Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2021 = 7.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, MAY-JUNE, 2021, VOL- 8/65 https://doi.org/10.21922/srjis.v8i65.1339 शिक्षा का अशिकार अशिशियम 2009 के शियान्वयि, समस्या एवं शिराकरण का शवश्लेषण प्रो. िं दलाल शमश्र1 & मृदुल कुमार शसंह2
अधिष्ठाता, कला संकाय, MGCGV धित्रकूट शोिछात्र
1 2
Paper Received On: 21 JUNE 2021 Peer Reviewed On: 30 JUNE 2021 Published On: 1 JULY 2021
ध िःशुल्क और अध वायय धशक्षा का अधिकार अधिध यम सं सद द्वारा अगस्त 2009 में पाररत हुआ और राष्ट्रपधत की सं स्तुधत प्राप्त हो े के बाद इसे 1 अप्रैल, 2010 से लागू धकए जा े के धलए अधिसू धित धकया गया। 86वां संधविा सं शोि जो भारत में 6 से 14 वर्य के बच्ों को ध िःशुल्क और अध वायय धशक्षा को मौधलक अधिकार के तौर पर उपलब्ध कराता है उसी धद अधिसू धित हुआ। इसके अलावा न्याय योग्य िाराओं धजसके साथ राज्य के प्राधिकृत छात्र-धशक्षक अ ुपात को हर धवद्यालय के धलए आवश्यक रूप से ग्राह्य ब ा धदया गया। अध वायय धवद्यालय प्रबं ि सधमधतयां धज में ज़्यादातर माता-धपता ही होंगे और स्था ीय प्राधिकारों की ध यु क्ति अधिध यम को अ ुबंधित समयावधि में कायाय क्तित कर े का काम हतोत्साधहत करता है । धवतरण याक्तिकी, धशक्षकों की ध यु क्ति प्रधिया, प्रधशक्षण सं स्था , एजेंधसयों के बीि समिय तथा माता-धपता की ध गरा ी प्रधिया को शीघ्र तय कर धदया जा ा िाधहए ताधक यह सु ध धित धकया जा सके की अधिध यम का कम से कम उल्लंघ हो या उसे तत्काल ठीक धकया जा सके। मु ख्य िब्द: RTE, सावय भौधमक घोर्णा पत्र, ASER, सं धविा
Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com संयुि राष्ट्र संि े धशक्षा के अधिकार को ‘मा वाधिकार’ की मान्यता प्रदा की है । धशक्षा के अधिकार को मा वाधिकार के सावयभौधमक घोर्णापत्र (Universal Declaration of Human Rights) के अ ु च्छेद 26 में , आधथय क, सामाधजक एवं सां स्कृधतक अधिकारों पर अन्तराष्ट्रीय प्रसंधवदा की िारा 14 में स्था धदया गया। संयुि राष्ट्र संघ के यू ेस्को एवं अन्य अंग धशक्षा के अधिकार हे तु अन्तराय ष्ट्रीय धवधिक प्रधतबद्धताओं को पूरा कर े के धलए कायय करते हैं । प्रत्येक राष्ट्र की सरकार अप े प्रत्येक ागररक को ध शु ल्क एवं अध वायय प्राथधमक धशक्षा प्रदा कर े हे तु अन्तराय ष्ट्रीय का ू ों तथा दे श के बच्ों के प्रधत अप े दाधयत्व ध वयह के प्रयास के िम में केन्द्र सरकार े बच्ों की मुफ्त एवं अध वायय धशक्षा का अधिकार अधिध यम, 2009 का धवध यम धकया है धजसे 26 अगस्त, 2009 को राष्ट्रपधत की स्वीकृधत प्राप्त हुई (धसंह, ए. 2009)। अधिध यम के प्राविा 1 अप्रैल, 2009 से लागू हो गये हैं । धशक्षा का अधिकार अधिध यम पाररत कर े से पूवय इस अधिध यम हे तु संधविा में समु धित प्राविा कर े के उद्दे श्य से 86वााँ संधविा संशोि अधिध यम भी पाररत धकया गया था। धशक्षा का अधिकार अधिध यम 2009 की धवशे र्ताएं भारत के 6 से 14 वर्य आयु वगय के बीि आ े वाले सभी बच्ों को मु फ्त तथा अध वायय धशक्षा। कक्षा 1 से कक्षा 8 तक की धशक्षा ‘प्राथधमक धशक्षा’ के रूप में पररभाधर्त। प्राथधमक धशक्षा खत्म हो े से पहले धकसी भी बच्े को रोका हीं जाएगा, ध काला हीं जाएगा या बोर्य परीक्षा पास कर े की जरूरत हीं होगी। Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
प्रो. ंदलाल धमश्र & मृदुल कुमार धसं ह
14966
(Pg. 14965-14968) ऐसा बच्ा धजसकी उम्र 6 साल से ऊपर है , जो धकसी स्कूल में दाक्तखल हीं है अथवा है भी, तो अप ी प्राथधमक धशक्षा पूरी हीं कर पाया/पायी है ; तब उसे उसकी उम्र के लायक उधित कक्षा में प्रवेश धदया जाएगा, बशते धक सीिे से दाक्तखला ले े वाले बच्ों के समकक्ष आ े के धलए उसे प्रस्ताधवत समय सीमा के भीतर धवशेर् टर े ध ं ग दी जा ी होगी, जो प्रस्ताधवत हो। प्राथधमक धशक्षा हे तु दाक्तखला ले े वाला/वाली बच्ा/बच्ी को 14 साल की उम्र के बाद भी प्राथधमक धशक्षा के पूरा हो े तक मु फ्त धशक्षा प्रदा की जाएगी। प्रवेश के धलए उम्र का साक्ष्य प्राथधमक धशक्षा हे तु प्रवेश के धलए बच्े की उम्र का ध िाय रण उसके जन्म प्रमाणपत्र, मृ त्यु तथा धववाह पंजीकरण का ू , 1856 या ऐसे ही अन्य कागजात के आिार पर धकया जाएगा जो उसे जारी धकया गया हो ( ं दकर, 2009)। उम्र प्रमाण हीं हो े की क्तस्थधत में धकसी भी बच्े को दाक्तखला ले े से वंधित हीं धकया जा सकता। प्राथधमक धशक्षा पूरा कर े वाले छात्र को एक प्रमाणपत्र धदया जाएगा। एक ध धित धशक्षक-छात्र अ ु पात की धसफाररश, जम्मूकश्मीर को छोड़कर समू िे दे श में लागू होगा। आधथय क रूप से कमजोर समु दायों के धलए सभी ध जी स्कूलों के कक्षा 1 में दाक्तखला ले े के धलए 25 फीसदी का आरक्षण। धशक्षा की गुणवत्ता में अध वायय सुिार। स्कूल धशक्षक को पााँ ि वर्ों के भीतर समु धित व्यावसाधयक धर्ग्री प्राप्त कर ले ा होगा, अन्यथा उ की ौकरी िली जाएगी। स्कूल का बुध यादी ढााँ िा (जहााँ यह एक समस्या है ) 3 वर्ों के भीतर सुिारा जाए अन्यथा उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। धवत्तीय बोझ राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के बीि (55:45 के अ पात में ) साझा धकया जाएगा। (अधिध यम 2009 की आख्या) RTE के धियािय में समस्या क्या है ? इस अधिध यम के अपेक्षा ु रूप कायाय क्तित कारण हैं :- इसके धदशा-ध दे शों के संबंि में अधिकां श माता-धपता को जा कारी
हो े के पीछे अ े का े क
हो े के कारण वे अप े बच्ों
के धलये अधिकारों की मां ग हीं कर पाते। अ े क धवद्यालय मा ते हैं धक RTE के अंतगयत गरीब बच्ों के प्रवेश से उ के धवद्यालय के पररणाम का स्तर धगर जाएगा, अतिः वे इ बच्ों के प्रवेश को हतोत्साधहत करते हैं । सरकार स्कूलों को समय पर क्षधतपूधतय राधश प्रदा
हीं करती, अतिः स्कूल प्रशास इ बच्ों को प्रवेश दे े में आ ाका ी
करता है । इस अधिध यम के कायाय िय के संबंि में कोई पुख्ता धशकायत ध वारण तंत्र मौजू द हीं है। इस अधिध यम के अंतगयत सीमां त वगों, जै से-LGBT, धवकलां गों, अ ाथों, धभखाररयों आधद के बच्ों के धलये पृथक् प्राविा
हीं धकया गया है। (शाधल ी, 2016)
'सवय धशक्षा अधभया ' में ि की कमी सबसे बड़ी बािा- सवयधशक्षा अधभया RTE अधिध यम के कायाय ् वय का एक मु ख्य साि है । यह दु ध या में अप ी तरह के सबसे बड़े काययिमों में से एक है । यह मु ख्यतया केंद्रीय बजट से प्राथधमक तौर पर धवत्तपोधर्त है और पूरे दे श में िलाया जाता है । आरटीई के दस साल का सफर घुट ों पर िल े की तरह रहा है . एक दशक बाद धशक्षा का अधिकार का ू
की उपलक्तब्धयां सीधमत हैं , उलटे इससे सवाल ज्यादा खड़े हुये हैं . इस का ू
को लागू कर े के धलये
धजम्मेदार केंद्र और राज्य सरकारें ही धपछले दस सालों के दौरा इससे अप ा पीछा छु ड़ाती हुई ही धदखाई पड़ी हैं । िूंधक हमारे दे श के राज ीधत में धशक्षा कोई मु द्दा हीं है इसधलए धपछले दस वर्ों के दौरा केंद्र और राज्य सरकारें आरटीई को लागू कर े में उदासी रही हैं . दस साल इस बात के गवाह रहे हैं धक धकस तरह से भारत के स्कूली धशक्षा का अिोसंरि ा (इं फ्रास्ट्रक्चर), पयाय प्त धशक्षकों की ध युक्ति, गुणवत्तापूणय धशक्षा के धलये सरकारों की उपेक्षा से जू झता रहा है । उपलक्तब्धयों की बात करें तो धशक्षा अधिकार का ू के एक दशक का सफर ‘सभी के धलये स्कूलों में ामां क का अधिकार’ साधबत हुआ है . इस दौरा की सबसे बड़ी उपलक्तब्ध स्कूलों में 6 से 14 वर्य के बच्ों का लगभग सौ फीसदी ामां क हैं , (धसंह, ए. 2015) हम प्राथधमक स्कूलों की संख्या बढ़ा े में भी कामयाब रहे हैं । आज लगभग हर बसावर या उसके करीब एक प्राथधमक स्कूल उपलब्ध है । इसके अलावा स्कूलों के अिोसंरि ा (इं फ्रास्ट्रक्चर) में भी सुिार हुआ है , आज ज्यादातर स्कूलों में लड़कों और लड़धकयों के धलए अलग-अलग शौिालय उपलब्ध हैं . हालां धक इ में अभी भी पा ी और साफ-सफाई की समस्या ब ी हुई है । Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
प्रो. ंदलाल धमश्र & मृदुल कुमार धसं ह
14967
(Pg. 14965-14968) िु ौधतयों की बात करें तो धपछले दस वर्ों के दौरा आरटीई सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूणय धशक्षा सुध धित कर े में धवफल साधबत हुई है . प्राथधमक स्कूलों में ामां क तो हो गये हैं ले धक स्कूलों में बच्ों के धटके रह े की िु ौती अभी भी बरकरार है . इसी के साथ ही आज भी बड़े पैमा े पर सरकारी स्कूल बुध यादी ढां िागत सुधविाओं, जरूरी संसाि , धशक्षा के धलये माहौल और धशक्षकों की भारी कमी से जू झ रहे हैं । मा व संसाि
धवकास
मं त्रालय से संबद्ध संसदीय सधमधत द्वारा फरवरी 2020 के आक्तखरी सप्ताह में संसद में पेश की गयी ररपोटय में सरकारी स्कूलों के आिारभू त ढां िे पर धिंता जाधहर की गई है . ररपोटय के अ ु सार अभी तक दे श के केवल 56 फीसदी सरकारी स्कूलों में ही धबजली की व्यवस्था हो सकी है , धजसमें मध्यप्रदे श और मधणपुर में तो महज 20 फीसदी स्कूलों तक ही धबजली की पहुं ि हो सकी है । इसी प्रकार से दे श में 57 प्रधतशत से भी कम स्कूलों में खेलकूद का मै दा है . ररपोटय में बताया गया है धक आज भी दे श में एक लाख से ज्यादा सरकारी स्कूल एकल धशक्षकों के भरोसे िल रहे हैं . इिर 2014-15 के बाद से धशक्षा के बजट में भी कमी दे ख े को धमली है . 2014-15 में धशक्षा के धलये आवंधटत बजट भारत सरकार के कुल बजट का 4.14 फीसदी था जो 2019-20 में 3.4 फीसदी हो गया है । (ASER की आख्या-2020) आरटीई की समस्याएाँ - सावयजध क धशक्षा एक आिुध क धविार है , धजसमें सभी बच्ों को, िाहे वे धकसी भी धलं ग, जाधत, वगय, भार्ा आधद के हों- धशक्षा उपलब्ध करा ा शास का कतयव्य मा ा जाता है । गौरतलब है धक भारत एक ऐसा दे श है जहां सधदयों तक धशक्षा पर कुछ खास समु दायों का एकाधिकार रहा है . यह धसलधसला औपध वेधशक काल में टू टा, जब भारत में स्कूलों के माध्यम से सबके धलए धशक्षा का प्रबन्ध धकया गया. अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थाधपत स्कूल-काले ज सभी भारतीयों के धलए खु ले थे। अंग्रेजों द्वारा स्पष्ट् ीधत अप ाई गई धक जाधत और समु दाय के आिार पर धकसी भी बच्े को इ स्कूलों में प्रवेश से इं कार हीं धकया जाएगा. यह एक बड़ा बदलाव था धजस े सभी भारतीयों के धलए धशक्षा का दरवाजा खोल धदया। आजादी के बाद इस प्रधिया में और तेजी आई. भारतीय संधविा के अ ु च्छेद 29 में भारत के सभी ागररकों को िमय , मू लवंश, जाधत या भार्ा के धकसी भे दभाव के धब ा धकसी भी धशक्षा संस्था में भती हो े का अधिकार धदया गया है (धसंह, ए. 2015) । साल 2010 में धशक्षा का अधिकार का ू के लागू हो े के बाद पहली बार केंद्र और सरकारों की का ू ी जवाबदे ही ब ी धक वे 6 से 14 साल सभी बच्ों के धलये ध िःशु ल्क और अध वायय धशक्षा की व्यवस्था करें . ले धक इसी के साथ ही इस का ू की सबसे बड़ी सीमा यह रही है धक इस े सावजय ध क और ध जी स्कूलों के अन्तधवयरोि से कोई छे ड़-छाड़ हीं की। आरटीई े ा केवल धशक्षा के दोहरी व्यवस्था को ब ाये रखा है बक्तल्क इसे मजबूत ब ा े में भी मददगार साधबत हुयी है . इस े सरकारी स्कूलों को ‘मजबूरी की शाला’ में बदल े में कोई कसर हीं छोड़ा है . जो लोग सक्षम है उ की दौड़ पहले से ही प्राइवेट स्कूलों की तरफ है . अब ध जी स्कूलों में 25 प्रधतशत कोटा लागू हो े के बाद गरीब और वंधित समु दाय भी इस भगदड़ में शाधमल हो गये हैं । बहरहाल धपछले ती दशकों के दौरा दु ध या बहुत तेजी से बदली भी है और इसी के साथ ही दे श-दु ध या की धशक्षा प्रणाली बढ़ती जरूरतों और मां गों के अ ु सार कई बदलावों से गुजरी है (धशक्षा अधिकार अधिध यम की आख्या-2009) दु भाय ग्य से भारत में एक बार धफर कुछ समु दाय और वगय ही इ बदलाओं का फायदा उठा पा रहे हैं , दे श की एक बड़ी ज संख्या धजसमें मु ख्य रूप से गरीब, अल्पसंख्यक और परम्परागत रूप से हाधशये पर रखे गये समु दाय शाधमल है , की यहां तक पहुं ि हीं हो सकती है । इस बदली हुई दु ध या में ज्ञा पर एकाधिकार की एक यी व्यवस्था ब ी है धजसमें पूंजी और बाजार की एक बड़ी भू धमका है . धपछले दस वर्ों के दौरा
धशक्षा का सावयभौधमकरण
(यूध वसयलाइजे श ) तो हुआ है ले धक इसका धवभाज भी बहुत गहरा हुआ है . इस ये धवभाज के दो छोर हैं जहां एक तरफ कुछ िुध न्दा कुली
और संभ्ां त प्राइवेट स्कूल,
वोदय/केन्द्रीय धवद्यालय हैं तो दू सरी तरफ
सरकारी और गली मु हल्लों में िल े वाले छोटे और मध्यमस्तर प्राइवेट स्कूल।
Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
प्रो. ंदलाल धमश्र & मृदुल कुमार धसं ह
14968
(Pg. 14965-14968) इ तमाम िु ौधतयों से उभर े के हमें दो स्तरों पर उपाय कर े की जरूरी है , एक तो आरटीई के दायरे में रहते हुये जरूरी कदम तो उठा े ही होंगे, साथ ही धशक्षा के अधिकार का ू ों के सीमओं को तोड़कर भी आगे बढ़ ा होगा। प्राथधमक धशक्षा में लगभग शत प्रधतशत ामां क के करीब पहुं ि े के बाद आरटीई को सभी बच्ों के धलये प्राथधमक धशक्षा के धलये अवसर का का ू की भू धमका से आगे बढ़ते हुये सभी बच्ों के के धलये गुणवत्ता पूणय और समा धशक्षा के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ ा होगा। अब ामां धकत बच्ों के ध यधमतीकरण और उन्हें अधिक समय तक स्कूल में रोके रख े के धलये तत्काल ठोस उपाय धकये जा े की जरूरत है . इसका सीिा संबंि धशक्षा के गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है धजसके धलए बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों पर धशक्षकों की ध युक्ति के साथ एक बड़े
ीधतगत फैसले और जरूरी बजट की जरूरत होगी। मसौदा राष्ट्रीय धशक्षा ीधत 2019 में स्कूलों में धशक्षकों की कमी दू र कर ा और सावजय ध क धशक्षा पर सरकारी खिे को जीर्ीपी के छह प्रधतशत तक खिय कर े की बात की गयी है ले धक हम जा ते हैं धक इस दे श ीधतयों को बहुत गंभीरता से हीं धलया जाता हैं . इससे पहले भी 1968 में जारी की गयी पहली राष्ट्रीय धशक्षा ीधत और दू सरी राष्ट्रीय धशक्षा ीधत 1986 में भी सावजय ध क धशक्षा में जीर्ीपी के छह प्रधतशत तक खिय का सुझाव धदया जा िुका है , अब एक बार धफर इसे दोहराया गया है (सै ी,ए.के. 2016)। ले धक अब इसे दोहरा े का हीं बक्तल्क फैसला ले े का है । धशक्षा में गव े स की मौजू दा प्रणाली पर भी पु धवयिार कर े की जरूरत है . मसौदा राष्ट्रीय धशक्षा ीधत 2019 में प्रिा मं त्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय धशक्षा आयोग के गठ की बात की गयी है ले धक इससे धशक्षा प्रशास के केन्द्रीकरण का खतरा बढ़ जा े की सम्भाव ा है . धशक्षा के प्रशास को हमें इस प्रकार से धवकेक्तन्द्रत कर े की जरूरत है धजसके केंद्र में धशक्षक, समु दाय और बच्े हो सकें। धशक्षा का अधिकार का ू के धियािय की ध गरा ी के धलये धजम्मेदार एजें सी राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग की भू धमका और स्पष्ट् व मजबूत ब ा े की जरूरत है (धसंह, एस. 2009) प्रभावी ध गरा ी के धलये व्यावहाररक रूप से यह जरूरी है धक कम से कम हर धजले में आयोग का अप ा ढां िा हो जो आरटीई के धशकायत ध वरण ढ़ां िे की तरह काम करे । यह काम राज्य बाल आयोगों के माध्यम से भी धकया जा सकता है । इसी प्रकार से राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग मधहला एवं बाल धवकास धवभाग के अंतगयत आता है जबधक धशक्षा का धजम्मा मा व संसाि धवकास मं त्रालय के पास हैं यहां भी सामंजस्य बैठा े की जरूरत है । संदर्भ सूची ASER Report, 2020 ASER Report, 2018 Shalini (2016) “The Protection of the Right to Education by International Legal Instruments.” The Protection of the Right to Education by International Law, pp. 85–154. Saini, A. K. (2016) “The Right of Children to Free and Compulsory Education Act – 2009: As One of the Most Pioneering Academic Reforms in India.” International Research in Higher Education, vol. 1, no. 2, doi:10.5430/irhe Singh A. (2015) Indian Constitution NCTE Rreport 2014-15 RTE Act, 2009 Singh, S. (2009) “Awareness in Elementary School Teachers of Government and Public Schools about Right to Education Act 2009.” Journal of Teacher Education and Research, vol. 11, no. 2, 2016, p. 93. Nandekar, U.P. (2009) “Right to Education and the Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009.” SSRN Electronic Journal, doi:10.2139/ssrn.2271976
Copyright © 2021, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies