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VARDHA JILE KE VADAR SAMUDAY KI SAMAJIK - AARTHIK STITHI KA ADHYAYAN

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2018 = 6.371, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFERRED JOURNAL, JULY-AUG, 2019, VOL- 7/52

वधधा जिले के वडधर समदु धय की सधमधजिक –आजथाक जथथजि कध अध्ययन कजविध नध. खोब्रधगडे शोध छात्रा (पीएच.डी. शशक्षा शास्त्र ), शशक्षा शिभाग, महात्मा गा​ांधी ाऄांतरराष्ट्रीय शहदां ी शिश्वशिद्यालय, िधा​ा, महाराष्ट्र., ाइ.मेल : kavitakhobragade18@gmail.com Abstract

प्रस्ततु शोध प्रत्र में िधा​ा शजले के िडार समदु ाय की सामाशजक और ाअशथाक शस्थशत का ाऄध्ययन शकया गया हैं । िडार महाराष्ट्र राज्य में शिमक्त ु जनजाशत में से एक शनम्न घमु क्कड़ कहे जाने िाली जनजाशत हैं । िडार समदु ाय में तीन ाईपजाशत शजसमें गाड़ी िडार, माती िडार, पत्थर िडार हैं । व्यिसाय के कारण तीन ाईपजाशत में िर्ग्रीकृ त हुए ाआस समदु ाय का ाआशतहास बहुत परु ाना हैं । भारत के लगभग सभी राज्यों में यह समदु ाय ाऄलग-ाऄलग नामों से शनिाशसत हैं । ाआस समदु ाय की सभी राज्यों में सामाशजक और ाअशथाक शस्थशत ाऄत्यांत गांभीर हैं । सामाशजक न्याय और ाऄशधकाररता सरकार ने शिमक्त ु , घमु ांतु और ाऄधा-घमु ांतु जनजाशतयों (एनसीडीएनटी) के शलए जनिरी 2015 में एक राष्ट्रीय ाअयोगका गठन शकयाथा शजसके ाऄध्यक्ष ाआदाते महोदय शजन्होंने २०१८ में ाऄपनी प्रस्तुत ररपोटा भी ाआस समदु ाय की समस्या पर प्रकाश डाला हैं । िडार समदु ाय का ाईल्लेख शसन्धु सभ्यता मे , बौद्ध काल में , जैन काल और १२ िीं शताब्दी तक एक क्षशत्रय के रूप में शमलता हैं । िडार समदु ाय ने भारतीय गुफाओ ां में शजस कला कौशल्य का प्रदशान शकया है िह शिश्व स्तर पर भारतीय सा​ांस्कृ शतक सांशचता का शदग्दशान कर रहा हैं । लेशकन शिशटश काल में ाआस समदु ाय को ाअपराशधक करार देकर समाज और गाि-ां शहरों के बाहर कर शदया । ाईस समय से ाआस समदु ाय की ाअशथाक और सामाशजक शस्थशत शबकट रही हैं । ाअजादी के ाईपरा​ांत समदु ाय का सिा​ागीण शिकास ाऄपेशक्षत रहा हैं पर ितामान तक ाआस समदु ाय के शस्थशत में ाईनके सामाशजक सशशक्तकरण में काफी बदलाि जरुरी हैं ाआसी बदलाि को मद्देनजर रखते हुए प्रस्ततु शोध व्दारा िडार समदु ाय की सामाशजक-ाअशथाक शस्थशत का ाऄध्ययन कर शोधकती ने समदु ाय की सध्य शस्थशत और ाईसमें में हुए बदलाि को देखा हैं । प्रस्तुत शोधके ाईद्देश्य -1.िधा​ा शजले के िडार समदु ाय की रूपा​ांतररत प्रकृ शत और ितामान समस्या का ाऄध्ययन करना। 2. िडारसमदु ायकी ाअशथाक शस्थशत का ाऄध्ययन और शिश्लेषण करना । ३.िडारसमदु ायकीसामाशजकशस्थशतऔर ितामान में हुए बदलाि का​ाऄध्ययनकरना । शोधप्रश्न- 1.िडार समदु ाय की रूपा​ांतररत प्रकृ शत क्या हैं ? 2. िडार समदु ाय की ितामान समस्याएां क्या-क्या हैं ?3.िडार समदु ाय की ाअशथाक शस्थशत कै सी हैं? 4. ितामान में ाअशथाक शस्थशत में क्या बदलाि ाअए हैं ? 5. ाअशथाक शस्थशत के कारण ाईनके सामाशजक जीिन पर क्या प्रभाि हैं ? 6. िडारसमदु ायकीाअशथाकशस्थशतमें क्यासधु ार ाअए हैं ?7. िडारसमदु ायकीाअशथाकशस्थशताईनके शिकासपरक्याप्रभािकररहीहैं ?8.िडार समदु ाय की सामाशजक शस्थशत कै सी है ?9. िडारसमदु ायके सामाशजकशस्थशत में क्या-क्या बदलाि हुए हैं ? 10. क्या िडार समदु ाय ाअज भी रोजगार हेतू स्थानान्तरण करता है 11. ितामानमेंिडारसमदु ायकामख्ु यव्यिसायक्याहैं ? 12. क्यािडारसमदु ायकोाऄन्यशिकशसतसमाजसहजतासेशस्िकारता है या​ाँ ाआस समदु ाय को ाअज भी गोाँिों के बाहर जग्ु गी-झोपड़ीयों में शनिास करना पड़ताहै ?13.क्यािडार समदु ाय के शनरन्तर शिस्थापन और स्थानातां रण में कुछ बदलाि ाअए हैं ?योजना एिां शियाशिशध : शोध प्रशिशध:प्रस्ततु शोध काया की प्रकृ शत मल ू ताः गणु ात्मक हैं । शोध की शिशभन्न प्रशिशध में से िृत्तात्मक शोध शिशध का चयन शकया गया है । िृत्तात्मक शोध शिशध सामाशजक िास्तशिकता को जानने के शलए प्रदत्त् ों के सांकलन, शिश्लेषण तथा प्रस्तुशतकरण का एक ाऄांग हैं ।िृत्तात्मक शोध शिशध िस्तुत: गुणात्मक ाऄनसु न्धान का िह प्रकार है शजसमें शकसी एक ाआका​ाइ का गहन तथा यथासभां ि पणू ा ाऄध्ययन शकया जाता हैं । यह शिशध िडार समदु ाय की सामाशजक–ाअशथाक शस्थशत को जानने हेतु ाईपयक्त ु है । ाऄध्ययन क्षेत्र के शसशमत होने के कारण ाआस ाऄध्ययन में सक्ष्ू मता तथा गहरा​ाइ Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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से िडार समदु ाय के चयशनत ाआका​ाइ के व्यिहार प्रशतमानों एिां ाईसे प्रभाशित करने िाले कारकों का शिस्तृत गणु ात्मक ाऄध्ययन करना सम्भि हैं । शोध का पररसीमन:प्रस्तुत शोध की प्रकृ शत िृत्तात्मक हैं एिां यह शोध ाऄध्ययन महाराष्ट्र राज्य के िधा​ा शजले के िडार बस्ती (िडारिाडा) में शनिाशसत िडार समदु ाय के लोगों तक शसशमत हैं । जनसांख्या (Population):प्रस्तुत शोध ाऄध्ययन में िधा​ा शजले के कुल 6 तहसील में से िधा​ा तहसील के कुल 5 ाआलाकों में से ाअिी नाका पररसर के एक (1) िडार ाआलाकें के 50 पररिार (समहू )का चयन शकया है । शजसमें कुल १०० (झोपशड़या​ाँ) घर है । शजसकी कुल जनसाँख्या 500 हैं ।प्रशतदशान :प्रस्तुत शोध ाऄध्ययन में िधा​ा शजले के कुल 6 तहसील में से िधा​ा तहसील के कुल 5 ाआलाकों में से ाअिी नाका पररसर के एक (1) िडार ाआलाकें के िडारिाडा समदु ाय (समहू )का चयन प्रशतदशान के रूप में शकया है । शोध ाईपकरण एिां तकनीकी : 1. ाईद्देश्य-1 एिां ाईद्देश्य 2- की प्राशि के शलए शोधाथी द्वारा साक्षात्कार ाऄनसु चू ी के माध्यम से ाअाँकड़े एकशत्रत शकए गए हैं ।शोध ाईपकरण के रूप में साक्षात्कार ाऄनसु चू ी का ाईपयोग शकया गया हैं । मुख्य ब िंदु : िधा​ा, िडार, समदु ाय, सामाशजक, ाअशथाक, Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com

प्रथिधवनध : विविधता में एकता भारतीय संस्कृ वत की एक ऄनठू ी देन रही हैं । प्राचीन काल में जावत संरचना को चार िणों में विभावजत वकया गया था। आसके ऄतं गगत ब्राह्मण, क्षविय, िैश्य और शद्रू थे, वजसमें चार स्तरों में सभी मनष्ु यों को विभावजत वकया गया था । भारतीय समाज में िरण् और जावत अधाररत सामावजक सरं चना होने के प्रमाण वमलते हैं । आसके प्रमाण िैवदक सावहत्य, महाभारत, रामायण, मनस्ु मृवत और स्मृवतग्रथं ों में स्पष्ट वदखाइ देता हैं । विश्व के ऄवधकतर देशों में सामावजक सरं चना के ऄतं गगत ग्रामीण, नगरीए और अवदिासी अवद स्तरों पर मानिीय सामावजक जीिन के िगीकरण की संरचना वदखाइ देती हैं। सामावजक संरचना के ऄनसु ार प्रत्येक स्तर की जीिनयापन पद्धवत, भाषा, धमग, रीवत-ररिाज, खानपान, वि​िाह विवध अवद में वभन्नता हैं। भारत में परस्पर एकदसू रों पर वनभगर रहना भारतीय समाज की मख्ु य प्रकृ वत हैं। विकास की गवत में परस्पर सहायता और तेज गवत ऄत्यांवधक महत्िपणू ग हैं (एस.एन. विपाठी2014) । भारत में सापेक्ष विभक्त समदु ाय देश के प्रत्येक प्रांत में है जो विकास की प्रविया में पीछे रह गए है और वजन्हें ऄपने भारत देश में विमक्त ु जनजावत, घमु ंत,ू घमु क्कड़ ऄदधग् घमु न्तु अवद नामों से जाना जाता हैं। विमक्त ु जनजावत के ऐवतहावसक ऄध्ययन से पता चलता है वक भारत की सबसे सभ्य और प्राचीन संस्कृ वत वसंधू सभ्यता में विमक्त ु जनजावत विद्यमान थी और ईसका ईल्लेख भीवमलता है। आसी संस्कृ वत से जडु ी गोर, बंजारा, गोंड और िडार अवद की संस्कृ वत वजसकी सच्चाइ परू ी दवु नया भर में हैं । आस सस्ं कृ वत के बारे में बौद्ध एिं जैन धमो मे भी ईल्लेख वमलता है। १२ िीं शताब्दी से 17 िीं शताब्दी तक आस Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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समदु ाय के बड़े–बड़े महान योद्धाओ ं के कायों का पररचय आवतहास ऄध्ययन से वमलता हैं। आस समदु ाय के एक महान योद्धा वितीय धमागगुरू का मन्ि ईनकी भाषा में यह है की, “ वशकत वशकित वशकी राज धतािट वशके त वशकू जेरी राज पनु इ वधयान पनु इ ” । (ऄथागत “जो समाज वशक्षा प्राप्त करके ऄपने समाज को वशवक्षत करता है िही समाज राजिैभि प्राप्त कर सकता हैं। ) ” ईपरोक्त वि​िरण से स्पष्ट होता हैं की यह समदु ाय वशक्षा के महत्ि को समझता था । यह समदु ाय कुशल, वशवक्षत, सगं वठत, कला वनपणु और दरू दृवष्ट वनवहत कुरीवतयों से परे विकास की समझ रखता था । परन्तु समय के साथ यह समदु ाय ऄपने विकास से कोसों दरू चलता गया और वब्रवटश काल में आस समदु ाय को अपरावधक करार देकर गािं और शहर के बाहर रखा गया (लष्कर,व्ही.सभु ाष,(2013)। विमक्त ु जनजावत में से एक जनजावत महाराष्र में िडार नाम से वनिावसत हैं। भारत में २०११ के जनगणना अँकड़ो के ऄनसु ार डी-नोवटफाआड या विमक्त ु जनजावत समदु ाय की अबादी १३.5 करोड़ ऄथागत भारत की कुल अबादी के लगभग 3 प्रवतशत (सामावजक न्याय विभाग ऄहिाल ऄनसु ार) हैं। भौगोवलक दृष्टी से यह समदु ाय भारत के लगभग सभी राज्यों में वस्थत हैं। अंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कनागटका, गुजरात और महाराष्र अवद राज्यों में ऄवधक संख्या में वनिावसत हैं। आस समदु ाय की भारत में विशेष पहचान नहीं है और जनसँख्या के ऄनसु ार आनके यथाथग अँकड़े भी कहीं ईपलब्ध नहीं है। हाल ही में ईत्तरप्रदेश की सरकार ने आस समदु ाय के विकास को लेकर एक सवमवत गवठत की और ईसमें ईन्होंने कहा की सबसे पहले आस समदु ाय की पहचान कर आनकी कुल अबादी याँ जनसँख्या के अधार पर अँकड़े एकवित कर ईनके वनिास हेतू मकान बनिाएं जाए। सवमवत के सवचि ने ईन्हें घमु न्तु कहकर ईनकी पररभाषा स्पष्ट की और वजला स्तर पर आस समदु ाय के अँकड़े एकवित करने का दावयत्ि वजला प्रमख ु प्रशासवनक ऄवधकारीयों पर सौंपा हैं। यह समाज वशक्षा से आसवलए कोंसो दरू है क्योंवक यह समदु ाय रोजगार हेतसू तत स्थानातं रण करता रहा हैं। (www.पविका .कॉम लखनउ न्यजू ) िडार समदु ाय का ईदगम स्थान ओररसा प्रांत हैं। सामान्य जनगणना सन 1871 की ररपोटग के ऄनसु ार ओड समदु ाय के लोग ओररसा प्रांत के हैं। 260 इसा पिू ग में कवलंग के राजा और राजा ऄशोक के बीच यद्ध ु हुअ था वजसमें ओररसा के स्थावनक ओड समदु ाय के लोग मारे गये थे।ईसके तुरन्त बाद यह ओड लोग ओररसा प्रांत Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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छोड़कर चले गए थे ओड लोगों का मल ू वनिास स्थल ओररसा प्रान्त हैं(ह-ँ एन-त्संग चीनी यािी- भारत यािी िणगन और प्रा. विनायक लष्कर-िडार संस्कृ वत ) । ओड का ओवडया, िोड्रा और िड्रा शब्दविस्तार से िडार आस तरह आस समदु ाय को महाराष्र में अज िडार नाम से जाना जाता हैं। ितगमान में यह समदु ाय भारत के विवभन्न राज्य जैसे अंध्र प्रदेश, कनागटक, तवमलनाडू और महाराष्र के ऄवधकतर शहरी आलाकों में पायें जाते है । महाराष्र में ितगमान में 14 विमक्त ु जनजावत और ३० घमु ंतू जनजावत हैवजनकों 3 % अरक्षण हैं । बौद्ध काल, जैन काल और वहन्दू काल अवद सभी काल में िडार समदु ाय ने गफ ु ाओ ं में वजस कला कौशल्य का प्रदशगन वकया है िह लाज़िाब और विश्व स्तर पर भारतीय सास्ं कृ वतक सवं चता का वदग्दशगन कर रही हैं । आस समदु ाय के लोगों ने देश के विकास और राष्र के वनमागण में ऄपना बहुमल्ू य योगदान वदया है । आस समदु ाय के लोगों ने भारत देश के बच्चों को वशवक्षत करने के वलए विद्यालय, कॉलेज, महाविद्यालय तथा ईद्योग वनमागण हेतू बड़े-बड़े गोंडाउँन, फावक्रज, रावष्रय महामागग, ऄस्पताल एिं देश के लोगों की धावमगक भािनाओ ं को मजबुत बनाने के वलए मवन्दर,मवज्जद, चचग अवद के साथ गुफांओ,ं कँु ए, डैम, राजमहल, हैण्डपंप् और ऐवतहावसक विवभन्न िास्तु जो वदन-रात मेहनत कर ऄपनी कुशलता से देश की सन्ु दरता को बनाएं रखने का ऄलौवकक कायग वकया हैं (सतीश पिार- िडार समदु ाय और संस्कृ वत) । महधरधष्ट्र में जवमक्त ु िनिधजि सच ू ी महाराष्र में विमक्त ु जनजावत (vj) की कुल संख्या 14 हैं और आस प्रिगग को 3% अरक्षण हैं वजसमें वनम्नवलवखत जनजावत शावमल हैं । क्रम ांक 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11

ज ति बेरड बस्िर भ मट कै कड़ी कांज र भ ट कट बू बांज र प रधी र ज प रधी र जपिू भ मट र मोिी

सम्बतधि अन्य ज ति न ईक व डी , िलव र, व ल्मीतक सांचल ु ू वड र भ मटी , तगरणी, क म टी, प थरूट, टक री, उछले घटां ी चोर घोटले कोरव , म कड व ले, प मलोर छ र , कांज र, गोर बांज र , लम्ब द , लभ नी, चरण बांज र , मथरु , लभ ण प ल प लखी ग व प रधी , हरण तिक री परदेिी भ मट , परदेिी भ मट -

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वड र

ग ड़ी वड्ड र ,ज ति वड्ड र, म िी वड्ड र, प थर वट, सांगि र ि , दगड फोडू, स लन व घरी 13 छप्पर बन्द 14 व घरी स्त्रोत ; ऄनसु वू चत जावत /जनजावत अदेश(सधु ार काननू 1976 का 108 में से पररवशष्ट -1 में से भाग- १० में ) महधरधष्ट्र रधज्य द्वधरध जनधधा ररि जवजिन्न वगों की सम्बजधि आरक्षण सच ू ी प्रवगग

सतां िप्त नम SC ST OBC SBC VJ –A NT -B NT –C NT –D

अनसु तू चि ज ति अनु सतू चि जनज ति अन्य तपछड़ वगग तविेष तपछड़ वगग तवमक्त ु ज ति-अ घमु न्िु ज ति –ब घमु िां ू ज ति –क घमु न्िु ज ति ड स म तजक और िैतिक तपछड़ प्रवगग कुल (विमक्त ु जावत,घमु ंतू जनजावत,ऄन्य वपछड़ा जावत

आरिण ज ति

जनसँख्य

प्रति​ि​ि

13 % 7% 19% 2% 3% 2.5% 3.5% 2% 16%

1,32,75,898 1,05,10,213

11.81% 9.35 %

59 47 350 7 14 37 1 1 1 (Maratha)

68 %

और विशेष वपछड़ा जावत कल्याण संचालनालय, महाराष्र

राज्य ,पनू े) सामावजक न्याय और विशेष सहाय्य विभाग महाराष्र सरकार (िमांक:सीबीसी-10\2006\प्र.ि.94\मािक-5) समस्या कथन (Statement of the topic)“ िधाग वजले के िडार समदु ाय की सामावजक-अवथगक वस्थवत का ऄध्ययन ” शोध के उद्देश्य (Objective of the Research)– 1.िधाग वजले के िडार समदु ाय की रूपांतररत प्रकृ वत और ितगमान समस्या का ऄध्ययन करना। 2. िडारसमदु ायकी अवथगक वस्थवत का ऄध्ययन और विश्लेषण करना । ३.िडारसमदु ायकीसामावजकवस्थवतऔर ितगमान में हुए बदलाि काऄध्ययनकरना ।

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योिनध एवं जियधजवजध (Plan andProcedure) शोध प्रजवजध (Research Method): प्रस्तुत शोध कायग की प्रकृ वत मल ू तः गुणात्मक हैं । शोध की विवभन्न प्रविवध में से िृत्तात्मक शोध विवध का चयन वकया गया है । िृत्तात्मक शोध विवध सामावजक िास्तविकता को जानने के वलए प्रदत्त् ों के संकलन, विश्लेषण तथा प्रस्तुवतकरण का एक ऄंग हैं । िृत्तात्मक शोध विवध िस्तुत: गुणात्मक ऄनसु न्धान का िह प्रकार है वजसमें वकसी एक आकाइ का गहन तथा यथासभं ि पणू ग ऄध्ययन वकया जाता हैं । यह विवध िडार समदु ाय की सास्ं कृ वतक – शैवक्षक वस्थवत और आस समदु ाय के ऄन्य पक्ष को जानने हेतु ईपयक्त ु है । ऄध्ययन क्षेि के वसवमत होने के कारण आस ऄध्ययन में सक्ष्ू मता तथा गहराइ से िडार समदु ाय के चयवनत आकाइ के व्यिहार प्रवतमानों एिं ईसे प्रभावित करने िाले कारकों का विस्तृत गुणात्मक ऄध्ययन करना सम्भि हैं । शोध कध पररसीमन: प्रस्तुत शोध की प्रकृ वत िृत्तात्मक हैं एिं यह शोध ऄध्ययन महाराष्र राजय् के िधाग वजले के िडार बस्ती (िडारिाडा) में वनिावसत िडार समदु ाय के लोगों तक वसवमत हैं । जनसंख्या (Population):प्रस्तुत शोध ऄध्ययन में िधाग वजले के कुल 6 तहसील में से िधाग तहसील के कुल 5 आलाकों में से अिी नाका पररसर के एक (1) िडार आलाकें के 50 पररिार (समहू )का चयन वकया है । वजसमें कुल १०० (झोपवड़याँ) घर है । वजसकी कुल जनसँख्या 500 हैं । प्रवतदशगन (Sample) :प्रस्तुत शोध ऄध्ययन में िधाग वजले के कुल 6 तहसील में से िधाग तहसील के कुल 5 आलाकों में सेअिी नाका पररसर के एक (1) िडार आलाकें के िडारिाडा समदु ाय (समहू )का चयन प्रवतदशगन के रूप में वकया है । शोध उपकरण एवं िकनीकी (Tools andTechniques) 1)

ईद्देश्य-1 एिं ईद्देश्य 2- की प्रावप्त के वलए शोधाथी िारा साक्षात्कार ऄनसु चू ी के माध्यम से अँकड़े

एकवित वकए गए हैं ।शोध ईपकरण के रूप में साक्षात्कार ऄनसु चू ी का ईपयोग वकया गया हैं । सधरधंश और जनष्ट्कषा : ईद्देश्य 1 : िधाग वजले के िडार समदु ाय की रूपांतररत प्रकृ वत और ितगमान समस्या का ऄध्ययन करना। स्थानान्तरण की रूपांतररत प्रकृ वत : िडार समदु ाय व्यिसाय हेतु एक गाँि से दसु रे गाँि स्थानान्तरण करता था वजसके प्रकृ वत में बदलाि अकर िडार समदु ाय का व्यिसाय हेतु स्थानान्तरण लगभग कम हो गया हैं वजसके Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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कारण समदु ाय स्थायी हो गया हैं । समदु ाय के स्थानान्तरण के कारण ईनकी वनिास की समस्या कम हो गइ हैं । जग्ु गी-झोपडी में रहना, वनम्न स्तर का जीिन जीना, ईन्नत समाज से दरू होने के कारण सामावजक विकास की समझ नहीं होना, स्कूल में नामांकन नहीं होने कारण वशक्षा से दरू रहना अवद सभी समस्या के िल व्यिसाय हेतु स्थानान्तरण के कारण होती थी ।समदु ाय के स्थायी होने से यह समदु ाय सामावजक समझ को समझने लगा हैं । व्यवसधय की रूपधंिररि प्रकृजि : िडार समदु ाय का पारंपररक व्यिसाय खोद कायग, नक्षी कायग, वमट्टी के बतगन बनाना, पत्थर की मवू तग एिं जाता –िरिटा बनाना , खदान से पथर वनकलना, मवन्दर –गफ ु ाओ ं में कला कुशलता से नक्षी कायग करना अवद सभी पारम्पाररक कायग लगभग समाप्त हो गए । ऄब स्थावनक आलाकों में नल पाआप लाआन की खोदाइ , जमींन की खोदाइ , मकान के वलए खोदक ् ायग अवद मेहनत के कायग समदु ाय के परु​ु ष करता हैं पर अमदनी बहुत कम वमलने के कारण ऄपनी मल ु भतु जरूरतों को पणू ग नहीं कर पाता हैं । समदु ाय की मवहला भंगार ईठाने का कायग सबु ह 2-३ घन्टे करती हैं वजसकी अमदनी ठीक-ठाक होती हैं।सही मायने में देखा जाए तो दोनों की अमदनी वमलाकर घर का खचाग अराम से चल सकता हैं लेवकन िधाग वजले के िडार बस्ती में ज्यादा तर घरों में देशी शराब बचने का काम वकया जाता हैं वजसमें बेचेने िाले ऄच्छे पैसे भी कमा लेते हैं पर िडार बस्ती की ऄवधकतर मवहला और परु​ु ष दोनों शराब वपने लगे हैं वजसके के कारण पररिार की अवथगक वस्थवत वबगड़ती हैं । िडार बस्ती की मवहला का विषय ऄवधक वचंताजनक हैं । भविष्य में यह मवहला बच्चों के सामाजीकरण और विकास में बाधाएँ सावबत होगी ।िडार बस्ती में यह रूपांतररत प्रकृ वत और समस्या पाइ गइ हैं । धमा के प्रिधव की रूपधंिररि प्रकृजि : िडार समदु ाय पर शरू ु से वहन्दू धमग का प्रभाि था । नामकरण विवध ,िास्तुपजू न, वि​िाह, मृत्यु विवध अवद सभी विवध वहन्दू धमग के अधार पर वकए जाते थे । लेवकन िधाग वजले के िडार बस्ती में शोध दरम्यान पाया गया की िडार समदु ाय के ऄवधकतर लोगों ने विचन धमग का वस्िकार वकया हैं । ईनका कहना हैं की हमारे घर पर येशु के कारण शावन्त अयी हैं । हमारे घर में पहले विवभन्न देिी-देिताओ ं की वजसमें दगु ाग देिी जी की पजू ा की जाती थी पर ईस समय हमारे घर में शावन्त नहीं थी । फादर ने हमारे बच्चों को स्कूल में डाला हमारे बच्चें पड़ रहे है । ऄिलोकन से पता चला हैं विश्चन वमशनरी व्दारा विद्यालय और अश्रम स्कूल चलाए जाते हैं वजसमें िडार बच्चों को वशवक्षत वकया जाता हैं । िडार समदु ाय स्थानान्तरण के कारण वशक्षा से कोसों दरू रहा हैं पर आस धमग के लोगों ने ईनकी वशक्षा हेतु प्रयास करने के कारण िडार समदु ाय आस धमग से अकवषगत होकर ज्यादा तर िडार आस धमग को मानने लगे हैं । धमग चाहे जो हो पर ईनके विकास में बदलाि की Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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झलक वदखाइ देती हैं । िडार समदु ाय में ऄवधकतर लोगों ने वहन्दू धमग का त्याग कर विश्चन धमग को आसवलए ऄपनाना की ईनके बच्चे पड़ रहे हैं ऄथागत िडार समदु ाय वशक्षा के महत्ि को समझने लगा हैं आस रूपांतररत बदलाि को देखा गया हैं। वेशिूषध की रूपधंिररि प्रकृजि : िडार समदु ाय की मवहला चोली और चड़ू ी नहीं पहनती थी। समाज में आस प्रथा का ऄवधक प्रभाि था और चोली पहनना पाप हैं आस धारणा के कारण समाज ईसका कठोर विरोध करता था।िधाग िडार बस्ती में लगभग सभी मवहला चोली और चड़ू ी पहनती हैं और सौन्दयग सावहत्य का ईपयोग कर सन्ु दर वदखना भी चाहती हैं । िडार मवहला भगं ार जमा करने का कायग करती हैं और भगं ार ईठाने ऄके ली शहर के हर कोने में जाती हैं शरीर पर चोली नहीं होना ईसके वलए ऄसरु वक्षत था पर आस समाज ने आस प्रथा का विरोध कर ईसमें सकारात्मक बदलाि के रूपातं ररत प्रकृ वत को देखा गया हैं । वडधर समुदधय की विामधन समथयधएँ : 1.

िडार समदु ाय के पास खदु का मकान यां जमींन न होने कारण बस्ती में वनजी मावलक की जमींन पर रहने

के कारण पक्का मकान बना नहीं पाते वजसके कारण टॉयलेट,शौचालय, वपने का पानी और नाली की सवु िधा वमल नहीं पाती हैं वजससे िडार समदु ाय विवभन्न समस्याओ ं का सामना कर रहा हैं और वनम्न स्तर का जीिन यापन कर रहा हैं । 2.

िडार समदु ाय की ितगमान और ऄवधक वचंताजनक समस्याओ ं में िडार मवहला का शराब पीना हैं

वजससे िडार बच्चों का भविष्य वचंता का विषय हो रहा हैं । 3.

िडार समदु ाय के बच्चों की वशक्षा की वस्थवत ।

4.

िडार समदु ाय का वनम्न अवथगक स्तर ।

उद्देश्य 2 :वडधरसमुदधयकी आजथाक जथथजि कध अध्ययन और जवश्ले षण करनध । 1.

अधवु नकीकरण के कारण पारंपररक व्यिसाय लगभग बंद पड़ गए है । िडार समदु ाय खोदाइ के कायग

जैसे घर, मवं दर, महल, राजिाड़े , स्कूल अवद कायग कला कुशलता के साथ पहले से करते अए हैं वजसके वलए िें स्थानातरण करते थे । पारंपररक व्यिसाय पर ऄब स्थावनक आलाकों में वमला कोइ भी व्यिसाय जैसे नल पाइप लाआन खोदना, मकान की खोदाइ, जमींन खोदाइ अवद मेहनत से भरे कायग यह समदु ाय करता हैं पर आटेररयर डेकोरे टर के कारण ईन्हें के िल खोद कायग हेतु कम पैसे में काम वदया जाता कुशल होने के बािजदू भी कम Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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अमदनी में ईन्हें काम करना पड़ता हैं । प्राप्त अमदनी से अवथगक जरूरत परू ी नहीं हो पाती । रोजगार प्राप्त करना मवु श्कल होता हैं ।ऄिलोकन से पाया गया की हाल ही में िडार बस्ती में ज्यादा तर घरों में देशी शराब बेचने के व्यिसाय ऄवधक प्रमाण में चलाए जाते हैं । िडार समदु ाय की मवहला और परु​ु ष दोनों शराब पीती हैं वजसके कारण ईनकी अवथगक वस्थवत और गंभीर होते जा रही हैं । घर में मवहला भगं ार ईठाने का कायग कर पररिार में अवथगक साह्य करती हैं । बच्चों की पढाइ , बड़ा पररिार और घर का खचाग चलाना मवु श्कल हो जाता हैं । परु े िडार बस्ती में कोइ सरकारी नौकरी पर नहीं पाया गया । िेतन रोज के काम का रोज वमलता है वजस वदन काम नहीं ईस वदन िेतन नहीं । सप्ताह में एक यां दो वदन ही कम वमलता हैं । बाररश के वदनों तो हालात और गंभीर होती हैं । िडार बस्ती में गृह व्यिसाय वदखाइ नहीं वदए । प्राप्त अमदनी से घर का खचाग और वनयोजन करना मवु श्कल हो जाता है । ितगमान रोजगार से समदु ाय सन्तुष्ट नहीं हैं । 2.

िडार समदु ाय ऄपनी रोजगार से बहुत कम अमदनी पाता है । घर का खचाग और बचत करना ऄसम्भि

बताते हैं । बैंक में खाता, RD, हैं पर ईसमें पैसे नहीं जमा हो पाते । बचत गट से पैसे ईठाए जाते हैं । मवहला बचत गट चलाती हैं । 3.

िडार समदु ाय ऄपनी अय का सबसे ऄवधक पैसा शराब, जअ ु और ऄपने व्यसन पर खचग करता हैं ।

पररिार की मल ु भतु जरूरतों को पणू ग करने में ऄसक्षम हैं । बच्चों की पढ़ाइ का महत्ि जानता हैं पर पढ़ाइ पर ऄवधक खचग करना नहीं चाहता । 4.

िडार समदु ाय के मकान पक्के इट के नहीं हैं पर जग्ु गी झोपडी से ऄच्छे हैं । लेवकन मकान की जमींन खदु

की नहीं है कब्ज़ा कर कोइ सरकारी जमींन पर तो कोइ वनजी मावलक की जमींन पर छोटे-छोटे घर बनाकर वकसी तरह ऄपना वनिास कर रहे हैं । एक घर में 8 से १० लोग छोटे –छोटे घर में एकसाथ रहते हैं । यहाँ वपने के पानी की व्यिस्था नहीं हैं । जल प्रावधकरण जगह नाम पर नहीं होने के कारण वपने का पानी नहीं देती बहुत दरू से हैंडपपं से पानी की व्यिस्था यह समदु ाय करता हैं । आस समदु ाय की सबसे मख्ु य समस्या शौचालय और टॉयलेट की हैं । नाली की व्यिस्था न होने कारण बस्ती में बहुत गन्दगी हैं वजसके कारण कॉलरा, मलेवलया, बुखार अवद जैसी बीमारी और शरीर पर की जख्म जल्दी ठीक नहीं होती हैं यह समदु ाय बताता हैं ।ऄथागत आस समदु ाय की स्िास्थ संबधी समस्या ऄत्यंत वबकट हैं । िडार समदु ाय के विकास हेतु विवभन्न सरकारी योजनायें हैं और कुछ योजनाओ ं की जानकारी समदु ाय को है पर स्िंय की जमींन और जरूरतों के काग़ज पि नहीं होने कारण यह समदु ाय सरकारी Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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योजनाओ ं का लाभ नहीं ईठा पाता हैं । सरकारी घरकुल योजना का यह समदु ाय खदु की जगह नहीं होने कारण लाभ नहीं ईठा पाते और खदु की जमींन खरीदने की अवथगक वस्थवत नहीं अवद सभी कारण आनके विकास में प्रभाि कर रही हैं । 5.

िडार समदु ाय के ऄवधकतर लोगों के पास राशनकाडग हैं पर बी.पी.एल. काडग कम लोगों के पास हैं ।

राशन काडग से प्राप्त ऄनाज कुछ प्रवतशत साह्य करती हैं पर महीने भर की जरूरत परू ी नहीं होती हैं । 6.

िडार बस्ती में लगभग घरों में वबजली कनेक्शन वदखाइ देते हैं पर वबजली वबल ईनके नाम पर नहीं अता

हैं । कुछ लोगों ने ऄिैध वबजली कनेक्शन लगाए हैं । लगभग घरों में पख ं ा, मोबाइल, गैस, टी.व्ही, रे वडओ अवद वदखाइ देते हैं पर रे फ्रीजरे टर, पानी का पपं , वसलाइ मशीन, वबजली की आस्त्री, कूलर अवद वदखाइ नहीं देते हैं । 7.

िडार बस्ती िधाग शहर के बीचों-बीच हैं और माके ट आलाका पास में हैं । िडार बस्ती में हैंडपपं यां

सामदु ावयक कुअं नहीं हैं । नगरपावलका का पानी नहीं हैं। सब्जी और ऄनाज की दक ु ान बस्ती के पास हैं । सरकारी ऄस्पताल 2 वकलीमीटर की दरु ी पर हैं और । सधरधंश :ईपरोक्त अवथगक वस्थवत से पता चलता हैं की िडार समदु ाय के अवथगक वस्थवत में ितगमान तक विशेष सधु ार नहीं हुए हैं । अवथगक वस्थवत व्यवक्त के सिा​ांगीण विकास पर प्रभाि करती हैं । िडार समदु ाय की अवथगक वस्थवत वनम्न स्तर पर हैं । उद्देश्य ३ :वडधरसमदु धयकीसधमधजिकजथथजिऔर विामधन में हुए बदलधव कधअध्ययनकरनध 1.

िडार समदु ाय में अयु १८ से ४० अयु िगग के ऄवधक लोग हैं । अयु ६० से ८० िषग के लोग कम हैं ।

िडार बस्ती में एक घर में कम से कम ३ बच्चे और ज्यादा से ज्यादा 6 बच्चे ऄथागत जन्म दर ऄवधक हैं । कुटुंब वनयोजन का ऄभाि वदखाइ देता हैं । कुटुंब वनयोजन हेतु ऄस्पताल और सरकारी योजनाओ ं का लाभ बहुत कम लोग लेते हैं । 2.

स्थानान्तरण करते-करते िडार समदु ाय ऄब स्थायी वनिावसत हो गया हैं । ितगमान में स्थानातंरण के िल

घर के परु​ु ष वकसी व्यिसाय हेतु कुछ वदन के वलए करते हैं और पनु : घर िावपस अते हैं । ऄब स्थायी वनिास करने लगे हैं । पर ईनके मकान पक्के इट के नहीं हैं पर जग्ु गी झोपडी से ऄच्छे हैं । लेवकन मकान की जमींन खदु की नहीं है कब्ज़ा कर कोइ सरकारी जमींन पर तो कोइ वनजी मावलक की जमींन पर छोटे-छोटे घर बनाकर वकसी तरह ऄपना वनिास कर रहे हैं । एक घर में 8 से १० लोग छोटे –छोटे घर में एकसाथ रहते हैं । यहाँ वपने के पानी की Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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व्यिस्था नहीं हैं । जल प्रावधकरण जगह स्िंय की नहीं होने कारण वपने का पानी नहीं देती बहुत दरू से हैंडपंप से पानी की व्यिस्था यह समदु ाय करता हैं । आस समदु ाय की सबसे मख्ु य समस्या शौचालय और टॉयलेट की हैं। नाली की व्यिस्था न होने कारण बस्ती में बहुत गन्दगी हैं वजसके कारण कॉलरा,मलेवलया, बुखार अवद जैसी बीमारी और शरीर पर की जख्म जल्दी ठीक नहीं होती हैं यह समदु ाय बताता हैं । ऄथागत आस समदु ाय की स्िास्थ संबधी समस्या ऄत्यंत वबकट हैं । सरकारी घरकुल योजना का यह समदु ाय खदु की जगह नहीं होने कारण लाभ नहीं ईठा पाते और खदु की जमींन खरीदने की अवथगक वस्थवत नहीं अवद सभी कारण आनके विकास में प्रभाि कर रही हैं । 3.

िडार पररिार ऄवधकतर सयक्त ु पररिार में रहते हैं एकसाथ रहना और छोटा कमरा होने कारण घर पर रोज

झगड़े और अवथगकता के कारण सघं षग होते हैं पर आस समदु ाय के अपसी सबंध बहुत ऄच्छे वदखाइ वदए हैं । पररिार में सबका ध्यान रखना, मदद करना, सनु लेना और कहना मानना अवद बातों को देखा गया ।सण – त्यौहारों में सभी लोग एकवित अकर त्योंहार मनाते हैं । िडार समदु ाय में महत्िपणू ग वनणगय घर के परु​ु ष िगग लेते हैं और ईसमें स्त्री िगग का भी वनणगय और सहयोग होता हैं । स्त्री को सन्मान वदया जाता हैं । लड़को के पक्ष में ऄवधक सकारात्मक भवू मका लेते हैं । लड़का-लड़की आस तरह का भेदभाि वदखाइ नहीं देता पर पिु प्राप्त न होने पर गोद लेने की प्रथा हैं । ऄवधकतर पररिार में पिु होने के प्रमाण हैं । 4.

िडार पररिार का स्थानांतरण नहीं के बराबर हैं । पारंपररक व्यिसाय लगभग बंद पड़ गए है । िडार

समदु ाय खोदाइ के कायग जैसे घर, मंवदर, महल, राजिाड़े , स्कूल अवद कायग कला कुशलता के साथ पहले से करते अए हैं ईसके वलए िें स्थानातरण करते थे पर ऄब स्थावनक आलाकों में कोइ भी व्यिसाय जैसे नल पाइपलाआन खोदना , मकान की खोदाइ , जमींन खोदाइ अवद मेहनत के कायग यह समदु ाय करता हैं पर आटेररयर डेकोरे टर के कारण ईन्हें के िल खोद कायग हेतु कम पैसे में काम वदया जाता वजसकी अमदनी कम होने से आनकी अवथगक जरूरत परू ी नहीं हो पाती । ऄिलोकन से पाया गया कीहाल ही में कुछ िषग में िडार बस्ती में ज्यादा तर घरों में देशी शराब बेचने के व्यिसाय ऄवधक प्रमाण में चलाए जाते है वजसके कारण िडार मवहला भी शराब वपने लगी हैं यह समस्या ऄवधक वचंताजनक है । परन्तु व्यिसाय हेतु स्थानातरण बंद हो गया हैं वजससे िे स्थायी हो गए हैं आसवलए स्थानातरण के बाद विस्थापन की समस्या कम हो गइ हैं ।

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5.

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िडार समदु ाय के िेशभषू ा में पररितगन अए है । मवहला िेशभषू ा में साड़ी, ब्लाईज, परकर वदखाइ वदए

और परु​ु ष िेशभषू ा में शटग,पैन्ट, वजन्स अवद का ईपयोग वकया जाता हैं । लड़वकयों के िेशभषू ा में ड्रेस, सलिार सटू वदखाइ वदए हैं । चोली और चड़ू ी नहीं पहनने की प्रथा लगभग बंद हो गयी और आसके वलए समाज से जो विरोध होता था िह भी ऄब बंद हो गया हैं । स्त्री सौन्दयग प्रसाधन के सभी सावहत्य का ईपयोग सन्ु दर वदखने के वलए िडार मवहला करती है । आस समदु ाय की मवहला परु े शरीर पर गोंदती थी पर ितगमान की िडार मवहला शरीर पर नहीं गोंदती हैं यह प्रथा भी लगभग बंद होते हुए वदखाइ देती हैं । 6.

ितगमान में िडार समदु ाय में ज्यादातर वि​िाह अयु के १६ से १८ के बीच हो जाते हैं ।बहुत कम वि​िाह

१२-१४ अयु के बीच पाए गए हैं । िडार समदु ाय में बालवि​िाह जैसी घातक प्रथा वदखाइ नहीं देती है पर ऄपनी जावत के ईपजावत में वि​िाह करने की प्रथा वदखाइ देती है । ईपजावत में ऄपने सगे मामा के बेटे, बुअ के बेटे से भी शादी की जाती है और प्रेमवि​िाह वि​िाह भी पाए गए हैं । वि​िाह वहन्दू विवध से पंवडत व्दारा मंगलाष्ठ्के के साथ संपन्न वकया जाता था पर ऄभी-ऄभी िधाग िडार बस्ती के ऄवधकांश लोगों ने विश्चन धमग का स्िीकार करने के कारण ऄवधकतर घरों में वि​िाह विवध, नामकरण, िास्तुपजू न, मृत्यु विवध और सण–त्यौहार भी विश्चन धमग नसु ार फादर के व्दारा वकए जाते हैं । वि​िाह विच्छे द के प्रकरण ऄवधक वदखाइ देते हैं पर वि​िाह विच्छे द का संघषग बस्ती के जातपंचायत के माध्यम से सल ु झाया जाता हैं बहुत कम प्रवतशत वि​िाह विच्छे द की वशकायत कोटग या न्यायालय तक जाती हैं । ऄवधकतर मामले जातपंचायत व्दारा शांत वकए जाते हैं । जातपंचायत का प्रभाि ऄभी भी आस समदु ाय पर वदखाइ वदया हैं । िडार समदु ाय में जातपंचायत का प्रभाि कभी कम नहीं हुअ हैं ।पनु विगिाह का प्रचलन हैं । एक से ज्यादा शादी करने का ररिाज भी वदखाइ देता हैं । विधिा वि​िाह वदखाइ देते हैं । 7.

िडार समदु ाय के वशक्षा के वस्थवत में कुछ बदलाि पाए गए । स्थानान्तरण के कारण जो समदु ाय वशक्षा

से िवं चत था ईस समदु ाय के बच्चे अज स्थायी हो जाने से विद्यालय में नामावं कत हो गए हैं । िडार बस्ती में लगभग १०० (सौ) से ऄवधक बच्चे पढ़ने िाले हैं ।ईसमें प्राथवमक वशक्षा लेने िाले बच्चे ऄवधक ४० से ५० हैं ।िडार बच्चों के वलए विद्यालय के िार तो खल ु गए पर वशक्षा सम्बन्धी विविध समस्याएँ वदखाइ देती हैं । िडार समदु ाय की मातृभाषा तेलगु /तवमल हैं । महाराष्र में सभी विद्यालय मराठी, वहदं ी माध्यम की हैं । िडार बच्चों की वशक्षा भाषा के कारण प्रभावित हो रही हैं । िडार बच्चों की विद्यालय में ईपवस्थवत बहुत कम पायी गइ हैं ।ऄवभभािक का ऄज्ञान, अवथगक वस्थवत, बस्ती का िातािरण और वशक्षा के प्रवत ईदासीनता अवद ऄनेक कारण Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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िडार बच्चों की वशक्षा प्रभावित कर रही हैं । सशवक्तकरण के वलए वशक्षा का महत्ि ऄवधक हैं आसवलए वशक्षा िडार समदु ाय के सशवक्तकरण के वलए ऄवधक महत्िपणू ग हैं । िडार समदु ाय वशक्षा लेने के पक्ष में कम और बच्चे जल्दी वकसी रोजगार को सीखे आस पक्ष के ऄवधक वदखाइ देते हैं । सधरधंश :ईपरोक्त वनष्कषग से पता चलता हैं की िडार समदु ाय के सामावजक वस्थवत में कुछ बदलाि जरुर अए हैं । लेवकन ऄभी भी ईनकी सामावजक वस्थवत वनम्न स्तर पर ही पाइ जाती हैं । िडार समदु ाय पर ईन्नत समाज की जीिनयापन पद्धवत, रहन-सहन, खान-पान, िेषभषू ा और जीिन शैली का प्रभाि पर वदखाइ देता हैं और िडार समदु ाय भी सामावजक पररितगन चाहता हैं लेवकन ईनकी अवथगक वस्थवत, कम िेतन, ऄवनयवमत रोजगार, व्यसन और ईधार का वनिास स्थान अवद सभी कारण सामावजक विकास में बाधाएँ हो रही हैं । सन्दबभ ग्रंथ सच ू ी (Bibliography): गामकवाड, र.(2016).वडाय वेदना:साकेत प्रकाशन । अत्रे त्रत्र.ना .(2009). गुन्हे गाय जाती : वयदा प्रकाशन ऩुणे । जोशी भ.(सऩा),(2002). बायतीम संस्कृतत कोष : बायतीम संस्कृतत कोष भंडर ऩुणे । एंथोनी, गग.(संऩा) (2008). सभाजशास्त्र का आरोचनात्भक ऩरयचम: ग्रन्थ शशल्ऩी प्रकाशन । जोशी, भ .(संऩा). बायतीम संस्कृतत कोष, वॉल्मूभ -3 चव्हाण,आय.(2004).बटकें ववभुक्त की जातऩंचामत , वॉल्मूभ -2, ऩुणे: सुगावा प्रकाशन । शभाभ, एस.(2004). शशऺण औय अगधगभ की सज ृ नात्भक ऩद्धततमा​ाँ, नई ददल्री: एन.सी.ई.आय.टी । शभाभ, सु. (2004), बायत भें शशऺा व्मवस्था : वाणी प्रकाशन । त्रत्रऩाठी ,स.(1993), शशऺा -शसद्ांत ,ददल्री : वेंकेट्स प्रकाशन । वऩसेर, स. (2014),वडाय सभाज के साभजजक–आगथभक ऩष्ृ टबूशभ का गचकीत्सक अध्ममन”बायती ववद्माऩीठ । कुरकणी,व्ही.(2016),वडाय सभाज के दे वारम की गचत्र ऩयम्ऩया औय संस्कृतत ”, ततरक ववद्माऩीठ । गगडेन्स, एं. (2008), सभाज शास्त्र का आरोचनात्भक ऩरयचम : ग्रन्थ शशल्ऩी प्रकाशन शसन्हा,वी..(2009).आधतनक बायत का इततहास,नईददल्री: ऻानदा प्रकाशन । शभाभ, एस. (2014). शशऺणऔयअगधगभ कीसज ृ नात्भकऩद्धततमा. नईददल्री: एन.सी.ई.आय.टी । रष्कय, वव. (2013). वडाय सभाज एक सभाज शास्त्रीम अध्ममन , ऩुणे : हरयतत प्रकाशन । शोध प्रंफध : Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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