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BAHUSANKRUTIK KAKSHA-KAKSH KI SHIKSHAN ADHIGAM PRIKRIYAME SHIKSHAK KI BHUMIKA

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2016 = 6.17, www.srjis.com UGC Approved Sr. No.45269, SEPT-OCT 2017, VOL- 4/36

बहु-सा​ांस्कृतिक कक्षा-कक्ष की तिक्षण अतधगम प्रतिया मे तिक्षक की भतू मका अतमि रत्न तिवेदी (Ph.D. शोधाथी), शशक्षाशिभाग, शशक्षाशिद्यापीठ, महात्मा गा​ाँधी अतं रराष्ट्रीयशहदं ी शिश्वशिद्यालय, िधा​ा (महाराष्ट्र) amitrdwivediau@gmail.com प्रस्तुत शोध अध्ययन गुणात्मक शोध उपागम पर आधाररत है, शजसका प्रमख ु उद्देश्य बहुसांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष की शशक्षण अशधगम प्रशिया में शशक्षक की भशू मका को ज्ञात करना है । बहुसांस्कृ शतक कक्षा - कक्ष की शशक्षण अशधगम प्रशिया में शशक्षक की भशू मका परंपरागत कक्षा कक्ष की भशू मका से अलग होती है | राष्ट्रीयपाठ्यचया​ा की रूपरे खा-2005 में कहा गया है शक एक बहुसांस्कृ शतक कक्षा -कक्ष में शशक्षक द्वारा शशक्षण -अशधगम से सम्बंशधत िातािरण इस प्रकार शनशमात शकया जाना चाशहए शजसमें बालक को अपनी योग्यता , क्षमता, मानशसक स्तर तथा स्िागशत के अनसु ार सीखने का अिसर प्राप्त हो सके । जॉन डीिी के अनसु ार शशक्षा एक शिधिु ीय प्रशिया है , इसमे एक छोर पर एक शशक्षक होता है तथा अन्य छोरों पर शशक्षाथी तथा पाठ्यिम | शशक्षण-अशधगम प्रशिया में शशक्षक की भशू मका उतनी ही महत्िपणू ा होती है, शजतनी की शशक्षाथी तथा पाठ्यिम की। एक कक्षा में ही शिशभन्न संस्कृ शतयों के शिद्याथी शशक्षण -अशधगम की प्रशिया में सशम्मशलत होते हैं ,इसशलए शशक्षक के सामने यह चनु ौती होती है कीिह शिद्याशथायों की संस्कृ शत तथा अशधगम क्षमता के अनरू ु प शशक्ष ण का आयोजन कर सके | प्रस्तुत शोध में शोधाथी के द्वारा यह जानने का प्रयास शकया गया है की एक बहु - सांस्कृ शतक कक्षा कक्ष शकशशक्षण अशधगम प्रशिया में शशक्षक शकन-शकन भशू मकाओ ं का शनिाहन करता है। Keywords- बहुसांस्कृ शतक, शिध्रिु ीय, संपोषक Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com

प्रस्तावना “एक प्रभावी शिक्षक वह है जो बालकों की रुशियों , अवश्यक्ताओ ,ं मानशिक स्तर,ऄशभवृशि अशद को ध्यान में रखकर शिक्षण ऄशधगम प्रशिया के शलए ईशित वातावरण का शनमा​ाण करता है िाथ ही िाथ बालकों की व्यशक्त गत शवशभन्नताओ ं को ध्यान में रखकर ईनको स्वयं िीखने के ऄविर प्रदान कर ईन्हें अगे बढ़ने में मदद करता है |” - शमश्रा (2016). शिक्षण ऄशधगम प्रशिया में शिक्षक, शिक्षाथी तथा पाठ्यिम तीनों का महत्वपणू ा स्थान होता है। शिक्षक तथा शिक्षाथी पाठ्यिम को ध्यान में रखकर शवशभन्न प्रकार की गशतशवशधयां िंपाशदत करते हुए शिक्षा के ईद्देश्यों को प्राप्त करते हैं । जॉन डीवी के ऄनिु ार शवद्यालय िमाज का लघु रूप है , Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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आि कथन िे यह शिद्ध होता है शक जो घटक अपि में शमलकर िमाज को िंपणू ा बनाते हैं वे िभी घटक एक शवद्यालय में पाए जाते हैं । िमाज ऄपनी अवश्यकताओ ं को ध्यान में रखकर शवद्यालय की स्थापना कर ता है तथा यह अिा करता है शक शवद्यालय िमाज की िंस्कृ शत को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के ईद्देश्यों को परू ा करे । शवद्यालय िमाज की िंस्कृ शत का िंरक्षण , िंवधान तथा हस्तांतरण करता है । शवद्यालय एक ऐिी िंस्था है जहां शवशभन्निंस्कृ शतयों िे अए हुए शवद्याथी एक िाथ एक कक्षा में िीखते हैं । ऄतः आि प्रकार की बहु -िांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में शिक्षक का दाशयत्व शवद्याशथायों को मात्र शिशक्षत करना ही नहीं होता ऄशपतु ईनकी िंस्कृ शतयों को ध्यान में रखते हुए ईनका िवा​ांगीण शवकाि करना भी होता है । बहु -िांस्कृ शतक कक्षा -कक्ष एक ऐिी कक्षा होती है शजिमें शवशभन्न पाररवाररक, िामाशजक तथा िांस्कृ शतक पररवेि के शवद्याथी शिक्षा ग्रहण करते हैं । ऄतःऐिी कक्षा में िफल शिक्षक ईिी को माना जाता है जो आन िारी बातों का ध्यान रखते हुए शिक्षण ऄशधगम प्रशिया को प्रभावी बनाता है । वतामान िमय में शिक्षा की ईपयोशगता को दृशिगत रखते हुए िभी शिक्षा प्राप्त करने को अतरु हो गए हैं और शिक्षा प्राप्त करने के शलए न शिफा एक प्रदेि िे दिू रे प्रदेि शस्थत एक देि िे दिू रे देि की यात्रा कर रहे हैं । ऐिे में शवशभन्न िंस्कृ शतयों तथा िामाशजक पृष्ठभशू म के शवद्याशथायों को एक िाथ शिशक्षत करना शिक्षकों के शलए एक िनु ौतीपणू ा काया हो गया है । ऄतःएक शिक्षक में वह िभी गणु होने िाशहए जो आन शवशभन्नताओ ं को ध्यान में रखते हुएशिक्षण काया को पणू ा कर िके । बहु-िास्ं कृ शतक कक्षा-कक्ष में ऄध्यापन करने वाले शिक्षक मैं ऄनेक गणु ों का िमावेि होना अवश्यक है । बहु-िास्ं कृ शतक कक्षा-कक्ष शिक्षण ऄशधगम पररशस्थशतयों को ध्यान में रखते हुए एक शिक्षक में शनम्नशलशखत गणु ों का िमावेि होना ऄशत अवश्यक है बालकों के समतववि तवकास के प्रति प्रतिबद्धशिक्षा का एक प्रमख ु ईद्देश्य बालकों के व्यशक्तत्व का िमशन्वत एवं ितं शु लत शवकाि करना होता है । शिक्षक शिक्षा के द्वारा बालकों के िमशन्वत शवकाि में महत्वपणू ा भशू मका शनभाता है । बहु िास्ं कृ शतक कक्षा-कक्ष में शवशभन्न िस्ं कृ शतयों िे अए हुए शवद्याथी एक िाथ ऄध्ययन करते हैं । ऄतः शिक्षक ऄपनी शिक्षण ऄशधगम प्रशिया आि प्रकार िे ि​िं ाशलत करनी िाशहए शक कक्षा -कक्ष में ईपशस्थत शवशभन्न िस्ं कृ शतयों िे अए बालकों का िैशक्षक मानशिक िामाशजक अशथाक राजनैशतक अशद िभी पक्षों का िमशन्वत एवं ितं शु लत शवकाि हो िके । तवतभवन सांस्कृतियों से पररति​िबहु-िांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष की प्रमख ु शविेषता यह होती है शक ईिमें शवशभन्न िंस्कृ शतयों िे अए हुए शवद्याथी शिक्षण ऄशधगम प्रशिया में भाग लेते हैं । ऄतः एक शिक्षक को शवशभन्न िंस्कृ शतयों Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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िे पररशित होना ऄशत अवश्यक है । आिका कारण यह है शक यशद शिक्षक शवशभन्न िंस्कृ शतयों िे पररशित होगा तो वह प्रत्येक िंस्कृ शत िे अए हुएबालकों को गहनता िे िमझ पाएगा। िाथ ही िाथ ईिकी िामाशजक तथा िांस्कृ शतक अवश्यकताओ ं िे पररशित होते हुए बालकों को ईनकी क्षमता अवश्यकता रुशियों व्यशक्तयों अशद के ऄनिु ार शिक्षण ऄशधगम प्रशिया के पररवेि के शनमा​ाण में िहायक हो िके गा। पवू ा​ाग्रहों से रतहिबहु-िांस्कृ शतक कक्षा -कक्ष में शिक्षक तथा छात्रों दोनों की िामाशजक तथा िांस्कृ शतक पररवेि ऄलग-ऄलग होता है । ऄलग-ऄलग िंस्कृ शतयों िे िंबंशधत होने के कारण कभी-कभी शिक्षक तथा छात्रों के मध्य िांस्कृ शतक द्वदं जैिी िंभावनाएं ईत्पन्न हो िकती है । शजि​िे शिक्षक छात्र शविेष क्षेत्र शविेष या िंस्कृ शत शविेष की ओर झक ु ने लगता है । जो शिक्षण ऄशधगम प्रशिया को प्रभाशवत करता है ।ऄतःएक प्रभावी तथा शनष्पक्ष शिक्षक की भशू मका में बहु -िांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में ऄध्यापन करनेवाले शिक्षकों को पवू ा​ाग्रहों िे रशहत होना िाशहए ताशक शिक्षण ऄशधगम प्रशिया प्रभावी रूप िे िंपन्न हो िके । तवषय तविेषज्ञएक शिक्षक तभी प्रभावी शिक्षक माना जाता है जब वह ऄपने शवषय का पणू ा ज्ञाता होता है । बहु-िास्ं कृ शतक कक्षा-कक्ष में शवशभन्न पररवेि छात्र िशम्मशलत होते हैं । ऐिे में शिक्षक का यह दाशयत्व होता है शक वह ऄपने शवषय में शविेषज्ञता रखता हो । शजि​िे वह छात्र को शवषय िे िबं शं धत ईशित ज्ञान प्रदान कर िके तथा शवषय िे िबं शं धत बालकों की िभी शजज्ञािाओ ं का प्रभावी तरीके िे िमाधान कर िके क्योंशक बहु -िास्ं कृ शतक कक्षा -कक्ष में शवशभन्न िस्ं कृ शतयों के शवद्याथी एक िाथऄध्ययन करते हैं । शवशभन्न िस्ं कृ शतयों िे िबं शं धत होने के कारण ईनकी ऄशधगम िैली ऄशधगम गशत तथा ऄशधगम क्षमता शभन्न-शभन्न होती है। ईनके शवषय िे िबं शं धत ऄनेक िमस्याओ ं का िामना करना होता है । ऄतः शिक्षक का यह दाशयत्व होना िाशहए शक वह बालकों की िमस्याओ ं का शनराकरण कर िके तथा प्रभावी ऄशधगम हेतु छात्र कें शित वातावरण का शनमा​ाण कर िके । तवतभवन सांिार िकनीतकयों िथा तिक्षण तवतधयों का ज्ञािा वतामान यगु शवज्ञान तथा तकनीकी का यगु है । शिक्षक ऄपनी प्रभाविीलता को बढ़ाने के शलए शवशभन्न तकनीकी ईपागम का ईपयोग करता है । ऄतः बहु -िास्ं कृ शतक कक्षा-कक्ष में ऄध्यापन करने वाले शिक्षक को शवशभन्न िंिार तकनीकों का ज्ञान होना िाशहए ताशक वह कक्षा कक्ष में प्रभावी शिक्षण काया को िंपाशदत कर िके । वतामान शिक्षा पद्धशत में शवद्याथी को कें िीय स्थान शदया गया है । Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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िमस्त प्रकार की शिक्षण ऄशधगम प्रशिया का शनयोजन शवद्याथी को ध्यान में रखकर शकया जाता है।ऄतः शिक्षक को शवशभन्न शिक्षण शवशधयों का ज्ञान होना िाशहए ताशक वह ईद्देश्य तथा अवश्यक्ताओ ं को ध्यान में रखकर ईशित शिक्षण शवशध का ियन कर िके । शवद्याथी शवशभन्न िंस्कृ शतयों िे िंबंध रखते हैं आिशलए िंभव है की ईनकी ऄशधगम िैली शभन्न -शभन्न हो। ऐिे में िभी को स्वर तथा िहज रुप िे शिक्षा िल ु भ हो । आिके शलए अवश्यक है शकि शिक्षक को शवशभन्न शिक्षण शवशधयों का तकनीकी ईपकरणों का तथा िंिार तकनीकी का ज्ञान हो। अच्छा वक्ता िथा नेित्ृ वकिा​ाएक शिक्षक में यह गणु प्रमख ु रूप िे होना िाशहए । वह ऄपनी बात को छात्रों तक ईिी रुप में पहुिं ाएं शजि रूप में वह छात्रों के शलए ग्राह्य हो शिक्षक ऄपने प्रभाविाली िब्दोंका प्रयोग करना िाशहए और वाकपटु होना िाशहए। शजिके माध्यम िे कक्षा के वातावरण को रोिक पणू ा बनाया जा िके । शिक्षक छात्रोंको िामाशजक , िांस्कृ शतक , िैशक्षक , अशथाक , राजनीशतक तथा व्यविाशयक िभीक्षेत्रों िे िंबंशधत शनदेिन प्रदान कर छात्रों को ईशित मागा की ओर ऄग्रिाररत करना िाशहए। प्रजािा​ांतिक/सांवैधातनक मूल्यों का पोषकबहु-िांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में शवशभन्न पररवेि िे िंबंशधत छात्रों को ईनकी रुशि योग्यता तथा क्षमता के ऄनरू ु प शिक्षा के िमान ऄविर ईपलब्ध कराने हेतु शिक्षक कोिभी छात्रों को अगे बढ़ने तथा ऄपनी रुशि योग्यता तथा क्षमता के ऄनरू ु प शिक्षा प्राप्त करने की ऄविर ईपलब्ध कराने िाशहए। कक्षा में शिक्षक को यह शविेष रूप िे ध्यान रखना िाशहए शक वहशिफा शकिी िस्ं कृ शत शविेष तकशिक्षा की िल ु भता प्रदानना करें ।वरन िभी िामाशजक-िास्ं कृ शतकपृष्ठभशू म िे अए हुए छात्रों कुछ शिक्षा के िमान ऄविर ईपलब्ध कराएं। छािों के पूवा ज्ञान से पररति​ि िथा उवहें सीखने में व्यस्ि रखेंएक शिक्षक में यह गणु अवश्यक रूप िे होना िाशहए शक वह छात्रों के पवू ा ज्ञान िे पररशित हो और ईिी ज्ञान के अधार पर अगे की शिक्षा काया का ि​िं ालन करें । शजि​िे शक छात्रों का िही रूप में ितमु ाख ु ी शवकाि िभं व हो िके । आिके शलए अवश्यक है शक शिक्षक छात्र के पवू ा ज्ञान िे पररशित होकर ईन्हें शवशभन्न प्रकार के कायािमों शिक्षण ऄशधगम प्रशिया तथा िास्ं कृ शतक गशतशवशधयों में िशिय रुप िे भाग शदला कर ईन्हें िीखने में व्यस्त रख िके । आि िे छात्रों ज्ञान में ि​ि ं ोधन िवं धान और पररवधान हो िके ।

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तिक्षक-छाि व्यवहार तमिवि होशिक्षक का यह दाशयत्व बनता है शक वह कक्षा का वातावरण िभी के शलए िख ु द और शमत्रवत बनाए रखें । शजि​िे शवशभन्न िामाशजक िांस्कृ शतक पृष्ठभशू म िे िंबंध रखने वाले शवद्याथी ऄपनी ऄपनी िमस्या का शनराकरण शबना शकिी शझझक के और शबना शकिी भेदभाव के कर िकें । शिक्षक को यह िाशहए शक शवद्याशथायों की िमस्याओ ं के िमाधान में ईन्हें आि योग्य बनायाजाए । शजि​िे वह ऄपनी िमस्या का िमाधान स्वयं करने में िक्षम हो िके । तिक्षक तिक्षण व्यवसाय के प्रति जवाबदेहऄच्छे शिक्षक की प्रमख ु शविेषताओ ं में िे एक ईि का शिक्षण व्यविाय के प्रशत जवाबदेह होना है। शिक्षक का दाशयत्व बनता है शक वह कक्षा में शनयत िमय पर ईपशस्थत हो । शजि​िे छात्र भी शिक्षक िे प्रेररत होकर िमय िे कक्षा में ईपशस्थत शिक्षण ऄशधगम प्रशिया के दौरान कक्षा कक्ष में शिक्षक द्वारा शकया गया शिक्षण काया तका पणू ा हो और वास्तशवकता के धरातल परप्रािशं गक हो बहु िांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में शवशभन्न िंस्कृ शतयों िे िंबंध रखने वाले छात्रों को ईनकी िामाशजक िांस्कृ शतक अवश्यकताओ ं के ऄनरू । यह शजम्मेवारी ु प शिक्षा प्रदानहो रही है या नहीं हो रही है शिक्षक की होनी िाशहए और ईिे ऄपने कताव्यों के प्रशत जवाब देह होना िाशहए । शिक्षक का यह कताव्य बनता है शक वह शवशभन्न िंस्कृ शतयों िे जडु े छात्रों को ईशित शनदेिन एवं परामिा प्रदान कर ईनकी िमस्याओ ं के िमाधान में िहयोग करें । शजि​िे शक छात्र एकाग्रशित होकर ऄध्ययन कर िकें । शिक्षक को िाशहए शक वह िभी िस्ं कृ शतयों िे जडु े शवद्याशथायों को शबना शकिी भेदभाव के शनदेिन एवं परामिा प्रदान कर शिक्षा प्रदान करें । यह िभी काया शिक्षण की गणु विा पर शनभार करता है । शजिके प्रशत शिक्षक को जवाब देह होना िाशहए। सकारात्मक िथा समीक्षात्मकबहु-िांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में शवशभन्न िंस्कृ शतयों िे िंबंध रखने के कारण शनशित तौर पर छात्रों मैं व्यवस्था देखने को शमलती है । शजिमें एक छात्र की िंस्कृ शत दिू रे के िमरूप या शवरुद्ध भी हो िकती है । ऐिे में शिक्षक का यह दाशयत्व बनता है शक वह कक्षा के िभी छात्रों में िभी धमों और िंस्कृ शतयों के प्रशत अदर की भावना का शवकाि करें तथा छात्रों मेंपल रही दभु ा​ावनाओ ं को दरू करें । शवशभन्न िामाशजक पृष्ठभशू म िे अए छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के दौरान शिक्षक का यह दाशयत्व बनता है की छात्र जो कुछ भी िीख रहे हैं । ईनका िमय-िमय पर मलू यांकन करता रहे । शजि​िे छात्रों के गणु व दोष पररलशक्षत होते रहे और शिक्षक ईन दोषों को दरू करते हुए छात्र के िीखने में पररवधान करता रहे । आिके शलए अवश्यक है शक शिक्षक िभी छात्रों के प्रशत िकारात्मक दृशिकोण रखता हो तथा िमीक्षात्मक ढंग िे मलू यांकन कर छात्रों के दोषों को दरू कर िकें तथा छात्रों के िीखने में ईत्पन्न Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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हो रहे व्यवधान को दरू कर छात्रों में िभी के प्रशत िकारात्मक दृशिकोण का बीजारोपण कर िकें । िीखने की प्रमख ु शवशधयों में िे एक ऄनक ु रण द्वारा िीखना होता है । बहु -िांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में छात्र ऄपने शप्रय शिक्षक िे शकिी न शकिी रूप में प्रभाशवत होते हैं और शिक्षक द्वारा शकए जा रहे कायोंका ऄनक ु रण करते हैं । आिशलए यशद शिक्षक में िकरात्मक शदिा की ओर अगे बढ़ने का गणु रहेगा तो छात्र भी शिक्षक का ऄनक ु रण कर आन गणु ों को िीख िकें गे । आिके ऄलावा भी यशद शिक्षक स्वयम िकारात्मक िोि रखकर िभी छात्रों को िही शदिा में एक दिू रे का िहयोग करते हुए अगे बढ़ने के शलए प्रेररत करे गा तो शनशित तौर पर छात्र भी शिक्षक का ऄनक ु रण कर िहयोगी प्रशवशि के होंगे और िभी के प्रशत िकारात्मक िोि का शवकाि कर िकें गे । अज के छात्र कल के िमाज के नागररक हैं और हम शजि प्रकार के िमाज की कलपना करते हैं । हमें वैिा ही नागररक शिक्षक द्वारा तैयार शकया जाना िाशहए जो ना शिफा शिक्षण ऄशधगम के दौरान बशलक िामाशजक शियाकलाप के दौरान भी दिू रे व्यशक्तयों के न शिफा दोस्त को देखें ऄशपत ईनके गणु ों िे भी पररशित हो और ईनके दोषों को दरू करने का प्रयत्न करें तथा गणु ों को प्रेररत करने की कोशि​ि करें शिक्षक के िकारात्मक तथा िमीक्षात्मक दृशिकोण के ऄभाव में ऐिे िमाज की कलपना करना शिफा एक कोरी कलपना करनी होगी। आिशलए एक िहयोगी िकारात्मक और आि शनघत िांशत वाले िमाज की स्थापना के शलए शिक्षक में िकारात्मक तथा िमीक्षात्मक गणु होना ऄशत अवश्यक है। हास्य की भावना रखनाशवशभन्न िामाशजक पृष्ठभशू म िे अए हुए छात्र जब एक जगह एकत्र होकर शिक्षा प्राप्त करने की दौड में िशम्मशलत होते हैं तो धीरे -धीरे शवषय िे िबं शं धत गभं ीरता िे छात्र में ईब ईत्पन्न होने लगती है शजि​िे छात्रों की एकाग्रता भगं होती है और शिक्षक द्वारा शिक्षण ऄशधगम प्रशिया के दौरान शिखाए गए पाटा पर भी ईशित िफलता नहीं प्राप्त होती है । क्योंशक लगातार पढ़ाने िे कक्षा का वातावरण नीरि होने लगता है । कक्षा के वातावरण को रोिक बनाए रखने के शलए तथा छात्रों में रुशि ईत्पन्न करने के शलए यह अवश्यक होता है । शकि शिक्षक द्वारा शिक्षण काया करते िमय व्याख्यान के बीि बीि में शवषय शविेष िे िबं शं धत कुछ रुशिपणू ा ईदाहरण प्रस्ततु कर छात्रों का ध्यान शवषय की ओर बनाए। रखें छात्रों में शविेष िे ईत्पन्न ना हो आिशलए अवश्यक हैकी शिक्षक शिक्षण ऄशधगम के दौरान कुछ हास्य प्रिगं ही ईठाता रहे । शकंतु बहु -िास्ं कृ शतक कक्षा -कक्ष में शकिीभी प्रकार की शवनोदपणू ा बात कहने िे पवू ा आि शवषयपर ऄवश्य ध्यान रखना िाशहए की शवशभन्न िामाशजक पृष्ठभशू म और िंस्कृ शत िे जडु े छात्रों को शवनोदपणू ा में कही गइ कोइ बात ईनकी ऄपनी िंस्कृ शत िे जडु ी हुइ ना हो शजि​िे शक ईन्हें ठे ि पहुिं े। Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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िाराि ं तः यह कहा जा िकता है शक बहुिांस्कृ शतक कक्ष -कक्ष में शवशभन्न पररवेि तथा पृष्ठभशू म के छात्र ईपशस्थत होते है तो ऐिे में शिक्षक का दाशयत्व और ऄशधक बढ़ जाता है| शिक्षकछात्रों की ना शिफा रूशि, क्षमता , योग्यता का ध्यान रखते है बशलक ईनके िामाशजक िांस्कृ शतक पृष्ठभशू म िे भी पररशित होते है, शजि​िे छात्रोंके शिखने की क्षमता , िामाशजक अवश्यकता तथा छात्र को शनदेिन प्रदान करने के शलए छात्र िे िम्बंशधत ईशित ि​िू नाये प्राप्त की जा िके तथा छात्र को ईशित शनदेिन एवं परामिा प्रदान शकया जा िके |बहुिांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में िभी को प्रभावी रूप िे शिशक्षत एवं दीशक्षत करने के शलए शिक्षण -ऄशधगम प्रशिया के दौरान शिक्षकों में कुछ गणु प्रमख ु रूप िे होने ऄशनवाया है | शिक्षकों का यह दाशयत्व बनता है शक वह बालकों का िमशन्वत एवं िंतशु लत शवकाि करे शजि​िे बालक का िामाशजक , अशथाक, राजनैशतकतथा मनोवैज्ञाशनकशवकाि पणू ा रूप िे हो िके | शिक्षक बालकों का िम्पणू ा शवकाि तभी कर िकता है जब वहस्वयं शवशभन्न िंस्कृ शतयों िे पररशित हो शजि​िे शिक्षक शिक्षण के दौरान वहा​ाँ की अवश्यकताओ ं को ध्यान में रख कर शिक्षण काया िंपन्न कर िके |बहुिांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में शिक्षण के दौरान शिक्षक को शकिी भी प्रकार के भेद -भाव िे दरू रहना िाशहए | कक्षा यशद बहुिांस्कृ शतक है तो शवद्याथी भी शवशभन्न पृष्ठभशू म के होंगे ऐिे में िंभव है के ईनके िीखने की क्षमता तथा िीखने की शवशध भी शभन्न -शभन्न हो आिशलए यह शनशित रूप िे अवश्यक है शक शिक्षक को शवशभन्न शिक्षण शवशधयों एवं शवशभन्न ि​िं ार तकनीकी का ज्ञान हो शजि​िे छात्रोंको िल ु भता िे शिखाया जा िके | एक शिक्षक में वाकपटुता का गणु शनशित तौर पर होना िाशहए शजि​िे वह ऄपनी बात को छात्रों तक प्रभावी और िही रूप में पहं िु ा िके | बहुिास्ं कृ शतक कक्षा-कक्ष में शिक्ष क को शकिी क्षेत्र शविेष के शवद्याशथायों पर ही परू ा ध्यान नहीं देना िाशहए ऄशपतु िभी पृष्ठभशू म िे अये शवद्याशथायों को ईनकी रूशि, क्षमता, योग्यताके ऄनरू ु प िमानरूपिे शिक्षा प्रदान करनी िाशहए | शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को िशिय बनाये रखने के शलए यह अवश्यक है शक छात्रों को स्वयं कर के शिखने का ऄविर प्रदान शकया जायशजि​िे छात्र ऄशधकाशधक शिख िकें | शिक्षक शिक्षण-ऄशधगम प्रशिया के दौरान छात्रों को जब स्वयं कर के शिखने के ऄविर प्रदान करे तो ईि िमय भी शिक्षक का यह दाशयत्व बनता है शक वह अवश्यकतानिु ार छात्रों शनदेिन करता रहे तथा छात्रों के िाथ शमत्रवत व्यव्हार बनाये रखे | शिक्षक के शलए यह ऄशत अवश्यक है शक कक्षा शिक्षण के दौरान िमय तथा ऄनिु ािन का शविेष ध्यान रखे शजि​िे शिक्षा प्रशिया को ि​िु ारू रूप िे िलाया जा िके | बहुिास्ं कृ शतक कक्षा-कक्ष में शिक्षक को शकिी भी प्रकार शक रुशढयों िे बिना िाशहए शजि​िे वह छात्रों के गणु -दोषों िे पररशित होकर दोष को दरू करने के ईपाय खोज िके तथागणु ों को प्रोत्िाशहत कर िके | बहुिांस्कृ शतककक्षाCopyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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कक्ष शिक्षण प्रशिया के दौरा न शिक्षण काया नीरि न हो जाए आिके शलए शिक्षक को िाशहए शक वह िमय-िमय पर शिक्षण तथ्य िे िम्बंशधत कुछ रोिक ईदारण प्रस्ततु करता रहे शजि​िे शिक्षा को रूशिकर बनाया जा िके | आि प्रकार बहुिांस्कृ शतक कक्षा-कक्ष में शवशभन्न पररवेि िे अये छात्रों कीरूशि, क्षमता , योग्यता तथा अवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शिक्षण -ऄशधगम प्रशिया का अयोजन करना िाशहएशजि​िे छात्रों को ऄशधक िे ऄशधक प्रोत्िाशहत कर शिक्षण-ऄशधगम प्रशिया में िशिय रूप िे भागीदार बनाया जा िके | शिक्षक का यह ईिरदाशयत्व बनता है शक वह छात्रों को ईशित िैशक्षक वातावरण प्रदान करे शजि​िे वे ऄपनी क्षमता तथा योग्यता के ऄनरू ु प िीख िकें | िन्दभा ि​िू ी भटनागर, एल.बी. तथा भटनागर , ए. (2008). शफशजकल िाआिं शिक्षण. मेरठ: अर .लाल बक ु शडपो. पृष्ठ िंख्या. 295-324. भट्टािाया, जी. िी . (2014). ऄध्यापक शिक्षा. ऄग्रवाल पशब्लके िन्ि. अगरा: पृष्ठ िंख्या. 222-271. बाजपेइ, एल. बी. (2006). शिक्षा में नवािार एवं तकनीकी. लखनउ: ऄलोक प्रकािन. पृष्ठ िख्ं या. 249-262. मालवीय, अर. (2010). शिक्षा दिान एवं िमाजिास्त्रीय पृष्ठभशू म. आलाहाबाद: िारदा पस्ु तक भवन. पृष्ठ िंख्या. 167-176. मालवीय, अर. (2010). शिक्षा का िमाजिास्त्रीय िवेक्षण . आलाहाबाद: िारदा पस्ु तक भवन. पृष्ठ िख्ं या. 68-78. शमश्रा, य.ू (2012). शिक्षा का िमाजिास्त्र. आलाहाबाद: न्यू कै लाि प्रकािन. पृष्ठ िंख्या. 23-38. लाल, अर. बी. (2014). शिक्षा की दािाशनक एवं िामाशजक पृष्ठभशू म. मेरठ: रस्तोगी पशब्लके िन्ि. पृष्ठ िंख्या. 447-459. रूहेला, एि.पी. (2012). शिक्षा के दािाशनक तथा िमाजिास्त्रीय अधार . अगरा: ऄग्रवाल पशब्लके िन्ि. पृष्ठ िख्ं या. 169-202. ईपाध्याय, पी. (2009). भारतीय शिक्षा में ईदीयमानप्रवृशिया​ाँ. आलाहाबाद: िारदा पस्ु तक भवन. पृष्ठ िंख्या.238-273. http://cepa.stanford.edu.content.teacher http://cndls.georgetown.edu http://www.thoughtco.com Teaching.monster.com www.wikipedia/multiculturedclassroomandteacher.org

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