Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2021 = 7.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, JAN-FEB, 2023, VOL- 10/75
संत रविदास की सामाजिक चेतना एिं ज्ञान की विरासत धीरि प्रताप ममत्र शोध छात्र, समािशास्त्र विभाग, काशी हिन्द ू विश्वविद्यालय, िाराणसी, उत्तर प्रदे श dpmitra@bhu.ac.in
Paper Received On: 25 FEBRUARY 2023 Peer Reviewed On: 28 FEBRUARY 2023 Published On: 01 MARCH 2023 Abstract प्रस्तुत लेख संत रविदास के िीिन दशशन, ज्ञान परं परा एिं ितशमान में उसकी प्रासंमगकता पर आधाररत िै । मध्यकाल में िब भारतीय समाि संक्रमण के दौर से गुिर रिा था तथा विमभन्न प्रकार के सामाजिक, धाममशक एिं सांस्कृ मतक आन्दोलन या तो पनप रिे थे अथिा अपनी सामाजिक स्िीकृ मत िे तु संघर्शरत थे उस समय मनगुण श परम्परा के संत यथा कबीर- रविदास ब्रह्म की गुणातीत व्याख्या कर ना केिल िेदाहद पर प्रिार कर िामतगत आधाररत कुरीमतयों का विरोध कर रिे थे बजकक मसद्ध नाथों की परम्परा में िेदाहद, पाखण्ड, बाह्याडम्बर, िामत भेद के विरोध के द्वारा मनुष्यता की मुवि की अलग ज्योमत प्रज्िमलत हकए। इस संत परम्परा ने ‘मन की साधना िी िास्तविक साधना िै , और भवि का सार तत्ि प्रेम िै ’१ की धाममशक दृवि को िनमानस के सामने प्रत्यक्ष हकया। कमथत तौर
पर नीची किी िाने िाली िामत में िन्म लेने के बाििूद संत रविदास ने अपनी िाणी, कमश एिं मन से मनिृवत्त परक प्रिृवत्तमय मनष्काम कमश की मशक्षा दे ने एिं तदनुरूप अपने िीिन में सांगोपांग आचरण करते िुए उच्च िीिन आदशश भी प्रस्तुत हकए। उन्िोंने अपने पदों –मशक्षाओं के माध्यम से विनम्र
शब्दािमलयों में सामाजिक बुराईयों एिं पाखण्ड आहद का विरोध कर समाि सुधार में अपना योगदान
हदया। मनगुण श संतों की दृवि में ब्रह्म तीन गुणों से परे िै , िि सिश व्यापी िै ।२ उनके पदों में िजणशत सत्य शास्ित िैं एिं उनकी प्रासंमगकता ितशमान समय में भी बरकरार िै । मुख्य शब्द- परं परा, मनगुण श , पंथ, पाखण्ड, िणश, समाि, अद्वै तिाद, ब्रह्म, िीिन,दशशन Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com
िीिन पररचयभारत भार्ाओँ एिं बोमलयों से समृद्ध दे श िै । यिााँ विमभन्न भागों में प्रचमलत विमभन्न बोमलयों एिं उनके उच्चारण आहद में मभन्नता के कारण संत रविदास का नाम Copyright © 2023, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies