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VARTMAN ME YOG KA MAHATWA

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2018 = 6.371, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFERRED JOURNAL, JULY-AUG, 2019, VOL- 7/52

वततभान भे मोग का भहत्व कु. प्रिती खोडे

सहामक िोपेसय, भहात्भा गा​ांधी अांतययाष्ट्रीम हहांदी प्रवश्वप्रवद्मारम वधात. (pritikhode1@gmail.com)

Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com िस्तावना:- मोग का हभाये जीवन भे क्मा िबाव ऩडता है ? मह एक भह्तत्वऩण ू त िश्न है । िाचीन कार से मोग का अध्ममन अध्माऩन ऋप्रषमो तथा भहप्रषतमों का प्रवषम भाना जाता था , रेककन मोग अफ आभ रोगो के भानससक औय शारययीक योग सभटाने भे राबदामक ससद्द हो यहा है । मोग का ननमभऩूवक त तथा ननमसभत अभ्मास कयने से हभाया शयीय स्वस्थ फनता है । शयीय के स्वस्थ यहने से भन औय भस्स्तष्ट्क बी उजातवान फनता है । भन औय भस्स्तष्ट्क के स्वस्थ यहने से ही आस्त्भक सख ु की िास्तत होती है । शयीय,भन तथा भस्स्तष्ट्क के उचचत साभांजस्म से ही जीवन भें खश ु ी औय सपरता सभरती है । वततभान भें भनुष्ट्म का औसत जीवन कार 70-75 वषत भाना गमा है । स्जसभे वह केवर 20 से 25 वषत किमाशीर यहता है । भनुष्ट्म अच्छे से किमाशीर तबी यह सकता है , जफ वह जीवन भें स्स्थयता राएगा तथा चचांताभक् ु त होगा। भनुष्ट्म अऩने अच्छे कामत द्वाया जीवन भें खश ु ी औय सपरता िातत कय सकता है । अच्छा कामत कयने के सरमे अच्छा स्वास्​्म होना आवश्मक है । एक अच्छे स्वास्​्म के सरमे व्मस्क्त को अऩने दै ननक किमा कराऩो भें मोग को सस्मभसरत कयना आज के इस बागदौड वारे जीवन भें अत्मांत आवश्मक हो गमा है । िाचीन कार भें जीवन िाचीन कार भें व्मस्क्त अऩना अचधकतय कामत शयीय के द्वाया कयता था। उस सभम अचधकतय भशीन ऐसी थी जो शयीय के द्वाया ही चराई जाती थी। भशीने चराने के सरए व्मस्क्त को स्वमां भेहनत कयनी ऩडती थी इसके कायण उसे ऩमाततत भात्रा भें ऩसीना शयीय के फाहय आता था। इससे व्मस्क्त अऩने आऩ को हल्का भहसूस कयता था। तफ सभाज भें आज की तयह योगों की बयभाय नहीां थी। उस सभम अचधक कामत शयीय द्वाया ही ककमा जाता था। उचचत ऩमाततत भात्रा भें वाहन नहीां थे इस वजह से व्मस्क्त अचधकतय ऩैदर ही मात्रा कयते थे। Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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ऩुरुष खेती के काभ कयते थे औय भहहराए घय का ऩूया काभ स्वमां कयती थी , सफेये घय के ऑगन भें िनतहदन गाम के गोफय की सरऩाई होती थी। औय सांमक् ु त ऩरयवाय होने के कायण भहहराओ को घय के फततन साप कयना , कऩडे धोना , घय की सपाई कयना आहद सबी कामत हाथ से कयने ऩडते थे। मही कायण थे की उस सभम के व्मस्क्त दृष्ट्ट ऩुष्ट्ट औय योग यहीत थे। वततभान कार भें जीवन:वततभान कार फडती िनतस्ऩधातओां का मुग है । इस िनतस्ऩधात भें व्मस्क्त अऩने आऩ को सपर फनाने के सरमे हदन यात बागभ बाग वारा जीवन व्मतीत कयने के सरमे भजफयू हो गमा है । उसकी व्मस्तता तथा भन की व्मग्रता फढ गई है । शयीय प्रवसबन्न योगो से ग्रस्त हो गमा है । तथा भन भस्स्तष्ट्क भें तनाव ऩैदा हो गमा है । भन भस्स्तष्ट्क भें तनाव तथा चचांता यहने से व्मस्क्त अऩना समऩुणत ध्मान केंहित नहीां कय ऩाता है । िनतस्ऩधात के इस मग ु भें व्मस्क्त के भानससक स्वबाव भे ऩरयवततन दे खने को सभर यहा है । वह आत्भकेंहित तथा स्वाथी हो गमा है । स्जसके कायन साभास्जक सांफांधो को बी उचचत तरयको से नहीां ननबा ऩा यहे है । उसकी हदन िनत हदन की हदनचमात अव्मवस्स्थत हो गई है । अचधकतय आज के मुग भें व्मस्क्त भोफाइर रैऩटॉऩ जैसे भसशनों का वाऩय अऩने जीवन भें अत्मचधक िभाण भें कय यहे है । आज का मुग भसशनों का मुग है । इस मुग भें बौनतकवादी का फोरफारा होता है । अध्मस्त्भक वाद का िबाव कभ होता चरा जाता है । ऩैसे कभाने की दृष्ट्टी से व्मस्क्त कायखाने अथवा भशीनों ऩय ननबतय हो यहा है । व्मस्क्त के शयीय का एक बाग अत्मचधक सकिम होने से औय वहह दस ू यी औय शयीय का दस ू या बाग ननस्ष्ट्िम होने से शयीय का सांतुरन बफघड जाता है । औय शयीय भें उच्च यक्त दाफ ह्रद्म योग , जोडो का ददत औय गरगांड , गहिमा , गैस , ऩेट के प्रवकाय जैसे बमांकय व्माचधमा ऩैदा हो जाती है । औय व्मस्क्त सबी िकाय की ऐश्वमत िसधनो के होने ऩय बी स्वमां को दख ु ी भहसुस कयता है । सपर जीवन के सरमे मोग का भहत्व मोगासनो के ननमसभत अभ्मास से भेरुदां ड सुदृढ फनता है । स्जससे सशयाओ औय धभननमो को आयाभ सभरता है । शयीय के सबी अांग ित्मांग सुचारु रुऩ से कामत कयते है िाणामभ द्वाया िाणवामु शयीय के ित्मेक बाग भें ऩहुच जाता है । स्जससे अनावसश्मक िव्म नष्ट्ट होते है , प्रवशा​ांक ननवातससत होते है स्जसभें सख ु द नीांद अऩने आऩ सभम ऩय रगती है । िाणामभ औय ध्मान से भस्स्तष्ट्क आभ रोगों की अऩेक्शा कही जादा किमाशीर औय शस्क्तशारी फनता है । मोग भें जहा शयीय ऊजात जागत ृ होती है । वही हभाये भस्स्तष्ट्क के अांतरयभ बाग भें नछऩी यहस्मभम शस्क्तमों का उदम होता है । जीवन भें सपरता के सरमे सकायात्भक उजात औय भस्स्तष्ट्क कक Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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जरुयत होती है । औय मे ससपत मोग से सभरनत है । मोग कयते यहने का िबाव मह होता है कक शयीय , भन औय भस्स्तष्ट्क के उजातवान फनने के साथ ही आऩकी सोच फदरती है । सोच के फदरने से आऩका जीवन बी फदरने रगता है । मोग से सकायत्भक सोच का प्रवकास होता है । मोगासन शयीय के अांग एव उसकी फनावट को दे ख कय फनाए गए है । स्थर त भस्काय , ू व्मामाभ , सूमन िाणामभ आहद मौचगक समऩूणत शयीय को िबाप्रवत कयने के सरए तथा शयीय श्रभ के अबाव को दयू कयने के सरए फनामे गए है । वततभान कार भें व्मस्क्त को योगों से भक् ु त यहने के सरए मोग प्रवग्मान का आश्रम रेना ही ऩडेग। बफना आश्रम सरमे उसे शयीय के योगो से छुट्काया सभरना असांबव सा ितीत होता है ।

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