Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies, Online ISSN 2278-8808, SJIF 2019 = 6.380, www.srjis.com PEER REVIEWED & REFERRED JOURNAL, JAN-FEB, 2020, VOL- 7/57 स्नातक स्तय ऩय साभान्म एवॊ व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ एवॊ व्मक्ततत्तत्तव शीरगुणों का अध्ममन – I ऩॊकज ऩायीक1, Ph. D. & ऩूर्णिभा नयार्णमाॊ2 1
भागिदशिक, प्राचामि भॊत्रभ ् मशऺक प्रमशऺण भहाववद्मारम, उदमऩुय याजस्थान
2
शोधाथी, भो.रा.सु.वव.वव. उदमऩुय याजस्थान Abstract
फारक जन्भ के साथ ही अऩने व्मक्ततत्तव के आधाय ऩय वातावयण से अनुबव प्राप्त कय सम्फन्ध स्थावऩत कयने का प्रमास कयने रगता है मह अर्धगभ अनुबव उसकी व्मक्ततगत ववमबन्नता एवॊ सीखने के तयीके से प्रबाववत होते है प्रस्तुत शोध भें शोधाथी द्वाया मुवा छात्रों के द्वाया अऩने शैक्षऺक ववकास भें अऩनामी गई अर्धगभ शैमरमों प्राथमभकता चमन जो उनके व्मक्ततत्तवशीर गुणों से ककस प्रकाय सहसम्फन्ध यखती है ऩय अध्ममन ककमा गमा। अऩने शोध कामि भें सवेऺण ववर्ध का उऩमोग कयते हुए स्वयनमभित उऩकयण अर्धगभ शैरी प्राथमभकता
प्रश्नावरी तथा प्रभाऩीकृत उऩकयण ये भण्ड फी केटर द्वाया यनमभित 16 ऩी एप का प्रशासन 80 साभान्म एवॊ व्मवसायमक ऩाठ्मक्रभ के ववऻान एवॊ फीटे क सॊकाम भहाववद्मारम ववद्मार्थिमों ऩय ककमा गमा। साक्यमकीम प्रववर्धमों भें प्रयतशत, टीभान एवॊ सहसम्फन्ध का उऩमोग हुआ। शोध ऩरयसीभन ऺैत्र उदमऩुय सॊबाग यहा।
शोध यनष्कषि भें आमा कक फीटे क एवॊ ववऻान सॊकाम के छात्र शायीरयक शैरी को प्राथमभकता दे ते है । ववऻान सॊकाम के छात्र ववश्रेषणात्तभक सोच यखते हुए ऩरयक्स्थयतमों के अनुसाय व्मवहायों की कक्रमाक्न्वयत कयते है । फीटे क
सॊकाम के छात्र अन्र्तभुखी व्मक्ततत्तव के होते है । वह ऩरयक्स्थयतमों का तनाव नहीॊ रेते है । दोनों सॊकामों के फीच दृश्म एवॊ मरखना/ऩढना शैरी भें अन्तय ऩामा जाता है । रेककन ववऻान तथा फीटे क सॊकाम के ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव कायकों भें कोई साथिक अन्तय नहीॊ होता है । ववऻान एवॊ फीटे क सॊकाम के ववद्मार्थिमों भें अर्धगभ शैरी एवॊ व्मक्ततत्तवशीरगुणों भें कुछ कयकों के सन्दबि भें साथिक सहसम्फन्ध ऩामा गमा।
Scholarly Research Journal's is licensed Based on a work at www.srjis.com प्रस्तावना INTRODUCTION: & व्मक्तत के अनुकुरन भें उसका ऻानात्तभक ववकास भुयम बूमभका यनवािह कयता है । मह दो तत्तवों ऩय यनबिय कयता है प्रथभ ‘‘ऻान‘‘, द्ववतीम ‘‘ववश्वास‘‘। ऻान एक वस्तुयनष्ठ प्रत्तमम औय ववश्वास आत्तभयनष्ठ प्रत्तमम। जफ फारक ऻान को ववश्वास के साथ प्रमोग कयता है औय ऩयीऺण के उऩयान्त व्मवहाय की कसौटी ऩय खया उतयने ऩय उसे आत्तभयनष्ठा के रूऩ भें नवीन ऻान की यचना कयता है । Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
Da^. ऩॊकज ऩायीक &ऩूर्णिभा नयार्णमाॊ (Pg. 13508-13526)
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हभाये ऻान एवॊ हभायी शैक्षऺक तथा व्मवहारयक कक्रमाओॊ के मरए उत्ततयदामी हभायी ऻानेक्न्िमाॊ है जो ऻान के द्वाय कही जाती है फारक व्मक्ततगत ववमबन्नता के साथ इन ऻानेक्न्िमों द्वाया अऩने अनुबवों को प्राप्त कयने के तयीको का सॊगठन कयता है औय उन्हें ववश्वास के साथ बववष्म भें उऩमोग कय ऩयीक्षऺत कयता है । मह प्रमास जफ उसकी सम्बावनाओॊ को ऩूणि कय दे ते है तो मह उसका ववशेष तयीका (स्टाइर) फन जाता है - सीखने मरए । छात्र की रूर्च, स्वबाव, आदतें , फुद्वव औय वॊशानुक्रभ अरग अरग होते है , मह सबी तत्तव भनोवैऻायनक, साभाक्जक तथा वातावयणीम प्रबाव से प्रबाववत होते है । अत् छात्र के सीखने तयीके बी प्राम् इन तत्तवों से यनदे मशत होकय मबन्न मबन्न रूऩों भें ऩामे जाते है । सफके सीखने का तयीका एक जैसा नहीॊ हो सकता है । प्रत्तमेक व्मक्तत अऩने व्मक्ततत्तत्तव के आमाभों की प्रधानता के आधाय ऩय अऩनी रुर्चमों , अमबववृ िमों, साभथ्र्मों, मोग्मताओॊ, अमबरुर्चमों तथा व्मवहाय रुऩों के प्रदशिन भें मबन्न-मबन्न प्रवक्ृ त्ततमाॊ यखता हैं। प्रत्तमेक छात्र सीखने के मरए तयीको का चमन अऩनी स्वाबाववक ऩरयक्स्थयतमों के अनुसाय कयता है । छात्र के इस सीखने की प्रकक्रमा एवॊ अनब ु वों के सॊगठनों भें व्मैक्ततक मबन्नता के अनस ु ाय अनेक शैमरमाॊ मा तयीके प्रमोग भें रामे जाते है जो उसके द्वाया प्राप्त ऻान को स्थाई फनाने भें प्रमोग ककमे जाते है । छात्र द्वाया प्रमोग भें रामे जाने वारे चमयनत वह तयीके जो उसके अर्धगभ को क्स्थयता प्रदान कयने भें सहामता प्रदान कयते है अर्धगभ की शैमरमाॊ कहे जाते है जो है दे खकय, सुनकय, फोरकय, मरखकय, स्ऩशि कयके, साभाक्जक, अन्त् कक्रमाकायकों, तकि द्वाया, अन्र्तदशिन द्वाया आदद हो सकते है । जो व्मक्ततत्तत्तव ववशेषक व्मक्तत के व्मक्ततत्तत्तव से सम्फक्न्धत होते है वह इन शैरी चमन भें अऩनी अहभ बूमभका यखते हैं। प्रस्तुत शोधकत्री द्वाया ककशोयों द्वाया अऩने शैक्षऺक ववकास भें अऩनामी गई इन अर्धगभ शैमरमों की वरयमता चमन के फाये भें अध्ममन ककमा गमा साथ ही मह बी दे खा गमा कक व्मक्तत के व्मक्ततत्तत्तव शीरगुण शैरी प्राथमभकता चमन भें ककस प्रकाय सहसॊफॊध यखते हैं। अर्धगभ शैरी ¼LEARNING STYLE ½%& 334 & B C भें अयस्तु ने कहा है कक ‘‘प्रत्तमेक फारक के ऩास एक ववमशष्ट मोग्मता एवॊ कुशरता होती है क्जससे वह सीखता है । औय वह सभमान्तयार मुवावस्था भें अरग -अरग रूऩ भॊ स्ऩष्ट ददखाई दे ती है ।‘‘ 1 Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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प्रत्तमेक व्मक्तत के ऩास सीखने का एक ववमशष्ट तयीका होता है जो प्राम् जैववक एवॊ अनुवाॊमशक गुण, वमस्कता, तथा व्मक्ततगत अनुबव से प्रबाववत होता है । छात्र जफ सीखने का प्रमास कयते है तो वह अऩनी रूर्च एवॊ स्वाबाववकता के साथ दे खकय, सुनकय , प्रमोगकय, फोरकय, अनुबव कय, अन्त्कक्रमा कय सीखना ऩसन्द कयते है , तो कुछ कामि प्रदि शन द्वाया प्रत्तमम को सभझने का प्रमास कयते है । मह तयीके सबी छात्रों भें मबन्न मबन्न भहत्तव यखते है । इन्हीॊ तयीको को एक प्रासाॊर्गक चय कहा जाता है जो छात्र (भुयम चय) के अर्धगभ को प्रबाववत कयता है औय अर्धगभ अनुबव इसके ऩरयणाभ होते है । प्रत्तमेक छात्र ऩास एक अन्र्तदृक्ष्ट, सॊगठन औय अमबऻानता होती है जो एक ववमशष्ट सॊऻानात्तभक प्रबावशारी औय शायीरयक व्मवहाय का सॊग्रह कयती है कक वह ककस प्रकाय अर्धगभ का सॊग्रह कये औय मशऺण वातावयण के साथ साभॊजस्म स्थावऩत कय सके। अर्धगभ शैरी को ववमबन्न भनोवैऻायनकों औय मशऺाववदों ने अरग अरग ववचायों भें उल्रेर्खत ककमा है वह यनम्न प्रकाय है - मह ‘‘ अनुबव आधारयत सीखने के व्मक्ततगत उऩागभ के फीच व्मवहाय का एक ववमशष्ट तयीका है (केम्ऩफेर 1996)2 नमी सच ु नाओॊ औय ववकमसत नमे तयीको के फीच अऩनामा गमा व्मक्ततगत अर्धगभ भागि है । भनोवैऻायनकों ने छात्र के सीखने के ववमबन्न तयीको को फतामा है औय अऩने ऩयीऺणों द्वाया ऩयीक्षऺत कयके उनके प्रभार्णक होने के प्रभाण प्रस्तुत ककमे है । कुछ के द्वाया 4, कुछ के द्वाया 3, कुछ के द्वाया 5 औय कहीॊ 8 तयीकों की बी वववेचना की गई है । व्मक्ततत्तत्तव शीरगुण ( PERSONALITY TRAITS ) व्मक्ततत्तत्तव शीरगुण के जानने से ऩूवि हभें व्मक्ततत्तत्तव के फाये भें जानना होगा। व्मक्ततत्तत्तव - व्मक्ततत्तत्तव व्मक्तत के रुऩ, गुण, प्रवक्ृ त्ततमों, साभथ्र्मो आदद का सॊगठन हैं मह उसके फा्यह्म एवॊ आॊतरयक रऺणों का सक्म्भमरत रुऩ हैं मह एक गयतशीर सभक्ष्ट हैं। ”व्मक्ततत्तत्तव व्मक्तत के बीतय उन भनोदै दहक गुणों का गत्तमात्तभक सॊगठन हैं जो ऩमािवयण के प्रयत होने वारे उसके अऩूवि अमबमोजनों का यनणिम कयते हैं। ”25 आरऩोटि 1937
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व्मक्ततत्तत्तव के शीरगुण 26:- व्मक्तत्तव के गुणों का ववश्रेषण सफसे ऩहरे आरऩोटि ने ककमा उन्होने अॊगे ्यजी शब्दकोष से व्मक्ततव सम्फन्धी 17953 शब्द ढुॊढे उनभें से 4500 शब्दो ऩुन् छाॉटा मे शब्द व्मक्ततत्तव के गुणों के घोतक थे। आरऩोटि के ऩश्चात आय. फी. केटर ने व्मक्ततत्तव के गुणों के 171, ऩुन् 35 औय भें 12 ववबाग ककमे। उऩयोतत ववषम आधारयत बूमभका यनभािण तथा शोध प्रश्नों के उऩयाॊत शोधकती ने अऩने शोध ववषम के रूऩ भें ‘स्नातक स्तय ऩय साभान्म एवॊ व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्मनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ एवॊ व्मक्ततत्तत्तव शीरगुणों का अध्ममन’ ववषम ऩय शोध कामि ककमा। शोध के उद्देश्म:- (OBJECTIVES OF RESEARCH ) 1 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ का अध्ममन कयना। 2 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव शीरगण ु ों का अध्ममन कयना। 3 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ की ववऻान/ फी. टे क सॊकामों भें तुरना कयना। । 4 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव शीरगुणों की ववऻान/फी.टे क सॊकामों भें तुरना कयना 5 स्नातक स्तय के साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के फीच अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ एवॊ व्मक्ततत्तव शीर गुणों के सहसम्फन्ध को यनम्न सॊकामों भें अध्ममन कयना- ववऻान, फी.टे क.. शोध की ऩरयकल्ऩना्- (HYPOTHESIS OF RESEARCH ) 1 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ भें कोई साथिक अन्तय नहीॊ होता है । 2 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के व्मक्तत्तव शीरगुणों भें कोई साथिक अन्तय नहीॊ होता है ।
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3 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के ववऻान, तथा फी.टे क. ऩाठ्मक्रभ के ववद्मार्थिमों के फीच अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ तथा व्मक्ततत्तव शीर गुणों भें कोई सहसम्फन्ध नहीॊ होता है । शोध ववर्ध:- शोध कामों भें यनदहत उद्देश्मों की प्राक्प्त के मरए तथा उर्चत दत्तत सॊकरन के मरए शोधाथी द्वाया अऩने रक्ष्म की ओय अग्रसय होने हे तु शोध प्रकृयत को ध्मान भें यखते हुए वणिनात्तभक सवेऺण ववर्ध का प्रमोग ककमा गमा। शोध उऩकयण/दत्तत सॊकरन:- शोध कामि भें दत्तत सॊकरन कामि को सम्ऩन्न कयने के मरए शोधाथी द्वाया उऩकयण के रूऩ भें अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ के भाऩन के मरए स्वयनमभित प्रश्नावरी उऩकयण का तथा व्मक्ततत्तत्तव ववशेषकों के ऩयीऺण के मरए भानकीकृत उऩकयण ये भन्ड फी. केटर (1956) द्वाया यनमभित 16 ऩी. एप. ऩयीऺण का दहन्दी रूऩान्तयण जो एस. डी. कऩुय द्वाया ककमा गमा हैं। इसका उऩमोग ककमा गमा। अर्धगभ शैरी प्राथमभकता प्रश्नावरी उऩकयण मह उऩकयण अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ के ऺेत्र भें न्मज ू ीरैण्ड के मशऺा शास्त्री नीर पेमभॊग (1987) के द्वाया प्रयतऩाददत ‘ऻानेक्न्िम प्रयतरूऩ’ ऩय आधारयत ¼VARK (visual, auditary, Read/write, kinesthie)½ अर्धगभ शैरी प्रकायों ऩय आधारयत यहा। उनके द्वाया प्रयतऩाददत भानव प्रश्नावरी उऩकयण “How do I learn best” से भागिदशिन रेकय शोधाथी बायतीम ऩरयक्स्थयतमों एवॊ भहाववद्मारमी शैक्षऺक वातावयण के अनुसाय स्वयनमभित उऩकयण तैमाय ककमा गमा क्जसका शीषिक मह यहा। ‘‘अर्धगभ शैरी प्राथमभकता प्रश्नावरी’’ साॊक्यमकीम प्रववर्धमाॊ / दत्तत ववश्रेषण:1 प्रयतशत
2. भध्मभान
4. टी-भान
5. सह सॊफॊध
3. भानक ववचरन
ऩरयसीभन:- (SCOPE) 1 प्रस्तुत शोध भें उदमऩुय सॊबाग के चाय क्जरे उदमऩुय, र्चत्ततौड़, फाॊसवाड़ा, याजसभॊद को सक्म्भमरत ककमा गमा। 2. प्रस्तुत शोध उदमऩुय सॊबाग भें सॊचामरत मूजीसी भान्मता प्राप्त 12 साभान्म तथा 12 व्मावसायमक भहाववद्मारमों का चमन ककमा गमा। Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
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3. प्रस्तुत शोध भें साभान्म ऩाठ्मक्रभ सॊचामरत ववऻान भहाववद्मारम एवॊ व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें फी.टे क. ऩाठ्मक्रभ सॊचामरत भहाववद्मारमों भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों का चमन ककमा गमा। न्मादशि:- (SAMPLE) 1 प्रस्तुत शोध भें शोधाथी द्वाया भहाववद्मारमों का चमन मादृक्छछक ववर्ध के अॊतगित राटयी ववर्ध द्वाया ककमा गमा। 2. शोध भें 4 साभान्म ऩाठ्मक्रभ तथा 4 व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भहाववद्मारमों का चमन ककमा गमा। 3. प्रस्तुत शोध भें 40 साभान्म ऩाठ्मक्रभ तथा 40 व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के अॊतगित अध्ममनयत कुर 80 ववद्मार्थिमों का न्मादशि चमन ककमा गमा। 4.प्रत्तमेक भहाववद्मारम भें से 5 छात्र तथा 5 छात्राओॊ का चमन ककमा गमा। प्रस्तुत शोध भें शोधाथी के द्वाया प्राॊचमरक एवॊ अप्राॊचमरक साॊक्यमकीम ववर्धमों द्वाया ववश्रेषण ककमा गमा क्जसके ववश्रेषण एवॊ व्मायमा यनष्कषि उद्देश्मानस ु ाय यनम्नमरर्खत यहे उद्देश्म सॊयमा 1 स्नातक स्तय ऩय साभान्म ऩाठ्मक्रभ के ववऻान सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ का अध्ममन कयना । सायणी सॊयमा 1 ववऻान सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता सायणी क्र. सं.
ऺैत्र
प्राप्ांक
प्रत्श्
प्राथमिक्ा
1
दृश्य
2051
64.09
द्वि्ीय
2
श्रव्य
1816
56.75
3
मऱ./ऩ.
्् ृ ीय
1795
56.09
च्थ ु थ
4
शारीररक
2338
73.06
प्रथि
3200 ऩूणािक
न. = 40
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ववऻान सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता आये ख
विज्ञान विद्यार्थय ि ों की अर्िगम शैऱी प्राथलमकिा 80 60 40 20 0 शैऱी
दृश्य
श्रव्य
प्रतिशि
64-09
56-75
लऱ./प. शारीररक 56-09
Series1
73-06
व्मायमा्- उऩयोतत सॊयमात्तभक ऩरयणाभों से ऩता चरता है कक ववऻान सॊकाम के ववद्माथी सीखने के क्रभ भें अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ के रूऩ भें शायीरयक शैरी का प्रथभ चन ु ाव कयते हुए वह कामि को कयके सीखने भें अनुबव प्राप्त कयके, प्रमोगात्तभक कामि कयके, कुछ यचनात्तभक कामि कयके तथा रोगों के साथ चचाि कयके सीखने भें प्रभुख प्राथमभकता यखते है साथ ही वह द्ववतीम प्राथमभकता भें चाटि , डामग्राभ, आये ख, प्रोजेतटय प्रदशिन द्वाया सीखना ऩसन्द कयते है । तत ृ ीम एवॊ चतुथि शैरी प्राथमभकताओॊ भें वह सूक्ष्भ अन्तय यखते हुए मशऺकों से व्मायमान सुनकय, स्वमॊ ऩुस्तक ऩढकय, नोट फुक भें नोट्स मरखकय, ववषम ऩय आरेख तैमाय कय सीखना कभ ऩसन्द कयते हैं । उद्देश्म सॊयमा 1.1 स्नातक स्तय ऩय व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के फी.टे क. सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ का अध्ममन कयना । सायणी सॊयमा 2 फी.टे क. सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता सायणी क्र. सं.
ऺैत्र
प्राप्ांक
प्रत्श्
प्राथमिक्ा
1
दृश्य
1848
57.75
्् ृ ीय
2
श्रव्य
1777
55.53
च्थ ु थ
2107
65.84
2268
70.87
3 4
मऱ./ऩ.
शारीररक 3200 ऩण ू ािक
द्वि्ीय प्रथि न. = 40
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फी.टे क. सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता आये ख
फी.टे क. विद्यार्थय थ ों की अर्धगि शैऱी प्राथमिक्ा 80 60 40 20 0
Series1 शैऱी क्षैत्र
दृश्य
श्रव्य
प्रतिशि
57-75
55-53
लऱ./प. शारीररक 65-84
70-87
व्मायमा:- अत् उऩयोतत सायणी सायणी ववश्रेषण आधारयत व्मायमा के रूऩ भें मह साभने आता है कक फी. टे क. ऩाठ्मक्रभ के ववद्माथी अऩने सीखने की प्राथमभकताओॊ भें शायीरयक शैरी प्रथभ प्राथमभकता दे ते हुए कामाित्तभक अनुबव द्वाया सीखना ऩसन्द कयते है । वह प्रमोजनाओॊ ऩय कामि कयके, यचनात्तभक गयतववर्धमों द्वाया मशऺकों का अनुकयण कयके, स्वमॊ कयके अनुबव प्राप्त कय सीखना ऩसन्द कयते है । अऩने द्ववतीम चन ु ाव के रूऩ भें वह प्रमोजनाओॊ की मरर्खत कक्रमाक्न्वयत द्वाया ववषम वस्तु सम्फन्धी ऩस् ु तकों कों बी ऩढना ऩसन्द कयते है । साथ ही वह प्रोजेतटय द्वाया ववषम साभग्री को दे ख सभझकय बी अर्धगभ अनब ु व प्राप्त कयते है । रेककन वह अध्माऩक के व्मायमान सन ु ना कभ ऩसन्द कयते है तथा सेभीनाय भें बी कभ सहबार्गता यखते है । 2- स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव शीर गुणों का अध्ममन कयना। उद्देश्म सॊयमा 2.1 - स्नातक स्तय ऩय साभान्म ऩाठ्मक्रभ के ववऻान सॊकाम के ववद्माथी के व्मक्ततत ्व ववशेषको का अध्ममन कयना।
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सायणी सॊयमा 3 विऻान संकाय के विद्याथी के व्यक्त्त्ि कारकों की विशेषण सारणी क्र.स .
व्यक्त्त्ि कारक
िध्यिान स्टे न
ऩररणाि
1
ए
5.65
औस्
2
फी
3.1
औस् से तनम्न
3
सी
4.35
औस् से तनम्न
4
ई
5.2
औस्
5
एप
4.35
औस् से तनम्न
6
जी
4.9
औस्
7
एच
5.9
औस्
8
आई
6.5
औस् से अर्धक
9
एऱ
6.4
औस्
10
एि
5.65
औस्
11
एन
7
औस् से अर्धक
12
ओ
9.7
औस् से अर्धक
13
तयू 1
6.15
औस्
14
तयू 2
6.4
औस्
15
तयू 3
4.45
औस् से तनम्न
16
तयू 4
5.9
औस्
1 से 4 तक = औसत से यनम्न
प्राप्ांक
सॊयमा = 20
5 से 6 तक = औसत 7 से 10 तक = औसत से अर्धक
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13517
ववऻान सॊकाम के ववद्माथी के व्मक्ततत्तव कायक स्टे न प्राप्ताॊक का आये ख
विज्ञान संकाय विद्याथी के व्यक्क्ित्ि कारक 10 9 8 7 6 5 4 3 2 1 0 ए बी सी इरर एफ जी एच आई एऱ एम एन ओ क्यु 1 क्यु 2 क्यु 3 क्यु 4
म.स्टे न प्रा.
6 3 4 5 4 5 6 7 6 6 7 10 6 6 4 6
व्याख्या विऻान संकाय के विद्याथी व्यक्त्ग् विश्ऱेषणात्िक सोच रख्े है िह संिेदनशीऱ हो्े है । सांसाररक तनयिों का ऩाऱन कर्े हुए सिय ऩररक्स्थत् के अनस ु ार सोच सिझकर तनणथय कर्े है ।िह प्रायः ऩररक्स्थत्यों के अनस ु ार अऩने व्यिहार की क्रक्रयाक्वित् कर्े है । उद्देश्य संख्या 2.2 - स्ना्क स््र ऩर व्यिसातयक ऩाठ्यक्रि के फी. टे क संकाय के विद्याथी के व्यक्त्त्ि विशेषकों का अध्ययन करना। सारणी संख्या 4 फी. टे क. सॊकाम के ववद्माथी के व्मक्ततत्तव कायक की ववशेषण सायणी क्र.स .
व्यक्त्त्ि कारक
िध्यिान स्टे न प्राप्ांक
ऩररणाि
1
ए
5.65
औस्
2
फी
3.05
औस् से तनम्न
3
सी
4.65
औस्
4
ई
5.9
औस्
5
एप
4.15
औस् से तनम्न
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जी
5.25
औस्
7
एच
5.9
औस्
8
आई
6.75
औस् से अर्धक
9
एऱ
6.65
औस् से अर्धक
10
एि
5.65
औस्
11
एन
7.3
औस् से अर्धक
12
ओ
7.35
औस् से अर्धक
13
तयू 1
6.45
औस्
14
तयू 2
6.35
औस्
15
तयू 3
5.7
औस्
16
तयू 4
5.75
औस्
1 से 4 तक = औसत से यनम्न
सॊयमा = 20
5 से 6 तक = औसत 7 से 10 तक = औसत से अर्धक
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फी. टे क सॊकाम के ववद्माथी के व्मक्ततत्तव कायक स्टे न प्राप्ताॊक का आये ख
फी.टे क. संकाय विद्याथी के व्यक्त्त्ि कारक
7 6 5 4 3 2
म.स्टे न प्रा.
1
6
3
5
6
4
5
6
7
7
6
7
क्यु 1 क्यु 2
7
क्यु 3 क्यु 4
ओ
एन
एम
आई
एऱ
एच
जी
एफ
इरर
ए
सी
बी
0
6
6
6
6
व्मायमा - फी. टे क सॊकाम के ववद्माथी औसत कायक प्रदशिन कयते हुए अन्र्तभख ु ी व्मक्ततत्तव यखते हुए कोभर ह्मदम के होते है वह जल्दी ही रोगों की फातों ऩय ववश्वास कय रेते है । सघषि से फचने के मरए रोगों के फीच यहना ऩसन्द कयते है । वह साभाक्जक व्मवहायों को यनमबिकता से यनवािह कयते है । आत्तभववश्वास के साथ नवीन ऩरयवतिन का स्वागत बी कयते है तथा जल्द ही तनाव से ग्रमसत नहीॊ होते है । उद्देश्म सॊयमा 3. :- स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ भें अध्ममनयत ववद्मार्थमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ की ववऻान फी.टे क. सॊकाम भें तुरना कयना ऩरयकल्ऩना ऩयीऺण 1 स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के ववऻान एवॊ फी.टे क. सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ भें कोई साथिक अन्तय नहीॊ होता है ।
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13520
ववऻान एवॊ फी.टे क. सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ की तुरनात्तभक सायणी विऻान संकाय के क्र
.सं.
विद्याथी
ऺैत्र
िध्यिा न
फी .टे क. संकाय के
विद्याथी
िानक
िध्यिा
विचऱन
न
िानक
विचऱन
िध्य िान
टीिान-
fMxzh vkWQ fQz-¾78 ij eku -05¾2-03 -01¾2-72
िें
अव्र 1
दृश्य
51-27
8-39
46-2
11-16
2-27
2
श्रव्य
45-4
5-58
44-42
7-29
-66
3
मऱ.ऩ/.
44-87
7-87
52-67
5-91
4-96
4
शारीररक
58-45
8-18
56-7
13-68
-68
साथथक अव्र है
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र है
साथथक अव्र नहीं
डडग्री आप कि.=78 आमा क्जसको 120 ऩय दे खा
सॊयमा =40 ] 40
ववऻान एवॊ फी.टे क. सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ की तर ु नात्तभक आये ख
विऻान एिं फी.टे क. विद्यार्थय थ ों की अर्धगि शैऱी
प्राथमिक्ा ्ुऱना 80 70 60 50 40 30 20 10 0
विज्ञान दृश्य
श्रव्य
लऱ./प.
शारीररक
64-09
56-75
56-09
73-06
57-75
55-53
65-84
70-87
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बी.टे क
5
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13521
व्मायमा:- उऩयोतत सायणी एवॊ ववश्रेषण के ऩश्चात ् हभ कह सकते है कक ववऻान एव फी.टे क. सॊकाम के अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ भें दृश्म औय मरखना/ऩढना शैरी भें साथिक अन्तय होता है रेककन श्रव्म तथा शायीरयक शैरी की तुरना भें कोई अन्तय नहीॊ आमा। दोनों सॊकाम के ववद्माथी अऩनी शैरी प्राथमभकताओॊ भें सभानता यखते है । ऩरयकल्ऩना ऩयीऺण 1 का यनष्कषि:- उऩयोतत ववश्रेषण के ऩश्चात ् हभ कह सकते है कक साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के ववऻान एवॊ फी.टे क. सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकताओॊ भें दृश्म एवॊ मरखना/ऩढना शैरी भें साथिक अन्तय ऩामे जाने के कायण इन दोनों ऺैत्रों भें शून्म ऩरयकल्ऩना सॊयमा 1 को अस्वीकृत ककमा जाता है तथा श्रव्म एवॊ शायीरयक शैरी ऺैत्र भें कोई साथिक अन्तय नहीॊ होने के कायण ऩरयकल्ऩना सॊयमा 1 को स्वीकृत ककमा जाता है । उद्देश्म सॊयमा 4 : स्नातक स्तय ऩय साभान्म तथा व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के ववऻान तथा फीटे क सॊकाम भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव शीरगुणों की तुरना कयना। ऩरयकल्ऩना ऩयीऺण 2: स्नातक स्तय ऩय साभान्म एवॊ व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के ववऻान तथा फीटे क सॊकाम भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव शीरगण ु ों भें कोई साथिक अन्तय नहीॊ होता है । सायणी सॊयमा 6 ववऻान तथा फीटे क सॊकाम के ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव कायक तर ु नात्तभक अध्ममन सायणी क्र व्यक्त् विऻान
.
त्ि
स कारक .
िध्यिा न
िानक
विचऱन
फीटे क
िध्यिा न
िानक
विचऱन
टी
डिग्रीआप
न
.05=1.98 .01=2.61
िा
ए
11.4
फी
6.62
3
सी
12.95
2.51
13.37
1.96
.82
4
ई
12.97
1.58
13.5
2.54
1.10
5
एप
13.45
2.63
13.82
2.43
.64
1
2
2.50
11.32
2.07
.15
क्रििि=120
साथथक अव्र नहीं
1.78
7.02
2.23
.88
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र नहीं
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जी
12.65
2.87
13.2
2.18
.96
7
एच
14.55
2.08
14.35
2.06
.43
आई
12.5
9
एऱ
11.82
2.51
12.6
3.08
1.23
1 0
एि
12.95
2.08
13.6
2.87
1.16
1 1
एन
11.9
2.10
12.97
3.37
1.69
1 2
ओ
13.5
1 3
तयू 1
12.1
2.14
13.32
3
1 4
तयू 2
12.22
2.43
13.65
3.17
1 5
तयू 3
12.25
2.14
13.15
2.86
1 6
तयू 4
13.92
2.21
13.72
3.11
8
13522
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र नहीं
2.53
13.22
2.94
1.16
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र नहीं
साथथक अव्र नहीं
2.01
14.22
2.66
1.41
साथथक अव्र नहीं
डडग्री आप किडभ 78 आमा क्जसको 120 ऩय दे खा
2.06 * 2.23 * 3.33 ** .32
साथथक अव्र साथथक अव्र साथथक अव्र साथथक अव्र नहीं
सॊयमा = 40,40
* .05 स्तय ऩय ** .01 स्तय ऩय व्मायमा - ववऻान एवॊ फीटे क ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव कायको का तुरनात्तभक अध्ममन तथा प्रत्तमेक कायक का सूक्ष्भ ववश्रेषण कयने के ऩश्चात ् मह कहा जा सकता है कक दोनो सॊकामों के भध्म व्मक्ततत्तव कायक - ए, फी, सी, ई, एप, जी, एच, आई, एर, एभ, एन, ओ, तथा तमू 4 के कायकों भें दोनों सॊकाम के ववद्माथी अऩने व्मक्ततत्तव शीरगुणों भें सभानता यखते हुए साथिक अन्तय नहीॊ ऩामा गमा तथा कायक - तमू 1, तमू 2 तथा तमू 3 ऩय व्मक्ततत्तव शीरगुणो भें असभानता यखते हुए साथिक अन्तय ऩामा गमा। क्जसके कायण वह मबन्न व्मवहायों का प्रदशिन कयते है ।
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ऩरयकल्ऩना सॊयमा 2 का यनष्कषि - ववऻान एवॊ फीटे क ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव कायकों का तुरनात्तभक अध्ममन कयने के ऩश्चात ् दोनों सॊकामों के भध्म 16 व्मक्ततत्तव कायकों भें से 13 व्मक्ततत्तव कायक - ए, फी, सी, ई, एप, जी, एच, आई, एर, एभ, एन, ओ, तथा तमू 4के सभान होने तथा उनभें कोई साथिक अन्तय नहीॊ ऩामे जाने के कायण शून्म ऩरयकल्ऩना सॊयमा 2 को स्वीकृत ककमा जाता है । हभ कह सकते है कक - ’’स्नातक स्तय ऩय साभान्म एवॊ व्मावसायमक ऩाठ्मक्रभ के ववऻान एवॊ फीटे क सॊकाम भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव शीरगुणों भें साथिक अन्तय नहीॊ ऩामा जाता उद्देश्म सॊयमा 5 :-
स्नातक स्तय के साभान्म ऩाठ्मक्रभ के ववऻान सॊकाम भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की
अर्धगभ शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव शीरगुणों के फीच सह सम्फन्ध का अध्ममन कयना। ऩरयकल्ऩना ऩयीऺण सॊयमा 3 :- स्नातक स्तय के साभान्म ऩाठ्मक्रभ के ववऻान सॊकाम भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव शीरगुणों के फीच कोई साथिक सह सम्फन्ध नहीॊ होता है । सायणी सॊयमा 7 ववऻान सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव शीरगण ु ों भें सहसम्फन्ध सायणी:अर्धगि शैऱी
दृश्य
श्रव्य
मऱ.ऩ/.
शारीररक
ए
.-61
.24
-.02
.19
-.29
-.27
.30
.04
.14
-.10
.01
.05
.22
-.24
.11
-.05
.27
-.19
.21
.25
.12
-.14
.26
.17
.08
.25
-.17
-.03
.16
.26
-.16
-.38
-.00
.25
.15 -.00
-.06
-.26
.01
.20
-.40
.23
-.03
.00
.40
.03
व्यक्त्त्िकारक फी
सी ई
एप जी
एच
आई एऱ एि एन ओ
तयू 1 तयू 2
.14 .47 .42 .10
.-20 .19
.-16 .-11 .-1
.-09
Copyright © 2017, Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies
Da^. ऩॊकज ऩायीक &ऩूर्णिभा नयार्णमाॊ (Pg. 13508-13526) तयू 3 तयू 4
.09
.01
-.04
.08
.01
.02
.08
-.07
13524
सय ्ॊ मा =40,40
व्मायमा:- उऩयोतत ववश्रेषण के उऩयान्त मह कहा जा सकता है कक दृष्म शैरी प्राथमभकता दे ने वारे ववद्माथी ओऩचारयक व्मवहायों को कयते हुए बावनाओॊ से प्रबाववत शान्त प्रवयृ त के एवॊ आऻाकायी होते है । श्रव्म शैरी को प्राथमभकता दे ने वारे दस ु यों के प्रयत सजग यहते हुए यनमभ ऩारन की चेतनशीरता यखते है । वह सौन्दमिवादी, बावक ु , कभफद् ु ववभान एवॊ गम्बीय होते है । मरखना/ऩढना शैरी को प्राथमभकता दे ने वारे ठोस सोच यखते हुए आत्तभववश्वासी एवॊ शारीन होते है । शायीरयक शैरी प्राथमभकता यखने वारे ऩयम्ऩयाओॊ भें ववश्वास यखते हुए एकान्त भें यहते है । अऩने ववचाय दस ू यों के साथ साझा नही कयते है । ऩरयकल्ऩना सॊयमा 3 का यनष्कषि:- दृश्म शैरी का कायक,- ए, सी, ई, श्रव्म शैरी का कायक - ए, जी, एच, आई, एर, मर/ऩ. शैरी का कायक - एभ, तमू 2 तथा शायीरयक शैरी का कायक - फी, ई, जी, एन, तथा तमू 1 के साथ धनात्तभक साथिक सह सम्फन्ध होने से उऩयोतत शैरी एवॊ व्मक्ततत्तव कायक सन्दबि भें ऩरयकल्ऩना सॊयमा 3 अस्वीकृत की जाती है । तथा शेष शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव कायकों के सह सम्फन्ध सन्दबि भें ऩरयकल्ऩना 3 को स्वीकृत ककमा जाता है । उद्देश्म सॊयमा 5.1:- स्नातक स्तय के व्मवसायमक ऩाठ्मक्रभ के फीटे क सॊकाम भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव शीरगुणों के फीच सह सम्फन्ध का अध्ममन कयना। ऩरयकल्ऩना ऩयीऺण सॊयमा 3.1 :- स्नातक स्तय के व्मवसायमक ऩाठ्मक्रभ के फीटै क सॊकाम भें अध्ममनयत ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव शीरगुणों के फीच कोई साथिक सह सम्फन्ध नहीॊ होता है ।
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13525
सायणी सॊयमा 8 फीटे क सॊकाम के ववद्मार्थिमों की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव शीरगुणों भें सहसम्फन्ध सायणी:अर्धगि शैऱी
दृश्य
श्रव्य
मऱ.ऩ/.
शारीररक
ए
.-54
.21
.21
.39
-.09
.19
.25
.04
-.01
.06
.39
-.64
.10
.14
-.17
.08
.14
-.11
-.00
.22
-.10
-.02
-.32
.19
.49
-.41
.04
.51
-.21
.13
.30
-.38
.22
.36
.-01
-.18
.46
-.90
-.32
-.24
.16
.25
-.21
-.37
.22
.42
-.13
-.34
.07
.30
-.29
.48
.37
-.11
व्यक्त्त्िकारक फी
सी ई
एप जी
एच
आई एऱ एि एन ओ
तयू 1 तयू 2 तयू 3 सय ्ॊ मा =40
तयू 4
.66 .78
.-23 .-19 .-03 .08 .41
.-28 .24
.-26
व्मायमा:- उऩयोतत व्मक्ततत्तव कायक एवॊ अर्धगभ शैरी ऺैत्र के सहसम्फन्ध के ववश्रेषण के ऩश्चात ् हभ मह कह सकते है कक फीटे क सॊकाम के जो ववद्माथी दृश्म शैरी को प्राथमभकता दे ते है वह अऩनी उछच भानमसक ऺभता के कायण यनणािमक सोच यखते है । बावनात्तभक रूऩ से क्स्थय एवॊ वातावायण के साथ सहज रूऩ से अनक ु ु मरत होते हे । वह उजािवान एवॊ सभम के अछछे उऩमोग कताि होते है । जो ववद्माथी श्रव्म शैरी को प्राथमभकता दे ते है वह सॊघषि का साभना नही कय ऩाने ऩय तनावग्रस्त हो जाते है । मरखना ऩढना शैरी को प्राथमभकता दे ने वारे ववद्माथी अऩने कामो को रेकय असॊतुष्ट यहते हुए अऩयाध की बावना यखते है । शान्त प्रवयृ त के होते है । शायीरयक शैरी प्राथमभकता दे ने वारे ववद्माथी सौन्दमिवादी, बावुक एवॊ कोभर भन वारे होते है । रोगों के व्मवहायों तथा वातावयण के प्रयत सतकि यहते है । आत्तभयनबिय यहना उन्हें अछछा रगता है ।
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ऩरयकल्ऩना सॊयमा 4 का यनष्कषि:- दृश्म शैरी का कायक,- फी सी आई एभ श्रव्म शैरी का कायक - ए ई एच तमू 4 मर/ऩ. शैरी का कायक - ए एन ओ तमू 2 तमू 4 शायीरयक शैरी का कायक - ए फी आई एर एभ एन तमू 1 तमू 2 तथा तमू 3 के साथ धनात्तभक साथिक सह सम्फन्ध होने से उऩयोतत शैरी एवॊ व्मक्ततत्तव कायक सन्दबि भें ऩरयकल्ऩना सॊयमा 3.1 अस्वीकृत की जाती है । तथा शेष शैरी प्राथमभकता एवॊ व्मक्ततत्तव कायकों के सह सम्फन्ध सन्दबि भें ऩरयकल्ऩना 3.1 को स्वीकृत ककमा जाता है । शैक्षऺक यनदहताथि:
शोध के प्राप्त ऩरयणाभो के द्वाया मह ऩता चरा कक साभान्म तथा व्मावसायमक मशऺा ऩाठ्मक्रभ भें
अध्मनयत ववद्मार्थमो की अर्धगभ शैरी प्राथमभकता तमा है क्जससे सॊकाम ववषम से जड़ ु े छात्र इन व्मक्ततत्तत्तव शीरगुणों के साथ अर्धगभ शैरी को प्राथमभकता से अऩने शैक्षऺक व्मवहायों भें अऩनाने भे सहामता मभरेगी तथा अऩने अर्धगभ सॊगठनो को स्थाई फनाने भें सपर होंगे।
मशऺकों को अनस ु न्धान के ऩरयणाभो द्वाया साभान्म मशऺा ऩाठ्मक्रभ व्मावसायमक मशऺा ऩाठ्मक्रभ
भें अध्मनयत ववद्मार्थिमो के व्मक्ततत्तत्तव शीरगुणों की मबन्नता आधारयत अर्धगभ शैरी प्राथमभकता को जानकय वह अऩने मशऺण कामि भें इन शैरी का सभावेश कय मशऺण अर्धगभ कामि के उद्मेश्म प्राक्प्त भें सपर होंगे।
मशऺकों को अनुसन्धान के ऩरयणाभो द्वाया साभान्म मशऺा ऩाठ्मक्रभ व्मावसायमक मशऺा ऩाठ्मक्रभ
भें अध्मनयत ववद्मार्थिमो के व्मक्ततत्तत्तव शीरगण ु ों की मबन्नता आधारयत अर्धगभ शैरी प्राथमभकता को जानकय वह अऩने मशऺण कामि भें इन शैरी का सभावेश कय मशऺण अर्धगभ कामि के उद्मेश्म प्राक्प्त भें सपर होंगे। उऩसॊहाय:- ‘‘सम्बावनाए असीभ है औय प्रमास बी‘‘ इस उक्तत को ध्मान भें यखकय उतत अर्धगभ शैरी प्राथमभकता
एव व्मक्ततत्तव शीरगुणों आधारयत मह शोधकामि साभान्म एव व्मवसायमक ऩाठ्मक्रभ के
तर ु नात्तभक दृक्ष्टकोण एवॊ सहसम्फन्ध के सन्दबि भें शोधाथी द्वाया ककमा गमा। क्जसके शोध यनष्कषि मह थे कक फीटे क एवॊ ववऻान सॊकाम के छात्र शायीरयक शैरी को प्राथमभकता दे ते है । ववऻान सॊकाम के छात्र ववश्रेषणात्तभक सोच यखते हुए ऩरयक्स्थयतमों के अनुसाय व्मवहायों की कक्रमाक्न्वयत कयते है । फीटे क सॊकाम के छात्र अन्र्तभुखी व्मक्ततत्तव के होते है । वह ऩरयक्स्थयतमों का तनाव नहीॊ रेते है । दोनों सॊकामों के फीच दृश्म एवॊ मरखना/ऩढना शैरी भें अन्तय ऩामा जाता है । रेककन ववऻान तथा फीटे क सॊकाम के ववद्मार्थिमों के व्मक्ततत्तव कायकों भें कोई साथिक अन्तय नहीॊ होता है । ववऻान एवॊ फीटे क सॊकाम के ववद्मार्थिमों भें अर्धगभ शैरी एवॊ व्मक्ततत्तवशीरगुणों भें कुछ कयकों के सन्दबि भें साथिक सहसम्फन्ध ऩामा गमा।
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