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VANCHIT VARG KE ABHIBHAVAKO KI SHIKSHA SE JUDI APEKSHAON ENAV CHUNOTIYON KA VISHESHANATMAK ADHYAYAN

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Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language, Online ISSN 2348-3083, SJ IMPACT FACTOR 2017: 5.068, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFERRED JOURNAL, JUNE-JULY, 2019, VOL- 7/34

वंचित वर्ग के अचि​िावकों की चिक्षा से जुड़ी अपेक्षाओ ं एवं िुनौचतयों का चवश्ले षणात्मक अध्ययन । िरत कुमार पंडा1, Ph. D. & कुमारी यिवन्ती यादव2 1

सहायक प्राध्यापक, म. गं. अ.ं हह.ं हि. हि. िधा​ा (महाराष्ट्र)

2

पीएच.डी(शोध छात्र), म. गं. अं. हह.ं हि. हि. िधा​ा (महाराष्ट्र)

Abstract

शिक्षा शकसी भी समाज के सर्ा​ांगीण शर्कास का सर्ा​ाशधक महत्र्पणू ां उपागम होती है । शकसी भी र्गा समदु ाय, समाज ऄथर्ा राष्ट्र के शर्कास के शिए सबसे पहिी सीढ़ी शिक्षा ही होती है । शजसके द्वारा व्यशि दीनता, दासता, गरीबी, और ऄज्ञानता से मशु ि प्राप्त कर सके । शिक्षा शर्कास और समाज का अपस मे घशनष्ठ संबंध होता है । समाज के प्रत्येक र्गा के ऄशभभार्क ऄपनी सामाशजक अशथाक पररर्ेि के ऄनसु ार शिक्षा से ऄपेक्षाए रखते है , हर व्यशि की ऄपनी पाररर्ाररक पृष्ठभशू म पररशथथशत, समाज,समय एर्ं अर्श्यकताओ ं के बदिते पररदृश्य के अधार पर शिक्षा से ऄपेक्षाए भी ऄिग-ऄिग है जैसे की शिशक्षत होकर अशथाक शथथशत सदृु ढ़ करे , समाज में सम्मान जनक थथान प्राप्त हो शिक्षा से ऄपने र्तामान जीर्न को समृद्ध बनाना चाहते है । शिक्षा मानर् जीर्न का सबसे अर्श्यक संथकार , सामाशजक पररर्तान का अधार और अशथाक उन्नशत का एक सि​ि साधन है । ऄतः मि ू भतू सशु र्धायों से र्ंशचत, शर्कास की मख्ु य धारा से भटके र्गों को शिक्षा की सि ु भता एर्ं िैशक्षक ऄपेक्षाओ ं की पतू ी हेतु सरकार द्वारा शर्शभन्न िैशक्षक कायाक्रमों का अयोजन शकया जा रहा है । शर्शभन्न कायाक्रमों का अयोजन उपरांत भी पणू ता या सफिता न शमिपाने से शर्शभन्न चनु ौशतयों की ओर ध्यान कें शित होता है । प्रकृ त िोध मे उि चनु ौशतयों को उजागर करने का प्रयास शकया गया है । Keywords - र्शं चतर्गा, िैशक्षक ऄपेक्षाएँ, चनु ौशतयाँ Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com

प्रस्तावना वंचित एक ऐसा रूढ शब्द है , चिसको शब्द की सीमाओ ं से पररभाचषत नहीं चकया िा सकता है । शब्द की ईत्पचत के अधार पर देखा िाय तो वंचित का ऄथथ है चकसी व्यचि से कोइ वस्तु छीन लेना या ईसे चकसी ऄचधकार से बेदखल कर देना । सक्ष्ू म रूप से देखा िाय तो समाि में ऐसा वगथ िो अधचु नक मल ू भतू सचु वधाओ ं से ऄब तक दरू है

,ईसे वचं ित कहा िा सकता है । लेचकन

शैचिक दृचिकोण से देखा िाय तो समाि का ऐसा वगथ चिसे चशिा प्राप्त करने का पयाथप्त ऄवसर नहीं चमला या चमला भी तो वह ईस ऄवसर का लाभ नहीं ईठा सका, वचं ित कहा िा सकता है । शैचिक ऄवसर का प्राप्त न होना या आसका लाभ न ईठा पाने का कारण पाररवाररक, सामाचिक तथा अचथथक हो सकता है । ईसकी पाररवाररक पृष्ठभचू म ऐसी हो सकती है िो चशिा के प्रचत िागरूक न हो । वचं ित वगथ को चशिा से दरू करने में अचथथक चस्थचत भी एक प्रमख ु कारण है । अचथथक रूप से चपछड़े लोग सामाचिक ऄवसरो की समानता का लाभ नही ईठा पाते हैं । ऄतः समाि का यह कतथव्य है चक चशिा के माध्यम से ऐसे लोगों को चवकास के समान Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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ऄवसर प्रदान करे । चशिा एक ऐसा साधन है चिसके द्वारा सामाचिक व्यवस्था को श्रेष्ठ स्वरूप प्रदान चकया िा सकता है । चशिा ही समाि के एक दसू रे व्यचि में राष्ट्रीय िेतना का भाव ईत्पन करती है । दसू रे शब्दो में चशिा लोकतांत्रीकीकरण की ऐसी प्रचिया है चिसका लक्ष्य समाि में समता लाना और चवचभन्न वगों एवं समदु ायों के बीि सामाचिक भेद भाव को चमटाना है । चशिा मानव िीवन का सबसे अवश्यक सस्ं कार , सामाचिक पररवतथन का अधार और अचथथक ईन्नचत का एक सशि साधन है । चशिा व्यवस्था को प्रभाचवत करने वाले घटकों मे छात्र , चशिक एवं ऄचभभावक मख्ु य घटक हैं । चशिा और समाि का अपस मे बहुत घचनष्ठ संबंध होता है चशिा व्यवस्था चकसी सामाचिक व्यवस्था का ऄचभन्न ऄगं होती है । चशिा चकसी समाि का चकतना साथथक चवकास कर पाएगी ये समाि मे रहने वाले नागररक के उपर चनभथर करता है , क्योंचक चशिा सामाचिक चस्थचतयों से बहुत गहरे रूप मे िड़ु ी होती है तथा सामाचिक रूपान्तरण में चशिा की कें द्रीय भचू मका होती है । चशिा समाि मे ईचित स्थान पाने का एक सशि माध्यम है । चशिा के द्वारा ही व्यचि ऄपने सामाचिक दाचयत्वों का चनधाथरण करता है । वतथमान सामाचिक पररचस्थचत में िो व्यचि अचथथक रूप से सम्पन्न है वही सामाचिक रूप से प्रचतचष्ठत भी है । ऄतः यह कहना गलत न होगा चक अि भी वंचित वगथ के ऄचभभावकों में ऄपने बच्िों के चशिा के प्रचत यही ऄचभलाषा चवद्यमान है चक ईनके बच्िे चशिा से अचथथक रूप से सशि बनें । अि का सामाचिक वातावरण आस प्रकार का हो गया है चक समाि के सभी वगथ िाहे ईच्ि वगथ हो , मध्यम वगथ हो, चनम्न वगथ या वंचित वगथ हो सभी ऄपने बच्िों की चशिा से यही अकांिा रखते हैं चक हमारा बच्िा चशिा के द्वारा एक संवेदनशील और चिम्मेदार नागररक बनकर ऄपने पररवार, समाि और राष्ट्र के प्रचत ऄपने स्वयं का चहत भी समचपथत करे । चशिा चकसी भी समाि वगथ, समदु ाय ऄथवा राष्ट्र के चवकास का सबसे महत्वपणू थ ईपागम होता है । सरकार द्वारा वंचित वगथ के लोगों को चशिा के प्रचत प्रोत्साचहत करने के चलए ऄनेक कायथिम िलाये िा रहे है िैसे सवथ चशिा ऄचभयान ,मचहला समाख्या योिना,राष्ट्रीय चशिा नीचत 1986 के तहत अपरे शन ब्लैक बोडथ योिना, चशिा का ऄचधकार ऄचधचनयम 2009 ,िनशाला कायथिम अचद । परंतु चवगत 70 वषो में ऄपेिाकृ त फल नही चमल पाया ऄथाथत वंचित वगों के ऄपेिाओ ं की पचू तथ हेतु चकया गया प्रयास के सामने चव

द्यमान

िनु ौचतया​ाँ ऄवश्य आसके कारण होते है । ऄतःऄपेिायों के समि िनु ौचतयों का चवश्ले षण चकया िाना सांप्रचतक अवश्यक है । चशिा एक ऐसा ससं ाधन है िों देश के ऄचधकांश लोगों को सामाचिक अचथथक चस्थचतयों में बदलाव ला सकता है । शोध प्रश्न1. वचं ित वगथ के ऄचभभावकों की चशिा से िड़ु ी क्या ऄपेिए है । 2. वचं ित वगथ के ऄचभभावकों को ऄपने पाल्यों को चशिा प्रदान करने के चलए चकस प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है । शोध उद्देश्य1 . वंचित वगथ के ऄचभभावकों का चशिा से ऄपेिाओ ं का ऄध्ययन करना । 2 . वंचित वगथ के ऄचभभावकों का चशिा में अने वाली िनु ौचतयों का ऄध्ययन करना । Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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समस्या कथन“वचं ित वगथ के ऄचभभावकों की चशिा से ऄपेिाएं एवं िनु ौचतयों का ऄध्ययन” पाररभाषषक शब्दावली वंषित वर्ग - वंचित वगथ सामान्य ऄथों में वंचित वगथ से अशय समाि के ऐसे लोगों से है , िो ऄब तक चवकास की मख्ु य धारा से ऄलग है ।चवशेष ऄथों में वचं ित वगथ से अशय समाि के ऐसे लोगों से है अचथथक एवं सामाचिक रूप से चपछड़े हैं । उपकरणवंचित वगथ के ऄचभभावकों का चशिा से ऄपेिाए एवं िनु ौचतयों का ऄध्ययन करने के चलए शोधकताथ के द्वारा स्वचनचमथत सािात्कार ऄनसु िू ी का चनमाथण चकया गया । समस्या का सीमांकनप्रस्तुत लघु शोध को सगु मता और िमबद्धता प्रदान करने के चलए शोधकताथ ने चनम्नांचकत सीमांकन चकए हैं1. यह ऄध्ययन ईत्तर प्रदेश राज्य के देवररया चिला के बरहि ब्लाक के ऄतं गथत तक सीचमत है । 2. वतथमान ऄध्ययन में चनम्न ईच्ि प्राथचमक किा तक के चवद्याचथथयों तक सीचमत है । 3. वतथमान शोध में के वल न्यादशथ के रूप में ियचनत चवद्याचथथयों को ही सचम्मचलत चकया गया है । शोध षवषध - प्रस्तुत शोध में सवेिण चवचध का प्रयोग चकया गया है । न्यायदशग- प्रस्तुत ऄध्ययन में न्यदशथ के रूप में देवररया चिले में बरहि ब्लाक के अठ चवद्यालयों को िनु ा गया ।आन चवद्यालयों का ियन साधारण यादृचच्छक न्यदशथ के रूप में चलया गया । षवश्ले षणप्रथम ईद्देश्य की पचू तथ हेतु सािात्कार ऄनसु िू ी के प्रथम िार प्रश्न एवं चद्वतीय ईद्देश्य की पचू तथ हेतु शेष दो प्रश्न ईचद्द ि है एवं आनका चवश्ले षण ईि ऄनसु ार ऄधोचलचखत है । प्रश्नष-:1अप ऄपने बच्िोंर को चवद्यालय क्यों्​् भेि?ते हैं ईि प्रश्न के ईत्तर के रूप में 33% ऄचभभावकों ने बताया चक िो समस्या हमारे सामने अ रही है वह हमारे बच्िों्ा को न हो । ईसी प्रकार 16% ऄचभभावकों ने बताया की चक ऄपने दैचनक कायों को सफलतापवू थक करने के चलए । 9.9% बच्िेो कुछ िान िाएगं े आस चलए । िबचक 6.6% पढ़ चलख कर ऄच्छाद बनने के चलए। परन्तु 33%ऄचभभावकों ने बताया की पढ़ने के चलए । ईपरोि ऄचभभावकों के ईि प्रचतचियाओ ं से यहा चवश्ले षण चकया िा सकता है की सभी ऄचभभावक चशिा के माध्यम से ऄपने बच्िों को समथथ िीवन के प्रचत कुशल बनाने की ऄपेिा रखी है । परन्तु 33% ऄचभभावक का मानना है चक ईनकी समस्याये ईनके संतानों के िीवन में न अए आसी ऄपेिा को प्रदचशथत करती है । ऄथाथत चशिा से िीवन की समस्या का समाधान हो सकती है आसी ऄपेिा को प्रदचशथत करती है । Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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प्रश्नg-2: अप के ऄनसु ार चशिा का ऄथथ क्याi है? ईि प्रश्न के ईत्तर के रूप में 33% ऄचभभावकों ने बताए ज्ञान के साथ ऄच्छे सस्ं कार सीखना । 16.5% ने बताया चक चशिा से व्यतचि को सही चदशा में मागथदशथन होता है । 16.5 % पढ़ चलख कर कुछ िान िाना । तथा 16.5%ज्ञान प्राप्त करना बताए है । चिनका चवश्ले कषण सेयह कहा िा सकता है चक ऄचभभावकों ने चशिा के चवचभन्न पहलयू ों को समझा तो है

, तथा चशिा के

चवचभन्न कायथ के बारे में ऄवगत है । आससे चवश्ले चषत चकया िा सकता है चक चशिा के चवचभन्न पहलू के बारे में ऄचभभावक ज्ञात है । एवं चशिा के माचगथक ऄथथ को ऄचभभावक ने समझे है, चिससे ईनकी पलयों के चशिा के प्रचत ऄचभभावकों का ईद्देश्य सामाचिक तौर पर योग्य, ग्राहय, श्रेष्ठ बनने चक ऄपेिा को व्यि करती है । प्रश्न -3: चशिा से अप की क्याब ऄपेिाएाँ ?है प्रश्नानसु ार प्रदतों के चवश्ले षण से 33% ऄचभभावकों का मानना है चक पढ़े-चलखे कर गरीबी दरू करे गा । 16.5% ऄचभभावकों का मानना था चक पढ़-चलख कर नौकरी प्राप्त3 करना । आसी संदभथ में 9.9 % पढ़-चलख कर कुछ बन िाए । 16.5 % ऄचभभावकों का मानना था चक मान सम्माकन चमलेगा रोिी-रोटी की समस्याक नहीं होगी। 16 .5%पढ़ चलख कर नौकरी पाना और पररवार की देख भाल करना । तथा 6.6% पढ़-चलखकर मेरे बच्िेह कुछ बन िाए तथा नाम रोशन करे । ईि प्रश्न के प्रदतों का चवश्ले षण करने से चशिा से ऄचवभावकों की िो प्रमख ु ऄपेिाए प्रदचशथत होती है चिसमे पहला अचथथक स्वतन्त्रता दसू रा सामाचिक प्रचतष्ठा लगभग आसी से उपर ऄचभभावकों ने चभन्न –चभन्न ईत्तरों के द्वारा चशिा से अचथथक स्वतन्त्रता की ऄपेिा रखी है । साथ ही साथ सामाचिक प्रचतष्ठा के भी ऄपेिा को प्रदचशथत चकये है । प्रश्न-् 4 : अप के ऄनसु ार चशिा कै सी होनी िाचहए? प्रश्नो के चवश्ले षण अधार पर 33% चशिा से बच्िेक होचशयार होते हैं तथा अगे बढ़ते ।33% है ने बताया चक चशिा के द्वारा रोिगार चमलना िाचहए तथा 16.5%चशिा व्यकवस्था्े को और ऄचधक ऄनश ु ाचसत बनाया िाना िाचहए चशिा ईद्देश्यगपणू थ होना िाचहए तथा 16.5% ऄचभभावकों ने कहा चक चशिा से ज्ञान चमले तथा चशिा ऐसी होनी िाचहए चिससे बच्िोंक को काम धंधा असानी से चमल िाए । ईि प्रदतों से ज्ञात होता है की ऄचभभावकों के सामने चशिा ऄथथकरी बने यह ऄपेिा एवं िनु ौती भी है प्रायः ऄचभभावक वतथमान चशिा का रोिगारिम समार्थयथ को सबसे बड़ी िनु ौती मानते है सभी ऄचभभावकों ने चभन्न –चभन्न ईत्तरों के द्वारा चशिा को चनचित रोिगार की दृचि से िनु ौती के रूप मे स्वीकार चकया । प्रश्नत-5 : अपको ऄपने बच्िे्े के चवद्यालयी चशिा के दौरान कोइ िनु ौचतया​ाँ अयी? हैहा​ाँ, नहीं यचद हा​ाँ तो कौन-कौन सी? प्रदतों के चवश्ले षण से पाया गया चक 33% ऄचभभावकों ने कहा चक अचथथक समस्या्ौ । 23.1% बताया चक घर का अचथथक अय कम होने के कारण हम बच्िों को चनिी चवद्यालय में नहीं भेि सकते । 33% चवद्यालय घर से दरू है , बच्िेत पढ़ने न िाकर रास्तेम में से ही लौट अते हैं या खेलने लगते है । 9.9% ऄचशचित होने की समस्यार चशचित होते तो बच्िों का होमवकथ कराते । ईपरोिन चवश्ले लषण से यहज्ञात होता है चक अचथथक िनु ौती सबसे ऄचधक प्रभाचवत करती है तथा ऄचवभावकों ने स्वयं की ऄचशचित को िनु ौती के रूप में स्वीकार करते है । यह ईनकी एवं सरकारी चवद्यालयों की चशिा व्यवस्था की भी िनु ौती है । ईनके शैचिक Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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अकांिाओ ं के सामने यह एक बड़ी िनु ौती के रूप में प्रदचशथत करती है । चवद्यालय की ऄनईु पल्बधता की िनु ौती के रूप में भी 33 %लोगो ने भी रे खांचकत चकया है । प्रश्नष-6 : चशिा को प्रोत्साचहत करने के चलए िलाए िा रहे कायथिम के बारे में अप को िानकारी है? प्रदतों के चवश्ले षण से अधार पर16.5% सरकार वचं ित वगथ के बच्िो को चनःशल्ु क चशिा देती है । 6.6% िो बच्िे बीि में स्कूल छोड़ देते है , सरकार यह प्रयास कर रही है चक वे बच्िे चफर से स्कूल िा सके । 9.9 %सरकार व्यावसाचयक पाठ्यिमों मे वचं ित वगथ के बच्िों को चनःशल्ु क चशिा देती है ।तथा 16.5% सरकार चशिा को प्रोत्साचहत करने के चकए सवथ चशिा ऄचभयान िलाइ है । 16.5% सरकार बच्िों को चकताबें और छात्रवृचत देती है । तथा 33% सरकार बच्िों को दोपहर का मध्यान भोिन देती है । आस प्रश्न के ईत्तर से यह प्रदचशथत होता है चक आस वगथ के सामने चशिा को संिाचलत करने चक सबसे बड़ी िनु ौती शैचिक योिना को िानने से है सरकार चक चनः शल्ु क चशिा व्यवस्था ,सवथ चशिा ऄचभयान,छात्रवृचत व्यवस्था एवं अर . टी . इ . के प्रावधानो की िानकारी न होना सबसे बड़ी िनु ौती है । षनष्कषग - प्रथम ईद्देश्य के अधार पर यह पाया गया चक समाि का प्रत्येक व्यचि चशिा से ऄपेिाए रखते है लेचकन ये लोग चशिा को ऄपनी समस्यायों से मचु ि पाने तथा ऄपने वतथमान िीवन में िो समस्याए आन्हे हो रही है , ऄचशचित होने के कारण यह ईनके पाल्यों के िीवन में न अए । आसी प्रकार ये अचथथक , सामाचिक, एवं बौचद्धक, की ऄपेिाए चशिा से रखते है । चद्वतीय ईद्देश्य के प्राचप्त हेतु चकया गया प्रदत्त चवश्ले षण से पाया गया की चशिा ग्रहण करने में आन्हे चवचभन्न समस्याओ ं का सामना करना पड़ता है । चिसमे भौगोचलक तथा अचथथक समस्याए प्रमख ु है । आन लोगों चक चशिा चक चस्थचत अिादी से पवू थ भी दयनीय थी और अिादी के बाद सरकार द्वारा चवचभन्न कायथिमों के माध्यम से आन्हे चशचित एवं िागरूक होने का प्रयास चकया िा रहा है चफर भी आन सभी कायथिमों के बाद भी आन की शैचिक चस्थचत दयनीय है । परामशग –चवद्यालयों में िलाये िाने वाले चवचभन्न कायथिमों चशिा का ऄचधकार ऄचधचनयम (2009) , सवथ चशिा ऄचभयान एवं छात्रवृचत योिनायों के प्रचत पाल्यों की समझ चवकचसत करनी होगी । प्रशासन के चलए चशिकों एवं पाल्यों दोनों की िागरूकता से सबं ंचधत प्रशासन द्वारा िो भी योिनाए प्रारम्भ की िाती है वह चकतना सफल हुअ तथा वचं ित वगथ के ऄचभभावकों पर चकतना सकारात्मक प्रभाव प्रशासन द्वारा समय-समय पर आसका मल्ू याकन करना िाचहए । वचं ित वगथ के पाल्यों को चशिक तथा बच्िों के चनरंतर सपं कथ में रहना तथा समय-समय पर चवद्यालय चशिकों से स्वपाल्यों के बारे में िानकारी लेते रहना िाचहए । चिससे ईनकी िमता, स्तर, योग्यता अचद से सबं चं धत िानकाररयां चमल पाएगीं । सदं भग र्न्थग सि ू ी Education portal http://www.mp.rte \ http//www.wisdomblow.com/?p=1239 http://\barwa.blogspot, in/2015/blog-post.html Retrieved data http://educationuou.blogspot.in\2015\01 http://www.indiaspendhindi.com/cover-story Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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https:/archve.indi/gov.in/hindi/sectors/education/edu scheduled castes . https:\\pibnia.wordpress.com\2017\08 https:\\www.hrw .org\news 2014\04\22\253438 अनसु हू चत जाहत और जंजाहतयों के हिए हशक्षा , (निोदय हिद्यािय ). अमेररकी आहथाक समीक्षा. (1964). स्त्रोत: इहं डयन एक्सप्रेस, द हहन्दू एिं टाइम्स ऑफ इहं डया. आहूजा , राम (2012 ) ।सामाहजक अनसु धं ान एिं सिेक्षण . आगरा :अग्रिाि पहलिके शन कहपि , एच .के .(2012 ).अनसु ंधान हिहधया​ाँ , आगरा :राखी प्रकाशन गुप्ता , एस .पी .(2004).हशक्षा का समाजशास्त्रीय आधार, इिाहबाद :िसंधु रा प्रकाशन चारु , बाहरी .(2016) ।िहं चत जाहतयो की हशक्षा में आरक्षण करता है मदत . जोशी , जे .के .(2017).आहथाक एिं सामाहजक रूप से िंहचत हिद्याहथायों के हिए हशक्षा की चनु ौहतया​ाँ . तनेजा, हशिानी .(2013).हशक्षा का उद्देश्य शहरी िंहचत समदु ायों के संदभा में .मस्ु कान :(अंक 34) फोकस समहू का आधार पत्र – नई हदल्िी अनसु हू चत जाहत और जजं ातीय के बच्चों की समस्याएाँ फोकस समहू का आधार पत्र –नई हदल्िी :राष्ट्रीय शैहक्षक अनसु ंधान और प्रहशक्षण पररषद बजोररया , जय श्री . (2014 भारत :हाहशए पर रह रहे बच्चों को हशक्षा से िंहचत करना , बैरिा , अि.आर .(2016).िहं चत समाज में सधु ार , मनोज, मनोहर ।(2015) .िंहचत िगा को आरक्षण से नही सशहिकरण से फायदा . माथरु , एस .के .(2002)भारतीय हशक्षा का ऐहतहास , आगरा :एच .पी.भागाि बुक हडपो हमश्र , सन्त कुमार .(2012).भारतीय समाज में हशक्षा का हिकास .मेरठ :आर िाि बुक हडपो . िाि , रमन हबहारी .(2014) ।भारतीय हशक्षा का इहतहास , हिकास एिं समस्याएाँ मेरठ :आर .िाि बुक हडपो िहं चत समहू और कमजोर िगा के बच्चों का प्रायिेट स्कूिों की प्रथम कक्षा में हनिः शल्ु क प्रिेश की व्यिस्था शमा​ा , नीिमहण (2010) ।आधे भारत का संघषा . नई हदल्िी :संजीि प्रकाशन हसंह , अरुणकुमार (2002).मनोहिज्ञान , समाजशात्र तथा हशक्षा में शोध हिहधया​ाँ िाराणसी :मोतीिाि बनरसीदास हसहं , गया .(2013).भारतीय समाज में हशक्षा .मेरठ :आर .िाि बक ु हडपो . हसंह, डॉ. बी.जी. (2014). भारत में हशक्षा का अहधकार एिं प्रारहम्भक हशक्षा. इिाहाबाद. सि ु ेमान , महु म्मद .डाक्टर (2007)उच्चतर हशक्षा मनोहिज्ञान , हदल्िी :मोतीिाि बनारसीदा.

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