रहे , जइ्े धरती आग के िह्ू् करत घरी ्ीण हो जदले । 5 एकरद बदद हि दे खनी वक ्िर्र ्े वनकलल आदिी के अपनद िश िे करे खदवतर आकदश के चदरो हिद ्े बहत ्ंखद िे आदिी जरट गईल रहले 6 बदवकर हि दे खनी वक ऊ अपनद खदवतर एगो बडहन पहदड गढले रहले आ ओकरद पर उड गइल रहले . 7 ले वकन हि उ इलदकद भद जगह दे खल चदहत रहनी जहदँ पहदडी उकेरल बद, ले वकन नद दे ख पिनी। 8 एकरद बदद हि दे खनी वक ओकरद के अपनद िश िे करे खदवतर जरटल ्ब लोग बहत डे रद गईल, ले वकन लडदई करे के वहमत कईले । 9 दे ख, जब उ लोग के भीड के वहं ्द दे खले त उ नद त हदथ उठिले, नद तलिदर पकडले , नद किनो यरद के औजदर।


10 ले वकन हि दे खनी वक उ अपनद िरँह ्े आग के धिदकद वनहन भेजले अिर री उनरकद होंठ ्े जदलदिरखी ्दं ् वनकलले अिर री जीभ ्े वचंगदरी अिर री आं धी-तूिदन वनकदलले । 11 उ ्ब एक ्ंगे विल गईल। आग के धिदकद, जदलदिरखी ्दँ ् आ बडहन तूिदन; आ लडदई करे खदवतर तइयदर भीड पर जोर ्े वगर गइल आ हर एक के जरद वदहल् वक अचदनक अ्ंख भीड िे करछ नद बरझदइल, खदली धूल आ धरँआ के गंध के, जब हि ई दे खनी त हि डे रद गइनी . 12 ओकरद बदद हि दे खनी वक उहे आदिी पहदड ्े उतर के एगो अिर री शदं वतवपय भीड के बोलिले । 13 तब बहत लोग उनकरद लगे अइले , जिनद ्े करछ लोग खर श भइल, करछ लोग के अि्ो्, करछ लोग के बदनल आ करछ लोग चढदिल गइल लोग ्े ले के आइल। 14 तू अपनद ्ेिक के शर र ्े ही ई चितदर दे खदित रहलू आ हिरद के एह लदयक िदनले बदडू वक तू हिदर पदथननद गहण करऽ। 15 अबहीं हिरद के एह ्पनद के वदखद दे खद दऽ। 16 जइ्े हि अपनद ्िझ िे गभनिती बदनी, ओह वदनन िे जे लोग बच जदई, ओकरद खदवतर वधकदर बद आ जे लोग पीछे नद छोडल जदई, ओकरद खदवतर बहत अवधक हदय! 17 कदहे वक जे लोग नद बचल रहे , उ लोग भदरी पड गईले । 18 अब हि ्िझत बदनी वक आलखर के वदन िे जिन चीज रखल गइल बद, जिन ओह लोग के आ पीछे छोडल गइल लोग के ्दथे होई। 19 एह ्े उ लोग बहत खतरद आ बहत जररी चीजन िे पड जदलद, जइ्े वक ई ्पनद बतदित बद। 20 विर भी खतरद िे पडल आदिी खदवतर एह ्ब िे आिे ्े आ्दन बद वक उ दर वनयद ्े बददल वनहन चल जद् अिर री अंवति ्िय िे होखे िदलद घटनद के नद दे ख्। उ हिरद ्े जिदब दे के कहले । 21 हि तोहरद के दशन न के वदखद बतदइब आ जिन बदत तू िदँ गले रहलू ओकरद के हि तोहरद खदवतर खोल दे ब। 22 कदहे वक तू पीछे छोडल लोग के बदरे िे कहले बदडू, एकर वदखद इहे बद। 23 जे ओह ्िय िे खतरद के ्हन करी, उ अपनद के रखले बद, जे खतरद िे पड गईल बद, उ लोग अयी्न हिे , जेकरद लगे कदि बद अिर री ्िन शलयिदन के पवत विशद् बद। 24 एह ्े ई जदन लीं वक िरल लोग ्े भी जददद धन होलद जे पीछे छोडल गइल बद। 25 दशन न के ितलब इहे बद वक तू एगो आदिी के ्िरंदर के बीच ्े ऊपर आित दे खनी। 26 उहे उहे ह जेकरद के परिदतद एगो बडहन ्िय रखले बदडन, जिन अपनद ददरद अपनद ्ृवष के बचदिे के कदि करीहे आ जे लोग पीछे रह गइल बद, ओकरद के विलसथत करीहे । 27 तू दे खनी वक ओकरद िरँह ्े हिद, आग आ तूिदन वनयर वनकलल बद। 28 नद त ओकरद लगे नद त तलिदर रहे आ नद किनो यरद के औजदर, बलर क ओकरद के दौडलद ्े ओकरद के अपनद िश िे करे आइल पूरद भीड के नदश कर वदहल्। इहे वदखद बद: 29 दे खऽ, उ वदन आिे लद जब परि परिेशिर धरती पर िौजूद लोग के बचदिे लदवगहे । 30 ऊ धरती पर रहे िदलद लोग के अचरज िे पड जदई। 31 एक आदिी दो्रद ्े, एक शहर दो्रद ्े, एक जगह दो्रद ्े, एक लोग दो्रद ्े आ एक ्ेत दो्रद ्े लडे के वजमद ले त होई। 32 उ ्िय होई जब इ ्ब बदत होई अिर री जिन ्ंकेत हि तोहरद के पवहले दे खिले रहनी, उ ्िय होई, तब हिदर बेटद के घोषणद होई, जेकरद के तू चढत दे खले रहलू ।

33 जब ्ब लोग उनकर आिदज ्रनदई त हर आदिी अपनद दे श िे एक दू ्रद के लखलदि लडदई छोड के चल जदई। 34 आ अनवगनत भीड एकटद हो जदई, जइ्े वक तू दे खले बदडू, जिन आिे के इचर क होई आ ओकरद के लडदई ्े जीते के इचर क होई। 35 ले वकन ऊ व्योन पहदड के चोटी पर खडद हो जइहे । 36 व्योन आके ्ब लोग के ्दिने आके तैयदर होके बनदिल जदई। जइ्े तूँ वबनद हदथ के उकेरल पहदड के दे खले बदडू। 37 ई हिदर बेटद ओह रदष्न के दर ष आविषदर के डदं टत होई, जिन अपनद दर ष जीिन के चलते तूिदन िे पड गइल बद। 38 ऊ ओह लोग के बररद विचदर आ जिनद यदतनद ्े ऊ लोग ्तदिल शर र करी, जिन लौ वनयर बद, ओकरद ्ोझद रदख दी आ ऊ हिरद जइ्न कदनून ्े वबनद िेहनत के ओह लोग के नदश कर दी. 39 तू दे खनी वक ऊ एगो अउरी शदं वतवपय भीड के बटोरले बदडन। 40 ऊ द् गो गोत ह जिन रदजद ओव्यद के ्िय िे अपनद दे श ्े बंदी बनद के ले जदइल गइल रहे , जेकरद के अशूर के रदजद ्लिदनद्र बंदी बनद के ले गइलन आ ऊ ओह लोग के पदनी के पदर ले गइलन आ एही ्े ऊ लोग दो्रद दे श िे आ गइलन . 41 ले वकन उ लोग आप् िे इ ्लदह ले ले वक उ लोग गैर-यहदी के भीड के छोड के एगो अिर री दे ् िे चल जईहे, जहदं कबहँ िनरष नद रहत रहले । 42 तदवक उ लोग उहदँ आपन वनयि के पदलन कर् जिन उ लोग अपनद दे श िे कबो नद रखले । 43 उ लोग नदी के ्ंकरी जगह ्े िरदत िे घर् गईले । 44 कदहे वक परिदतद ओह लोग खदवतर वनशदनी दे खदित रहलन आ जबले ऊ लोग नद पदर नद हो गइल तबले जलपलय के रोक वदहलन। 45 कदहे वक ओह दे श ्े गरजरे के एगो बडहन रदसद रहे , जिन वक डे ढ ्दल के रहे । 46 तब उ लोग बदद के ्िय तक उहदँ रहत रहले । आ अब जब ऊ लोग आिे लदगी त 47 ्ब्े ऊँच धदर के झरनद के िेर ्े रोक वदहे तदवक उ लोग ओवहजद ्े गरजर ्के, एह्े तू भीड के शदं वत ्े दे खनी। 48 ले वकन जे तोहदर लोग ्े पीछे रह गईल बद उ उहे ह जिन हिरद ्ीिद िे विले लद। 49 जब ऊ एकटद भइल रदष्न के भीड के नदश कर दी त ऊ अपनद बचे िदलद लोग के बचदि करी। 50 तब ऊ ओह लोग के बडहन चितदर करीहे । 51 तब हि कहनी, हे शद्न करे िदलद पभर , हिरद के इ बतदि वक हि ्िर् के बीच ्े उ आदिी के कदहे दे खले बदनी? 52 उ हिरद ्े कहले , “जइ्े तू ्िरंदर के गवहरदई िे िौजूद चीजन के नद खोज ्कत बदडू नद जदन ्कत बदडू . 53 इहे ओह ्पनद के वदखद ह जिन तू दे खले रहलू आ जिनद ्े तू खदली इहदँ ह्द हो गइल बदडू। 54 कदहे वक तू आपन रदसद छोड के हिरद विसथद पर आपन लगन लगद के ओकरद के खोजत रहलू । 55 तू अपनद जीिन के बरलद ्े विलसथत कइले बदडू आ ्िझददरी के अपनद िदई के बोलिले बदडू। 56 एही ्े हि तोहरद के परिदतद के खजदनद दे खद दे ले बदनी, तीन वदन बदद हि तोहरद ्े अउरी बदत कहब आ तोहरद के परदकिी आ अद् भरत बदत बतदइब। 57 तब हि खे त िे वनकल गइनी आ परि परिदतद के बहत सरवत आ धनिदद दे त रहनी, कदहे वक ऊ ्िय के चितदर कइलन। 58 कदहे वक ऊ ओही चीजन पर शद्न करे लद आ जिन चीजन के ्िय पर पडे लद, आ हि तीन वदन उहदँ बईठल रहनी। अध्य 14 के ब्


1 वत्रकद वदने हि एगो ओक के नीचे बइठल रहनी त दे खनी वक हिरद ्दिने एगो झदडी ्े आिदज आइल आ कहल्, “एस्द, एस्द्।” 2 हि कहनी, इहदँ हि बदनी, पभर आ हि अपनद गोड पर खडद हो गईनी। 3 तब उ हिरद ्े कहल्, “जब हिदर लोग विस िे ्ेिद करत रहे त हि झदडी िे िू्द के ्दिने आपन बदत पकट कईले रहनी अिर री उनरकद ्े बदत कईनी। 4 हि ओकरद के भेज के अपनद लोग के विस ्े वनकदल के ओह पहदड पर ले अइनी जहदँ हि ओकरद के लं बद ्िय तक अपनद लगे रखले रहनी। 5 ऊ ओकरद के बहत अचरज के बदत कहलन आ ओकरद के ्िय आ अंत के रहस बतदित रहलन। आजद वदहलन वक, 6 ई बदत तू बतदइबऽ आ ई बदत तू वछपद दे बऽ। 7 अब हि तोहरद ्े कहत बदनी वक 8 तू अपनद िन िे जिन वनशदनी दे खिले बदनी, जिन ्पनद दे खले बदनी आ जिन वदखद ्रनले बदनी ओकरद के अपनद िन िे रख दी ं। 9 कदहे वक तू ्ब ्े दू र हो जदईब आ अब ्े तू हिरद बेटद आ तोहरद जइ्न लोग के ्दथे रहब जब तक वक ्िय खति नद हो जदई। 10 कदहे वक दर वनयद आपन जिदनी गँिद चरकल बद आ ्िय पररदन होखे लदगल बद। 11 कदहे वक दर वनयद बदरह भदग िे बदँ टल गइल बद आ ओकर द् भदग पवहलही ं खति हो गइल बद आ द्िदँ वहसद के आधद वहसद खति हो गइल बद। 12 द्िदँ वहसद के आधद वहसद के बदद जिन बद ऊ बदचल बद। 13 अब अपनद घर के ्रविलसथत करऽ आ अपनद लोग के डदं टऽ, जेकरद के ्ंकट िे पडल बद, ओकरद के वदलद्द दी ं आ अब विनदश के तदग करऽ। 14 तोहरद ्े नशर विचदर छोड दी,ं आदिी के बोझ िेक दी,ं अब किजोर सभदि के छोड दी ं। 15 जिन विचदर तोहरद पर भदरी पडे लद ओकरद के अलगद कर के एह ्िय ्े भदगे िे जली करऽ। 16 कदहे वक जिन बररदई तू दे खले बदडू ओकरद ्े भी बड बररदई बदद िे होई। 17 कदहे वक दे खऽ वक दर वनयद केतनद किजोर हो जदई, आउर ओवहजद रहे िदलद लोग पर बररदई ओतने बढी। 18 कदहे वक ्िय दू र भदग गइल बद आ पटद ले िे के कदि िरल्ल हो गइल बद, कदहे वक अब जिन दशन न तू दे खले बदडू, जलबदजी िे आिे िदलद बद। 19 तब हि तोहरद ्ोझद जिदब वदहनी। 20 दे खऽ हे पभर , हि जइ्न तू हिरद के आजद दे ले बदडऽ, जदके ओवहजद िौजूद लोग के डदं टब, ले वकन जे लोग ओकरद बदद पैदद होई, ओकरद के के ्लदह वदही? एह तरह ्े दर वनयद अनदर िे पड गइल बद आ ओकरद िे रहे िदलद लोग वबनद रोशनी के बद। 21 कदहे वक तोहदर विसथद जरर गइल बद तोहरद ्े जिन कदि हो रहल बद आ जिन कदि शर र होखे िदलद बद, ओकरद के केह नइखे जदनत। 22 ले वकन अगर हिरद तोहरद ्दिने अनरगह विलल बद त पवित आतद के हिरद िे भेज दी ं आ हि दर वनयद िे जिन करछ शर र ्े भइल बद, जिन तोहरद विसथद िे वलखल बद, ओकरद के वलख दे ब, तदवक लोग तोहदर रदसद खोज ्के आ उ लोग जिन बदद के वदन िे वजंदद रही, उ वजंदद रह ्कतद। 23 ऊ हिरद के जिदब वदहलन, “जद के लोग के एकटद कर के कहऽ वक चदली् वदन ले तोहरद के नद खोजत रहे ।” 24 बदवकर दे खऽ, तू अपनद ्दथे बहते बेद के पेड तइयदर करऽ आ अपनद ्दथे ्रे आ, दबररयद, ्ेलेवियद, एकन् आ अ्ीएल के ले के चलऽ, ई पदं च गो जे तेजी ्े वलखे खदवतर तइयदर बदडे ।

25 आ इहदँ आके हि तोहरद वदल िे ्िझ के एगो दीयद जरद दे ब जिन तब तक नद बरझदई जब तक वक उ कदि पूरद नद हो जदई जिन तू वलखे शर र करब। 26 जब तू कदि कर ले ब त करछ बदत के पचदर करब आ करछ बदत जदनी लोग के गरप रप ्े बतदईब। 27 तब हि उनकर आजद के अनर्दर बदहर वनकलनी आ ्ब लोग के एकटद क के कहनी। 28 हे इसदएल, ई बदत ्रनऽ। 29 हिनी के पररखद लोग शर र िे विस िे परदे ्ी रहले , जहदँ ्े उ लोग के िरलय विलल रहे । 30 उ लोग जीिन के वनयि के पद वलहले , जिनद के उ लोग नद पदलन कईले , जिनद के तू भी उ लोग के बदद उलं घन कईले बदनी। 31 तब व्योन के दे श तोहनी के बीच वचटी ्े बंटल रहे , ले वकन तोहनी के बदप-दददद आ तोहनी खर द अधिन कइले बदनी आ परिदतद के आजद के नईखी रखले । 32 जब्े उ एगो धि् नदयदधीश हउिे , उ ्िय के ्दथ तोहनी ्े उ चीज ले के चल गईले जिन उ तोहनी के दे ले रहले । 33 अब तू लोग इहदँ आऊ तोहनी के बीच िे आपन भदई लोग। 34 एह ्े अगर तू लोग अपनद ्िझ के अपनद िश िे करब आ अपनद वदल िे ्रधदर करब त तोहनी के वजंदद रदखल जदई आ िरलद के बदद तोहनी पर दयद हो जदई। 35 कदहे वक िरलद के बदद नदय आई, जब हिनी के िेर ्े वजंदद होखब जद, तब धि् लोग के नदि पकट होई अिर री अभय लोग के कदि के घोषणद होई। 36 एह चदली् वदन ्े केह हिरद लगे नद आिे आ नद ही हिरद के खोजे। 37 हि ओह पदँ च आदिी के ले के, जइ्न वक उ हिरद के कहले रहले , हि खे त िे चल गइनी आ उहदँ रह गइनी। 38 अवगलद वदने एगो आिदज हिरद के बोलिल् वक, “एसड्द, आपन िरँह खोल के जिन हि तोहरद के पीये दे त बदनी, ओकरद के पी लीं।” 39 तब हि आपन िरँह खोलनी त दे खनी वक उ हिरद लगे एगो भरल पदलद पहं चल, जिन पदनी ्े भरल रहे , ले वकन ओकर रं ग आग वनहन रहे । 40 हि ओकरद के ले के पी वलहनी आ जब हि ओकरद ्े पी वलहनी त हिदर िन ्िझ के बदत कइल् आ हिरद छदती िे बरलद बढल, कदहे वक हिदर आतद हिदर यददददश िजबूत कर वदहल्। 41 हिदर िरँह खर लल आ अब बंद नद भइल। 42 परिदतद पदं चों आदिी के ्िझ दे ले अिर री उ लोग रदत के अद् भरत दशन न वलखले , जिन वक उ लोग नद जदनत रहले । 43 रहल बदत हिरद के त। हि वदन िे बोलत रहनी, रदत िे जीभ नद पकड पिनी। 44 चदली् वदन िे उ लोग दू ्ौ चदर वकतदब वलखले । 45 चदली् वदन पूरद भइलद पर परिदतद कहलन वक, “पवहले जिन तू वलखले बदडऽ, ओकरद के खर ल के पकदवशत करऽ, तदवक योग आ अयोग लोग ओकरद के पढ ्के। 46 बदकी ्​्र के बदद के रखीं तदवक तू ओकरद के खदली ओह लोग के दे दी ं जे लोग के बीच िे बरलदिदन होखे । 47 कदहे वक ओह लोग िे ्िझ के झरनद, बरलद के िवदरद आ जदन के धदरद बद। 48 आ हि अई्न कइनी। अध्य 15 के ब् 1 दे ख, तू हिरद लोग के कदन िे भविषिदणी के बदत कहऽ, जिन हि तोहरद िरँह िे डदल दे ब, पभर कहत बदडन।


2 आ ओकरद के कदगज पर वलखिद दी,ं कदहे वक ऊ विशद्ी आ ्चद हिे । 3 तोहरद लखलदि कलनद ्े ित डे रदईं, तोहरद लखलदि बोले िदलद कलनद के अविशद् ्े तोहरद परे शदन ित होखे । 4 कदहे वक ्ब अविशद्ी अपनद बेि​िदई िे िर जइहे । 5 दे खऽ, पभर कहत बदडन, हि दर वनयद पर विपव् ले अइब। तलिदर, अकदल, िौत आ विनदश के। 6 कदहे वक दर षतद पूरद धरती के बहत गंदद क दे ले बद, आ ओकर अपिदनजनक कदि पूरद हो गईल बद। 7 एही ्े पभर कहत बदडन वक 8 हि अब ओह लोग के दर षतद के ले के आपन जीभ नद पकडब, जिन उ लोग अशर द तरीकद ्े करे लद, आ नद ही हि ओह लोग के ओह कदि िे ्हन करब, जिनद िे उ लोग बररदई के कदि करे लद ब् लगदतदर वशकदयत करत रही.ं 9 एही ्े पभर कहत बदडन वक हि ओह लोग के बदलद जरर ले ब आ ओह लोग के बीच ्े ्ब वनद्ष खू न हिरद खदवतर ले ले ब। 10 दे खऽ, हिदर लोग के झंरड वनयर िध के ओर ले जदइल गइल बद, हि अब ओह लोग के विस के दे श िे नद रहे दे ब। 11 ले वकन हि ओह लोग के एगो तदकतिर हदथ आ प्रल बदं ह ्े ले के आईब आ विस के पवहले जइ्न विपव् ्े िदर दे ब आ ओकर पूरद दे श के नष कर दे ब। 12 विस शोक करी आ ओकर नीिं पर उ विपव् आ ्जद के िदरल जदई जिन परिेशर ओकरद पर ले अइहे । 13 जिीन जोतिदिे िदलद लोग शोक करी, कदहे वक उनकर बीज धिदकद आ ओलद आ भयदिह न्त के ्दथ खति हो जदई। 14 दर वनयद आ ओकरद िे रहे िदलद लोग के हदय! 15 कदहे वक तलिदर आ ओकर विनदश नजदीक आ गइल बद आ एक लोग खडद होके लडदई लडत होई टी दू ्रद, आ हदथ िे तलिदर। 16 कदहे वक आदिी के बीच बगदित होई आ एक दू ्रद पर आकिण होई। ऊ लोग अपनद रदजद आ नद रदजकरिदरन के परिदह नद करी आ ओह लोग के कदि के रदसद ओह लोग के ्​्द िे खडद हो जदई. 17 आदिी के किनो शहर िे जदए के इचद होई, ले वकन नद हो पदई। 18 कदहे वक ओह लोग के घिंड के चलते शहर परे शदन हो जइहे , घर उजड जदई आ आदिी डे रद जदई। 19 आदिी के अपनद पडो्ी पर किनो दयद नद होई, बलर क रोटी के किी आ बहत कष के चलते तलिदर ्े ओकर घर के उजदड वदही अिर री ओकर ्ंपव् लू ट ली। 20 दे खऽ, भगिदन कहत बदडन वक हि धरती के ्ब रदजद लोग के एकटद कर के हिरद के आदर दे ब, जिन ्ूरज के उगलद ्े, दव्ण ्े, पूरब ्े आ वलबदन् ्े बद। एक दू ्रद के लखलदि िरड के उ लोग जिन कदि कईले बदडे ओकर बदलद दे िे के चदही। 21 जइ्े आज भी उ लोग हिरद चरनल लोग के कदि करत बद, ओइ्ही ं हिहँ करब आ ओह लोग के कोरद िे बदलद दे ब। पभर परिेशर इहे कहत बदडन वक; 22 हिदर दवहनद हदथ पदपी लोग के नद छोडी आ धरती पर वनद्ष खू न बहदिे िदलद लोग पर हिदर तलिदर नद रकी। 23 उनकर कोध ्े आग वनकल के धरती के नीिं आ पदपी लोग के भस कर दे ले बद, जइ्े वक भू्द जरदिल जदलद। 24 वधकदर बद वक पदप करे िदलद लोग आ हिदर आजद के पदलन नद करे लद! पभर कहत बदडन। 25 हि ओह लोग के नद छोडब, हे लइकद लोग, आपन रदसद ्े जद, हिरद पवित सथदन के अशर द ित करऽ। 26 कदहे वक पभर उनकरद लखलदि पदप करे िदलद ्ब लोग के जदनत हउिे आ एही ्े उ ओह लोग के िौत आ विनदश के ओर ्ौंप दे ले।

27 कदहे वक अब पूरद धरती पर विपव् आ गइल बद आ तू लोग ओहिे रहबऽ, कदहे वक परिेशर तोहनी के नद बचदई, कदहे वक तू लोग ओकरद लखलदि पदप कइले बदडऽ। 28 दे खऽ एगो भयदनक दशन न आ पूरब ्े ओकर रप दे खऽ। 29 जहदँ अरब के अजगरन के रदष् बहत रथ ले के वनकलीहे आ ओह लोग के भीड के हिद वनयर धरती पर ले जदइल जदई तदवक जे ्ब ्रनत बद ऊ डे रद के कदँ प ्के। 30 कोध ्े भडकल किदन वनयन लोग जंगल के जंगली ्ूअर वनहन वनकल जईहे अिर री बहत शलय ्े उ लोग आके ओ लोग के ्ंगे लडदई िे शदविल होईहे अिर री अशूर के दे श के करछ वहसद बबदन द क वदहे । 31 तब अजगरन के आपन सभदि के यदद करत ऊपरी हदथ होखी। आ अगर उ लोग अपनद के ्तदिे के बहत तदकत ्े ्दवजश रच के अपनद के िरड जदई। 32 तब ई लोग घबरदहट िे खू न बह जदई आ अपनद शलय ्े चरप रह जदई आ भदग जदई। 33 अशूर के दे श ्े दर शन ओह लोग के घेरदबंदी करी आ ओह लोग िे ्े करछ लोग के भस करी आ ओह लोग के ्ेनद िे डर आ भय आ ओह लोग के रदजद लोग के बीच झगडद हो जदई. 34 दे खऽ, पूरब आ उ्र ्े दल्न ओर बददल आ दे खे िे बहते भयदिह बद, जिन कोध आ तूिदन ्े भरल बद। 35 ऊ लोग एक दो्रद के िदर दीहे आ धरती पर तदरद के बहते भीड, ऊ लोग आपन तदरद, िदर दीहे. आ तलिदर ्े ले के पेट तक खू न हो जदई। 36 ऊंट के गोबर तक आदिी के गोबर। 37 आ धरती पर बहते भय आ कदँ प उठी आ जे कोध दे ख्र ऊ डे रद जइहे आ ओह लोग पर कदँ प उठी. 38 तब दल्न ्े, उ्र ्े आ पवशि ्े एगो अउरी वहसद ्े बडहन तूिदन आई। 39 पूरब ्े तेज हिद उठ के ओकरद के खोल वदही। ऊ बददल जिनद के ऊ कोध िे उठिले रहले आ तदरद पूरब आ पलचि के हिद के ओर भय पैदद करे खदवतर झकझोर वदहले रहले , ऊ नदश हो जदई. 40 बडकद-बडकद बददल कोध आ तदरद ्े भरल िरलद जदई, तदवक ऊ पूरद धरती आ ओकरद िे रहे िदलद लोग के डे रद ्के। आ ऊ हर ऊँच आ पिरख जगहन पर एगो भयदिह तदरद उझर दीहे . 41 आग, ओलद, उडत तलिदर आ बहत पदनी, तदवक ्ब खे त आ ्ब नदी, बहत पदनी के भरिदर होखे । 42 शहर आ दे िदल, पहदड आ पहदडी, जंगल के पेड, घद् के घद् आ ओकर धदन के तोड दीहे । 43 उ लोग दढतद ्े बदबरल िे जदके ओकरद के डे रद वदहे । 44 ऊ लोग ओकरद लगे आके ओकरद के घेरदबंदी करी, ओकरद पर तदरद आ पूरद कोध उडदई, तब धूल आ धरँआ आकदश िे चढ जदई आ ओकरद आ्पद् के ्ब लोग ओकरद के विलदप करी। 45 आउर जे उनकरद अधीन रही, उ लोग उनकर ्ेिद करी जे ओकरद के डरद दे ले बद। 46 आ एवशयद, तू बदबरल के आशद के वहसद हउअ आ ओकर िवहिद हउअ। 47 वधकदर बद, हे दरर्, कदहे वक तू अपनद के ओकरद जइ्न बनद ले ले बदडऽ। आ तोहरद बेटी लोग के िे शदिृ व् िे ्जिले बदडऽ तदवक ऊ लोग तोहरद पेिी लोग के खर श करे आ घिंड करे , जे हिेशद ्े तोहरद ्दथे िे शदिृ व् करे के चदहत रहे । 48 तूँ ओकरद ्ब कदि आ आविषदर िे निरत करे िदलद के पदछे चलल बदडऽ। 49 हि तोहरद पर विपव् भेजब। विधिद, गरीबी, अकदल, तलिदर आ िहदिदरी, अपनद घरन के विनदश आ िौत ्े बबदन द करे खदवतर।


50 आ तोहदर शलय के िवहिद िूल वनहन ्ूख जदई, उ गि् पैदद हो जदई जिन तोहरद ऊपर भेजल जदलद। 51 तूँ एगो गरीब िेहरदर वनयर किजोर हो जइबऽ वक ओकरद के चोट लदगल बद आ जइ्े घदि ्े ्जद वदहल गइल बद, जिनद ्े परदकिी आ पेिी लोग के नद विल पदई िे तोहरद के। 52 पभर कहत बदडन वक कद हि ईषदन ्े तोहरद लखलदि अई्न कदि कइले रहतीं? 53 अगर तू हिेशद हिरद चरनल लोग के नद िदरत रवहत, अपनद हदथ के िदर के ऊपर उठदित आ नशद िे धर् रहलद पर ओह लोग के िरल लोग के ऊपर नद कहत रवहत। 54 तोहरद चेहरद के ्रंदरतद के बदरे िे बतदईं? 55 तोहदर िे शदिृ व् के इनदि तोहरद गोदी िे होई, एह्े तोहरद बदलद विल जदई। 56 जइ्े तू हिरद चरनल लोग के ्दथे कइले बदडऽ, पभर कहत हउिे , ओइ्ही ं परिेशर तोहरद ्दथे भी करीहे आ तोहरद के बदिदशी िे ्ौंप वदहे 57 तोहदर लइकद भूख ्े िर जइहे आ तू तलिदर ्े वगर जदईं, तोहदर शहर टू ट जदई आ तोहदर ्ब लोग खे त िे तलिदर ्े नदश हो जदई। 58 पहदड पर रहे िदलद लोग रोटी के भूख आ पदनी के पद् के चलते भूख ्े िर जदई, आपन िदं ् खद के आपन खू न पीई। 59 तूँ दर खी होके ्िरंदर के रदसद ्े आके िेर ्े विपव् पदईबऽ। 60 एह रदसद िे ऊ लोग बेकदर शहर पर दौड के तोहदर दे श के करछ वहसद के नष कर दीहे आ तोहदर िवहिद के करछ वहसद के भस कर दीहे आ नष भइल बदबरल िे िदप् आ जइहे । 61 आ तू ओह लोग के ददरद ठूंठ वनयर िेक वदहल जदई आ ऊ तोहरद खदवतर आग वनयर हो जदई। 62 तोहरद के आ तोहदर शहरन के, तोहदर दे श के आ तोहरद पहदडन के भस कर दी। तोहदर ्ब जंगल आ िलददर पेड के आग ्े जरद दीहे । 63 तोहदर लइकन के बंदी बनद के ले जइहे आ दे ख, तोहरद लगे जिन बद, ओकरद के लू ट के तोहरद चेहरद के ्रंदरतद के वबगदड दीहे । अध्य 16 के ब् 1 हे बदबरल आ एवशयद, तोहरद पर हदय! वधकदर बद तोहरे , विस आ ्ीररयद! 2 बोरद आ बदल के कपडद पवहन के अपनद लइकन के विलदप करी ं आ पछतदिद करी ं। कदहे वक तोहदर विनदश नजदीक आ गइल बद। 3 तोहनी पर तलिदर भेजल गइल बद आ ओकरद के के घरिद ्केलद? 4 तोहनी के बीच िे आग भेजल गइल बद आ ओकरद के के बरझद ्केलद? 5 तोहनी पर विपव् भेजल गइल बद आ ऊ कद ह जे ओकरद के भगद ्केलद? 6 कद किनो आदिी जंगल िे भूखल शे र के भगद ्केलद? भद केह आग के ठूंठ िे बरझद ्केलद, जब ऊ आग जरे लदगल बद? 7 कद किनो िजबूत तीरं ददज के गोली िदरल तीर के िेर ्े घरिदिल जद ्केलद? 8 परदकिी पभर विपव्यन के भेजत बदडन आ ऊ के ह जे ओकरद के भगद ्केलद? 9 ओकरद कोध ्े आग वनकली आ ओकरद के बरझदिे िदलद के ह? 10 ऊ वबजली वगरदई आ के नद डे रदई? ऊ गरजत होई आ के नद डे रदई? 11 पभर धिकी वदहे , आ ओकरद ्दिने केकरद के पीट के पदउडर नद बनदिल जदई? 12 धरती आ ओकर नीिं वहल जदलद। ्िरंदर गवहरदह ्े लहर के ्दथे उठत बद आ ओकर लहर आ ओकर िछरी भी पभर के ्दिने आ उनकर शलय के िवहिद के ्दिने तस हो जदलद।

13 कदहे वक ओकर ददवहनद हदथ िजबूत बद जिन धनरष के िोड दे लद, ओकर तीर तेज होलद आ जब दर वनयद के छोर पर गोली चले लदगी त ऊ नद छूट पदई। 14 दे खऽ, विपव् भेजल गइल बद आ जबले ऊ धरती पर नद आई तबले िेर ्े नद लिट पदई. 15 आग तब तक नद बरझदई जब तक वक उ धरती के नीिं के नद भस नद करी। 16 जइ्े किनो परदकिी तीरं ददज के गोली ्े तीर पीछे नद लिटत होखे , ओइ्ही ं धरती पर जिन विपव् भेजल जदई ऊ िेर ्े नद लिट पदई। 17 हदय हिरद पर बद! हदय हिरद पर बद! ओह वदन िे हिरद के के बचदई? 18 दर ख आ बडहन शोक के शर रआत भइल। अकदल आ बहते िौत के शर रआत भइल; यरद के शर रआत, आ शलय लोग डर ्े खडद हो जदई। बररदई के शर रआत हो जदलद! जब ई बररदई आई त हि कद करब? 19 दे खऽ, अकदल आ विपव्, कष आ पीडद के ्रधदर खदवतर कोडद के रप िे भेजल गइल बद। 20 ले वकन एह ्ब बदत के चलते उ लोग अपनद बररदई ्े नद िरवडहे अिर री नद ही हिेशद कोडद के बदरे िे यदद करीहे । 21 दे खऽ, धरती पर अतनद बवढयद ्सद हो जदई वक ऊ लोग अपनद के बवढयद हदलत िे ्िझी आ तबवहयो धरती पर बररदई, तलिदर, अकदल आ बहते भि पैदद हो जदई. 22 कदहे वक धरती पर रहे िदलद बहत लोग अकदल ्े नदश हो जइहे । आ दू ्रकद, जे भूख ्े बचेलद, तलिदर के नदश कर दी। 23 िरअल लोग के गोबर वनहन िेक वदहल जदई अिर री ओकरद के वदलद्द दे िे िदलद केह नद होई, कदहे की धरती उजड जदई अिर री शहर वगर जदई। 24 धरती के जोते आ बोिे िदलद केह नद रह जदई 25 पेड िल दे ई आ के बटोरी? 26 अंगूर पक जदई आ ओकरद के के दबदई? कदहे वक ्ब जगह आदिी के उजदड हो जदई। 27 एक आदिी के दो्रद के दे खे के आ ओकर आिदज ्रने के इचद होखे । 28 कदहे वक किनो शहर के द् गो आ खे त के दू गो बदचल रहीहे जिन िोट बगीचद आ चटदन के दरदर िे लर कदइल रहीहे . 29 जइ्े जैतून के बगइचद िे हर पेड पर तीन चदर जैतून रह जदलद। 30 जइ्े वक अंगूर के बगइचद बटोरलद पर अंगूर के बगइचद के करछ झरंड रह जदलद जे पूरद िेहनत ्े अंगूर के बगइचद िे खोजत रहे लद। 31 ओही वदन िे तलिदर ्े घर के तलदशी ले िे िदलद लोग के तीन चदर गो रह जइहे । 32 धरती उजदड हो जदई आ ओकर खे त पररदन हो जदई आ ओकर रदसद आ ओकर ्ब रदसद कदँ ट ्े भरल हो जदई कदहे वक केह ओवहजद ्े नद गरजरी। 33 करंिदरी लोग शोक िनदिे ली, जेकरद लगे दू लद नद होई। िेहरदर लोग शोक िनदिे ली, जेकर किनो पवत नद होई। उनकर बेटी लोग शोक करी, जेकरद लगे किनो ्हदयक नद होई। 34 यरद िे उनकर दू लद नदश हो जइहे आ उनकर िरद अकदल ्े नदश हो जइहे । 35 हे पभर के ्ेिक लोग, अब ई बदत ्रनी ं आ ्िझीं। 36 दे खऽ, पभर के िचन के गहण करी,ं जिनद दे ितद लोग के बदरे िे पभर कहले बदडन, ओकरद पर विशद् ित करी।ं 37 दे खऽ, विपव् नजदीक आित बद आ ढील नइखे होखत। 38 जइ्े नौिदँ िहीनद िे गभनिती िेहरदर अपनद बेटद के जनि दे ले त ओकरद जनि के दू -तीन घंटद के बदद ओकरद गभन िे बहत ददन हो जदलद, जिन वक जब बचद पैदद होखे लद त एक पल भी ढील नद होखे लद।


39 ओइ्ही ं धरती पर विपव् आिे िे ढील नद होखी आ दर वनयद शोक करी आ ओकरद पर हर तरि दर ख आ जदई. 40 हे हिदर लोग, हिदर िचन ्रनऽ, तोहनी के आपन लडदई खदवतर तइयदर करऽ, आ ओह बररदई िे धरती पर तीथनयदती जइ्न रहऽ। 41 जे बेचेलद, उ भदगल वनहन होखे अिर री खरीदे िदलद के नरक्दन होखे िदलद वनहन होखे । 42 जे बवनयद के कबद िे बद, उ ओइ्ही ं जइ्े ओकरद ्े किनो िदयदद नद होखे , आ जे वनिदन ण करे लद, ऊ ओइ्ही ं जइ्े ओकरद िे नद रहे िदलद। 43 बोिे िदलद, जइ्े वक अंगूर के बगइचद नद िटत होखे , ओइ्ही ं अंगूर के बगइचद रोपे िदलद भी अंगूर नद बटोरे । 44 जे वबयदह करे लद, ओइ्ही ं जेकरद ्ंतदन नद होई। आ जे वबयदह नद करे लद, उ विधिद लोग वनहन। 45 एही ्े जे लोग बेकदर िे िेहनत करे लद। 46 कदहे वक परदे ्ी लोग आपन िल कदट के आपन ्ंपव् लू ट के आपन घर उखदड िेकी आ अपनद लइकन के बंदी बनद ली कदहे वक बंदी आ अकदल िे ओह लोग के ्ंतदन विल जदई। 47 जे लोग अपनद वदपदर िे डकैती के कदि करे लद, ओतने अपनद शहर, घर, ्ंपव् आ अपनद आदिी के ्जदिे लद। 48 पभर कहत बदडन वक हि ओह लोग पर ओतने नदरदज होखब। 49 जइ्े िे शद ्ही ईिदनददर आ ्द् गरणी औरत ्े ईषदन करे ले । 50 ओइ्ही ं धिन अधिन ्े निरत करी जब ऊ अपनद के धोखद वदही आ ओकरद पर आरोप लगदई आ जब ऊ अइहे जे धरती पर हर पदप के खोज करे िदलद के बचदि करी। 51 एह ्े तू लोग ओकरद जइ्न नद होखऽ आ नद ओकर कदि के जइ्न होखऽ। 52 कदहे वक अबहीं करछर ओ धरती ्े अधिन दू र हो जदई आ तोहनी िे धदविनकतद के रदज होई। 53 पदपी ई ित कहे वक ऊ पदप नइखे कइले, कदहे वक भगिदन ओकरद िदथद पर आग के कोयलद जरद दीहे जिन पभर परिेशर आ उनकर िवहिद के ्दिने कहत बद वक हि पदप नइखीं कइले । 54 दे खऽ, पभर आदिी के ्ब कदि, उनकर कलनद, उनकर विचदर आ उनकर वदल के जदनत बदडन। 55 उ लोग खदली इहे बदत कहल् वक धरती बनल होखे । आ ऊ बन गइल: आकदश बनल होखे ; आ एकर रचनद भइल। 56 उनकरद िचन ्े तदरद बनल बद आ ऊ ओह लोग के ्ंखद जदनत हउिे । 57 ऊ गवहरदई आ ओकर खजदनद के खोज करे लद। ऊ ्िरंदर के नदपले बद आ ओकरद िे कद बद. 58 ऊ ्िरंदर के पदनी के बीच िे बंद कर वदहले बदडन आ अपनद बदत ्े धरती के पदनी पर लटकद वदहले बदडन. 59 ऊ आकदश के वतजोरी वनयर प्रत बद। पदनी पर ऊ एकर नीिं बनिले बदडन। 60 रे वगसदन िे ऊ पहदड के चोटी पर पदनी के झरनद आ करंड बनिले बदडन, तदवक ऊंच चटदन ्े बदढ बह के धरती के पदनी दे ्के। 61 ऊ आदिी के बनिले आ आपन िन दे ह के बीच िे रख के ओकरद के ्दँ ्, जीिन आ ्िझ वदहलन। 62 हँ आ ्िन शलयिदन परिेशर के आतद, जे ्ब करछ बनिले बद आ धरती के रहस िे ्ब वछपल चीजन के खोजत बद। 63 ऊ तोहनी के आविषदर के जदनत बद आ तोहनी के वदल िे कद ्ोचत बदडू, उहे लोग जिन पदप करे लद आ आपन पदप वछपदिे के चदहत बद। 64 एही ्े पभर तोहनी के ्ब कदि के ठीक ्े खोज ले ले बदडे , त उ तोहनी के ्ब के शविमदद क वदहे ।

65 आ जब तोहनी के पदप ्दिने आई त तू लोग के ्दिने शविमदद होखब आ ओह वदन तोहनी के पदप तोहनी के आरोपी बन जदई। 66 तू कद करबऽ? यद तू लोग आपन पदप के परिेशर आ उनकर दू त के ्दिने कइ्े वछपदबऽ? 67 दे खऽ, भगिदन खर दे नदयी हउिे , ओकरद ्े डे रदईं, आपन पदप छोड के आपन अपरदध के भरलद जदईं आ ओकरद िे अब हिेशद खदवतर दखल ित दे ब। 68 कदहे वक दे खऽ, तोहनी पर बहत भीड के जरत कोध हो गइल बद आ ऊ लोग तोहनी िे ्े करछ लोग के छीन के बेकदर होके िूवतनयन के चढदिल चीजन ्े पेट भरी। 69 जे लोग ओह लोग के ्हिवत दे त बद, ओकरद के िजदक उडदिल जदई, आ ओकरद के गोड ्े दबद वदहल जदई। 70 कदहे वक हर जगह आ ओकरद बदद के शहरन िे पभर ्े डे रदए िदलद लोग पर बहत बड वि्ोह होई। 71 उ लोग पदगल लोग वनहन होईहे , जिन वक केह के नद छोडीहे , ले वकन तबहँ पभर ्े डे रदए िदलद के लू ट के नदश करीहे । 72 कदहे वक उ लोग आपन ्दिदन उजदड के ले जईहे अिर री घर ्े बदहर वनकदल वदहे । 73 तब उ लोग के पतद चल जदई वक हिदर चरनल के हिे । आ आग िे ्ोनद जइ्न परखल जदई। 74 हे हिदर वपयजन, ्रनऽ, पभर कहत बदडन, दे खऽ, ्ंकट के वदन नजदीक आ गइल बद, बदवकर हि तोहनी के ओही ्े िरय कर दे ब। 75 ित डे रदईं आ नद ्ंदेह करी।ं कदहे वक भगिदन तोहदर िदगनदशन क हिे । 76 हिदर आजद आ उपदे श के पदलन करे िदलद लोग के िदगनदशन क, पभर परिेशर कहत हउिे वक तोहनी के पदप के बोझ ित उठदिे के चदहीं आ तोहनी के अपरदध के ऊपर ित उठदिे के चदहीं। 77 वधकदर बद वक जे लोग अपनद पदप ्े बदनल बद आ अपनद इवन ्े ढं कल बद अइ्न गरण जइ्े खे त िे झदडी ्े ढं कल होखे आ ओकर रदसद कदँ टद ्े ढं कल होखे , जिनद ्े केह नद जद ्के! 78 ओकरद के वबनद कपडद के छोड वदहल जदलद आ ओकरद ्े भस होखे खदवतर आग िे िेक वदहल जदलद।


Turn static files into dynamic content formats.

Create a flipbook