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PRATHAMIK STAR PAR CHATRO, SHIKSHKO EANV ABHIBHAVKO KA JAL SANRAKSHAN KE PRATI JAGARUKTAKA KA ADHYAY

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2016 = 6.17, www.srjis.com UGC Approved Sr. No.49366, MAR–APR, 2018, VOL- 5/44

प्राथमिक स्तर पर छात्रों, मिक्षकों एवं अमि​िावकों का जलसंरक्षण के प्रमत जागरूकता का अध्ययन अमित रत्न मिवे दी शोधछात्र, शशक्षशिद्यापीठ, म.गा.अं.श ं.शि.शि., िधा​ा, म ाराष्ट्र, 442001, ई.मे ल :amitrdwivediau@gmail.com

इस पृथ्वीपर मनष्ु य हों चाहे पशु या पेड़ पौधे सभी के लिए जि की अलनवायय आवश्यकता है | हमारे धमयग्रंथों में वलणयत पंचतत्व लिलत, जि, पावक, गगन, शमीर में से एक प्रमख ु जि है लजसका हमें सरं िण करना चालहए | मनष्ु य को जि सरं िण के प्रलतजागरूक होकर अपनी बलु िमत्ता का पररचय देना चालहए | लकन्तु क्यों जागरूक होने की आवश्यकता है ? क्या है जिसरं िण ? क्यों जरुरी है जिसरं िण ? क्यों हािात पैदा हुए जि सरं िण के ? जि सरं िण के लवलभन्न िेत्रों में िोग लकस तरह से जागरूक हैं ? उन्हें लकस िेत्र लवशेष में जागरूक करने की आवश्यकता है ? इन तमाम प्रश्नों के उत्तर को प्रस्ततु शोधपत्र के माध्यम से देने का प्रयास लकया गया है | Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com

जल एक यौगगक है गजसका एक ऄणु हाआड्रोजन के दो परमाणु तथा अक्सीजन के एक परमाणु के गमलने से बनता है | यौगगक होने के कारण आसकी संगठनात्मक रचना (H₂O) में कोइ ऄतं र होने का प्रश्न नहीं है | जल का जमाव गबंदु जीरो गडग्री सेगशियि (0°c) तथा क्वथनांक गबंदु ( 100°c) होता है | जल ठोस, द्रव तथा गैस तीनो ऄवस्थाओ ं में स्वतन्त्र रूप से गस्थर रह सकता है | ठोस के रूप में बर्फ , द्रव के रूप में सामान्त्य जल तथा गैसीय रूप में भाप बन जाता है | जल के आन तीनो रूपों में गसर्फ ऄवस्था में पररवतफन होता है गुणधमफ में नहीं| भमू ण्डल में जल का गविाल भण्डार है | यह सम्पणू फ पृथ्वी का 7/10 भाग है और अयतन में लगभग 1400 गमगलयन घन गकमी है | जल के आस अवरण को हाआड्रोगस्र्यर कहते है | पृथ्वी पर ईपलब्ध जल का लगभग 97 प्रगतित भाग महासागर तथा समुद्रों में है िेष 3% ऄलग-ऄलग रूपों में ऄलग-ऄलग स्थानों पर ईपलब्ध है | आसमें िुद्ध जल की मारा 2.792% ही है गजसमें 2.14% ग्लेगियर बर्फ के रूप में जमा है | ऄथाफत कुल जल का 0.65%, 1% से भी कम िुद्ध पीने योग्य जल ईपलब्ध है | पीने योग्य पानी की कुल मारा जो वाष्पीकरण तथा गनजफलन प्रगिया से ऄंतररम रूप में ईपलब्ध होती है ईसकी कुल मारा 37000 घन गकमी है गजसमे से वतफमान समय में गसर्फ 55% का ही ईपयोग गकया जा रहा है ऄतः पीने के पानी की कमी अज बढती मांग के सन्त्दभफ में होने लगी है|

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Amit Ratna Dwivedi 9932 (Pg. 9931-9937)

समृगद्ध के गलए खेतों में पानी चागहए, संवेदना के गलए अँखों में पानी चागहए, जीने के गलए पीने का पानी चागहए और यह पानी ऄब दल ु फभ हो रहा है | जहाँ पहले धरती माँ की कोंख से िुद्ध जल का सवफसुलभ होता था , वहीं अज वह भी जहर होता जा रहा है | आसी के चलते चाहे िहर हो या गाँव हर जगह पानी की गकशलत हो रही है और पानी ऄब गबमाररयों का घर बनता जा रहा है | ऐसे में जल को प्रदगू षत होने से बचाने के ऄलावा जल का संरक्षण भी अवश्यक है | जल संरक्षण का अथथ जल संरक्षण का ऄथफ है जल के ऄत्यगधक प्रयोग को घटाना आसके गलए हम सर्ाइ , गनमाफण एवं कृ गष अगद के गलए ऄवगिष्ट जल का पनु ः चिंण कर सकते हैं

| पानी की कमी को देखते हुए अवश्यक है की जल का

अवश्यकतानसु ार ईगचत प्रयोग करें , जल को प्रदगू षत नहीं करना चागहए , कँु ए व ऄन्त्य स्थानों पे पानी ढँक कर रखना चागहए | जल का ईगचत संरक्षण करना चागहए , जल के दरु​ु पयोग को रोकना चागहए | आसके ऄगतररक्त हम ऄपने दैगनक जीवन में गवगभन्त्न कायों में जल के व्यथफ प्रयोग को घटा सकते हैं | जैसे ब्रि करते समय या कपड़े धल ु ते समय नल को खल ु ा न छोड़ना, खल ु े नलों पर न नहाना अगद | UNO की ररपोर्थ – वतफमान समय में िहरीकरण की ऄन्त्धी दौड़ और जनसंख्या वृगद्ध के कारण जल संकट आतना गवकराल होगा की खाद्यान्त्न संकट भी अ खड़ा होगा | संयुक्त राष्र ने गवश्व जल गवकास ररपोटफ 2015 में आस बात का खल ु ासा करते हुए परू ी दगु नया को असन्त्न जल संकट के प्रगत अगाह गकया है | ररपोटफ के ऄनसु ार अने वाले वषों में जल प्रबंधन ऄगर ठीक तरह से नहीं गकया गया तो पेयजल से लेकर गसंचाइ व ईद्योगों के गलए जल की पयाफप्त अपतू ी करना मुगश्कल हो जायेगा |UNO की ररपोटफ के ऄनसु ार वषफ 2050 तक गवश्व में पानी की मांग 55% तक बढ़ जाएगी | ररपोटफ के ऄनसु ार भारत, नेपाल, चीन और बांग्लादेि कृ गष कायों के गलए गवश्व के अधे भ-ू जल का आस्तेमाल करते हैं | ऐसे में गनगित तौर पर सभी को जल संरक्षण के प्रगत जागरूक करने की जरुरत है| भारत में जल संसाधन की दृगष्ट से बात करें तो यह बात सामने अती है गक 2001 में प्रगत व्यगक्त 1800 क्यूगबक मीटरपानी ईपलब्ध था जो 2050 तक 1000 क्यूगबक मीटर प्रगत व्यगक्त हो जायेगा | भारत आस समय कृ गष संकट और पेय जल के गंभीर संकट से गुजर रहा है और यह संकट वैगश्वक स्तर पर सार् गदख रहा है | हरगवकगसतऔर गवकासिील देि आस संकट को दरू करने के गलए आस पर गवचार कर रहे हैं | आस संकट के गनवारण के गलए हमें टीम स्तरों पर गवचार करना होगा – पहला यह गक हम जल का ईपयोग गकस तरह से करते थे ?, दसू राभगवष्य में कै से करना है ?तथा तीसरा जल संरक्षण हेतु क्या कदम ईठायें जाय ?परू ी दृगष्ट पर नजर डालें तो यह तस्वीर ईभरती है गक ऄभी तक हम जल का ईपयोग ऄनि ु ागसत ढगं से नहीं करते थे तथा जरूरत से ज्यादा जल का ईपयोग करते थे-डॉ. तीथे श्वर मसहं (2011) Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


Amit Ratna Dwivedi 9933 (Pg. 9931-9937)

WSSCC नामक संस्था की जल-मल गनस्तारण एवं स्वास्थ्य संयोजक नोमा नेसेनी ने एक साक्षात्कार में कहा – वषफ 2008 को सर्ाइ वषफ घोगषत गकये जाने तथा गजम्बाम्बे सर कार द्वारा सार् -सर्ाइ के गलए घोगषत एक नीगत के बावजदू मारपांच माह बाद ही वहां पर हैजा र्ै ला ईसमे 4000 लोगों की जान गयी | आसमें जो सबसे मख्ु य कारण था वो था जल का प्रदगू षत होना गजसकी वजह से आतने लोगों की जान गयी | के न्त्द्रीयजल अयोग की ररपोटफ के ऄनसु ार देि में19 के 184 गजलों के भजू ल में फ्लोराआड की मारा ईगचत सीमा 1.5 गमली ग्राम से ज्यादा है | वहीं देि के 4 राज्यों के 26 गजलों में असेगनक गक मारा ईगचत सीमा0.01 गमली ग्राम प्रगत लीटर से ज्यादा है | फ्लोराआड के खतरे के मामले में राजस्थान सबसे उपर है और यहाँ के 32 गजले पानी में फ्लोराआड की वजह से पीगड़त हैं जबगक पगिम बंगाल

कामुगिफदाबाद गजला पानी में असेगनक होने का सबसे ज्यादा गिकार है

|(दीपांकर चक्रवती) जलसंरक्षण की ईपयोगगता के गवषय में डी.एस. कुलकणी के सह-गनदेिक संजय देिपांडे जी ने कहा गक- “जल संरक्षण अज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है | यह के वल व्यावसागयक नीगत नहीं बगशक प्रत्येक व्यगक्त की सामागजक गजम्मेदारी है | देि के ऄनेक क्षेर में पानी की बढतीमांग और घटती ईपलब्धताएक बड़ी समस्या बन चुकी है | मैं महाराष्र के सामगाँव नामक स्थान से हँ जो एक सख ू ाग्रस्त गाँव है गकन्त्तु जल संरक्षण गक तकनीक के पता होने के कारण मझु े और मेरे गाँव वालों को जल के गलए कष्ट नहीं झेलना पड़ता”(संजय देिपांडे) क्यों जरुरी है जल संरक्षण ?  गजस तरह बड़े िहरों में पेय जल बाजारों में गबकता है गजसका सबसे ऄहम कारण है पेय जल की कमी और ऄगर ऐसा ही र हा तो वो समय ऄब दरू नहीं जब हमारे गलए जमीन से पानी गनकालना संभव नहीं रह जायेगा और पानी की कमी में ईत्तरोत्तर गगरावट अती जाएगी, आसगलए जरुरी है जल संरक्षण |  ऄनाज, र्ल, सगब्जयां .. गजनका नहं ऄपने दैगनक जीवन में ईपभोग कर रहे हैं यगद आनकी गसंचाइ के गलए पानी ईपलब्ध ना हुअ तो आनका ईत्पादन ही महीन हो पायेगा आसगलए जरुरी है जल संरक्षण |  िद्ध ु पेयजल के ना होने से ऄनेकानेक बीमाररयाँ जन्त्म लेंगी

समस्त जगत में महामारी का प्रकोपछा जायेगा

आसगलए जरुरी है जल संरक्षण |  धरती के ऄन्त्दर जल कीमारा कम होने से भगू म बंजर हो जाएगी और गकसी भी ऄनाज का ईत्पादन संभव नहीं हो पायेगा ऐसे में भख ू गवकराल रूप धारण कर लेगा आसगलए जरुरी है जल संरक्षण|  वायमु ंडलीय तापमान गनरंतर बढ़ रहा है और कइ िहरों में तो जाड़ों में भी गमी का वातावरण बना रहता है ऐसे में ना गसर्फ मानव बगशक पिु दोनों झल ु स जायेंगे आसगलए जरुरी है जल संरक्षण | Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


Amit Ratna Dwivedi 9934 (Pg. 9931-9937)

क्यों हालात पैदा हुए जल संकर् के ?  िहरीकरण और औद्योगीकरण दोनों की आसमें प्रमुख भगू मका रही है क्योंगकगकसी भी र्ै क्री या कारखाने के गलए पानी की बहुत ऄगधक मारा में अवश्यकता होती है गकन्त्तु लोग स्वयं का स्वाथफ गसद्ध करने के गलए जल की कमी पर ध्यान गदए बगैर जमीन से पानी लगातार गनकाल कर ईसका ईपभोग करते रहे |  ऐसे घर या स्थान जहाँ पर टुशलू या सम रसेगबल जैसी पानी की मिीन लग गयी है वे खदु को पानी बहाने का ऄगधकारी समझने लगते हैं |  गकसानद्वारा ईपयोग में लाया जाने वाला रासायगनक ईवफरक खेतों की गसंचाइ के गलए प्रयुक्त पानी को दगू षत कर देता है गजसका गर्र से कोइ ईपयोग नही हो सकता है तथा आसका ईपयोग पेयजल के रूप में नही गकया सकता और वही जल कल को गकसी ऄन्त्य माध्यम से जब हम ग्रहण करते हैं तो गवगभन्त्न प्रकार की गबमाररयों के गिकार होते हैं | भारत में सालाना 7 लाख 83 हजार लोगों की मौत दगू षत पानी पीने की वजह से होती है | दगू षत जल सेवन की चपेट में अने वाले लोगों के चलते हर साल देि की ऄथफ व्यवस्था को करीब 5 ऄरब रुपयों का नक ु सान ईठाना पड़ता है

|

छतीसगढ़, बंदु ेलखंड, गबहार, ईड़ीसा आनमे सबसे ऄगधक प्रभागवत क्षेर हैं | वतफमान समय में जल संकट की गस्थगत को देख के यह अवश्यक हो गया है गक लोग जल संरक्षण के प्रगत जागरूक हों और िुद्ध जल के गलए प्रयासरत हों | िोध के उद्देश्य 1. प्राथगमक स्तर पर छारों का जल संरक्षण के प्रगत जागरूकता का ऄध्ययन 2. प्राथगमक स्तर के गिक्षकों का जल संरक्षण के प्रगत जागरूकता का ऄध्ययन 3. प्राथगमक स्तर के छारों के ऄगभभावकों का जल संरक्षण के प्रगत जागरूकता का ऄध्ययन अध्ययन की मवमध  प्रस्तुत िोध के गलए सवेक्षण गवगध का प्रयोग गकया गया|  प्रस्तुत िोध में ईद्देश्यपणू फ न्त्यादिफन गवगध द्वारा आलाहाबाद के न्त्यू कैं ट स्कूल से प्राथगमक स्तर के 100 छारों का चयन गकया गया है |  प्रस्तुत िोध में अंकड़ो के संकलन हेतु िोधकताफ ने स्वगनगमफत प्रश्नावली को ऄपनाया है | आसमें बहुगवकशपी प्रश्नों को सगम्मगलत गकया गया | प्रश्नों के वैध व गवश्वसनीय होने के गलए गिक्षक गविेषज्ञों का सहयोग गलया गया है| Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


Amit Ratna Dwivedi 9935 (Pg. 9931-9937)

पररणाि – िोध में प्राप्त अंकड़ों का प्रगतित गवश्ले षण गकया गया है | गिक्षकों, छारों तथा ऄगभभावकों के द्वारा गदए गये प्रश्नों के सही प्रगतगियाओ ं को गनम्नगलगखत सारणी में प्रस्तुत गकया गया है िम संख्या 1

कथन

छार ऄगभ गिक्षक

% पानी के दरु​ु पयोग को रोकने के गलए हमें ऄपने व्यवहार में बदलाव 87

लाना चागहये 2 ऄनावश्यक रूप से बहते हुए पानी को रोकने का प्रयास करना चागहए 3 पानी की टंकी का गनयगमत रूप से सर्ाइ होना जरूरी नहीं है 4 जल गनगम द्वारा क्लोररन का प्रयोग स्वच्छ पानी को सगु नगित करता है 5 पानी को ईबाल देने से वह दगू षत हो जाता है 6 गन्त्दा पानी पीने से संिामक रोग हो सकता है 7 बरसात में ऄगतररक्त पानी का संरक्षण अवश्यक है 8 पीने के पानी को सार् बतफन में रखना चागहए 9 पानी को खल ु ा रखने पर बीमारी फ़ै लने की अिंका रहती है 10 पानी पीने से पहले गगलास ऄच्छी तरह सार् कर लेना चागहए 11 गकसी को भी पानी देते समय गगलास बाहर से पकड़नी चागहए 12 ब्रि करते समय नल को खल ु ा छोड़ देना चागहए 13 घर में लगी पानी की मिीन चालू रखने से जल का ऄपव्यय होता है 14 हमें साफ़ गगलास में पानी पीना चागहए 15 नदी के पानी में हमें कपड़े धोने चागहए 16 वषाफ के जल को बहने देना चागहए 17 हमें कूड़ा और पोलीगथन को नदी में या तालाब में र्े कना चागहए 18 हमें िव को नदी में नही र्े कना चागहए 19 एक स्थान पर जमा हुए पानी से डें गू र्ै लता है 20 नहाते समय पानी को ज्यादा नही बहाना चागहए मनष्कर्थ एवं पराि​िथ

% 96

% 92

96

97

96

61 84

80 93

84 100

85 89 92 77 97 95 96 91 93 81 89 51 83 31 94 83

97 83 98 84 94 95 94 70 94 97 83 60 93 76 96 97

98 100 97 100 100 100 100 100 95 97 92 84 94 92 96 100

कुछ क्षेर ऐसे हैं जहाँ पर लोगों की जागरूकता ऄभी भी संतोषजनक नहीं है क्योंगक बहुत ही सामान्त्य जानकारी से भी लोग ईतने पररगचत नहीं है गजतने की होने की ऄपेक्षा की जाती है जैसे की पानी के टंकी की सर्ाइ तथा पीने के पानी को सार् बतफन में रखने जैसी बातों से ऄभी भी लोग कम पररगचत हैं | वतफमान समय में जहाँ पानी की कमी बढ़ती ही जा रही है वहां पर लोग अज भी वषाफ के जल को बहने देने की बात करते हैं | वषाफ जल के संरक्षण की बात तो दरू की है जो जल है भी ईसका भी ठीक से प्रयोग नहीं हो रहा है और ईसे बबाफद गकया जा रहा है | नगदयों, झरनों और तालाबों के पानी में कूड़ा र्ें क कर ईसे प्रदगू षत गकया जा रहा है | छारों में ऄभी वषाफ जल के संरक्षण के प्रगत जागरूकता कम है Copyright © 2018, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


Amit Ratna Dwivedi 9936 (Pg. 9931-9937)

जबगक गिक्षक और ऄगभभावक वषाफ जल के प्रगत जागरूक हैं | अज के छार ही कल के समाज के नागररक होंगे और यगद ईन्त्हें जल संरक्षण के प्रगत प्रारम्भ से ही गसखाया जायेगा तो गनगित तौर पर जल के संरक्षण में सर्लता गमलेगी

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अज भी लोग धमफ के नाम पर , अत्मा की िांगत के नाम पर , तथा मोक्ष के नाम पर मरे हुए व्यगक्तयों के िव को जल में गवसगजफत कर देते हैं ऐसा करके वे ईस मृतक अत्मा की िांगत की प्राथफना करते हैं लेगकन ऐसा करने से जल प्रदगू षत होता है ऐसा ईनमे से बहुत कम को ही पता है | िायद आसीगलए ऄभी भी िव को नदी में गवसगजफत करने जैसी प्रथा चली अ रही है | िव को नदी में र्ें कने से सम्बगन्त्धत जागरूकता छारों में बहुत ही कम है िायद ऐसा आसगलए है क्योंगक घर पर ईन्त्हें कुछ आसी प्रकार की गिक्षा गमली है आसीगलए वे आसे ही सही मानते हैं | और यगद ऐसा ही चलता रहा तो वह गदन दरू नहीं जब पीने का पानी जहर का रूप ले लेगा | आसगलए आस क्षेर गविेष में गजतनी जशदी हो सके जागरूकता लाना होगा| यगद छारों को जागरूक कर भी गदया गया तो ईसका कोइ ऄथफ नहीं जबतक गक ईनके ऄगभभावकों को आसके प्रगत जागरूक न गकया जाय | क्योंगक यगद वे स्वयं जागरूक नहीं होंगे तो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बच्चों/छारों के उपर ऄपने गवचारों को थोपते रहेंगे | आसगलए ऄब यह भी जरुरी हो गया है गक छारों के साथ-साथ ऄगभभावकों को भी जागरूक गकया जाय | छार जल प्रदषू ण की समस्या का गनवारण और जल संरक्षण के बारे में स्कूल में सीखते हैं | लेगकन यगद गसखाने वाले ही जागरूक नहीं होंगे तो गर्र जल का संरक्षण या गर्र जल प्रदषू ण का गनवारण गसर्फ एक कोरी कशपना बन कर रह जायेगा ऐसे में यह बेहद जरुरी है गक गिक्षकों को जल प्रदषू ण के गनवारण तथा जल संरक्षण के प्रगत जागरूक बनाया जाए| जल संरक्षण से सम्बंगधत जागरुकता हर जगह पहुँचाइ जाये चाहे वह गाँव हो या िहर क्योंगक गसर्फ गकसी क्षेर गविेष में जागरूकता लाने से जल का संरक्षण नहीं गकया जा सकता है | जल प्रदषू ण तथा संरक्षण से सम्बगन्त्धत काननू का सख्ती से पालन गकया जाये | तगमलनाडु देि का एकमार राज्य है जहाँ परू े राज्य में हर घर में छत वषाफजल संग्रहण ढांचों का बनाना अवश्यक कर गदया गया है | आस सन्त्दभफ में दोषी व्यक्तयों पर काननू ी कायफवाही हो सकती है, ऐसा काननू धीरे -धीरे परू े देि में लागू कर देना चागहए| िौचालय के फ्लि व्यवस्था को ख़त्म गकया जाना चागहए तथा पानी डालने के गलए समुद्र के जल का प्रयोग करना चागहए आसके ऄगतररक्त घरों में नाली बंद नगलका का प्रयोग गकया जाना चागहए जो प्रयोग हो जाने के बाद जल प्रवाह को होते रहने देने के बजाय बंद कर देता है |

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Amit Ratna Dwivedi 9937 (Pg. 9931-9937)

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