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UCCHA MADHYAMIK STAR KI SHIKSHA ME KAHANI AADHARIT ANUDESHAN EANV USAKI PRASANGIKTA

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Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2019 = 6.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFEREED JOURNAL, JULY-AUGUST, 2020, VOL- 8/60 उच्च प्राथमभक स्तय की मिऺा भें कहानी आधारयत अनुदेिन एवॊ उसकी प्रासॊगगकता भमा िॊकय मादव

ऩी-एच.डी िोध छात्र, भहात्भा गाॊधी अॊतययाष्ट्रीम हहॊदी ववश्वववद्मारम वधा​ा (भहायाष्ट्र) 442001 Email. Mayashankar182@gmail.com

Abstract प्रस्तुत िोध ऩत्र उच्च प्राथमभक स्तय ऩय मिऺण कयने से सम्फॊगधत है जजसभें कहानी आधारयत अनुदेिन एवॊ उसकी प्रासॊगगकता का वणान ककमा गमा है ।भानव सभ्मता के आहद-कार से ही कहानी सुननेएवॊ सुनाने की ऩयॊ ऩया ककसी न ककसी रूऩ भें चरी आ यही है ।दयू दिान के आगभन के ऩूवा िाभ होते ही सॊमुक्त ऩरयवाय भें फच्चे अऩनी दादी-नानी के ऩास कहानी सुनने ऩहुॉच जाते थे । सॊमुक्त ऩरयवाय भें फच्चों का साभाजजक, भानमसक, फौविक व बाषा का ववकास सहज ही हो जाता है । उस सभम अनौऩचारयक मिऺा का एक भुख्म भाध्मभ दादी-नानी की कहाननमाॉ थी ।छोटे ऩरयवायों भें मह कामा भाता, वऩता,

दादी, बईमा मा ऩास -ऩड़ोस की दादी-नानी कयती थी । कहानी फच्चे को आनॊहदत कयने के साथ ही साथ उन्हें अनेक प्रकाय की जानकारयमाॉ प्रदान कयने भें सहामता कयती है । जो फात हभ फच्चों को सहज रूऩ से नहीॊ मसखा ऩाते हैं, वही फात वह कहानी के भाध्मभ से जल्दी सीख रेते हैं। उनके भन भें ककसी ववषमवस्तु को कहानी के भाध्मभ से स्थाई प्रबाव डारा जा

सकता है । इस तयह ववऻान की कहाननमाॉ, जानवयों की कहाननमाॉ, साभाजजक कहाननमाॉ तथा अन्म मिऺाप्रद से सम्फॊगधत कहाननमाॉ फच्चों के सवा​ांगीण ववकास भें सहामक होती है ।फच्चों को कौन-सी कहाननमाॉ अच्छी रगती हैं? कैसी हो कहानी?

कहानी सुनाई कैसे जाए? इत्माहद का वणान कयते हुए, उच्च प्राथमभक स्तय ऩयकहानी केभाध्मभ से मिऺण की प्रासॊगगकता का वणान ककमा गमा है ।

फीज िब्द : उच्च प्राथमभक मिऺा, कहानी आधारयत अनुदेिन, कहानी की प्रासॊगगकता ।

Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com प्रस्तावना स्वतन्त्र बायत के प्रथभ मिऺा भॊत्री भौराना अफुर कराभ आजाद ने 1948 भें एक मिऺा सम्भरेन भें कहा था कक फनु नमादी मिऺा प्रत्मेक व्मजक्त का जन्भ मसि अगधकाय है ,क्मोंकक उसके बफना वह फतौय नागरयक जजम्भेदारयमाॊ फखफ ू ी नहीॊ ननबा सकता है ।ककसी बी दे ि का बववष्ट्म वहाॉ के फच्चों को मभरने वारी उच्च प्राथमभक मिऺा ऩय ननबाय कयती है । उच्च प्राथमभक मिऺा जजस प्रकाय की होगी दे ि का बववष्ट्म बी उसी प्रकाय का होगा । इस स्तय ऩय ही दे ि तथा उसके प्रत्मेक नागरयक का ववकास ननबाय कयता है । मिऺा ककसी बी प्रगनतिीर सभाज की यीढ़ होने के साथ ही साथ उसकी उन्ननत औय ऩरयऩक्क्वता का आइना होती है । जो सभाज मिऺा ऩय फर नहीॊ दे ता। वह गुभनाभी भें खो जाता है औय कबी बी अथाऩूणा ढॊ ग से प्रगनत नहीॊ कय सकता। ऐसे सभाज भें आत्भा नहीॊ होती है । प्राथमभक स्तय की मिऺा को मिऺा व्मवस्था का प्रथभ स्तय कहा जाता है । इसस्तय की मिऺा 6 मा 7 वषा की आमु से 14 वषा की आमु तक चरती यहती है । अत् कऺा 1 से रेकय कऺा 8 तक की मिऺा को प्राथमभक मिऺा Copyright © 2020, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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कहा जाता है(गुप्ता,2015)। मिऺा आमोग (1964-66) ने कऺा 1 से 5 तक की मिऺा को ननम्न प्राथमभक मिऺा तथा कऺा 6 से 8 तक की मिऺा को उच्च प्राथमभक मिऺा कहा है । उच्च प्राथमभक स्तय की मिऺा भें 11 से 14 आमु वगा के फच्चे आते है (रार,2013)। इस आमु वगा के फच्चों को कहानी सुनना फहुत अच्छा रगता है (अग्रवार,2016)। कहानी सन ु ना फच्चों की हदनचमा​ा की अत्मॊत भहत्त्वऩण ू ा गनतववगध है(सोनी,2010)। ववश्व की प्रत्मेक सॊस्कृनतमों ने हभेिा से ही ववश्वास, ऩयॊ ऩयाओॊ औय इनतहास को बववष्ट्म की ऩीढ़ी तक ऩहुॉचाने के मरए कहाननमों का ही सहाया मरमा है । कहाननमाॉ फच्चों की कल्ऩनािीरता को फढ़ाती हैं, कहानी कहने औय सुनने वारे के फीच सभझ स्थावऩत कयने हे तु मह सेतु का कामा कयती है औय फाहुसॊस्कृनतक सभाज भें फच्चों के मरए एक सभान आधाय तैमाय कयती है ।फच्चों को स्थानीम ऩरयवेि, बाषा औय व्मवहाय से ऩरयगचत होने का अवसय सहज ही मभर जाता हैं।याष्ट्रीम ऩाठ्मचमा​ा की रुऩये खा इसी फात की अनुिॊसा कयती है कक स्कूरी ऻान को सभद ु ाम के ऻान से जोड़ा जाम । ववमबन्न सभद ु ामों भें ऻान के सॊसाधनों के रूऩ भें प्रचमरत कहाननमाॉ, स्कूर को सभुदाम से जोड़ने का एक अच्छा साधन है ।इससे फच्चे खर ु कय अऩनी फात कह ऩाते हैं। कहानी सुनाने का उद्देश्म भनोयॊ जन के साथ-साथ सभसानमक जीवन को सभझाने ,उसभें अऩनी बूमभका को दे खने, ऩात्रों के फायें भें चचा​ा के भाध्मभ से ववमबन्न ऩरयजस्थनतमों को सभझने व उसके अनस ु ाय व्मवहाय कयने की सभझ ववकमसत कयना होता है । कहानी स्कूरों भें मिऺण िास्त्र का एक सिक्त भाध्मभ बी है ।फच्चों भें भौखखक बाषा से सीखने एवॊ सभझने औय उनभें भनोयॊ जन की स्वाबाववक ऺभता होती है ।इसीमरए कहानी का उऩमोग हदनचमा​ा की जजॊदगी भें फेहद प्रचमरत है(इगन,1986)।कहानी को “बाषा, स्वय के उताय-चढाव, िायीरयक-गनत, हाव-बाव आहद के उऩमोग से फच्चों के मरए ककसी कहानी की घटनाओॊ औय गचत्रों को सजीव फनाने की करा के रूऩ भें ” भें ऩरयबावषत ककमा जा सकता है ।कहानी-कथन का सफसे भहत्त्वऩूणा ऩहरू मह है कक कहानी को ऩूया कयने औय उसे कपय से फनाने के मरए फच्चे ककस प्रकाय से कहानी के दृश्म औय वववयण अऩने भजस्तष्ट्क भें ववकमसत कयते हैं।कहानी मिऺण को प्रेटोने छोटे फच्चों के मरए इसे उत्तभ फतामा था । फच्चे स्वबाव से ही कहानी प्रेभी होते हैं। कहानी उनकी जजऻासा औय उनके कौतह ू र को िाॊत कयती है कहानी उनकी कल्ऩनाओॊ के ऩॊखों की उड़ानबयती है ।यास ने प्रायॊ मबक स्तय ऩय इनतहास मिऺण के मरए इसी ववगध को अऩनाने का सुझाव हदमा है । एप.आय.वर्डास के अनुसाय तेयह वषा की अवस्था तक के फच्चों को इनतहास ऩढ़ाने का भख् ु म साधन कहानी होनी चाहहए । मिऺक द्वाया फताई गमी कहानी फच्चे सुनकय अऩने-अऩने सभूह भें कहानी मरखते हैं औय घटनाओॊ तथा ऩात्रों की कल्ऩना कय कहानी का गचत्र फनाते हैं ।इस प्रकाय फच्चे सभुदामों के भौखखक ऻान को मरखखत रूऩ दे ते हैं औय अऩने यचनात्भक-सॊऻानात्भक कौिरों के उऩमोग से उनका गचत्रणकयते हैं।इन कहाननमों को ककसी ककताफ से न कहकय फजल्क सभुदाम से सम्फॊगधत होनी चाहहए । जजनभें सॊस्कृनत,सभुदाम, ऩमा​ावयण, इनतहास, बूगोर इत्माहद का सभि ृ ऻान िामभर होता है औय जो फच्चों के जाने- ऩहचाने सन्दबों /प्रसॊगों से जुड़ा हो। इस गनतववगध भें एक तयप जहाॉ फच्चों ने कहानी के रेखक औय गचत्रकाय के रूऩ भें कहानी-उत्सव का आनॊद रेते हैं।वही सभद ु ाम के

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सदस्मों को स्कूर भें फच्चों की अकादमभक गनतववगध भें िामभर होने की ऩहचान मभरती है औय फच्चों की बाषाई कौिरों के ववकास भें सहामता मभरती है । कहानी आधारयत अनुदेिन कहानी कथन से तात्ऩमा है - कहानी कहना मा कहानी सन ु ना। कहानी कहते सभम ववषम-वस्तु के सक्ष् ू भ तथा जहटर अॊिों को इतना सयर फनामा जाता है कक कऺा के सबी ववद्मागथामों को स्ऩष्ट्ट हो जाए। फच्चें अऩनी जजऻासु प्रवजृ त्त के कायण कहानी सुनने भें रूगच रेते हैं। वे कहानी द्वाया प्रस्तत ु ऻान को सयरता से सभझते हैं औय एकाग्रगचत होकय एवॊ भन से ग्रहण कयते है ।अनद ु े िन का सम्फन्ध आधनु नक कौिर एवॊ प्रववगधमों को मिऺा तथा प्रमिऺण भें प्रमोग कयने से हैं। जजससे अगधगभ को सुगभ एवॊ सयर फनामा जाता है (खॊडर े वार,2015)।कहानी आधारयत अनुदेिन के द्वाया ववषम-वस्तु के सूक्ष्भ एवॊ जहटर अॊिों को सयर ढॊ ग से प्रस्तत ु कय फच्चों की जजऻासा फढ़ाने के साथ ही साथ उनकी काल्ऩननक एवॊ ताककाक िजक्तमों का ववकास ककमा जाता है (कुरश्रेष्ट्ठ,2010)। हजायों वषों से सभाज भें कहाननमों के भाध्मभ से प्रभुख मसिान्तों को मसखामा जाता यहा है ।कहानी भानवीम अनुबवों औय कल्ऩनाओॊ का सजम्भश्रण है ।कहानी की कथा-वस्त,ु ऩात्र, चरयत्र औय उसके चरयत्रों के भानमसक घात-प्रनतघातों का सयर-योचक वणान फच्चों भें अन्म ववगधमों से कही अगधक प्रबाववत कयता है ।कहानी आधारयत अनुदेिन की सयरता ही इसकी फड़ी वविेषता है , जो सुगभता से फच्चों की रूगच को अऩनी ओय आकवषात कय रेती है ।अॊग्रेजी के ववख्मात आरोचक श्री हे नयी हडसन का कहना है कक कहानी वह है जो एक ही फैठक भें सग ु भता से सभाप्त ककमा जा सके । ववख्मात कथाकाय एच.जी.वेल्स का ववचाय है कक कहानी वह गद्म-कथा है जो फीस मभनट भें ऩढ़ी जा सके ।” कहानी आधारयत अनुदेिन के ववमबन्न आमाभ कहानी आधारयत अनुदेिन के ववमबन्न आमाभ ननम्न भाने गमे हैंिीषाक फच्चे जफ ककसी कहानी को ऩढ़ते है,तो सफसे ऩहरे उनकी दृजष्ट्ट कहानी के िीषाक ऩय ही ऩड़ती है ।इसमरए कहानी के सबी आमाभों भें प्राथमभक भहत्त्व िीषाक का ही होता है ।कहानी के िीषाक भें महद फच्चों को कोई नवीनता अथवा आकषाण प्रतीत नहीॊ होता है, तो वह उसे ऩढ़ने की इच्छा नहीॊ कयते है ।फहुत से िीषाक कहानी की सम्ऩण ू ा ववषमवस्तु को ही अमबव्मक्त कय दे ते है ।इससे स्ऩष्ट्ट है कक कहानी के सभग्र स्वरूऩ भें उसके िीषाक का भहत्त्वऩूणा स्थान है ।िीषाक कहानी का न केवर प्राथमभकता की दृजष्ट्ट से एक भहत्त्वऩूणा आमाभ है,सभग्र कहानी के स्वरूऩ का फोध कयाने की दृजष्ट्ट से बी उसकी भहत्ता है ।इसमरए िीषाक कहानी का एक सवाथा अननवामा आमाभ है ।जजस प्रकाय से नाभ के अबाव भें ककसी भनुष्ट्म की कोई वैमजक्तकता नहीॊ होती है ,उसी प्रकाय से िीषाक के अबाव भें ककसी बी कहानी को सभग्र रूऩात्भक नहीॊ कहा जा सकता है । कथानक

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मही कहानी का आधाय है ।कहानी का प्रबाविारी होना इसी ऩय ननबाय कयता है ।एक मा एकागधक घटनाओॊ एवॊ वाह्म तथा अन्त्जस्थनतमों का तॊतज ु ार ही कथानक है । मह तॊतज ु ार जजतना ही सुगहठत होता है कहानीउतनी ही प्रबाविारी मसि होती है (नतवायी,2005)। मू तो कहानी के आयम्ब औय अॊत का ववचाय कयते हुए चेखव ने मरखा है -“कहानी का न कोई अॊत होता है न प्रायॊ ब वह जीवन का एक पाॉक है ।”प्रत्मेक कहानी भें ककसी न ककसी कथा को कहने का एक प्रऩत्र होता है, बरे ही उस ऩय अगधक फर न हदमा जाम । कथानक अऩनी सीभा भें जीवन के मथाथाआमाभों का अॊकन कयता है तथा ववस्तत ृ ऩरयवेि के छोयों को फाॉधने का प्रमत्न कयता है तो कथानक भें घटनाओॊ को इस प्रकाय सॊमोजजत ककमा जाता है कक उनभें कहीॊ बी रयक्तता का आबास भारभ ू ना हो(अवस्थी,1963)। चरयत्र गचत्रण कहानी के प्रभुख तत्त्वों भें कथानकके उऩयाॊत चरयत्र गचत्रण को ही स्थान हदमा जाता है ।एक कथानक जो अऩनी कहाननमों भें ऩात्र मोजना प्रस्तत ु कयता है,उसका भर ू आधाय भानव जीवन के ववववध ऩऺ होते है ।ववमबन्न ऩात्रों की मोजना कयके कहानी ववमबन्न ऩरयजस्थनतमों भें भनुष्ट्म के चरयत्र की प्रनतकिमात्भक सॊबावनाओॊ का ननदिान कयती है ।कहानी भें चरयत्र गचत्रण का भहत्त्व इस कायण से बी अऩेऺाकृत अगधक हो जाता है , क्मोंकक ननमोजजत ऩात्रों के ही भाध्मभ से कहानीकाय भानवता का फहुऩऺीम रूऩ प्रस्तत ु कयता है ।व्मावहारयक दृजष्ट्टकोण से बी ककसी बी सभाज भें यहने वारा भनुष्ट्म अऩनी सभकारीन ऩरयजस्थनतमों औय ननकटवती वातावयण से प्रबाववत होता है ।भानव जीवन की ऩष्ट्ृ ठबूमभ भें ही ववववध ऺेत्रीम गुणों-अवगुणों की ननमभानत, ववकास, ऩरयवतान तथा ह्रास होता है ।कहानीकाय अऩनी कहानी भें ननमोजजत घटनाओॊ के अनक ु ू र ऩात्रों की सजृ ष्ट्ट कयके उनके चरयत्र गचत्रण के भाध्मभ से भनुष्ट्म के चारयबत्रक ववकास की इस प्रकिमा का ऩरयचम दे ता है ।उसके ऩात्र ववमबन्न ऩरयजस्थनतमों भें अऩने स्वबाव तथा व्मजक्तत्व के अनुसाय आचयण कयके उसके अबीष्ट्ट की ऩूनता कयते हैं। कथोऩकथन कथोऩकथन मा सॊवाद मोजना कहानी का चौथा भूर आमाभ है । सैिाॊनतक दृजष्ट्ट से तो कहानी के प्राम् सबी तत्त्व ऩयस्ऩय सम्फि होते है , ऩयन्तु व्मावहारयक दृजष्ट्टकोण से कथोऩकथन का सम्फन्ध ऩात्रों से अगधक घननष्ट्ठ होता है ।कहानी भें ननमोजजत ऩात्रों के ऩायस्ऩरयक वाता​ाराऩ के भाध्मभ से ही इस तत्त्व का सभावेि कहानी भें ककमा जाता है ।ऩात्रों तथा कहानी के अन्म तत्त्वों की बाॊनत ही कथोऩकथन के भाध्मभ से घटनाओॊ भें गनतिीरता आती है ।कथावस्तु के ववकास के मरए कथोऩकथन की मोजना कयने से कहानीकाय को एक सुववधा मह यहती है कक उसे अनावश्मक ववस्ताय नहीॊ दे ना ऩड़ता है। दे ि, कार अथवा वातावयण का फोध बी ऩात्रों के ऩायस्ऩरयक वाता​ाराऩ द्वाया फच्चों को कयामा जा सकता है ।कथोऩकथन का एक उद्देश्म कहानी की कथावस्तु का ववकास कयना बी है ।इसके भाध्मभ से घटनाओॊ भें सजीवता आती है । वातावयण कहानी ववगध भें वातावयण का भहत्त्वऩण ू ा आमाभ हैं ।कहानी का ववषम प्राम् भानव औय उसका किमाकराऩ है । भानव-जीवन ककसी न ककसी ऩरयवेि भें ही व्मतीत होता है । जफ तक कहानी को घटना मा उसके ऩात्रों का ककसी Copyright © 2020, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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कार-वविेष तथा स्थान-वविेष का गचत्रण न होता है तफ तक कहानी कल्ऩना-भात्र ही रगती है ।कहानी को ववश्वसनीम फनाने के मरए इसभें वातावयण की सजृ ष्ट्ट अनत आवश्मक है । उद्देश्म सजृ ष्ट्ट भें कोई बी कामा ननरुद्देश्म नहीॊ होता । भनष्ट्ु म जो बी कामा कयता है उसका कोई न कोई ध्मेम अवश्म होता है । उसी प्रकाय कहानीकाय के सम्भुख कोई न कोई ननजश्चत उद्देश्म आवश्मक होता है, जजससे प्रेरयत होकय वह कहानी फच्चों को सुनाता है । उच्च प्रथभ स्तय के फच्चों को उनकी भातब ु ाने से उनके सीखने की ऺभता भें ववृ ि होती है ।महद ृ ाषा भें कहानी सन भातब ृ ाषा भें ही फारक के ऩरयवेि की बाषा हो, तो वह उसके भाध्मभ से व्माऩक सभाज से सॊऩका स्थावऩत कयते हैं औय उसी भानक के रूऩ भें आगे औऩचारयक मिऺा ग्रहण कयते हैं।इसीमरए औऩचारयक मिऺा भें भातब ृ ाषा का तात्ऩमा ककसी ऺेत्र वविेष की उस बाषा से होता है जजसके भाध्मभ से उस ऺेत्र का ऩढ़ा मरखा सभाज ववचायों का आदान -प्रदान मा सम्प्रेषण आसानी से कयता है ।भातब ृ ाषा का मिऺा के ऺेत ्य भें फहुत भहत्त्वऩूणा स्थान है ।इसी के भाध्मभ से फच्चे फोरने- मरखने एवॊ ववचाय व्मक्त कयते हैं।अऩने ववचायों तथा बावों की अमबव्मजक्त कहानी के भाध्मभ से जजतनी सहजता, स्ऩष्ट्टता एवॊ प्रबावी रूऩ से कय सकते है । उतनी ककसी अन्म ववगध भें नहीॊ ।मही फच्चों के स्वप्नों तथा अनुबूनतमों की बाषा होती है ।फाल्मावस्था अवस्था भें भातब ृ ाषा के ववकास औय बववष्ट्म के फौविक जीवन औय सज ृ नात्भक के ववकास के मरए कहानी आधारयत अनुदेिन एक सिक्त मिऺण का भाध्मभ है ।ववश्व के सबी मिऺािास्त्री तथा भनोवैऻाननक इस फात से सहभत है कक मिऺण का सवाश्रेष्ट्ठ भाध्मभ कहानी आधारयत अनुदेिन ही हो सकती है । कहानी का चन ु ाव कहानी सुनाने से सफसे ऩहरी अवस्था कहानी का चन ु ाव कयना होता है । कौन-सी कहानी सुनाई जानी चाहहए ।ऐसे प्रश्नों का उत्तय कुछ अन्म प्रश्नों ऩय ननबाय कयता है । कहानी ककस आमु के फच्चों को सुनाना है ? कहानी फच्चों की ककस बाषा भें सुनाई जाम ? कहानी क्मों सुनानी है? कभ आमु वारे फच्चों के मरए कहानी का चन ु ाव कयते सभम हभें फच्चों की रूगच, ऺभता एवॊ उनकी बाषा को ध्मान भें यखना होता है ।छोटे फच्चों को उनके जीवन औय उनकी कल्ऩनाओॊ से सम्फॊगधत कहाननमाॉ अच्छी रगती है । उनके आस -ऩास के ऩरयवेि से सम्फॊगधत जैस-े ऩि-ु ऩऺी, खेर-खखरौने, भेरा-त्मोहाय, ऩरयवाय इत्माहद उनके भनऩसॊद ववषम है ।फच्चों को ऐसी कहाननमाॉ अच्छी रगती है जजनभें छोटे -छोटे वाक्म औय तक ु फॊदी हो एवॊ भातब ृ ाषा भें कहानी सुनाई जाम।फच्चों को जानकयी /सीख की गचॊता ककमे बफना केवर उन्हीॊ कहाननमों के चमन कयने ऩय ध्मान केजन्ित कयना चाहहए जो फच्चों को अच्छी रगे । महद कहानी अच्छी है तो मिऺक के सबी उद्देश्म अऩने आऩ ऩूणा होते चरे जाते हैं। स्वननमभात कहाननमों का उऩमोग कयना फच्चों को कहानी सन ु ाने के मरए स्वननमभात कहाननमों का उऩमोग ककमा जाना चाहहए ।कहानी को थोडापेयफदरकय कयके सुनामा जा सकता है ।ककसी ऩुस्तक को ऩढ़कय मा ऩाठ्मऩुस्तक को ऩढ़कय उसभें फच्चों की Copyright © 2020, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


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बाषा के िब्दों का उऩमोग कयके सुनाई जाए । सभाचाय-ऩत्र, ऩबत्रकाओॊ, कहानी की ऩुस्तकों,ऩायॊ ऩरयक कहाननमों भें से बी कहानी का चमन ककमा जा सकता है ।मिऺक स्वननमभात कहाननमों का उऩमोग कयके फच्चों को स्वमॊ बी कहाननमों का ननभा​ाण कयने के मरए प्रोत्साहहत कय सकते है ।ववद्मारम भें अरग-अरग सभाज के फच्चे आते है औय वे अऩने अनब ु व के आधाय ऩय ववमबन्न कहाननमों का एक सॊकरन फना सकतेहैं।उनका अनुबव सॊसाय तो ननश्चम ही अरग होता है । अगधकतय ऩायॊ ऩरयक कहाननमों भें वे सबी फातें सभाहहत यहती है ।जजसके कायण सबी फच्चों को अच्छी रगती है ।फच्चे न केवर अऩने भतरफ की जानकायी /सीख उसभें से अऩने आऩ ननकार रेते हैं। कहानी आधारयत अनद ु े िन के भाध्मभ से कहानी कैसे सन ु ाएॉ मिऺक कहानी के चन ु ाव के फादउन्हीॊ कहाननमों को फच्चों को सुनाना चाहते है । कहानी सुनाने से ऩहरे फच्चों को कहानी के प्रनत रूगच उत्ऩन्न कयना चाहहए । कहानी सुनाने के मरए ऩढ़कय मा बफना ऩढ़े बी कहानी सुनाई जा सकती है ।दोनों ववगधमों का अऩना अरग-अरग िैक्षऺक भहत्त्व है।जफ मिऺक फच्चों को ककसी नवाचायी ढॊ ग से ककसी नए प्रकयण से ऩरयगचत कयाते है तो उस सभम मिऺक उनके अत्मगधक रूगच औय उल्रास को भहसूस कयते हैं। आभतौय ऩय मिऺक मह बी दे खते है कक ककतने अगधक फच्चों ने इस प्रकयण के सीखने भें तत्ऩयता हदखाई हैं। मसिाॊतों को बफना दै ननक जीवन से जोड़े सभझाना फहुत साये ववद्मागथामों के मरए कहठनाई होती है । कहानी आधारयत अनुदेिनजैसी यचनात्भक औय प्रेयक भाध्मभ से ककसी प्रसॊग की बूमभका प्रदान कयने के राब तथा प्रबाव इस प्रकाय हैं - फच्चों के ध्मान को केजन्ित यखना औय इसे ऩूये प्रकयण के दौयान फनाए यखना । नवीन अन्वेषण औय ऩछ ू ताछ के द्वाया सीखने को प्रोत्साहहत कयना। फच्चों एवॊ मिऺक तथा स्कूर के प्रनत सकायात्भक बाव ऩैदा कयना। सीखने को सुगभ फनाने के मरए व्मजक्तगत सॊवेदनात्भक प्राथमभकताओॊ की आवश्मकताओॊ ऩय ध्मान दे ना । ववद्मागथामों को सकिमता से जोड़ते हुए सीखने को प्रोत्साहहत कयना। मिऺक औय फच्चों के भध्म अॊतय-वैमजक्तक सॊफॊधों को ववकमसत कयना। इस प्रकाय के अनुबव ऩय आधारयत अगधगभ से फच्चे कबी नहीॊ बूरते है । वताभान सभम भें कहानी आधारयत अनुदेिन की प्रासॊगगकता वताभान सभम भें मिऺा का फोझ रगाताय फढ़ता ही जा यहा है । व्मजक्त कभ सभम भें अगधक से अगधक ऻान एवॊ सच ू नाएॊ ग्रहण कय रेना चाहता है । ऩरयणाभस्वरूऩ वताभान मिऺा प्रणारी सच ू ना आधारयत मिऺा प्रणारी की ओय उन्भुख हो गमी है । ऐसे भें सबी ववषमों भें सूचनाएॊ एवॊ ऻान भें रगाताय ववृ ि होने से ववषम फोखझर होते जा यहे हैं। फच्चों के स्व-अनब ु वों से िरु ु आत कयना भहत्वऩण ू ा होता है । खासतौय से छोटे फच्चों के साथ क्मोंकक उन्हें फाहयी दनु नमा भें जीवन का अगधक अनुबव नहीॊ होता है । जजससे फच्चे तयु न्त अऩने आऩको अऩने ऩरयवेि से जोड़ नही ऩाते है । जजससे जानकायी को अथा प्रदान कयना कहठन होता है क़िय बी महद मिऺक ककसी वस्तु का उऩमोग कयते हुए, जो स्थानीम हो औय उनके मरमे सभसाभनमक हो तो कही ना कही फेहतय ऩरयणाभ प्राप्त होते है । कहाननमाॉ फच्चों के जीवन को अथाऩूणा फनाने भें भदद कयती हैं।इससे वह प्रसन्न होकय उनभें आत्भववश्वास,जजऻासा औय Copyright © 2020, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies


भमा िॊकय मादव (Pg. 14042-14048)

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सतत कामा कयने की उजा​ा मभरती है, जो उन्हें एक फड़ी दनु नमा भें अऩनी ताकत, अऩनी ऺभताओॊ को ववकमसत होने का एक अवसय मभरता है(होल्ट,2005) ।फच्चे उस सभम सफसे अच्छे ढॊ ग से सीखते हैं। जफ वे िैक्षऺक अनुबव से सकिम रूऩ से जुड़े होते हैं। एक-दस ू यों के साथ ऩयस ्ऩय सॊवाद औय अऩने ववचायों को साझा कयने से मिऺक औय फच्चे अऩनी सभझ की गहयाईमों भें ववृ ि कयते हैं। कहानी कहना बी करा हैं। छोटे फच्चे स्वाबाववक रूऩ भें इन्हें माद बी कय रेते है । आग की खोज, भनुष्ट्म की खोज, अनाज की खोज कहाननमाॉ सुनाई जाम । छोटे फच्चों भें कहाननमों को साथाक फनाने तथा स्ऩष्ट्टीकयण के मरए, गचत्रों, बानगचत्रों औय पोटो की सहामता री जा सकती है । गौतभ फि ु , अिोक, मिवाजी भहायाज, झरकायीफाई के मि ु ों की कहाननमों को फच्चों को गचत्रों की सहामता से अगधक फोधगम्म ढॊ ग फताई जा सकती हैं। सन्दबा अवस्थी,डी.(1963). कहानी ववववधा, हदल्री : याजकभर प्रकािन प्राईवेट मरमभटे ड,ऩष्ट्ृ ठ सॊख्मा 26-27.

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