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जीएसटी - सफलता के लिए सरकार अब क्या करे- सुधीर हालाखंडी

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सुधीर हालाखंडी

जीएसटी की सफलता के ललए सरकार अब क्या करे -

आइए प्रयास करें सरल जीएसटी – सफल जीएसटी


सुधीर हालाखंडी

जीएसटी को लेकर अब सरकार को क्या करना चाहहए 1 जुलाई 2020 को जीएसटी को हमारे दे श में आये हुए अब 3 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है तो आइए एक बार दे ख लें सरलीकरण के ललए

भारत में लाये गए सबसे बड़े कर सुिार की स्ततथी इस समय क्या है और इस समय सरकार को क्या करना चाहहए कक जीएसटी भारत के उद्योग एवं व्यापार की उन उम्मीदों पर खरा उतर सके स्जसकी उन्होंने तब उम्मीद की थी जब इसे लगाया गया था .

क्या जीएसटी सफल है ?

सबसे पहले दे खें कक इन तीन वर्ों की अवधि में जीएसटी सफल रहा या

असफल तो हम कह सकते हैं कक जीएसटी भारत में पूरी तरह से असफल तो

नहीं है लेककन इसका दस ू रा अथष यह नहीं है कक यह पूरी तरह से सफल है .

जीएसटी असललयत में सफलता और असफलता के बीच अटका हुआ है लेककन सफलता का हहतसा आप आिे से अधिक नहीं मान सकते है .


तो क्या हम उम्मीद छोड़ दें इस सबसे आप उम्मीद नहीं छोड़ सकते क्यों कक जीएसटी एक लम्बी योजना का हहतसा था और इसे अप्रत्यक्ष करों के सरलीकरण के ललए लाया गया था

और भारत की अथषव्यवतथा के ववकास में इस कर को बहुत बडी भागदारी ननभानी थी इसललए अभी हमें इन्तजार करना चाहहए कक जीएसटी आने वाले समय में अपने उदीश्यों और इससे की गई उम्मीदों को जरुर पूरा करे गा.

जीएसटी की इन प्रारस्म्भक परे शाननयों का कारण क्या है ? जीएसटी में जो प्रारस्म्भक परे शाननया​ाँ हुई है उनका भी एक बडा कारण है और वह है कक सरकार ने एक अच्छा कानून बना कर भारत में जीएसटी लागू कर जो राजनैनतक इच्छाशस्क्त का पररचय हदया था उसके बाद जीएसटी को लागू

करने का काम स्जन लोगों को सौंपा गया उन्हें इस सम्बन्ि में कोई व्यवहाररक अनुभव नहीं था और वे बबना सोचे समझे प्रकियाओं को सख्त से सख्त बनाते गए और इन्ही सख्त प्रकियाओं ने जीएसटी को उलझा कर रख हदया है और इसी कारण इस समय जीएसटी को हम सरल नहीं कह सकते .

एक दस ू रा कारण यह था कक जीएसटी की सफलता के ललए एक अच्छा

लसतटम नेटवकष चाहहए था लेककन जीएसटी का जो नेटवकष है वो पूरी तरह से इस पर खरा नहीं उतरा और जीएसटी के प्रारम्भ से ही यह नेटवकष अपनी और से डीलसष क परे शाननयां दे ता रहा और डीलसष इसका दं ड भुगतते रहे .


अब हमारे कानून ननमाषता क्या करें !!!

अब हम आगे दे खेंगे कक अब सरकार क्या करे कक सबसे पहले तो करदाताओं

को राहत लमले और दस ू रा जीएसटी अपनी सफलता की रह पकड़ सके. सबसे पहले तो सरकार और ववभाग डीलसष पर ववशवास की नीनत पर चले और उन्हें

कहिन प्रकियाओं की जगह एक सरल वविी उपलब्ि कराये ताकक जीएसटी

अपने आप में सरल हो सके और जीएसटी सरल होगा तो इसका पालन करना भी आसान होगा तो अपने आप सरकार का राजतव भी बढे गा .

डीलसष डीलसष को तकनीकी भूल ों के सुिार का मौक़ा दें

जीएसटी की प्रकियाएं प्रारम्भ से ही कहिन है तो डीलसष ने इसमें तकनीकी

गलनतयां भी बहुत की है और इन गलनतयों के कारण अब जब कर ननिाषरण होंगे तो उन्हें भारी कर और पेनाल्टी का भी भुगतान करना होगा तो इस समय सरकार को यह चाहहए कक वह डीलसष को एक मौक़ा दे कक वे अपनी इन सभी गलनतयों का तपष्टीकरण दे सके स्जनमें ना तो कोई कर की चोरी

हुई है और ना ही डीलर की ऐसी कोई मंशा जाहहर होती है तो उन्हें इसका सुिार करने का अवसर हदया जाना चाहहए. ये सारी गलनतया​ाँ इसीललये हुई है


क्यों कक जीएसटी के एक महत्वपूणष ररटनष जीएसटीआर – 3 बी में सुिार की

कोई सुवविा नहीं दी गई थी. इसके साथ ही अब इस ररटनष जीएसटीआर – 3 बी में कम से कम अब तो सुिार की प्रकिया प्रारम्भ कर दे .

जीएसटी लाया गया है कर एकत्रीकरण के ललए और मान लीस्जये कर की

चोरी रूकने के ललए लेककन एक तो यह नया कानून था और दस ू रा इसकी

प्रकियाएं इतनी सख्त बनाई गई कक डीलसष से तकनीकी भूलें बहुत अधिक हुई है और कफर भूल सुिार की सवविा के अभाव में वे िीक भी नहीं हो पाई . एक नए

कानून में इस तरह की भूले तवाभाववक है इसललए इस समय की

सबसे बड़ी जरुरत है कक उन्हें सुिार का मौक़ा हदया जाए और इसके ललये सबसे उपयुक्त वविी यह होगी कक स्जस भी डीलर से यह गलनतयां ही है उन्हें

ही एक मौक़ा हदया जाए कक वे उन्हें घोवर्त कर दें और यहद ऐसी गलनतयों

में कोई कर की चोरी नहीं है तो कफर लसतटम पर ही उन्हें िीक करने का मौक़ा हदया जाए.

लमतमेच के ननततारण के ललए 90 हदन का समय दें

इनपुट िेडडट का लमतमेच भी डीलसष के ललए एक समतया बन गया है क्यों कक एक बार तो डीलर अपने वविेता को कर दे ता है और दस ू री बार सरकार के लमतमेच के कड़े ननयमों के कारण उसे एक बार और कर यहद दे ना पड़े तो

उसके ललए यह कायषशील पूज ं ी का संकट खडा जाएगा . इसके ललए सरकार कम से कम 90 हदन का समय डीलसष को दे ना चाहहए ताकक वे अपने वविेता

से बात कर इस समतया का हल करवा सके. इस समय तो यह प्राविान

कोरोना के कारण तथधगत है लेककन जब यह कफर से लागू होगा तो यह एक बड़ी समतया बन जाएगा .


डीलसष को िारा 16 (4) के प्राविानों से छुट दें इस समय सरकार ने उन डीलसष को जो ककसी कारण वश अपना ररटनष नहीं

भर पाए उन्हें बहुत ही कम पेनाल्टी पर ररटनष भरने की ररटनष भरने की सुवविा दी है ताकक वे अपना कर भी जमा करा सके लेककन ऐसे डीलसष को

जीएसटी कानून की एक िारा 16(4) के कारण प्रारम्भ के दो वर्ों की इनपुट िेडडट नहीं लमलेगी तो ऐसे में उनके ललए यह छूट व्यथष है इसललए कफलहाल सरकार को उन्हें इस प्राविान से भी छूट दे नी चाहहए.

ब्याज को लेकर समतयाओं को हल करें कर पर ब्याज को लेकर भी जीएसटी के कानून में बहुत सी गलनतयां और भ्रास्न्तया है स्जन्हें दरू ककया जाना आवशयक है . जैसे कर पर ब्याज लगाने की व्यवतथा स्जसके अनुसार ब्याज तब तक लगता रहता है जब तक कक डीलर अपने ररटनष में इसे समायोस्जत नहीं कर दे भले ही डीलर ने इससे

पहले ही चुका हदया हो . इसके अनतररक्त ब्याज की दर बहुत अधिक है जब कक बैंकों में लगातार ब्याज की दर गीत रही है तो ऐसे में 18 प्रनतशत या 24 प्रनतशत ब्याज की दर जो जीएसटी में लागू है उसके औधचत्य के बारे में सरकार को ववचार करना चाहहए.

सकल कर पर ब्याज के मामले पर जीएसटी कौंलसल काफी समय पहले

फैसला कर चुकी है कक इसे शुद्ि कर पर लगना चाहहए लेककन यह फैसला

भी अभी तक अटका हुआ है तो सरकार को जीएसटी कौंलसल के फैसले भी समय पर लागू करने की नीनत बनानी होगी वनाष जीएसटी कौंलसल का महत्त्व


ही समाप्त हो जाएगा जो कक जीएसटी की सफलता के ललए कोई अच्छे

संकेत नहीं है . जीएसटी कौंलसल की तथापना एक ववशेर् उद्दे श्य से की गई है

और इस तरह से यहद उसके फैसले दे री से लागू ककये गए तो उनका महत्त्व ही समाप्त हो जाएगा.

लेट फीस को लेकर कोई ताककषक फैसला शीघ्र हो

लेट फीस के बारे में भी सरकार को जल्दी ही कोई फैसला ले लेना चाहहए कक स्जन डीलसष ने उन महीनों की लेट फीस जमा करा कर ररटनष भरे हैं स्जन

महीनों के लेट फीस बाद में माफ़ कर दी थी या कम कर दी थी तो उन्हें यह लेट फीस लौटाने की व्यवतथा की जाए ताकक जीएसटी में डीलसष का ववश्वास पुख्ता हो .

कभी –कभी तो लगता है जीएसटी एक कर नहीं बस्ल्क लेट फीस ही जीएसटी

है और सरकार को यह िारणा समाप्त करनी चाहहए. जीएसटी कौंलसल के पास नवम्बर 2017 में लॉ कलमटी की लसफाररश आई थी कक लेट फीस की

अधिकतम सीमा को जीएसटी की आउटपुट सीमा तक सीलमत कर हदया जाए लेककन अभी भी इसपर कोई फैसला नही ककया जाए .


जीएसटी नेटवकष में सुिार करें

सरकार जीएसटी के नेटवकष में सुिार करे या कफर इसके सेवा प्रदाता की कोई तकनीकी मदद करें या कफर सेवा प्रदाता को बदले ताकक जीएसटी नेटवकष

अपना काम ढं ग से कर सके. डीलसष काफी समय से इसको लेकर भी परे शान

है और जीएसटी की सफलता में यह भी एक बहुत बड़ा बािा है . इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कक पहले तो दो साल तक इस समतया को माना ही नहीं गया लेककन अब जब मान ललया गया है तो कफर इसका समािान अब तो हो जाना चाहहए.

इस समय जीएसटी नेटवकष से कोई ज्यादा लशकायतें नहीं है लेककन इसका

कारण है कक कोरोना संकट के कारण ररटनष भरने के ललए अधिक समय हदया गया है लेककन स्ततथी सामान्य होते ही जीएसटी नेटवकष में सुिार जरुरी हो जाएगा.

ररवसष चाजष को ताककषक करें ररवसष चाजष भी जीएसटी में एक समतया है और सरकार को कम से कम ऐसे

ररवसष चाजष को स्जसका कोई ववत्तीय प्रभाव नहीं है उसे समाप्त करे और भूल वश ककसी डीलर ने इसे जमा नहीं कराया लेककन इससे सरकार के राजतव में


कोई नुक्सान नहीं हुआ हो तो इसमें राहत दे ने पर भी ववचार करे .

समतयाओं का हल शीघ्र करें

सरकार इन मसलों पर यहद जल्द ही फैसला कर राहत दे गी तो जीएसटी में

सरलीकरण का उद्दे श्य पूरा होगा और जीएसटी जब सरल होगा तो इसका

पालन करना आसान होगा और यहद डीलसष इसका पूरा –पूरा पालन करें गे तो सरकार का राजतव भी बढे गा.

जीएसटी कानून को एक बार फफर से दे खें

वैसे तो यह बहुत जल्दी है लेककन जीएसटी कानून को लेकर स्जस प्रकार से नोहटकफकेशन , सकुषलर , तपष्टीकरण जारी सरने पड़े है उससे तो अब यही

बेहतर है वे कानून को ही एक बार कफर से बना दे क्यों कक अभी वाले कानून में वववाद की बहुत अधिक संभावना है जो कक कर ककसी भी सरल कर कानून के ललए अच्छी बात नहीं है .

एकल कर प्रणाली के बार में ववचार करे


जीएसटी का आदशष तवरुप है “एकल कर” जहां डीलसष को एक ही कर का

भुगतान करना पड़े लेककन भारत में राज्यों और केंद्र दोनों के कर लगाने के अधिकार के चलते उद्योग एवं व्यापर को जीएसटी के आदशष तवरुप से वंधचत

रहना पडा और जीएसटी की बहुत सी समतयाएं इस जीएसटी दोहरे कर के कारण है . अब राज्य और केंद्र के बीच कर लगाने के अधिकार को लेकर जो भी वववाद है उसे उन्हें अच्छी तरह से इस तरह से ननपटा लेना चाहहए ताकक भारत के व्यापर और उद्योग को एक आदशष जीएसटी व्यवतथा लमल सके.

सुधीर हालाखंडी


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जीएसटी - सफलता के लिए सरकार अब क्या करे- सुधीर हालाखंडी by CA Sudhir Halakhandi - Issuu