Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2021 = 7.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, JULY-AUGUST, 2022, VOL- 10/72
वििेकानन्द केन्द्र की स्थापना का ऐविहाविक पुनरािलोकन अतुल कुमार1 & भरत कुमार पंडा2, Ph. D. 1
पी-एच.डी. शोधार्थी
2
सहायक प्राध्यापक, शशक्षा शिभाग, महात्मा गाां धी अांतरराष्ट्रीय, शहां दी शिश्वशिद्यालय, िधाा ,
महाराष्ट्र - 442001
Paper Received On: 25 AUGUST 2022 Peer Reviewed On: 31 AUGUST 2022 Published On: 01 SEPTEMBER 2022
Abstract
स्वामी वििेकानन्द ने अपने जीिन के अत्यंत अल्प समय में ही सारे विश्व को जो राह विखाई संभितः कोई अन्य कई सौ िर्षों तक जीवित रह कर भी न कर पाता। उनके कमम योग का संिेश कमम को ईश्वर के रूप में िे खने की प्रेरणा िे ता है । उनका कहना था वक आधुवनक काल में भारत का जो पतन हुआ है िह धमम की अज्ञानता के कारण हुआ है । इसवलए जीिन में धमम की अज्ञानता को िू र करना मनु ष्य का परम लक्ष्य होना चावहए। इस अज्ञानता को िू र करने के वलए हमें सही मागमिशम क वशक्षा की आिश्यकता है । जो प्रत्येक भ्ां वतयों को िू र कर यथाथम का ज्ञान कराये। इसी कारण से उन्ोंने वशक्षा की राष्ट्र केन्द्रीयता के आह्वाहन के साथ राष्ट्र के युिा िगम उविष्ठत जाग्रत प्राप्य िराविबोधत के साथ राष्ट्रीय चररत्र के वनमाम ण के वलये प्रेररत वकया। स्वामी जी के इन विचारों से प्रेररत होकर एकनाथ जी ने सिमप्रथम वििेकानन्द वशला स्मारक, कन्याकुमारी को प्रवतवष्ठत कराया। उसके पश्चात् स्वामी जी के विचारों को मू तम रूप िे ने के वलए वििेकानन्द केंद्र की स्थापना की। ितममान समय में वििेकानन्द केंद्र भारत के 24 राज्ों और 2 केन्द्रशावसत प्रिे शों में विवभि कायमक्रमों जै से- वशक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण एिं जनजातीय कल्याण के कायमक्रम प्रकाशन, सामावजक एिं सां स्कृवतक विकास सम्बन्धी कायों के द्वारा विकास के वनत नए प्रवतमान स्थावपत कर रहा है तथा स्वामी वििेकानन्द जी के कल्पनाओं को मूतम रूप िे रहा है । इस ले ख के माध्यम से शोधाथी ने वििेकानन्द केंद्र की स्थापना का इवतहास, उद्देश्य एिं पररयोजनाओं को सभी के सम्मुख प्रस्तु त करने का प्रयास वकया है । मुख्य शब्द: एकनार्थ रानडे जी, शििेकानन्द शशला स्मारक, शििेकानन्द केंद्र। Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com
प्रस्तािना: हमारा िे श सामावजक जीिन के सभी क्षे त्रों में अग्रणी रहा है , वकंतु कई आक्रमणों एिं वििे शी साम्राज् से संघर्षम ने हमारी वशक्षा पद्धवत एिं मानवसकता को प्रभावित कर विया है । उसके बाि अंग्रेजों ने हमारी वशक्षा को प्रभावित कर हमें मानवसक रूप से पंगु बनाकर हमारे ऊपर लगभग 200 Copyright © 2022, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies