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GHATATA BAL LING ANUPAT: EK GAMBHIR SAMASYA

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2019 = 6.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, SEPT-OCT, 2020, VOL- 8/61

घटता बाल ललिंग अनु पात: एक गिंभीर समस्या (DECLINE CHILD SEX RATIO: A SERIOUS PROBLEM) Manisha Rani1 & Jyoti Tiwari2, Ph. D. 1 Research Scholar, Department of Home Science, Birla Campus, H.N.B.G.U. Srinagar (Uttarakhand) 2 Associate professor, Department of Home Science, Birla Campus, H.N.B.G.U. Srinagar (Uttarakhand)

Abstract

“दे खो चारो​ों ओर वैश्वीकरण का शोर है , पर रास्ते में इसके बाधाएों घनघोर है | ना होगा चहुँ ववकास, जनावधकार भी कमजोर है , जब हर घर-पररवार में, व ोंगानुपात डाों वाडो है ||” मानव आबादी में 0-6 सा (जन्म से ेकर 6 वर्ष) की उम्र में प्रवत 1000 बा को​ों पर बाव काओों की सोंख्या के अनुपात को ‘बा व ोंगानुपात’ अथवा ‘वशशु व ोंगानुपात’ कहते हैं | वजसमें कमी होने अथवा वनम्नता व असोंतु न की स्थथवत को ‘घटता बा व ोंग अनुपात’ (Decline Child Sex Ratio) कहा जाता है , इसके प्रभावी होने से वकसी भी दे श के व ए वैश्वीकरण का नारा, मात्र एक खूबसूरत ख्वाब बनकर रह जाये गा| वैश्वीकरण की प्रविया समाज में पररवार व व ोंग, वशक्षा व सावहत्य, आवथषक, राजनीवतक आवद समान ताकतो​ों के ववकास का सोंयोजन है | वजसमे समाज के प्रत्येक मानव के ववकास में आने वा ी बाधाओों को दू र वकया जाता है| ईश्वरकृत इन अनुपम कृवतयो​ों (स्त्री-पु रुर्) के बीच मानवकृत वनयम भेदभाव व शोर्ण पै दा करते हैं | वजसकी आड़ में मानव अवधकारो​ों व मवह ावधकारो​ों का हनन शुरू होता है | इन सब में गातार बाव काओों का घटता व ोंगानुपात वैवश्वक ववकास की बाधाओों में मुख्य जड़ का काम कर रहा है | वास्तव में यह वकसी भी दे श की शमषनाक स्थथवत है | भारत में 1961-2011 तक की जनगणना के आों कड़ो​ों से यह स्पष्ट हो जाता है वक हमारे दे श में बा व ोंगानुपात गातर घट रहा है , वजसके च ते कदम-कदम पर मवह ाओों को पु रुर्ो​ों से कम आों का जाता है | अतः बा क तथा बाव काओों के मध्य व ोंग अनुपात में सोंतु न होना आवश्यक है , अन्यथा वह वदन दू र नहीों जब वैश्वीकरण के थथान पर दे श में मवह ा ववहीन समाज की स्थथवत आ जाएगी| वपछ े 65 वर्ों में भारतीय जनसोंख्या में व ोंग अनुपात गातार कम हआ है । जोवक वचन्ता का ववर्य है , भारत में व ोंग अऩुपात में वगरावट का प्रमुख कारण ड़कें और ड़वकयो​ों के प्रवत भेदभाव पू णष मानवसकता का होना है । सरकार द्वारा वववभन्न वनवतयाुँ च ाकर वनम्न व ोंगानुपात को उठाने हे तु प्रयास वकयें जा रहे हैं । ेवकन, चूोंवक यह एक सामावजक समस्या है अतः इसे जड़ से खत्म करने के व ए प्रत्येक व्यस्ि को अपनी पुरूर् वादी मानवसकता को बद ना अवनवायष है । मुख्य शब्द: वैश्वीकरण, ववकास, मानव, व ोंगानुपात, घटता बा व ोंगानुपात| Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com

पररचय समाज में मानव के सामावजक, आवथष क, शैवक्षक, तथा

ैं वगक आवद प्रत्ये क क्षे त्र में होने वा ी

प्रगवत, समृ स्ि, सुदृढ़ता और बेहतर होने या बनाने वा ी प्रविया ववकास कह ाती है वजसके फ स्वरूप प्रत्ये क व्यस्ि उत्तम जीवन जी सके| परन्तु एक ओर जहाों मनुष्य जावत में जन्म

े ने वा े

प्रत्ये क प्राणी को मानव कहा जाता है , मावन के तहत स्त्री-पुरुर् दोनो​ों को सस्िव त वकया जाता है | दोनो​ों ही सृवष्ट के सृजनकताष हैं , तथा मानव जन्म

े ते ही मानवावधकारो​ों का हक़दार हो जाता है | वहीुँ

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दू सरी ओर जब पुरुर् और मवह ाओों के जीवन दर में वभन्नता प्रदवशषत होती है अथवा बा को​ों की सोंख्या पर बाव काओों का जन्म और जीवन अनुपात कम होता है तो इस वचन्ता जनक स्थथवत के च ते ववकास की यह नीवत वकसी भी राष्टर के नागररको​ों के व ए वनष्फ हो जाती है | मानवीय आबादी में प्रवत एक हजार स्त्री और पुरुर् की समान जनसोंख्या के आधार पर व ों ग अनुपात का वनधाष रण वकया जाता है वजसमे बा

व ों ग अनुपात हे तु वकसी ववशेर् क्षे त्र में जन्म े ने वा े 0-6 वर्ष के 1000 बा को​ों की सोंख्या

पर समान क्षे त्र व समयाववध में पैदा होने वा ी बाव काओों का जन्म और जीवन अनुपात दे खा जाता है | भारत में यह अनुपात इतना असोंतुव त है वक भारत अपनी व ों ग अनुपात का घटना चु प आपातका

वों गक असमानता के व ए कुख्यात है।

है े वकन सोंकट वास्तववक है |

वैश्वीकरण एक सतत प्रविया है वजसके सकारात्मक प्रभाव को प्राप्त करने के व ए समाज में मानवीय समानता होना परम आवश्यक है | इसमें समू चे ववश्व को एक वैवश्वक ग्राम के रूप में ववकवसत करने का प्रयास वकया जा रहा है , परन्तु दू सरी ओर वतष मान युग में घटता व ों ग अनुपात वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ा रहा है | यह सम्पू णष ववश्व को एक नव-साम्राज्यवाद युग में

े जाता प्रतीत हो

रहा है | वजसके कारण समाज में मवह ाओों का अनु पात कम हो रहा है जो पूरे ववश्व के व ए एक शमष नाक स्स्तवथ है | वास्तव में जब भी हम वकसी क्षेत्र, समाज, राज्य या दे श के ववकास बात करते हैं तब उसके व ए मवह ा व पुरुर् की एक समान भागीदारी आवश्यक होती है | परन्तु यह एक दु ःखमय स्थथवत है वजससे सामावजक बुराइयो​ों को ब

वम ता है | फ स्वरूप वैवश्वक ववकास पूणषतः बावधत होता

प्रतीत होता है | “स्स्त्रयाों योग्य होती है वकन्तु वे अपनी योग्यता का उपयोग घर की चार वदवारी में ही करती हैं , उनकी क्षमता का उपयोग राजकीय कायों में कराया जाना चावहए|” – ई.पू. प्लेटो (ररपस्िक), का यह तथ्य वतष मान में मवह ाओों की वास्तववक क्षमता को प्रदवशषत करता है चूुँ वक वैश्वीकरण के कारण आज मवह ाएों अवसर वम ने पर घरे ू व सामावजक दोनो​ों ही क्षे त्रो​ों में सोंतुव त भू वमका वनभाकर पररवार, समाज व राष्टर के ववकास में अपना योगदान दे रहीों है | वतष मान में उच्च वशक्षा, बैंवकोंग, बीमा कोंपवनयो​ों, रे वे, हे ल्थ सेंटर, आई.टी., सेना, प्रशासवनक सेवा व अोंतराष ष्टरीय कम्पवनयो​ों में मवह ाओों ने अपनी क्षमता का पररचय वदया है | वशक्षा व समान अवधकारो​ों के फ स्वरूप मवह ा ववकास हे तु अनेक अवसरो​ों के द्वार खु े हैं | रोजगार सु भ हो गया है | अतः वैश्वीकरण ने दु वनया को एक गाुँ व में बद

वदया है | अतः

ववश्व के वकसी भी भाग में होने वा ा पररवतष न या ववकास मवह ाओों को प्रभाववत करने के साथ-साथ उनसे प्रभाववत भी होता है | वनःसोंदेह, भारत में 21वीों से मवह ाओों की उच्च वशक्षा से भू वमका रही है

े कर व्यापार और राजनीवत में अोंहम

वकन यह वसक्के का मात्र एक पह ू है | दू सरे पह ू में घर के अन्दर औरतो​ों की शोवर्त

स्थथवत वछपी हई है जोवक सामावजक मू ल्ो​ों, परम्पराओों और सोंस्कृवत के नाम पर बा को​ों की तु ना में बाव का व ों ग अनुपात को कम करता है | चूुँ वक भारत अपनी और वशशु व ों ग अनुपात का घटना एक गुप्त आपातका

ैं वगक असमानता के व ए कुख्यात है

की भाों वत बढ़ता है वजसका सोंकट वास्तववक

होता है , अतः वैश्वीकरण पर इसका प्रभाव एक भयानक और शमष नाक भववष्य के रूप में वदखाई दे रहा है | ऐसी स्स्तवथ में राष्टर का ववकास सोंभव नहीों है , चूुँ वक स्त्री व पुरुर् दोनो​ों ही प्राणी के जीवन और ववकास रूपी गाड़ी के दो पवहयें हैं , वजनमे दोनो​ों की सोंतुव त भागीदारी अवनवायष होती है | अतः बा व ों ग

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अनुपात में वगरावट के कारण स्स्त्रयो​ों की जीवन सोंख्या सोंकटमय बनी हई है | वजसके च ते भारत जैसे ववकवसत दे श का वैवश्वक स्तर पर ही नहीों बस्ि सामान्य स्तर पर भी मानवीय ववकास बावधत है | भारत एक ऐसा दे श है जहाों बेटो​ों को बेवटयो​ों की तु ना में अवधक वरीयता दी जाती है | ववशेर् रूप से मध्य पूवष एवशया और उत्तरी अफ्रीका में , वहाों समृ स्ि में वृस्ि होने से प्रजनन दर में वगरावट के साथ ववर्म व ों ग अनुपात भी दे खा गया है | इसके पीछे

ोगो​ों की आवथष क व शैवक्षक मजबूती भी एक

प्रमु ख कारण रही है जो वैश्वीकरण का नकारात्मक रूप है | इससे साक्षरता दर और आय में वृस्ि हई है वजससे

ोगो में व ों ग परीक्षण की पहुँ च आसान हो गयी है | समाज में

गातार घटती जा रही वशशु व ों ग

अनुपात दर का कारण प्राकृवतक नहीों है और न ही इसका सम्बन्ध अमीरी या गरीबी से है | यह एक मानव वनवमष त समस्या है जो दे श के सभी वहस्ो​ों, जावतयो​ों, वगों, और समु दायो​ों में व्याप्त है | भारत में असोंतुव त बा

व ों ग अनुपात के वववभन्न कारण हैं जैसे-

समाज में सवदयो​ों से च ी आ रही

वपतृ सत्तात्मक मानवसकता का होना, मवह ा वशक्षा व सशिीकरण में कमी होना, दहे ज़ प्रथा, सामावजक-आवथष क असुरक्षा, आधु वनक तकनीक (अल्ट्र ासाउों ड, एवम्नयोवसन्टे वसस) का ग त उपयोग होना, सुरक्षा अवधवनयमो​ों की असफ ता, आय में वृस्ि व वगरता प्रजनन दर तथा पररवार के आकर में पुत्रो​ों को प्राथवमकता दे ने के कारण जन्म के बाद वशशु कन्या की दे खभा

न करना आवद| इन सभी

कारणो​ों ने भारत में कन्या भ्रू ण हत्या को बढ़ावा वदया है वजससे भारत के आधे से अवधक राज्यो​ों में बाव काओों का अनुपात बा को​ों की तु ना में वनम्न है , साथ ही दे श के कई वहस्ो​ों में खरीद-फरोख्त के माम े सामने आते रहते हैं | इस प्रकार यह न केव ववर्य है बस्ि वहों सा, मानव ववकास एवों

ड़वकयो​ों की

व ों ग न्याय और समानता का

ोकतों त्र भी है | वजसको दू र वकये वबना वैश्वीकरण में मवह ाओों

के योगदान के अभाव को दू र नहीों वकया जा सकता है | अतः व ों गभे दी बीमारी से ग्रस्त भारतीय समाज को बा

व ों ग अनुपात को सोंतुव त करना आवश्यक है चूुँ वक इसके अभाव में न वकसी पररवार का

ववकास वकया जा सकता है और न ही राष्टर ववकास सोंभव है | भारत में घटते बाल ललिंग अनु पात की भयावह स्थिलत- “एक नजर” भारत में बा

गातार घटता जा रहा है | वर्ष 1961 से

े कर 2011 तक की

जनगणना का अव ोकन करने से यह स्पष्ट हो जाता है वक वपछ े दशको​ों में बा

व ों ग अनुपात (0 से 6

वर्ष के आयु समू ह) में

व ों ग अनुपात

गातार वगरावट हई है । वपछ े 50 सा ो​ों में बा

व ों ग अनुपात में

गभग 60

पॉइों ट की वगरावट दजष की गई है , (Figure- 01) े वकन वपछ े दशक (2001-2011) के द रान इसकी सोंख्या में सबसे अवधक कमी दे खी गयी है | वर्ष 2001 की जनगणना में जहाुँ 6 वर्ष तक की आयु में प्रवत 1000 बा क पर बाव काओों की सोंख्या 927 थी। वहीों 2011 में घटकर 914 (918, 2015-16 में ) हो गयी। ध्यान दे ने वा ी बात यह है वक आज़ादी के बाद भारत में अब तक की जनगणना में यह अनुपात सबसे वनम्न है |

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Decline Child Sex Ratio (0-6 Year) बीते 6 दशकों (1961-2011) में प्रतत 1000 बालकों पर बातलकाओं की ं​ं्या 1000 1000 980

1000

1000

1000

1000

1000

976 964

962

960

945

927

940

918

Boy

920

Girl

900 880

860 1961

1971

1981

1991

2001

2011

Source: The bio-politics of population control and sex-selective abortion in China and India - Scientific Figure on ResearchGate

Figure- 01

दे श के वववभन्न राज्यो​ों के बा

व ों गानुपात पर दृवष्टपात करने से यह स्पष्ट होता है वक कुछ राज्य ऐसे हैं

वजनमे 2001-2011 के मध्य बा

व ों ग अनुपात में सुधार होने के बावजूद उनका आों कड़ा 900 तक भी

नहीों पोंहच पाया है | इनमें पोंजाब, हररयाणा, जिू कश्मीर, वदल्ली तथा चों डीगढ़ आवद राज्य ऊपरी थथान पर हैं | वपछ े 30 सा ो​ों के आों कड़ो​ों के अनुसार, भारत में बा

व ों गानुपात में वववभन्न उतार-चढ़ाव के

बावजूद पोंजाब और हररयाणा राज्य सबसे वनच े पायदान पर प्रतीत होतें हैं , (Table-01) 1991 में सबसे वनम्न बा

व ों ग अनुपात वा े राज्यो​ों में प्रथम थथान पर पोंजाब (875), दू सरे थथान पर हररयाणा

(879) तथा तीसरे थथान पर छत्तीसगढ़ (899) राज्य रहें | 2001 में भी प्रथम थथान पर भारी वगरावट के साथ पोंजाब (798), दू सरे थथान पर हररयाणा (819) का अनुपात रहा जबवक तीसरे थथान पर चों डीगढ़ (845) राज्य रहा वजसका बा

व ों गानुपात 1991 में काफी अच्छा था| वहीुँ 2011 में प्रथम हररयाणा

834, दू सरा पोंजाब 846 तथा तीसरे थथान पर जिू कश्मीर 862 (941 से घटकर) बाव काओों की सोंख्या में सबसे वनम्न बा

व ों ग अनुपात वा े राज्यो​ों की श्रेणी पर आते हैं | इन आों कड़ो से यह स्पष्ट होता

है वक 1991-2001 के दशक में इन राज्यो​ों में बाव काओों की सोंख्या में तीव्रता से कमी आयी है जबवक अग े दशक 2001-2011 में इन राज्यो​ों ने बा वजससे वनम्न बा

व ों गानुपात के सुधार हे तु अथक प्रयास प्रारों भ वकये,

व ों ग अनुपात के खतरो​ों से बचा जा सके| परन्तु 2011 के आों कड़ो के अनुसार यहाुँ

अभी भी वचोंताजनक स्थथवत बनी हई है |

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बीते 30 वर्षों में सबसे कम बाल ललिंग अनुपात (0-6 year) वाले राज्य Source- Census of India 2011 (www.censusindia.gov.in) Supported by UNICEF Year State & Ratio 1st

2nd

3rd

1991

पंजाब- 875

हरियाणा- 879

छत्तीसगढ़-

2001

पंजाब- 798

हरियाणा- 819

चं डीगढ़-

2011

हरियाणा- 834

पंजाब- 846

जम्मू-कश्मीि- 862

899 845

Table- 01 उपरोि ताव का से स्पष्ट है वक 2011 के जारी आों कड़ो​ों के अनुसार, दे श में सबसे वनम्न बा व ों गानुपात वा े राज्यो​ों में प्रथम थथान पर हररयाणा 834, दू सरे थथान पर पोंजाब 846 तथा तीसरे थथान पर जिू-कश्मीर 862 हैं | परन्तु 2001-2011 के आों कड़ो​ों में प्रवत 1000 बा को​ों पर बाव काओों की सोंख्या में आने वा ी वगरावट के अनुसार जिू-कश्मीर एक ऐसा राज्य है जहाों 2011 में , 2001 की तु ना में बाव काओों की सोंख्या में सबसे अवधक (79) अोंको​ों की वगरावट दजष की गयी, (Figure- 02) इसमें दू सरे थथान पर दादर-नगर हवे ी में 53 बाव काओों, तीसरे थथान पर

क्ष्यद्वीप 48, च थे थथान

पर आुँ ध्रप्रदे श 22 तथा दमन और द्वीप 22 एवों पाोंचवें थथान पर राजथथान में 21 बाव काओों के कमी दजष की गयी| इसी िम में महाराष्टर 19, उत्तराखोंड 18, झारखोंड 17 बाव काओों की सोंख्या घटाते हए िमशः छटवें, सातवें और आठवें थथान पर आतें हैं | भारत में सबसे वनम्न बा व ों गानुपात हररयाणा राज्य के झज्जर में 774 है |

2001-2011 में बाल तलंगानुपात में ंर्ा​ातिक तगरार्ट र्ाले राज्य 979

1000 950 900

961

959

941

926

939

926

911

904

909 888

862 2001

850

2011

800 J&K

Dadar Nagar Haveli

Laxya Dweep

Andhra Pradesh

Daman Dweep

Rajsthan

Source- Census of India 2011 (www.censusindia.gov.in) Supported by UNICEF

Figure- 02 उपरोि आों कड़ो से स्पष्ट होता है वक स्वतन्त्रता के बाद भारत में आवथष क ववकास वजतनी तीव्रता के साथ हआ है उतनी ही तीव्रता से बा

व ों ग अनुपात में वगरावट आयी है | वदल्ली, चों डीगढ़,

हररयाणा, पोंजाब, तवम नाडू आवद वववभन्न ववकवसत राज्यो​ों में प्रवत व्यस्ि आय की तु ना में बाव का Copyright © 2020, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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वशशु अनुपात की स्थथवत वनराशाजनक है | जनसोंख्या ववस्फोट को रोकने हे तु वकये गये प्रयासो​ों का एक कुप्रभाव असोंतुव त व ों ग अनुपात के रूप में भी वदखाई दे ता है चूुँ वक पररवार वनयोजन करते समय जब पररवार, कम बच्चे पैदा करने का वनणषय

े ते हैं तो पररवार की मवह ाओों पर पुत्र को जन्म दे ने का

दबाव बढ़ जाता है | समाज में छोटा पररवार, एक बेटी की तु ना में एक बेटा पैदा करने की अवनवायषता को मजबूत करता है | लनम्न बाल ललिंगानु पात सुधार हे तु सरकार के बढ़ते कदम वतष मान स्थथवत और भववष्य की वचन्ता को दे खते हए आधु वनक दु वनया के साथ भारत सरकार ने मवह ा बचाव उत्थान के व ए कोई कसर नहीों छोड़ी है। बा

व ों ग अनुपात बढ़ाने और बाव का जन्म

सुधार के व ए सरकार ने वनम्नाों वकत कदम उठायें है । •

भारतीय दिं ड सिंलहता, 1860 भारतीय दों ड सोंवहता, 1860 के तहत प्रावधान में धारा 312 के अनुसार, “जो कोई भी

जानबूझकर वकसी गभष वती माता का गभष पात कराता है जब तक वक उि मवह ा के जीवन के व ए गभाष वथथा का जारी रहना खतरनाक न हो, उसे 7 सा

की सजा दी जाएगी|” इसमें धारा 313 के

अनुसार, स्वयों मवह ा द्वारा भी गभष पात की कोवशश करना भी दों डनीय अपराध है | •

ललिंग चयन प्रलतषेध अलधलनयम, 1994 पूवष गभाष धान और प्रसव पूवष वनदान तकनीक (1994) अवधवनयम, 20 वसतम्बर 1994, भारत के

कन्या भ्रू ण हत्या और वगरते व ों गानुपात को रोकने के व ए भारत की सोंसद द्वारा पाररत एक सोंघीय कानून है | वजसके द्वारा प्रसव पूवष व ों ग वनधाष रण पर प्रवतबन्ध

गाकर गैरकानूनी घोवर्त कर वदया है |

वजसके अोंतगषत व ों ग जाुँ च के व ए अल्ट्र ासाउों ड या अल्ट्र ासोनो ग्राफी कराने वा े पवत-पत्नी एवों करने वा े डॉक्टर, ै ब कमी को 3-5 सा की सजा और 10-15 हजार रुपयें जुमाष ने का प्रावधान है | •

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (BBBPY) BBBPY की शुरुआत 22 जनवरी, 2015 को ऐसे 10 राज्यो​ों में की गयी वजनमे बा

अनुपात वनम्न था| यह योजना ‘मवह ा एवों बा

व ों ग

ववकास मों त्रा य’, ‘स्वास्थ्य मों त्रा य’, ‘पररवार कल्ाण

मों त्रा य’ एवों ‘मानव ववकास मों त्रा य’ की एक सोंयुि पह

है | जो

ड़की के जन्म उपरान्त उसकी

जन्म वतवथ मनाने, उस पर गवष करने तथा उसको वशवक्षत करने की ओर ध्यान केस्ित करती है | बेटी बचाओों बेटी पढ़ाओों योजना से दे श के 104 वज ो​ों में व ोंग अनुपात बेहतर दे खा गया है | मवह ा एवों बा ववकास मत्राों य के अनुसार यह कायषिम 161 राज्यो​ों में शुरु वकया गया था| उनके अनुसार 119 वज ो​ों में गभष धारण के पह े 3 माह में पोंजीकरण कराने के माम ें में प्रगवत आई है । •

बाललका बचाओ योजना यह योजना बाव काओों के जन्म और जीवन को सुरवक्षत करने हे तु प्रयासरत है , वजसकी

शुरुआत गाुँ धी जी की 138वीों जयोंती के अवसर पर भारत की पह ी मवह ा राष्टरपवत प्रवतभा पाटे ने ‘स्वास्थ्य एवों पररवार कल्ाण मों त्रा य’ के अोंतगषत की| •

जी

सुकन्या समृलध योजना सरकार द्वारा जनवरी, 2015 में प्रारों भ की गयी यह योजना दे श में अवधक से अवधक

को बचाने तथा उन्हें आवथष क रूप से बेहतर व सुरवक्षत भववष्य प्रदान करने के व ए प्रयासरत है |

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ड़वकयो​ों


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•

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शुभलक्ष्मी योजना राज्य सरकार राजथथान द्वारा वनम्न बा

व ों गानुपात को ध्यान में रखते हए, बाव का के पैदा

होने को शुभ मानने तथा कन्या भ्रू ण हत्या को रोकने के व ए शुभ क्ष्मी योजना प्रारों भ की| इस योजना के अोंतगषत पररवार में बेटी का जन्म होने पर माता-वपता को 2100 रूपये वदए जायेंगे| इसके अवतररि उि बेटी को पढ़ाई के समय 3100 रूपये का चै क और वववाह के समय 7300 रूपये वदए जाने का प्रावधान वकया गया है | इस प्रकार स्पष्ट होता है वक उपरोि कई प्रकार की योजनाओों व प्रावधानो​ों के द्वारा भारत में बा

व ों ग अनुपात को सोंतुव त करने का प्रयास वकया जा रहा है | वजसमें केंद्र सरकार के साथ-साथ

वववभन्न राज्य सरकारें भी वियाशी

हैं | उदाहरणाथष -

ाड ी

क्ष्मी योजना (मध्य प्रदे श),

ाड ी-

वदल्ली व हररयाणा, मु ख्यमों त्री कन्या सुकन्या योजना (वबहार), ग ष चाइल्ड प्रोटे क्शन स्कीम (आन्ध्र प्रदे श), भाग्य क्ष्मी स्कीम (कनाष टक) आवद वववभन्न प्रकार की योजनायें अ ग-अ ग राज्य सरकारो​ों द्वारा च ाई जा रहीों हैं , वजससे घटते बा

व ों ग अनुपात में सुधार वकया जा सके| फ स्वरूप 2011 के

जारी आों कड़ो​ों में हमें 2001 की तु ना में सुधार दे खने को वम ता है | 2011 में सवषश्रेष्ट प्रदशषनकारी राज्यो​ों में प्रथम थथान पर अरुणाच

प्रदे श 972, दू सरे थथान पर मे घा य व वमजोरम 970, तीसरे थथान

पर छत्तीसगढ़ 969 तथा च थे थथान पर अोंडमान वनकोबार 968 हैं | प्रस्तु त आों कड़ो​ों के अनुसार पोंजाब एक ऐसा राज्य है वजसने 2001 से 2011 में तु नात्मक रूप से बाव काओों की सोंख्या में सबसे अवधक कु

48 अोंको​ों की बढ़ोत्तरी करके 798 से 846 का अनुपात प्राप्त वकया है , (Figure- 03) इसके साथ

चों डीगढ़ राज्य में 35 बाव काओों, हररयाणा में 15, वहमाच

प्रदे श 13, तथा अोंडमान वनकोबार में कु

11 बाव काओों की वृस्ि दजष की गयी वजसके उपराों त 2011 में उि राज्यो​ों का बा िमशः 880 (चोंडीगढ़), 834 (हररयाणा) 909 (वहमाच

व ों गानुपात

प्रदे श) तथा 968 (अोंडमान वनकोबार) तक

पोंहच गया है | दू सरी ओर यह अनुपात बा को​ों की तु ना में सोंतोर्जनक नहीों है तथा अवधक सुधार की आवश्यकता की ओर सोंकेत करता है | 2001-2011 में बाल तलं गानुपात में ंर्ा​ातिक अंकीय ंु िार प्रदशान र्ाले राज्य 1000

798

846

845 880

819 834

957 968

2001

500

2011 0 Panjab

Chandigarh

Panjab

Andmaan Nikobaar

Source- Census of India 2011 (www.censusindia.gov.in) Supported by UNICEF

Figure- 03

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बीते तीन दशको​ों (30 वर्ों) के आों कड़ो​ों के अनुसार सवाष वधक बा

14302

व ों ग अनुपात वा े राज्यो​ों में

1991 में प्रथम थथान पर दादर नगर हवे ी राज्य में बाव काओों का अनुपात (1013) बा को​ों (1000) की तु ना में 13 अोंक ऊपर रहा, वहीुँ दू सरे थथान पर नागा ैं ड (993) तथा तीसरे थथान पर उड़ीसा (987) का नाम दजष हआ| आश्चयष की बात यह है वक बाव काओों की सोंख्या में 34 अोंको की वगरावट के बावजूद, 2001 में भी प्रथम थथान पर दादर नगर हवे ी (979) रहा| 2001 में दू सरे थथान पर छत्तीसगढ़ (975) और तीसरे थथान पर मे घा य (973) राज्य रहे | 2011 में दे श में बाव काओों की सोंख्या अनुपात में काफी सुधार दे खा गया, वजसमें अरुणाच

प्रदे श एक ऐसा राज्य जो बा

व ों गानुपात में सुधार कर

979 अनुपात के साथ प्रथम थथान पर दजष वकया गया, जबवक दू सरे थथान पर मे घा य व वमजोरम (970) तथा तीसरे थथान पर छत्तीसगढ़ (973) ने अपना नाम दजष कराया, (Table-02) प्रस्तु त आों कड़ो​ों का अव ोकन करने से यह ज्ञात होता है वक बा क व बाव काओों के अनुपात में सुधार के आों कडें सोंतोर्जनक नहीों हैं , चूुँ वक 1991 में जहाों प्रथम थथान पर 1013 बाव काओों वा ा राज्य अोंवकत था वहीुँ 2011 में प्रथम थथान का अनुपात वगरकर 979 बाव काओों की सोंख्या वा े राज्य तक पोंहच चु का है | अतः बा

व ों ग अनुपात में अभी अत्यवधक सुधार की आवश्यकता है | बीते 30 वर्षों में सबसे अलिक बाल ललिंग अनु पात (0-6 year) वाले राज्य Source- Census of India 2011 (www.censusindia.gov.in) Supported by UNICEF

Year 1991 2001 2011

State & Ratio 1st 2nd दादि नगि हवेली- नागालैं ड- 993 1013 दादि नगि हवेली- छत्तीसगढ़- 975 979 अरुणाचल प्रदे श- मे घालय/ममजोिम972 970 Table-02

वववभन्न प्रयासो​ों व सुधारो​ों के बावजूद, बा

3rd उड़ीसा987 मे घालय- 973 छत्तीसगढ़969

व ों गानु पात के आों कड़े बताते हैं वक घटते बा

व ों गानुपात को कम करने वा ी नीवतयो​ों व एक्ट जैसे- P.C. & P.N.D.T. आवद का कोई असर नहीों वदख रहा है वजनका सख्ती से पा न करना आवश्यक है | सरकार की

ाखो​ों कोवशशो​ों के बावजूद

समाज में कन्या भ्रू ण हत्या की घटनाएुँ कम होने के थथान पर वशक्षा के साथ बढ़ रहीों हैं | कन्या भ्रू ण हत्या दे श की मानव समाज में में घटता बा

व ों ग अनुपात बा

ड़की और

ड़के की जनसोंख्या में भारी अोंतर पैदा कर रही है | भारत

ववकास की एक प्रमुख चु न ती है , इसके वनवारण हे तु सम्पू णष समाज

के द्वारा अहम कदम उठाये जाने की आवश्यकता है | राष्टर के ववकास हे तु वनम्न बा व ों ग अनुपात की इस चु न ती का सामना करने के व ए समाज में प्रत्ये क व्यस्ि (स्त्री-पुरुर्) को वनयवमत रूप से कन्या भ्रू ण हत्या के स्ख ाफ अपनी आवाज उठानी चावहए| वजससे समाज में वनम्न बा

व ों ग अनु पात के प्रवत जागरूकता

ायी जा सके| क्ो​ोंवक समाज में

प्रत्ये क उम्र, व ों ग, जावत, धमष के व्यस्ियो​ों को कन्या भ्रू ण हत्या के कारण तथा उसके सामावजक नुकसान के बारें में अवगत होना आवश्यक है | बच्चो​ों ( ड़को​ों) को प्रारों भ से ही पररवार व ववद्या यो​ों में Copyright © 2020, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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ड़वकयो​ों के प्रवत सिान और आदर वसखाया जाना चावहए| स्कू पाठ्यिम में

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व कॉ े जो​ों के पाठ्यचयाष एवों

ड़वकयो​ों के वगरते व ों ग अनुपात के कारण व समाज में भववष्य में इससे पनपने वा े

खतरो​ों को पढ़ने और पढ़ाने की अवनवायषता की जाये| वनयवमत अोंतरा

पर गाुँ व व शहरो​ों के

ोगो​ों की

पुरूर् रूविवादी मानवसकता पर वशक्षा, नाटको​ों, रै व यो​ों, समू ह मीवटों ग/चचाष आवद के द्वारा चोट की जानी चावहए, वजसमे युवा शस्ि की मु ख्य भू वमका होती है | दे श की युवा पीढ़ी और सरकार द्वारा घटते बा

व ों ग अनुपात के स्ख ाफ अपनी आवाज पहुँ चाने हे तु इों टरनेट व सोश

वमवडया का उपयोग एक

सशि माध्यम के रूप में वकया जा सकता है | साथ ही दे श के कानून को कन्या सुरक्षा हेतु सख्त से सख्त कानून बनाकर उन्हें दृढ़ता से

ागू वकया जाना अवनवायष है , तभी उि वनयमो​ों का पा न हो

पायेगा| दू सरी ओर समाज से ऐसी वपतृ सत्तात्मक मानवसकता का अन्त वकया जाना आवश्यक है वजसके अोंतगषत मवह ाओों को पुरुर्ो​ों से कम महत्व वदया जाता है | वनष्कर्ष राष्टर के ववकास अथवा वैश्वीकरण को मात्र एक आवथष क ववकास की पररघटना मान े ना उवचत नहीों है बस्ि यह समाज के सभी पक्षो​ों के समान ववकास की स्थथवत है | जहाों एक ओर भारत शैवक्षक, आवथष क एवों तकनीकी रूप से ववकवसत हो रहा है वहीुँ दू सरी ओर उत्तर भारत में स्त्री-पुरुर् अनुपात की घटती दर वचों ताजनक है | भारत में जैसे-जैसे

ोगो​ों की आमदनी बढ़ रही है वैसे-वैसे बेवटयो​ों के जन्म

में कमी आयी है | वैज्ञावनक क्षे त्र में प्रगवत के साथ राष्टर का तकनीकी ववकास होने के कारण ऐसी तकनीको​ों तक ोगो की पोंहच आसन हई हैं वजससे मवह ा के गभष में ही वशशु के व ों ग का पता गाया जा सकता है | इससे दे श में कन्या भ्रू ण हत्या में द्रु त गवत से वृस्ि हई है | बीते वर्ों में जहाों एक ओर समाज में शैवक्षक ववकास के साथ-साथ मवह ा वशक्षा का ववकास हआ है वहीुँ दू सरी ओर समाज में पुत्र महत्त्व की रुवढ़वादी मानवसकता में कोई साथष क पररवतषन नहीों आया है | वतष मान में भी जीवन के प्रत्ये क क्षे त्र में मवह ाओों को पुरुर्ो​ों की तु ना में कम महत्त्व वदया जाता है वजसकी शुरुआत पररवार से ही होती है | चूुँ वक भारतीय समाज पुरुर् प्रधान है , जहाों पररवारो​ों में पुत्र जन्म को वोंश का आधार माना जाता है और पुत्री को पराया धन की सोंज्ञा दी जाती है | इस प्रकार की वववभन्न परम्पराओों व मान्यताओों के च ते पुरुर्ो​ों को एक वजिेदार व आत्मवनभष र व्यस्ि माना जाने

गा तथा मवह ाएों एक वजिेदारी मात्र

बनकर रह गयीों| वजससे उनके जन्म को पररवार में इक बोझ समझा जाने

गा, जो बाल्ावथथा से

वृिावथथा तक वपता, भाई, पवत तथा पुत्र जैसे वपतृ सत्तात्मक नातो​ों पर वनभष र हो गयी और मवह ाओों का महत्त्व कम होता च ा गया| फ स्वरूप भारत में प्रवत दशक बाव का व ों गानुपात में भारी वगरावट आयी और धीरे -धीरे व ों ग असमानता के कुप्रभाव हमारे सामने आने

गे, जैसे- मवह ाओों के स्ख ाफ

अपराधो​ों में ते जी से वृस्ि होना, आपरावधक य न समस्या एवों रोगो​ों के सोंिमण में वृस्ि होना, गरीब मवह ा वहों सा व तस्करी को बढ़ावा आवद| दू सरी ओर वनम्न बाव का अनुपात के दीघषका ीन प्रभाव जैसेपाररवाररक वोंश का रुकना, भववष्य पुरुर् वववाह हीनता, आजीवन मवह ा अभाव और सामावजक मु ख्य धारा का अपवजषन तथा जनसोंख्या जन्मदर का अन्त आवद एक सोंकटमय भववष्य के रूप में वदखाई दे रहा है | अतः स्पष्ट है वक वनम्न बा

व ों गानुपात के प्रभाव वैश्वीकरण ववरोधी स्थथवत को पैदा करते हैं |

क्ो​ोंवक यह एक प्राकृवतक सत्य है वक बाव काओों/मवह ाओों के आभाव में वकसी भी पररवार या राष्टर की कल्पना नहीों की जा सकती है इनके वनमाष ण और ववकास में पुरुर् के साथ-साथ स्स्त्रयो​ों की भी समान रूप से भागीदारी अवनवायष होती है |

गातार घटते व ों ग अनुपात के कुप्रभावो​ों के कारण

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जनजीवन प्रभाववत होने तथा भववष्य के सोंकटो​ों को दे खते हए सरकार ने मवह ाओों को जीवन की मु ख्य धारा से जोड़ने के प्रयास प्राम्भ वकये| बा

व ों गानुपात सोंतु न हे तु सरकार ने सवषप्रथम कन्या भ्रू ण हत्या

को रोकने हे तु ‘व ों ग चयन प्रवतर्ेध अवधवनयम-1994’ (Gender selection prohibition act, 1994) ागू वकया वजसके अोंतगषत गभाष वथथा में व ों ग जाुँ च करना व करना दोनो​ों गैरकानूनी है | इसके अवतररि शुभ क्ष्मी योजना, बेटी बचाओों बेटी पढ़ाओों योजना, बाव का बचाओों योजना, सुकन्या समृ स्ि खाता योजना, प्रधानमों त्री उज्जव ा योजना जैसे वववभन्न कायषिमो​ों द्वारा भारत में बा

व ों ग अनुपात को

सोंतुव त करने का प्रयास वकया जा रहा है | 2003 में समाज में घटती मवह ाओों की सोंख्या पर ‘मातृ भूवम: ए नेशन ववदआऊट वूमेन’ (Matrubhoomi: A Nation Without Women) नामक एक वफल्म आयी थी, इसमें भववष्य के एक ऐसे गाुँ व की शमष नाक व भयानक कल्पना को साकार वकया गया है जहाुँ वर्ों से होते आ रहे मवह ा शोर्ण और बाव का वशशु हत्या के च ते अब यहाुँ एक भी मवह ा या

ड़की जीववत नहीों थी|

दरअस , यह समाज को भववष्य की चे तावनी दे ने वा ी वफल्म है वक मवह ाओों अथवा बेवटयो​ों के प्रवत अनचाहे रुख की स्थथवत वकतनी भयावह हो सकती है | वतष मान में इस वफल्म की कई चे तावनी वैवश्वक ववकास में बाधा बनकर भारत के सामने हैं | ऐसी चे तावनी की हकीकत से बचने हे तु हमें घटते व ों ग अनुपात के प्रवत सचेत होना और बा

व ों ग अनुपात दर को सोंतुव त करना परम आवश्यक है | अन्यथा

वैवश्वक ववकास नहीों वकया जा सकता है | परन्तु केव

सरकारी प्रयासो​ों के द्वारा इस समस्या का

समाधान नहीों वकया जा सकता, चूुँ वक यह एक सामावजक समस्या है , अतः इसका अन्त भी समाज के सहयोग द्वारा हो सकता है | इसके व ए दे श के सभी नागररको​ों को मवह ाओों के महत्व को स्वीकार करना अवनवायष है तभी समाज को व ों गभे दी बीमारी से मु स्ि वद ाई जा सकती है अन्यथा वो वदन दू र नहीों जब मवह ा ववहीन समाज की स्थथवत आ जायेगी| सिंदभभ ग्रिंि डॉ. पाठक, एस. (2018), “वैश्वीकरण का अथष क्ा है ?” क्ोटा अनीस, ज. (2017), “घटता बा व ोंग अनुपात: वपत्रसत्तात्मक मानवसकता का समाज और सरकार की चोट जरुरी” गोरखपु र न्यूज ाइन Available from: https://gorakhpurnewsline.com/7478-2/ नायर, एस. (2016), “भारत में बढ़ रही है ोगो​ों की आमदनी, ेवकन बे वटयो​ों के जन्म में कमी” इों वडयास्पेंड. Available from: https://archive.indiaspendhindi.com धर, अ. (2016) “914, बा व ोंग अनुपात स्वतन्त्रता के बाद सबसे कम है ” आई.एस.टी. अनीस, ज. (2014), “मध्य प्रदे श में जारी है बा व ोंग अनुपात का घटना” नागररक सोंघर्ष Available from: http://mymplssm.blogspot.com/2014/01/blog-post_14.html?m=1 अख्तर, व. (2012), “असोंतुव त होता बा व ोंग अनुपात और भववष्य की चुन वतयाुँ ” प्रविा डॉट काम Available from: https://www.pravakta.com/child-sex-ratio-is-unbalanced-and-futurechallenges/ ज ी, अ. (2006), “वचोंताजनक है उत्तर भारत में स्त्री पु रुर् अनुपात” बी बी सी सोंवाददाता The bio-politics of population control and sex-selective abortion in China and India Scientific Figure on Research Gate. Available from: https://www.researchgate.net/figure/Indias-sex-ratio-Total-and-0-6-years-SourceCensus-of-India-from-1961-to-2011-Note_fig2_313674392 Census of India 2011. Supported by UNICEF. Available from: https://www.censusindia.gov.in/2011census/censusinfodashboard/downloads.html

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14305

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