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SAMAJIK NYAY KE SRUJAN ME SAHITYA KI BHUMIKA

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Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language, Online ISSN 2348-3083, SJ IMPACT FACTOR 2021: 7.278, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, DEC-JAN, 2022, VOL-10/49 सामाजिक न्याय के सृिन में साजित्य की भूजमका ब्यूटी जसिंि

असिस्टें ट प्रोफेिर, बी॰डी॰एम॰एमयू मसिला मिासिद्यालय, सिकोिाबाद

Paper Received On: 25 JAN 2022 Peer Reviewed On: 31 JAN 2022 Published On: 1 FEB 2022 Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com िामासिक न्याय (social justice) की बुसियाद िभी मिुष्ो​ों को िमाि माि​िे के आग्रि पर आधाररत िै । इिके मु तासबक सकिी के िाथ िामासिक, धासमि क और िाों स्कृसतक पूि​िग्रि​िो​ों के आधार पर भे दभाि ि​िीों िोिा चासिए। िर सकिी के पाि इतिे न्यू ितम िोंिाधि िोिे चासिए सक िे ‘उत्तम िीि​ि’ की अपिी िोंकल्पिा को धरती पर उतार पाएँ । सिकसित िो​ों या सिकाि​िील, दोिो​ों िी तरि के दे िो​ों में राि​िीसतक सिद्ाों त के दायरे में िामासिक न्याय की इि अिधारणा और उि​िे िु डी असभव्यक्तियो​ों का प्रमु खता िे प्रयोग सकया िाता िै । ले सकि इिका मतलब यि ि​िीों िै सक उिका अथि िमे िा िुस्पष्ट िी िोता िै । सिद्ाों तकारो​ों िे इि प्रत्यय का अपिे -अपिे तरीके िे इस्ते माल सकया िै । व्याि​िाररक राि​िीसत के क्षे त्र में भी, भारतिै िे दे ि में िामासिक न्याय का िारा िोंसचत िमू िो​ों की राि​िीसतक गोलबोंदी का एक प्रमु ख आधार रिा िै । उदारतािादी मािकीय राि​िीसतक सिद्ाों त में उदारतािादी-िमतािाद िे आगे बढ़ते हुए िामासिक न्याय के सिद्ाों तीकरण में कई आयाम िु डते गये िैं । मिलि, अल्पिोंख्यक असधकार, बहुिों स्कृसतिाद, मूल सि​िासियो​ों के असधकार आसद। इिी तरि, िारीिाद के दायरे में क्तियो​ों के असधकारो​ों को ले कर भी सिसभन्न स्तरो​ों पर सिद्ाों तीकरण हुआ िै और िी-ि​ि​िीकरण के मु द्ो​ों को उिके िामासिक न्याय िे िोड कर दे खा िािे लगा िै । (रो​ोंल्स, िे .1971) इिी के िाथ-िाथ मािकीय उदारतािादी सिद्ाों त में राज्य द्वारा िमाि के कुछ तबको​ों की भलाई या कल्याण के सलए ज़्यादा आय िाले लोगो​ों पर टै क्स लगािे का मिला सि​िादास्पद बिा रिा। कीोंि िे पूँिीिाद को मों दी िे उबारिे के सलए राज्य के िस्तक्षे प के ज़ररये रोज़गार पैदा करिे के प्रािधािो​ों का िुझाि सदया, ले सकि फ़्रेसडिख़ िाि िायक, समल्टि फ़्रीडमैि और बाद में रॉबटि िॉसज़क िैिे सिद्वािो​ों िे आसथि क गसतसिसधयो​ों में राज्य के िस्तक्षे प की आलोचिा की। इि लोगो​ों का माि​िा था सक इि​िे व्यक्ति की स्वतोंत्रता और आसथि क आज़ादी को चोट पहुँ चती िै । िॉि रॉल्स िे 1971 में अपिी सकताब अ सथयरी ऑफ़ िक्तस्टि में ताकतिर दलीलें दीों आसख़र क्ो​ों िमाि के कमज़ोर तबको​ों की भलाई के सलए राज्य को िसिय िस्तक्षे प करिा चासिए। अपिी सथयरी में रॉल्स िुद् प्रसियात्मक न्याय की अिधारणा प्रस्तु त करते हुए सितरणमू लक न्याय के लक्ष्य को िासिल करिे की कोसि​ि करते हुए सदखाई दे ते िैं । अपिे न्याय के सिद्ाों त में उन्ो​ोंिे िर सकिी को िमाि स्वतोंत्रता के असधकार की तरफ़दारी की। इिके िाथ Copyright © 2022, Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language


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िी भे दमू लक सिद्ाों त के माध्यम िे यि स्पष्ट सकया सक िामासिक और आसथि क अोंतरो​ों को इि तरि िमायोसित सकया िािा चासिए सक इि​िे िबिे िोंसचत तबके को िबिे ज़्यादा फ़ायदा िो। (सज़सलयट, ई.1986) िमु दायिासदयो​ों और िारीिासदयो​ों की द्वारा की गयी आलोचिाओों का सि​िे ष रूप िे उल्ले ख सकया िा िकता िै । िमु दायिासदयो​ों िे िामान्य तौर पर उदारतािाद और सि​िेष रूप िे रॉल्स के सिद्ाों त की इिसलए आलोचिा की सक इिमें व्यक्ति की अणुिादी िोंकल्पिा पेि सकया गया िै । रॉल्स सि​ि व्यक्ति की िोंकल्पिा करते िैं ि​ि अपिे िोंदभि और िमु दाय िे पूरी तरि कटा हुआ िै । बाद में , 1980 के दिक के आसख़री िषों में, उदारतािासदयो​ों िे िमु दायिासदयो​ों की आलोचिाओों को उदारतािाद के भीतर िमायोसित करिे की कोसि​ि की सि​िके पररणामस्वरूप बहुिोंस्कृसतिाद की िोंकल्पिा िामिे आयी। इिमें यि मािा गया सक अल्पिोंख्यक िमू िो​ों के िाथ िास्तसिक रूप िे तभी न्याय िो िकता िै , िब उन्ें अपिी िोंस्कृसत िे िुडे सिसिध पिलु ओों की सिफ़ाज़त करिे और उन्ें िाि​ि​िसिक रूप िे असभव्यि करिे की आज़ादी समले । इिके सलए यि ज़रूरी िै सक इिके िामु दासयक असधकारो​ों को मान्यता दी िाए। इि तरि िैद्ाों सतक सिमि​ि के स्तर पर बहुिों स्कृसतिाद िे िामासिक न्याय की अिधारणा में एक िया आयाम िोडा। (सकमसलका, 1996) यिाँ उल्ले खिीय िै सक िाठ के दिक िे िी पसिम में िारीिादी आों दोलि, िागररक असधकार आों दोलि, गे, ले क्तियि और टि ाों ि-िें डर आों दोलि और पयाि िरण आों दोलि आसद उभरिे लगे थे। बाद के दिको​ों में इिका प्रिार ज़्यादा बढ़ा और इन्ो​ोंिे िैद्ाों सतक सिमि​ि को भी गिराई प्रदाि की। मिलि, िारीिासदयो​ों िे उदारतािाद और रॉल्सिादी रूपरे खा की आलोचिा की। अपिे सिश्लेषण द्वारा उन्ो​ोंिे सपतृित्ता को िारीिासदयो​ों के िमाि िक के रास्ते में िबिे बडी रुकािट के रूप में रे खाों सकत सकया। इिी तरि, गे, ले क्तियि और टि ाों ि- िें डर लोगो​ों िे िमाि में ‘िामान्य’ या ‘िामिल’ की िचिस्वी रूपरे खा पर ि​िाल उठाया और अपिे सलए िमाि क्तथथसत की माँ ग की। िागररक असधकार आों दोलिो​ों द्वारा पसिम में , ख़ाि तौर पर अमे ररकी िमाि में काले लोगो​ों िे अपिे सलए बराबरी की माँ ग की। मूल सि​िासियो​ों िे भी अपिे िाों स्कृसतक असधकारो​ों की माँ ग करते हुए बहुत िारे आों दोलि सकये िैं । बहुिोंस्कृसतिासदयो​ों िे अपिी िैद्ाों सतक रूपरे खा में इि िभी पिलु ओों को िमे टिे की कोसि​ि की िै । इि िभी पिलु ओों िे िामासिक न्याय के अथि में कई िये आयाम िोडे िैं । इि​िे स्पष्ट िोता िै सक सिसिध िमू िो​ों के सलए िामासिक न्याय का अलग-अलग अथि रिा िै । (िे िा गोस्वामी) अिल में सिकाि​िील िमािो​ों में पसिमी िमािो​ों की तुलिा में िामासिक न्याय ज़्यादा रै सडकल रूप में िामिे आया िै । मिलि, दसक्षण अफ़्रीका में अश्वे त लोगो​ों िे रों गभे द के सख़लाफ़ और ित्ता में अपिी सिस्सेदारी के सलए ज़ोरदार िोंघषि सकया। इि िोंघषि की प्रकृसत अमे ररका में काले लोगो​ों द्वारा चलाये गये िोंघषि िे इि अथि में अलग थी सक दसक्षण अफ़्रीका में काले लोगो​ों को ज़्यादा दमिकारी क्तथथसत का िामिा करिा पड रिा था। इि िोंदभि में भारत का उदािरण भी उल्लेखिीय िै । बहुिोंस्कृसतिाद िे सि​ि िामु दासयक असधकारो​ों पर िोर सदया उिमें िे कई असधकार भारतीय िोंसिधाि में पिले िे िी दि​ि िैं । ले सकि यिाँ िामासिक न्याय िास्तसिक राि​िीसत में िोंघषि का िारा बि कर उभरा। मिलि, भीमराि आम्बे डकर और उत्पीसडत िासतयो​ों और िमु दायो​ों के कई िे ता िमाि के िासिये पर पडी िासतयो​ों कोसिसक्षत और िोंगसठत िोकर िोंघषि करते हुए अपिे न्यायपूणि िक को िासिल करिे की Copyright © 2022, Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language


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सिराित रच चुके थे । इिी तरि पचाि और िाठ के दिक में राममिोिर लोसिया िे इि बात पर िोर सदया सक सपछडो​ों, दसलतो​ों, अल्पिोंख्यको​ों और क्तियो​ों को एकिु ट िोकर िामासिक न्याय के सलए िोंघषि करिा चासिए। लोसिया चािते थे सक ये िमू ि एकिु ट िोकर ित्ता और िौकररयो​ों में ऊँची िासतयो​ों के िचिस्व को चुिौती दें । इि पृष्ठभू सम के िाथ िब्बे के दिक के बाद िामासिक न्याय भारतीय राि​िीसत का एक प्रमुख िारा बिता चला गया। इिके कारण अभी तक ित्ता िे दू र रिे िमूिो​ों को ित्ता की राि​िीसत के केंद्र में आिे का मौका समला। गौरतलब िै सक भारत में भी पयाि िरण के आों दोलि चल रिे िैं । लेसकि ये लडाइयाँ थथािीय िमु दायो​ों के अपिे ‘िल, िों गल और िमीि’ के िोंघषि िे िु डी हुई िैं । इिी तरि सिकाि​िील िमािो​ों में अल्पिोंख्यक िमू ि भी अपिे सख़लाफ़ पूि​िग्रिो​ों िे लडते हुए अपिे सलए ज़्यादा बेितर िुसिधाओों की माँ ग कर रिे िैं । इि अथि में िामासिक न्याय का िोंघषि लोगो​ों के अक्तस्तत्व और अक्तिता िे िु डा हुआ िोंघषि िै । (सकमसलका, िी. 2009) इि बात िे इिकार ि​िीों सकया िा िकता िै सक िामासिक न्याय के िारे िे सिसभन्न िमािो​ों में सिसभन्न तबको​ों को अपिे सलए गररमामय सज़ों दगी की माँ ग करिे और उिके सलए िोंघषि करिे के सलए प्रेररत सकया िै । िैद्ाों सतक सिमि​ि में भी यूटोसपयाई िमाि​िाद िे ले कर ितिमाि िमय तक िामासिक न्याय में बहुत िारे आयाम िु डते गये िैं । यि भी उल्ले खिीय िै सक सिकसित िमािो​ों की तुलिा में सिकाि​िील िमािो​ों में िामासिक न्याय का िोंघषि बहुत िसटलताओों िे सघरा रिा िै । असधकाों ि मौको​ों पर इि िमािो​ों में लोगो​ों को िामासिक न्याय के िोंघषि में बहुत ज़्यादा िोंरचात्मक सिों िा और कई मौको​ों पर राज्य की सिों िा का भी िामिा करिा पडा िै । ले सकि िामासिक न्याय के सलए चलिे िाले िोंघषों के कारण इि िमािो​ों में बुसियादी बदलाि हुए िैं । कुल समला कर िमय के िाथ िामासिक न्याय के सिद्ाों तीकरण में कई िये आयाम िु डे िैं और एक िोंकल्पिा या िारे के रूप में इि​िे लम्बे िमय तक ख़ामोि या िे पथ्य में रि​िे िाले िमू िो​ों को भी अपिे के सलए िागृत सकया िै। (ियप्रकाि कदि म) सिों दी के मिाकाव्य के रूप में रामचररतमाि​ि का अध्ययि करिे पर (िो एक िमृद् िासित्य के रूप में भी िािा िाता िै ) भी सिसभन्न थथािो​ों पर भगिाि श्री राम द्वारा िामाि के िर िगि के उत्थाि के सलए सकये गये सिसभन्न कायों का िणि​ि समलता िै । इि मिाकाव्य का अध्ययि करिे िे िमाि में िामासिक न्याय िै िे गोंभीर सिषय के प्रीत लोग िचेत िोते िैं और िमाि के िर िगि को आगे बढ़िे का पूरा अि​िर दे िे में भी यकीि रखते िैं । रामचररतमाि​ि के िभी काों डो​ों का यसद अध्ययि करें तो िमाि के प्रसत स्कारात्मक दृसष्टकोण सिकसित िोगा िो िामासिक न्याय में ि​ियोग करे गा। श्री िेदव्याि िी िे मिाभारत में गीता का िणि​ि करिे के उपराों त किा िै सक ‘गीता िुगीता कतिव्या सकमन्यै ैः िािसिस्तरै ैः या थव्यों पद्मिाभस्य मु खमद्मासद्विीैःिुता.’ अथाि त गीता िुगीता करिे योग्य िै इिे भली प्रकार पढ़कर अोंतैःकरण में धारण कर लेिा मु ख्य कतिव्य िै िो सक स्वयों पद्मिाभ भगिाि श्रीसिष्णु के मुखारसिोंद िे सिकली हुई िै । स्वयों श्री भगिाि िे भी गीता के मिात्मय का बखाि सकया िै । श्रीगीता एक ऐिा अिु पमे य िाि िै सि​िमें एक भी िब्द िदु पदे ि िे खाली ि​िीों िै । गीता का अध्ययि करिे िे यि पता चलता िै सक गीता िामासिक न्याय पर िी आधाररत िै Copyright © 2022, Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language


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"िामासिक न्याय भी एक ऐिी अिधारणा िै , सि​िे कुछ लोग िामासिक रूप िे न्याय आधाररत िोंिार की ओर एक आों दोलि के रूप में िसणित करिे के सलए उपयोग करते िैं । इि िन्दभि में , िामासिक न्याय माि​ि असधकारो​ों और िमािता की अिधारणाओों पर आधाररत िै और प्रगसतिील कराधाि, आय पुिसि​ितरण, या सफर िम्पसत्त पुिसि​ितरण के माध्यम िे असधक िे असधक आसथि क िमाितािाद को िक्तिसलत करता िै । इि िीसतयो​ों का लक्ष्य यि िै सक सिकाि​िादी अथि िािी ितिमाि में कुछ िमािो​ों में सिद्यमाि अि​िरो​ों की तुलिा में असधक िमािता का उल्ले ख कर िकते िैं और उि सिषयो​ों में िमािता के पररणामो​ों का सिमाि ण कर िकते िैं , ि​िाँ प्रािोंसगक अिमािता एक न्याय आधाररत प्रसिया पद्सत में िी सदखाई दे ती िै ।"(बाइसबल) सकिी भाषा के िासचक और सलक्तखत (िाि​िमू ि) को िासित्य कि िकते िैं । दु सिया में िबिे पुरािा िासचक िासित्य िमें आसदिािी भाषाओों में समलता िै । इि दृसष्ट िे आसदिािी िासित्य िभी िासित्य का मू ल स्रोत िै । राि​िीसतक पररक्तथथसतयो​ों के पररणामस्वरूप िी एक िामासिक िगि का आसधपत्य िुसिसित िोता िै और ि​ि अपिे सिचारो​ों और भािो​ों को िासित्य के माध्यम िे प्रकट करता िै तथा िामासिक न्याय की माों ग करता िै ।” (इि​िाईक्लोपीसडया सिटै सिका) सिों दी में ि​िचेतिा के िबिे प्रखर कसि िैं - कबीर ले सकि इिकी ि​िचेतिा ि​ि​िादी चेतिा ि​िीों िै । कबीर का ि​ि​िमाि के िाथ ररश्ता उभयमु खी था। कबीर िमाि को उिकी ताकत िे पररसचत करािा चािते थे। उिका िदै ि गरीब तबके के लोगो​ों के िाथ िहृदय िोंिेदिा िुडी रिती थी और कुछ इिी अथों में उन्ो​ोंिे सलखा – द्वार धिी के पडी रिा, धक्का धिी की खाय। कबहुँ क धिी िे िािई, िो दर छाडी ि िाई ॥ कबीर की ि​िचेतिा एक मु िभोगी की ि​िचेतिा िै । उन्ो​ोंिे सिसिततैः ि​ि गरीबी दे खी थी सक िब बाररि के बादल सघरते थे , तो उन्ें िूरदाि की गोसपयो​ों के आों िुओों िे घि को िरािे या तुलिी के राम की तरि सप्रयािीि िोिे िे डरिे की याद ि​िीों आती िरि उिका कले िा काँ प उठता िै – घि गरिै , कपै मोरी छाती क्ो​ोंसक घर ि​ि​ि र िो उठा िै , टाटी खों खण िो चुकी िै सछि​िर घर अरु सझि​िर टाटी व्याि​िाररक िमीक्षा एिों िामासिकता की तलाि के इि आि के दौर में , सिसित िै सक यि िब पीछे छूट िायेगा। िै िे प्रत्येक ग्रन्थ की ओट में उिके रचसयता का और प्रत्येक राष्टिीय िासित्य की ओट में उिको उत्पन्न करिे िाली िासत का व्यक्तित्व सछपा रिता िै , िैिे िी काल सि​िेष के िासित्य की ओट में उि काल के िीि​ि को रूप सि​िेष प्रदाि करिे िाली व्यक्तिमू लक और अव्यक्तिमू लक अिेक िोंयुि िक्तियाँ काम करती रिती िैं । िासित्य उि अिे क िाधािो​ों में िे एक िै सि​िमें काल सि​िे ष की स्फूसति अपिी असभव्यक्ति पाकर उन्मुि िोती िै ; यिी स्फूसति पररप्लासित िोकर राि​िीसतक आन्दोलिो​ों,धासमि क सिचार, दाि​ि सिक तकि-सितकि, िामासिक न्याय और कला में प्रकट िोती िै । (स्टडी ऑफ सलटरे चर , सिसलयम िे िरी िे डि​ि) Copyright © 2022, Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language


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आक्तखरी कलाम में दू धिाथ सिोंि िे िामासिक यथाथि के सिसभन्न आयामो​ों की प्रभािी पिचाि करायी िै इिमें उन्ो​ोंिे धमि, राि​िीसत, िोंस्कृसत अलग-थलग ि​िीों िै बक्ति उिी में रच बि कर कैिे एकदू िरे को प्रभासित कर रिी िै इिकी िाफ-िाफ तस्वीर प्रस्तु त करती िै । उपन्याि की मू ल कथा 3 सदिोंबर िे 6 सदिोंबर तक मि​ि 4 सदिो​ों की िै । िो अयोध्या में घसटत हुई िै और सि​िके केंद्र में िै बाबरी मक्तिद का सिध्वों ि । सिों दी के इि उपन्याि में दे ि के धासमि क पुिैः िीि​ि के राि​िीसतक, आसथि क और िाों स्कृसतक मािौल को पेि करता िै ।(सिोंि दू धिाथ) िामासिक न्याय को िामासिक अक्तिता के रूप में भी िािा िाता िै सि​ि पर मै िेिर पाों डे िी िे अपिी कृसत के माध्यम िे प्रकाि डाला िै िे सलखते िैं - “िासिक्तत्यक िमाि​िाि का लक्ष्य कृसत सक केिल व्याख्या ि​िीों िै यि काम दू िरी आलोचिा पद्सतयो​ों में भी िोता िै । िासिक्तत्यक कृसत की िामासिक अक्तिता की रचिा की िोंदभि और िामासिक अक्तस्तत्व िे सिसमि त िोती िै इिसलए िासित्य के िमाि​िाि इि पूरी प्रसिया को िमझिे की कोसि​ि िोती िै । सि​िमें कोई रचिा िासिक्तत्यक कृसत बिती िै ।” पोंसडत िी िे अपिे कृसत के माध्यम िामासिक अक्तिता पर लोगो​ों का ध्याि आकसषि त कर इिके माध्यम िे िामासिक न्याय की माों ग की िै सि​िका अध्ययि कर िमाि के लोग येि केि प्रकारे ण इि​िे प्रभासित िोते िैं । िमाि के लोग अपिे कतिव्यो​ों और असधकारो​ों के सलए सिसभन्न प्रकार िे प्रयािरत रिते िैं और अपिी सिस्ताररत करिे के सलए सिसभन्न माध्यमो​ों का प्रयोग करते िैं िासित्य भी उन्ीों में िे एक िै इिी बात को ध्याि में रखते हुए बालकृष्ण भट्ट सलखते िैं िासित्य ि​ि​िमू ि के हृदय का सिकाि िै इिी बात पर ि​िारी प्रिाद सद्विेदी िी िे सलखा िासित्य ि​िता की सचत्तिृसत्त का िोंसचत प्रसतसबोंब िै । िमाि में न्याय की माों ग के सलए अिे कािे क आों दोलि हुई कुछ िकारात्मक तथा कुछ िकारात्मक कायि सकए गए इि िब में िोंतुलि सबठाकर उसचत मागि अपिाकर िामासिक िामों िस्य और िामासिक न्याय थथासपत करिे के सलए िासित्य में आलोचिा का आरों भ हुआ इिी िोंदभि में आचायि रामचोंद्र िु क्ल िे सलखा िै सकि िासित्य के िमाि​िाि िे िासित्य की अिधारणा सिकसित की िै सि​ि​िे िासित्य का िामासिक स्वरूप स्पष्ट िो। और िमाि िे िासित्य के िोंबोंध की व्याख्या िोंभि िो। सि​ि प्रकार िे िमाि को प्रभासित करता िै ठीक उिी प्रकार िासित्य िमाि को प्रभासित करता िै िासित्य को िामासिक कमि का एक रूप िामासिक कमि का प्रभाि या प्रसतसबोंब िामासिक कमि का आदि​ि रूप और कभी कभी सि​िे ष पररक्तथथसतयो​ों में दै सिक िामासिक कमि की िीमाओों के परी ले िािे िाला सिया व्यापार भी मािा िाता िै । (सिडे ि) िासित्य और िमाि िमेिा िे एक दू िरे िे प्रभासित िोते रिे िैं सफर बात चािे िमाि का कोई भी सिषय क्ो​ों ि िो पर उिका प्रभाि पडता िी िै । कुछ इिी िोंदभि में मादाम स्तेि िे अपिी पुस्तक की भूसमका में सलखा िै मैं िे िासित्य पर धमि िै सतकता और कािू ि के प्रभाि तथा उि िब पर िासित्य के प्रभाि की िाों च का प्रयत्न सकया िै इि​िे स्पष्ट िोता िै सक िमाि िाक्तियो​ों िे िे ले कर कािूि आचार सिचार तक सिचार सकया िै सि​ि​िे इि िाि को बल समलता िै । उपयुि​ि तथ्यो​ों का अिलोकि करें तो स्पष्ट िोता िै सक िमाि के सिसभन्न पिलु ओों पर िासित्य का उतिा िी प्रभाि पडता िै सितिा सक िमाि का प्रभाि िासित्य पर पडता िै । िामासिक न्याय िैिे गोंभीर सिषय भी इि​िे Copyright © 2022, Scholarly Research Journal for Humanity Science & English Language


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अछूते ि​िीों िै । िासित्य िी ि​ि माध्यम िै सि​िके द्वारा िमाि में न्याय का प्रचार प्रिार िोता िै और िामासिक न्याय के माध्यम िे िामासिक िामोंिस्य थथासपत सकया िा िकता िै । िमाि में न्याय का िृि​ि िासित्य के आलोचिा, िमालोचिा, किािी, िाटक तथा उपन्याि के माध्यम िे िृसित िोते िैं । सन्दभभरॉल्स िे. (1971), अ सथयरी ऑफ़ िक्तस्टि, ऑक्सफ़डि यु सि​िसि​ि टी प्रेि, लोंदि. सज़सलयट ई. (1986), ‘द िोिल ऐोंड पॉसलसटकल थॉट ऑफ़ बी.आर. आम्बे डकर’, थॉमि पैंथम और केिेथ एल. ड्यु ि (िम्पा.), पॉसलसटकल थॉट इि मॉडि​ि इक्तिया, िे ि पक्तिकेिोंि, ियी सदल्ली. सकमसलका सि. (1996), मल्टीकल्चरल सिटीज़िसिप : अ सलबरल सथयरी ऑफ़ माइिॉररटी राइट् ि, क्लेरैंडि प्रेि, ऑक्सफ़डि . सकमसलका सि. (2009), िमकालीि राि​िीसत दि​ि​ि : एक पररचय, (अिु. कमल ियि चौबे ) सपयि​ि ि, ियी सदल्ली. आक्तखरी कलाम: दू धिाथ सिों ि िासित्य का िमाि​िाि: डॉ. िागे न्द्र िमाि​िाि के सिद्ाों त: डी.आर. िचदे ि रागदरबारी का िमाि​िाि: ियप्रकाि कदि म िासित्य के िमाि​िात्र: मैिेिर पािे य िमकालीि सिों दी तथा िासित्य में ि​िचेतिा: डॉ.अरुणा लोखों डे माि​ि और िासित्य: डॉ. ि​िल सकिोर ि​िभारत टाइम्स: सबरे न्द्र कुमार बि​िाल िासित्य सिक्षा और िों स्कृसत: डॉ. रािेन्द्र प्रिाद िामासिक न्याय और दसलत िासित्य: डॉ. श्योराि सिों ि बे चैि दसलत िासित्य और िामासिक न्याय: पुरुषोत्तम ित्यप्रेमी िासित्य और भारतीय िमाि: िन्दलाल भारती िी सिमि​ि: भारतीय िासित्य के िों दभि में , िेिा गोस्वामी मध्यकालीि िासित्य के िामासिक िरोकार: ित्यदे ि सत्रपाठी ि​ि​िागरण और आलोचिा: रमेि कुमार https://www.prabhatbooks.com/sahitya-shiksha-aur-sanskriti.htm http://www.hindikunj.com/2018/06/sahitya-siksha-samaj.html https://www.jagran.com/bihar/darbhanga-12506831.html http://hihindi.com/sahitya-aur-samaj-par-nibandh/

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