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तुलसीदास की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना : एक समाजशास्त्रीय पाठ

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2021 = 7.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, JAN-FEB, 2023, VOL- 10/75

तुलसीदास की सामाजिक-सा​ांस्कृ ततक चेतना : एक समािशास्त्रीय पाठ धीरि प्रताप तमत्र शोध छात्र, समािशास्त्र विभाग, काशी हिन्द ू विश्वविद्यालय, िाराणसी, उत्तर प्रदे श

Paper Received On: 25 FEBRUARY 2023 Peer Reviewed On: 28 FEBRUARY 2023 Published On: 01 MARCH 2023 Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com

प्रस्तािना भारतीय इततिास के मध्यकाल में िब यिा​ाँ सामाजिक, सा​ांस्कृ ततक, मानतसक एिां िैचाररक स्तर पर ना केिल िड़ता की जस्ितत िी बजकक सा​ांस्कृ ततक टकराि युक्त सांक्रमणकाल भी चल रिा िा। िब दे श के करोड़ों दतलत, पीहड़त, िांतचत एिां शोवित सामाजिक व्यिस्िा की भयानक बेहड़यों में बांधे कराि रिे िे तब भवक्त आन्दोलन के रूप में एक िन आन्दोलन खड़ा िुआ जिसने ना केिल इस तबके के लोगों में आत्मसम्मानयुक्त िीिन िीने िे तु प्रेररत एिां तनदेतशत हकया बजकक तत्कालीन ऊांच- नीच, कृ वत्रम भेदभाि, पाखण्ड एिां समाि में प्रचतलत अमानिीय रूहियों का भी विरोध कर िगग, िातत, धमग एिां सम्प्रदाय के भेद से इतर सभी मानिों के तलए ईश्वर की सामान भवक्त एिां तदनुसार मुवक्त का मागग प्रशस्त हकया. यि एक नई समाि व्यिस्िा के विकतसत िोने का दौर िा जिसका नेतत्ृ ि कबीर, रै दास, मीरा, सूरदास, एिां तुलसीदास िैसे सांत एिां भक्त कवियों ने हकया। इन सांतों एिां कवियों में तुलसीदास िी का स्िान वितशष्ट रिा िै । प्रभु राम की भवक्त के अिलांबन में इन्िोने ना केिल वितभन्न धातमगक सम्प्रदायों एिां पांिों की एकता का सूत्र बा​ांधा बजकक भारतीय समाि व्यिस्िा में व्याप्त कलि एिां वबखराि को भी शास्त्र सम्मत ढां ग से व्यिजस्ित करने का प्रयत्न हकया। उन्िोंने श्रेष्ट नैततक मूकयों की स्िापना िे तु अपनी रचनाओां के माध्यम से प्रयत्न हकया एिां ना केिल भक्त सांतों एिां कवियों के बीच अपना स्िान बनाया बजकक भारतीय िनमानस के भी मानस पटल पर Copyright © 2023, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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